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Bihar

Bihar Bridge Construction Accident: लालगंज में अचानक गिरा Launcher, 2 मजदूरों की हालत नाजुक

बिहार (Bihar) के वैशाली जिले के लालगंज में गुरुवार को निर्माणाधीन पुल पर अचानक बड़ा हादसा हो गया। पुल बनाने के काम में इस्तेमाल किया जा रहा भारी Launcher अचानक नीचे गिर गया। हादसे के समय वहां मजदूर काम कर रहे थे, जिनमें कई इसकी चपेट में आ गए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हादसे में 8 मजदूर घायल हुए हैं। इनमें से 2 मजदूरों की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आसपास मौजूद लोगों और निर्माण स्थल पर काम कर रहे कर्मचारियों ने घायलों को बाहर निकालने में मदद की। भारतमाला Project के तहत चल रहा था काम लालगंज में जिस जगह यह हादसा हुआ, वहां भारत माला परियोजना के तहत NH-139W फोरलेन का निर्माण चल रहा है। इसी परियोजना के तहत पुल का काम भी किया जा रहा है। निर्माण के दौरान इस्तेमाल होने वाला लॉन्चर अचानक गिरने से यह दुर्घटना हुई। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। राहत और बचाव का काम शुरू किया गया और घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। दो मजदूरों की हालत गंभीर हादसे में घायल मजदूरों में दो की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। उन्हें बेहतर इलाज के लिए रेफर किए जाने की जानकारी सामने आई है। बाकी घायलों का भी अस्पताल में इलाज चल रहा है। घटना के बाद प्रशासन ने मौके का जायजा लिया और हादसे की वजह पता करने के लिए जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि लॉन्चर गिरने के पीछे तकनीकी खराबी थी, मशीनरी में कोई समस्या आई या निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा में चूक हुई। Construction Site की Safety पर फिर उठे सवाल निर्माणाधीन पुल पर भारी मशीनरी के इस्तेमाल के दौरान सुरक्षा बेहद जरूरी होती है। ऐसे हादसे में सिर्फ मशीन या निर्माण कार्य को नुकसान नहीं पहुंचता, बल्कि वहां काम कर रहे मजदूरों की जान भी खतरे में पड़ जाती है। लालगंज की घटना के बाद निर्माण स्थल पर Safety Measures और मशीनरी की तकनीकी जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन की जांच पूरी होने के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह सामने आएगी। फिलहाल घायल मजदूरों का इलाज जारी है। सभी की नजर अब गंभीर रूप से घायल दो मजदूरों की हालत पर बनी हुई है।
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Nepal

India-Nepal Relief: बाढ़ से तबाह Nepal के लिए भारत ने भेजी 8वीं बड़ी मदद

Nepal में अगस्त के आखिर में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। कई इलाकों में घर, सड़कें और पुल बह गए, जबकि हजारों परिवारों की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। इस मुश्किल वक्त में भारत लगातार नेपाल के साथ खड़ा है। भारत ने अब 35 टन राहत सामग्री लेकर 8वीं खेप नेपाल भेजी है, जो काठमांडू पहुंच गई है। इस मदद के जरिए बाढ़ प्रभावित लोगों तक जरूरी सामान और Rescue Equipment पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। Nepal Flood में 1367 से ज्यादा लोगों की मौत नेपाल में 26 अगस्त को शुरू हुई इस भीषण आपदा के बाद मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। Reuters के मुताबिक कम से कम 1,367 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 5,000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। राहत और बचाव टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रही हैं। इस आपदा की वजह हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के टूटने से आई भारी बाढ़ बताई जा रही है। तेज बहाव के साथ पानी, मलबा और चट्टानें नीचे की ओर आईं और रास्ते में आने वाले कई गांवों तथा Infrastructure को भारी नुकसान पहुंचा। India ने भेजी 8वीं राहत खेप भारत ने मानवीय सहायता के तहत भारतीय वायुसेना के विमान से 35 टन राहत और बचाव सामग्री नेपाल भेजी है। यह नेपाल के लिए भेजी गई भारत की आठवीं राहत खेप है। इससे पहले भी भारत कई चरणों में राहत सामग्री और विशेषज्ञ टीम नेपाल भेज चुका है। भारत की मदद सिर्फ राहत सामग्री तक सीमित नहीं है। भारतीय विशेषज्ञ नेपाल में Rescue और Forensic Operations में भी सहयोग कर रहे हैं। इससे प्रभावित लोगों की तलाश और आपदा में जान गंवाने वालों की पहचान के प्रयासों को मजबूती मिल रही है। सड़कें और पुल टूटे, Rescue Operation में बड़ी चुनौती बाढ़ ने नेपाल के कई हिस्सों में सड़क और पुलों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। यही वजह है कि राहत टीमों के लिए दूरदराज के इलाकों तक पहुंचना आसान नहीं है। कई जगह Helicopter पहले से Search and Rescue Mission में लगे हैं। ऐसे में नेपाल की सेना अब Drones की मदद से राहत सामग्री प्रभावित इलाकों तक पहुंचा रही है। इन ड्रोन के जरिए भोजन, दवाइयां, ईंधन और दूसरी जरूरी चीजें उन जगहों तक भेजी जा रही हैं, जहां सामान्य वाहनों का पहुंचना मुश्किल है। हजारों लोग अभी भी Missing बाढ़ के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। लापता लोगों के परिवार लगातार अपने प्रियजनों की तलाश कर रहे हैं। कई मामलों में शवों की पहचान भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। भारत ने पहले ही Forensic Experts और अन्य विशेषज्ञों को नेपाल भेजा है। जरूरत पड़ने पर DNA आधारित पहचान की प्रक्रिया भी मददगार साबित हो रही है। भारत में भी कुछ परिवार अपने लापता रिश्तेदारों की पहचान के लिए DNA Samples जमा कर रहे हैं। Infrastructure को भी भारी नुकसान नेपाल में इस आपदा से सिर्फ लोगों की जान नहीं गई, बल्कि बड़े पैमाने पर Infrastructure को नुकसान पहुंचा है। सड़कें, पुल, घर और Hydropower Projects प्रभावित हुए हैं। नेपाल अब राहत के साथ-साथ आने वाले समय में Reconstruction की तैयारी भी कर रहा है। सरकार ने शुरुआती Recovery और Reconstruction के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत बताई है। इसका मकसद प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी व्यवस्था करने के साथ जरूरी Infrastructure को दोबारा खड़ा करना है। भारत की मदद से बढ़ी उम्मीद नेपाल इस समय अपने हाल के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। हजारों परिवार अपनों की तलाश में हैं और कई इलाकों में सामान्य जिंदगी वापस लाने की कोशिश जारी है। ऐसे समय में भारत की लगातार राहत सहायता पड़ोसी देश के लिए महत्वपूर्ण है। 35 टन की 8वीं राहत खेप के काठमांडू पहुंचने से Search, Rescue और राहत अभियान को जरूरी सामान मिलने की उम्मीद है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाना और नेपाल में धीरे-धीरे सामान्य हालात बहाल करना है।
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BRICS Summit 2026

