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Amit Shah

Amit Shah Letter to Speaker: चर्चा के लिए घंटे तय करने की मांग, Rahul Gandhi ने सरकार को घेरा

संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच एक बार फिर चर्चा को लेकर तकरार सामने आई है। गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर सदन में चर्चा के लिए समय तय करने की मांग की है। शाह ने साफ कहा कि वह खुद सदन में मौजूद रहेंगे और सरकार की ओर से उठाए गए मुद्दों पर जवाब दिया जाएगा। वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष केवल लेक्चर सुनने के लिए सदन में नहीं बैठा है। उनका कहना है कि संसद में वास्तविक मुद्दों पर खुलकर चर्चा और सवालों के जवाब जरूरी हैं। अमित शाह ने ओम बिरला को लिखा Letter अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजकर चर्चा के लिए निश्चित समय तय करने का आग्रह किया। शाह के मुताबिक, सरकार सदन में चर्चा से पीछे नहीं हट रही है और वह खुद चर्चा के दौरान मौजूद रहेंगे। गृह मंत्री का यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब संसद में कई मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। सरकार चाहती है कि सदन की कार्यवाही व्यवस्थित तरीके से चले और जरूरी विषयों पर चर्चा हो। राहुल गांधी का सरकार पर निशाना राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि विपक्ष को सिर्फ भाषण सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। विपक्ष चाहता है कि जिन सवालों को संसद में उठाया जा रहा है, उन पर सरकार स्पष्ट जवाब दे। Rahul Gandhi के बयान से साफ है कि विपक्ष चर्चा को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं है। उनका जोर इस बात पर है कि संसद में जनता से जुड़े मुद्दों पर सार्थक बहस हो और सरकार को जवाब देना पड़े। Shah vs Rahul: किस बात पर है विवाद? दरअसल, विवाद सिर्फ चर्चा होने या न होने का नहीं है, बल्कि चर्चा के तरीके और समय को लेकर भी है। अमित शाह ने स्पीकर से चर्चा के लिए घंटे तय करने की बात कही है, जबकि विपक्ष चाहता है कि उसे अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिले। यही वजह है कि संसद में सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक खींचतान बढ़ती दिखाई दे रही है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात मजबूती से रखने की कोशिश कर रहे हैं। Speaker Om Birla के फैसले पर नजर अब सबकी निगाहें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अगले कदम पर हैं। अगर चर्चा के लिए समय तय होता है तो सदन में सरकार और विपक्ष के बीच सीधा संवाद देखने को मिल सकता है। संसद में जारी इस सियासी बहस के बीच एक बात साफ है कि दोनों पक्ष जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी स्थिति मजबूती से रखने की तैयारी में हैं। आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही के दौरान यह टकराव और दिलचस्प हो सकता है।
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Justice Yashwant Varma

Justice Yashwant Varma Case: Cash Scandal में बड़ा खुलासा, तीनों आरोपों पर समिति की मुहर

जस्टिस यशवंत वर्मा (Justice Yashwant Varma) से जुड़े कथित Cash Case में जांच समिति की रिपोर्ट ने मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है। सरकारी आवास में आग लगने के बाद मिले जले और अधजले नोटों के मामले में उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को जांच समिति ने साबित माना है। यह मामला सामने आने के बाद न्यायपालिका की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी कई सवाल उठे थे। सरकारी आवास में आग के बाद मिला था कैश यह पूरा विवाद मार्च 2025 में शुरू हुआ था। दिल्ली स्थित जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास परिसर में आग लगने की सूचना के बाद दमकलकर्मी मौके पर पहुंचे थे। आग बुझाने के दौरान एक स्टोर रूम में जले हुए सामान के साथ बड़ी मात्रा में जले और अधजले नोट मिलने की बात सामने आई। मामले ने तूल पकड़ा तो सुप्रीम कोर्ट ने शुरुआती जांच कराई। तत्कालीन दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट, तस्वीरों और वीडियो समेत संबंधित दस्तावेजों को भी सार्वजनिक किया गया था। जांच समिति ने तीनों आरोप माने साबित मामले की विस्तृत जांच के लिए बाद में लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति ने जांच की। समिति ने उपलब्ध दस्तावेजों, बयानों और अन्य साक्ष्यों की समीक्षा के बाद जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगाए गए तीनों Articles of Charge को साबित माना। रिपोर्ट में नकदी के स्रोत और उसके संबंध में दिए गए स्पष्टीकरण को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। साथ ही मामले से जुड़े साक्ष्यों के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ के पहलू पर भी समिति ने निष्कर्ष दर्ज किए। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी महत्वपूर्ण बात सामने आई कि ऐसा कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं मिला, जिससे यह निश्चित रूप से कहा जा सके कि जस्टिस वर्मा ने खुद वह नकदी वहां रखी थी। जस्टिस वर्मा ने उठाए थे प्रक्रिया पर सवाल जस्टिस वर्मा ने जांच की प्रक्रिया और समिति के निष्कर्षों पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए और बाद में राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भी सौंपा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी कानूनी चुनौती दी गई थी, लेकिन अदालत से उन्हें तत्काल राहत नहीं मिली। इसके बाद जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ती रही। अब आगे क्या होगा? जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंप दी है। अब इसके बाद संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई का रास्ता तय होगा। जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़ा यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें सिर्फ एक न्यायाधीश पर लगे आरोपों की बात नहीं है, बल्कि यह सवाल भी जुड़ा है कि न्यायपालिका में accountability और transparency सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था किस तरह काम करती है। फिलहाल जांच समिति की रिपोर्ट के बाद मामला एक नए चरण में पहुंच गया है। आगे संसद और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं की कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Amrit Bharat Express

