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Jitendra Mishra

Operation Sindoor के कमांडर अब Ram Mandir के CEO, Jitendra Mishra की नई भूमिका

राम मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा (Jitendra Mishra) को राम मंदिर का पहला Chief Executive Officer (CEO) नियुक्त किया है। भारतीय वायुसेना में लंबे समय तक सेवाएं देने वाले मिश्रा अब अयोध्या में मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था संभालेंगे। जीतेंद्र मिश्रा का नाम इसलिए भी खास है क्योंकि वह भारतीय वायुसेना की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। वह Western Air Command के प्रमुख रह चुके हैं और Operation Sindoor के दौरान भी पश्चिमी क्षेत्र में वायुसेना की कमान उनके पास थी। देवरिया से Air Force की ऊंची कमान तक का सफर उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपतपुरा गांव से आने वाले जीतेंद्र मिश्रा ने भारतीय वायुसेना में करीब चार दशक का करियर बनाया। सैन्य सेवा के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया और अंत में वायुसेना की शीर्ष कमान में शामिल हुए। उनका सफर इसलिए भी प्रेरणादायक माना जा रहा है कि अब सैन्य जीवन के बाद उन्हें देश के सबसे चर्चित धार्मिक स्थलों में से एक की व्यवस्था की जिम्मेदारी मिली है। Operation Sindoor के दौरान भी संभाली थी कमान जीतेंद्र मिश्रा उस समय Western Air Command का नेतृत्व कर रहे थे, जब Operation Sindoor हुआ। इस दौरान पश्चिमी मोर्चे पर वायुसेना की ऑपरेशनल जिम्मेदारियां बेहद अहम थीं। सैन्य क्षेत्र में उनके अनुभव और बड़े स्तर पर ऑपरेशन को संभालने की क्षमता को देखते हुए राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से उन्हें CEO की जिम्मेदारी देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Ram Mandir CEO के तौर पर क्या होगी जिम्मेदारी? अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और विस्तार के साथ यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मंदिर की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित तरीके से चलाना अपने आप में बड़ी चुनौती है। CEO के तौर पर जीतेंद्र मिश्रा के सामने मंदिर की administrative management, श्रद्धालुओं की सुविधाएं, अलग-अलग एजेंसियों के बीच coordination और रोजमर्रा के संचालन को बेहतर बनाने जैसी जिम्मेदारियां होंगी। उनका सैन्य अनुभव खास तौर पर बड़े स्तर पर लोगों और संसाधनों के प्रबंधन में काम आ सकता है। ट्रस्ट में professional management पर जोर राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से पूर्व वरिष्ठ सैन्य अधिकारी को CEO की जिम्मेदारी दिया जाना मंदिर प्रशासन में professional management की बढ़ती भूमिका का संकेत माना जा रहा है। मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं रह गया है। हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, सुविधाएं और प्रशासनिक समन्वय को मजबूत रखना लगातार जरूरी होता जा रहा है। जीतेंद्र मिश्रा के अनुभव से ट्रस्ट को इन व्यवस्थाओं को और बेहतर तरीके से संचालित करने की उम्मीद है। अब अयोध्या में नई भूमिका एक ओर देवरिया के भोपतपुरा गांव से निकलकर भारतीय वायुसेना की शीर्ष जिम्मेदारियों तक पहुंचने वाले जीतेंद्र मिश्रा का सैन्य सफर उल्लेखनीय रहा है, वहीं अब उनकी नई भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। Air Marshal से Ram Mandir CEO तक का यह सफर जीतेंद्र मिश्रा के करियर का एक नया अध्याय है। अब नजर इस बात पर होगी कि उनके नेतृत्व में राम मंदिर की प्रशासनिक और श्रद्धालु सुविधाओं से जुड़ी व्यवस्थाओं में किस तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nepal

Nepal Flood Crisis: 1127 मौतें, हजारों Missing; PM Balen Shah ने India की मदद को सराहा

नेपाल (Nepal) इन दिनों एक ऐसी प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है, जिसने हजारों परिवारों की जिंदगी बदल दी है। लगातार बारिश, Flash Flood और भूस्खलन के बाद कई इलाकों में हालात बेहद मुश्किल बने हुए हैं। राहत और बचाव अभियान को शुरू हुए करीब एक सप्ताह हो चुका है, लेकिन बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। Nepal में बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में अब तक 1,127 लोगों की मौत की खबर है। वहीं, करीब 4,800 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। सुरक्षा बलों और Rescue Teams की मदद से प्रभावित इलाकों में तलाश अभियान लगातार चलाया जा रहा है। PM बालेन्द्र शाह ने Parliament में भारत का जताया आभार मुश्किल हालात के बीच नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने संसद में भारत समेत पड़ोसी देशों की मदद का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संकट के समय पड़ोसी देशों ने सही समय पर सहायता पहुंचाई। भारत की ओर से नेपाल को राहत सामग्री और बचाव दल उपलब्ध कराए गए हैं। इस मदद को लेकर नेपाली प्रधानमंत्री ने भारत के प्रति आभार जताया। दोनों देशों के बीच आपदा के समय सहयोग की यह भूमिका एक बार फिर सामने आई है। India ने भेजी Relief और Rescue Team नेपाल में आपदा की खबर सामने आने के बाद भारत ने राहत अभियान में मदद बढ़ाई। भारत की ओर से जरूरी दवाइयां और राहत सामग्री भेजी गई। इसके अलावा भारतीय Rescue Team को भी नेपाल भेजा गया, ताकि मुश्किल इलाकों में फंसे लोगों की तलाश और बचाव में स्थानीय एजेंसियों की मदद की जा सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से बातचीत कर आपदा में हुई जनहानि पर संवेदना जताई। भारत ने इस कठिन समय में नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता देने का भरोसा दिया। 7 दिन बाद भी जारी है Search Operation आपदा के एक सप्ताह बाद भी नेपाल में Search and Rescue Operation थमा नहीं है। कई इलाकों में बाढ़ का पानी और मलबा जमा होने के कारण बचाव दलों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त सड़कें और संपर्क मार्ग भी राहत कार्य में बड़ी बाधा बने हुए हैं। कई स्थानों तक पहुंचने के लिए सुरक्षा बलों और बचाव टीमों को बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा चिंता उन लोगों को लेकर है, जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। लापता लोगों के परिवार लगातार उनकी खबर मिलने का इंतजार कर रहे हैं। Infrastructure को भी भारी नुकसान बाढ़ ने नेपाल में सिर्फ लोगों की जान ही नहीं ली, बल्कि Infrastructure को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया है। सड़कें, पुल, बिजली व्यवस्था और Hydropower Projects प्रभावित हुए हैं। कई जगहों पर मलबा जमा होने से सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है। अब सरकार के सामने राहत पहुंचाने के साथ-साथ प्रभावित लोगों के Rehabilitation और Infrastructure Reconstruction की चुनौती भी है। China और दूसरे देशों से भी मिली मदद नेपाल की इस आपदा के बाद भारत के अलावा चीन और कुछ अन्य देशों की ओर से भी सहायता पहुंचाई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Rescue और Relief Efforts में सहयोग दिया जा रहा है। फिलहाल नेपाल के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और जरूरी सेवाओं को दोबारा बहाल करना है। संकट की घड़ी में पड़ोसी का साथ नेपाल की इस त्रासदी के बीच भारत की मदद का जिक्र दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। प्राकृतिक आपदा के वक्त राजनीतिक मतभेदों से अलग हटकर मानवीय मदद सबसे महत्वपूर्ण होती है। नेपाल में हजारों परिवार अभी भी मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे में Rescue Operation से लेकर राहत और पुनर्वास तक आने वाले दिनों में सरकार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।
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Cabinet

