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JEE Advanced 2026 Top 3: बिहार, दिल्ली और राजस्थान के छात्रों ने मारी बाज़ी

देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE Advanced 2026 के नतीजों ने एक बार फिर छात्रों की मेहनत और संघर्ष की कहानी सामने रख दी है। इस साल बिहार के Shubham ने ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल कर टॉप किया है। वहीं दिल्ली के Kabir दूसरे स्थान पर रहे और राजस्थान के झुंझुनूं के Jatin ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। यह रिजल्ट सिर्फ रैंकिंग नहीं, बल्कि उन रातों की मेहनत, स्ट्रेस और लगातार पढ़ाई की कहानी भी है, जो इन छात्रों ने इस सफलता तक पहुंचने के लिए की। Bihar का Shubham बना JEE Advanced 2026 Topper (AIR 1) इस साल का सबसे बड़ा आकर्षण बिहार के शुभम रहे, जिन्होंने पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया। उनकी सफलता ने एक बार फिर साबित किया कि सही दिशा और मेहनत से किसी भी राज्य का छात्र देश में टॉप कर सकता है। Delhi के Kabir ने हासिल किया Second Rank दिल्ली के कबीर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए AIR 2 हासिल किया। कठिन पेपर और हाई कॉम्पिटिशन के बावजूद उन्होंने लगातार फोकस और स्ट्रॉन्ग स्ट्रेटेजी के साथ यह उपलब्धि हासिल की। Jhunjhunu के Jatin ने किया Third Rank हासिल राजस्थान के झुंझुनूं के जतिन ने AIR 3 हासिल कर अपने शहर और राज्य का नाम रोशन किया। उनकी मेहनत और कंसिस्टेंसी ने उन्हें टॉप 3 में जगह दिलाई। Kota Coaching का फिर दिखा दबदबा इस साल के रिजल्ट में एक बार फिर राजस्थान का कोटा शहर चर्चा में रहा। टॉप-10 में शामिल 6 छात्रों ने अपनी तैयारी राजस्थान से की है। इससे यह साफ है कि कोटा अभी भी JEE और इंजीनियरिंग एंट्रेंस की तैयारी का सबसे बड़ा हब बना हुआ है। छोटे शहरों के छात्रों का बढ़ता कमाल इस बार के रिजल्ट ने यह भी दिखाया है कि अब सफलता सिर्फ बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रही। छोटे शहरों के छात्र भी लगातार टॉप रैंक में जगह बना रहे हैं, जो देश के एजुकेशन सिस्टम में बड़ा बदलाव दर्शाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Education Row: CBSE छात्रों से मिले Rahul Gandhi, OSM विवाद पर केंद्र सरकार को घेरा

Education Crisis: CBSE OSM विवाद के बीच छात्रों से मिले राहुल गांधी नई दिल्ली। CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर जारी विवाद अब राजनीतिक और शैक्षणिक दोनों स्तरों पर बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उन छात्रों से मुलाकात की, जिन्होंने उत्तर पुस्तिकाओं में कथित गड़बड़ियों और मूल्यांकन संबंधी समस्याओं को लेकर आवाज उठाई थी। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि वे उन छात्रों से मिलने जा रहे हैं जिन्हें कुछ लोगों ने “एंटी-नेशनल”, “पाकिस्तानी” और “सोरोस एजेंट” तक कह दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर 17 साल के छात्रों को इस तरह के राजनीतिक विशेषणों से क्यों जोड़ा जा रहा है। क्या है पूरा OSM विवाद? CBSE ने इस वर्ष उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम लागू किया था। कई छात्रों और अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं में पेज गायब थे, कुछ उत्तर दिखाई नहीं दे रहे थे और मूल्यांकन पोर्टल में तकनीकी समस्याएं थीं। कांग्रेस और राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि OSM कॉन्ट्रैक्ट देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और पात्रता मानकों में बदलाव कर एक विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाया गया। सरकार और CBSE का क्या कहना है? केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने माना कि OSM सिस्टम में कुछ तकनीकी समस्याएं सामने आई हैं और उन्हें दूर करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं CBSE ने राहुल गांधी के आरोपों को “भ्रामक” बताते हुए कहा कि कॉन्ट्रैक्ट पूरी सरकारी प्रक्रिया और General Financial Rules के तहत दिया गया था। बोर्ड के अनुसार सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई। छात्रों के भविष्य पर बढ़ी चिंता इस पूरे विवाद के कारण लाखों छात्रों और उनके परिवारों में चिंता का माहौल है। विपक्ष लगातार स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है, जबकि सरकार और CBSE का दावा है कि सभी शिकायतों का समाधान किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लागू करने से पहले व्यापक परीक्षण और तकनीकी तैयारी आवश्यक थी, ताकि छात्रों के परिणामों पर किसी भी तरह का प्रभाव न पड़े। Desh Harpal Analysis यह विवाद केवल एक परीक्षा परिणाम का मामला नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता, तकनीकी विश्वसनीयता और छात्रों के अधिकारों से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में सरकार, CBSE और विपक्ष के बीच यह बहस और तेज हो सकती है।
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Re-NEET 2026 Exam: छात्रों को बड़ी राहत, 21 जून को DTC बसों में मिलेगा फ्री सफर

