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Bhopal

Bhopal Municipal Action: दुकानों पर Sealing से नाराज व्यापारी, बोले- बड़े Malls पर कार्रवाई क्यों नहीं?

Bhopal में नगर निगम की Sealing Action के बाद व्यापारियों में नाराजगी बढ़ गई है। सोमवार को रिहायशी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ निगम ने बड़े स्तर पर कार्रवाई की। करीब चार घंटे तक चले अभियान में शहर के अलग-अलग इलाकों में 15 से ज्यादा दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बंद या सील किया गया। कार्रवाई के दौरान सबसे ज्यादा हलचल अरेरा कॉलोनी में देखने को मिली। निगम की टीम जब E-3 इलाके में पहुंची तो दुकानदारों ने विरोध शुरू कर दिया। व्यापारियों का कहना था कि नियमों के नाम पर छोटे कारोबारियों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि बड़े शॉपिंग मॉल और दूसरे बड़े प्रतिष्ठानों पर ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। अरेरा कॉलोनी में आमने-सामने आए व्यापारी और निगम की टीम अरेरा कॉलोनी के E-3 इलाके में निगम की टीम ने कई दुकानों पर कार्रवाई की। इस दौरान करीब 8 दुकानों को सील किए जाने की जानकारी सामने आई है। निगम की कार्रवाई शुरू होते ही दुकानदार मौके पर जमा हो गए। व्यापारियों ने अधिकारियों से कार्रवाई को लेकर सवाल किए और अपनी परेशानी बताई। उनका कहना था कि कई परिवार इन छोटे कारोबारों पर निर्भर हैं और दुकान अचानक बंद होने से रोजमर्रा की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा। व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया कि निगम की कार्रवाई में समानता नहीं दिखाई दे रही है। दुकानदारों का सवाल- बड़े Malls पर कार्रवाई कब? अरेरा कॉलोनी में विरोध की सबसे बड़ी वजह बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर उठे सवाल रहे। दुकानदारों का कहना है कि यदि रिहायशी क्षेत्र में Commercial Activity नियमों के खिलाफ है, तो फिर छोटी दुकान हो या बड़ा Shopping Mall, नियम सभी के लिए एक जैसे होने चाहिए। व्यापारियों ने नगर निगम से यह स्पष्ट करने की मांग की कि कार्रवाई का आधार क्या है और किन प्रतिष्ठानों को नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में रखा गया है। हालांकि, निगम का कहना है कि कार्रवाई नियमों के तहत की जा रही है और नोटिस दिए जाने के बाद आगे की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। Kolar से लेकर Rachna Nagar तक Action नगर निगम का अभियान सिर्फ अरेरा कॉलोनी तक सीमित नहीं रहा। कोलार के सर्वधर्म क्षेत्र में भी निगम की टीमों ने कई प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। यहां होटल, पब, मॉल और जिम समेत कई व्यावसायिक गतिविधियां कार्रवाई के दायरे में आईं। इसके अलावा रचना नगर और खानूगांव सहित दूसरे क्षेत्रों में भी निगम की टीमें पहुंचीं। कुछ स्थानों पर टीम के पहुंचने से पहले ही दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए। 8 हजार से ज्यादा नोटिस जारी भोपाल में रिहायशी इलाकों में Commercial Use को लेकर नगर निगम पहले से ही कार्रवाई की तैयारी कर रहा था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 26 अगस्त तक करीब 8,264 नोटिस जारी किए जा चुके थे। अब नोटिस के बाद Sealing Action शुरू होने से कारोबारियों में चिंता बढ़ गई है। खासकर छोटे दुकानदारों को डर है कि दुकान बंद होने से उनकी आय पर सीधा असर पड़ेगा। Supreme Court के निर्देशों के बाद तेज हुई कार्रवाई रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों का मामला लंबे समय से चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नगर निगम की कार्रवाई में तेजी आई है। निगम का फोकस ऐसे प्रतिष्ठानों पर है, जहां निर्धारित नियमों के अनुरूप व्यावसायिक गतिविधियां संचालित नहीं हो रही हैं। दूसरी तरफ व्यापारियों की मांग है कि कार्रवाई के साथ उनकी रोजी-रोटी का भी ध्यान रखा जाए। उनका कहना है कि अगर कोई नियम लागू है तो उसकी जानकारी स्पष्ट तरीके से दी जाए और सभी प्रतिष्ठानों पर बिना भेदभाव के कार्रवाई हो। अब आगे क्या होगा? भोपाल में Sealing Drive अभी खत्म होती नजर नहीं आ रही है। नगर निगम की टीमें आने वाले दिनों में दूसरे इलाकों में भी ऐसे प्रतिष्ठानों की जांच कर सकती हैं। अरेरा कॉलोनी में हुए विरोध ने इस पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि निगम की कार्रवाई आगे कितनी तेज होती है और व्यापारियों की शिकायतों पर प्रशासन की ओर से क्या जवाब सामने आता है। फिलहाल एक बात साफ है—भोपाल में residential areas में commercial activities को लेकर नगर निगम की सख्ती बढ़ गई है और आने वाले दिनों में इसका असर शहर के कई कारोबारियों पर देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