Modi Cabinet में बड़ा फेरबदल संभव! Vaishnaw-Gadkari को लेकर चर्चाएं, नए चेहरों की भी एंट्री

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में एक बार फिर Cabinet Reshuffle को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सत्ता के गलियारों में संभावित फेरबदल को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चा है कि सरकार में कुछ मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं, कुछ को नई जिम्मेदारी मिल सकती है और कई नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से कैबिनेट में बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक सूची या घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए सामने आ रही जानकारियों को फिलहाल संभावनाओं और राजनीतिक चर्चाओं के तौर पर ही देखा जा रहा है। Ashwini Vaishnaw की भूमिका पर सबकी नजर संभावित Modi Cabinet Reshuffle में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का नाम खास तौर पर चर्चा में है। मौजूदा समय में उनके पास कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि फेरबदल हुआ तो उनकी भूमिका में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। वैष्णव को लेकर कहीं बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है तो कहीं उनके विभागों में फेरबदल की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि तभी होगी जब सरकार की ओर से आधिकारिक फैसला सामने आएगा। Nitin Gadkari के मंत्रालय को लेकर भी अटकलें केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को लेकर भी संभावित बदलाव की चर्चा ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है। कुछ रिपोर्ट्स में उनके मंत्रालय में बदलाव की संभावना जताई गई है। गडकरी लंबे समय से सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय संभाल रहे हैं और देश में हाईवे तथा इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट उनके कार्यकाल में आगे बढ़े हैं। ऐसे में अगर उनके विभाग में बदलाव होता है तो यह कैबिनेट फेरबदल का अहम हिस्सा माना जाएगा। 17 नए चेहरों की चर्चा, लेकिन तस्वीर साफ नहीं कैबिनेट में संभावित बदलाव को लेकर 17 नए चेहरों को शामिल किए जाने की चर्चा भी सामने आई है। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्ट्स में नए मंत्रियों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे हैं। यही वजह है कि फिलहाल 17 नए चेहरों वाली बात को अंतिम सूची मानना सही नहीं होगा। कौन-कौन से नेता मोदी सरकार में मंत्री बनेंगे, यह फैसला बीजेपी नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा। कई मंत्रियों के विभागों में हो सकता है बदलाव मोदी सरकार में कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के पास एक से ज्यादा मंत्रालयों की जिम्मेदारी है। ऐसे में संभावित फेरबदल के दौरान विभागों का बंटवारा दोबारा किया जा सकता है। माना जा रहा है कि सरकार प्रशासनिक कामकाज को ज्यादा प्रभावी बनाने के साथ-साथ राजनीतिक और क्षेत्रीय संतुलन पर भी ध्यान दे सकती है। नए चेहरों को मौका देने के साथ कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव संभव है। Performance भी बन सकता है बड़ा आधार कैबिनेट में बदलाव की चर्चाओं के बीच मंत्रियों के कामकाज और उनके मंत्रालयों की Performance पर भी नजर होने की बात सामने आ रही है। मंत्रालयों की उपलब्धियां, लंबित योजनाएं और सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर उनकी प्रगति जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं। अगर फेरबदल होता है तो यह सिर्फ चेहरों को बदलने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकार के अगले चरण की प्राथमिकताओं का संकेत भी दे सकता है। चुनावी राज्यों को लेकर भी रणनीति आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए कैबिनेट में क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन भी अहम हो सकता है। बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के बीच प्रतिनिधित्व को लेकर भी समीकरण बनाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। खासकर उन राज्यों पर नजर रहेगी जहां आने वाले समय में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में संभावित Cabinet Expansion में नए राजनीतिक चेहरों को जगह मिलने की चर्चा स्वाभाविक रूप से बढ़ गई है। आधिकारिक ऐलान के बाद ही खुलेगा पूरा पत्ता फिलहाल मोदी कैबिनेट में फेरबदल को लेकर चर्चाएं जरूर जोर पकड़ रही हैं, लेकिन Vaishnaw को प्रमोशन, Gadkari के मंत्रालय में बदलाव या 17 नए चेहरों जैसे दावों पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। इसलिए इन खबरों को अभी संभावित बदलाव के तौर पर ही देखना बेहतर होगा। अगर केंद्र सरकार की ओर से Cabinet Reshuffle का ऐलान होता है, तभी यह साफ होगा कि किस मंत्री की जिम्मेदारी बदली गई और किन नए चेहरों को सरकार में जगह मिली। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Amarjeet Kaur

