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Health Update: Alcohol वाली दवाओं पर सरकार सख्त, 12% से ज्यादा Content पर बिना Prescription बिक्री बंद

दवाओं की बिक्री को लेकर सरकार ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब 12 प्रतिशत से ज्यादा Alcohol Content वाली दवाएं बिना डॉक्टर के Prescription के नहीं खरीदी जा सकेंगी। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर Cough Syrup, Tonic और अन्य Liquid Medicines पर देखने को मिलेगा, जिनमें अल्कोहल की मात्रा मौजूद होती है। नए नियमों के बाद मेडिकल स्टोर संचालकों के लिए भी जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। अब उन्हें ऐसी दवाओं की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा और जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराना होगा। Cough Syrup और Tonic पर बढ़ेगी निगरानी कई कफ सिरप और टॉनिक में अल्कोहल का इस्तेमाल दवा को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और उसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए किया जाता है। हालांकि, इन दवाओं के गलत इस्तेमाल की आशंका को देखते हुए सरकार ने इनकी बिक्री पर निगरानी बढ़ाने का फैसला लिया है। अब मेडिकल दुकानदारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 12% से अधिक Alcohol वाली Medicines केवल वैध डॉक्टर की पर्ची के आधार पर ही बेची जाएं। Medical Stores को रखना होगा 3 साल का Record नए नियमों के तहत मेडिकल स्टोर संचालकों को अल्कोहल युक्त दवाओं की खरीद और बिक्री से जुड़ा रिकॉर्ड कम से कम 3 साल तक सुरक्षित रखना होगा। इस रिकॉर्ड में दवा की बिक्री, ग्राहक से जुड़ी जानकारी और Prescription से संबंधित दस्तावेज शामिल हो सकते हैं। जांच के दौरान अगर संबंधित विभाग रिकॉर्ड मांगता है तो दुकानदारों को इसे उपलब्ध कराना होगा। मरीजों के लिए क्या बदलेगा? आम लोगों के लिए राहत की बात यह है कि सभी दवाओं की खरीद पर नया नियम लागू नहीं होगा। यह नियम केवल उन्हीं दवाओं पर लागू होगा जिनमें अल्कोहल की मात्रा तय सीमा से ज्यादा है। अगर किसी मरीज को ऐसी दवा की जरूरत होगी तो उसे डॉक्टर की सलाह और Prescription लेना जरूरी हो सकता है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि दवा का इस्तेमाल सही कारण और सही मात्रा में किया जाए। सरकार ने क्यों लिया यह फैसला? सरकार का उद्देश्य दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकना और Medicine Sale System को ज्यादा सुरक्षित बनाना है। खासतौर पर अल्कोहल वाली दवाओं को लेकर समय-समय पर उठने वाली चिंताओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं की बिक्री में सख्ती से मरीजों को सुरक्षित इलाज उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और बिना जरूरत दवाओं के इस्तेमाल पर रोक लग सकेगी। Pharmacy Sector पर भी पड़ेगा असर नए नियमों के बाद Pharmacy Sector में निगरानी और बढ़ जाएगी। मेडिकल स्टोर्स को अब हर बिक्री में नियमों का पालन करना होगा। बिना Prescription के ऐसी दवाएं बेचने पर दुकानदारों को कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। कुल मिलाकर, 12% से ज्यादा Alcohol Content वाली Medicines को लेकर सरकार का यह नया नियम मरीजों की सुरक्षा और दवाओं के सही इस्तेमाल की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Skin Infection in Summer: गर्मियों में क्यों बढ़ते हैं स्किन रैश और इन्फेक्शन? जानें बचाव के 10 आसान टिप्स

Skin Infection in Summer: गर्मियों में क्यों बढ़ते हैं स्किन रैश और इन्फेक्शन? जानें बचाव के 10 आसान टिप्स

