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TET Paper Leak Update: परीक्षा से 24 घंटे पहले लीक की खबर, महाराष्ट्र में Exam रद्द; जांच तेज

महाराष्ट्र में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। रविवार को आयोजित होने वाली Teacher Eligibility Test (TET) Paper से ठीक एक दिन पहले कथित पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार और शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। ठाणे पुलिस की कार्रवाई के बाद परीक्षा को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है, जबकि पूरे मामले की जांच तेज कर दी गई है। ठाणे से सामने आया पेपर लीक का मामला पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ठाणे में गुप्त सूचना मिली थी कि टीईटी परीक्षा का प्रश्नपत्र कुछ लोगों के पास पहले से पहुंच चुका है। सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी की, जहां से कथित प्रश्नपत्र बरामद किया गया। इस कार्रवाई के दौरान कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है। हालांकि, अभी तक यह आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है कि बरामद किया गया प्रश्नपत्र वही है, जो परीक्षा में इस्तेमाल होने वाला था। इसकी जांच शिक्षा विभाग और संबंधित एजेंसियां कर रही हैं। परीक्षा स्थगित करने का लिया गया फैसला पेपर लीक की आशंका को गंभीर मानते हुए महाराष्ट्र शिक्षा विभाग ने रविवार को होने वाली टीईटी परीक्षा को स्थगित करने का फैसला लिया। विभाग का कहना है कि किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो और परीक्षा की निष्पक्षता बनी रहे, इसलिए यह कदम उठाया गया है। नई परीक्षा तिथि का ऐलान जांच पूरी होने के बाद किया जाएगा। विभाग ने उम्मीदवारों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक सूचना का इंतजार करें। जांच में जुटी पुलिस और शिक्षा विभाग फिलहाल ठाणे पुलिस, शिक्षा विभाग और अन्य जांच एजेंसियां मिलकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित प्रश्नपत्र कहां से लीक हुआ और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं। यदि जांच में यह साबित होता है कि बरामद पेपर असली था, तो आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है या फिर सीमित स्तर पर हुई गड़बड़ी है। हजारों उम्मीदवारों की मेहनत पर लगा ब्रेक टीईटी परीक्षा के लिए राज्यभर से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। कई उम्मीदवार महीनों से इसकी तैयारी कर रहे थे। परीक्षा स्थगित होने की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर छात्रों ने निराशा जताई और जल्द नई परीक्षा तिथि घोषित करने की मांग की। कई अभ्यर्थियों का कहना है कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं मेहनत करने वाले छात्रों का मनोबल कमजोर करती हैं और भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करती हैं। आगे क्या होगा? अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है। यदि पेपर लीक की पुष्टि होती है, तो पुलिस पूरे नेटवर्क का खुलासा कर सकती है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, शिक्षा विभाग नई परीक्षा तिथि की घोषणा आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से करेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NCERT

NCERT Class 9 New Syllabus: अब SIR और Election Commission के बारे में पढ़ेंगे छात्र

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान (Social Science) की नई किताब में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इस बार छात्रों को सिर्फ लोकतंत्र की परिभाषा ही नहीं, बल्कि Election Commission of India (ECI) की भूमिका, Special Intensive Revision (SIR) और भारत की चुनावी प्रक्रिया को भी विस्तार से पढ़ाया जाएगा। नई किताब में भारतीय चुनाव प्रणाली को दुनिया की सबसे बड़ी और ‘बेमिसाल’ लोकतांत्रिक व्यवस्था बताया गया है। यह बदलाव नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत तैयार किए गए पाठ्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं के बारे में व्यावहारिक जानकारी देना है। चुनाव कैसे होते हैं? अब किताब में मिलेगा पूरा जवाब नई NCERT पुस्तक में बताया गया है कि चुनाव केवल वोट डालने की प्रक्रिया नहीं है। इसके पीछे निर्वाचन आयोग की कई अहम जिम्मेदारियां होती हैं। किताब में समझाया गया है कि किस तरह मतदाता सूची तैयार की जाती है, मतदान केंद्र बनाए जाते हैं, चुनाव की निगरानी होती है और पूरे देश में निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित किया जाता है। भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में करोड़ों मतदाताओं के बीच चुनाव कराना अपने आप में एक बड़ी प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसे पुस्तक में सरल भाषा में समझाया गया है। SIR क्या है? छात्रों को मिलेगी पूरी जानकारी नई किताब में Special Intensive Revision (SIR) को भी शामिल किया गया है। यह निर्वाचन आयोग द्वारा चलाया जाने वाला विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट और सटीक बनाना होता है। इस प्रक्रिया के दौरान— NCERT का मानना है कि छात्रों को यह जानना जरूरी है कि लोकतंत्र की मजबूती केवल मतदान से नहीं, बल्कि सही मतदाता सूची और निष्पक्ष चुनावी व्यवस्था से भी तय होती है। Election Commission की भूमिका भी समझाई जाएगी नई किताब में निर्वाचन आयोग की संवैधानिक शक्तियों और जिम्मेदारियों को भी विस्तार से शामिल किया गया है। इसमें बताया गया है कि आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने, चुनाव कार्यक्रम घोषित करने, आदर्श आचार संहिता लागू कराने और पूरी चुनावी प्रक्रिया की निगरानी करने का काम करता है। Emergency पर भी जोड़ा गया नया अध्याय NCERT ने कक्षा 9 की नई किताब में 1975-77 के आपातकाल (Emergency) पर भी नया अध्याय जोड़ा है। इसमें उस दौर के राजनीतिक घटनाक्रम, नागरिक अधिकारों पर पड़े प्रभाव और भारतीय लोकतंत्र के सामने आई चुनौतियों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों को देश के लोकतांत्रिक इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों से परिचित कराना है। बदलाव पर शुरू हुई राजनीतिक बहस नई किताब में SIR, चुनाव आयोग और Emergency जैसे विषय शामिल होने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा भी तेज हो गई है। कुछ विपक्षी दलों ने इन बदलावों पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार और शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि छात्रों को लोकतांत्रिक संस्थाओं और भारतीय संविधान की कार्यप्रणाली से परिचित कराना समय की आवश्यकता है। छात्रों के लिए क्यों है यह बदलाव अहम? नई NCERT किताब के जरिए विद्यार्थियों को सिर्फ परीक्षा की तैयारी ही नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी जानकारी मिलेगी। इससे वे समझ पाएंगे कि भारत में चुनाव कैसे कराए जाते हैं, निर्वाचन आयोग की भूमिका क्या होती है और लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने में हर नागरिक की क्या जिम्मेदारी है। मुख्य बातें (Highlights) हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा: बायोमेट्रिक सिस्टम हैक कर बैठाए गए नकली परीक्षार्थी