Dhanbad-Coimbatore Train: 2200 KM से ज्यादा का सफर, Amrit Bharat Express से जुड़ेंगे कई शहर

धनबाद (Dhanbad) से दक्षिण भारत जाने वाले यात्रियों के लिए रेलवे की ओर से बड़ी खुशखबरी है। Dhanbad-Podanur Amrit Bharat Express ने झारखंड और तमिलनाडु के बीच रेल कनेक्टिविटी को एक नई रफ्तार दी है। इस ट्रेन से न सिर्फ लंबी दूरी का सफर करने वाले यात्रियों को नया विकल्प मिला है, बल्कि पूर्वी भारत और दक्षिण भारत के बीच आने-जाने में भी आसानी होगी। धनबाद से पोदनूर तक सीधा रेल कनेक्शन यह अमृत भारत एक्सप्रेस धनबाद से पोदनूर के बीच चलती है। पोदनूर, कोयंबटूर के पास स्थित एक प्रमुख रेलवे स्टेशन है। ट्रेन के रूट में कई महत्वपूर्ण शहर और रेलवे जंक्शन शामिल हैं, जिससे रास्ते में रहने वाले यात्रियों को भी इसका फायदा मिल सकता है। धनबाद से दक्षिण भारत जाने वाले लोगों के लिए लंबे समय से बेहतर रेल विकल्प की जरूरत महसूस की जाती रही है। ऐसे में इस ट्रेन का संचालन यात्रियों के लिए राहत लेकर आया है। 6 राज्यों को मिलेगा फायदा इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत इसका लंबा रूट है। ट्रेन झारखंड से निकलकर कई राज्यों को जोड़ते हुए तमिलनाडु तक पहुंचती है। इसके जरिए झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु समेत रूट से जुड़े अन्य राज्यों के यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलती है। पूर्वी भारत से दक्षिण भारत की यात्रा करने वाले छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, कारोबारियों और आम यात्रियों के लिए यह ट्रेन खास उपयोगी हो सकती है। 2,200 KM से ज्यादा की दूरी तय करेगी ट्रेन Dhanbad-Podanur Amrit Bharat Express करीब 2,200 किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय करती है। रास्ते में रांची, हटिया, राउरकेला, झारसुगुड़ा, संबलपुर, विजयनगरम, विजयवाड़ा, नेल्लोर, रेनिगुंटा, कटपड़ी, सेलम, इरोड और तिरुप्पुर जैसे प्रमुख स्टेशन आते हैं। इतनी लंबी दूरी को देखते हुए यह ट्रेन उन यात्रियों के लिए खास मायने रखती है, जो पूर्वी भारत से सीधे तमिलनाडु जाना चाहते हैं। यात्रियों को क्या होगा फायदा? नई Amrit Bharat Express शुरू होने से धनबाद और आसपास के यात्रियों के पास दक्षिण भारत जाने के लिए एक और विकल्प उपलब्ध हुआ है। खासकर उन लोगों को राहत मिल सकती है जिन्हें काम, पढ़ाई, कारोबार या परिवार से जुड़े कारणों से तमिलनाडु और आसपास के इलाकों की यात्रा करनी पड़ती है। अमृत भारत ट्रेनों को सामान्य और स्लीपर श्रेणी के यात्रियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। ऐसे में लंबी दूरी की यात्रा के लिए यह सेवा आम यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है। कारोबार और रोजगार के लिहाज से भी अहम धनबाद देश के प्रमुख कोयला क्षेत्रों में शामिल है, जबकि कोयंबटूर तमिलनाडु का बड़ा औद्योगिक और कारोबारी शहर है। दोनों क्षेत्रों के बीच बेहतर रेल कनेक्टिविटी से यात्रियों के साथ-साथ व्यापार और रोजगार से जुड़े लोगों की आवाजाही भी आसान हो सकती है। रेल संपर्क मजबूत होने से छोटे कारोबारियों, कर्मचारियों और छात्रों के लिए भी यात्रा के विकल्प बढ़ते हैं। यही वजह है कि इस ट्रेन को केवल एक नई यात्री सेवा के तौर पर नहीं, बल्कि East India और South India के बीच बेहतर connectivity की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। Dhanbad-Coimbatore Train: क्यों खास है यह Amrit Bharat Express? धनबाद-पोदनूर अमृत भारत एक्सप्रेस का सबसे बड़ा फायदा यही है कि यह लंबी दूरी के कई महत्वपूर्ण शहरों को एक ही रेल रूट से जोड़ती है। झारखंड से तमिलनाडु तक जाने वाले यात्रियों को अब यात्रा की planning में एक और विकल्प मिल गया है। Dhanbad-Coimbatore Amrit Bharat Express आने वाले समय में इस रूट पर यात्रियों की बढ़ती जरूरत को पूरा करने में कितनी सफल रहती है, यह इसके संचालन और यात्री प्रतिक्रिया से साफ होगा। फिलहाल, झारखंड से South India जाने वाले लोगों के लिए यह ट्रेन निश्चित तौर पर एक उपयोगी कनेक्शन बनकर सामने आई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

