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NEET UG Result

NEET UG Result 2026: Aryan Gupta-Panshul Bansal बने Topper, 715/720 Score से चमकाया नाम

NEET UG 2026 Result: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 का रिजल्ट जारी हो गया है। लाखों मेडिकल उम्मीदवारों के लिए यह दिन बेहद खास रहा। लंबे समय की मेहनत, तैयारी और इंतजार के बाद अब छात्रों को अपने स्कोर और रैंक की जानकारी मिल गई है। इस साल 11.21 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने NEET UG परीक्षा में सफलता हासिल की है। रिजल्ट जारी होते ही देशभर में सफल छात्रों के चेहरों पर खुशी देखने को मिली। कई छात्रों ने अपनी मेहनत के दम पर शानदार स्कोर हासिल किया और मेडिकल कॉलेज में दाखिले की ओर अपना पहला कदम बढ़ाया। Punjab-Haryana के छात्रों का दबदबा, 715/720 अंक के साथ बने Topper NEET UG 2026 में इस बार टॉप रैंक पर पंजाब और हरियाणा के छात्रों ने अपनी जगह बनाई है। Punjab के Aryan Gupta और Haryana के Panshul Bansal ने संयुक्त रूप से पहला स्थान हासिल किया है। दोनों छात्रों ने 720 में से 715 अंक प्राप्त कर देशभर में शानदार प्रदर्शन किया। टॉपर्स की इस सफलता के पीछे उनकी लगातार मेहनत, बेहतर टाइम मैनेजमेंट और परीक्षा की सही रणनीति को अहम वजह माना जा रहा है। उनकी उपलब्धि NEET की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है। 690+ Score करने वाले छात्रों की संख्या भी रही शानदार NEET UG 2026 के परिणामों में हाई स्कोर करने वाले उम्मीदवारों की संख्या भी काफी अधिक रही। इस बार 138 छात्रों ने 690 या उससे ज्यादा अंक हासिल किए हैं। वहीं कई उम्मीदवारों ने 700 से अधिक अंक प्राप्त कर अपनी मजबूत तैयारी का प्रदर्शन किया। 720 अंकों की परीक्षा में इतने बड़े स्कोर हासिल करना छात्रों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कठिन मेहनत को दिखाता है। 11 लाख से ज्यादा छात्रों का Medical College Admission का रास्ता साफ NEET UG परीक्षा के जरिए देशभर के मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS और अन्य मेडिकल कोर्स में एडमिशन मिलता है। रिजल्ट जारी होने के बाद अब सफल उम्मीदवारों को आगे की प्रक्रिया यानी Counselling और Seat Allotment का इंतजार रहेगा। काउंसलिंग के दौरान छात्रों को उनकी रैंक, कैटेगरी और उपलब्ध सीटों के आधार पर मेडिकल कॉलेज चुनने का मौका मिलेगा। Students की मेहनत का मिला फल, परिवारों में खुशी का माहौल NEET जैसी कठिन परीक्षा को पास करना हर मेडिकल उम्मीदवार का सपना होता है। कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपनी सफलता की कहानी साझा की और बताया कि लगातार पढ़ाई, धैर्य और परिवार के सहयोग ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। वहीं, जिन छात्रों को उम्मीद के मुताबिक अंक नहीं मिले हैं, उनके लिए भी आगे कई अवसर मौजूद हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एक परीक्षा किसी छात्र की पूरी क्षमता तय नहीं करती। Result Highlights NEET UG 2026: लाखों युवाओं के डॉक्टर बनने की राह हुई आसान NEET UG का रिजल्ट सिर्फ एक परीक्षा का परिणाम नहीं है, बल्कि उन लाखों छात्रों की मेहनत का नतीजा है जिन्होंने डॉक्टर बनने का सपना देखा है। टॉपर्स की सफलता से लेकर लाखों छात्रों की खुशी तक, इस बार का रिजल्ट कई यादगार कहानियां लेकर आया है। अब सभी सफल उम्मीदवारों की नजर मेडिकल कॉलेज एडमिशन और नई शुरुआत पर है। आने वाले दिनों में काउंसलिंग प्रक्रिया के साथ छात्रों के डॉक्टर बनने के सफर की अगली शुरुआत होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET Exam Leak

NEET Exam Leak: CBI Investigation में बड़ा खुलासा, लातूर Coaching से जुड़ा पूरा Paper Leak Network

