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Kharge

Sugar Import पर सियासत तेज: Kharge बोले- भारत में चीनी की कमी, फिर कैसा Atmanirbhar Bharat?

रसोई में इस्तेमाल होने वाली चीनी की कीमतों में तेजी ने त्योहारों से पहले आम परिवारों का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। बाजार में बढ़ते दामों को लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीनी की कीमतों और घरेलू स्टॉक को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। खड़गे (Kharge ) ने सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि जब भारत दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है, तो घरेलू जरूरतों के लिए Sugar Import की नौबत क्यों आई? उन्होंने इसे सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दावे से जोड़ते हुए कई सवाल उठाए। तीन महीने में चीनी के दाम में बड़ा उछाल Kharge का दावा है कि पिछले तीन महीनों में चीनी की कीमत करीब 40 फीसदी तक बढ़ी है। हाल के दिनों में भी खुदरा बाजार में कीमतों में तेजी देखी गई है। त्योहारों के नजदीक आने के साथ चीनी की मांग बढ़ने की संभावना है, ऐसे में आम लोगों की चिंता और बढ़ गई है। चीनी की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ चाय की प्याली तक सीमित नहीं है। मिठाई, बेकरी और कई खाद्य उत्पादों की लागत भी इससे प्रभावित होती है। यही वजह है कि कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी सीधे घरेलू बजट पर असर डालती है। Kharge ने सरकार से पूछे 3 बड़े सवाल मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीनी की उपलब्धता और कीमतों को लेकर सरकार से तीन अहम सवाल किए हैं। पहला सवाल: भारत में चीनी का स्टॉक नौ साल के निचले स्तर तक कैसे पहुंच गया? दूसरा सवाल: जब देश चीनी का प्रमुख उत्पादक है, तो सरकार को निर्यात पर रोक लगाने और 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति क्यों देनी पड़ी? तीसरा सवाल: अगर घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता को लेकर दबाव है, तो E20 और Ethanol Policy की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही? खड़गे का तर्क है कि अगर गन्ने और उससे जुड़े संसाधनों का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन में बढ़ रहा है, तो इसका असर चीनी की उपलब्धता पर भी देखा जाना चाहिए। सरकार ने Ethanol Policy को बताया जिम्मेदार नहीं विपक्ष के आरोपों के बीच केंद्र सरकार ने चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए एथेनॉल उत्पादन को मुख्य वजह मानने से इनकार किया है। सरकार का कहना है कि मौजूदा तेजी के पीछे कई दूसरे कारण हैं। सरकार के मुताबिक इस साल चीनी उत्पादन में कमी की आशंका है। खराब मौसम और गन्ने की पैदावार पर पड़े असर ने भी स्थिति को प्रभावित किया है। इसके अलावा त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में बदलाव का असर घरेलू बाजार पर पड़ा है। 10 लाख टन Raw Sugar Import का फैसला बढ़ती कीमतों पर काबू पाने और घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए केंद्र ने 10 लाख टन Raw Sugar के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार की कोशिश है कि अतिरिक्त सप्लाई बाजार में पहुंचे और कीमतों पर दबाव कम हो। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब घरेलू स्टॉक और उत्पादन को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। Stock Limit से जमाखोरी पर भी नजर चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार ने Stock Limit से जुड़े कदम भी उठाए हैं। इसका उद्देश्य बाजार में जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा करने और कृत्रिम कमी पैदा होने की संभावना को कम करना है। सरकार की नजर खास तौर पर त्योहारों से पहले बाजार की स्थिति पर है। मांग बढ़ने के दौरान अगर सप्लाई सामान्य रहती है, तो कीमतों पर दबाव कम किया जा सकता है। खराब मौसम और कम उत्पादन भी बड़ी वजह सरकार के मुताबिक इस साल चीनी उत्पादन पर मौसम का असर पड़ा है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में परिस्थितियों का प्रभाव उत्पादन पर पड़ा है। यही वजह है कि केंद्र और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। विपक्ष जहां कीमतों और Import को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार उत्पादन में कमी और बाजार की परिस्थितियों को मुख्य वजह बता रही है। आम आदमी के लिए सबसे बड़ा सवाल—चीनी कब सस्ती होगी? इस पूरे विवाद के बीच आम लोगों की नजर एक ही बात पर है—चीनी की कीमत आखिर कब नीचे आएगी? त्योहारों का मौसम सामने है और मिठाई से लेकर घर की रोजमर्रा की चाय तक, चीनी की जरूरत हर परिवार में है। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती सिर्फ राजनीतिक आरोपों का जवाब देना नहीं, बल्कि बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनाए रखते हुए कीमतों को काबू में रखना भी है। फिलहाल Sugar Price Hike, Duty-Free Import और Ethanol Policy को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। आने वाले दिनों में आयातित चीनी की सप्लाई और सरकारी कदमों का बाजार पर असर इस कहानी की अगली तस्वीर तय करेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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झारखंड

