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Skin Infection in Summer: गर्मियों में क्यों बढ़ते हैं स्किन रैश और इन्फेक्शन? जानें बचाव के 10 आसान टिप्स

Skin Infection in Summer: गर्मियों में क्यों बढ़ते हैं स्किन रैश और इन्फेक्शन? जानें बचाव के 10 आसान टिप्स

Skin Infection in Summer : गर्मी का मौसम अपने साथ कई स्वास्थ्य समस्याएं लेकर आता है। इनमें स्किन इन्फेक्शन और स्किन रैश सबसे आम समस्याओं में से एक हैं। तेज धूप, अत्यधिक पसीना और बढ़ी हुई नमी (उमस) त्वचा पर बैक्टीरिया और फंगस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बना देते हैं। यही कारण है कि गर्मियों में खुजली, लाल चकत्ते, घमौरियां और फंगल इन्फेक्शन के मामले बढ़ जाते हैं। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, थोड़ी सी सावधानी और सही स्किन केयर रूटीन अपनाकर इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। गर्मियों में स्किन इन्फेक्शन क्यों बढ़ते हैं? स्किन इन्फेक्शन से बचने के 10 आसान टिप्स 1. त्वचा को साफ रखें दिन में कम से कम दो बार नहाएं और पसीना आने के बाद त्वचा को साफ करें। 2. सूती कपड़े पहनें कॉटन के ढीले और आरामदायक कपड़े त्वचा को सांस लेने में मदद करते हैं। 3. शरीर को सूखा रखें पसीना आने के बाद तौलिये से त्वचा को अच्छी तरह सुखाएं। 4. पर्याप्त पानी पिएं दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर और त्वचा हाइड्रेट रहती है। 5. सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन जरूर लगाएं। 6. गीले कपड़े तुरंत बदलें व्यायाम या पसीना आने के बाद गीले कपड़े ज्यादा देर तक न पहनें। 7. निजी सामान साझा न करें तौलिया, कपड़े और अन्य निजी वस्तुएं दूसरों के साथ साझा करने से बचें। 8. संतुलित आहार लें फल, सब्जियां और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन त्वचा की सेहत के लिए फायदेमंद होता है। 9. खुजली होने पर त्वचा न खुजलाएं बार-बार खुजलाने से संक्रमण बढ़ सकता है। 10. समस्या बढ़ने पर डॉक्टर से सलाह लें यदि रैश, खुजली या संक्रमण लंबे समय तक बना रहे तो त्वचा विशेषज्ञ से संपर्क करें।
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Ebola

WHO Health Emergency on Ebola: कांगो में बिगड़े हालात, भारत समेत दुनिया अलर्ट पर

अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में फैले Ebola Virus outbreak ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। तेजी से बढ़ते मामलों और मौतों के बीच World Health Organization (WHO) ने इसे Global Health Emergency (PHEIC) घोषित कर दिया है। पड़ोसी देश युगांडा तक संक्रमण पहुंचने के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। कांगो में Ebola का कहर, 20 दिनों में बिगड़े हालात कांगो के कई हिस्सों में Ebola संक्रमण तेजी से फैल रहा है और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव है। स्थानीय प्रशासन और हेल्थ टीम लगातार कंट्रोल की कोशिश में जुटी हैं, लेकिन हालात अभी भी चिंताजनक बने हुए हैं। नया Ebola Strain क्यों बढ़ा रहा चिंता? इस बार फैला हुआ वायरस Bundibugyo Ebola strain बताया जा रहा है, जो पहले भी खतरनाक माना गया है। इसकी वजह से चिंता और बढ़ गई है क्योंकि: WHO ने क्यों घोषित की Global Health Emergency? WHO ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर मानते हुए कहा है कि: WHO ने इसे एक “serious public health threat” बताया है और सभी देशों को अलर्ट रहने की सलाह दी है। India Ebola Alert: भारत क्यों है सतर्क? भारत में अभी तक कोई Ebola केस नहीं मिला है, लेकिन सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में है। भारत में फिलहाल जोखिम कम है, लेकिन international travel के कारण सतर्कता जरूरी मानी जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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इबोला

