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Nitin Nabin

Nitin Nabin ने गिनाईं Modi Government की उपलब्धियां, बोले- 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्र सरकार की उपलब्धियों को लेकर भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन (Nitin Nabin) ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में देश ने कई क्षेत्रों में बदलाव देखा है। खासतौर पर युवाओं में नई उम्मीद पैदा हुई है और भारत की Economy ने भी तेजी से आगे बढ़ने की दिशा पकड़ी है। नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने के मौके पर सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। उनके मुताबिक, गरीबों के लिए चलाई गई योजनाओं और विकास से जुड़े कदमों का असर आम लोगों की जिंदगी में दिखाई दे रहा है। युवाओं को लेकर क्या बोले नितिन नवीन? भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश के युवाओं को निराशा के माहौल से निकालकर उनके सामने आगे बढ़ने के नए रास्ते खोले हैं। उनका कहना है कि आज युवा रोजगार के साथ-साथ Startup, Technology, Innovation और Entrepreneurship जैसे क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। नितिन नवीन के मुताबिक, देश की युवा आबादी को विकास की ताकत बनाने पर सरकार का लगातार फोकस रहा है। उन्होंने कहा कि बदलते भारत में युवाओं की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। India की Economy पर भी कही बड़ी बात नितिन नवीन ने भारत की आर्थिक प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि देश की Economy ने पिछले वर्षों में तेज रफ्तार पकड़ी है। उनके मुताबिक, भारत अब दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह मजबूत कर रहा है। उन्होंने मोदी सरकार के नेतृत्व में हुए आर्थिक बदलावों को देश के बढ़ते आत्मविश्वास से जोड़ते हुए कहा कि भारत अब सिर्फ विकास की बात नहीं कर रहा, बल्कि कई क्षेत्रों में दुनिया के सामने अपनी क्षमता भी दिखा रहा है। 25 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर आने का दावा नितिन नवीन ने सरकार की गरीब कल्याण योजनाओं को भी अपनी बात का आधार बनाया। उन्होंने दावा किया कि 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। इसके साथ ही उन्होंने गरीब परिवारों के लिए राशन, घर, गैस कनेक्शन और दूसरी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख किया। हालांकि, गरीबी से बाहर आने वाले लोगों का यह आंकड़ा भाजपा नेतृत्व की ओर से किया गया दावा है। ऐसे आंकड़ों को समझते समय संबंधित सरकारी रिपोर्ट और आंकड़ों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। 17 सितंबर से शुरू होगा ‘सेवा संकल्प अभियान’ प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने के अवसर पर भाजपा देशभर में कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी में है। पार्टी की ओर से ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाने की बात कही गई है। इस अभियान के जरिए प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन, सरकार की योजनाओं और गरीब कल्याण से जुड़े कामों को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश होगी। पार्टी कार्यकर्ताओं को भी इस अभियान से जोड़ने की तैयारी है। ‘Viksit Bharat 2047’ पर नजर नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का लक्ष्य सिर्फ वर्तमान की चुनौतियों तक सीमित नहीं है। सरकार ‘Viksit Bharat 2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रही है। उनके मुताबिक, आने वाले समय में युवाओं के लिए अवसर बढ़ाना, महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करना, गरीबों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना और भारत की Economy को और मजबूत करना बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Crude Oil

Crude Oil $100 के पार: America-Iran Tension से बढ़ी कीमत, Petrol-Diesel पर असर संभव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत ने एक बार फिर हलचल मचा दी है। Brent Crude Oil की कीमत $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो करीब छह हफ्तों का सबसे ऊंचा स्तर है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है और इसका असर सीधे Global Oil Market पर दिखाई दे रहा है। तेल महंगा होने की खबर भारत के लिए भी अहम है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अगर crude oil की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहती है, तो Petrol-Diesel और LPG की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। 6 हफ्ते में सबसे महंगा हुआ Crude Oil बुधवार के कारोबार में Brent crude करीब $100.19 प्रति बैरल तक पहुंच गया। बाद में इसकी कीमत लगभग $99.93 प्रति बैरल के आसपास रही। वहीं अमेरिकी WTI crude भी करीब $94.52 प्रति बैरल तक पहुंचा। तेल की कीमतों में यह तेजी ऐसे समय आई है जब Middle East में हालात सामान्य नहीं हैं। बाजार को डर है कि अगर तनाव और बढ़ा तो तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। America-Iran Tension का Oil Market पर असर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव इस समय Oil Market के लिए सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। Middle East दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। यहां किसी बड़े संघर्ष या सप्लाई रूट में रुकावट का असर पूरी दुनिया में दिखाई दे सकता है। खास तौर पर Strait of Hormuz को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां लंबे समय तक किसी तरह की बाधा आने पर कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है और कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। भारत में Petrol-Diesel Price पर क्या असर होगा? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या महंगे crude oil का असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा? भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत तय करने में अंतरराष्ट्रीय crude oil price के अलावा कई दूसरे factors भी काम करते हैं। इनमें रुपये और डॉलर की exchange rate, refining cost, freight, taxes और oil companies के margins शामिल हैं। इसलिए कच्चा तेल $100 पार करने का मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल-डीजल की कीमत तुरंत बढ़ जाएगी। लेकिन अगर crude लगातार इसी स्तर पर बना रहता है, तो घरेलू fuel prices पर दबाव जरूर बढ़ सकता है। LPG Cylinder की कीमत भी अहम Crude oil की तेजी के साथ LPG को लेकर भी चिंता बढ़ी है। भारत LPG की जरूरत का एक हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में Middle East में supply और shipping routes प्रभावित होने पर import cost बढ़ सकती है। हालांकि घरेलू LPG Cylinder की कीमत केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार के आधार पर तय नहीं होती। सरकार की pricing policy और अन्य आर्थिक factors भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए अभी LPG की कीमत बढ़ने को लेकर निश्चित तौर पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी। महंगा तेल बढ़ा सकता है महंगाई का दबाव कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता। Transport और logistics महंगे होने पर इसका असर सामान की लागत पर भी पड़ सकता है। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इसका असर transport, manufacturing और दूसरे कई कारोबारों पर भी देखने को मिल सकता है। आगे Crude Oil का क्या होगा? आने वाले दिनों में crude oil की दिशा काफी हद तक Middle East की स्थिति पर निर्भर करेगी। अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है और supply routes सामान्य रहते हैं, तो तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है। लेकिन अगर संघर्ष बढ़ता है या Hormuz जैसे महत्वपूर्ण shipping routes प्रभावित होते हैं, तो Brent Crude $100 से ऊपर लंबे समय तक बना रह सकता है। फिलहाल भारत में लोगों की नजर Petrol-Diesel और LPG के दाम पर रहेगी। अगर crude oil की यह तेजी कुछ समय और जारी रहती है, तो सरकार और oil companies के सामने घरेलू ईंधन कीमतों को संभालने की चुनौती बढ़ सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ODI Rankings

