भारतीय नौसेना के बेड़े में तीन नए स्वदेशी युद्धपोतों की एंट्री हुई है, जिससे देश की समुद्री सुरक्षा और मजबूत हो गई है। ये जहाज न सिर्फ आधुनिक तकनीक से लैस हैं, बल्कि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को भी नई दिशा देते हैं। इन नए युद्धपोतों में प्रमुख हैं INS Dunagiri, INS Androth और INS Sandhayak। इन तीनों को अलग-अलग रणनीतिक भूमिकाओं के लिए तैयार किया गया है, जिससे भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल ताकत कई गुना बढ़ गई है। INS Dunagiri: Modern Stealth Frigate with BrahMos Capability INS Dunagiri को एक एडवांस स्टील्थ फ्रिगेट के रूप में डिजाइन किया गया है, जो दुश्मन के रडार से बचकर ऑपरेशन करने में सक्षम है। इसमें BrahMos missile जैसी हाई-स्पीड और सटीक मार करने वाली मिसाइल प्रणाली को इंटीग्रेट करने की क्षमता है, जिससे यह जहाज बेहद घातक बन जाता है। यह युद्धपोत समुद्री निगरानी, हमला और सुरक्षा अभियानों में अहम भूमिका निभाएगा। INS Androth: Anti-Submarine Warfare में नई ताकत INS Androth को खास तौर पर पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) के लिए विकसित किया गया है। इसका मुख्य काम समुद्र में छिपी दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाना और उन्हें निष्क्रिय करना है। आधुनिक सेंसर और हथियार प्रणालियों के साथ यह जहाज भारत की समुद्री सीमाओं को और सुरक्षित बनाता है। INS Sandhayak: Hydrographic Survey में अहम भूमिका INS Sandhayak एक आधुनिक सर्वे वेसल है, जो समुद्र की गहराई, जलमार्ग और नेविगेशन मैपिंग का काम करती है। यह जहाज लगातार लंबे समय तक समुद्र में ऑपरेशन कर सकता है, जिससे भारत के समुद्री रास्तों की सुरक्षा और बेहतर योजना संभव होती है। आत्मनिर्भर भारत की ओर मजबूत कदम ये तीनों युद्धपोत पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनाए गए हैं, जो भारत के “Make in India” और “Atmanirbhar Bharat” मिशन को मजबूत करते हैं। इनके शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी, युद्ध क्षमता और रणनीतिक पकड़ पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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