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Sonia Gandhi

Manmohan Singh की Legacy पर Sonia Gandhi बोलीं- इतिहास ईमानदारी और काम को याद रखेगा

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को लेकर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी (Sonia Gandhi)ने एक बार फिर खुलकर अपनी बात रखी है। सोनिया गांधी ने कहा कि मनमोहन सिंह भले ही अपने शांत और सहज स्वभाव के लिए जाने जाते थे, लेकिन देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर उनका प्रभाव बेहद गहरा था। उनका मानना है कि आने वाले समय में इतिहास मनमोहन सिंह को एक ईमानदार और बेहद प्रभावशाली प्रधानमंत्री के तौर पर याद करेगा। सोनिया गांधी ने यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद की है, जिसमें कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ चल रही कार्यवाही को बंद करने का रास्ता साफ हुआ। 29 जुलाई 2026 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया और 2015 में विशेष अदालत की ओर से लिए गए संज्ञान से जुड़े आदेश को भी रद्द कर दिया। Coal case में मिली राहत को सोनिया ने बताया अहम पड़ाव सोनिया गांधी ने अपने लेख में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मनमोहन सिंह की सार्वजनिक छवि के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस मामले में लंबे समय तक पूर्व प्रधानमंत्री की ईमानदारी और उनकी भूमिका पर सवाल उठाए गए, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस पूरे प्रकरण को नए नजरिए से देखने की जरूरत है। सोनिया के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करने के साथ निचली अदालत की उन टिप्पणियों पर भी सवाल उठाए, जिनके लिए पर्याप्त ठोस आधार नहीं था। ‘शांत, सरल लेकिन बेहद प्रभावशाली PM’ सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह के व्यक्तित्व का जिक्र करते हुए उन्हें शांत और सौम्य नेता बताया। उनके अनुसार, सिंह ने प्रधानमंत्री के रूप में दस वर्षों तक देश का नेतृत्व किया और उनकी सरकार के दौरान आर्थिक विकास तथा कई सामाजिक योजनाओं पर काम हुआ। सोनिया ने यह भी कहा कि मनमोहन सिंह की सबसे बड़ी ताकत उनकी व्यक्तिगत ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन में उनकी विश्वसनीयता थी। उनके मुताबिक, समय बीतने के साथ उनके काम और योगदान का मूल्यांकन राजनीतिक आरोपों से अलग होकर किया जाएगा। BJP सरकार पर भी सोनिया गांधी का निशाना मनमोहन सिंह की विरासत की चर्चा करते हुए सोनिया गांधी ने मौजूदा नरेंद्र मोदी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने जांच एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं के खिलाफ CBI और ED जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जाता है। यह सोनिया गांधी का राजनीतिक आरोप है। BJP की ओर से इन आरोपों पर अलग-अलग मौकों पर विरोध जताया जाता रहा है। आर्थिक सुधारों में मनमोहन सिंह की बड़ी भूमिका मनमोहन सिंह का नाम भारत के आर्थिक इतिहास में खास तौर पर 1991 के आर्थिक सुधारों से जुड़ा रहा है। उस समय वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकार के साथ मिलकर आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाया। बाद में 2004 में वे देश के प्रधानमंत्री बने और लगातार दो कार्यकाल तक इस पद पर रहे। उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल में RTI, ग्रामीण रोजगार और कई सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं को लेकर बड़े फैसले हुए। फिर चर्चा में आई मनमोहन सिंह की Legacy मनमोहन सिंह के निधन के बाद भी उनकी राजनीतिक विरासत को लेकर देश में बहस जारी रही है। समर्थक उनकी आर्थिक समझ, सादगी और व्यक्तिगत ईमानदारी को उनकी सबसे बड़ी पहचान मानते हैं, जबकि आलोचक उनकी सरकार के दौरान सामने आए विवादों और राजनीतिक फैसलों पर सवाल उठाते रहे हैं। अब कोयला मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सोनिया गांधी की टिप्पणी ने एक बार फिर मनमोहन सिंह की Legacy को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सोनिया गांधी का कहना है कि समय के साथ मनमोहन सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोपों से ज्यादा उनके लंबे सार्वजनिक जीवन, काम और ईमानदारी को याद किया जाएगा। यही वजह है कि उनके बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि भारतीय राजनीति और इतिहास में मनमोहन सिंह की भूमिका को आने वाली पीढ़ियां किस नजरिए से देखेंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Colombia