इबोला वायरस खतरा बढ़ा: भारत सरकार ने जारी की नई यात्रा चेतावनी

दुनिया के कुछ हिस्सों में इबोला वायरस (Ebola Virus Disease) के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए भारत सरकार ने नागरिकों के लिए एक नई ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे फिलहाल जोखिम वाले क्षेत्रों की गैर-जरूरी यात्रा से बचें और पूरी सावधानी बरतें। सरकार का कहना है कि यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है, ताकि संभावित संक्रमण को समय रहते रोका जा सके और देश में किसी भी तरह के खतरे से बचाव किया जा सके। क्या है इबोला वायरस? Ebola Virus Disease एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलती है। यह बीमारी तेजी से शरीर को प्रभावित कर सकती है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा भी साबित हो सकती है। प्रमुख लक्षण: किन देशों को लेकर अलर्ट? सरकार ने किसी एक देश की स्पष्ट सूची जारी नहीं की है, लेकिन सामान्य तौर पर इबोला के मामले अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में अधिक पाए जाते हैं। ऐसे में इन प्रभावित क्षेत्रों की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे क्षेत्रों में सावधानी और जागरूकता बेहद जरूरी है। सरकार की ट्रैवल एडवाइजरी (Important Guidelines) भारत सरकार ने यात्रियों के लिए कुछ जरूरी निर्देश जारी किए हैं: एयरपोर्ट और बॉर्डर पर बढ़ी निगरानी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स और सीमा क्षेत्रों में निगरानी को और सख्त कर दिया है। संदिग्ध मामलों की तुरंत पहचान और आइसोलेशन के लिए मेडिकल टीमों को अलर्ट पर रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच और रोकथाम से इस वायरस के फैलाव को काफी हद तक रोका जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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इबोला

Delhi Airport Health Alert: इबोला को लेकर भारत सतर्क, हाई-रिस्क देशों के यात्रियों की जांच तेज

दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट पर इबोला वायरस को लेकर सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रखा गया है। अफ्रीकी देशों में बढ़ते संक्रमण के मामलों और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों की चेतावनी के बाद भारत ने यह एहतियाती कदम उठाया है। हालांकि देश में अभी तक इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन सरकार किसी भी संभावित खतरे को रोकने के लिए पहले से ही सतर्क हो गई है। क्यों बढ़ी चिंता? पिछले कुछ समय से डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC), युगांडा और साउथ सूडान जैसे देशों में इबोला वायरस के मामले रिपोर्ट हुए हैं।विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी स्थिति पर नजर रखते हुए इसे गंभीर मानते हुए देशों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इसी के बाद भारत ने एयरपोर्ट स्तर पर स्क्रीनिंग और मॉनिटरिंग को और मजबूत कर दिया है। दिल्ली एयरपोर्ट पर क्या हो रहा है? IGI एयरपोर्ट पर आने वाले यात्रियों, खासकर हाई-रिस्क देशों से आने वालों के लिए: जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। किन देशों पर खास नजर? फिलहाल जिन देशों से आने वाले यात्रियों की सख्त जांच हो रही है: इन देशों को संक्रमण जोखिम के आधार पर “हाई रिस्क जोन” में रखा गया है। इबोला के शुरुआती लक्षण स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इबोला के लक्षण अचानक दिखाई दे सकते हैं, जैसे: भारत की मौजूदा स्थिति सरकारी सूत्रों के मुताबिक: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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WHO

WHO Ebola Warning: कांगो और युगांडा में फैला वायरस, घोषित हुई Health Emergency

अफ्रीका में इबोला वायरस का नया प्रकोप एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ा रहा है। हालात को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे Public Health Emergency of International Concern (PHEIC) घोषित कर दिया है, यानी अब यह एक वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थिति बन चुका है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में संक्रमण के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं और मौतों की संख्या भी बढ़ रही है। अफ्रीका में कहां फैला है इबोला? ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले मध्य और पूर्वी अफ्रीका के दो देशों में मिले हैं: युगांडा में मिले कुछ मरीज हाल ही में कांगो से यात्रा करके आए थे, जिससे क्रॉस-बॉर्डर संक्रमण का खतरा और बढ़ गया है। अब तक क्या है स्थिति? उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक हालात चिंताजनक हैं: इन आंकड़ों ने स्वास्थ्य एजेंसियों को तुरंत कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया है। WHO की चेतावनी क्या कहती है? World Health Organization ने साफ कहा है कि यह स्थिति अब सिर्फ किसी एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खतरा बन सकती है। हालांकि WHO ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह स्थिति महामारी (pandemic) घोषित नहीं हुई है, लेकिन अगर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो हालात बिगड़ सकते हैं। कौन सा वायरस स्ट्रेन जिम्मेदार है? इस बार का प्रकोप Ebola virus disease के Bundibugyo strain से जुड़ा बताया जा रहा है। यह स्ट्रेन अपेक्षाकृत कम पाया जाता है, लेकिन इसे गंभीर और खतरनाक माना जाता है। इबोला कैसे फैलता है? इबोला वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे संपर्क से फैलता है, खासकर: क्यों बढ़ रही है चिंता? इबोला कोई सामान्य वायरस नहीं है। इसकी वजह से चिंता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Hantavirus