BRICS Summit 2026: Xi Jinping आएंगे India, PM Modi के साथ Bilateral Talks पर सबकी नजर

नई दिल्ली में होने वाले BRICS Summit 2026 से पहले भारत और चीन के रिश्तों को लेकर हलचल बढ़ गई है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग BRICS बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं। उनका यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि 2019 के बाद यह उनका पहला India Visit होगा। सबसे ज्यादा नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और Xi Jinping की Bilateral Meeting पर है। 2019 के बाद पहली बार भारत आएंगे Xi Jinping शी जिनपिंग आखिरी बार 2019 में भारत आए थे। तब प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी मुलाकात तमिलनाडु के मामल्लपुरम में हुई थी। इसके बाद 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प ने दोनों देशों के रिश्तों को बड़ा झटका दिया। सीमा पर तनाव के बाद भारत और चीन के बीच लंबे समय तक रिश्ते मुश्किल दौर से गुजरे। राजनीतिक बातचीत, कारोबार और निवेश पर भी इसका असर दिखाई दिया। हालांकि, पिछले कुछ समय से दोनों देशों ने संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिश की है। Modi-Xi Meeting पर क्यों टिकी हैं निगाहें? BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात को सिर्फ एक सामान्य कूटनीतिक बैठक के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच LAC, Border Peace, Trade और Economic Relations जैसे कई अहम मुद्दे हैं। अगर दोनों नेताओं के बीच विस्तृत बातचीत होती है, तो सीमा पर शांति बनाए रखने और आपसी रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। हालिया रिपोर्टों में भी इस बैठक में LAC की स्थिति और तनाव कम करने के प्रयासों पर चर्चा की संभावना जताई गई है। Galwan Clash के बाद बदले भारत-चीन के रिश्ते 2020 की गलवान झड़प भारत-चीन संबंधों के लिए एक बड़ा turning point साबित हुई थी। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई। समय के साथ सीमा पर स्थिति को संभालने के लिए दोनों पक्षों ने बातचीत का रास्ता बनाए रखा। अब BRICS जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर मोदी और जिनपिंग की आमने-सामने बातचीत को इसी प्रक्रिया की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। Trade और Business Relations भी बड़ा मुद्दा भारत और चीन के बीच सिर्फ सीमा विवाद ही चुनौती नहीं है। दोनों देशों के बीच व्यापार काफी बड़ा है, लेकिन इसके साथ कई तरह की चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं। चीनी कंपनियों के निवेश, वीजा, तकनीक और संवेदनशील क्षेत्रों में कारोबार को लेकर भारत सतर्क रहा है। वहीं कुछ भारतीय कारोबारी भी चीन के साथ व्यापार करते समय अलग-अलग व्यावसायिक और नियामकीय अड़चनों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की बातचीत से Economic Relations को लेकर भी कोई सकारात्मक संकेत मिलने की उम्मीद की जा रही है। BRICS Summit में बड़े नेताओं का जमावड़ा 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में BRICS Summit आयोजित हो रहा है। भारत इस बार BRICS की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, आपदा से निपटने और महत्वपूर्ण Supply Chains जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन समेत कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी से यह Summit काफी महत्वपूर्ण हो गया है। क्या India-China Relations में आएगा नया मोड़? सबसे बड़ा सवाल यही है कि Modi-Xi Meeting से भारत और चीन के रिश्तों को कितनी नई दिशा मिलती है। दोनों देशों के बीच अभी भी कई मतभेद हैं, लेकिन हाल के महीनों में संवाद और संपर्क बढ़ाने की कोशिशें दिखाई दी हैं। अगर बातचीत सकारात्मक रहती है तो इससे सीमा पर शांति, व्यापार और दोनों देशों के बीच व्यापक संबंधों को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक केवल एक बैठक से वर्षों से चले आ रहे मतभेद खत्म नहीं होंगे। फिलहाल दुनिया की नजर BRICS Summit पर है और खासतौर पर इस बात पर कि PM Modi और Xi Jinping की मुलाकात में क्या बातचीत होती है और भारत-चीन रिश्तों के लिए इससे क्या संदेश निकलता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर में बढ़ी श्रद्धालुओं की भीड़, मूर्ति हटाने को लेकर दावों पर प्रशासन की सफाई

