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Jantar Mantar Lathicharge मामले पर संसद में जवाब देंगे रिजिजू

Jantar Mantar Lathicharge मामले पर संसद में जवाब देंगे रिजिजू

Jantar Mantar Lathicharge के मामले को लेकर संसद में सियासी माहौल गर्म है। विपक्ष इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री के बयान की मांग कर रहा है। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि सरकार इस मामले पर संसद में जवाब देगी, लेकिन विपक्ष को भी सरकार का पक्ष सुनना पड़ेगा। रिजिजू ने कहा कि संसद में केवल अपनी बात रखने से काम नहीं चलेगा। विपक्ष को सरकार की बात भी सुननी होगी। उन्होंने साफ कहा कि सरकार चर्चा से भागने वाली नहीं है और सदन में उठाए जा रहे मुद्दों का जवाब दिया जाएगा। विपक्ष गृह मंत्री के बयान पर अड़ा जंतर-मंतर पर हुए लाठीचार्ज के मामले को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है। विपक्ष की मांग है कि केंद्रीय गृह मंत्री संसद में इस मामले पर बयान दें और पूरे घटनाक्रम की जानकारी सदन के सामने रखें। विपक्ष का कहना है कि जंतर-मंतर जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर हुई घटना को लेकर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इसी मांग को लेकर संसद में हंगामे की स्थिति भी देखने को मिली। रिजिजू बोले- विपक्ष को सुनना पड़ेगा किरेन रिजिजू ने विपक्ष के रुख पर कहा कि सरकार संसद में जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपनी बात रख सकता है, लेकिन उसे सरकार की बात भी सुननी होगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि संसद में चर्चा लोकतांत्रिक तरीके से होनी चाहिए। केवल आरोप लगाने के बजाय दोनों पक्षों को एक-दूसरे की बात सुननी चाहिए। संसद में आगे बढ़ सकता है मामला जंतर-मंतर लाठीचार्ज मामले को लेकर आने वाले दिनों में संसद में राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। विपक्ष जहां सरकार से जवाब मांग रहा है, वहीं सरकार भी अपना पक्ष सदन में रखने की तैयारी में है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि संसद में सरकार इस मामले पर क्या जवाब देती है और विपक्ष की ओर से उस पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump बिना परमाणु समझौते के भी खत्म कर सकते हैं Iran युद्ध

Trump बिना परमाणु समझौते के भी खत्म कर सकते हैं Iran युद्ध

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump Iran के साथ चल रहे युद्ध को बिना किसी नए परमाणु समझौते के भी खत्म करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, इसके लिए ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना होगा। युद्ध के लंबे खिंचने के साथ अब अमेरिका का ध्यान केवल परमाणु मुद्दे से हटकर क्षेत्र में स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी केंद्रित होता दिखाई दे रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना अहम मुद्दा रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प प्रशासन की प्राथमिकताओं में अब होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना महत्वपूर्ण हो गया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लिए बेहद अहम है, क्योंकि बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और अन्य ऊर्जा संसाधन इसी रास्ते से होकर गुजरते हैं। अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और कई देशों में ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि अमेरिका इस मुद्दे को युद्ध खत्म करने की संभावित शर्त के तौर पर देख रहा है। पहले परमाणु समझौता था मुख्य मुद्दा ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका लंबे समय से चिंता जताता रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद भी परमाणु गतिविधियों को रोकना और ईरान की परमाणु क्षमता को सीमित करना अमेरिकी रणनीति का अहम हिस्सा रहा। हालांकि, अब युद्ध के लंबा खिंचने के बीच ट्रम्प प्रशासन का फोकस कुछ बदलता नजर आ रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका अब केवल परमाणु समझौते पर जोर देने के बजाय युद्ध को जल्द खत्म करने और क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करने पर भी विचार कर रहा है। युद्ध का असर दुनिया पर भी ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक बाजारों और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही बाधित होने की स्थिति में भारत समेत कई देशों पर इसका असर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से परिवहन और रोजमर्रा की कई चीजों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है। ट्रम्प के सामने चुनौती ट्रम्प के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि युद्ध को खत्म करते हुए ईरान से ऐसी शर्तों पर सहमति कैसे बनाई जाए, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगियों के हित सुरक्षित रहें। दूसरी ओर, ईरान भी अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों से समझौता करने के लिए आसानी से तैयार होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए क्या कोई नया रास्ता निकलता है। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुलता है और युद्ध समाप्ति की दिशा में बातचीत आगे बढ़ती है, तो इससे पश्चिम एशिया के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी बड़ी राहत मिल सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jharkhand विधानसभा के बाहर छात्रों का प्रदर्शन

