ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई (Khamenei) की अंतिम यात्रा को लेकर पूरे देश में गहरा शोक और भावनात्मक माहौल देखने को मिल रहा है। राजधानी तेहरान की सड़कों पर सुबह से ही लोगों की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी, और जैसे-जैसे समय आगे बढ़ा, यह भीड़ एक विशाल जनसैलाब में बदल गई। रिपोर्ट्स के अनुसार यह अंतिम यात्रा लगभग 10 किलोमीटर लंबे रूट पर निकाली गई, जिसमें लाखों लोगों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। लोग दूर-दराज़ इलाकों से पहुंचकर अपने नेता को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए सड़कों पर खड़े नजर आए। भावनाओं से भरा माहौल, हर आंख नम तेहरान की गलियों में हर तरफ मातमी माहौल था। लोग काले कपड़ों में, हाथों में झंडे और तस्वीरें लेकर खामेनेई को याद कर रहे थे। कई जगहों पर लोग भावुक होकर रोते हुए भी दिखाई दिए। यह सिर्फ एक अंतिम यात्रा नहीं बल्कि एक ऐसे नेता को विदाई देने का क्षण था, जिसने लंबे समय तक ईरान की राजनीति में अहम भूमिका निभाई। 10KM लंबा जुलूस, घंटों चला आयोजन यह पूरा जुलूस लगभग 10 किलोमीटर लंबे निर्धारित मार्ग पर निकाला गया। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह आयोजन 10 घंटे से अधिक समय तक चला। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई थी और पूरे रास्ते को बैरिकेड्स से घेरा गया था। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि कई जगहों पर लोग ऊंची इमारतों और सड़कों के किनारे खड़े होकर अंतिम दर्शन कर रहे थे। हेलिकॉप्टर से ताबूत ले जाने की तैयारी रिपोर्ट्स के मुताबिक अंतिम यात्रा के एक चरण के बाद ताबूत को हेलिकॉप्टर के जरिए आगे ले जाने की व्यवस्था भी की गई है। यह कदम भीड़ प्रबंधन और धार्मिक प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया बताया जा रहा है। राजनीतिक और धार्मिक महत्व इस अंतिम यात्रा को केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक और ऐतिहासिक क्षण भी माना जा रहा है। हजारों समर्थकों और सरकारी प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया है। ईरान में इस आयोजन को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट पर रहीं ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचा जा सके। अंतिम विदाई का लंबा सिलसिला जानकारी के अनुसार, अंतिम संस्कार के बाद भी कई धार्मिक रस्में अलग-अलग पवित्र स्थलों पर जारी रहेंगी। इसमें देश के भीतर और बाहर मौजूद शिया समुदाय से जुड़े प्रमुख धार्मिक केंद्र भी शामिल हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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