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Delhi-Varanasi Bullet Train

Delhi-Varanasi Bullet Train: यूपी के इन शहरों से गुजरेगी हाई-स्पीड ट्रेन, जानें पूरा Route

उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए आने वाले समय में रेल यात्रा काफी आसान और तेज हो सकती है। दिल्ली से वाराणसी के बीच प्रस्तावित बुलेट ट्रेन (Delhi-Varanasi Bullet Train) कॉरिडोर को लेकर रेलवे की तैयारियां आगे बढ़ रही हैं। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद दिल्ली से वाराणसी पहुंचने में करीब 3 घंटे 50 मिनट लगने का अनुमान है। यानी जिस सफर में अभी काफी समय खर्च होता है, वह भविष्य में कुछ ही घंटों में पूरा हो सकेगा। केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी समेत देश में सात नए High-Speed Rail Corridors विकसित करने की घोषणा की थी। इस योजना का मकसद बड़े शहरों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करना और यात्रियों को तेज रेल सुविधा देना है। Delhi-Varanasi Bullet Train Project पर क्या है नया अपडेट? दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को लेकर रेलवे स्तर पर तकनीकी तैयारियां और डिजाइन से जुड़े काम आगे बढ़ाए जा रहे हैं। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने जून 2026 में दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर के सिविल स्ट्रक्चर डिजाइन के लिए कंसल्टेंसी बिड आमंत्रित की थी। इसमें स्टेशन, सुरंग, शाफ्ट और अन्य जरूरी निर्माण संरचनाओं के डिजाइन से जुड़ा काम शामिल है। प्रस्तावित कॉरिडोर को 320 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति के हिसाब से तैयार करने की योजना है। हालांकि, अभी इस परियोजना की अंतिम सरकारी मंजूरी और निर्माण की समयसीमा स्पष्ट नहीं है। इसलिए इसे निर्माण शुरू होने वाला प्रोजेक्ट मानना जल्दबाजी होगी। दिल्ली से वाराणसी तक सिर्फ 3 घंटे 50 मिनट में पूरा होगा सफर इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात इसकी रफ्तार होगी। रेलवे मंत्रालय की बजट संबंधी जानकारी के अनुसार, दिल्ली से वाराणसी तक की यात्रा लगभग 3 घंटे 50 मिनट में पूरी हो सकेगी। इससे नौकरी, कारोबार, पढ़ाई और धार्मिक यात्रा के लिए दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बीच आने-जाने वाले लोगों को काफी सुविधा मिल सकती है। प्रस्तावित हाई-स्पीड नेटवर्क से दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ने की योजना है। यूपी के इन शहरों को मिल सकती है Bullet Train की सुविधा प्रस्तावित रूट में उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहर शामिल किए जाने की चर्चा है। इनमें दिल्ली, नोएडा, जेवर, आगरा, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज और वाराणसी जैसे स्थान शामिल हैं। इसके अलावा अयोध्या को भी लिंक लाइन के माध्यम से जोड़ने का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, इन सभी स्थानों पर स्टेशन बनने की अंतिम पुष्टि अभी नहीं हुई है। वास्तविक रूट और स्टेशन की जानकारी आधिकारिक मंजूरी के बाद ही सामने आएगी। Varanasi से Patna होते हुए Siliguri तक भी जाएगी Bullet Train इस योजना का दूसरा अहम हिस्सा वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर है। इसके जरिए उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच तेज रेल कनेक्टिविटी विकसित करने की योजना है। प्रस्तावित रूट वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक जाएगा। रेल मंत्रालय के अनुसार, इस कॉरिडोर पर वाराणसी से सिलीगुड़ी तक का सफर लगभग 2 घंटे 55 मिनट में पूरा हो सकता है। इससे धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ व्यापार और क्षेत्रीय आवागमन को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। 320 KM की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को आधुनिक तकनीक के आधार पर विकसित करने की योजना है। डिजाइन संबंधी दस्तावेजों में 320 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति और 350 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति का उल्लेख किया गया है। इसके लिए आधुनिक ट्रैक, एलिवेटेड सेक्शन, सुरंग और विशेष रेलवे स्टेशनों का निर्माण करना होगा। जेवर में भूमिगत स्टेशन का डिजाइन भी प्रस्तावित है। सात नए Bullet Train Corridors की घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में देश के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने के लिए सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर घोषित किए गए हैं। इनमें शामिल हैं: इन कॉरिडोर का उद्देश्य देश के प्रमुख आर्थिक, औद्योगिक और धार्मिक शहरों के बीच यात्रा को आसान बनाना है। Bullet Train शुरू होने से यूपी को क्या होगा फायदा? दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का असर सिर्फ रेल यात्रा तक सीमित नहीं रहेगा। इसके शुरू होने से उत्तर प्रदेश में पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर विकसित हो सकते हैं। कब शुरू होगी Delhi-Varanasi Bullet Train? फिलहाल यात्रियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिल्ली से वाराणसी के बीच बुलेट ट्रेन कब दौड़ेगी। अभी तक इस कॉरिडोर के लिए अंतिम निर्माण मंजूरी और व्यावसायिक संचालन की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं हुई है। रेलवे के सामने DPR, तकनीकी-आर्थिक व्यवहार्यता, फंडिंग, जमीन और निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण चरण हैं। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही परियोजना की समयसीमा स्पष्ट हो पाएगी। कुल मिलाकर, दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश के लिए भविष्य की एक बड़ी रेल कनेक्टिविटी योजना है। अगर यह योजना तय स्वरूप में पूरी होती है, तो दिल्ली से काशी तक का सफर पहले के मुकाबले काफी कम समय में पूरा किया जा सकेगा। अब लोगों की नजर इस प्रोजेक्ट की अंतिम मंजूरी और निर्माण से जुड़ी अगली घोषणा पर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Omar Abdullah