Hantavirus Cases बढ़ने से दुनिया अलर्ट, WHO बोला- घबराएं नहीं लेकिन रहें सावधान

दुनियाभर में एक बार फिर Hantavirus को लेकर चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है। हाल ही में सामने आए मामलों के बाद World Health Organization (WHO) ने इस वायरस को लेकर बड़ा अपडेट जारी किया है। WHO का कहना है कि फिलहाल जो मामले सामने आए हैं, उनमें “Andes Virus” स्ट्रेन मिला है, जो बेहद दुर्लभ परिस्थितियों में इंसान से इंसान में फैल सकता है। हालांकि राहत की बात यह है कि विशेषज्ञ इसे Covid-19 जैसी महामारी बनने वाला खतरा नहीं मान रहे हैं। Cruise Ship से सामने आए कई मामले हाल के दिनों में MV Hondius नाम की एक क्रूज शिप पर Hantavirus संक्रमण के कई मामले सामने आए। रिपोर्ट्स के मुताबिक 10 से ज्यादा यात्री संक्रमित पाए गए, जबकि 3 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बाद स्वास्थ्य एजेंसियों ने कई देशों में यात्रियों की निगरानी शुरू कर दी है। WHO का कहना है कि अभी संक्रमण सीमित स्तर पर है, लेकिन लगातार बढ़ते मामलों ने चिंता जरूर बढ़ाई है। इंसानों में कितने समय तक रह सकता है Hantavirus? हालिया रिसर्च और मेडिकल रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि Andes Virus पुरुषों के शरीर, खासकर semen यानी वीर्य में लंबे समय तक मौजूद रह सकता है। कुछ अध्ययनों में यह अवधि करीब 6 साल तक बताई गई है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस विषय पर अभी और रिसर्च की जरूरत है। विशेषज्ञों के मुताबिक वायरस शरीर के कुछ हिस्सों में लंबे समय तक छिपा रह सकता है, इसलिए संक्रमित लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। कैसे फैलता है यह वायरस? Hantavirus मुख्य रूप से चूहों और अन्य rodents यानी कृंतकों के जरिए फैलता है। संक्रमित चूहों के मल, मूत्र और लार के संपर्क में आने से इंसान संक्रमित हो सकता है। बंद जगहों की सफाई के दौरान वायरस के कण हवा में फैल सकते हैं और सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। WHO और CDC के मुताबिक इंसान से इंसान में संक्रमण बेहद दुर्लभ है और अब तक यह क्षमता मुख्य रूप से Andes Virus स्ट्रेन में ही देखी गई है। Hantavirus के शुरुआती लक्षण क्या हैं? शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य वायरल या फ्लू जैसे लगते हैं। इनमें शामिल हैं: गंभीर मामलों में मरीज के फेफड़ों पर असर पड़ सकता है, जिससे स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। WHO ने लोगों को क्या सलाह दी? WHO ने साफ कहा है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना बेहद जरूरी है। संस्था के अनुसार अभी ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि वायरस तेजी से म्यूटेट होकर बड़े स्तर पर फैल सकता है। बचाव के लिए क्या करें? स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते सावधानी और सही इलाज से Hantavirus के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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AIIMS Bhopal, Dr Tanya Sharma, World Congress of Nephrology 2026, Membranous Nephropathy Research, ICMR Research India, Kidney Disease Study, Japan Conference News

Global Recognition: AIIMS Bhopal की डॉ. तान्या शर्मा ने Japan में बढ़ाया भारत का मान

