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भारत पर 100% टैरिफ लगाने को लेकर 10 दिन में फैसला ले सकते हैं ट्रम्प, अमेरिकी दूत का दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत पर 100% टैरिफ लगाने को लेकर अगले करीब 10 दिनों में फैसला ले सकते हैं। अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत को प्रतिबंधों से छूट मिलेगी या नहीं, इसका फैसला भी ट्रम्प ही करेंगे। रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने से जुड़े अमेरिकी कानून के बाद भारत पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है। हालांकि, अब तक भारत पर ऐसे प्रतिबंध लगाए जाने की घोषणा नहीं हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी संसद ने 16 सितंबर को रूस से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने से जुड़ा विधेयक पारित किया था। ट्रम्प ने 18 सितंबर को इसे मंजूरी दे दी, लेकिन किसी देश पर प्रतिबंध लगाने का फैसला नहीं किया। कानून के तहत 30 दिनों के भीतर इस संबंध में निर्णय लिया जाना जरूरी बताया गया है। कानून में प्रतिबंध लगाने के तीन आधार सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिकी संसद ने प्रतिबंधों के लिए तीन श्रेणियां तय की हैं। इनमें तेल खरीदना, गैस खरीदना और प्रतिबंधों से बचने में रूस की मदद करना शामिल है। उन्होंने कहा कि इन प्रतिबंधों का निशाना किसी एक देश को बनाना नहीं है। गोर के मुताबिक, संबंधित श्रेणियों में आने वाले देशों और पक्षों की पहचान आंकड़ों के आधार पर की जाती है। भारत भी कई अन्य देशों के साथ इनमें से एक श्रेणी में आता है। भारत को किसी तरह की छूट मिलेगी या नहीं, यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में होगा। अमेरिका में डीजल महंगा, रूस से खरीद की तैयारी रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध के बाद अमेरिका में डीजल की कीमत बढ़कर 6.28 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है। युद्ध से पहले इसकी कीमत करीब 3.70 डॉलर प्रति गैलन थी। ईंधन की बढ़ती कीमतें अमेरिकी प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई हैं। इसी बीच, ट्रम्प ने रूस से डीजल खरीदने पर लगी रोक को 7 अप्रैल 2027 तक हटाने का फैसला लिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूस पहले 3 लाख टन से ज्यादा डीजल भेजेगा। इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और फिर 10 लाख टन डीजल की आपूर्ति की जाएगी। आगे चलकर आपूर्ति की मात्रा 30 लाख टन तक पहुंचने की बात कही गई है। अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले ईंधन की कीमतें एक अहम मुद्दा बनी हुई हैं। ऐसे में रूस से डीजल खरीदने के फैसले को कीमतों पर दबाव कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बातचीत में प्रगति सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर कहा कि बातचीत में काफी प्रगति हुई है और बड़े मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। अब कुछ छोटे मुद्दों पर चर्चा बाकी है। दोनों देशों के बीच इस समझौते को लेकर करीब डेढ़ साल से बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ रक्षा, आईटी, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना चाहता है। गोर ने भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास के लिए एक बड़ा केंद्र बनने की क्षमता वाला देश बताया। उनके मुताबिक, भारतीय और अमेरिकी टेक कंपनियों के बीच साझेदारी से दोनों देशों को लाभ मिल सकता है। भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला? अमेरिका की ओर से 100% टैरिफ लगाए जाने की स्थिति में भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर असर पड़ सकता है। इससे दोनों देशों के बीच चल रही ट्रेड डील की बातचीत भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। फिलहाल भारत को छूट मिलेगी या नहीं, इस पर अंतिम निर्णय का इंतजार है। आने वाले दिनों में ट्रम्प का फैसला दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों और रूस से भारत की ऊर्जा खरीद को लेकर अहम साबित हो सकता है।
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चेतन शर्मा बोले- गेंदबाजों को भी मिले मददगार पिचें, बोले- इतना मत मारिए कि मैदान पर लौटना ही न चाहें

