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Gandhinagar

Gandhinagar Municipal Election: भाजपा को बहुमत, कांग्रेस को फायदा; AAP को एक भी सीट नहीं

Gandhinagar Municipal Election गुजरात की राजधानी गांधीनगर के नगर निगम चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखा है। 44 सीटों वाले नगर निगम में भाजपा ने 38 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। वहीं, कांग्रेस 5 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) इस बार अपना खाता भी नहीं खोल पाई। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। 13 अक्टूबर को सामने आए चुनाव परिणामों में भाजपा के लिए राहत की बात यह रही कि नगर निगम की सत्ता उसके पास बनी रही। हालांकि, पिछली बार के मुकाबले पार्टी की सीटें कम हुई हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस ने अपनी सीटों की संख्या बढ़ाकर स्थानीय राजनीति में अपनी मौजूदगी मजबूत की है। Gandhinagar Election Result: BJP को 38, कांग्रेस को मिलीं 5 सीटें गांधीनगर नगर निगम की 44 सीटों के लिए 11 अक्टूबर को मतदान हुआ था। चुनाव में अलग-अलग राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई। मतगणना के बाद भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। पार्टीवार नतीजे इस प्रकार रहे: इन आंकड़ों से साफ है कि भाजपा ने नगर निगम में बहुमत बनाए रखा है। वहीं, कांग्रेस को मिली पांच सीटें और AAP का खाता नहीं खुलना इस चुनाव के प्रमुख नतीजे रहे। पिछली बार से BJP की सीटें घटीं, कांग्रेस ने बढ़ाई ताकत गांधीनगर नगर निगम के पिछले चुनाव अक्टूबर 2021 में हुए थे। उस समय भाजपा ने 44 में से 41 सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस को दो सीटें मिली थीं, जबकि आम आदमी पार्टी ने भी एक सीट हासिल की थी। इस बार तस्वीर में कुछ बदलाव देखने को मिला। भाजपा की सीटें 41 से घटकर 38 रह गईं, जबकि कांग्रेस दो से बढ़कर पांच सीटों तक पहुंच गई। AAP पिछले चुनाव में मिली अपनी एकमात्र सीट भी नहीं बचा सकी। यानी भाजपा ने अपनी सत्ता कायम रखी, लेकिन कांग्रेस ने पिछली बार के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया। इन नतीजों ने गांधीनगर की स्थानीय राजनीति में दोनों प्रमुख दलों की स्थिति को फिर चर्चा में ला दिया है। Ward No. 6 Result: कांग्रेस ने चारों सीटों पर दर्ज की जीत गांधीनगर नगर निगम चुनाव में वार्ड नंबर 6 का परिणाम भी खास रहा। यहां कांग्रेस ने सभी चार सीटों पर जीत दर्ज की। वार्ड नंबर 7 में भी कांग्रेस को एक सीट मिली, जबकि बाकी तीन सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार विजयी रहे। इसके अलावा, वार्ड नंबर 2 में निर्दलीय उम्मीदवार दीपिका वाघेला ने जीत हासिल की। यह परिणाम दिखाता है कि भाजपा को कुल मिलाकर स्पष्ट बहुमत मिलने के बावजूद कुछ वार्डों में मुकाबला अलग रहा। Gandhinagar Municipal Election: कितना रहा मतदान? गांधीनगर नगर निगम चुनाव में 59.25 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। चुनाव के लिए 11 वार्डों की 44 सीटों पर कुल 130 उम्मीदवार मैदान में थे। 11 अक्टूबर को मतदान के बाद 13 अक्टूबर को मतगणना हुई। नतीजे सामने आने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि भाजपा नगर निगम में अपना बहुमत बरकरार रखने में सफल रही है। Gujarat Civic Polls: थारा और ओखा में भी BJP को बढ़त गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में गांधीनगर के अलावा थारा और ओखा नगरपालिका के नतीजे भी चर्चा में रहे। थारा नगरपालिका की 24 सीटों में भाजपा ने 19 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को पांच सीटें मिलीं। वहीं, ओखा नगरपालिका में मतदान वाली 32 सीटों में भाजपा ने 29 और कांग्रेस ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की। ओखा में चार अन्य सीटें भाजपा पहले ही निर्विरोध जीत चुकी थी। इस तरह गांधीनगर, थारा और ओखा के चुनाव परिणामों में भाजपा ने अपनी स्थिति बनाए रखी। हालांकि, गांधीनगर में कांग्रेस की सीटें बढ़ना भी इन नतीजों का एक अहम पहलू रहा। Gandhinagar Election Result 2026: आगे किस पर रहेगी नजर? चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद अब गांधीनगर नगर निगम में नई परिषद के गठन और महापौर के चयन की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। महापौर पद को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल, चुनाव का सबसे बड़ा नतीजा यही है कि भाजपा ने 38 सीटों के साथ नगर निगम में अपना बहुमत बरकरार रखा है। कांग्रेस को पिछले चुनाव के मुकाबले तीन सीटों का फायदा हुआ, जबकि AAP इस बार एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी। गांधीनगर के ये नतीजे स्थानीय निकाय की राजनीति में भाजपा की स्थिति और कांग्रेस की बढ़ी हुई सीटों, दोनों को सामने रखते हैं। आने वाले समय में नगर निगम के फैसलों और नई परिषद के कामकाज पर लोगों की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UPI

UPI Charges Update: ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% फीस, दिवाली तक टला फैसला