Colombia Earthquake: 7.4 तीव्रता के भूकंप से भारी तबाही, 132 की मौत, 570 घायल

दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया (Colombia) सोमवार को आए शक्तिशाली भूकंप से बुरी तरह हिल गया। पश्चिमी हिस्से में आए 7.4 magnitude के भूकंप ने कई शहरों में तबाही मचा दी। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक हादसे में 132 लोगों की मौत हुई है, जबकि 570 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव का काम अभी भी जारी है, इसलिए मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। भूकंप का असर इतना व्यापक रहा कि कई इलाकों में घर, अस्पताल, स्कूल और दूसरी इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं। शुरुआती आकलन के अनुसार 86 इमारतें पूरी तरह ढह गईं, जबकि 1,500 से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचा है। कई जगह लोग मलबे में फंसे हुए हैं और बचाव दल लगातार उन्हें निकालने की कोशिश कर रहे हैं। पश्चिमी Colombia में सबसे ज्यादा तबाही भूकंप का केंद्र चोको क्षेत्र के सैन जोसे डेल पालमार के आसपास बताया गया है। इसके झटके कैली, पेरेइरा, क्विब्दो, मनीसालेस और आर्मेनिया जैसे शहरों में भी महसूस किए गए। रिपोर्टों के मुताबिक देश के 32 शहरों पर भूकंप का गंभीर असर पड़ा है। पांच विभागीय राजधानियों को रेड अलर्ट पर रखा गया है। भूकंप के झटके महसूस होते ही बड़ी संख्या में लोग घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। कई इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दूरदराज के इलाकों में सड़क और संचार व्यवस्था प्रभावित होने से राहत टीमों के लिए घटनास्थल तक पहुंचना भी चुनौती बन गया है। 1,500 से ज्यादा घरों को नुकसान भूकंप के बाद सामने आई तस्वीरों में कई इलाकों में इमारतों के मलबे में तब्दील होने की स्थिति दिखाई दी। 1,500 से ज्यादा घर प्रभावित हुए हैं, जबकि दर्जनों इमारतें पूरी तरह गिर गईं। कई स्कूल और अस्पताल भी नुकसान की चपेट में आए हैं। सबसे बड़ी चिंता उन लोगों को लेकर है जो अब भी मलबे के नीचे या क्षतिग्रस्त इमारतों के आसपास फंसे हो सकते हैं। राहतकर्मी और स्थानीय लोग मिलकर लगातार तलाश अभियान चला रहे हैं। Hospitals में बढ़ा दबाव, मरीज भी फंसे भूकंप ने स्वास्थ्य सेवाओं को भी प्रभावित किया है। कुछ अस्पतालों की इमारतों को नुकसान पहुंचा है और कई जगह बड़ी संख्या में घायल लोगों को इलाज के लिए लाया गया। कैली में अस्पताल से जुड़े हिस्सों में भी नुकसान की खबर सामने आई है। अचानक बढ़े मरीजों की संख्या के कारण मेडिकल टीमों पर भी दबाव बढ़ गया है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाएं और राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। सात Airports पर काम बंद भूकंप का असर सिर्फ जमीन पर नहीं, बल्कि air connectivity पर भी पड़ा है। नुकसान और सुरक्षा जांच के चलते सात एयरपोर्ट पर संचालन रोक दिया गया। इनमें कैली, पेरेइरा, मनीसालेस, क्विब्दो, आर्मेनिया, कार्टागो और बुएनावेंतुरा के एयरपोर्ट शामिल बताए गए हैं। एयरपोर्ट बंद होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। साथ ही राहत और बचाव टीमों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। Aftershocks ने बढ़ाई चिंता मुख्य भूकंप के बाद कई aftershocks भी महसूस किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार रात तक करीब 21 आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए थे। इससे पहले से कमजोर हो चुकी इमारतों को लेकर चिंता और बढ़ गई है। प्रशासन ने लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों में वापस नहीं जाने और स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। Colombia में National Emergency घोषित हालात की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रपति अबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला ने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है। सरकार का पूरा ध्यान फिलहाल राहत और बचाव अभियान पर है। प्रभावित इलाकों में जरूरी संसाधन पहुंचाए जा रहे हैं और मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश जारी है। भूकंप के बाद कुछ शहरों में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर भरोसा नहीं करने और आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करने की अपील की है। International help के लिए आगे आए देश इस बड़ी प्राकृतिक आपदा के बाद कोलंबिया के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद भी सामने आई है। अमेरिका ने राहत और मानवीय सहायता के लिए 15.5 मिलियन डॉलर की मदद देने की घोषणा की है। इसके अलावा दूसरे देशों ने भी सहायता की पेशकश की है। फिलहाल कोलंबिया में राहत-बचाव अभियान युद्धस्तर पर चल रहा है। जैसे-जैसे दूरदराज के इलाकों से जानकारी सामने आएगी, नुकसान और हताहतों का आंकड़ा बदल सकता है। प्रशासन की सबसे बड़ी कोशिश यही है कि मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जाए और प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाई जाए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Suvendu Adhikari

West Bengal में बड़ा अपडेट! Suvendu Adhikari के Helicopter की Emergency Landing

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) को लेकर जा रहे हेलिकॉप्टर की मंगलवार को कोलाघाट में अचानक Emergency Landing करानी पड़ी। हेलिकॉप्टर के रास्ते में मौसम खराब होने के बाद पायलट ने उड़ान जारी रखने के बजाय एहतियातन उसे सुरक्षित जगह पर उतारने का फैसला किया। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी दमदम से केशपुर के लिए हेलिकॉप्टर से रवाना हुए थे। उन्हें पश्चिम मेदिनीपुर के केशपुर में स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस को श्रद्धांजलि देने से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होना था। इसी दौरान मौसम ने अचानक करवट ली और उड़ान में परेशानी की स्थिति बनी। कोलाघाट में खुले मैदान में हुई Precautionary Landing खराब मौसम को देखते हुए पायलट ने जोखिम लेने के बजाय हेलिकॉप्टर को पूर्व मेदिनीपुर के कोलाघाट में एक खुले मैदान में उतार दिया। इसे एहतियाती लैंडिंग बताया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस घटना में मुख्यमंत्री या हेलिकॉप्टर में सवार किसी व्यक्ति के घायल होने की खबर नहीं है। हेलिकॉप्टर की लैंडिंग के बाद कुछ देर के लिए मुख्यमंत्री का कार्यक्रम प्रभावित हुआ, लेकिन यात्रा पूरी तरह नहीं रुकी। सुवेंदु अधिकारी ने इसके बाद सड़क मार्ग से केशपुर के लिए अपनी यात्रा जारी रखी और निर्धारित कार्यक्रम में पहुंचने की कोशिश की। मौसम बना परेशानी की मुख्य वजह इस घटना में सबसे अहम बात मौसम की स्थिति रही। रिपोर्टों के मुताबिक, इलाके में inclement weather यानी खराब मौसम के कारण पायलट ने हेलिकॉप्टर को आगे ले जाना सुरक्षित नहीं समझा। ऐसे हालात में उड़ान को रोककर सुरक्षित स्थान पर लैंडिंग करना एहतियाती कदम माना जाता है। घटना के बाद मुख्यमंत्री के हेलिकॉप्टर की Emergency Landing की खबर तेजी से सामने आई। हालांकि, शुरुआती जानकारी से साफ है कि यह किसी बड़े हादसे के बजाय खराब मौसम के कारण की गई precautionary landing थी। मुख्यमंत्री सुरक्षित रहे और उन्होंने सड़क मार्ग से अपनी आगे की यात्रा जारी रखी। क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर? मानसून के दौरान पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में मौसम तेजी से बदल रहा है। ऐसे में हेलिकॉप्टर उड़ानों के लिए मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी होता है। कोलाघाट में हुई यह लैंडिंग भी इसी तरह के एहतियाती फैसले का उदाहरण है, जहां पायलट ने परिस्थिति को देखते हुए उड़ान जारी रखने के बजाय सुरक्षित लैंडिंग को प्राथमिकता दी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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SIR