SCO Summit में PM Modi और Pezeshkian की मुलाकात, Iran War के बाद पहली बातचीत

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की बिश्केक में मुलाकात हुई। दोनों नेताओं की यह बैठक SCO Summit 2026 के दौरान हुई। हालिया ईरान-अमेरिका संघर्ष के बाद मोदी और पेजेश्कियान की यह पहली आमने-सामने की मुलाकात है, इसलिए इस बैठक पर दुनियाभर की नजरें टिकी हैं। मुलाकात ऐसे वक्त हुई है, जब पश्चिम एशिया की स्थिति लगातार संवेदनशील बनी हुई है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ ऊर्जा और व्यापार पर भी पड़ रहा है। ऐसे माहौल में भारत और ईरान के शीर्ष नेताओं की आमने-सामने बातचीत को कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। West Asia Crisis के बीच हुई बातचीत प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेश्कियान की बातचीत में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति प्रमुख मुद्दों में रही। इससे पहले भी दोनों नेताओं के बीच क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर संपर्क हुआ है। भारत लगातार क्षेत्र में तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा और बातचीत के जरिए समाधान की जरूरत पर जोर देता रहा है। भारत के लिए पश्चिम एशिया की स्थिति इसलिए भी अहम है क्योंकि इस क्षेत्र से बड़ी संख्या में भारतीयों का जुड़ाव है और ऊर्जा एवं व्यापार के लिहाज से भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है। Iran के साथ रिश्तों पर भी नजर भारत और ईरान के रिश्ते केवल राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। ऐसे समय में जब ईरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुश्किल दौर से गुजर रहा है, भारत का उसके साथ संवाद बनाए रखना खास महत्व रखता है। बिश्केक में हुई मोदी-पेजेश्कियान बैठक इसी निरंतर कूटनीतिक संपर्क की एक अहम कड़ी मानी जा रही है। SCO Summit में एक मंच पर बड़े नेता बिश्केक में हो रहे Shanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit में भारत, चीन, रूस, ईरान समेत कई देशों के शीर्ष नेता हिस्सा ले रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा में कई द्विपक्षीय बैठकों का कार्यक्रम भी है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी ने इस सम्मेलन को और महत्वपूर्ण बना दिया है। SCO के मंच पर क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और बदलते वैश्विक समीकरणों जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच यह बैठक सदस्य देशों के लिए अपनी-अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताएं रखने का अहम मंच भी बन गई है। भारत की Balanced Diplomacy पर टिकी नजर ईरान के साथ बातचीत के दौरान भारत के सामने एक तरफ अपने रणनीतिक और आर्थिक हित हैं, तो दूसरी ओर पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की जरूरत। मोदी सरकार पहले भी अलग-अलग पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने की नीति पर आगे बढ़ती रही है। ऐसे में बिश्केक में मोदी और पेजेश्कियान की मुलाकात को भारत की Balanced Foreign Policy के नजरिए से भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति किस दिशा में जाती है और भारत इस संकट में अपनी कूटनीतिक भूमिका को किस तरह आगे बढ़ाता है, यह देखना दिलचस्प होगा। क्यों खास है यह मुलाकात? इस मुलाकात ने साफ कर दिया है कि पश्चिम एशिया के बदलते समीकरणों के बीच भारत ईरान समेत सभी प्रमुख पक्षों के साथ अपना संवाद बनाए रखना चाहता है। बिश्केक से हुई यह बैठक आने वाले समय में भारत की West Asia Policy के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CJP

5 सितंबर को Delhi March करेगा CJP, Supreme Court ने रोक लगाने से किया इनकार

राजधानी दिल्ली में 5 सितंबर को प्रस्तावित CJP March को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने फिलहाल इस प्रदर्शन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी कोई ठोस परिस्थिति सामने नहीं है, जिसके आधार पर अभी से यह मान लिया जाए कि मार्च के दौरान कोई अप्रिय घटना होगी। साथ ही अदालत ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन और पुलिस पर छोड़ दी। CJP यानी Cockroach Janata Party ने 5 सितंबर को दिल्ली में शांतिपूर्ण मार्च निकालने का ऐलान किया है। संगठन के मुताबिक मार्च India Gate से Delhi Police Headquarters तक प्रस्तावित है। इस प्रदर्शन को लेकर पहले से ही सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे थे। Supreme Court ने क्यों नहीं लगाई रोक? 5 सितंबर के मार्च पर पाबंदी लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई गई थीं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि फिलहाल ऐसी कोई “compelling circumstance” नहीं है, जिससे यह अनुमान लगाया जा सके कि प्रदर्शन के दौरान कुछ अप्रिय होगा। कोर्ट ने सभी पक्षों से कानून के दायरे में रहकर जिम्मेदारी से काम करने की उम्मीद जताई। अदालत ने याचिकाकर्ता को अपनी चिंताएं संबंधित पुलिस और प्रशासन के सामने रखने को भी कहा। यानी फिलहाल कोर्ट ने मार्च को रोकने के बजाय कानून-व्यवस्था से जुड़ा फैसला प्रशासन पर छोड़ दिया है। 5 सितंबर को क्यों निकलेगा CJP March? CJP ने यह मार्च सरकार पर पहले किए गए कथित वादों को पूरा नहीं करने के आरोपों के बीच घोषित किया है। संगठन का कहना है कि 25 जुलाई के आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से कुछ आश्वासन दिए गए थे, लेकिन उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। CJP ने खास तौर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाया है। संगठन का दावा है कि इन मामलों में कार्रवाई में देरी के कारण दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। March में कौन शामिल हो सकता है? CJP के अनुसार प्रस्तावित मार्च में छात्र और युवा संगठनों के अलावा NEET से जुड़े मामलों में प्रभावित परिवारों तथा कथित पुलिस कार्रवाई से प्रभावित लोगों के शामिल होने की बात कही गई है। संगठन ने इसे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन बताया है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने पहले कहा था कि प्रस्तावित मार्च के लिए उसकी अनुमति मांगी गई थी या नहीं, इस संबंध में प्रक्रिया अलग से देखी जा रही है। पुलिस सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए तैयारियों का आकलन कर रही है। अब प्रशासन के सामने बड़ी जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद 5 सितंबर के मार्च को लेकर अब नजर दिल्ली पुलिस और प्रशासन की तैयारियों पर रहेगी। India Gate और Delhi Police Headquarters के बीच प्रस्तावित रूट पर भीड़, ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था को संभालना प्रशासन के लिए अहम चुनौती होगी। कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध का अधिकार अपनी जगह है, लेकिन प्रदर्शन के दौरान कानून का पालन करना भी उतना ही जरूरी है। अगर स्थिति भविष्य में गंभीर होती है, तो संबंधित पक्ष कानूनी उपाय अपना सकते हैं। 10 सितंबर को फिर होगी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने मामले को लंबित याचिकाओं के साथ 10 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। फिलहाल 5 सितंबर के मार्च पर कोई तत्काल रोक नहीं है और अदालत ने सभी पक्षों से शांतिपूर्ण तथा जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Hanuman Ansh

₹2 करोड़ की Hanuman Ansh ने किया कमाल, शानदार Collection के बाद डायरेक्टर हुए भावुक

