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Bhopal-Indore Metro: अब 30 सेकंड में मिलेगा मेट्रो टिकट, हर स्टेशन पर लगीं 2-2 TVM मशीनें; पहले दिन ही आई खराबी

Bhopal-Indore Metro: अब 30 सेकंड में मिलेगा मेट्रो टिकट, हर स्टेशन पर लगीं 2-2 TVM मशीनें; पहले दिन ही आई खराबी

मध्य प्रदेश में मेट्रो से सफर करने वाले यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। भोपाल और इंदौर मेट्रो में अब टिकट खरीदने के लिए लंबी लाइन में लगने की जरूरत नहीं होगी। यात्रियों की सुविधा के लिए टिकट वेंडिंग मशीन (TVM) शुरू की जा रही हैं। इन मशीनों की मदद से यात्री महज 30 सेकंड में अपना टिकट ले सकेंगे। भोपाल और इंदौर के मेट्रो स्टेशनों पर दो-दो टिकट वेंडिंग मशीनें लगाई गई हैं। इस सुविधा का उद्देश्य टिकट काउंटर पर भीड़ कम करना और यात्रियों का समय बचाना है। हालांकि, शुरुआत में ही कुछ मशीनों में तकनीकी खराबी सामने आने से सुविधा पर सवाल भी उठे हैं। हर स्टेशन पर लगाई गईं 2-2 टिकट मशीनें भोपाल और इंदौर मेट्रो के यात्रियों को अब टिकट खरीदने के लिए केवल काउंटर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। हर स्टेशन पर दो टिकट वेंडिंग मशीनें लगाई गई हैं। इन मशीनों के जरिए यात्री खुद टिकट खरीद सकेंगे। इसके लिए उन्हें स्टेशन पर उपलब्ध मशीन की स्क्रीन पर अपनी यात्रा से जुड़ी जानकारी दर्ज करनी होगी। नई व्यवस्था से खासतौर पर उन यात्रियों को फायदा मिलेगा, जिन्हें जल्दबाजी में सफर करना होता है या टिकट काउंटर पर भीड़ के कारण इंतजार करना पड़ता है। कैसे काम करेगी TVM मशीन? टिकट वेंडिंग मशीन का इस्तेमाल करना काफी आसान रखा गया है। यात्री कुछ आसान स्टेप्स में अपना टिकट प्राप्त कर सकते हैं। पूरी प्रक्रिया में करीब 30 सेकंड का समय लगने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वास्तविक समय भुगतान और मशीन की स्थिति पर निर्भर करेगा। पहले ही दिन मशीन में आई तकनीकी खराबी नई सुविधा शुरू होने के साथ ही पहले दिन कुछ टिकट वेंडिंग मशीनों में तकनीकी समस्या सामने आई। इसके कारण यात्रियों को टिकट लेने में परेशानी हुई। मशीनों के ठीक से काम नहीं करने की शिकायतों के बाद तकनीकी टीम को उनकी जांच और सुधार के लिए लगाया गया। शुरुआत में आई इस समस्या के कारण यात्रियों को कुछ समय तक टिकट काउंटर का सहारा लेना पड़ सकता है। भोपाल और इंदौर के मेट्रो यात्रियों को क्या होगा फायदा? TVM मशीनें शुरू होने से दोनों शहरों में मेट्रो से यात्रा करने वाले लोगों को कई सुविधाएं मिलेंगी।
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Shivraj Singh Chouhan Mother Death: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मां काशीबाई का निधन, 76 साल की उम्र में भोपाल AIIMS में ली अंतिम सांस

Shivraj Singh Chouhan Mother Death: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मां काशीबाई का निधन, 76 साल की उम्र में भोपाल AIIMS में ली अंतिम सांस

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के परिवार से दुखद खबर सामने आई है। उनकी मां काशीबाई का शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 की सुबह भोपाल के AIIMS अस्पताल में निधन हो गया। वह करीब 76 वर्ष की थीं और पिछले एक सप्ताह से अस्पताल में भर्ती थीं। उनकी तबीयत गंभीर होने के कारण उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। मां के निधन की खबर मिलते ही शिवराज सिंह चौहान ने अपने सभी पहले से तय कार्यक्रम रद्द कर दिए। उन्हें शुक्रवार को रायसेन में आयोजित किसान सम्मेलन में शामिल होना था, लेकिन अब वह इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। एक हफ्ते से AIIMS में चल रहा था इलाज जानकारी के मुताबिक, काशीबाई पिछले कुछ समय से बीमार चल रही थीं। उन्हें सांस लेने में परेशानी होने के बाद भोपाल के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती कराया गया था। करीब एक सप्ताह तक डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चला। हालत गंभीर होने पर उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया था। शुक्रवार सुबह उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। काशीबाई भोपाल के साकेत नगर स्थित अपने आवास में रहती थीं। उनके निधन की खबर से परिवार और परिचितों में शोक का माहौल है। बचपन में सगी मां को खोया था, काशीबाई ने संभाला परिवार शिवराज सिंह चौहान के जीवन में काशीबाई का विशेष स्थान रहा है। दरअसल, उनकी सगी मां सुंदरबाई का निधन उनके बचपन में ही हो गया था। इसके बाद उनके पिता प्रेम सिंह चौहान ने काशीबाई से दूसरा विवाह किया। काशीबाई ने शिवराज सिंह चौहान और उनके भाई-बहनों की परवरिश की और पूरे परिवार को संभाला। उन्होंने बच्चों को मां जैसा स्नेह दिया। यही वजह है कि शिवराज सिंह चौहान का उनसे गहरा भावनात्मक जुड़ाव था।
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Israel Election 2026: सरकार बनाने में जुटे गादी आइजनकोट, 3 विपक्षी नेताओं से की मुलाकात; नेतन्याहू पर लगाए गंभीर आरोप

