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भारत-पाकिस्तान महामुकाबला, ACC ने जारी किया पूरा शेड्यूल

दुबई। एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) ने विमेंस एशिया कप 2026 का शेड्यूल जारी कर दिया है। टूर्नामेंट का सबसे बहुप्रतीक्षित मुकाबला भारत और पाकिस्तान के बीच 5 सितंबर को दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। टी-20 फॉर्मेट में आयोजित होने वाला यह टूर्नामेंट 28 अगस्त से शुरू होगा। उद्घाटन मैच में थाईलैंड और हांगकांग-चीन की टीमें आमने-सामने होंगी। 8 टीमें लेंगी हिस्सा विमेंस एशिया कप 2026 में कुल आठ टीमें भाग लेंगी, जिन्हें दो ग्रुप में बांटा गया है। ग्रुप-A ग्रुप-B ग्रुप चरण के बाद दोनों ग्रुप की शीर्ष दो-दो टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी। टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला 13 सितंबर को खेला जाएगा। सभी मुकाबले दुबई में होंगे पूरे टूर्नामेंट के सभी मैच दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित किए जाएंगे। भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला मुकाबला टूर्नामेंट का सबसे चर्चित मैच माना जा रहा है, जिस पर दुनियाभर के क्रिकेट प्रशंसकों की नजर रहेगी। भारत सबसे सफल टीम टी-20 फॉर्मेट में अब तक खेले गए पांच विमेंस एशिया कप में भारतीय महिला टीम सबसे सफल रही है। भारत ने तीन बार खिताब अपने नाम किया है, जबकि बांग्लादेश और श्रीलंका ने एक-एक बार ट्रॉफी जीती है। श्रीलंका मौजूदा चैंपियन के रूप में इस टूर्नामेंट में उतरेगा। खेल जगत की ताजा और विश्वसनीय खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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Freelancers Money Management: कभी ₹30 हजार तो कभी ₹1 लाख कमाई? अनिश्चित इनकम में ऐसे करें Saving और Investment

Freelancers Money Management: कभी ₹30 हजार तो कभी ₹1 लाख कमाई? अनिश्चित इनकम में ऐसे करें Saving और Investment

Freelancers Money Management: फ्रीलांसिंग और डिजिटल प्रोफेशन में काम करने वाले लोगों की आय अक्सर हर महीने अलग-अलग होती है। कभी कमाई ₹30 हजार होती है तो कभी ₹1 लाख या उससे ज्यादा। ऐसे में सही वित्तीय योजना बनाना बेहद जरूरी हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, फ्रीलांसर्स को सबसे पहले 6 से 12 महीने के खर्च के बराबर Emergency Fund बनाना चाहिए। इसके अलावा, पिछले कुछ महीनों की औसत आय के आधार पर बजट तैयार करना बेहतर रहता है। अच्छी कमाई वाले महीनों में अतिरिक्त राशि को खर्च करने के बजाय बचत और निवेश में लगाना चाहिए। SIP जैसे विकल्प नियमित निवेश की आदत बनाने में मदद करते हैं। साथ ही, टैक्स भुगतान के लिए भी हर कमाई का एक हिस्सा अलग रखना जरूरी है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि अनिश्चित आय के बावजूद अनुशासित बचत, समझदारी से निवेश और सही बजटिंग के जरिए मजबूत आर्थिक भविष्य बनाया जा सकता है।
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Moji Riba

Moji Riba Arunachal Pradesh का अनकहा वीर नायक और भूला हुआ स्वतंत्रता सेनानी

मोजी रिबा (Moji Riba) अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के इतिहास के उन वीर नेताओं में से एक हैं, जिनका नाम आज भी कई लोगों के लिए अज्ञात है। उन्होंने अपने साहस, नेतृत्व और अदम्य हिम्मत से ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई लड़ी और अपने लोगों की आज़ादी के लिए अनवरत संघर्ष किया। प्रारंभिक जीवन Moji Riba का जन्म अरुणाचल प्रदेश के लुहित जिले में हुआ था। बचपन से ही उनमें नेतृत्व और साहस के गुण दिखाई देते थे। स्थानीय समुदाय में उनका व्यक्तित्व अत्यंत सम्मानित था। उनके आसपास के लोग उन्हें साहसी, न्यायप्रिय और दूरदर्शी नेता के रूप में देखते थे। ब्रिटिश शासन के समय स्थानीय लोगों पर अत्याचार और अन्याय बढ़ते जा रहे थे। इन परिस्थितियों ने मोजी रिबा को अपने समुदाय को संगठित करने और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया। ब्रिटिश राज के खिलाफ संघर्ष Moji Riba ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (British East India Company) के खिलाफ कई रणनीतिक अभियानों का नेतृत्व किया। उन्होंने अपने साहस और बुद्धिमत्ता के कारण ब्रिटिश अधिकारियों को लगातार चकमा दिया। उनकी रणनीतियाँ केवल युद्ध कौशल तक सीमित नहीं थीं। मोजी रिबा ने स्थानीय लोगों में स्वतंत्रता की भावना जगाई और उन्हें ब्रिटिश दमन के खिलाफ एकजुट किया। उन्होंने यह सिद्ध किया कि नेतृत्व और वीरता का असली अर्थ केवल युद्ध में नहीं, बल्कि लोगों की सोच और सामूहिक शक्ति को वीरता और नेतृत्व Moji Riba की सबसे बड़ी ताकत उनका नेतृत्व और साहस था। उन्होंने न केवल हथियारों के माध्यम से, बल्कि अपनी सोच और संगठन क्षमता से लोगों को स्वतंत्रता की लड़ाई में सक्रिय किया। उनके नेतृत्व में स्थानीय समुदाय ने ब्रिटिश दमन के खिलाफ साहसिक कदम उठाए। उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि स्वतंत्रता संग्राम में योगदान केवल बड़े नेताओं या शहरों तक सीमित नहीं था। छोटे-छोटे गांवों और पहाड़ी इलाकों के लोग भी अपने साहस, निष्ठा और दृढ़ निश्चय से स्वतंत्रता की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते थे।प्रेरित करने में है। आज Moji Riba की याद में अरुणाचल प्रदेश में स्मारक और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उनकी कहानी आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मोजी रिबा की वीरता और देशभक्ति को याद करना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें यह सिखाती है कि स्वतंत्रता की लड़ाई में हर योगदान की कीमत है। मोजी रिबा की कहानी अरुणाचल प्रदेश और भारत के इतिहास में “अनकहा वीर नायक और भूला हुआ स्वतंत्रता सेनानी” के रूप में अमर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ashutosh Kuila

