Exclusive story:-भारत में SWAYAM और NPTEL ऑनलाइन कोर्स से डिग्री में क्रेडिट लेने का सिस्टम लागू है, लेकिन छात्र और यूनिवर्सिटीज इसे अपनाने में पीछे क्यों हैं?जानिए पूरी पड़ताल। ऑनलाइन एजुकेशन का बड़ा दावा, लेकिन असर सीमित भारत में उच्च शिक्षा को डिजिटल और लचीला बनाने के लिए सरकार ने SWAYAM और NPTEL प्लेटफॉर्म को बढ़ावा दिया। उद्देश्य साफ था — छात्र अपने कॉलेज के साथ-साथ ऑनलाइन पढ़ाई करके डिग्री का एक बड़ा हिस्सा पूरा कर सकें। नीतियों के अनुसार, छात्र अपनी पढ़ाई का लगभग 40% हिस्सा ऑनलाइन कोर्स के जरिए पूरा कर सकते हैं। लेकिन असल स्थिति यह है कि यह सुविधा मौजूद होने के बावजूद ज्यादातर छात्र इसका फायदा नहीं उठा रहे हैं। सिस्टम मौजूद, लेकिन इस्तेमाल कम देशभर की 400 से ज्यादा यूनिवर्सिटीज इस क्रेडिट सिस्टम से जुड़ चुकी हैं। प्लेटफॉर्म पर हजारों कोर्स भी उपलब्ध हैं। फिर भी, ग्राउंड लेवल पर देखा जाए तो: इससे साफ संकेत मिलता है कि नीति और व्यवहार में बड़ा गैप है। क्रेडिट ट्रांसफर सिस्टम आखिर है क्या? यह सिस्टम छात्रों को यह आज़ादी देता है कि: कागजों पर यह मॉडल काफी मजबूत दिखता है, लेकिन इसे लागू करना उतना आसान नहीं रहा। क्यों नहीं चल पा रहा यह मॉडल? 1. स्टूडेंट्स का कम जुड़ाव कई छात्रों को ये कोर्स अतिरिक्त बोझ लगते हैं। वे इन्हें सीरियसली नहीं लेते या पूरा नहीं कर पाते। 2. यूनिवर्सिटीज का अधूरा इंप्लीमेंटेशन हालांकि कई यूनिवर्सिटीज इस सिस्टम से जुड़ी हैं, लेकिन: 3. टाइमिंग और शेड्यूल का टकराव ऑनलाइन कोर्स और कॉलेज के सेमेस्टर शेड्यूल में तालमेल की कमी है।इस वजह से छात्रों के लिए दोनों को साथ मैनेज करना मुश्किल हो जाता है। 4. इंडस्ट्री-फोकस्ड कोर्स की कमी आज के समय में छात्र ऐसे कोर्स चाहते हैं जो उन्हें नौकरी दिलाने में मदद करें।लेकिन कई ऑनलाइन कोर्स अभी भी पुराने या कम प्रैक्टिकल माने जाते हैं। 5. जानकारी और गाइडेंस का अभाव कई छात्रों को यह तक नहीं पता कि: क्या हो सकता है समाधान? विशेषज्ञों का मानना है कि इस सिस्टम को सफल बनाने के लिए: ✔ कुछ प्रतिशत क्रेडिट को अनिवार्य किया जाए✔ छात्रों को सही गाइडेंस दी जाए✔ इंडस्ट्री से जुड़े नए कोर्स जोड़े जाएं✔ यूनिवर्सिटीज में इसे गंभीरता से लागू किया जाए प्राइवेट प्लेटफॉर्म क्यों आगे हैं? आज के समय में कई छात्र विदेशी और प्राइवेट प्लेटफॉर्म को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके पीछे कारण हैं: यही वजह है कि सरकारी प्लेटफॉर्म होते हुए भी कम्पटीशन बढ़ गया है। भविष्य का रास्ता क्या है? SWAYAM और NPTEL जैसे प्लेटफॉर्म भारत के लिए बहुत बड़ा अवसर हैं, खासकर उन छात्रों के लिए जो: लेकिन अगर इन्हें सही तरीके से लागू नहीं किया गया, तो यह पहल सिर्फ एक अच्छी योजना बनकर रह जाएग डिजिटल एजुकेशन का यह मॉडल भारत की शिक्षा व्यवस्था को बदल सकता है, लेकिन अभी यह अपने शुरुआती संघर्ष के दौर में है। नीतियों से ज्यादा जरूरी है उनका सही क्रियान्वयन — तभी यह पहल सच में एजुकेशन रिवोल्यूशन बन पाएगी।
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