PM Modi-Priyanka Gandhi का ये Moment हुआ Viral, Kharge बोले- ‘आप बदल गए!’

संसद में अक्सर एक-दूसरे पर तीखे हमले करने वाले नेताओं का एक अलग ही अंदाज तब देखने को मिला, जब वे एक पारिवारिक समारोह में आमने-सामने थे। NCP (SP) सांसद सुप्रिया सुले की बेटी रेवती के Wedding Reception में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई बड़े नेता पहुंचे। इसी दौरान PM Modi और Priyanka Gandhi की बातचीत का एक छोटा-सा पल कैमरे में कैद हो गया, जिस पर Kharge की टिप्पणी ने माहौल को हल्का कर दिया। PM Modi और Priyanka Gandhi के बीच क्या हुई बात? रेवती सुले के Reception में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रियंका गांधी के बीच बातचीत होती दिखाई दी। दोनों की बातचीत के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे भी वहां मौजूद थे। इसी बीच खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी की ओर इशारा करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा- “भाई साहब, आप बदल गए!” खड़गे की इस टिप्पणी के बाद वहां मौजूद लोगों के बीच हल्की मुस्कान देखने को मिली। राजनीतिक गलियारों में यह छोटा-सा Moment अब चर्चा का विषय बन गया है। Wedding Reception में दिखा नेताओं का अलग अंदाज आमतौर पर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिलती है। लेकिन सामाजिक समारोहों में नेताओं का व्यवहार कुछ अलग नजर आता है। सुप्रिया सुले की बेटी के Reception में भी यही तस्वीर देखने को मिली। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी पहुंचे। वहीं कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी की मौजूदगी रही। अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं का एक ही समारोह में जुटना अपने आप में खास रहा। Social Media पर Video ने खींचा ध्यान PM Modi और Priyanka Gandhi की बातचीत वाला वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा हो रही है। खास तौर पर खड़गे का “भाई साहब, आप बदल गए” वाला अंदाज लोगों का ध्यान खींच रहा है। हालांकि, इस छोटी-सी बातचीत को किसी बड़े राजनीतिक बदलाव से जोड़ना जल्दबाजी होगी। यह एक निजी समारोह के दौरान हुआ अनौपचारिक पल था। राजनीति की गर्मागर्म बहसों के बीच नेताओं की ऐसी तस्वीरें अक्सर लोगों को सहज और मानवीय पक्ष दिखाती हैं। एक ही फ्रेम में सत्ता और विपक्ष इस Reception की तस्वीरों और वीडियो में सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई बड़े चेहरे एक साथ नजर आए। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन सामाजिक आयोजनों में नेताओं का एक-दूसरे से मिलना और बातचीत करना भारतीय राजनीति की पुरानी परंपरा का हिस्सा रहा है। फिलहाल PM Modi-Priyanka Gandhi Conversation और उस पर Kharge का मजेदार रिएक्शन सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर दिखाया कि राजनीति के गंभीर माहौल के बीच नेताओं के बीच हल्के-फुल्के पल भी लोगों का ध्यान खींच लेते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump ने माना- Iran के डर से बदलना पड़ा विमान