NEET परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा: बायोमेट्रिक सिस्टम हैक कर बैठाए गए नकली परीक्षार्थी

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET में फर्जीवाड़े का एक और बड़ा मामला सामने आया है। बिहार पुलिस ने बायोमेट्रिक सिस्टम में सेंध लगाकर असली अभ्यर्थियों की जगह नकली परीक्षार्थियों को परीक्षा में बैठाने वाले एक बड़े सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह ने परीक्षा केंद्रों पर इस्तेमाल होने वाले बायोमेट्रिक सत्यापन सिस्टम को धोखा देने की तकनीक विकसित कर ली थी। इसके जरिए असली उम्मीदवारों की पहचान छिपाकर उनकी जगह दूसरे लोगों को परीक्षा में बैठाया जाता था। बदले में अभ्यर्थियों और उनके परिजनों से लाखों रुपये वसूले जाते थे। पुलिस को प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह नेटवर्क केवल बिहार तक सीमित नहीं था, बल्कि कई राज्यों में सक्रिय था। गिरोह के सदस्य छात्रों को मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने का लालच देकर उनसे मोटी रकम लेते थे। इसके बाद प्रशिक्षित सॉल्वरों को परीक्षा में बैठाया जाता था। अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और मामले में कई और लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है। पुलिस इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, मोबाइल फोन और दस्तावेजों की भी जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। इस घटना ने देश की परीक्षा प्रणाली और बायोमेट्रिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाखों मेहनती छात्रों और उनके परिवारों के लिए यह मामला चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि ऐसी धोखाधड़ी योग्य उम्मीदवारों के भविष्य को प्रभावित करती है। जांच एजेंसियों ने भरोसा दिलाया है कि मामले में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे। अधिक राष्ट्रीय और शिक्षा जगत की खबरों के लिए पढ़ते रहें Deshharpal। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET UG

NEET UG 2026: मेडिकल एडमिशन की सबसे मुश्किल लड़ाई, हर सीट पर 36 दावेदार

NEET UG 2026 की तस्वीर इस बार और भी ज्यादा कठिन और चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है। मेडिकल कॉलेजों में MBBS एडमिशन पाने के लिए देशभर के लाखों छात्रों के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। इस साल 22 लाख से अधिक छात्रों ने NEET UG परीक्षा में हिस्सा लिया है, जबकि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या पहले की तरह ही सीमित है। यही वजह है कि औसतन एक सरकारी MBBS सीट के लिए करीब 36 छात्र दावेदारी कर रहे हैं।सीटें कम, उम्मीदें ज्यादा सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की सीटें हमेशा से ही कम रही हैं, लेकिन इस बार मुकाबला और भी कठिन हो गया है। कम फीस और बेहतर शिक्षा सुविधाओं के कारण हर छात्र की पहली पसंद सरकारी कॉलेज ही होते हैं। लेकिन सीमित सीटों के कारण हजारों मेहनती छात्रों को हर साल निराशा का सामना करना पड़ता है, जिससे उनके लंबे समय के सपनों पर असर पड़ता है। छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ा इतनी भारी प्रतिस्पर्धा का सीधा असर छात्रों की मानसिक स्थिति पर भी पड़ रहा है। कई छात्र सालों तक दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन चयन की कोई गारंटी नहीं होती। कोचिंग और परीक्षा के इस बढ़ते प्रेशर ने मेडिकल एंट्रेंस को सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि एक मानसिक चुनौती भी बना दिया है। क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स? शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि देश में मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ाना अब समय की जरूरत बन गया है। अगर सीटें बढ़ाई जाती हैं, तो न केवल छात्रों को राहत मिलेगी, बल्कि देश में डॉक्टरों की कमी भी काफी हद तक पूरी हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET UG Re-Exam

