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Moji Riba

Moji Riba Arunachal Pradesh का अनकहा वीर नायक और भूला हुआ स्वतंत्रता सेनानी

मोजी रिबा (Moji Riba) अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के इतिहास के उन वीर नेताओं में से एक हैं, जिनका नाम आज भी कई लोगों के लिए अज्ञात है। उन्होंने अपने साहस, नेतृत्व और अदम्य हिम्मत से ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई लड़ी और अपने लोगों की आज़ादी के लिए अनवरत संघर्ष किया। प्रारंभिक जीवन Moji Riba का जन्म अरुणाचल प्रदेश के लुहित जिले में हुआ था। बचपन से ही उनमें नेतृत्व और साहस के गुण दिखाई देते थे। स्थानीय समुदाय में उनका व्यक्तित्व अत्यंत सम्मानित था। उनके आसपास के लोग उन्हें साहसी, न्यायप्रिय और दूरदर्शी नेता के रूप में देखते थे। ब्रिटिश शासन के समय स्थानीय लोगों पर अत्याचार और अन्याय बढ़ते जा रहे थे। इन परिस्थितियों ने मोजी रिबा को अपने समुदाय को संगठित करने और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया। ब्रिटिश राज के खिलाफ संघर्ष Moji Riba ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (British East India Company) के खिलाफ कई रणनीतिक अभियानों का नेतृत्व किया। उन्होंने अपने साहस और बुद्धिमत्ता के कारण ब्रिटिश अधिकारियों को लगातार चकमा दिया। उनकी रणनीतियाँ केवल युद्ध कौशल तक सीमित नहीं थीं। मोजी रिबा ने स्थानीय लोगों में स्वतंत्रता की भावना जगाई और उन्हें ब्रिटिश दमन के खिलाफ एकजुट किया। उन्होंने यह सिद्ध किया कि नेतृत्व और वीरता का असली अर्थ केवल युद्ध में नहीं, बल्कि लोगों की सोच और सामूहिक शक्ति को वीरता और नेतृत्व Moji Riba की सबसे बड़ी ताकत उनका नेतृत्व और साहस था। उन्होंने न केवल हथियारों के माध्यम से, बल्कि अपनी सोच और संगठन क्षमता से लोगों को स्वतंत्रता की लड़ाई में सक्रिय किया। उनके नेतृत्व में स्थानीय समुदाय ने ब्रिटिश दमन के खिलाफ साहसिक कदम उठाए। उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि स्वतंत्रता संग्राम में योगदान केवल बड़े नेताओं या शहरों तक सीमित नहीं था। छोटे-छोटे गांवों और पहाड़ी इलाकों के लोग भी अपने साहस, निष्ठा और दृढ़ निश्चय से स्वतंत्रता की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते थे।प्रेरित करने में है। आज Moji Riba की याद में अरुणाचल प्रदेश में स्मारक और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उनकी कहानी आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मोजी रिबा की वीरता और देशभक्ति को याद करना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें यह सिखाती है कि स्वतंत्रता की लड़ाई में हर योगदान की कीमत है। मोजी रिबा की कहानी अरुणाचल प्रदेश और भारत के इतिहास में “अनकहा वीर नायक और भूला हुआ स्वतंत्रता सेनानी” के रूप में अमर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ashutosh Kuila

कम उम्र में अमर नाम Ashutosh Kuila की शहादत की कहानी

Ashutosh Kuila का परिचय भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में कई ऐसे युवा वीर हुए जिन्होंने अपनी कम उम्र में ही अद्भुत साहस और बलिदान का परिचय दिया। Ashutosh Kuila उन्हीं महान शहीदों में से एक थे, जिन्होंने मात्र 18 साल की उम्र में मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। झारखंड (तत्कालीन बिहार) के इस युवा योद्धा की कहानी हमें याद दिलाती है कि सच्चा देशप्रेम उम्र का मोहताज नहीं होता। जन्म और प्रारंभिक जीवन स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका गिरफ्तारी और यातना 18 साल में शहादत Ashutosh Kuila की विरासत हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bishni Devi Shah