Israel Election 2026: सरकार बनाने में जुटे गादी आइजनकोट, 3 विपक्षी नेताओं से की मुलाकात; नेतन्याहू पर लगाए गंभीर आरोप

Israel में आम चुनाव के नतीजे आने के बाद भी नई सरकार बनने का रास्ता साफ नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाला गठबंधन सबसे ज्यादा सीटें हासिल करने के बावजूद बहुमत से पीछे रह गया है। इस बीच विपक्षी नेता गादी आइजनकोट ने सरकार बनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। उन्होंने तीन विपक्षी नेताओं से मुलाकात कर आगे की रणनीति पर चर्चा की है। आइजनकोट का कहना है कि नेतन्याहू और उनकी पार्टी चुनाव के नतीजों को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में इजराइल की राजनीति में सरकार गठन को लेकर खींचतान और तेज हो गई है। इजराइल चुनाव में किसी भी गठबंधन को नहीं मिला बहुमत इजराइल की संसद यानी नेसेट (Knesset) में कुल 120 सीटें हैं। यहां सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। 27 अक्टूबर को हुए चुनाव के अंतिम नतीजों के मुताबिक, बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 27 सीटें मिली हैं। उनके नेतृत्व वाले गठबंधन को कुल 53 सीटें हासिल हुईं। वहीं, विपक्षी खेमे को 48 सीटें मिली हैं, जबकि अरब पार्टियों के खाते में 19 सीटें गई हैं। इस तरह किसी भी गठबंधन के पास अपने दम पर सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटें नहीं हैं। तीन विपक्षी नेताओं से मिले आइजनकोट सरकार बनाने की कोशिशों के तहत गादी आइजनकोट ने विपक्षी नेताओं के साथ बातचीत शुरू कर दी है। उन्होंने नफ्ताली बेनेट, यायर गोलान और यायर लैपिड के साथ मुलाकात और चर्चा की है। इन बैठकों का मकसद विपक्षी दलों के बीच सहमति बनाना और नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार का विकल्प तैयार करना है। आइजनकोट और बेनेट ने मुलाकात के बाद कहा कि उन्होंने जल्द से जल्द इजराइल में नई सरकार बनाने के रास्तों पर चर्चा की है। वहीं, यायर गोलान ने भी आइजनकोट के साथ बातचीत के बाद कहा कि दोनों नेता इजराइल की सुरक्षा और भविष्य को लेकर अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। उन्होंने बदलाव के लिए मिलकर काम करने की बात कही। नेतन्याहू पर चुनाव को बदनाम करने का आरोप गादी आइजनकोट ने बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी लिकुड पार्टी पर चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। आइजनकोट के मुताबिक, नेतन्याहू का खेमा चुनाव में बहुमत नहीं मिलने के बाद नतीजों पर सवाल उठाकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। दरअसल, इजराइल में चुनाव के दौरान विदेशी हस्तक्षेप और कथित गड़बड़ियों को लेकर जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसी शिन बेट (Shin Bet) इन आरोपों की पड़ताल कर रही है। हालांकि, आइजनकोट ने कहा है कि जांच एजेंसियों को अपना काम करने देना चाहिए और किसी भी तरह का राजनीतिक दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए।
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भोपाल में वर्ग-3 शिक्षक अभ्यर्थियों का चक्काजाम, नियुक्ति पत्र की मांग पर सड़क पर लेटकर किया प्रदर्शन

भोपाल। राजधानी भोपाल के बोर्ड ऑफिस चौराहे पर प्राथमिक शिक्षक वर्ग-3 के मेरिट होल्डर अभ्यर्थियों ने नियुक्ति पत्र और जॉइनिंग की मांग को लेकर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठकर थालियां बजाने और नारेबाजी करने लगे, जिससे चौराहे पर यातायात बाधित हो गया। पुलिस ने अभ्यर्थियों को सड़क से हटाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे। पुलिस की कार्रवाई के दौरान कई अभ्यर्थी सड़क पर लेट गए, जबकि कुछ ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर रास्ता रोक लिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच खींचतान भी हुई। पुलिस यातायात बहाल कराने का प्रयास करती रही। अभ्यर्थियों को हिरासत में लिए जाने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रगान गाना शुरू कर दिया। नियुक्ति पत्र और जॉइनिंग की मांग प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक नियुक्ति पत्र जारी करने और जॉइनिंग को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। अभ्यर्थी भर्ती नियम के क्लॉज 49 का हवाला देते हुए दस्तावेज सत्यापन के दौरान डीएलएड डिग्री से जुड़ी शर्त पर सवाल उठा रहे हैं। उनकी मांग है कि मेरिट में स्थान पाने वाले पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी कर जॉइनिंग दी जाए। 22 दिन पहले भी किया था चक्काजाम प्राथमिक शिक्षक वर्ग-3 के अभ्यर्थियों ने करीब 22 दिन पहले भी नियुक्ति की मांग को लेकर एमपी नगर चौराहे पर चक्काजाम किया था। उस समय प्रदर्शन करीब चार घंटे तक चला था। इसके बाद एसडीएम लाखन सिंह चौधरी और पुलिस अधिकारियों से बातचीत के बाद आंदोलन समाप्त हुआ था। हालांकि, अभ्यर्थियों का कहना था कि शिक्षा मंत्री या मुख्यमंत्री स्तर पर बातचीत नहीं हुई और उनकी समस्या का समाधान नहीं निकला, तो वे दोबारा आंदोलन करेंगे। अब नियुक्ति पत्र और जॉइनिंग की मांग को लेकर अभ्यर्थी एक बार फिर सड़क पर उतर आए हैं। प्रदर्शन के चलते बोर्ड ऑफिस चौराहे पर यातायात प्रभावित हुआ और पुलिस को स्थिति संभालने के लिए मशक्कत करनी पड़ी।
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अभिजीत वंजारी

