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Pellet Gun

Pellet Gun Case: राहुल गांधी का धरना रंग लाया, पुलिस ने दर्ज की FIR

पैलेट गन (Pellet Gun) से घायल छात्र के मामले में शुक्रवार को दिल्ली की सियासत गरमा गई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी पीड़ित साहिल लोचब को साथ लेकर संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे और FIR दर्ज करने की मांग की। पुलिस से बातचीत के बाद भी जब कार्रवाई को लेकर स्थिति साफ नहीं हुई तो राहुल गांधी वहीं धरने पर बैठ गए। कुछ देर बाद मामले में FIR दर्ज होने की खबर सामने आई। पीड़ित को साथ लेकर थाने पहुंचे राहुल गांधी राहुल गांधी शुक्रवार को साहिल लोचब के साथ संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे। साहिल ने आरोप लगाया है कि 20 जुलाई को दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल से उन्हें चोट लगी थी। पीड़ित की शिकायत पर FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर राहुल गांधी ने पुलिस अधिकारियों से बातचीत की। उनका कहना था कि अगर किसी व्यक्ति के घायल होने की शिकायत सामने आई है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। FIR की मांग पर धरने पर बैठ गए राहुल पुलिस स्टेशन में बातचीत के बाद राहुल गांधी ने FIR दर्ज करने की मांग दोहराई। कार्रवाई में देरी को लेकर उन्होंने वहीं धरना शुरू कर दिया। इस दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत पार्टी के कई नेता भी मौके पर पहुंचे। राहुल गांधी ने कहा कि वह पीड़ित को न्याय दिलाने और मामले में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराने के लिए वहां बैठे हैं। उनके धरने के बाद पुलिस स्टेशन के आसपास सुरक्षा भी बढ़ा दी गई। आखिर क्या है Pellet Gun Case? यह मामला 20 जुलाई को दिल्ली में हुए एक छात्र प्रदर्शन से जुड़ा बताया जा रहा है। साहिल लोचब ने शिकायत में कथित पैलेट गन से घायल होने की बात कही है। घटना को लेकर पुलिस की भूमिका और बल प्रयोग के आरोपों पर भी सवाल उठाए गए हैं। दिल्ली पुलिस की ओर से मामले से जुड़े आरोपों की जांच का पक्ष सामने आया है। वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुलिस और अर्धसैनिक बलों के कथित अत्यधिक बल प्रयोग से जुड़े आरोपों की जांच के लिए हाई-पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी गठित किए जाने की बात भी सामने आई है। धरने के बीच सामने आई FIR की जानकारी राहुल गांधी के धरने के बीच शाम को खबर सामने आई कि दिल्ली पुलिस ने साहिल लोचब को लगी पैलेट चोटों के मामले में FIR दर्ज कर ली है। इसके बाद राहुल गांधी की मांग पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई। हालांकि, FIR दर्ज होना जांच की शुरुआत है। अब जांच में यह सामने आना बाकी है कि घटना वास्तव में कैसे हुई, पैलेट गन का इस्तेमाल किस परिस्थिति में हुआ और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है। BJP ने राहुल गांधी पर साधा निशाना राहुल गांधी के धरने को लेकर BJP ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी पुलिस स्टेशन पर धरना देकर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। BJP का कहना है कि मामले से जुड़े आरोपों की जांच पहले से अलग स्तर पर चल रही है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि घायल छात्र की शिकायत पर FIR दर्ज होना उसका कानूनी अधिकार है और राहुल गांधी उसी मांग को लेकर पीड़ित के साथ खड़े हुए। अब जांच पर टिकी नजर पैलेट गन मामले में FIR दर्ज होने के बाद अब सबसे ज्यादा नजर पुलिस जांच पर रहेगी। घटना से जुड़े वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट जैसे साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है। राहुल गांधी के धरने ने इस मामले को राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। फिलहाल FIR दर्ज होने के बाद अगला बड़ा सवाल यही है कि जांच में क्या सामने आता है और जिम्मेदारी किस पर तय होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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गुना में 3.74 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी का मामला, DPM भोपाल अटैच