उज्जैन। खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को हटाए जाने की चर्चाओं के बीच उज्जैन का यह मंदिर देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर प्रतिमा से जुड़े वीडियो और रील्स वायरल होने के बाद मंदिर में दर्शन करने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। पिछले दो दिनों में 35 हजार से ज्यादा श्रद्धालु यहां पहुंच चुके हैं। इनमें मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान से आए श्रद्धालु भी शामिल हैं। सती गेट के पास स्थित मंदिर के आसपास प्रशासन की कार्रवाई और प्रतिमा को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, जिला प्रशासन ने बुधवार को प्रेस नोट जारी कर प्रतिमा को हटाने के किसी भी प्रयास से इनकार किया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही चमत्कार की कहानियां प्रतिमा को हटाने की कोशिश नाकाम होने की चर्चाओं के बाद सोशल मीडिया पर खड़े हनुमानजी से जुड़ी कई तरह की चमत्कारिक कहानियां वायरल हो रही हैं। इन वीडियो और रील्स के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से मंदिर के आसपास के क्षेत्र में निर्माण हटाने की कार्रवाई की गई है। वहीं, हनुमानजी की प्रतिमा फिलहाल टेंट के भीतर विराजमान है। बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर के आसपास बैरिकेडिंग की गई है और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। IIT इंदौर की टीम फिर करेगी जांच प्रतिमा को हटाने को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच IIT इंदौर की टीम सोमवार को मंदिर पहुंची थी। टीम ने मौके पर पहुंचकर मंदिर और प्रतिमा से संबंधित स्थिति की जांच की। अब IIT इंदौर की टीम गुरुवार को एक बार फिर खड़े हनुमान मंदिर पहुंचकर जांच करेगी। इस जांच के बाद स्थिति को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है। सोशल मीडिया से श्रद्धालुओं को मिली जानकारी सती गेट के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में उन्होंने मंदिर में इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं देखी। अब दर्शन के लिए लोग लंबी कतारों में खड़े हो रहे हैं। नासिक से पहुंचे अनिल ने बताया कि उन्होंने इंस्टाग्राम पर खड़े हनुमानजी की रील देखी थी। इसके बाद उन्होंने उज्जैन आकर दर्शन करने का फैसला किया। नागपुर से आए महेश टिचकुले ने बताया कि वह पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर हनुमानजी से जुड़ी खबरें देख रहे थे। इसके बाद उन्होंने उज्जैन आने का निर्णय लिया। वहीं, राजस्थान के अजमेर से आए सुशील खंडेलवाल महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि घर पर सोशल मीडिया रील देखने के दौरान उन्हें खड़े हनुमान मंदिर के बारे में जानकारी मिली, जिसके बाद वे यहां दर्शन करने पहुंचे। प्रशासन ने कहा- प्रतिमा हटाने का कोई प्रयास नहीं हुआ सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच जिला प्रशासन ने बुधवार को प्रेस नोट जारी कर अपना पक्ष स्पष्ट किया। प्रशासन ने कहा कि खड़े हनुमानजी की प्रतिमा का विषय उज्जैनवासियों और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है। प्रशासन के अनुसार श्रद्धालुओं की भावनाओं, प्रतिमा की सुरक्षा तथा उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रेस नोट में कहा गया कि सोशल मीडिया पर यह भ्रामक खबर प्रसारित की जा रही है कि प्रशासन ने श्री खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को विस्थापित करने के कई प्रयास किए हैं। जिला प्रशासन के मुताबिक, अब तक प्रतिमा को विस्थापित या हटाने के लिए मशीन अथवा मानवीय तरीके से कोई प्रयास नहीं किया गया है। भक्तों ने प्रशासन के दावे पर उठाए सवाल प्रशासन की सफाई के बाद कुछ श्रद्धालुओं और मंदिर से जुड़े लोगों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रतिमा को हटाने के प्रयास से संबंधित वीडियो उनके पास मौजूद हैं और अधिकारी चाहें तो उन्हें दिखाया जा सकता है। मंदिर से जुड़े शैलू यादव ने कहा कि प्रशासन को जनभावनाओं का सम्मान करते हुए हनुमानजी की प्रतिमा को यहीं रहने देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यदि प्रशासन प्रतिमा हटाने के किसी प्रयास से इनकार कर रहा है तो उनके पास इसके संबंध में वीडियो मौजूद हैं। शैलू यादव के मुताबिक, नगर निगम अधिकारी हिमांशु तिवारी के सामने गड्ढा खोदा गया था। इसके बाद पुरातत्व विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची थी। उन्होंने रात में कटर मशीन लाए जाने का भी दावा किया है। उनके अनुसार इन घटनाओं से जुड़े वीडियो उनके पास सुरक्षित हैं। फिलहाल प्रतिमा को हटाने को लेकर प्रशासन और स्थानीय लोगों के दावों में अंतर है। IIT इंदौर की आगामी जांच और प्रशासन की कार्रवाई के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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ग्वालियर बंद बेअसर, यूजीसी नियमों के विरोध में संगठनों का प्रदर्शन

ग्वालियर। यूजीसी के नियमों को वापस लेने, जातिगत नीतियों की समीक्षा और विभिन्न सामाजिक मुद्दों को लेकर सर्व संगठन एवं परशुराम सेना की ओर से गुरुवार को ग्वालियर बंद का आह्वान किया गया था। हालांकि शहर में बंद का खास असर देखने को नहीं मिला और अधिकांश इलाकों में सामान्य गतिविधियां जारी रहीं। बंद के दौरान फूलबाग स्थित रानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल के सामने मैदान में विभिन्न संगठनों के लोग एकत्रित हुए। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को दोहराते हुए संबंधित नीतियों की समीक्षा और बदलाव की मांग उठाई। भिंड, मुरैना और दतिया से भी पहुंचे लोग आंदोलन में ग्वालियर के अलावा भिंड, मुरैना, दतिया समेत आसपास के जिलों से भी विभिन्न संगठनों के लोग शामिल होने पहुंचे। आयोजकों ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण और अनुशासित बनाए रखने की अपील की। आंदोलन को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल तैनात रहा और स्थिति पर लगातार नजर रखी गई। UGC नियम वापस लेने की मांग प्रदर्शनकारी संगठनों की प्रमुख मांग यूजीसी के हालिया दिशा-निर्देशों और नीतियों को वापस लेने की है। संगठनों का कहना है कि इन नियमों को लेकर छात्रों और युवाओं के बीच असंतोष है। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, किसी भी नए नियम या नीति को लागू करने से पहले उससे प्रभावित होने वाले छात्रों और अन्य संबंधित पक्षों की चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। जातिगत नीतियों की समीक्षा की मांग सर्व संगठन और परशुराम सेना की ओर से सरकारी योजनाओं और आरक्षण व्यवस्था से जुड़ी जातिगत नीतियों की समीक्षा की मांग भी उठाई गई। संगठनों का कहना है कि सामाजिक संतुलन और वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मौजूदा नीतियों की समीक्षा आवश्यक है। इसके अलावा युवाओं, छात्रों और आम नागरिकों से जुड़े कई अन्य सामाजिक मुद्दे भी प्रदर्शन के दौरान उठाए गए। सुरक्षा के बीच कई रूट डायवर्ट प्रदर्शन को देखते हुए फूलबाग और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात किया गया। शहर में यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई मार्गों पर रूट डायवर्जन किया गया। महाराज बाड़ा, बाड़ा बाजार, मुरार और हजीरा समेत शहर के प्रमुख इलाकों में भी सुरक्षा बढ़ाई गई। पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों के जरिए संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी रखी। हालांकि ग्वालियर बंद का व्यापक असर नहीं दिखा, लेकिन विभिन्न संगठनों के प्रदर्शन के चलते प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती।
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Houthi