West Bengal SIR विवाद में Supreme Court का सख्त रुख, ECI से मांगा अपीलों का पूरा डेटा

पश्चिम बंगाल में SIR (Special Intensive Revision) को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव आयोग यानी ECI से SIR से जुड़ी अपीलों और उनके निपटारे की स्थिति पर जानकारी मांगी। कोर्ट का रुख इस बात का संकेत है कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों को लेकर अदालत पूरी प्रक्रिया पर बारीकी से नजर रख रही है। यह मामला कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की याचिका से जुड़ा है। याचिका में SIR प्रक्रिया के दौरान प्रभावित मतदाताओं की ओर से दाखिल की गई अपीलों के जल्द निपटारे की मांग की गई है। Supreme Court ने ECI से क्या जानकारी मांगी? सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि SIR के दौरान मतदाता सूची से जुड़े कितने मामलों में अपील दाखिल की गई, उनमें से कितने मामलों का फैसला हो चुका है और कितने अभी लंबित हैं। अदालत का फोकस इस बात पर है कि जिन लोगों ने मतदाता सूची में अपने नाम को लेकर आपत्ति या दावा पेश किया है, उनकी अपीलों पर कार्रवाई किस स्थिति में है। इससे यह भी पता चलेगा कि अपीलीय स्तर पर मामलों का निपटारा किस गति से हो रहा है। क्या है Bengal SIR विवाद? Special Intensive Revision यानी SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की गहन जांच और उसे अपडेट करना है। इस प्रक्रिया में मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन किया जाता है, ताकि पात्र लोगों के नाम सूची में बने रहें और गलत या अपात्र प्रविष्टियों को हटाया जा सके। हालांकि, पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर राजनीतिक विवाद भी काफी बढ़ गया है। विपक्षी दलों की ओर से लगातार सवाल उठाए गए हैं कि प्रक्रिया के दौरान वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित न हों। दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखना चुनावी प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा है। अपील करने वाले मतदाताओं के लिए मामला अहम SIR प्रक्रिया में जिन मतदाताओं के नाम या विवरण को लेकर आपत्ति सामने आती है, उनके लिए अपील की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिलता है। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट में अब यह सवाल अहम हो गया है कि दाखिल की गई अपीलों पर कितनी तेजी से फैसला हो रहा है। अदालत द्वारा ECI से डेटा मांगे जाने के बाद अब आयोग को मामलों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी होगी। अधीर रंजन चौधरी की याचिका क्यों महत्वपूर्ण? कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर SIR से जुड़े मामलों की अपीलों के निपटारे की मांग की है। उनका तर्क है कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों में समय पर फैसला होना जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा संबंध लोगों के मतदान के अधिकार से है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अपीलीय ट्रिब्यूनलों के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की है। हालांकि, अदालत ने मामलों के निपटारे से जुड़ा डेटा मांगकर यह साफ कर दिया है कि वह पूरी प्रक्रिया की स्थिति जानना चाहती है। अब ECI के जवाब पर नजर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब चुनाव आयोग के जवाब का इंतजार है। आयोग की ओर से पेश किए जाने वाले आंकड़ों से यह स्पष्ट हो सकता है कि SIR से जुड़ी कितनी अपीलें सामने आईं, कितनों पर फैसला हो चुका है और कितने मामले अभी बाकी हैं। Bengal SIR Latest Update: पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट की यह सुनवाई इसलिए अहम है, क्योंकि अब चर्चा केवल SIR की प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे जुड़े मामलों की सुनवाई और अपीलों के निपटारे पर भी अदालत की नजर है। आने वाली सुनवाई में ECI का जवाब इस मामले की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump

Trump Secret Flight: ईरान के डर से Air Force One बना Decoy, Catering Truck से बदला विमान

