कई दिनों की उठापटक के बाद आखिरकार भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में तेजी लौटती दिखाई दे रही है। गुरुवार, 5 नवंबर को बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल आया। सेंसेक्स करीब 1,600 अंक चढ़ गया, वहीं निफ्टी ने भी 400 अंकों से ज्यादा की छलांग लगाई। लगातार छह कारोबारी दिनों से जारी तेजी ने निवेशकों को बड़ी राहत दी है। बाजार में इस तेजी के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण हैं। अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को लगे झटके, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की वापसी ने बाजार का माहौल बदल दिया है। इसका असर भारतीय बाजार के साथ-साथ दुनिया के दूसरे शेयर बाजारों में भी देखने को मिल रहा है। Sensex-Nifty में जोरदार उछाल, निवेशकों की नजर बाजार पर गुरुवार सुबह कारोबार शुरू होते ही बाजार में खरीदारी का माहौल बन गया। बीएसई सेंसेक्स करीब 1,609 अंक उछलकर 78,910 के स्तर पर खुला। वहीं निफ्टी 50 करीब 418 अंक की बढ़त के साथ 24,378 के आसपास पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 78,900 के पार और निफ्टी 24,400 के करीब पहुंच गया। दोनों प्रमुख इंडेक्स में लगभग 2 फीसदी की तेजी देखने को मिली। बाजार की इस तेजी ने उन निवेशकों को भी राहत दी है, जो पिछले कुछ समय से लगातार गिरावट और बिकवाली के कारण परेशान थे। 6 दिनों में Sensex ने 5,500 से ज्यादा अंक जोड़े शेयर बाजार की तेजी केवल एक दिन की कहानी नहीं है। पिछले छह कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स 5,500 अंकों से ज्यादा चढ़ चुका है। लगातार खरीदारी के कारण बाजार में निवेशकों का भरोसा वापस लौटता दिखाई दे रहा है। इस तेजी में बड़ी कंपनियों के शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली है। यानी बाजार में उत्साह सिर्फ सेंसेक्स और निफ्टी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई सेक्टर के शेयरों में भी तेजी आई है। Trump को Midterm Election में झटका, बाजार को मिला सहारा अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने दुनियाभर के निवेशकों का ध्यान खींचा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को चुनाव में नुकसान हुआ है, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में अपनी स्थिति मजबूत की है। इस नतीजे के बाद अमेरिकी सरकार की टैरिफ और विदेश नीति से जुड़ी योजनाओं पर राजनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना है। निवेशकों को उम्मीद है कि आने वाले समय में अमेरिका की नीतियों को लेकर अनिश्चितता कुछ कम हो सकती है। अमेरिकी राजनीति में आए इस बदलाव का असर वहां के शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। अमेरिकी बाजारों में तेजी के बाद भारतीय शेयर बाजार को भी सकारात्मक संकेत मिले। Crude Oil की कीमतों में गिरावट से भारत को राहत भारतीय बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट भी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 93.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। इससे पहले भी कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है। ऐसे में कच्चा तेल सस्ता होने से देश के आयात बिल में कमी आने और महंगाई का दबाव घटने की उम्मीद रहती है। इसके अलावा तेल की कीमतों में गिरावट से एयरलाइन, ऑटो और दूसरी कंपनियों की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। यही वजह है कि क्रूड ऑयल की कीमतों में कमी को बाजार के लिए राहत भरा संकेत माना जा रहा है। FII की खरीदारी से मजबूत हुआ बाजार विदेशी निवेशकों की वापसी ने भी बाजार को नई ताकत दी है। पिछले कुछ समय से भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली कर रहे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने अब खरीदारी शुरू कर दी है। 4 नवंबर को विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में करीब 7,284 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र रहा, जब विदेशी निवेशक नेट बायर बने। विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार में पैसा आने के साथ निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हुआ है। बाजार की तेजी में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की भूमिका भी अहम रही है। इन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा तेजी गुरुवार के शुरुआती कारोबार में कई बड़े शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। खासतौर पर ऑटो, बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और रियल्टी सेक्टर में मजबूती रही। शुरुआती कारोबार में IndiGo, Bajaj Finance, Asian Paints, Maruti Suzuki और Mahindra & Mahindra जैसे शेयरों में तेजी दर्ज की गई। बैंकिंग सेक्टर के HDFC Bank और ICICI Bank के शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में आई मजबूती ने भी बाजार की तेजी को सहारा दिया। निवेशकों की दौलत में 6.6 लाख करोड़ रुपये का इजाफा बाजार में आई तेजी का फायदा निवेशकों की संपत्ति पर भी दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 501 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में यह लगभग 494.4 लाख करोड़ रुपये था। इस तरह बाजार खुलने के शुरुआती समय में ही निवेशकों की संपत्ति में करीब 6.6 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। आगे कैसी रहेगी Share Market की चाल? लगातार छह दिनों की तेजी के बाद अब निवेशकों की नजर बाजार के अगले रुख पर है। अमेरिका की नई राजनीतिक स्थिति, ईरान से जुड़ा तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। इसके अलावा कंपनियों के तिमाही नतीजे और घरेलू आर्थिक आंकड़े भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। फिलहाल भारतीय शेयर बाजार में लौटी तेजी ने निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान जरूर ला दी है। हालांकि, बाजार में लगातार बढ़त के बाद उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है। इसलिए निवेश से जुड़े फैसले जल्दबाजी में लेने के बजाय बाजार की स्थिति और कंपनी के प्रदर्शन को समझना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!