बॉक्स ऑफिस पर कई बार ऐसी फिल्में आ जाती हैं, जिनकी शुरुआत देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा पाता कि आगे चलकर कहानी इतनी बदल जाएगी। ‘हनुमान अंश’ (Hanuman Ansh) भी कुछ ऐसी ही फिल्म साबित हो रही है। शुरुआत में धीमी रफ्तार से आगे बढ़ी इस फिल्म ने तीसरे हफ्ते के बाद ऐसी छलांग लगाई कि अब इसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। नीम करौली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक विचारों से प्रेरित ‘हनुमान अंश’ को विशाल चतुर्वेदी ने लिखा और डायरेक्ट किया है। करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म की कमाई अब उसके शुरुआती प्रदर्शन से बिल्कुल अलग तस्वीर दिखा रही है। 10 लाख की Opening से शुरू हुआ सफर Hanuman Ansh ने सिनेमाघरों में पहले दिन करीब 10 लाख रुपये की कमाई की थी। पहले दो हफ्तों में भी फिल्म की रफ्तार काफी धीमी रही। यही वजह थी कि शुरुआत में कुछ लोगों ने फिल्म के बॉक्स ऑफिस भविष्य पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। लेकिन फिल्म ने हार नहीं मानी। तीसरे हफ्ते में दर्शकों की संख्या बढ़ने लगी और Word of Mouth ने पूरा खेल बदल दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीसरे हफ्ते में फिल्म ने करीब 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया, जो शुरुआती प्रदर्शन के मुकाबले जबरदस्त उछाल था। 24वें दिन Box Office पर बड़ा उछाल फिल्म की सबसे ज्यादा चर्चा उसके चौथे हफ्ते के प्रदर्शन को लेकर हो रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 24वें दिन ‘हनुमान अंश’ ने करीब ₹12.75 करोड़ का India Net Collection किया और कुल कमाई ₹40 करोड़ के पार पहुंच गई। वहीं कुछ अन्य ट्रेड रिपोर्ट्स में आंकड़े अलग बताए गए हैं, इसलिए अंतिम कलेक्शन में अंतर संभव है। यह उछाल इसलिए भी खास है क्योंकि फिल्म की शुरुआत महज 10 लाख रुपये से हुई थी। यानी कुछ ही हफ्तों में फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर पूरी तरह अपना रंग बदल दिया। डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी हुए Emotional फिल्म की बढ़ती सफलता से डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी भी भावुक नजर आए। उन्होंने शुरुआती दौर को याद करते हुए बताया कि एक समय फिल्म के शो कम होने की स्थिति बन गई थी। लेकिन दर्शकों के रिस्पॉन्स ने हालात बदल दिए। फिल्म को मिल रहे प्यार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शो की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। डायरेक्टर का कहना है कि अभी फिल्म के शोज और बढ़ सकते हैं। कम बजट, लेकिन बड़ा असर ‘हनुमान अंश’ की कहानी सिर्फ कमाई की वजह से चर्चा में नहीं है। फिल्म की खासियत यह है कि इसे बड़े स्टार्स और भारी-भरकम बजट वाली फिल्मों के बीच अपनी अलग जगह बनाने में सफलता मिली है। फिल्म के विषय और आध्यात्मिक कहानी से जुड़े दर्शकों ने इसे पसंद किया। सोशल मीडिया और दर्शकों की आपसी चर्चाओं ने भी फिल्म को धीरे-धीरे ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। यही Word of Mouth फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आया है। ‘हनुमान अंश’ ने बदल दी Box Office की कहानी जिस फिल्म की शुरुआत बेहद मामूली रही, वही अब चौथे हफ्ते में बड़ी फिल्मों को टक्कर देती नजर आ रही है। रिपोर्ट्स में इसे 2026 की चौंकाने वाली Sleeper Hit में गिना जा रहा है। ‘हनुमान अंश’ की कहानी बॉक्स ऑफिस पर एक बात जरूर साबित करती है—हर फिल्म को पहले दिन करोड़ों की Opening की जरूरत नहीं होती। अगर कहानी दर्शकों के दिल तक पहुंच जाए, तो उसका असर देर से सही, लेकिन काफी दूर तक जा सकता है। फिलहाल फिल्म के बढ़ते शोज और दर्शकों की दिलचस्पी ने मेकर्स की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। डायरेक्टर के मुताबिक, सिनेमाघरों में फिल्म का सफर अभी जारी है और आने वाले दिनों में शोज की संख्या और बढ़ सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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SIR

Delhi SIR Draft Voter List: 47.7 लाख नाम बाहर, ऐसे Check करें अपना नाम

दिल्ली में SIR (Special Intensive Revision) के तहत Draft Voter List जारी होने के बाद मतदाताओं के बीच हलचल बढ़ गई है। नई सूची में करीब 47.7 लाख लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। यह आंकड़ा सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतने नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर क्यों रह गए और जिन लोगों का नाम नहीं है, वे अब क्या करें? सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ड्राफ्ट लिस्ट में नाम नहीं होना अंतिम रूप से वोटर लिस्ट से नाम कटने का मतलब नहीं है। पात्र मतदाताओं को अपना नाम वापस शामिल कराने के लिए दावा और आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया गया है। दिल्ली में कितने मतदाता, कितने नाम Draft List में? SIR से पहले दिल्ली में कुल 1,45,10,299 मतदाता दर्ज थे। Revision के दौरान करीब 97.5 लाख मतदाताओं के Enumeration Forms प्राप्त हुए और उन्हें डिजिटल किया गया। इसके आधार पर करीब 97.5 लाख नाम Draft Electoral Roll में शामिल किए गए हैं। दूसरी ओर, करीब 47.7 लाख नाम फिलहाल ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं दिखाई दे रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक इन मामलों को मुख्य रूप से Absent, Shifted, Dead, Duplicate and Others (ASDDO) जैसी श्रेणियों में रखा गया है। यानी कई मामलों में मतदाता का पता बदल चुका हो सकता है, किसी व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी हो सकती है या रिकॉर्ड में एक से ज्यादा एंट्री होने की संभावना हो सकती है। नाम नहीं मिला तो क्या करें? अगर आपने SIR के दौरान अपना Enumeration Form जमा किया था, लेकिन Draft Voter List में नाम नहीं दिख रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। Election authorities ने ऐसे लोगों को Claim और Objection दाखिल करने का मौका दिया है। दावा-आपत्ति की प्रक्रिया 31 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक चलेगी। पात्र व्यक्ति अपना नाम वोटर लिस्ट में शामिल कराने के लिए Form 6 के जरिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद अधिकारियों की ओर से दस्तावेजों और दावे की जांच की जाएगी। जरूरी होने पर संबंधित व्यक्ति से अतिरिक्त जानकारी या दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं। Final Voter List कब आएगी? Draft Electoral Roll जारी होने के बाद अब अगला चरण claims और objections का है। इस दौरान जिन लोगों के नाम गलती से छूट गए हैं, उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 29 अक्टूबर 2026 तक नोटिस और दावों के निपटारे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद 4 नवंबर 2026 को Delhi की Final Voter List जारी की जाएगी। SIR में क्यों हटाए गए इतने नाम? SIR का उद्देश्य वोटर लिस्ट को अपडेट करना और उसमें मौजूद गलत या पुराने रिकॉर्ड की पहचान करना है। लंबे समय से दिल्ली में रह रहे लेकिन पता बदल चुके मतदाताओं, मृत व्यक्तियों के नाम, डुप्लीकेट एंट्री और अन्य संदिग्ध रिकॉर्ड की जांच इस प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में नाम Draft List से बाहर होने के बाद अब यह भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि कोई वास्तविक और पात्र मतदाता गलती से मतदान के अधिकार से वंचित न रह जाए। अलग-अलग इलाकों में अलग रहा Verification दिल्ली की अलग-अलग विधानसभा सीटों पर Enumeration Forms के digitisation का प्रतिशत भी एक जैसा नहीं रहा। रिपोर्ट के मुताबिक रोहिणी में करीब 83.43% फॉर्म डिजिटाइज हुए, जबकि तुगलकाबाद में यह आंकड़ा करीब 52.15% रहा। इसी वजह से अब Draft Roll के बाद शुरू होने वाली Claim और Objection प्रक्रिया काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Delhi Voter List में नाम जरूर Check करें अगर आप दिल्ली के मतदाता हैं, तो इस समय सबसे जरूरी काम है कि Draft Voter List में अपना नाम जरूर चेक करें। खासकर उन लोगों को ध्यान देना चाहिए जिनका पता हाल के वर्षों में बदला है या जिनके Enumeration Form को लेकर कोई समस्या हुई थी। अगर नाम नहीं मिलता है और आप मतदान के लिए पात्र हैं, तो 30 सितंबर 2026 से पहले Claim दाखिल करना जरूरी होगा। Final Voter List में नाम शामिल होने के बाद ही आगामी चुनाव में मतदान का अधिकार सुनिश्चित होगा। Delhi SIR Voter List की Important Dates हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BJP