Skin Infection in Summer : गर्मी का मौसम अपने साथ कई स्वास्थ्य समस्याएं लेकर आता है। इनमें स्किन इन्फेक्शन और स्किन रैश सबसे आम समस्याओं में से एक हैं। तेज धूप, अत्यधिक पसीना और बढ़ी हुई नमी (उमस) त्वचा पर बैक्टीरिया और फंगस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बना देते हैं। यही कारण है कि गर्मियों में खुजली, लाल चकत्ते, घमौरियां और फंगल इन्फेक्शन के मामले बढ़ जाते हैं। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, थोड़ी सी सावधानी और सही स्किन केयर रूटीन अपनाकर इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। गर्मियों में स्किन इन्फेक्शन क्यों बढ़ते हैं? स्किन इन्फेक्शन से बचने के 10 आसान टिप्स 1. त्वचा को साफ रखें दिन में कम से कम दो बार नहाएं और पसीना आने के बाद त्वचा को साफ करें। 2. सूती कपड़े पहनें कॉटन के ढीले और आरामदायक कपड़े त्वचा को सांस लेने में मदद करते हैं। 3. शरीर को सूखा रखें पसीना आने के बाद तौलिये से त्वचा को अच्छी तरह सुखाएं। 4. पर्याप्त पानी पिएं दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर और त्वचा हाइड्रेट रहती है। 5. सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन जरूर लगाएं। 6. गीले कपड़े तुरंत बदलें व्यायाम या पसीना आने के बाद गीले कपड़े ज्यादा देर तक न पहनें। 7. निजी सामान साझा न करें तौलिया, कपड़े और अन्य निजी वस्तुएं दूसरों के साथ साझा करने से बचें। 8. संतुलित आहार लें फल, सब्जियां और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन त्वचा की सेहत के लिए फायदेमंद होता है। 9. खुजली होने पर त्वचा न खुजलाएं बार-बार खुजलाने से संक्रमण बढ़ सकता है। 10. समस्या बढ़ने पर डॉक्टर से सलाह लें यदि रैश, खुजली या संक्रमण लंबे समय तक बना रहे तो त्वचा विशेषज्ञ से संपर्क करें।
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Ebola

WHO Health Emergency on Ebola: कांगो में बिगड़े हालात, भारत समेत दुनिया अलर्ट पर

अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में फैले Ebola Virus outbreak ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। तेजी से बढ़ते मामलों और मौतों के बीच World Health Organization (WHO) ने इसे Global Health Emergency (PHEIC) घोषित कर दिया है। पड़ोसी देश युगांडा तक संक्रमण पहुंचने के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। कांगो में Ebola का कहर, 20 दिनों में बिगड़े हालात कांगो के कई हिस्सों में Ebola संक्रमण तेजी से फैल रहा है और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव है। स्थानीय प्रशासन और हेल्थ टीम लगातार कंट्रोल की कोशिश में जुटी हैं, लेकिन हालात अभी भी चिंताजनक बने हुए हैं। नया Ebola Strain क्यों बढ़ा रहा चिंता? इस बार फैला हुआ वायरस Bundibugyo Ebola strain बताया जा रहा है, जो पहले भी खतरनाक माना गया है। इसकी वजह से चिंता और बढ़ गई है क्योंकि: WHO ने क्यों घोषित की Global Health Emergency? WHO ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर मानते हुए कहा है कि: WHO ने इसे एक “serious public health threat” बताया है और सभी देशों को अलर्ट रहने की सलाह दी है। India Ebola Alert: भारत क्यों है सतर्क? भारत में अभी तक कोई Ebola केस नहीं मिला है, लेकिन सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में है। भारत में फिलहाल जोखिम कम है, लेकिन international travel के कारण सतर्कता जरूरी मानी जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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इबोला

इबोला वायरस खतरा बढ़ा: भारत सरकार ने जारी की नई यात्रा चेतावनी

दुनिया के कुछ हिस्सों में इबोला वायरस (Ebola Virus Disease) के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए भारत सरकार ने नागरिकों के लिए एक नई ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे फिलहाल जोखिम वाले क्षेत्रों की गैर-जरूरी यात्रा से बचें और पूरी सावधानी बरतें। सरकार का कहना है कि यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है, ताकि संभावित संक्रमण को समय रहते रोका जा सके और देश में किसी भी तरह के खतरे से बचाव किया जा सके। क्या है इबोला वायरस? Ebola Virus Disease एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलती है। यह बीमारी तेजी से शरीर को प्रभावित कर सकती है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा भी साबित हो सकती है। प्रमुख लक्षण: किन देशों को लेकर अलर्ट? सरकार ने किसी एक देश की स्पष्ट सूची जारी नहीं की है, लेकिन सामान्य तौर पर इबोला के मामले अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में अधिक पाए जाते हैं। ऐसे में इन प्रभावित क्षेत्रों की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे क्षेत्रों में सावधानी और जागरूकता बेहद जरूरी है। सरकार की ट्रैवल एडवाइजरी (Important Guidelines) भारत सरकार ने यात्रियों के लिए कुछ जरूरी निर्देश जारी किए हैं: एयरपोर्ट और बॉर्डर पर बढ़ी निगरानी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स और सीमा क्षेत्रों में निगरानी को और सख्त कर दिया है। संदिग्ध मामलों की तुरंत पहचान और आइसोलेशन के लिए मेडिकल टीमों को अलर्ट पर रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच और रोकथाम से इस वायरस के फैलाव को काफी हद तक रोका जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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इबोला