Nagpur Election Result: अभिजीत वंजारी की जीत, फडणवीस के Tweet पर मचा सियासी घमासान

महाराष्ट्र की राजनीति में नागपुर से आए एक चुनावी नतीजे ने कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी तेज कर दी है। नागपुर ग्रेजुएट्स विधान परिषद सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को 3,271 वोटों से हराकर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। नतीजा आने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का एक पुराना सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में आ गया। इस पोस्ट में उन्होंने कांग्रेस को विधान परिषद चुनावों में ‘Big Fat Zero’ मिलने की बात कही थी। लेकिन नागपुर में कांग्रेस की जीत के बाद फडणवीस ने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया। इसके बाद महाराष्ट्र कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने सभी नतीजे आने से पहले ही कांग्रेस के प्रदर्शन पर टिप्पणी कर दी थी। नागपुर का यह मुकाबला इसलिए भी खास रहा, क्योंकि यह फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह नगर है। दोनों नेताओं ने भाजपा उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार किया था। Nagpur MLC Result: अभिजीत वंजारी ने कितने वोटों से जीत हासिल की? नागपुर डिवीजन ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के मौजूदा विधान परिषद सदस्य अभिजीत वंजारी को कुल 67,231 वोट मिले। वहीं, भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले को 63,960 वोट प्राप्त हुए। इस तरह वंजारी ने 3,271 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। मतगणना मंगलवार सुबह शुरू हुई और गुरुवार, 29 अक्टूबर की तड़के पूरी हुई। नतीजे आने में 40 घंटे से ज्यादा समय लगा। शुरुआत में मुकाबला कड़ा रहा और मतगणना के अलग-अलग चरणों में दोनों उम्मीदवारों की स्थिति बदलती रही। दूसरे राउंड के बाद सुधाकर कोहले 60,924 वोटों के साथ आगे थे, जबकि वंजारी को 56,630 वोट मिले थे। निर्दलीय उम्मीदवार नितेश कराले को 24,249 वोट प्राप्त हुए। किसी भी उम्मीदवार को पहली वरीयता के वोटों से जीत के लिए जरूरी कोटा नहीं मिला, इसलिए आगे की वरीयताओं के वोटों की गिनती की गई। अंतिम चरणों में वोटों के हस्तांतरण से मुकाबले का रुख बदला और अभिजीत वंजारी ने जीत दर्ज कर ली। इस परिणाम ने दिखाया कि MLC चुनाव में केवल शुरुआती बढ़त ही नहीं, बल्कि वरीयता वाले वोट भी निर्णायक साबित हो सकते हैं। Fadnavis Tweet Controversy: कांग्रेस को ‘Zero’ बताने वाला पोस्ट क्यों हुआ वायरल? इस विवाद की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 28 अक्टूबर की सोशल मीडिया पोस्ट से हुई। प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में विधान परिषद चुनावों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के प्रदर्शन पर सवाल उठाया था। उन्होंने बैलेट पेपर से हुए चुनावों का जिक्र करते हुए पूछा था कि कांग्रेस को कितनी सीटें मिलीं। इसके बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी कांग्रेस पर तंज कसते हुए ‘Big Fat Zero’ वाली टिप्पणी की। उस समय नागपुर सीट की मतगणना पूरी नहीं हुई थी। जब अभिजीत वंजारी की जीत का अंतिम परिणाम सामने आया, तो फडणवीस का पोस्ट राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया। मुख्यमंत्री ने अपना पोस्ट हटा दिया। महाराष्ट्र कांग्रेस ने हटाए गए पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए इस पर सवाल उठाए। हालांकि, फडणवीस ने पोस्ट डिलीट करने का कोई स्पष्ट कारण सार्वजनिक रूप से बताया हो, इसकी पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती। इसलिए पोस्ट हटाने की वजह को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। Maharashtra Congress का पलटवार, 2029 चुनाव का भी किया जिक्र नागपुर में जीत के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर फडणवीस को घेरा। पार्टी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पूरे नतीजे आने से पहले कांग्रेस की हार का मजाक उड़ाया था, लेकिन नागपुर के परिणाम ने तस्वीर बदल दी। कांग्रेस ने अपने पोस्ट में 2029 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया और भाजपा को आने वाले चुनावी मुकाबले के लिए तैयार रहने की बात कही। पार्टी ने इस जीत को अपने कार्यकर्ताओं और विपक्षी गठबंधन की एकजुटता से जोड़कर पेश किया। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भी नागपुर में भाजपा की हार को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया। नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का मुख्यालय होने के कारण इस परिणाम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज हो गईं। हालांकि, 2029 के चुनावों में क्या नतीजे आएंगे, यह अभी तय नहीं है। कांग्रेस का बयान उसकी राजनीतिक प्रतिक्रिया है, न कि भविष्य के चुनाव परिणाम का संकेत देने वाला कोई निश्चित तथ्य। Abhijit Wanjari कौन हैं? लगातार दूसरी बार जीती नागपुर सीट अभिजीत गोविंदराव वंजारी कांग्रेस के नेता, वकील और शिक्षाविद हैं। वह नागपुर ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य हैं। उन्होंने 2020 में भी यह सीट जीती थी और अब लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है। वंजारी छात्र राजनीति से कांग्रेस में सक्रिय हुए। वह महाराष्ट्र प्रदेश NSUI में महासचिव रह चुके हैं और युवा कांग्रेस तथा नागपुर जिला कांग्रेस संगठन में भी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। शिक्षा क्षेत्र से भी उनका जुड़ाव रहा है। जीत के बाद वंजारी ने मतदाताओं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और महा विकास अघाड़ी के सहयोगियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह जीत केवल एक उम्मीदवार की नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की है जिन्होंने उन पर भरोसा किया। उन्होंने आगे भी बेरोजगार ग्रेजुएट्स, युवाओं, शिक्षा क्षेत्र की समस्याओं और सरकारी भर्तियों से जुड़े मुद्दों को विधान परिषद में उठाने की बात कही। पुरानी पेंशन योजना और शिक्षकों-कर्मचारियों की लंबित मांगों पर काम जारी रखने का भरोसा भी जताया। MLC Election Results: महाराष्ट्र की पांच सीटों में किसे मिली जीत? महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। सभी परिणाम सामने आने के बाद विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) ने तीन सीटें जीतीं, जबकि भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को दो सीटों पर सफलता मिली। मुख्य नतीजे इस प्रकार रहे: इस तरह विपक्षी MVA को तीन सीटें मिलीं, जबकि भाजपा और शिवसेना ने एक-एक सीट जीती। इन नतीजों ने महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष के बीच चुनावी प्रदर्शन को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। नागपुर में BJP की हार क्यों बनी चर्चा का विषय? नागपुर को भाजपा का मजबूत राजनीतिक क्षेत्र माना जाता रहा है। यह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह नगर है। गडकरी ने 1990 से 2014 तक करीब 24 वर्षों तक नागपुर ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र का विधान परिषद में प्रतिनिधित्व...
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आजम खान