Maharashtra में फिर बढ़ी सियासी गर्मी, Mumbai Bank Election में BJP और शिंदे सेना की भिड़ंत

महाराष्ट्र की राजनीति में BJP और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना एक बार फिर आमने-सामने नजर आ सकती है। इस बार मामला किसी विधानसभा सीट या बड़े राजनीतिक चुनाव का नहीं, बल्कि Mumbai Bank Election का है। मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव में शिंदे गुट के उतरने की चर्चा ने महायुति के भीतर सियासी हलचल बढ़ा दी है। BJP और शिंदे की शिवसेना राज्य में महायुति सरकार की सहयोगी हैं, लेकिन स्थानीय चुनावों में दोनों दलों के बीच वर्चस्व की लड़ाई कई बार सामने आती रही है। ऐसे में मुंबई बैंक चुनाव को भी सिर्फ सहकारी संस्था का चुनाव मानकर नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। Mumbai Bank Election में सीधा मुकाबला? मुंबई बैंक का चुनाव सहकारिता क्षेत्र में काफी अहम माना जाता है। बैंक से जुड़े चुनाव में अलग-अलग राजनीतिक गुटों की सक्रियता रहती है। यही वजह है कि अगर BJP और शिंदे सेना अपने-अपने पैनल के साथ मैदान में उतरती हैं तो मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। शिंदे गुट की ओर से चुनाव लड़ने की तैयारी की खबर के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि BJP की रणनीति क्या रहती है। दोनों दलों के अलग-अलग उम्मीदवार मैदान में आने पर चुनाव सीधे तौर पर राजनीतिक ताकत के प्रदर्शन में बदल सकता है। महायुति में साथ, चुनाव में अलग राह महाराष्ट्र में BJP और शिवसेना का शिंदे गुट सत्ता में साझेदार हैं। दोनों दलों ने कई बड़े चुनावों में साथ मिलकर रणनीति बनाई है। लेकिन स्थानीय स्तर पर परिस्थितियां हमेशा इतनी आसान नहीं रहतीं। मुंबई और ठाणे जैसे इलाकों में संगठन और राजनीतिक प्रभाव को लेकर दोनों पक्षों के बीच प्रतिस्पर्धा पहले भी देखने को मिली है। सहकारी संस्थाओं के चुनाव इस लिहाज से खास होते हैं, क्योंकि इनके नतीजे स्थानीय संगठन की पकड़ और नेताओं के प्रभाव का संकेत भी देते हैं। Thane Bank Election ने भी दिखाया था टकराव मुंबई बैंक से पहले ठाणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक का चुनाव भी BJP और शिंदे सेना के बीच चर्चा में रहा था। दोनों दलों के बीच राजनीतिक समीकरणों को लेकर अलग-अलग दावे और रणनीतियां सामने आई थीं। हालांकि बाद में कुछ मौकों पर दोनों पक्षों ने मिलकर भी काम किया। यही महाराष्ट्र की महायुति की राजनीति की खासियत है—जहां सत्ता में गठबंधन कायम है, वहीं स्थानीय स्तर पर राजनीतिक मुकाबला भी चलता रहता है। Mumbai Politics के लिए क्यों अहम है यह चुनाव? मुंबई सिर्फ महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी नहीं है, बल्कि प्रदेश की राजनीति का भी बड़ा केंद्र है। यहां किसी भी चुनाव में संगठनात्मक प्रदर्शन को राजनीतिक नजरिए से देखा जाता है। अगर मुंबई बैंक चुनाव में BJP और शिंदे सेना अलग-अलग खेमों में उतरती हैं, तो इससे दोनों दलों को अपनी जमीनी ताकत परखने का मौका मिलेगा। साथ ही चुनाव के नतीजे आने वाले स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिए भी संकेत दे सकते हैं। अब सबकी नजर चुनावी रणनीति पर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या BJP और शिंदे सेना Mumbai Bank Election में अलग-अलग चुनाव लड़ेंगी या आखिरी समय में कोई समझौता हो जाएगा? शिंदे गुट की संभावित एंट्री ने मुकाबले को पहले ही दिलचस्प बना दिया है। अगर दोनों पक्ष आमने-सामने आते हैं तो यह सिर्फ बैंक के बोर्ड पर कब्जे की लड़ाई नहीं होगी, बल्कि मुंबई में अपने राजनीतिक प्रभाव का संदेश देने की कोशिश भी मानी जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold Rate Today: सोना ₹1.55 लाख पर आया, Silver Price में ₹8,437 की बड़ी गिरावट