Re-NEET 2026 Exam: छात्रों को बड़ी राहत, 21 जून को DTC बसों में मिलेगा फ्री सफर

दिल्ली में Re-NEET 2026 परीक्षा देने जा रहे छात्रों के लिए अच्छी खबर है। परीक्षा के दिन यानी 21 जून को अभ्यर्थी दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बसों में मुफ्त यात्रा कर सकेंगे। इस फैसले का उद्देश्य छात्रों को परीक्षा केंद्र तक आसानी से पहुंचाने और उनकी यात्रा से जुड़ी परेशानियों को कम करना है। दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग की ओर से यह सुविधा विशेष रूप से Re-NEET परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए दी गई है। छात्र अपने एडमिट कार्ड को दिखाकर DTC बसों में बिना टिकट सफर कर सकेंगे। छात्रों को मिलेगा सीधा फायदा परीक्षा के दिन कई छात्रों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में मुफ्त बस यात्रा की सुविधा से न केवल उनका खर्च बचेगा, बल्कि समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचने में भी मदद मिलेगी। यह फैसला हजारों छात्रों और उनके परिवारों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। एडमिट कार्ड होगा जरूरी DTC बसों में मुफ्त यात्रा का लाभ लेने के लिए छात्रों को अपना Re-NEET एडमिट कार्ड साथ रखना होगा। बस में यात्रा के दौरान जरूरत पड़ने पर इसे दिखाना होगा। परीक्षा को लेकर प्रशासन की तैयारी Re-NEET परीक्षा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से आयोजित कराने के लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। परीक्षा केंद्रों के आसपास यातायात व्यवस्था, सुरक्षा और परिवहन सुविधाओं पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। छात्रों से अपील अधिकारियों ने छात्रों को सलाह दी है कि वे परीक्षा के दिन समय से पहले घर से निकलें और अपने जरूरी दस्तावेज साथ रखें। इससे किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सकेगा। Re-NEET परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह सुविधा निश्चित रूप से राहत देने वाली है और उन्हें परीक्षा पर बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगी।
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प्रयागराज में SSC परीक्षा विवाद: सर्वर फेल होने पर छात्रों का हंगामा, हाईवे जाम और तोड़फोड़

prayagraj में SSC परीक्षा विवाद: सर्वर फेल होने पर छात्रों का हंगामा, हाईवे जाम और तोड़फोड़

prayagraj में SSC परीक्षा के दौरान सर्वर फेल होने की वजह से बड़ा हंगामा हो गया। परीक्षा केंद्रों पर अचानक तकनीकी समस्या आने से कई उम्मीदवार परीक्षा नहीं दे सके, जिससे छात्रों में गुस्सा फैल गया। कंप्यूटर और कुर्सियों में तोड़फोड़, हाईवे जाम गुस्साए छात्रों ने परीक्षा केंद्र पर कंप्यूटर, कुर्सियां और अन्य सामान में तोड़फोड़ कर दी।इसके बाद बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतर आए और हाईवे जाम कर दिया, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ। आज की परीक्षा रद्द स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने आज होने वाली परीक्षा को रद्द (cancel) करने का फैसला लिया है।अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में आई तकनीकी खराबी की जांच की जा रही है और जल्द ही नई तारीख घोषित की जाएगी। प्रशासन की कार्रवाई और स्थिति घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।प्रशासन ने छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि समस्या का समाधान जल्द किया जाएगा।
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ईद के चलते MCU की परीक्षा तारीख बदली, अब 7 जून को होंगे एग्जाम

ईद के चलते MCU की परीक्षा तारीख बदली, अब 7 जून को होंगे एग्जाम

भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) ने 28 मई को होने वाली परीक्षाओं को स्थगित कर दिया है। अब ये परीक्षाएं 7 जून 2026 को आयोजित की जाएंगी। यह फैसला ईद के त्योहार को देखते हुए लिया गया है, ताकि छात्रों को किसी तरह की असुविधा न हो। पुराने एडमिट कार्ड रहेंगे मान्य विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा में शामिल होने के लिए पुराने एडमिट कार्ड ही मान्य रहेंगे।छात्रों को नए एडमिट कार्ड जारी नहीं किए जाएंगे, जिससे उन्हें किसी तरह की अतिरिक्त परेशानी न हो। पीएचडी इंटरव्यू की तारीखों में भी बदलाव केवल परीक्षाएं ही नहीं, बल्कि पीएचडी इंटरव्यू की तारीखों में भी संशोधन किया गया है।नई तारीखों की जानकारी जल्द ही विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी।
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NEET-UG Paper Leak Case: CBI की बड़ी कार्रवाई, पुणे की लेक्चरर गिरफ्तार, फिजिक्स पेपर बांटने का आरोप