Abdullah Azam Bail: बेटे अब्दुल्ला को जमानत, आजम खान को भी High Court से राहत

उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। दोनों को दो PAN कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को अदालत ने दोनों की सजा निलंबित करते हुए जमानत मंजूर कर दी। हालांकि, कोर्ट ने दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी। ऐसे में यह फैसला दोनों के लिए राहत जरूर लेकर आया है, लेकिन उनकी कानूनी और राजनीतिक चुनौतियां अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। आजम खान को इस मामले में 10 साल और अब्दुल्ला आजम को 7 साल की सजा सुनाई गई थी। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद उनकी रिहाई की प्रक्रिया और दूसरे लंबित मामलों की स्थिति पर सबकी नजर रहेगी। हाईकोर्ट ने क्या फैसला सुनाया? इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने आजम खान और अब्दुल्ला आजम की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सजा निलंबित करने और जमानत देने का आदेश दिया। दोनों ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए दोषसिद्धि पर रोक लगाने, सजा निलंबित करने और जेल से रिहाई की मांग की थी। इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 15 अक्टूबर को अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब 29 अक्टूबर को फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने जमानत दे दी, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसका मतलब है कि दोनों को फिलहाल सजा काटने से राहत मिली है, लेकिन निचली अदालत का दोषी ठहराने वाला फैसला बरकरार है। जमानत और दोषसिद्धि पर रोक दो अलग-अलग कानूनी राहतें हैं। आजम खान को 10 साल और अब्दुल्ला को 7 साल की सजा क्यों हुई? दो PAN कार्ड मामले में रामपुर की एमपी-एमएलए अदालत ने नवंबर 2025 में आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दोषी ठहराया था। उस समय दोनों को सात-सात साल की सजा सुनाई गई थी और 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इसके बाद मई 2026 में रामपुर की एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने आजम खान की सजा बढ़ाकर 10 साल कर दी। उनका जुर्माना भी बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया। वहीं, अब्दुल्ला आजम की सात साल की सजा बरकरार रखते हुए उनका जुर्माना बढ़ाकर 3.50 लाख रुपये कर दिया गया। दोनों ने इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अब हाईकोर्ट ने उनकी सजा निलंबित कर जमानत दे दी है। हालांकि, दोषसिद्धि के खिलाफ उनकी कानूनी लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। Two PAN Card Case: आखिर क्या है पूरा मामला? इस मामले की शुरुआत साल 2019 में हुई थी। बीजेपी नेता आकाश सक्सेना की शिकायत पर अब्दुल्ला आजम खान के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि अब्दुल्ला के पास अलग-अलग जन्मतिथियों वाले दो PAN कार्ड थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, एक PAN कार्ड में जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 दर्ज थी, जबकि दूसरे में 30 सितंबर 1990 लिखी गई थी। आरोप था कि दूसरे PAN कार्ड से जुड़े दस्तावेजों का इस्तेमाल 2017 के विधानसभा चुनाव में नामांकन के दौरान किया गया था। मामले में आजम खान पर भी अपने बेटे के साथ कथित साजिश में शामिल होने का आरोप लगा। निचली अदालत ने दोनों को धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से जुड़े अपराधों में दोषी ठहराया था। आजम खान और अब्दुल्ला आजम ने इस फैसले को चुनौती दी है। इसलिए मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण बनी हुई है। क्या जमानत के बाद जेल से बाहर आएंगे आजम खान? हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आजम खान और अब्दुल्ला आजम अब कब जेल से बाहर आएंगे। हालांकि, किसी एक मामले में जमानत मिलने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को हर स्थिति में तुरंत रिहा कर दिया जाएगा। यदि किसी अन्य मामले में हिरासत जारी रखने का आदेश है या जमानत नहीं मिली है, तो रिहाई में देरी हो सकती है। इसलिए दोनों की वास्तविक रिहाई की स्थिति उनके खिलाफ लंबित अन्य मामलों और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी। हाईकोर्ट के इस आदेश से उन्हें दो PAN कार्ड मामले में राहत मिली है, लेकिन रिहाई की स्थिति को लेकर दूसरे मामलों की जानकारी भी जरूरी है। Jauhar University पर ED की कार्रवाई, आजम खान की मुश्किलें चर्चा में आजम खान से जुड़ी एक और बड़ी खबर 28 अक्टूबर को सामने आई थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की जमीन और इमारतों को अटैच करने की कार्रवाई की। रिपोर्टों के अनुसार, इन संपत्तियों की बुक वैल्यू करीब 426 करोड़ रुपये और अनुमानित बाजार कीमत लगभग 1,170 करोड़ रुपये बताई गई है। यह कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़ी जांच के तहत की गई। ED की कार्रवाई जमीन से संबंधित कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का हिस्सा है। एजेंसी की कार्रवाई और दो PAN कार्ड मामले अलग-अलग कानूनी मामले हैं। इसलिए हाईकोर्ट से मिली जमानत को विश्वविद्यालय की संपत्तियों से जुड़े मामले में राहत नहीं माना जा सकता। 2027 के UP Election में क्या आजम खान और अब्दुल्ला आजम लड़ पाएंगे चुनाव? हाईकोर्ट के फैसले के बाद दोनों नेताओं की राजनीतिक स्थिति पर भी चर्चा तेज हो सकती है। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह सवाल अहम है कि क्या वे चुनाव लड़ सकेंगे। फिलहाल दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई गई है। जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत दो साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराध में दोषसिद्धि होने पर चुनाव लड़ने की अयोग्यता लागू हो सकती है। इसलिए केवल जमानत मिलने या सजा निलंबित होने से चुनाव लड़ने की पात्रता अपने आप बहाल नहीं होती। इस मामले में आगे अदालत का फैसला और लागू कानूनी प्रावधान दोनों नेताओं की राजनीतिक स्थिति के लिए महत्वपूर्ण होंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold Price Today: ₹1.42 लाख पर आया सोना, अक्टूबर में ₹6,000 तक घटे दाम