PM Modi को लेकर Amarjeet Kaur की टिप्पणी पर घमासान, BJP ने जताई कड़ी आपत्ति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर CPI नेता अमरजीत कौर (Amarjeet Kaur) की एक टिप्पणी ने सियासी माहौल गर्म कर दिया है। उनके बयान के सामने आने के बाद BJP ने कड़ा विरोध जताया और इसे लेकर माफी की मांग की। मामला अब सिर्फ बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे लेकर BJP और वामपंथी दलों के बीच जुबानी जंग भी तेज होती दिखाई दे रही है। अमरजीत कौर के बयान पर क्यों मचा विवाद? रिपोर्टों के मुताबिक, अमरजीत कौर ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर तीखी टिप्पणी की। उनके बयान को BJP ने आपत्तिजनक बताते हुए निशाने पर लिया। अमरजीत कौर की टिप्पणी सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में इस पर चर्चा तेज हो गई। BJP ने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है। BJP ने किया जोरदार पलटवार CPI नेता के बयान पर BJP की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने अमरजीत कौर के बयान की आलोचना करते हुए उनसे माफी मांगने की मांग की। BJP का कहना है कि राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत और आपत्तिजनक टिप्पणियों तक नहीं ले जाना चाहिए। पार्टी ने अमरजीत कौर की टिप्पणी को लेकर सार्वजनिक रूप से जवाब देने की बात कही। माफी मांगने से अमरजीत कौर का इनकार विवाद बढ़ने के बाद जब अमरजीत कौर से माफी को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने अपने रुख से पीछे हटने के संकेत नहीं दिए। रिपोर्टों के अनुसार, CPI नेता ने अपने बयान को लेकर सफाई दी और BJP की आपत्ति को खारिज किया। उनका तर्क है कि विपक्षी दलों को सरकार की नीतियों और प्रधानमंत्री के बयानों पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है। इसी बात को लेकर अब दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बयान से फिर आमने-सामने BJP और Left अमरजीत कौर के बयान ने एक बार फिर BJP और Left parties के बीच राजनीतिक मतभेद को सामने ला दिया है। एक ओर BJP इसे लेकर माफी की मांग कर रही है, तो दूसरी ओर CPI अपने नेता के रुख को लेकर पीछे हटती नजर नहीं आ रही। राजनीति में तीखी बयानबाजी कोई नई बात नहीं है, लेकिन ऐसे बयानों को लेकर अक्सर सियासी विवाद बड़ा रूप ले लेते हैं। फिलहाल इस मामले में भी यही होता दिखाई दे रहा है। आगे क्या? अमरजीत कौर के बयान और BJP की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमा सकता है। दोनों पक्षों की ओर से लगातार बयान आने की संभावना है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि विवाद यहीं थमता है या फिर यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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OBC

OBC Reservation पर बड़ा फैसला, Supreme Court ने पुराने Order पर रोक नहीं लगाई

OBC क्रीमी लेयर के नियमों को लेकर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने मार्च 2026 के अपने फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद अब खासतौर पर Civil Services Examination (CSE) 2025 के OBC उम्मीदवारों की सेवा आवंटन प्रक्रिया को लेकर स्थिति पर सबकी नजर है। मामला उस फैसले से जुड़ा है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि OBC उम्मीदवार को क्रीमी लेयर में रखने का फैसला केवल उसके माता-पिता की Salary या Income देखकर नहीं किया जा सकता। माता-पिता की नौकरी, पद और सामाजिक स्थिति जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना होगा। मार्च के फैसले में Supreme Court ने क्या कहा था? सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने 11 मार्च 2026 को OBC क्रीमी लेयर से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। अदालत ने माना कि सिर्फ माता-पिता की आय को आधार बनाकर किसी OBC उम्मीदवार को क्रीमी लेयर में डालना उचित नहीं है। यह मामला उन उम्मीदवारों से जुड़ा था, जिनके माता-पिता PSU और निजी क्षेत्र में काम करते थे। अदालत के सामने सवाल था कि क्या ऐसे कर्मचारियों की Salary को सरकारी कर्मचारियों की तरह क्रीमी लेयर तय करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कोर्ट ने अपने फैसले में क्रीमी लेयर की अवधारणा को सामाजिक उन्नति से जोड़ते हुए कहा कि केवल Income को ही निर्णायक आधार नहीं बनाया जा सकता। CSE 2025 को लेकर क्यों बढ़ी चिंता? केंद्र सरकार की मुख्य चिंता CSE 2025 के परिणाम और Service Allocation को लेकर है। सरकार का कहना है कि मार्च में आया फैसला परीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद आया था। ऐसे में अगर इसे पुराने मामलों पर लागू किया जाता है, तो कई उम्मीदवारों की OBC स्थिति और सेवा आवंटन पर असर पड़ सकता है। केंद्र ने इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट से इस फैसले को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। सरकार का तर्क है कि OBC क्रीमी लेयर तय करने के लिए निजी क्षेत्र में काम करने वाले माता-पिता की Social Status का आकलन करने की एक समान व्यवस्था स्पष्ट नहीं है। Supreme Court ने अभी क्या किया? 1 सितंबर 2026 की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की याचिका पर विचार किया, लेकिन मार्च के फैसले पर Interim Stay देने से इनकार कर दिया। यानी फिलहाल पहले दिए गए फैसले पर रोक नहीं लगी है। मामले में केंद्र की दलीलों और उसके असर पर आगे सुनवाई होगी। इसका सीधा मतलब यह है कि OBC Creamy Layer से जुड़े मार्च के फैसले की स्थिति अभी बरकरार है। हालांकि CSE 2025 और उससे जुड़े Service Allocation पर इसे किस तरह लागू किया जाएगा, इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई अहम रहेगी। OBC उम्मीदवारों के लिए क्या है इसका मतलब? OBC आरक्षण का लाभ Non-Creamy Layer वर्ग के उम्मीदवारों को मिलता है। ऐसे में क्रीमी लेयर तय करने का तरीका सीधे तौर पर आरक्षण के लाभ से जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के मार्च के फैसले ने यह सवाल महत्वपूर्ण बना दिया है कि क्या किसी उम्मीदवार के माता-पिता की ज्यादा Salary अपने आप उसे क्रीमी लेयर में रखने के लिए पर्याप्त है। अदालत ने फिलहाल इस तरह के आकलन में सिर्फ आय के बजाय दूसरे सामाजिक और सेवा संबंधी पहलुओं को भी देखने की बात कही है। अब आगे की सुनवाई में यह साफ होना महत्वपूर्ण होगा कि मार्च 2026 का फैसला CSE 2025 के मामलों पर किस तरह लागू होगा। फिलहाल केंद्र की Stay की मांग स्वीकार नहीं हुई है और पुराने Supreme Court Order पर रोक नहीं लगी है। नजर अब अगली सुनवाई पर है, क्योंकि इस मामले का असर सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि OBC Creamy Layer के निर्धारण की प्रक्रिया को लेकर आगे की नीति पर भी पड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Hathnikund Barrage

