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Meta

Meta Action पर मचा बवाल: PM Modi Video हटाने के बाद Zuckerberg ने मांगी माफी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े एक वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद मामला अब तूल पकड़ चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो हटाए जाने को लेकर सरकार ने Meta के सामने नाराजगी जताई और कंपनी को तीन दिन के भीतर मामले पर जवाब देने का अल्टीमेटम दिया। इसके बाद Meta की ओर से इस मामले में माफी मांगे जाने की बात सामने आई है। मामला उस समय का है, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन चल रहा था। इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया। कुछ समय बाद यह वीडियो प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। वीडियो हटने के बाद सवाल उठे कि आखिर इसे किस आधार पर हटाया गया और इसके पीछे Meta की क्या वजह थी। Jantar Mantar Protest के दौरान पोस्ट हुआ था Video बताया जा रहा है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया था। प्रदर्शन से जुड़े इस वीडियो के हटने के बाद मामला सरकारी स्तर तक पहुंच गया। सरकार की ओर से Meta से इस कार्रवाई को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया। साथ ही कंपनी को तीन दिन के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर कंटेंट हटाने की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई। Government के Ultimatum के बाद Meta ने मांगी माफी सरकार की ओर से समयसीमा दिए जाने के बाद Meta की तरफ से मामले पर प्रतिक्रिया सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने वीडियो हटाए जाने को लेकर माफी मांगी है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि Social Media Platforms पर राजनीतिक और सार्वजनिक महत्व वाले कंटेंट को हटाने का फैसला किस प्रक्रिया के तहत लिया जाता है। किसी वीडियो को हटाने से पहले प्लेटफॉर्म की नीतियों और परिस्थितियों का आकलन किस तरह किया जाता है, यह भी चर्चा का विषय बन गया है। PM Modi से जुड़े Content पर क्यों बढ़ी चर्चा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी किसी भी पोस्ट या वीडियो पर सोशल मीडिया पर तेजी से प्रतिक्रिया देखने को मिलती है। ऐसे में किसी वीडियो का अचानक हटना स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान खींचता है। इस मामले में सरकार के हस्तक्षेप और उसके बाद Meta की ओर से माफी की खबर ने पूरे घटनाक्रम को और अहम बना दिया है। हालांकि, वीडियो हटाने की सटीक वजह और Meta की आंतरिक प्रक्रिया को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है। Social Media Companies की Accountability पर सवाल यह घटना केवल एक वीडियो हटाए जाने तक सीमित नहीं है। इससे सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही और Content Moderation Policy पर भी सवाल उठ रहे हैं। आज करोड़ों लोग सोशल मीडिया को खबरों और सूचनाओं के प्रमुख माध्यम के रूप में इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में किसी महत्वपूर्ण वीडियो या पोस्ट को हटाए जाने पर प्लेटफॉर्म की ओर से स्पष्ट कारण बताना और पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी माना जाता है। फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा सरकार के तीन दिन के अल्टीमेटम और उसके बाद Meta की ओर से आई माफी को लेकर है। आने वाले समय में कंपनी की ओर से इस मामले पर और स्पष्ट जानकारी सामने आती है या नहीं, इस पर सभी की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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RBI