कम उम्र में अमर नाम Ashutosh Kuila की शहादत की कहानी

Ashutosh Kuila का परिचय भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में कई ऐसे युवा वीर हुए जिन्होंने अपनी कम उम्र में ही अद्भुत साहस और बलिदान का परिचय दिया। Ashutosh Kuila उन्हीं महान शहीदों में से एक थे, जिन्होंने मात्र 18 साल की उम्र में मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। झारखंड (तत्कालीन बिहार) के इस युवा योद्धा की कहानी हमें याद दिलाती है कि सच्चा देशप्रेम उम्र का मोहताज नहीं होता। जन्म और प्रारंभिक जीवन स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका गिरफ्तारी और यातना 18 साल में शहादत Ashutosh Kuila की विरासत हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bishni Devi Shah

Bishni Devi Shah उत्तराखंड की First Woman Freedom Fighter और आज़ादी की वीरांगना

भारत की आज़ादी की लड़ाई में जहां महात्मा गांधी, भगत सिंह और रानी लक्ष्मीबाई जैसे बड़े नाम चर्चित रहे, वहीं कई ऐसे वीर-वीरांगनाएं भी थीं जिनका योगदान इतिहास के पन्नों में कम लिखा गया। Bishni Devi Shah इन्हीं में से एक हैं, जिन्हें Uttarakhand की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी (First Woman Freedom Fighter) के रूप में जाना जाता है। उन्होंने अपने साहस, त्याग और अदम्य इच्छाशक्ति से पहाड़ के कोने-कोने में आज़ादी की अलख जगाई। प्रारंभिक जीवन और संघर्ष की शुरुआत Bishni Devi Shah का जन्म उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में हुआ। बचपन से ही उनमें न्याय और देशभक्ति की भावना थी। पहाड़ी गांव में पली-बढ़ी होने के बावजूद उन्होंने समाज की रूढ़ियों को चुनौती दी और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष का संकल्प लिया। स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका महिलाओं को आंदोलन में शामिल करने की प्रेरणा उस दौर में महिलाओं की स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी बेहद कम थी, लेकिन Bishni Devi Shah ने गांव-गांव जाकर उन्हें आंदोलन में जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह साबित किया कि आज़ादी की लड़ाई में महिला और पुरुष का योगदान समान है। त्याग और बलिदान विरासत और सम्मान आज Bishni Devi Shah को Uttarakhand की First Woman Freedom Fighter के रूप में सम्मानित किया जाता है। हालांकि उनका नाम मुख्यधारा के इतिहास में कम दर्ज है, लेकिन स्थानीय इतिहासकार और समाजसेवी उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयास कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tara Rani Srivastava

Tara Rani Srivastava तिरंगे के लिए गोली भी झेली भारतीय स्वतंत्रता सेनानी की अमर गाथा

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कई ऐसे वीरांगनाएँ और योद्धा हुए हैं, जिनका नाम इतिहास की किताबों में कम लिखा गया, पर उनकी बहादुरी और त्याग अमर है। ऐसी ही एक शूरवीर नारी थीं Tara Rani Srivastava, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए तिरंगे के सम्मान में गोली तक झेली। आइए जानते हैं उनके जीवन और संघर्ष की कहानी। Tara Rani Srivastava कौन थीं? Tara Rani Srivastava एक स्वतंत्रता सेनानी थीं, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ देश की आज़ादी के लिए बहादुरी से लड़ाई लड़ी। वह एक साधारण परिवार से थीं, लेकिन देशभक्ति उनके रक्त में बसी थी। उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर आज़ादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई। तिरंगे के लिए उनकी बहादुरी Tara Rani Srivastava की बहादुरी का सबसे बड़ा उदाहरण तब सामने आया जब वे ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ तिरंगा झंडा फहराने निकलीं। उस समय ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपने देश के तिरंगे की शान को बचाने के लिए उन्होंने गोली झेली, फिर भी झंडा नहीं छोड़ा। उनकी इस वीरता ने हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की आग जगा दी। स्वतंत्रता संग्राम में योगदान Tara Rani Srivastava की विरासत तारा रानी की कहानी आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी बहादुरी और त्याग को याद करते हुए हमें अपने देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा मिलती है। आज हम स्वतंत्रता का आनंद उनके जैसे वीरों के कारण ही ले पा रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gangu Baba