अगर आप सोना या चांदी खरीदने का मन बना रहे हैं तो आज के भाव आपके लिए खास हो सकते हैं। लंबे समय से ऊंचे स्तर पर चल रही कीमती धातुओं की कीमतों में सोमवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। चांदी (Silver) का भाव ₹8,437 प्रति किलोग्राम टूटकर करीब ₹2.35 लाख पर आ गया। वहीं सोने की कीमत में भी ₹4,453 की गिरावट दर्ज की गई और 10 ग्राम सोना करीब ₹1.55 लाख के स्तर पर पहुंच गया। सोने-चांदी के दाम में अचानक आई इस नरमी ने बाजार का रुख बदल दिया है। खासकर वे लोग जो लंबे समय से कीमतों में कमी का इंतजार कर रहे थे, उनके लिए आज की गिरावट ध्यान देने वाली है। Silver Price: चांदी में ₹8 हजार से ज्यादा की गिरावट आज चांदी की कीमत में एक ही दिन में बड़ी गिरावट देखने को मिली। Silver Price करीब ₹8,437 नीचे आकर ₹2.35 लाख प्रति किलो के आसपास पहुंच गया। Silver के भाव में पिछले कुछ समय से लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। सात महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो मौजूदा भाव की तुलना में चांदी करीब ₹1.51 लाख प्रति किलोग्राम तक नीचे आ चुकी है। यानी जिस धातु ने कुछ समय पहले निवेशकों का ध्यान खींचा था, उसमें अब काफी बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। Gold Price Today: सोना भी ₹4,453 सस्ता चांदी ही नहीं, Gold Price Today में भी बड़ी गिरावट आई है। सोने का भाव करीब ₹4,453 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1.55 लाख के आसपास पहुंच गया। Gold की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट आम खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शादी या किसी खास मौके के लिए सोना खरीदने वाले परिवार अक्सर कीमतों में थोड़ी नरमी का इंतजार करते हैं। ऐसे में आज का भाव उनकी नजर में जरूर आया होगा। आखिर क्यों गिर रहे हैं सोने-चांदी के दाम? सोने और चांदी की कीमतें केवल स्थानीय बाजार की मांग से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनके भाव, डॉलर की चाल, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और निवेशकों की खरीद-बिक्री जैसे कई कारक कीमतों को प्रभावित करते हैं। खासकर चांदी में औद्योगिक मांग की भी अहम भूमिका होती है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर सेक्टर समेत कई उद्योगों में इसका इस्तेमाल होता है। इसलिए वैश्विक बाजार में मांग और आर्थिक गतिविधियों में बदलाव का असर चांदी के भाव पर जल्दी दिखाई दे सकता है। क्या अभी Gold-Silver खरीदना सही रहेगा? कीमतों में आज की गिरावट देखकर खरीदारों के मन में यह सवाल आना स्वाभाविक है कि क्या अभी सोना-चांदी खरीद लेना चाहिए? अगर खरीदारी आपकी जरूरत के लिए है तो मौजूदा भाव पर बाजार के अलग-अलग विक्रेताओं से रेट की तुलना की जा सकती है। लेकिन केवल एक दिन की गिरावट देखकर जल्दबाजी में निवेश का फैसला करना सही नहीं होगा। कीमती धातुओं के दाम आगे भी ऊपर-नीचे हो सकते हैं। ज्वेलरी खरीदते समय एक बात खास तौर पर ध्यान रखें। बाजार में दिखाई जाने वाली सोने की कीमत के अलावा GST, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क भी बिल में जुड़ते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले अंतिम कीमत जरूर पूछें। आज के Gold-Silver Rate की अहम बातें खरीदारों के लिए राहत या निवेशकों की चिंता? सोने और चांदी में आई आज की गिरावट को कोई खरीदार के लिए मौका मान सकता है, तो किसी निवेशक के लिए यह बाजार में बढ़े उतार-चढ़ाव का संकेत हो सकता है। फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि खरीदारी करने से पहले अपने शहर का ताजा रेट, शुद्धता और सभी चार्ज की जानकारी जरूर जांच लें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Hanuman Ansh

₹2 करोड़ की Hanuman Ansh ने किया कमाल, शानदार Collection के बाद डायरेक्टर हुए भावुक