Trump ने माना- Iran के डर से बदलना पड़ा विमान

America के राष्ट्रपति Donald Trump ने माना है कि ईरान से संभावित हमले के खतरे को देखते हुए उन्हें अपना विमान बदलना पड़ा था। ट्रम्प के मुताबिक, अगर हमला होता तो निशाना एयरफोर्स वन भी बन सकता था। ट्रम्प ने बताया कि सुरक्षा कारणों से उन्हें एक विमान से दूसरे विमान तक पहुंचने के लिए बेहद गोपनीय तरीके का इस्तेमाल करना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, वह एक ट्रक में छिपकर दूसरे विमान तक पहुंचे, ताकि उनकी गतिविधि के बारे में किसी को जानकारी न मिल सके। ट्रम्प ने कहा कि उस समय सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को लेकर बेहद सतर्क थीं। ईरान की ओर से हमले की आशंका के बीच राष्ट्रपति की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। हमला होता तो एयरफोर्स वन भी निशाने पर ट्रम्प ने कहा कि अगर उस समय हमला किया जाता तो एयरफोर्स वन भी इसकी चपेट में आ सकता था। यही वजह थी कि उनकी यात्रा और विमान बदलने की पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय रखा गया। राष्ट्रपति की सुरक्षा में आमतौर पर कई स्तरों की व्यवस्था होती है, लेकिन इस घटना ने दिखाया कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा कितनी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ट्रक में छिपकर बदला विमान ट्रम्प के अनुसार, उन्हें एक विमान से दूसरे विमान तक ले जाने के दौरान ट्रक का इस्तेमाल किया गया। सुरक्षा कारणों से उन्हें उसमें छिपाकर ले जाया गया, ताकि उनकी लोकेशन का पता न चल सके। इस पूरे घटनाक्रम से यह भी साफ होता है कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर किस स्तर की सावधानी बरती जा रही थी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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India vs Afghanistan

India vs Afghanistan T20 Series: 13, 15 और 17 सितंबर को Delhi में मुकाबले, Bangladesh Tour अटका

भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए सितंबर का महीना एक बार फिर क्रिकेट के रोमांच से भरने वाला है। India vs Afghanistan T20 Series 2026 के तहत दोनों टीमें तीन मैचों में आमने-सामने होंगी। खास बात यह है कि तीनों मुकाबले नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले जाएंगे। मैच 13, 15 और 17 सितंबर को होंगे। इस सीरीज की घोषणा के साथ ही भारतीय क्रिकेट के शेड्यूल में एक नया मोड़ भी आ गया है। अफगानिस्तान के खिलाफ मुकाबलों की तारीखें सामने आने के बाद भारत के प्रस्तावित Bangladesh Tour पर संकट गहराता नजर आ रहा है। Delhi में लगातार तीन T20 मुकाबले भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाली T20 सीरीज के तीनों मैच दिल्ली में खेले जाएंगे। क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह किसी खास मौके से कम नहीं होगा, क्योंकि एक ही मैदान पर लगातार तीन मुकाबले देखने को मिलेंगे। India vs Afghanistan T20I Schedule: अफगानिस्तान को इस सीरीज का मेजबान माना जा रहा है, लेकिन घरेलू परिस्थितियों के चलते मुकाबले भारत में आयोजित किए जा रहे हैं। Bangladesh Tour पर क्यों आया संकट? अफगानिस्तान सीरीज की घोषणा के बाद सबसे बड़ा सवाल भारत के बांग्लादेश दौरे को लेकर खड़ा हो गया है। भारत के सितंबर में बांग्लादेश दौरे का कार्यक्रम प्रस्तावित था, लेकिन अब तारीखों में टकराव की स्थिति बन रही है। यही वजह है कि Bangladesh Tour 2026 को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। दौरे को बचाने के लिए कार्यक्रम में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन फिलहाल अंतिम तस्वीर साफ नहीं है। क्रिकेट कैलेंडर में भारत के व्यस्त कार्यक्रम को देखते हुए दोनों सीरीज को एक साथ आयोजित करना आसान नहीं होगा। ऐसे में आने वाले दिनों में BCCI और संबंधित क्रिकेट बोर्ड के बीच बातचीत पर सबकी नजर रहेगी। Asian Games से पहले टीम इंडिया के लिए अहम मौका अफगानिस्तान के खिलाफ यह T20 सीरीज भारतीय टीम के लिए सिर्फ तीन मुकाबलों तक सीमित नहीं होगी। सितंबर के बाद होने वाले Asian Games को देखते हुए ये मैच खिलाड़ियों को अपनी तैयारियों को परखने का मौका भी दे सकते हैं। T20 क्रिकेट में अफगानिस्तान की टीम पिछले कुछ वर्षों में मजबूत चुनौती बनकर सामने आई है। उसके पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो मैच का रुख कुछ ही ओवर में बदलने की क्षमता रखते हैं। इसलिए टीम इंडिया के लिए घरेलू मैदान पर भी मुकाबले आसान नहीं माने जा सकते। Fans की नजर अब Bangladesh Tour पर फिलहाल क्रिकेट फैंस के लिए सबसे बड़ा आकर्षण दिल्ली में होने वाली India-Afghanistan T20 सीरीज है। लेकिन इसके साथ ही सबकी नजर इस बात पर भी रहेगी कि भारत का Bangladesh Tour होगा या नहीं। अगर कार्यक्रम में बदलाव नहीं हुआ तो सितंबर का क्रिकेट कैलेंडर काफी दिलचस्प होने वाला है। एक तरफ दिल्ली में भारत-अफगानिस्तान की T20 भिड़ंत होगी, तो दूसरी ओर बांग्लादेश दौरे को लेकर लगातार अटकलें जारी रहेंगी। कुल मिलाकर, 13, 15 और 17 सितंबर को होने वाली India vs Afghanistan T20 Series ने भारतीय क्रिकेट के शेड्यूल को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि बांग्लादेश दौरे को लेकर बोर्ड क्या फैसला लेते हैं और टीम इंडिया का अगला सफर किस दिशा में जाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tata संस के Chairman N Chandrasekaran ने दिया Resign