Yamuna में Army Boat डूबी, जवान लापता; Hathnikund Barrage पर Rescue Operation तेज

हरियाणा के यमुनानगर में हथिनीकुंड बैराज (Hathnikund Barrage) के पास मंगलवार को सेना के Training Exercise के दौरान बड़ा हादसा हो गया। यमुना नदी में अभ्यास के दौरान Army की मोटर बोट में तकनीकी खराबी आ गई और देखते ही देखते जवानों को तेज बहाव वाली नदी में उतरना पड़ा। हादसे के बाद जवानों की तलाश के लिए बड़े स्तर पर Search Operation शुरू किया गया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बोट पर चार जवान सवार थे। इनमें से तीन जवान तैरकर सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे, जबकि एक जवान के लापता होने की जानकारी पुलिस और कुछ प्रमुख रिपोर्टों में दी गई है। वहीं, कुछ अन्य रिपोर्टों में दो जवानों के लापता होने की बात कही गई है। ऐसे में लापता जवानों की सही संख्या को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। Technical Fault के बाद बिगड़ा पूरा मामला बताया जा रहा है कि सेना के जवान हथिनीकुंड बैराज के upstream क्षेत्र में नियमित Training और Mock Drill कर रहे थे। इसी दौरान मोटर बोट में तकनीकी समस्या आई। बोट के नियंत्रण में दिक्कत आने के बाद उसमें सवार जवान पानी में उतर गए। यमुना के तेज बहाव ने हालात को मुश्किल बना दिया। रिपोर्टों के अनुसार, तीन जवानों ने करीब 600 मीटर तक तैरकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचने में सफलता हासिल की। इसके बाद स्थानीय पुलिस और सेना की टीमें तुरंत Search Operation में जुट गईं। रातभर चला Search Operation घटना की सूचना मिलते ही सेना के साथ हरियाणा पुलिस और SDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं। उत्तर प्रदेश की SDRF टीमों को भी तलाश अभियान में शामिल किया गया है। नदी के तेज बहाव और संभावित downstream क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए कई किलोमीटर तक सर्च किया जा रहा है। हथिनीकुंड बैराज से निकलने वाले पानी के बहाव को कम करने के लिए सिंचाई विभाग से भी मदद ली गई। अधिकारियों का मानना है कि पानी का बहाव नियंत्रित होने से Search and Rescue टीमों को नदी और नहर के हिस्सों में तलाश करने में आसानी होगी। Helicopter से भी निगरानी लापता जवानों की तलाश को तेज करने के लिए हवाई निगरानी का भी सहारा लिया गया है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, downstream इलाके में Indian Air Force के हेलिकॉप्टरों से भी निगरानी की जा रही है। नदी के संभावित बहाव क्षेत्र में लगातार नजर रखी जा रही है। हादसे ने बढ़ाई चिंता सेना की Training Exercise के दौरान हुए इस हादसे से इलाके में चिंता का माहौल है। फिलहाल सबसे बड़ा फोकस लापता जवानों को तलाशने पर है। सेना, पुलिस, SDRF और प्रशासन की टीमें मिलकर अभियान चला रही हैं। हादसे की शुरुआती वजह मोटर बोट में आई तकनीकी खराबी बताई जा रही है। हालांकि, घटना की पूरी परिस्थितियों और सुरक्षा इंतजामों को लेकर विस्तृत जानकारी जांच के बाद ही सामने आने की उम्मीद है। अभी राहत की बात यह है कि कुछ जवान सुरक्षित बाहर निकल आए हैं। वहीं, लापता जवानों को लेकर Search Operation लगातार जारी है और प्रशासन की टीमें हर संभावित क्षेत्र में तलाश कर रही हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Silver