AIIMS Bhopal की डॉ. तान्या शर्मा ने World Congress of Nephrology 2026 (Japan) में मेम्ब्रेनस नेफ्रोपैथी पर ICMR फंडेड रिसर्च प्रस्तुत कर भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित किया। भोपाल से ग्लोबल मंच तक: AIIMS की डॉक्टर ने दिखाई रिसर्च की ताकत मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के लिए गर्व का क्षण है। एम्स भोपाल (AIIMS Bhopal) की डॉक्टर डॉ. तान्या शर्मा ने जापान के योकोहामा में आयोजित World Congress of Nephrology 2026 में अपने शोध कार्य को प्रस्तुत कर देश का नाम रोशन किया है। यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन किडनी से जुड़ी बीमारियों पर रिसर्च और नई खोजों के लिए दुनियाभर में जाना जाता है, जहां चयनित वैज्ञानिकों और डॉक्टरों को ही अपने कार्य प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। International Society से मिला Travel Grant डॉ. तान्या शर्मा को इस बड़े मंच पर अपने शोध को प्रस्तुत करने के लिए International Society of Nephrology (ISN) की ओर से ट्रैवल ग्रांट भी प्रदान किया गया। यह ग्रांट उन चुनिंदा शोधकर्ताओं को दिया जाता है, जिनका काम वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालने की क्षमता रखता है। किस विषय पर था शोध? डॉ. शर्मा का यह शोध मेम्ब्रेनस नेफ्रोपैथी (Membranous Nephropathy) नामक गंभीर किडनी रोग पर आधारित है। यह शोध ICMR (Indian Council of Medical Research) द्वारा वित्तपोषित है। उनके अध्ययन में इस बीमारी से जुड़े नए एंटीजन (Antigens) की पहचान पर विशेष काम किया गया है। 👉 इस खोज से भविष्य में: भारत के लिए क्यों है यह बड़ी उपलब्धि आज के समय में किडनी से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में भारतीय वैज्ञानिकों का इस स्तर पर रिसर्च प्रस्तुत करना न केवल मेडिकल फील्ड में नई दिशा देता है, बल्कि भारत की रिसर्च क्षमता को भी वैश्विक मंच पर मजबूत करता है। AIIMS Bhopal की यह उपलब्धि सिर्फ एक संस्थान की नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश और देश के लिए गर्व का विषय है। डॉ. तान्या शर्मा जैसे युवा शोधकर्ता भारत को मेडिकल रिसर्च में नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं।
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H5N1

Chennai Bird Flu H5N1 बर्ड फ्लू से सैकड़ों कौवे मरे, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई (Chennai) में Bird Flu H5N1 के मामलों ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। शहर और उसके आसपास के इलाकों में सैकड़ों कौवों की अचानक मौत के बाद जांच की गई, जिसमें H5N1 एवियन इन्फ्लुएंजा वायरस की पुष्टि हुई। इस घटना के सामने आते ही केंद्र और राज्य सरकार हरकत में आ गई है और लोगों के लिए स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की गई है। क्या है पूरा मामला? पिछले कुछ दिनों से चेन्नई के कई इलाकों में सड़क किनारे और रिहायशी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कौवे मृत पाए गए। शुरुआत में इसे सामान्य घटना माना गया, लेकिन जब मौतों की संख्या लगातार बढ़ने लगी, तो प्रशासन ने सैंपल जांच करवाई। रिपोर्ट में सामने आया कि ये मौतें हाई पैथोजेनिक एवियन इन्फ्लुएंजा (H5N1) की वजह से हुई हैं, जो पक्षियों में तेजी से फैलने वाला वायरस है। प्रशासन और सरकार की तैयारी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए: क्या इंसानों को खतरा है? स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, H5N1 वायरस आमतौर पर इंसानों में नहीं फैलता और यह मुख्य रूप से पक्षियों तक सीमित रहता है। फिलहाल चेन्नई में किसी भी व्यक्ति के संक्रमित होने की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, जो लोग सीधे तौर पर पक्षियों के संपर्क में रहते हैं—जैसे पोल्ट्री वर्कर्स—उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। सरकार की एडवाइजरी: क्या करें, क्या न करें सरकार ने आम नागरिकों से अपील की है कि: क्यों जरूरी है सतर्क रहना? भारत में पहले भी अलग-अलग राज्यों में Bird Flu के मामले सामने आ चुके हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि समय पर पहचान, सही जानकारी और सावधानी से इसके फैलाव को रोका जा सकता है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से दूर रहने और केवल सरकारी सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। फिलहाल चेन्नई में हालात नियंत्रण में बताए जा रहे हैं, लेकिन प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। आम लोगों के सहयोग से ही इस तरह की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटना संभव है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Foetus Donation