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी और BCCI के पूर्व मुख्य चयनकर्ता चेतन शर्मा ने टी-20 क्रिकेट में बल्लेबाजों के अनुकूल पिचों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से ऐसी पिचें तैयार करने की अपील की, जिन पर गेंदबाजों को भी मदद मिल सके। उनका कहना है कि बल्लेबाजों के पक्ष में ज्यादा झुकी पिचों से बल्ले और गेंद के बीच संतुलन बिगड़ रहा है। नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान चेतन शर्मा ने कहा, “मैं मानता हूं कि गेंदबाज रन देने के लिए मैदान पर आते हैं, लेकिन उन्हें इतना मत मारिए कि वे दोबारा मैदान पर आना ही न चाहें।” उन्होंने जोर दिया कि इंटरनेशनल क्रिकेट में भी ऐसी पिचें होनी चाहिए, जहां गेंदबाज आक्रामक बल्लेबाजों का मुकाबला कर सकें। चेतन के मुताबिक, घरेलू क्रिकेट में गेंदबाजों को मदद देने वाली पिचें तैयार करने की तरह इंटरनेशनल मैचों में भी इस दिशा में ध्यान दिया जाना चाहिए। भारत-वेस्टइंडीज टी-20 सीरीज में चौकों-छक्कों की बरसात भारत और वेस्टइंडीज के बीच जारी टी-20 सीरीज में अब तक खेले गए चार मुकाबलों में बड़े स्कोर देखने को मिले हैं। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, सीरीज में अब तक 98 छक्के और 104 चौके लग चुके हैं। दोनों टीमों की आठ पारियों में छह बार 200 रन से ज्यादा का स्कोर बना है। सीरीज के दूसरे टी-20 मुकाबले में भारत ने 249 रन बनाए थे। इसके जवाब में वेस्टइंडीज ने नौ गेंद शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया था। तीसरे टी-20 में भारतीय टीम ने 223 रन बनाए और वेस्टइंडीज को 209 रन पर रोक दिया। वहीं, चौथे मुकाबले में वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 247 रन बनाए, जबकि भारतीय टीम जवाब में 223 रन ही बना सकी। पहले मुकाबले में भी भारत ने 172 रन का लक्ष्य 14.4 ओवर में हासिल कर लिया था। लगातार बड़े स्कोर और आक्रामक बल्लेबाजी के बीच चेतन शर्मा की पिचों को लेकर यह टिप्पणी सामने आई है। रेड-बॉल क्रिकेट को भी जरूरी मानते हैं चेतन शर्मा चेतन शर्मा ने टी-20 क्रिकेट की बढ़ती लोकप्रियता को स्वीकार किया, लेकिन युवा खिलाड़ियों के विकास के लिए रेड-बॉल क्रिकेट को भी जरूरी बताया। उन्होंने कहा, “मैं पुराने विचारों वाला व्यक्ति हूं। मेरा मानना है कि रेड-बॉल क्रिकेट सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।” चेतन के अनुसार, युवा खिलाड़ियों को रेड-बॉल क्रिकेट में खेलने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने बताया कि उनकी मुलाकात ऐसे कई कोचों से हुई है, जो इस फॉर्मेट पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने खिलाड़ियों को सलाह दी कि उन्हें जो भी अवसर मिलें, उनका पूरा उपयोग करना चाहिए। पिचों पर संतुलन और खिलाड़ियों के विकास पर जोर चेतन शर्मा की टिप्पणी टी-20 क्रिकेट में बल्लेबाजों के बढ़ते दबदबे और गेंदबाजों की भूमिका को लेकर बहस के बीच आई है। उनका मानना है कि ऐसी पिचें तैयार करना जरूरी है, जहां बल्लेबाजों को रन बनाने के अवसर मिलें, लेकिन गेंदबाजों के पास भी विकेट लेने और मुकाबले में बने रहने के मौके हों। इसके साथ ही उन्होंने रेड-बॉल क्रिकेट को युवा खिलाड़ियों के तकनीकी विकास के लिए अहम बताया।
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भारत-जिम्बाब्वे महिला टी-20 सीरीज का पहला मैच आज, स्मृति मंधाना की कप्तानी में उतरेगी टीम इंडिया

रायपुर: भारतीय महिला क्रिकेट टीम आज जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी-20 इंटरनेशनल सीरीज का पहला मुकाबला खेलेगी। मैच रायपुर में शाम 7 बजे से शुरू होगा। महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में भारत और जिम्बाब्वे की टीमें पहली बार आमने-सामने होंगी। रायपुर में भी पहली बार महिला इंटरनेशनल क्रिकेट मैच खेला जाएगा। स्मृति मंधाना के नियमित कप्तान बनने के बाद भारतीय टीम पहली बार मैदान पर उतरेगी। टीम इंडिया की कोशिश अपनी जीत की लय बरकरार रखने और सीरीज में बढ़त बनाने की होगी। जिम्बाब्वे की टीम इस साल एक भी टी-20 नहीं जीती जिम्बाब्वे की महिला टीम के लिए इस साल टी-20 इंटरनेशनल में प्रदर्शन चुनौतीपूर्ण रहा है। टीम ने 2026 में अब तक 18 मुकाबले खेले हैं और सभी में उसे हार का सामना करना पड़ा है। जिम्बाब्वे की पिछली टी-20 इंटरनेशनल जीत सितंबर 2025 में नामीबिया के खिलाफ आई थी। दूसरी ओर, भारतीय महिला टीम लगातार आठ टी-20 इंटरनेशनल मुकाबले जीत चुकी है। टीम ने हाल ही में एशिया कप का खिताब जीता था और एशियन गेम्स में भी गोल्ड मेडल हासिल किया था। ऐसे में भारतीय टीम का पलड़ा मजबूत माना जा रहा है। उपकप्तान शेफाली वर्मा पर रहेंगी नजरें भारतीय टीम की उपकप्तान शेफाली वर्मा अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से मैच का रुख बदल सकती हैं। उन्होंने इस साल 24 टी-20 मैचों में 162.83 के स्ट्राइक रेट से 863 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर नाबाद 100 रन रहा। शेफाली से उम्मीद होगी कि वह टीम को तेज शुरुआत दिलाएं और बड़े स्कोर की नींव रखें। गेंदबाजी में श्री चरणी से उम्मीदें गेंदबाजी में श्री चरणी भारतीय टीम के लिए अहम भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने इस साल 23 मैचों में 47 विकेट लिए हैं और उनकी इकोनॉमी 5.67 रही है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, वह इस साल टी-20 इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज हैं। भारतीय टीम को उम्मीद होगी कि श्री चरणी अपनी गेंदबाजी से जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी पर दबाव बनाएं। पहले मैच में भारत की नजर जीत पर भारत और जिम्बाब्वे के बीच यह पहली महिला टी-20 इंटरनेशनल भिड़ंत होगी। घरेलू मैदान पर खेलने और लगातार जीत के रिकॉर्ड के कारण भारतीय टीम से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। वहीं, जिम्बाब्वे की टीम लगातार हार के सिलसिले को तोड़ने की कोशिश करेगी। तीन मैचों की इस सीरीज का पहला मुकाबला दोनों टीमों के लिए अहम रहेगा। भारत जहां जीत के साथ शुरुआत करना चाहेगा, वहीं जिम्बाब्वे उलटफेर करने के इरादे से मैदान पर उतरेगा।
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Abhijeet Dipke