Gold-Silver Rate में बड़ा बदलाव! चांदी ₹9,000 और सोना ₹4,500 तक टूटा

सोना (Gold) और चांदी (Silver) खरीदने वालों के लिए इन दिनों बाजार का रुख थोड़ा बदलता नजर आ रहा है। लगातार तेजी के बाद दोनों precious metals की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले दो कारोबारी दिनों में चांदी करीब ₹9,000 प्रति किलो तक सस्ती हुई, जबकि सोने के भाव में भी लगभग ₹4,500 तक की कमी दर्ज की गई। कीमती धातुओं के दाम में आई इस गिरावट के बीच PM Modi की Gold खरीदारी को लेकर की गई अपील भी चर्चा में है। हालांकि, बाजार के जानकारों के मुताबिक सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट को केवल इस अपील से जोड़ना सही नहीं होगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की स्थिति, ब्याज दरों की उम्मीद और वैश्विक तनाव जैसे कई factors कीमतों को प्रभावित करते हैं। Silver Price में तेज गिरावट चांदी में हालिया गिरावट ने निवेशकों को खास तौर पर चौंकाया है। कुछ ही कारोबारी सत्रों में इसकी कीमत में हजारों रुपये की कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार, 1 सितंबर को चांदी करीब ₹6,780 प्रति किलो तक नीचे आई थी। चांदी की कीमत पर घरेलू मांग के साथ-साथ international market का भी असर पड़ता है। इसलिए वैश्विक स्तर पर कीमतों में कमजोरी आने पर भारतीय बाजार में भी इसका असर दिखाई देता है। Gold Price भी हुआ कमजोर चांदी के साथ सोने के भाव में भी गिरावट आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना तीन सप्ताह से ज्यादा के निचले स्तर तक पहुंच गया। रिपोर्टों के अनुसार, Spot Gold करीब 4,321 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखा। बाजार में अमेरिकी interest rates को लेकर बदलती उम्मीदों का भी असर सोने पर पड़ा है। आमतौर पर ब्याज दरें बढ़ने की संभावना बढ़ती है तो सोने जैसी बिना ब्याज वाली asset की मांग पर दबाव आ सकता है। PM Modi की Gold खरीदारी टालने की अपील क्यों? सोने की कीमतों के बीच PM Modi की Gold खरीदारी को लेकर अपील एक बार फिर चर्चा में है। प्रधानमंत्री पहले भी लोगों से गैर-जरूरी सोने की खरीदारी को कुछ समय के लिए टालने की अपील कर चुके हैं। इसके पीछे बड़ी वजह देश का Gold Import Bill और विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाला दबाव है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से सोना मंगाकर पूरा करता है। ऐसे में Gold Import बढ़ने पर देश से बड़ी मात्रा में foreign exchange बाहर जाता है। रिपोर्टों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का Gold Import Bill करीब 72 अरब डॉलर रहा। क्या PM Modi की अपील से Gold-Silver सस्ता हुआ? यह सवाल इस समय सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है। लेकिन सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट को केवल प्रधानमंत्री की अपील का असर मानना सही नहीं होगा। International market में चल रही हलचल, अमेरिकी monetary policy, डॉलर की चाल, महंगाई और पश्चिम एशिया की स्थिति जैसे कई factors कीमती धातुओं के भाव तय करते हैं। हालिया रिपोर्टों में भी सोने की कीमतों पर अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बनी उम्मीदों और पश्चिम एशिया के तनाव के असर का उल्लेख किया गया है। यानी PM Modi की अपील ने Gold को लेकर चर्चा जरूर बढ़ाई है, लेकिन बाजार में कीमतों की गिरावट के पीछे कई आर्थिक और वैश्विक कारण एक साथ काम कर रहे हैं। Jewellery Market पर भी नजर सोने की खरीदारी को लेकर अपील के बीच jewellery industry भी बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अगर ग्राहक कुछ समय के लिए Gold खरीदने से दूरी बनाते हैं तो इसका असर ज्वैलरी कारोबार पर पड़ सकता है। खासकर त्योहारों और शादी के सीजन में सोने की मांग काफी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में ज्वैलर्स के लिए आने वाले दिनों में Gold demand एक अहम factor रहने वाला है। आगे कैसी रहेगी Gold-Silver की चाल? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोना और चांदी आगे भी सस्ते होंगे या फिर दोबारा तेजी लौटेगी। इसका जवाब कई global factors पर निर्भर करेगा। अमेरिकी interest rate policy, डॉलर की मजबूती, crude oil prices, global inflation और geopolitical tensions आने वाले दिनों में Gold-Silver Price की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए अगर आप सोना या चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो केवल एक दिन की गिरावट देखकर फैसला लेने के बजाय बाजार के ताजा भाव और आगे के trend पर नजर रखना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Disha Salian

Sushant की पूर्व Manager Disha Salian की मौत की CBI जांच, Bombay HC का बड़ा Order

मुंबई की चर्चित दिशा सालियान डेथ केस में अब एक नया मोड़ आ गया है। Bombay High Court ने दिशा सालियान (Disha Salian) की मौत की जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद करीब छह साल पुराने मामले की जांच एक बार फिर नए सिरे से शुरू होगी। दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई की एक इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने के बाद हुई थी। वह अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं। दिशा की मौत के महज छह दिन बाद, 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत की भी मौत हो गई थी। दोनों घटनाओं के बीच कम समय का अंतर होने की वजह से दिशा की मौत लंबे समय से चर्चा में रही है। पिता ने CBI जांच की मांग की थी दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख करते हुए मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की थी। उन्होंने मुंबई पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए FIR दर्ज करने और मामले को CBI को सौंपने की मांग की थी। याचिका में दिशा की मौत की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल उठाए गए थे। हालांकि, इन दावों की पुष्टि होना अभी बाकी है। अदालत के आदेश का मतलब भी किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं है। अब इन तमाम पहलुओं की जांच CBI करेगी। पहले Mumbai Police ने क्या कहा था? दिशा की मौत के बाद मुंबई पुलिस ने Accidental Death Report (ADR) दर्ज की थी। पुलिस की ओर से की गई जांच में उनकी मौत को आत्महत्या माना गया था। लेकिन परिवार की ओर से लगातार सवाल उठाए जाने के बाद मामला अदालत तक पहुंचा। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जांच की प्रक्रिया और FIR दर्ज नहीं किए जाने को लेकर पुलिस से सवाल किए थे। Court में उठे थे कई सवाल मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने घटनास्थल, मेडिकल रिकॉर्ड और पुलिस जांच से जुड़े कई मुद्दे आए। कोर्ट ने यह जानने की कोशिश की कि परिवार की ओर से संदेह जताए जाने के बावजूद मामले में FIR क्यों दर्ज नहीं की गई। अदालत ने जांच से जुड़े रिकॉर्ड और उपलब्ध सामग्री को भी गंभीरता से देखा। इसके बाद कोर्ट ने मामले की आगे की जांच CBI से कराने का फैसला सुनाया। सुशांत सिंह राजपूत से कनेक्शन के कारण मामला रहा चर्चा में दिशा सालियान का नाम सुशांत सिंह राजपूत केस के साथ भी लगातार जोड़ा जाता रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह दोनों की मौत के बीच सिर्फ छह दिन का अंतर था। हालांकि, दोनों मामलों के बीच किसी आपराधिक संबंध की पुष्टि अपने आप नहीं हो जाती। अब CBI की जांच में यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि दिशा की मौत किन परिस्थितियों में हुई थी और क्या मामले में कोई ऐसा पहलू है, जिसकी पहले जांच नहीं हो सकी। अब CBI के सामने क्या चुनौती होगी? हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI मामले से जुड़े पुराने रिकॉर्ड, मेडिकल दस्तावेज, पुलिस की जांच रिपोर्ट और संबंधित लोगों के बयान देख सकती है। जरूरत पड़ने पर एजेंसी नए सिरे से भी जांच कर सकती है। सबसे अहम सवाल यही रहेगा कि जांच के दौरान क्या कोई नया सबूत सामने आता है या नहीं। अदालत ने भी साफ किया है कि किसी व्यक्ति को केवल आरोपों के आधार पर आरोपी नहीं माना जा सकता। इसके लिए जांच में पर्याप्त सबूत सामने आना जरूरी होगा। छह साल बाद फिर खुलेगा मामला दिशा सालियान की मौत को छह साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन इस मामले को लेकर सवाल पूरी तरह खत्म नहीं हुए थे। अब Bombay High Court के CBI जांच के आदेश ने केस को एक नया मोड़ दे दिया है। आने वाले समय में CBI की जांच से यह पता चल सकेगा कि दिशा सालियान की मौत वास्तव में किन परिस्थितियों में हुई और पहले की जांच में कोई महत्वपूर्ण पहलू छूटा था या नहीं। फिलहाल, CBI जांच शुरू होना इस मामले में नया अध्याय है। अंतिम सच जांच एजेंसी की रिपोर्ट और सामने आने वाले सबूतों से ही स्पष्ट होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Messi