NEET-UG Paper Leak Case: CBI की बड़ी कार्रवाई, पुणे की लेक्चरर गिरफ्तार, फिजिक्स पेपर बांटने का आरोप

NEET-UG Paper Leak मामले में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पुणे की एक लेक्चरर को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि लेक्चरर ने परीक्षा से पहले फिजिक्स के प्रश्नपत्र कुछ छात्रों तक पहुंचाए थे। इस गिरफ्तारी के बाद मामले में नए खुलासों की संभावना बढ़ गई है। सीबीआई पिछले कई महीनों से देशभर में फैले पेपर लीक नेटवर्क की जांच कर रही है। एजेंसी को शक है कि इस रैकेट में कई राज्यों के लोग और शिक्षा से जुड़े कुछ अन्य व्यक्ति भी शामिल हो सकते हैं। फिजिक्स पेपर लीक करने का आरोप जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी लेक्चरर ने कथित तौर पर छात्रों को फिजिक्स के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए थे। सीबीआई ने तकनीकी और डिजिटल सबूतों के आधार पर यह कार्रवाई की है। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है। देशभर में फैला था नेटवर्क नीट-यूजी पेपर लीक मामला सामने आने के बाद कई राज्यों में जांच तेज कर दी गई थी। एजेंसियों को आशंका है कि पेपर लीक का नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था। इससे पहले भी कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी पेपर लीक मामले ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। अभिभावकों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से मेहनत करने वाले छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है। सोशल मीडिया पर भी मामले को लेकर लगातार प्रतिक्रिया सामने आ रही है।
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UPSC Exam Calendar 2027: यूपीएससी ने 27 भर्तियों का परीक्षा कैलेंडर जारी किया

UPSC Exam Calendar 2027: यूपीएससी ने 27 भर्तियों का परीक्षा कैलेंडर जारी किया

संघ लोक सेवा आयोग यानी Union Public Service Commission (UPSC) ने साल 2027 के लिए अपना वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी कर दिया है। इस कैलेंडर में सिविल सेवा परीक्षा (IAS), IPS, IFS, NDA, CDS समेत कुल 27 बड़ी भर्ती परीक्षाओं की तारीखों का ऐलान किया गया है। अब लाखों उम्मीदवार अपनी तैयारी को पहले से बेहतर तरीके से प्लान कर सकेंगे। यूपीएससी की ओर से जारी कैलेंडर के मुताबिक, सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (CSE Prelims) 23 मई 2027 को आयोजित होगी। वहीं, सिविल सेवा मुख्य परीक्षा (Mains) 20 अगस्त 2027 से शुरू होगी और यह पांच दिनों तक चलेगी। इसके अलावा NDA, CDS, इंजीनियरिंग सर्विस, जियो-साइंटिस्ट और अन्य कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं की तारीखें भी जारी कर दी गई हैं। आयोग ने साफ किया है कि परिस्थितियों के अनुसार परीक्षा तिथियों में बदलाव भी किया जा सकता है। UPSC 2027 की प्रमुख परीक्षाओं की तारीखें उम्मीदवारों के लिए क्यों जरूरी है यह कैलेंडर? हर साल लाखों युवा यूपीएससी की तैयारी करते हैं। ऐसे में परीक्षा कैलेंडर जारी होने से उम्मीदवारों को अपनी पढ़ाई, टेस्ट सीरीज और रिवीजन की रणनीति बनाने में काफी मदद मिलती है। खासकर वे छात्र जो पहली बार UPSC की तैयारी शुरू कर रहे हैं, उनके लिए यह शेड्यूल बेहद उपयोगी माना जा रहा है। ऐसे डाउनलोड करें UPSC Exam Calendar 2027 उम्मीदवार यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पूरा परीक्षा कैलेंडर डाउनलोड कर सकते हैं। UPSC Official Website UPSC Exam Calendar Page अधिक जानकारी और शिक्षा जगत की बड़ी खबरों के लिए पढ़ते रहें Deshharpal News Portal हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CBSE 12वीं स्कैन आंसर शीट डाउनलोड की तारीख बढ़ी, अब 23 मई तक आवेदन का मौका