Ramgarh Factory Blast: झारखंड के Iron Plant में बड़ा हादसा, 3 Engineers की मौत

झारखंड के रामगढ़ से शनिवार को एक दर्दनाक औद्योगिक हादसे की खबर सामने आई। यहां एक आयरन फैक्ट्री में जोरदार ब्लास्ट के बाद आग लग गई। हादसे में तीन इंजीनियरों की जान चली गई, जबकि एक मजदूर घायल बताया जा रहा है। घटना के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अचानक हुआ Blast, आग ने लिया विकराल रूप बताया जा रहा है कि हादसा रामगढ़ के बरकाकाना इलाके में स्थित आयरन फैक्ट्री में हुआ। फैक्ट्री में सामान्य रूप से काम चल रहा था। इसी दौरान पावर प्लांट से तेज धमाके की आवाज आई। कुछ ही देर में वहां आग फैल गई। ब्लास्ट इतना तेज था कि आसपास मौजूद कर्मचारियों में भी दहशत फैल गई। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल राहत और बचाव की कोशिश शुरू की। सूचना मिलने के बाद दमकल और पुलिस की टीम भी घटनास्थल पर पहुंची। तीन Engineers की मौत, एक Worker घायल हादसे में तीन इंजीनियर बुरी तरह प्रभावित हुए। उन्हें बचाने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। हादसे में एक मजदूर भी घायल हुआ है, जिसे इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। इस घटना ने फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। अचानक हुए इस हादसे से फैक्ट्री प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के सामने भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। Blast की वजह अभी साफ नहीं फैक्ट्री में आग और ब्लास्ट आखिर किस वजह से हुआ, इसकी आधिकारिक तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। शुरुआती स्तर पर तकनीकी खराबी, ओवरहीटिंग या इलेक्ट्रिकल सिस्टम से जुड़ी समस्या जैसी संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। हालांकि, जांच एजेंसियां सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर घटना की वजह पता करने में जुटी हैं। हादसे के बाद फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था और मशीनरी की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई पुलिस और प्रशासन ने घटनास्थल का जायजा लिया है। हादसे से जुड़े तथ्यों को जुटाया जा रहा है। यह भी देखा जा रहा है कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता घायल मजदूर के इलाज और मृतकों के परिवारों को जरूरी सहायता उपलब्ध कराने की है। रामगढ़ की इस घटना ने एक बार फिर याद दिलाया है कि बड़े औद्योगिक संयंत्रों में Safety Protocols और नियमित मशीनरी जांच कितनी जरूरी है। Ramgarh Factory Blast की जांच आगे बढ़ने के साथ हादसे की असली वजह और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अन्य पहलुओं पर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nitin Nabin

Nitin Nabin की नई BJP Team की पहली Meeting, Vande Mataram के सभी 6 अंतरे

भारतीय जनता पार्टी की नई टीम के साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (Nitin Nabin) की पहली अहम बैठक हुई। बैठक की शुरुआत राष्ट्रगीत वंदे मातरम के सभी 6 अंतरों के सामूहिक गायन से हुई। इसके बाद पार्टी संगठन को आगे बढ़ाने, आगामी चुनावों की तैयारियों और युवाओं को BJP से जोड़ने को लेकर मंथन किया गया। नई टीम के गठन के बाद हुई इस बैठक को पार्टी के अगले राजनीतिक रोडमैप के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नेतृत्व ने संगठन को सिर्फ चुनाव के समय सक्रिय रखने के बजाय लगातार जनता के बीच मजबूत संपर्क बनाए रखने पर जोर दिया। चुनावी तैयारियों को समय से पहले गति देने की तैयारी बैठक में आगामी चुनावों को लेकर संगठन की तैयारियों पर चर्चा हुई। पार्टी का फोकस बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर रहा। नेताओं और पदाधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्रों में जनता के बीच सक्रिय रहने की उम्मीद जताई गई। स्थानीय समस्याओं को समझने और सरकार की योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने को भी संगठन की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया। Youth Connect पर BJP का खास फोकस बैठक में युवाओं को पार्टी से जोड़ने का मुद्दा भी प्रमुख रहा। BJP अब युवा वर्ग के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है। युवा कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने और उन्हें पार्टी के कार्यक्रमों से जोड़ने की रणनीति आने वाले समय में अहम हो सकती है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाने पर भी पार्टी का विशेष ध्यान रहने की उम्मीद है। Vande Mataram के सभी 6 अंतरे, बैठक का खास पल नई टीम की पहली बैठक का सबसे अलग पहलू वंदे मातरम के सभी छह अंतरों का गायन रहा। बैठक में मौजूद नेताओं और पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत गाया। इससे बैठक की शुरुआत में ही एकजुटता और राष्ट्रभावना का संदेश देने की कोशिश दिखाई दी। नई टीम के सामने बड़ी जिम्मेदारी नितिन नवीन के नेतृत्व में नई BJP टीम के सामने अब संगठन को जमीन पर और मजबूत करने की चुनौती है। आगामी चुनावों की तैयारी, युवा वोटर्स से संवाद और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता—ये सभी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे रहने वाले हैं। पहली बैठक से साफ है कि BJP का फोकस अब Election Preparation के साथ Organization Strength और Youth Connect पर भी रहेगा। आने वाले दिनों में बैठक में बनी रणनीति को किस तरह जमीन पर लागू किया जाता है, इस पर सभी की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mayawati

