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रानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट हो गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। सामान चढ़ाने और यात्रियों के आने-जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया, जिसके चलते ट्रेन करीब 29 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। आरोप है कि पैंट्री कर्मचारियों ने एकजुट होकर यात्रियों पर हमला किया। विवाद के दौरान कर्मचारियों द्वारा चेन पुलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन पर पहले ही निर्धारित समय से 3 घंटे 33 मिनट की देरी से पहुंची थी। जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया विवाद घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों व पैंट्री कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराया। जीआरपी टीआई अमित शर्मा के मुताबिक, पीड़ित यात्री बेंगलुरु जा रहा था। उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन पर इस मामले में शिकायत नहीं मिली। वहीं, नागपुर में जीरो पर प्रकरण दर्ज किए जाने की सूचना है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जीआरपी के स्तर पर की जाएगी।
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मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव

मध्यप्रदेश में पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार करीब साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 330 विकासखंडों में हर साल पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। सरकार की इस पहल से स्थानीय खेलों को प्रतियोगिताओं और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। पिट्ठू से मलखंभ तक, कई खेल होंगे शामिल प्रस्तावित योजना में पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक व आंचलिक खेलों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ जैसे खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन स्पर्धाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक समान नियम तैयार किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के समान अवसर मिल सकें। छोटे शहरों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र खेल विभाग का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ऐसे खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक खेलों से जोड़ने की भी तैयारी खेल विभाग इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करेगा। इसके बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार करने की योजना है। विभाग पारंपरिक खेलों से जुड़ी प्रतिभाओं को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इस पहल के जरिए पारंपरिक खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: विश्वास सारंग खेल मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अंचलों में कई देशी खेल प्रचलित हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर खेलने के अवसर सीमित हैं। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन खेलों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना में टीम आधारित और व्यक्तिगत, दोनों तरह के खेलों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।
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एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
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SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में विवादों की लंबी फेहरिस्त, खरीदी से लेकर भर्ती तक उठे सवाल

मध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने के उद्देश्य से अप्रैल 2024 में डीन की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव किया गया था। पदोन्नति की पुरानी व्यवस्था के स्थान पर 18 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पहली बार सीधी भर्ती के जरिए डीन नियुक्त किए गए। इसका उद्देश्य कॉलेजों के प्रशासन और वित्तीय कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना था। हालांकि, करीब ढाई साल बाद भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों से जुड़ी शिकायतों में कमी आती नजर नहीं आ रही है। कहीं मेडिकल उपकरणों की खरीदी में अनियमितताओं के आरोप लगे, तो कहीं कर्मचारियों की भर्ती और वित्तीय लेन-देन पर सवाल उठे। कई मामलों में जांच शुरू हुई, जबकि कुछ मामलों में पुलिस और लोकायुक्त तक कार्रवाई के लिए पहुंचे। रीवा मेडिकल कॉलेज में डीन बदले, अस्पताल की घटनाओं से उठे सवाल