सोना-चांदी (Gold-Silver) खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए बाजार से राहत भरी खबर है। 29 अक्टूबर को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। सोना ₹563 सस्ता होकर करीब ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि चांदी के भाव में ₹2,945 की कमी आई। अक्टूबर महीने में अब तक सोने की कीमत करीब ₹6,000 तक नीचे आ चुकी है। लगातार बदलते भाव के बीच अब खरीदारों की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में कीमतें और गिरेंगी या बाजार में फिर तेजी लौटेगी। Gold Rate Today: आज कितना सस्ता हुआ सोना? गुरुवार को सोने की कीमत में ₹563 प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद सोने का भाव करीब ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। अक्टूबर में अब तक सोने की कीमत में लगभग ₹6,000 की कमी आ चुकी है। हालांकि, सोने का भाव उसकी शुद्धता, शहर और बाजार के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है। 24 कैरेट सोना मुख्य रूप से निवेश के लिए इस्तेमाल होता है, जबकि गहने बनाने के लिए आमतौर पर 22 कैरेट सोना खरीदा जाता है। त्योहारी सीजन में सोने की खरीदारी करने वालों के लिए कीमतों में आई यह गिरावट अहम है। लेकिन खरीदारी करने से पहले स्थानीय ज्वेलर से ताजा भाव पता करना जरूरी है। Silver Rate Today: चांदी की कीमत में भी बड़ी गिरावट सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी कमजोरी देखने को मिली। आज चांदी ₹2,945 प्रति किलोग्राम सस्ती हुई। अक्टूबर महीने के दौरान चांदी के भाव में करीब ₹30,000 प्रति किलोग्राम की गिरावट बताई जा रही है। चांदी का इस्तेमाल केवल गहने और सिक्के खरीदने तक सीमित नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसकी मांग रहती है। इसलिए चांदी की कीमतों पर निवेशकों के साथ-साथ औद्योगिक मांग का भी असर पड़ता है। अक्टूबर में सोना-चांदी कितना सस्ता हुआ? इस महीने की कीमतों पर नजर डालें तो दोनों कीमती धातुओं में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली है। ये आंकड़े संबंधित बाजार अपडेट पर आधारित हैं। अलग-अलग स्रोतों में भाव और दैनिक बदलाव अलग हो सकते हैं। Gold-Silver Price क्यों गिर रहे हैं? सोने और चांदी की कीमतों में बदलाव के पीछे कई वजहें होती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग, अमेरिकी डॉलर की चाल, बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें इनकी कीमतों को प्रभावित करती हैं। जब डॉलर मजबूत होता है या निवेशकों को दूसरे विकल्प आकर्षक लगते हैं, तो सोने पर दबाव आ सकता है। दूसरी ओर, वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर सोने की मांग में तेजी भी देखने को मिल सकती है। चांदी की कीमतें भी इन्हीं कारकों से प्रभावित होती हैं। इसके अलावा उद्योगों में चांदी की मांग बढ़ने या घटने से भी बाजार में उतार-चढ़ाव आ सकता है। इसलिए केवल एक दिन की गिरावट देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि सोना-चांदी आगे भी लगातार सस्ते होते रहेंगे। क्या अभी सोना-चांदी खरीदना सही रहेगा? कीमतों में गिरावट के बाद कई खरीदारों के मन में यह सवाल है कि अभी खरीदारी करें या कुछ दिन और इंतजार करें। इसका जवाब आपकी जरूरत और खरीदारी के उद्देश्य पर निर्भर करता है। अगर आप शादी, त्योहार या किसी खास मौके के लिए गहने खरीद रहे हैं, तो अपने बजट के हिसाब से अलग-अलग ज्वेलर्स के भाव की तुलना कर सकते हैं। वहीं, निवेश के उद्देश्य से खरीदारी करने वालों को कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव और अपनी वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए। ध्यान रखें कि गहने खरीदते समय सोने की कीमत के अलावा मेकिंग चार्ज और GST भी देना होता है। इसलिए बाजार में सोना सस्ता होने के बावजूद अंतिम बिल में उतनी ही कमी हो, यह जरूरी नहीं है। सोना खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Stock Market Today: US Fed के फैसले से शेयर बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स में उछाल

