तिरुवनंतपुरम (केरल), 2 मई 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के तट पर बने Vizhinjam International Seaport को देश को समर्पित किया। यह बंदरगाह भारत का पहला Deep Water Transshipment Port है और इसे भारत के समुद्री क्षेत्र के लिए एक Game Changer माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक मौके पर केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और अडाणी ग्रुप के सीईओ करण अडाणी भी मौजूद रहे।
PM Modi Kerala Visit: Vizhinjam Port से भारत को क्या मिलेगा?
विजिंजम पोर्ट की गहराई 24 मीटर है और यह दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर जहाजों को संभालने में सक्षम है। इसकी खासियत यह है कि यह पोर्ट अंतरराष्ट्रीय समुद्री रूट से सिर्फ 10 नॉटिकल माइल्स दूर है, जिससे भारत को अब कोलंबो, सिंगापुर और दुबई जैसे विदेशी ट्रांसशिपमेंट हब्स पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
5000+ रोजगार और ₹5000 करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट
इस प्रोजेक्ट से केरल और भारत दोनों को जबरदस्त आर्थिक और रोजगार लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, यह बंदरगाह 5,000 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार देगा और लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और टूरिज्म जैसे क्षेत्रों को भी बूस्ट करेगा।
केरल सरकार ने इसके लिए ₹5,000 करोड़ का विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर पैकेज घोषित किया है, जिसमें सड़क और रेलवे कनेक्टिविटी को भी सुधारा जाएगा।
10 KM रेलवे टनल और Smart Cargo Handling
विजिंजम पोर्ट को Balaramapuram स्टेशन से जोड़ने के लिए 10.2 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन प्रस्तावित है, जिसमें 9.2 किमी लंबी सुरंग (Tunnel) होगी। इससे माल की आवाजाही आसान, तेज़ और सुरक्षित होगी। यह परियोजना पर्यावरण और सामाजिक स्वीकृतियों की प्रक्रिया में है।
Adani Ports और सरकार की मजबूत साझेदारी
यह पोर्ट भारत सरकार और निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक Adani Ports & SEZ Limited की साझेदारी में विकसित किया जा रहा है। यह एक Public-Private Partnership (PPP) मॉडल का बेहतरीन उदाहरण है, जिसकी कुल लागत करीब ₹8,867 करोड़ है।
करण अडाणी ने इसे प्रधानमंत्री मोदी के “Maritime Amrit Kaal 2047” विजन का अहम हिस्सा बताया और कहा कि यह भारत को आत्मनिर्भर समुद्री राष्ट्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
PM Modi का संदेश: “विजिंजम भारत की शक्ति का प्रतीक है”
“विजिंजम सिर्फ एक बंदरगाह नहीं, यह आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है। यह पोर्ट भारत की समुद्री शक्ति को विश्वस्तरीय बनाएगा और नौजवानों को नई संभावनाएं देगा।”
The Vizhinjam International Deepwater Multipurpose Seaport in Kerala is a significant advancement in India's maritime infrastructure. https://t.co/sUeQ5k7TK1
भोपाल के न्यू मार्केट रोशनपुरा में मंगलवार को लेंसकार्ट शोरूम के बाहर हिंदू उत्सव समिति के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने शोरूम के कर्मचारियों को तिलक लगाया, मंत्रोच्चार किया और कलावा बांधा। इस दौरान “सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” जैसे नारे भी लगाए गए। बहिष्कार की चेतावनी हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि संगठन लेंसकार्ट के बहिष्कार की अपील कर रहा है। उनका कहना है कि भारत में तिलक, कलावा और बिंदी जैसे धार्मिक प्रतीकों का सम्मान होना चाहिए। यदि किसी कंपनी ने इन पर रोक लगाने की कोशिश की, तो इसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भले ही कंपनी के CEO पीयूष बंसल ने माफी मांगी हो, लेकिन संगठन इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं है। “अगर हमने कंपनी को आगे बढ़ाया है, तो जरूरत पड़ने पर नीचे भी ला सकते हैं,” उन्होंने चेतावनी दी। संत समिति ने भी जताई आपत्ति मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिल आनंद ने कहा कि कथित गाइडलाइन में महिलाओं को सिंदूर और कलावा पहनने से रोकने की बात सामने आई है, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि भारत में सनातन परंपराओं का सम्मान होना चाहिए और किसी भी कंपनी को धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाने का अधिकार नहीं है। कर्मचारियों ने किया खंडन विवाद के बीच शोरूम के कर्मचारी मनीष भमारे ने कहा कि उन्हें कभी तिलक या कलावा पहनने से नहीं रोका गया। उन्होंने बताया कि नवरात्रि के दौरान भी वे तिलक और कलावा लगाकर काम पर आए थे। उनके मुताबिक कंपनी की ओर से ऐसी कोई पाबंदी नहीं है। सोशल मीडिया से शुरू हुआ विवाद यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित पॉलिसी डॉक्यूमेंट से शुरू हुआ। इसमें दावा किया गया था कि कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा पहनने से रोका गया है, जबकि हिजाब और पगड़ी को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई है। इस मुद्दे को एक्टिविस्ट शेफाली वैद्य ने X (ट्विटर) पर उठाया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया और लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कंपनी की सफाई विवाद बढ़ने के बाद कंपनी के CEO पीयूष बंसल ने कहा कि लेंसकार्ट सभी धर्मों का सम्मान करता है और कर्मचारियों को अपने धार्मिक प्रतीक पहनने की पूरी आजादी है। हालांकि, विरोध कर रहे संगठन इस सफाई से संतुष्ट नहीं हैं और आगे भी आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। 👉 अधिक जानकारी और ताज़ा अपडेट के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
हफ्ते की शुरुआत शेयर बाजार के लिए राहत भरी खबर लेकर आई। पिछले कुछ दिनों की उतार-चढ़ाव भरी चाल के बाद आज बाजार में मजबूती साफ नजर आई। BSE Sensex ने करीब 600 अंकों की छलांग लगाई, जबकि Nifty 50 भी 150 से ज्यादा अंकों की तेजी के साथ 24,500 के पार पहुंच गया। सुबह धीमी शुरुआत, फिर पकड़ी रफ्तार दिन की शुरुआत हल्की बढ़त के साथ हुई थी, लेकिन जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, बाजार में खरीदारी तेज होती गई।दोपहर तक लगभग हर सेक्टर में हरियाली दिखने लगी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होता गया। आखिर क्यों चढ़ा बाजार? आज की तेजी अचानक नहीं थी, इसके पीछे कई वजहें काम कर रही थीं: किन सेक्टर्स ने दिया साथ? आज की तेजी में सबसे बड़ा योगदान बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों का रहा। इसके अलावा: इन सभी में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। निवेशकों के लिए संकेत मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर Nifty 24,500 के ऊपर टिकता है, तो आगे और तेजी की गुंजाइश बन सकती है।हालांकि, अंतरराष्ट्रीय हालात अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं हैं, इसलिए बाजार में अचानक उतार-चढ़ाव से इनकार नहीं किया जा सकता। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
दिल्ली के बहुचर्चित शराब नीति (Excise Policy) मामले में केजरीवाल (Arvind Kejriwal) को बड़ा झटका लगा है। Delhi High Court ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने जस्टिस Swarana Kanta Sharma को मामले की सुनवाई से अलग (recuse) करने की मांग की थी। अदालत ने अपने फैसले में बेहद कड़े शब्दों में कहा कि—“कोई भी पक्ष, खासकर एक राजनेता, यह तय नहीं कर सकता कि कौन सा जज निष्पक्ष है और कौन नहीं।” पूरा मामला क्या है? यह विवाद दिल्ली की 2021-22 की नई शराब नीति से जुड़ा है, जिसे लागू करने के बाद भारी राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा हुआ। इसी दौरान केजरीवाल की ओर से जज पर सवाल उठाते हुए उन्हें केस से हटाने की मांग की गई। केजरीवाल के 3 बड़े आरोप याचिका में केजरीवाल की तरफ से जस्टिस शर्मा पर कई गंभीर आरोप लगाए गए— 1. Conflict of Interest का आरोप कहा गया कि जज के परिवार के कुछ सदस्यों का संबंध सरकारी संस्थानों से है, जिससे निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। 2. एकतरफा सुनवाई का आरोप केजरीवाल ने दावा किया कि अदालत की कार्यवाही में उनकी दलीलों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा। 