Bishni Devi Shah उत्तराखंड की First Woman Freedom Fighter और आज़ादी की वीरांगना

भारत की आज़ादी की लड़ाई में जहां महात्मा गांधी, भगत सिंह और रानी लक्ष्मीबाई जैसे बड़े नाम चर्चित रहे, वहीं कई ऐसे वीर-वीरांगनाएं भी थीं जिनका योगदान इतिहास के पन्नों में कम लिखा गया। Bishni Devi Shah इन्हीं में से एक हैं, जिन्हें Uttarakhand की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी (First Woman Freedom Fighter) के रूप में जाना जाता है। उन्होंने अपने साहस, त्याग और अदम्य इच्छाशक्ति से पहाड़ के कोने-कोने में आज़ादी की अलख जगाई। प्रारंभिक जीवन और संघर्ष की शुरुआत Bishni Devi Shah का जन्म उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में हुआ। बचपन से ही उनमें न्याय और देशभक्ति की भावना थी। पहाड़ी गांव में पली-बढ़ी होने के बावजूद उन्होंने समाज की रूढ़ियों को चुनौती दी और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष का संकल्प लिया। स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका महिलाओं को आंदोलन में शामिल करने की प्रेरणा उस दौर में महिलाओं की स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी बेहद कम थी, लेकिन Bishni Devi Shah ने गांव-गांव जाकर उन्हें आंदोलन में जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह साबित किया कि आज़ादी की लड़ाई में महिला और पुरुष का योगदान समान है। त्याग और बलिदान विरासत और सम्मान आज Bishni Devi Shah को Uttarakhand की First Woman Freedom Fighter के रूप में सम्मानित किया जाता है। हालांकि उनका नाम मुख्यधारा के इतिहास में कम दर्ज है, लेकिन स्थानीय इतिहासकार और समाजसेवी उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयास कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tara Rani Srivastava

Tara Rani Srivastava तिरंगे के लिए गोली भी झेली भारतीय स्वतंत्रता सेनानी की अमर गाथा

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कई ऐसे वीरांगनाएँ और योद्धा हुए हैं, जिनका नाम इतिहास की किताबों में कम लिखा गया, पर उनकी बहादुरी और त्याग अमर है। ऐसी ही एक शूरवीर नारी थीं Tara Rani Srivastava, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए तिरंगे के सम्मान में गोली तक झेली। आइए जानते हैं उनके जीवन और संघर्ष की कहानी। Tara Rani Srivastava कौन थीं? Tara Rani Srivastava एक स्वतंत्रता सेनानी थीं, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ देश की आज़ादी के लिए बहादुरी से लड़ाई लड़ी। वह एक साधारण परिवार से थीं, लेकिन देशभक्ति उनके रक्त में बसी थी। उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर आज़ादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई। तिरंगे के लिए उनकी बहादुरी Tara Rani Srivastava की बहादुरी का सबसे बड़ा उदाहरण तब सामने आया जब वे ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ तिरंगा झंडा फहराने निकलीं। उस समय ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपने देश के तिरंगे की शान को बचाने के लिए उन्होंने गोली झेली, फिर भी झंडा नहीं छोड़ा। उनकी इस वीरता ने हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की आग जगा दी। स्वतंत्रता संग्राम में योगदान Tara Rani Srivastava की विरासत तारा रानी की कहानी आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी बहादुरी और त्याग को याद करते हुए हमें अपने देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा मिलती है। आज हम स्वतंत्रता का आनंद उनके जैसे वीरों के कारण ही ले पा रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gangu Baba

Gangu Baba की वीर गाथा: 1857 के क्रांतिकारी गंगादिन मेहतर का इतिहास

1857 की क्रांति में कानपुर के गंगादिन मेहतर उर्फ Gangu Baba ने अदम्य साहस दिखा कर लगभग 200 अंग्रेज सैनिकों को अकेले ही हराया। उनकी प्रेरक और भावनात्मक कहानी, जो आज भी हमें देशभक्ति का संदेश देती है। परिचय: निर्धन से वीर योद्धा तक गंगादिन मेहतर, जिन्हें प्यार से Gangu Baba कहा जाता था, का जन्म कानपुर के समीप वाल्मीकि (भंगी) समुदाय में हुआ था। समाज में व्याप्त ठगी और छुआछूत के कारण उनका परिवार ‘अकबरपुरा’ से ‘चुन्नीगंज’ आकर बस गया। बचपन से ही पहलवानी का शौक रहा और एक मुस्लिम गुरु से कुश्ती की कला सीखी। सामाजिक विषमताओं ने उन्हें कमजोर नहीं किया, बल्कि उन्हें दृढ़ता और आत्म-सम्मान सिखाया। क्रांतिकारी बनने की शुरुआत और Nana Saheb के साथ संबंध कहा जाता है कि एक बार वे जंगल से एक मृत बाघ कंधे पर लेकर लौटा करते थे, तभी नाना साहेब पेशवा ने उनका यह अद्भुत रण-वीर्य देखा। प्रभावित होकर उन्होंने गंगू बाबा को अपनी सेना में शामिल कर लिया। वहां वे सिर्फ नगारित नहीं बल्कि सूबेदार का पद प्राप्त कर गए—कुशल और वीर सैनिक के रूप में उनका नाम फैल गया। 1857 की क्रांति में अद्वितीय वीरता क्रांतिकारी संघर्ष में, गंगू बाबा ने अदम्य साहस का परिचय दिया। उनके हाथों तकरीबन 200 ब्रिटिश सैनिकों की मौत हुई, एक-एक करके उन्होंने अंग्रेजों में भय का संचार कर दिया। उनकी बहादुरी ने इलाके में विद्रोहियों का हौसला कई गुना बढ़ा दिया। अंतिम संघर्ष और बलिदान अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ने के लिए आदेश भेजा और अंततः उसे बंदी बना लिया। निर्मम तरीके से—घोड़े से लटकाकर पूरे शहर में घसीटते हुए—उनका बदनाम किया गया। 8 सितंबर 1859 को कानपुर के चुन्नीगंज क्षेत्र में एक नीम के पेड़ से फांसी पर चढ़ा दिया गया। अपनी अंतिम सांस में उन्होंने कहा:“भारत की माटी में हमारे पूर्वजों का खून व कुर्बानी की गंध है, एक दिन यह मुल्क आज़ाद होगा।”घटना ने इतिहास में शहीद-मार्गदर्शक को अमर बना दिया। इतिहास में क्यों रहा कहीं छुपा? गंगू बाबा जैसे वीर योद्धा अक्सर मुख्यधारा के इतिहास से अनदेखे रह जाते हैं। लेकिन लोक-कथाओं, स्मरणशक्ति और मौखिक परंपराओं में वे आज भी जीवित हैं। उनके वंशज कानपुर में आज भी रहते हैं, और उनकी कहानी बुजुर्गों की जुबानी पीढ़ी दर पीढ़ी चल रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kerala school rivalry news in Hindi