शेयर बाजार (Stock Market) में गिरावट देखकर परेशान निवेशकों को गुरुवार को राहत मिली। अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) के ब्याज दरों पर फैसले के बाद भारतीय बाजार में खरीदारी लौट आई। सेंसेक्स 600 अंकों से ज्यादा उछल गया, जबकि निफ्टी में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली। बाजार में अचानक आई इस तेजी ने निवेशकों का ध्यान एक बार फिर खींचा है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या यह तेजी आगे भी जारी रहेगी या बाजार में फिर उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा? US Fed Decision: अमेरिका में क्या हुआ, जिसका दिखा असर? अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने 28 अक्टूबर को अपनी प्रमुख ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया। दरों को स्थिर रखने के फैसले के बाद वैश्विक बाजारों में निवेशकों ने राहत महसूस की। दरअसल, अमेरिका में ब्याज दरों का असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर पड़ता है। जब वहां ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है, तो विदेशी निवेशक अपने निवेश को लेकर सतर्क हो जाते हैं। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। हालांकि, फेड के फैसले का मतलब यह नहीं है कि वैश्विक बाजारों की सभी चिंताएं खत्म हो गई हैं। महंगाई और आगे ब्याज दरों में संभावित बदलाव पर अभी भी नजर बनी हुई है। Sensex Today: 600 अंक से ज्यादा चढ़ा बाजार गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान खरीदारी बढ़ी। इसके बाद सेंसेक्स 600 अंकों से ज्यादा उछल गया। वहीं, निफ्टी 50 में भी तेजी देखने को मिली और इंडेक्स 22,900 के करीब पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में बाजार पर बिकवाली का दबाव था। ऐसे में अगले दिन आई तेजी ने निवेशकों को कुछ राहत दी। बाजार के प्रमुख शेयरों में खरीदारी बढ़ने से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों को सहारा मिला। हालांकि, शुरुआती कारोबार में दर्ज की गई तेजी पूरे दिन बरकरार रहे, यह जरूरी नहीं है। शेयर बाजार में कीमतें लगातार बदलती रहती हैं। Share Market Rally: बाजार में तेजी की क्या हैं बड़ी वजहें? 1. US Fed ने ब्याज दरें नहीं बढ़ाईं अमेरिकी फेड के फैसले से निवेशकों को तत्काल ब्याज दरों में बढ़ोतरी की चिंता से कुछ राहत मिली। इससे वैश्विक बाजारों की धारणा को सहारा मिला। हालांकि, आगे ब्याज दरों को लेकर फेड का रुख महत्वपूर्ण रहेगा। 2. विदेशी निवेशकों ने की खरीदारी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की खरीदारी भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत रही। 28 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब 872 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी। लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में खरीदारी होने से बाजार को समर्थन मिला। हालांकि, विदेशी निवेशकों के कुल रुख में स्थायी बदलाव हुआ है या नहीं, यह आने वाले सत्रों में स्पष्ट होगा। 3. बड़े शेयरों में बढ़ी खरीदारी बाजार की तेजी में दिग्गज कंपनियों के शेयरों की अहम भूमिका रही। रिलायंस इंडस्ट्रीज, अडानी पोर्ट्स और पावर ग्रिड जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। IT कंपनियों के शेयरों में भी कुछ जगहों पर मजबूती दर्ज की गई। जब बड़ी कंपनियों के शेयर चढ़ते हैं, तो सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख इंडेक्स को भी सहारा मिलता है। 4. टैक्स राहत की उम्मीदों पर नजर शेयर बाजार में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स को लेकर संभावित राहत की चर्चा भी निवेशकों के बीच बनी हुई है। हालांकि, किसी आधिकारिक घोषणा के बिना इसे सरकार का तय फैसला नहीं माना जा सकता। किन शेयरों में दिखी तेजी? गुरुवार के शुरुआती कारोबार में Adani Ports, Power Grid और Reliance Industries जैसे शेयरों पर निवेशकों की नजर रही। कुछ IT शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। दूसरी ओर, सभी शेयरों में तेजी नहीं थी। Trent सहित कुछ कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला। इससे साफ है कि बाजार के प्रमुख इंडेक्स में बढ़त के बावजूद अलग-अलग कंपनियों का प्रदर्शन अलग रह सकता है। Crude Oil Price: कच्चा तेल बना बाजार की चिंता शेयर बाजार में तेजी के बावजूद कच्चे तेल की कीमतें चिंता का विषय बनी हुई हैं। 29 अक्टूबर की सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है। ऐसे में कच्चा तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर रुपये, महंगाई और कई कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। अगर तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो बाजार की तेजी पर दबाव आ सकता है। इसलिए निवेशकों के लिए केवल सेंसेक्स और निफ्टी की चाल देखना ही पर्याप्त नहीं होगा। पिछले दिन बाजार में क्यों आई थी गिरावट? 28 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। सेंसेक्स कारोबार के दौरान 1,000 अंकों के करीब गिर गया था और बाद में कुछ सुधार के बावजूद गिरावट के साथ बंद हुआ। IT शेयरों में बिकवाली, प्रमुख कंपनियों के शेयरों में कमजोरी और वैश्विक संकेतों को लेकर चिंता ने बाजार पर दबाव बनाया था। अमेरिकी फेड के फैसले से पहले निवेशक भी सतर्क नजर आ रहे थे। इसके बाद 29 अक्टूबर को खरीदारी लौटने से बाजार को राहत मिली। लेकिन एक कारोबारी दिन की तेजी से बाजार की लंबी अवधि की दिशा तय नहीं होती। आगे Share Market में क्या होगा? अब निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। इन कारकों के आधार पर बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। जो निवेशक शेयर बाजार में पैसा लगाने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए जरूरी है कि वे जल्दबाजी में फैसला न लें। केवल एक दिन की तेजी देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, अपनी जोखिम क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से बाहर हो सकते हैं प्रसिद्ध कृष्णा, फिटनेस टेस्ट के बाद होगा फैसला