CBSE 12वीं स्कैन आंसर शीट डाउनलोड की तारीख बढ़ी, अब 23 मई तक आवेदन का मौका

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी Central Board of Secondary Education (CBSE) ने 12वीं के छात्रों को बड़ी राहत दी है। बोर्ड ने स्कैन कॉपी (स्कैन आंसर शीट) डाउनलोड करने की अंतिम तारीख बढ़ा दी है। अब छात्र 23 मई तक आवेदन कर सकेंगे। पहले इसकी आखिरी तारीख 21 मई तय की गई थी। CBSE की ओर से यह फैसला छात्रों और अभिभावकों की मांग को देखते हुए लिया गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थी अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी प्राप्त कर सकें। कई छात्रों को तकनीकी दिक्कतों और समय की कमी के कारण आवेदन करने में परेशानी हो रही थी। बोर्ड के अनुसार, जो छात्र अपने परीक्षा परिणाम से संतुष्ट नहीं हैं या अपने दिए गए उत्तरों को दोबारा जांचना चाहते हैं, वे स्कैन आंसर शीट डाउनलोड कर सकते हैं। इससे छात्रों को यह समझने में मदद मिलेगी कि उनकी कॉपी में किस तरह मूल्यांकन किया गया है। CBSE ने छात्रों से अपील की है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें और समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें। आवेदन ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कैन कॉपी देखने से छात्रों को अपनी गलतियों का पता चलता है और आगे की पढ़ाई में सुधार करने में मदद मिलती है। वहीं, कई अभिभावकों ने बोर्ड के इस फैसले को छात्रों के हित में बताया है। शिक्षा से जुड़ी हर बड़ी अपडेट और खबर के लिए पढ़ते रहें Deshharpal News Portal हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UP 69000 Teacher Recruitment Protest: कीड़ों की तरह रेंगकर पहुंचे अभ्यर्थी, आरक्षण विवाद पर अनोखा प्रदर्शन

UP 69000 Teacher Recruitment Protest: कीड़ों की तरह रेंगकर पहुंचे अभ्यर्थी, आरक्षण विवाद पर अनोखा प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती मामले को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। आरक्षण गड़बड़ी और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने राजधानी लखनऊ में अनोखे तरीके से प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी सड़क पर कीड़ों की तरह रेंगते हुए शिक्षा मंत्री के आवास तक पहुंचे। उनका कहना है कि लंबे समय से न्याय की मांग करने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, जिसके कारण उन्हें इस तरह विरोध जताने के लिए मजबूर होना पड़ा। क्या है 69000 शिक्षक भर्ती विवाद? 69000 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से आरक्षण नियमों के पालन पर सवाल उठ रहे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि चयन प्रक्रिया में आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के साथ गलत तरीके से सीटों का वितरण किया गया, जिससे हजारों अभ्यर्थियों को नुकसान हुआ। इस मुद्दे पर पहले भी कई बार प्रदर्शन और अदालत में सुनवाई हो चुकी है। अभ्यर्थियों ने लगाए गंभीर आरोप प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवारों का कहना है कि सरकार और विभाग लगातार उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रहे हैं। कई अभ्यर्थियों ने दावा किया कि भर्ती में आरक्षण नियमों का सही तरीके से पालन नहीं हुआ। उनकी मांग है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा की जाए और प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय मिले। पुलिस और प्रशासन रहा अलर्ट प्रदर्शन को देखते हुए शिक्षा मंत्री आवास के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग भी की गई। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहा। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ प्रदर्शन अभ्यर्थियों के इस अनोखे प्रदर्शन के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। कई लोगों ने प्रदर्शनकारियों के धैर्य और संघर्ष की चर्चा की, जबकि कुछ ने सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की। मामला फिर गरमाया 69000 शिक्षक भर्ती विवाद पहले भी राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। अब एक बार फिर यह मामला चर्चा में है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।
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NEET