Kerala school rivalry news: 50 साल पुरानी रंजिश में दो बुजुर्गों ने पूर्व सहपाठी पर किया हमला

केरल के कासरगोड में 50 साल पुराना स्कूल विवाद बना हिंसा का कारण Kerala school rivalry news – केरल के कासरगोड जिले के मलोम कस्बे से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां स्कूल टाइम की 50 साल पुरानी रंजिश ने दो बुजुर्गों को हिंसा के रास्ते पर धकेल दिया। बालाल ग्राम पंचायत स्थित नटक्कल्लू एडेड स्कूल में साथ पढ़ने वाले तीन पूर्व सहपाठी—वी.जे. बाबू (62), मालोथु बालकृष्णन, और मैथ्यू वलियप्लक्कल—के बीच वर्षों पुराना विवाद फिर से उभर आया। होटल के बाहर हुआ हमला, टूटा दोस्ती का दिखावा घटना सोमवार को जनग्राम होटल के बाहर हुई, जब तीनों की आकस्मिक मुलाकात हो गई। बातचीत के दौरान पुरानी रंजिश फिर से भड़क उठी। रिपोर्ट के मुताबिक, बालकृष्णन ने बाबू को पकड़ लिया और मैथ्यू ने एक बड़ा पत्थर उठाकर बाबू के चेहरे और शरीर पर हमला कर दिया। इस हमले में बाबू के दो दांत टूट गए और उन्हें गंभीर हालत में परियारम स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज, कन्नूर में भर्ती कराया गया। गैर-जमानती धाराओं में केस दर्ज, हो सकती है जेल वेल्लरिकुंड पुलिस थाने के निरीक्षक टी.के. मुकुंदन के अनुसार, अगर मेडिकल रिपोर्ट में यह साबित हुआ कि बाबू के दांत हमले के कारण टूटे हैं, तो यह अपराध गैर-जमानती हो जाएगा। हमले के आरोप में बालकृष्णन और मैथ्यू पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराओं में केस दर्ज किया गया है: ₹1.5 लाख में सुलह की पेशकश, शराब की भी संभावना पुलिस को मिली जानकारी के अनुसार, घायल वी.जे. बाबू ने इस मामले को कोर्ट से बाहर सुलझाने की इच्छा जताई है, लेकिन बदले में ₹1.5 लाख की मांग की है। साथ ही उन्होंने यह भी बयान दिया कि हमले के समय हमलावरों द्वारा शराब का सेवन किया गया हो सकता है। 50 साल पुरानी दुश्मनी का मनोवैज्ञानिक पहलू Kerala school rivalry news- विशेषज्ञों के अनुसार, स्कूल में हुए छोटे-छोटे बुलींग या टकराव का असर लंबे समय तक मानसिक रूप से बना रह सकता है, खासकर अगर उसे सुलझाया न जाए। यह घटना बताती है कि बचपन की घटनाएं, अगर मन में बैठ जाएं, तो बुजुर्ग अवस्था में भी हिंसा का रूप ले सकती हैं।
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Ramdev