NEET UG Re-Exam 2026: 23 लाख Candidates की आज परीक्षा, Dharmendra Pradhan बोले- बिना डरे दें Exam

लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। NEET UG Re-Exam 2026 आज देशभर में आयोजित किया जा रहा है। इस परीक्षा में करीब 22.8 लाख (लगभग 23 लाख) छात्र-छात्राएं शामिल हो रहे हैं। पिछली परीक्षा को लेकर उठे विवाद और पेपर लीक के आरोपों के बाद यह री-एग्जाम कराया जा रहा है। इस बार परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए सरकार और National Testing Agency (NTA) ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। देशभर के 564 शहरों में बनाए गए 5,440 परीक्षा केंद्रों पर सुबह से ही अभ्यर्थियों की आवाजाही शुरू हो गई। परीक्षा केंद्रों के बाहर सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ प्रवेश प्रक्रिया को भी पहले से अधिक सख्त बनाया गया है। मुख्य सुरक्षा व्यवस्थाएं: इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य किसी भी तरह की नकल, पेपर लीक या फर्जी अभ्यर्थियों की संभावना को पूरी तरह खत्म करना है। Candidates के लिए जरूरी Guidelines NTA ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि वे परीक्षा शुरू होने से काफी पहले केंद्र पर पहुंच जाएं। प्रवेश के समय एडमिट कार्ड और वैध फोटो पहचान पत्र अनिवार्य होगा। उम्मीदवारों को मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान परीक्षा केंद्र के अंदर ले जाने की अनुमति नहीं होगी। निर्धारित ड्रेस कोड का पालन करना भी जरूरी रहेगा। क्यों कराया जा रहा है NEET UG Re-Exam? NEET UG 2026 की पहली परीक्षा के बाद कई राज्यों से पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। इसके बाद जांच एजेंसियों की कार्रवाई और बढ़ते दबाव के बीच NTA ने दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया, ताकि सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सके। आज लाखों छात्रों के भविष्य का बड़ा दिन देशभर के लाखों परिवारों की उम्मीदें आज इस परीक्षा से जुड़ी हैं। कई छात्रों ने पिछले कुछ हफ्तों में दोबारा तैयारी की और अब वे अपने मेडिकल कॉलेज के सपने को साकार करने के लिए परीक्षा देने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम समय में तनाव लेने के बजाय शांत मन से प्रश्नपत्र हल करना बेहतर रणनीति होगी। NEET UG Re-Exam 2026: Highlights हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET

Exam Stress in India: NEET की तैयारी कर रहे छात्र ने की आत्महत्या

NEET परीक्षा की तैयारी कर रहे एक छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। छात्र अपने कमरे में मृत अवस्था में पाया गया, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में दुख और सन्नाटा फैल गया। जैसे ही घटना की जानकारी मिली, स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है। सपनों का दबाव या सिस्टम की खामियां? यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं है, बल्कि उन हजारों छात्रों की कहानी है जो हर साल बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। लगातार बढ़ते प्रतिस्पर्धी माहौल, कोचिंग का दबाव और बेहतर प्रदर्शन की दौड़ कई बार छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ती नजर आती है। विशेषज्ञ लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि पढ़ाई के साथ-साथ मानसिक संतुलन और सपोर्ट सिस्टम भी बेहद जरूरी है। परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ घटना के बाद छात्र के परिवार में गहरा शोक है। परिजन इस अचानक हुए हादसे से सदमे में हैं और कुछ भी समझ पाने की स्थिति में नहीं हैं। पूरे इलाके में भी शोक का माहौल है। बढ़ती घटनाओं से उठ रहे बड़े सवाल ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आना समाज और शिक्षा व्यवस्था दोनों के लिए चेतावनी है। सवाल यह है कि क्या हम अपने छात्रों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाल रहे हैं? और क्या उनके मानसिक स्वास्थ्य को उतनी प्राथमिकता मिल रही है जितनी मिलनी चाहिए? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET Re-Exam

NEET Re-Exam 2026: नागपुर छात्र को मिला Abu Dhabi सेंटर, सिस्टम गड़बड़ी से मचा हड़कंप