Delhi Airport Health Alert: इबोला को लेकर भारत सतर्क, हाई-रिस्क देशों के यात्रियों की जांच तेज

दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट पर इबोला वायरस को लेकर सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रखा गया है। अफ्रीकी देशों में बढ़ते संक्रमण के मामलों और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों की चेतावनी के बाद भारत ने यह एहतियाती कदम उठाया है। हालांकि देश में अभी तक इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन सरकार किसी भी संभावित खतरे को रोकने के लिए पहले से ही सतर्क हो गई है। क्यों बढ़ी चिंता? पिछले कुछ समय से डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC), युगांडा और साउथ सूडान जैसे देशों में इबोला वायरस के मामले रिपोर्ट हुए हैं।विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी स्थिति पर नजर रखते हुए इसे गंभीर मानते हुए देशों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इसी के बाद भारत ने एयरपोर्ट स्तर पर स्क्रीनिंग और मॉनिटरिंग को और मजबूत कर दिया है। दिल्ली एयरपोर्ट पर क्या हो रहा है? IGI एयरपोर्ट पर आने वाले यात्रियों, खासकर हाई-रिस्क देशों से आने वालों के लिए: जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। किन देशों पर खास नजर? फिलहाल जिन देशों से आने वाले यात्रियों की सख्त जांच हो रही है: इन देशों को संक्रमण जोखिम के आधार पर “हाई रिस्क जोन” में रखा गया है। इबोला के शुरुआती लक्षण स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इबोला के लक्षण अचानक दिखाई दे सकते हैं, जैसे: भारत की मौजूदा स्थिति सरकारी सूत्रों के मुताबिक: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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WHO

WHO Ebola Warning: कांगो और युगांडा में फैला वायरस, घोषित हुई Health Emergency

अफ्रीका में इबोला वायरस का नया प्रकोप एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ा रहा है। हालात को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे Public Health Emergency of International Concern (PHEIC) घोषित कर दिया है, यानी अब यह एक वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थिति बन चुका है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में संक्रमण के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं और मौतों की संख्या भी बढ़ रही है। अफ्रीका में कहां फैला है इबोला? ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले मध्य और पूर्वी अफ्रीका के दो देशों में मिले हैं: युगांडा में मिले कुछ मरीज हाल ही में कांगो से यात्रा करके आए थे, जिससे क्रॉस-बॉर्डर संक्रमण का खतरा और बढ़ गया है। अब तक क्या है स्थिति? उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक हालात चिंताजनक हैं: इन आंकड़ों ने स्वास्थ्य एजेंसियों को तुरंत कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया है। WHO की चेतावनी क्या कहती है? World Health Organization ने साफ कहा है कि यह स्थिति अब सिर्फ किसी एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खतरा बन सकती है। हालांकि WHO ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह स्थिति महामारी (pandemic) घोषित नहीं हुई है, लेकिन अगर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो हालात बिगड़ सकते हैं। कौन सा वायरस स्ट्रेन जिम्मेदार है? इस बार का प्रकोप Ebola virus disease के Bundibugyo strain से जुड़ा बताया जा रहा है। यह स्ट्रेन अपेक्षाकृत कम पाया जाता है, लेकिन इसे गंभीर और खतरनाक माना जाता है। इबोला कैसे फैलता है? इबोला वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे संपर्क से फैलता है, खासकर: क्यों बढ़ रही है चिंता? इबोला कोई सामान्य वायरस नहीं है। इसकी वजह से चिंता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Hantavirus