शरबत जिहाद” टिप्पणी पर बवाल: Ramdev को Delhi High Court की फटकार, Rooh Afza पर दिए बयान से साम्प्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका

योग गुरु बाबा Ramdev एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने रूह अफ़ज़ा को लेकर उनकी विवादित टिप्पणी पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह बयान “अंतरात्मा को झकझोर देता है” और समाज में सांप्रदायिक तनाव पैदा कर सकता है। Ramdev का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने दावा किया कि रूह अफ़ज़ा की बिक्री से मस्जिदें बनाई जा रही हैं और इसे उन्होंने “शरबत जिहाद” बताया। कोर्ट ने इस बयान को “गैरजिम्मेदाराना” और “गंभीर रूप से भड़काऊ” बताया। कोर्ट का कड़ा संदेश: जिम्मेदार लोग न फैलाएं नफरत हाई कोर्ट ने कहा कि बाबा रामदेव जैसे प्रभावशाली व्यक्तियों को बयान देने से पहले सामाजिक जिम्मेदारी समझनी चाहिए। इस तरह की टिप्पणियां भारत जैसे विविधता से भरे देश में सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकती हैं। पहले भी सुप्रीम कोर्ट से मिल चुकी है चेतावनी यह कोई पहला मामला नहीं है जब रामदेव या पतंजलि कोर्ट के निशाने पर आए हों। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि द्वारा भ्रामक विज्ञापन चलाने और एलोपैथी को बदनाम करने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। Ramdev और उनके सहयोगियों को अदालत की अवमानना मामले में बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी थी। कोविड को लेकर भ्रामक दावे पर भी फटकार दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अन्य मामले में पतंजलि और रामदेव को आदेश दिया था कि वे एलोपैथी को कोविड-19 मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराने वाले अपने दावे हटाएं। अदालत ने कहा था कि इस तरह की गलत जानकारी सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है।
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भाजपा का समर्थ भारत निर्माण में अतुलनीय योगदान