भारत में पहला Foetus Donation AIIMS Delhi में जैन परिवार ने रचा इतिहास

दिल्ली के AIIMS (All India Institute of Medical Sciences) में इतिहास रचते हुए पहली बार Foetus Donation (भ्रूण दान) किया गया है। यह साहसिक और संवेदनशील निर्णय राजधानी के एक जैन परिवार ने लिया, जब 32 वर्षीय वंदना जैन का पांचवें महीने में गर्भपात हो गया। परिवार ने निजी दुख को समाज और चिकित्सा अनुसंधान के लिए योगदान में बदलकर मिसाल पेश की है। कैसे हुआ पहला Foetus Donation? क्यों है यह Donation इतना महत्वपूर्ण? यह पहला Foetus Donation in India मेडिकल साइंस और शिक्षा के लिए नए दरवाजे खोलेगा। जैन परिवार बना प्रेरणा स्रोत जैन परिवार ने अपने निजी दुख को मानवता और विज्ञान की भलाई में बदल दिया। उनका यह कदम न सिर्फ AIIMS बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। यह योगदान आने वाली पीढ़ियों की मेडिकल रिसर्च और शिक्षा में ऐतिहासिक महत्व रखेगा। AIIMS Delhi का यह पहला Foetus Donation मेडिकल इतिहास का हिस्सा बन गया है। जैन परिवार का साहसिक कदम आने वाले समय में भारत को चिकित्सा अनुसंधान और शिक्षा में नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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drunk man eats snake

🐍 Snake Shock in Banda: नशे में युवक ने निगल लिया जिंदा सांप, मां ने शोर मचाकर बचाई जान

देश हरपल | बांदा (उत्तर प्रदेश) “शराब के नशे में क्या-क्या कर सकता है इंसान?” — इस सवाल का सबसे चौंकाने वाला जवाब मिला है उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से, जहां हरदौली गांव के रहने वाले अशोक नामक युवक ने नशे में घर में घुसे एक जिंदा सांप को ही निगल लिया। कैसे हुआ ये सब? जानकारी के मुताबिक, बबेरू कोतवाली क्षेत्र के हरदौली गांव में रहने वाला अशोक शराब के नशे में बुरी तरह धुत था। उसी वक्त घर के पास एक सांप आ गया। नशे में बेसुध अशोक ने उसे देखा, पकड़कर सीधे मुंह में डाल लिया और चबाना शुरू कर दिया। मां की सूझबूझ से बची जान अशोक की मां सिया दुलारी ने जब यह भयावह दृश्य देखा तो जोर-जोर से चिल्लाने लगीं। घरवालों ने किसी तरह अशोक के मुंह से सांप को निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक वो सांप को खा चुका था। इस डरावनी घटना के बाद तुरंत उसे बबेरू के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया। डॉक्टर भी रह गए दंग CHC के डॉक्टर्स के मुताबिक, यह मामला उनके पूरे करियर का सबसे अजीब और खतरनाक केस था। उन्होंने तुरंत इलाज शुरू किया और राहत की बात ये रही कि सांप ज़हरीला नहीं था, वरना मामला जानलेवा हो सकता था। क्या कहता है एक्सपर्ट? स्थानीय वन विभाग के अनुसार, अगर यह सांप ज़हरीला होता तो स्थिति घातक हो सकती थी। डॉ. महेश तिवारी, जो कि बांदा जिला अस्पताल में चिकित्सा अधिकारी हैं, उन्होंने कहा, “शराब न केवल मानसिक स्थिति को विकृत करती है, बल्कि जानलेवा निर्णय भी करवा सकती है।” सबक क्या है? यह घटना बताती है कि शराब व्यक्ति को किस हद तक बेकाबू बना सकती है। एक सामान्य व्यक्ति कभी भी ऐसा कदम नहीं उठाता, लेकिन नशा इंसान को मौत के मुंह तक ले जा सकता है। आपका क्या कहना है इस चौंकाने वाली घटना पर? कमेंट सेक्शन में बताइए और देश की ऐसी ही रोचक खबरों के लिए जुड़े रहिए देश हरपल से।
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अमरनाथ यात्रा 2026: हाईटेक सुरक्षा कवच में होगी बाबा बर्फानी की यात्रा