Abhijeet Dipke Detained: दिल्ली में CJP मार्च से पहले अभिजीत दिपके हिरासत में

दिल्ली में CJP के प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके (Abhijeet Dipke) को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर पहले से ही तनाव का माहौल था। पुलिस की कार्रवाई के बाद CJP के प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। CJP ने इस मार्च के जरिए राष्ट्रीय ध्वज के साथ अपनी बात रखने और अपने नेताओं की हिरासत का विरोध करने की योजना बनाई थी। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था, यातायात और सार्वजनिक सुरक्षा का हवाला देते हुए कार्यक्रम को लेकर प्रतिबंध लागू किए थे। Latest Update: मार्च से पहले अभिजीत दिपके हिरासत में 16 अक्टूबर को प्रस्तावित मार्च से पहले दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके के आवास पर पहुंचकर उन्हें कार्यक्रम में शामिल नहीं होने के संबंध में नोटिस दिया। इसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। पुलिस की कार्रवाई ऐसे समय हुई, जब CJP ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च आयोजित करने की घोषणा की थी। पार्टी की योजना राष्ट्रीय ध्वज के साथ जुटकर अपनी मांगों को सामने रखने की थी। इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठने लगे हैं कि प्रस्तावित मार्च को लेकर आगे क्या कार्रवाई होगी और CJP अपने प्रदर्शन की रणनीति में कोई बदलाव करेगी या नहीं। हिरासत के बाद की कानूनी स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट होगी। CJP के ‘Lehra Do Tiranga’ मार्च पर विवाद क्यों? CJP ने 16 अक्टूबर को शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च आयोजित करने का ऐलान किया था। पार्टी ने समर्थकों से राष्ट्रीय ध्वज के साथ कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की थी। इस मार्च का उद्देश्य अपने नेताओं की हिरासत के खिलाफ आवाज उठाना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को आगे बढ़ाना बताया गया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इलाके में लागू प्रतिबंधों और संभावित भीड़ को देखते हुए कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी। प्रशासन की चिंता थी कि बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने से यातायात और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। Delhi High Court में भी उठा था मार्च का मुद्दा CJP के प्रस्तावित मार्च को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में भी मामला पहुंचा था। अदालत के सामने कार्यक्रम से जुड़े प्रतिबंधों और सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर सवाल रखे गए थे। अदालती कार्यवाही में पुलिस की जिम्मेदारी, सार्वजनिक स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने और स्थानीय लोगों की सुविधाओं जैसे मुद्दे सामने आए। अदालत की ओर से मार्च पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिए जाने और कार्यक्रम की स्पष्ट अनुमति मिलने के बीच अंतर समझना जरूरी है। ऐसे मामलों में किसी प्रदर्शन की वैधता और उसके आयोजन की शर्तें संबंधित आदेशों तथा प्रशासनिक प्रतिबंधों पर निर्भर करती हैं। Saurav Das और Ashutosh Ranka की हिरासत का मामला CJP के प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में पार्टी के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत का मामला भी शामिल है। पार्टी ने अपने नेताओं के खिलाफ हुई कार्रवाई का विरोध किया था और उनके समर्थन में तिरंगा मार्च निकालने की घोषणा की थी। CJP का कहना है कि वह अपने मुद्दों को सार्वजनिक रूप से उठाना चाहती है। वहीं, पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और लागू प्रतिबंधों का पालन कराने की बात कही गई है। इसी घटनाक्रम के बीच अभिजीत दिपके को हिरासत में लिए जाने से पार्टी के प्रदर्शन को लेकर विवाद और बढ़ गया है। Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग क्यों कर रही है CJP? CJP के विरोध प्रदर्शन का एक प्रमुख मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। पार्टी और कुछ अन्य प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम हटाए जाने की प्रक्रिया से पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इस मुद्दे पर निष्कर्ष निकालने के लिए आधिकारिक आंकड़ों, निर्वाचन आयोग की जानकारी और संबंधित मामलों के तथ्यों को देखना जरूरी है। CJP की मांग और प्रशासन की कार्रवाई के बीच यह विवाद अब दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी से भी जुड़ गया है। कनॉट प्लेस में सुरक्षा व्यवस्था सख्त प्रस्तावित मार्च को देखते हुए कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने और यातायात सुचारु रखने के लिए कदम उठाए। सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को बंद रखे जाने की जानकारी भी सामने आई थी। इस फैसले से आम लोगों की आवाजाही और कार्यक्रम के आयोजन को लेकर सवाल उठे। प्रशासन के सामने सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखने की चुनौती है, जबकि CJP अपने मुद्दों को लोगों तक पहुंचाना चाहती है। ऐसे में आगे की कार्रवाई इस मामले में महत्वपूर्ण होगी। Abhijeet Dipke की हिरासत के बाद अब क्या होगा? अभिजीत दिपके की हिरासत के बाद अब CJP के अगले कदम पर नजर रहेगी। पार्टी अपने नेताओं की हिरासत और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर आगे भी आवाज उठा सकती है। फिलहाल, हिरासत के बाद की कानूनी स्थिति और प्रस्तावित मार्च को लेकर आगे का फैसला महत्वपूर्ण है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन की अनुमति और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताने के अधिकार के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Meerut