गुना में मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में सामने आई 3.74 करोड़ रुपए की वित्तीय गड़बड़ी के मामले में अब जिला परियोजना प्रबंधक (DPM) पर भी कार्रवाई हुई है। राज्य आजीविका मिशन के CEO ने DPM सोनू सुशीला यादव को भोपाल अटैच कर दिया है। जारी आदेश के मुताबिक, गुना में चल रही जांच पूरी होने तक DPM को जिला मुख्यालय से हटाया गया है। मामले में वित्तीय रिकॉर्ड, पोर्टल पर दर्ज जानकारी और बैंक खातों की जांच की जा रही है। LOKOS पोर्टल के आंकड़ों से सामने आई गड़बड़ी मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले में स्व-सहायता समूह और उनके सामुदायिक संगठन बनाए गए हैं। इन समूहों से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जानकारी भारत सरकार के LOKOS पोर्टल पर दर्ज की जाती है। पोर्टल पर समूहों को मिली राशि, भुगतान की तारीख और अन्य वित्तीय जानकारी का रिकॉर्ड रहता है। इसी रिकॉर्ड का मिशन की वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (FDM) से मिलान किया गया था। 90.25 लाख रुपए की राशि पर उठे सवाल मई में FDM और LOKOS पोर्टल के आंकड़ों के मिलान के दौरान प्रतिज्ञा सीएलएफ, विकासखंड गुना से संबंधित करीब 90.25 लाख रुपए की राशि में अंतर सामने आया। FDM पोर्टल पर यह राशि दिखाई दे रही थी, लेकिन बैंक रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट की जांच में इतनी राशि की वास्तविक प्राप्ति नहीं मिली। इसके बाद विभागीय स्तर पर मामले की जांच शुरू की गई। जिला और राज्य स्तर पर जांच जारी मामला सामने आने के बाद जिला पंचायत CEO ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की। टीम को वित्तीय गड़बड़ी की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए। इसके बाद मामले की शिकायत राज्य स्तर पर भी की गई, जिसके आधार पर राज्य की टीम ने भी जांच शुरू कर दी है। फिलहाल वित्तीय अभिलेखों, पोर्टल पर की गई प्रविष्टियों और संबंधित बैंक खातों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने तक DPM भोपाल अटैच मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य आजीविका मिशन के CEO ने DPM सोनू सुशीला यादव को जांच पूरी होने तक भोपाल अटैच कर दिया है। अब जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि पोर्टल पर दर्ज राशि और बैंक खातों में वास्तविक लेन-देन के बीच अंतर कैसे आया और इसमें किस स्तर पर लापरवाही या वित्तीय अनियमितता हुई। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
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मध्यप्रदेश की जेलों में अब बंदियों की होगी साइको-सोशल काउंसलिंग, भोपाल सेंट्रल जेल में खुलेगा पहला सेंटर

मध्यप्रदेश की जेलों में बंद कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार में सुधार के लिए नई पहल शुरू की जा रही है। अब बंदियों को केवल सजा काटने तक सीमित रखने के बजाय उनके मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए जेल विभाग की ओर से भोपाल केंद्रीय जेल में पहला साइको-सोशल काउंसलिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा। इसके परिणामों के आधार पर इस व्यवस्था को प्रदेश की अन्य जेलों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। जेल विभाग और RRU के बीच हुआ MOU इस पहल के लिए मध्यप्रदेश जेल विभाग और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU), गांधीनगर, गुजरात के बीच साइको-सोशल काउंसलिंग के क्षेत्र में सहयोग के लिए एमओयू हुआ है। जेल महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर की पहल पर जेल मुख्यालय में हुए एमओयू कार्यक्रम में विशेष महानिदेशक जी. अखेतो सेमा, उप महानिरीक्षक (कल्याण) एमआर पटेल सहित जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। RRU की ओर से डॉ. नूरिन चौधरी, डॉ. गीतेश कुमार सिंह, प्रदीप रूसिया, तनु पी चंदेल और शुभम जैन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। 28 जेल अधिकारी-कर्मचारियों को दिया गया प्रशिक्षण जेल महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर ने बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर RRU की साइको-सोशल काउंसलिंग योजना का अध्ययन किया। इसके बाद विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों को भोपाल बुलाकर 6 से 12 जुलाई तक सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान प्रदेश की अलग-अलग जेलों के 28 अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया। इनमें मेल नर्स, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, मुख्य प्रहरी और प्रहरी शामिल रहे। प्रशिक्षण में मानसिक तनाव से गुजर रहे बंदियों की पहचान करने और उनकी काउंसलिंग करने के तरीके बताए गए। प्रशिक्षण के बाद बंदियों की काउंसलिंग शुरू प्रशिक्षण प्राप्त अधिकारियों और कर्मचारियों ने संबंधित जेलों में जाकर तनावग्रस्त बंदियों की काउंसलिंग की। जेल महानिदेशक ने काउंसलिंग से मिले फीडबैक और परिणामों की समीक्षा की। जेल विभाग के अनुसार, शुरुआती स्तर पर बंदियों के मानसिक सुधार की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आए। इसके बाद इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए RRU के साथ एमओयू की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। गुजरात में मास्टर ट्रेनर तैयार होंगे एमओयू के तहत जेल विभाग के चयनित अधिकारी और कर्मचारी राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर जाकर मास्टर ट्रेनर कोर्स करेंगे। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये अधिकारी जेल विभाग में मास्टर ट्रेनर के रूप में काम करेंगे और प्रदेश की अन्य जेलों के अधिकारियों-कर्मचारियों को साइको-सोशल काउंसलिंग का प्रशिक्षण देंगे। इससे जेलों में मानसिक तनाव से जूझ रहे बंदियों की पहचान, उनकी जरूरतों को समझने और उन्हें जरूरी मनो-सामाजिक सहयोग देने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार किया जा सकेगा। भोपाल केंद्रीय जेल से होगी शुरुआत जेल विभाग की इस योजना का पहला चरण केंद्रीय जेल भोपाल से शुरू होगा। यहां साइको-सोशल काउंसलिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा। इसके अनुभव और परिणामों के आधार पर सेंटर और काउंसलिंग व्यवस्था को प्रदेश की अन्य जेलों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। जेल विभाग का उद्देश्य बंदियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने, भावनात्मक संतुलन कायम करने और सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन की दिशा में सहयोग देना है, ताकि जेल से बाहर आने के बाद वे बेहतर जीवन की ओर आगे बढ़ सकें।
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बड़वानी में बीईओ को हटाने की मांग पर प्रदर्शन, सेंधवा विधायक को डेढ़ घंटे कार्यालय में रोका