NEET Re-Exam 2026 को लेकर देशभर में परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) की ओर से एडमिट कार्ड जारी होते ही कुछ गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं, जिससे छात्रों और अभिभावकों में तनाव और चिंता का माहौल बन गया है। सबसे चौंकाने वाला मामला तब सामने आया जब एक छात्र को भारत नहीं बल्कि Abu Dhabi (UAE) परीक्षा केंद्र अलॉट कर दिया गया। नागपुर छात्र को भारत से बाहर मिला परीक्षा केंद्र नागपुर के एक NEET अभ्यर्थी को एडमिट कार्ड में जो परीक्षा केंद्र मिला, वह सीधे अबू धाबी था। इस घटना के बाद परिवार की चिंता और नाराज़गी दोनों बढ़ गई, क्योंकि परीक्षा सिर्फ एक दिन दूर थी। भुवनेश्वर छात्रा का Dehradun सेंटर भी बदला गया इसी तरह भुवनेश्वर की एक छात्रा को पहले Dehradun exam centre अलॉट किया गया था। लेकिन शिकायत और जांच के बाद उसका सेंटर बदल दिया गया। इस तरह की लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने NEET परीक्षा प्रणाली की तैयारी और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। NTA की सफाई: “तकनीकी खराबी की वजह से हुई गलती” NTA की ओर से कहा गया है कि यह समस्या system glitch और technical error के कारण हुई है। एजेंसी का दावा है कि: NEET Re-Exam से पहले पूरे देश में मॉक ड्रिल NEET री-एग्जाम 2026 से पहले आज पूरे देश में mocks drill / rehearsal आयोजित की गई। इसका उद्देश्य है: छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता लगातार सामने आ रही इन गलतियों से छात्रों और उनके परिवारों में असमंजस की स्थिति बन गई है। लोगों का कहना है: कई छात्र यह भी कह रहे हैं कि इतनी बड़ी परीक्षा में ऐसी गलतियां “unacceptable” हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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JNCT

JNCT Bhopal में World Environment Day Celebration छात्रों ने वृक्षारोपण का संदेश

भोपाल स्थित Jai Narain College of Technology (JNCT) में World Environment Day के अवसर पर एक भावनात्मक और जागरूकता से भरपूर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर छात्रों ने न सिर्फ गतिविधियों में हिस्सा लिया, बल्कि प्रकृति को बचाने का मजबूत संदेश भी दिया। कैंपस में पूरे दिन “Go Green, Save Earth” का माहौल देखने को मिला, जहां हर गतिविधि में पर्यावरण संरक्षण की झलक साफ नजर आई। Tree Plantation Drive से हुई शुरुआत कार्यक्रम की शुरुआत वृक्षारोपण अभियान से हुई। छात्रों ने कॉलेज परिसर में पौधे लगाए और उन्हें सुरक्षित रखने का संकल्प लिया। कई छात्रों ने कहा कि “एक पौधा आज, एक बेहतर कल की नींव है।” Poster Making Competition में दिखी Creativity छात्रों ने पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। किसी ने प्लास्टिक प्रदूषण पर संदेश दिया तो किसी ने “Save Water, Save Life” जैसे विचारों को अपनी कला के जरिए पेश किया। पूरे हॉल में रंगों और विचारों का सुंदर संगम देखने को मिला। Speech & Debate से उठे गंभीर सवाल भाषण और वाद-विवाद प्रतियोगिता में छात्रों ने पर्यावरण संकट, ग्लोबल वॉर्मिंग और प्रदूषण जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। शिक्षकों ने भी छात्रों को छोटे-छोटे कदमों से बड़ा बदलाव लाने की प्रेरणा दी। Quiz और Theme Activities ने बढ़ाई जागरूकता पर्यावरण आधारित क्विज प्रतियोगिता में छात्रों ने उत्साह से हिस्सा लिया। “Planet vs Plastic” और “Go Green, Breathe Green” जैसी थीम पर आधारित गतिविधियों ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया कि प्रकृति को बचाना अब विकल्प नहीं, जरूरत है। NCC और Students Clubs की सक्रिय भागीदारी कार्यक्रम में NCC और विभिन्न छात्र क्लबों की भागीदारी भी सराहनीय रही। सभी ने मिलकर यह संदेश दिया कि अगर युवा ठान लें, तो पर्यावरण संरक्षण एक बड़ा आंदोलन बन सकता है। एक छोटा कदम, बड़ा बदलाव कार्यक्रम के अंत में सभी छात्रों और शिक्षकों ने मिलकर यह संकल्प लिया कि वे प्लास्टिक का कम उपयोग करेंगे, अधिक पेड़ लगाएंगे और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। यह आयोजन सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक भावनात्मक याद दिलाने जैसा था कि धरती को बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET

NEET RE-Exam 2026 Guidelines: ड्रेस कोड से लेकर एग्जाम हॉल तक पूरे नियम जानें

NEET री-एग्जाम को लेकर लाखों छात्रों के बीच तैयारी तेज है, लेकिन इसी बीच National Testing Agency (NTA) ने परीक्षा को लेकर सख्त गाइडलाइन जारी कर दी है। इसमें खासकर ड्रेस कोड और परीक्षा हॉल नियमों पर ज्यादा ध्यान दिया गया है, ताकि एग्जाम पूरी तरह पारदर्शी और नकल-रहित हो सके। छात्रों के लिए यह जरूरी है कि वे परीक्षा सेंटर जाने से पहले सभी नियम अच्छे से समझ लें, क्योंकि छोटी सी गलती भी एंट्री रोक सकती है। NEET Exam Dress Code 2026: क्या पहनना सही रहेगा? NTA ने साफ कहा है कि उम्मीदवारों को सिंपल और हल्के कपड़े पहनकर आना चाहिए: NEET Exam में क्या नहीं पहनना चाहिए? NTA ने कुछ चीजों पर सख्त रोक लगाई है: NEET Exam Hall Rules: क्या लेकर जा सकते हैं? परीक्षा हॉल में सिर्फ जरूरी चीजों की अनुमति है: परीक्षा केंद्र में क्या बिल्कुल मना है? छात्रों के लिए जरूरी सलाह (Important Tips) NEET जैसी बड़ी परीक्षा में छोटी तैयारी भी बड़ा फर्क डालती है:
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NEET