Gangu Baba की वीर गाथा: 1857 के क्रांतिकारी गंगादिन मेहतर का इतिहास

1857 की क्रांति में कानपुर के गंगादिन मेहतर उर्फ Gangu Baba ने अदम्य साहस दिखा कर लगभग 200 अंग्रेज सैनिकों को अकेले ही हराया। उनकी प्रेरक और भावनात्मक कहानी, जो आज भी हमें देशभक्ति का संदेश देती है। परिचय: निर्धन से वीर योद्धा तक गंगादिन मेहतर, जिन्हें प्यार से Gangu Baba कहा जाता था, का जन्म कानपुर के समीप वाल्मीकि (भंगी) समुदाय में हुआ था। समाज में व्याप्त ठगी और छुआछूत के कारण उनका परिवार ‘अकबरपुरा’ से ‘चुन्नीगंज’ आकर बस गया। बचपन से ही पहलवानी का शौक रहा और एक मुस्लिम गुरु से कुश्ती की कला सीखी। सामाजिक विषमताओं ने उन्हें कमजोर नहीं किया, बल्कि उन्हें दृढ़ता और आत्म-सम्मान सिखाया। क्रांतिकारी बनने की शुरुआत और Nana Saheb के साथ संबंध कहा जाता है कि एक बार वे जंगल से एक मृत बाघ कंधे पर लेकर लौटा करते थे, तभी नाना साहेब पेशवा ने उनका यह अद्भुत रण-वीर्य देखा। प्रभावित होकर उन्होंने गंगू बाबा को अपनी सेना में शामिल कर लिया। वहां वे सिर्फ नगारित नहीं बल्कि सूबेदार का पद प्राप्त कर गए—कुशल और वीर सैनिक के रूप में उनका नाम फैल गया। 1857 की क्रांति में अद्वितीय वीरता क्रांतिकारी संघर्ष में, गंगू बाबा ने अदम्य साहस का परिचय दिया। उनके हाथों तकरीबन 200 ब्रिटिश सैनिकों की मौत हुई, एक-एक करके उन्होंने अंग्रेजों में भय का संचार कर दिया। उनकी बहादुरी ने इलाके में विद्रोहियों का हौसला कई गुना बढ़ा दिया। अंतिम संघर्ष और बलिदान अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ने के लिए आदेश भेजा और अंततः उसे बंदी बना लिया। निर्मम तरीके से—घोड़े से लटकाकर पूरे शहर में घसीटते हुए—उनका बदनाम किया गया। 8 सितंबर 1859 को कानपुर के चुन्नीगंज क्षेत्र में एक नीम के पेड़ से फांसी पर चढ़ा दिया गया। अपनी अंतिम सांस में उन्होंने कहा:“भारत की माटी में हमारे पूर्वजों का खून व कुर्बानी की गंध है, एक दिन यह मुल्क आज़ाद होगा।”घटना ने इतिहास में शहीद-मार्गदर्शक को अमर बना दिया। इतिहास में क्यों रहा कहीं छुपा? गंगू बाबा जैसे वीर योद्धा अक्सर मुख्यधारा के इतिहास से अनदेखे रह जाते हैं। लेकिन लोक-कथाओं, स्मरणशक्ति और मौखिक परंपराओं में वे आज भी जीवित हैं। उनके वंशज कानपुर में आज भी रहते हैं, और उनकी कहानी बुजुर्गों की जुबानी पीढ़ी दर पीढ़ी चल रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kerala school rivalry news in Hindi

Kerala school rivalry news: 50 साल पुरानी रंजिश में दो बुजुर्गों ने पूर्व सहपाठी पर किया हमला

केरल के कासरगोड में 50 साल पुराना स्कूल विवाद बना हिंसा का कारण Kerala school rivalry news – केरल के कासरगोड जिले के मलोम कस्बे से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां स्कूल टाइम की 50 साल पुरानी रंजिश ने दो बुजुर्गों को हिंसा के रास्ते पर धकेल दिया। बालाल ग्राम पंचायत स्थित नटक्कल्लू एडेड स्कूल में साथ पढ़ने वाले तीन पूर्व सहपाठी—वी.जे. बाबू (62), मालोथु बालकृष्णन, और मैथ्यू वलियप्लक्कल—के बीच वर्षों पुराना विवाद फिर से उभर आया। होटल के बाहर हुआ हमला, टूटा दोस्ती का दिखावा घटना सोमवार को जनग्राम होटल के बाहर हुई, जब तीनों की आकस्मिक मुलाकात हो गई। बातचीत के दौरान पुरानी रंजिश फिर से भड़क उठी। रिपोर्ट के मुताबिक, बालकृष्णन ने बाबू को पकड़ लिया और मैथ्यू ने एक बड़ा पत्थर उठाकर बाबू के चेहरे और शरीर पर हमला कर दिया। इस हमले में बाबू के दो दांत टूट गए और उन्हें गंभीर हालत में परियारम स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज, कन्नूर में भर्ती कराया गया। गैर-जमानती धाराओं में केस दर्ज, हो सकती है जेल वेल्लरिकुंड पुलिस थाने के निरीक्षक टी.के. मुकुंदन के अनुसार, अगर मेडिकल रिपोर्ट में यह साबित हुआ कि बाबू के दांत हमले के कारण टूटे हैं, तो यह अपराध गैर-जमानती हो जाएगा। हमले के आरोप में बालकृष्णन और मैथ्यू पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराओं में केस दर्ज किया गया है: ₹1.5 लाख में सुलह की पेशकश, शराब की भी संभावना पुलिस को मिली जानकारी के अनुसार, घायल वी.जे. बाबू ने इस मामले को कोर्ट से बाहर सुलझाने की इच्छा जताई है, लेकिन बदले में ₹1.5 लाख की मांग की है। साथ ही उन्होंने यह भी बयान दिया कि हमले के समय हमलावरों द्वारा शराब का सेवन किया गया हो सकता है। 50 साल पुरानी दुश्मनी का मनोवैज्ञानिक पहलू Kerala school rivalry news- विशेषज्ञों के अनुसार, स्कूल में हुए छोटे-छोटे बुलींग या टकराव का असर लंबे समय तक मानसिक रूप से बना रह सकता है, खासकर अगर उसे सुलझाया न जाए। यह घटना बताती है कि बचपन की घटनाएं, अगर मन में बैठ जाएं, तो बुजुर्ग अवस्था में भी हिंसा का रूप ले सकती हैं।
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Ramdev