स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के गृह जिले रीवा में मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पताल में पहले प्रसूता की मौत और फिर जीवित व्यक्ति को मृत घोषित किए जाने जैसी घटनाएं सामने आईं। इसके बाद डीन डॉ. सुनील अग्रवाल को पद से हटाकर सतना भेज दिया गया। उनकी जगह डॉ. शशिधर गर्ग को नया डीन नियुक्त किया गया। इसी कॉलेज से जुड़े संजय गांधी अस्पताल में 80 नर्सिंग छात्राओं ने ईएनटी विभाग के एक डॉक्टर पर अभद्रता करने का आरोप लगाया। इन घटनाओं ने अस्पताल के प्रशासन और व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए। उधर, शिवपुरी मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारियों पर आयुष्मान योजना की प्रोत्साहन राशि अपने खातों में ट्रांसफर कराने के आरोप लगे। मामले में लोकायुक्त ने प्रारंभिक जांच शुरू की है। वहीं, नए मेडिकल कॉलेजों में डीन की सीधी भर्ती को लेकर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है। इंदौर: मशीन खरीदी में गड़बड़ी के आरोप, डीन को आरोप पत्र इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में मेडिकल उपकरणों की खरीदी को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। शिकायत में दावा किया गया कि करीब 98 लाख रुपए में खरीदी गई ओटी लाइट जैसी लाइट जेम पोर्टल पर लगभग 7 लाख रुपए में उपलब्ध थी। इसके अलावा करीब 70.50 लाख रुपए के कैमरों की खरीदी पर भी सवाल उठे। मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय समिति गठित की गई। लोकायुक्त ने भी विभाग से रिपोर्ट मांगी है। वहीं, जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन की खरीदी के मामले में डीन के खिलाफ आरोप पत्र जारी किए जाने की जानकारी सामने आई। भोपाल: उपकरणों की खरीदी पर शिकायत, वेतन नहीं मिलने से हड़ताल भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में मेडिकल उपकरणों की खरीदी को लेकर शिकायतें सामने आईं। मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई। शिकायतकर्ता ने जांच समिति की रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति मांगते हुए मुख्य सचिव को भी आवेदन दिया। इसी बीच हमीदिया अस्पताल में आउटसोर्स कर्मचारियों को दो महीने तक वेतन नहीं मिलने के कारण हड़ताल करनी पड़ी। इससे अस्पताल के कामकाज और कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर सवाल उठे। ग्वालियर: डाइट सप्लाई और वित्तीय अनियमितताओं की जांच ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज में मरीजों के लिए डाइट सप्लाई को लेकर विवाद सामने आया। इसके अलावा वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें भी जांच के दायरे में आईं। वर्ष 2024 में कॉलेज में करीब 19 करोड़ रुपए के खर्च और खरीदी से जुड़े मामलों की जांच की जानकारी सामने आई थी। इन मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए। जबलपुर: 1.63 करोड़ रुपए की गड़बड़ी, तीन कर्मचारी गिरफ्तार जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज की कैश शाखा में वर्ष 2026 में 1.63 करोड़ रुपए से अधिक की राशि के हिसाब में गड़बड़ी का मामला सामने आया। आंतरिक जांच के बाद डीन डॉ. नवनीत सक्सेना की शिकायत पर पुलिस ने पांच कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। इनमें से तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। खंडवा से सागर तक, दूसरे मेडिकल कॉलेजों में भी शिकायतें खंडवा मेडिकल कॉलेज: छात्रों ने मेस की साफ-सफाई और भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में रसोई में गंदगी और कीड़े-मकोड़े मिलने की बात सामने आई। विदिशा मेडिकल कॉलेज: आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति में गड़बड़ी के आरोप लगे। शहडोल मेडिकल कॉलेज: नवजात के इलाज में लापरवाही के आरोपों के बाद हंगामा हुआ और पुलिस ने जांच शुरू की। इसके अलावा करीब 150 कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि और एसीआर से जुड़ी शिकायतें कीं। दतिया मेडिकल कॉलेज: वर्ष 2026 में नर्सिंग अधीक्षक की नियुक्ति को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया। रतलाम मेडिकल कॉलेज: अनियमितताओं से जुड़ी शिकायत का मुद्दा विधानसभा में उठाया गया। सागर मेडिकल कॉलेज: सोनोग्राफी सेवा बंद रहने और इलाज में लापरवाही सहित कई शिकायतें सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज कराई गईं। सीधी भर्ती से बदलाव की उम्मीद, लेकिन जवाबदेही पर सवाल सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डीन की नियुक्ति प्रक्रिया बदलने का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना और वित्तीय कामकाज में पारदर्शिता लाना था। लेकिन अलग-अलग कॉलेजों से सामने आए मामलों ने निगरानी व्यवस्था, खरीद प्रक्रिया, भर्ती और अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। अब इन शिकायतों की जांच और उन पर होने वाली कार्रवाई अहम होगी। इससे ही स्पष्ट होगा कि अनियमितताओं के आरोपों पर कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है और सरकारी मेडिकल कॉलेजों की व्यवस्था में कितना सुधार आता है।
