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INDIA गठबंधन

Indian Politics: INDIA गठबंधन की रैली के बाद BJP का पलटवार, राहुल गांधी पर लगाए गंभीर आरोप

देश की राजनीति में एक बार फिर बीजेपी और कांग्रेस के बीच टकराव बढ़ गया है। दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की रैली के बाद अब बीजेपी ने भी विपक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें लोकतंत्र के लिए चुनौती बताया है। इसी के साथ पार्टी ने 2 नवंबर को देश के कई शहरों में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ (Loktantra Bachao, Arajakta Hatao) अभियान के तहत पदयात्राएं और विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है। इस अभियान में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, जेपी नड्डा और धर्मेंद्र प्रधान समेत कई बड़े नेता शामिल हो रहे हैं। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस और INDIA गठबंधन चुनाव आयोग के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाकर लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि खराब कर रहे हैं। दूसरी तरफ, राहुल गांधी और विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के नाम पर मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। दिल्ली की रैली के बाद BJP का जवाबी हमला दरअसल, 1 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली आयोजित की थी। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए थे। रैली में नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। विपक्ष का कहना है कि SIR के दौरान मतदाता सूची से करोड़ों नाम हटाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। इससे आम मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष की इसी रैली के अगले दिन बीजेपी ने देशभर में अपना विरोध अभियान शुरू कर दिया। पार्टी इसे ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ नाम दे रही है। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं को निशाना बना रही है। Amit Shah Hyderabad में निकालेंगे BJP का March बीजेपी के इस अभियान में अमित शाह की हैदराबाद पदयात्रा सबसे अहम कार्यक्रमों में शामिल है। केंद्रीय गृह मंत्री 2 नवंबर को हैदराबाद में पार्टी के मार्च का नेतृत्व करेंगे। यह पदयात्रा दोपहर करीब 3 बजे निजाम कॉलेज के सामने डॉ. बाबू जगजीवन राम की प्रतिमा से शुरू होगी। इसके बाद मार्च आबिड्स इलाके से होते हुए शाम करीब 6 बजे मोजमजाही मार्केट पहुंचेगा। तेलंगाना बीजेपी ने इस कार्यक्रम को लेकर तैयारियां की हैं। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष एन. रामचंदर राव भी आयोजन से जुड़ी तैयारियों में सक्रिय रहे हैं। मार्च को देखते हुए हैदराबाद के कुछ प्रमुख इलाकों में ट्रैफिक डायवर्जन की व्यवस्था भी की गई है। Nitin Nabin बिहार और बंगाल में संभालेंगे कमान बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी इस अभियान के तहत बिहार और पश्चिम बंगाल में पदयात्रा करेंगे। बिहार के भागलपुर में सुबह करीब 11 बजे लाजपत पार्क से मार्च शुरू होकर सेवा ज्योति चौक तक जाएगा। इसके बाद वह कोलकाता पहुंचेंगे, जहां दोपहर 3 बजे कॉलेज स्ट्रीट से पदयात्रा निकाली जाएगी। यह मार्च धर्मतला और एस्प्लेनेड की ओर बढ़ेगा। बीजेपी इन कार्यक्रमों के जरिए विपक्ष के वोट चोरी के आरोपों का जवाब देने और अपने पक्ष को जनता तक पहुंचाने की तैयारी में है। हरियाणा में भी BJP ने निकाली पदयात्रा बीजेपी का यह अभियान 1 नवंबर को भी कई शहरों में देखने को मिला। हरियाणा के रोहतक में नितिन नवीन ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मार्च निकाला। वहीं, फरीदाबाद में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पदयात्रा की अगुवाई की। फरीदाबाद में मार्च बीके चौक से शुरू होकर हार्डवेयर चौक तक पहुंचा। इस दौरान केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर समेत कई स्थानीय नेता और पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे। धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर जनता के बीच भ्रम पैदा कर रहा है। 1984 के सिख दंगों को लेकर भी कांग्रेस पर हमला बीजेपी ने INDIA गठबंधन की रैली को लेकर 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा भी उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चंडीगढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर की तारीख सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के लिए बेहद संवेदनशील है। ऐसे दिन रैली आयोजित करने को लेकर उन्होंने कांग्रेस से सवाल किए। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन और जेपी नड्डा ने भी कांग्रेस पर इस मामले में संवेदनशीलता नहीं दिखाने का आरोप लगाया। हालांकि, विपक्ष की रैली का मुख्य एजेंडा SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली था। Sambit Patra ने राहुल गांधी और INDIA गठबंधन पर साधा निशाना बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष की रैली पर सवाल उठाए। उन्होंने रैली में जुटी भीड़ और कांग्रेस के दावों को लेकर अपनी आपत्ति जताई। बीजेपी नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाकर जनता के बीच अविश्वास पैदा कर रहे हैं। वहीं, राहुल गांधी ने INDIA गठबंधन की रैली में चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा कि चुनाव में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा जरूरी है। 30 नवंबर तक चलेगा BJP का अभियान बीजेपी ने अपने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान को अलग-अलग चरणों में चलाने की योजना बनाई है। पार्टी के कार्यक्रम के अनुसार, पहला चरण 5 नवंबर तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण 11 नवंबर से 30 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश में भी कई बड़े नेताओं को पदयात्राओं की जिम्मेदारी दी गई है। 3 नवंबर को शिवराज सिंह चौहान और जेपी नड्डा अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यक्रम करेंगे। 4 नवंबर को नितिन नवीन, केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। वहीं, 5 नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गाजियाबाद में पदयात्रा करेंगे। हरियाणा के करनाल में भी 5 नवंबर को अमित शाह के शामिल होने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। क्या है SIR विवाद, जिस पर आमने-सामने हैं BJP और कांग्रेस? इस पूरे राजनीतिक विवाद की सबसे बड़ी वजह चुनाव आयोग की Special Intensive...
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इंदौर में RSS की तीन दिवसीय बैठक शुरू, मोहन भागवत समेत 408 पदाधिकारी संगठन के विस्तार पर करेंगे मंथन

इंदौर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की तीन दिवसीय बैठक सोमवार को डेली कॉलेज में शुरू हो गई। बैठक में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और सभी छह सह सरकार्यवाह सहित देशभर के करीब 408 प्रमुख पदाधिकारी शामिल हुए हैं। 4 नवंबर तक चलने वाली इस बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा की जाएगी। साथ ही संगठन विस्तार और आगामी कार्ययोजना पर चर्चा होगी। संघ के मुताबिक, पिछले एक साल में देशभर में 13 हजार से अधिक नई दैनिक शाखाएं शुरू हुई हैं और 65 हजार से ज्यादा हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए हैं। 1.01 लाख से ज्यादा दैनिक शाखाएं अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि बैठक में संघ के 11 क्षेत्र और 46 प्रांतों से संघचालक, सह संघचालक, कार्यवाह, सह कार्यवाह, प्रचारक और सह प्रचारक शामिल हुए हैं। अंतिम दिन विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी और आंकड़े साझा किए जाएंगे। आंबेकर के अनुसार, देशभर में संघ की दैनिक शाखाओं की संख्या बढ़कर 1 लाख 1 हजार 151 हो गई है। साप्ताहिक और मासिक मिलन को मिलाकर संघ का काम अब 1 लाख 10 हजार 849 स्थानों तक पहुंच गया है। पिछले साल अक्टूबर की तुलना में शताब्दी वर्ष के दौरान 13 हजार से अधिक नई दैनिक शाखाएं जुड़ी हैं। बैठक में शाखाओं के साथ साप्ताहिक और मासिक मिलन की गतिविधियों को मजबूत करने पर भी चर्चा होगी। देशभर में 65,660 हिंदू सम्मेलन आयोजित शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर में 65 हजार 660 हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया। सुनील आंबेकर के मुताबिक, शहरों में बस्ती स्तर पर और ग्रामीण क्षेत्रों में आठ-दस गांवों को मिलाकर बनाए गए मंडल स्तर पर सम्मेलन हुए। कई जगह दो-तीन मंडलों को मिलाकर भी आयोजन किए गए। उन्होंने बताया कि इन सम्मेलनों में कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा और समाज की ओर से समर्थन मिला। कई लोगों ने संघ की शाखाओं से जुड़ने की इच्छा जताई। सामाजिक संस्थाओं और संगठनों ने भी अपने कार्यक्रमों में स्वयंसेवकों के अनुभवों का सहयोग लेने की इच्छा व्यक्त की है। बैठक में इन आयोजनों से मिले अनुभवों और सामाजिक सहभागिता की समीक्षा होगी। महिलाओं और युवाओं को जोड़ने पर चर्चा शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी भी रही। अब इस अनुभव के आधार पर महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए नए कार्यक्रमों और उपक्रमों पर विचार किया जाएगा। युवाओं को जोड़ने के लिए शहरों, गांवों और कॉलेज परिसरों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और अन्य युवाओं ने हिस्सा लिया। बैठक में इन प्रयासों को आगे बढ़ाने की योजनाओं पर चर्चा होगी। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान संघ की पिछली दो-तीन बैठकों में नशीली दवाओं के बढ़ते चलन पर चिंता जताई गई थी। इस बार भी यह विषय बैठक के एजेंडे में शामिल है। आंबेकर ने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर प्रयास जरूरी हैं। युवाओं को नशीली दवाओं से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर विचार होगा। इसके लिए सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं के माध्यम से काम करने की योजना बनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि पिछली समन्वय बैठक में संघ से प्रेरित विभिन्न संगठनों ने भी अपने क्षेत्रों में नशे के खिलाफ अभियान शुरू करने की जानकारी दी थी। पंच परिवर्तन के पांच विषयों पर बनेगी कार्ययोजना शताब्दी वर्ष में संघ ने पंच परिवर्तन के पांच विषय समाज के सामने रखे हैं। इनमें सामाजिक समरसता, पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली, कुटुंब प्रबोधन, स्व का भाव और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं। इन विषयों को समाज तक पहुंचाने के लिए गृह संपर्क अभियान, सम्मेलन और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। बैठक में इन पांचों विषयों के आधार पर आगे की कार्ययोजना बनाई जाएगी। अलग-अलग प्रांतों के पदाधिकारी अपने क्षेत्रों में हुए कार्यों और आगामी योजनाओं की जानकारी देंगे। सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर नए अभियान चलाने पर भी विचार होगा। सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर जन-जागरण की तैयारी बैठक में सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर जन-जागरण को लेकर भी चर्चा होगी। सुनील आंबेकर के मुताबिक, संघ का प्रयास रहेगा कि समाज के सभी वर्गों तक तथ्यात्मक जानकारी सही परिप्रेक्ष्य में पहुंचे। इसके लिए उचित दृष्टिकोण और जानकारी लोगों तक पहुंचाने के तरीकों पर विचार किया जाएगा।
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Rajasthan

Rajasthan Accident: झुंझुनूं में बड़ा हादसा, हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से 8 मजदूरों की मौत

राजस्थान (Rajasthan) के झुंझुनूं जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। उदयपुरवाटी क्षेत्र के छापोली गांव में सड़क निर्माण के दौरान हुए हादसे में 8 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए। बताया जा रहा है कि सड़क बनाने के काम में लगी एक मशीन अचानक 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइन के संपर्क में आ गई। मशीन में करंट फैलते ही आसपास काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए। हादसा इतना अचानक हुआ कि वहां मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। जिन परिवारों के सदस्य रोजी-रोटी कमाने के लिए काम पर निकले थे, उनके घरों में मातम छा गया। वहीं, घटना से नाराज ग्रामीणों ने मौके पर धरना शुरू कर दिया और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। Jhunjhunu Accident: सड़क निर्माण के दौरान कैसे हुआ हादसा? जानकारी के मुताबिक, झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी क्षेत्र के छापोली गांव में कदम कुंड की ओर जाने वाली सड़क का निर्माण कार्य चल रहा था। सोमवार को भी मजदूर सड़क बनाने के काम में जुटे हुए थे। इसी दौरान निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली रोड़ी और बजरी मिलाने की मशीन ऊपर से गुजर रही 11 KV हाईटेंशन बिजली लाइन के संपर्क में आ गई। बिजली के तार से संपर्क होते ही मशीन में करंट फैल गया। आसपास काम कर रहे मजदूर भी इसकी चपेट में आ गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोग मदद के लिए पहुंचे। शुरुआती खबरों में पांच मजदूरों की मौत और तीन लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, बाद की रिपोर्ट में मृतकों की संख्या बढ़कर आठ बताई गई। घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट्स में भी अंतर सामने आया है। 