शरबत जिहाद” टिप्पणी पर बवाल: Ramdev को Delhi High Court की फटकार, Rooh Afza पर दिए बयान से साम्प्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका

योग गुरु बाबा Ramdev एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने रूह अफ़ज़ा को लेकर उनकी विवादित टिप्पणी पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह बयान “अंतरात्मा को झकझोर देता है” और समाज में सांप्रदायिक तनाव पैदा कर सकता है। Ramdev का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने दावा किया कि रूह अफ़ज़ा की बिक्री से मस्जिदें बनाई जा रही हैं और इसे उन्होंने “शरबत जिहाद” बताया। कोर्ट ने इस बयान को “गैरजिम्मेदाराना” और “गंभीर रूप से भड़काऊ” बताया। कोर्ट का कड़ा संदेश: जिम्मेदार लोग न फैलाएं नफरत हाई कोर्ट ने कहा कि बाबा रामदेव जैसे प्रभावशाली व्यक्तियों को बयान देने से पहले सामाजिक जिम्मेदारी समझनी चाहिए। इस तरह की टिप्पणियां भारत जैसे विविधता से भरे देश में सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकती हैं। पहले भी सुप्रीम कोर्ट से मिल चुकी है चेतावनी यह कोई पहला मामला नहीं है जब रामदेव या पतंजलि कोर्ट के निशाने पर आए हों। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि द्वारा भ्रामक विज्ञापन चलाने और एलोपैथी को बदनाम करने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। Ramdev और उनके सहयोगियों को अदालत की अवमानना मामले में बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी थी। कोविड को लेकर भ्रामक दावे पर भी फटकार दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अन्य मामले में पतंजलि और रामदेव को आदेश दिया था कि वे एलोपैथी को कोविड-19 मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराने वाले अपने दावे हटाएं। अदालत ने कहा था कि इस तरह की गलत जानकारी सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है।
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भाजपा का समर्थ भारत निर्माण में अतुलनीय योगदान