सत्येंद्र जैन ,स्तंभकार विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भाजपा ने स्थापना के 46 वे वर्ष में प्रवेश किया है।भाजपा के संस्थापक अटल बिहारी वाजपेयी,लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी,कुशा भाऊ ठाकरे, राजमाता विजयाराजे सिंधिया,सुन्दरलाल पटवा,प्यारेलाल खण्डेलवाल आदि नेताओं ने 1980 में पार्टी स्थापना के समय यह कल्पना भी नहीं की होगी कि इतने कम समय में ही भाजपा विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी का गौरव अर्जित कर लेगी।1984 में भाजपा की यात्रा मात्र 2 लोकसभा सीट से प्रारम्भ होकर वर्ष 2019 में 303 सीट तक पहुँची है।वर्तमान में भाजपा के 240 सांसद हैं। भाजपा चार दशकों की यात्रा में ही भारतीय राजनीति में शून्य से चलकर शिखर पर आरोहित हो गई है।विश्व की सर्वोच्च राजनीतिक पार्टी बन गई है। वर्तमान में भाजपा के लगभग 13 करोड़ से अधिक सदस्य हैं। मध्यप्रदेश भाजपा ने पौने दो करोड़ सदस्य बना कर देश में अग्रणी भूमिका निभा कर कीर्तिमान स्थापित किया है।भाजपा का शिखर पर आरोहण सामान्य बात नहीं है ।यह अतुलनीय विलक्षण उपलब्धि है। यह उपलब्धि भाजपा की भारतीय मूल्यों ,पंच निष्ठाओं एवं एकात्म मानववाद के सिद्धांत को आत्मरूप आधार मानकर ही हुई है।भाजपा के संविधान में भी एकात्म मानववाद और पंच निष्ठाओं को आधारभूत तत्व माना गया है ।जो भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रीय मूल्यों को संवर्धित करते हैं।विचार परिवार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से राष्ट्र निर्माण के मंत्र,दिशा निर्देश सतत प्राप्त होने से उत्कृष्टता के पथ पर अग्रसर है।भाजपा ने अनेक संकल्प भारतीय जनसंघ की स्थापना के समय से ही अपने संकल्प पत्र, घोषणापत्र में सम्मिलित किए हैं।जम्मू कश्मीर में धारा 370 को निष्प्रभावी करना,अयोध्या में दिव्य,भव्य,नव्य राम मंदिर का निर्माण करना,समान नागरिक संहिता को लागू करना जैसे संकल्पों को सदैव घोषणापत्र में सम्मिलित किया है।उत्तराखंड में यूनीफॉर्म सिविल कोड लागू कर दिया गया है।अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति,पिछड़े वर्ग के साथ सामान्य निर्धन वर्ग को भी अब आरक्षण मिल रहा है।नारी शक्ति वंदन अधिनियम द्वारा देश की महिलाओं को राजनैतिक क्षेत्र लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण कार्य भाजपा ने किया है।भाजपा ने गौरवशाली,वैभवशाली,समृद्धशाली, शक्तिशाली,समर्थ भारत निर्माण के रोड मेप को जनता के समक्ष प्रस्तुत किया है।शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग, रक्षा,विनिर्माण आदि क्षेत्रों में स्व तत्व की प्रधानता को महत्व दिया है। मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि आगामी शताब्दी में भी भाजपा का भविष्य उज्जवल रहेगा। भाजपा की सतत उन्नति की यह यात्रा महा विजय की यात्रा सिद्ध होगी। वर्तमान भाजपा की सफलता चार पीढ़ियों के सतत,अथक परिश्रम से ही संभव हुई है।भाजपा को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनाने का कीर्तिमान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री, तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को जाता है ।अमित शाह ने राष्ट्र व्यापी सदस्यता अभियान चला कर,चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को सदस्य संख्या में पछाड़ दिया। 11 करोड़ सदस्य बनाकर संसार की सर्वोच्च पार्टी बनाया। राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के नेतृत्व में सदस्यता अभियान को गति दी गई है।आज विश्व के 60 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भारतीय जनता पार्टी के संगठन विस्तार की सफलता का अध्ययन करने के लिए भारत आ चुके हैं।राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से भेंट कर चुके हैं।मध्य प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा से एवं अन्य राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष से भेंट कर चुके हैं।भाजपा की अप्रतिम सफलता से कार्यकर्ताओं, प्रतिनिधियों को गौरव बोध होता है।उनके दल की संरचना को समझने के लिए विश्व के देशों से प्रतिनिधि आ रहे हैं हैं ।दूसरे शब्दों में कहें कि भाजपा की संगठन रचना,भागीरथी परिश्रम की विपुल सफ़लता से हमारे राष्ट्र भारतवर्ष का विश्व में सम्मान बढ़ रहा है।यह हम सभी 140 करोड़ भारतीयों के लिए स्वाभिमान का विषय है। वर्तमान में राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने विश्व के 20 से अधिक देश जैसे अमेरिका,ऑस्ट्रेलिया जापान,जर्मनी,फ्रांस,ब्रिटेन आदि देशों के राजनीतिक दलों को भारतीय लोकतंत्र के उत्सव लोकसभा चुनाव 2024 को निकटता से देखने के लिए निमंत्रित भी किया था।यह अनूठी एवं सराहनीय पहल है। स्वतंत्रता के चौसठ वर्षों के बाद भाजपा की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की पूर्ण बहुमत की सरकार लगातार तीन बार से केंद्र में बनी है ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुयोग्य नेतृत्व में भारत का,भारत के लोगों का सर्वांगीण उत्थान हो रहा है।देश के 21 राज्यों – केंद्र शासित प्रदेशों में भाजपा एवं सहयोगी दलों की सरकारें हैं।देश भर में एक हजार तीन सौ से अधिक कार्यालयों का निर्माण हो रहा है।पाँच सौ से अधिक कार्यालय निर्मित होकर सुचारु रूप में प्रारंभ हो चुके हैं। मध्यप्रदेश में भाजपा की संरचना पर प्रकाश डालेंगे तो पाते हैं कि वर्तमान में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा एवं संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा की त्रिदेव रूपी त्रिवेणी, ट्रिनिटी के चमत्कारी नेतृत्व में प्रदेश भाजपा इकाई नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।लोकसभा चुनाव में सभी 29 सीट जीत कर कांग्रेस को शून्य पर ला दिया है।वोट शेयर भी लगभग 59 प्रतिशत अर्जित कर कीर्तिमान रचा है।वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में पाँचवीं बार भाजपा की सरकार बनी है।163 विधायक विजयी हुए हैं। वोट शेयर भी बढ़कर लगभग 49 प्रतिशत हुआ है।प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा पुनः शुभंकर सिद्ध हुए हैं ।लगभग 64000 से अधिक बूथ्स का डिजिटलाइजेशन एवं लाख कार्यकर्ताओं का कैलाश पर्वत बूथ स्तर पर अपना कार्य कर रहा है।बूथ विजय संकल्प को सार्थक कर रहा है।अनेक अवसर पर विष्णु दत्त शर्मा के भागीरथी परिश्रम, बूथ डिजिटलाइजेशन के कार्य की भूरी-भूरी प्रशंसा स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने मुक्त कंठ से की है।देश के समस्त राज्य की इकाइयों को मध्यप्रदेश के संगठन से सीखने का आह्वान किया गया है।सदस्यता अभियान के संगठन महापर्व में मध्य प्रदेश का भाजपा संगठन अग्रणी है।विगत चुनाव में अभूतपूर्व सफलता भाजपा के संगठन कौशल,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार और मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव की सरकार के द्वारा चलाई जा रही सैकड़ों योजनाओं के धरातलीय क्रियान्वयन के परिणाम स्वरुप ही संभव हो पायी है।भविष्य के गौरवशाली,वैभवशाली,समृद्धशाली, शक्तिशाली,समर्थ भारत निर्माण में भाजपा का अतुलनीय योगदान है।
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Editor's Picks

Deepak Prakash

Bihar Political MLC टिकट नहीं मिलने से Deepak Prakash पर संकट, छोड़ना पड़ेगा मंत्री पद?