बड़वानी जिले के निवाली में विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) मनोज मराठे को पद से हटाने और निलंबित करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच सेंधवा विधायक मोंटू सोलंकी को पुलिस ने उनके कार्यालय में करीब डेढ़ घंटे तक रोककर रखा। विधायक अपने समर्थकों के साथ निवाली में चल रहे प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे। प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा और कार्रवाई का लिखित आदेश नहीं मिलने के बाद वे 300 से अधिक समर्थकों के साथ प्रदर्शन में शामिल होने के लिए रवाना हो गए। बीईओ को निलंबित करने की मांग जयस की ओर से बीईओ मनोज मराठे को हटाने की मांग को लेकर पिछले चार दिनों से निवाली में धरना दिया जा रहा है। बताया गया है कि बीईओ के खिलाफ सेंधवा ग्रामीण थाने में आपराधिक प्रकरण दर्ज है और उन पर एक शिक्षक को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। इसी मामले को लेकर विधायक मोंटू सोलंकी भी आंदोलन में शामिल होने जा रहे थे। उन्होंने बीईओ के वित्तीय अधिकार तत्काल वापस लेने और उन्हें निलंबित करने की मांग की। अधिकारियों ने दिया कार्रवाई का आश्वासन विधायक को कार्यालय में रोके जाने के दौरान सेंधवा एसडीओपी अजय वाघमारे ने उनसे चर्चा की। पुलिस और प्रशासन की ओर से कार्रवाई का मौखिक आश्वासन दिया गया, लेकिन विधायक को निलंबन से संबंधित कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया। करीब डेढ़ घंटे तक इंतजार करने के बाद विधायक अपने समर्थकों के साथ निवाली के लिए रवाना हो गए। विधायक ने प्रशासन पर लगाए संरक्षण के आरोप विधायक मोंटू सोलंकी ने आरोप लगाया कि आपराधिक मामले में आरोपी अधिकारी को शासन और प्रशासन का संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बीईओ के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। विधायक ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की और आंदोलन को दबाने की कोशिश की गई तो प्रदर्शन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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मध्यप्रदेश में IAS अफसरों की बड़ी प्रशासनिक सर्जरी, 10 जिला पंचायत CEO समेत नगर निगम आयुक्त बदले