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एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Share Market

Share Market Update सेंसेक्स की तेजी पर लगा ब्रेक, Auto-Metal Stocks में दबाव

शेयर बाजार (Share Market) में तेजी देखकर खरीदारी करने वाले निवेशकों के लिए बुधवार का कारोबार थोड़ा निराशाजनक रहा। 21 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार ने शुरुआत में अच्छी बढ़त बनाई, लेकिन दोपहर तक तस्वीर बदल गई। सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर से करीब 1,200 अंक नीचे आ गया और 73,500 के आसपास कारोबार करने लगा। ऑटो और मेटल शेयरों में बिकवाली ने बाजार की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। शुरुआती कारोबार में खरीदारी का माहौल था, लेकिन जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया। इसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर दबाव देखने को मिला। बाजार में गिरावट के बीच निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर है। Sensex और Nifty में गिरावट, शुरुआती तेजी पड़ी फीकी बुधवार को बाजार की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ हुई थी। कुछ बड़े शेयरों में खरीदारी से प्रमुख इंडेक्स को सहारा मिला। हालांकि, ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू होने के बाद सेंसेक्स अपनी बढ़त बरकरार नहीं रख सका। दिन के उच्चतम स्तर से करीब 1,200 अंक की गिरावट ने बाजार में जारी उतार-चढ़ाव को उजागर किया। निफ्टी पर भी दबाव देखने को मिला। निवेशक फिलहाल बाजार में बड़े दांव लगाने के बजाय कारोबार से जुड़े संकेतों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। Auto और Metal Stocks में क्यों बढ़ी बिकवाली? बाजार की गिरावट में ऑटो और मेटल सेक्टर के शेयरों की कमजोरी चर्चा में रही। इन सेक्टरों में बिकवाली से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। ऑटो कंपनियों के शेयरों पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए वाहन बिक्री, मांग और उत्पादन लागत जैसे पहलू अहम हैं। वहीं, मेटल कंपनियों के प्रदर्शन पर वैश्विक मांग, धातुओं की कीमतों और औद्योगिक गतिविधियों का असर पड़ता है। हालांकि, पूरे सेक्टर को एक ही नजर से देखना सही नहीं होगा। अलग-अलग कंपनियों के शेयरों में उनकी वित्तीय स्थिति और कारोबार के आधार पर अलग-अलग चाल देखने को मिल सकती है। Crude Oil Price में तेजी से बढ़ी चिंता अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भी भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। तेल महंगा होने से भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर महंगाई, परिवहन खर्च और कई कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे कुछ कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से निवेशक वैश्विक घटनाक्रम और तेल बाजार की चाल पर नजर रख रहे हैं। IT Stocks और Reliance पर भी निवेशकों की नजर जहां ऑटो और मेटल शेयरों में दबाव देखने को मिला, वहीं आईटी सेक्टर और रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े घटनाक्रम भी बाजार की चर्चा में रहे। आईटी कंपनियों के तिमाही नतीजे और कारोबार की संभावनाएं निवेशकों के लिए अहम हैं। इसके अलावा, जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO से जुड़ी गतिविधियों पर भी बाजार की नजर बनी हुई है। हालांकि, किसी एक कंपनी में खरीदारी या तेजी से पूरे बाजार की दिशा तय नहीं होती। सेंसेक्स और निफ्टी पर कई बड़े शेयरों और सेक्टरों का संयुक्त असर पड़ता है। Share Market में गिरावट की 4 बड़ी वजहें निवेशक अब किन बातों पर रखें नजर? आने वाले कारोबारी सत्रों में कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, वैश्विक बाजारों का रुख और कंपनियों के तिमाही नतीजे अहम रहेंगे। इन संकेतों से बाजार की दिशा को समझने में मदद मिल सकती है, हालांकि बाजार की चाल का सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल एक दिन की तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला न लें। निवेश से पहले कंपनी के प्रदर्शन, अपनी जोखिम क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना बेहतर रहता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold-Silver Rate