Jharkhand विधानसभा के बाहर छात्रों का प्रदर्शन

Jharkhand विधानसभा के बाहर सोमवार को छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा की ओर बढ़े। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्र कंटीले तारों वाली बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। वहीं, पुलिस की ओर से चलाए गए वाटर कैनन के बीच कुछ छात्रों ने डांस करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान मौके पर काफी देर तक गहमागहमी का माहौल बना रहा। प्रदर्शन में देवेंद्रनाथ भी शामिल हुए, जो पिछले 9 दिनों से अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठे हैं। लगातार अनशन के बावजूद उनके प्रदर्शन में शामिल होने से छात्रों में भी उत्साह देखने को मिला। छात्रों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। विधानसभा के बाहर प्रदर्शन के चलते सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को विधानसभा परिसर की ओर बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। इसके बावजूद छात्रों ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों का जोश और उनके अनोखे तरीके से विरोध करने का अंदाज लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा। अब देखना होगा कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jharkhand

Jharkhand Student Protest: सरकार से दूसरी बातचीत भी बेनतीजा, 15वें दिन जारी आंदोलन

झारखंड (Jharkhand) में परीक्षा से जुड़ी कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदर्शन के 15वें दिन छात्रों और सरकार के बीच दूसरी बार बातचीत हुई, लेकिन इस बैठक में भी किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन सकी। हालांकि, सरकार ने छात्रों की शिकायतें और सुझाव सीधे सुनने के लिए ई-मेल और फीडबैक नंबर जारी करने की पहल की है। छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में सामने आए सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो और जिन मुद्दों को लेकर वे सड़क पर हैं, उनका जल्द समाधान निकाला जाए। दूसरी बैठक में भी नहीं बनी बात छात्र प्रतिनिधियों और सरकार के बीच हुई दूसरी बैठक में परीक्षा से जुड़े विवादित मुद्दों पर चर्चा हुई। छात्रों ने अपनी मांगें और समस्याएं सरकार के सामने रखीं। दोनों पक्षों के बीच बातचीत जरूर हुई, लेकिन ऐसा कोई फैसला नहीं हो सका जिससे आंदोलन खत्म करने पर सहमति बनती। बैठक के बाद अब छात्रों से सुझाव और शिकायतें लेने के लिए ई-मेल तथा फीडबैक नंबर उपलब्ध कराने की बात सामने आई है। सरकार की यह पहल छात्रों की समस्याओं को सीधे संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए अहम मानी जा रही है। 15वें दिन भी सड़कों पर छात्र परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन लगातार 15वें दिन जारी है। लंबे समय से चल रहे इस आंदोलन ने परीक्षा व्यवस्था और प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए हैं। प्रदर्शन कर रहे छात्र चाहते हैं कि उनकी शिकायतों पर केवल बातचीत तक सीमित न रहकर ठोस कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि परीक्षा से जुड़े मामलों में छात्रों के भविष्य का सवाल होता है, इसलिए किसी भी तरह की गड़बड़ी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। Feedback के लिए Email और नंबर जारी सरकार की ओर से छात्रों के सुझाव लेने के लिए ई-मेल और फीडबैक नंबर जारी करना बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। अब छात्र अपनी शिकायतें और सुझाव इन माध्यमों के जरिए सरकार तक पहुंचा सकते हैं। हालांकि, छात्रों की मुख्य मांगों पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार को मिलने वाले फीडबैक के बाद आगे क्या कदम उठाया जाता है। आंदोलन खत्म होगा या जारी रहेगा? दूसरी बैठक में सहमति नहीं बनने के बाद फिलहाल छात्रों का आंदोलन जारी है। आने वाले दिनों में सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच आगे की बातचीत इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकती है। एक तरफ सरकार बातचीत और फीडबैक के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश कर रही है, वहीं छात्र अपनी मांगों पर स्पष्ट कार्रवाई चाहते हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अगली बातचीत में कोई ऐसा रास्ता निकल पाएगा, जिससे 15 दिनों से चल रहा यह Student Protest खत्म हो सके। Jharkhand Student Protest से जुड़े इस मामले में छात्रों और सरकार के अगले कदम पर अब सभी की नजर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Dolphin Typhoon