मोहन सरकार ने मध्यप्रदेश में IAS अधिकारियों की बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी तबादला आदेश में 2016 से 2024 बैच तक के कई IAS अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इस फेरबदल में 10 जिलों के जिला पंचायत CEO बदले गए हैं। इसके अलावा ग्वालियर और सतना नगर निगम के आयुक्तों का भी तबादला किया गया है। तबादला सूची में अधिकारियों को जिला पंचायत CEO, अपर कलेक्टर और SDM के साथ-साथ राज्य शासन के विभिन्न विभागों में उप सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। कई अधिकारियों को नगर निगमों में आयुक्त और अपर आयुक्त के पद पर भी भेजा गया है। ग्वालियर और सतना नगर निगम आयुक्त बदले 2018 बैच के अभिषेक चौधरी को जिला पंचायत धार के CEO पद से हटाकर नगर पालिक निगम ग्वालियर का आयुक्त बनाया गया है। वहीं ग्वालियर नगर निगम के आयुक्त संघ प्रिय को जिला पंचायत सिंगरौली का CEO नियुक्त किया गया है। 2019 बैच के डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा को जिला पंचायत खंडवा के CEO पद से नगर निगम सतना का आयुक्त बनाया गया है। उन्हें CEO स्मार्ट सिटी सतना का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। 2016 से 2018 बैच के प्रमुख तबादले 2019 से 2021 बैच में भी बदलाव 2019 से 2021 बैच के अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से: 2022 बैच के अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारी 2022 बैच के अधिकारियों में भी बड़े स्तर पर फेरबदल किया गया है। ईश्वर्य वर्मा को CEO जिला पंचायत खंडवा और आशीष को अपर आयुक्त, नगर निगम इंदौर बनाया गया है। वहीं कार्तिकेय जायसवाल को CEO जिला पंचायत श्योपुर और विशाल धाकड़ को CEO जिला पंचायत टीकमगढ़ की जिम्मेदारी मिली है। इसके अलावा: 2024 बैच के सहायक कलेक्टरों को SDM की जिम्मेदारी तबादला आदेश में 2024 बैच के कई सहायक कलेक्टरों को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) यानी SDM की जिम्मेदारी दी गई है। श्रद्धा शुक्ला की भी पदस्थापना आदेश में श्रद्धा शुक्ला (2022) को अपर कलेक्टर, जिला खंडवा के पद पर पदस्थ किया गया है। आदेश में उनके लिए फिलहाल पदस्थापना की प्रतीक्षा और कनिष्ठ वेतनमान से संबंधित उल्लेख भी किया गया है। इस प्रशासनिक फेरबदल के बाद प्रदेश के कई जिलों में जिला पंचायत, नगरीय प्रशासन और राजस्व स्तर पर अधिकारियों की नई टीम के साथ कामकाज शुरू होगा।
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छिंदवाड़ा में गर्भवती महिला को 8 किमी डोली में ले गए ग्रामीण, अस्पताल में गर्भस्थ शिशु की मौत

छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव ब्लॉक के चीटीपाठा जामुनडोंग टोले में सड़क की बदहाल स्थिति ने एक गर्भवती महिला के परिवार की मुश्किलें बढ़ा दीं। प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद गांव तक 108 एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी। ऐसे में परिजनों और ग्रामीणों ने महिला को डोली में बैठाकर करीब 8 किलोमीटर तक दुर्गम रास्ते से पैदल पहुंचाया। गांव से बाहर एंबुलेंस मिलने के बाद महिला को अस्पताल ले जाया गया। वहां जांच के दौरान डॉक्टरों ने गर्भस्थ शिशु की मौत की पुष्टि की। महिला की हालत गंभीर होने पर उसे ICU में भर्ती किया गया है। 8 किलोमीटर तक डोली में लेकर चले ग्रामीण जानकारी के मुताबिक, चीटीपाठा जामुनडोंग निवासी सोनू मलगाम की पत्नी कुस्तरिया को गुरुवार सुबह अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने 108 एंबुलेंस को सूचना दी, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक, टोले तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद सरपंच, परिजनों और ग्रामीणों ने लकड़ी और कपड़े की मदद से डोली तैयार की। महिला को डोली में बैठाकर ग्रामीण पैदल ही गांव से बाहर की ओर निकल पड़े। करीब 8 किलोमीटर का पथरीला और कठिन रास्ता तय करने के बाद महिला को गोप गांव तक पहुंचाया गया। यहां से 108 एंबुलेंस की मदद से उसे दमुआ स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने महिला को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। अस्पताल पहुंचने पर गर्भस्थ शिशु की मौत की पुष्टि परिजनों के मुताबिक, महिला को अस्पताल पहुंचाने से पहले काफी दूरी तक दुर्गम रास्ते पर डोली के सहारे ले जाना पड़ा। अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने गर्भ में ही शिशु की मौत की पुष्टि की। महिला की गंभीर हालत को देखते हुए उसे ICU में भर्ती किया गया है, जहां उसका इलाज जारी है। 125 परिवार, लेकिन पक्की सड़क का इंतजार ग्रामीणों का कहना है कि चीटीपाठा जामुनडोंग टोले में करीब 125 परिवार रहते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यहां लंबे समय से पक्की सड़क सहित कई बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। ग्रामीणों का दावा है कि सड़क निर्माण के लिए वर्ष 2016 से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने प्रस्ताव रखे जा रहे हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ है। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क की सुविधा नहीं होने के कारण आपात स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों ने दावा किया कि पहले भी तीन गर्भवती महिलाओं की मौत समय पर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलने के कारण हुई है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव तक पक्की सड़क बनाने और आपात स्थिति में एंबुलेंस की पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी मरीज को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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Gold-Silver Rate: सोना-चांदी ने फिर पकड़ी रफ्तार, जानिए आज का ताजा भाव