RBI On Plastic Currency: ₹10-₹20 के Plastic Notes को लेकर सामने आया नया Update

अगर आपके बटुए में रखे ₹10 और ₹20 के नोट कुछ ही दिनों में पुराने और मुड़े-तुड़े नजर आने लगते हैं, तो आने वाले समय में इसमें बदलाव देखने को मिल सकता है। ₹10 और ₹20 के Plastic यानी Polymer Notes को लेकर RBI की तैयारी एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से इन नोटों को लाने की बात चल रही है और अब इसके संभावित लॉन्च को लेकर भी जानकारी सामने आई है। हालांकि, यहां एक बात साफ समझना जरूरी है कि Polymer Notes को लेकर प्रक्रिया अभी चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी। पहले इनका ट्रायल और जरूरी तकनीकी जांच होगी। इसके बाद ही इन्हें बड़े स्तर पर बाजार में उतारने का फैसला किया जाएगा। क्यों जरूरी महसूस हो रहे हैं Plastic Notes? भारत में ₹10 और ₹20 के नोटों का इस्तेमाल रोजमर्रा की छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए खूब होता है। चाय की दुकान से लेकर ऑटो का किराया और छोटे-मोटे सामान की खरीदारी तक, इन नोटों का इस्तेमाल लगातार होता रहता है। यही वजह है कि ये नोट अपेक्षाकृत जल्दी खराब भी हो जाते हैं। Polymer Notes इसी समस्या का एक संभावित समाधान माने जा रहे हैं। ये कागजी नोटों के मुकाबले ज्यादा टिकाऊ होते हैं और पानी या नमी के संपर्क में आने पर भी बेहतर तरीके से टिक सकते हैं। ₹10 और ₹20 के नोटों से क्यों हो सकती है शुरुआत? Plastic Currency को लेकर शुरुआती फोकस ₹10 और ₹20 denomination पर रहने की संभावना है। इन दोनों मूल्यवर्ग के नोटों का सर्कुलेशन काफी ज्यादा है। ऐसे में इनके Polymer Version को इस्तेमाल में लाकर इसकी व्यावहारिकता को बेहतर तरीके से परखा जा सकता है। अगर ट्रायल सफल रहता है और लोगों के इस्तेमाल से जुड़े पहलू संतोषजनक पाए जाते हैं, तो आगे चलकर दूसरे मूल्यवर्ग की करेंसी पर भी विचार हो सकता है। कब लॉन्च होंगे Polymer Notes? सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ₹10 और ₹20 के Plastic Notes आम लोगों के हाथ में कब पहुंचेंगे? उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पहले field trial और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद RBI इनके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को लेकर फैसला करेगा। इसलिए अभी इसे ऐसी योजना नहीं माना जा सकता जिसमें कोई निश्चित तारीख तय हो चुकी हो। यानी लोगों को फिलहाल पुराने ₹10 और ₹20 के नोटों को लेकर किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। मौजूदा नोट सामान्य रूप से चलन में बने रहेंगे, जब तक RBI की तरफ से कोई अलग निर्देश जारी नहीं किया जाता। नकली नोटों पर भी लग सकती है लगाम Polymer Currency का एक अहम फायदा इसकी security features से भी जुड़ा है। इन नोटों में ऐसे सुरक्षा फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं, जिन्हें कॉपी करना नकली नोट बनाने वालों के लिए मुश्किल हो। हालांकि, किसी नए नोट को जारी करने से पहले RBI को उसकी सुरक्षा के साथ-साथ ATM, cash counting machines और दूसरे banking systems के साथ compatibility भी जांचनी होती है। क्या पुराने ₹10 और ₹20 के नोट बंद हो जाएंगे? नहीं। Polymer Notes आने का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा कागजी नोट तुरंत बंद कर दिए जाएंगे। अगर नए नोट जारी होते हैं तो RBI की ओर से उनकी वैधता और पुराने नोटों के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट जानकारी दी जाएगी। इसलिए अभी सोशल मीडिया पर चलने वाली ऐसी किसी भी खबर पर भरोसा करने से बचें जिसमें पुराने ₹10 या ₹20 के नोटों को अचानक बंद किए जाने का दावा किया जा रहा हो। भारत में Currency का बदलता रूप भारत में समय के साथ करेंसी में कई बदलाव हुए हैं। सुरक्षा फीचर्स को मजबूत करने से लेकर नोटों के डिजाइन और आकार में बदलाव तक, RBI लगातार करेंसी सिस्टम को बेहतर बनाने पर काम करता रहा है। अब अगर Polymer Notes का प्रयोग सफल रहता है, तो यह भारतीय करेंसी के क्षेत्र में एक और बड़ा बदलाव हो सकता है। खासकर छोटे नोटों की durability बढ़ाने में इसका फायदा मिल सकता है। RBI के फैसले पर टिकी नजर फिलहाल ₹10 और ₹20 के Plastic Notes को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रक्रिया अभी आगे बढ़ रही है और अंतिम लॉन्च से पहले ट्रायल व जरूरी जांच पूरी की जाएगी। इसलिए निश्चित लॉन्च डेट को लेकर RBI की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना ही सही रहेगा। आम लोगों के लिए फिलहाल राहत की बात यही है कि मौजूदा ₹10 और ₹20 के नोट चलते रहेंगे। Polymer Notes आते हैं तो RBI उनकी उपलब्धता, इस्तेमाल और पुराने नोटों को लेकर पूरी जानकारी सार्वजनिक करेगा।
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Supreme Court

Car-Bike Insurance पर Supreme Court सख्त, नई Car के लिए 4 साल और Bike के लिए 6 साल का Cover

अगर आप कार या बाइक चलाते हैं, तो वाहन के इंश्योरेंस से जुड़ी यह खबर आपके काम की है। Supreme Court ने बिना वैध बीमा वाले वाहनों पर सख्ती की जरूरत बताई है। कोर्ट के निर्देश के बाद अब ऐसे इंतजाम पर जोर दिया जा रहा है, जिससे बिना इंश्योरेंस वाले वाहन सड़कों पर न चल सकें और उन्हें पेट्रोल-डीजल भी आसानी से न मिल पाए। इस मामले में नई गाड़ियों के लिए लंबी अवधि के बीमा कवर की व्यवस्था का भी जिक्र हुआ है। इसके तहत नई कार के लिए 4 साल और नई बाइक के लिए 6 साल का Insurance Cover रखने की बात सामने आई है। इसका मकसद वाहन खरीदने के कुछ समय बाद इंश्योरेंस खत्म होने और उसके बाद बिना बीमा वाहन चलाने की समस्या पर लगाम लगाना है। बिना Insurance गाड़ी चलाने वालों पर बढ़ेगी सख्ती देश में कई वाहन ऐसे हैं जिनका इंश्योरेंस खत्म हो चुका होता है, लेकिन वे फिर भी सड़कों पर दौड़ते रहते हैं। सड़क दुर्घटना की स्थिति में ऐसे वाहनों के कारण पीड़ितों को मुआवजा मिलने में परेशानी हो सकती है। यही वजह है कि वैध Motor Insurance को लेकर नियमों के पालन पर लगातार जोर दिया जा रहा है। Supreme Court की ओर से जिस व्यवस्था पर जोर दिया गया है, उसमें पेट्रोल पंप पर वाहन का Insurance Status चेक करने की संभावना भी महत्वपूर्ण है। यदि किसी वाहन का बीमा वैध नहीं पाया जाता है, तो उसे Petrol या Diesel देने पर रोक लगाने की व्यवस्था की जा सकती है। नई Car खरीदने वालों के लिए 4 साल का Insurance नई कार खरीदने वालों के लिए 4 साल का बीमा कवर एक महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है। इससे ग्राहक को कार खरीदने के बाद शुरुआती वर्षों में बीमा रिन्यू कराने की परेशानी कम होगी। इसी तरह नई बाइक खरीदने वालों के लिए 6 साल का Insurance Cover रखने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। लंबी अवधि का बीमा होने से दोपहिया वाहन मालिकों के लिए पॉलिसी की वैधता बनाए रखना आसान हो सकता है। Petrol Pump पर कैसे होगी Insurance की जांच? अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो पेट्रोल पंप पर वाहन का नंबर डालकर उसके Insurance की वैधता जांची जा सकती है। इसके लिए सरकारी वाहन रिकॉर्ड और Insurance Database को आपस में जोड़ना होगा। ऐसी व्यवस्था सफल रहती है तो पेट्रोल पंप पर ही बिना बीमा वाले वाहन की पहचान की जा सकेगी। इससे वाहन मालिकों पर अपने इंश्योरेंस को समय पर Renew कराने का दबाव बढ़ेगा। वाहन मालिक अभी से कर लें यह काम अगर आपके पास Car, Bike या कोई अन्य वाहन है, तो सबसे पहले अपनी Insurance Policy की Expiry Date चेक कर लें। बीमा खत्म हो गया है तो वाहन चलाने से पहले उसे Renew कराना जरूरी है। सिर्फ चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा के लिहाज से भी Valid Insurance बेहद जरूरी है। खासकर पुराने वाहनों के मालिकों को अपनी पॉलिसी की स्थिति नियमित रूप से जांचते रहना चाहिए। क्यों अहम है Supreme Court का यह निर्देश? इस पूरी कवायद का उद्देश्य सड़क पर चलने वाले वाहनों को बीमा के दायरे में लाना और दुर्घटना के बाद पीड़ितों को मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करना है। अगर पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता को भी वैध Insurance से जोड़ दिया जाता है, तो बिना बीमा वाहन चलाने वालों पर प्रभावी रोक लग सकती है। यानी आने वाले समय में वाहन मालिकों के लिए RC और Driving Licence के साथ Valid Insurance रखना भी उतना ही जरूरी हो सकता है। नई व्यवस्था लागू होने पर इसका सीधा असर वाहन मालिकों और पेट्रोल पंप संचालकों, दोनों पर देखने को मिलेगा।
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परिसीमन Bill

