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4 साल बाद टेस्ट शतक के करीब पहुंचे बाबर आजम, वेस्टइंडीज के खिलाफ 88 रन बनाकर नाबाद

स्पोर्ट्स डेस्क। पाकिस्तान के टेस्ट कप्तान बाबर आजम चार साल बाद टेस्ट क्रिकेट में शतक के बेहद करीब पहुंच गए हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले जा रहे दूसरे टेस्ट की दूसरी पारी में बाबर 88 रन बनाकर नाबाद हैं और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा चुके हैं। बाबर आजम ने अपना पिछला टेस्ट शतक वर्ष 2022 में न्यूजीलैंड के खिलाफ कराची टेस्ट में लगाया था। उस मुकाबले में उन्होंने 161 रन की शानदार पारी खेली थी। संयोग से उस समय भी वह पाकिस्तान की कप्तानी कर रहे थे। कप्तानी में वापसी के बाद शानदार प्रदर्शन खराब फॉर्म के चलते बाबर आजम ने वर्ष 2023 में टेस्ट कप्तानी छोड़ दी थी, जिसके बाद शान मसूद को नियमित कप्तान बनाया गया। हालांकि, 5 जुलाई 2026 को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने एक बार फिर बाबर को टेस्ट टीम की कमान सौंपी। कप्तानी में वापसी के बाद उनका यह प्रदर्शन टीम के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। अब्दुल्ला शफीक के शतक से पाकिस्तान मजबूत दूसरी पारी में अब्दुल्ला शफीक के शानदार नाबाद शतक और बाबर आजम की अर्धशतकीय पारी की बदौलत पाकिस्तान ने 2 विकेट पर 273 रन बना लिए हैं। दोनों बल्लेबाजों के बीच तीसरे विकेट के लिए शतकीय साझेदारी हो चुकी है। पहली पारी के आधार पर पाकिस्तान अब वेस्टइंडीज से केवल 71 रन पीछे है। दो साल बाद शतक लगाने में सफल रहे शफीक अब्दुल्ला शफीक ने अपने टेस्ट करियर का छठा शतक लगाया। यह उनका 2024 के बाद पहला टेस्ट शतक है। वह लंबे समय तक 99 रन पर रुके रहे, लेकिन बाद में जोमेल वॉरिकन की गेंद पर मिडविकेट की दिशा में चौका लगाकर तीन अंकों तक पहुंचे। अजान ओवैस ने दिलाई तेज शुरुआत पाकिस्तान की दूसरी पारी की शुरुआत युवा बल्लेबाज अजान ओवैस ने आक्रामक अंदाज में की। उन्होंने दूसरे ही ओवर में तेज गेंदबाज केमार रोच के खिलाफ लगातार तीन चौके जड़कर टीम को तेज शुरुआत दिलाई। हालांकि, इमाम-उल-हक तेज गेंदबाज शमार जोसेफ की गेंद पर स्लिप में कैच देकर आउट हो गए। ओवैस ने अर्धशतक जरूर पूरा किया, लेकिन बाद में जोमेल वॉरिकन की गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट हो गए। पहली पारी में 344 रन पर सिमटी थी वेस्टइंडीज इससे पहले वेस्टइंडीज की पहली पारी 344 रन पर समाप्त हुई थी। टीम की ओर से जस्टिन ग्रीव्स और रोस्टन चेज ने अर्धशतकीय पारियां खेलीं। पाकिस्तान के लिए अली उस्मान ने पहली ही गेंद पर जस्टिन ग्रीव्स का विकेट लिया। उबैद शाह ने रोस्टन चेज को बोल्ड किया, जबकि साजिद खान ने शमार जोसेफ का विकेट लेकर वेस्टइंडीज की पारी का अंत किया। क्रिकेट और खेल जगत की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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मंडी शुल्क बढ़ाने के फैसले का खंडवा में विरोध, व्यापारियों ने सरकार से बढ़ोतरी वापस लेने की मांग की

खंडवा। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कृषि उपज मंडियों में मंडी शुल्क 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत किए जाने के फैसले का विरोध तेज हो गया है। मंगलवार को खंडवा में व्यापार एवं उद्योग कांग्रेस के पदाधिकारियों और व्यापारियों ने पुरानी अनाज मंडी कार्यालय पहुंचकर मंडी सचिव को ज्ञापन सौंपा और शुल्क में की गई 0.5 प्रतिशत बढ़ोतरी वापस लेने की मांग की। व्यापारियों ने बढ़ती लागत पर जताई चिंता ज्ञापन में व्यापारियों ने कहा कि मंडी शुल्क बढ़ने से व्यापार की लागत में इजाफा होगा, जिसका सीधा असर किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि बढ़ा हुआ शुल्क मध्य प्रदेश की मंडियों को पड़ोसी राज्यों की मंडियों की तुलना में प्रतिस्पर्धा में कमजोर कर सकता है, जिससे कृषि व्यापार प्रभावित होने की आशंका है। पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग व्यापार एवं उद्योग कांग्रेस के खंडवा शहर अध्यक्ष संदीप सोनी ने कहा कि संगठन व्यापार और उद्योग से जुड़े मुद्दों को शासन-प्रशासन के सामने मजबूती से उठाएगा। उन्होंने बताया कि यह संगठन का पहला सामूहिक कार्यक्रम था, जिसमें बड़ी संख्या में व्यापारियों ने भाग लिया। उन्होंने सरकार से मंडी शुल्क में की गई वृद्धि को वापस लेकर पहले की व्यवस्था बहाल करने की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने दिया समर्थन कार्यक्रम में शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा रघुवंशी और नेता प्रतिपक्ष मुल्लू राठौर भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने व्यापारियों की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को ऐसे निर्णय लेने से बचना चाहिए, जिनका नकारात्मक प्रभाव व्यापार, कृषि और आम नागरिकों पर पड़े। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने “देश का कल्चर-एग्रीकल्चर” जैसे नारे लगाकर भी अपना विरोध दर्ज कराया। ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांग व्यापारियों ने सरकार से मांग की कि मंडी शुल्क में की गई 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी तत्काल वापस ली जाए और किसानों, व्यापारियों तथा उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए पहले वाली शुल्क व्यवस्था दोबारा लागू की जाए। मध्य प्रदेश और कारोबार से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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केंद्र का दावा: सात वर्षों में 36 देशों से 274 भगोड़े भारत लाए गए, ₹17,874 करोड़ की संपत्ति अटैच

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि पिछले सात वर्षों में 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। सरकार के अनुसार, यह आंकड़ा वर्ष 2004 से 2013 के दौरान हुए प्रत्यर्पण की तुलना में करीब 10 गुना अधिक है। सरकार ने यह भी बताया कि इस अवधि में भगोड़ों की 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति भी अटैच की गई है। कई तरह के गंभीर मामलों में थे वांछित सरकार के मुताबिक, 2019 से जुलाई 2026 के बीच भारत लाए गए 274 भगोड़ों में विभिन्न गंभीर अपराधों के आरोपी शामिल हैं। इनमें 9 आर्थिक अपराध, 17 आतंकवाद, 42 संगठित अपराध, 62 हत्या, लूट और अन्य हिंसक अपराध, 53 यौन अपराध और बच्चों के खिलाफ यौन अपराध, 16 मादक पदार्थों की तस्करी, 12 नकली मुद्रा तस्करी, 18 मानव तस्करी और 45 अन्य मामलों में वांछित आरोपी शामिल थे। इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस में भी बढ़ोतरी केंद्र सरकार ने बताया कि हाल के वर्षों में इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में 40, 2023 में 100, 2024 में 107, 2025 में 112 और 2026 में अब तक 182 रेड नोटिस जारी किए जा चुके हैं। पिछले तीन वर्षों में कुल 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ रेड नोटिस जारी किए गए। प्रत्यर्पण प्रक्रिया को बनाया गया अधिक प्रभावी गृह मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री के मार्गदर्शन में प्रत्यर्पण संबंधी अनुरोधों को अब अधिक पेशेवर तरीके से तैयार किया जा रहा है। संबंधित देशों की कानूनी आवश्यकताओं के अनुरूप दस्तावेज, साक्ष्य और आवश्यक लिखित आश्वासन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे प्रत्यर्पण प्रक्रिया को मजबूती मिली है। पुराने ढांचे पर भी सरकार का बयान सरकार ने दावा किया कि 2004-13 के दौरान भारत का प्रत्यर्पण तंत्र अपेक्षाकृत कमजोर था। उस समय केवल 37 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियां थीं और आर्थिक भगोड़ों से निपटने के लिए अलग कानून भी उपलब्ध नहीं था। सरकार के अनुसार, जटिल कागजी प्रक्रिया के कारण कई मामलों में विदेशी अदालतों ने भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध स्वीकार नहीं किए थे। केंद्र ने यह भी कहा कि वर्ष 2018 में Fugitive Economic Offenders Act लागू किया गया, जबकि 2019 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) में संशोधन कर कार्रवाई के दायरे को और मजबूत किया गया। देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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राहुल गांधी बोले- छात्रों को माफी नहीं, सरकार के कामों का जवाब चाहिए; RSS पर भी साधा निशाना

नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को छात्रों के मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश के छात्र कठिन दौर से गुजर रहे हैं और उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माफी नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों और कामकाज पर जवाब चाहिए। राहुल गांधी ने यह बातें पूर्व कांग्रेस सांसद वाइको की पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम के दौरान कहीं। “छात्र रोजगार और निष्पक्ष परीक्षा चाहते हैं” राहुल गांधी ने कहा कि देशभर के छात्र रोजगार, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और बेहतर शिक्षा प्रणाली की मांग को लेकर सड़कों पर हैं। उनके अनुसार, युवाओं की प्रमुख चिंता रोजगार के अवसर और निष्पक्ष प्रतियोगी परीक्षाएं हैं। उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि प्रधानमंत्री छात्रों को माफ करने जैसी बात क्यों कर रहे हैं, जबकि छात्र अपनी समस्याओं के समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं। RSS पर इतिहास बदलने का आरोप कांग्रेस नेता ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि संगठन देश के इतिहास को बदलने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के लोग अपने इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं करेंगे। राज्यों के सम्मान की भी उठाई बात राहुल गांधी ने कहा कि संविधान भारत को राज्यों का एक संघ मानता है और प्रत्येक राज्य देश की विविधता तथा पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने दावा किया कि हर राज्य, उसकी भाषा और संस्कृति के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग भारत की विभिन्न भाषाओं और सांस्कृतिक परंपराओं के महत्व को कम करके आंकने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि देश की ताकत उसकी विविधता में निहित है। देश और राजनीति से जुड़ी हर बड़ी खबर के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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बेन स्टोक्स ने इंग्लैंड टीम के ‘ड्रिंकिंग कल्चर’ के आरोपों को किया खारिज, बोले- ऐसी कोई समस्या नहीं

लंदन। इंग्लैंड के पूर्व टेस्ट कप्तान बेन स्टोक्स ने इंग्लैंड क्रिकेट टीम में कथित ‘ड्रिंकिंग कल्चर’ की धारणा को खारिज करते हुए कहा है कि सीनियर टीम में शराब से जुड़ी किसी तरह की संस्कृति या समस्या नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह जरूर माना कि यूनाइटेड किंगडम में क्रिकेट और शराब का ऐतिहासिक संबंध रहा है। 35 वर्षीय स्टोक्स ने पूर्व क्रिकेटरों स्टुअर्ट ब्रॉड और जोस बटलर के पॉडकास्ट ‘For The Love of Cricket’ में यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इंग्लैंड की सीनियर टीम को शराब की समस्या से जोड़ना सही नहीं है। एशेज सीरीज के दौरान उठा था विवाद इंग्लैंड क्रिकेट में शराब को लेकर बहस उस समय तेज हुई थी, जब एशेज सीरीज के दौरान कुछ खिलाड़ियों के शराब पीने की खबरें सामने आई थीं। विवाद तब और बढ़ गया था, जब सलामी बल्लेबाज बेन डकेट टीम के मिड-सीरीज ब्रेक के दौरान ऑस्ट्रेलिया के नूसा में कथित तौर पर नशे की हालत में नजर आए थे। इसके अलावा, न्यूजीलैंड के खिलाफ लॉर्ड्स टेस्ट में जीत के बाद बेन स्टोक्स तेज गेंदबाज गस एटकिंसन के साथ बाहर गए थे। इस दौरान एक नाइटक्लब में हुई घटना के बाद उन्हें अगले टेस्ट मैच से बाहर बैठना पड़ा था। कोचिंग में बनाना चाहते हैं करियर बेन स्टोक्स ने बताया कि वह इस समय लेवल-3 कोचिंग क्वालिफिकेशन पूरा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सक्रिय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी वह खेल से जुड़े रहना चाहते हैं और भविष्य में कोचिंग की भूमिका निभाने की इच्छा रखते हैं। स्टोक्स ने कहा कि उनका लक्ष्य है कि क्रिकेट छोड़ने से पहले कोचिंग की सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर लें, ताकि वह भविष्य में टीमों के साथ प्रभावी भूमिका निभा सकें। जो रूट की कप्तानी को लेकर जताई चिंता स्टोक्स ने इंग्लैंड के नए टेस्ट कप्तान जो रूट को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि रूट हमेशा टीम को खुद से पहले रखते हैं और यही बात उन्हें परेशान करती है। उन्होंने बताया कि कप्तान के रूप में रूट पहले भी खुद पर काफी दबाव लेते थे और वह नहीं चाहते कि दोबारा उन्हें उसी मानसिक दबाव का सामना करना पड़े। बेन स्टोक्स ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में इंग्लैंड के लिए 122 टेस्ट, 114 वनडे और 43 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। उनकी कप्तानी में इंग्लैंड ने आक्रामक ‘बैजबॉल’ शैली से टेस्ट क्रिकेट में नई पहचान बनाई। खेल जगत की ताजा और विश्वसनीय खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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जालोर में तेज रफ्तार डंपर की चपेट में आया ढाई साल का मासूम, मौके पर मौत; चालक हिरासत में