Akhilesh Yadav पर Mayawati का बड़ा हमला, ‘चवन्नी से रुपया’ बयान पर Jat समाज से मांगें माफी

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बयान ने फिर हलचल बढ़ा दी है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की ‘चवन्नी से रुपया’ वाली टिप्पणी को लेकर राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी ने आपत्ति जताई, वहीं अब बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती (Mayawati) ने भी अखिलेश यादव पर सीधा हमला बोला है। मायावती ने कहा कि अखिलेश को जयंत चौधरी के साथ-साथ जाट समाज से भी माफी मांगनी चाहिए। कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद? दरअसल, अखिलेश यादव ने अपने पुराने राजनीतिक सहयोगियों पर निशाना साधते हुए कहा था कि सपा ने कुछ लोगों को ‘चवन्नी से रुपया’ बनाया, लेकिन बाद में वही लोग पार्टी से अलग हो गए। उनके इस बयान को जयंत चौधरी और राष्ट्रीय लोकदल से जोड़कर देखा गया। अखिलेश की टिप्पणी सामने आने के बाद जयंत चौधरी ने भी जवाब दिया। उनका कहना था कि अगर राजनीतिक आलोचना करनी है तो सीधे उनका नाम लिया जाए। पूरे जाट समाज को इस तरह की टिप्पणी से जोड़ना ठीक नहीं है। Mayawati ने अखिलेश को घेरा विवाद बढ़ा तो मायावती ने अखिलेश यादव को निशाने पर ले लिया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन किसी समाज या सम्मानित राजनीतिक परिवार के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है। मायावती ने अखिलेश से जयंत चौधरी, चौधरी चरण सिंह के परिवार और जाट समाज से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने सपा पर आरोप लगाया कि चुनावी जरूरत के हिसाब से पार्टी अपने राजनीतिक सहयोगियों के प्रति रुख बदलती रही है। ‘काम निकलने के बाद बदल जाते हैं रंग’ Mayawati ने सपा की राजनीति पर तंज कसते हुए कहा कि जब किसी सहयोगी से राजनीतिक फायदा लेना होता है तो उसे महत्व दिया जाता है, लेकिन काम निकलने के बाद रवैया बदल जाता है। उन्होंने इसी संदर्भ में ‘गिरगिट की तरह रंग बदलने’ वाली बात कही। उनके इस बयान ने यूपी की सियासत में पहले से चल रही बयानबाजी को और तेज कर दिया है। जयंत चौधरी के समर्थन में उतरीं मायावती मायावती का जयंत चौधरी के समर्थन में खुलकर सामने आना राजनीतिक तौर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समाज का प्रभाव लंबे समय से चुनावी समीकरणों में अहम माना जाता है। ऐसे में अखिलेश यादव की टिप्पणी और उसके बाद मायावती का हमला राजनीतिक मायने रखता है। वहीं, समाजवादी पार्टी की ओर से अखिलेश यादव के बयान को लेकर सफाई भी सामने आई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि टिप्पणी का उद्देश्य किसी समाज का अपमान करना नहीं था। 2027 चुनाव से पहले बढ़ेगी सियासी गर्मी? उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी शुरू हो चुकी है। सपा, RLD और बसपा के बीच बदलते समीकरणों के बीच ‘चवन्नी से रुपया’ विवाद ने एक नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अखिलेश यादव मायावती की माफी की मांग पर जवाब देंगे? आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की ओर से और बयान सामने आ सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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इंदौर में 12वीं के छात्र ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, मोबाइल चैट की जांच में जुटी पुलिस

इंदौर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में 12वीं कक्षा के एक छात्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना छोटा बांगड़दा के सुविधा नगर की है। मृतक की पहचान यशपाल (17), पिता बलीराम के रूप में हुई है। वह मूल रूप से विदिशा जिले का रहने वाला था और इंदौर में अपनी बड़ी बहन और जीजा के साथ रहकर पढ़ाई कर रहा था। पुलिस के मुताबिक, यशपाल एक कॉन्वेंट स्कूल में 12वीं कक्षा का छात्र था। उसके पिता किसान हैं। परिवार में दो बहनें और एक भाई हैं। उसकी बड़ी बहन और जीजा भी इंदौर में उसके साथ रहते थे। जीजा फाइनेंस का काम करते हैं। घटना के वक्त घर में अकेला था छात्र पुलिस के अनुसार, घटना के समय यशपाल घर में अकेला था। बाद में परिजनों ने उसे फंदे पर लटका देखा और तत्काल पुलिस को सूचना दी। जानकारी मिलते ही एरोड्रम पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। मोबाइल और चैट की जांच कर रही पुलिस पुलिस ने घटनास्थल से यशपाल का मोबाइल फोन जब्त किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह मोबाइल पर किसी से चैटिंग करता था। अब पुलिस उसके कॉल डिटेल, चैट और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि छात्र ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया। फिलहाल आत्महत्या की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
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Canada