Parliament Special Session: परिसीमन Bill पर सरकार का बड़ा प्लान, जल्द हो सकता है फैसला

देश की राजनीति में एक बार फिर Delimitation (परिसीमन) का मुद्दा चर्चा में है। केंद्र सरकार परिसीमन Bill को आगे बढ़ाने के लिए संसद का Special Session बुलाने के विकल्प पर विचार कर सकती है। अगर सरकार इस दिशा में आगे बढ़ती है, तो संसद के साथ-साथ राज्यों की राजनीति पर भी इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। परिसीमन का मामला सिर्फ लोकसभा सीटों की संख्या बदलने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं तय होती हैं और राज्यों को मिलने वाले राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर भी इसका असर पड़ सकता है। यही कारण है कि इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष के साथ विपक्षी दलों और राज्यों की भी नजर बनी हुई है। Special Session क्यों बुलाने की चर्चा? परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव को संसद में लाने के लिए सरकार विशेष सत्र का रास्ता अपना सकती है। हालांकि, अभी तक विशेष सत्र की तारीख या बिल के अंतिम प्रारूप को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। सरकार अगर विशेष सत्र बुलाती है, तो इस दौरान परिसीमन से जुड़े संवैधानिक और कानूनी पहलुओं पर चर्चा हो सकती है। साथ ही राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने की कोशिश भी की जा सकती है। आखिर Delimitation क्या होता है? सरल भाषा में समझें तो Delimitation यानी परिसीमन का मतलब लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और सीटों का पुनर्निर्धारण है। इसका उद्देश्य जनसंख्या में हुए बदलाव के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन करना होता है। देश में आखिरी बड़े परिसीमन की प्रक्रिया 1970 के दशक में हुई थी। इसके बाद लोकसभा सीटों के राज्यों के बीच आवंटन को लेकर एक निश्चित व्यवस्था लागू रही। अब 2026 के बाद होने वाली प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। किन राज्यों पर पड़ सकता है असर? परिसीमन की चर्चा में सबसे बड़ा सवाल राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का है। जिन राज्यों में पिछले दशकों में जनसंख्या तेजी से बढ़ी है, वहां लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जाती रही है। दूसरी ओर, दक्षिण भारत के कई राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है। इन राज्यों में यह चिंता रही है कि अगर सिर्फ मौजूदा जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण किया गया, तो उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि परिसीमन को लेकर उत्तर और दक्षिण भारत के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन एक अहम राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। विपक्ष के सामने भी बड़ा मुद्दा अगर Delimitation Bill संसद में पेश होता है, तो विपक्ष इस पर सरकार से कई सवाल पूछ सकता है। राज्यों के प्रतिनिधित्व, जनसंख्या नियंत्रण और संघीय ढांचे से जुड़े मुद्दे बहस के केंद्र में रह सकते हैं। विपक्षी दलों की कोशिश होगी कि परिसीमन की प्रक्रिया में राज्यों के हितों को नजरअंदाज न किया जाए। वहीं सरकार की ओर से जनसंख्या के बदलते आंकड़ों और समान प्रतिनिधित्व की जरूरत को आधार बनाया जा सकता है। क्या बदल सकती है लोकसभा की तस्वीर? परिसीमन होने की स्थिति में लोकसभा के निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव के साथ सीटों की संख्या में भी बदलाव संभव है। इसका सीधा असर आने वाले लोकसभा चुनावों के राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि किस राज्य को कितनी सीटें मिलेंगी। इसके लिए परिसीमन आयोग की प्रक्रिया, जनगणना के आंकड़े और सरकार की ओर से तय किए जाने वाले कानूनी प्रावधान महत्वपूर्ण होंगे। सरकार के अगले कदम पर नजर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार परिसीमन को लेकर कब और किस रूप में कदम उठाती है। अगर संसद का Special Session बुलाया जाता है और Bill पेश होता है, तो यह मौजूदा राजनीतिक माहौल में एक बड़ा घटनाक्रम होगा। परिसीमन का असर लंबे समय तक देश की चुनावी राजनीति पर रह सकता है। इसलिए आने वाले दिनों में सरकार की घोषणा के साथ-साथ विपक्ष और राज्यों की प्रतिक्रिया भी काफी महत्वपूर्ण होगी।
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CJP