बॉक्स ऑफिस पर कई बार ऐसी फिल्में आ जाती हैं, जिनकी शुरुआत देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा पाता कि आगे चलकर कहानी इतनी बदल जाएगी। ‘हनुमान अंश’ (Hanuman Ansh) भी कुछ ऐसी ही फिल्म साबित हो रही है। शुरुआत में धीमी रफ्तार से आगे बढ़ी इस फिल्म ने तीसरे हफ्ते के बाद ऐसी छलांग लगाई कि अब इसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। नीम करौली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक विचारों से प्रेरित ‘हनुमान अंश’ को विशाल चतुर्वेदी ने लिखा और डायरेक्ट किया है। करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म की कमाई अब उसके शुरुआती प्रदर्शन से बिल्कुल अलग तस्वीर दिखा रही है। 10 लाख की Opening से शुरू हुआ सफर Hanuman Ansh ने सिनेमाघरों में पहले दिन करीब 10 लाख रुपये की कमाई की थी। पहले दो हफ्तों में भी फिल्म की रफ्तार काफी धीमी रही। यही वजह थी कि शुरुआत में कुछ लोगों ने फिल्म के बॉक्स ऑफिस भविष्य पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। लेकिन फिल्म ने हार नहीं मानी। तीसरे हफ्ते में दर्शकों की संख्या बढ़ने लगी और Word of Mouth ने पूरा खेल बदल दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीसरे हफ्ते में फिल्म ने करीब 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया, जो शुरुआती प्रदर्शन के मुकाबले जबरदस्त उछाल था। 24वें दिन Box Office पर बड़ा उछाल फिल्म की सबसे ज्यादा चर्चा उसके चौथे हफ्ते के प्रदर्शन को लेकर हो रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 24वें दिन ‘हनुमान अंश’ ने करीब ₹12.75 करोड़ का India Net Collection किया और कुल कमाई ₹40 करोड़ के पार पहुंच गई। वहीं कुछ अन्य ट्रेड रिपोर्ट्स में आंकड़े अलग बताए गए हैं, इसलिए अंतिम कलेक्शन में अंतर संभव है। यह उछाल इसलिए भी खास है क्योंकि फिल्म की शुरुआत महज 10 लाख रुपये से हुई थी। यानी कुछ ही हफ्तों में फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर पूरी तरह अपना रंग बदल दिया। डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी हुए Emotional फिल्म की बढ़ती सफलता से डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी भी भावुक नजर आए। उन्होंने शुरुआती दौर को याद करते हुए बताया कि एक समय फिल्म के शो कम होने की स्थिति बन गई थी। लेकिन दर्शकों के रिस्पॉन्स ने हालात बदल दिए। फिल्म को मिल रहे प्यार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शो की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। डायरेक्टर का कहना है कि अभी फिल्म के शोज और बढ़ सकते हैं। कम बजट, लेकिन बड़ा असर ‘हनुमान अंश’ की कहानी सिर्फ कमाई की वजह से चर्चा में नहीं है। फिल्म की खासियत यह है कि इसे बड़े स्टार्स और भारी-भरकम बजट वाली फिल्मों के बीच अपनी अलग जगह बनाने में सफलता मिली है। फिल्म के विषय और आध्यात्मिक कहानी से जुड़े दर्शकों ने इसे पसंद किया। सोशल मीडिया और दर्शकों की आपसी चर्चाओं ने भी फिल्म को धीरे-धीरे ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। यही Word of Mouth फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आया है। ‘हनुमान अंश’ ने बदल दी Box Office की कहानी जिस फिल्म की शुरुआत बेहद मामूली रही, वही अब चौथे हफ्ते में बड़ी फिल्मों को टक्कर देती नजर आ रही है। रिपोर्ट्स में इसे 2026 की चौंकाने वाली Sleeper Hit में गिना जा रहा है। ‘हनुमान अंश’ की कहानी बॉक्स ऑफिस पर एक बात जरूर साबित करती है—हर फिल्म को पहले दिन करोड़ों की Opening की जरूरत नहीं होती। अगर कहानी दर्शकों के दिल तक पहुंच जाए, तो उसका असर देर से सही, लेकिन काफी दूर तक जा सकता है। फिलहाल फिल्म के बढ़ते शोज और दर्शकों की दिलचस्पी ने मेकर्स की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। डायरेक्टर के मुताबिक, सिनेमाघरों में फिल्म का सफर अभी जारी है और आने वाले दिनों में शोज की संख्या और बढ़ सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
E20 Petrol

E20 Petrol पर Supreme Court का फैसला, Ethanol Percentage और पुराने वाहनों पर बढ़ी चिंता

पेट्रोल पंप पर गाड़ी में डाला जा रहा E20 Petrol आखिर कितना Ethanol वाला है? इस सवाल का सीधा जवाब मांगने वाली याचिका पर Supreme Court ने सोमवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपनी शिकायत संबंधित सक्षम अथॉरिटी या क्षेत्राधिकार वाले हाईकोर्ट के सामने रखने की छूट दी है। मामला सिर्फ पेट्रोल पंप पर Ethanol Percentage लिखने तक सीमित नहीं था। याचिका में पुराने वाहनों के लिए E20 Fuel की compatibility, fuel bills पर जानकारी और एक official vehicle-wise database बनाने जैसी कई मांगें भी उठाई गई थीं। ऐसे में इस फैसले के बाद E20 Petrol को लेकर वाहन मालिकों की चिंता एक बार फिर चर्चा में आ गई है। Petrol Pump पर Ethanol Percentage बताने की मांग याचिका दाखिल करने वाले नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने मांग की थी कि देश के सभी पेट्रोल पंपों पर dispensing nozzle के पास पेट्रोल में मौजूद Ethanol की exact percentage साफ तौर पर दिखाई जाए। उनका कहना था कि ग्राहक को यह पता होना चाहिए कि वह जिस fuel के लिए पैसे दे रहा है, उसकी composition क्या है। याचिका में यह भी कहा गया था कि पेट्रोल खरीदने के बाद मिलने वाले bill, invoice या receipt पर भी Ethanol की मात्रा दर्ज होनी चाहिए। इससे वाहन मालिकों को अपने वाहन के लिए fuel को लेकर बेहतर जानकारी मिल सकेगी। E20 Petrol को लेकर क्यों हो रही है चर्चा? E20 का मतलब ऐसे पेट्रोल से है जिसमें करीब 20 प्रतिशत Ethanol blending होती है। भारत में Ethanol blending को बढ़ावा देने की नीति का उद्देश्य imported crude oil पर निर्भरता कम करना और घरेलू biofuel के इस्तेमाल को बढ़ाना है। लेकिन इस बदलाव के बीच सबसे ज्यादा सवाल उन गाड़ियों को लेकर उठ रहे हैं जो E20 standards को ध्यान में रखकर तैयार नहीं की गई थीं। याचिका में पुराने और non-compatible vehicles के लिए अलग transition framework की मांग भी की गई थी। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि हर पुरानी गाड़ी में E20 Petrol डालने से खराबी होगी। किसी वाहन की compatibility उसके model, engine, manufacturing year और manufacturer की specifications पर निर्भर करती है। Vehicle-wise E20 Compatibility Database की मांग याचिका में एक ऐसा official और publicly searchable database बनाने की मांग की गई थी, जिसमें वाहन मालिक अपने वाहन की जानकारी डालकर यह देख सकें कि वह किस ethanol blend के लिए suitable है। इस database में manufacturer, model, engine type और manufacturing year के आधार पर जानकारी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव था। इससे खासकर पुराने वाहन मालिकों को अपने वाहन के लिए fuel compatibility समझने में आसानी हो सकती है। E20 पर Expert Committee बनाने की भी मांग याचिका में E20 के असर का व्यापक अध्ययन करने के लिए एक independent expert committee बनाने की मांग भी की गई थी। प्रस्तावित committee में Petroleum Ministry, Road Transport Ministry, Bureau of Indian Standards और automobile experts को शामिल करने की बात कही गई थी। समिति से vehicle compatibility, fuel efficiency, engine life, maintenance cost, warranty और insurance जैसे मुद्दों का अध्ययन कराने की मांग की गई थी। याचिका में E20 के environmental impact और ethanol production से जुड़े water use तथा food-security जैसे पहलुओं पर भी expert assessment की मांग की गई थी। Supreme Court ने क्या कहा? Supreme Court की जस्टिस एमएम सुंदरैश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने याचिका को Article 32 के तहत entertain करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपनी शिकायत के लिए संबंधित High Court का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता दी। इसका सीधा मतलब यह है कि फिलहाल Supreme Court ने पेट्रोल पंपों पर Ethanol Percentage लिखना अनिवार्य करने का कोई नया आदेश नहीं दिया है। अब आम Vehicle Owners के लिए क्या मायने हैं? इस मामले की सबसे बड़ी बात यह है कि E20 को लेकर बहस अब केवल सरकार की ethanol blending policy तक सीमित नहीं है। मामला consumer awareness और transparency से भी जुड़ गया है। वाहन मालिकों के लिए यह जानना अहम है कि उनके वाहन के लिए manufacturer ने किस ethanol blend को suitable बताया है। वहीं, याचिका ने यह सवाल जरूर सामने ला दिया है कि पेट्रोल खरीदते समय consumer को fuel की composition की स्पष्ट जानकारी कितनी आसानी से मिलनी चाहिए। फिलहाल Supreme Court से इस मामले में कोई mandatory labelling order नहीं आया है। आगे की कार्रवाई के लिए याचिकाकर्ता सक्षम अथॉरिटी या संबंधित High Court का रुख कर सकता है। E20 Petrol पर Supreme Court का यह फैसला भले ही याचिका को आगे नहीं बढ़ाता, लेकिन इसने एक आम सवाल जरूर सामने रख दिया है—जब fuel बदल रहा है, तो क्या consumer को भी उसके बारे में पूरी और साफ जानकारी नहीं मिलनी चाहिए?
RBI