Houthi Missile Attack: सऊदी अरब पर हमले के बाद Pakistan का Iran को सीधा संदेश

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। यमन के हूती (Houthi) विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर किए गए हमलों ने पूरे क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। हमलों के बाद पाकिस्तान भी खुलकर सामने आया है। पाकिस्तान ने ईरान को साफ संदेश दिया है कि वह हूतियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सऊदी अरब पर हो रहे हमलों को रोकने की कोशिश करे। मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हाल ही में रक्षा सहयोग मजबूत हुआ है। ऐसे में सऊदी अरब पर लगातार हमले होने की स्थिति में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। Saudi Arabia पर Missile और Drone Attack रिपोर्ट्स के मुताबिक हूतियों ने सऊदी अरब के कुछ इलाकों को मिसाइल और ड्रोन के जरिए निशाना बनाया। अबहा, जिजान, नजरान और खमिस मुशैत जैसे क्षेत्रों में हमलों की खबर सामने आई है। कुछ स्थानों पर तेल और ऊर्जा से जुड़े ठिकानों को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई। इन हमलों में बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। हमले के बाद सऊदी सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और संभावित दूसरे हमलों को रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है। Pakistan ने Iran को क्यों चेताया? सऊदी अरब पर हमले के बाद पाकिस्तान की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। पाकिस्तान के सऊदी अरब के साथ पुराने और मजबूत रक्षा संबंध हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अगर सऊदी अरब पर हमला जारी रहता है तो पाकिस्तान अपने रक्षा सहयोग के तहत प्रतिक्रिया देने की स्थिति में आ सकता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी इस मामले में सख्त रुख दिखाया है। उनका संदेश साफ है कि सऊदी अरब की सुरक्षा को खतरा पहुंचने की स्थिति को हल्के में नहीं लिया जाएगा। यही वजह है कि पाकिस्तान ने ईरान से हूतियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने और उन्हें सऊदी अरब पर हमले रोकने के लिए मनाने की अपील की है। क्या Saudi Arabia के लिए Pakistan उतरेगा मैदान में? अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पाकिस्तान सीधे सैन्य कार्रवाई में शामिल होगा। फिलहाल इस्लामाबाद का जोर कूटनीतिक दबाव और बातचीत के जरिए तनाव कम करने पर दिखाई दे रहा है। हालांकि, अगर सऊदी अरब पर हमले बड़े स्तर पर जारी रहते हैं तो पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौता चर्चा के केंद्र में आ सकता है। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान पर अपने करीबी सहयोगी के साथ खड़े होने का दबाव बढ़ सकता है। Iran और Houthis के बीच कनेक्शन पर सवाल हूतियों और ईरान के संबंध लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। ईरान पर हूतियों को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं, जबकि तेहरान यह कहता रहा है कि हूती एक स्वतंत्र संगठन हैं और उसके सीधे नियंत्रण में नहीं हैं। यही वजह है कि पाकिस्तान का ईरान को दिया गया संदेश काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर तेहरान हूतियों पर प्रभाव डालने में सफल होता है और सऊदी अरब पर हमले कम होते हैं, तो क्षेत्र में तनाव कुछ हद तक कम हो सकता है। Saudi Arabia की जवाबी कार्रवाई से बढ़ी चिंता हूती हमलों के बाद सऊदी अरब की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई है। यमन में हूती ठिकानों पर हमलों की खबरों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों पक्ष यहीं रुकेंगे या हमले और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला आगे बढ़ेगा। अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर सिर्फ यमन और सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहेगा। Oil Market पर भी पड़ सकता है असर मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने का सीधा असर दुनिया के Energy Market पर पड़ सकता है। सऊदी अरब दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों में शामिल है। ऐसे में उसके तेल प्रतिष्ठानों या महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों को किसी बड़े हमले का सामना करना पड़ा तो Global Oil Supply को लेकर चिंता बढ़ सकती है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। भारत जैसे बड़े Oil Importing देश के लिए यह स्थिति खास तौर पर महत्वपूर्ण है। आगे क्या होगा? फिलहाल Pakistan की चेतावनी ने Middle East Crisis को नया मोड़ दे दिया है। एक तरफ सऊदी अरब हूती हमलों का सामना कर रहा है, दूसरी तरफ पाकिस्तान अपने करीबी सहयोगी के समर्थन में सख्त संदेश दे रहा है और ईरान से हूतियों पर दबाव बनाने को कह रहा है। अगर हूती हमले रुकते हैं तो क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद बन सकती है। लेकिन हमले और जवाबी कार्रवाई जारी रहती है तो पाकिस्तान, ईरान और सऊदी अरब के बीच पहले से जटिल रिश्तों पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है। फिलहाल पूरी नजर इस बात पर है कि Iran हूतियों को लेकर क्या कदम उठाता है और Saudi Arabia पर हमले आगे किस दिशा में जाते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Apple iPhone Duo: पहली बार आया Foldable iPhone, ₹3 लाख के करीब Price और eSIM Only