Gold-Silver Rate सोना लगातार दूसरे दिन हुआ सस्ता, चांदी के दाम भी गिरे

Gold-Silver Rate में गिरावट ने सर्राफा बाजार का ध्यान खींचा है। बीते दो दिनों में सोना करीब ₹2,300 सस्ता होने की खबर है। वहीं, चांदी के दाम में भी लगभग ₹5,000 की कमी दर्ज की गई है। ऐसे में जो लोग त्योहारों या शादी के लिए गहने खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, उनकी नजर अब सोने-चांदी के नए भाव पर है। आपके दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 10 ग्राम सोने की कीमत घटकर करीब ₹1.44 लाख रह गई है। हालांकि, 21 अक्टूबर 2026 को सामने आए ताजा बाजार अपडेट में सोने और चांदी के भाव अलग-अलग स्तर पर दर्ज किए गए। इसलिए खरीदारी से पहले आज का रेट जरूर जांच लें। Gold Price Today: 10 ग्राम सोने का भाव कितना है? 21 अक्टूबर के बाजार अपडेट के अनुसार, सोने की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। सुबह करीब 11:25 बजे उपलब्ध एक रिपोर्ट के मुताबिक, 10 ग्राम सोना ₹669 सस्ता होकर ₹1,45,850 पर पहुंच गया। इससे पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव ₹1,46,519 था। वहीं, एक अन्य बाजार अपडेट में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,46,220 प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। अलग-अलग रिपोर्टों में कीमतों का अंतर अपडेट के समय और बाजार के आधार पर हो सकता है। सोने की कीमतों में आई इस गिरावट से उन लोगों को कुछ राहत मिल सकती है, जो लंबे समय से गहने खरीदने के लिए सही मौके का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, केवल एक-दो दिन के भाव देखकर खरीदारी का फैसला करना सही नहीं होगा। Silver Price Today: चांदी भी हुई सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट देखने को मिली। 21 अक्टूबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक किलो चांदी का भाव ₹2,11,485 से घटकर ₹2,09,050 पर आ गया। यानी कीमत में ₹2,435 की कमी दर्ज की गई। वहीं, कुछ खुदरा बाजारों में चांदी का भाव करीब ₹2.30 लाख प्रति किलो बताया गया। यह अंतर बाजार और कीमत अपडेट के तरीके के कारण हो सकता है। इसलिए अपने शहर के सर्राफा बाजार से ताजा भाव की पुष्टि करना जरूरी है। चांदी का इस्तेमाल सिर्फ गहने बनाने में ही नहीं, बल्कि बर्तन, सिक्के और कई औद्योगिक उत्पादों में भी होता है। यही वजह है कि इसके दाम में होने वाले बदलाव पर खरीदारों और कारोबारियों की नजर बनी रहती है। Gold-Silver Rate क्यों गिर रहे हैं? सोने और चांदी की कीमतों पर घरेलू मांग के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी असर पड़ता है। डॉलर की मजबूती, रुपये की विनिमय दर, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और वैश्विक आर्थिक हालात कीमतों में उतार-चढ़ाव ला सकते हैं। 21 अक्टूबर की बाजार रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है। निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक से मिलने वाले संकेतों का भी इंतजार कर रहे हैं। इन परिस्थितियों का असर कीमती धातुओं की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। हालांकि, सोने और चांदी के भाव में गिरावट की वजह केवल एक कारक नहीं है। बाजार में निवेशकों की खरीद-बिक्री और अंतरराष्ट्रीय घटनाएं भी कीमतों की दिशा तय करती हैं। क्या अभी सोना-चांदी खरीदना सही रहेगा? अगर आप त्योहार, शादी या किसी पारिवारिक कार्यक्रम के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अलग-अलग दुकानों के भाव की तुलना करना फायदेमंद रहेगा। लेकिन यह जरूरी नहीं कि आज कीमत कम हुई है तो आने वाले दिनों में भी गिरावट जारी रहेगी। खरीदारी के समय इन बातों का ध्यान रखें: Gold-Silver Price: अलग-अलग शहरों में भाव क्यों बदलते हैं? दिल्ली, मुंबई, भोपाल, इंदौर और दूसरे शहरों में सोने-चांदी की कीमतों में अंतर हो सकता है। स्थानीय बाजार की परिस्थितियां, कारोबारी मार्जिन और आभूषण बनाने के शुल्क अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा, ऑनलाइन दिखाई देने वाला बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप पर मिलने वाली कीमत एक जैसी होना जरूरी नहीं है। इसलिए खरीदारी से पहले स्थानीय ज्वेलर से कीमत की पुष्टि करना बेहतर रहेगा। आज के Gold-Silver Rate पर एक नजर 21 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध अलग-अलग बाजार अपडेट के अनुसार: ये दरें अलग-अलग बाजारों और अपडेट के समय के आधार पर हैं। इन्हें एक ही बाजार की समान दर न मानें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Para Asian Games