India फिर बना ODI Rankings का King, 3 साल से Top पर; New Zealand दे रहा चुनौती

वनडे क्रिकेट में टीम इंडिया (Team India) का दबदबा लगातार बना हुआ है। ICC Men’s ODI Rankings में भारत ने एक बार फिर नंबर-1 की कुर्सी संभाल रखी है। खास बात यह है कि सितंबर 2023 में शीर्ष स्थान हासिल करने के बाद से भारतीय टीम ने अपनी स्थिति लगातार मजबूत रखी है। मौजूदा ICC रैंकिंग में भारत के बाद न्यूजीलैंड दूसरे और ऑस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर है। 2023 में पाकिस्तान को पीछे छोड़कर India बना था नंबर-1 सितंबर 2023 में भारतीय टीम ने पाकिस्तान को पीछे छोड़ते हुए ODI Rankings में पहला स्थान हासिल किया था। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मोहाली वनडे में जीत के बाद भारत 116 रेटिंग पॉइंट्स के साथ टॉप पर पहुंचा था, जबकि पाकिस्तान 115 अंकों के साथ दूसरे नंबर पर था। इसके बाद इंदौर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे वनडे में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। इस जीत ने टीम इंडिया की नंबर-1 रैंकिंग को और मजबूत कर दिया था। उस दौर में भारत के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास थी क्योंकि टीम टेस्ट, ODI और T20I—तीनों फॉर्मेट की ICC Rankings में नंबर-1 बनी थी। 2026 में भी Top पर Team India समय बदला, टीम में बदलाव हुए और कई बड़े मुकाबले आए, लेकिन ODI Rankings में भारत की स्थिति नहीं बदली। ICC के मई 2026 के वार्षिक अपडेट में भारत 118 रेटिंग पॉइंट्स के साथ पहले स्थान पर था। न्यूजीलैंड 113 अंकों के साथ दूसरे और ऑस्ट्रेलिया 109 अंकों के साथ तीसरे नंबर पर था। यानी टॉप पर भारत और उसके पीछे न्यूजीलैंड के बीच मुकाबला काफी दिलचस्प बना हुआ है। आने वाली वनडे सीरीज में टीमों के प्रदर्शन से रैंकिंग में बदलाव की संभावना बनी रहेगी। New Zealand बना रहा है सबसे बड़ी चुनौती न्यूजीलैंड ने भी पिछले कुछ समय में वनडे क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन किया है। ICC की मौजूदा टीम रैंकिंग में वह दूसरे स्थान पर है और उसके 109 रेटिंग पॉइंट्स हैं। भारत और न्यूजीलैंड की टक्कर सिर्फ टीम रैंकिंग तक सीमित नहीं है। खिलाड़ियों की व्यक्तिगत Rankings में भी दोनों टीमों के सितारे लगातार आगे बढ़ रहे हैं। जुलाई 2026 की ICC अपडेट में भारत के शुभमन गिल, विराट कोहली और रोहित शर्मा ODI Batting Rankings में टॉप पोजिशन के करीब पहुंच रहे थे। India की असली ताकत है consistency वनडे में नंबर-1 बनना एक बात है, लेकिन इतने लंबे समय तक उस स्थान पर बने रहना अलग उपलब्धि है। भारत की मौजूदा स्थिति बताती है कि टीम ने अलग-अलग दौर और परिस्थितियों में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल जीत भी भारतीय क्रिकेट के हालिया शानदार दौर का हिस्सा रही है। ICC के 2026 वार्षिक अपडेट में भी भारत को ODI Rankings में शीर्ष स्थान मिला हुआ था। अब नजर नंबर-1 की कुर्सी बचाने पर टीम इंडिया के सामने अब चुनौती सिर्फ टॉप पर पहुंचने की नहीं, बल्कि इस जगह को बनाए रखने की है। न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमें लगातार चुनौती दे रही हैं। ऐसे में आने वाले ODI मुकाबले भारत की रैंकिंग के लिहाज से काफी अहम होंगे। फिलहाल तस्वीर साफ है—Team India ICC ODI Rankings में नंबर-1 है और New Zealand दूसरे स्थान पर। सितंबर 2023 में शुरू हुई भारत की यह बादशाहत करीब तीन साल बाद भी कायम है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Russia Su-57

Russia Su-57 Deal: भारत की नजर 75 Stealth Fighter Jets पर, Modi-Putin Talks से बढ़ी उम्मीद

भारत और रूस के बीच Defence Partnership को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। रूस के Su-57 Stealth Fighter Jet को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है। खबरों के मुताबिक भारत करीब 75 Su-57 Fighter Jets लेने के विकल्प पर विचार कर सकता है। संभावित सौदे की कीमत करीब ₹1 लाख करोड़ तक बताई जा रही है। हालांकि, अभी तक 75 विमानों की खरीद और इतनी रकम की डील को लेकर कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रस्तावित मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। बातचीत के दौरान Defence Cooperation के साथ Su-57 की बिक्री और Technology Transfer पर भी चर्चा हो सकती है। Su-57 Deal पर क्यों टिकी हैं नजरें? भारत लंबे समय से अपनी Air Force की combat capability को मजबूत करने पर काम कर रहा है। ऐसे में रूस का पांचवीं पीढ़ी का Su-57 Fighter Jet चर्चा में आना स्वाभाविक है। रूस की ओर से भारत को सिर्फ तैयार विमान देने के बजाय Technology Transfer और स्थानीय स्तर पर उत्पादन से जुड़े विकल्पों पर भी बातचीत के संकेत मिले हैं। अगर इस दिशा में कोई समझौता होता है, तो इसका फायदा भारत के Defence Manufacturing Sector को मिल सकता है। 75 Fighter Jets की खबर कितनी सही? सबसे ज्यादा चर्चा 75 Su-57 Jets की संभावित खरीद को लेकर है। कुछ रिपोर्टों में इसकी अनुमानित लागत ₹1 लाख करोड़ तक बताई गई है। लेकिन फिलहाल इसे पक्की Deal मानना सही नहीं होगा। रूस ने Su-57 की बिक्री और तकनीकी सहयोग को लेकर भारत के साथ बातचीत की बात जरूर कही है, लेकिन विमानों की अंतिम संख्या, कीमत और खरीद की शर्तों पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। यानी अभी कहानी बातचीत के दौर में है और आगे की तस्वीर दोनों देशों की बैठक के बाद ज्यादा साफ हो सकती है। Technology Transfer पर भारत का जोर भारत की Defence Procurement Policy में अब केवल विदेशी हथियार खरीदना ही मुख्य लक्ष्य नहीं है। देश की कोशिश है कि बड़े Defence Deals के साथ तकनीक और Manufacturing Capability भी भारत आए। Su-57 के मामले में भी Technology Transfer का मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है। अगर रूस भारत में इस विमान से जुड़ी तकनीक और उत्पादन क्षमता विकसित करने में सहयोग करता है, तो इससे भारतीय Aerospace Industry को लंबी अवधि में फायदा हो सकता है। Su-57 कितना खास है? Su-57 रूस का Fifth Generation Fighter Aircraft है। इसे आधुनिक एवियोनिक्स, स्टील्थ डिजाइन, सेंसर और लंबी दूरी की युद्ध क्षमता को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। भारत के लिए पांचवीं पीढ़ी के Fighter Aircraft की जरूरत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय वायुसेना आने वाले वर्षों में अपने Fighter Squadron को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसके साथ ही भारत का अपना AMCA यानी Advanced Medium Combat Aircraft Programme भी आगे बढ़ रहा है। मोदी-पुतिन Meeting पर सबकी नजर Su-57 के अलावा भारत और रूस की बातचीत का दायरा काफी बड़ा हो सकता है। Defence Cooperation, Nuclear Energy, Trade और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े मुद्दों पर भी दोनों देशों के बीच चर्चा होने की उम्मीद है। ऐसे में अगर Su-57 को लेकर कोई बड़ा ऐलान होता है, तो यह भारत-रूस Defence Relations के लिए अहम पड़ाव साबित हो सकता है। भारत के लिए क्या बदल सकता है? अगर भविष्य में Su-57 की खरीद और Technology Transfer पर सहमति बनती है, तो भारत को एक तरफ आधुनिक Fighter Aircraft मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर घरेलू Defence Manufacturing को भी बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, अभी 75 Su-57 Jets और ₹1 लाख करोड़ की कीमत को संभावित प्रस्ताव के तौर पर ही देखना बेहतर है। अंतिम फैसला होने तक इन आंकड़ों में बदलाव संभव है। फिलहाल नजरें मोदी-पुतिन की बैठक पर हैं। अगर बातचीत किसी ठोस समझौते तक पहुंचती है, तो Su-57 Deal भारत की Defence Strategy और भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी दोनों के लिए बड़ी खबर बन सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Punjab