8 मजदूरों की मौत से गांव में पसरा मातम इस हादसे में आठ मजदूरों की जान चली गई। वहीं, करंट की चपेट में आए अन्य लोगों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। एक साथ इतने मजदूरों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। स्थानीय लोगों के बीच घटना को लेकर गहरा दुख और नाराजगी है। फिलहाल घायलों के इलाज और मृतकों के परिवारों को मिलने वाली सहायता पर सबकी नजर बनी हुई है। ग्रामीणों का गुस्सा, धरने पर बैठे लोग हादसे के बाद छापोली गांव के ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए धरना शुरू कर दिया। लोगों का कहना है कि जब निर्माण स्थल के ऊपर से हाईटेंशन बिजली लाइन गुजर रही थी, तो वहां मशीन से काम कराने से पहले सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए? ग्रामीणों के बीच इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि आखिर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही कैसे हुई। लोग चाहते हैं कि घटना की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। CM भजनलाल शर्मा ने लिया हादसे का संज्ञान झुंझुनूं में हुए इस दर्दनाक हादसे के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी घटना पर दुख जताया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को घायलों के बेहतर इलाज और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री की ओर से घटना की जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात भी सामने आई है। अब प्रशासनिक जांच के जरिए हादसे की असली वजह और जिम्मेदारी तय होने का इंतजार है। अशोक गहलोत ने उठाई जांच और मुआवजे की मांग राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी हादसे पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने घटना की जांच कराने और मृतक मजदूरों के परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग उठाई। गहलोत का कहना है कि इस तरह की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में निर्माण कार्यों के दौरान मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। Construction Safety पर फिर उठे सवाल झुंझुनूं का यह हादसा एक बार फिर निर्माण स्थलों पर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। सड़क, पुल और अन्य निर्माण कार्यों के दौरान कई बार मजदूरों को बिजली की हाईटेंशन लाइनों के आसपास काम करना पड़ता है। ऐसे में सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद जरूरी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि छापोली गांव में सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए थे और मशीन हाईटेंशन लाइन के संपर्क में कैसे आई? प्रशासन की जांच से ही इन सवालों के जवाब सामने आ सकेंगे। फिलहाल आठ मजदूरों की मौत से गांव में शोक का माहौल है। ग्रामीण धरने पर बैठे हैं और पीड़ित परिवारों को न्याय तथा उचित सहायता मिलने का इंतजार कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Omar Abdullah

Omar Abdullah Government: मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज 25 विधायक, समर्थन वापसी की दी चेतावनी

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में इन दिनों कुछ भी सामान्य नहीं चल रहा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) की अपनी ही पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के करीब 25 विधायक मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने और सरकार के कामकाज से नाराज बताए जा रहे हैं। इन विधायकों ने पार्टी नेतृत्व को 14 दिन का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि अगर इस दौरान मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे सरकार से समर्थन वापस लेने का कदम उठा सकते हैं। इस घटनाक्रम ने जम्मू-कश्मीर की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। एक तरफ विधायकों की नाराजगी है तो दूसरी तरफ सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का पार्टी नेतृत्व से मतभेद भी सामने आया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या उमर अब्दुल्ला अपनी ही पार्टी के भीतर उठ रहे विरोध को शांत कर पाएंगे? 25 विधायकों की नाराजगी, 14 दिन में फैसला लेने की मांग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेशनल कॉन्फ्रेंस के असंतुष्ट विधायकों ने बैठक कर पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी नाराजगी रखी। बताया जा रहा है कि इस समूह में करीब 25 विधायक शामिल हैं। इनमें से कुछ विधायक बैठक में व्यक्तिगत रूप से पहुंचे, जबकि अन्य ने ऑनलाइन अपनी बात रखी। विधायकों की शिकायत है कि सरकार में महत्वपूर्ण फैसले लेने के दौरान सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को बराबर महत्व नहीं दिया जा रहा है। उनका मानना है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों को सरकार के कामकाज में ज्यादा भागीदारी मिलनी चाहिए। इसी नाराजगी के बीच विधायकों ने नेतृत्व को 14 दिन का समय दिया है। मांगें पूरी नहीं होने पर राजभवन जाकर समर्थन वापसी की चेतावनी दी गई है। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। Cabinet Expansion के बाद क्यों बिगड़ा मामला? दरअसल, 27 अक्टूबर को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंत्रिमंडल का विस्तार किया था। इस दौरान चार नए चेहरों को कैबिनेट में जगह मिली। इनमें अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी शामिल हैं। कैबिनेट विस्तार के बाद कई विधायकों को उम्मीद थी कि उन्हें भी मंत्री पद या सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलेगी। लेकिन ऐसा नहीं होने से पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ने की खबरें सामने आने लगीं। नए मंत्रियों को विभागों की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद भी विवाद थमा नहीं। नाराज विधायकों का मानना है कि मंत्रिमंडल के गठन और विभागों के बंटवारे में सभी विधायकों से पर्याप्त चर्चा नहीं की गई। नाराज विधायकों ने रखीं ये बड़ी मांगें असंतुष्ट विधायकों की मांग सिर्फ मंत्री पद तक सीमित नहीं बताई जा रही है। वे सरकार और पार्टी के कामकाज में बड़े बदलाव चाहते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी प्रमुख मांगें हैं: इन मांगों पर पार्टी नेतृत्व क्या फैसला लेता है, इस पर अब सबकी नजर है। Aga Syed Ruhullah के रुख से भी बढ़ी मुश्किल नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए परेशानी का एक और कारण श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का पार्टी नेतृत्व से मतभेद है। उन्होंने पार्टी की कार्यशैली और चुनाव के दौरान किए गए वादों को लेकर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट्स में उनके 3 नवंबर को पार्टी और लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देने के ऐलान का भी जिक्र है। उनका विरोध मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक मुद्दों और अनुच्छेद 370 की बहाली को लेकर पार्टी के रुख से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि, इस्तीफे के ऐलान और उसके औपचारिक रूप से स्वीकार होने की स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है। इस घटनाक्रम ने पार्टी के अंदर चल रही खींचतान को और चर्चा में ला दिया है। Jammu Kashmir Assembly में क्या है बहुमत का गणित? जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 90 निर्वाचित सीटें हैं। 2024 के विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 42 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को 6 सीटें मिली थीं। इसके अलावा कुछ निर्दलीय विधायकों ने भी सरकार को समर्थन दिया था। अगर 25 विधायक वास्तव में सरकार से समर्थन वापस लेने के फैसले पर कायम रहते हैं तो उमर अब्दुल्ला सरकार के सामने बहुमत का सवाल खड़ा हो सकता है। हालांकि, फिलहाल इसे सरकार गिरने की स्थिति नहीं कहा जा सकता। इसके लिए विधायकों का औपचारिक फैसला, विधानसभा में सदस्यों की प्रभावी संख्या और बहुमत की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। अब उमर अब्दुल्ला क्या करेंगे? इस पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के सामने पार्टी को एकजुट रखने की चुनौती है। नाराज विधायकों को मनाना, कैबिनेट विस्तार पर उठे सवालों का जवाब देना और पार्टी के चुनावी वादों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करना नेतृत्व के लिए अहम होगा। फिलहाल 14 दिन का अल्टीमेटम इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बना हुआ है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व बातचीत से मामला सुलझाता है या फिर जम्मू-कश्मीर की राजनीति में समर्थन वापसी को लेकर कोई नया मोड़ आता है। आने वाले दिनों में नेशनल कॉन्फ्रेंस का फैसला न सिर्फ उमर अब्दुल्ला सरकार बल्कि जम्मू-कश्मीर की राजनीति की दिशा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अमित शाह

Maharashtra Politics: अमित शाह से मिले NCP के 6 बड़े नेता, सुनेत्रा पवार के लिए Finance Ministry की मांग