Canada पर 50% Tariff: US Trade Deal का खेल बिगड़ा, PM Carney बोले- देंगे करारा जवाब

US-Canada Trade Deal को लेकर चल रही बातचीत आखिरकार बेनतीजा रही। आखिरी दौर में समझौता नहीं हो सका और इसके बाद अमेरिका ने कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50% Tariff लगा दिया। अमेरिका के इस फैसले ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच पहले से जारी व्यापारिक खींचतान को और तेज कर दिया है। कनाडा ने भी साफ कर दिया है कि वह इस फैसले को चुपचाप स्वीकार नहीं करेगा। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) ने अमेरिका के कदम का Dollar-for-Dollar जवाब देने की बात कही है। यानी कनाडा अमेरिकी सामान पर भी जवाबी शुल्क लगाने की तैयारी में है। आखिरी वक्त में क्यों टूटी Trade Deal? अमेरिका और कनाडा के बीच Trade Deal को लेकर कई दौर की बातचीत हुई थी। उम्मीद थी कि दोनों देश टैरिफ विवाद को खत्म करने के लिए किसी समझौते पर पहुंच जाएंगे। बातचीत के दौरान कुछ मुद्दों पर सहमति बनने के संकेत भी मिले, लेकिन अंतिम चरण में मामला फिर बिगड़ गया। कनाडाई पक्ष के मुताबिक, बातचीत के आखिरी दौर में अमेरिका की ओर से ऐसी शर्तें सामने आईं जिन्हें स्वीकार करना उसके लिए मुश्किल था। इसके बाद समझौते की कोशिश फिलहाल रुक गई। अमेरिका ने लगाया 50% Tariff डील टूटने के बाद अमेरिका ने कनाडा के लगभग 20 अरब डॉलर के उत्पादों पर 50% टैरिफ लागू किया है। हालांकि प्रभावित सामान कनाडा के अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात का एक छोटा हिस्सा है, लेकिन इस फैसले का राजनीतिक और कारोबारी असर बड़ा माना जा रहा है। टैरिफ की चपेट में कई तरह के औद्योगिक और उपभोक्ता उत्पाद आ सकते हैं। इससे दोनों देशों के कारोबारियों के लिए लागत बढ़ने और सप्लाई चेन पर दबाव आने की चिंता भी बढ़ी है। PM Mark Carney का सख्त रुख अमेरिकी फैसले के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने नरम रुख अपनाने के बजाय जवाबी कार्रवाई का संकेत दिया है। कार्नी ने कहा है कि कनाडा अमेरिका के टैरिफ का Dollar-for-Dollar जवाब देगा। सीधी भाषा में समझें तो अगर अमेरिकी टैरिफ से कनाडाई सामान पर अतिरिक्त बोझ बढ़ता है, तो कनाडा भी अमेरिकी उत्पादों पर उसी अनुपात में शुल्क लगाने की दिशा में कदम उठा सकता है। USMCA पर भी मंडरा रहा संकट अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव का असर केवल मौजूदा Tariff War तक सीमित नहीं रह सकता। दोनों देशों के बीच व्यापार को नियंत्रित करने वाले USMCA समझौते की आगे की बातचीत और समीक्षा भी इससे प्रभावित हो सकती है। अमेरिका और कनाडा एक-दूसरे के बड़े व्यापारिक साझेदार हैं। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाला टैरिफ विवाद उद्योगों, कंपनियों और सप्लाई चेन के लिए परेशानी बढ़ा सकता है। अब आगे क्या? फिलहाल दोनों देशों के तेवर देखकर लगता है कि US-Canada Trade War का मुद्दा जल्दी खत्म होने वाला नहीं है। एक तरफ अमेरिका ने 50% Tariff के जरिए दबाव बढ़ाया है, तो दूसरी तरफ कनाडा ने जवाबी कार्रवाई का संकेत देकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि दोनों देशों के बीच बातचीत फिर शुरू होती है या नहीं। अगर बातचीत का रास्ता खुलता है तो टैरिफ विवाद कम हो सकता है, लेकिन फिलहाल Trade Deal का टूटना और 50% Tariff दोनों देशों के रिश्तों में नई चुनौती बनकर सामने आया है। नोट: टैरिफ और व्यापारिक नीतियों में बदलाव तेजी से हो सकते हैं, इसलिए नए सरकारी फैसलों के साथ आंकड़ों और शुल्क दरों में बदलाव संभव है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold-Silver