NEET 2026 Controversy: ट्रांसलेशन प्रोसेस से लीक हुआ पेपर? कोर्ट में बड़ा दावा

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। पेपर लीक मामले की जांच कर रही CBI ने कोर्ट में ऐसे खुलासे किए हैं, जिन्होंने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा व्यवस्था सभी को झकझोर दिया है। जांच एजेंसी का दावा है कि प्रश्नपत्र लीक होने के पीछे केवल बाहरी गैंग ही नहीं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कुछ अंदरूनी लोग भी शामिल हो सकते हैं। जांच के दौरान सबसे बड़ा शक उस टीम पर गया है, जो प्रश्नपत्र को अलग-अलग भाषाओं में ट्रांसलेट करने का काम कर रही थी। CBI का मानना है कि पेपर ट्रांसलेशन प्रक्रिया के दौरान ही गोपनीय जानकारी बाहर पहुंचाई गई और फिर इसे मोटी रकम लेकर छात्रों तक पहुंचाया गया। कोर्ट में CBI ने क्या बताया? दिल्ली की विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान CBI ने कहा कि पेपर लीक का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था। जांच एजेंसी के अनुसार, कुछ आरोपियों ने मेडिकल सीट दिलाने और अच्छे नंबर लाने का लालच देकर छात्रों और उनके परिवारों से लाखों रुपये वसूले। CBI ने यह भी खुलासा किया कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र WhatsApp ग्रुप, निजी चैनलों और कोचिंग नेटवर्क के जरिए शेयर किया गया। जांच में सामने आया है कि कुछ लोगों ने 10 लाख से लेकर 25 लाख रुपये तक की डील की थी। Translation Team पर क्यों बढ़ा शक? सूत्रों के मुताबिक, पेपर को कई भाषाओं में तैयार और ट्रांसलेट किया जाता है। CBI को शक है कि इसी प्रक्रिया के दौरान किसी ने गोपनीय दस्तावेज की कॉपी बाहर निकाली। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि पेपर सबसे पहले किस स्तर पर लीक हुआ और इसे किन-किन लोगों तक पहुंचाया गया। जांच में पुणे की एक बॉटनी टीचर का नाम भी सामने आया है, जो कथित तौर पर NTA से जुड़ी एक्सपर्ट टीम का हिस्सा थीं। CBI ने उन्हें गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है। एजेंसी का दावा है कि इस मामले में कुछ और बड़े नाम भी सामने आ सकते हैं। कई राज्यों में CBI की रेड पेपर लीक मामले की जांच अब दिल्ली, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र और हरियाणा तक पहुंच चुकी है। CBI ने कई शहरों में छापेमारी कर मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और अहम दस्तावेज जब्त किए हैं। जांच एजेंसी डिजिटल चैट, बैंक ट्रांजैक्शन और कॉल रिकॉर्ड्स खंगाल रही है। सूत्र बताते हैं कि कुछ आरोपी छात्रों को “पक्का पेपर” देने का दावा कर रहे थे। हालांकि कई छात्रों के कम नंबर आने के बाद यह भी सामने आया कि कुछ लोगों ने फर्जीवाड़ा कर अभिभावकों से पैसे ठगे। छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता NEET जैसी बड़ी परीक्षा में पेपर लीक की खबर ने लाखों छात्रों की मेहनत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर विरोध जताया है। सोशल मीडिया पर भी NTA की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कई अभिभावकों का कहना है कि बच्चे पूरे साल मेहनत करते हैं, लेकिन ऐसे मामलों से उनका भरोसा टूटता जा रहा है। छात्रों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार की मांग की है। अभी और हो सकते हैं बड़े खुलासे CBI का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। एजेंसी अब इस बात की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है कि पेपर लीक का मास्टरमाइंड कौन था और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे। NEET UG 2026 पेपर लीक मामला अब सिर्फ एक परीक्षा विवाद नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Share Market

Share Market Update सेंसेक्स की तेजी पर लगा ब्रेक, Auto-Metal Stocks में दबाव