बिहार की सियासत में इन दिनों उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश (Deepak Prakash) को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। NDA की ओर से जारी विधान परिषद (MLC) उम्मीदवारों की सूची में नाम नहीं आने के बाद अब उनके मंत्री पद पर सवाल खड़े होने लगे हैं। 6 महीने का नियम बना बड़ी वजह दीपक प्रकाश फिलहाल बिहार सरकार में मंत्री हैं, लेकिन अभी तक वे विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं बन पाए हैं। संविधान के नियम के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति को मंत्री बनने के बाद छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी होता है। ऐसा नहीं होने पर मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है। इसी नियम को लेकर अब बिहार की राजनीति गर्म हो गई है। माना जा रहा था कि NDA उन्हें विधान परिषद भेज सकती है, लेकिन उम्मीदवारों की सूची आने के बाद तस्वीर बदलती नजर आई। सूची में उनका नाम नहीं होने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। NDA में सीट शेयरिंग बनी वजह? राजनीतिक जानकारों का कहना है कि गठबंधन के अंदर सीट शेयरिंग और राजनीतिक संतुलन की वजह से राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को ज्यादा जगह नहीं मिल सकी। इसका असर सीधे तौर पर दीपक प्रकाश की दावेदारी पर पड़ा। उधर, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी लगातार यह दावा कर रही है कि NDA में सबकुछ सामान्य है, लेकिन अंदरखाने चल रही हलचल कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। पार्टी समर्थकों के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि आखिर मंत्री बनाए जाने के बाद अब तक दीपक प्रकाश को सदन में पहुंचाने की रणनीति क्यों तय नहीं हो सकी। क्या निकलेगा कोई नया राजनीतिक रास्ता? सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में कोई बड़ा राजनीतिक फैसला लिया जा सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी चर्चा है कि परिवार या पार्टी स्तर पर ऐसा रास्ता तलाशा जा रहा है, जिससे दीपक प्रकाश का मंत्री पद बचाया जा सके। हालांकि अभी तक इस पर किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विपक्ष ने भी साधा निशाना इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष भी अब NDA पर निशाना साध रहा है और इसे गठबंधन के अंदर की खींचतान बता रहा है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ हफ्ते दीपक प्रकाश के राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं। अब आगे क्या? फिलहाल सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या NDA दीपक प्रकाश को सदन तक पहुंचाने के लिए कोई नया रास्ता निकालेगी या फिर उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Manipur

Manipur Protest Update: उखरुल में प्रदर्शन हुआ हिंसक, जवानों पर पेट्रोल डालने का आरोप

मणिपुर (Manipur) के उखरुल जिले में रविवार को उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब स्थानीय तंगखुल समुदाय की महिलाओं और असम राइफल्स के जवानों के बीच तीखी झड़प हो गई। विरोध प्रदर्शन के दौरान गुस्साई भीड़ ने सुरक्षा बलों के बनाए बंकर को नुकसान पहुंचाया। वहीं असम राइफल्स ने दावा किया है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने जवानों पर पेट्रोल डालने की कोशिश की। इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव बढ़ गया है। स्थानीय संगठनों के अनुसार, झड़प में करीब 22 महिलाएं घायल हुई हैं, जिनमें कई को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। कैसे शुरू हुआ विवाद? जानकारी के मुताबिक, उखरुल में पिछले कुछ दिनों से सुरक्षा बलों की मौजूदगी को लेकर लोगों में नाराजगी थी। इसी मुद्दे को लेकर बड़ी संख्या में महिलाएं प्रदर्शन करने पहुंचीं। शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में हालात बिगड़ गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों और जवानों के बीच पहले बहस हुई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की और झड़प में बदल गई। इसी दौरान भीड़ ने असम राइफल्स के अस्थायी बंकर को तोड़ दिया। Assam Rifles ने क्या कहा? असम राइफल्स की ओर से जारी बयान में कहा गया कि ड्यूटी पर तैनात जवानों को प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया था। सुरक्षा बलों का आरोप है कि कुछ महिलाओं ने जवानों पर पेट्रोल डालने की कोशिश की, जिससे हालात और ज्यादा बिगड़ गए। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि महिलाओं के साथ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। 22 महिलाएं घायल, कई अस्पताल में भर्ती स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस झड़प में करीब 22 तंगखुल महिलाएं घायल हुई हैं। कुछ महिलाओं को मामूली चोटें आईं, जबकि कई को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रशासन ने अभी तक घायलों की आधिकारिक संख्या जारी नहीं की है। इलाके में बढ़ा तनाव घटना के बाद उखरुल जिले में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी तरह की हिंसा को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। पहले भी हो चुके हैं ऐसे विवाद मणिपुर पिछले लंबे समय से जातीय हिंसा और तनाव की घटनाओं से जूझ रहा है। राज्य के कई हिस्सों में सुरक्षा बलों और स्थानीय समूहों के बीच टकराव की खबरें सामने आती रही हैं। उखरुल की यह ताजा घटना भी राज्य के संवेदनशील माहौल को दिखाती है, जहां हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Monsoon