Meerut Murder Case: सांप के काटने का नाटक पड़ा भारी, रविता को Death Penalty

उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) में पति की हत्या को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने के चर्चित मामले में अदालत ने रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मौत की सजा सुनाई है। इस मामले ने उस समय सबको चौंका दिया था, जब शुरुआत में अमित कश्यप की मौत को सर्पदंश माना जा रहा था। लेकिन जांच आगे बढ़ी तो कहानी कुछ और ही निकली। पुलिस की जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दूसरे सबूतों के आधार पर मामले की परतें खुलती चली गईं। अदालत के फैसले के बाद मेरठ का यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। Meerut Murder Case: क्या है पूरा मामला? यह मामला मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव का है। यहां रहने वाले अमित कश्यप उर्फ मिक्की की अप्रैल 2025 में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उनका शव घर में बिस्तर पर मिला था। शुरुआती तौर पर मौत की वजह सांप का काटना मानी गई। हालांकि, मामले की जांच के दौरान कुछ ऐसे तथ्य सामने आए, जिनसे पुलिस को शक हुआ। इसके बाद घटना की गहराई से जांच शुरू की गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना सामने आने के बाद पुलिस ने हत्या के एंगल से जांच आगे बढ़ाई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से बदली जांच की दिशा अमित की मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट अहम साबित हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी मौत सर्पदंश से नहीं, बल्कि दम घुटने से हुई थी। इसके बाद पुलिस ने घटना से जुड़े लोगों और परिस्थितियों की जांच की। जांच में अमित की पत्नी रविता और अमरदीप की भूमिका सामने आई। अभियोजन पक्ष ने अदालत में मामले से जुड़े सबूत और गवाहों के बयान पेश किए। इन्हीं तथ्यों के आधार पर अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। रविता और अमरदीप को Death Penalty अदालत के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पति की मौत को सांप के काटने की घटना दिखाने के आरोपों से शुरू हुई जांच हत्या के मामले तक पहुंची। इस पूरे घटनाक्रम में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच ने अहम भूमिका निभाई। ऐसे मामलों में फॉरेंसिक जांच, गवाहों के बयान और अन्य सबूत यह समझने में मदद करते हैं कि घटना के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं। मेरठ में तीन दिन में चार दोषियों को फांसी की सजा की चर्चा मेरठ में हाल के दिनों में दो चर्चित हत्याकांडों में मृत्युदंड सुनाए जाने की वजह से भी चर्चा तेज हुई है। अमित कश्यप हत्याकांड के अलावा सौरभ राजपूत हत्याकांड भी सुर्खियों में रहा। सौरभ की हत्या के मामले में उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को भी अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। दोनों मामलों की घटनाएं अलग-अलग हैं, लेकिन इन फैसलों ने हत्या के मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर लोगों का ध्यान खींचा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ग्वालियर के वेंकटेश्वर अपार्टमेंट में युवक का शव मिला, रजिस्टर में युवती का जिक्र; पुलिस जांच में जुटी

ग्वालियर: शहर के सिटी सेंटर स्थित वेंकटेश्वर अपार्टमेंट में गुरुवार देर रात एक युवक का शव फ्लैट के कमरे में पंखे से लटका मिला। मृतक की पहचान अंबाह निवासी संतोष शर्मा के रूप में हुई है। वह ग्वालियर की एक बीमा कंपनी में नौकरी करता था। सूचना मिलने पर विश्वविद्यालय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। घटनास्थल से मिले एक रजिस्टर में युवती का जिक्र करते हुए कुछ पंक्तियां लिखी मिली हैं। इनमें संतोष ने युवती के साथ काफी समय बिताने और उसे अच्छा बताने की बात लिखी है। साथ ही, अपनी मौत के लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराने का भी उल्लेख किया है। पुलिस इन पंक्तियों समेत सभी साक्ष्यों की जांच कर रही है। बी-ब्लॉक के जी-8 फ्लैट में मिला शव घटना वेंकटेश्वर अपार्टमेंट के बी-ब्लॉक स्थित जी-8 फ्लैट की है। गुरुवार रात करीब 11 बजे पुलिस को युवक का शव कमरे में पंखे से लटका होने की सूचना मिली। इसके बाद विश्वविद्यालय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। मामले की जांच के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. कोक सिंह को भी बुलाया गया। पुलिस ने मृतक का मोबाइल फोन कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। कॉल रिकॉर्ड और चैट हिस्ट्री की पड़ताल के जरिए घटना से जुड़े तथ्यों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। युवती के साथ फ्लैट में रहने की जानकारी पुलिस के अनुसार, जिस फ्लैट में संतोष का शव मिला, वह एक युवती ने किराए पर लिया था। अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों ने पुलिस को बताया कि युवती संतोष के साथ इसी फ्लैट में रहती थी। पुलिस ने युवती से संपर्क किया तो उसने बताया कि वह पीएचडी के काम से बाहर गई हुई है। फिलहाल पुलिस संतोष और युवती के बीच संबंधों तथा घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। ऑनलाइन गेमिंग की आदत की भी पड़ताल शुरुआती जानकारी में संतोष के ऑनलाइन गेमिंग में सक्रिय रहने की बात सामने आई है। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या ऑनलाइन गेमिंग में पैसों के लेनदेन या किसी अन्य कारण से वह तनाव में था। हालांकि, फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि संतोष को गेमिंग में बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ था, उस पर कर्ज था या उसकी मौत का संबंध ऑनलाइन गेमिंग से था। पुलिस सभी पहलुओं की कर रही जांच विश्वविद्यालय थाना प्रभारी रविंद्र जाटव के मुताबिक, पुलिस मामले की हर संभावित पहलू से जांच कर रही है। घटनास्थल से मिले रजिस्टर, मोबाइल फोन और अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। संबंधित लोगों से पूछताछ के आधार पर भी जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल युवक की मौत के पीछे किसी एक कारण की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच पूरी होने और साक्ष्य सामने आने के बाद ही घटना की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।
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WhatsApp का नया फीचर: बिना अकाउंट और ऐप के भी कर सकेंगे कॉल, जानें कैसे करेगा काम