Apple ने आखिरकार उस सेगमेंट में एंट्री कर ली है, जिसका इंतजार Apple iPhone यूजर्स लंबे समय से कर रहे थे। कंपनी ने अपना पहला Foldable iPhone Duo लॉन्च कर दिया है। नए फोन की शुरुआती कीमत भारत में करीब ₹2.99 लाख रखी गई है। खास बात यह है कि फोन में Physical SIM की जगह eSIM का इस्तेमाल किया जाएगा। Apple ने इसी लॉन्च इवेंट में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max भी पेश किए। Pro मॉडल्स में कंपनी ने Performance के साथ Camera System पर खास ध्यान दिया है। पहली बार Apple का Foldable iPhone iPhone Duo Apple के लिए एक बड़ा बदलाव है। कंपनी ने पहली बार iPhone को Foldable डिजाइन में पेश किया है। फोन को खोलने पर यूजर्स को करीब 7.6 इंच का बड़ा डिस्प्ले मिलता है, जबकि फोल्ड करने पर बाहरी स्क्रीन करीब 5.4 इंच की है। बड़ी स्क्रीन का फायदा खासतौर पर वीडियो देखने, गेमिंग और एक साथ कई काम करने में मिल सकता है। Apple ने फोन के डिजाइन को पतला और प्रीमियम रखने की कोशिश की है। Physical SIM को कहा Goodbye iPhone Duo की एक खास बात इसका eSIM-only होना है। यानी फोन में सामान्य Physical SIM Card लगाने का विकल्प नहीं मिलेगा। नेटवर्क कनेक्टिविटी के लिए यूजर्स को eSIM का इस्तेमाल करना होगा। भारत जैसे बड़े Smartphone Market में यह बदलाव कितना पसंद किया जाता है, यह बिक्री शुरू होने के बाद साफ होगा। कीमत सुनकर चौंक सकते हैं यूजर्स Apple ने Foldable iPhone को प्रीमियम सेगमेंट में रखा है। भारत में iPhone Duo की शुरुआती कीमत ₹2,99,900 बताई गई है। इतनी कीमत के साथ यह फोन Apple के सबसे महंगे iPhone मॉडल्स में शामिल हो गया है। कंपनी का फोकस साफ तौर पर उन यूजर्स पर है, जो नए डिजाइन और हाई-एंड टेक्नोलॉजी के लिए ज्यादा कीमत खर्च करने को तैयार हैं। iPhone 18 Pro में Camera का बड़ा बदलाव Foldable iPhone के साथ Apple ने iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max भी लॉन्च किए। इन फोन में कैमरा सिस्टम को पहले के मुकाबले ज्यादा Pro बनाया गया है। iPhone 18 Pro में 48MP Fusion Main Camera दिया गया है। इसमें Variable Aperture तकनीक भी मिलती है, जो अलग-अलग Lighting Conditions में कैमरा पर ज्यादा कंट्रोल देने के लिए डिजाइन की गई है। रियर कैमरा सिस्टम में तीन 48MP कैमरों का सेटअप दिया गया है। इससे Photography और Video Recording के दौरान ज्यादा flexibility मिलने की उम्मीद है। यही वजह है कि iPhone 18 Pro के कैमरे को लेकर इसकी तुलना DSLR और Professional Camera से की जा रही है। हालांकि Smartphone Camera और DSLR की क्षमताएं अलग होती हैं, इसलिए इसे सीधे DSLR का विकल्प कहना सही नहीं होगा। A20 Pro Chip से मिलेगा दमदार Performance iPhone 18 Pro Series में Apple का नया A20 Pro Chip दिया गया है। कंपनी ने नई चिप के साथ Performance, Graphics और AI Processing को बेहतर बनाने पर जोर दिया है। Apple का फोकस अब सिर्फ तेज Processor देने तक सीमित नहीं है। कंपनी अपने नए iPhones में AI और On-device Processing को भी लगातार आगे बढ़ा रही है। iPhone 18 Pro की कीमत भारत में iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत ₹1,64,900 रखी गई है। वहीं iPhone 18 Pro Max की शुरुआती कीमत ₹1,79,900 बताई गई है। Pro मॉडल्स में अलग-अलग Storage Options भी दिए गए हैं। Apple का यह लाइनअप उन यूजर्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिन्हें High-end Performance, Camera और Premium Design चाहिए। Apple के लिए क्यों खास है यह लॉन्च? Apple का Foldable iPhone लॉन्च करना सिर्फ एक नया Product Launch नहीं है। कंपनी ने पहली बार iPhone के पारंपरिक डिजाइन से हटकर Foldable Form Factor अपनाया है। अब तक Foldable Smartphone Market में Samsung, Google और कई दूसरी कंपनियां अपनी जगह बना चुकी हैं। ऐसे में Apple की एंट्री से इस Segment में Competition और तेज होने की उम्मीद है। दूसरी तरफ iPhone 18 Pro Series में Camera और AI पर बढ़ता फोकस यह संकेत देता है कि Apple आने वाले समय में Smartphone Photography और Artificial Intelligence को और ज्यादा महत्व देने वाला है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

दक्षिण अफ्रीका ने नामीबिया को 99 रन से हराया, डेब्यू में जॉर्डन हरमन ने जड़ा 150 रन का तूफानी शतक