Punjab Employees Protest खत्म: DA, OPS समेत लंबित मांगों पर सरकार से Agreement

Punjab में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत के बाद आंदोलन खत्म करने पर सहमति बन गई है। हड़ताल खत्म होने के साथ ही सरकारी दफ्तरों में कामकाज सामान्य होने की उम्मीद है। कर्मचारी लंबे समय से DA (Dearness Allowance) की लंबित किस्तों, वेतन से जुड़े बकाये और दूसरी सेवा संबंधी मांगों को लेकर सरकार के सामने अपनी बात रख रहे थे। इसी को लेकर कर्मचारियों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया था। सरकार और कर्मचारियों के बीच बनी सहमति हड़ताल के दौरान कर्मचारियों और सरकार के बीच तनाव की स्थिति बन गई थी। कर्मचारियों की ओर से लगातार अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाया जा रहा था। वहीं सरकार ने भी ड्यूटी से गैरहाजिर रहने वाले कर्मचारियों को लेकर सख्त रुख अपनाया था। बातचीत के बाद सरकार की ओर से कर्मचारियों के खिलाफ जारी किए गए Show Cause Notice और कार्रवाई से जुड़े कदम वापस लेने पर सहमति बनी। इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल खत्म करने का फैसला किया। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि आंदोलन खत्म जरूर किया गया है, लेकिन उनकी सभी मांगों का अंतिम समाधान अभी बाकी है। इन मुद्दों को लेकर सरकार के साथ आगे भी बातचीत जारी रहेगी। DA की मांग सबसे अहम पंजाब के सरकारी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में महंगाई भत्ते यानी DA की लंबित किस्तों का भुगतान शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से DA की कई किस्तें बकाया हैं, जिसका सीधा असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। इसके साथ ही वेतन और भत्तों के बकाये का भुगतान भी कर्मचारी संगठनों की प्राथमिक मांगों में शामिल है। कर्मचारी चाहते हैं कि सरकार इन मामलों में जल्द स्पष्ट फैसला ले। Old Pension Scheme और दूसरी मांगें भी शामिल DA के अलावा कर्मचारी Old Pension Scheme (OPS), ACP योजना, वेतन विसंगतियों को दूर करने और विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को भी उठा रहे हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इन मांगों पर सरकार के साथ लंबे समय से चर्चा चल रही है। अब हड़ताल खत्म होने के बाद उम्मीद है कि बातचीत के जरिए इन मामलों का समाधान निकलेगा। ‘No Work, No Pay’ को लेकर भी था विवाद हड़ताल के दौरान सरकार की ओर से ‘No Work, No Pay’ को लेकर सख्त रुख अपनाया गया था। यानी जो कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद नहीं रहेंगे, उनके वेतन को लेकर कार्रवाई की जा सकती थी। इस फैसले के बाद कर्मचारियों और सरकार के बीच विवाद और बढ़ गया था। बाद में दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर आए और कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को वापस लेने की दिशा में सहमति बनी। अब मुख्यमंत्री से बातचीत पर नजर हड़ताल खत्म होने के बाद अब कर्मचारियों की नजर सरकार के साथ होने वाली अगली बातचीत पर है। कर्मचारी संगठन DA, OPS और बाकी लंबित मांगों को मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने रखेंगे। फिलहाल आंदोलन खत्म होने से आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकारी विभागों में रुका हुआ काम फिर से रफ्तार पकड़ सकता है। हालांकि कर्मचारियों की प्रमुख मांगों पर अंतिम फैसला आगामी बैठकों और सरकार के निर्णय के बाद ही साफ होगा। Punjab Employees Strike: आगे क्या? हड़ताल खत्म होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि DA की लंबित किस्तों, OPS और अन्य मांगों पर सरकार कब तक फैसला लेती है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि आंदोलन खत्म करने के बाद सरकार बातचीत को आगे बढ़ाएगी और लंबे समय से लंबित मुद्दों का कोई व्यावहारिक समाधान निकलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Iran

Iran Missile Attack: 5 Tankers पर US Action के बाद जॉर्डन में US Base पर मिसाइल हमला

America और Iran के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी सेना की कार्रवाई के बाद ईरान ने भी जवाबी हमला किया है। अमेरिका ने ईरान से जुड़े पांच Oil Tankers को निशाना बनाया, जिसके बाद ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने के पास करीब 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में पहले से बने तनाव को और बढ़ा दिया है। खासकर Strait of Hormuz में बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ रही है। अमेरिका ने 5 ईरानी Oil Tankers को बनाया निशाना अमेरिकी सेना के अनुसार, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की ओर से अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि जहाज पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया, लेकिन अमेरिकी डिफेंस सिस्टम ने खतरे को नाकाम कर दिया। इसके बाद अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े पांच Oil Tankers के खिलाफ कार्रवाई की। अमेरिका का दावा है कि इन जहाजों का इस्तेमाल ईरान के IRGC और उससे जुड़े नेटवर्क के लिए आर्थिक गतिविधियों में किया जा रहा था। अमेरिकी कार्रवाई से पहले जहाजों पर मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने के निर्देश दिए जाने की बात भी सामने आई है। ईरान का जवाब, US Military Base पर 20 मिसाइलें अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान ने देर नहीं की और जवाबी हमला किया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जॉर्डन के Al-Azraq क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन के अधिकारियों के मुताबिक, करीब 20 मिसाइलें दागी गईं। इनमें से 18 को एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही रोक लिया, जबकि दो मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस हमले में अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है। Strait of Hormuz पर भी बढ़ा दबाव इस पूरे घटनाक्रम में Strait of Hormuz सबसे अहम जगह बनकर सामने आया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने यहां से गुजर रहे कई जहाजों को निशाना बनाया। हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल है। दुनिया के बड़े हिस्से का Oil Supply इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में अगर यहां लंबे समय तक तनाव बना रहता है तो इसका असर International Oil Market पर पड़ सकता है। Crude Oil की कीमतों पर नजर अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। बाजार की सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगर हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित हुई तो Supply Chain पर दबाव पड़ सकता है। इसका असर आगे चलकर भारत समेत कई देशों में पेट्रोल-डीजल और दूसरी पेट्रोलियम आधारित चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। Middle East में Conflict बढ़ने का खतरा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव अब सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा। जॉर्डन और हॉर्मुज जैसे इलाकों में सैन्य गतिविधियां बढ़ने से पूरे Middle East में Conflict फैलने की आशंका बनी हुई है। ईरान समर्थित संगठनों की गतिविधियों ने भी स्थिति को और जटिल बना दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान की अगली रणनीति पर दुनिया की नजर रहेगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों देश तनाव कम करने की दिशा में कोई कदम उठाएंगे या फिर सैन्य कार्रवाई का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CJP