UPI Transaction Charges में डिजिटल पेमेंट करने वाले दुकानदारों और कारोबारियों के लिए UPI चार्ज से जुड़ा अहम अपडेट सामने आया है। ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% फीस लगाने की व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होनी थी, लेकिन त्योहारी सीजन को देखते हुए इसे दिवाली तक टालने की जानकारी सामने आई है। इससे त्योहारों के दौरान डिजिटल पेमेंट करने वाले कारोबारियों को फिलहाल राहत मिल सकती है। हालांकि, इस फैसले से जुड़ी नई तारीख और लागू होने वाली शर्तों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। इसलिए ग्राहकों और दुकानदारों को किसी भी बदलाव से पहले संबंधित दिशानिर्देशों पर ध्यान देना चाहिए। UPI Payment Charges: क्या है पूरा मामला? आज देश में छोटी दुकानों से लेकर बड़े शोरूम तक UPI के जरिए भुगतान किया जाता है। सब्जी खरीदने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग और बड़े बिलों का भुगतान करने तक, QR कोड स्कैन करना लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है। इसी बीच ₹2,000 से ज्यादा के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की चर्चा है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने वाली थी, लेकिन दिवाली के दौरान बाजार में बढ़ने वाली खरीदारी और डिजिटल लेनदेन को देखते हुए इसे आगे बढ़ाने की बात कही गई है। यहां समझना जरूरी है कि MDR का संबंध कारोबारी भुगतान से है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर UPI यूजर को पैसे भेजने या प्राप्त करने पर अतिरिक्त फीस देनी होगी। क्या PhonePe और Google Pay से पेमेंट करना होगा महंगा? UPI चार्ज की खबर सामने आने के बाद कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या PhonePe, Google Pay और दूसरे UPI ऐप से भुगतान करने पर अब अतिरिक्त पैसे देने होंगे। फिलहाल आम ग्राहकों को यह समझना चाहिए कि प्रस्तावित मर्चेंट चार्ज और व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI ट्रांसफर अलग-अलग हैं। सामान्य P2P ट्रांजैक्शन पर इस तरह का MDR लागू नहीं होता। इसी तरह, निर्धारित नियमों के तहत आने वाले छोटे मूल्य के मर्चेंट ट्रांजैक्शन भी इस चार्ज से बाहर रह सकते हैं। इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि ₹2,000 से अधिक का हर UPI पेमेंट महंगा हो जाएगा। दुकानदारों को क्यों मिल सकती है राहत? दिवाली के समय बाजारों में ग्राहकों की भीड़ बढ़ जाती है। कपड़े, मिठाई, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल और घरेलू सामान की दुकानों पर डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ता है। ऐसे में ट्रांजैक्शन चार्ज से जुड़े फैसले को आगे बढ़ाने से कारोबारियों को त्योहार के दौरान भुगतान व्यवस्था में बदलाव के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है। खासकर छोटे दुकानदारों के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके कारोबार में UPI पेमेंट की बड़ी भूमिका होती है। हालांकि, चार्ज किस पर और किन शर्तों के तहत लागू होगा, यह संबंधित आधिकारिक नियमों पर निर्भर करेगा। UPI Transaction Fee: कब लागू होगा नया नियम? ₹2,000 से अधिक के पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% फीस से जुड़े फैसले को दिवाली तक टालने की खबर सामने आई है। लेकिन नई लागू तारीख और अंतिम नियमों की पुष्टि आधिकारिक घोषणा से ही की जानी चाहिए। इसलिए ग्राहकों और कारोबारियों को फिलहाल किसी भी अपुष्ट जानकारी के आधार पर यह नहीं मानना चाहिए कि सभी UPI पेमेंट पर चार्ज लगने वाला है। UPI यूजर्स के लिए जरूरी सलाह UPI ने देश में डिजिटल भुगतान को आसान और तेज बनाया है। ऐसे में चार्ज से जुड़ी किसी भी नई व्यवस्था का असर समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि नियम किस प्रकार के ट्रांजैक्शन पर लागू होता है। आम यूजर्स को अपने सामान्य डिजिटल पेमेंट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। वहीं, दुकानदारों को किसी भी संभावित चार्ज के बारे में अपने बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर से जानकारी लेनी चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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SIR

Patna SIR Protest: पटना में छात्रों का हंगामा, बैरिकेडिंग तोड़ी; छात्राओं को खींचकर ले जाने का आरोप

बिहार की राजधानी पटना (Patna) में SIR (Special Intensive Revision) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में सड़क पर उतरे छात्रों और प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की खबर सामने आई। वहीं, पुलिस की गाड़ी की चाबी लेकर भागने और प्रदर्शन कर रही छात्राओं को खींचकर ले जाने के आरोपों ने भी इस मामले को चर्चा में ला दिया है। प्रदर्शन की इन घटनाओं के बीच अब पुलिस की कार्रवाई और SIR की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर सबकी नजर है। Patna में SIR के खिलाफ प्रदर्शन, सड़क पर उतरे छात्र पटना में SIR के विरोध में छात्रों और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की नाराजगी मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलती से मतदाता सूची से न हटे। SIR यानी Special Intensive Revision का उद्देश्य मतदाता सूची की विशेष जांच और उसे अपडेट करना है। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। Protest के दौरान टूटी बैरिकेडिंग, पुलिस से टकराव प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी। इसके बाद मौके पर तनाव बढ़ गया और पुलिस के साथ टकराव की स्थिति बन गई। इसी दौरान पुलिस की गाड़ी की चाबी लेकर भागने की घटना भी सामने आई है। हालांकि, इस घटना की परिस्थितियों और इसमें शामिल लोगों के बारे में आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। छात्राओं को खींचकर ले जाने का आरोप पटना में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि प्रदर्शन कर रही कुछ छात्राओं को पुलिसकर्मी खींचकर वहां से ले गए। इस घटना को लेकर प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार पर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, छात्राओं की संख्या, उन्हें हिरासत में लिए जाने की स्थिति और इस मामले में पुलिस का पक्ष स्पष्ट होने के बाद ही घटनाक्रम की पूरी जानकारी सामने आएगी। क्या है SIR और क्यों हो रहा है इसका विरोध? SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision है। यह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाताओं के विवरण की जांच की जाती है और सूची को अपडेट किया जाता है। इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे संगठनों की प्रमुख चिंता यह है कि जांच के दौरान किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए। उनका जोर पारदर्शिता, सही दस्तावेजों और मतदाताओं को अपनी शिकायत दर्ज कराने का उचित अवसर देने पर है। वहीं, मतदाता सूची को अपडेट करना चुनावी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। ऐसे में इस मुद्दे पर स्पष्ट दिशा-निर्देश और शिकायतों का समय पर समाधान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Patna Protest के बाद पुलिस की कार्रवाई पर नजर पटना में SIR के खिलाफ हुए इस प्रदर्शन के बाद अब पुलिस की कार्रवाई और घटनास्थल से सामने आने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी। बैरिकेडिंग तोड़ने, पुलिस की गाड़ी की चाबी लेकर भागने और छात्राओं को खींचकर ले जाने के आरोपों की पुष्टि के लिए आधिकारिक बयान और उपलब्ध वीडियो अहम होंगे। फिलहाल, इस घटना से जुड़ी सभी जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष और हिरासत से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi

Rahul Gandhi Meeting: CEC के खिलाफ Protest तेज, INDIA ब्लॉक की नई रणनीति

चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच जारी विवाद अब और तेज होता नजर आ रहा है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। इसी बीच राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के नेताओं को चाय पर चर्चा के लिए अपने आवास पर बुलाया है। इस बैठक में चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों, SIR प्रक्रिया और आगे के विरोध प्रदर्शन की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। इससे पहले सोमवार को राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं ने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया था। प्रदर्शन के बाद पुलिस कार्रवाई और FIR दर्ज होने को लेकर भी राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी और वोटरों के नाम हटाए जाने से जुड़े सवालों का जवाब मिलना चाहिए। वहीं, चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रिया का बचाव किया है। Rahul Gandhi की High Tea Meeting में क्या होगा? Rahul Gandhi ने INDIA ब्लॉक के सांसदों और अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों को बैठक के लिए आमंत्रित किया है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार विरोध दर्ज करा रहा है। बैठक में SIR यानी Special Intensive Revision, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर चर्चा हो सकती है। विपक्षी दल आगे आंदोलन जारी रखने या कानूनी रास्ते से अपनी मांग उठाने को लेकर भी रणनीति बना सकते हैं। हालांकि, बैठक में कौन-कौन से फैसले लिए जाएंगे, यह चर्चा पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। Supreme Court March: राहुल गांधी के साथ कई विपक्षी नेता सड़क पर उतरे सोमवार, 12 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के कई नेताओं ने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। इस प्रदर्शन में राहुल गांधी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और दूसरे विपक्षी नेताओं के शामिल होने की खबरें सामने आईं। प्रदर्शन के दौरान विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। नेताओं ने मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने और SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की। विपक्ष का कहना है कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच जरूरी है। मार्च के बाद विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त याचिका भी दाखिल की। इसमें चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को उठाया गया है। SIR Controversy: मतदाता सूची को लेकर क्यों बढ़ा विवाद? SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision है। इसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची की जांच और संशोधन की प्रक्रिया चलाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना है, लेकिन इसे लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर सवाल हैं। उनका कहना है कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम सूची से नहीं हटना चाहिए और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। आयोग के अनुसार, मतदाता सूची में नाम जोड़ने या संशोधन कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया मौजूद है। ऐसे में SIR को लेकर जारी विवाद अब राजनीतिक मंच के साथ-साथ कानूनी स्तर पर भी पहुंच गया है। Opposition Protest पर FIR, पुलिस की कार्रवाई से बढ़ी हलचल सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाले गए मार्च के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़े मामलों में FIR दर्ज की हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान बैरिकेडिंग, सड़क पर नारे लिखने और प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन जैसे आरोपों की जांच की जा रही है। अलग-अलग रिपोर्ट्स में FIR की संख्या को लेकर अंतर सामने आया है। इसलिए सभी मामलों की संख्या और उनमें लगाए गए आरोपों को अलग-अलग समझना जरूरी है। विपक्ष ने इन प्रदर्शनों के जरिए चुनाव आयोग से जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग की है। वहीं, पुलिस का पक्ष है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई। FIR दर्ज होना अपने आप में किसी आरोप को साबित नहीं करता; मामलों का निपटारा कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा। आठ दिनों में कई प्रदर्शन, दिल्ली में जारी है सियासी हलचल CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। विपक्षी दलों के अलावा सामाजिक और छात्र संगठनों के कुछ प्रतिनिधियों ने भी अपनी आवाज उठाई है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर भी पुलिस की कार्रवाई चर्चा में रही। 13 अक्टूबर को प्रदर्शन से जुड़े कुछ नेताओं को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। इनमें आशुतोष रांका और सौरव दास के नाम भी रिपोर्ट किए गए हैं। वहीं, दिल्ली में प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों और अनुमति से जुड़े नियमों को लेकर भी बहस जारी है। विपक्ष का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, जबकि प्रशासन ने कानून-व्यवस्था और निर्धारित नियमों के पालन पर जोर दिया है। अब आगे क्या करेगा INDIA ब्लॉक? राहुल गांधी की बैठक को मौजूदा विवाद के अगले चरण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्षी दलों के सामने एक ओर सड़कों पर विरोध जारी रखने का विकल्प है, तो दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाने का रास्ता भी है। बैठक के बाद विपक्ष की रणनीति क्या होगी और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सबकी नजर रहेगी। फिलहाल SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अजरबैजान