Omar Abdullah: नेशनल कॉन्फ्रेंस में बढ़ी नाराजगी, 24 विधायकों ने खोला मोर्चा

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में इन दिनों नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर सबकुछ ठीक नजर नहीं आ रहा है। उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) के मंत्रिमंडल विस्तार के कुछ ही दिनों बाद पार्टी के करीब 24 विधायकों के एकजुट होने की खबर सामने आई है। नाराज विधायक सरकार के कामकाज और मंत्रियों के चयन को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनकी मांग है कि मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को पद से हटाया जाए और मंत्रिमंडल में भी बदलाव किया जाए। श्रीनगर में हुई विधायकों की बैठक के बाद अब सभी की नजर पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला पर है। नाराज विधायक उनसे मुलाकात कर अपनी शिकायतें और मांगें रखने की तैयारी में हैं। इस घटनाक्रम ने जम्मू-कश्मीर की सियासत में नई चर्चा शुरू कर दी है। 24 विधायकों ने मिलकर की बैठक, पार्टी नेतृत्व से नाराजगी शुक्रवार, 30 अक्टूबर को नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने श्रीनगर में विधायक कैसर जमशेद लोन के आवास पर बैठक की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक में 18 विधायक व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए, जबकि छह विधायकों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपना समर्थन दिया। बैठक में विधायकों ने पार्टी के अंदर फैसले लेने के तरीके और सरकार में उनकी भूमिका को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि मंत्रियों और दूसरे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति करते समय वरिष्ठ नेताओं और विधायकों की राय भी ली जानी चाहिए। विधायकों का मानना है कि पार्टी के अंदर बातचीत और सामूहिक फैसलों को ज्यादा महत्व मिलना चाहिए। हालांकि, पार्टी की ओर से इसे बगावत मानने से इनकार किया गया है। CM के सलाहकार नासिर असलम वानी को हटाने की मांग नाराज विधायकों की सबसे बड़ी मांग मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सलाहकार नासिर असलम वानी को उनके पद से हटाने की है। कुछ विधायकों का आरोप है कि सरकार और पार्टी से जुड़े फैसलों में कुछ लोगों का जरूरत से ज्यादा प्रभाव है। इसके अलावा उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी को लेकर भी नाराजगी सामने आई है। विधायकों के एक समूह ने पुराने मंत्रियों की जगह नए चेहरों को मौका देने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें हैं: 27 अक्टूबर को हुआ था Cabinet Expansion दरअसल, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 27 अक्टूबर 2026 को जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल का विस्तार किया था। इस दौरान चार नए नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। नए मंत्रियों में अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कल्लू शामिल हैं। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रीनगर स्थित लोक भवन में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस फेरबदल के दौरान निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से बाहर किया गया था। कैबिनेट विस्तार के बाद कुछ वरिष्ठ नेताओं और विधायकों की नाराजगी की खबरें सामने आईं। माना जा रहा है कि मंत्रियों के चयन और पार्टी के भीतर सलाह-मशविरे की कमी को लेकर असंतोष बढ़ा है। Mubarak Gul को महासचिव पद से हटाया गया पार्टी के अंदर चल रही हलचल के बीच फारूक अब्दुल्ला ने एक संगठनात्मक बदलाव भी किया। उन्होंने वरिष्ठ नेता मुबारक गुल को महासचिव पद से हटा दिया। उनकी जगह अली मोहम्मद सागर को महासचिव की जिम्मेदारी दी गई। मुबारक गुल नेशनल कॉन्फ्रेंस के पुराने और अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। वह छह बार विधायक रह चुके हैं। कैबिनेट विस्तार में उन्हें जगह नहीं मिलने के बाद उनकी नाराजगी की खबरें भी सामने आई थीं। उनके समर्थकों ने भी उन्हें मंत्री बनाए जाने की मांग उठाई थी। ऐसे में महासचिव पद से हटाए जाने के फैसले को पार्टी के मौजूदा घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। Aga Ruhullah Mehdi ने भी पार्टी छोड़ने का किया ऐलान नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए एक और मुश्किल श्रीनगर के सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी के बयान से बढ़ गई है। उन्होंने पार्टी और लोकसभा सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया है। रुहुल्लाह ने पार्टी नेतृत्व पर चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, अनुच्छेद 370 की बहाली, राजनीतिक बंदियों की रिहाई और जम्मू-कश्मीर के अधिकारों जैसे मुद्दों पर सरकार को और प्रभावी तरीके से काम करना चाहिए था। उनके इस फैसले ने पार्टी के अंदर चल रहे मतभेदों को फिर से चर्चा में ला दिया है। हालांकि, इस्तीफे के ऐलान और उसके औपचारिक रूप से स्वीकार होने के बीच अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है। National Conference ने बगावत की खबरों को नकारा विधायकों की नाराजगी की खबरों के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पार्टी में बगावत होने की बात को खारिज किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि विधायकों की बैठक को विद्रोह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पार्टी की ओर से यह भी कहा गया कि संगठन के अंदर अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा होना सामान्य बात है। विधायक अपनी समस्याएं और सुझाव नेतृत्व के सामने रख सकते हैं। इस तरह पार्टी के भीतर एक तरफ बदलाव की मांग उठ रही है, तो दूसरी तरफ नेतृत्व इसे आंतरिक बातचीत का हिस्सा बता रहा है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में NC की स्थिति जम्मू-कश्मीर की 90 सदस्यीय विधानसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 41 विधायक हैं। पार्टी ने कांग्रेस और अन्य समर्थक विधायकों के सहयोग से सरकार बनाई है। ऐसे में पार्टी के भीतर 24 विधायकों के एकजुट होने की खबर को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, फिलहाल सरकार के बहुमत को लेकर कोई आधिकारिक संकट सामने नहीं आया है। अब Farooq Abdullah के फैसले पर टिकी नजरें जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर चल रही नाराजगी अब पार्टी नेतृत्व के लिए अहम मुद्दा बन गई है। कैबिनेट विस्तार के बाद शुरू हुई असंतोष की चर्चा, मुबारक गुल को पद से हटाए जाने और आगा रुहुल्लाह के इस्तीफे के ऐलान ने राजनीतिक माहौल को और चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि फारूक अब्दुल्ला नाराज विधायकों की मांगों पर क्या फैसला लेते हैं और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला मंत्रिमंडल में दोबारा बदलाव करते हैं या नहीं। फिलहाल पार्टी के भीतर बातचीत और नेतृत्व के अगले कदम पर सबकी नजर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Punjab Election

Punjab Election 2027: AAP की 40 Candidates List जारी, CM भगवंत मान फिर Dhuri से लड़ेंगे चुनाव