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Tata संस के Chairman N Chandrasekaran ने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है। हालांकि, वे फरवरी 2027 तक अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे, ताकि नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी की जा सके। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा समूह के भीतर पिछले कुछ समय से नेतृत्व और भविष्य की रणनीतियों को लेकर मतभेद सामने आ रहे थे। बताया जा रहा है कि नोएल टाटा और एन. चंद्रशेखरन के बीच कुछ अहम मुद्दों पर विचारों का अंतर था। इसके साथ ही टाटा ट्रस्ट के भीतर भी खींचतान और नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज थी, जिसे इस फैसले की एक बड़ी वजह माना जा रहा है। एन. चंद्रशेखरन ने साल 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने कई बड़े फैसले लिए और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान को और मजबूत किया। एयर इंडिया के अधिग्रहण से लेकर विभिन्न कारोबारी क्षेत्रों में विस्तार तक, उनके कार्यकाल को महत्वपूर्ण माना जाता है। जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में टाटा समूह नए नेतृत्व की तलाश और संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर फोकस करेगा। फिलहाल कंपनी की ओर से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर आधिकारिक प्रक्रिया जारी है। टाटा समूह के करोड़ों निवेशकों, कर्मचारियों और कारोबार से जुड़े लोगों की नजर अब इस बात पर है कि चंद्रशेखरन के बाद समूह की कमान किसके हाथों में जाएगी और भविष्य की रणनीति क्या होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Share Market Crash: Crude Oil से Global Tension तक, क्यों लाल हुआ बाजार?

बुधवार को शेयर बाजार (Share Market) खुलते ही माहौल कुछ ऐसा रहा कि निवेशकों की नजरें स्क्रीन पर टिक गईं। Sensex करीब 600 अंक तक फिसल गया, वहीं Nifty 50 में भी कमजोरी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बिकवाली बढ़ने से बाजार का कुल मार्केट कैप भी घटा और निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹2 लाख करोड़ तक की कमी आने की बात सामने आई। आखिर बाजार में अचानक इतनी गिरावट क्यों आई? इसके पीछे घरेलू के साथ-साथ कई Global Factors भी जिम्मेदार माने जा रहे हैं। Crude Oil ने बढ़ाई Market की चिंता शेयर बाजार की गिरावट में सबसे अहम वजहों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने से भारत के लिए आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर रुपये और महंगाई पर पड़ने की आशंका रहती है। महंगा तेल कंपनियों की लागत भी बढ़ा सकता है। यही वजह है कि Crude Oil में तेजी आते ही बाजार में अक्सर सावधानी बढ़ जाती है। Middle East Tension का असर मध्य पूर्व में तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। खासकर तेल की सप्लाई और Strait of Hormuz से जुड़े घटनाक्रम पर दुनियाभर के बाजारों की नजर है। अगर तनाव लंबा खिंचता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आने का खतरा बना रहता है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह अच्छी खबर नहीं मानी जाती। Global Market से भी नहीं मिला मजबूत Support भारतीय शेयर बाजार अकेले नहीं चलता। दुनिया के बड़े बाजारों में होने वाली हलचल का असर यहां भी दिखाई देता है। अमेरिका समेत प्रमुख बाजारों में आर्थिक नीतियों और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क रखा। ऐसे माहौल में विदेशी निवेशक जोखिम कम करने के लिए बिकवाली कर सकते हैं, जिससे घरेलू बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनता है। Inflation Data पर Investors की नजर महंगाई के आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि Inflation का अगला रुख ब्याज दरों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों को किस तरह प्रभावित करेगा। ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बढ़ने पर शेयरों में Volatility बढ़ना स्वाभाविक है। कौन-कौन से Sector दबाव में रहे? बाजार में गिरावट का असर कई सेक्टर्स पर दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में बड़ी संख्या में सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में रहे। हालांकि कुछ चुनिंदा क्षेत्रों, खासकर Metal और PSU Bank Stocks, में खरीदारी भी देखने को मिली। इससे साफ है कि निवेशक पूरी तरह बाजार से बाहर नहीं निकल रहे, बल्कि मौजूदा परिस्थितियों में ज्यादा सावधानी से पैसा लगा रहे हैं। क्या Investors को घबराने की जरूरत है? Sensex में 600 अंकों की गिरावट निश्चित रूप से बड़ी नजर आती है, लेकिन सिर्फ एक दिन की कमजोरी को देखकर इसे बड़ी Market Crash की शुरुआत मानना सही नहीं होगा। फिलहाल बाजार की नजर Crude Oil Prices, Middle East Tension, Global Cues और Inflation Data पर है। इन मोर्चों पर हालात सुधरते हैं तो बाजार में तेजी से रिकवरी भी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव में और बढ़ोतरी बाजार की परेशानी बढ़ा सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
India vs Afghanistan