CJP Protest में Student को Notice, CJI भड़के- ‘हमने Action नहीं लेने को कहा था’

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के एक छात्र को CJP प्रदर्शन से जोड़कर नोटिस जारी किए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। CJI ने सवाल किया कि जब सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई नहीं करने को कहा था, तो फिर मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी कैसे कर दिया? सुनवाई के दौरान CJI का रुख काफी सख्त नजर आया। उन्होंने पूछा कि “मजिस्ट्रेट की हिम्मत कैसे हुई?” अदालत ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद छात्रों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं की जा सकती। Student को क्यों भेजा गया था Notice? पूरा मामला गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के लॉ स्टूडेंट अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने 4 सितंबर को छात्र को BNSS की संबंधित धाराओं के तहत नोटिस जारी किया था। नोटिस में छात्र से शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 5 लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के दो जमानती मुचलके देने को कहा गया था। प्रशासन की ओर से इसे एहतियाती कार्रवाई बताया गया। पुलिस की रिपोर्ट में दावा किया गया कि छात्र विश्वविद्यालय के अन्य विद्यार्थियों के बीच कथित तौर पर सरकार विरोधी बातें फैला रहा था और उन्हें CJP के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहा था। छात्र ने Police के आरोपों को नकारा दूसरी तरफ, छात्र अक्षत त्रिपाठी ने पुलिस के इन आरोपों को गलत बताया। उनका कहना है कि वह काफी समय से विश्वविद्यालय नहीं गए थे और उनकी पढ़ाई ऑनलाइन चल रही थी। छात्र के मुताबिक, जिस समय प्रदर्शन हुआ, उस दौरान वह प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट में काम कर रहे थे। ऐसे में उन पर विश्वविद्यालय के छात्रों को प्रदर्शन के लिए उकसाने का आरोप लगाना सही नहीं है। Notice वापस लेने के बाद भी Supreme Court नाराज मामला सामने आने के बाद पुलिस ने नोटिस वापस ले लिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह सवाल उठा कि अगर अदालत ने छात्रों के खिलाफ coercive action से बचने का निर्देश दिया था, तो फिर ऐसा नोटिस जारी ही क्यों किया गया। यही बात सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के तेवरों की बड़ी वजह बनी। अदालत ने मामले से जुड़े दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखने को कहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नोटिस किस आधार पर जारी किया गया था। Supreme Court के पुराने Order का भी जिक्र इस मामले की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट का पहले दिया गया आदेश भी अहम है। रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने 1 सितंबर 2026 को CJP प्रदर्शन से जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज FIRs को रद्द कर दिया था। हालांकि, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के संबंध में अलग स्थिति रखी गई थी। इसके बाद छात्रों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला दिया गया। अदालत ने इसी संदर्भ में नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर सवाल उठाए। अब आगे क्या होगा? फिलहाल सुप्रीम कोर्ट पूरे मामले के तथ्यों को देख रहा है। अदालत ने नोटिस और उससे जुड़े दस्तावेज पेश करने को कहा है। आगे की सुनवाई में यह साफ हो सकता है कि मजिस्ट्रेट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद किस आधार पर छात्र को नोटिस भेजा था। यह मामला सिर्फ एक छात्र को नोटिस देने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए students के protest rights, प्रशासनिक powers और Supreme Court के orders के पालन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। फिलहाल सबकी नजर अगली सुनवाई पर है, जहां यह साफ हो सकता है कि सुप्रीम कोर्ट इस कार्रवाई को लेकर आगे क्या रुख अपनाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

Monsoon Update: बिहार में Flood का खतरा बढ़ा, 8 नदियां उफान पर; UP और Uttarakhand भी बेहाल