जालोर। राजस्थान के जालोर जिले में मंगलवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में ढाई साल के मासूम की जान चली गई। बागोड़ा थाना क्षेत्र के छाजाला गांव में घर के बाहर खेल रहे बच्चे को तेज रफ्तार डंपर ने कुचल दिया। हादसे के बाद चालक मौके से भागने का प्रयास करने लगा, लेकिन ग्रामीणों ने उसका पीछा कर पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। घर के बाहर खेल रहा था मासूम जानकारी के अनुसार, यह हादसा मंगलवार सुबह करीब 9:30 बजे हुआ। मासूम मोहम्मद, पिता बिलाल खान, अपने घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान तेज गति से आए डंपर ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। हादसा इतना गंभीर था कि बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई। ग्रामीणों ने पीछा कर चालक को पकड़ा प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों ने डंपर चालक को रुकने का इशारा किया, लेकिन वह वाहन लेकर भागने लगा। इस पर ग्रामीणों ने उसका पीछा किया और कुछ दूरी पर पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। इकलौता बेटा था मासूम छाजाला गांव के पूर्व सरपंच शरीफ खान ने बताया कि मृतक उनका भांजा था। उन्होंने बताया कि मासूम परिवार का इकलौता बेटा था और उसकी तीन बड़ी बहनें हैं। बच्चे के पिता बिलाल खान मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। हादसे के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। पुलिस ने डंपर जब्त कर शुरू की जांच बागोड़ा थाना प्रभारी बलदेव राम ने बताया कि परिजनों की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है। डंपर को जब्त कर लिया गया है और चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। राजस्थान और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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4 साल बाद टेस्ट शतक के करीब पहुंचे बाबर आजम, वेस्टइंडीज के खिलाफ 88 रन बनाकर नाबाद

स्पोर्ट्स डेस्क। पाकिस्तान के टेस्ट कप्तान बाबर आजम चार साल बाद टेस्ट क्रिकेट में शतक के बेहद करीब पहुंच गए हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले जा रहे दूसरे टेस्ट की दूसरी पारी में बाबर 88 रन बनाकर नाबाद हैं और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा चुके हैं। बाबर आजम ने अपना पिछला टेस्ट शतक वर्ष 2022 में न्यूजीलैंड के खिलाफ कराची टेस्ट में लगाया था। उस मुकाबले में उन्होंने 161 रन की शानदार पारी खेली थी। संयोग से उस समय भी वह पाकिस्तान की कप्तानी कर रहे थे। कप्तानी में वापसी के बाद शानदार प्रदर्शन खराब फॉर्म के चलते बाबर आजम ने वर्ष 2023 में टेस्ट कप्तानी छोड़ दी थी, जिसके बाद शान मसूद को नियमित कप्तान बनाया गया। हालांकि, 5 जुलाई 2026 को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने एक बार फिर बाबर को टेस्ट टीम की कमान सौंपी। कप्तानी में वापसी के बाद उनका यह प्रदर्शन टीम के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। अब्दुल्ला शफीक के शतक से पाकिस्तान मजबूत दूसरी पारी में अब्दुल्ला शफीक के शानदार नाबाद शतक और बाबर आजम की अर्धशतकीय पारी की बदौलत पाकिस्तान ने 2 विकेट पर 273 रन बना लिए हैं। दोनों बल्लेबाजों के बीच तीसरे विकेट के लिए शतकीय साझेदारी हो चुकी है। पहली पारी के आधार पर पाकिस्तान अब वेस्टइंडीज से केवल 71 रन पीछे है। दो साल बाद शतक लगाने में सफल रहे शफीक अब्दुल्ला शफीक ने अपने टेस्ट करियर का छठा शतक लगाया। यह उनका 2024 के बाद पहला टेस्ट शतक है। वह लंबे समय तक 99 रन पर रुके रहे, लेकिन बाद में जोमेल वॉरिकन की गेंद पर मिडविकेट की दिशा में चौका लगाकर तीन अंकों तक पहुंचे। अजान ओवैस ने दिलाई तेज शुरुआत पाकिस्तान की दूसरी पारी की शुरुआत युवा बल्लेबाज अजान ओवैस ने आक्रामक अंदाज में की। उन्होंने दूसरे ही ओवर में तेज गेंदबाज केमार रोच के खिलाफ लगातार तीन चौके जड़कर टीम को तेज शुरुआत दिलाई। हालांकि, इमाम-उल-हक तेज गेंदबाज शमार जोसेफ की गेंद पर स्लिप में कैच देकर आउट हो गए। ओवैस ने अर्धशतक जरूर पूरा किया, लेकिन बाद में जोमेल वॉरिकन की गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट हो गए। पहली पारी में 344 रन पर सिमटी थी वेस्टइंडीज इससे पहले वेस्टइंडीज की पहली पारी 344 रन पर समाप्त हुई थी। टीम की ओर से जस्टिन ग्रीव्स और रोस्टन चेज ने अर्धशतकीय पारियां खेलीं। पाकिस्तान के लिए अली उस्मान ने पहली ही गेंद पर जस्टिन ग्रीव्स का विकेट लिया। उबैद शाह ने रोस्टन चेज को बोल्ड किया, जबकि साजिद खान ने शमार जोसेफ का विकेट लेकर वेस्टइंडीज की पारी का अंत किया। क्रिकेट और खेल जगत की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com