Amarnath यात्रा 2026: हाईटेक सुरक्षा कवच में होगी बाबा बर्फानी की यात्रा

Amarnath यात्रा 2026 को लेकर इस बार सुरक्षा व्यवस्था पहले से ज्यादा मजबूत और हाईटेक बनाई जा रही है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने बालटाल मार्ग से लेकर पवित्र अमरनाथ गुफा तक CCTV कैमरों का बड़ा नेटवर्क तैयार किया है। अब यात्रा मार्ग के हर कदम पर नजर रखी जाएगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। प्रशासन के अनुसार, यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां इस बार तकनीक का सहारा लेकर पूरी यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने में जुटी हैं। पहाड़ी रास्तों, संवेदनशील इलाकों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर विशेष कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो 24 घंटे निगरानी करेंगे। सिर्फ CCTV ही नहीं, बल्कि कंट्रोल रूम से लाइव मॉनिटरिंग की भी व्यवस्था की गई है। सुरक्षा बलों और प्रशासन की टीमें हर गतिविधि पर नजर रखेंगी। अगर कहीं भी कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है, तो तुरंत अलर्ट जारी किया जाएगा। यात्रियों की सुविधा के लिए मेडिकल टीम, आपदा राहत दल और हेल्प सेंटर भी तैनात किए जाएंगे। प्रशासन का कहना है कि इस बार यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए आसान बनाने पर विशेष फोकस किया जा रहा है। हर साल की तरह इस बार भी देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए पहुंचेंगे। ऐसे में हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था श्रद्धालुओं को भरोसा और सुरक्षित माहौल देने का काम करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Himachal में भूकंप के तीन झटकों से दहशत, कई मकान क्षतिग्रस्त; पालमपुर में अस्पताल की छत गिरी

Himachal में भूकंप के तीन झटकों से दहशत, कई मकान क्षतिग्रस्त; पालमपुर में अस्पताल की छत गिरी

Himachal Pradesh में शुक्रवार देर रात और शनिवार सुबह भूकंप के तीन तेज झटकों ने लोगों में दहशत फैला दी। लगातार आए झटकों से लोग डरकर अपने घरों से बाहर निकल आए। कई इलाकों में मकानों में दरारें आ गईं, जबकि कुछ जगहों पर दीवारें और छतें भी क्षतिग्रस्त हो गईं। सबसे ज्यादा असर कांगड़ा और पालमपुर इलाके में देखने को मिला। पालमपुर के एक सरकारी अस्पताल की छत का हिस्सा अचानक गिर गया। हादसे के समय अस्पताल में मरीज और स्टाफ मौजूद थे। गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गई, लेकिन लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि पहला झटका महसूस होते ही घरों में रखे सामान हिलने लगे। कई लोग डर के कारण पूरी रात घरों के बाहर खुले मैदानों और सड़कों पर बिताने को मजबूर हुए। बच्चों और बुजुर्गों में खासा डर देखने को मिला। प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और प्रभावित इलाकों का निरीक्षण शुरू किया। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और सतर्क रहें। जिन मकानों में दरारें आई हैं, वहां रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है। भूकंप के झटकों के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। लोग लगातार प्रशासन से अपडेट ले रहे हैं और किसी बड़े नुकसान की आशंका को लेकर चिंतित हैं। मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग हालात पर नजर बनाए हुए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CJI Surya Kant

CJI Surya Kant London Event Row: विदेश में लेक्चर के बीच विवाद, भारत का सख्त रुख

लंदन में आयोजित एक अकादमिक कार्यक्रम के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant) के लेक्चर में कथित तौर पर हंगामे की स्थिति बन गई। इस घटना के बाद भारत में कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है और इसे संस्थागत गरिमा के खिलाफ बताया जा रहा है। London Event में आखिर हुआ क्या? रिपोर्ट्स के अनुसार, लंदन के एक विश्वविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में CJI सूर्यकांत “AI, लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय कानून” जैसे विषय पर संबोधन दे रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने बीच-बीच में सवाल उठाकर और आपत्ति जताकर कार्यक्रम में बाधा डालने की कोशिश की। कुछ देर के लिए माहौल असहज हो गया, हालांकि बाद में कार्यक्रम फिर से सामान्य रूप से आगे बढ़ा। भारत की सख्त प्रतिक्रिया इस घटना के बाद भारत की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। भारतीय उच्चायोग ने इसे “असभ्य और अनुचित व्यवहार” बताया और कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस तरह की हरकतें स्वीकार्य नहीं हैं। सरकारी और कूटनीतिक स्तर पर यह संदेश दिया गया कि न्यायपालिका जैसे संवेदनशील संस्थानों से जुड़े कार्यक्रमों में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखना बेहद जरूरी है। Freedom of Speech vs Institutional Respect इस पूरे मामले ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है कि: कुछ जानकारों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सवाल उठाना स्वाभाविक है, लेकिन उसे व्यवस्थित और सम्मानजनक तरीके से किया जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज जैसे ही घटना से जुड़े वीडियो सामने आए, सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई।कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी बताया, तो कुछ ने इसे “अशोभनीय व्यवहार” करार दिया। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal जा रही टूरिस्ट बस डंपर से टकराई, चालक समेत 12 यात्री घायल