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 Exam Leak मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ऐसा खुलासा किया है, जिसने पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, महाराष्ट्र के लातूर में एक कोचिंग सेंटर संचालक के पास से बरामद 136 हस्तलिखित प्रश्नों में से 111 प्रश्न हूबहू NEET-UG 2026 की परीक्षा में पूछे गए। इस खुलासे के बाद साफ हो गया है कि यह मामला केवल संदेह तक सीमित नहीं था, बल्कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नों की पहुंच कुछ लोगों तक हो चुकी थी। CBI की जांच में क्या सामने आया? CBI ने इस मामले में लातूर के रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस के संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया है। एजेंसी का दावा है कि आरोपी के मोबाइल फोन से केमिस्ट्री विषय के हस्तलिखित प्रश्नों की कई तस्वीरें मिलीं। जब इन सवालों का मिलान राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के मास्टर प्रश्नपत्र से किया गया, तो 136 में से 111 प्रश्न पूरी तरह मेल खाते पाए गए। जांच अधिकारियों के अनुसार, यह अब तक का सबसे मजबूत डिजिटल और दस्तावेजी सबूत माना जा रहा है। परीक्षा से पहले ही पहुंच गया था प्रश्नपत्र CBI की जांच में सामने आया कि आरोपी के मोबाइल में मौजूद इन तस्वीरों की तारीख 23 अप्रैल 2026 की है, जबकि NEET-UG परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित हुई थी। यानी परीक्षा से करीब 10 दिन पहले ही ये प्रश्न आरोपी के पास मौजूद थे। जांच एजेंसी का कहना है कि इससे यह संकेत मिलता है कि प्रश्नपत्र आधिकारिक परीक्षा से पहले ही लीक हो चुका था। कैसे चला पूरा खेल? जांच के मुताबिक, प्रश्नपत्र कथित तौर पर NTA से जुड़े एक पैनल सदस्य और अनुवादक के माध्यम से बाहर पहुंचा। इसके बाद इसे चुनिंदा लोगों तक पहुंचाया गया और हस्तलिखित नोट्स तैयार कर छात्रों को याद करवाया गया। CBI को यह भी जानकारी मिली है कि कुछ अभ्यर्थियों को कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र और उत्तर परीक्षा से पहले उपलब्ध कराए गए थे। पूरे मामले में कई राज्यों में फैले नेटवर्क की भूमिका की जांच जारी है। Telegram के जरिए लाखों रुपये में हुई डील जांच में यह भी सामने आया है कि लीक प्रश्नपत्र की PDF फाइलें कथित तौर पर Telegram के माध्यम से बेची गईं। इसके अलावा करीब 150 पन्नों का एक गेस पेपर भी कुछ छात्रों तक पहुंचाया गया, जिसमें सैकड़ों प्रश्न शामिल थे। जांच के दौरान इनमें से बड़ी संख्या में सवाल वास्तविक परीक्षा में पूछे गए पाए गए। CBI अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा कितने छात्रों को इसका फायदा पहुंचाया गया। अब तक कई गिरफ्तारियां पेपर लीक मामले में अब तक 13 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोग, छात्र और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कुछ अन्य आरोपी शामिल हैं। जांच एजेंसी लगातार डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की फोरेंसिक जांच कर रही है। CBI का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। छात्रों की मेहनत पर उठे सवाल NEET परीक्षा हर साल लाखों छात्रों के मेडिकल कॉलेज में प्रवेश का सपना तय करती है। ऐसे में पेपर लीक जैसे मामलों ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। जो विद्यार्थी महीनों तक ईमानदारी से तैयारी करते हैं, उनके लिए ऐसी घटनाएं पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं। फिलहाल मामले की सुनवाई अदालत में जारी है और CBI पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि इस पेपर लीक में कितने लोग शामिल थे और इसके पीछे कितना बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा था। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CBSE

CBSE Education Rule 2026: Third Language Assessment में फेल हुए तो नहीं मिलेगा 10वीं का Certificate