बेन स्टोक्स ने इंग्लैंड टीम के ‘ड्रिंकिंग कल्चर’ के आरोपों को किया खारिज, बोले- ऐसी कोई समस्या नहीं

लंदन। इंग्लैंड के पूर्व टेस्ट कप्तान बेन स्टोक्स ने इंग्लैंड क्रिकेट टीम में कथित ‘ड्रिंकिंग कल्चर’ की धारणा को खारिज करते हुए कहा है कि सीनियर टीम में शराब से जुड़ी किसी तरह की संस्कृति या समस्या नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह जरूर माना कि यूनाइटेड किंगडम में क्रिकेट और शराब का ऐतिहासिक संबंध रहा है। 35 वर्षीय स्टोक्स ने पूर्व क्रिकेटरों स्टुअर्ट ब्रॉड और जोस बटलर के पॉडकास्ट ‘For The Love of Cricket’ में यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इंग्लैंड की सीनियर टीम को शराब की समस्या से जोड़ना सही नहीं है। एशेज सीरीज के दौरान उठा था विवाद इंग्लैंड क्रिकेट में शराब को लेकर बहस उस समय तेज हुई थी, जब एशेज सीरीज के दौरान कुछ खिलाड़ियों के शराब पीने की खबरें सामने आई थीं। विवाद तब और बढ़ गया था, जब सलामी बल्लेबाज बेन डकेट टीम के मिड-सीरीज ब्रेक के दौरान ऑस्ट्रेलिया के नूसा में कथित तौर पर नशे की हालत में नजर आए थे। इसके अलावा, न्यूजीलैंड के खिलाफ लॉर्ड्स टेस्ट में जीत के बाद बेन स्टोक्स तेज गेंदबाज गस एटकिंसन के साथ बाहर गए थे। इस दौरान एक नाइटक्लब में हुई घटना के बाद उन्हें अगले टेस्ट मैच से बाहर बैठना पड़ा था। कोचिंग में बनाना चाहते हैं करियर बेन स्टोक्स ने बताया कि वह इस समय लेवल-3 कोचिंग क्वालिफिकेशन पूरा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सक्रिय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी वह खेल से जुड़े रहना चाहते हैं और भविष्य में कोचिंग की भूमिका निभाने की इच्छा रखते हैं। स्टोक्स ने कहा कि उनका लक्ष्य है कि क्रिकेट छोड़ने से पहले कोचिंग की सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर लें, ताकि वह भविष्य में टीमों के साथ प्रभावी भूमिका निभा सकें। जो रूट की कप्तानी को लेकर जताई चिंता स्टोक्स ने इंग्लैंड के नए टेस्ट कप्तान जो रूट को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि रूट हमेशा टीम को खुद से पहले रखते हैं और यही बात उन्हें परेशान करती है। उन्होंने बताया कि कप्तान के रूप में रूट पहले भी खुद पर काफी दबाव लेते थे और वह नहीं चाहते कि दोबारा उन्हें उसी मानसिक दबाव का सामना करना पड़े। बेन स्टोक्स ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में इंग्लैंड के लिए 122 टेस्ट, 114 वनडे और 43 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। उनकी कप्तानी में इंग्लैंड ने आक्रामक ‘बैजबॉल’ शैली से टेस्ट क्रिकेट में नई पहचान बनाई। खेल जगत की ताजा और विश्वसनीय खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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WhatsApp Account Ban: अचानक हजारों Accounts हुए बंद, ‘Under Review’ Message से Users परेशान

WhatsApp यूजर्स के लिए अचानक एक ऐसी परेशानी सामने आई, जिसने कई लोगों को चिंता में डाल दिया। बिना किसी स्पष्ट Warning के बड़ी संख्या में WhatsApp Accounts को अचानक बंद कर दिया गया। अकाउंट खोलने पर यूजर्स को ‘Under Review’ का मैसेज दिखाई दिया। इसके बाद WhatsApp के कई जरूरी फीचर्स का इस्तेमाल भी प्रभावित हुआ। अचानक आई इस कार्रवाई से उन लोगों की परेशानी बढ़ गई, जो WhatsApp का इस्तेमाल रोजाना बातचीत के साथ-साथ काम और जरूरी संपर्कों के लिए भी करते हैं। कई यूजर्स का कहना है कि उन्हें अकाउंट पर किसी कार्रवाई से पहले कोई साफ चेतावनी नहीं मिली थी। WhatsApp Accounts क्यों हुए Under Review? WhatsApp अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग तरह के सिस्टम का इस्तेमाल करता है। इन सिस्टम के जरिए Spam, फर्जी गतिविधियों और WhatsApp की नीतियों के संभावित उल्लंघन पर नजर रखी जाती है। अगर किसी अकाउंट की गतिविधि सिस्टम को संदिग्ध लगती है, तो उसे जांच के लिए Under Review किया जा सकता है। हालांकि, इस तरह की कार्रवाई में कभी-कभी ऐसे अकाउंट भी प्रभावित हो सकते हैं, जिनके यूजर्स का दावा है कि उन्होंने कोई नियम नहीं तोड़ा। यही वजह है कि अचानक हुए