मानसून (Monsoon) की बारिश ने एक बार फिर देश के कई हिस्सों में लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। बिहार में नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। कई इलाकों में पानी घरों और सड़कों तक पहुंच गया है। वहीं उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और जलभराव को देखते हुए कुछ जिलों में स्कूल बंद करने का फैसला लिया गया है। उत्तराखंड में बारिश के बीच Landslide ने पहाड़ी इलाकों की चिंता बढ़ा दी है। दूसरी तरफ मध्य प्रदेश में फिलहाल बारिश की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी है। बिहार में नदियों ने बढ़ाई चिंता बिहार में गंगा, कोसी, गंडक समेत कई नदियों का जलस्तर लगातार ऊपर जा रहा है। कई जगहों पर नदियां खतरे के निशान के आसपास या उससे ऊपर बह रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 8 नदियों में उफान की स्थिति बनी हुई है। नदी का पानी बढ़ने का सबसे ज्यादा असर निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है। गांवों में रहने वाले लोगों को रोजमर्रा के काम के लिए भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। खेतों में पानी भरने से फसल को नुकसान की आशंका है, जबकि कई ग्रामीण इलाकों का सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है। पटना, भागलपुर, मुंगेर, वैशाली सहित कई जिलों में प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। 14 जिलों में Flood का असर बिहार में बाढ़ की स्थिति कई जिलों तक फैल चुकी है। करीब 14 जिलों में बाढ़ का असर बताया जा रहा है। बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हैं और कई परिवारों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है। प्रशासन की ओर से राहत शिविर बनाए गए हैं। जरूरत वाले इलाकों में नावों के जरिए लोगों तक मदद पहुंचाई जा रही है। NDRF और SDRF की टीमें भी राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता आने वाले दिनों में नदी के जलस्तर को लेकर है। अगर जलस्तर और बढ़ता है तो निचले इलाकों में स्थिति और मुश्किल हो सकती है। UP में बारिश के बाद School बंद उत्तर प्रदेश में भी बारिश और बाढ़ का असर कई इलाकों में देखने को मिल रहा है। जलभराव और खराब मौसम को देखते हुए कुछ जिलों में स्कूलों को बंद रखने का फैसला किया गया है। स्थानीय प्रशासन की ओर से स्थिति के अनुसार स्कूलों की छुट्टी का आदेश जारी किया जा रहा है। इसलिए किसी एक जिले में स्कूल बंद होने का मतलब पूरे उत्तर प्रदेश में स्कूल बंद होना नहीं है। कई जगह सड़कों पर पानी जमा होने और नदी के बढ़ते जलस्तर ने लोगों की आवाजाही को प्रभावित किया है। प्रशासन की टीमें संवेदनशील इलाकों में राहत कार्यों पर नजर रख रही हैं। Uttarakhand में Landslide से बढ़ी परेशानी पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में बारिश के साथ Landslide का खतरा बना हुआ है। पौड़ी समेत कई पहाड़ी इलाकों में बारिश के कारण पहाड़ों से मलबा आने की घटनाएं सामने आई हैं। बारिश के दौरान पहाड़ी सड़कों पर सफर करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। सड़क पर मलबा आने से यातायात प्रभावित हो सकता है। ऐसे में प्रशासन की ओर से संवेदनशील मार्गों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। स्थानीय लोगों और यात्रियों को मौसम खराब होने पर गैर-जरूरी यात्रा से बचने तथा प्रशासन की Advisory पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है। MP में बारिश से मिली थोड़ी राहत मध्य प्रदेश में फिलहाल बारिश का जोर कुछ कम हुआ है। पिछले दिनों कई हिस्सों में लगातार बारिश के बाद अब मौसम में थोड़ी राहत देखने को मिल रही है। हालांकि राज्य के कुछ इलाकों में बारिश का दौर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। मौसम में बदलाव को देखते हुए नदी, नाले और जलाशयों के आसपास रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। मानसून ने कई राज्यों की बढ़ाई मुश्किल देश के अलग-अलग हिस्सों में मानसून का असर अलग नजर आ रहा है। बिहार में Flood ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है, उत्तर प्रदेश में बारिश और जलभराव के कारण स्कूलों पर असर पड़ा है, जबकि उत्तराखंड में Landslide का खतरा बना हुआ है। मध्य प्रदेश में फिलहाल बारिश की रफ्तार कुछ कम जरूर हुई है। बिहार और उत्तर प्रदेश के बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन की चुनौती लोगों को सुरक्षित रखना और राहत सामग्री समय पर पहुंचाना है। आने वाले दिनों में नदियों के जलस्तर और मौसम की स्थिति पर सभी की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Satya Niketan

Satya Niketan PG Collapse: लीज वाले PG Operator की गिरफ्तारी, 5 आरोपी Police की गिरफ्त में

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक Satya Niketan PG Building Collapse के बाद पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। हादसे में सात लोगों की मौत के बाद अब पुलिस ने उस PG संचालक को भी गिरफ्तार कर लिया है, जिसने हादसे वाली बिल्डिंग लीज पर ली थी। इस गिरफ्तारी के साथ मामले में अब तक पांच लोगों को पकड़ा जा चुका है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर जिस इमारत में छात्र रह रहे थे, उसकी हालत इतनी खराब होने के बावजूद वहां PG का संचालन कैसे होता रहा। हादसे से पहले बिल्डिंग में चल रहे निर्माण और मरम्मत के काम को लेकर भी कई सवाल सामने आए हैं। लीज पर लेकर चला रहा था PG जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार PG संचालक सुधांशु अपने पार्टनर शुभम त्यागी के साथ मिलकर ‘Hostel Days’ नाम से PG चला रहा था। दोनों ने यह इमारत लीज पर ली थी। पुलिस के मुताबिक शुभम त्यागी अभी फरार है और उसकी तलाश की जा रही है। हादसे के बाद जांच एजेंसियां बिल्डिंग के निर्माण, मरम्मत, स्ट्रक्चरल स्थिति और PG संचालन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं। अधिकारियों की कोशिश यह समझने की है कि हादसे के पीछे लापरवाही की कितनी बड़ी भूमिका रही। 27 घंटे तक चला Rescue Operation इमारत गिरने के बाद मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए राहत और बचाव टीमों ने लंबे समय तक काम किया। करीब 27 घंटे चले Rescue Operation के दौरान मलबे को सावधानी से हटाया गया। हादसे में सात लोगों की जान चली गई। घटना के बाद इलाके में रहने वाले छात्रों और उनके परिवारों के बीच भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। MCD के अधिकारियों पर भी कार्रवाई हादसे के बाद सिर्फ PG संचालकों पर ही सवाल नहीं उठे, बल्कि सरकारी निगरानी व्यवस्था भी जांच के घेरे में आ गई। दिल्ली नगर निगम ने दक्षिण जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित किया है। अब यह जांच की जा रही है कि इमारत की स्थिति और वहां चल रहे निर्माण कार्यों की जानकारी संबंधित विभागों को थी या नहीं। अगर नियमों का उल्लंघन हुआ था तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई, यह भी जांच का अहम हिस्सा है। जर्जर इमारतों पर शुरू हुआ Bulldozer Action सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में जर्जर और अवैध निर्माण वाली इमारतों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। MCD ने कई ऐसी संपत्तियों को निशाने पर लिया है, जिनकी स्थिति लोगों के लिए खतरा मानी जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक कार्रवाई के दौरान 17 इमारतों को गिराया गया और पांच संपत्तियों को सील किया गया। प्रशासन का कहना है कि खतरनाक इमारतों की पहचान कर जरूरी कदम उठाए जाएंगे। इस कार्रवाई का मकसद सिर्फ हादसे के बाद प्रतिक्रिया देना नहीं, बल्कि उन इमारतों की पहले से पहचान करना है जो भविष्य में बड़ा खतरा बन सकती हैं। Delhi PG System पर उठे गंभीर सवाल सत्य निकेतन की घटना ने दिल्ली के PG और निजी हॉस्टल सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पढ़ाई और नौकरी की तैयारी के लिए देशभर से दिल्ली आने वाले युवा बड़ी संख्या में PG में रहते हैं। ऐसे में सिर्फ कमरा और किराया देखना पर्याप्त नहीं है। बिल्डिंग की मजबूती, Fire Safety और जरूरी मंजूरियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। हादसे के बाद दिल्ली सरकार PG और निजी हॉस्टलों के लिए नियमों को ज्यादा सख्त करने की दिशा में काम कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था में लाइसेंस, Police Verification, Structural Safety और Fire Safety जैसे पहलुओं को शामिल किया जा सकता है। आगे क्या होगा? अब पुलिस की जांच के साथ प्रशासन की कार्रवाई भी अहम होगी। एक तरफ हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका तय की जा रही है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली में दूसरी जर्जर इमारतों की पहचान का काम भी शुरू हो गया है। सत्य निकेतन हादसे ने यह सवाल जरूर सामने ला दिया है कि किसी इमारत में लोगों को रहने की अनुमति देने से पहले उसकी सुरक्षा की जांच कितनी गंभीरता से की जाती है। अब जरूरत सिर्फ कार्रवाई की नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाने की है जिससे किसी परिवार को दोबारा इसी तरह के हादसे का दर्द न झेलना पड़े। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
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गांधीनगर में बड़ा हादसा: निर्माणाधीन इमारत पर गिरी क्रेन, 10-15 मजदूरों के दबे होने की आशंका