Maharashtra में CJP की बड़ी बैठक, दीपक ने साफ किया- नहीं बनाएंगे Political Party

Maharashtra में CJP की दो दिवसीय बैठक शुरू हो गई है। बैठक के बीच दीपक ने संगठन की आगे की दिशा को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि CJP कोई Political Party नहीं बनाएगा, बल्कि Pressure Group की तरह काम करते हुए जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाएगा। महाराष्ट्र में CJP की दो दिन की बैठक शुरू होने के साथ ही संगठन की आगे की रणनीति पर चर्चा तेज हो गई है। बैठक में देश के मौजूदा हालात, जनता से जुड़े मुद्दों और संगठन की भूमिका को लेकर विचार-विमर्श किया जा रहा है। इसी दौरान दीपक ने स्पष्ट कर दिया कि CJP का फिलहाल चुनावी राजनीति में उतरने का कोई इरादा नहीं है। दीपक ने कहा कि संगठन को Political Party बनाने के बजाय Pressure Group के तौर पर काम किया जाएगा। इसका मकसद सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि जनता के मुद्दों को सामने लाना और जरूरत पड़ने पर सरकार तथा राजनीतिक दलों पर लोकतांत्रिक तरीके से दबाव बनाना होगा। ‘देश को एक बड़े जन-आंदोलन की जरूरत’ दीपक ने देश में जन-आंदोलन की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक सिर्फ चुनाव लड़ने या सरकार बदलने से हर समस्या का समाधान नहीं हो सकता। समाज के लोगों को अपने अधिकारों और मुद्दों को लेकर जागरूक होना होगा। उन्होंने कहा कि जब आम लोग किसी मुद्दे पर एकजुट होकर अपनी आवाज उठाते हैं, तो व्यवस्था पर उसका असर पड़ता है। CJP इसी सोच के साथ जनता के बीच काम करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। Maharashtra Meeting में किन मुद्दों पर मंथन? दो दिवसीय बैठक में संगठन के भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हो रही है। इसमें जनभागीदारी बढ़ाने, संगठन को मजबूत करने और अलग-अलग मुद्दों पर अभियान चलाने जैसे विषयों पर विचार किया जा रहा है। बैठक को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि आने वाले समय में CJP की गतिविधियों का स्वरूप इसी रणनीति के आधार पर तय हो सकता है। संगठन का जोर सीधे चुनावी मैदान में उतरने के बजाय सामाजिक और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय रहने का है। Political Party से अलग क्यों रहेगा CJP? दीपक के बयान से साफ है कि CJP अपनी पहचान एक राजनीतिक दल के रूप में नहीं बनाना चाहता। संगठन का दावा है कि वह किसी एक पार्टी की राजनीति तक सीमित रहने के बजाय जनता के सवालों को प्राथमिकता देगा। Pressure Group के रूप में काम करते हुए CJP सरकार की नीतियों और फैसलों से जुड़े जनहित के मुद्दों को उठाने की कोशिश करेगा। इसके लिए लोगों के बीच जागरूकता अभियान और सामूहिक भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगे क्या करेगा CJP? महाराष्ट्र में चल रही बैठक के बाद CJP की आगामी रणनीति को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है। संगठन किन मुद्दों को प्राथमिकता देगा और किस तरह के जन-अभियान शुरू करेगा, इस पर आने वाले दिनों में नजर रहेगी। फिलहाल दीपक के बयान ने एक बात स्पष्ट कर दी है—CJP चुनावी पार्टी बनने के बजाय Pressure Group के रूप में जनता के बीच अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है। अब असली चुनौती इस सोच को जमीन पर उतारने और लोगों को बड़े स्तर पर इससे जोड़ने की होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Pradeep Rawat

Pradeep Rawat Funeral: ‘गजनी’ के विलेन को आज दी जाएगी अंतिम विदाई, 2 बजे होगा अंतिम संस्कार