सत्येंद्र जैन ,स्तंभकार विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भाजपा ने स्थापना के 46 वे वर्ष में प्रवेश किया है।भाजपा के संस्थापक अटल बिहारी वाजपेयी,लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी,कुशा भाऊ ठाकरे, राजमाता विजयाराजे सिंधिया,सुन्दरलाल पटवा,प्यारेलाल खण्डेलवाल आदि नेताओं ने 1980 में पार्टी स्थापना के समय यह कल्पना भी नहीं की होगी कि इतने कम समय में ही भाजपा विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी का गौरव अर्जित कर लेगी।1984 में भाजपा की यात्रा मात्र 2 लोकसभा सीट से प्रारम्भ होकर वर्ष 2019 में 303 सीट तक पहुँची है।वर्तमान में भाजपा के 240 सांसद हैं। भाजपा चार दशकों की यात्रा में ही भारतीय राजनीति में शून्य से चलकर शिखर पर आरोहित हो गई है।विश्व की सर्वोच्च राजनीतिक पार्टी बन गई है। वर्तमान में भाजपा के लगभग 13 करोड़ से अधिक सदस्य हैं। मध्यप्रदेश भाजपा ने पौने दो करोड़ सदस्य बना कर देश में अग्रणी भूमिका निभा कर कीर्तिमान स्थापित किया है।भाजपा का शिखर पर आरोहण सामान्य बात नहीं है ।यह अतुलनीय विलक्षण उपलब्धि है। यह उपलब्धि भाजपा की भारतीय मूल्यों ,पंच निष्ठाओं एवं एकात्म मानववाद के सिद्धांत को आत्मरूप आधार मानकर ही हुई है।भाजपा के संविधान में भी एकात्म मानववाद और पंच निष्ठाओं को आधारभूत तत्व माना गया है ।जो भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रीय मूल्यों को संवर्धित करते हैं।विचार परिवार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से राष्ट्र निर्माण के मंत्र,दिशा निर्देश सतत प्राप्त होने से उत्कृष्टता के पथ पर अग्रसर है।भाजपा ने अनेक संकल्प भारतीय जनसंघ की स्थापना के समय से ही अपने संकल्प पत्र, घोषणापत्र में सम्मिलित किए हैं।जम्मू कश्मीर में धारा 370 को निष्प्रभावी करना,अयोध्या में दिव्य,भव्य,नव्य राम मंदिर का निर्माण करना,समान नागरिक संहिता को लागू करना जैसे संकल्पों को सदैव घोषणापत्र में सम्मिलित किया है।उत्तराखंड में यूनीफॉर्म सिविल कोड लागू कर दिया गया है।अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति,पिछड़े वर्ग के साथ सामान्य निर्धन वर्ग को भी अब आरक्षण मिल रहा है।नारी शक्ति वंदन अधिनियम द्वारा देश की महिलाओं को राजनैतिक क्षेत्र लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण कार्य भाजपा ने किया है।भाजपा ने गौरवशाली,वैभवशाली,समृद्धशाली, शक्तिशाली,समर्थ भारत निर्माण के रोड मेप को जनता के समक्ष प्रस्तुत किया है।शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग, रक्षा,विनिर्माण आदि क्षेत्रों में स्व तत्व की प्रधानता को महत्व दिया है। मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि आगामी शताब्दी में भी भाजपा का भविष्य उज्जवल रहेगा। भाजपा की सतत उन्नति की यह यात्रा महा विजय की यात्रा सिद्ध होगी। वर्तमान भाजपा की सफलता चार पीढ़ियों के सतत,अथक परिश्रम से ही संभव हुई है।भाजपा को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनाने का कीर्तिमान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री, तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को जाता है ।अमित शाह ने राष्ट्र व्यापी सदस्यता अभियान चला कर,चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को सदस्य संख्या में पछाड़ दिया। 11 करोड़ सदस्य बनाकर संसार की सर्वोच्च पार्टी बनाया। राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के नेतृत्व में सदस्यता अभियान को गति दी गई है।आज विश्व के 60 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भारतीय जनता पार्टी के संगठन विस्तार की सफलता का अध्ययन करने के लिए भारत आ चुके हैं।राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से भेंट कर चुके हैं।मध्य प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा से एवं अन्य राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष से भेंट कर चुके हैं।भाजपा की अप्रतिम सफलता से कार्यकर्ताओं, प्रतिनिधियों को गौरव बोध होता है।उनके दल की संरचना को समझने के लिए विश्व के देशों से प्रतिनिधि आ रहे हैं हैं ।दूसरे शब्दों में कहें कि भाजपा की संगठन रचना,भागीरथी परिश्रम की विपुल सफ़लता से हमारे राष्ट्र भारतवर्ष का विश्व में सम्मान बढ़ रहा है।यह हम सभी 140 करोड़ भारतीयों के लिए स्वाभिमान का विषय है। वर्तमान में राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने विश्व के 20 से अधिक देश जैसे अमेरिका,ऑस्ट्रेलिया जापान,जर्मनी,फ्रांस,ब्रिटेन आदि देशों के राजनीतिक दलों को भारतीय लोकतंत्र के उत्सव लोकसभा चुनाव 2024 को निकटता से देखने के लिए निमंत्रित भी किया था।यह अनूठी एवं सराहनीय पहल है। स्वतंत्रता के चौसठ वर्षों के बाद भाजपा की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की पूर्ण बहुमत की सरकार लगातार तीन बार से केंद्र में बनी है ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुयोग्य नेतृत्व में भारत का,भारत के लोगों का सर्वांगीण उत्थान हो रहा है।देश के 21 राज्यों – केंद्र शासित प्रदेशों में भाजपा एवं सहयोगी दलों की सरकारें हैं।देश भर में एक हजार तीन सौ से अधिक कार्यालयों का निर्माण हो रहा है।पाँच सौ से अधिक कार्यालय निर्मित होकर सुचारु रूप में प्रारंभ हो चुके हैं। मध्यप्रदेश में भाजपा की संरचना पर प्रकाश डालेंगे तो पाते हैं कि वर्तमान में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा एवं संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा की त्रिदेव रूपी त्रिवेणी, ट्रिनिटी के चमत्कारी नेतृत्व में प्रदेश भाजपा इकाई नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।लोकसभा चुनाव में सभी 29 सीट जीत कर कांग्रेस को शून्य पर ला दिया है।वोट शेयर भी लगभग 59 प्रतिशत अर्जित कर कीर्तिमान रचा है।वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में पाँचवीं बार भाजपा की सरकार बनी है।163 विधायक विजयी हुए हैं। वोट शेयर भी बढ़कर लगभग 49 प्रतिशत हुआ है।प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा पुनः शुभंकर सिद्ध हुए हैं ।लगभग 64000 से अधिक बूथ्स का डिजिटलाइजेशन एवं लाख कार्यकर्ताओं का कैलाश पर्वत बूथ स्तर पर अपना कार्य कर रहा है।बूथ विजय संकल्प को सार्थक कर रहा है।अनेक अवसर पर विष्णु दत्त शर्मा के भागीरथी परिश्रम, बूथ डिजिटलाइजेशन के कार्य की भूरी-भूरी प्रशंसा स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने मुक्त कंठ से की है।देश के समस्त राज्य की इकाइयों को मध्यप्रदेश के संगठन से सीखने का आह्वान किया गया है।सदस्यता अभियान के संगठन महापर्व में मध्य प्रदेश का भाजपा संगठन अग्रणी है।विगत चुनाव में अभूतपूर्व सफलता भाजपा के संगठन कौशल,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार और मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव की सरकार के द्वारा चलाई जा रही सैकड़ों योजनाओं के धरातलीय क्रियान्वयन के परिणाम स्वरुप ही संभव हो पायी है।भविष्य के गौरवशाली,वैभवशाली,समृद्धशाली, शक्तिशाली,समर्थ भारत निर्माण में भाजपा का अतुलनीय योगदान है।
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Gold Price Today: सोने के दाम में बड़ी गिरावट, 10 ग्राम का भाव ₹1.43 लाख पर