विंडहोक। दक्षिण अफ्रीका ने नामीबिया के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला 99 रन से जीत लिया। दक्षिण अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 348/6 रन बनाए। जवाब में बारिश से दो बार प्रभावित नामीबिया की टीम 38 ओवर में 162/8 रन ही बना सकी। मुकाबले का फैसला DLS मेथड से हुआ। दक्षिण अफ्रीका की जीत के हीरो डेब्यू कर रहे जॉर्डन हरमन रहे, जिन्होंने शानदार 150 रन की पारी खेली। वहीं प्रेनेलन सब्रायेन ने करियर की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी करते हुए चार विकेट झटके। सीरीज का दूसरा वनडे 11 सितंबर को विंडहोक में खेला जाएगा। डेब्यू पर 150 रन, हरमन ने बनाया बड़ा रिकॉर्ड जॉर्डन हरमन वनडे डेब्यू पर 150 रन बनाने वाले संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा स्कोर करने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। इससे पहले मैथ्यू ब्रीट्जके ने भी अपने वनडे डेब्यू पर 150 रन की पारी खेली थी। हरमन दक्षिण अफ्रीका की ओर से वनडे डेब्यू पर शतक लगाने वाले पांचवें बल्लेबाज भी बन गए। उनसे पहले कॉलिन इंग्राम, टेम्बा बावुमा, रीजा हेंड्रिक्स और मैथ्यू ब्रीट्जके यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। हरमन ने टोनी डी जॉर्जी के साथ दूसरे विकेट के लिए 190 रन की साझेदारी की। डी जॉर्जी ने 84 गेंदों पर 72 रन बनाए और वनडे करियर का तीसरा अर्धशतक पूरा किया। शुरुआती 20 ओवर में 100 रन, इसके बाद बढ़ी रफ्तार दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत बहुत तेज नहीं रही। नामीबिया के गेंदबाजों को शुरुआती ओवरों में पिच से कुछ मूवमेंट मिली। रूबेन ट्रम्पेलमैन ने हरमन के बल्ले का बाहरी किनारा भी छुआ और टॉप-एज का मौका बनाया, लेकिन विकेट नहीं मिल सका। सातवें ओवर में कॉनर एस्टरहुइजन ने शॉर्ट गेंद को पुल करने की कोशिश की, लेकिन फाइन लेग पर जैक ब्रासेल ने कैच पकड़ लिया। इससे शुरुआती साझेदारी 27 रन पर टूट गई। दूसरी ओर डी जॉर्जी को भी कई बार जीवनदान मिला। उन्होंने स्लिप के बाहर एज किया और विकेटकीपर के पास भी कैच का मौका बना, लेकिन नामीबिया उसे भुना नहीं सका। एक रनआउट का मौका भी टीम ने गंवा दिया। दक्षिण अफ्रीका ने 20 ओवर में 100/1 रन बनाए। इसके बाद अगले सात ओवर में 50 रन जोड़कर टीम ने रन गति बढ़ाई। इसी दौरान हरमन ने अपना अर्धशतक पूरा किया, जबकि डी जॉर्जी ने 64 गेंदों में फिफ्टी लगाई। शतक के बाद हरमन ने बदला अंदाज हरमन ने 93 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। शतक के बाद उन्होंने आक्रामक अंदाज अपनाया और तेजी से रन बनाए। सेंचुरी के बाद उन्होंने पांच चौके और दो छक्के लगाए। हरमन ने मैदान के दोनों हिस्सों में शानदार शॉट खेले। कवर और मिडऑफ के बीच उन्होंने 59 रन बटोरे। उनके बाद क्रीज पर आए डेवाल्ड ब्रेविस ने महज दो गेंद बाद नो-लुक सिक्स लगाकर पारी को और रोमांचक बना दिया। आखिरी 10 ओवर में गिरे चार विकेट दक्षिण अफ्रीका ने आखिरी 10 ओवर की शुरुआत 266/2 के स्कोर से की थी। उस समय टीम के 350 रन के पार जाने की उम्मीद थी, लेकिन नामीबिया के गेंदबाजों ने वापसी की। हरमन ने बैक-ऑफ-द-हैंड स्लोअर गेंद को बैकवर्ड पॉइंट के ऊपर से खेलने की कोशिश की, लेकिन कैच लॉरेन स्टीनकैंप के हाथों में चला गया। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका ने केवल 58 रन के अंदर चार विकेट गंवा दिए। ट्रम्पेलमैन ने इनमें से तीन विकेट लिए। डेवाल्ड ब्रेविस डीप स्क्वायर लेग पर कैच हुए, रुबिन हरमन LBW आउट हुए और जेसन स्मिथ भी बड़ा शॉट लगाने के प्रयास में आउट हो गए। आखिर में कॉर्बिन बॉश ने 24 गेंदों पर नाबाद 39 रन बनाकर दक्षिण अफ्रीका को 348/6 तक पहुंचाया। नामीबिया की शुरुआत रही बेहद धीमी 349 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी नामीबिया की शुरुआत बेहद धीमी रही। टीम ने शुरुआती 10 ओवर में सिर्फ 24 रन बनाए। दूसरे से 12वें ओवर के बीच लगातार 10 ओवर तक कोई बाउंड्री नहीं आई। एलेक्स बुसिंग-वोल्शेंक 12 रन बनाकर फोर्टुइन की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने गए। लॉन्गऑफ पर जेसन स्मिथ के पास कैच आया, लेकिन गेंद उनके हाथ से निकल गई। हालांकि अगली ही गेंद पर बुसिंग-वोल्शेंक ने क्वेना मफाका की गेंद पर गलत लाइन में शॉट खेला और विकेटकीपर के हाथों कैच आउट हो गए। जन फ्रायलिंक भी इस मुकाबले में प्रभाव नहीं छोड़ सके। उन्होंने 16 गेंदों पर सात रन बनाए और मफाका की गेंद पर बोल्ड हो गए। 73/3 के स्कोर पर बारिश ने रोका खेल दूसरे ओपनर मालन क्रुगर का संघर्ष 19वें ओवर में खत्म हुआ। वह सब्रायेन की गेंद पर फ्लिक करने से चूक गए और LBW आउट हो गए। 22वें ओवर में नामीबिया का स्कोर 73/3 था, तभी विंडहोक में बारिश शुरू हो गई और मैच रोकना पड़ा। करीब 1 घंटे 18 मिनट बाद खेल दोबारा शुरू हुआ। बारिश के कारण नामीबिया का लक्ष्य घटाकर 38 ओवर में 301 रन कर दिया गया। टीम को बचे हुए 16.3 ओवर में 225 रन बनाने थे। दूसरी बारिश के बाद 7 ओवर में चाहिए थे 167 रन खेल दोबारा शुरू होने के कुछ ही समय बाद लॉरेन स्टीनकैंप ने बॉश की गेंद को हवा में खेल दिया। शॉर्ट कवर पर सब्रायेन ने कैच पकड़ लिया और इसके बाद नामीबिया के विकेट तेजी से गिरने लगे। गेरहार्ड इरास्मस ने कुछ अच्छे शॉट लगाते हुए दो चौके लगाए, लेकिन बारिश ने एक बार फिर मैच रोक दिया। करीब आधे घंटे बाद खेल दोबारा शुरू हुआ। उस समय नामीबिया को केवल 7 ओवर में 167 रन बनाने थे। यह लक्ष्य लगभग असंभव था। नामीबिया ने इस दौरान 67 रन के अंदर चार और विकेट गंवा दिए और 38 ओवर में 162/8 रन ही बना सकी। इस तरह दक्षिण अफ्रीका ने मुकाबला 99 रन से अपने नाम कर सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली।

हर्षित राणा अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज से हो सकते हैं बाहर, हैमस्ट्रिंग चोट से पूरी तरह नहीं उबरे

भारत के तेज गेंदबाज हर्षित राणा अफगानिस्तान के खिलाफ 13 सितंबर से शुरू होने वाली तीन मैचों की टी-20 सीरीज से बाहर हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राणा अभी अपनी हैमस्ट्रिंग चोट से पूरी तरह फिट नहीं हुए हैं और उन्हें मैदान पर वापसी के लिए थोड़ा और समय लग सकता है। हर्षित राणा को अफगानिस्तान के खिलाफ तीनों टी-20 मैचों के लिए फिटनेस के आधार पर भारतीय टीम में शामिल किया गया है। उन्हें आगामी एशियन गेम्स के लिए चुनी गई भारतीय टीम में भी जगह मिली है। BCCI के एक सूत्र के मुताबिक, राणा अभी चोट से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं और उन्हें फिट होने में और समय लगेगा। इंग्लैंड दौरे पर खेला था आखिरी मुकाबला हर्षित राणा ने भारत के लिए अपना आखिरी मुकाबला इंग्लैंड दौरे के दौरान खेला था। इसके बाद हैमस्ट्रिंग चोट के कारण वह टीम से बाहर चल रहे हैं। राणा को भी वॉशिंगटन सुंदर जैसी हैमस्ट्रिंग चोट से जूझना पड़ा है। हालांकि, सुंदर अब पूरी तरह फिट हो चुके हैं और उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज के लिए फिट घोषित किया गया है। बुमराह और नितीश भी फिटनेस के आधार पर टीम में अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज के लिए तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और ऑलराउंडर नितीश रेड्डी को भी फिटनेस के आधार पर टीम में शामिल किया गया है। बुमराह बाएं घुटने की चोट से उबर रहे हैं। वह जुलाई में इंग्लैंड दौरे के बाद से क्रिकेट से दूर हैं। वहीं, नितीश रेड्डी क्वाड्रिसेप्स की चोट से रिकवरी कर रहे हैं। BCCI सूत्र के अनुसार, बुमराह और नितीश दोनों की फिटनेस में सुधार हो रहा है और उनकी वापसी सही दिशा में है। अफगानिस्तान सीरीज के बाद एशियन गेम्स भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की टी-20 सीरीज के मुकाबले 13 सितंबर से दिल्ली में खेले जाने हैं। इसके बाद भारतीय टीम 22 सितंबर को टोक्यो में जापान के खिलाफ एकमात्र मैच खेलेगी। भारतीय टीम इसके बाद 28 सितंबर से एशियन गेम्स में अपना अभियान शुरू करेगी। हर्षित राणा को एशियन गेम्स की टीम में भी शामिल किया गया है। ऐसे में उनकी फिटनेस भारतीय टीम के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अफगानिस्तान सीरीज से पहले राणा की फिटनेस पर अंतिम फैसला उनकी रिकवरी और फिटनेस टेस्ट के आधार पर लिया जा सकता है।