Punjab Election 2027 को लेकर सियासी हलचल तेज होने लगी है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने चुनाव से पहले ही अपनी तैयारियों को आगे बढ़ाते हुए 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इस लिस्ट में सबसे खास बात यह है कि पार्टी ने अपने सभी मौजूदा विधायकों पर दोबारा भरोसा जताया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान एक बार फिर धूरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे। वहीं, जेल में बंद कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को भी टिकट दिया गया है। AAP की इस घोषणा के बाद पंजाब की राजनीति में चुनावी चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी ने शुरुआती सूची में पुराने चेहरों को प्राथमिकता दी है। अब बाकी सीटों पर उम्मीदवारों के नामों का इंतजार किया जा रहा है। AAP ने 40 Candidates की पहली List जारी की आम आदमी पार्टी ने 31 अक्टूबर 2026 को अपने 40 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया। उम्मीदवारों के चयन को लेकर पार्टी की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (PAC) की बैठक हुई थी। इसमें अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री भगवंत मान और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया। पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन में स्थानीय फीडबैक और विधायकों के कामकाज को आधार बनाने की बात कही है। सभी 40 नाम मौजूदा विधायकों के होने से साफ है कि शुरुआती सूची में पार्टी ने अपने पुराने चेहरों को ही आगे रखा है। CM भगवंत मान फिर Dhuri से लड़ेंगे चुनाव मुख्यमंत्री भगवंत मान एक बार फिर धूरी विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरेंगे। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने इसी सीट से जीत हासिल की थी। अब 2027 के चुनाव के लिए पार्टी ने उन्हें दोबारा धूरी से उम्मीदवार बनाया है। भगवंत मान की उम्मीदवारी को लेकर पहले से ही चर्चा थी। अब पार्टी की आधिकारिक घोषणा के बाद धूरी सीट पर चुनावी मुकाबले की तैयारियां शुरू हो जाएंगी। जेल में बंद Sanjeev Arora को भी मिला Ticket AAP की पहली उम्मीदवार सूची में सबसे ज्यादा चर्चा मंत्री संजीव अरोड़ा के नाम की हो रही है। पार्टी ने उन्हें लुधियाना वेस्ट विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। संजीव अरोड़ा को मई 2026 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। वह गुरुग्राम की भोंडसी जेल में बंद हैं। इसके बावजूद पार्टी ने उन्हें चुनावी मैदान में उतारने का फैसला किया है। संजीव अरोड़ा ने 2025 में लुधियाना वेस्ट सीट पर हुए उपचुनाव में जीत दर्ज की थी। उनकी गिरफ्तारी को लेकर AAP ने राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप लगाए हैं। वहीं, ED की कार्रवाई जांच से जुड़ी है। अब उनके टिकट के बाद लुधियाना वेस्ट सीट भी चर्चा में आ गई है। इन प्रमुख नेताओं को भी मिला टिकट AAP की पहली सूची में पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां को कोटकपूरा से उम्मीदवार बनाया गया है। इसके अलावा कुलदीप सिंह धालीवाल, कुलवंत सिंह, डॉ. इंदरबीर सिंह निज्जर और कई अन्य मौजूदा विधायकों को भी टिकट मिला है। पार्टी की सूची में अलग-अलग क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। इनमें माझा, दोआबा और मालवा क्षेत्र की सीटें शामिल हैं। AAP की 40 उम्मीदवारों की List पार्टी की ओर से घोषित प्रमुख उम्मीदवारों में शामिल हैं: 2027 Election से पहले AAP की तैयारी तेज पंजाब में कुल 117 विधानसभा सीटें हैं और 2027 में इन पर चुनाव होना है। AAP ने चुनाव से पहले उम्मीदवारों की सूची जारी करके अपने चुनावी अभियान को गति दे दी है। अब पार्टी के सामने अपने मौजूदा विधायकों के कामकाज को जनता के सामने रखने और अगले कार्यकाल के लिए अपना एजेंडा पेश करने की चुनौती होगी। वहीं, विपक्षी दल भी सरकार के कामकाज, रोजगार, किसानों, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों पर सवाल उठा सकते हैं। फिलहाल AAP की पहली सूची में 40 नाम सामने आ चुके हैं। अब बाकी 77 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा और कांग्रेस, भाजपा व शिरोमणि अकाली दल की चुनावी रणनीति पर सभी की नजर रहेगी। अब आगे क्या? पंजाब चुनाव 2027 में मुकाबला किन मुद्दों पर होगा और दूसरी पार्टियां किसे उम्मीदवार बनाएंगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल भगवंत मान की धूरी से उम्मीदवारी और संजीव अरोड़ा को टिकट देने का फैसला AAP की पहली सूची के सबसे चर्चित पहलू बने हुए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मोदी

Ekta Nagar Development: PM मोदी ने दी बड़ी सौगात, Hotel से Eco Trail तक कई नए आकर्षण तैयार

गुजरात के एकतानगर (केवड़िया) में अब पर्यटकों को घूमने के लिए पहले से ज्यादा विकल्प मिलने वाले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अक्टूबर 2026 को सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर यहां ₹426.71 करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और लोकार्पण किया। इन परियोजनाओं में IRCTC होटल, एकता क्रूज, रेनफॉरेस्ट, इको ट्रेल और नर्मदा घाट के विकास जैसे कई बड़े काम शामिल हैं। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के लिए मशहूर एकतानगर को पर्यटन के लिहाज से और आकर्षक बनाने की तैयारी है। सरकार का जोर सिर्फ नए पर्यटन स्थल बनाने पर नहीं, बल्कि पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं देने, साफ-सफाई सुधारने और आसपास के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी है। ₹426.71 करोड़ की 31 परियोजनाओं से बदलेगी एकतानगर की तस्वीर एकतानगर में कुल 31 परियोजनाओं पर ₹426.71 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। इनमें 23 परियोजनाओं का उद्घाटन या लोकार्पण किया गया है, जबकि आठ नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई है। इनका बजट इस प्रकार है: इन योजनाओं के पूरा होने से एकतानगर में पर्यटन के साथ परिवहन, स्वच्छता और दूसरी जरूरी सुविधाओं को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। IRCTC Hotel और Ekta Cruise होंगे पर्यटकों के लिए खास आकर्षण इस बार की विकास योजनाओं में कुछ ऐसे प्रोजेक्ट शामिल हैं, जिनका इंतजार पर्यटकों को लंबे समय से था। इन सुविधाओं के बाद एकतानगर आने वाले लोगों के पास स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के अलावा भी घूमने और समय बिताने के कई विकल्प होंगे। 12 एकड़ में बना Rainforest, 132 Glass Panels वाला Skywalk खास एकतानगर का रेनफॉरेस्ट इस विकास योजना के सबसे आकर्षक प्रोजेक्ट्स में से एक है। करीब 12 एकड़ में फैले इस परिसर को प्राकृतिक वर्षावन जैसा अनुभव देने के लिए तैयार किया गया है। यहां कृत्रिम बारिश की व्यवस्था, रेन-गन टावर, झरने, बबल फाउंटेन और कई तरह के पेड़-पौधे देखने को मिलेंगे। इसका 132 ग्लास पैनल वाला गोलाकार ग्लास स्काईवॉक भी खास आकर्षण है। इस स्काईवॉक से पर्यटक आसपास फैली हरियाली और पूरे परिसर का नजारा देख सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दौरे के दौरान रेनफॉरेस्ट के साथ वामन वृक्ष वाटिका का भी जायजा लिया। Narmada Ghat से Water Treatment Plant तक, मिलेंगी बेहतर सुविधाएं एकतानगर में सिर्फ घूमने-फिरने की जगहों पर ही काम नहीं किया जा रहा है। यहां आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बुनियादी सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जा रहा है। इसमें नर्मदा घाट का अपग्रेडेशन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परिसर में फसाड लाइटिंग जैसे काम शामिल हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रिक बसों, ट्रैवलेटर, सड़कों के विकास और रेलवे स्टेशन से विजिटर सेंटर तक वॉक-वे जैसी सुविधाओं पर भी काम किया जा रहा है। इनका उद्देश्य पर्यटकों की आवाजाही को आसान बनाना और क्षेत्र को अधिक व्यवस्थित बनाना है। 8 नई परियोजनाओं का भी शिलान्यास, Road Development पर जोर प्रधानमंत्री ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए आठ नई परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। इन पर करीब ₹118.88 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इनमें गोरा-भद्रा रोड डेवलपमेंट, स्मार्ट जीरो वेस्ट मैनेजमेंट, खलवानी इको टूरिज्म और कैक्टस-बटरफ्लाई गार्डन का विकास प्रमुख है। गोरा-भद्रा रोड के विकास पर करीब ₹59.32 करोड़ और स्मार्ट सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट पर लगभग ₹36.58 करोड़ खर्च किए जाने हैं। वहीं, खलवानी इको टूरिज्म और कैक्टस-बटरफ्लाई गार्डन से क्षेत्र में प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना है। Bharat Parv 2026 में दिखेगी भारत की संस्कृति और परंपरा एकतानगर में 30 अक्टूबर से भारत पर्व 2026 का आयोजन भी शुरू हो चुका है, जो 15 नवंबर तक चलेगा। इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग राज्यों की संस्कृति, लोककला, पारंपरिक व्यंजन, हस्तशिल्प और पर्यटन स्थलों की झलक देखने को मिल रही है। इसके साथ एकता प्रकाश पर्व के तहत पूरे परिसर को आकर्षक रोशनी से सजाया गया है। वैली ऑफ फ्लावर्स रोड और ग्लो टनल जैसे आकर्षण भी पर्यटकों के लिए तैयार किए गए हैं। सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पहुंचकर सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह और एकता परेड का आयोजन किया गया। परेड में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, राज्य पुलिस बलों और विभिन्न केंद्रीय पुलिस संगठनों की टुकड़ियों ने हिस्सा लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों और झांकियों के जरिए देश की एकता और विविधता का संदेश भी दिया गया। एकतानगर में पर्यटन को मिलेगा नया विस्तार एकतानगर में शुरू की गई ये परियोजनाएं सिर्फ नए पर्यटन स्थल जोड़ने तक सीमित नहीं हैं। इनका मकसद यहां आने वाले लोगों को ठहरने, घूमने और स्थानीय सुविधाओं का बेहतर अनुभव देना भी है। IRCTC होटल, एकता क्रूज, रेनफॉरेस्ट और इको ट्रेल जैसे आकर्षण जुड़ने से पर्यटकों के पास अब ज्यादा विकल्प होंगे। साथ ही सड़क, पानी, स्वच्छता और परिवहन से जुड़े काम क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अब आने वाले समय में इन परियोजनाओं का असर एकतानगर के पर्यटन और स्थानीय रोजगार के अवसरों पर कितना पड़ता है, यह देखना दिलचस्प होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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INDIA Bloc