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए भाषा शिक्षा से जुड़ा एक बड़ा बदलाव किया है। नए नियम के तहत अब छात्रों को Class 10 Pass Certificate पाने के लिए Third Language (तीसरी भाषा) में भी सफल होना जरूरी होगा। हालांकि, थर्ड लैंग्वेज की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, लेकिन स्कूल द्वारा कराए जाने वाले Internal Assessment में पास होना अनिवार्य रहेगा। यह नया नियम उन छात्रों पर लागू होगा जो Academic Session 2026-27 में Class 9 में प्रवेश लेंगे और 2027-28 में Class 10 Board Exam देंगे। CBSE का यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत छात्रों में बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है। CBSE Third Language Rule: क्या बदला है? अब तक कई छात्र तीसरी भाषा को केवल एक अतिरिक्त विषय के रूप में देखते थे, लेकिन नए नियम के बाद इसकी अहमियत बढ़ जाएगी। CBSE के अनुसार, कक्षा 9 और 10 के छात्रों को तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा। नए नियम की मुख्य बातें: Third Language में Fail होने पर क्या होगा? CBSE ने छात्रों को राहत देते हुए यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई छात्र Third Language Internal Assessment में सफल नहीं हो पाता है, तो उसे सुधार का मौका दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में: NEP 2020 के तहत क्यों आया यह बदलाव? CBSE का मानना है कि आज के समय में भाषा का ज्ञान केवल परीक्षा तक सीमित नहीं होना चाहिए। नई शिक्षा नीति 2020 में छात्रों को कई भाषाओं को समझने और सीखने पर जोर दिया गया है। Third Language को अनिवार्य करने का उद्देश्य है कि छात्र: Students और Parents के लिए जरूरी जानकारी नए नियम को लेकर छात्रों और अभिभावकों के मन में कई सवाल हैं। उन्हें ध्यान रखना होगा कि: CBSE Education System में बड़ा बदलाव CBSE का यह फैसला स्कूल शिक्षा प्रणाली में भाषा सीखने के तरीके को बदल सकता है। अब छात्रों को केवल मुख्य विषयों पर ही नहीं, बल्कि भाषा कौशल पर भी ध्यान देना होगा। छात्रों के लिए यह जरूरी है कि वे Third Language को बोझ न समझें, बल्कि इसे नई भाषा सीखने और अपनी क्षमता बढ़ाने के अवसर के रूप में देखें।
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Study Abroad अब India में: 15 International Universities को मिली मंजूरी, अगस्त से शुरू हो सकता है पहला बैच

Study Abroad अब India में: 15 International Universities को मिली मंजूरी, अगस्त से शुरू हो सकता है पहला बैच

भारत की higher education system में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब छात्रों को विदेश जाकर पढ़ाई करने की जरूरत पहले जैसी नहीं रहेगी। सरकार और UGC ने करीब 15 विदेशी यूनिवर्सिटियों को भारत में कैंपस खोलने की मंजूरी दे दी है। यह कदम NEP 2020 के तहत education को global बनाने की दिशा में काफी अहम माना जा रहा है। अगले कुछ महीनों में कई कैंपस की शुरुआत होने वाली है और रिपोर्ट्स के मुताबिक अगस्त 2026 से पहले बैच की पढ़ाई भी शुरू हो सकती है। भारत में Global Education का नया दौर शुरू अब UK, Australia और अन्य देशों की टॉप यूनिवर्सिटियां भारत में अपने independent campuses खोलेंगी। इसका मतलब यह है कि छात्रों को: सरल शब्दों में कहें तो, “अब विदेश वाली पढ़ाई भारत में ही”। सबसे बड़ा फायदा: कम खर्च में Foreign Degree इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा middle-class families को मिलने वाला है। विदेश जाकर पढ़ाई करने की तुलना में: यानी quality education अब ज्यादा affordable हो जाएगी। किन शहरों में खुल सकते हैं कैंपस? हालांकि final list हर university के हिसाब से अलग होगी, लेकिन शुरुआती संकेतों के मुताबिक major cities में campuses आने की संभावना है: कुछ universities पहले ही groundwork शुरू कर चुकी हैं। कौन-कौन सी यूनिवर्सिटियां आ सकती हैं? सूत्रों और रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ बड़ी international universities शामिल हैं: इनका focus mainly professional और industry-oriented courses पर होगा। छात्रों को क्या-क्या मिलेगा? इस बदलाव से students को कई बड़े फायदे मिलेंगे: International Degree in India अब भारत में रहकर ही foreign degree हासिल की जा सकेगी। Global Curriculum AI, Data Science, Business, Engineering जैसे modern courses। Industry Exposure Internships और practical learning पर ज्यादा focus। Safe & Affordable Option विदेश जाने का risk और cost दोनों कम हो जाएंगे। कब से शुरू होगा एडमिशन? भारत के लिए इसका मतलब क्या है? यह सिर्फ education reform नहीं है, बल्कि एक बड़ा shift है: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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TET Paper

TET Paper Leak Update: परीक्षा से 24 घंटे पहले लीक की खबर, महाराष्ट्र में Exam रद्द; जांच तेज