Japan में 200 Kmph का तूफान: Dolphin Typhoon से बढ़ा खतरा, Toyota ने 9 Plants में रोका Production

Japan में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। देश के कई हिस्सों में Dolphin Typhoon का असर तेजी से बढ़ रहा है। करीब 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रहे इस तूफान को लेकर प्रशासन ने कई इलाकों में अलर्ट जारी किया है। भारी बारिश और तेज हवाओं के खतरे को देखते हुए करीब 2.6 लाख लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने का आदेश दिया गया है। तूफान के असर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जापान की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी Toyota ने भी अपनी कई Manufacturing Units में काम रोकने का फैसला किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने सुरक्षा कारणों से 9 फैक्ट्रियों में उत्पादन अस्थायी रूप से बंद किया है। 200 Kmph की रफ्तार से बढ़ रहा तूफान Dolphin Typhoon के कारण Japan के कई क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने लोगों को समुद्र और निचले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है। तेज हवाओं की वजह से पेड़ गिरने, बिजली आपूर्ति प्रभावित होने और परिवहन व्यवस्था बाधित होने की आशंका जताई गई है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। 2.6 लाख लोगों को सुरक्षित जगह जाने का आदेश तूफान के संभावित खतरे को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने करीब 2.6 लाख लोगों के लिए Evacuation Order जारी किया है। लोगों से कहा गया है कि वे मौसम की स्थिति बिगड़ने से पहले सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाएं। खास तौर पर निचले इलाकों और उन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क किया गया है, जहां बाढ़ या भूस्खलन का खतरा हो सकता है। प्रशासन ने लोगों से सरकारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। Toyota ने 9 Factories में रोका Production Dolphin Typhoon का असर जापान के Industrial Sector पर भी दिखाई दे रहा है। देश की बड़ी कार निर्माता कंपनी Toyota ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपनी 9 फैक्ट्रियों में काम रोक दिया है। फैक्ट्रियों में Production रोकने का फैसला कर्मचारियों की सुरक्षा और संभावित Transport Disruptions को देखते हुए लिया गया है। मौसम सामान्य होने और परिस्थितियों का आकलन करने के बाद उत्पादन दोबारा शुरू करने पर फैसला लिया जाएगा। Transport और Daily Life पर भी असर तूफान के कारण जापान में सड़क और रेल यातायात प्रभावित होने की आशंका है। कई इलाकों में लोगों को गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। तेज हवाओं और बारिश के चलते Flights और अन्य Transport Services पर भी असर पड़ सकता है। प्रशासन की प्राथमिकता इस समय लोगों को सुरक्षित रखना है। लोगों से सतर्क रहने की अपील जापानी अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक मौसम और प्रशासनिक अपडेट पर भरोसा करें। लोगों को जरूरी सामान तैयार रखने और जरूरत पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी गई है। फिलहाल Dolphin Typhoon के कारण जापान में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। आने वाले घंटों में तूफान की दिशा और रफ्तार के आधार पर इसके प्रभाव में बदलाव हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tariff