Messi ने लिया बड़ा फैसला: Argentina के लिए International Football से Retirement

फुटबॉल प्रेमियों के लिए 31 अगस्त 2026 का दिन हमेशा याद रहेगा। दुनिया के महानतम फुटबॉलरों में शामिल Lionel Messi ने Argentina की National Team से International Football को अलविदा कह दिया। 39 साल के मेसी ने Instagram पर एक भावुक पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। करीब 21 साल तक अर्जेंटीना की जर्सी पहनने के बाद उनका यह फैसला करोड़ों फैंस के लिए भावुक कर देने वाला है। Instagram Post में छलका Messi का दर्द मेसी ने अपने Instagram पोस्ट में बताया कि राष्ट्रीय टीम से विदा लेना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने माना कि यह फैसला उन्हें अंदर तक दुख पहुंचा रहा है, लेकिन अब उन्हें लगता है कि इस अध्याय को बंद करने का समय आ गया है। मेसी ने यह भी कहा कि उन्होंने अर्जेंटीना के लिए खेलते हुए हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ दिया। उनके लिए National Team की जर्सी सिर्फ एक जर्सी नहीं, बल्कि गर्व और भावनाओं से जुड़ी रही है। उन्होंने अपने परिवार, साथियों, कोचों और फैंस का भी शुक्रिया अदा किया। 2026 World Cup Final के बाद लिया फैसला मेसी के मुताबिक उन्होंने 2026 FIFA World Cup Final के बाद ही International Football से हटने के बारे में गंभीरता से सोचना शुरू कर दिया था। फाइनल में Argentina को Spain के खिलाफ 1-0 से हार मिली थी। इस हार के बाद मेसी ने अपने भविष्य पर विचार किया। बाद में उनके पिता जॉर्ज मेसी के निधन ने भी इस कठिन दौर को और भावुक बना दिया। आखिरकार उन्होंने राष्ट्रीय टीम से विदाई लेने का फैसला सार्वजनिक कर दिया। Argentina के लिए Messi का शानदार सफर मेसी ने 2005 में Argentina की Senior Team के लिए अपना International Debut किया था। शुरुआती दौर में उन्हें कई बड़ी निराशाओं का सामना करना पड़ा। विश्व कप और Copa América के फाइनल में मिली हार ने उनके करियर पर सवाल भी खड़े किए, लेकिन मेसी ने कभी हार नहीं मानी। समय के साथ कहानी बदली। 2021 में Argentina ने Copa América जीता, इसके बाद 2022 में Messi की कप्तानी में टीम ने Qatar World Cup की ट्रॉफी उठाई। 2024 में Argentina ने फिर Copa América अपने नाम किया। 2026 में टीम World Cup Final तक पहुंची, हालांकि इस बार Spain से हार गई। Argentina के लिए 207 Matches और 125 Goals International career खत्म करते समय मेसी अपने पीछे ऐसे आंकड़े छोड़ गए हैं, जिन्हें पार करना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होगा। Argentina के लिए Messi के प्रमुख आंकड़े: इन उपलब्धियों के साथ मेसी अर्जेंटीना के फुटबॉल इतिहास में हमेशा एक खास जगह बनाए रखेंगे। एक दौर का हुआ अंत मेसी का सफर सिर्फ आंकड़ों या ट्रॉफियों की कहानी नहीं है। एक समय ऐसा भी था जब उन पर अर्जेंटीना को बड़ी ट्रॉफी नहीं दिला पाने का दबाव था। लेकिन उन्होंने आलोचनाओं के बीच वापसी की और आखिरकार वही हासिल किया, जिसका सपना उन्होंने बचपन से देखा था। 2022 World Cup जीत के बाद मेसी और Argentina के बीच वह रिश्ता पूरा हुआ, जिसका इंतजार लंबे समय से था। अब International Football से उनकी विदाई के साथ अर्जेंटीना की टीम में एक नए दौर की शुरुआत होगी। अब Messi को Argentina की जर्सी में नहीं देख पाएंगे फैंस मेसी ने अपने संदेश में संकेत दिया कि युवा खिलाड़ियों के लिए अब आगे आने का समय है। उन्होंने कहा कि वह Argentina को अब एक खिलाड़ी की तरह नहीं, बल्कि एक फैन की तरह सपोर्ट करेंगे। दुनियाभर से मेसी के लिए श्रद्धांजलि और शुभकामनाओं का सिलसिला शुरू हो गया है। Argentina के राष्ट्रपति Javier Milei ने भी मेसी को धन्यवाद देते हुए उनकी तारीफ की। फुटबॉल की दुनिया में कई महान खिलाड़ी आए और गए, लेकिन Lionel Messi और Argentina की कहानी अलग रहेगी। एक ऐसा खिलाड़ी जिसने आलोचना भी झेली, हार भी देखी और आखिरकार अपने देश को World Cup जिताकर अपने सपने को पूरा किया। अब Argentina की जर्सी में मेसी का अध्याय भले खत्म हो गया हो, लेकिन उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों तक याद की जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
GDP Growth