INDIA Bloc Protest: CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आज जनमहाभियोग, कल Delhi में Vote Bachao Rally

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) और कथित Vote Chori के मुद्दे पर INDIA Bloc ने अब विरोध प्रदर्शन को तेज करने की तैयारी कर ली है। विपक्षी दल 31 अक्टूबर को CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सार्वजनिक जनमहाभियोग कार्यक्रम आयोजित करेंगे। इसके अगले दिन यानी 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली निकाली जाएगी। हालांकि, इस रैली से पहले दिल्ली के कारोबारियों ने कांग्रेस नेतृत्व से कार्यक्रम टालने की अपील की है। व्यापारिक संगठनों को आशंका है कि दिवाली से ठीक पहले लाखों लोगों की भीड़ और वाहनों की आवाजाही से दिल्ली के प्रमुख बाजारों में कारोबार प्रभावित हो सकता है। ऐसे में अब इस राजनीतिक कार्यक्रम को लेकर विपक्ष और व्यापारिक संगठनों के बीच चर्चा तेज हो गई है। आज 31 अक्टूबर को CEC के खिलाफ होगा जनमहाभियोग कार्यक्रम INDIA ब्लॉक ने पहले 30 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सार्वजनिक जनमहाभियोग कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई थी। लेकिन दिल्ली में बारिश के कारण इसे एक दिन के लिए टाल दिया गया। अब यह कार्यक्रम 31 अक्टूबर को दोपहर 3:30 से 4 बजे के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास, 10 राजाजी मार्ग पर आयोजित होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार कर सकती हैं। मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से प्रस्ताव पेश किया जाएगा, जबकि राहुल गांधी समापन संबोधन देंगे। इसमें INDIA ब्लॉक के कई दलों के नेता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। विपक्ष का कहना है कि इस आयोजन के जरिए चुनाव आयोग के कामकाज और CEC के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जनता के सामने रखा जाएगा। यहां एक बात समझना जरूरी है कि जनमहाभियोग कोई आधिकारिक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है। यह विपक्ष की ओर से आयोजित प्रतीकात्मक सार्वजनिक सुनवाई है। इससे CEC को सीधे पद से नहीं हटाया जा सकता। SIR और Vote Chori पर क्यों आमने-सामने हैं विपक्ष और चुनाव आयोग? इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR है। राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के अन्य नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव के नाम पर बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि इससे लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। विपक्ष लगातार चुनाव आयोग से SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है। दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद गलतियों को दूर करना है। आयोग के अनुसार, मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान करना इस प्रक्रिया का हिस्सा है। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। INDIA ब्लॉक इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बता रहा है, जबकि चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के तहत बता रहा है। संसद में CEC को हटाने का नोटिस भी हो चुका है खारिज ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग विपक्ष पहले भी संसद में उठा चुका है। 12 मार्च को विपक्षी सांसदों ने लोकसभा और राज्यसभा में CEC को हटाने से संबंधित नोटिस दिए थे। इन नोटिसों पर लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों के हस्ताक्षर थे। हालांकि, 6 अप्रैल को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने इन नोटिसों को खारिज कर दिया था। इसके बाद विपक्ष ने इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने का फैसला किया। इसी रणनीति के तहत अब सार्वजनिक जनमहाभियोग कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होगी Vote Bachao Rally जनमहाभियोग कार्यक्रम के अगले दिन यानी 1 नवंबर को INDIA ब्लॉक दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करेगा। इस अभियान को ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ नाम दिया गया है। राहुल गांधी ने आम लोगों, युवाओं, छात्रों और सामाजिक संगठनों से इस रैली में शामिल होने की अपील की है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह लड़ाई किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि मताधिकार और चुनावी व्यवस्था में भरोसे से जुड़ी है। कांग्रेस के मुताबिक, रैली के तहत मिंटो रोड और कनॉट प्लेस जंक्शन से मार्च निकालने की योजना है, जो रामलीला मैदान पहुंचकर समाप्त होगा। इसमें INDIA ब्लॉक के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है। दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान में रैली के लिए शर्तों के साथ अनुमति दी है। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर भी तैयारियां की जा रही हैं। दिल्ली के कारोबारियों ने सोनिया गांधी को लिखा पत्र रैली से पहले दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने अपनी चिंता जाहिर की है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख बदलने की मांग की है। कारोबारियों का कहना है कि दिवाली से पहले दिल्ली के बाजारों में खरीदारी और माल की सप्लाई बढ़ जाती है। ऐसे समय में बड़ी रैली होने से ट्रैफिक जाम, पार्किंग की समस्या और बाजारों तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है। CTI का अनुमान है कि रैली के कारण दिल्ली के करीब 20 प्रमुख बाजारों में 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये तक का कारोबार प्रभावित होने का जोखिम है। यह आंकड़ा व्यापारिक संगठन का अनुमान है, वास्तविक नुकसान का आंकड़ा नहीं। CTI ने सोनिया गांधी के सामने दो सुझाव रखे हैं: कारोबारियों का कहना है कि वे राजनीतिक कार्यक्रम के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन त्योहार से ठीक पहले इसके समय और जगह को लेकर उन्हें परेशानी हो सकती है। राहुल गांधी ने कारोबारियों की अपील पर क्या कहा? राहुल गांधी पहले भी कारोबारियों की चिंताओं पर प्रतिक्रिया दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटा दें, तो विपक्ष का विरोध 30 सेकंड में खत्म हो सकता है। व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा कि विपक्ष उनकी परेशानियों को समझता है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वहीं, 31 अक्टूबर...
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Hormuz