Hijab Controversy: अजरबैजान में School Dress Code पर विवाद, तुर्किये में भी Protest

अजरबैजान में स्कूलों के ड्रेस कोड को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। देश के कुछ स्कूलों में हिजाब पहनकर आने वाली छात्राओं को लेकर उठे विवाद के बाद छात्राओं ने कक्षाओं का बहिष्कार किया। वहीं, पड़ोसी देश तुर्किये में भी इस मुद्दे से जुड़े विरोध प्रदर्शनों की खबर सामने आई है। इस पूरे मामले ने धार्मिक स्वतंत्रता, स्कूल यूनिफॉर्म और धर्मनिरपेक्ष शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अजरबैजान की आबादी में मुस्लिम समुदाय बहुसंख्यक है। इसके बावजूद देश में सरकारी संस्थानों और शिक्षा व्यवस्था में धर्मनिरपेक्षता को महत्व दिया जाता है। ऐसे में स्कूलों में हिजाब पहनने को लेकर सामने आया विवाद कई सवाल खड़े कर रहा है। छात्राओं और उनके समर्थकों के लिए यह धार्मिक पहचान से जुड़ा मुद्दा है, जबकि स्कूल ड्रेस कोड को लेकर प्रशासन के अपने नियम हैं। Azerbaijan में Hijab Ban को लेकर क्यों बढ़ा विवाद? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजरबैजान के कुछ स्कूलों में ड्रेस कोड को सख्ती से लागू किए जाने के बाद हिजाब पहनने वाली छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी के विरोध में कुछ छात्राओं ने कक्षाओं का बहिष्कार किया। हालांकि, इस मामले में यह समझना जरूरी है कि स्कूल ड्रेस कोड को लेकर सख्ती और पूरे देश में हिजाब पर स्पष्ट प्रतिबंध लगने की बात एक जैसी नहीं है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह दावा करना सही नहीं होगा कि अजरबैजान के सभी स्कूलों में हिजाब पहनने पर एक समान प्रतिबंध लागू है। 96% मुस्लिम आबादी, फिर भी Secular Education पर जोर अजरबैजान में मुस्लिम आबादी की हिस्सेदारी काफी अधिक है, लेकिन देश की शासन व्यवस्था धर्मनिरपेक्ष है। यहां धार्मिक परंपराओं और सार्वजनिक संस्थानों के नियमों के बीच संतुलन को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है। स्कूलों में यूनिफॉर्म लागू करने के पीछे एकरूपता और अनुशासन जैसे कारण दिए जाते हैं। दूसरी ओर, हिजाब पहनने वाली छात्राओं के लिए यह उनकी धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत पहचान से जुड़ा विषय है। यही वजह है कि यह विवाद केवल स्कूल के कपड़ों तक सीमित नहीं है। इसके साथ यह सवाल भी जुड़ा है कि शिक्षा संस्थानों में एक जैसे नियम लागू करते समय विद्यार्थियों की धार्मिक मान्यताओं का कितना ध्यान रखा जाना चाहिए। छात्राओं ने Classes का किया Boycott ड्रेस कोड को लेकर असहमति के बाद कुछ छात्राओं के कक्षाओं का बहिष्कार करने की खबर सामने आई। इस विरोध को स्कूलों में हिजाब पहनने से जुड़े नियमों के प्रति नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, विरोध में शामिल छात्राओं की कुल संख्या और प्रभावित स्कूलों के बारे में विस्तृत, स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी स्पष्ट नहीं है। इसलिए इस घटना को पूरे देश में व्यापक विरोध बताने से पहले आधिकारिक जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है। Türkiye में भी Protest की चर्चा अजरबैजान के मामले के बीच पड़ोसी देश तुर्किये में भी विरोध प्रदर्शन की खबरें सामने आई हैं। तुर्किये में धर्मनिरपेक्षता और सार्वजनिक संस्थानों में धार्मिक प्रतीकों की भूमिका लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। हालांकि, तुर्किये में हुए प्रदर्शनों का अजरबैजान के स्कूलों में ड्रेस कोड से सीधा संबंध है या नहीं, इसे लेकर आयोजकों की मांगों और प्रदर्शन के कारणों की पुष्टि जरूरी है। Hijab और School Dress Code पर छिड़ी बहस अजरबैजान में सामने आया यह विवाद एक अहम सवाल खड़ा करता है—क्या स्कूलों में एक समान ड्रेस कोड लागू करने के साथ विद्यार्थियों की धार्मिक पहचान का सम्मान भी किया जा सकता है? एक तरफ स्कूल प्रशासन के लिए अनुशासन और निर्धारित यूनिफॉर्म का पालन महत्वपूर्ण हो सकता है। दूसरी तरफ, छात्राओं के लिए अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कपड़े पहनना व्यक्तिगत स्वतंत्रता का विषय है। फिलहाल, इस मामले में सरकार और स्कूल प्रशासन के आधिकारिक रुख, नियमों के दायरे और विरोध प्रदर्शनों की स्थिति पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अजरबैजान में इस विवाद का समाधान किस तरह निकाला जाता है और क्या ड्रेस कोड को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Weather

Weather Update राजस्थान में आंधी का Alert, UP में गंगा उफान पर; पहाड़ों पर बर्फबारी