India पर 100% Tariff लगाएगा America? Trump के 500% Plan से बढ़ी चिंता

अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक बार फिर Tariff यानी आयात शुल्क को लेकर हलचल बढ़ गई है। अमेरिकी सीनेट से रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़ा एक अहम बिल पास होने के बाद भारत पर भी संभावित टैरिफ का मुद्दा चर्चा में आ गया है। सबसे ज्यादा चर्चा 100% Tariff को लेकर हो रही है। वहीं, इस पूरे मामले में 500% टैरिफ का जिक्र भी सामने आया है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर भारत पर कितना शुल्क लग सकता है और क्या अमेरिका वाकई भारतीय सामान पर 100% Tariff लगाने जा रहा है? आइए आसान भाषा में समझते हैं पूरा मामला। Russia से Oil खरीदना बना बड़ी वजह भारत लंबे समय से रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है। रूस से मिलने वाला तेल भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर अमेरिका और उसके सहयोगी रूस पर यूक्रेन युद्ध के कारण आर्थिक दबाव बढ़ाना चाहते हैं। अमेरिका की कोशिश है कि रूस से तेल और दूसरी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर दबाव बनाया जाए, ताकि रूस की ऊर्जा से होने वाली कमाई प्रभावित हो। यही वजह है कि भारत जैसे बड़े रूसी तेल खरीदारों पर भी अमेरिकी टैरिफ कार्रवाई की चर्चा तेज हो गई है। US Senate ने क्या किया? अमेरिकी सीनेट ने रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े एक विधेयक को भारी बहुमत से मंजूरी दी है। इस प्रस्ताव में उन देशों के खिलाफ भी आर्थिक कार्रवाई का रास्ता बनाया गया है, जो रूस के साथ बड़े स्तर पर ऊर्जा कारोबार करते हैं। प्रस्ताव के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ परिस्थितियों में ऐसे देशों से आने वाले सामान पर 100% तक अतिरिक्त Tariff लगाने का अधिकार मिल सकता है। यहीं से भारत को लेकर चिंता बढ़ी है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि सीनेट से बिल पास होने का मतलब यह नहीं है कि भारत पर 100% टैरिफ आज से लागू हो गया है। क्या India पर तुरंत लगेगा 100% Tariff? नहीं। फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद भी कानून बनने की प्रक्रिया बाकी है। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन को यह तय करना होगा कि इस प्रावधान का इस्तेमाल कब और किस देश के खिलाफ किया जाए। इसलिए अभी भारत पर 100% टैरिफ को संभावित खतरा कहना ज्यादा सही है, न कि लागू हो चुका शुल्क। फिर 500% Tariff की चर्चा क्यों? 500% टैरिफ का आंकड़ा रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर बेहद कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने से जुड़े अमेरिकी प्रस्तावों के संदर्भ में सामने आया है। ऐसे प्रावधानों में अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस के साथ व्यापार जारी रखने वाले देशों पर बहुत ऊंचा शुल्क लगाने की शक्ति देने की बात की गई है। लेकिन यहां एक बड़ा फर्क समझना जरूरी है। 500% Tariff को भारत पर लागू होने वाला तय शुल्क नहीं माना जा सकता। वहीं मौजूदा चर्चा में भारत के लिए 100% तक अतिरिक्त टैरिफ की संभावना ज्यादा सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। India-US Trade पर कितना असर पड़ेगा? अगर भविष्य में भारत पर भारी टैरिफ लगाया जाता है, तो इसका असर दोनों देशों के कारोबार पर दिखाई दे सकता है। अमेरिका में भारतीय सामान की कीमत बढ़ सकती है। इसका असर भारतीय exporters पर पड़ सकता है और कुछ क्षेत्रों में अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा मुश्किल हो सकती है। दूसरी तरफ अमेरिका के लिए भी भारतीय उत्पाद महंगे हो जाएंगे। इसलिए इतना बड़ा टैरिफ सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों के लिए चुनौती बन सकता है। भारत के सामने Oil और Trade का Balance भारत के लिए मामला केवल व्यापार का नहीं है। रूस से मिलने वाला कच्चा तेल देश की energy security में अहम भूमिका निभाता है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में भारत और अमेरिका के बीच इस मुद्दे पर बातचीत काफी महत्वपूर्ण हो सकती है। Trump का अगला कदम क्या होगा? अब सबकी नजर अमेरिकी कानून की आगे की प्रक्रिया और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख पर है। यदि कानून अंतिम रूप लेता है और अमेरिकी प्रशासन इसका इस्तेमाल करता है, तो भारत समेत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, अभी यह कहना सही नहीं होगा कि भारत पर 100% Tariff तय हो चुका है। फिलहाल यह एक संभावित कार्रवाई है, जिस पर आगे अमेरिकी प्रशासन का फैसला महत्वपूर्ण होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Salman Khan

Salman Khan की Security में तैनात पुलिसकर्मी की मौत, Galaxy Apartment के बाहर मचा हड़कंप

