लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस (Congress) को मिलने वाले चंदे में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली थी, लेकिन अब पार्टी की फंडिंग को लेकर सामने आए नए आंकड़े कुछ अलग कहानी बयां कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में कांग्रेस को मिलने वाला बड़ा चंदा करीब 75 फीसदी घट गया है। चुनाव आयोग को सौंपी गई योगदान रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी को इस दौरान ₹130.69 करोड़ मिले, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह रकम ₹517.39 करोड़ थी। यानी महज एक साल में कांग्रेस के घोषित चंदे में करीब ₹386.70 करोड़ की कमी आई है। पिछले 10 वर्षों में यह सबसे बड़ी सालाना गिरावट बताई जा रही है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कांग्रेस की फंडिंग, बड़े दानदाताओं और इलेक्टोरल ट्रस्ट से मिलने वाले पैसे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ₹517 करोड़ से ₹130 करोड़ पर पहुंचा Congress Donation Congress को मिलने वाले चंदे के आंकड़ों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2023-24 में पार्टी को ₹281.48 करोड़ मिले थे। इसके बाद 2024-25 में लोकसभा चुनाव के दौरान यह रकम बढ़कर ₹517.39 करोड़ पहुंच गई। लेकिन 2025-26 में पार्टी को सिर्फ ₹130.69 करोड़ का घोषित चंदा मिला। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष की तुलना में कांग्रेस की फंडिंग में करीब 75 फीसदी की गिरावट आई है। हालांकि, यह आंकड़ा मुख्य रूप से ₹20,000 से अधिक के घोषित योगदान से जुड़ा है, इसलिए इसे पार्टी की कुल कमाई में गिरावट नहीं माना जा सकता। Prudent Electoral Trust से मिलने वाला चंदा भी घटा Congress को मिलने वाले चंदे में कमी की एक बड़ी वजह Prudent Electoral Trust से प्राप्त योगदान में गिरावट है। वित्त वर्ष 2024-25 में इस ट्रस्ट ने कांग्रेस को ₹216.34 करोड़ दिए थे। वहीं, 2025-26 में यह रकम घटकर सिर्फ ₹25 करोड़ रह गई। यानी इस स्रोत से मिलने वाले योगदान में करीब 88 फीसदी की कमी आई है। पिछले वित्त वर्ष में प्रूडेंट ट्रस्ट से मिला पैसा कांग्रेस की कुल घोषित फंडिंग का बड़ा हिस्सा था। ऐसे में इस योगदान में आई कमी का असर पार्टी के कुल चंदे पर भी दिखाई दिया। इन कंपनियों और कारोबारियों ने दिया करोड़ों का चंदा चंदे में बड़ी गिरावट के बावजूद कुछ कंपनियों और कारोबारियों ने कांग्रेस को अच्छा-खासा योगदान दिया। रिपोर्ट में सामने आए प्रमुख नामों में शामिल हैं: इसके अलावा एक करोड़ रुपये या उससे अधिक के कुल नौ योगदानों से पार्टी को करीब ₹43 करोड़ मिले। वहीं, पांच लाख रुपये या उससे कम के 1,321 छोटे योगदानों से कांग्रेस को कुल ₹37.2 करोड़ प्राप्त हुए। इससे पता चलता है कि पार्टी को बड़े दानदाताओं के साथ छोटे योगदानों से भी पैसा मिला है। BJP और Congress के चंदे में कितना अंतर? राजनीतिक दलों की फंडिंग की तुलना करें तो बीजेपी और कांग्रेस के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। वित्त वर्ष 2024-25 में बीजेपी को ₹6,074.02 करोड़ का घोषित चंदा मिला था। वहीं, कांग्रेस को इसी अवधि में ₹517.39 करोड़ प्राप्त हुए थे। इस तरह बीजेपी को कांग्रेस के मुकाबले करीब 12 गुना ज्यादा चंदा मिला था। हालांकि, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बीजेपी की समान अवधि वाली योगदान रिपोर्ट उपलब्ध हुए बिना दोनों पार्टियों के ताजा आंकड़ों की सीधी तुलना करना सही नहीं होगा। चुनावी साल के बाद कांग्रेस की Funding में क्यों आई गिरावट? Congress के चंदे में आई इस गिरावट को समझने के लिए पिछले वित्त वर्ष के आंकड़ों पर भी नजर डालना जरूरी है। 2024-25 में लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी को बड़े दानदाताओं और अन्य स्रोतों से अच्छा योगदान मिला था। उस साल कांग्रेस को कूपन की बिक्री से भी ₹350.12 करोड़ प्राप्त हुए थे। लेकिन 2025-26 में पार्टी के घोषित बड़े चंदे में भारी कमी दर्ज की गई। प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से मिलने वाली रकम में गिरावट भी इस बदलाव की अहम वजह रही। हालांकि, पार्टी की कुल फंडिंग में कमी के पीछे दूसरे कारणों का पता ऑडिट रिपोर्ट सामने आने के बाद ही चल सकेगा। क्या कांग्रेस का खजाना खाली हो गया? चंदे में 75 फीसदी की गिरावट के बाद कांग्रेस की आर्थिक स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लेकिन सिर्फ इस रिपोर्ट के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि पार्टी का खजाना खाली हो गया है। दरअसल, चुनाव आयोग में जमा योगदान रिपोर्ट में ₹20,000 से अधिक के चंदे का विवरण दिया जाता है। पार्टी की कुल आय में छोटे चंदे, सदस्यता शुल्क, कूपन की बिक्री और बैंक जमा पर मिलने वाला ब्याज भी शामिल होता है। इसलिए कांग्रेस की वास्तविक आर्थिक स्थिति समझने के लिए उसकी पूरी ऑडिट रिपोर्ट देखना जरूरी होगा। इसमें पार्टी की कुल आय के साथ खर्च और उपलब्ध फंड की जानकारी भी मिलती है। अब कांग्रेस की नजर अगले वित्तीय आंकड़ों पर फिलहाल कांग्रेस के सामने पार्टी की फंडिंग को मजबूत बनाए रखने की चुनौती है। एक तरफ बड़े दानदाताओं से मिलने वाले योगदान में कमी आई है, तो दूसरी तरफ प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से मिलने वाली रकम भी काफी घट गई है। अब सबकी नजर पार्टी की वित्त वर्ष 2025-26 की पूरी ऑडिट रिपोर्ट पर रहेगी। उससे यह साफ हो सकेगा कि चंदे में आई गिरावट का पार्टी की कुल आर्थिक स्थिति पर कितना असर पड़ा है। कुल मिलाकर, कांग्रेस के लिए 2025-26 चंदा जुटाने के लिहाज से पिछले साल जैसा नहीं रहा। ₹517 करोड़ से घटकर ₹130.69 करोड़ पर पहुंचा योगदान पार्टी की फंडिंग में आए बड़े बदलाव को दिखाता है। हालांकि, पार्टी की पूरी आर्थिक तस्वीर सामने आने के लिए ऑडिट रिपोर्ट का इंतजार करना होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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