India vs Afghanistan T20 Series: 13, 15 और 17 सितंबर को Delhi में मुकाबले, Bangladesh Tour अटका

भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए सितंबर का महीना एक बार फिर क्रिकेट के रोमांच से भरने वाला है। India vs Afghanistan T20 Series 2026 के तहत दोनों टीमें तीन मैचों में आमने-सामने होंगी। खास बात यह है कि तीनों मुकाबले नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले जाएंगे। मैच 13, 15 और 17 सितंबर को होंगे। इस सीरीज की घोषणा के साथ ही भारतीय क्रिकेट के शेड्यूल में एक नया मोड़ भी आ गया है। अफगानिस्तान के खिलाफ मुकाबलों की तारीखें सामने आने के बाद भारत के प्रस्तावित Bangladesh Tour पर संकट गहराता नजर आ रहा है। Delhi में लगातार तीन T20 मुकाबले भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाली T20 सीरीज के तीनों मैच दिल्ली में खेले जाएंगे। क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह किसी खास मौके से कम नहीं होगा, क्योंकि एक ही मैदान पर लगातार तीन मुकाबले देखने को मिलेंगे। India vs Afghanistan T20I Schedule: अफगानिस्तान को इस सीरीज का मेजबान माना जा रहा है, लेकिन घरेलू परिस्थितियों के चलते मुकाबले भारत में आयोजित किए जा रहे हैं। Bangladesh Tour पर क्यों आया संकट? अफगानिस्तान सीरीज की घोषणा के बाद सबसे बड़ा सवाल भारत के बांग्लादेश दौरे को लेकर खड़ा हो गया है। भारत के सितंबर में बांग्लादेश दौरे का कार्यक्रम प्रस्तावित था, लेकिन अब तारीखों में टकराव की स्थिति बन रही है। यही वजह है कि Bangladesh Tour 2026 को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। दौरे को बचाने के लिए कार्यक्रम में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन फिलहाल अंतिम तस्वीर साफ नहीं है। क्रिकेट कैलेंडर में भारत के व्यस्त कार्यक्रम को देखते हुए दोनों सीरीज को एक साथ आयोजित करना आसान नहीं होगा। ऐसे में आने वाले दिनों में BCCI और संबंधित क्रिकेट बोर्ड के बीच बातचीत पर सबकी नजर रहेगी। Asian Games से पहले टीम इंडिया के लिए अहम मौका अफगानिस्तान के खिलाफ यह T20 सीरीज भारतीय टीम के लिए सिर्फ तीन मुकाबलों तक सीमित नहीं होगी। सितंबर के बाद होने वाले Asian Games को देखते हुए ये मैच खिलाड़ियों को अपनी तैयारियों को परखने का मौका भी दे सकते हैं। T20 क्रिकेट में अफगानिस्तान की टीम पिछले कुछ वर्षों में मजबूत चुनौती बनकर सामने आई है। उसके पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो मैच का रुख कुछ ही ओवर में बदलने की क्षमता रखते हैं। इसलिए टीम इंडिया के लिए घरेलू मैदान पर भी मुकाबले आसान नहीं माने जा सकते। Fans की नजर अब Bangladesh Tour पर फिलहाल क्रिकेट फैंस के लिए सबसे बड़ा आकर्षण दिल्ली में होने वाली India-Afghanistan T20 सीरीज है। लेकिन इसके साथ ही सबकी नजर इस बात पर भी रहेगी कि भारत का Bangladesh Tour होगा या नहीं। अगर कार्यक्रम में बदलाव नहीं हुआ तो सितंबर का क्रिकेट कैलेंडर काफी दिलचस्प होने वाला है। एक तरफ दिल्ली में भारत-अफगानिस्तान की T20 भिड़ंत होगी, तो दूसरी ओर बांग्लादेश दौरे को लेकर लगातार अटकलें जारी रहेंगी। कुल मिलाकर, 13, 15 और 17 सितंबर को होने वाली India vs Afghanistan T20 Series ने भारतीय क्रिकेट के शेड्यूल को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि बांग्लादेश दौरे को लेकर बोर्ड क्या फैसला लेते हैं और टीम इंडिया का अगला सफर किस दिशा में जाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
N Chandrasekaran

N Chandrasekaran Resigns: Tata Sons में बड़ा फेरबदल, फरवरी 2027 के बाद कौन संभालेगा कमान?