गांधीनगर। गुजरात के गांधीनगर के पास कुडासन इलाके में बुधवार को एक बड़ा हादसा हो गया। निर्माणाधीन इमारत पर अचानक भारी क्रेन गिर गई। हादसे के समय नीचे काम कर रहे करीब 10 से 15 मजदूरों के मलबे और क्रेन के भारी हिस्सों के नीचे दबे होने की आशंका है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। मलबे में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है। मलबा हटाने के लिए दूसरी क्रेन बुलाई गई क्रेन और निर्माण सामग्री के भारी मलबे को हटाने के लिए मौके पर एक और क्रेन बुलाई गई है। बचाव दल मलबे के नीचे दबे मजदूरों तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दमकल की चार से ज्यादा गाड़ियां मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में जुटी हैं। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस भी घटनास्थल पर तैनात की गई हैं। फिलहाल हादसे में कितने लोग घायल हुए हैं या किसी की मौत हुई है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। नगर आयुक्त और डिप्टी CM मौके पर पहुंचे हादसे की गंभीरता को देखते हुए गांधीनगर नगर आयुक्त और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों की निगरानी में राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे मजदूरों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालना है। फिलहाल बचाव अभियान जारी है और हादसे से जुड़ी विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

Apple iPhone 18 Pro और Pro Max लॉन्च, A20 Pro चिप और 45 घंटे तक की बैटरी; पहली बार फोल्डेबल iPhone भी

कैलिफोर्निया। Apple ने अपने नए iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने दोनों प्रीमियम मॉडल्स में नए डिजाइन, A20 Pro चिप, बेहतर AI फीचर्स और लंबी बैटरी लाइफ पर खास जोर दिया है। लॉन्च इवेंट नए CEO जॉन टर्नस के नेतृत्व में Apple का पहला बड़ा प्रोडक्ट प्रेजेंटेशन भी रहा। दोनों मॉडल चार कलर ऑप्शन में पेश किए गए हैं—डीप ब्लैक, सिल्वर, ग्लेशियर और बरगंडी। iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत 1,199 डॉलर और iPhone 18 Pro Max की 1,299 डॉलर रखी गई है। दोनों के बेस मॉडल में 256GB स्टोरेज दी गई है। A20 Pro चिप से मिलेगा तेज परफॉर्मेंस iPhone 18 Pro सीरीज में नया A20 Pro प्रोसेसर दिया गया है। Apple के मुताबिक यह 2nm टेक्नोलॉजी पर आधारित नई आर्किटेक्चर वाली चिप है। इसमें 6-कोर CPU और नया GPU दिया गया है, जबकि कंपनी ने GPU परफॉर्मेंस में करीब 40 फीसदी तक सुधार का दावा किया है। Apple Intelligence और Siri को भी नए हार्डवेयर के साथ ज्यादा सक्षम बनाया गया है। Siri में AI क्षमताओं और अधिक नैचुरल वॉइस अनुभव पर जोर दिया गया है। कंपनी का कहना है कि डिवाइस पर AI प्रोसेसिंग के साथ प्राइवेसी को भी प्राथमिकता दी गई है। बैटरी लाइफ में बड़ा अपग्रेड iPhone 18 Pro और Pro Max में अब तक की सबसे लंबी iPhone बैटरी लाइफ में से एक मिलने का दावा किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक iPhone 18 Pro करीब 24 घंटे और Pro Max करीब 30 घंटे तक सामान्य उपयोग में चल सकता है। वहीं वीडियो प्लेबैक में Pro मॉडल करीब 36 घंटे और Pro Max करीब 45 घंटे तक का बैकअप दे सकता है। Pro Max का 45 घंटे का वीडियो प्लेबैक इस सीरीज की सबसे बड़ी बैटरी उपलब्धियों में से एक है। नई फास्ट चार्जिंग तकनीक भी दी गई है। कंपनी के अनुसार फोन करीब 15 मिनट की चार्जिंग में 50 फीसदी तक चार्ज हो सकता है। कैमरा सिस्टम में भी बड़ा बदलाव iPhone 18 Pro सीरीज में कैमरा सिस्टम को भी अपग्रेड किया गया है। मुख्य कैमरे में 48MP सेंसर के साथ डायनेमिक/वेरिएबल अपर्चर दिया गया है, जिससे अलग-अलग रोशनी की परिस्थितियों में फोटो क्वालिटी और लो-लाइट परफॉर्मेंस बेहतर करने में मदद मिलेगी। वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए भी नए प्रो कंट्रोल और 4K Dolby Vision HDR टाइम-लैप्स जैसे फीचर्स जोड़े गए हैं। Apple का पहला फोल्डेबल iPhone भी लॉन्च Apple के इस इवेंट की सबसे बड़ी खासियत कंपनी का पहला फोल्डेबल iPhone भी रहा। यह Apple के स्मार्टफोन डिजाइन में लंबे समय बाद सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। Reuters के मुताबिक फोल्डेबल iPhone की कीमत 2,000 डॉलर से ज्यादा हो सकती है और कंपनी ने इसे लंबे समय तक इंजीनियरिंग चुनौतियों पर काम करने के बाद पेश किया है। इस साल Apple का फोकस प्रीमियम iPhone मॉडल्स और फोल्डेबल डिवाइस पर ज्यादा रहा है। बेस iPhone मॉडल के लॉन्च शेड्यूल में भी बदलाव किया गया है। नए CEO जॉन टर्नस का पहला बड़ा प्रेजेंटेशन 1 सितंबर को Tim Cook के बाद Apple के CEO बने John Ternus के लिए यह पहला बड़ा प्रोडक्ट लॉन्च प्रेजेंटेशन रहा। Ternus इससे पहले Apple के हार्डवेयर प्रमुख के तौर पर काम कर चुके हैं। Apple के इस इवेंट में iPhone के अलावा नए वियरेबल्स और अन्य प्रोडक्ट्स की घोषणाएं भी की गईं। कंपनी के लिए यह लॉन्च नए CEO के नेतृत्व में उसकी अगली प्रोडक्ट रणनीति की शुरुआत के तौर पर भी अहम माना जा रहा है।

दक्षिण अफ्रीका ने नामीबिया को 99 रन से हराया, डेब्यू में जॉर्डन हरमन ने जड़ा 150 रन का तूफानी शतक