NEET की दर्दनाक सच्चाई: 2 दिन में 4 मौतें, छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ी बहस

देश में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर बढ़ता मानसिक दबाव एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पिछले 48 घंटों में अलग-अलग राज्यों से सामने आए दर्दनाक मामलों ने न सिर्फ परिवारों को तोड़ दिया, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी बहस छेड़ दी है। गुजरात और तमिलनाडु से सामने आए दर्दनाक मामले गुजरात में एक छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर सामने आई है। वहीं तमिलनाडु की एक छात्रा ने अपने आखिरी संदेश में दोबारा परीक्षा देने के डर और लगातार बढ़ते मानसिक दबाव का जिक्र किया, जिसने सभी को भावुक कर दिया। इसी दौरान अन्य राज्यों से भी ऐसे ही दुखद मामले सामने आए हैं, जिससे कुल मिलाकर दो दिनों में कम से कम चार छात्रों की मौत की स्थिति बनी है। परिवारों ने बताया— लंबे समय से था तनाव परिजनों का कहना है कि बच्चे लंबे समय से NEET की तैयारी में दिन-रात मेहनत कर रहे थे, लेकिन लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा, कोचिंग का दबाव और भविष्य की अनिश्चितता उन्हें अंदर ही अंदर तोड़ रही थी। कई माता-पिता ने बताया कि बच्चे तनाव में रहते थे, लेकिन खुलकर अपनी बात साझा नहीं कर पा रहे थे। विशेषज्ञों की चिंता: मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ परीक्षा का दबाव नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की कमी भी एक बड़ा कारण है। छात्रों के लिए समय रहते काउंसलिंग, भावनात्मक सपोर्ट और सुरक्षित माहौल बेहद जरूरी है, ताकि वे दबाव को संभाल सकें। शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल इन घटनाओं के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था केवल रैंक और मार्क्स पर ही केंद्रित रह गई है? समाज के कई वर्ग अब मांग कर रहे हैं कि परीक्षा प्रणाली के साथ-साथ छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को भी उतनी ही गंभीरता से लिया जाए। देश में गहराता संकट और बढ़ती चिंता फिलहाल इन मामलों ने पूरे देश को झकझोर दिया है और एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सफलता की दौड़ में कहीं हम अपने बच्चों को खो तो नहीं रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold Price Today: सोने के दाम में बड़ी गिरावट, 10 ग्राम का भाव ₹1.43 लाख पर

सोना (Gold) और चांदी (Silver) खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। पिछले तीन दिनों में दोनों कीमती धातुओं के भाव में अच्छी-खासी गिरावट आई है। सोना करीब ₹3,000 और चांदी लगभग ₹9,000 तक सस्ती हुई है। ऐसे में शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने या निवेश की योजना बना रहे लोगों की नजर अब बाजार के अगले रुख पर है। 22 अक्टूबर 2026 के बाजार अपडेट के मुताबिक, 10 ग्राम सोने की कीमत करीब ₹1.43 लाख और चांदी का भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो बताया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग बाजारों में कीमतों का अंतर हो सकता है। Gold Rate Today: ₹1.43 लाख पर पहुंचा 10 ग्राम सोना Gold Price में आई गिरावट से खरीदारों को कुछ राहत जरूर मिली है। बीते तीन दिनों में भाव करीब ₹3,000 नीचे आने से उन लोगों के लिए खरीदारी का मौका बन सकता है, जो लंबे समय से कीमतें कम होने का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, सोना खरीदने से पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर पता कर लें। 24 कैरेट सोने की कीमत और गहने बनाने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने के भाव में अंतर होता है। इसके अलावा ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और GST भी देना पड़ता है। Silver Rate Today: चांदी ₹9,000 तक हुई सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। पिछले तीन दिनों में चांदी करीब ₹9,000 तक सस्ती हुई है और इसका भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो के स्तर पर बताया जा रहा है। चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर उन ग्राहकों पर भी पड़ता है, जो त्योहारों पर चांदी के सिक्के, बर्तन या दूसरे सामान खरीदते हैं। हालांकि, खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार में चांदी का ताजा भाव और शुद्धता की जानकारी लेना जरूरी है। सोना-चांदी के दाम क्यों गिर रहे हैं? Gold or Silver की कीमतें केवल घरेलू मांग से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव, डॉलर की चाल, रुपये की स्थिति और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें भी इनके भाव पर असर डालती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतें कमजोर होती हैं, तो भारतीय बाजार में भी इसका असर दिखाई दे सकता है। इसके अलावा मुनाफावसूली के कारण भी कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, बाजार में आई गिरावट की किसी एक वजह को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। कीमतों की चाल कई आर्थिक और वैश्विक कारकों पर निर्भर करती है। क्या अभी सोना और चांदी खरीदना सही रहेगा? अगर आप शादी या त्योहार के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो मौजूदा गिरावट आपके लिए राहत की बात हो सकती है। लेकिन केवल तीन दिन की गिरावट देखकर यह मान लेना ठीक नहीं है कि आगे भी भाव लगातार कम होंगे। खरीदारी से पहले अलग-अलग ज्वेलर्स के रेट की तुलना करें। सोने पर हॉलमार्क और शुद्धता की जांच करें तथा बिल में मेकिंग चार्ज और GST का पूरा विवरण देखें। निवेश के लिहाज से भी जल्दबाजी करने के बजाय अपने बजट और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना बेहतर है। आगे Gold-Silver Price में क्या बदलाव हो सकता है? आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख, अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों से जुड़ी खबरें और रुपये की चाल सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में भाव में फिर तेजी आने या गिरावट जारी रहने, दोनों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, तीन दिनों में सोने और चांदी के दाम में आई गिरावट ने खरीदारों को थोड़ी राहत दी है। अगर आप आज खरीदारी करने जा रहे हैं, तो पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर जांच लें, क्योंकि बाजार भाव और ज्वेलरी की अंतिम कीमत में अंतर हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Amit Shah