सोना-चांदी (Gold-Silver) खरीदने वालों के लिए आज का दिन खास रहा। सराफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं के दाम में जोरदार तेजी देखने को मिली। चांदी की कीमत एक ही कारोबारी सत्र में ₹9,260 बढ़कर करीब ₹2.38 लाख प्रति किलो पहुंच गई। वहीं, 10 ग्राम सोने का भाव भी ₹3,519 चढ़कर करीब ₹1.57 लाख तक पहुंच गया। कीमती धातुओं की कीमतों में इस तेजी ने निवेशकों के साथ-साथ उन लोगों का भी ध्यान खींचा है, जो आने वाले समय में शादी या किसी खास मौके के लिए सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। Silver Price में बड़ा उछाल चांदी की कीमत में हुई तेजी इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में है। करीब ₹9 हजार से ज्यादा की बढ़त के बाद चांदी का भाव ₹2.38 लाख प्रति किलो के आसपास पहुंच गया है। चांदी की कीमत में तेजी के पीछे घरेलू मांग के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल और औद्योगिक मांग को भी अहम माना जाता है। चांदी का इस्तेमाल सिर्फ गहनों और निवेश के लिए ही नहीं होता, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी किया जाता है। इसलिए इसकी कीमत पर वैश्विक आर्थिक गतिविधियों का असर तेजी से दिखाई देता है। Gold Price भी हुआ महंगा चांदी के साथ सोने ने भी तेजी दिखाई। 10 ग्राम सोने की कीमत में ₹3,519 का इजाफा हुआ और भाव करीब ₹1.57 लाख तक पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मजबूती और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ती दिलचस्पी ने घरेलू बाजार को भी सहारा दिया। हाल के कारोबार में कमजोर डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी जैसे संकेतों ने भी सोने की कीमत को सपोर्ट किया है। ऐसे माहौल में निवेशक अक्सर Gold को सुरक्षित विकल्प के तौर पर देखते हैं। क्या ₹1.70 लाख तक पहुंच सकता है Gold? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोने का भाव इस साल ₹1.70 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है? बाजार में ऐसी संभावनाओं को लेकर चर्चा जरूर है, लेकिन कीमत का अगला स्तर कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। अमेरिकी फेड की ब्याज दर नीति, डॉलर की चाल, महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी सोने की दिशा तय करने वाले प्रमुख फैक्टर हैं। अगर इन परिस्थितियों से सोने को लगातार समर्थन मिलता रहा, तो आने वाले महीनों में नए रिकॉर्ड देखने को मिल सकते हैं। खरीदारों के लिए क्या है मतलब? सोने-चांदी की लगातार बढ़ती कीमतों से आम खरीदारों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। खासकर शादी-ब्याह के सीजन में बड़ी मात्रा में खरीदारी करने वालों के लिए कुछ हजार रुपये का अंतर भी बजट पर असर डाल सकता है। हालांकि, सिर्फ तेजी देखकर जल्दबाजी में खरीदारी करना सही रणनीति नहीं मानी जाती। अगर खरीदारी जरूरी है तो स्थानीय सराफा बाजार का ताजा भाव, GST और making charges की जानकारी लेने के बाद ही फैसला करना बेहतर रहेगा। Gold-Silver Rate में आगे भी उतार-चढ़ाव संभव सोना और चांदी इस समय ऊंचे स्तरों पर कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में आगे भी तेजी और मुनाफावसूली दोनों देखने को मिल सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाला छोटा बदलाव भी घरेलू कीमतों पर असर डाल सकता है। फिलहाल चांदी में ₹9,260 की छलांग और सोने में ₹3,519 की बढ़त ने बाजार की तस्वीर जरूर बदल दी है। अगर वैश्विक परिस्थितियां कीमती धातुओं के पक्ष में बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में सोना-चांदी नए स्तरों की ओर बढ़ते नजर आ सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

सोना-चांदी के दाम में गिरावट, 24 कैरेट सोना ₹1.53 लाख और चांदी ₹2.27 लाख किलो; जानें खरीदारी का सही तरीका