देश के कई राज्यों में मौसम (Weather) का मिजाज बदल गया है। कहीं तेज हवाओं और आंधी की आशंका है, तो कहीं बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। राजस्थान में आंधी का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में पानी भर गया है। दूसरी ओर, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में बर्फबारी हुई है और हिमाचल प्रदेश में अगले तीन दिनों तक बारिश होने की संभावना है। मौसम के इस बदलाव का असर आम लोगों के साथ किसानों और पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वालों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में घर से निकलने से पहले अपने क्षेत्र का Weather Update जानना जरूरी है। Rajasthan Weather: राजस्थान में आंधी और बारिश का अलर्ट राजस्थान में अक्टूबर के महीने में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। राज्य के कुछ हिस्सों में तेज हवाएं चलने और बारिश होने की संभावना है। मौसम में इस बदलाव से तापमान में गिरावट आ सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है। हालांकि, आंधी और तेज हवाओं के कारण खुले स्थानों पर काम करने वाले लोगों, किसानों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के आधार पर फसलों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएं। UP Flood Update: गंगा का जलस्तर बढ़ा, घरों में घुसा पानी उत्तर प्रदेश में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी के आसपास रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। कुछ निचले इलाकों में पानी भरने से घर और आसपास के क्षेत्र प्रभावित हुए हैं। ऐसे हालात में स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षित रहना और प्रशासन के निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है। गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी के बीच नदी किनारे रहने वाले परिवारों को लगातार स्थिति पर नजर रखनी चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों को जलभराव वाले इलाकों से दूर रखना भी जरूरी है। उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना के कारण लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। Uttarakhand Snowfall: पिथौरागढ़ में बर्फबारी से बढ़ी ठंड उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में बर्फबारी के बाद पहाड़ी इलाकों में ठंड बढ़ने लगी है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम का यह बदलाव स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। बर्फबारी और बारिश के कारण कुछ पहाड़ी रास्तों पर फिसलन बढ़ सकती है। ऐसे में पिथौरागढ़ और आसपास के ऊंचाई वाले इलाकों में जाने वाले यात्रियों को सफर शुरू करने से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए। पहाड़ों में मौसम तेजी से बदल सकता है, इसलिए यात्रा के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है। Himachal Weather: हिमाचल में अगले 3 दिन बारिश के आसार हिमाचल प्रदेश में अगले तीन दिनों तक मौसम खराब रहने की संभावना जताई गई है। राज्य के कई हिस्सों में बारिश हो सकती है, जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी देखने को मिल सकती है। बारिश के कारण तापमान में गिरावट आने से ठंड बढ़ सकती है। पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखनी चाहिए। खराब मौसम के दौरान सड़क की स्थिति को नजरअंदाज करना परेशानी का कारण बन सकता है। Weather Alert: आम लोगों और किसानों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए? देश के अलग-अलग हिस्सों में बदलते मौसम को देखते हुए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। आज का Weather Update: कई राज्यों में बदलेगा मौसम राजस्थान में आंधी का अलर्ट, उत्तर प्रदेश में गंगा का बढ़ता जलस्तर, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में बर्फबारी और हिमाचल प्रदेश में तीन दिनों तक बारिश की संभावना लोगों के लिए सतर्क रहने का संकेत है। मौसम का असर हर जिले में अलग-अलग हो सकता है, इसलिए किसी भी यात्रा या जरूरी काम की योजना बनाने से पहले अपने इलाके का ताजा पूर्वानुमान जरूर देख लें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UPI Charges Update: ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% फीस, दिवाली तक टला फैसला

UPI Transaction Charges में डिजिटल पेमेंट करने वाले दुकानदारों और कारोबारियों के लिए UPI चार्ज से जुड़ा अहम अपडेट सामने आया है। ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% फीस लगाने की व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होनी थी, लेकिन त्योहारी सीजन को देखते हुए इसे दिवाली तक टालने की जानकारी सामने आई है। इससे त्योहारों के दौरान डिजिटल पेमेंट करने वाले कारोबारियों को फिलहाल राहत मिल सकती है। हालांकि, इस फैसले से जुड़ी नई तारीख और लागू होने वाली शर्तों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। इसलिए ग्राहकों और दुकानदारों को किसी भी बदलाव से पहले संबंधित दिशानिर्देशों पर ध्यान देना चाहिए। UPI Payment Charges: क्या है पूरा मामला? आज देश में छोटी दुकानों से लेकर बड़े शोरूम तक UPI के जरिए भुगतान किया जाता है। सब्जी खरीदने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग और बड़े बिलों का भुगतान करने तक, QR कोड स्कैन करना लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है। इसी बीच ₹2,000 से ज्यादा के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की चर्चा है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने वाली थी, लेकिन दिवाली के दौरान बाजार में बढ़ने वाली खरीदारी और डिजिटल लेनदेन को देखते हुए इसे आगे बढ़ाने की बात कही गई है। यहां समझना जरूरी है कि MDR का संबंध कारोबारी भुगतान से है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर UPI यूजर को पैसे भेजने या प्राप्त करने पर अतिरिक्त फीस देनी होगी। क्या PhonePe और Google Pay से पेमेंट करना होगा महंगा? UPI चार्ज की खबर सामने आने के बाद कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या PhonePe, Google Pay और दूसरे UPI ऐप से भुगतान करने पर अब अतिरिक्त पैसे देने होंगे। फिलहाल आम ग्राहकों को यह समझना चाहिए कि प्रस्तावित मर्चेंट चार्ज और व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI ट्रांसफर अलग-अलग हैं। सामान्य P2P ट्रांजैक्शन पर इस तरह का MDR लागू नहीं होता। इसी तरह, निर्धारित नियमों के तहत आने वाले छोटे मूल्य के मर्चेंट ट्रांजैक्शन भी इस चार्ज से बाहर रह सकते हैं। इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि ₹2,000 से अधिक का हर UPI पेमेंट महंगा हो जाएगा। दुकानदारों को क्यों मिल सकती है राहत? दिवाली के समय बाजारों में ग्राहकों की भीड़ बढ़ जाती है। कपड़े, मिठाई, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल और घरेलू सामान की दुकानों पर डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ता है। ऐसे में ट्रांजैक्शन चार्ज से जुड़े फैसले को आगे बढ़ाने से कारोबारियों को त्योहार के दौरान भुगतान व्यवस्था में बदलाव के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है। खासकर छोटे दुकानदारों के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके कारोबार में UPI पेमेंट की बड़ी भूमिका होती है। हालांकि, चार्ज किस पर और किन शर्तों के तहत लागू होगा, यह संबंधित आधिकारिक नियमों पर निर्भर करेगा। UPI Transaction Fee: कब लागू होगा नया नियम? ₹2,000 से अधिक के पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% फीस से जुड़े फैसले को दिवाली तक टालने की खबर सामने आई है। लेकिन नई लागू तारीख और अंतिम नियमों की पुष्टि आधिकारिक घोषणा से ही की जानी चाहिए। इसलिए ग्राहकों और कारोबारियों को फिलहाल किसी भी अपुष्ट जानकारी के आधार पर यह नहीं मानना चाहिए कि सभी UPI पेमेंट पर चार्ज लगने वाला है। UPI यूजर्स के लिए जरूरी सलाह UPI ने देश में डिजिटल भुगतान को आसान और तेज बनाया है। ऐसे में चार्ज से जुड़ी किसी भी नई व्यवस्था का असर समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि नियम किस प्रकार के ट्रांजैक्शन पर लागू होता है। आम यूजर्स को अपने सामान्य डिजिटल पेमेंट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। वहीं, दुकानदारों को किसी भी संभावित चार्ज के बारे में अपने बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर से जानकारी लेनी चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Stock Market

