संपादकीय भारत में “लव जिहाद” बहस तेज—नासिक, भोपाल समेत कई शहरों में सामने आए मामलों का विश्लेषण। क्या कहते हैं कानून, आंकड़े और विशेषज्ञ? पढ़ें पूरा संपादकीय। भारत में पिछले कुछ वर्षों में “लव जिहाद” को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। नासिक, परतवाड़ा, अकोला और भोपाल जैसे शहरों से सामने आए मामलों ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सवाल यह है कि क्या ये घटनाएं अलग-अलग आपराधिक मामले हैं, या इसके पीछे कोई बड़ा पैटर्न है? क्या कहते हैं कानून और सरकार? सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि “लव जिहाद” शब्द भारतीय कानून में परिभाषित नहीं है। केंद्र सरकार ने संसद में कई बार स्पष्ट किया है कि इस नाम से कोई अलग अपराध श्रेणी नहीं है। हालांकि, कई राज्यों ने जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए कानून बनाए हैं: इन कानूनों के लागू होने के बाद दर्ज मामलों में कुछ वृद्धि देखी गई है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बढ़ती जागरूकता और रिपोर्टिंग का असर भी हो सकता है। आंकड़े क्या बताते हैं? यानी, आंकड़े मिश्रित तस्वीर दिखाते हैं—कुछ मामले वास्तविक अपराध के हैं, तो कुछ व्यक्तिगत विवाद या सहमति वाले रिश्तों के। हाईली एजुकेटेड लड़कियां क्यों बनती हैं टारगेट? यह सबसे बड़ा सवाल है। आम धारणा के विपरीत, शिक्षा हमेशा भावनात्मक निर्णयों को नहीं रोकती। विशेषज्ञों के अनुसार: ये सभी कारण किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकते हैं—चाहे वह कितना भी शिक्षित क्यों न हो। क्या हर इंटरफेथ शादी संदिग्ध है? बिल्कुल नहीं। भारत में हजारों अंतर-धार्मिक शादियां हर साल होती हैं, जिनमें से अधिकांश पूरी तरह सहमति और वैध प्रक्रिया के तहत होती हैं। समस्या तब शुरू होती है जब: यहीं पर कानून हस्तक्षेप करता है। क्या यह केवल एक समुदाय का मुद्दा है? इस तरह की घटनाओं को किसी एक धर्म से जोड़ना वास्तविकता को सरल बना देना होगा पर यह भी उतना ही बड़ा सच हैं की अधिकांश घटनाओ में मुस्लिम युवा इसमें संलिप्त पाये गए हैं । दुनिया भर में “रोमांस स्कैम”, “ऑनलाइन ग्रूमिंग” और “इमोशनल एक्सप्लॉइटेशन” के मामले बढ़ रहे हैं—और यह हर समाज में मौजूद समस्या है। समाज और संगठनों की भूमिका “लव जिहाद” की बहस भावनात्मक जरूर है, लेकिन इसका समाधान केवल भावनाओं से नहीं निकलेगा। जरूरत है: हर अंतर-धार्मिक रिश्ते को शक की नजर से देखना गलत है, लेकिन वास्तविक अपराधों को नजरअंदाज करना भी उतना ही खतरनाक हैl
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