Hantavirus Cases बढ़ने से दुनिया अलर्ट, WHO बोला- घबराएं नहीं लेकिन रहें सावधान

दुनियाभर में एक बार फिर Hantavirus को लेकर चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है। हाल ही में सामने आए मामलों के बाद World Health Organization (WHO) ने इस वायरस को लेकर बड़ा अपडेट जारी किया है। WHO का कहना है कि फिलहाल जो मामले सामने आए हैं, उनमें “Andes Virus” स्ट्रेन मिला है, जो बेहद दुर्लभ परिस्थितियों में इंसान से इंसान में फैल सकता है। हालांकि राहत की बात यह है कि विशेषज्ञ इसे Covid-19 जैसी महामारी बनने वाला खतरा नहीं मान रहे हैं। Cruise Ship से सामने आए कई मामले हाल के दिनों में MV Hondius नाम की एक क्रूज शिप पर Hantavirus संक्रमण के कई मामले सामने आए। रिपोर्ट्स के मुताबिक 10 से ज्यादा यात्री संक्रमित पाए गए, जबकि 3 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बाद स्वास्थ्य एजेंसियों ने कई देशों में यात्रियों की निगरानी शुरू कर दी है। WHO का कहना है कि अभी संक्रमण सीमित स्तर पर है, लेकिन लगातार बढ़ते मामलों ने चिंता जरूर बढ़ाई है। इंसानों में कितने समय तक रह सकता है Hantavirus? हालिया रिसर्च और मेडिकल रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि Andes Virus पुरुषों के शरीर, खासकर semen यानी वीर्य में लंबे समय तक मौजूद रह सकता है। कुछ अध्ययनों में यह अवधि करीब 6 साल तक बताई गई है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस विषय पर अभी और रिसर्च की जरूरत है। विशेषज्ञों के मुताबिक वायरस शरीर के कुछ हिस्सों में लंबे समय तक छिपा रह सकता है, इसलिए संक्रमित लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। कैसे फैलता है यह वायरस? Hantavirus मुख्य रूप से चूहों और अन्य rodents यानी कृंतकों के जरिए फैलता है। संक्रमित चूहों के मल, मूत्र और लार के संपर्क में आने से इंसान संक्रमित हो सकता है। बंद जगहों की सफाई के दौरान वायरस के कण हवा में फैल सकते हैं और सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। WHO और CDC के मुताबिक इंसान से इंसान में संक्रमण बेहद दुर्लभ है और अब तक यह क्षमता मुख्य रूप से Andes Virus स्ट्रेन में ही देखी गई है। Hantavirus के शुरुआती लक्षण क्या हैं? शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य वायरल या फ्लू जैसे लगते हैं। इनमें शामिल हैं: गंभीर मामलों में मरीज के फेफड़ों पर असर पड़ सकता है, जिससे स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। WHO ने लोगों को क्या सलाह दी? WHO ने साफ कहा है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना बेहद जरूरी है। संस्था के अनुसार अभी ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि वायरस तेजी से म्यूटेट होकर बड़े स्तर पर फैल सकता है। बचाव के लिए क्या करें? स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते सावधानी और सही इलाज से Hantavirus के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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AIIMS Bhopal, Dr Tanya Sharma, World Congress of Nephrology 2026, Membranous Nephropathy Research, ICMR Research India, Kidney Disease Study, Japan Conference News

Global Recognition: AIIMS Bhopal की डॉ. तान्या शर्मा ने Japan में बढ़ाया भारत का मान

AIIMS Bhopal की डॉ. तान्या शर्मा ने World Congress of Nephrology 2026 (Japan) में मेम्ब्रेनस नेफ्रोपैथी पर ICMR फंडेड रिसर्च प्रस्तुत कर भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित किया। भोपाल से ग्लोबल मंच तक: AIIMS की डॉक्टर ने दिखाई रिसर्च की ताकत मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के लिए गर्व का क्षण है। एम्स भोपाल (AIIMS Bhopal) की डॉक्टर डॉ. तान्या शर्मा ने जापान के योकोहामा में आयोजित World Congress of Nephrology 2026 में अपने शोध कार्य को प्रस्तुत कर देश का नाम रोशन किया है। यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन किडनी से जुड़ी बीमारियों पर रिसर्च और नई खोजों के लिए दुनियाभर में जाना जाता है, जहां चयनित वैज्ञानिकों और डॉक्टरों को ही अपने कार्य प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। International Society से मिला Travel Grant डॉ. तान्या शर्मा को इस बड़े मंच पर अपने शोध को प्रस्तुत करने के लिए International Society of Nephrology (ISN) की ओर से ट्रैवल ग्रांट भी प्रदान किया गया। यह ग्रांट उन चुनिंदा शोधकर्ताओं को दिया जाता है, जिनका काम वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालने की क्षमता रखता है। किस विषय पर था शोध? डॉ. शर्मा का यह शोध मेम्ब्रेनस नेफ्रोपैथी (Membranous Nephropathy) नामक गंभीर किडनी रोग पर आधारित है। यह शोध ICMR (Indian Council of Medical Research) द्वारा वित्तपोषित है। उनके अध्ययन में इस बीमारी से जुड़े नए एंटीजन (Antigens) की पहचान पर विशेष काम किया गया है। 👉 इस खोज से भविष्य में: भारत के लिए क्यों है यह बड़ी उपलब्धि आज के समय में किडनी से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में भारतीय वैज्ञानिकों का इस स्तर पर रिसर्च प्रस्तुत करना न केवल मेडिकल फील्ड में नई दिशा देता है, बल्कि भारत की रिसर्च क्षमता को भी वैश्विक मंच पर मजबूत करता है। AIIMS Bhopal की यह उपलब्धि सिर्फ एक संस्थान की नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश और देश के लिए गर्व का विषय है। डॉ. तान्या शर्मा जैसे युवा शोधकर्ता भारत को मेडिकल रिसर्च में नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं।
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H5N1