Stock Market Today: सेंसेक्स 600 अंक उछला, Nifty में 200 अंकों की तेजी; IT और Banking Stocks में खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में मंगलवार, 13 अक्टूबर को कारोबार के दौरान अच्छी तेजी देखने को मिली। शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स ने जोरदार वापसी की और 600 अंकों से ज्यादा की बढ़त दर्ज की। वहीं, निफ्टी भी करीब 200 अंक चढ़ गया। IT और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी बढ़ने से बाजार को सहारा मिला। सुबह करीब 10 बजे BSE Sensex 72,500 के ऊपर कारोबार कर रहा था, जबकि NSE Nifty 50 भी 22,500 के पार पहुंच गया। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों को राहत मिली। हालांकि, कई शेयरों में बिकवाली जारी रहने से बाजार की तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं रही। Sensex-Nifty में तेजी, निवेशकों को मिली राहत शेयर बाजार में मंगलवार को खरीदारी का माहौल मजबूत होता दिखाई दिया। सेंसेक्स करीब 660 अंक चढ़कर 72,585 के आसपास पहुंच गया। दूसरी ओर, निफ्टी में लगभग 202 अंकों की बढ़त दर्ज की गई और यह 22,565 के स्तर के करीब कारोबार करता नजर आया। पिछले सत्रों में बाजार पर दबाव देखने को मिला था। ऐसे में प्रमुख सूचकांकों में आई इस तेजी ने निवेशकों को कुछ राहत दी। हालांकि, बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। IT Stocks में सबसे ज्यादा हलचल मंगलवार को IT सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। HCL Technologies और Tata Consultancy Services (TCS) के शेयरों में मजबूत बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा Infosys और Tech Mahindra के शेयरों पर भी निवेशकों की नजर रही। IT कंपनियों के तिमाही नतीजों और कारोबार से जुड़े अपडेट का असर शेयरों पर दिखाई दिया। खासकर HCLTech के नतीजों से जुड़ी सकारात्मक खबरों ने सेक्टर में खरीदारी को बढ़ावा दिया। IT शेयरों में आई तेजी ने सेंसेक्स और निफ्टी को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई। Banking Stocks ने भी दिया बाजार का साथ IT शेयरों के साथ बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में भी निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई। HDFC Bank, State Bank of India (SBI), Bajaj Finance और Bajaj Finserv जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। बैंकिंग शेयरों में बढ़त का असर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर भी पड़ा। हालांकि, सभी सेक्टरों में एक जैसी तेजी नहीं रही। कुछ शेयरों में कमजोरी बनी रही, जिससे पता चलता है कि निवेशक चुनिंदा कंपनियों में ही पैसा लगा रहे थे। रुपये की मजबूती से बाजार को सहारा शेयर बाजार के अलावा मुद्रा बाजार में भी हलचल देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती से निवेशकों की धारणा को कुछ समर्थन मिला। रुपये की चाल पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कदमों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और डॉलर की वैश्विक स्थिति का असर पड़ता है। हालांकि, आने वाले दिनों में रुपये की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक हालात पर निर्भर करेगी। महंगाई और कच्चे तेल पर भी रहेगी नजर बाजार में तेजी के बावजूद निवेशकों की चिंताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। खुदरा महंगाई, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे समय में कंपनियों के तिमाही नतीजे भी महत्वपूर्ण हैं। बेहतर नतीजे पेश करने वाली कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है, जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वाले शेयरों पर दबाव बना रह सकता है। निवेशकों के लिए क्या है संकेत? सेंसेक्स और निफ्टी में आई तेजी बाजार के लिए राहत की खबर है, लेकिन इसे लगातार तेजी की गारंटी नहीं माना जा सकता। बाजार में निवेश करने से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, शेयर की कीमत और उससे जुड़े जोखिमों को समझना जरूरी है। कुल मिलाकर, 13 अक्टूबर को IT और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के दम पर भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती दिखाई। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि बाजार अपनी बढ़त को कितना बरकरार रखता है और आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेत किस तरह असर डालते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold Rate

Gold Rate Today: सोने की कीमत में बड़ी गिरावट, 10 ग्राम का भाव ₹1.48 लाख; ₹1.55 लाख तक जाने का अनुमान