Gold-Silver Rate: सोना-चांदी ने फिर पकड़ी रफ्तार, जानिए आज का ताजा भाव

सोना-चांदी (Gold-Silver) खरीदने वालों के लिए आज का दिन खास रहा। सराफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं के दाम में जोरदार तेजी देखने को मिली। चांदी की कीमत एक ही कारोबारी सत्र में ₹9,260 बढ़कर करीब ₹2.38 लाख प्रति किलो पहुंच गई। वहीं, 10 ग्राम सोने का भाव भी ₹3,519 चढ़कर करीब ₹1.57 लाख तक पहुंच गया। कीमती धातुओं की कीमतों में इस तेजी ने निवेशकों के साथ-साथ उन लोगों का भी ध्यान खींचा है, जो आने वाले समय में शादी या किसी खास मौके के लिए सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। Silver Price में बड़ा उछाल चांदी की कीमत में हुई तेजी इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में है। करीब ₹9 हजार से ज्यादा की बढ़त के बाद चांदी का भाव ₹2.38 लाख प्रति किलो के आसपास पहुंच गया है। चांदी की कीमत में तेजी के पीछे घरेलू मांग के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल और औद्योगिक मांग को भी अहम माना जाता है। चांदी का इस्तेमाल सिर्फ गहनों और निवेश के लिए ही नहीं होता, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी किया जाता है। इसलिए इसकी कीमत पर वैश्विक आर्थिक गतिविधियों का असर तेजी से दिखाई देता है। Gold Price भी हुआ महंगा चांदी के साथ सोने ने भी तेजी दिखाई। 10 ग्राम सोने की कीमत में ₹3,519 का इजाफा हुआ और भाव करीब ₹1.57 लाख तक पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मजबूती और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ती दिलचस्पी ने घरेलू बाजार को भी सहारा दिया। हाल के कारोबार में कमजोर डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी जैसे संकेतों ने भी सोने की कीमत को सपोर्ट किया है। ऐसे माहौल में निवेशक अक्सर Gold को सुरक्षित विकल्प के तौर पर देखते हैं। क्या ₹1.70 लाख तक पहुंच सकता है Gold? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोने का भाव इस साल ₹1.70 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है? बाजार में ऐसी संभावनाओं को लेकर चर्चा जरूर है, लेकिन कीमत का अगला स्तर कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। अमेरिकी फेड की ब्याज दर नीति, डॉलर की चाल, महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी सोने की दिशा तय करने वाले प्रमुख फैक्टर हैं। अगर इन परिस्थितियों से सोने को लगातार समर्थन मिलता रहा, तो आने वाले महीनों में नए रिकॉर्ड देखने को मिल सकते हैं। खरीदारों के लिए क्या है मतलब? सोने-चांदी की लगातार बढ़ती कीमतों से आम खरीदारों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। खासकर शादी-ब्याह के सीजन में बड़ी मात्रा में खरीदारी करने वालों के लिए कुछ हजार रुपये का अंतर भी बजट पर असर डाल सकता है। हालांकि, सिर्फ तेजी देखकर जल्दबाजी में खरीदारी करना सही रणनीति नहीं मानी जाती। अगर खरीदारी जरूरी है तो स्थानीय सराफा बाजार का ताजा भाव, GST और making charges की जानकारी लेने के बाद ही फैसला करना बेहतर रहेगा। Gold-Silver Rate में आगे भी उतार-चढ़ाव संभव सोना और चांदी इस समय ऊंचे स्तरों पर कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में आगे भी तेजी और मुनाफावसूली दोनों देखने को मिल सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाला छोटा बदलाव भी घरेलू कीमतों पर असर डाल सकता है। फिलहाल चांदी में ₹9,260 की छलांग और सोने में ₹3,519 की बढ़त ने बाजार की तस्वीर जरूर बदल दी है। अगर वैश्विक परिस्थितियां कीमती धातुओं के पक्ष में बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में सोना-चांदी नए स्तरों की ओर बढ़ते नजर आ सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

सोना-चांदी के दाम में गिरावट, 24 कैरेट सोना ₹1.53 लाख और चांदी ₹2.27 लाख किलो; जानें खरीदारी का सही तरीका