Chennai Bird Flu H5N1 बर्ड फ्लू से सैकड़ों कौवे मरे, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई (Chennai) में Bird Flu H5N1 के मामलों ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। शहर और उसके आसपास के इलाकों में सैकड़ों कौवों की अचानक मौत के बाद जांच की गई, जिसमें H5N1 एवियन इन्फ्लुएंजा वायरस की पुष्टि हुई। इस घटना के सामने आते ही केंद्र और राज्य सरकार हरकत में आ गई है और लोगों के लिए स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की गई है। क्या है पूरा मामला? पिछले कुछ दिनों से चेन्नई के कई इलाकों में सड़क किनारे और रिहायशी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कौवे मृत पाए गए। शुरुआत में इसे सामान्य घटना माना गया, लेकिन जब मौतों की संख्या लगातार बढ़ने लगी, तो प्रशासन ने सैंपल जांच करवाई। रिपोर्ट में सामने आया कि ये मौतें हाई पैथोजेनिक एवियन इन्फ्लुएंजा (H5N1) की वजह से हुई हैं, जो पक्षियों में तेजी से फैलने वाला वायरस है। प्रशासन और सरकार की तैयारी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए: क्या इंसानों को खतरा है? स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, H5N1 वायरस आमतौर पर इंसानों में नहीं फैलता और यह मुख्य रूप से पक्षियों तक सीमित रहता है। फिलहाल चेन्नई में किसी भी व्यक्ति के संक्रमित होने की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, जो लोग सीधे तौर पर पक्षियों के संपर्क में रहते हैं—जैसे पोल्ट्री वर्कर्स—उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। सरकार की एडवाइजरी: क्या करें, क्या न करें सरकार ने आम नागरिकों से अपील की है कि: क्यों जरूरी है सतर्क रहना? भारत में पहले भी अलग-अलग राज्यों में Bird Flu के मामले सामने आ चुके हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि समय पर पहचान, सही जानकारी और सावधानी से इसके फैलाव को रोका जा सकता है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से दूर रहने और केवल सरकारी सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। फिलहाल चेन्नई में हालात नियंत्रण में बताए जा रहे हैं, लेकिन प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। आम लोगों के सहयोग से ही इस तरह की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटना संभव है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Foetus Donation

भारत में पहला Foetus Donation AIIMS Delhi में जैन परिवार ने रचा इतिहास

दिल्ली के AIIMS (All India Institute of Medical Sciences) में इतिहास रचते हुए पहली बार Foetus Donation (भ्रूण दान) किया गया है। यह साहसिक और संवेदनशील निर्णय राजधानी के एक जैन परिवार ने लिया, जब 32 वर्षीय वंदना जैन का पांचवें महीने में गर्भपात हो गया। परिवार ने निजी दुख को समाज और चिकित्सा अनुसंधान के लिए योगदान में बदलकर मिसाल पेश की है। कैसे हुआ पहला Foetus Donation? क्यों है यह Donation इतना महत्वपूर्ण? यह पहला Foetus Donation in India मेडिकल साइंस और शिक्षा के लिए नए दरवाजे खोलेगा। जैन परिवार बना प्रेरणा स्रोत जैन परिवार ने अपने निजी दुख को मानवता और विज्ञान की भलाई में बदल दिया। उनका यह कदम न सिर्फ AIIMS बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। यह योगदान आने वाली पीढ़ियों की मेडिकल रिसर्च और शिक्षा में ऐतिहासिक महत्व रखेगा। AIIMS Delhi का यह पहला Foetus Donation मेडिकल इतिहास का हिस्सा बन गया है। जैन परिवार का साहसिक कदम आने वाले समय में भारत को चिकित्सा अनुसंधान और शिक्षा में नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Editor's Picks