Tपाकिस्तान 133 रन पर ऑलआउट, बाबर आजम फिर फेल; इंग्लैंड के गेंदबाजों का कहर

बर्मिंघम: इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टेस्ट में पाकिस्तान की पहली पारी महज 133 रन पर सिमट गई। टीम के सिर्फ तीन बल्लेबाज ही दहाई का आंकड़ा पार कर सके। बर्मिंघम के एजबेस्टन में पाकिस्तान की ओर से सऊद शकील ने सबसे ज्यादा 43 रन बनाए, जबकि मोहम्मद अब्बास ने 21 रन की पारी खेली। इंग्लैंड के लिए जोश टंग ने 4 विकेट चटकाए। ओली रॉबिन्सन और जोफ्रा आर्चर को 3-3 विकेट मिले। पहले घंटे में पाकिस्तान ने गंवाए 4 विकेट इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया और शुरुआत से ही पाकिस्तान के बल्लेबाजों पर दबाव बना दिया। ओली रॉबिन्सन ने सईम अयूब को 10 गेंदों में बिना खाता खोले LBW आउट किया। यह रॉबिन्सन के टेस्ट करियर का 100वां विकेट भी रहा। इसके बाद अजान अवैस 9 रन बनाकर जोफ्रा आर्चर की गेंद पर जोश टंग को कैच दे बैठे। रॉबिन्सन ने अब्दुल्ला शफीक को 3 रन पर स्लिप में डैन लॉरेंस के हाथों कैच कराया। वहीं, आर्चर ने अगले ओवर में कप्तान शान मसूद को सिर्फ 5 रन पर पवेलियन भेज दिया। पाकिस्तान ने शुरुआती 9 ओवर में ही अपने 3 विकेट गंवा दिए थे। बाबर आजम फिर नाकाम, 7 रन पर बोल्ड पाकिस्तान के स्टार बल्लेबाज बाबर आजम भी टीम की पारी को संभाल नहीं सके। वह 18 गेंदों पर 7 रन बनाकर जोश टंग की गेंद पर बोल्ड हो गए। टंग की गेंद अंदर की ओर आई और बाबर उसकी लेंथ को सही तरीके से नहीं पढ़ सके। गेंद उनके बल्ले के नीचे से निकलकर ऑफ स्टंप पर जा लगी। बाबर के आउट होने के समय पाकिस्तान का स्कोर 48 रन पर 5 विकेट था। इसके साथ ही पाकिस्तान के टॉप-5 बल्लेबाजों में से कोई भी दहाई का आंकड़ा नहीं छू सका। टेस्ट इतिहास में बना अनचाहा रिकॉर्ड पाकिस्तान के शुरुआती पांच बल्लेबाजों ने मिलकर सिर्फ 24 रन बनाए। साल 2000 के बाद टेस्ट की पहली पारी में पाकिस्तान के टॉप-5 का यह दूसरा सबसे कम संयुक्त स्कोर है। इससे कम 19 रन 2012 में इंग्लैंड के खिलाफ दुबई टेस्ट में बने थे। इसके अलावा टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में यह सिर्फ 12वीं बार है, जब किसी टीम के टॉप-5 बल्लेबाज सिंगल डिजिट स्कोर पर आउट हुए हैं। खास बात यह है कि टेस्ट की पहली पारी में पाकिस्तान के साथ ऐसा पहली बार हुआ। पहले सेशन में 7 विकेट गंवाए पाकिस्तान के शुरुआती पांच विकेट 48 रन पर गिर गए थे। टीम ने पहले सेशन में ही 7 विकेट गंवा दिए और उसके स्कोरबोर्ड पर 100 रन थे। टेस्ट के पहले दिन की पहली पारी में 7 विकेट गंवाने का पाकिस्तान का यह दूसरा मौका है। इससे पहले 2012 में दुबई में इंग्लैंड के खिलाफ पाकिस्तान ने 53 रन पर 7 विकेट गंवाए थे। तीन डेब्यूटेंट भी नहीं कर सके कमाल पाकिस्तान ने इस टेस्ट में तीन खिलाड़ियों को डेब्यू कराया, लेकिन इनमें से कोई भी बड़ी पारी नहीं खेल सका। गाजी घोरी ने अपने करियर की पहली गेंद पर चौका लगाया। इसके बाद इंग्लैंड ने LBW के लिए रिव्यू लिया, लेकिन फैसला पाकिस्तान के पक्ष में रहा। हालांकि, दो गेंद बाद जोश टंग ने उन्हें LBW आउट कर दिया। घोरी ने 4 रन बनाए। मोहम्मद इमरान रंधावा 5 रन बनाकर टंग की शानदार यॉर्कर पर बोल्ड हुए। वहीं, रजाउल्लाह ने 11 रन बनाए और ओली रॉबिन्सन का शिकार बने। सऊद शकील ने बचाई पाकिस्तान की लाज मुश्किल परिस्थितियों में सऊद शकील ने पाकिस्तान की ओर से सबसे ज्यादा 43 रन बनाए। उन्होंने 47 गेंदों की पारी में 7 चौके लगाए। हालांकि, 107 रन के स्कोर पर जोश टंग ने उन्हें क्लीन बोल्ड कर दिया। इसके बाद नंबर-10 पर बल्लेबाजी करने आए मोहम्मद अब्बास ने 21 रन बनाकर कुछ संघर्ष किया, लेकिन जोफ्रा आर्चर ने उन्हें हैरी ब्रूक के हाथों कैच करा दिया। मोहम्मद अली 5 रन बनाकर नाबाद रहे। 33.5 ओवर में सिमटी पाकिस्तान की पारी पाकिस्तान की पहली पारी सिर्फ 33.5 ओवर चली। इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट में यह पाकिस्तान की तीसरी सबसे छोटी पारियों में से एक रही। इससे पहले पाकिस्तान 2010 में नॉटिंघम में 29 ओवर में 80 रन और लॉर्ड्स में 33 ओवर में 74 रन पर ऑलआउट हुआ था। रॉबिन्सन ने पूरे किए 100 टेस्ट विकेट ओली रॉबिन्सन ने इस मुकाबले में अपने टेस्ट करियर के 100 विकेट पूरे कर लिए। उन्होंने यह उपलब्धि 24 टेस्ट में हासिल की। इंग्लैंड के लिए 100 टेस्ट विकेट तक पहुंचने वाले गेंदबाजों में रॉबिन्सन संयुक्त रूप से पांचवें सबसे तेज हैं। उनसे आगे इयान बॉथम, डेरेक अंडरवुड, स्टीव हार्मिसन और ग्रीम स्वान हैं। 100 से ज्यादा टेस्ट विकेट लेने वाले गेंदबाजों में 100 विकेट के आंकड़े तक पहुंचने के समय रॉबिन्सन का गेंदबाजी औसत भी शानदार रहा। इंग्लैंड सीरीज में 2-0 से आगे तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में इंग्लैंड पहले ही 2-0 की बढ़त बना चुका है। पहले टेस्ट में इंग्लैंड ने पाकिस्तान को पारी और 103 रन से हराया था। इसके बाद लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे टेस्ट में इंग्लैंड ने 194 रन से जीत दर्ज की। एजबेस्टन में भी पाकिस्तान का रिकॉर्ड खराब रहा है। टीम ने इस मैदान पर अब तक 8 टेस्ट खेले हैं, लेकिन उसे एक भी जीत नहीं मिली। पाकिस्तान को 5 मैचों में हार मिली, जबकि 3 मुकाबले ड्रॉ रहे हैं। वसीम अकरम ने सिस्टम पर उठाए सवाल पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और महान तेज गेंदबाज वसीम अकरम ने मौजूदा हालात के लिए सिर्फ खिलाड़ियों को जिम्मेदार नहीं माना है। उनका कहना है कि पाकिस्तान क्रिकेट की समस्याएं काफी गहरी हैं। अकरम के मुताबिक, इंग्लैंड सीरीज शुरू होने से पहले ही उन्हें अंदाजा था कि पाकिस्तान को 3-0 से हार का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि टीम की बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में समस्याएं दिखाई दे रही थीं। इंग्लैंड की पारी शुरू, डकेट आउट पाकिस्तान को 133 रन पर समेटने के बाद इंग्लैंड ने अपनी पहली पारी शुरू की। दिन के दूसरे सेशन में 4.3 ओवर के बाद इंग्लैंड का स्कोर 18/1था। बेन डकेट 11 रन बनाकर मोहम्मद अली की गेंद पर स्लिप में बाबर आजम के हाथों कैच आउट हुए। इसके बाद एमिलियो गे और जॉर्डन कॉक्स क्रीज पर मौजूद थे।
Crude Oil