ट्रंप (Trump) की तुर्किये से ब्रिटेन वापसी को लेकर एक ऐसी जानकारी सामने आई है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से जुड़े संभावित खतरे को देखते हुए ट्रंप की वापसी के लिए बेहद गोपनीय प्लान तैयार किया गया था। बाहर से सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था, लेकिन पर्दे के पीछे राष्ट्रपति की यात्रा का पूरा तरीका बदल दिया गया। ट्रंप पहले Air Force One में सवार होते हुए नजर आए। वहां मौजूद लोगों और पत्रकारों को भी यही लगा कि राष्ट्रपति इसी विमान से आगे की यात्रा करेंगे। लेकिन कुछ समय बाद ट्रंप को एयरपोर्ट पर इस्तेमाल होने वाली एक Catering Truck के जरिए चुपचाप दूसरे विमान तक ले जाया गया। Air Force One बना ‘Decoy’ रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की वास्तविक यात्रा को छिपाने के लिए Air Force One को एक तरह के Decoy यानी भ्रम पैदा करने वाले विमान के रूप में इस्तेमाल किया गया। इसका मकसद यह था कि ट्रंप की असली लोकेशन और उनके विमान की जानकारी आसानी से सार्वजनिक न हो। बताया गया कि ट्रंप को बाद में एक छोटे अमेरिकी सैन्य विमान C-32A तक पहुंचाया गया। इसके बाद उन्होंने इसी विमान से ब्रिटेन के लिए उड़ान भरी। पत्रकारों को भी नहीं थी पूरी जानकारी इस पूरे ऑपरेशन की सबसे खास बात इसकी गोपनीयता थी। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति के साथ यात्रा कर रहे कुछ पत्रकारों को भी विमान बदलने की जानकारी पहले से नहीं थी। एयरपोर्ट पर भी सुरक्षा और मूवमेंट इस तरह रखा गया कि ट्रंप के वास्तविक विमान की पहचान करना आसान न हो। यही वजह है कि कुछ समय तक यह भ्रम बना रहा कि राष्ट्रपति Air Force One से ही ब्रिटेन जा रहे हैं। Iran Threat को लेकर बढ़ी चिंता ट्रंप की इस Secret Flight को ईरान से जुड़े संभावित खतरे से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर लगातार सतर्क रही हैं। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ट्रंप की तुर्किये से वापसी को लेकर सुरक्षा अधिकारियों ने अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी थी। इसी वजह से यात्रा के अंतिम चरण में अचानक बदलाव किया गया। हालांकि, इस पूरे ऑपरेशन के हर विवरण की आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक तौर पर नहीं हुई है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि ट्रंप पर तत्काल किसी हमले की पुष्टि हुई थी। उपलब्ध रिपोर्टों में इसे संभावित सुरक्षा खतरे से जोड़कर बताया गया है। C-32A से ब्रिटेन पहुंचे ट्रंप रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप C-32A विमान से ब्रिटेन पहुंचे। वहीं Air Force One को भी आगे भेजा गया। इस तरह राष्ट्रपति की वास्तविक यात्रा और Air Force One की गतिविधि को अलग रखा गया। सुरक्षा के लिहाज से यह तरीका काफी असामान्य माना जा रहा है। आमतौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा में सुरक्षा के कई स्तर होते हैं, लेकिन इस बार विमान बदलने की जानकारी को भी बेहद सीमित रखा गया। कतर के विमान को लेकर भी चर्चा ट्रंप की तुर्किये यात्रा के दौरान कतर से मिले Boeing 747 विमान को लेकर भी काफी चर्चा हुई थी। यह विमान भविष्य में अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए इस्तेमाल किए जाने की योजना का हिस्सा है। हालांकि, वापसी के दौरान पुराने Air Force One का इस्तेमाल किया गया। इसके पीछे सुरक्षा और विमान की तैयारी से जुड़ी चिंताओं को वजह बताया गया है। आखिर क्यों इतना बड़ा Secret Operation? राष्ट्रपति की यात्रा से जुड़ी जानकारी अगर पहले से सार्वजनिक हो जाए तो सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में विमान बदलने और वास्तविक यात्रा को कुछ समय के लिए छिपाने जैसी रणनीति का इस्तेमाल किया जा सकता है। ट्रंप के मामले में भी यही वजह सबसे अहम मानी जा रही है। Air Force One को सामने रखकर और राष्ट्रपति को दूसरे विमान से रवाना कर सुरक्षा एजेंसियों ने उनकी वास्तविक लोकेशन को ज्यादा समय तक गोपनीय रखने की कोशिश की। Trump की Secret Flight ने बढ़ाई चर्चा ट्रंप की तुर्किये से यह गुप्त उड़ान अब अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। खासकर ईरान के साथ तनाव के बीच इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था ने कई सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है और ऑपरेशन से जुड़े कई सुरक्षा विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। लेकिन इतना साफ है कि ट्रंप की वापसी सामान्य यात्रा जैसी नहीं थी। Air Force One में दिखाई देने से लेकर Catering Truck के जरिए दूसरे विमान तक पहुंचने तक पूरी कहानी में सुरक्षा और गोपनीयता सबसे अहम रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