EMI नहीं चुकाई तो क्या होगा? RBI Loan Recovery Rules में बदलाव, जानिए Bank क्या नहीं कर सकता

अगर आपने Personal Loan, Home Loan, Car Loan या किसी अन्य तरह का Loan लिया है और किसी वजह से EMI समय पर नहीं चुका पा रहे हैं, तो आपके लिए RBI के Loan Recovery Rules जानना बेहद जरूरी है। EMI डिफॉल्ट होने पर बैंक या NBFC बकाया रकम की Recovery कर सकता है, लेकिन इसके लिए उसे RBI के नियमों का पालन करना जरूरी है। कई लोग यह मान लेते हैं कि EMI मिस होने के बाद Recovery Agent घर आकर धमका सकता है या किसी भी समय फोन कर सकता है। ऐसा नहीं है। RBI ने Loan Recovery के दौरान ग्राहकों के सम्मान, Privacy और उचित व्यवहार को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं। EMI Miss होने पर सबसे पहले क्या होता है? अगर आपकी EMI तय तारीख पर जमा नहीं होती है, तो बैंक इसे Overdue Payment के रूप में दर्ज कर सकता है। Loan Agreement के मुताबिक बैंक बकाया रकम के साथ लागू ब्याज या अन्य वैध Charges की मांग कर सकता है। अगर EMI लगातार Miss होती रहती है, तो बैंक ग्राहक से संपर्क कर सकता है और बकाया रकम चुकाने के लिए कह सकता है। लंबे समय तक भुगतान न होने पर बैंक अपने नियमों और लागू कानून के अनुसार Recovery Process आगे बढ़ा सकता है। इसलिए RBI के नियमों का मतलब यह नहीं है कि EMI नहीं चुकाने पर बैंक पैसा नहीं मांग सकता। नियम मुख्य रूप से यह तय करते हैं कि Recovery किस तरीके से की जा सकती है। RBI Loan Recovery Rules: Bank आपको कब कॉल कर सकता है? RBI के निर्देशों के अनुसार Overdue Loan की Recovery के लिए ग्राहक से सुबह 8 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद संपर्क नहीं किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि Recovery Agent ग्राहकों को अनुचित समय पर फोन करके परेशान न करें। अगर कोई Recovery Agent लगातार देर रात या सुबह-सुबह कॉल करता है, तो ग्राहक इस मामले की शिकायत संबंधित Bank या NBFC से कर सकता है। Recovery Agent आपको धमका नहीं सकता Loan की Recovery के लिए Bank या NBFC Recovery Agent की मदद ले सकता है, लेकिन Agent को ग्राहक के साथ धमकी, गाली-गलौज, अपमानजनक व्यवहार या मानसिक दबाव बनाने की अनुमति नहीं है। Recovery का उद्देश्य बकाया रकम की वसूली करना है, ग्राहक को डराना या परेशान करना नहीं। RBI ने Regulated Entities को अपने Recovery Agents की गतिविधियों पर उचित निगरानी रखने की जिम्मेदारी भी दी है। परिवार और दोस्तों को भी परेशान नहीं कर सकता Bank अगर आपकी EMI बकाया है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि Recovery Agent आपके परिवार, दोस्तों या परिचितों को परेशान करके आप पर दबाव बनाए। ग्राहक की Privacy और सम्मान का ध्यान रखना जरूरी है। किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना या उसके कर्ज की जानकारी का अनुचित तरीके से इस्तेमाल करना Recovery का स्वीकार्य तरीका नहीं है। क्या Bank घर आकर Recovery कर सकता है? बकाया Loan की Recovery के लिए Bank या उसका अधिकृत Recovery Agent ग्राहक से संपर्क कर सकता है। हालांकि, Recovery करते समय निर्धारित नियमों और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। अगर Loan के बदले कोई Asset जैसे Car, Property या अन्य Security रखी गई है, तो Default की स्थिति में Bank के पास कानून और Loan Agreement के तहत Recovery के अधिकार हो सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि Recovery Agent अपनी मर्जी से जबरन सामान या संपत्ति पर कब्जा कर सकता है। Loan Default होने पर Credit Score पर भी असर पड़ सकता है EMI का लगातार भुगतान न करने का असर केवल Bank Recovery तक सीमित नहीं रहता। Loan Repayment History आपके Credit Profile को प्रभावित कर सकती है। अगर Loan Account में लगातार Default होता है, तो भविष्य में Loan या Credit Card लेने में परेशानी हो सकती है। इसलिए आर्थिक परेशानी होने पर EMI को नजरअंदाज करने के बजाय Bank से समय रहते संपर्क करना बेहतर होता है। Recovery Agent परेशान करे तो क्या करें? अगर कोई Recovery Agent RBI के नियमों का उल्लंघन करता है, तो ग्राहक को सबसे पहले संबंधित Bank या NBFC के Grievance Redressal Mechanism में शिकायत करनी चाहिए। शिकायत करते समय कॉल रिकॉर्ड, SMS, WhatsApp Message, Email या अन्य उपलब्ध सबूत सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। अगर Bank या NBFC से शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो पात्र मामलों में RBI की Ombudsman व्यवस्था के तहत शिकायत की जा सकती है। क्या EMI नहीं भरने पर Bank Loan माफ कर देगा? नहीं। RBI के Recovery Rules का उद्देश्य ग्राहकों को अनुचित Recovery Practices से सुरक्षा देना है। इसका मतलब यह नहीं है कि EMI नहीं भरने पर Loan अपने आप माफ हो जाएगा। Bank अपने Loan Agreement और लागू कानून के अनुसार बकाया रकम की Recovery कर सकता है। लंबे समय तक Default की स्थिति में कानूनी कार्रवाई भी संभव है। EMI भरने में परेशानी हो तो क्या करें? अगर आपको लगता है कि किसी महीने या आने वाले समय में EMI भरना मुश्किल हो सकता है, तो Bank या NBFC से जल्द संपर्क करें। अपनी Financial Situation के बारे में जानकारी देकर उपलब्ध विकल्पों के बारे में पूछें। सबसे जरूरी बात यह है कि Recovery Agent के दबाव में आकर किसी अनजान व्यक्ति के Personal Account में पैसा जमा न करें। Payment हमेशा Bank/NBFC के अधिकृत माध्यम से ही करें। RBI Loan Recovery Rules का सबसे जरूरी सार EMI समय पर नहीं चुकाने पर Bank आपसे बकाया रकम की मांग कर सकता है और नियमों के अनुसार Recovery Process शुरू कर सकता है। लेकिन Recovery के दौरान Bank या उसके Agent को ग्राहक की Privacy और सम्मान का ध्यान रखना होगा। याद रखें: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CNG Price