7.8% GDP Growth से मजबूत हुआ भारत, PM Modi की अपील- जरूरत न हो तो Gold न खरीदें

दुनिया इस वक्त कई तरह के संकटों से जूझ रही है। कहीं युद्ध का असर है तो कहीं आर्थिक अनिश्चितता और महंगाई ने चिंता बढ़ा रखी है। ऐसे माहौल में भारत की अर्थव्यवस्था ने उम्मीद जगाने वाली तस्वीर पेश की है। देश की GDP Growth पहली तिमाही में 7.8% रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे देश के करोड़ों लोगों की मेहनत और सामूहिक प्रयास का नतीजा बताया। लेकिन GDP के इस आंकड़े के साथ पीएम मोदी का एक और संदेश लोगों के बीच चर्चा में है। उन्होंने अपील की कि अगर सोना खरीदना जरूरी नहीं है, तो फिलहाल Gold खरीदने से बचें। इसके साथ ही उन्होंने विदेश यात्रा और विदेशों में होने वाली Destination Weddings के बजाय भारत में ही खर्च करने पर जोर दिया। Global Crisis के बीच India की Economy ने दिखाया दम वैश्विक स्तर पर तनाव और अनिश्चितता के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने मजबूत प्रदर्शन किया है। अप्रैल-जून तिमाही में GDP Growth 7.8% दर्ज की गई। यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया के कई हिस्सों में आर्थिक गतिविधियों पर दबाव देखने को मिल रहा है। PM मोदी ने इस प्रदर्शन को केवल सरकारी नीतियों की उपलब्धि के तौर पर नहीं देखा। उन्होंने देशवासियों की मेहनत, कारोबारियों के प्रयास और भारत के सामूहिक संकल्प को इसका बड़ा आधार बताया। यानी आसान शब्दों में कहें तो देश की Economy की यह रफ्तार सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की मेहनत से भी जुड़ी है। जरूरत नहीं तो Gold खरीदने से बचें प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से Gold Purchase को लेकर खास अपील की। उनका कहना है कि अगर सोना खरीदना जरूरी नहीं है, तो उसकी खरीद को टाला जा सकता है। भारत में सोने की बड़ी मात्रा विदेशों से आती है। इसलिए गैर-जरूरी Gold Import कम होने से विदेशी मुद्रा पर दबाव घटाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि जरूरत के समय सोना खरीदने पर रोक है। PM की अपील मुख्य तौर पर अनावश्यक खरीदारी को लेकर है। Foreign Trip की जगह India में Tourism PM मोदी ने विदेश यात्रा को लेकर भी लोगों से सोचने की अपील की। उनका जोर है कि छुट्टियां बिताने के लिए हमेशा विदेश जाने की जरूरत नहीं है। भारत में ही ऐसे कई शहर, पहाड़, समुद्र तट और ऐतिहासिक स्थल हैं जिन्हें देखा जा सकता है। अगर भारतीय परिवार देश में ही घूमने-फिरने पर पैसा खर्च करते हैं, तो इसका फायदा स्थानीय होटल, टैक्सी, दुकानदार, गाइड और दूसरे छोटे कारोबारों को मिलता है। इस तरह एक परिवार की यात्रा कई लोगों के लिए कमाई का जरिया बन सकती है। Destination Wedding पर भी PM मोदी का संदेश आजकल विदेशों में Destination Wedding का चलन बढ़ा है। बड़े समारोहों में काफी पैसा दूसरे देशों में खर्च हो जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसके बजाय भारत में ही शादी समारोह आयोजित करने की अपील की। देश में होने वाली बड़ी शादियों से होटल, कैटरिंग, इवेंट मैनेजमेंट, डेकोरेशन, ट्रांसपोर्ट और स्थानीय कारोबार से जुड़े लोगों को काम मिलता है। यही वजह है कि ‘Wed in India’ जैसी सोच को घरेलू Economy और Tourism से जोड़कर देखा जा रहा है। Vocal for Local को फिर मिला जोर PM मोदी के संदेश का एक अहम हिस्सा Vocal for Local और Swadeshi भी रहा। उनका कहना है कि भारतीयों को जहां संभव हो, देश में बने Products और Services को प्राथमिकता देनी चाहिए। स्थानीय सामान खरीदने का फायदा सिर्फ दुकानदार तक सीमित नहीं रहता। इससे निर्माता, सप्लायर, ट्रांसपोर्टर और दूसरे छोटे कारोबार भी जुड़े होते हैं। 7.8% Growth से आगे क्या? GDP का 7.8% आंकड़ा निश्चित तौर पर उत्साह बढ़ाने वाला है, लेकिन असली चुनौती इस Growth Momentum को आगे बनाए रखना है। भारत को वैश्विक बाजार की अनिश्चितता, महंगाई, व्यापार से जुड़े बदलाव और भू-राजनीतिक तनाव जैसी चुनौतियों के बीच अपनी घरेलू Economy को मजबूत रखना होगा। ऐसे में PM मोदी की अपील को सिर्फ Gold या Foreign Travel तक सीमित करके देखने के बजाय घरेलू मांग और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा देने की बड़ी रणनीति के तौर पर भी समझा जा सकता है। आम लोगों से जुड़ा है PM मोदी का संदेश प्रधानमंत्री का संदेश सुनने में भले ही आर्थिक नीति जैसा लगे, लेकिन इसका असर रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा है। कहां पैसा खर्च हो रहा है और किस चीज पर खर्च हो रहा है, इसका असर आखिरकार देश की Economy पर पड़ता है। अगर जरूरत का सामान देश में खरीदा जाए, छुट्टियां India में बिताई जाएं और स्थानीय कारोबार को प्राथमिकता मिले, तो पैसा देश के भीतर ही घूमता है। इससे छोटे कारोबार और रोजगार को भी सहारा मिलता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
LPG