सोने और चांदी की कीमतों में 19 अगस्त को गिरावट देखने को मिली है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, चांदी की कीमत 5,772 रुपये घटकर 2.27 लाख रुपये प्रति किलो हो गई है। वहीं 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 1,196 रुपये गिरकर 1.53 लाख रुपये पर आ गया। पिछले कुछ दिनों में कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी के बाद अब बाजार में मुनाफावसूली का असर दिखाई दे रहा है। सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट क्यों आई? 1. मुनाफावसूली का असर पिछले 10-15 दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में अच्छी तेजी देखने को मिली थी। ऐसे में कई निवेशकों और ट्रेडर्स ने मुनाफा निकालने के लिए बिकवाली शुरू कर दी। बाजार में बिकवाली बढ़ने से कीमतों पर दबाव आया और दोनों धातुओं के भाव नीचे आ गए। 2. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें ब्रेंट क्रूड की कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है। कच्चा तेल महंगा होने से दुनियाभर में महंगाई बढ़ने की चिंता बढ़ती है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने या बढ़ाने की संभावना बन सकती है। ऊंची ब्याज दरों को आमतौर पर सोने के लिए नकारात्मक माना जाता है। इस साल सोना करीब 20 हजार रुपये महंगा साल 2026 में अब तक सोने की कीमत में अच्छी तेजी रही है। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोने का भाव 1.33 लाख रुपये से ऊपर था, जो अब करीब 1.53 लाख रुपये हो गया है। हालांकि, इस दौरान कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव भी रहा। 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी ने 3.86 लाख रुपये प्रति किलो का ऑलटाइम हाई बनाया था। वहीं 31 दिसंबर 2025 को चांदी करीब 2.30 लाख रुपये प्रति किलो थी, जो अब 2.27 लाख रुपये पर आ गई है। क्या अभी सोना-चांदी खरीदना सही है? कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने और चांदी की कीमतें अपने ऊंचे स्तर से काफी नीचे आ चुकी हैं। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशक धीरे-धीरे खरीदारी कर सकते हैं, लेकिन एकमुश्त बड़ी रकम लगाने से बचना बेहतर हो सकता है। उनके अनुमान के मुताबिक साल के अंत तक सोना फिर से 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2.80 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है। हालांकि, बाजार की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 3 बातों का रखें ध्यान 1. BIS हॉलमार्क वाला सोना खरीदें सोना खरीदते समय हमेशा BIS हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना लें। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता और कैरेट की जानकारी मिलती है। 2. कीमत और वजन जरूर जांचें खरीदारी से पहले सोने का वजन और उस दिन का भाव अलग-अलग विश्वसनीय स्रोतों से जांच लें। 24, 22 और 18 कैरेट सोने के भाव अलग-अलग होते हैं। 3. मेकिंग चार्ज पर ध्यान दें गहने खरीदते समय मेकिंग चार्ज भी कुल कीमत को काफी प्रभावित करता है। ज्वेलर से मेकिंग या लेबर चार्ज का पूरा ब्रेकअप मांगें और संभव हो तो इस पर बातचीत भी करें। चांदी खरीदते समय शुद्धता कैसे जांचें? चांदी की शुद्धता जांचने के लिए कुछ घरेलू तरीके बताए जाते हैं, जैसे मैग्नेट और आइस टेस्ट। हालांकि, सिर्फ इन घरेलू परीक्षणों के आधार पर चांदी को असली या नकली मानना पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है। बेहतर है कि चांदी की खरीदारी करते समय उसकी शुद्धता, हॉलमार्क और बिल की जानकारी जरूर जांचें। बड़ी खरीदारी में प्रमाणित विक्रेता से खरीदना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।

महिला हॉकी वर्ल्ड कप में भारत की बड़ी जीत, साउथ अफ्रीका को 6-1 से हराकर पूल-D में टॉप पर पहुंची टीम