शेयर बाजार (Share Market) में तेजी देखकर खरीदारी करने वाले निवेशकों के लिए बुधवार का कारोबार थोड़ा निराशाजनक रहा। 21 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार ने शुरुआत में अच्छी बढ़त बनाई, लेकिन दोपहर तक तस्वीर बदल गई। सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर से करीब 1,200 अंक नीचे आ गया और 73,500 के आसपास कारोबार करने लगा। ऑटो और मेटल शेयरों में बिकवाली ने बाजार की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। शुरुआती कारोबार में खरीदारी का माहौल था, लेकिन जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया। इसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर दबाव देखने को मिला। बाजार में गिरावट के बीच निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर है। Sensex और Nifty में गिरावट, शुरुआती तेजी पड़ी फीकी बुधवार को बाजार की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ हुई थी। कुछ बड़े शेयरों में खरीदारी से प्रमुख इंडेक्स को सहारा मिला। हालांकि, ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू होने के बाद सेंसेक्स अपनी बढ़त बरकरार नहीं रख सका। दिन के उच्चतम स्तर से करीब 1,200 अंक की गिरावट ने बाजार में जारी उतार-चढ़ाव को उजागर किया। निफ्टी पर भी दबाव देखने को मिला। निवेशक फिलहाल बाजार में बड़े दांव लगाने के बजाय कारोबार से जुड़े संकेतों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। Auto और Metal Stocks में क्यों बढ़ी बिकवाली? बाजार की गिरावट में ऑटो और मेटल सेक्टर के शेयरों की कमजोरी चर्चा में रही। इन सेक्टरों में बिकवाली से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। ऑटो कंपनियों के शेयरों पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए वाहन बिक्री, मांग और उत्पादन लागत जैसे पहलू अहम हैं। वहीं, मेटल कंपनियों के प्रदर्शन पर वैश्विक मांग, धातुओं की कीमतों और औद्योगिक गतिविधियों का असर पड़ता है। हालांकि, पूरे सेक्टर को एक ही नजर से देखना सही नहीं होगा। अलग-अलग कंपनियों के शेयरों में उनकी वित्तीय स्थिति और कारोबार के आधार पर अलग-अलग चाल देखने को मिल सकती है। Crude Oil Price में तेजी से बढ़ी चिंता अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भी भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। तेल महंगा होने से भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर महंगाई, परिवहन खर्च और कई कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे कुछ कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से निवेशक वैश्विक घटनाक्रम और तेल बाजार की चाल पर नजर रख रहे हैं। IT Stocks और Reliance पर भी निवेशकों की नजर जहां ऑटो और मेटल शेयरों में दबाव देखने को मिला, वहीं आईटी सेक्टर और रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े घटनाक्रम भी बाजार की चर्चा में रहे। आईटी कंपनियों के तिमाही नतीजे और कारोबार की संभावनाएं निवेशकों के लिए अहम हैं। इसके अलावा, जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO से जुड़ी गतिविधियों पर भी बाजार की नजर बनी हुई है। हालांकि, किसी एक कंपनी में खरीदारी या तेजी से पूरे बाजार की दिशा तय नहीं होती। सेंसेक्स और निफ्टी पर कई बड़े शेयरों और सेक्टरों का संयुक्त असर पड़ता है। Share Market में गिरावट की 4 बड़ी वजहें निवेशक अब किन बातों पर रखें नजर? आने वाले कारोबारी सत्रों में कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, वैश्विक बाजारों का रुख और कंपनियों के तिमाही नतीजे अहम रहेंगे। इन संकेतों से बाजार की दिशा को समझने में मदद मिल सकती है, हालांकि बाजार की चाल का सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल एक दिन की तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला न लें। निवेश से पहले कंपनी के प्रदर्शन, अपनी जोखिम क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना बेहतर रहता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