महाराष्ट्र में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। रविवार को आयोजित होने वाली Teacher Eligibility Test (TET) Paper से ठीक एक दिन पहले कथित पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार और शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। ठाणे पुलिस की कार्रवाई के बाद परीक्षा को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है, जबकि पूरे मामले की जांच तेज कर दी गई है। ठाणे से सामने आया पेपर लीक का मामला पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ठाणे में गुप्त सूचना मिली थी कि टीईटी परीक्षा का प्रश्नपत्र कुछ लोगों के पास पहले से पहुंच चुका है। सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी की, जहां से कथित प्रश्नपत्र बरामद किया गया। इस कार्रवाई के दौरान कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है। हालांकि, अभी तक यह आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है कि बरामद किया गया प्रश्नपत्र वही है, जो परीक्षा में इस्तेमाल होने वाला था। इसकी जांच शिक्षा विभाग और संबंधित एजेंसियां कर रही हैं। परीक्षा स्थगित करने का लिया गया फैसला पेपर लीक की आशंका को गंभीर मानते हुए महाराष्ट्र शिक्षा विभाग ने रविवार को होने वाली टीईटी परीक्षा को स्थगित करने का फैसला लिया। विभाग का कहना है कि किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो और परीक्षा की निष्पक्षता बनी रहे, इसलिए यह कदम उठाया गया है। नई परीक्षा तिथि का ऐलान जांच पूरी होने के बाद किया जाएगा। विभाग ने उम्मीदवारों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक सूचना का इंतजार करें। जांच में जुटी पुलिस और शिक्षा विभाग फिलहाल ठाणे पुलिस, शिक्षा विभाग और अन्य जांच एजेंसियां मिलकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित प्रश्नपत्र कहां से लीक हुआ और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं। यदि जांच में यह साबित होता है कि बरामद पेपर असली था, तो आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है या फिर सीमित स्तर पर हुई गड़बड़ी है। हजारों उम्मीदवारों की मेहनत पर लगा ब्रेक टीईटी परीक्षा के लिए राज्यभर से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। कई उम्मीदवार महीनों से इसकी तैयारी कर रहे थे। परीक्षा स्थगित होने की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर छात्रों ने निराशा जताई और जल्द नई परीक्षा तिथि घोषित करने की मांग की। कई अभ्यर्थियों का कहना है कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं मेहनत करने वाले छात्रों का मनोबल कमजोर करती हैं और भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करती हैं। आगे क्या होगा? अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है। यदि पेपर लीक की पुष्टि होती है, तो पुलिस पूरे नेटवर्क का खुलासा कर सकती है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, शिक्षा विभाग नई परीक्षा तिथि की घोषणा आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से करेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NCERT

NCERT Class 9 New Syllabus: अब SIR और Election Commission के बारे में पढ़ेंगे छात्र

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान (Social Science) की नई किताब में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इस बार छात्रों को सिर्फ लोकतंत्र की परिभाषा ही नहीं, बल्कि Election Commission of India (ECI) की भूमिका, Special Intensive Revision (SIR) और भारत की चुनावी प्रक्रिया को भी विस्तार से पढ़ाया जाएगा। नई किताब में भारतीय चुनाव प्रणाली को दुनिया की सबसे बड़ी और ‘बेमिसाल’ लोकतांत्रिक व्यवस्था बताया गया है। यह बदलाव नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत तैयार किए गए पाठ्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं के बारे में व्यावहारिक जानकारी देना है। चुनाव कैसे होते हैं? अब किताब में मिलेगा पूरा जवाब नई NCERT पुस्तक में बताया गया है कि चुनाव केवल वोट डालने की प्रक्रिया नहीं है। इसके पीछे निर्वाचन आयोग की कई अहम जिम्मेदारियां होती हैं। किताब में समझाया गया है कि किस तरह मतदाता सूची तैयार की जाती है, मतदान केंद्र बनाए जाते हैं, चुनाव की निगरानी होती है और पूरे देश में निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित किया जाता है। भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में करोड़ों मतदाताओं के बीच चुनाव कराना अपने आप में एक बड़ी प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसे पुस्तक में सरल भाषा में समझाया गया है। SIR क्या है? छात्रों को मिलेगी पूरी जानकारी नई किताब में Special Intensive Revision (SIR) को भी शामिल किया गया है। यह निर्वाचन आयोग द्वारा चलाया जाने वाला विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट और सटीक बनाना होता है। इस प्रक्रिया के दौरान— NCERT का मानना है कि छात्रों को यह जानना जरूरी है कि लोकतंत्र की मजबूती केवल मतदान से नहीं, बल्कि सही मतदाता सूची और निष्पक्ष चुनावी व्यवस्था से भी तय होती है। Election Commission की भूमिका भी समझाई जाएगी नई किताब में निर्वाचन आयोग की संवैधानिक शक्तियों और जिम्मेदारियों को भी विस्तार से शामिल किया गया है। इसमें बताया गया है कि आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने, चुनाव कार्यक्रम घोषित करने, आदर्श आचार संहिता लागू कराने और पूरी चुनावी प्रक्रिया की निगरानी करने का काम करता है। Emergency पर भी जोड़ा गया नया अध्याय NCERT ने कक्षा 9 की नई किताब में 1975-77 के आपातकाल (Emergency) पर भी नया अध्याय जोड़ा है। इसमें उस दौर के राजनीतिक घटनाक्रम, नागरिक अधिकारों पर पड़े प्रभाव और भारतीय लोकतंत्र के सामने आई चुनौतियों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों को देश के लोकतांत्रिक इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों से परिचित कराना है। बदलाव पर शुरू हुई राजनीतिक बहस नई किताब में SIR, चुनाव आयोग और Emergency जैसे विषय शामिल होने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा भी तेज हो गई है। कुछ विपक्षी दलों ने इन बदलावों पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार और शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि छात्रों को लोकतांत्रिक संस्थाओं और भारतीय संविधान की कार्यप्रणाली से परिचित कराना समय की आवश्यकता है। छात्रों के लिए क्यों है यह बदलाव अहम? नई NCERT किताब के जरिए विद्यार्थियों को सिर्फ परीक्षा की तैयारी ही नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी जानकारी मिलेगी। इससे वे समझ पाएंगे कि भारत में चुनाव कैसे कराए जाते हैं, निर्वाचन आयोग की भूमिका क्या होती है और लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने में हर नागरिक की क्या जिम्मेदारी है। मुख्य बातें (Highlights) हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा: बायोमेट्रिक सिस्टम हैक कर बैठाए गए नकली परीक्षार्थी