Hormuz Attack: जहाज पर चिपकाया विस्फोटक, धमाके से Engine Room में लगी आग; 27 भारतीय सुरक्षित

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज (Hormuz) जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से एक और चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर MT LOUISE 1 को निशाना बनाया गया। बताया जा रहा है कि एक छोटी नाव के जरिए जहाज के बाहरी हिस्से पर विस्फोटक उपकरण लगाए गए थे। धमाका होते ही जहाज के इंजन रूम में आग लग गई। इस दौरान टैंकर पर 27 भारतीय नाविक भी मौजूद थे। राहत की बात यह रही कि सभी भारतीय सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की खबर नहीं है। यह घटना 30 अक्टूबर को ओमान के पास हुई। हमले के बाद जहाज में कुछ समय के लिए कामकाज प्रभावित हुआ, लेकिन चालक दल ने आग पर काबू पा लिया। समुद्री सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियां भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। MT LOUISE 1 पर कैसे हुआ हमला? समुद्री सुरक्षा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, एक छोटी नाव टैंकर के करीब पहुंची थी। इसके बाद जहाज के बाहरी हिस्से पर दो लिंपेट माइंस (Limpet Mines) लगाए जाने की जानकारी सामने आई। कुछ समय बाद हुए धमाकों से जहाज के इंजन रूम में आग लग गई। घटना के बाद चालक दल ने स्थिति संभाली और आग बुझाने में सफलता हासिल की। शुरुआती जानकारी के अनुसार, टैंकर की यात्रा भी दोबारा शुरू हो गई। ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO के मुताबिक, यह घटना ओमान के खासाब (Khasab) से करीब 25 नॉटिकल मील उत्तर-पूर्व में हुई। फिलहाल इस हमले के पीछे किसका हाथ है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। क्या होती हैं Limpet Mines? लिंपेट माइंस छोटे विस्फोटक उपकरण होते हैं, जिन्हें जहाज के बाहरी हिस्से पर लगाया जा सकता है। इस तरह के उपकरणों को लेकर समुद्री सुरक्षा एजेंसियां गंभीर चिंता जता रही हैं, क्योंकि इनका इस्तेमाल व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। इस घटना के बाद होर्मुज से गुजरने वाले दूसरे जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। एक दिन पहले MT ARZANAH पर भी हुआ था हमला होर्मुज में तनाव का मामला सिर्फ एक जहाज तक सीमित नहीं है। MT LOUISE 1 पर हमले से एक दिन पहले यानी 29 अक्टूबर को MT ARZANAH नाम के एक अन्य तेल टैंकर को भी निशाना बनाया गया था। लाइबेरिया के झंडे वाले इस जहाज पर प्रोजेक्टाइल से हमला होने की जानकारी सामने आई थी। उस समय जहाज पर दो भारतीय नागरिक मौजूद थे। राहत की बात यह रही कि वे दोनों भी सुरक्षित बच गए। इस तरह 29 और 30 अक्टूबर को हुई दोनों घटनाओं में कुल 29 भारतीय नाविक जहाजों पर मौजूद थे। केंद्र सरकार के मुताबिक, सभी भारतीय सुरक्षित हैं। भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर सरकार का बयान केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दोनों घटनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि MT ARZANAH और MT LOUISE 1 पर मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। सरकार की ओर से जहाजों की प्रबंधन कंपनियों के साथ संपर्क बनाए रखने और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर नजर रखने की बात कही गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य में क्यों बढ़ रहा है तनाव? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्तों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और अन्य ऊर्जा उत्पाद दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचते हैं। यह रास्ता फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इसलिए यहां होने वाली किसी भी सैन्य या समुद्री घटना का असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहता। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बाद इस इलाके में जहाजों की आवाजाही और सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। हाल के दिनों में कई व्यापारिक जहाजों से जुड़ी घटनाएं सामने आई हैं। 30 अक्टूबर को ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स नेवी (IRGC) ने भी दावा किया था कि होर्मुज में समुद्री रास्तों से गुजरने की कोशिश के दौरान चार तेल टैंकरों में आग और विस्फोट हुए। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। भारत के लिए क्यों अहम है होर्मुज का यह मामला? भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने से तेल की सप्लाई, अंतरराष्ट्रीय कीमतों और समुद्री परिवहन पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा भारतीय नागरिक बड़ी संख्या में विदेशी व्यापारिक जहाजों पर काम करते हैं। ऐसे में जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों की खबरें उनके परिवारों के लिए भी चिंता बढ़ाने वाली हैं। फिलहाल भारत के लिए राहत की बात यह है कि दोनों जहाजों पर मौजूद सभी 29 भारतीय सुरक्षित हैं। हालांकि, होर्मुज में लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच समुद्री सुरक्षा को लेकर सतर्कता बनाए रखना जरूरी है। आने वाले दिनों में इस क्षेत्र की स्थिति पर भारत समेत दुनिया के कई देशों की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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रिलायंस इंडस्ट्रीज के Q2 नतीजे आज होंगे जारी, ₹21,368 करोड़ मुनाफे का अनुमान; जियो और रिफाइनिंग पर रहेगी नजर