Para Asian Games भारत को 3 Gold, Shot Put और High Jump में खिलाड़ियों ने दिखाया दम

Asian Para Games 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। जापान के आइची-नागोया में हो रहे इस खेल आयोजन में भारत ने एथलेटिक्स और तीरंदाजी में कई पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया। शॉट पुट में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक अपने नाम किए, वहीं हाई जंप में भी गोल्ड और सिल्वर मेडल भारत के खाते में आए। इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि भारतीय खिलाड़ियों ने अलग-अलग स्पर्धाओं में अपनी मेहनत और दमखम दिखाया। सचिन खिलारी, प्रवीण कुमार और आयुष वर्मा ने गोल्ड मेडल जीतकर सुर्खियां बटोरीं। इनके अलावा दूसरे खिलाड़ियों ने भी सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत की पदक तालिका में योगदान दिया। Shot Put में भारत का क्लीन स्वीप, सचिन खिलारी ने जीता Gold पुरुषों की शॉट पुट F46 स्पर्धा में सचिन सरजेराव खिलारी ने 15.87 मीटर का थ्रो करके गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने अपने आखिरी प्रयास में यह दूरी हासिल की और गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। इस मुकाबले में भारत का प्रदर्शन और भी खास रहा। मोहम्मद यासिर ने 15.06 मीटर के थ्रो के साथ सिल्वर मेडल जीता, जबकि परवीन ने 14.94 मीटर के थ्रो के साथ ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। इस तरह इस स्पर्धा के तीनों पदक भारतीय खिलाड़ियों के खाते में आए। एक ही इवेंट में गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज जीतना भारत के लिए बड़ी उपलब्धि रही। High Jump में प्रवीण कुमार ने बनाया रिकॉर्ड हाई जंप में प्रवीण कुमार ने 2.05 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। उनके इस प्रदर्शन ने भारतीय दल को एक और बड़ी सफलता दिलाई। प्रवीण ने शानदार छलांग के साथ गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। इसी स्पर्धा में भारत के बंटी ने 1.92 मीटर की छलांग लगाकर सिल्वर मेडल हासिल किया। इस तरह हाई जंप में भी भारत को दो पदक मिले। आयुष वर्मा के नाम भी Gold Medal पुरुषों की शॉट पुट F53 स्पर्धा में आयुष वर्मा ने 8.16 मीटर का थ्रो करके गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में यह दूरी हासिल की। आयुष के लिए यह प्रतियोगिता का दूसरा पदक रहा। इससे पहले वह जैवलिन थ्रो में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके थे। लगातार दो स्पर्धाओं में पदक जीतना उनके शानदार प्रदर्शन को दिखाता है। भाग्यश्री जाधव ने जीता Silver, अनभव चौधरी को Bronze महिलाओं की शॉट पुट F34 स्पर्धा में भाग्यश्री जाधव ने 8.19 मीटर का थ्रो करके सिल्वर मेडल जीता। वहीं, पुरुषों की 100 मीटर T35 दौड़ में अनभव चौधरी ने 12.72 सेकंड का समय निकालकर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। इन पदकों के साथ भारतीय खिलाड़ियों ने एथलेटिक्स में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। मैदान पर उनकी मेहनत का नतीजा पदकों के रूप में देखने को मिला। Archery में शीतल देवी और पायल नाग की जोड़ी को Silver तीरंदाजी में शीतल देवी और पायल नाग की जोड़ी ने महिला कंपाउंड डबल्स स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता। फाइनल मुकाबले में भारतीय जोड़ी को चीन की टीम से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, गोल्ड नहीं मिल सका, लेकिन दोनों खिलाड़ियों ने सिल्वर मेडल जीतकर भारत की पदक संख्या में इजाफा किया। Asian Para Games में भारत का शानदार प्रदर्शन एशियन पैरा गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार चर्चा में है। एथलेटिक्स से लेकर तीरंदाजी तक, खिलाड़ी अलग-अलग स्पर्धाओं में पदक जीत रहे हैं। गोल्ड मेडल के साथ सिल्वर और ब्रॉन्ज की उपलब्धियां भी भारतीय दल के लिए अहम हैं। सचिन खिलारी का रिकॉर्ड बनाने वाला थ्रो, प्रवीण कुमार की शानदार छलांग और आयुष वर्मा का गोल्ड मेडल इस दिन की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहे। अब भारतीय खेल प्रेमियों की नजरें आगामी मुकाबलों पर हैं, जहां खिलाड़ियों से एक बार फिर अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी। भारतीय खिलाड़ियों की यह सफलता बताती है कि मेहनत, लगन और हौसले के दम पर वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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