NEET परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा: बायोमेट्रिक सिस्टम हैक कर बैठाए गए नकली परीक्षार्थी

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET में फर्जीवाड़े का एक और बड़ा मामला सामने आया है। बिहार पुलिस ने बायोमेट्रिक सिस्टम में सेंध लगाकर असली अभ्यर्थियों की जगह नकली परीक्षार्थियों को परीक्षा में बैठाने वाले एक बड़े सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह ने परीक्षा केंद्रों पर इस्तेमाल होने वाले बायोमेट्रिक सत्यापन सिस्टम को धोखा देने की तकनीक विकसित कर ली थी। इसके जरिए असली उम्मीदवारों की पहचान छिपाकर उनकी जगह दूसरे लोगों को परीक्षा में बैठाया जाता था। बदले में अभ्यर्थियों और उनके परिजनों से लाखों रुपये वसूले जाते थे। पुलिस को प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह नेटवर्क केवल बिहार तक सीमित नहीं था, बल्कि कई राज्यों में सक्रिय था। गिरोह के सदस्य छात्रों को मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने का लालच देकर उनसे मोटी रकम लेते थे। इसके बाद प्रशिक्षित सॉल्वरों को परीक्षा में बैठाया जाता था। अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और मामले में कई और लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है। पुलिस इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, मोबाइल फोन और दस्तावेजों की भी जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। इस घटना ने देश की परीक्षा प्रणाली और बायोमेट्रिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाखों मेहनती छात्रों और उनके परिवारों के लिए यह मामला चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि ऐसी धोखाधड़ी योग्य उम्मीदवारों के भविष्य को प्रभावित करती है। जांच एजेंसियों ने भरोसा दिलाया है कि मामले में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे। अधिक राष्ट्रीय और शिक्षा जगत की खबरों के लिए पढ़ते रहें Deshharpal। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET UG

NEET UG 2026: मेडिकल एडमिशन की सबसे मुश्किल लड़ाई, हर सीट पर 36 दावेदार

NEET UG 2026 की तस्वीर इस बार और भी ज्यादा कठिन और चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है। मेडिकल कॉलेजों में MBBS एडमिशन पाने के लिए देशभर के लाखों छात्रों के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। इस साल 22 लाख से अधिक छात्रों ने NEET UG परीक्षा में हिस्सा लिया है, जबकि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या पहले की तरह ही सीमित है। यही वजह है कि औसतन एक सरकारी MBBS सीट के लिए करीब 36 छात्र दावेदारी कर रहे हैं।सीटें कम, उम्मीदें ज्यादा सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की सीटें हमेशा से ही कम रही हैं, लेकिन इस बार मुकाबला और भी कठिन हो गया है। कम फीस और बेहतर शिक्षा सुविधाओं के कारण हर छात्र की पहली पसंद सरकारी कॉलेज ही होते हैं। लेकिन सीमित सीटों के कारण हजारों मेहनती छात्रों को हर साल निराशा का सामना करना पड़ता है, जिससे उनके लंबे समय के सपनों पर असर पड़ता है। छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ा इतनी भारी प्रतिस्पर्धा का सीधा असर छात्रों की मानसिक स्थिति पर भी पड़ रहा है। कई छात्र सालों तक दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन चयन की कोई गारंटी नहीं होती। कोचिंग और परीक्षा के इस बढ़ते प्रेशर ने मेडिकल एंट्रेंस को सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि एक मानसिक चुनौती भी बना दिया है। क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स? शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि देश में मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ाना अब समय की जरूरत बन गया है। अगर सीटें बढ़ाई जाती हैं, तो न केवल छात्रों को राहत मिलेगी, बल्कि देश में डॉक्टरों की कमी भी काफी हद तक पूरी हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET UG Re-Exam