भारतीय महिला हॉकी टीम ने एफआईएच महिला हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए साउथ अफ्रीका को 6-1 से हरा दिया। एम्सटेलवीन में खेले गए पूल-D के मुकाबले में भारत ने शुरुआत से ही दबदबा बनाए रखा और टूर्नामेंट में अपनी पहली जीत दर्ज की। इस जीत के साथ भारत पूल-D की पॉइंट्स टेबल में शीर्ष पर पहुंच गया है। भारत की ओर से सुनेलिता टोप्पो, नवनीत कौर, सुशीला चानू, दीपिका, लालरेमसियामी और साक्षी राणा ने एक-एक गोल किया। साउथ अफ्रीका के लिए एकमात्र गोल कायला डी वाल ने 55वें मिनट में किया। यह वर्ल्ड कप में भारत की अब तक की सबसे बड़ी जीत भी रही। नवनीत ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदला भारत ने पहले क्वार्टर में ही सुनेलिता टोप्पो के गोल से बढ़त बना ली थी। इसके बाद दूसरे क्वार्टर की शुरुआत में नवनीत कौर ने पेनल्टी कॉर्नर को शानदार तरीके से गोल में बदला। 17वें मिनट में नवनीत ने एंगल बदलते हुए लो और तेज शॉट लगाया, जिसे साउथ अफ्रीकी गोलकीपर रोक नहीं सकीं। भारत की बढ़त 2-0 हो गई। इसके बाद भारतीय टीम ने लगातार आक्रमण जारी रखा और सर्कल में कई मौके बनाए। सुशीला के गोल से भारत 3-0 आगे 25वें मिनट में भारत ने तीसरा गोल किया। दीपिका के ड्रैगफ्लिक पर साउथ अफ्रीकी डिफेंस से डिफ्लेक्शन हुआ और गेंद सुशीला चानू के पास पहुंची। सुशीला ने मौके का फायदा उठाते हुए गेंद को गोल में पहुंचा दिया। भारत ने 3-0 की मजबूत बढ़त बना ली। इसके बाद भी भारतीय टीम ने दबाव कम नहीं किया और लगातार पेनल्टी कॉर्नर व सर्कल एंट्री हासिल करती रही। तीसरे क्वार्टर में तीन और गोल भारत ने तीसरे क्वार्टर में मुकाबले को पूरी तरह अपने नियंत्रण में कर लिया। दीपिका, लालरेमसियामी और साक्षी राणा ने गोल कर स्कोर 6-0 कर दिया। साउथ अफ्रीका ने आखिरी क्वार्टर में वापसी की कोशिश की और 55वें मिनट में कायला डी वाल ने गोल कर स्कोर 6-1 किया, लेकिन भारत ने बाकी समय में अपनी बढ़त कायम रखी और मुकाबला अपने नाम कर लिया। टॉप-8 की रेस में भारत की स्थिति मजबूत इस जीत के बाद भारत की अगले दौर में पहुंचने की स्थिति मजबूत हो गई है। टीम को अब अपने आखिरी पूल मुकाबले में इंग्लैंड के खिलाफ कम से कम ड्रॉ की जरूरत होगी, जिससे वह टॉप-8 में जगह पक्की कर सके। भारत ने टूर्नामेंट के अपने पहले मुकाबले में ओलिंपिक सिल्वर मेडलिस्ट चीन के खिलाफ 2-2 से ड्रॉ खेला था। उस मैच में नवनीत कौर और दीपिका ने भारत के लिए गोल किए थे। भारत के लिए शानदार शुरुआत चीन के खिलाफ ड्रॉ के बाद साउथ अफ्रीका पर 6-1 की बड़ी जीत ने भारतीय टीम के अभियान को मजबूती दी है। अब टीम की नजर इंग्लैंड के खिलाफ आखिरी पूल मुकाबले पर होगी, जहां एक अंक भी भारत को अगले दौर में पहुंचाने के लिए काफी हो सकता है।

टाटा संस की AGM पहली बार टली, कानूनी अड़चन से अटकी बैठक; चेयरमैन समेत कई अहम फैसले प्रभावित

मुंबई स्थित टाटा समूह के मुख्यालय बॉम्बे हाउस में 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) स्थगित हो गई। टाटा संस के इतिहास में यह पहली बार है जब कंपनी की AGM टली है। चेयरमैन एन चंद्रशेखरन बैठक में शामिल होने के लिए सुबह ही पहुंच गए थे, लेकिन कानूनी और तकनीकी अड़चनों के चलते बैठक में कोई फैसला नहीं हो सका। पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि AGM के लिए जरूरी कोरम पूरा नहीं हो पाया। इस पूरे घटनाक्रम का असर कंपनी के कई महत्वपूर्ण फैसलों और टाटा समूह में नेतृत्व की आगे की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। सवाल 1: AGM क्यों टली? टाटा संस के नियमों के मुताबिक AGM के लिए कम से कम 5 सदस्यों की व्यक्तिगत मौजूदगी जरूरी है। साथ ही सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) की ओर से संयुक्त रूप से नामित प्रतिनिधि की मौजूदगी भी जरूरी है। बोर्ड मीटिंग नहीं हो पाने के कारण दोनों ट्रस्ट संयुक्त प्रतिनिधि का नाम तय नहीं कर सके। यह नियम तब तक लागू है, जब तक दोनों ट्रस्टों के पास टाटा संस की कम से कम 40% हिस्सेदारी है। फिलहाल SRTT और SDTT के पास करीब 51% और पूरे टाटा ट्रस्ट्स नेटवर्क के पास करीब 66% हिस्सेदारी बताई गई है। सवाल 2: SRTT की बैठक क्यों नहीं हो पा रही? महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने मई में SRTT के बोर्ड गठन से जुड़ी जांच को लेकर निर्देश जारी किए थे। इसके बाद से ट्रस्ट की बैठक नहीं हो सकी है। इसी वजह से AGM के लिए संयुक्त प्रतिनिधि के नाम पर भी फैसला नहीं हो पाया। सवाल 3: विवाद किस कानून से जुड़ा है? मामला महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट की धारा 30A (2) से जुड़ा है। यह प्रावधान 2025 के संशोधन के जरिए लागू किया गया था। इसके तहत किसी पब्लिक ट्रस्ट के बोर्ड में लाइफटाइम या परमानेंट ट्रस्टियों की संख्या कुल ट्रस्टियों के 25% तक सीमित की गई है। SRTT का तर्क है कि यह प्रावधान नया है और इसे पहले से की गई नियुक्तियों पर लागू नहीं किया जा सकता। सवाल 4: AGM टलने से कौन से फैसले अटके? AGM स्थगित होने से कंपनी के तीन अहम एजेंडे फिलहाल अटक गए हैं: सवाल 5: एन चंद्रशेखरन और नए चेयरमैन की स्थिति क्या है? एन चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को स्पष्ट किया था कि वह टाटा संस के चेयरमैन पद से हट रहे हैं और अगले कार्यकाल के लिए पद पर नहीं रहेंगे। हालांकि, वह टाटा संस के डायरेक्टर भी हैं। AGM स्थगित होने के बाद वह अगली बैठक होने तक डायरेक्टर पद पर बने रहेंगे। दूसरी ओर, नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। SDTT ने 13 अगस्त को नए चेयरमैन के चयन के लिए कमेटी बनाने का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन SRTT की बैठक नहीं होने से प्रक्रिया आगे बढ़ने में अड़चन आ सकती है। सवाल 6: क्या AGM स्थगित करने को लेकर नियम स्पष्ट हैं? टाटा संस के आर्टिकल 87 में कोरम पूरा नहीं होने की स्थिति में बैठक स्थगित करने का प्रावधान है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक यदि SRTT और SDTT का संयुक्त प्रतिनिधि आगे भी नियुक्त नहीं हो पाता है, तो स्थगित AGM को किस तरह आगे बढ़ाया जाएगा, इस स्थिति को लेकर नियमों में स्पष्टता नहीं है। सवाल 7: टाटा ट्रस्ट्स में पिछले एक साल से किन मुद्दों पर मतभेद? पिछले एक साल में टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टियों के बीच बोर्ड में प्रतिनिधित्व, नए ट्रस्टियों की नियुक्ति, टाटा संस की संभावित लिस्टिंग और एयर इंडिया, टाटा डिजिटल व टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कारोबारों में पूंजी आवंटन को लेकर मतभेद सामने आए हैं। इन मतभेदों के बीच कुछ बड़े इस्तीफे भी हुए हैं। टाटा समूह के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम? टाटा संस की AGM का पहली बार स्थगित होना सिर्फ एक कॉरपोरेट बैठक का टलना नहीं है। इसका सीधा असर कंपनी के वित्तीय फैसलों, बोर्ड में नियुक्तियों और नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। अब अगली बैठक कब और किस तरह होती है, इस पर टाटा संस के साथ-साथ पूरे टाटा ट्रस्ट्स की आगे की रणनीति भी निर्भर करेगी।