मध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में विवादों की लंबी फेहरिस्त, खरीदी से लेकर भर्ती तक उठे सवाल

मध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने के उद्देश्य से अप्रैल 2024 में डीन की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव किया गया था। पदोन्नति की पुरानी व्यवस्था के स्थान पर 18 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पहली बार सीधी भर्ती के जरिए डीन नियुक्त किए गए। इसका उद्देश्य कॉलेजों के प्रशासन और वित्तीय कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना था। हालांकि, करीब ढाई साल बाद भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों से जुड़ी शिकायतों में कमी आती नजर नहीं आ रही है। कहीं मेडिकल उपकरणों की खरीदी में अनियमितताओं के आरोप लगे, तो कहीं कर्मचारियों की भर्ती और वित्तीय लेन-देन पर सवाल उठे। कई मामलों में जांच शुरू हुई, जबकि कुछ मामलों में पुलिस और लोकायुक्त तक कार्रवाई के लिए पहुंचे। रीवा मेडिकल कॉलेज में डीन बदले, अस्पताल की घटनाओं से उठे सवाल स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के गृह जिले रीवा में मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पताल में पहले प्रसूता की मौत और फिर जीवित व्यक्ति को मृत घोषित किए जाने जैसी घटनाएं सामने आईं। इसके बाद डीन डॉ. सुनील अग्रवाल को पद से हटाकर सतना भेज दिया गया। उनकी जगह डॉ. शशिधर गर्ग को नया डीन नियुक्त किया गया। इसी कॉलेज से जुड़े संजय गांधी अस्पताल में 80 नर्सिंग छात्राओं ने ईएनटी विभाग के एक डॉक्टर पर अभद्रता करने का आरोप लगाया। इन घटनाओं ने अस्पताल के प्रशासन और व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए। उधर, शिवपुरी मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारियों पर आयुष्मान योजना की प्रोत्साहन राशि अपने खातों में ट्रांसफर कराने के आरोप लगे। मामले में लोकायुक्त ने प्रारंभिक जांच शुरू की है। वहीं, नए मेडिकल कॉलेजों में डीन की सीधी भर्ती को लेकर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है। इंदौर: मशीन खरीदी में गड़बड़ी के आरोप, डीन को आरोप पत्र इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में मेडिकल उपकरणों की खरीदी को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। शिकायत में दावा किया गया कि करीब 98 लाख रुपए में खरीदी गई ओटी लाइट जैसी लाइट जेम पोर्टल पर लगभग 7 लाख रुपए में उपलब्ध थी। इसके अलावा करीब 70.50 लाख रुपए के कैमरों की खरीदी पर भी सवाल उठे। मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय समिति गठित की गई। लोकायुक्त ने भी विभाग से रिपोर्ट मांगी है। वहीं, जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन की खरीदी के मामले में डीन के खिलाफ आरोप पत्र जारी किए जाने की जानकारी सामने आई। भोपाल: उपकरणों की खरीदी पर शिकायत, वेतन नहीं मिलने से हड़ताल भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में मेडिकल उपकरणों की खरीदी को लेकर शिकायतें सामने आईं। मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई। शिकायतकर्ता ने जांच समिति की रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति मांगते हुए मुख्य सचिव को भी आवेदन दिया। इसी बीच हमीदिया अस्पताल में आउटसोर्स कर्मचारियों को दो महीने तक वेतन नहीं मिलने के कारण हड़ताल करनी पड़ी। इससे अस्पताल के कामकाज और कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर सवाल उठे। ग्वालियर: डाइट सप्लाई और वित्तीय अनियमितताओं की जांच ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज में मरीजों के लिए डाइट सप्लाई को लेकर विवाद सामने आया। इसके अलावा वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें भी जांच के दायरे में आईं। वर्ष 2024 में कॉलेज में करीब 19 करोड़ रुपए के खर्च और खरीदी से जुड़े मामलों की जांच की जानकारी सामने आई थी। इन मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए। जबलपुर: 1.63 करोड़ रुपए की गड़बड़ी, तीन कर्मचारी गिरफ्तार जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज की कैश शाखा में वर्ष 2026 में 1.63 करोड़ रुपए से अधिक की राशि के हिसाब में गड़बड़ी का मामला सामने आया। आंतरिक जांच के बाद डीन डॉ. नवनीत सक्सेना की शिकायत पर पुलिस ने पांच कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। इनमें से तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। खंडवा से सागर तक, दूसरे मेडिकल कॉलेजों में भी शिकायतें खंडवा मेडिकल कॉलेज: छात्रों ने मेस की साफ-सफाई और भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में रसोई में गंदगी और कीड़े-मकोड़े मिलने की बात सामने आई। विदिशा मेडिकल कॉलेज: आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति में गड़बड़ी के आरोप लगे। शहडोल मेडिकल कॉलेज: नवजात के इलाज में लापरवाही के आरोपों के बाद हंगामा हुआ और पुलिस ने जांच शुरू की। इसके अलावा करीब 150 कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि और एसीआर से जुड़ी शिकायतें कीं। दतिया मेडिकल कॉलेज: वर्ष 2026 में नर्सिंग अधीक्षक की नियुक्ति को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया। रतलाम मेडिकल कॉलेज: अनियमितताओं से जुड़ी शिकायत का मुद्दा विधानसभा में उठाया गया। सागर मेडिकल कॉलेज: सोनोग्राफी सेवा बंद रहने और इलाज में लापरवाही सहित कई शिकायतें सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज कराई गईं। सीधी भर्ती से बदलाव की उम्मीद, लेकिन जवाबदेही पर सवाल सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डीन की नियुक्ति प्रक्रिया बदलने का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना और वित्तीय कामकाज में पारदर्शिता लाना था। लेकिन अलग-अलग कॉलेजों से सामने आए मामलों ने निगरानी व्यवस्था, खरीद प्रक्रिया, भर्ती और अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। अब इन शिकायतों की जांच और उन पर होने वाली कार्रवाई अहम होगी। इससे ही स्पष्ट होगा कि अनियमितताओं के आरोपों पर कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है और सरकारी मेडिकल कॉलेजों की व्यवस्था में कितना सुधार आता है।
Gold-Silver Rate