मुंबई से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। बॉलीवुड अभिनेता Salman Khan के बांद्रा स्थित Galaxy Apartment के बाहर सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस कॉन्स्टेबल की अचानक मौत हो गई। बताया जा रहा है कि ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी की तबीयत बिगड़ी और वह अचानक जमीन पर गिर पड़े। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। शुरुआती रिपोर्ट्स में पुलिसकर्मी की मौत की वजह suspected heart attack बताई जा रही है। हालांकि, मौत का सही कारण मेडिकल जांच और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा। Salman Khan की Security में तैनात थे पुलिसकर्मी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक पुलिसकर्मी की ड्यूटी Salman Khan के घर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था में लगाई गई थी। अभिनेता की सुरक्षा पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा में रही है। Lawrence Bishnoi Gang की धमकियों के बाद Salman Khan की सुरक्षा बढ़ाई गई थी। इसी वजह से Galaxy Apartment के आसपास भी पुलिस की अतिरिक्त तैनाती और निगरानी रखी जाती है। बताया जा रहा है कि पुलिस कॉन्स्टेबल सामान्य तरीके से अपनी ड्यूटी कर रहे थे। इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और वह गिर पड़े। मौके पर मौजूद लोगों और अन्य सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें संभाला और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल पहुंचने से पहले बिगड़ी हालत पुलिसकर्मी को अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरों ने उनकी जांच की। हालांकि, उन्हें बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों को भी झकझोर दिया। ड्यूटी के दौरान इस तरह अचानक हुई मौत से आसपास कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। Lawrence Bishnoi की धमकियों के बाद बढ़ी थी सुरक्षा Salman Khan लंबे समय से Lawrence Bishnoi Gang की धमकियों के चलते कड़ी सुरक्षा में रहते हैं। अप्रैल 2024 में उनके Galaxy Apartment के बाहर गोलीबारी की घटना के बाद सुरक्षा को और मजबूत किया गया था। इसके बाद अभिनेता की सुरक्षा में पुलिस के साथ-साथ अन्य सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी बढ़ाई गई। Galaxy Apartment के आसपास आने-जाने वालों पर नजर रखने और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष सावधानी बरती जाती है। हालांकि, पुलिस कॉन्स्टेबल की मौत को किसी हमले या Lawrence Bishnoi Gang की गतिविधि से जोड़ने वाली कोई जानकारी सामने नहीं आई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी थी। मौत की असली वजह पर आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार फिलहाल पुलिसकर्मी की मौत को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। शुरुआती तौर पर हार्ट अटैक की आशंका जताई गई है, लेकिन अंतिम कारण मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा। एक तरफ Salman Khan की सुरक्षा के कारण Galaxy Apartment हमेशा सुर्खियों में रहता है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी की अचानक मौत ने इस घटना को और गंभीर बना दिया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

अमेरिका बना भारत का सबसे बड़ा LPG और LNG सप्लायर, होर्मुज संकट के बाद बदली ऊर्जा रणनीति

होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुए संकट के बाद भारत की ऊर्जा आयात रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि अमेरिका अब भारत का सबसे बड़ा LPG (रसोई गैस) सप्लायर बन गया है और देश की जरूरत की करीब 67% एलपीजी अब अमेरिका से आ रही है। उन्होंने यह जानकारी शुक्रवार को कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के एक कार्यक्रम में दी। LNG सप्लाई में भी अमेरिका पहले स्थान पर इक्विरस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने कतर को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) सप्लायर भी बन गया है। मई से जुलाई 2026 के दौरान: इस अवधि में अमेरिका ने 2.19 मिलियन टन LNG की आपूर्ति की, जबकि नाइजीरिया 1.31 मिलियन टन के साथ दूसरे स्थान पर रहा। वहीं ओमान से LNG सप्लाई में 341% की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई। भारत में गैस की मांग बढ़ी रिपोर्ट के मुताबिक जून 2026 में भारत में प्राकृतिक गैस की कुल मांग बढ़कर 197 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (mmscmd) पहुंच गई। मुख्य आंकड़े: सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सबसे बड़ा उपभोक्ता क्षेत्रवार गैस खपत में: हालांकि पेट्रोकेमिकल सेक्टर की मांग पिछले वर्ष की तुलना में अब भी करीब 48% कम बनी हुई है। वैश्विक कीमतें ऊंची, फिर भी मजबूत रहा आयात रिपोर्ट के अनुसार, एशियाई स्पॉट LNG की कीमतें 20 डॉलर प्रति MMBtu से ऊपर बनी हुई हैं। इसके बावजूद भारत का LNG आयात मजबूत रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई में गैस की मांग मजबूत बनी रहेगी, जबकि अगस्त में मौसमी कारणों से कुछ नरमी आ सकती है। होर्मुज संकट के बावजूद नहीं हुई ईंधन की कमी हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि मिडिल ईस्ट संकट और होर्मुज मार्ग प्रभावित होने के बावजूद देश में एलपीजी या पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं होने दी गई। उन्होंने बताया कि युद्ध से पहले भारत: इसी समुद्री मार्ग से आयात करता था। संकट के दौरान भारत ने तुरंत वैकल्पिक देशों से आयात बढ़ाया और घरेलू उत्पादन में भी वृद्धि की। मंत्री ने कहा कि देश के 1.07 लाख से अधिक पेट्रोल पंपों में से एक भी फ्यूल आउटलेट खाली नहीं रहा। 41 देशों तक बढ़ाया कच्चे तेल का आयात भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए: ‘समुद्र मंथन’ योजना को मिली मंजूरी सरकार ने दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए 84,000 करोड़ रुपये की ‘समुद्र मंथन’ योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य गहरे समुद्र में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज को बढ़ावा देना है। हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि ड्रिलिंग का कार्य निजी कंपनियां करेंगी। सरकार जोखिम वाले ऑफशोर प्रोजेक्ट्स में निवेश बढ़ाने के लिए प्रति कुएं 650 करोड़ रुपये तक या ड्रिलिंग लागत का 50 प्रतिशत आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराएगी। देश, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र की ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

भारत-श्रीलंका टेस्ट सीरीज में दर्शकों को मिलेगी फ्री एंट्री, श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड का बड़ा फैसला

भारत और श्रीलंका के बीच होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज के दौरान क्रिकेट प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड (SLC) ने घोषणा की है कि दोनों टेस्ट मैचों में दर्शकों को फ्री एंट्री दी जाएगी। बोर्ड का उद्देश्य टेस्ट क्रिकेट के प्रति दर्शकों की रुचि बढ़ाना और स्टेडियम में अधिक से अधिक भीड़ जुटाना है। गॉल और कोलंबो में मिलेगी मुफ्त एंट्री भारत और श्रीलंका के बीच पहला टेस्ट मैच 15 अगस्त से गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा। इस मुकाबले के लिए दर्शकों को गेट नंबर-4 से निशुल्क प्रवेश मिलेगा। वहीं दूसरा टेस्ट 23 अगस्त से कोलंबो के एसएससी (SSC) मैदान में खेला जाएगा। यहां दर्शकों को गेट नंबर 3, 4, 5 और 7 से बिना टिकट प्रवेश दिया जाएगा। श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने क्रिकेट प्रशंसकों से बड़ी संख्या में स्टेडियम पहुंचकर टेस्ट क्रिकेट का समर्थन करने की अपील की है। टेस्ट मैचों में घट रही है दर्शकों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में उपमहाद्वीप में टेस्ट क्रिकेट के दौरान स्टेडियमों में दर्शकों की संख्या लगातार कम होती गई है। भारत के पिछले श्रीलंका दौरे और इसी वर्ष श्रीलंका में खेले गए अफगानिस्तान टेस्ट मैच में भी स्टैंड काफी हद तक खाली रहे थे। इसी स्थिति को देखते हुए श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने यह पहल की है। WTC के लिहाज से अहम है सीरीज भारत फिलहाल वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) की अंक तालिका में पांचवें स्थान पर है, जबकि श्रीलंका छठे नंबर पर मौजूद है। ऐसे में दोनों टीमों के लिए यह टेस्ट सीरीज WTC अंक तालिका के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 2017 में भारत ने किया था क्लीन स्वीप भारत ने श्रीलंका के अपने पिछले टेस्ट दौरे (2017) में शानदार प्रदर्शन करते हुए 3-0 से सीरीज अपने नाम की थी। श्रीलंका पर रहेगा वापसी का दबाव श्रीलंका की टीम इस सीरीज में वेस्टइंडीज के खिलाफ हाल ही में खेली गई दो मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-0 की हार के बाद उतर रही है। ऐसे में मेजबान टीम घरेलू मैदान पर वापसी करने की कोशिश करेगी, जबकि भारत की नजर WTC में अपनी स्थिति मजबूत करने पर होगी। क्रिकेट से जुड़ी हर बड़ी खबर और लाइव अपडेट्स के लिए विजिट करें:deshharpal.com
R Praggnanandhaa