सोने और चांदी की कीमतों में 19 अगस्त को गिरावट देखने को मिली है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, चांदी की कीमत 5,772 रुपये घटकर 2.27 लाख रुपये प्रति किलो हो गई है। वहीं 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 1,196 रुपये गिरकर 1.53 लाख रुपये पर आ गया। पिछले कुछ दिनों में कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी के बाद अब बाजार में मुनाफावसूली का असर दिखाई दे रहा है। सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट क्यों आई? 1. मुनाफावसूली का असर पिछले 10-15 दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में अच्छी तेजी देखने को मिली थी। ऐसे में कई निवेशकों और ट्रेडर्स ने मुनाफा निकालने के लिए बिकवाली शुरू कर दी। बाजार में बिकवाली बढ़ने से कीमतों पर दबाव आया और दोनों धातुओं के भाव नीचे आ गए। 2. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें ब्रेंट क्रूड की कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है। कच्चा तेल महंगा होने से दुनियाभर में महंगाई बढ़ने की चिंता बढ़ती है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने या बढ़ाने की संभावना बन सकती है। ऊंची ब्याज दरों को आमतौर पर सोने के लिए नकारात्मक माना जाता है। इस साल सोना करीब 20 हजार रुपये महंगा साल 2026 में अब तक सोने की कीमत में अच्छी तेजी रही है। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोने का भाव 1.33 लाख रुपये से ऊपर था, जो अब करीब 1.53 लाख रुपये हो गया है। हालांकि, इस दौरान कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव भी रहा। 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी ने 3.86 लाख रुपये प्रति किलो का ऑलटाइम हाई बनाया था। वहीं 31 दिसंबर 2025 को चांदी करीब 2.30 लाख रुपये प्रति किलो थी, जो अब 2.27 लाख रुपये पर आ गई है। क्या अभी सोना-चांदी खरीदना सही है? कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने और चांदी की कीमतें अपने ऊंचे स्तर से काफी नीचे आ चुकी हैं। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशक धीरे-धीरे खरीदारी कर सकते हैं, लेकिन एकमुश्त बड़ी रकम लगाने से बचना बेहतर हो सकता है। उनके अनुमान के मुताबिक साल के अंत तक सोना फिर से 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2.80 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है। हालांकि, बाजार की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 3 बातों का रखें ध्यान 1. BIS हॉलमार्क वाला सोना खरीदें सोना खरीदते समय हमेशा BIS हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना लें। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता और कैरेट की जानकारी मिलती है। 2. कीमत और वजन जरूर जांचें खरीदारी से पहले सोने का वजन और उस दिन का भाव अलग-अलग विश्वसनीय स्रोतों से जांच लें। 24, 22 और 18 कैरेट सोने के भाव अलग-अलग होते हैं। 3. मेकिंग चार्ज पर ध्यान दें गहने खरीदते समय मेकिंग चार्ज भी कुल कीमत को काफी प्रभावित करता है। ज्वेलर से मेकिंग या लेबर चार्ज का पूरा ब्रेकअप मांगें और संभव हो तो इस पर बातचीत भी करें। चांदी खरीदते समय शुद्धता कैसे जांचें? चांदी की शुद्धता जांचने के लिए कुछ घरेलू तरीके बताए जाते हैं, जैसे मैग्नेट और आइस टेस्ट। हालांकि, सिर्फ इन घरेलू परीक्षणों के आधार पर चांदी को असली या नकली मानना पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है। बेहतर है कि चांदी की खरीदारी करते समय उसकी शुद्धता, हॉलमार्क और बिल की जानकारी जरूर जांचें। बड़ी खरीदारी में प्रमाणित विक्रेता से खरीदना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।

महिला हॉकी वर्ल्ड कप में भारत की बड़ी जीत, साउथ अफ्रीका को 6-1 से हराकर पूल-D में टॉप पर पहुंची टीम

भारतीय महिला हॉकी टीम ने एफआईएच महिला हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए साउथ अफ्रीका को 6-1 से हरा दिया। एम्सटेलवीन में खेले गए पूल-D के मुकाबले में भारत ने शुरुआत से ही दबदबा बनाए रखा और टूर्नामेंट में अपनी पहली जीत दर्ज की। इस जीत के साथ भारत पूल-D की पॉइंट्स टेबल में शीर्ष पर पहुंच गया है। भारत की ओर से सुनेलिता टोप्पो, नवनीत कौर, सुशीला चानू, दीपिका, लालरेमसियामी और साक्षी राणा ने एक-एक गोल किया। साउथ अफ्रीका के लिए एकमात्र गोल कायला डी वाल ने 55वें मिनट में किया। यह वर्ल्ड कप में भारत की अब तक की सबसे बड़ी जीत भी रही। नवनीत ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदला भारत ने पहले क्वार्टर में ही सुनेलिता टोप्पो के गोल से बढ़त बना ली थी। इसके बाद दूसरे क्वार्टर की शुरुआत में नवनीत कौर ने पेनल्टी कॉर्नर को शानदार तरीके से गोल में बदला। 17वें मिनट में नवनीत ने एंगल बदलते हुए लो और तेज शॉट लगाया, जिसे साउथ अफ्रीकी गोलकीपर रोक नहीं सकीं। भारत की बढ़त 2-0 हो गई। इसके बाद भारतीय टीम ने लगातार आक्रमण जारी रखा और सर्कल में कई मौके बनाए। सुशीला के गोल से भारत 3-0 आगे 25वें मिनट में भारत ने तीसरा गोल किया। दीपिका के ड्रैगफ्लिक पर साउथ अफ्रीकी डिफेंस से डिफ्लेक्शन हुआ और गेंद सुशीला चानू के पास पहुंची। सुशीला ने मौके का फायदा उठाते हुए गेंद को गोल में पहुंचा दिया। भारत ने 3-0 की मजबूत बढ़त बना ली। इसके बाद भी भारतीय टीम ने दबाव कम नहीं किया और लगातार पेनल्टी कॉर्नर व सर्कल एंट्री हासिल करती रही। तीसरे क्वार्टर में तीन और गोल भारत ने तीसरे क्वार्टर में मुकाबले को पूरी तरह अपने नियंत्रण में कर लिया। दीपिका, लालरेमसियामी और साक्षी राणा ने गोल कर स्कोर 6-0 कर दिया। साउथ अफ्रीका ने आखिरी क्वार्टर में वापसी की कोशिश की और 55वें मिनट में कायला डी वाल ने गोल कर स्कोर 6-1 किया, लेकिन भारत ने बाकी समय में अपनी बढ़त कायम रखी और मुकाबला अपने नाम कर लिया। टॉप-8 की रेस में भारत की स्थिति मजबूत इस जीत के बाद भारत की अगले दौर में पहुंचने की स्थिति मजबूत हो गई है। टीम को अब अपने आखिरी पूल मुकाबले में इंग्लैंड के खिलाफ कम से कम ड्रॉ की जरूरत होगी, जिससे वह टॉप-8 में जगह पक्की कर सके। भारत ने टूर्नामेंट के अपने पहले मुकाबले में ओलिंपिक सिल्वर मेडलिस्ट चीन के खिलाफ 2-2 से ड्रॉ खेला था। उस मैच में नवनीत कौर और दीपिका ने भारत के लिए गोल किए थे। भारत के लिए शानदार शुरुआत चीन के खिलाफ ड्रॉ के बाद साउथ अफ्रीका पर 6-1 की बड़ी जीत ने भारतीय टीम के अभियान को मजबूती दी है। अब टीम की नजर इंग्लैंड के खिलाफ आखिरी पूल मुकाबले पर होगी, जहां एक अंक भी भारत को अगले दौर में पहुंचाने के लिए काफी हो सकता है।