Crude Oil $100 के पार: America-Iran Tension से बढ़ी कीमत, Petrol-Diesel पर असर संभव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत ने एक बार फिर हलचल मचा दी है। Brent Crude Oil की कीमत $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो करीब छह हफ्तों का सबसे ऊंचा स्तर है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है और इसका असर सीधे Global Oil Market पर दिखाई दे रहा है। तेल महंगा होने की खबर भारत के लिए भी अहम है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अगर crude oil की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहती है, तो Petrol-Diesel और LPG की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। 6 हफ्ते में सबसे महंगा हुआ Crude Oil बुधवार के कारोबार में Brent crude करीब $100.19 प्रति बैरल तक पहुंच गया। बाद में इसकी कीमत लगभग $99.93 प्रति बैरल के आसपास रही। वहीं अमेरिकी WTI crude भी करीब $94.52 प्रति बैरल तक पहुंचा। तेल की कीमतों में यह तेजी ऐसे समय आई है जब Middle East में हालात सामान्य नहीं हैं। बाजार को डर है कि अगर तनाव और बढ़ा तो तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। America-Iran Tension का Oil Market पर असर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव इस समय Oil Market के लिए सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। Middle East दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। यहां किसी बड़े संघर्ष या सप्लाई रूट में रुकावट का असर पूरी दुनिया में दिखाई दे सकता है। खास तौर पर Strait of Hormuz को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां लंबे समय तक किसी तरह की बाधा आने पर कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है और कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। भारत में Petrol-Diesel Price पर क्या असर होगा? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या महंगे crude oil का असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा? भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत तय करने में अंतरराष्ट्रीय crude oil price के अलावा कई दूसरे factors भी काम करते हैं। इनमें रुपये और डॉलर की exchange rate, refining cost, freight, taxes और oil companies के margins शामिल हैं। इसलिए कच्चा तेल $100 पार करने का मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल-डीजल की कीमत तुरंत बढ़ जाएगी। लेकिन अगर crude लगातार इसी स्तर पर बना रहता है, तो घरेलू fuel prices पर दबाव जरूर बढ़ सकता है। LPG Cylinder की कीमत भी अहम Crude oil की तेजी के साथ LPG को लेकर भी चिंता बढ़ी है। भारत LPG की जरूरत का एक हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में Middle East में supply और shipping routes प्रभावित होने पर import cost बढ़ सकती है। हालांकि घरेलू LPG Cylinder की कीमत केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार के आधार पर तय नहीं होती। सरकार की pricing policy और अन्य आर्थिक factors भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए अभी LPG की कीमत बढ़ने को लेकर निश्चित तौर पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी। महंगा तेल बढ़ा सकता है महंगाई का दबाव कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता। Transport और logistics महंगे होने पर इसका असर सामान की लागत पर भी पड़ सकता है। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इसका असर transport, manufacturing और दूसरे कई कारोबारों पर भी देखने को मिल सकता है। आगे Crude Oil का क्या होगा? आने वाले दिनों में crude oil की दिशा काफी हद तक Middle East की स्थिति पर निर्भर करेगी। अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है और supply routes सामान्य रहते हैं, तो तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है। लेकिन अगर संघर्ष बढ़ता है या Hormuz जैसे महत्वपूर्ण shipping routes प्रभावित होते हैं, तो Brent Crude $100 से ऊपर लंबे समय तक बना रह सकता है। फिलहाल भारत में लोगों की नजर Petrol-Diesel और LPG के दाम पर रहेगी। अगर crude oil की यह तेजी कुछ समय और जारी रहती है, तो सरकार और oil companies के सामने घरेलू ईंधन कीमतों को संभालने की चुनौती बढ़ सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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