Account Ban को लेकर यूजर्स के बीच नाराजगी और confusion देखने को मिला। बिना Warning बंद हुए कई Features अकाउंट पर Review लगने के बाद यूजर्स को WhatsApp की सामान्य सेवाओं का इस्तेमाल करने में परेशानी हुई। कई मामलों में मैसेजिंग और दूसरे फीचर्स प्रभावित होने की शिकायत सामने आई। यूजर्स के लिए सबसे ज्यादा परेशानी की बात यह रही कि उन्हें यह समझ नहीं आया कि आखिर उनका अकाउंट किस वजह से Review में गया है। WhatsApp का सिस्टम अगर किसी गतिविधि को संदिग्ध मानता है तो जांच पूरी होने तक अकाउंट पर कुछ restrictions लग सकती हैं। WhatsApp ने माना- कभी-कभी हो सकती है गलती इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि WhatsApp की ओर से यह माना गया है कि automated systems से कभी-कभी गलत पहचान भी हो सकती है। यानी किसी यूजर का अकाउंट गलती से भी Review के दायरे में आ सकता है। ऐसी स्थिति में यूजर्स के लिए Review Request का विकल्प मददगार हो सकता है। कंपनी की ओर से जांच किए जाने के बाद अगर कार्रवाई गलत पाई जाती है, तो अकाउंट को दोबारा चालू किया जा सकता है। Account Ban होने पर क्या करें? अगर आपके WhatsApp Account पर भी ‘Under Review’ दिखाई दे रहा है, तो सबसे पहले घबराने के बजाय WhatsApp में दिए गए आधिकारिक Request a Review विकल्प का इस्तेमाल करें। इसके अलावा किसी अनजान व्यक्ति या वेबसाइट से Account Unban कराने का दावा करने वाली सर्विस न लें। WhatsApp Account से जुड़ी जानकारी, OTP या अन्य निजी विवरण किसी के साथ शेयर करना नुकसानदायक हो सकता है। यूजर्स को यह भी सलाह दी जाती है कि WhatsApp के अनऑफिशियल या Modified Versions का इस्तेमाल न करें। ऐसे ऐप्स अकाउंट की सुरक्षा और प्लेटफॉर्म की नीतियों से जुड़ी परेशानी पैदा कर सकते हैं। Users के लिए क्यों बड़ी चिंता है यह मामला? आज WhatsApp सिर्फ दोस्तों और परिवार से बातचीत का माध्यम नहीं रह गया है। छोटे-बड़े कारोबार, ऑफिस Communication, स्कूल-कॉलेज और रोजमर्रा के जरूरी कामों में भी इसका इस्तेमाल बड़े स्तर पर होता है। ऐसे में बिना किसी स्पष्ट Warning के Account का अचानक बंद होना यूजर के लिए काफी परेशान करने वाला अनुभव हो सकता है। खासकर तब, जब स्क्रीन पर सिर्फ ‘Under Review’ लिखा दिखाई दे और कार्रवाई की वजह साफ न हो। फिलहाल प्रभावित यूजर्स के लिए सबसे सही रास्ता आधिकारिक Review Process का इस्तेमाल करना है। अगर कार्रवाई सिस्टम की गलती के कारण हुई है, तो जांच के बाद अकाउंट दोबारा Restore होने की संभावना रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UPI

6 साल बाद UPI पर फिर MDR की तैयारी! बड़े कारोबारियों से वसूली जा सकती है Payment Fee

अगर आप रोजाना UPI से Payment करते हैं तो यह खबर आपके लिए काफी अहम है। देश में डिजिटल पेमेंट का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके UPI को लेकर सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसके बाद आने वाले समय में कुछ ट्रांजैक्शन पर MDR यानी Merchant Discount Rate लागू होने का रास्ता खुल सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि अभी UPI पर कोई नई फीस लागू नहीं हुई है। वित्त मंत्रालय ने Payment and Settlement Systems Act, 2007 में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो सरकार के पास कुछ डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने की व्यवस्था करने का विकल्प होगा। 2020 में खत्म कर दिया गया था MDR UPI को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने साल 2020 में UPI के जरिए होने वाले Merchant Payments पर MDR को खत्म कर दिया था। इसका सीधा फायदा दुकानदारों और कारोबारियों को मिला और डिजिटल पेमेंट को तेजी से अपनाने में मदद मिली। धीरे-धीरे UPI छोटे किराना स्टोर से लेकर बड़े Shopping Platforms तक पहुंच गया। आज चाय की दुकान से लेकर बड़े मॉल तक QR Code से Payment करना आम बात हो चुकी है। लेकिन इस पूरी व्यवस्था के पीछे बैंक और Payment Companies लगातार टेक्नोलॉजी, सर्वर, नेटवर्क और साइबर सिक्योरिटी पर खर्च कर रहे हैं। इसी वजह से लंबे समय से UPI के लिए एक स्थायी Revenue Model की जरूरत पर चर्चा होती रही है। Payment Act में बदलाव क्यों जरूरी माना जा रहा है? वित्त मंत्रालय ने कानून के मौजूदा प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद डिजिटल पेमेंट से जुड़े शुल्क के लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था