WhatsApp ने यूजर्स के लिए ‘गेस्ट कॉलिंग’ फीचर पेश किया है। इसकी मदद से अब ऐसे लोगों को भी WhatsApp कॉल में शामिल किया जा सकेगा, जिनके पास न तो WhatsApp अकाउंट है और न ही उनके मोबाइल या कंप्यूटर में ऐप इंस्टॉल है। इसके लिए सिर्फ कॉल का लिंक शेयर करना होगा। गेस्ट यूजर वेब ब्राउजर के जरिए कॉल से जुड़ सकेंगे। इस फीचर से पर्सनल बातचीत के साथ ऑनलाइन मीटिंग करना भी आसान हो सकता है। आइए, सवाल-जवाब के जरिए जानते हैं WhatsApp के गेस्ट कॉलिंग फीचर से जुड़ी जरूरी बातें। सवाल 1. WhatsApp का गेस्ट कॉलिंग फीचर क्या है? जवाब: गेस्ट कॉलिंग फीचर की मदद से आप ऐसे व्यक्ति को भी WhatsApp कॉल में शामिल कर सकते हैं, जो इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं करता। इसके लिए सामने वाले व्यक्ति को न तो ऐप डाउनलोड करना होगा और न ही अकाउंट बनाना पड़ेगा। कॉल शुरू करने वाला यूजर लिंक शेयर करेगा और गेस्ट उस लिंक के जरिए कॉल में शामिल हो सकेगा। सवाल 2. बिना ऐप इंस्टॉल किए कॉल से कैसे जुड़ेंगे? जवाब: गेस्ट यूजर अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर Google Chrome या Safari जैसे वेब ब्राउजर में कॉल लिंक खोलकर जुड़ सकता है। इसके लिए डिवाइस में WhatsApp ऐप इंस्टॉल होना जरूरी नहीं होगा। हालांकि, कॉल से जुड़ने के लिए जरूरी ब्राउजर और डिवाइस सपोर्ट उपलब्ध होना चाहिए। सवाल 3. गेस्ट यूजर्स को कॉल के दौरान कौन-कौन से फीचर्स मिलेंगे? जवाब: गेस्ट यूजर्स को कॉल के दौरान कुछ प्रमुख सुविधाएं मिलेंगी। इनमें शामिल हैं: इन सुविधाओं से ऑनलाइन चर्चा और मीटिंग में हिस्सा लेना आसान हो सकता है। सवाल 4. क्या गेस्ट कॉलिंग फीचर सुरक्षित है? जवाब: WhatsApp के मुताबिक, गेस्ट कॉलिंग के जरिए होने वाली कॉल भी एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से सुरक्षित रहेंगी। इसका उद्देश्य कॉल में शामिल लोगों के बीच बातचीत को निजी बनाए रखना है, ताकि कोई अनधिकृत तीसरा पक्ष उसे सुन या एक्सेस न कर सके। सवाल 5. क्या कोई भी व्यक्ति लिंक से सीधे कॉल में शामिल हो सकता है? जवाब: नहीं, गेस्ट यूजर को कॉल में शामिल करने के लिए होस्ट की मंजूरी जरूरी होगी। जब कोई व्यक्ति लिंक खोलकर कॉल से जुड़ने की कोशिश करेगा, तो उसे पहले वेटिंग रूम में रखा जाएगा। कॉल शुरू करने वाला होस्ट मंजूरी देने के बाद ही उसे कॉल में शामिल कर सकेगा। सवाल 6. गेस्ट यूजर्स पर क्या पाबंदियां होंगी? जवाब: कॉल की सुरक्षा और निजता बनाए रखने के लिए गेस्ट यूजर्स पर कुछ सीमाएं रहेंगी। वे: इसके अलावा, होस्ट किसी भी समय गेस्ट यूजर को कॉल से बाहर कर सकता है। सवाल 7. इस फीचर से यूजर्स को क्या फायदा होगा? जवाब: गेस्ट कॉलिंग फीचर से उन लोगों के साथ बातचीत करना आसान होगा, जो WhatsApp इस्तेमाल नहीं करते या अपने डिवाइस में नया ऐप इंस्टॉल नहीं करना चाहते। इसके प्रमुख फायदे हैं: सवाल 8. Google Calendar और Outlook के साथ क्या नया अपडेट आएगा? जवाब: दी गई जानकारी के मुताबिक, Meta ने Google Calendar और Outlook के साथ WhatsApp कॉल इंटीग्रेशन की योजना बताई है। इसके जरिए यूजर्स कैलेंडर इनवाइट के साथ WhatsApp कॉल का लिंक भी साझा कर सकेंगे। इस सुविधा के लिए WhatsApp प्लगइन इंस्टॉल करने और अकाउंट कनेक्ट करने की जरूरत हो सकती है। इसकी उपलब्धता और लॉन्च की तारीख से जुड़ी जानकारी आधिकारिक अपडेट के आधार पर देखनी चाहिए। क्या होता है एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन? एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन एक सुरक्षा तकनीक है, जिसमें बातचीत को इस तरह सुरक्षित किया जाता है कि उसे केवल अधिकृत प्रतिभागी ही समझ सकें। WhatsApp कॉल में इसका उद्देश्य कॉल करने वाले और कॉल रिसीव करने वाले लोगों की बातचीत को निजी रखना है। इससे सेवा देने वाली कंपनी समेत अन्य पक्षों के लिए बातचीत की सामग्री तक पहुंचना मुश्किल होता है। निष्कर्ष: WhatsApp का गेस्ट कॉलिंग फीचर उन लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है, जिन्हें बिना अकाउंट बनाए किसी कॉल या ऑनलाइन मीटिंग में शामिल होना है। हालांकि, फीचर की उपलब्धता और इससे जुड़ी शर्तों की पुष्टि WhatsApp के आधिकारिक अपडेट से करना बेहतर होगा।