नई दिल्ली। देश की सबसे वैल्युएबल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) आज, 30 अक्टूबर को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी करेगी। ऑयल रिफाइनिंग मार्जिन में तेजी और जियो के यूजर्स व ARPU में बढ़ोतरी के दम पर कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहने का अनुमान है। ब्लूमबर्ग का अनुमान: ₹21,368 करोड़ रह सकता है मुनाफा ब्लूमबर्ग कंसेंसस एस्टिमेट्स के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज सितंबर तिमाही में ₹21,368 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज कर सकती है। यह पिछली तिमाही (अप्रैल-जून) के ₹20,946 करोड़ से ज्यादा है, हालांकि पिछले साल की समान तिमाही के ₹22,092 करोड़ के मुकाबले थोड़ा कम है। एनालिस्ट्स के अनुसार, कंपनी के ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) बिजनेस का कमाई में बड़ा योगदान रह सकता है। वहीं, डिजिटल सर्विसेज यानी जियो से ग्रोथ को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। ब्रोकरेज हाउस ने EBITDA में बढ़ोतरी का जताया अनुमान अलग-अलग ब्रोकरेज हाउस ने रिलायंस के प्रदर्शन को लेकर अनुमान जारी किए हैं। O2C बिजनेस: रिफाइनिंग मार्जिन से मिल सकता है सहारा ग्लोबल मार्केट में पेट्रोलियम उत्पादों की सीमित सप्लाई और खाड़ी देशों में तनाव के कारण रिफाइनिंग मार्जिन मजबूत बने रहने का अनुमान है। प्रभुदास लीलाधर के मुताबिक, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सितंबर में क्रूड की कीमतों में उछाल आया। इससे दूसरी तिमाही में ब्रेंट क्रूड का औसत भाव 91.4 डॉलर प्रति बैरल रहा। डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के रिफाइनिंग क्रैक्स भी ऊंचे स्तर पर रहे। कोटक सिक्योरिटीज का अनुमान है कि O2C EBITDA में सालाना आधार पर 47% की बढ़ोतरी हो सकती है। इसमें कंपनी की SEZ रिफाइनरी का बड़ा योगदान रहने की उम्मीद है, जिसे विंडफॉल टैक्स से छूट मिली हुई है। इसके अलावा अमेरिका से मिलने वाला सस्ता एथेन-बेस्ड पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक और रुपए की कमजोरी भी मार्जिन को सहारा दे सकती है। नुवामा के मुताबिक, O2C EBITDA में सालाना आधार पर 38% की बढ़ोतरी संभव है। हालांकि, बढ़े हुए फ्रेट चार्ज और ऑपरेशनल एडजस्टमेंट का असर प्रदर्शन पर पड़ सकता है। जियो: ARPU और यूजर्स की बढ़ोतरी पर नजर रिलायंस जियो की कमाई में लगातार बढ़ोतरी बने रहने का अनुमान है। ब्रोकरेज हाउस ने जियो के ARPU और सब्सक्राइबर बेस को लेकर ये अनुमान दिए हैं। रिलायंस रिटेल: रेवेन्यू बढ़ने की उम्मीद, मार्जिन पर दबाव रिटेल सेगमेंट में रेवेन्यू बढ़ने का अनुमान है, लेकिन मार्जिन पर दबाव रह सकता है। ऑयल एंड गैस बिजनेस में सुस्ती की आशंका प्रोडक्शन में गिरावट के कारण कंपनी का अपस्ट्रीम ऑयल एंड गैस बिजनेस दबाव में रह सकता है। कोटक सिक्योरिटीज ने इस सेगमेंट के EBITDA में सालाना आधार पर 7.2% और नुवामा ने 6% की गिरावट का अनुमान जताया है। नतीजों के साथ इन 5 बातों पर रहेगी निवेशकों की नजर कंपनी के तिमाही नतीजों के अलावा निवेशक इन अहम पहलुओं पर भी ध्यान देंगे: इस साल अब तक 26% गिरा रिलायंस का शेयर तिमाही नतीजों से पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 0.3% गिरकर ₹1,163 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। बीते 5 दिनों में शेयर 2%, एक महीने में 3% और 6 महीने में 19% गिर चुका है। इस साल 1 जनवरी से अब तक शेयर में 26% की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, एक साल में इसकी कीमत 22% नीचे आई है। कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹15.74 लाख करोड़ है। भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट सेक्टर कंपनियों में शामिल है रिलायंस रिलायंस इंडस्ट्रीज भारत की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की कंपनियों में शामिल है। कंपनी हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन, पेट्रोलियम रिफाइनिंग और मार्केटिंग, पेट्रोकेमिकल्स, एडवांस मटेरियल और कंपोजिट, रिन्यूएबल एनर्जी, डिजिटल सर्विसेज और रिटेल जैसे क्षेत्रों में कारोबार करती है। क्या होता है ARPU? ARPU का पूरा नाम ‘एवरेज रेवेन्यू पर यूजर’ है। यह टेलीकॉम कंपनियों के प्रदर्शन का एक प्रमुख पैमाना है। इससे पता चलता है कि कंपनी औसतन एक ग्राहक से हर महीने कितना रेवेन्यू कमाती है। क्या होते हैं रिफाइनिंग क्रैक्स? कच्चे तेल को रिफाइन करके पेट्रोल, डीजल और ATF जैसे उत्पाद बनाने के बाद मिलने वाले ग्रॉस मार्जिन को रिफाइनिंग क्रैक स्प्रेड कहा जाता है। इससे रिफाइनरी की कमाई और मुनाफे का अंदाजा लगाने में मदद मिलती है। नोट: इस खबर में दिए गए मुनाफे और EBITDA के आंकड़े ब्रोकरेज हाउस और एनालिस्ट्स के अनुमान हैं। ये कंपनी के आधिकारिक तिमाही नतीजे नहीं हैं।

IPL 2027 से पहले मुंबई इंडियंस में बड़े बदलाव, मलिंगा समेत 3 कोचिंग स्टाफ से बाहर

मुंबई। मुंबई इंडियंस ने IPL 2027 से पहले अपने कोचिंग स्टाफ में तीन बड़े बदलाव किए हैं। फ्रेंचाइजी ने लंबे समय तक टीम से जुड़े रहे तेज गेंदबाजी कोच लसिथ मलिंगा, बॉलिंग कोच पारस म्हाम्ब्रे और फील्डिंग कोच कार्ल हॉपकिन्सन को जिम्मेदारी से हटा दिया है। मुंबई इंडियंस ने गुरुवार को इसकी आधिकारिक घोषणा की। हालांकि, फ्रेंचाइजी ने अभी तक इन तीनों की जगह नए कोच के नामों का ऐलान नहीं किया है। इससे पहले टीम ने महेला जयवर्धने की जगह कीरोन पोलार्ड को पुरुष टीम का हेड कोच नियुक्त किया था। मुंबई इंडियंस के साथ 11 सीजन जुड़े रहे मलिंगा लसिथ मलिंगा मुंबई इंडियंस के सबसे पुराने और चर्चित खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। वे 2008 से 2017 तक टीम के प्रमुख गेंदबाज रहे। इसके बाद 2018 में फ्रेंचाइजी ने उन्हें बॉलिंग मेंटर बनाया। साल 2019 में उन्होंने खिलाड़ी के तौर पर टीम में वापसी की और फिर पिछले तीन सीजन तक बॉलिंग कोच की भूमिका निभाई। मलिंगा अक्टूबर 2023 में दोबारा मुंबई इंडियंस से जुड़े थे और IPL 2024 से तेज गेंदबाजी कोच के तौर पर काम शुरू किया था। म्हाम्ब्रे और हॉपकिन्सन भी हुए बाहर पारस म्हाम्ब्रे और कार्ल हॉपकिन्सन IPL 2025 से पहले मुंबई इंडियंस के कोचिंग स्टाफ में शामिल हुए थे। म्हाम्ब्रे का फ्रेंचाइजी के साथ यह दूसरा कार्यकाल था। वे इससे पहले 2010 से 2017 तक भी टीम के कोचिंग स्टाफ का हिस्सा रह चुके हैं। मुंबई इंडियंस ने अपने बयान में तीनों को उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया। फ्रेंचाइजी ने कहा कि उनका समर्पण, बनाए गए रिश्ते और साथ बिताए यादगार पल हमेशा टीम की यात्रा का हिस्सा रहेंगे। पिछले 6 सीजन से फाइनल में नहीं पहुंची मुंबई मुंबई इंडियंस IPL इतिहास की पहली टीम है, जिसने पांच बार खिताब जीता है। टीम ने 2013, 2015, 2017, 2019 और 2020 में ट्रॉफी अपने नाम की थी। हालांकि, पिछले छह सीजन से टीम फाइनल में जगह नहीं बना सकी है। IPL 2026 में मुंबई इंडियंस 10 टीमों की पॉइंट्स टेबल में नौवें स्थान पर रही थी। इसके बाद फ्रेंचाइजी ने कोचिंग स्टाफ में बदलाव किए हैं। कीरोन पोलार्ड को बनाया गया हेड कोच मुंबई इंडियंस ने 24 अक्टूबर को वेस्टइंडीज के पूर्व क्रिकेटर कीरोन पोलार्ड को IPL 2027 के लिए पुरुष टीम का हेड कोच नियुक्त करने की घोषणा की थी। 39 वर्षीय पोलार्ड पिछले 16 साल से मुंबई इंडियंस से जुड़े हैं। वे 2009-10 में फ्रेंचाइजी के साथ आए थे और 2022 तक खिलाड़ी के तौर पर टीम का हिस्सा रहे। इस दौरान उन्होंने मुंबई इंडियंस के साथ पांच IPL खिताब जीते। 16 दिसंबर को होगा IPL 2027 का ऑक्शन IPL 2027 के लिए खिलाड़ियों का ऑक्शन 16 दिसंबर को गोवा में आयोजित किया जाएगा। इससे पहले सभी फ्रेंचाइजी को 15 नवंबर तक रिटेन और रिलीज किए जाने वाले खिलाड़ियों की सूची सौंपनी है। मलिंगा को सर्च करने में बढ़ी लोगों की दिलचस्पी मुंबई इंडियंस से लसिथ मलिंगा के अलग होने की खबर के बाद उन्हें ऑनलाइन सर्च करने वालों की संख्या में भी तेजी आई। उपलब्ध गूगल ट्रेंड्स के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 30 दिनों में 29 अक्टूबर के आसपास मलिंगा को सर्च करने का ग्राफ तेजी से ऊपर गया।