विंडहोक। दक्षिण अफ्रीका ने नामीबिया के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला 99 रन से जीत लिया। दक्षिण अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 348/6 रन बनाए। जवाब में बारिश से दो बार प्रभावित नामीबिया की टीम 38 ओवर में 162/8 रन ही बना सकी। मुकाबले का फैसला DLS मेथड से हुआ। दक्षिण अफ्रीका की जीत के हीरो डेब्यू कर रहे जॉर्डन हरमन रहे, जिन्होंने शानदार 150 रन की पारी खेली। वहीं प्रेनेलन सब्रायेन ने करियर की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी करते हुए चार विकेट झटके। सीरीज का दूसरा वनडे 11 सितंबर को विंडहोक में खेला जाएगा। डेब्यू पर 150 रन, हरमन ने बनाया बड़ा रिकॉर्ड जॉर्डन हरमन वनडे डेब्यू पर 150 रन बनाने वाले संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा स्कोर करने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। इससे पहले मैथ्यू ब्रीट्जके ने भी अपने वनडे डेब्यू पर 150 रन की पारी खेली थी। हरमन दक्षिण अफ्रीका की ओर से वनडे डेब्यू पर शतक लगाने वाले पांचवें बल्लेबाज भी बन गए। उनसे पहले कॉलिन इंग्राम, टेम्बा बावुमा, रीजा हेंड्रिक्स और मैथ्यू ब्रीट्जके यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। हरमन ने टोनी डी जॉर्जी के साथ दूसरे विकेट के लिए 190 रन की साझेदारी की। डी जॉर्जी ने 84 गेंदों पर 72 रन बनाए और वनडे करियर का तीसरा अर्धशतक पूरा किया। शुरुआती 20 ओवर में 100 रन, इसके बाद बढ़ी रफ्तार दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत बहुत तेज नहीं रही। नामीबिया के गेंदबाजों को शुरुआती ओवरों में पिच से कुछ मूवमेंट मिली। रूबेन ट्रम्पेलमैन ने हरमन के बल्ले का बाहरी किनारा भी छुआ और टॉप-एज का मौका बनाया, लेकिन विकेट नहीं मिल सका। सातवें ओवर में कॉनर एस्टरहुइजन ने शॉर्ट गेंद को पुल करने की कोशिश की, लेकिन फाइन लेग पर जैक ब्रासेल ने कैच पकड़ लिया। इससे शुरुआती साझेदारी 27 रन पर टूट गई। दूसरी ओर डी जॉर्जी को भी कई बार जीवनदान मिला। उन्होंने स्लिप के बाहर एज किया और विकेटकीपर के पास भी कैच का मौका बना, लेकिन नामीबिया उसे भुना नहीं सका। एक रनआउट का मौका भी टीम ने गंवा दिया। दक्षिण अफ्रीका ने 20 ओवर में 100/1 रन बनाए। इसके बाद अगले सात ओवर में 50 रन जोड़कर टीम ने रन गति बढ़ाई। इसी दौरान हरमन ने अपना अर्धशतक पूरा किया, जबकि डी जॉर्जी ने 64 गेंदों में फिफ्टी लगाई। शतक के बाद हरमन ने बदला अंदाज हरमन ने 93 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। शतक के बाद उन्होंने आक्रामक अंदाज अपनाया और तेजी से रन बनाए। सेंचुरी के बाद उन्होंने पांच चौके और दो छक्के लगाए। हरमन ने मैदान के दोनों हिस्सों में शानदार शॉट खेले। कवर और मिडऑफ के बीच उन्होंने 59 रन बटोरे। उनके बाद क्रीज पर आए डेवाल्ड ब्रेविस ने महज दो गेंद बाद नो-लुक सिक्स लगाकर पारी को और रोमांचक बना दिया। आखिरी 10 ओवर में गिरे चार विकेट दक्षिण अफ्रीका ने आखिरी 10 ओवर की शुरुआत 266/2 के स्कोर से की थी। उस समय टीम के 350 रन के पार जाने की उम्मीद थी, लेकिन नामीबिया के गेंदबाजों ने वापसी की। हरमन ने बैक-ऑफ-द-हैंड स्लोअर गेंद को बैकवर्ड पॉइंट के ऊपर से खेलने की कोशिश की, लेकिन कैच लॉरेन स्टीनकैंप के हाथों में चला गया। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका ने केवल 58 रन के अंदर चार विकेट गंवा दिए। ट्रम्पेलमैन ने इनमें से तीन विकेट लिए। डेवाल्ड ब्रेविस डीप स्क्वायर लेग पर कैच हुए, रुबिन हरमन LBW आउट हुए और जेसन स्मिथ भी बड़ा शॉट लगाने के प्रयास में आउट हो गए। आखिर में कॉर्बिन बॉश ने 24 गेंदों पर नाबाद 39 रन बनाकर दक्षिण अफ्रीका को 348/6 तक पहुंचाया। नामीबिया की शुरुआत रही बेहद धीमी 349 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी नामीबिया की शुरुआत बेहद धीमी रही। टीम ने शुरुआती 10 ओवर में सिर्फ 24 रन बनाए। दूसरे से 12वें ओवर के बीच लगातार 10 ओवर तक कोई बाउंड्री नहीं आई। एलेक्स बुसिंग-वोल्शेंक 12 रन बनाकर फोर्टुइन की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने गए। लॉन्गऑफ पर जेसन स्मिथ के पास कैच आया, लेकिन गेंद उनके हाथ से निकल गई। हालांकि अगली ही गेंद पर बुसिंग-वोल्शेंक ने क्वेना मफाका की गेंद पर गलत लाइन में शॉट खेला और विकेटकीपर के हाथों कैच आउट हो गए। जन फ्रायलिंक भी इस मुकाबले में प्रभाव नहीं छोड़ सके। उन्होंने 16 गेंदों पर सात रन बनाए और मफाका की गेंद पर बोल्ड हो गए। 73/3 के स्कोर पर बारिश ने रोका खेल दूसरे ओपनर मालन क्रुगर का संघर्ष 19वें ओवर में खत्म हुआ। वह सब्रायेन की गेंद पर फ्लिक करने से चूक गए और LBW आउट हो गए। 22वें ओवर में नामीबिया का स्कोर 73/3 था, तभी विंडहोक में बारिश शुरू हो गई और मैच रोकना पड़ा। करीब 1 घंटे 18 मिनट बाद खेल दोबारा शुरू हुआ। बारिश के कारण नामीबिया का लक्ष्य घटाकर 38 ओवर में 301 रन कर दिया गया। टीम को बचे हुए 16.3 ओवर में 225 रन बनाने थे। दूसरी बारिश के बाद 7 ओवर में चाहिए थे 167 रन खेल दोबारा शुरू होने के कुछ ही समय बाद लॉरेन स्टीनकैंप ने बॉश की गेंद को हवा में खेल दिया। शॉर्ट कवर पर सब्रायेन ने कैच पकड़ लिया और इसके बाद नामीबिया के विकेट तेजी से गिरने लगे। गेरहार्ड इरास्मस ने कुछ अच्छे शॉट लगाते हुए दो चौके लगाए, लेकिन बारिश ने एक बार फिर मैच रोक दिया। करीब आधे घंटे बाद खेल दोबारा शुरू हुआ। उस समय नामीबिया को केवल 7 ओवर में 167 रन बनाने थे। यह लक्ष्य लगभग असंभव था। नामीबिया ने इस दौरान 67 रन के अंदर चार और विकेट गंवा दिए और 38 ओवर में 162/8 रन ही बना सकी। इस तरह दक्षिण अफ्रीका ने मुकाबला 99 रन से अपने नाम कर सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली।