3. पूर्वाग्रह (Bias) का आरोप यह भी कहा गया कि कोर्ट का रुख पहले से ही उनके खिलाफ दिखाई दे रहा है, जिससे निष्पक्ष ट्रायल पर सवाल उठता है। हाईकोर्ट का सख्त और स्पष्ट जवाब जस्टिस स्वरणा कांता शर्मा ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए विस्तृत आदेश में कहा— अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका में लगाए गए आरोप ठोस सबूतों पर आधारित नहीं थे, बल्कि “अनुमानों और आशंकाओं” पर आधारित थे। राजनीतिक प्रतिक्रिया: बयानबाजी तेज इस फैसले के बाद सियासत भी गरमा गई— इस पूरे घटनाक्रम ने एक नई बहस छेड़ दी है— क्या नेता जज की निष्पक्षता पर सवाल उठा सकते हैं? या यह न्यायपालिका की गरिमा को चुनौती है? कानूनी नजरिए से क्यों अहम है ये फैसला? यह फैसला सिर्फ एक केस तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए एक बड़ा नज़ीर (precedent) बन सकता है— बड़ी बात (Big Takeaway) दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला एक मजबूत संदेश देता है— न्यायपालिका किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव के आगे नहीं झुकेगीसिर्फ आरोप लगाकर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित नहीं किया जा सकता यह मामला अब सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि“न्यायपालिका vs राजनीति” की बड़ी बहस बन चुका है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
चारधाम यात्रा का सबसे पवित्र और भावनात्मक पड़ाव माने जाने वाले Kedarnath Dham के कपाट कल श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। लंबे इंतजार के बाद बाबा केदार के दर्शन का समय करीब आ गया है और देशभर से भक्त भारी उत्साह के साथ उत्तराखंड की ओर रवाना हो रहे हैं। पहाड़ों में ठंडी हवाओं के बीच गूंजते “जय बाबा केदार” के जयकारों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया है। मंदिर प्रशासन और स्थानीय लोगों की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। मंदिर में सख्त नियम: मोबाइल ले जाना पूरी तरह मना इस बार सबसे बड़ा बदलाव मंदिर परिसर में मोबाइल फोन पर पूरी तरह प्रतिबंध है। श्रद्धालुओं को गेट पर ही मोबाइल जमा करना होगा और उसके बाद ही प्रवेश मिलेगा। प्रशासन का कहना है कि यह कदम इसलिए लिया गया है ताकि: श्रद्धालुओं की भावनाएं और तैयारियां केदारनाथ यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का गहरा अनुभव है। कई श्रद्धालु सालभर इस पल का इंतजार करते हैं। कुछ भक्तों के चेहरे पर खुशी है तो कुछ में बाबा के दर्शन की भावुकता साफ झलक रही है। परिवारों के साथ पहुंचे श्रद्धालु कठिन रास्तों और मौसम की परवाह किए बिना बस एक ही भावना लेकर आगे बढ़ रहे हैं—“बाबा केदार के दर्शन”। प्रशासन की अपील और सुरक्षा इंतजाम प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और मौसम को ध्यान में रखते हुए यात्रा करें। सुरक्षा के लिए पुलिस और राहत दलों को तैनात किया गया है। साथ ही यात्रियों को सलाह दी गई है: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
देशभर के लाखों स्टूडेंट्स के लिए बड़ी खबर सामने आई है। National Testing Agency (NTA) ने JEE Main 2026 Session 2 Result जारी कर दिया है। लंबे इंतजार के बाद जब रिजल्ट आया, तो कई छात्रों के चेहरे पर खुशी दिखी, तो कुछ अब आगे की तैयारी में जुट गए हैं। इस बार रिजल्ट में क्या खास रहा? इस साल भी कॉम्पिटिशन काफी टफ रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 26 छात्रों ने 100 percentile हासिल किया है। अब सभी कैंडिडेट्स अपनी All India Rank (AIR) और स्कोरकार्ड चेक कर सकते हैं, जो उनके एडमिशन का रास्ता तय करेगा। अब अगला स्टेप: JoSAA Counselling 2026 रिजल्ट के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है—अब आगे क्या?तो जवाब है Joint Seat Allocation Authority (JoSAA) काउंसलिंग, जिसके जरिए देश के टॉप इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन मिलता है। कब शुरू होगी काउंसलिंग?एक्सपर्ट्स के मुताबिक, JoSAA Counselling 2026 की शुरुआत 2 जून 2026 (संभावित) से हो सकती है। यह प्रक्रिया आमतौर पर JEE Advanced के रिजल्ट के बाद शुरू होती है, जो 1 जून के आसपास आने की उम्मीद है। JoSAA Counselling Process आसान भाषा में काउंसलिंग पूरी तरह ऑनलाइन होगी और इसमें ये स्टेप शामिल रहेंगे: किसे मिलेगा कौन सा कॉलेज? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
देशहरपल सिर्फ खबरों का मंच नहीं, बल्कि आपकी आवाज़ को सामने लाने का एक सशक्त माध्यम भी है। यहां आपको ताज़ातरीन खबरों के साथ-साथ नौकरी, शिक्षा, और नए भारत की बदलती आर्थिक तस्वीर पर उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी मिलेगी।