Tata Group के कॉरपोरेट स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। N Chandrasekaran ने Tata Sons के चेयरमैन पद से हटने का फैसला किया है। हालांकि, यह बदलाव तुरंत नहीं होगा। चंद्रशेखरन अपने मौजूदा कार्यकाल के पूरा होने तक चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनका कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होगा। चंद्रशेखरन के इस फैसले ने Tata Group के अगले नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं। खासकर इसलिए क्योंकि पिछले कुछ समय से Tata Trusts और Tata Sons के बीच governance और leadership को लेकर मतभेदों की खबरें आती रही हैं। AGM से पहले आया बड़ा फैसला Tata Sons की Annual General Meeting यानी AGM 18 अगस्त 2026 को होने वाली है। इस बैठक से पहले चंद्रशेखरन का पद छोड़ने का फैसला सामने आया है। ऐसे में AGM और उसके बाद होने वाली गतिविधियों पर कारोबारी जगत की नजर बनी हुई है। चंद्रशेखरन फिलहाल अपने पद पर बने रहेंगे, इसलिए Tata Sons को नए चेयरमैन के लिए तैयारी करने का समय मिल जाएगा। फरवरी 2027 के बाद समूह की कमान किसके हाथ में होगी, यह आने वाले महीनों में सबसे बड़ा सवाल रहने वाला है। Noel Tata से मतभेद की खबरों ने बढ़ाई हलचल चंद्रशेखरन के फैसले के साथ Noel Tata का नाम भी चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स में Tata Trusts और Tata Sons के नेतृत्व के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद की बात कही गई है। इनमें Tata Sons की future strategy, board representation और कंपनी की संभावित public listing जैसे मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, इन कथित मतभेदों को लेकर सभी दावे आधिकारिक रूप से सामने नहीं आए हैं। इसलिए इन्हें फिलहाल रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से ही देखा जाना चाहिए। 2017 में संभाली थी Tata Sons की जिम्मेदारी N Chandrasekaran ने 2017 में Tata Sons के चेयरमैन का पद संभाला था। इससे पहले वह TCS के CEO और MD रह चुके थे। Tata Sons की कमान संभालने वाले वह Tata परिवार से बाहर के प्रमुख प्रोफेशनल चेहरों में से एक रहे हैं। उनके कार्यकाल में Tata Group ने कई बड़े कारोबारी फैसले किए। Air India की Tata Group में वापसी, अलग-अलग कारोबारों में निवेश और समूह की global presence बढ़ाने की दिशा में भी इस दौरान महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। Tata Trusts की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है? Tata सिर्फ एक सामान्य holding company नहीं है। यह Tata Group के कई बड़े कारोबारों के लिए केंद्रीय भूमिका निभाती है। TCS, Tata Motors, Tata Steel, Tata Power और Air India जैसे बड़े नाम समूह का हिस्सा हैं। अब सबसे बड़ा सवाल—अगला चेयरमैन कौन? चंद्रशेखरन के फैसले के बाद अब Tata Group में succession planning पर सबकी नजर रहेगी। फरवरी 2027 तक उनके पद पर बने रहने से नए नेतृत्व की तलाश और transition को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने का समय मिलेगा। यह बदलाव सिर्फ एक चेयरमैन के जाने तक सीमित नहीं है। Tata Group जिस दौर से गुजर रहा है, उसमें अगला चेयरमैन कंपनी की growth strategy, governance और future expansion में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। निवेशकों की भी नजर Tata Group की listed कंपनियों में निवेश करने वाले लोगों के लिए भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। नेतृत्व में बदलाव का असर आगे चलकर समूह की रणनीति और बाजार की धारणा पर पड़ सकता है। हालांकि, किसी शेयर पर सिर्फ इस खबर के आधार पर निवेश का फैसला करना सही नहीं होगा। फिलहाल तस्वीर साफ है—N Chandrasekaran फरवरी 2027 तक Tata Sons की कमान संभालेंगे, लेकिन उसके बाद Tata Group को नया नेतृत्व मिलेगा। अब निगाहें इस बात पर हैं कि यह जिम्मेदारी किसे सौंपी जाती है और Tata Trusts की भूमिका इस पूरी प्रक्रिया में कितनी अहम रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
BSE