छत्तीसगढ़ कैबिनेट के बड़े फैसले: स्टार्टअप-NIPUN मिशन के लिए 500 करोड़, कर्मचारियों की उम्र सीमा 45 साल

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में हुई कैबिनेट बैठक में युवाओं, कर्मचारियों, निर्यात और न्यायिक अधोसंरचना से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। सरकार ने अगले पांच वर्षों के लिए मुख्यमंत्री स्टार्टअप और NIPUN मिशन के तहत 500 करोड़ रुपए खर्च करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा सरकारी और संबद्ध संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को दूसरी शासकीय सेवाओं और उच्च पदों के लिए आवेदन करने में बड़ी राहत दी गई है। अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। वहीं, छत्तीसगढ़ को प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30 को भी मंजूरी दी गई है। स्टार्टअप और NIPUN मिशन के लिए 500 करोड़ कैबिनेट ने युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास, उद्यमिता और नवाचार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री स्टार्टअप और NIPUN मिशन को मंजूरी दी है। इसके लिए अगले पांच वर्षों में 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। मिशन के तहत प्रदेश के सभी 33 जिलों में उद्यमिता विकास केंद्र, 100 इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब और 5 इंडस्ट्री एक्सीलेंस सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही NIPUN JOB Engine के माध्यम से उद्योगों की जरूरत के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें औपचारिक रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30 को मंजूरी राज्य को देश के प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30 को मंजूरी दी है। नीति के तहत मजबूत निर्यात इकोसिस्टम और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। प्रदेश के उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों को बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों के मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना भी नीति का प्रमुख लक्ष्य होगा। नवा रायपुर में 200 करोड़ की लागत से बनेगा NSTI कैबिनेट ने नवा रायपुर अटल नगर के ग्राम तेंदुवा में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (NSTI) की स्थापना के लिए 10 एकड़ शासकीय भूमि केंद्र सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता निदेशालय को मुफ्त उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। करीब 200 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस संस्थान में आधुनिक शैक्षणिक, प्रशासनिक और हॉस्टल सुविधाएं विकसित की जाएंगी। NSTI में हर साल दीर्घकालीन पाठ्यक्रमों के तहत करीब 1,000 प्रशिक्षुओं और अल्पकालीन कार्यक्रमों में 3,000 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण देने की क्षमता होगी। सरकारी कर्मचारियों की अधिकतम आयु सीमा 45 साल कैबिनेट ने राज्य शासन के स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों के साथ निगम-मंडल, स्वशासी संस्थाओं के कर्मचारियों, संविदाकर्मियों और नगर सैनिकों के लिए अधिकतम आयु सीमा बढ़ाने को मंजूरी दी है। अब दूसरी शासकीय सेवाओं और उच्च पदों के लिए आवेदन करने की अधिकतम आयु सीमा 38 से बढ़ाकर 45 वर्ष किए जाने का फैसला लिया गया है। सरकार के इस फैसले से संबंधित कर्मचारियों को दूसरी सरकारी सेवाओं और उच्च पदों पर आवेदन करने के लिए अतिरिक्त अवसर मिल सकेंगे। इसके लिए राज्य शासन की ओर से एकीकृत स्थायी दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। दुर्ग में बनेगा नया जिला न्यायालय भवन दुर्ग जिला न्यायालय के नए भवन के निर्माण का रास्ता भी कैबिनेट के फैसले से साफ हो गया है। सरकार ने ग्राम तितुरडीह में बीआईटी कॉलेज के पास 4 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके बदले ग्राम पाहंदा, तहसील पाटन में 5.024 हेक्टेयर शासकीय भूमि भिलाई इस्पात संयंत्र को दी जाएगी। दोनों जमीनों का वर्तमान मूल्य लगभग समान बताया गया है। इस फैसले के बाद दुर्ग में आधुनिक सुविधाओं से लैस और सुव्यवस्थित जिला न्यायालय परिसर के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

हर्षित राणा अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज से हो सकते हैं बाहर, हैमस्ट्रिंग चोट से पूरी तरह नहीं उबरे

भारत के तेज गेंदबाज हर्षित राणा अफगानिस्तान के खिलाफ 13 सितंबर से शुरू होने वाली तीन मैचों की टी-20 सीरीज से बाहर हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राणा अभी अपनी हैमस्ट्रिंग चोट से पूरी तरह फिट नहीं हुए हैं और उन्हें मैदान पर वापसी के लिए थोड़ा और समय लग सकता है। हर्षित राणा को अफगानिस्तान के खिलाफ तीनों टी-20 मैचों के लिए फिटनेस के आधार पर भारतीय टीम में शामिल किया गया है। उन्हें आगामी एशियन गेम्स के लिए चुनी गई भारतीय टीम में भी जगह मिली है। BCCI के एक सूत्र के मुताबिक, राणा अभी चोट से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं और उन्हें फिट होने में और समय लगेगा। इंग्लैंड दौरे पर खेला था आखिरी मुकाबला हर्षित राणा ने भारत के लिए अपना आखिरी मुकाबला इंग्लैंड दौरे के दौरान खेला था। इसके बाद हैमस्ट्रिंग चोट के कारण वह टीम से बाहर चल रहे हैं। राणा को भी वॉशिंगटन सुंदर जैसी हैमस्ट्रिंग चोट से जूझना पड़ा है। हालांकि, सुंदर अब पूरी तरह फिट हो चुके हैं और उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज के लिए फिट घोषित किया गया है। बुमराह और नितीश भी फिटनेस के आधार पर टीम में अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज के लिए तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और ऑलराउंडर नितीश रेड्डी को भी फिटनेस के आधार पर टीम में शामिल किया गया है। बुमराह बाएं घुटने की चोट से उबर रहे हैं। वह जुलाई में इंग्लैंड दौरे के बाद से क्रिकेट से दूर हैं। वहीं, नितीश रेड्डी क्वाड्रिसेप्स की चोट से रिकवरी कर रहे हैं। BCCI सूत्र के अनुसार, बुमराह और नितीश दोनों की फिटनेस में सुधार हो रहा है और उनकी वापसी सही दिशा में है। अफगानिस्तान सीरीज के बाद एशियन गेम्स भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की टी-20 सीरीज के मुकाबले 13 सितंबर से दिल्ली में खेले जाने हैं। इसके बाद भारतीय टीम 22 सितंबर को टोक्यो में जापान के खिलाफ एकमात्र मैच खेलेगी। भारतीय टीम इसके बाद 28 सितंबर से एशियन गेम्स में अपना अभियान शुरू करेगी। हर्षित राणा को एशियन गेम्स की टीम में भी शामिल किया गया है। ऐसे में उनकी फिटनेस भारतीय टीम के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अफगानिस्तान सीरीज से पहले राणा की फिटनेस पर अंतिम फैसला उनकी रिकवरी और फिटनेस टेस्ट के आधार पर लिया जा सकता है।

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