दिवाली से पहले सोना-चांदी सस्ता, अक्टूबर में अब तक सोना 6 हजार और चांदी 30 हजार रुपए गिरी

नई दिल्ली। दिवाली से पहले सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट जारी है। 29 अक्टूबर को भी दोनों कीमती धातुओं के भाव नीचे आए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 452 रुपए सस्ता होकर 1.42 लाख रुपए पर आ गया। वहीं, एक किलो चांदी की कीमत 2,964 रुपए घटकर 1.90 लाख रुपए रह गई। अक्टूबर में अब तक सोना करीब 6 हजार रुपए और चांदी करीब 30 हजार रुपए सस्ती हो चुकी है। इससे पहले सितंबर में भी सोने की कीमत में करीब 8 हजार रुपए और चांदी में 15 हजार रुपए की गिरावट दर्ज की गई थी। 31 अगस्त को सोना 1.56 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम था, जो 30 सितंबर को घटकर 1.48 लाख रुपए पर आ गया। इसी तरह चांदी की कीमत 2.37 लाख रुपए प्रति किलो से गिरकर 2.22 लाख रुपए पर पहुंच गई थी। क्या सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट जारी रहेगी? विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलहाल सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसके पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. BIS हॉलमार्क वाला सोना खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा प्रमाणित सोना ही खरीदें। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता की जानकारी मिलती है। हॉलमार्क पर दर्ज पहचान संख्या और अन्य विवरण भी जरूर जांचें। 2. कीमत और वजन की पुष्टि करें: सोना खरीदने से पहले उसका वजन और उस दिन का भाव अलग-अलग भरोसेमंद स्रोतों से जांच लें। 24, 22 और 18 कैरेट सोने की कीमत अलग-अलग होती है। IBJA की वेबसाइट पर भी सोने के भाव देखे जा सकते हैं। चांदी की शुद्धता जांचने के 4 तरीके 1. मैग्नेट टेस्ट: शुद्ध चांदी चुंबक से आकर्षित नहीं होती। हालांकि, सिर्फ इस जांच के आधार पर चांदी के असली या नकली होने का फैसला नहीं किया जा सकता। 2. आइस टेस्ट: चांदी की ऊष्मा चालकता अधिक होती है, इसलिए उस पर रखी बर्फ तेजी से पिघल सकती है। यह जांच भी अपने आप में शुद्धता का पक्का प्रमाण नहीं है। 3. स्मेल टेस्ट: शुद्ध चांदी में आमतौर पर कोई खास गंध नहीं होती। धातु जैसी तेज गंध आने पर उसमें दूसरी धातुओं की मिलावट की आशंका हो सकती है। 4. क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ने पर काला निशान आ सकता है। यह चांदी पर ऑक्सीडेशन या टार्निश की वजह से होता है, लेकिन इससे शुद्धता की पूरी पुष्टि नहीं होती। चांदी की सही शुद्धता जानने के लिए प्रमाणित जांच कराना बेहतर है। केवल घरेलू तरीकों के आधार पर खरीदारी का फैसला न करें।
Gold

Gold Price Today: ₹1.42 लाख पर आया सोना, अक्टूबर में ₹6,000 तक घटे दाम

सोना-चांदी (Gold-Silver) खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए बाजार से राहत भरी खबर है। 29 अक्टूबर को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। सोना ₹563 सस्ता होकर करीब ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि चांदी के भाव में ₹2,945 की कमी आई। अक्टूबर महीने में अब तक सोने की कीमत करीब ₹6,000 तक नीचे आ चुकी है। लगातार बदलते भाव के बीच अब खरीदारों की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में कीमतें और गिरेंगी या बाजार में फिर तेजी लौटेगी। Gold Rate Today: आज कितना सस्ता हुआ सोना? गुरुवार को सोने की कीमत में ₹563 प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद सोने का भाव करीब ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। अक्टूबर में अब तक सोने की कीमत में लगभग ₹6,000 की कमी आ चुकी है। हालांकि, सोने का भाव उसकी शुद्धता, शहर और बाजार के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है। 24 कैरेट सोना मुख्य रूप से निवेश के लिए इस्तेमाल होता है, जबकि गहने बनाने के लिए आमतौर पर 22 कैरेट सोना खरीदा जाता है। त्योहारी सीजन में सोने की खरीदारी करने वालों के लिए कीमतों में आई यह गिरावट अहम है। लेकिन खरीदारी करने से पहले स्थानीय ज्वेलर से ताजा भाव पता करना जरूरी है। Silver Rate Today: चांदी की कीमत में भी बड़ी गिरावट सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी कमजोरी देखने को मिली। आज चांदी ₹2,945 प्रति किलोग्राम सस्ती हुई। अक्टूबर महीने के दौरान चांदी के भाव में करीब ₹30,000 प्रति किलोग्राम की गिरावट बताई जा रही है। चांदी का इस्तेमाल केवल गहने और सिक्के खरीदने तक सीमित नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसकी मांग रहती है। इसलिए चांदी की कीमतों पर निवेशकों के साथ-साथ औद्योगिक मांग का भी असर पड़ता है। अक्टूबर में सोना-चांदी कितना सस्ता हुआ? इस महीने की कीमतों पर नजर डालें तो दोनों कीमती धातुओं में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली है। ये आंकड़े संबंधित बाजार अपडेट पर आधारित हैं। अलग-अलग स्रोतों में भाव और दैनिक बदलाव अलग हो सकते हैं। Gold-Silver Price क्यों गिर रहे हैं? सोने और चांदी की कीमतों में बदलाव के पीछे कई वजहें होती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग, अमेरिकी डॉलर की चाल, बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें इनकी कीमतों को प्रभावित करती हैं। जब डॉलर मजबूत होता है या निवेशकों को दूसरे विकल्प आकर्षक लगते हैं, तो सोने पर दबाव आ सकता है। दूसरी ओर, वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर सोने की मांग में तेजी भी देखने को मिल सकती है। चांदी की कीमतें भी इन्हीं कारकों से प्रभावित होती हैं। इसके अलावा उद्योगों में चांदी की मांग बढ़ने या घटने से भी बाजार में उतार-चढ़ाव आ सकता है। इसलिए केवल एक दिन की गिरावट देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि सोना-चांदी आगे भी लगातार सस्ते होते रहेंगे। क्या अभी सोना-चांदी खरीदना सही रहेगा? कीमतों में गिरावट के बाद कई खरीदारों के मन में यह सवाल है कि अभी खरीदारी करें या कुछ दिन और इंतजार करें। इसका जवाब आपकी जरूरत और खरीदारी के उद्देश्य पर निर्भर करता है। अगर आप शादी, त्योहार या किसी खास मौके के लिए गहने खरीद रहे हैं, तो अपने बजट के हिसाब से अलग-अलग ज्वेलर्स के भाव की तुलना कर सकते हैं। वहीं, निवेश के उद्देश्य से खरीदारी करने वालों को कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव और अपनी वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए। ध्यान रखें कि गहने खरीदते समय सोने की कीमत के अलावा मेकिंग चार्ज और GST भी देना होता है। इसलिए बाजार में सोना सस्ता होने के बावजूद अंतिम बिल में उतनी ही कमी हो, यह जरूरी नहीं है। सोना खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Stock Market