BSE को मिली Nifty 50 में जगह, Wipro बाहर; जानें 30 सितंबर से क्या बदलेगा

भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े benchmark index Nifty 50 में जल्द ही बड़ा बदलाव होने वाला है। NSE Indices की छमाही समीक्षा में BSE Ltd. को Nifty 50 में शामिल करने का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही दिग्गज IT कंपनी Wipro Ltd. अब इस प्रमुख इंडेक्स का हिस्सा नहीं रहेगी। यह बदलाव 30 सितंबर 2026 से लागू होगा। यानी 29 सितंबर को बाजार बंद होने के बाद Nifty 50 की नई तस्वीर सामने आएगी। BSE को क्यों मिली Nifty 50 में जगह? NSE Indices के मुताबिक BSE का 6 महीने का औसत free-float market capitalisation करीब ₹1.41 लाख करोड़ रहा। वहीं Nifty 50 की सबसे छोटी मौजूदा कंपनी Wipro का औसत free-float market cap करीब ₹55,930 करोड़ था। इंडेक्स में शामिल होने के नियमों के मुताबिक BSE का औसत free-float market cap Wipro के मुकाबले जरूरी स्तर से काफी ऊपर रहा। इसी आधार पर BSE को Nifty 50 में जगह मिली है। सीधी भाषा में कहें तो बाजार में BSE का बढ़ता आकार और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी अब उसे Nifty 50 की शीर्ष कंपनियों की सूची तक ले आई है। Wipro की Nifty 50 से होगी Exit इस बदलाव का दूसरा बड़ा पहलू Wipro का Nifty 50 से बाहर होना है। कंपनी लंबे समय से इस benchmark index का हिस्सा रही है, लेकिन अब इसका free-float market capitalisation इंडेक्स की मौजूदा जरूरत के मुकाबले कम हो गया है। Wipro को Nifty 50 से हटाकर Nifty Next 50 में शामिल किया जाएगा। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि कंपनी के कारोबार पर कोई सीधा फैसला हो गया है। यह मुख्य रूप से इंडेक्स के तय नियमों और बाजार पूंजीकरण से जुड़ा बदलाव है। 30 सितंबर से लागू होगा नया बदलाव NSE Indices ने साफ किया है कि बदलाव 29 सितंबर 2026 को बाजार बंद होने के बाद प्रभावी होंगे। इसके बाद 30 सितंबर से Nifty 50 में BSE की जगह पक्की हो जाएगी और Wipro बाहर होगी। यह बदलाव सिर्फ इंडेक्स की सूची तक सीमित नहीं है। Nifty 50 को ट्रैक करने वाले कई passive funds और ETFs को भी अपनी holdings में बदलाव करना पड़ सकता है। इसी वजह से बदलाव की तारीख के आसपास संबंधित शेयरों में खरीद-बिक्री बढ़ सकती है। BSE Share में क्यों बढ़ी हलचल? BSE के Nifty 50 में शामिल होने की खबर बाजार के लिए काफी अहम रही। Reuters के अनुसार घोषणा के बाद BSE के शेयर में करीब 4 फीसदी की तेजी देखने को मिली, जबकि Wipro के शेयर में करीब 1.1 फीसदी की गिरावट आई। हालांकि, शेयर बाजार में किसी कंपनी के इंडेक्स में शामिल होने या बाहर होने को देखकर अकेले निवेश का फैसला करना ठीक नहीं है। शेयर की कीमत पर कंपनी के नतीजे, valuation, बाजार की स्थिति और कई दूसरे factors भी असर डालते हैं। Nifty 50 के लिए क्या बदलेगा? Nifty 50 को भारतीय शेयर बाजार का प्रमुख benchmark माना जाता है। इसमें देश की बड़ी और प्रमुख कंपनियां शामिल होती हैं। समय-समय पर NSE Indices इसकी समीक्षा करता है, ताकि इंडेक्स बदलती market conditions को बेहतर तरीके से दर्शा सके। BSE की entry इसी बदलती तस्वीर की एक मिसाल है। एक तरफ stock exchange कारोबार से जुड़ी कंपनी का बाजार में बढ़ता महत्व नजर आ रहा है, तो दूसरी तरफ लंबे समय से Nifty 50 में मौजूद Wipro को अब Next 50 में जाना होगा। निवेशकों की नजर अब सितंबर के बदलाव पर फिलहाल बाजार की नजर 30 सितंबर 2026 पर है। उस दिन से Nifty 50 में BSE की नई पारी शुरू होगी और Wipro की benchmark index से विदाई हो जाएगी। यह बदलाव भारतीय शेयर बाजार में बदलते market dynamics की ओर इशारा करता है। आने वाले दिनों में निवेशक BSE और Wipro दोनों के शेयरों में होने वाली गतिविधियों के साथ-साथ Nifty 50 में होने वाले दूसरे बदलावों पर भी नजर रखेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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