चेतन शर्मा बोले- गेंदबाजों को भी मिले मददगार पिचें, बोले- इतना मत मारिए कि मैदान पर लौटना ही न चाहें

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी और BCCI के पूर्व मुख्य चयनकर्ता चेतन शर्मा ने टी-20 क्रिकेट में बल्लेबाजों के अनुकूल पिचों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से ऐसी पिचें तैयार करने की अपील की, जिन पर गेंदबाजों को भी मदद मिल सके। उनका कहना है कि बल्लेबाजों के पक्ष में ज्यादा झुकी पिचों से बल्ले और गेंद के बीच संतुलन बिगड़ रहा है। नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान चेतन शर्मा ने कहा, “मैं मानता हूं कि गेंदबाज रन देने के लिए मैदान पर आते हैं, लेकिन उन्हें इतना मत मारिए कि वे दोबारा मैदान पर आना ही न चाहें।” उन्होंने जोर दिया कि इंटरनेशनल क्रिकेट में भी ऐसी पिचें होनी चाहिए, जहां गेंदबाज आक्रामक बल्लेबाजों का मुकाबला कर सकें। चेतन के मुताबिक, घरेलू क्रिकेट में गेंदबाजों को मदद देने वाली पिचें तैयार करने की तरह इंटरनेशनल मैचों में भी इस दिशा में ध्यान दिया जाना चाहिए। भारत-वेस्टइंडीज टी-20 सीरीज में चौकों-छक्कों की बरसात भारत और वेस्टइंडीज के बीच जारी टी-20 सीरीज में अब तक खेले गए चार मुकाबलों में बड़े स्कोर देखने को मिले हैं। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, सीरीज में अब तक 98 छक्के और 104 चौके लग चुके हैं। दोनों टीमों की आठ पारियों में छह बार 200 रन से ज्यादा का स्कोर बना है। सीरीज के दूसरे टी-20 मुकाबले में भारत ने 249 रन बनाए थे। इसके जवाब में वेस्टइंडीज ने नौ गेंद शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया था। तीसरे टी-20 में भारतीय टीम ने 223 रन बनाए और वेस्टइंडीज को 209 रन पर रोक दिया। वहीं, चौथे मुकाबले में वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 247 रन बनाए, जबकि भारतीय टीम जवाब में 223 रन ही बना सकी। पहले मुकाबले में भी भारत ने 172 रन का लक्ष्य 14.4 ओवर में हासिल कर लिया था। लगातार बड़े स्कोर और आक्रामक बल्लेबाजी के बीच चेतन शर्मा की पिचों को लेकर यह टिप्पणी सामने आई है। रेड-बॉल क्रिकेट को भी जरूरी मानते हैं चेतन शर्मा चेतन शर्मा ने टी-20 क्रिकेट की बढ़ती लोकप्रियता को स्वीकार किया, लेकिन युवा खिलाड़ियों के विकास के लिए रेड-बॉल क्रिकेट को भी जरूरी बताया। उन्होंने कहा, “मैं पुराने विचारों वाला व्यक्ति हूं। मेरा मानना है कि रेड-बॉल क्रिकेट सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।” चेतन के अनुसार, युवा खिलाड़ियों को रेड-बॉल क्रिकेट में खेलने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने बताया कि उनकी मुलाकात ऐसे कई कोचों से हुई है, जो इस फॉर्मेट पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने खिलाड़ियों को सलाह दी कि उन्हें जो भी अवसर मिलें, उनका पूरा उपयोग करना चाहिए। पिचों पर संतुलन और खिलाड़ियों के विकास पर जोर चेतन शर्मा की टिप्पणी टी-20 क्रिकेट में बल्लेबाजों के बढ़ते दबदबे और गेंदबाजों की भूमिका को लेकर बहस के बीच आई है। उनका मानना है कि ऐसी पिचें तैयार करना जरूरी है, जहां बल्लेबाजों को रन बनाने के अवसर मिलें, लेकिन गेंदबाजों के पास भी विकेट लेने और मुकाबले में बने रहने के मौके हों। इसके साथ ही उन्होंने रेड-बॉल क्रिकेट को युवा खिलाड़ियों के तकनीकी विकास के लिए अहम बताया।

भारत-जिम्बाब्वे महिला टी-20 सीरीज का पहला मैच आज, स्मृति मंधाना की कप्तानी में उतरेगी टीम इंडिया