नई दिल्ली। भारतीय तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी वनडे सीरीज से बाहर हो सकते हैं। 30 वर्षीय तेज गेंदबाज को 4 नवंबर से शुरू होने वाली पांच मैचों की सीरीज के शुरुआती तीन मुकाबलों के लिए टीम में चुना गया है, लेकिन उनका खेलना फिटनेस क्लीयरेंस पर निर्भर करेगा। क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रसिद्ध कृष्णा 1 और 2 नवंबर को मैच सिमुलेशन टेस्ट से गुजरेंगे। इन परीक्षणों के बाद ही उनकी उपलब्धता पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। फिलहाल वे BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) में रिहैबिलिटेशन कर रहे हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे में लगी थी चोट प्रसिद्ध कृष्णा 30 सितंबर को वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे वनडे मुकाबले के दौरान हैमस्ट्रिंग चोट का शिकार हुए थे। इसके बाद से ही वे मैदान से बाहर हैं। भारतीय टीम मैनेजमेंट को उम्मीद थी कि वे न्यूजीलैंड दौरे तक फिट हो जाएंगे, लेकिन उनकी रिकवरी पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रसिद्ध ने 22 अक्टूबर को भी मैच सिमुलेशन किया था। अब दोबारा टेस्ट होने से साफ है कि उनकी फिटनेस और गेंदबाजी की क्षमता का आकलन अभी जारी है। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में उनकी रिकवरी संतोषजनक रही है। टेस्ट सीरीज के लिए फिटनेस को प्राथमिकता रिपोर्ट के मुताबिक, हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल चाहते हैं कि प्रसिद्ध कृष्णा न्यूजीलैंड के खिलाफ दो टेस्ट मैचों के लिए उपलब्ध रहें। भारत के लिए वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) फाइनल की दौड़ के लिहाज से यह सीरीज अहम मानी जा रही है। ऐसे में टीम मैनेजमेंट उन्हें वनडे सीरीज में उतारकर जोखिम लेने से बच सकता है, ताकि वे टेस्ट मैचों के लिए पूरी तरह फिट हो सकें। नवंबर में खेले जाएंगे वनडे और टेस्ट मुकाबले न्यूजीलैंड के खिलाफ पहला वनडे 4 नवंबर को ऑकलैंड में खेला जाएगा। दूसरा मुकाबला 7 नवंबर और तीसरा वनडे 10 नवंबर को निर्धारित है। दोनों टीमों के बीच टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला 19 नवंबर से वेलिंगटन और दूसरा टेस्ट 27 नवंबर से क्राइस्टचर्च में खेला जाएगा। भारत A के खिलाफ भी खेल सकते हैं प्रसिद्ध अगर प्रसिद्ध कृष्णा को फिटनेस क्लीयरेंस मिल जाता है, तो वे 6 से 9 नवंबर के बीच भारत A और न्यूजीलैंड के बीच होने वाले तीसरे अनऑफिशियल टेस्ट में भी खेल सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। BCCI ने 16 अक्टूबर को घोषित वनडे टीम में प्रसिद्ध कृष्णा के चयन को फिटनेस क्लीयरेंस के अधीन रखा था। वहीं, न्यूजीलैंड के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की टीम में उनके चयन के साथ ऐसी कोई शर्त नहीं जोड़ी गई थी।