Monsoon का कहर! MP समेत 6 राज्यों में लगातार बारिश, UP में 25 मकान पानी में डूबे

देश के कई राज्यों में मानसून (Monsoon) की बारिश अब लोगों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों में पिछले 24 घंटे से बारिश का दौर जारी है। लगातार बरसात के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ गया है, निचले इलाकों में पानी भर रहा है और कई जगहों पर सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने भी आने वाले दिनों में कुछ राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। MP में लगातार बारिश से बढ़ी परेशानी मध्य प्रदेश में बारिश का असर कई जिलों में दिखाई दे रहा है। भोपाल, विदिशा, रायसेन, मंडला और डिंडौरी समेत कई इलाकों में तेज बारिश के बाद नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है। कुछ जगहों पर सड़कें पानी में डूबने से लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। भोपाल में भी लगातार बारिश के चलते कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी। प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रख रही हैं। नदी और नालों के आसपास रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मंडला और डिंडौरी क्षेत्र में तेज बारिश का असर खास तौर पर देखने को मिला है। नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। UP में गंगा का जलस्तर बढ़ा, कई मकानों पर संकट उत्तर प्रदेश में भी लगातार बारिश के कारण हालात चिंताजनक बने हुए हैं। गंगा का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे बसे इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। कई निचले इलाकों में पानी पहुंचने के बाद लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण करीब 25 मकानों के पानी की चपेट में आने की बात सामने आई है। स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव की तैयारियां तेज की गई हैं। प्रशासन लोगों से नदी के आसपास जाने से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील कर रहा है। Rajasthan में 12 इंच तक बारिश, बांधों पर बढ़ा दबाव राजस्थान में मानसून इस समय काफी सक्रिय है। राज्य के कई जिलों में जोरदार बारिश दर्ज की गई है। कुछ इलाकों में करीब 12 इंच तक बारिश होने से सड़कों और निचले क्षेत्रों में पानी भर गया। हाड़ौती क्षेत्र में बारिश का असर ज्यादा दिखाई दे रहा है। झालावाड़, बारां, बूंदी और कोटा समेत आसपास के इलाकों में भारी बारिश के बाद बांधों और जलाशयों का जलस्तर बढ़ गया है। कई जगह पानी की निकासी के लिए बांधों के गेट खोलने पड़े हैं। भारी बारिश के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खेतों में पानी भरने से किसानों की चिंता बढ़ गई है, जबकि कई रास्तों पर पानी आने से आवागमन प्रभावित हुआ है। किन राज्यों में बारिश का अलर्ट? मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के अलावा देश के कई अन्य हिस्सों में भी बारिश की संभावना जताई है। उत्तर भारत से लेकर मध्य और पश्चिमी भारत तक मानसून सक्रिय रहने के आसार हैं। कई इलाकों में भारी बारिश के साथ तेज हवाएं और बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है। नदियों और बांधों पर प्रशासन की नजर लगातार बारिश के बीच प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता नदियों और बांधों का बढ़ता जलस्तर है। जलस्तर बढ़ने के साथ निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। स्थानीय प्रशासन और राहत दल संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं। लोगों से अपील की जा रही है कि वे उफनती नदियों, नालों और तेज बहाव वाले रास्तों को पार करने की कोशिश न करें। अगले कुछ दिन भी अहम मानसून की मौजूदा स्थिति को देखते हुए अगले कुछ दिन कई राज्यों के लिए अहम रहने वाले हैं। लगातार बारिश जहां किसानों के लिए राहत लेकर आई है, वहीं अत्यधिक बारिश ने कई इलाकों में बाढ़ और जलभराव का खतरा बढ़ा दिया है। फिलहाल लोगों को सलाह है कि बिना जरूरत घर से बाहर निकलने से बचें और अपने इलाके की स्थानीय Weather Alert को नजरअंदाज न करें। खासकर नदी और निचले इलाकों में रहने वाले लोग प्रशासन की अपील को गंभीरता से लें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BSE को मिली Nifty 50 में जगह, Wipro बाहर; जानें 30 सितंबर से क्या बदलेगा

भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े benchmark index Nifty 50 में जल्द ही बड़ा बदलाव होने वाला है। NSE Indices की छमाही समीक्षा में BSE Ltd. को Nifty 50 में शामिल करने का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही दिग्गज IT कंपनी Wipro Ltd. अब इस प्रमुख इंडेक्स का हिस्सा नहीं रहेगी। यह बदलाव 30 सितंबर 2026 से लागू होगा। यानी 29 सितंबर को बाजार बंद होने के बाद Nifty 50 की नई तस्वीर सामने आएगी। BSE को क्यों मिली Nifty 50 में जगह? NSE Indices के मुताबिक BSE का 6 महीने का औसत free-float market capitalisation करीब ₹1.41 लाख करोड़ रहा। वहीं Nifty 50 की सबसे छोटी मौजूदा कंपनी Wipro का औसत free-float market cap करीब ₹55,930 करोड़ था। इंडेक्स में शामिल होने के नियमों के मुताबिक BSE का औसत free-float market cap Wipro के मुकाबले जरूरी स्तर से काफी ऊपर रहा। इसी आधार पर BSE को Nifty 50 में जगह मिली है। सीधी भाषा में कहें तो बाजार में BSE का बढ़ता आकार और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी अब उसे Nifty 50 की शीर्ष कंपनियों की सूची तक ले आई है। Wipro की Nifty 50 से होगी Exit इस बदलाव का दूसरा बड़ा पहलू Wipro का Nifty 50 से बाहर होना है। कंपनी लंबे समय से इस benchmark index का हिस्सा रही है, लेकिन अब इसका free-float market capitalisation इंडेक्स की मौजूदा जरूरत के मुकाबले कम हो गया है। Wipro को Nifty 50 से हटाकर Nifty Next 50 में शामिल किया जाएगा। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि कंपनी के कारोबार पर कोई सीधा फैसला हो गया है। यह मुख्य रूप से इंडेक्स के तय नियमों और बाजार पूंजीकरण से जुड़ा बदलाव है। 30 सितंबर से लागू होगा नया बदलाव NSE Indices ने साफ किया है कि बदलाव 29 सितंबर 2026 को बाजार बंद होने के बाद प्रभावी होंगे। इसके बाद 30 सितंबर से Nifty 50 में BSE की जगह पक्की हो जाएगी और Wipro बाहर होगी। यह बदलाव सिर्फ इंडेक्स की सूची तक सीमित नहीं है। Nifty 50 को ट्रैक करने वाले कई passive funds और ETFs को भी अपनी holdings में बदलाव करना पड़ सकता है। इसी वजह से बदलाव की तारीख के आसपास संबंधित शेयरों में खरीद-बिक्री बढ़ सकती है। BSE Share में क्यों बढ़ी हलचल? BSE के Nifty 50 में शामिल होने की खबर बाजार के लिए काफी अहम रही। Reuters के अनुसार घोषणा के बाद BSE के शेयर में करीब 4 फीसदी की तेजी देखने को मिली, जबकि Wipro के शेयर में करीब 1.1 फीसदी की गिरावट आई। हालांकि, शेयर बाजार में किसी कंपनी के इंडेक्स में शामिल होने या बाहर होने को देखकर अकेले निवेश का फैसला करना ठीक नहीं है। शेयर की कीमत पर कंपनी के नतीजे, valuation, बाजार की स्थिति और कई दूसरे factors भी असर डालते हैं। Nifty 50 के लिए क्या बदलेगा? Nifty 50 को भारतीय शेयर बाजार का प्रमुख benchmark माना जाता है। इसमें देश की बड़ी और प्रमुख कंपनियां शामिल होती हैं। समय-समय पर NSE Indices इसकी समीक्षा करता है, ताकि इंडेक्स बदलती market conditions को बेहतर तरीके से दर्शा सके। BSE की entry इसी बदलती तस्वीर की एक मिसाल है। एक तरफ stock exchange कारोबार से जुड़ी कंपनी का बाजार में बढ़ता महत्व नजर आ रहा है, तो दूसरी तरफ लंबे समय से Nifty 50 में मौजूद Wipro को अब Next 50 में जाना होगा। निवेशकों की नजर अब सितंबर के बदलाव पर फिलहाल बाजार की नजर 30 सितंबर 2026 पर है। उस दिन से Nifty 50 में BSE की नई पारी शुरू होगी और Wipro की benchmark index से विदाई हो जाएगी। यह बदलाव भारतीय शेयर बाजार में बदलते market dynamics की ओर इशारा करता है। आने वाले दिनों में निवेशक BSE और Wipro दोनों के शेयरों में होने वाली गतिविधियों के साथ-साथ Nifty 50 में होने वाले दूसरे बदलावों पर भी नजर रखेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold

Gold-Silver Rate: सोने में फिर आया बड़ा उछाल, अगस्त में ₹9,630 महंगा; चांदी भी चमकी

सोना खरीदने वालों के लिए एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाली खबर है। देश के सर्राफा बाजार में Gold Price में तेज उछाल देखने को मिला है। सोने की कीमत एक दिन में ₹1,849 बढ़कर करीब ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम पहुंच गई है। खास बात यह है कि अगस्त की शुरुआत से ही सोने के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं और अब तक इसमें करीब ₹9,630 की बढ़ोतरी हो चुकी है। सोने के साथ-साथ चांदी ने भी तेजी का नया दौर देखा है। Silver Price में एक दिन में ₹15,985 का बड़ा उछाल आया और चांदी करीब ₹2.34 लाख प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई। अगस्त में सोने ने बढ़ाया खरीदारी का खर्च अगस्त महीने में Gold Rate में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। अब तक सोना करीब ₹9,630 महंगा हो चुका है। ऐसे में जिन लोगों के घर में शादी या कोई बड़ा समारोह है, उनके लिए गहनों की खरीदारी पहले के मुकाबले काफी महंगी पड़ सकती है। सोने की कीमत में इतनी तेजी के बाद आम खरीदार अब बाजार में भाव देखकर ही खरीदारी का फैसला कर रहे हैं। कई लोग जरूरत की खरीदारी को कुछ समय के लिए टालने पर भी विचार कर सकते हैं। Silver Price में भी जोरदार उछाल चांदी की कीमतों ने भी इस बार तेजी के मामले में सोने को पीछे छोड़ दिया है। एक दिन में ही Silver Rate में ₹15,985 की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद चांदी करीब ₹2.34 लाख प्रति किलो के भाव पर पहुंच गई। चांदी का इस्तेमाल आभूषणों के अलावा कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी होता है। इसलिए इसकी कीमत पर बाजार की मांग और निवेशकों की गतिविधियों का असर दिखाई देता है। क्यों महंगा हो रहा है Gold और Silver? सोने और चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार की हलचल भी अहम भूमिका निभाती है। निवेशकों के बीच सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने पर अक्सर Gold की कीमतों को सहारा मिलता है। इसके अलावा डॉलर की चाल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं के भाव और घरेलू मांग जैसे कई कारक भी सोने-चांदी के रेट को प्रभावित करते हैं। खरीदारों के लिए बढ़ी मुश्किल Gold Price के लगातार बढ़ने से सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जिन्हें आने वाले दिनों में आभूषण खरीदने हैं। शादी और त्योहारों के सीजन में सोने की मांग बढ़ने के साथ कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल सोना और चांदी दोनों ही ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में निवेशकों के साथ आम खरीदारों की नजर भी अब अगले कुछ दिनों के Gold Rate और Silver Rate पर रहेगी। Gold-Silver Price की एक नजर हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gautam Adani