टाटा संस की AGM पहली बार टली, कानूनी अड़चन से अटकी बैठक; चेयरमैन समेत कई अहम फैसले प्रभावित

मुंबई स्थित टाटा समूह के मुख्यालय बॉम्बे हाउस में 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) स्थगित हो गई। टाटा संस के इतिहास में यह पहली बार है जब कंपनी की AGM टली है। चेयरमैन एन चंद्रशेखरन बैठक में शामिल होने के लिए सुबह ही पहुंच गए थे, लेकिन कानूनी और तकनीकी अड़चनों के चलते बैठक में कोई फैसला नहीं हो सका। पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि AGM के लिए जरूरी कोरम पूरा नहीं हो पाया। इस पूरे घटनाक्रम का असर कंपनी के कई महत्वपूर्ण फैसलों और टाटा समूह में नेतृत्व की आगे की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। सवाल 1: AGM क्यों टली? टाटा संस के नियमों के मुताबिक AGM के लिए कम से कम 5 सदस्यों की व्यक्तिगत मौजूदगी जरूरी है। साथ ही सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) की ओर से संयुक्त रूप से नामित प्रतिनिधि की मौजूदगी भी जरूरी है। बोर्ड मीटिंग नहीं हो पाने के कारण दोनों ट्रस्ट संयुक्त प्रतिनिधि का नाम तय नहीं कर सके। यह नियम तब तक लागू है, जब तक दोनों ट्रस्टों के पास टाटा संस की कम से कम 40% हिस्सेदारी है। फिलहाल SRTT और SDTT के पास करीब 51% और पूरे टाटा ट्रस्ट्स नेटवर्क के पास करीब 66% हिस्सेदारी बताई गई है। सवाल 2: SRTT की बैठक क्यों नहीं हो पा रही? महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने मई में SRTT के बोर्ड गठन से जुड़ी जांच को लेकर निर्देश जारी किए थे। इसके बाद से ट्रस्ट की बैठक नहीं हो सकी है। इसी वजह से AGM के लिए संयुक्त प्रतिनिधि के नाम पर भी फैसला नहीं हो पाया। सवाल 3: विवाद किस कानून से जुड़ा है? मामला महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट की धारा 30A (2) से जुड़ा है। यह प्रावधान 2025 के संशोधन के जरिए लागू किया गया था। इसके तहत किसी पब्लिक ट्रस्ट के बोर्ड में लाइफटाइम या परमानेंट ट्रस्टियों की संख्या कुल ट्रस्टियों के 25% तक सीमित की गई है। SRTT का तर्क है कि यह प्रावधान नया है और इसे पहले से की गई नियुक्तियों पर लागू नहीं किया जा सकता। सवाल 4: AGM टलने से कौन से फैसले अटके? AGM स्थगित होने से कंपनी के तीन अहम एजेंडे फिलहाल अटक गए हैं: सवाल 5: एन चंद्रशेखरन और नए चेयरमैन की स्थिति क्या है? एन चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को स्पष्ट किया था कि वह टाटा संस के चेयरमैन पद से हट रहे हैं और अगले कार्यकाल के लिए पद पर नहीं रहेंगे। हालांकि, वह टाटा संस के डायरेक्टर भी हैं। AGM स्थगित होने के बाद वह अगली बैठक होने तक डायरेक्टर पद पर बने रहेंगे। दूसरी ओर, नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। SDTT ने 13 अगस्त को नए चेयरमैन के चयन के लिए कमेटी बनाने का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन SRTT की बैठक नहीं होने से प्रक्रिया आगे बढ़ने में अड़चन आ सकती है। सवाल 6: क्या AGM स्थगित करने को लेकर नियम स्पष्ट हैं? टाटा संस के आर्टिकल 87 में कोरम पूरा नहीं होने की स्थिति में बैठक स्थगित करने का प्रावधान है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक यदि SRTT और SDTT का संयुक्त प्रतिनिधि आगे भी नियुक्त नहीं हो पाता है, तो स्थगित AGM को किस तरह आगे बढ़ाया जाएगा, इस स्थिति को लेकर नियमों में स्पष्टता नहीं है। सवाल 7: टाटा ट्रस्ट्स में पिछले एक साल से किन मुद्दों पर मतभेद? पिछले एक साल में टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टियों के बीच बोर्ड में प्रतिनिधित्व, नए ट्रस्टियों की नियुक्ति, टाटा संस की संभावित लिस्टिंग और एयर इंडिया, टाटा डिजिटल व टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कारोबारों में पूंजी आवंटन को लेकर मतभेद सामने आए हैं। इन मतभेदों के बीच कुछ बड़े इस्तीफे भी हुए हैं। टाटा समूह के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम? टाटा संस की AGM का पहली बार स्थगित होना सिर्फ एक कॉरपोरेट बैठक का टलना नहीं है। इसका सीधा असर कंपनी के वित्तीय फैसलों, बोर्ड में नियुक्तियों और नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। अब अगली बैठक कब और किस तरह होती है, इस पर टाटा संस के साथ-साथ पूरे टाटा ट्रस्ट्स की आगे की रणनीति भी निर्भर करेगी।