September Price Hike: LPG से दूध तक महंगा, Tata-Hyundai Cars की कीमतें भी बढ़ीं

सितंबर की शुरुआत होते ही आम लोगों के खर्च का हिसाब थोड़ा बिगड़ सकता है। रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ी चीजों से लेकर नई कार खरीदने तक, कई जगह कीमतों में बदलाव देखने को मिला है। Commercial LPG Cylinder के दाम में 11.50 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। मुंबई में थोक दूध भी 9 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो गया है। वहीं Tata Motors और Hyundai ने अपनी कारों की कीमतों में इजाफा किया है। यानी महीने की शुरुआत में ही घर के बजट से लेकर कारोबार और वाहन खरीदने की योजना तक पर इसका असर पड़ सकता है। Commercial LPG Cylinder हुआ महंगा तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले Commercial LPG Cylinder की कीमतों में बढ़ोतरी की है। अलग-अलग शहरों में यह बढ़ोतरी अलग रही है। कोलकाता में सिलेंडर की कीमत 11.50 रुपये बढ़ी है, जबकि दिल्ली में करीब 9.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। कमर्शियल गैस का इस्तेमाल होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और कैटरिंग जैसे कारोबारों में बड़े स्तर पर होता है। ऐसे में गैस की कीमत बढ़ने से कारोबारियों का खर्च बढ़ना तय माना जा रहा है। इसका असर आगे चलकर खाने-पीने की कुछ चीजों की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। हालांकि घर में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो के घरेलू LPG Cylinder की कीमत में फिलहाल बदलाव नहीं किया गया है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं को कुछ राहत जरूर मिली है। LPG e-KYC को लेकर भी जरूरी अपडेट LPG ग्राहकों के लिए सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि e-KYC भी इस समय अहम मुद्दा है। e-KYC की तय समयसीमा 31 अगस्त 2026 थी। जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उन्हें सब्सिडी से जुड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। अगर आपने अभी तक e-KYC नहीं कराया है, तो अपनी गैस एजेंसी या संबंधित LPG कंपनी से संपर्क करके अपनी स्थिति जरूर जांच लें। इससे बाद में सब्सिडी को लेकर होने वाली परेशानी से बचा जा सकता है। मुंबई में दूध ₹9 तक महंगा महंगाई का असर दूध पर भी पड़ा है। मुंबई में थोक दूध की कीमत 93 रुपये से बढ़कर 102 रुपये प्रति लीटर हो गई है। यानी एक लीटर पर सीधे 9 रुपये ज्यादा देने होंगे। दूध की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ रोजाना दूध खरीदने वाले परिवारों तक सीमित नहीं रहेगा। पनीर, दही, मिठाई और दूसरे डेयरी प्रोडक्ट्स की लागत पर भी इसका असर पड़ सकता है। मुंबई जैसे बड़े शहर में दूध की कीमत में यह बढ़ोतरी आम परिवारों के मासिक बजट को प्रभावित कर सकती है, खासकर उन घरों में जहां रोजाना दूध की खपत ज्यादा है। Tata Cars खरीदना भी हुआ महंगा अगर आप इस महीने नई कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो कीमत जरूर चेक कर लें। Tata Motors ने अपने पैसेंजर व्हीकल्स की कीमतों में बढ़ोतरी की है। अलग-अलग मॉडल और वैरिएंट के हिसाब से कीमत में 25,000 रुपये तक का इजाफा हुआ है। इस बढ़ोतरी के बाद Tata की कार खरीदने वाले ग्राहकों को पहले के मुकाबले थोड़ा ज्यादा बजट रखना पड़ सकता है। कार बुक करने से पहले नई एक्स-शोरूम कीमत और डीलर से मिलने वाले ऑफर्स की जानकारी लेना बेहतर रहेगा। Hyundai Cars पर भी बढ़ा Price Tata के साथ Hyundai Motor India ने भी अपनी कारों की कीमतों में बदलाव किया है। कंपनी ने मॉडल के आधार पर कीमतों में 1 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। इनपुट कॉस्ट, कमोडिटी की कीमतों और ऑपरेशनल खर्च में बढ़ोतरी को कीमतें बढ़ाने की प्रमुख वजह बताया गया है। ऐसे में Hyundai की कार खरीदने की तैयारी कर रहे ग्राहकों के लिए भी सितंबर का बजट पहले से थोड़ा ज्यादा हो सकता है। आम आदमी की जेब पर क्या पड़ेगा असर? सितंबर की शुरुआत में हुए इन बदलावों का असर अलग-अलग वर्गों पर अलग तरीके से पड़ेगा। घरेलू LPG की कीमत स्थिर रहने से परिवारों को राहत है, लेकिन कमर्शियल गैस महंगी होने से होटल और दूसरे कारोबारों का खर्च बढ़ेगा। दूध की कीमत में बढ़ोतरी सीधे घरेलू खर्च को प्रभावित करेगी, जबकि Tata और Hyundai की कारों की कीमत बढ़ने से नई गाड़ी खरीदने वालों को ज्यादा रकम खर्च करनी होगी। कुल मिलाकर सितंबर की शुरुआत में LPG, Milk और Cars की कीमतों में बदलाव ने आम आदमी के बजट पर दबाव बढ़ाया है। ऐसे में महीने की शुरुआत में खर्चों की सही प्लानिंग करना और जरूरी सेवाओं की नई कीमतों की जानकारी रखना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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