ड्डा का राहुल पर पलटवार: बोले- कांग्रेस बताए अपने राज्यों में पेपर लीक क्यों हुए, सरकार चर्चा को तैयार

पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस पहले यह बताए कि उसके शासन वाले राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं। नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार इस गंभीर विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है, जबकि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में है। दरअसल, राहुल गांधी ने हाल ही में दावा किया था कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 152 पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं। उन्होंने इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार पर परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने में विफल रहने का आरोप लगाया था। इस पर जवाब देते हुए नड्डा ने कहा कि केवल आंकड़े पेश करने से काम नहीं चलेगा। कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि जिन राज्यों में उसकी सरकारें रही हैं, वहां भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं और उन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा संसद में इस विषय पर सार्थक चर्चा का स्वागत करती है।

अजमेर में मार्बल व्यापारी पर जानलेवा हमला, CCTV में कैद हुई वारदात

राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ में बुधवार सुबह मार्बल व्यापारी पर चार बदमाशों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। स्कॉर्पियो से आए हमलावरों ने गोदाम में घुसकर व्यापारी के साथ बेरहमी से मारपीट की। पूरी घटना गोदाम में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। गोदाम में घुसकर किया हमला गांधीनगर थाना क्षेत्र स्थित मार्बल एरिया में बुधवार सुबह करीब 8:20 बजे स्कॉर्पियो में सवार चार युवक गोदाम के बाहर पहुंचे। गोदाम में बैठे मार्बल व्यापारी गोवर्धन पर उन्होंने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। व्यापारी ने शुरुआत में हमलावरों का मुकाबला करने की कोशिश की, लेकिन चारों बदमाशों ने उसे घेर लिया और जमीन पर गिराकर लगातार लाठियों से पीटा। वारदात के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। सिर और हाथ में गंभीर चोट हमले में व्यापारी के सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं। घायल अवस्था में उन्हें तत्काल किशनगढ़ के राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पीड़ित ने दर्ज कराई शिकायत गांधीनगर थाना प्रभारी अनिल शर्मा ने बताया कि पीड़ित व्यापारी की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। भाई के साथ गोदाम में मौजूद था व्यापारी पीड़ित गोवर्धन ने बताया कि वह बुधवार सुबह अपने भाई के साथ गोदाम में बैठा था। इसी दौरान स्कॉर्पियो में सवार चार युवक पहुंचे और बिना किसी बातचीत के अचानक हमला कर दिया। बदमाशों ने गोदाम के अंदर घुसकर उन्हें नीचे गिराया और लाठियों से बेरहमी से पीटा। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

BPCL को जून तिमाही में ₹3,962 करोड़ का घाटा, कच्चे तेल की महंगाई से बिगड़े नतीजे

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी को इस तिमाही में ₹3,962 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ है। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने ₹6,124 करोड़ का मुनाफा कमाया था, जबकि मार्च तिमाही में ₹3,191 करोड़ का लाभ दर्ज किया गया था। 23% बढ़ा कंपनी का रेवेन्यू घाटे के बावजूद BPCL का परिचालन से राजस्व (Revenue from Operations) बढ़कर ₹1.59 लाख करोड़ पहुंच गया। यह पिछले साल की समान तिमाही के ₹1.29 लाख करोड़ के मुकाबले करीब 23% अधिक है। वहीं, मार्च तिमाही के ₹1.35 लाख करोड़ की तुलना में इसमें करीब 18% की वृद्धि दर्ज की गई। कच्चे तेल की महंगाई बनी घाटे की वजह कंपनी के अनुसार, अमेरिका-ईरान तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। इसके साथ ही शिपिंग (भाड़ा) और इंश्योरेंस लागत भी बढ़ गई। हालांकि, बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में नहीं डाला जा सका, जिससे कंपनी की लाभप्रदता प्रभावित हुई और तिमाही घाटे में बदल गई। शेयर में गिरावट नतीजों के बाद BPCL का शेयर 3% की गिरावट के साथ ₹309 पर बंद हुआ। BPCL के बारे में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों में शामिल है। इसकी स्थापना 24 जनवरी 1976 को हुई थी। कंपनी मुंबई, कोच्चि, नुमालीगढ़ और बीना में रिफाइनरियों का संचालन करती है, जिनकी कुल रिफाइनिंग क्षमता 40 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से अधिक है। BPCL पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, लुब्रिकेंट्स और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के रिफाइनिंग व वितरण का कार्य करती है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू का इस्तीफा, विवादित कृषि बिल के विरोध में छोड़ा पद