को बदलना है। अगर संशोधन को मंजूरी मिल जाती है तो सरकार आगे यह तय कर सकती है कि किन पेमेंट सिस्टम, कारोबारियों या ट्रांजैक्शन पर MDR लगाया जाए। यानी अभी सरकार ने यह नहीं कहा है कि हर UPI Payment पर शुल्क लगेगा। फिलहाल मामला कानूनी बदलाव के प्रस्ताव तक सीमित है। क्या आम UPI Users को देना होगा पैसा? यही सवाल इस समय सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आम लोगों के सामान्य UPI Payments पर सीधे शुल्क लगाने की कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है। संभावना यह जताई जा रही है कि अगर MDR लागू किया जाता है तो इसका फोकस मुख्य रूप से बड़े कारोबारियों या कुछ खास तरह के Merchant Transactions पर हो सकता है। इसका मतलब है कि किसी दोस्त को पैसे भेजना, परिवार के सदस्य को Payment करना या रोजमर्रा की छोटी खरीदारी के लिए UPI इस्तेमाल करना फिलहाल शुल्क के दायरे में आने की पुष्टि नहीं हुई है। बड़े कारोबारियों पर क्यों हो सकता है असर? UPI का इस्तेमाल अब बड़े E-commerce Platforms, Food Delivery Apps, Travel Companies और दूसरे बड़े कारोबारों में भी बड़े पैमाने पर होता है। इन कंपनियों के जरिए रोजाना बड़ी संख्या में डिजिटल भुगतान किए जाते हैं। ऐसे में अगर सरकार बड़े कारोबारियों के कुछ UPI Transactions पर MDR लागू करती है तो सबसे पहले इसका असर इसी वर्ग पर पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम नियम आने के बाद ही पता चलेगा कि किस Merchant को कितना MDR देना होगा और इसकी दर क्या होगी। छोटे दुकानदारों के लिए क्या बदलेगा? छोटे व्यापारियों के लिए UPI लंबे समय से एक आसान और कम लागत वाला Payment Option रहा है। इसलिए सरकार के सामने यह चुनौती भी होगी कि MDR की व्यवस्था बनाते समय छोटे दुकानदारों और छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। अगर भविष्य में शुल्क सिर्फ बड़े कारोबारियों और निर्धारित श्रेणी के Transactions तक सीमित रखा जाता है तो छोटे दुकानदारों पर इसका असर अपेक्षाकृत कम रह सकता है। UPI Users के लिए अभी क्या समझना जरूरी है? इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर ऐसी चर्चाएं भी हो सकती हैं कि अब हर UPI Payment पर Fee लगेगी। लेकिन फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। अभी UPI Payment पर नई अनिवार्य फीस लागू नहीं हुई है। सरकार ने सिर्फ कानून में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। आगे संसद की प्रक्रिया, सरकार के नियम और संबंधित Notification के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी। UPI के Future के लिए बड़ा फैसला UPI ने भारत में Payment करने का तरीका ही बदल दिया है। छोटी रकम से लेकर लाखों रुपये के Business Transactions तक इसका इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में MDR की संभावित वापसी सिर्फ फीस से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि भारत के पूरे Digital Payment Ecosystem के भविष्य से जुड़ा फैसला है। सरकार के सामने दो बड़ी जरूरतें हैं—एक तरफ आम लोगों के लिए UPI को आसान और किफायती बनाए रखना और दूसरी तरफ इस पूरे सिस्टम को चलाने वाले बैंकों और Payment Companies के लिए टिकाऊ Revenue Model तैयार करना। फिलहाल नजर सरकार के अगले कदम पर है। अगर प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो आने वाले दिनों में यह साफ हो सकता है कि UPI पर MDR किन लोगों और किन Transactions पर लागू होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
FSSAI

FSSAI ने डाबर इंडिया को भेजा नोटिस, 100% दावे के साथ शहद, घी, तेल आदि की बिक्री पर लगाई रोक

खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापन में किए जाने वाले दावों को लेकर FSSAI ने बड़ी कार्रवाई की है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने Dabur India को नोटिस जारी करते हुए उसके कुछ खाद्य उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। मामला खास तौर पर उत्पादों की पैकेजिंग और ऑनलाइन लिस्टिंग में इस्तेमाल किए जा रहे ‘100%’ दावों से जुड़ा है। FSSAI की कार्रवाई के बाद शहद, घी, तेल, नारियल पानी और एप्पल साइडर विनेगर जैसे उत्पादों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इस कार्रवाई का मतलब यह नहीं है कि डाबर के सभी संबंधित उत्पादों को मिलावटी या स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया गया है। नियामक की मुख्य आपत्ति लेबलिंग और विज्ञापन में किए गए दावों को लेकर है। किन उत्पादों पर FSSAI की नजर? रिपोर्ट्स के मुताबिक, FSSAI ने डाबर के कई खाद्य उत्पादों पर इस्तेमाल किए जा रहे ‘100%’ जैसे दावों पर आपत्ति जताई है। इनमें Honey, Apple Cider Vinegar, Virgin Coconut Oil, Sesame Oil, Cow Ghee, Coconut Water और Coconut Milk जैसे उत्पाद शामिल हैं। नियामक ने कंपनी की वेबसाइट और उत्पादों की ऑनलाइन लिस्टिंग में इस्तेमाल की गई भाषा की भी जांच की। कुछ उत्पादों के साथ ‘100% Natural’, ‘100% Pure’, ‘100% Purity Guaranteed’ और ‘100% Organic’ जैसे दावे पाए गए। FSSAI का मानना है कि इस तरह के दावे उपभोक्ताओं के मन में उत्पाद की पूरी तरह शुद्ध, प्राकृतिक या जैविक होने की धारणा बना सकते हैं। इसलिए खाद्य उत्पादों के प्रचार और लेबलिंग में ऐसी भाषा के इस्तेमाल को लेकर नियमों का पालन जरूरी है। Organic Products के दावों पर भी सवाल इस मामले में केवल ‘100%’ दावे ही नहीं, बल्कि कुछ ऑर्गेनिक उत्पादों की लेबलिंग भी जांच के दायरे में आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, Dabur Organic Honey और Dabur Himalayan Organic Apple Cider Vinegar पर इस्तेमाल किए गए ‘Jaivik Bharat’ लोगो को लेकर भी नियामक ने सवाल उठाए हैं। FSSAI ने संबंधित ऑर्गेनिक दावों और उनके लिए जरूरी प्रमाणन की स्थिति को लेकर कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को पैकेजिंग पर वही जानकारी दी जाए, जिसे नियमों के तहत प्रमाणित किया जा सकता है। पहले भी दी गई थी चेतावनी FSSAI की मौजूदा कार्रवाई अचानक नहीं हुई है। इससे पहले भी खाद्य कंपनियों को ‘100%’ जैसे दावों के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए थे। मई 2025 में FSSAI ने खाद्य कारोबारियों को ऐसे दावों से बचने की सलाह दी थी, क्योंकि ‘100%’ जैसी भाषा किसी खाद्य उत्पाद की पूर्ण गुणवत्ता या श्रेष्ठता की गारंटी के तौर पर समझी जा सकती है। डाबर के मामले में भी नियामक की ओर से पहले सुधारात्मक कदम उठाने के लिए कहा गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी की ओर से की गई कार्रवाई को संतोषजनक नहीं माने जाने के बाद बिक्री रोकने का निर्देश दिया गया। 15 दिन में Action Taken Report मांगी FSSAI ने डाबर से इस मामले में 15 दिनों के भीतर Action Taken Report (ATR) जमा करने को कहा है। यानी कंपनी को यह जानकारी देनी होगी कि नियामक की आपत्तियों के बाद उसने क्या सुधारात्मक कदम उठाए हैं। यह कदम खाद्य कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी माना जा रहा है कि उत्पाद की पैकेजिंग, वेबसाइट और विज्ञापन में इस्तेमाल किए जाने वाले दावों को लेकर नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। क्या Dabur के उत्पाद मिलावटी हैं? इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि FSSAI की कार्रवाई को उत्पादों के मिलावटी या असुरक्षित होने की घोषणा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मौजूदा विवाद मुख्य रूप से ‘100%’ दावों, लेबलिंग और ऑर्गेनिक प्रमाणन से जुड़े पहलुओं पर है। इसलिए सोशल मीडिया या अन्य जगहों पर इस कार्रवाई को सीधे तौर पर ‘डाबर के उत्पाद मिलावटी पाए गए’ कहना भ्रामक हो सकता है। कंपनियों के लिए बढ़ी चुनौती FSSAI की यह कार्रवाई खाद्य उद्योग में लेबलिंग और मार्केटिंग के बढ़ते नियामकीय दबाव को भी दिखाती है। आज उपभोक्ता किसी उत्पाद को खरीदने से पहले पैकेजिंग पर लिखे शब्दों, ऑनलाइन डिस्क्रिप्शन और विज्ञापनों पर काफी भरोसा करते हैं। ऐसे में ‘Pure’, ‘Natural’, ‘Organic’ या ‘100%’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कंपनियों के लिए सिर्फ मार्केटिंग का हिस्सा नहीं, बल्कि नियमों के दायरे में आने वाला विषय भी है। डाबर मामले में अब नजर कंपनी की अगली कार्रवाई और FSSAI को दी जाने वाली रिपोर्ट पर रहेगी। अगर कंपनी को अपने उत्पादों की पैकेजिंग या ऑनलाइन दावों में बदलाव करना पड़ता है, तो इसका असर बाजार में मौजूद उत्पादों की लेबलिंग पर भी दिखाई दे सकता है। फिलहाल FSSAI का संदेश स्पष्ट है—खाद्य उत्पादों को बेचते समय कंपनियों को ऐसे दावों से बचना होगा, जो उपभोक्ताओं को उत्पाद की गुणवत्ता या शुद्धता के बारे में गलत या बढ़ा-चढ़ाकर धारणा दे सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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