फिल्म इंडस्ट्री से एक दुखद खबर सामने आई है। ‘लगान’ और ‘गजनी’ जैसी फिल्मों में अपनी दमदार एक्टिंग से पहचान बनाने वाले अभिनेता प्रदीप रावत (Pradeep Rawat) नहीं रहे। 74 साल की उम्र में मंगलवार शाम उनका निधन हो गया। वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से बॉलीवुड के साथ-साथ साउथ फिल्म इंडस्ट्री में भी शोक का माहौल है। परिवार और करीबी लोगों के लिए यह बेहद भावुक पल है। प्रदीप रावत को आज अंतिम विदाई दी जाएगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार दोपहर 2 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 2 बजे होगी Pradeep Rawat की अंतिम विदाई प्रदीप रावत ने मंगलवार शाम करीब 6 से 6:30 बजे के बीच अंतिम सांस ली। उनके मैनेजर के मुताबिक, अभिनेता पहले भी कैंसर से जंग लड़ चुके थे। कुछ समय पहले बीमारी दोबारा सामने आई, जिसके बाद उनका इलाज चल रहा था। बीमारी के बावजूद उन्होंने अपने करियर में लंबे समय तक काम किया और दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाए रखी। अब उनके निधन के बाद परिवार, दोस्तों और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग उन्हें याद कर रहे हैं। ‘महाभारत’ के अश्वत्थामा से घर-घर में पहचान प्रदीप रावत का एक्टिंग करियर फिल्मों तक सीमित नहीं था। टीवी के मशहूर धारावाहिक ‘महाभारत’ में अश्वत्थामा की भूमिका ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई थी। इसके बाद उन्होंने बड़े पर्दे का रुख किया और धीरे-धीरे अपनी मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस के लिए जाने जाने लगे। गंभीर और नकारात्मक किरदारों में उनकी पकड़ खास तौर पर मजबूत मानी जाती थी। ‘लगान’ के देवा सिंह सोढ़ी को आज भी याद करते हैं दर्शक आमिर खान की चर्चित फिल्म ‘लगान’ प्रदीप रावत के करियर की यादगार फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में उन्होंने देवा सिंह सोढ़ी का किरदार निभाया था। फिल्म की कहानी और कलाकारों की टीम में उनका किरदार भले ही मुख्य भूमिका में नहीं था, लेकिन उनकी मौजूदगी ने दर्शकों का ध्यान खींचा। ‘लगान’ की लोकप्रियता के साथ प्रदीप रावत भी बड़ी संख्या में दर्शकों के बीच पहचाने जाने लगे। ‘गजनी’ में विलेन बनकर छोड़ी अलग छाप प्रदीप रावत को सबसे ज्यादा चर्चा ‘गजनी’ के किरदार को लेकर मिली। आमिर खान स्टारर हिंदी फिल्म में उन्होंने विलेन की भूमिका निभाई थी। उनका अंदाज, आवाज और स्क्रीन पर दिखाई देने वाला रौबदार व्यक्तित्व इस किरदार की खासियत बना। यही वजह है कि आज भी जब ‘गजनी’ के यादगार विलेन की बात होती है, तो प्रदीप रावत का नाम जरूर लिया जाता है। Bollywood के साथ South फिल्मों में भी किया काम प्रदीप रावत ने सिर्फ हिंदी सिनेमा में ही काम नहीं किया। उन्होंने Telugu, Tamil, Kannada और दूसरी भाषाओं की फिल्मों में भी अपनी एक्टिंग का हुनर दिखाया। उनके खाते में ‘सरफरोश’, ‘लगान’, ‘गजनी’, ‘चांदनी चौक टू चाइना’ समेत कई चर्चित फिल्में हैं। साउथ इंडियन फिल्मों में भी उन्होंने कई प्रभावशाली किरदार निभाए और वहां के दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाई। साथी कलाकारों ने दी श्रद्धांजलि प्रदीप रावत के निधन की खबर सामने आने के बाद उनके साथ काम कर चुके कलाकारों और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने उन्हें याद किया। ‘लगान’ के को-स्टार यशपाल शर्मा ने भी अभिनेता के निधन पर दुख जताया और उनकी अंतिम विदाई से जुड़ी जानकारी साझा की। प्रदीप रावत का जाना सिर्फ एक अभिनेता का चले जाना नहीं है, बल्कि उन किरदारों की याद भी है जिन्हें उन्होंने अपनी आवाज और अंदाज से यादगार बना दिया। अश्वत्थामा से लेकर देवा सिंह सोढ़ी और ‘गजनी’ के विलेन तक, उन्होंने अलग-अलग भूमिकाओं में अपनी छाप छोड़ी। आज जब उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी, तब उनके चाहने वालों के जेहन में उनके वही दमदार किरदार और पर्दे पर उनका खास अंदाज जरूर रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Car-Bike Insurance पर Supreme Court सख्त, नई Car के लिए 4 साल और Bike के लिए 6 साल का Cover