Amit Shah Statement: धरने से कुछ नहीं होगा, जनता के बीच जाएं- विपक्ष को शाह की सलाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ धरना-प्रदर्शन करने से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता। अगर विपक्ष को राजनीति में आगे बढ़ना है, तो उसे जनता के बीच जाकर काम करना होगा। शाह ने कांग्रेस को लेकर दावा किया कि पार्टी अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं लौट पाएगी। उन्होंने अपने बयान में राहुल गांधी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी राजनीति और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठाए। अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और कथित वोट चोरी को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच सियासी टकराव जारी है। कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग से जवाब मांग रही है, जबकि भाजपा विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक हताशा से जोड़ रही है। Amit Shah Statement: कांग्रेस पर क्यों बरसे गृह मंत्री? अमित शाह ने अपने संबोधन में कांग्रेस की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए केवल विरोध प्रदर्शन करना काफी नहीं है। राजनीतिक दलों को जनता की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए काम करना चाहिए। शाह के मुताबिक, विपक्ष को अपनी चुनावी हार की वजहों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर निशाना साधते हुए दावा किया कि पार्टी की मौजूदा राजनीति उसे लंबे समय तक सत्ता से दूर रख सकती है। हालांकि, कांग्रेस के अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं आने का बयान अमित शाह का राजनीतिक दावा है। इसे किसी निश्चित चुनावी नतीजे के तौर पर नहीं देखा जा सकता। Rahul Gandhi का नाम लिए बिना क्या बोले अमित शाह? अमित शाह ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना विपक्ष के धरने और प्रदर्शनों पर टिप्पणी की। उनके बयान को कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ उठाए जा रहे सवालों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। शाह का कहना है कि विपक्ष को जनता के बीच जाकर अपना समर्थन बढ़ाना चाहिए। केवल आरोप लगाने या सड़कों पर उतरने से चुनावी राजनीति में सफलता नहीं मिलती। दूसरी तरफ, कांग्रेस का तर्क है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। पार्टी और INDIA गठबंधन के नेता मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। Vote Chori और SIR पर भाजपा-विपक्ष में टकराव देश की राजनीति में वोट चोरी और SIR यानी Special Intensive Revision का मुद्दा लगातार चर्चा में है। राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि इन मामलों में स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। वहीं, भाजपा इन आरोपों को खारिज करती रही है और विपक्ष पर चुनावी हार के बाद संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाती है। इस विवाद में दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। मतदाता सूची से जुड़े आरोपों की सच्चाई समझने के लिए आधिकारिक आंकड़ों, चुनाव आयोग के जवाब और उपलब्ध प्रमाणों को देखना जरूरी है। चुनाव आयोग को लेकर भी जारी है सियासी लड़ाई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों का विरोध पहले भी सामने आ चुका है। विपक्ष ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर जवाब मांगा है। वहीं, भाजपा का कहना है कि चुनावी नतीजों को लेकर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय विपक्ष को अपनी रणनीति पर ध्यान देना चाहिए। इस मुद्दे ने भाजपा और INDIA गठबंधन के बीच राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले समय में यह विवाद चुनावी भाषणों और विपक्षी अभियानों में भी अहम भूमिका निभा सकता है। Amit Shah ने AAP पर भी साधा निशाना अमित शाह ने अपने संबोधन में आम आदमी पार्टी (AAP) की राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने विपक्षी दलों को सलाह दी कि वे आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जनता के लिए काम करें। दिल्ली की राजनीति में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच लंबे समय से टकराव रहा है। ऐसे में शाह का बयान विपक्ष पर राजनीतिक दबाव बनाने के साथ-साथ भाजपा के चुनावी संदेश को मजबूत करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। आगे क्या होगा? कांग्रेस के सामने क्या चुनौती है? अमित शाह के बयान से साफ है कि भाजपा कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। दूसरी ओर, कांग्रेस चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर जवाब मांगने की अपनी रणनीति पर कायम है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में क्या तथ्य सामने रखता है और चुनाव आयोग इन सवालों पर क्या जवाब देता है। साथ ही, यह भी देखना होगा कि इन मुद्दों का आने वाले चुनावों में मतदाताओं पर कितना असर पड़ता है। फिलहाल, अमित शाह का 30 साल वाला बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। लेकिन आखिरकार चुनाव में किसे जनता का समर्थन मिलेगा, इसका फैसला मतदाता ही करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Ranbir Kapoor