Gold Rate में गिरावट से उन लोगों को थोड़ी राहत मिली है, जो गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं। पिछले दो दिनों में सोना करीब ₹1,750 सस्ता हुआ है। इसके बाद 10 ग्राम सोने का भाव लगभग ₹1.48 लाख पर आ गया है। हालांकि, कीमतों में इस गिरावट के बीच बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले समय में सोना फिर महंगा हो सकता है और इसका भाव ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। ऐसे में सोना खरीदने वालों के मन में सवाल है कि क्या मौजूदा गिरावट खरीदारी का सही मौका है या आने वाले दिनों में कीमतें और नीचे जा सकती हैं? आइए जानते हैं सोने के ताजा भाव और आगे की संभावनाओं के बारे में। Gold Rate Today: दो दिन में ₹1,750 की गिरावट Gold Rate में पिछले दो दिनों के दौरान करीब ₹1,750 की कमी आई है। इससे 10 ग्राम सोने का भाव लगभग ₹1.48 लाख रह गया है। कीमतों में इस बदलाव का असर उन लोगों के बजट पर पड़ सकता है, जो शादी-ब्याह या किसी खास मौके के लिए सोने के गहने खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, खरीदारी से पहले यह समझना जरूरी है कि बाजार में सोने का भाव उसकी शुद्धता और शहर के हिसाब से अलग हो सकता है। 24 कैरेट सोना आमतौर पर निवेश के लिए खरीदा जाता है, जबकि गहने बनाने में 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल अधिक होता है। इसके अलावा, गहनों की अंतिम कीमत में मेकिंग चार्ज और लागू टैक्स भी शामिल होते हैं। इसलिए केवल सोने का बाजार भाव देखकर खरीदारी का बजट तय करना पर्याप्त नहीं है। Gold Price Prediction: ₹1.55 लाख तक पहुंच सकता है सोना सोने की कीमतों में आई गिरावट के बावजूद बाजार में आगे तेजी की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, आने वाले समय में 10 ग्राम सोने का भाव ₹1.55 लाख तक पहुंच सकता है। हालांकि, यह एक अनुमान है, निश्चित भविष्यवाणी नहीं। सोने की कीमतों में तेजी या गिरावट कई कारकों पर निर्भर करती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति, अमेरिकी डॉलर की चाल, ब्याज दरों से जुड़ी नीतियां और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता सोने के भाव को प्रभावित कर सकती हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग बढ़ती है, तो इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। दूसरी ओर, बाजार की परिस्थितियां बदलने पर कीमतों में और गिरावट भी संभव है। Gold Price का आम लोगों के बजट पर क्या असर पड़ेगा? भारत में सोना खरीदना केवल निवेश का मामला नहीं है। शादियों, त्योहारों और पारिवारिक समारोहों में भी सोने के गहनों की खास जगह होती है। ऐसे में कीमतों में होने वाला बदलाव सीधे खरीदारों के बजट को प्रभावित करता है। दो दिनों में ₹1,750 की गिरावट उन लोगों के लिए राहत की खबर हो सकती है, जो लंबे समय से सोने के भाव कम होने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, खरीदारी का फायदा कितना होगा, यह खरीदे जाने वाले सोने की मात्रा, शुद्धता और गहनों के मेकिंग चार्ज पर भी निर्भर करेगा। यही वजह है कि सोना खरीदने से पहले अलग-अलग दुकानों के भाव की तुलना करना और बिल में सभी शुल्कों की जानकारी लेना जरूरी है। क्या अभी Gold खरीदना सही रहेगा? अगर आप शादी या किसी जरूरी पारिवारिक कार्यक्रम के लिए सोना खरीदने वाले हैं, तो अपनी जरूरत और बजट को प्राथमिकता दें। केवल इस उम्मीद में खरीदारी टालना कि कीमतें और गिरेंगी, हमेशा सही फैसला नहीं हो सकता। वहीं, निवेश के लिए सोना खरीदने वालों को बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव को समझना चाहिए। एक-दो दिन की गिरावट को कीमतों में लगातार कमी का संकेत मानना ठीक नहीं है। इसी तरह, भविष्य में भाव बढ़ने के अनुमान के आधार पर जल्दबाजी में निवेश करना भी जोखिम भरा हो सकता है। खरीदारी के समय इन बातों का ध्यान रखें: आगे क्या होगा सोने की कीमतों का? फिलहाल सोने का भाव करीब ₹1.48 लाख प्रति 10 ग्राम पर आने से खरीदारों को कुछ राहत मिली है। वहीं, कीमतों के ₹1.55 लाख तक पहुंचने का अनुमान यह संकेत देता है कि बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। आने वाले दिनों में सोना सस्ता होगा या महंगा, यह अंतरराष्ट्रीय बाजार और आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। ऐसे में खरीदारों के लिए बेहतर यही है कि वे ताजा कीमतों पर नजर रखें और अपनी जरूरत के मुताबिक फैसला लें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

भारत के खिलाफ मैच में रोवमन पॉवेल और शेरफेन रदरफोर्ड को ICC की फटकार, मिला 1-1 डिमेरिट पॉइंट