रायपुर: भारतीय महिला क्रिकेट टीम आज जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी-20 इंटरनेशनल सीरीज का पहला मुकाबला खेलेगी। मैच रायपुर में शाम 7 बजे से शुरू होगा। महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में भारत और जिम्बाब्वे की टीमें पहली बार आमने-सामने होंगी। रायपुर में भी पहली बार महिला इंटरनेशनल क्रिकेट मैच खेला जाएगा। स्मृति मंधाना के नियमित कप्तान बनने के बाद भारतीय टीम पहली बार मैदान पर उतरेगी। टीम इंडिया की कोशिश अपनी जीत की लय बरकरार रखने और सीरीज में बढ़त बनाने की होगी। जिम्बाब्वे की टीम इस साल एक भी टी-20 नहीं जीती जिम्बाब्वे की महिला टीम के लिए इस साल टी-20 इंटरनेशनल में प्रदर्शन चुनौतीपूर्ण रहा है। टीम ने 2026 में अब तक 18 मुकाबले खेले हैं और सभी में उसे हार का सामना करना पड़ा है। जिम्बाब्वे की पिछली टी-20 इंटरनेशनल जीत सितंबर 2025 में नामीबिया के खिलाफ आई थी। दूसरी ओर, भारतीय महिला टीम लगातार आठ टी-20 इंटरनेशनल मुकाबले जीत चुकी है। टीम ने हाल ही में एशिया कप का खिताब जीता था और एशियन गेम्स में भी गोल्ड मेडल हासिल किया था। ऐसे में भारतीय टीम का पलड़ा मजबूत माना जा रहा है। उपकप्तान शेफाली वर्मा पर रहेंगी नजरें भारतीय टीम की उपकप्तान शेफाली वर्मा अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से मैच का रुख बदल सकती हैं। उन्होंने इस साल 24 टी-20 मैचों में 162.83 के स्ट्राइक रेट से 863 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर नाबाद 100 रन रहा। शेफाली से उम्मीद होगी कि वह टीम को तेज शुरुआत दिलाएं और बड़े स्कोर की नींव रखें। गेंदबाजी में श्री चरणी से उम्मीदें गेंदबाजी में श्री चरणी भारतीय टीम के लिए अहम भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने इस साल 23 मैचों में 47 विकेट लिए हैं और उनकी इकोनॉमी 5.67 रही है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, वह इस साल टी-20 इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज हैं। भारतीय टीम को उम्मीद होगी कि श्री चरणी अपनी गेंदबाजी से जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी पर दबाव बनाएं। पहले मैच में भारत की नजर जीत पर भारत और जिम्बाब्वे के बीच यह पहली महिला टी-20 इंटरनेशनल भिड़ंत होगी। घरेलू मैदान पर खेलने और लगातार जीत के रिकॉर्ड के कारण भारतीय टीम से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। वहीं, जिम्बाब्वे की टीम लगातार हार के सिलसिले को तोड़ने की कोशिश करेगी। तीन मैचों की इस सीरीज का पहला मुकाबला दोनों टीमों के लिए अहम रहेगा। भारत जहां जीत के साथ शुरुआत करना चाहेगा, वहीं जिम्बाब्वे उलटफेर करने के इरादे से मैदान पर उतरेगा।

विप्रो का रेवेन्यू 9.1% बढ़ा, लेकिन मुनाफा 1.4% घटा; 2026 में अब तक 35% टूट चुका है शेयर

देश की प्रमुख आईटी कंपनियों में शामिल विप्रो ने 15 अक्टूबर को जुलाई-सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी किए। कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 9.1% बढ़कर ₹24,752.7 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹22,697.3 करोड़ था। हालांकि, रेवेन्यू में बढ़ोतरी के बावजूद कंपनी के मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई। जुलाई-सितंबर तिमाही में विप्रो को ₹3,200.6 करोड़ का मुनाफा हुआ, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह ₹3,246.2 करोड़ था। यानी कंपनी का मुनाफा सालाना आधार पर करीब 1.4% घटा। इन आंकड़ों से पता चलता है कि कंपनी की कुल कमाई बढ़ी है, लेकिन खर्चों और अन्य वित्तीय कारकों के कारण अंतिम मुनाफे में मामूली कमी आई है। विप्रो के तिमाही नतीजों पर एक नजर वित्तीय आंकड़ा जुलाई-सितंबर 2025 जुलाई-सितंबर 2026 रेवेन्यू ₹22,697.3 करोड़ ₹24,752.7 करोड़ मुनाफा ₹3,246.2 करोड़ ₹3,200.6 करोड़ रेवेन्यू में सालाना बदलाव — 9.1% की बढ़ोतरी मुनाफे में सालाना बदलाव — 1.4% की गिरावट शेयर बाजार में 1.83% की तेजी तिमाही नतीजों की घोषणा से पहले गुरुवार को विप्रो के शेयर में तेजी देखने को मिली। कंपनी का शेयर 1.83% बढ़कर ₹174.05 पर बंद हुआ। हालांकि, साल 2026 में अब तक विप्रो के शेयर में करीब 34.9% की गिरावट आ चुकी है। इसी अवधि में निफ्टी 50 में लगभग 12% की गिरावट दर्ज की गई। इस तरह विप्रो के शेयर का प्रदर्शन प्रमुख बाजार सूचकांक के मुकाबले कमजोर रहा है। कंपनी का बाजार पूंजीकरण यानी मार्केट कैप करीब ₹1.72 लाख करोड़ बताया गया है। वित्तीय नतीजों से जुड़े शब्दों का आसान मतलब Q2 FY27: वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही, यानी जुलाई से सितंबर 2026। Q1 FY27: वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही, यानी अप्रैल से जून 2026। Q2 FY26: वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही, यानी जुलाई से सितंबर 2025। रेवेन्यू: कंपनी को अपनी सेवाओं और कारोबार से मिलने वाली कुल आय। प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT): खर्च, ब्याज और टैक्स सहित संबंधित मदों को घटाने के बाद बचने वाला मुनाफा। EBITDA: ब्याज, टैक्स और मूल्यह्रास-अमूर्तकरण जैसे खर्चों से पहले की कमाई का एक वित्तीय माप। EPS: प्रति शेयर कमाई। इससे पता चलता है कि कंपनी ने प्रत्येक शेयर के हिसाब से कितनी कमाई की। आगे निवेशकों की नजर किन बातों पर रहेगी? विप्रो के नतीजों में रेवेन्यू की बढ़ोतरी और मुनाफे में गिरावट दोनों महत्वपूर्ण संकेत हैं। निवेशक आगे कंपनी की लागत, नए प्रोजेक्ट्स, आईटी सेवाओं की मांग और भविष्य के कारोबार संबंधी अनुमानों पर नजर रख सकते हैं। हालांकि, केवल एक तिमाही के नतीजों या शेयर की हालिया गिरावट के आधार पर निवेश का फैसला करना उचित नहीं है। निवेश से पहले कंपनी के आधिकारिक वित्तीय नतीजों और अन्य प्रासंगिक जानकारियों की समीक्षा करना जरूरी है।
Starlink