Ranbir Kapoor Controversy: सच्चाई और अच्छाई पर गलत बोल गए रणबीर, अब मांगी माफी

बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। दशहरे के मौके पर कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सच्चाई और अच्छाई को लेकर कुछ ऐसा कह दिया, जिस पर सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे। वीडियो वायरल हुआ तो लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। अब रणबीर कपूर ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी है। उन्होंने सफाई दी कि बोलते समय उनकी जुबान फिसल गई थी और वह कुछ और कहना चाहते थे। दशहरे पर क्या बोल गए रणबीर कपूर? दरअसल, दशहरे के मौके पर Ranbir Kapoor कोलकाता में एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस दौरान वह बुराई पर अच्छाई की जीत के संदेश के बारे में बात कर रहे थे। लेकिन अपनी बात रखते समय वह ‘सच्चाई और अच्छाई की जीत’ की जगह उनके अंत होने जैसी बात कह गए। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसके बाद कई यूजर्स ने उनके शब्दों पर सवाल उठाए, तो कुछ ने मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया दी। मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि रणबीर कपूर अपनी आगामी फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं। ट्रोलिंग के बाद Ranbir Kapoor ने मांगी माफी बयान को लेकर विवाद बढ़ने के बाद रणबीर कपूर ने चेन्नई में आयोजित ‘रामायण’ के म्यूजिकल इवेंट में इस पर सफाई दी। उन्होंने माना कि उस समय बोलते हुए उनकी जुबान फिसल गई थी। Ranbir ने बताया कि वह कहना चाहते थे कि बुराई कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, आखिरकार जीत सच्चाई और अच्छाई की ही होती है। लेकिन शब्दों के गलत इस्तेमाल के कारण उनकी बात का अर्थ बदल गया। उन्होंने अपनी गलती के लिए माफी भी मांगी। अभिनेता ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी समझाया कि कभी-कभी वह कहना कुछ चाहते हैं, लेकिन उनके मुंह से कुछ और निकल जाता है। उनकी इस सफाई के बाद यह साफ हुआ कि उनका इरादा दशहरे के संदेश के उलट बात कहने का नहीं था। Social Media पर क्यों होने लगे Ranbir Kapoor ट्रोल? Ranbir Kapoor का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने इसे जुबान फिसलने की सामान्य गलती बताया, जबकि कुछ यूजर्स ने सार्वजनिक मंच पर बोलते समय ज्यादा सावधानी बरतने की बात कही। फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम का किरदार निभाने की वजह से भी यह बयान लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, रणबीर ने ज्यादा देर तक इस मामले पर चुप रहने के बजाय अपनी बात स्पष्ट की और गलती स्वीकार कर ली। Ranbir Kapoor की अपकमिंग फिल्म Ramayana भी चर्चा में रणबीर कपूर इन दिनों निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ को लेकर भी सुर्खियों में हैं। फिल्म में साई पल्लवी माता सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म के पहले भाग की रिलीज 5 नवंबर 2026 को तय बताई गई है। ऐसे में फिल्म के प्रमोशन के दौरान रणबीर कपूर के बयान ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। Ranbir Kapoor Controversy: क्या है पूरा मामला? इस पूरे विवाद की शुरुआत दशहरे के कार्यक्रम में बोले गए गलत शब्दों से हुई। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद रणबीर कपूर को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनकी जुबान फिसल गई थी और वह अच्छाई व सच्चाई की जीत की बात कर रहे थे। फिलहाल, रणबीर कपूर की माफी के बाद इस मामले में उनकी सफाई सामने आ चुकी है। अब दर्शकों की नजर उनकी फिल्म ‘रामायण’ पर है, जिसे लेकर पहले से ही काफी उत्सुकता बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

छत्तीसगढ़ में परीक्षा में नकल और गड़बड़ी के मामलों की सुनवाई के लिए 3 स्पेशल कोर्ट गठित