Gold-Silver Rate सोना लगातार दूसरे दिन हुआ सस्ता, चांदी के दाम भी गिरे

Gold-Silver Rate में गिरावट ने सर्राफा बाजार का ध्यान खींचा है। बीते दो दिनों में सोना करीब ₹2,300 सस्ता होने की खबर है। वहीं, चांदी के दाम में भी लगभग ₹5,000 की कमी दर्ज की गई है। ऐसे में जो लोग त्योहारों या शादी के लिए गहने खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, उनकी नजर अब सोने-चांदी के नए भाव पर है। आपके दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 10 ग्राम सोने की कीमत घटकर करीब ₹1.44 लाख रह गई है। हालांकि, 21 अक्टूबर 2026 को सामने आए ताजा बाजार अपडेट में सोने और चांदी के भाव अलग-अलग स्तर पर दर्ज किए गए। इसलिए खरीदारी से पहले आज का रेट जरूर जांच लें। Gold Price Today: 10 ग्राम सोने का भाव कितना है? 21 अक्टूबर के बाजार अपडेट के अनुसार, सोने की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। सुबह करीब 11:25 बजे उपलब्ध एक रिपोर्ट के मुताबिक, 10 ग्राम सोना ₹669 सस्ता होकर ₹1,45,850 पर पहुंच गया। इससे पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव ₹1,46,519 था। वहीं, एक अन्य बाजार अपडेट में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,46,220 प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। अलग-अलग रिपोर्टों में कीमतों का अंतर अपडेट के समय और बाजार के आधार पर हो सकता है। सोने की कीमतों में आई इस गिरावट से उन लोगों को कुछ राहत मिल सकती है, जो लंबे समय से गहने खरीदने के लिए सही मौके का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, केवल एक-दो दिन के भाव देखकर खरीदारी का फैसला करना सही नहीं होगा। Silver Price Today: चांदी भी हुई सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट देखने को मिली। 21 अक्टूबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक किलो चांदी का भाव ₹2,11,485 से घटकर ₹2,09,050 पर आ गया। यानी कीमत में ₹2,435 की कमी दर्ज की गई। वहीं, कुछ खुदरा बाजारों में चांदी का भाव करीब ₹2.30 लाख प्रति किलो बताया गया। यह अंतर बाजार और कीमत अपडेट के तरीके के कारण हो सकता है। इसलिए अपने शहर के सर्राफा बाजार से ताजा भाव की पुष्टि करना जरूरी है। चांदी का इस्तेमाल सिर्फ गहने बनाने में ही नहीं, बल्कि बर्तन, सिक्के और कई औद्योगिक उत्पादों में भी होता है। यही वजह है कि इसके दाम में होने वाले बदलाव पर खरीदारों और कारोबारियों की नजर बनी रहती है। Gold-Silver Rate क्यों गिर रहे हैं? सोने और चांदी की कीमतों पर घरेलू मांग के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी असर पड़ता है। डॉलर की मजबूती, रुपये की विनिमय दर, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और वैश्विक आर्थिक हालात कीमतों में उतार-चढ़ाव ला सकते हैं। 21 अक्टूबर की बाजार रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है। निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक से मिलने वाले संकेतों का भी इंतजार कर रहे हैं। इन परिस्थितियों का असर कीमती धातुओं की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। हालांकि, सोने और चांदी के भाव में गिरावट की वजह केवल एक कारक नहीं है। बाजार में निवेशकों की खरीद-बिक्री और अंतरराष्ट्रीय घटनाएं भी कीमतों की दिशा तय करती हैं। क्या अभी सोना-चांदी खरीदना सही रहेगा? अगर आप त्योहार, शादी या किसी पारिवारिक कार्यक्रम के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अलग-अलग दुकानों के भाव की तुलना करना फायदेमंद रहेगा। लेकिन यह जरूरी नहीं कि आज कीमत कम हुई है तो आने वाले दिनों में भी गिरावट जारी रहेगी। खरीदारी के समय इन बातों का ध्यान रखें: Gold-Silver Price: अलग-अलग शहरों में भाव क्यों बदलते हैं? दिल्ली, मुंबई, भोपाल, इंदौर और दूसरे शहरों में सोने-चांदी की कीमतों में अंतर हो सकता है। स्थानीय बाजार की परिस्थितियां, कारोबारी मार्जिन और आभूषण बनाने के शुल्क अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा, ऑनलाइन दिखाई देने वाला बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप पर मिलने वाली कीमत एक जैसी होना जरूरी नहीं है। इसलिए खरीदारी से पहले स्थानीय ज्वेलर से कीमत की पुष्टि करना बेहतर रहेगा। आज के Gold-Silver Rate पर एक नजर 21 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध अलग-अलग बाजार अपडेट के अनुसार: ये दरें अलग-अलग बाजारों और अपडेट के समय के आधार पर हैं। इन्हें एक ही बाजार की समान दर न मानें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों को करना होगा स्ट्रेस मैनेजमेंट का ऑनलाइन कोर्स, 31 अक्टूबर तक की डेडलाइन

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यस्थल पर तनाव कम करने और काम करने के तरीके में सुधार के लिए ऑनलाइन कोर्स करना अनिवार्य किया गया है। राज्य शासन ने मिशन कर्मयोगी के तहत iGOT पोर्टल पर उपलब्ध दो कोर्स 31 अक्टूबर तक पूरे करने के निर्देश दिए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में सभी विभागों को आदेश जारी किया है। इन कोर्स का उद्देश्य कर्मचारियों को कामकाज के दौरान होने वाले तनाव को संभालने, मानसिक एकाग्रता बढ़ाने और कार्यक्षमता में सुधार करने में मदद करना है। दो ऑनलाइन कोर्स करना अनिवार्य सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए दो कोर्स निर्धारित किए हैं। दोनों कोर्स iGOT पोर्टल पर उपलब्ध हैं। सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्धारित समयसीमा में इन्हें पूरा करना होगा। 3 नवंबर तक शासन को देनी होगी रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों से समय पर दोनों कोर्स पूरे करवाएं। किसी भी कर्मचारी का कोर्स लंबित नहीं रहना चाहिए। विभागों को कोर्स पूरा होने की जानकारी 3 नवंबर तक शासन को भेजनी होगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरकारी दफ्तरों में कामकाज सुधारने पर जोर सरकारी कार्यालयों में कामकाज की व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बावजूद लोगों को कई बार शिकायतों के निराकरण में देरी का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में फाइलें लंबे समय तक लंबित रहती हैं, जिससे आम लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। बताया जा रहा है कि अब तक बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों ने ये कोर्स पूरे नहीं किए हैं। इसी को देखते हुए शासन ने 31 अक्टूबर तक दोनों कोर्स अनिवार्य रूप से पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

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