Gautam Adani को US Court से राहत, Bribery और Fraud के आरोपों वाला केस हुआ खत्म

अडाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी (Gautam Adani) को अमेरिका से बड़ी कानूनी राहत मिली है। अमेरिकी संघीय अदालत ने अडाणी और उनके सहयोगियों के खिलाफ चल रहे रिश्वत और धोखाधड़ी से जुड़े आपराधिक मामले को खारिज कर दिया है। यह मामला नवंबर 2024 में सामने आया था और तब से ही अडाणी समूह के लिए बड़ी कानूनी चुनौती बना हुआ था। अमेरिकी अभियोजकों ने आरोप लगाया था कि अडाणी और उनके सहयोगियों ने भारत में सोलर पावर प्रोजेक्ट से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत देने की योजना बनाई थी। साथ ही आरोप था कि इस कथित योजना की जानकारी अमेरिकी निवेशकों से छिपाई गई। अडाणी पक्ष ने इन आरोपों को खारिज किया था। 2024 में शुरू हुआ था Adani का US Case इस पूरे विवाद की शुरुआत नवंबर 2024 में हुई थी। अमेरिकी अभियोजकों ने गौतम अडाणी, उनके भतीजे सागर अडाणी और अन्य लोगों पर कथित रिश्वत योजना से जुड़े आरोप लगाए थे। अभियोजन पक्ष का कहना था कि भारत में सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए अधिकारियों को कथित तौर पर करीब 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत देने की योजना बनाई गई थी। इसके अलावा अमेरिकी निवेशकों को कंपनी की गतिविधियों और कथित भ्रष्टाचार से जुड़ी जानकारी नहीं देने का आरोप भी लगाया गया था। हालांकि, अडाणी समूह ने शुरुआत से ही किसी भी गलत काम से इनकार किया। Justice Department ने केस आगे बढ़ाने से किया इनकार मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब अमेरिकी Justice Department ने अभियोजन को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया। इसके बाद मामला अदालत के सामने पहुंचा। अमेरिकी जिला जज निकोलस गारॉफिस ने पहले DOJ से इस फैसले के पीछे की वजह स्पष्ट करने को कहा था। अमेरिकी सरकार की ओर से दलील दी गई कि मामले का बड़ा हिस्सा अमेरिका के बाहर हुई कथित गतिविधियों से जुड़ा है और इसे अमेरिकी कानून के तहत साबित करना मुश्किल हो सकता है। अभियोजन पक्ष ने मामले की विदेशी प्रकृति और कानूनी जटिलताओं को भी अपने फैसले की वजह बताया। अमेरिकी कोर्ट ने 10 अगस्त को खत्म किया मामला आखिरकार 10 अगस्त 2026 को अमेरिकी अदालत ने गौतम अडाणी और अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक आरोप खारिज कर दिए। इस फैसले के साथ 2024 से चल रहा हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामला अमेरिकी अदालत में समाप्त हो गया। हालांकि, फैसले के दौरान जज ने Justice Department की ओर से केस छोड़ने की प्रक्रिया को लेकर चिंता भी जताई। उनका सवाल मुख्य रूप से इस बात पर था कि मामले को खत्म करने का फैसला किस प्रक्रिया के तहत लिया गया और क्या जांच में शामिल अधिकारियों की राय को पर्याप्त महत्व दिया गया था। Adani Group के लिए बड़ी राहत अमेरिकी कोर्ट का यह फैसला अडाणी समूह के लिए इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि यह मामला लंबे समय से कंपनी की अंतरराष्ट्रीय छवि और कारोबार पर नजर रखने वाले निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ था। फैसले के बाद अडाणी समूह की कई कंपनियों के शेयरों में भी तेजी देखने को मिली। रिपोर्टों के मुताबिक 11 अगस्त को समूह की कुछ प्रमुख कंपनियों के शेयरों में करीब 3 फीसदी तक की बढ़त दर्ज की गई। गौतम अडाणी ने फैसले का किया स्वागत केस खारिज होने के बाद गौतम अडाणी ने अमेरिकी अदालत के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पूरी कानूनी प्रक्रिया के दौरान उनका विश्वास सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन में बना रहा। अडाणी के लिए यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2024 में आरोप सामने आने के बाद इस मामले ने दुनियाभर में काफी सुर्खियां बटोरी थीं। अब अमेरिकी आपराधिक केस खत्म होने से समूह को इस मोर्चे पर राहत मिली है। क्या अब अडाणी पर कोई मामला नहीं बचा? यहां एक बात समझना जरूरी है। अमेरिकी अदालत द्वारा आपराधिक केस खारिज किए जाने का मतलब यह नहीं है कि अडाणी से जुड़े हर अमेरिकी कानूनी या नियामकीय मामले का भी अंत हो गया है। इससे संबंधित कुछ civil और regulatory proceedings अलग प्रक्रिया के तहत चल सकती हैं। Reuters के अनुसार, अडाणी और उनके भतीजे सागर अडाणी ने संबंधित अमेरिकी Securities and Exchange Commission मामले में भुगतान को लेकर समझौता किया था। यानी फिलहाल सबसे बड़ी खबर यह है कि 2024 में शुरू हुआ अमेरिकी आपराधिक रिश्वत और Fraud Case अब अदालत में खत्म हो गया है। इससे गौतम अडाणी और Adani Group को निश्चित तौर पर बड़ी कानूनी राहत मिली है, जबकि इससे जुड़े अन्य मामलों की स्थिति अलग हो सकती है। Adani Case की पूरी कहानी: 2024 में लगे गंभीर आरोपों से लेकर Justice Department के केस वापस लेने और अब अमेरिकी कोर्ट द्वारा आरोप खारिज किए जाने तक यह मामला करीब दो साल तक चर्चा में रहा। ताजा फैसले के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि इस कानूनी राहत का अडाणी समूह के कारोबार और निवेशकों के भरोसे पर आगे क्या असर पड़ता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Salman Khan

Salman Khan की Security में तैनात पुलिसकर्मी की मौत, Galaxy Apartment के बाहर मचा हड़कंप