खेलों पर अगले 5 साल में ₹36,441 करोड़ खर्च करेगी सरकार, 2036 ओलिंपिक में टॉप-10 का लक्ष्य

भारत सरकार खेलों को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति मजबूत करने के लिए अगले पांच वर्षों में ₹36,441 करोड़ खर्च करेगी। भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के अनुसार, यह राशि 2026 से 2031 के बीच रिवैंप्ड खेलो इंडिया योजना के तहत खर्च की जाएगी। सरकार ने बजट के साथ भविष्य के ओलिंपिक के लिए मेडल लक्ष्य भी तय किए हैं। भारत का लक्ष्य 2036 ओलिंपिक की मेडल टैली में टॉप-10 और 2048 ओलिंपिक में टॉप-5 देशों में जगह बनाना है। भारत 2036 ओलिंपिक की मेजबानी की दावेदारी भी पेश करना चाहता है। वहीं, 2048 ओलिंपिक तक देश की आजादी के 100 वर्ष पूरे हो चुके होंगे। ऐसे में सरकार लंबे समय की रणनीति के तहत भारतीय खिलाड़ियों को मजबूत करने पर जोर दे रही है। खिलाड़ियों की संख्या 10 गुना बढ़ाने की तैयारी SAI रीजनल सेंटर मुंबई के क्षेत्रीय निदेशक पांडुरंग चाटे के मुताबिक, रिवैंप्ड खेलो इंडिया योजना का उद्देश्य अलग-अलग योजनाओं के बजाय खिलाड़ियों के लिए पूरी खेल यात्रा तैयार करना है। योजना के बजट को करीब 8 गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही 2026 से 2031 के बीच योजना से लाभ पाने वाले खिलाड़ियों की संख्या को भी 10 गुना तक बढ़ाने की योजना है। 30 हजार खिलाड़ियों को मिलेगा फायदा रिवैंप्ड खेलो इंडिया योजना के तहत करीब 30 हजार खिलाड़ियों को सहायता देने की योजना है। योजना में केंद्र और राज्य के बीच खर्च का अनुपात 60:40 रखा गया है। SAI रीजनल सेंटर मुंबई ने कहा कि रिवैंप्ड खेलो इंडिया योजना महाराष्ट्र के मौजूदा स्पोर्ट्स इकोसिस्टम को और मजबूत करने का अवसर देगी। गौरतलब है कि पेरिस ओलिंपिक 2024 में भारत ने कुल 6 पदक जीते थे और मेडल टैली में 71वें स्थान पर रहा था। अब सरकार का फोकस खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और लंबी अवधि की सहायता उपलब्ध कराकर ओलिंपिक में भारत के प्रदर्शन को नई ऊंचाई देने पर है।

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