नई दिल्ली/मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के संभावित विलय और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि, इस संबंध में भाजपा, एनसीपी या एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार आगामी संसद सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। इसी बीच यह दावा किया जा रहा है कि एनडीए नेतृत्व ने सुझाव दिया है कि एनसीपी के दोनों गुट एकजुट होकर गठबंधन में शामिल हों, बजाय इसके कि कोई एक गुट अलग से सत्ता पक्ष में शामिल हो। परिसीमन विधेयक पर रुख बदलने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि एनसीपी (शरदचंद्र पवार) परिसीमन विधेयक पर अपने रुख पर पुनर्विचार कर सकती है। इसे संभावित राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कैबिनेट में प्रतिनिधित्व का प्रस्ताव होने का दावा सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि दोनों गुटों के विलय की स्थिति में केंद्रीय मंत्रिमंडल में दो पद देने का प्रस्ताव रखा गया है। बताया जा रहा है कि इसका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक संतुलन बनाए रखना है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। एनसीपी के भीतर मतभेद की भी चर्चा रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ नेताओं के सत्ता में भागीदारी को लेकर अलग विचार हैं, जबकि कुछ संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने की बात कर रहे हैं। इन चर्चाओं पर भी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। शरद पवार गुट के सामने कई विकल्प सूत्रों के मुताबिक, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के भीतर भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर अलग-अलग मत हैं। कुछ नेता एनडीए के साथ जाने के पक्ष में बताए जा रहे हैं, जबकि कुछ कांग्रेस के साथ तालमेल बनाए रखने के समर्थक हैं। हालांकि, इस संबंध में भी कोई आधिकारिक निर्णय या घोषणा नहीं हुई है। 1999 में हुआ था NCP का गठन राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की स्थापना 10 जून 1999 को शरद पवार, पी.ए. संगमा और तारिक अनवर ने कांग्रेस से अलग होकर की थी। इसके बाद से पार्टी महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। संख्या बल पर टिकी नजर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भविष्य में एनसीपी के दोनों गुट एकजुट होकर एनडीए का हिस्सा बनते हैं, तो संसद में सत्तापक्ष का संख्या बल बढ़ सकता है। हालांकि, फिलहाल यह पूरा घटनाक्रम मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक अटकलों पर आधारित है तथा किसी भी पक्ष ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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