NEET UG Re-Exam 2026: 23 लाख Candidates की आज परीक्षा, Dharmendra Pradhan बोले- बिना डरे दें Exam

लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। NEET UG Re-Exam 2026 आज देशभर में आयोजित किया जा रहा है। इस परीक्षा में करीब 22.8 लाख (लगभग 23 लाख) छात्र-छात्राएं शामिल हो रहे हैं। पिछली परीक्षा को लेकर उठे विवाद और पेपर लीक के आरोपों के बाद यह री-एग्जाम कराया जा रहा है। इस बार परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए सरकार और National Testing Agency (NTA) ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। देशभर के 564 शहरों में बनाए गए 5,440 परीक्षा केंद्रों पर सुबह से ही अभ्यर्थियों की आवाजाही शुरू हो गई। परीक्षा केंद्रों के बाहर सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ प्रवेश प्रक्रिया को भी पहले से अधिक सख्त बनाया गया है। मुख्य सुरक्षा व्यवस्थाएं: इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य किसी भी तरह की नकल, पेपर लीक या फर्जी अभ्यर्थियों की संभावना को पूरी तरह खत्म करना है। Candidates के लिए जरूरी Guidelines NTA ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि वे परीक्षा शुरू होने से काफी पहले केंद्र पर पहुंच जाएं। प्रवेश के समय एडमिट कार्ड और वैध फोटो पहचान पत्र अनिवार्य होगा। उम्मीदवारों को मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान परीक्षा केंद्र के अंदर ले जाने की अनुमति नहीं होगी। निर्धारित ड्रेस कोड का पालन करना भी जरूरी रहेगा। क्यों कराया जा रहा है NEET UG Re-Exam? NEET UG 2026 की पहली परीक्षा के बाद कई राज्यों से पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। इसके बाद जांच एजेंसियों की कार्रवाई और बढ़ते दबाव के बीच NTA ने दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया, ताकि सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सके। आज लाखों छात्रों के भविष्य का बड़ा दिन देशभर के लाखों परिवारों की उम्मीदें आज इस परीक्षा से जुड़ी हैं। कई छात्रों ने पिछले कुछ हफ्तों में दोबारा तैयारी की और अब वे अपने मेडिकल कॉलेज के सपने को साकार करने के लिए परीक्षा देने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम समय में तनाव लेने के बजाय शांत मन से प्रश्नपत्र हल करना बेहतर रणनीति होगी। NEET UG Re-Exam 2026: Highlights हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET

Exam Stress in India: NEET की तैयारी कर रहे छात्र ने की आत्महत्या

NEET परीक्षा की तैयारी कर रहे एक छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। छात्र अपने कमरे में मृत अवस्था में पाया गया, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में दुख और सन्नाटा फैल गया। जैसे ही घटना की जानकारी मिली, स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है। सपनों का दबाव या सिस्टम की खामियां? यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं है, बल्कि उन हजारों छात्रों की कहानी है जो हर साल बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। लगातार बढ़ते प्रतिस्पर्धी माहौल, कोचिंग का दबाव और बेहतर प्रदर्शन की दौड़ कई बार छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ती नजर आती है। विशेषज्ञ लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि पढ़ाई के साथ-साथ मानसिक संतुलन और सपोर्ट सिस्टम भी बेहद जरूरी है। परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ घटना के बाद छात्र के परिवार में गहरा शोक है। परिजन इस अचानक हुए हादसे से सदमे में हैं और कुछ भी समझ पाने की स्थिति में नहीं हैं। पूरे इलाके में भी शोक का माहौल है। बढ़ती घटनाओं से उठ रहे बड़े सवाल ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आना समाज और शिक्षा व्यवस्था दोनों के लिए चेतावनी है। सवाल यह है कि क्या हम अपने छात्रों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाल रहे हैं? और क्या उनके मानसिक स्वास्थ्य को उतनी प्राथमिकता मिल रही है जितनी मिलनी चाहिए? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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जबलपुर में NSUI और कांग्रेस का प्रदर्शन, वाटर कैनन से खदेड़े गए कार्यकर्ता

दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में जबलपुर में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर NSUI ने सांकेतिक अर्थी यात्रा निकाली, जबकि शाम को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मालवीय चौक पर प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। दोनों प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई तथा स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। अर्थी यात्रा को पुलिस ने रोका NSUI कार्यकर्ताओं की अर्थी यात्रा सिविल लाइन स्थित साईं मंदिर से शुरू होकर महाकौशल महाविद्यालय की ओर बढ़ रही थी। पुलिस ने सिविल लाइन क्षेत्र में उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि दिल्ली में 21 दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों को सरकार नजरअंदाज कर रही है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर बल प्रयोग किया जा रहा है। 48 घंटे में इस्तीफे की मांग NSUI ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं दिया गया तो NSUI, यूथ कांग्रेस और अन्य सहयोगी संगठन और बड़ा आंदोलन करेंगे। मालवीय चौक पर कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन शाम को मालवीय चौक पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षा मंत्री के विरोध में पोस्टर जलाने की कोशिश की गई, जिसे रोकने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हो गई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने दो बार वाटर कैनन चलाकर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया। इस दौरान कुछ कार्यकर्ता मशाल लेकर अंजुमन स्कूल की ओर बढ़े, जबकि अन्य मालवीय चौक पर दोबारा एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करते रहे। कांग्रेस ने सरकार पर लगाए आरोप कांग्रेस नेता सौरभ नाटी शर्मा ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज दबाने के लिए सरकार दमनात्मक रवैया अपना रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है तथा शिक्षा मंत्री को बचाने के लिए सरकार विपक्ष की आवाज दबा रही है। काफी देर तक चले हंगामे के बाद पुलिस ने स्थिति पर नियंत्रण पाया, हालांकि देर रात तक प्रदर्शन जारी रहा। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

बिलासपुर के राजेश सोंथालिया बने भारत स्काउट्स एवं गाइड्स छत्तीसगढ़ के सहायक राज्य आयुक्त

बिलासपुर के वरिष्ठ स्काउटर राजेश सोंथालिया को भारत स्काउट्स एवं गाइड्स, छत्तीसगढ़ राज्य संघ का सहायक राज्य आयुक्त (Assistant State Commissioner) नियुक्त किया गया है। इस संबंध में राज्य मुख्य आयुक्त इंदरजीत सिंह खालसा ने सोमवार को नियुक्ति आदेश जारी किया। राजेश सोंथालिया की नियुक्ति राज्य के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की अनुशंसा पर की गई है। स्काउट आंदोलन में उनकी वर्षों की सक्रिय भागीदारी, संगठनात्मक क्षमता और सेवा भावना को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। निभाएंगे अहम जिम्मेदारी सहायक राज्य आयुक्त के रूप में राजेश सोंथालिया अब प्रदेशभर में स्काउट गतिविधियों के संचालन, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, संगठन के विस्तार और युवा नेतृत्व को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। सामाजिक कार्यों में रहा उल्लेखनीय योगदान राजेश सोंथालिया शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कई कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि उनके नेतृत्व में प्रदेश में स्काउट आंदोलन को नई ऊर्जा और नई दिशा मिलेगी। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन जारी, अभिजीत दीपके बोले- अब सरकार खुद बातचीत के लिए आए

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहा। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दीपके ने साफ कहा कि अब उनकी ओर से कोई प्रतिनिधि सरकार से बातचीत के लिए नहीं जाएगा। यदि सरकार बातचीत चाहती है तो उसे खुद जंतर-मंतर आना होगा। अभिजीत दीपके ने संसद मार्च के दौरान घायल हुए प्रदर्शनकारियों से माफी भी मांगी और कहा कि जिन लोगों को कानूनी सहायता की जरूरत है, वे CJP की लीगल टीम से संपर्क करें। सभी प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी। इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार उनमें खून की कमी के लक्षण हैं, लेकिन उनका अनशन 24वें दिन भी जारी है। विपक्षी नेताओं ने जताया समर्थन मंगलवार को जंतर-मंतर पर कई विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता आंदोलन के समर्थन में पहुंचे। इनमें उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव, शरद पवार, सुप्रिया सुले, अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह सहित कई प्रमुख नेता शामिल रहे। शाम होते-होते प्रदर्शन स्थल पर भीड़ फिर बढ़ गई। धरने में वे प्रदर्शनकारी भी शामिल हुए, जो एक दिन पहले संसद मार्च के दौरान पुलिस लाठीचार्ज और आंसू गैस की कार्रवाई में घायल हुए थे। हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारी रिहा दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई को हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा कर दिया है। इसके बाद CJP ने पुलिस मुख्यालय के सामने प्रस्तावित धरना रद्द कर दिया। वहीं, संसद मार्च के दौरान बर्गर खाते नजर आए CJP प्रवक्ता विजेता दाहिया को संगठन ने पद से हटा दिया। इस पर दाहिया ने वीडियो जारी कर कहा कि यदि किसी को भूख लगेगी तो वह खाना जरूर खाएगा। दिनभर के प्रमुख अपडेट्स अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