भारत और वेस्टइंडीज के बीच रांची में खेले गए दूसरे टी-20 मुकाबले के बाद ICC ने वेस्टइंडीज के बल्लेबाज रोवमन पॉवेल और शेरफेन रदरफोर्ड के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। दोनों खिलाड़ियों को आचार संहिता के उल्लंघन के लिए आधिकारिक फटकार लगाई गई है। साथ ही, उनके खाते में एक-एक डिमेरिट पॉइंट भी जोड़ा गया है। ICC के मुताबिक, पॉवेल ने आउट होने के बाद बल्ले से गेंद को दूर मारा था, जबकि रदरफोर्ड ने अंपायर के वाइड नहीं देने के फैसले पर नाराजगी जताई थी। दोनों खिलाड़ियों ने अपने अपराध स्वीकार कर लिए हैं। आउट होने के बाद पॉवेल ने बल्ले से गेंद मारी रोवमन पॉवेल पर ICC की आचार संहिता के अनुच्छेद 2.2 के उल्लंघन का आरोप लगा। यह नियम अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान क्रिकेट उपकरणों, कपड़ों, मैदान के उपकरणों या अन्य सुविधाओं के दुरुपयोग से संबंधित है। वेस्टइंडीज की पारी के छठे ओवर में भारतीय गेंदबाज मयंक यादव ने पॉवेल को आउट किया। पवेलियन लौटते समय पॉवेल ने अपने बल्ले से गेंद को दूर मार दिया। ICC ने उनके इस व्यवहार को नियमों का उल्लंघन माना और उन्हें आधिकारिक फटकार के साथ एक डिमेरिट पॉइंट दिया। वाइड नहीं मिलने पर रदरफोर्ड ने जताई नाराजगी शेरफेन रदरफोर्ड को ICC की आचार संहिता के अनुच्छेद 2.8 के उल्लंघन का दोषी पाया गया। यह नियम अंतरराष्ट्रीय मैच में अंपायर के फैसले पर असहमति जताने से संबंधित है। यह घटना वेस्टइंडीज की पारी के 13वें ओवर में हुई। अंपायर ने गेंद को वाइड नहीं दिया, जिसके बाद रदरफोर्ड ने आक्रामक अंदाज में अपनी नाराजगी जाहिर की। ICC ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन माना और उन पर भी आधिकारिक फटकार के साथ एक डिमेरिट पॉइंट लगाया। चार अधिकारियों ने लगाए आरोप दोनों खिलाड़ियों के खिलाफ आरोप मैदानी अंपायर जयरामन मदनगोपाल और रोहन पंडित, तीसरे अंपायर नितिन मेनन तथा चौथे अंपायर वीरेंद्र शर्मा ने लगाए थे। दोनों खिलाड़ियों ने आरोप स्वीकार कर लिए, इसलिए औपचारिक सुनवाई की आवश्यकता नहीं पड़ी। पांच मैचों की सीरीज में भारत 2-1 से आगे भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी-20 सीरीज में भारतीय टीम 2-1 से आगे है। भारत ने पहला मुकाबला आठ विकेट से और तीसरा मैच 14 रन से जीता था। वहीं, दूसरे मुकाबले में वेस्टइंडीज ने कप्तान शाई होप के शतक की मदद से छह विकेट से जीत दर्ज की थी।

ऋषभ पंत न्यूजीलैंड A के खिलाफ शुरुआती दो मैचों से बाहर, कुमार कुशाग्र को टीम में मिली जगह

भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत चोट के कारण न्यूजीलैंड A के खिलाफ भारत A की अनऑफिशियल टेस्ट सीरीज के शुरुआती दो मुकाबलों से बाहर हो गए हैं। उनकी जगह युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज कुमार कुशाग्र को टीम में शामिल किया गया है। तीसरे मुकाबले में पंत खेल पाएंगे या नहीं, इस पर बाद में फैसला लिया जाएगा। ईरानी कप के दौरान चोटिल हुए पंत ऋषभ पंत को ईरानी कप में रेस्ट ऑफ इंडिया की कप्तानी करते समय बाईं ओर खिंचाव की समस्या हुई थी। न्यूजीलैंड दौरे के लिए उनके चयन पर पहले से ही फिटनेस क्लीयरेंस की शर्त लागू थी। अब शुरुआती दो मैचों से बाहर रहने के कारण टीम की विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी कप्तान ध्रुव जुरेल संभालेंगे। रेड-बॉल क्रिकेट में अच्छी फॉर्म में हैं कुमार कुशाग्र 21 वर्षीय कुमार कुशाग्र हाल के दिनों में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने अपने पिछले तीन मुकाबलों में दो शतक लगाए हैं। इनमें दलीप ट्रॉफी के फाइनल में बनाया गया शतक और पुडुचेरी में ऑस्ट्रेलिया A के खिलाफ लगाया गया शतक शामिल है। उनके प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें भारत A टीम में जगह दी गई है। न्यूजीलैंड A के खिलाफ भारत A के मुकाबले न्यूजीलैंड A के खिलाफ भारत A को तीन मैचों की अनऑफिशियल टेस्ट सीरीज खेलनी है। पहला मुकाबला 24 अक्टूबर को लिंकन और दूसरा मैच 31 अक्टूबर को क्राइस्टचर्च में खेला जाएगा। भारत A की अपडेटेड टीम यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, देवदत्त पडिक्कल, रविचंद्रन स्मरण, ध्रुव जुरेल (कप्तान और विकेटकीपर), वॉशिंगटन सुंदर, औकिब नबी, आकाश दीप, अंशुल कंबोज, मानव सुथार, मुकेश चौधरी, साई सुदर्शन, यश राठौड़, मुकेश कुमार और कुमार कुशाग्र। न्यूजीलैंड दौरे पर भारतीय टीम का व्यस्त कार्यक्रम भारतीय टीम 22 अक्टूबर से 1 दिसंबर तक न्यूजीलैंड दौरे पर रहेगी। इस दौरान पांच टी-20, पांच वनडे और दो टेस्ट मैच खेले जाने हैं। हालांकि, वनडे और टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम की घोषणा अभी नहीं हुई है। भारत की टी-20 टीम श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा (उपकप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन (विकेटकीपर), अक्षर पटेल, शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी, नमन धीर, प्रिंस यादव, मयंक यादव, अर्शदीप सिंह, भुवनेश्वर कुमार, वरुण चक्रवर्ती और कुलदीप यादव।

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