सोना (Gold) और चांदी (Silver) खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। पिछले तीन दिनों में दोनों कीमती धातुओं के भाव में अच्छी-खासी गिरावट आई है। सोना करीब ₹3,000 और चांदी लगभग ₹9,000 तक सस्ती हुई है। ऐसे में शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने या निवेश की योजना बना रहे लोगों की नजर अब बाजार के अगले रुख पर है। 22 अक्टूबर 2026 के बाजार अपडेट के मुताबिक, 10 ग्राम सोने की कीमत करीब ₹1.43 लाख और चांदी का भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो बताया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग बाजारों में कीमतों का अंतर हो सकता है। Gold Rate Today: ₹1.43 लाख पर पहुंचा 10 ग्राम सोना Gold Price में आई गिरावट से खरीदारों को कुछ राहत जरूर मिली है। बीते तीन दिनों में भाव करीब ₹3,000 नीचे आने से उन लोगों के लिए खरीदारी का मौका बन सकता है, जो लंबे समय से कीमतें कम होने का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, सोना खरीदने से पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर पता कर लें। 24 कैरेट सोने की कीमत और गहने बनाने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने के भाव में अंतर होता है। इसके अलावा ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और GST भी देना पड़ता है। Silver Rate Today: चांदी ₹9,000 तक हुई सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। पिछले तीन दिनों में चांदी करीब ₹9,000 तक सस्ती हुई है और इसका भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो के स्तर पर बताया जा रहा है। चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर उन ग्राहकों पर भी पड़ता है, जो त्योहारों पर चांदी के सिक्के, बर्तन या दूसरे सामान खरीदते हैं। हालांकि, खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार में चांदी का ताजा भाव और शुद्धता की जानकारी लेना जरूरी है। सोना-चांदी के दाम क्यों गिर रहे हैं? Gold or Silver की कीमतें केवल घरेलू मांग से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव, डॉलर की चाल, रुपये की स्थिति और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें भी इनके भाव पर असर डालती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतें कमजोर होती हैं, तो भारतीय बाजार में भी इसका असर दिखाई दे सकता है। इसके अलावा मुनाफावसूली के कारण भी कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, बाजार में आई गिरावट की किसी एक वजह को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। कीमतों की चाल कई आर्थिक और वैश्विक कारकों पर निर्भर करती है। क्या अभी सोना और चांदी खरीदना सही रहेगा? अगर आप शादी या त्योहार के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो मौजूदा गिरावट आपके लिए राहत की बात हो सकती है। लेकिन केवल तीन दिन की गिरावट देखकर यह मान लेना ठीक नहीं है कि आगे भी भाव लगातार कम होंगे। खरीदारी से पहले अलग-अलग ज्वेलर्स के रेट की तुलना करें। सोने पर हॉलमार्क और शुद्धता की जांच करें तथा बिल में मेकिंग चार्ज और GST का पूरा विवरण देखें। निवेश के लिहाज से भी जल्दबाजी करने के बजाय अपने बजट और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना बेहतर है। आगे Gold-Silver Price में क्या बदलाव हो सकता है? आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख, अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों से जुड़ी खबरें और रुपये की चाल सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में भाव में फिर तेजी आने या गिरावट जारी रहने, दोनों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, तीन दिनों में सोने और चांदी के दाम में आई गिरावट ने खरीदारों को थोड़ी राहत दी है। अगर आप आज खरीदारी करने जा रहे हैं, तो पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर जांच लें, क्योंकि बाजार भाव और ज्वेलरी की अंतिम कीमत में अंतर हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Amit Shah

Amit Shah Statement: धरने से कुछ नहीं होगा, जनता के बीच जाएं- विपक्ष को शाह की सलाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ धरना-प्रदर्शन करने से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता। अगर विपक्ष को राजनीति में आगे बढ़ना है, तो उसे जनता के बीच जाकर काम करना होगा। शाह ने कांग्रेस को लेकर दावा किया कि पार्टी अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं लौट पाएगी। उन्होंने अपने बयान में राहुल गांधी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी राजनीति और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठाए। अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और कथित वोट चोरी को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच सियासी टकराव जारी है। कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग से जवाब मांग रही है, जबकि भाजपा विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक हताशा से जोड़ रही है। Amit Shah Statement: कांग्रेस पर क्यों बरसे गृह मंत्री? अमित शाह ने अपने संबोधन में कांग्रेस की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए केवल विरोध प्रदर्शन करना काफी नहीं है। राजनीतिक दलों को जनता की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए काम करना चाहिए। शाह के मुताबिक, विपक्ष को अपनी चुनावी हार की वजहों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर निशाना साधते हुए दावा किया कि पार्टी की मौजूदा राजनीति उसे लंबे समय तक सत्ता से दूर रख सकती है। हालांकि, कांग्रेस के अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं आने का बयान अमित शाह का राजनीतिक दावा है। इसे किसी निश्चित चुनावी नतीजे के तौर पर नहीं देखा जा सकता। Rahul Gandhi का नाम लिए बिना क्या बोले अमित शाह? अमित शाह ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना विपक्ष के धरने और प्रदर्शनों पर टिप्पणी की। उनके बयान को कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ उठाए जा रहे सवालों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। शाह का कहना है कि विपक्ष को जनता के बीच जाकर अपना समर्थन बढ़ाना चाहिए। केवल आरोप लगाने या सड़कों पर उतरने से चुनावी राजनीति में सफलता नहीं मिलती। दूसरी तरफ, कांग्रेस का तर्क है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। पार्टी और INDIA गठबंधन के नेता मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। Vote Chori और SIR पर भाजपा-विपक्ष में टकराव देश की राजनीति में वोट चोरी और SIR यानी Special Intensive Revision का मुद्दा लगातार चर्चा में है। राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि इन मामलों में स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। वहीं, भाजपा इन आरोपों को खारिज करती रही है और विपक्ष पर चुनावी हार के बाद संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाती है। इस विवाद में दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। मतदाता सूची से जुड़े आरोपों की सच्चाई समझने के लिए आधिकारिक आंकड़ों, चुनाव आयोग के जवाब और उपलब्ध प्रमाणों को देखना जरूरी है। चुनाव आयोग को लेकर भी जारी है सियासी लड़ाई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों का विरोध पहले भी सामने आ चुका है। विपक्ष ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर जवाब मांगा है। वहीं, भाजपा का कहना है कि चुनावी नतीजों को लेकर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय विपक्ष को अपनी रणनीति पर ध्यान देना चाहिए। इस मुद्दे ने भाजपा और INDIA गठबंधन के बीच राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले समय में यह विवाद चुनावी भाषणों और विपक्षी अभियानों में भी अहम भूमिका निभा सकता है। Amit Shah ने AAP पर भी साधा निशाना अमित शाह ने अपने संबोधन में आम आदमी पार्टी (AAP) की राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने विपक्षी दलों को सलाह दी कि वे आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जनता के लिए काम करें। दिल्ली की राजनीति में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच लंबे समय से टकराव रहा है। ऐसे में शाह का बयान विपक्ष पर राजनीतिक दबाव बनाने के साथ-साथ भाजपा के चुनावी संदेश को मजबूत करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। आगे क्या होगा? कांग्रेस के सामने क्या चुनौती है? अमित शाह के बयान से साफ है कि भाजपा कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। दूसरी ओर, कांग्रेस चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर जवाब मांगने की अपनी रणनीति पर कायम है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में क्या तथ्य सामने रखता है और चुनाव आयोग इन सवालों पर क्या जवाब देता है। साथ ही, यह भी देखना होगा कि इन मुद्दों का आने वाले चुनावों में मतदाताओं पर कितना असर पड़ता है। फिलहाल, अमित शाह का 30 साल वाला बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। लेकिन आखिरकार चुनाव में किसे जनता का समर्थन मिलेगा, इसका फैसला मतदाता ही करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Ranbir Kapoor