अभिषेक शर्मा बने दुनिया के नंबर-1 टी-20 बल्लेबाज, ईशान किशन तीसरे स्थान पर फिसले

नई दिल्ली। न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी-20 मैच में शतक लगाने वाले भारतीय ओपनर अभिषेक शर्मा ने ICC की ताजा टी-20 रैंकिंग में पहला स्थान हासिल कर लिया है। पिछले सप्ताह तक शीर्ष पर रहे भारतीय बल्लेबाज ईशान किशन दो स्थान नीचे खिसककर तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। पाकिस्तान के साहिबजादा फरहान दूसरे स्थान पर हैं। श्रेयस अय्यर और तिलक वर्मा भी टॉप-10 में भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर और तिलक वर्मा भी टी-20 बल्लेबाजों की टॉप-10 रैंकिंग में शामिल हैं। हालांकि, अय्यर को पांच स्थान का नुकसान हुआ है। वहीं, तिलक वर्मा ने अपनी पिछली रैंकिंग बरकरार रखी है। अभिषेक शर्मा के लिए यह उपलब्धि न्यूजीलैंड के खिलाफ शानदार प्रदर्शन के बाद आई है। तीसरे मुकाबले में शतक जड़कर उन्होंने अपनी बल्लेबाजी का दम दिखाया और रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया। टी-20 गेंदबाजों की टॉप-10 सूची से भारतीय बाहर टी-20 गेंदबाजों की रैंकिंग में भारत का कोई भी गेंदबाज शीर्ष 10 में जगह नहीं बना पाया है। अक्षर पटेल एक स्थान नीचे खिसककर 11वें नंबर पर पहुंच गए हैं। अर्शदीप सिंह 15वें और जसप्रीत बुमराह 27वें स्थान पर हैं। अक्षर पटेल और अर्शदीप सिंह न्यूजीलैंड के खिलाफ मौजूदा सीरीज में खेल रहे हैं, जबकि जसप्रीत बुमराह को इस सीरीज से आराम दिया गया है। राशिद खान शीर्ष पर बरकरार टी-20 गेंदबाजों की रैंकिंग में अफगानिस्तान के राशिद खान पहले स्थान पर बने हुए हैं। ऑस्ट्रेलिया के एडम जंपा दूसरे नंबर पर हैं।

भारत से व्यापार पर बैन के बावजूद पाकिस्तान में भारतीय सामान की मांग बढ़ी, तीसरे देशों के जरिए हो रही सप्लाई

नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच सीधे व्यापार पर रोक के बावजूद पाकिस्तानी बाजार में भारतीय सामान की मांग बढ़ने का दावा किया गया है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी जुलाई से सितंबर के दौरान पाकिस्तान ने भारत से 61.74 मिलियन डॉलर का सामान आयात किया। उपलब्ध आंकड़ों में यह रकम पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 69% अधिक बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल इसी अवधि में पाकिस्तान ने भारत से करीब ₹3,478 करोड़ का सामान खरीदा था। वहीं, इस अवधि में पाकिस्तान से भारत को होने वाला आयात शून्य रहने की बात कही गई है। सीधे व्यापार पर रोक, फिर कैसे पहुंच रहा भारतीय सामान? 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सीधे व्यापार पर रोक लगा दी गई थी। इसके बावजूद भारतीय उत्पादों की मांग पूरी करने के लिए तीसरे देशों के जरिए व्यापार होने की बात सामने आई है। व्यापार से जुड़े दावों के मुताबिक, कुछ कारोबारी भारत में बने सामान को पहले दुबई, सिंगापुर या श्रीलंका जैसे देशों में भेजते हैं। इसके बाद वहां से उसे पाकिस्तान पहुंचाया जाता है। इस प्रक्रिया में सामान की पैकेजिंग और दस्तावेजों में बदलाव किए जाने की भी बात कही गई है। हालांकि, किसी उत्पाद का तीसरे देश से होकर गुजरना अपने आप में गैरकानूनी नहीं होता। उसकी वैधता इस बात पर निर्भर करती है कि व्यापार, मूल देश की जानकारी, सीमा शुल्क और संबंधित प्रतिबंधों के नियमों का पालन किया गया है या नहीं। तीसरे देशों के जरिए व्यापार कैसे होता है? व्यापार के इस तरीके को समझने के लिए तीन प्रमुख चरण बताए जाते हैं: GTRI का अनुमान: अनौपचारिक व्यापार सालाना 10 अरब डॉलर से ज्यादा? थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के हवाले से दावा किया गया है कि तीसरे देशों के माध्यम से भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला अनौपचारिक व्यापार सालाना 10 अरब डॉलर यानी करीब ₹83,000 करोड़ से अधिक हो सकता है। यह आंकड़ा एक अनुमान है। इसे भारत-पाकिस्तान के बीच दर्ज आधिकारिक व्यापार के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। पाकिस्तानी उपभोक्ताओं को महंगा पड़ सकता है भारतीय सामान सीधे व्यापार के बजाय तीसरे देशों के जरिए सामान पहुंचाने पर परिवहन, भंडारण और अन्य कारोबारी खर्च बढ़ सकते हैं। ऐसे में भारतीय उत्पाद पाकिस्तानी उपभोक्ताओं को अधिक कीमत पर मिलने की संभावना रहती है। फिलहाल, भारत-पाकिस्तान के बीच प्रत्यक्ष व्यापार पर लगी रोक के बावजूद भारतीय सामान की मांग और तीसरे देशों के जरिए होने वाली आपूर्ति को लेकर व्यापारिक दावे चर्चा में हैं। इन दावों के वास्तविक पैमाने और संबंधित लेन-देन की वैधता का आकलन करने के लिए आधिकारिक आंकड़ों और स्वतंत्र पुष्टि की जरूरत है।

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