Delhi CNG Price: CNG के दाम में ₹3.89 की बढ़ोतरी, अब ₹86.98 प्रति किलो मिलेगा गैस

दिल्ली-NCR में CNG इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। CNG Price Hike के तहत इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने CNG की कीमत में ₹3.89 प्रति किलो की बढ़ोतरी की है। नई कीमतें 29 अगस्त 2026 से लागू हो गई हैं। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में CNG का रेट ₹83.09 प्रति किलो से बढ़कर ₹86.98 प्रति किलो हो गया है। यह 2026 में दिल्ली-NCR में CNG की पांचवीं कीमत बढ़ोतरी है। लगातार हो रही बढ़ोतरी से CNG कार चलाने वाले लोगों के साथ-साथ ऑटो, टैक्सी, कैब और कमर्शियल वाहनों के ड्राइवरों पर भी ईंधन खर्च का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। Delhi CNG Price: अब कितना हुआ CNG का रेट? IGL की नई कीमतों के मुताबिक दिल्ली-NCR के अलग-अलग शहरों में CNG के दाम इस प्रकार हैं: दिल्ली में CNG की कीमत में सीधे ₹3.89 प्रति किलो की वृद्धि हुई है। इसका मतलब है कि जो वाहन रोजाना बड़ी मात्रा में CNG की खपत करते हैं, उनके लिए महीने का fuel budget पहले की तुलना में और बढ़ जाएगा। Why CNG Price Increased: क्यों बढ़े CNG के दाम? IGL के अनुसार, CNG की कीमत बढ़ाने की मुख्य वजह imported LNG की बढ़ी हुई लागत है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में LNG की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर गैस की supply और import cost पर पड़ा है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण LNG की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है। इसके चलते global energy market में कीमतों पर दबाव बना हुआ है। IGL ने इसी बढ़ी हुई input cost के एक हिस्से को CNG की कीमतों में शामिल किया है। 2026 में पांचवीं बार महंगी हुई CNG दिल्ली-NCR में वर्ष 2026 के दौरान CNG की कीमतों में यह पांचवीं बढ़ोतरी है। इससे पहले भी इस साल अलग-अलग चरणों में CNG के दाम बढ़ाए गए थे। बार-बार होने वाली price hike के कारण CNG को economical fuel मानकर इस्तेमाल करने वाले वाहन मालिकों की लागत लगातार बढ़ रही है। हालांकि पेट्रोल और डीजल की तुलना में CNG अभी भी कई वाहन चालकों के लिए एक महत्वपूर्ण alternative fuel बनी हुई है। CNG Price Hike का आम लोगों पर क्या असर होगा? CNG की कीमत बढ़ने का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं। निजी CNG कारों के अलावा auto-rickshaw, taxi, cab और commercial vehicles चलाने वालों की operating cost भी बढ़ेगी। ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए बढ़ती fuel cost का सीधा असर उनकी daily earnings पर पड़ सकता है। अगर CNG की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो भविष्य में इसका असर transportation charges और passenger fares पर भी देखने को मिल सकता है। CNG महंगी होने से बढ़ सकता है Monthly Fuel Budget उदाहरण के तौर पर, अगर कोई वाहन प्रतिदिन 5 किलो CNG की खपत करता है, तो ₹3.89 प्रति किलो की अतिरिक्त कीमत के कारण उसका खर्च करीब ₹19.45 प्रतिदिन बढ़ जाएगा। 30 दिनों में यह अतिरिक्त खर्च लगभग ₹584 हो सकता है। जिन commercial vehicles की रोजाना CNG consumption इससे कहीं अधिक है, उनके लिए अतिरिक्त मासिक खर्च भी काफी ज्यादा होगा। आगे CNG के दाम पर क्या रहेगा असर? CNG की कीमतों पर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय LNG prices, global gas supply और पश्चिम एशिया की स्थिति का असर महत्वपूर्ण रहेगा। अगर imported gas की लागत ऊंची बनी रहती है, तो domestic CNG prices पर भी दबाव बना रह सकता है। फिलहाल दिल्ली-NCR के लोगों को 29 अगस्त से CNG के लिए ₹3.89 प्रति किलो ज्यादा भुगतान करना होगा। दिल्ली में नई CNG कीमत ₹86.98 प्रति किलो पहुंच गई है, जबकि नोएडा और गाजियाबाद में यह ₹95.59 प्रति किलो हो गई है। CNG Price Hike 2026 की यह पांचवीं बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब बढ़ती fuel और transportation costs पहले से ही आम लोगों के बजट को प्रभावित कर रही हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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