Ranbir Kapoor Controversy: सच्चाई और अच्छाई पर गलत बोल गए रणबीर, अब मांगी माफी

बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। दशहरे के मौके पर कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सच्चाई और अच्छाई को लेकर कुछ ऐसा कह दिया, जिस पर सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे। वीडियो वायरल हुआ तो लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। अब रणबीर कपूर ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी है। उन्होंने सफाई दी कि बोलते समय उनकी जुबान फिसल गई थी और वह कुछ और कहना चाहते थे। दशहरे पर क्या बोल गए रणबीर कपूर? दरअसल, दशहरे के मौके पर Ranbir Kapoor कोलकाता में एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस दौरान वह बुराई पर अच्छाई की जीत के संदेश के बारे में बात कर रहे थे। लेकिन अपनी बात रखते समय वह ‘सच्चाई और अच्छाई की जीत’ की जगह उनके अंत होने जैसी बात कह गए। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसके बाद कई यूजर्स ने उनके शब्दों पर सवाल उठाए, तो कुछ ने मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया दी। मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि रणबीर कपूर अपनी आगामी फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं। ट्रोलिंग के बाद Ranbir Kapoor ने मांगी माफी बयान को लेकर विवाद बढ़ने के बाद रणबीर कपूर ने चेन्नई में आयोजित ‘रामायण’ के म्यूजिकल इवेंट में इस पर सफाई दी। उन्होंने माना कि उस समय बोलते हुए उनकी जुबान फिसल गई थी। Ranbir ने बताया कि वह कहना चाहते थे कि बुराई कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, आखिरकार जीत सच्चाई और अच्छाई की ही होती है। लेकिन शब्दों के गलत इस्तेमाल के कारण उनकी बात का अर्थ बदल गया। उन्होंने अपनी गलती के लिए माफी भी मांगी। अभिनेता ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी समझाया कि कभी-कभी वह कहना कुछ चाहते हैं, लेकिन उनके मुंह से कुछ और निकल जाता है। उनकी इस सफाई के बाद यह साफ हुआ कि उनका इरादा दशहरे के संदेश के उलट बात कहने का नहीं था। Social Media पर क्यों होने लगे Ranbir Kapoor ट्रोल? Ranbir Kapoor का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने इसे जुबान फिसलने की सामान्य गलती बताया, जबकि कुछ यूजर्स ने सार्वजनिक मंच पर बोलते समय ज्यादा सावधानी बरतने की बात कही। फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम का किरदार निभाने की वजह से भी यह बयान लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, रणबीर ने ज्यादा देर तक इस मामले पर चुप रहने के बजाय अपनी बात स्पष्ट की और गलती स्वीकार कर ली। Ranbir Kapoor की अपकमिंग फिल्म Ramayana भी चर्चा में रणबीर कपूर इन दिनों निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ को लेकर भी सुर्खियों में हैं। फिल्म में साई पल्लवी माता सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म के पहले भाग की रिलीज 5 नवंबर 2026 को तय बताई गई है। ऐसे में फिल्म के प्रमोशन के दौरान रणबीर कपूर के बयान ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। Ranbir Kapoor Controversy: क्या है पूरा मामला? इस पूरे विवाद की शुरुआत दशहरे के कार्यक्रम में बोले गए गलत शब्दों से हुई। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद रणबीर कपूर को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनकी जुबान फिसल गई थी और वह अच्छाई व सच्चाई की जीत की बात कर रहे थे। फिलहाल, रणबीर कपूर की माफी के बाद इस मामले में उनकी सफाई सामने आ चुकी है। अब दर्शकों की नजर उनकी फिल्म ‘रामायण’ पर है, जिसे लेकर पहले से ही काफी उत्सुकता बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