अगर आप कार या बाइक चलाते हैं, तो वाहन के इंश्योरेंस से जुड़ी यह खबर आपके काम की है। Supreme Court ने बिना वैध बीमा वाले वाहनों पर सख्ती की जरूरत बताई है। कोर्ट के निर्देश के बाद अब ऐसे इंतजाम पर जोर दिया जा रहा है, जिससे बिना इंश्योरेंस वाले वाहन सड़कों पर न चल सकें और उन्हें पेट्रोल-डीजल भी आसानी से न मिल पाए। इस मामले में नई गाड़ियों के लिए लंबी अवधि के बीमा कवर की व्यवस्था का भी जिक्र हुआ है। इसके तहत नई कार के लिए 4 साल और नई बाइक के लिए 6 साल का Insurance Cover रखने की बात सामने आई है। इसका मकसद वाहन खरीदने के कुछ समय बाद इंश्योरेंस खत्म होने और उसके बाद बिना बीमा वाहन चलाने की समस्या पर लगाम लगाना है। बिना Insurance गाड़ी चलाने वालों पर बढ़ेगी सख्ती देश में कई वाहन ऐसे हैं जिनका इंश्योरेंस खत्म हो चुका होता है, लेकिन वे फिर भी सड़कों पर दौड़ते रहते हैं। सड़क दुर्घटना की स्थिति में ऐसे वाहनों के कारण पीड़ितों को मुआवजा मिलने में परेशानी हो सकती है। यही वजह है कि वैध Motor Insurance को लेकर नियमों के पालन पर लगातार जोर दिया जा रहा है। Supreme Court की ओर से जिस व्यवस्था पर जोर दिया गया है, उसमें पेट्रोल पंप पर वाहन का Insurance Status चेक करने की संभावना भी महत्वपूर्ण है। यदि किसी वाहन का बीमा वैध नहीं पाया जाता है, तो उसे Petrol या Diesel देने पर रोक लगाने की व्यवस्था की जा सकती है। नई Car खरीदने वालों के लिए 4 साल का Insurance नई कार खरीदने वालों के लिए 4 साल का बीमा कवर एक महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है। इससे ग्राहक को कार खरीदने के बाद शुरुआती वर्षों में बीमा रिन्यू कराने की परेशानी कम होगी। इसी तरह नई बाइक खरीदने वालों के लिए 6 साल का Insurance Cover रखने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। लंबी अवधि का बीमा होने से दोपहिया वाहन मालिकों के लिए पॉलिसी की वैधता बनाए रखना आसान हो सकता है। Petrol Pump पर कैसे होगी Insurance की जांच? अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो पेट्रोल पंप पर वाहन का नंबर डालकर उसके Insurance की वैधता जांची जा सकती है। इसके लिए सरकारी वाहन रिकॉर्ड और Insurance Database को आपस में जोड़ना होगा। ऐसी व्यवस्था सफल रहती है तो पेट्रोल पंप पर ही बिना बीमा वाले वाहन की पहचान की जा सकेगी। इससे वाहन मालिकों पर अपने इंश्योरेंस को समय पर Renew कराने का दबाव बढ़ेगा। वाहन मालिक अभी से कर लें यह काम अगर आपके पास Car, Bike या कोई अन्य वाहन है, तो सबसे पहले अपनी Insurance Policy की Expiry Date चेक कर लें। बीमा खत्म हो गया है तो वाहन चलाने से पहले उसे Renew कराना जरूरी है। सिर्फ चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा के लिहाज से भी Valid Insurance बेहद जरूरी है। खासकर पुराने वाहनों के मालिकों को अपनी पॉलिसी की स्थिति नियमित रूप से जांचते रहना चाहिए। क्यों अहम है Supreme Court का यह निर्देश? इस पूरी कवायद का उद्देश्य सड़क पर चलने वाले वाहनों को बीमा के दायरे में लाना और दुर्घटना के बाद पीड़ितों को मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करना है। अगर पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता को भी वैध Insurance से जोड़ दिया जाता है, तो बिना बीमा वाहन चलाने वालों पर प्रभावी रोक लग सकती है। यानी आने वाले समय में वाहन मालिकों के लिए RC और Driving Licence के साथ Valid Insurance रखना भी उतना ही जरूरी हो सकता है। नई व्यवस्था लागू होने पर इसका सीधा असर वाहन मालिकों और पेट्रोल पंप संचालकों, दोनों पर देखने को मिलेगा।
Stock Market

Stock Market सेंसेक्स 100 अंक मजबूत, Nifty 50 कमजोर; Realty और Auto Sector में खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में बुधवार को कारोबार की शुरुआत उतार-चढ़ाव के साथ हुई। Sensex करीब 100 अंक चढ़कर 78,550 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि Nifty 50 करीब 50 अंक की गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया। बाजार में जहां कुछ प्रमुख शेयरों पर दबाव रहा, वहीं Realty और Auto सेक्टर के Stocks में निवेशकों ने जमकर खरीदारी की। Realty और Auto Stocks बने बाजार की पसंद बुधवार के कारोबार में Realty और Auto सेक्टर सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। दोनों सेक्टर के कई शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। रियल्टी कंपनियों में आई मजबूती से संकेत मिलता है कि निवेशक इस सेक्टर के चुनिंदा Stocks को लेकर सकारात्मक नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर, Auto सेक्टर में भी खरीदारी का माहौल रहा। बाजार की मौजूदा चाल में इन दोनों सेक्टर्स ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। Sensex ने दिखाई मजबूती, Nifty में गिरावट कारोबार के दौरान Sensex करीब 100 अंक की बढ़त के साथ 78,550 के आसपास पहुंचा। हालांकि, Nifty 50 में लगभग 50 अंकों की कमजोरी देखने को मिली। यानी बाजार में फिलहाल एकतरफा तेजी या गिरावट के बजाय मिला-जुला रुख बना हुआ है। इस तरह की स्थिति में निवेशक पूरे बाजार के बजाय खास सेक्टर और चुनिंदा कंपनियों पर ज्यादा ध्यान देते हैं। बुधवार को भी यही तस्वीर दिखाई दी, जहां Realty और Auto Stocks में खरीदारी ने बाजार की हलचल बढ़ाई। Investors की नजर आगे के संकेतों पर बाजार की दिशा को लेकर निवेशकों की नजर अब घरेलू और वैश्विक संकेतों पर बनी हुई है। इसके अलावा कंपनियों के तिमाही नतीजे, आर्थिक आंकड़े और विदेशी बाजारों की चाल भी भारतीय शेयर बाजार पर असर डाल सकती है। फिलहाल Sensex की बढ़त और Nifty की कमजोरी से बाजार में सावधानी का माहौल नजर आ रहा है। हालांकि Realty और Auto Stocks में खरीदारी यह बताती है कि निवेशक चुनिंदा सेक्टर्स में मौके तलाश रहे हैं। Market में आगे क्या रहेगा फोकस? आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की नजर प्रमुख कंपनियों के प्रदर्शन, ग्लोबल मार्केट के संकेत और निवेशकों के सेंटीमेंट पर रहेगी। ऐसे में सेंसेक्स और निफ्टी की आगे की चाल के साथ-साथ सेक्टरवार प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold

Gold-Silver Rate: खरीदारी से पहले जानें आज का भाव, सोना और चांदी दोनों हुए महंगे

अगर आप आज सोना (Gold)या चांदी (Silver) खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो बाजार से पहले ताजा रेट जान लेना आपके लिए जरूरी है। बुधवार, 5 अगस्त को घरेलू सर्राफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी देखने को मिली। सोने के भाव में जहां करीब ₹2,200 तक की बढ़ोतरी बताई जा रही है, वहीं चांदी की कीमत में ₹5,000 तक का उछाल देखने को मिला है। कीमतों में अचानक आई इस तेजी का असर उन लोगों पर भी पड़ सकता है, जो आने वाले दिनों में शादी, त्योहार या किसी खास मौके के लिए ज्वेलरी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, सोने-चांदी के दाम शहर और बाजार के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं। Silver Rate में जोरदार तेजी 5 अगस्त को चांदी के बाजार भाव ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा। कई बाजारों में चांदी की कीमत में हजारों रुपये प्रति किलो का अंतर देखने को मिला। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के मुताबिक पुणे में चांदी का भाव करीब ₹2,49,900 प्रति किलो दर्ज किया गया। चांदी के दाम में होने वाली तेजी सिर्फ ज्वेलरी बाजार तक सीमित नहीं रहती। इंडस्ट्री में चांदी की मांग और निवेशकों की खरीदारी भी इसके भाव को प्रभावित करती है। यही वजह है कि Silver Rate में कई बार कम समय में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है। Gold Rate भी चढ़ा, खरीदारी हुई महंगी चांदी के साथ सोने के भाव में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 5 अगस्त को Gold Rate में करीब ₹2,200 तक की तेजी की खबर है। सोने की कीमत उसकी शुद्धता के अनुसार बदलती है। 24 कैरेट सोना सबसे शुद्ध माना जाता है, जबकि ज्वेलरी में आमतौर पर 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल ज्यादा होता है। यहां एक बात समझना जरूरी है कि बाजार में बताए जाने वाले Gold Rate और ज्वेलरी की दुकान पर मिलने वाली अंतिम कीमत एक जैसी नहीं होती। ज्वेलरी खरीदते समय GST, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क भी जुड़ सकते हैं। हर शहर में एक जैसा नहीं होता Gold-Silver Rate सोने और चांदी की कीमत पूरे देश में बिल्कुल एक जैसी नहीं रहती। स्थानीय बाजार की स्थिति, मांग-सप्लाई, टैक्स और ज्वेलर्स के चार्ज के कारण शहर-दर-शहर कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप भोपाल, दिल्ली, मुंबई, इंदौर, जयपुर या किसी दूसरे शहर में खरीदारी करने जा रहे हैं, तो वहां के स्थानीय सर्राफा बाजार का ताजा भाव जरूर पता कर लें। अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी पड़ता है असर Gold और Silver की कीमतें सिर्फ घरेलू मांग से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बुलियन की कीमत, डॉलर की चाल, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और निवेशकों का रुख भी भारतीय बाजार पर असर डालता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की कीमत बढ़ती है या रुपये की स्थिति में बदलाव आता है, तो उसका असर घरेलू Gold-Silver Rate पर भी दिखाई दे सकता है। खरीदारी करने वालों के लिए क्या है सलाह? अगर आपको आज ही सोना या चांदी खरीदनी है, तो सिर्फ एक जगह का रेट देखकर फैसला न करें। अलग-अलग ज्वेलर्स से कीमत की जानकारी लें और शुद्धता, मेकिंग चार्ज, GST और अंतिम बिल को ध्यान से देखें। खासकर चांदी खरीदते समय प्रति किलो और प्रति ग्राम के रेट में अंतर को भी समझना जरूरी है। वहीं सोने की ज्वेलरी खरीदते वक्त हॉलमार्क और शुद्धता की जानकारी जरूर जांचें। Gold Silver Rate: आगे क्या? सोने और चांदी के बाजार में फिलहाल उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में कीमत किस दिशा में जाएगी, यह घरेलू और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। डिस्क्लेमर: सोने और चांदी के भाव समय, शहर, शुद्धता और स्थानीय बाजार के अनुसार बदल सकते हैं। ज्वेलरी खरीदने से पहले अपने स्थानीय ज्वेलर से उस समय का ताजा रेट और सभी अतिरिक्त शुल्क की जानकारी जरूर लें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

4 साल बाद टेस्ट शतक के करीब पहुंचे बाबर आजम, वेस्टइंडीज के खिलाफ 88 रन बनाकर नाबाद