R Praggnanandhaa ने रचा इतिहास, एक Round पहले बने Saint Louis Rapid & Blitz Champion

भारतीय शतरंज के युवा ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा (R Praggnanandhaa) ने एक बार फिर देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने Saint Louis Rapid & Blitz 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया। खास बात यह रही कि प्रज्ञानानंदा ने टूर्नामेंट का खिताब एक राउंड बाकी रहते ही पक्का कर लिया। सेंट लुइस में खेली गई इस प्रतियोगिता में दुनिया के कई दिग्गज शतरंज खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। ऐसे मजबूत मैदान में प्रज्ञानानंदा का लगातार बेहतर प्रदर्शन करना उनकी बढ़ती ताकत को दिखाता है। Rapid में बनाई मजबूत पकड़ टूर्नामेंट के Rapid चरण से ही प्रज्ञानानंदा ने अपनी स्थिति मजबूत कर ली थी। नौ राउंड के Rapid मुकाबलों के बाद वह 12 अंकों के साथ सबसे आगे थे। उन्होंने कई अहम मुकाबलों में जीत दर्ज की, जबकि कुछ बाजियां ड्रॉ भी रहीं। Rapid में मिली बढ़त का फायदा उन्हें Blitz चरण में मिला। तेज रफ्तार वाले मुकाबलों में जहां एक छोटी गलती भी पूरा खेल बदल सकती है, वहां प्रज्ञानानंदा ने धैर्य बनाए रखा और जरूरी अंक हासिल करते रहे। Sindarov के खिलाफ ड्रॉ ने तय किया खिताब खिताब की दौड़ में उज़्बेकिस्तान के Javokhir Sindarov उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बने हुए थे। दोनों के बीच मुकाबले पर सबकी नजर थी। प्रज्ञानानंदा ने इस अहम मुकाबले में ड्रॉ हासिल किया और इसके बाद उनकी बढ़त इतनी मजबूत हो गई कि बाकी खिलाड़ियों के लिए उन्हें पीछे छोड़ना मुश्किल हो गया। एक राउंड अभी बाकी था, लेकिन प्रज्ञानानंदा ने चैंपियन बनने की जरूरी बढ़त हासिल कर ली थी। इसके साथ ही उन्होंने पहली बार Saint Louis Rapid & Blitz का खिताब अपने नाम किया। बड़े खिलाड़ियों के बीच दिखाया दम इस प्रतियोगिता में प्रज्ञानानंदा के सामने दुनिया के कई अनुभवी खिलाड़ी थे। Fabiano Caruana, Wesley So, Anish Giri, Levon Aronian, Vincent Keymer और Javokhir Sindarov जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी ने टूर्नामेंट को बेहद प्रतिस्पर्धी बना दिया था। ऐसे खिलाड़ियों के बीच शुरुआत से लेकर खिताब तक अपनी बढ़त बनाए रखना प्रज्ञानानंदा के प्रदर्शन की सबसे बड़ी खासियत रही। भारतीय Chess के लिए बड़ी उपलब्धि प्रज्ञानानंदा की इस जीत को सिर्फ एक टूर्नामेंट की सफलता के तौर पर नहीं देखा जा सकता। कम उम्र में उन्होंने दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ लगातार अपनी पहचान बनाई है। Saint Louis में मिली यह ट्रॉफी उनके करियर में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव जोड़ती है। Rapid और Blitz जैसे तेज फॉर्मेट में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए सिर्फ आक्रामक खेल ही नहीं, बल्कि सटीक फैसले, समय का बेहतर इस्तेमाल और दबाव संभालने की क्षमता भी जरूरी होती है। प्रज्ञानानंदा ने पूरे टूर्नामेंट में इन पहलुओं पर मजबूत पकड़ दिखाई। Grand Chess Tour में भी बढ़ी उम्मीदें Saint Louis Rapid & Blitz में शानदार प्रदर्शन का असर Grand Chess Tour 2026 में उनकी स्थिति पर भी पड़ा है। इस जीत से प्रज्ञानानंदा का आत्मविश्वास निश्चित तौर पर बढ़ेगा और आने वाले मुकाबलों में भी उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी। भारतीय शतरंज के लिए यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि प्रज्ञानानंदा लगातार उस पीढ़ी का हिस्सा बन रहे हैं जो दुनिया के सबसे बड़े Chess मंचों पर भारत की मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही है। एक राउंड पहले चैंपियन बनकर रचा इतिहास Saint Louis में प्रज्ञानानंदा ने सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं जीती, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में लगातार अच्छा खेल दिखाकर यह साबित किया कि वह अब दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों के बीच अपनी जगह बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। एक राउंड बाकी रहते Saint Louis Rapid & Blitz Champion बनना उनके करियर की यादगार उपलब्धियों में शामिल हो गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