छत्तीसगढ़ में परीक्षा में नकल और गड़बड़ी के मामलों की सुनवाई के लिए 3 स्पेशल कोर्ट गठित

छत्तीसगढ़ में प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल व गड़बड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए तीन स्पेशल कोर्ट बनाई गई हैं। राज्य शासन ने रायपुर, बिलासपुर और कोरिया के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट को विशेष अदालत के रूप में नामित किया है। कोरिया जिले की स्पेशल कोर्ट बैकुंठपुर में होगी। इस संबंध में कानून एवं विधायी कार्य विभाग ने अधिसूचना जारी की है। इन अदालतों में सार्वजनिक परीक्षाओं के दौरान नकल और अनुचित तरीकों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाएगी। 2024 के कानून के तहत गठित हुईं विशेष अदालतें राज्य में यह व्यवस्था पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के तहत की गई है। अधिसूचना में कानून की धारा 12-क की उपधारा (2) का उल्लेख किया गया है। इसी प्रावधान के तहत राज्य शासन ने तीन जिलों के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट को स्पेशल कोर्ट के रूप में नामित किया है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध कराना है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से परामर्श के बाद जारी हुई अधिसूचना छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र से परामर्श के बाद राज्य शासन ने यह अधिसूचना जारी की है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव ने संबंधित जिलों के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जजों को अधिसूचना की प्रतियां भेजकर आवश्यक निर्देश दिए हैं। तीनों विशेष अदालतें अपने-अपने न्यायिक क्षेत्राधिकार में आने वाले परीक्षा संबंधी गड़बड़ी के मामलों की सुनवाई करेंगी। इस व्यवस्था के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल या अनुचित तरीकों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सुना जाएगा।
Akhilesh Yadav

Akhilesh Yadav Rampur Visit: रामपुर जेल पहुंचे अखिलेश, आजम खान से करेंगे मुलाकात

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) गुरुवार, 22 अक्टूबर को रामपुर जिला जेल पहुंचे। यहां उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात होनी है। इस दौरे पर राजनीतिक गलियारों की नजरें टिकी हैं। इसकी वजह सिर्फ दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बदलते राजनीतिक समीकरण भी हैं। Akhilesh Yadav के रामपुर पहुंचने के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि आजम खान से बातचीत के बाद वह क्या कहते हैं और इस मुलाकात से पार्टी के भीतर क्या संदेश जाता है। Akhilesh Yadav कैसे रामपुर पहुंचे ? निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) लखनऊ से निजी विमान के जरिए बरेली पहुंचे। इसके बाद हेलीकॉप्टर से रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय पहुंचे और वहां से जिला जेल के लिए रवाना हुए। कार्यक्रम में आजम खान से मुलाकात के साथ उनके परिवार से मिलने की योजना भी शामिल है। आजम खान की तबीयत और उनके हालात जानने को इस दौरे की अहम वजह बताया गया है। Azam Khan से मुलाकात क्यों है खास? आजम खान समाजवादी पार्टी के पुराने और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। रामपुर और आसपास के इलाकों में उनकी राजनीतिक पहचान लंबे समय से रही है। ऐसे में अखिलेश यादव का उनसे मिलने पहुंचना पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ समय से आजम खान और सपा नेतृत्व के संबंधों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं होती रही हैं। उनकी पत्नी तजीन फातिमा की अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद रामपुर आने का कार्यक्रम भी चर्चा में रहा। अब दोनों नेताओं की मुलाकात से यह देखने की उत्सुकता है कि उनके बीच किन मुद्दों पर बात होती है और आगे पार्टी की ओर से क्या संदेश दिया जाता है। UP Politics: 2027 चुनाव से पहले बढ़ी हलचल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सभी प्रमुख दल अपने राजनीतिक समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे समय में आजम खान से अखिलेश यादव की मुलाकात को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के नजरिए से भी देखा जा रहा है। हालांकि, इस मुलाकात में चुनावी रणनीति या संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इसे किसी बड़े राजनीतिक फैसले से जोड़कर देखना अभी जल्दबाजी होगी। Asaduddin Owaisi के दौरे के बाद चर्चा तेज रामपुर में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के दौरे और समाजवादी पार्टी पर उनकी राजनीतिक टिप्पणियों के बाद भी इस मुलाकात को लेकर चर्चा हो रही है। ओवैसी मुस्लिम राजनीति और सपा के नेतृत्व को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में अखिलेश यादव और आजम खान की मुलाकात पर राजनीतिक दलों की नजर होना स्वाभाविक है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच बातचीत का वास्तविक एजेंडा सामने आने के बाद ही इसके राजनीतिक मायने स्पष्ट होंगे। Om Prakash Rajbhar के बयान से भी गरमाई सियासत उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी अखिलेश यादव के रामपुर दौरे को लेकर टिप्पणी की है। इस बयानबाजी के बीच सपा प्रमुख का आजम खान से मिलना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल, इस दौरे को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लेकिन अखिलेश यादव और आजम खान की बातचीत के बाद ही यह साफ होगा कि मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई। मुलाकात के बाद क्या होगा अगला कदम? अखिलेश यादव के रामपुर पहुंचने के बाद अब आजम खान से मुलाकात और उनके परिवार से बातचीत पर सबकी नजर है। समर्थकों को उम्मीद है कि इस मुलाकात से दोनों नेताओं के बीच संवाद को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल, किसी नई चुनावी रणनीति या बड़े फैसले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव का बयान और समाजवादी पार्टी की आगे की गतिविधियां इस दौरे की अहमियत को समझने में मदद करेंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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