Monsoon Alert 2026: 12 राज्यों में बारिश की एंट्री, Delhi Airport पर तूफान से 3 विमान डैमेज

देशभर में मानसून (Monsoon) अब पूरी तरह एक्टिव होता नजर आ रहा है। कई राज्यों में तेज बारिश, आंधी और ओलावृष्टि ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। जहां मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली, वहीं राजस्थान में ओलों और तेज हवाओं ने मुश्किलें बढ़ा दीं। दूसरी तरफ दिल्ली में आए तेज तूफान का असर एयरपोर्ट तक पहुंच गया, जहां Air India के तीन विमान क्षतिग्रस्त हो गए। 12 राज्यों तक पहुंचा मानसून, मौसम हुआ सुहाना भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब तक 12 राज्यों में दस्तक दे चुका है। कई इलाकों में लगातार बारिश होने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। लोगों को लंबे समय बाद गर्मी से राहत महसूस हुई। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में मानसून और तेजी से आगे बढ़ सकता है, जिससे उत्तर भारत के कई राज्यों में अच्छी बारिश देखने को मिलेगी। MP और UP में बारिश से मिली राहत मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर समेत कई शहरों में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। कई जगहों पर बादल गरजे और मौसम अचानक ठंडा हो गया। लोग घरों से बाहर निकलकर बारिश का आनंद लेते नजर आए। उत्तर प्रदेश में भी लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज सहित कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। गर्मी से परेशान लोगों के चेहरे पर राहत साफ दिखाई दी। हालांकि कुछ इलाकों में जलभराव की समस्या भी सामने आई। राजस्थान में आंधी और ओलावृष्टि से बढ़ी परेशानी राजस्थान में मौसम ने अलग ही रूप दिखाया। जयपुर, बीकानेर, अजमेर और नागौर सहित कई जिलों में तेज धूलभरी आंधी चली। कुछ इलाकों में ओले गिरने की खबरें भी सामने आई हैं। तेज हवाओं के कारण पेड़ गिर गए और बिजली सप्लाई भी प्रभावित हुई। किसानों को फसलों के नुकसान की चिंता सताने लगी है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए अलर्ट जारी किया है। Delhi Airport पर तूफान का बड़ा असर राजधानी दिल्ली में रविवार शाम अचानक मौसम बिगड़ गया। तेज आंधी और बारिश के दौरान हवा की रफ्तार करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई। इसका असर सीधे IGI Airport पर देखने को मिला। जानकारी के अनुसार तेज हवाओं की वजह से एयरपोर्ट पर मौजूद लोहे के स्टैंड उड़कर Air India के तीन विमानों से टकरा गए। इस घटना में विमानों को नुकसान पहुंचा है। घटना के बाद एयरपोर्ट अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। खराब मौसम की वजह से कई फ्लाइट्स लेट हुईं और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। अगले कुछ दिनों तक जारी रहेगा बारिश का दौर IMD ने दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और आसपास के कई राज्यों में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार मानसून सामान्य से बेहतर रह सकता है, जिससे किसानों और आम लोगों दोनों को फायदा मिलने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold Price