स्पोर्ट्स डेस्क। पाकिस्तान के टेस्ट कप्तान बाबर आजम चार साल बाद टेस्ट क्रिकेट में शतक के बेहद करीब पहुंच गए हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले जा रहे दूसरे टेस्ट की दूसरी पारी में बाबर 88 रन बनाकर नाबाद हैं और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा चुके हैं। बाबर आजम ने अपना पिछला टेस्ट शतक वर्ष 2022 में न्यूजीलैंड के खिलाफ कराची टेस्ट में लगाया था। उस मुकाबले में उन्होंने 161 रन की शानदार पारी खेली थी। संयोग से उस समय भी वह पाकिस्तान की कप्तानी कर रहे थे। कप्तानी में वापसी के बाद शानदार प्रदर्शन खराब फॉर्म के चलते बाबर आजम ने वर्ष 2023 में टेस्ट कप्तानी छोड़ दी थी, जिसके बाद शान मसूद को नियमित कप्तान बनाया गया। हालांकि, 5 जुलाई 2026 को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने एक बार फिर बाबर को टेस्ट टीम की कमान सौंपी। कप्तानी में वापसी के बाद उनका यह प्रदर्शन टीम के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। अब्दुल्ला शफीक के शतक से पाकिस्तान मजबूत दूसरी पारी में अब्दुल्ला शफीक के शानदार नाबाद शतक और बाबर आजम की अर्धशतकीय पारी की बदौलत पाकिस्तान ने 2 विकेट पर 273 रन बना लिए हैं। दोनों बल्लेबाजों के बीच तीसरे विकेट के लिए शतकीय साझेदारी हो चुकी है। पहली पारी के आधार पर पाकिस्तान अब वेस्टइंडीज से केवल 71 रन पीछे है। दो साल बाद शतक लगाने में सफल रहे शफीक अब्दुल्ला शफीक ने अपने टेस्ट करियर का छठा शतक लगाया। यह उनका 2024 के बाद पहला टेस्ट शतक है। वह लंबे समय तक 99 रन पर रुके रहे, लेकिन बाद में जोमेल वॉरिकन की गेंद पर मिडविकेट की दिशा में चौका लगाकर तीन अंकों तक पहुंचे। अजान ओवैस ने दिलाई तेज शुरुआत पाकिस्तान की दूसरी पारी की शुरुआत युवा बल्लेबाज अजान ओवैस ने आक्रामक अंदाज में की। उन्होंने दूसरे ही ओवर में तेज गेंदबाज केमार रोच के खिलाफ लगातार तीन चौके जड़कर टीम को तेज शुरुआत दिलाई। हालांकि, इमाम-उल-हक तेज गेंदबाज शमार जोसेफ की गेंद पर स्लिप में कैच देकर आउट हो गए। ओवैस ने अर्धशतक जरूर पूरा किया, लेकिन बाद में जोमेल वॉरिकन की गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट हो गए। पहली पारी में 344 रन पर सिमटी थी वेस्टइंडीज इससे पहले वेस्टइंडीज की पहली पारी 344 रन पर समाप्त हुई थी। टीम की ओर से जस्टिन ग्रीव्स और रोस्टन चेज ने अर्धशतकीय पारियां खेलीं। पाकिस्तान के लिए अली उस्मान ने पहली ही गेंद पर जस्टिन ग्रीव्स का विकेट लिया। उबैद शाह ने रोस्टन चेज को बोल्ड किया, जबकि साजिद खान ने शमार जोसेफ का विकेट लेकर वेस्टइंडीज की पारी का अंत किया। क्रिकेट और खेल जगत की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com

बेन स्टोक्स ने इंग्लैंड टीम के ‘ड्रिंकिंग कल्चर’ के आरोपों को किया खारिज, बोले- ऐसी कोई समस्या नहीं

लंदन। इंग्लैंड के पूर्व टेस्ट कप्तान बेन स्टोक्स ने इंग्लैंड क्रिकेट टीम में कथित ‘ड्रिंकिंग कल्चर’ की धारणा को खारिज करते हुए कहा है कि सीनियर टीम में शराब से जुड़ी किसी तरह की संस्कृति या समस्या नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह जरूर माना कि यूनाइटेड किंगडम में क्रिकेट और शराब का ऐतिहासिक संबंध रहा है। 35 वर्षीय स्टोक्स ने पूर्व क्रिकेटरों स्टुअर्ट ब्रॉड और जोस बटलर के पॉडकास्ट ‘For The Love of Cricket’ में यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इंग्लैंड की सीनियर टीम को शराब की समस्या से जोड़ना सही नहीं है। एशेज सीरीज के दौरान उठा था विवाद इंग्लैंड क्रिकेट में शराब को लेकर बहस उस समय तेज हुई थी, जब एशेज सीरीज के दौरान कुछ खिलाड़ियों के शराब पीने की खबरें सामने आई थीं। विवाद तब और बढ़ गया था, जब सलामी बल्लेबाज बेन डकेट टीम के मिड-सीरीज ब्रेक के दौरान ऑस्ट्रेलिया के नूसा में कथित तौर पर नशे की हालत में नजर आए थे। इसके अलावा, न्यूजीलैंड के खिलाफ लॉर्ड्स टेस्ट में जीत के बाद बेन स्टोक्स तेज गेंदबाज गस एटकिंसन के साथ बाहर गए थे। इस दौरान एक नाइटक्लब में हुई घटना के बाद उन्हें अगले टेस्ट मैच से बाहर बैठना पड़ा था। कोचिंग में बनाना चाहते हैं करियर बेन स्टोक्स ने बताया कि वह इस समय लेवल-3 कोचिंग क्वालिफिकेशन पूरा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सक्रिय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी वह खेल से जुड़े रहना चाहते हैं और भविष्य में कोचिंग की भूमिका निभाने की इच्छा रखते हैं। स्टोक्स ने कहा कि उनका लक्ष्य है कि क्रिकेट छोड़ने से पहले कोचिंग की सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर लें, ताकि वह भविष्य में टीमों के साथ प्रभावी भूमिका निभा सकें। जो रूट की कप्तानी को लेकर जताई चिंता स्टोक्स ने इंग्लैंड के नए टेस्ट कप्तान जो रूट को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि रूट हमेशा टीम को खुद से पहले रखते हैं और यही बात उन्हें परेशान करती है। उन्होंने बताया कि कप्तान के रूप में रूट पहले भी खुद पर काफी दबाव लेते थे और वह नहीं चाहते कि दोबारा उन्हें उसी मानसिक दबाव का सामना करना पड़े। बेन स्टोक्स ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में इंग्लैंड के लिए 122 टेस्ट, 114 वनडे और 43 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। उनकी कप्तानी में इंग्लैंड ने आक्रामक ‘बैजबॉल’ शैली से टेस्ट क्रिकेट में नई पहचान बनाई। खेल जगत की ताजा और विश्वसनीय खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com

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