खेलों पर अगले 5 साल में ₹36,441 करोड़ खर्च करेगी सरकार, 2036 ओलिंपिक में टॉप-10 का लक्ष्य

भारत सरकार खेलों को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति मजबूत करने के लिए अगले पांच वर्षों में ₹36,441 करोड़ खर्च करेगी। भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के अनुसार, यह राशि 2026 से 2031 के बीच रिवैंप्ड खेलो इंडिया योजना के तहत खर्च की जाएगी। सरकार ने बजट के साथ भविष्य के ओलिंपिक के लिए मेडल लक्ष्य भी तय किए हैं। भारत का लक्ष्य 2036 ओलिंपिक की मेडल टैली में टॉप-10 और 2048 ओलिंपिक में टॉप-5 देशों में जगह बनाना है। भारत 2036 ओलिंपिक की मेजबानी की दावेदारी भी पेश करना चाहता है। वहीं, 2048 ओलिंपिक तक देश की आजादी के 100 वर्ष पूरे हो चुके होंगे। ऐसे में सरकार लंबे समय की रणनीति के तहत भारतीय खिलाड़ियों को मजबूत करने पर जोर दे रही है। खिलाड़ियों की संख्या 10 गुना बढ़ाने की तैयारी SAI रीजनल सेंटर मुंबई के क्षेत्रीय निदेशक पांडुरंग चाटे के मुताबिक, रिवैंप्ड खेलो इंडिया योजना का उद्देश्य अलग-अलग योजनाओं के बजाय खिलाड़ियों के लिए पूरी खेल यात्रा तैयार करना है। योजना के बजट को करीब 8 गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही 2026 से 2031 के बीच योजना से लाभ पाने वाले खिलाड़ियों की संख्या को भी 10 गुना तक बढ़ाने की योजना है। 30 हजार खिलाड़ियों को मिलेगा फायदा रिवैंप्ड खेलो इंडिया योजना के तहत करीब 30 हजार खिलाड़ियों को सहायता देने की योजना है। योजना में केंद्र और राज्य के बीच खर्च का अनुपात 60:40 रखा गया है। SAI रीजनल सेंटर मुंबई ने कहा कि रिवैंप्ड खेलो इंडिया योजना महाराष्ट्र के मौजूदा स्पोर्ट्स इकोसिस्टम को और मजबूत करने का अवसर देगी। गौरतलब है कि पेरिस ओलिंपिक 2024 में भारत ने कुल 6 पदक जीते थे और मेडल टैली में 71वें स्थान पर रहा था। अब सरकार का फोकस खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और लंबी अवधि की सहायता उपलब्ध कराकर ओलिंपिक में भारत के प्रदर्शन को नई ऊंचाई देने पर है।

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