24 Carat Gold Price Today: सोना टूटा, चांदी लुढ़की; निवेशकों के लिए बड़ी खबर

सोना और चांदी खरीदने की सोच रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। सोमवार को सर्राफा बाजार और MCX में Gold Price -Silver Price में बड़ी गिरावट देखने को मिली। खासतौर पर चांदी के दाम में आई भारी टूट ने निवेशकों को हैरान कर दिया है। वहीं सोने की कीमत भी हजारों रुपये नीचे आ गई है। बाजार में आई इस गिरावट के बाद अब लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर 24 Carat Gold का नया रेट क्या है और आने वाले दिनों में कीमतें बढ़ेंगी या और गिरेंगी। चांदी के दाम में बड़ी गिरावट सोमवार सुबह जैसे ही बाजार खुला, चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिल्वर करीब ₹6000 से ₹8900 प्रति किलो तक सस्ती हो गई। कुछ जगहों पर चांदी का भाव ₹2.45 लाख प्रति किलो के नीचे पहुंच गया। पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ रही कीमतों के बाद यह गिरावट आम ग्राहकों के लिए राहत मानी जा रही है। शादी-विवाह और त्योहारों के सीजन से पहले लोग इसे खरीदारी का अच्छा मौका भी मान रहे हैं। 24 Carat Gold Price Today सोने की कीमत में भी सोमवार को नरमी देखने को मिली। MCX पर 24 कैरेट गोल्ड करीब ₹2400 प्रति 10 ग्राम तक फिसल गया। इसके बाद कई शहरों में सोने का रेट ₹1.53 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया। आज का अनुमानित गोल्ड रेट आखिर क्यों गिर रहे हैं Gold-Silver के दाम? विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव बढ़ने की वजह से Gold और Silver दोनों कमजोर हुए हैं। अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, मजबूत डॉलर और वैश्विक आर्थिक तनाव का असर कीमती धातुओं पर साफ दिखाई दे रहा है। इसके अलावा निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश के बजाय दूसरे विकल्पों की तरफ भी रुख कर रहे हैं, जिससे गोल्ड मार्केट में दबाव बना हुआ है। क्या अभी खरीदना सही रहेगा? सर्राफा बाजार के जानकारों का मानना है कि यह गिरावट लंबे समय के निवेशकों के लिए अच्छा मौका हो सकती है। हालांकि शॉर्ट टर्म में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अगर आप शादी, निवेश या सेविंग के लिए सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो बाजार पर नजर बनाए रखना जरूरी है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय संकेतों के आधार पर कीमतों में फिर बदलाव देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Abhijeet Deepke

‘मैं हूं कॉकरोच’ Campaign हुआ तेज, Abhijeet Deepke करेंगे अलग-अलग राज्यों का दौरा

दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का आंदोलन अब देश के कई राज्यों तक पहुंचने की तैयारी में है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके (Abhijeet Deepke) ने ऐलान किया है कि आने वाले दिनों में देशभर में प्रदर्शन किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वे खुद अलग-अलग शहरों में जाकर लोगों से मुलाकात करेंगे और इस अभियान को आगे बढ़ाएंगे। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ लगातार चर्चा में बनी हुई है। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद इस संगठन का नाम तेजी से वायरल हुआ। प्रदर्शन के दौरान “मैं हूं कॉकरोच” जैसे पोस्टर और नारे लोगों के बीच चर्चा का विषय बने रहे। 13 जून तक शिक्षामंत्री के इस्तीफे की मांग अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्रालय पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार जवाब नहीं दे रही है। उन्होंने मांग की कि 13 जून तक शिक्षामंत्री इस्तीफा दें। अगर ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा। दीपके का कहना है कि यह सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि युवाओं की आवाज उठाने की कोशिश है। उन्होंने दावा किया कि देशभर से छात्रों और युवाओं का समर्थन उन्हें मिल रहा है। अलग-अलग राज्यों में जाएंगे अभिजीत दीपके अभिजीत दीपके ने कहा कि वे जल्द ही कई राज्यों और शहरों का दौरा करेंगे। पार्टी की टीम भी अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन और सभाओं की तैयारी में जुट गई है। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि आंदोलन अब सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे जमीन पर भी मजबूत किया जाएगा। बॉलीवुड और सोशल मीडिया से मिला सपोर्ट ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे युवाओं की नई आवाज बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक स्टंट मान रहे हैं। इस बीच बॉलीवुड अभिनेत्री ऋचा चड्ढा समेत कुछ चर्चित चेहरों ने भी इस आंदोलन के समर्थन में पोस्ट शेयर किए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम, एक्स और यूट्यूब पर इस आंदोलन से जुड़े वीडियो और पोस्ट तेजी से वायरल हो रहे हैं। अभिजीत दीपके भी लगातार अपने समर्थकों से ऑनलाइन जुड़े हुए हैं। क्यों चर्चा में है ‘Cockroach Janata Party’? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सोशल मीडिया के दौर में अलग अंदाज वाले आंदोलन तेजी से लोगों का ध्यान खींचते हैं। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ भी इसी वजह से अचानक चर्चा में आई है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि 13 जून तक सरकार की तरफ से क्या प्रतिक्रिया आती है और यह आंदोलन आने वाले दिनों में कितना बड़ा रूप लेता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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