राहुल गांधी की हिरासत के विरोध में रायपुर में कांग्रेस का प्रदर्शन, लोकभवन के बाहर पुलिस से धक्का-मुक्की

राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं की दिल्ली में हिरासत के विरोध में मंगलवार रात छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने रायपुर के लोकभवन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पूर्व विधायक विकास उपाध्याय समेत कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गेट की ओर बढ़ने से रोक दिया, जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। दरअसल, दिल्ली में नीट पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कई नेता प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठे थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इसी कार्रवाई के विरोध में देशभर में कांग्रेस प्रदर्शन कर रही है। भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर जताया विरोध दिल्ली में हुए प्रदर्शन में शामिल छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया कि पुलिस उन्हें और अन्य वरिष्ठ नेताओं को बस में बैठाकर एयरपोर्ट की ओर ले गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उनका एक जूता भी ले लिया। कांग्रेस की प्रमुख मांगें प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी और भजन-कीर्तन रायपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लोकभवन के बाहर भजन-कीर्तन किया, सरकार के खिलाफ नारे लगाए और गेट तक पहुंचने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की हुई। हालात को देखते हुए मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर साधा निशाना पूर्व महापौर एजाज ढेबर ने कहा कि कई छात्रों ने आत्महत्या की है और छात्रों पर लाठीचार्ज जैसी घटनाएं चिंताजनक हैं। कांग्रेस नेता राकेश गुप्ता ने शिक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग की। वहीं, सुबोध हरितवाल ने कहा कि जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलेगा, कांग्रेस का विरोध जारी रहेगा। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

भोपाल महिला आयोग में रिश्तों के दो चौंकाने वाले मामले, पत्नी ने मांगा तलाक तो दूसरे केस में दोनों ने लगाए गंभीर आरोप

भोपाल में राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई के दौरान वैवाहिक विवादों से जुड़े दो अलग-अलग मामलों ने सबका ध्यान खींचा। एक मामले में सरकारी विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर बनने के बाद पत्नी ने पति पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए तलाक की मांग की, जबकि दूसरे मामले में पति-पत्नी ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए। 20 साल बाद पत्नी ने मांगा तलाक पहले मामले में सरकारी विभाग में कार्यरत असिस्टेंट डायरेक्टर महिला ने शादी के करीब 20 साल बाद महिला आयोग में पति के खिलाफ मानसिक प्रताड़ना और आर्थिक लेनदेन से जुड़े आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, सुनवाई के दौरान वह स्वयं उपस्थित नहीं हुईं। सरकारी कॉलेज में प्रोफेसर पति आयोग के सामने पेश हुए और कहा कि वह अपनी पत्नी के साथ रहना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि पत्नी बिना बताए बेटे को लेकर मायके चली गई और तब से अलग रह रही है। पति ने कहा कि दोनों का बेटा आईवीएफ तकनीक से हुआ है और यदि रिश्ते में लगातार प्रताड़ना होती तो ऐसा संभव नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि पत्नी के जाने के बाद उनकी मां को पैरालिसिस का दूसरा अटैक आया और अब इस उम्र में अकेले जीवन बिताना मुश्किल होगा। दूसरे मामले में पति-पत्नी के गंभीर आरोप दूसरे मामले में पति ने महिला आयोग के सामने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी का एक अन्य महिला के साथ अवैध संबंध है और उसे अपनी जान का खतरा महसूस होता है। उसका दावा था कि इस संबंध में वह अदालत में दस्तावेज और सबूत भी प्रस्तुत कर चुका है। वहीं, पत्नी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पति और ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना, मारपीट, जबरन गर्भपात कराने, निजी वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा करने और मानसिक उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए। महिला ने यह भी दावा किया कि उसके पति का अपनी रिश्तेदारी की एक महिला के साथ संबंध है और ससुर ने भी उसके साथ अनुचित व्यवहार किया। महिला ने आयोग को बताया कि शादी के बाद से उसे लगातार प्रताड़ित किया गया और वर्तमान में उसका खर्च मायके वाले उठा रहे हैं। दूसरी ओर, पति ने पत्नी के सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। दोनों मामलों में महिला आयोग ने संबंधित पक्षों के बयान दर्ज कर आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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