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने विवादित कृषि विधेयक के विरोध में इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। इस बिल में दो प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित इस्तेमाल और सिंचाई के लिए बड़े जलाशय बनाने की अनुमति देने का प्रावधान है। वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे मधुमक्खियों, जैव विविधता और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के अनुसार, बारबू बुधवार को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंपेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के अपने वादों से पीछे हटते हुए ऐसे प्रावधानों को मंजूरी दी, जिनका वह लगातार विरोध करती रही थीं। बिल के दो विवादित प्रावधान 1. प्रतिबंधित कीटनाशकों को मंजूरीविधेयक में एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन जैसे प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित उपयोग की अनुमति दी गई है। इनका इस्तेमाल चुकंदर, सेब और चेरी जैसी फसलों में किया जा सकेगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ये रसायन मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले कीड़ों के लिए बेहद हानिकारक हैं, जिससे कृषि उत्पादन और पारिस्थितिकी तंत्र दोनों प्रभावित हो सकते हैं। 2. सिंचाई के लिए बड़े जलाशयों की अनुमतिबिल में किसानों को सिंचाई के लिए बड़े जलाशय और कृत्रिम तालाब बनाने की प्रक्रिया आसान करने का भी प्रावधान है। पर्यावरणविदों का तर्क है कि इससे भूजल और नदियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और गर्मियों में जल संकट बढ़ सकता है। संसद से पास हुआ विधेयक फ्रांस की संसद में मंगलवार को पेश किए गए इस विधेयक को सीनेट ने 214 के मुकाबले 111 मतों से पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि यह कानून किसानों की बढ़ती लागत और घटती आय को देखते हुए लाया गया है, ताकि वे यूरोप के अन्य देशों के किसानों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें। बारबू ने जताई नाराजगी मोनिक बारबू ने कहा कि विवादित प्रावधान आखिरी समय में बिल में जोड़े गए और उन्हें हटाने पर सरकार ने कोई गंभीर चर्चा नहीं की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पिछले नौ महीनों में उन्होंने जंगलों, स्वच्छ जल, साफ हवा और जैव विविधता की रक्षा के लिए काम किया, लेकिन अब वह अपने उद्देश्यों को पूरा करने की स्थिति में नहीं हैं। पहले भी विवादों में रहा कीटनाशक एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन नियोनिकोटिनॉइड समूह के कीटनाशक हैं। फ्रांस ने 2018 में एसेटामिप्रिड पर प्रतिबंध लगाया था। इससे पहले भी इस प्रतिबंध को हटाने की कोशिश हुई थी, लेकिन फ्रांस की सर्वोच्च अदालत ने पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर संभावित खतरे का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

इंदौर में छात्र आंदोलन को मिला कांग्रेस का समर्थन, दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी धरने में पहुंचे

इंदौर के टंट्याभील चौराहे पर चल रहे छात्र आंदोलन को बुधवार रात कांग्रेस का खुला समर्थन मिला। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी धरना स्थल पहुंचे और छात्रों के बीच बैठकर उनके आंदोलन में शामिल हुए। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। टंट्याभील चौराहे पर पिछले कई दिनों से छात्र शिक्षा व्यवस्था, कथित पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन और सोनम वांगचुक को हिरासत में लिए जाने के बाद इंदौर में भी आंदोलन तेज हो गया है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र धरना स्थल पर पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार रात दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी ने छात्रों के बीच बैठकर आंदोलन का समर्थन किया। उनके साथ शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे सहित कई कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी धरने में शामिल हुए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस पिछले 25 दिनों से यह मांग उठा रही है और उन्होंने स्वयं 21 जून को भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी थी। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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