छत्तीसगढ़ में प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल व गड़बड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए तीन स्पेशल कोर्ट बनाई गई हैं। राज्य शासन ने रायपुर, बिलासपुर और कोरिया के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट को विशेष अदालत के रूप में नामित किया है। कोरिया जिले की स्पेशल कोर्ट बैकुंठपुर में होगी। इस संबंध में कानून एवं विधायी कार्य विभाग ने अधिसूचना जारी की है। इन अदालतों में सार्वजनिक परीक्षाओं के दौरान नकल और अनुचित तरीकों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाएगी। 2024 के कानून के तहत गठित हुईं विशेष अदालतें राज्य में यह व्यवस्था पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के तहत की गई है। अधिसूचना में कानून की धारा 12-क की उपधारा (2) का उल्लेख किया गया है। इसी प्रावधान के तहत राज्य शासन ने तीन जिलों के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट को स्पेशल कोर्ट के रूप में नामित किया है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध कराना है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से परामर्श के बाद जारी हुई अधिसूचना छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र से परामर्श के बाद राज्य शासन ने यह अधिसूचना जारी की है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव ने संबंधित जिलों के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जजों को अधिसूचना की प्रतियां भेजकर आवश्यक निर्देश दिए हैं। तीनों विशेष अदालतें अपने-अपने न्यायिक क्षेत्राधिकार में आने वाले परीक्षा संबंधी गड़बड़ी के मामलों की सुनवाई करेंगी। इस व्यवस्था के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल या अनुचित तरीकों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सुना जाएगा।
Akhilesh Yadav

Akhilesh Yadav Rampur Visit: रामपुर जेल पहुंचे अखिलेश, आजम खान से करेंगे मुलाकात

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) गुरुवार, 22 अक्टूबर को रामपुर जिला जेल पहुंचे। यहां उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात होनी है। इस दौरे पर राजनीतिक गलियारों की नजरें टिकी हैं। इसकी वजह सिर्फ दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बदलते राजनीतिक समीकरण भी हैं। Akhilesh Yadav के रामपुर पहुंचने के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि आजम खान से बातचीत के बाद वह क्या कहते हैं और इस मुलाकात से पार्टी के भीतर क्या संदेश जाता है। Akhilesh Yadav कैसे रामपुर पहुंचे ? निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) लखनऊ से निजी विमान के जरिए बरेली पहुंचे। इसके बाद हेलीकॉप्टर से रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय पहुंचे और वहां से जिला जेल के लिए रवाना हुए। कार्यक्रम में आजम खान से मुलाकात के साथ उनके परिवार से मिलने की योजना भी शामिल है। आजम खान की तबीयत और उनके हालात जानने को इस दौरे की अहम वजह बताया गया है। Azam Khan से मुलाकात क्यों है खास? आजम खान समाजवादी पार्टी के पुराने और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। रामपुर और आसपास के इलाकों में उनकी राजनीतिक पहचान लंबे समय से रही है। ऐसे में अखिलेश यादव का उनसे मिलने पहुंचना पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ समय से आजम खान और सपा नेतृत्व के संबंधों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं होती रही हैं। उनकी पत्नी तजीन फातिमा की अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद रामपुर आने का कार्यक्रम भी चर्चा में रहा। अब दोनों नेताओं की मुलाकात से यह देखने की उत्सुकता है कि उनके बीच किन मुद्दों पर बात होती है और आगे पार्टी की ओर से क्या संदेश दिया जाता है। UP Politics: 2027 चुनाव से पहले बढ़ी हलचल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सभी प्रमुख दल अपने राजनीतिक समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे समय में आजम खान से अखिलेश यादव की मुलाकात को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के नजरिए से भी देखा जा रहा है। हालांकि, इस मुलाकात में चुनावी रणनीति या संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इसे किसी बड़े राजनीतिक फैसले से जोड़कर देखना अभी जल्दबाजी होगी। Asaduddin Owaisi के दौरे के बाद चर्चा तेज रामपुर में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के दौरे और समाजवादी पार्टी पर उनकी राजनीतिक टिप्पणियों के बाद भी इस मुलाकात को लेकर चर्चा हो रही है। ओवैसी मुस्लिम राजनीति और सपा के नेतृत्व को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में अखिलेश यादव और आजम खान की मुलाकात पर राजनीतिक दलों की नजर होना स्वाभाविक है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच बातचीत का वास्तविक एजेंडा सामने आने के बाद ही इसके राजनीतिक मायने स्पष्ट होंगे। Om Prakash Rajbhar के बयान से भी गरमाई सियासत उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी अखिलेश यादव के रामपुर दौरे को लेकर टिप्पणी की है। इस बयानबाजी के बीच सपा प्रमुख का आजम खान से मिलना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल, इस दौरे को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लेकिन अखिलेश यादव और आजम खान की बातचीत के बाद ही यह साफ होगा कि मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई। मुलाकात के बाद क्या होगा अगला कदम? अखिलेश यादव के रामपुर पहुंचने के बाद अब आजम खान से मुलाकात और उनके परिवार से बातचीत पर सबकी नजर है। समर्थकों को उम्मीद है कि इस मुलाकात से दोनों नेताओं के बीच संवाद को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल, किसी नई चुनावी रणनीति या बड़े फैसले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव का बयान और समाजवादी पार्टी की आगे की गतिविधियां इस दौरे की अहमियत को समझने में मदद करेंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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