Nepal जा रही टूरिस्ट बस डंपर से टकराई, चालक समेत 12 यात्री घायल

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में शुक्रवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। Nepal जा रही एक टूरिस्ट बस सामने चल रहे डंपर से टकरा गई। हादसे में बस चालक समेत करीब एक दर्जन यात्री घायल हो गए। हादसे के बाद लखनऊ-अयोध्या मार्ग पर करीब डेढ़ घंटे तक यातायात प्रभावित रहा और सड़क पर लंबा जाम लग गया। जानकारी के मुताबिक, बस में सवार यात्री नेपाल घूमने जा रहे थे। सुबह के समय तेज रफ्तार में चल रही बस अचानक अनियंत्रित होकर डंपर से भिड़ गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों को बस से बाहर निकाला और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस और एंबुलेंस टीम ने घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। कुछ यात्रियों को मामूली चोटें आई हैं, जबकि चालक समेत कुछ लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के चलते लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त बस और डंपर को सड़क से हटवाया, जिसके बाद करीब डेढ़ घंटे बाद यातायात सामान्य हो सका। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर समय रहते स्थानीय लोग मदद के लिए नहीं पहुंचते, तो हादसा और भी बड़ा हो सकता था। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

‘तुम प्रेग्नेंट कैसे हो सकती हो?’: ट्विशा से समर्थ के सवाल पर टिकी सीबीआई जांच, प्रेग्नेंसी टर्मिनेट विवाद में नए खुलासे

प्रेग्नेंसी टर्मिनेट विवाद मामले में सीबीआई की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। अब एजेंसी की नजर ट्विशा और समर्थ के बीच हुई बातचीत पर है। जांच के दौरान कुछ ऐसे चैट और बातचीत सामने आई हैं, जिन्होंने इस केस को नया मोड़ दे दिया है। समर्थ ने पूछा- यह बच्चा किसका है? सूत्रों के मुताबिक, समर्थ ने ट्विशा से सवाल किया था कि वह प्रेग्नेंट कैसे हो सकती है और यह बच्चा आखिर किसका है। बताया जा रहा है कि इसी बातचीत के बाद दोनों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। सीबीआई अब इन्हीं सवालों और बातचीत को जांच का अहम हिस्सा मान रही है। डिजिटल सबूत खंगाल रही सीबीआई जांच एजेंसी कॉल रिकॉर्ड, चैट्स और अन्य डिजिटल सबूतों की बारीकी से जांच कर रही है। मामले से जुड़े कई लोगों से पूछताछ भी जारी है। अधिकारियों का मानना है कि दोनों के बीच हुई बातचीत से केस के कई अहम पहलुओं का खुलासा हो सकता है। मानसिक दबाव के एंगल पर भी जांच सीबीआई यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या ट्विशा पर किसी तरह का मानसिक दबाव बनाया गया था। प्रेग्नेंसी टर्मिनेट कराने के पीछे किन परिस्थितियों ने भूमिका निभाई, इस पहलू पर भी जांच की जा रही है। सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। रिश्तों में भरोसा, जिम्मेदारी और महिलाओं के अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि परिवार और करीबी लोग फिलहाल खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी सच्चाई सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और सभी मेडिकल व डिजिटल रिकॉर्ड्स की गहराई से जांच की जा रही है। एजेंसी का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी। अधिक जानकारी के लिए इस मामले से जुड़ी हर बड़ी अपडेट और ताजा खबरें पढ़ने के लिए विजिट करें www.deshharpal.com

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