टॉप नेशनल शूटिंग कोच पर हितों के टकराव के आरोप, SAI ने शुरू कराई जांच

नई दिल्ली। भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने एक शीर्ष राष्ट्रीय शूटिंग कोच के खिलाफ मिली शिकायत पर जांच के निर्देश दिए हैं। कोच पर चेन्नई में प्रस्तावित शूटिंग रेंज निर्माण परियोजना का ठेका हासिल करने की कोशिश करने का आरोप है। SAI ने इसे संभावित हितों के टकराव (Conflict of Interest) का मामला मानते हुए जांच शुरू की है। फिलहाल संबंधित कोच का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। बताया जा रहा है कि संबंधित कोच नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के साथ मिलकर भारतीय शॉटगन निशानेबाजों को ओलंपिक, ISSF वर्ल्ड कप, वर्ल्ड चैंपियनशिप और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए प्रशिक्षण देते हैं। SAI ने मांगी जांच रिपोर्ट SAI के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस मामले में नाम सहित औपचारिक शिकायत प्राप्त हुई है। इसके बाद स्टेडियम डिवीजन और दिल्ली के क्षेत्रीय निदेशक को जांच के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारी ने बताया कि फिलहाल जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। चेन्नई शूटिंग रेंज परियोजना से जुड़ा मामला सूत्रों के मुताबिक, शिकायत चेन्नई में लगभग 15 से 16 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली पांच शॉटगन शूटिंग रेंज की टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया से असंतुष्ट एक बोलीदाता ने मामले को विजिलेंस विभाग के समक्ष उठाया है। एशियन गेम्स कोचिंग स्टाफ से हटाए जाने की चर्चा जानकारी के अनुसार, इस मामले के चलते संबंधित कोच को 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स के लिए भारतीय कोचिंग स्टाफ से बाहर रखा जा सकता है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। NRAI ने कहा- जानकारी नहीं NRAI ने अपने बयान में कहा कि फेडरेशन को किसी कोच की निजी व्यावसायिक गतिविधियों या उनके खिलाफ चल रही विजिलेंस जांच की जानकारी नहीं है। फेडरेशन ने यह भी बताया कि एशियन गेम्स प्रशिक्षण शिविर के लिए कोचों की सूची को आंशिक मंजूरी मिली है, जिसमें कुछ नाम शामिल नहीं हैं। इस संबंध में SAI के अंतिम निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है। राइफल कोच भी जांच के दायरे में इसी बीच, भारतीय राइफल टीम के एक हाई परफॉर्मेंस कोच भी SAI की जांच का सामना कर रहे हैं। उन पर नई दिल्ली स्थित कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में निजी कोचिंग चलाने और अपनी निजी क्लास में शामिल न होने वाले निशानेबाजों के साथ कथित भेदभाव करने के आरोप लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, 50 मीटर राइफल इवेंट के हेड कोच मनोज कुमार से जुड़े मामले में हाल ही में SAI मुख्यालय में सुनवाई हुई, जिसमें खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों की शिकायतें दर्ज की गईं। फिलहाल दोनों मामलों में जांच जारी है और संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। खेल जगत की ताजा और विश्वसनीय खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com

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