Reliance-Starlink Controversy: मस्क के आरोपों पर अंबानी की कंपनी का जवाब, कहा- Competition से नहीं डरते

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर रिलायंस (Reliance) इंडस्ट्रीज और एलन मस्क की कंपनी Starlink के बीच चर्चा तेज हो गई है। स्टारलिंक की भारत में एंट्री में देरी को लेकर मस्क ने सवाल उठाए थे। अब मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस ने अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि वह प्रतिस्पर्धा से कभी नहीं डरी और भारत में स्टारलिंक का स्वागत करती है। Reliance के इस बयान के बाद देश के टेलीकॉम और सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में मुकाबले को लेकर चर्चा बढ़ गई है। एक तरफ एलन मस्क की स्टारलिंक भारतीय बाजार में अपनी सेवाएं शुरू करना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ जियो भी सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। Reliance ने Starlink को लेकर क्या कहा? Reliance इंडस्ट्रीज ने अपने बयान में कहा कि कंपनी ने हमेशा प्रतिस्पर्धा का सामना किया है और वह नई कंपनियों के बाजार में आने से नहीं घबराती। कंपनी के मुताबिक, भारत में कारोबार करने वाली सभी कंपनियों को देश के नियमों का पालन करना चाहिए। रिलायंस ने स्टारलिंक का स्वागत करते हुए यह भी संकेत दिया कि सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में मुकाबला ग्राहकों के लिए फायदेमंद हो सकता है। कंपनी का मानना है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सेवाओं की गुणवत्ता और ग्राहकों के अनुभव में सुधार की गुंजाइश बनती है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत को लेकर कई कंपनियां तैयारी कर रही हैं। Elon Musk ने Mukesh Ambani पर क्यों उठाए सवाल? एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग में हो रही देरी को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी हित कंपनी की भारतीय बाजार में एंट्री को मुश्किल बना रहे हैं। इस विवाद में रिलायंस और मुकेश अंबानी का नाम भी सामने आया। मस्क का कहना है कि स्टारलिंक जैसी कंपनियों को भारतीय बाजार में काम करने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि ग्राहकों के पास इंटरनेट सेवा चुनने के अधिक विकल्प हों। हालांकि, इन आरोपों से यह साबित नहीं होता कि स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी के पीछे रिलायंस की भूमिका है। इसके लिए किसी ठोस प्रमाण की जरूरत होगी। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए कंपनियों को लाइसेंस के साथ-साथ दूसरी जरूरी मंजूरियां भी हासिल करनी होती हैं। Jio भी Satellite Internet Market में उतरने को तैयार Reliance जियो ने साल 2016 में भारतीय टेलीकॉम बाजार में कदम रखा था। सस्ते डेटा और किफायती सेवाओं के कारण कंपनी ने तेजी से ग्राहक जोड़े और देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों में अपनी जगह बनाई। अब जियो की नजर सैटेलाइट इंटरनेट बाजार पर भी है। इस तकनीक के जरिए उन इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाने में मदद मिल सकती है, जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क या ब्रॉडबैंड कनेक्शन उपलब्ध कराना मुश्किल है। दूसरी तरफ, स्टारलिंक अपने सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए भारत में इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराना चाहती है। ऐसे में आने वाले समय में दोनों कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। Starlink की India Launch में देरी की वजह क्या है? भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करना केवल लाइसेंस मिलने तक सीमित नहीं है। कंपनियों को सुरक्षा मानकों, तकनीकी आवश्यकताओं और सरकारी नियमों से जुड़ी प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होती हैं। स्टारलिंक के अलावा जियो और भारती समूह से जुड़ी Eutelsat OneWeb भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन कंपनियों की सेवाओं की शुरुआत जरूरी मंजूरियों और नियामकीय शर्तों पर निर्भर करती है। इसलिए स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी को किसी एक कंपनी से जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी। वास्तविक स्थिति समझने के लिए सरकारी मंजूरियों और संबंधित कंपनियों की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखना जरूरी है। आम लोगों को क्या होगा फायदा? अगर भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू होती हैं, तो इसका फायदा खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को मिल सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों और उन जगहों पर, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है, यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि, ग्राहकों के लिए सबसे अहम सवाल इंटरनेट की कीमत, स्पीड और उपलब्धता का होगा। स्टारलिंक और जियो की सेवाएं कितनी किफायती होंगी, यह उनकी व्यावसायिक योजनाओं और लॉन्च के समय घोषित किए जाने वाले प्लान पर निर्भर करेगा। अब आगे क्या? रिलायंस के बयान से साफ है कि कंपनी सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है। वहीं, एलन मस्क की स्टारलिंक भारतीय बाजार में अपनी सेवाएं शुरू करने का इंतजार कर रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि जरूरी सरकारी प्रक्रियाएं कब पूरी होती हैं और कंपनियां ग्राहकों के लिए अपनी सेवाएं कब पेश करती हैं। अगर बाजार में कई कंपनियां उतरती हैं, तो भारतीय ग्राहकों को इंटरनेट के नए विकल्प मिल सकते हैं। फिलहाल, रिलायंस और स्टारलिंक के बीच जारी यह बहस भारत के तेजी से बदलते डिजिटल और टेलीकॉम बाजार की एक अहम तस्वीर पेश करती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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