मुंबई से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। बॉलीवुड अभिनेता Salman Khan के बांद्रा स्थित Galaxy Apartment के बाहर सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस कॉन्स्टेबल की अचानक मौत हो गई। बताया जा रहा है कि ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी की तबीयत बिगड़ी और वह अचानक जमीन पर गिर पड़े। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। शुरुआती रिपोर्ट्स में पुलिसकर्मी की मौत की वजह suspected heart attack बताई जा रही है। हालांकि, मौत का सही कारण मेडिकल जांच और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा। Salman Khan की Security में तैनात थे पुलिसकर्मी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक पुलिसकर्मी की ड्यूटी Salman Khan के घर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था में लगाई गई थी। अभिनेता की सुरक्षा पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा में रही है। Lawrence Bishnoi Gang की धमकियों के बाद Salman Khan की सुरक्षा बढ़ाई गई थी। इसी वजह से Galaxy Apartment के आसपास भी पुलिस की अतिरिक्त तैनाती और निगरानी रखी जाती है। बताया जा रहा है कि पुलिस कॉन्स्टेबल सामान्य तरीके से अपनी ड्यूटी कर रहे थे। इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और वह गिर पड़े। मौके पर मौजूद लोगों और अन्य सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें संभाला और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल पहुंचने से पहले बिगड़ी हालत पुलिसकर्मी को अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरों ने उनकी जांच की। हालांकि, उन्हें बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों को भी झकझोर दिया। ड्यूटी के दौरान इस तरह अचानक हुई मौत से आसपास कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। Lawrence Bishnoi की धमकियों के बाद बढ़ी थी सुरक्षा Salman Khan लंबे समय से Lawrence Bishnoi Gang की धमकियों के चलते कड़ी सुरक्षा में रहते हैं। अप्रैल 2024 में उनके Galaxy Apartment के बाहर गोलीबारी की घटना के बाद सुरक्षा को और मजबूत किया गया था। इसके बाद अभिनेता की सुरक्षा में पुलिस के साथ-साथ अन्य सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी बढ़ाई गई। Galaxy Apartment के आसपास आने-जाने वालों पर नजर रखने और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष सावधानी बरती जाती है। हालांकि, पुलिस कॉन्स्टेबल की मौत को किसी हमले या Lawrence Bishnoi Gang की गतिविधि से जोड़ने वाली कोई जानकारी सामने नहीं आई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी थी। मौत की असली वजह पर आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार फिलहाल पुलिसकर्मी की मौत को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। शुरुआती तौर पर हार्ट अटैक की आशंका जताई गई है, लेकिन अंतिम कारण मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा। एक तरफ Salman Khan की सुरक्षा के कारण Galaxy Apartment हमेशा सुर्खियों में रहता है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी की अचानक मौत ने इस घटना को और गंभीर बना दिया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

अमेरिका बना भारत का सबसे बड़ा LPG और LNG सप्लायर, होर्मुज संकट के बाद बदली ऊर्जा रणनीति

होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुए संकट के बाद भारत की ऊर्जा आयात रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि अमेरिका अब भारत का सबसे बड़ा LPG (रसोई गैस) सप्लायर बन गया है और देश की जरूरत की करीब 67% एलपीजी अब अमेरिका से आ रही है। उन्होंने यह जानकारी शुक्रवार को कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के एक कार्यक्रम में दी। LNG सप्लाई में भी अमेरिका पहले स्थान पर इक्विरस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने कतर को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) सप्लायर भी बन गया है। मई से जुलाई 2026 के दौरान: इस अवधि में अमेरिका ने 2.19 मिलियन टन LNG की आपूर्ति की, जबकि नाइजीरिया 1.31 मिलियन टन के साथ दूसरे स्थान पर रहा। वहीं ओमान से LNG सप्लाई में 341% की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई। भारत में गैस की मांग बढ़ी रिपोर्ट के मुताबिक जून 2026 में भारत में प्राकृतिक गैस की कुल मांग बढ़कर 197 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (mmscmd) पहुंच गई। मुख्य आंकड़े: सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सबसे बड़ा उपभोक्ता क्षेत्रवार गैस खपत में: हालांकि पेट्रोकेमिकल सेक्टर की मांग पिछले वर्ष की तुलना में अब भी करीब 48% कम बनी हुई है। वैश्विक कीमतें ऊंची, फिर भी मजबूत रहा आयात रिपोर्ट के अनुसार, एशियाई स्पॉट LNG की कीमतें 20 डॉलर प्रति MMBtu से ऊपर बनी हुई हैं। इसके बावजूद भारत का LNG आयात मजबूत रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई में गैस की मांग मजबूत बनी रहेगी, जबकि अगस्त में मौसमी कारणों से कुछ नरमी आ सकती है। होर्मुज संकट के बावजूद नहीं हुई ईंधन की कमी हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि मिडिल ईस्ट संकट और होर्मुज मार्ग प्रभावित होने के बावजूद देश में एलपीजी या पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं होने दी गई। उन्होंने बताया कि युद्ध से पहले भारत: इसी समुद्री मार्ग से आयात करता था। संकट के दौरान भारत ने तुरंत वैकल्पिक देशों से आयात बढ़ाया और घरेलू उत्पादन में भी वृद्धि की। मंत्री ने कहा कि देश के 1.07 लाख से अधिक पेट्रोल पंपों में से एक भी फ्यूल आउटलेट खाली नहीं रहा। 41 देशों तक बढ़ाया कच्चे तेल का आयात भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए: ‘समुद्र मंथन’ योजना को मिली मंजूरी सरकार ने दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए 84,000 करोड़ रुपये की ‘समुद्र मंथन’ योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य गहरे समुद्र में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज को बढ़ावा देना है। हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि ड्रिलिंग का कार्य निजी कंपनियां करेंगी। सरकार जोखिम वाले ऑफशोर प्रोजेक्ट्स में निवेश बढ़ाने के लिए प्रति कुएं 650 करोड़ रुपये तक या ड्रिलिंग लागत का 50 प्रतिशत आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराएगी। देश, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र की ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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