Stock Market Today: US Fed के फैसले से शेयर बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स में उछाल

शेयर बाजार (Stock Market) में गिरावट देखकर परेशान निवेशकों को गुरुवार को राहत मिली। अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) के ब्याज दरों पर फैसले के बाद भारतीय बाजार में खरीदारी लौट आई। सेंसेक्स 600 अंकों से ज्यादा उछल गया, जबकि निफ्टी में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली। बाजार में अचानक आई इस तेजी ने निवेशकों का ध्यान एक बार फिर खींचा है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या यह तेजी आगे भी जारी रहेगी या बाजार में फिर उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा? US Fed Decision: अमेरिका में क्या हुआ, जिसका दिखा असर? अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने 28 अक्टूबर को अपनी प्रमुख ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया। दरों को स्थिर रखने के फैसले के बाद वैश्विक बाजारों में निवेशकों ने राहत महसूस की। दरअसल, अमेरिका में ब्याज दरों का असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर पड़ता है। जब वहां ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है, तो विदेशी निवेशक अपने निवेश को लेकर सतर्क हो जाते हैं। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। हालांकि, फेड के फैसले का मतलब यह नहीं है कि वैश्विक बाजारों की सभी चिंताएं खत्म हो गई हैं। महंगाई और आगे ब्याज दरों में संभावित बदलाव पर अभी भी नजर बनी हुई है। Sensex Today: 600 अंक से ज्यादा चढ़ा बाजार गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान खरीदारी बढ़ी। इसके बाद सेंसेक्स 600 अंकों से ज्यादा उछल गया। वहीं, निफ्टी 50 में भी तेजी देखने को मिली और इंडेक्स 22,900 के करीब पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में बाजार पर बिकवाली का दबाव था। ऐसे में अगले दिन आई तेजी ने निवेशकों को कुछ राहत दी। बाजार के प्रमुख शेयरों में खरीदारी बढ़ने से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों को सहारा मिला। हालांकि, शुरुआती कारोबार में दर्ज की गई तेजी पूरे दिन बरकरार रहे, यह जरूरी नहीं है। शेयर बाजार में कीमतें लगातार बदलती रहती हैं। Share Market Rally: बाजार में तेजी की क्या हैं बड़ी वजहें? 1. US Fed ने ब्याज दरें नहीं बढ़ाईं अमेरिकी फेड के फैसले से निवेशकों को तत्काल ब्याज दरों में बढ़ोतरी की चिंता से कुछ राहत मिली। इससे वैश्विक बाजारों की धारणा को सहारा मिला। हालांकि, आगे ब्याज दरों को लेकर फेड का रुख महत्वपूर्ण रहेगा। 2. विदेशी निवेशकों ने की खरीदारी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की खरीदारी भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत रही। 28 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब 872 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी। लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में खरीदारी होने से बाजार को समर्थन मिला। हालांकि, विदेशी निवेशकों के कुल रुख में स्थायी बदलाव हुआ है या नहीं, यह आने वाले सत्रों में स्पष्ट होगा। 3. बड़े शेयरों में बढ़ी खरीदारी बाजार की तेजी में दिग्गज कंपनियों के शेयरों की अहम भूमिका रही। रिलायंस इंडस्ट्रीज, अडानी पोर्ट्स और पावर ग्रिड जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। IT कंपनियों के शेयरों में भी कुछ जगहों पर मजबूती दर्ज की गई। जब बड़ी कंपनियों के शेयर चढ़ते हैं, तो सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख इंडेक्स को भी सहारा मिलता है। 4. टैक्स राहत की उम्मीदों पर नजर शेयर बाजार में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स को लेकर संभावित राहत की चर्चा भी निवेशकों के बीच बनी हुई है। हालांकि, किसी आधिकारिक घोषणा के बिना इसे सरकार का तय फैसला नहीं माना जा सकता। किन शेयरों में दिखी तेजी? गुरुवार के शुरुआती कारोबार में Adani Ports, Power Grid और Reliance Industries जैसे शेयरों पर निवेशकों की नजर रही। कुछ IT शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। दूसरी ओर, सभी शेयरों में तेजी नहीं थी। Trent सहित कुछ कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला। इससे साफ है कि बाजार के प्रमुख इंडेक्स में बढ़त के बावजूद अलग-अलग कंपनियों का प्रदर्शन अलग रह सकता है। Crude Oil Price: कच्चा तेल बना बाजार की चिंता शेयर बाजार में तेजी के बावजूद कच्चे तेल की कीमतें चिंता का विषय बनी हुई हैं। 29 अक्टूबर की सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है। ऐसे में कच्चा तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर रुपये, महंगाई और कई कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। अगर तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो बाजार की तेजी पर दबाव आ सकता है। इसलिए निवेशकों के लिए केवल सेंसेक्स और निफ्टी की चाल देखना ही पर्याप्त नहीं होगा। पिछले दिन बाजार में क्यों आई थी गिरावट? 28 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। सेंसेक्स कारोबार के दौरान 1,000 अंकों के करीब गिर गया था और बाद में कुछ सुधार के बावजूद गिरावट के साथ बंद हुआ। IT शेयरों में बिकवाली, प्रमुख कंपनियों के शेयरों में कमजोरी और वैश्विक संकेतों को लेकर चिंता ने बाजार पर दबाव बनाया था। अमेरिकी फेड के फैसले से पहले निवेशक भी सतर्क नजर आ रहे थे। इसके बाद 29 अक्टूबर को खरीदारी लौटने से बाजार को राहत मिली। लेकिन एक कारोबारी दिन की तेजी से बाजार की लंबी अवधि की दिशा तय नहीं होती। आगे Share Market में क्या होगा? अब निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। इन कारकों के आधार पर बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। जो निवेशक शेयर बाजार में पैसा लगाने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए जरूरी है कि वे जल्दबाजी में फैसला न लें। केवल एक दिन की तेजी देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, अपनी जोखिम क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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