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल देखने को मिल रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के छह वरिष्ठ नेताओं ने सोमवार, 2 नवंबर को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद सबसे ज्यादा चर्चा महाराष्ट्र सरकार के वित्त मंत्रालय को लेकर हो रही है। बताया जा रहा है कि NCP चाहती है कि अजित पवार के पास रहा Finance Ministry का विभाग अब पार्टी को वापस मिल जाए। खास बात यह है कि इस बैठक में NCP की राष्ट्रीय अध्यक्ष और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार तथा पार्थ पवार शामिल नहीं हुए। ऐसे में अमित शाह के साथ पार्टी के छह बड़े नेताओं की इस मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। Amit Shah से मिलने पहुंचे NCP के 6 बड़े नेता मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमित शाह से मुलाकात करने वाले NCP नेताओं में सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, धनंजय मुंडे, हसन मुश्रीफ और दिलीप वळसे पाटिल शामिल थे। बताया जा रहा है कि बैठक में महाराष्ट्र सरकार में वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी NCP को वापस देने का मुद्दा उठाया गया। हालांकि, अमित शाह के साथ बातचीत में क्या सहमति बनी और इस पर केंद्र की ओर से क्या रुख अपनाया गया, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। Ajit Pawar के निधन के बाद Devendra Fadnavis संभाल रहे Finance Ministry दरअसल, जनवरी 2026 में महाराष्ट्र के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी अपने पास रख ली थी। अजित पवार महायुति सरकार में वित्त मंत्री थे। उनके पास यह विभाग होने के कारण NCP की ओर से इसे पार्टी का महत्वपूर्ण विभाग माना जाता रहा है। अब पार्टी चाहती है कि वित्त मंत्रालय फिर से उसके हिस्से में आए और सुनेत्रा पवार को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जाए। वित्त मंत्रालय राज्य के बजट, सरकारी योजनाओं, विकास कार्यों और फंड आवंटन से जुड़े फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही वजह है कि इस विभाग को लेकर NCP लगातार अपनी मांग उठा रही है। सुनेत्रा पवार पहले भी कर चुकी हैं फडणवीस से मुलाकात वित्त मंत्रालय को लेकर NCP की मांग पहले भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने रखी जा चुकी है। 25 अक्टूबर को सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री से उनके सरकारी आवास वर्षा में मुलाकात की थी। इस बैठक में छगन भुजबल, हसन मुश्रीफ और धनंजय मुंडे समेत कई नेता मौजूद थे। मुलाकात के बाद छगन भुजबल ने बताया था कि मुख्यमंत्री ने मांग पर सकारात्मक रुख दिखाया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि राज्य की आर्थिक स्थिति, सूखा राहत, किसानों की मदद और कर्जमाफी जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया जाएगा। NCP को उम्मीद थी कि शीतकालीन सत्र से पहले इस मामले में कोई रास्ता निकल सकता है। सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार की गैरमौजूदगी ने बढ़ाई चर्चा अमित शाह के साथ हुई बैठक में सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार की गैरमौजूदगी भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। पार्टी के छह वरिष्ठ नेताओं का सीधे दिल्ली पहुंचकर गृह मंत्री से मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि, बैठक में दोनों नेताओं के शामिल नहीं होने का मतलब पार्टी में मतभेद होना नहीं है। सुनेत्रा पवार पहले भी NCP में अंदरूनी कलह की खबरों को खारिज कर चुकी हैं। फिलहाल इस मुलाकात को वित्त मंत्रालय की मांग के संदर्भ में देखा जा रहा है। NCP के सामने चुनावी और संगठनात्मक चुनौतियां भी महाराष्ट्र में NCP को हाल के दिनों में कुछ राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। विधान परिषद चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार सतीश चव्हाण को छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से हार मिली थी। इसके बाद पार्टी की चुनावी रणनीति और संगठन को लेकर भी चर्चा शुरू हुई। 31 अक्टूबर को सुनेत्रा पवार ने पार्टी में मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए कहा था कि राजनीति में जीत और हार होती रहती है। हार के बाद आत्ममंथन करना जरूरी है। NCP विलय और Cabinet Expansion पर भी नजर महाराष्ट्र की राजनीति में NCP के दोनों गुटों के संभावित विलय और मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि, छगन भुजबल ने दोनों गुटों के विलय की खबरों को खारिज किया था। वहीं, महायुति सरकार में NCP के कोटे से खाली मंत्री पद को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। ऐसे में वित्त मंत्रालय की मांग के साथ-साथ पार्टी के सामने संगठन और सरकार में अपनी भूमिका को लेकर कई अहम मुद्दे हैं। Maharashtra Politics में अब आगे क्या होगा? अमित शाह से NCP के छह वरिष्ठ नेताओं की मुलाकात के बाद अब सबकी नजर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अगले कदम पर है। पार्टी चाहती है कि वित्त मंत्रालय दोबारा उसके पास आए और सुनेत्रा पवार को यह जिम्मेदारी मिले। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि महायुति सरकार में विभागों के बंटवारे को लेकर क्या फैसला लिया जाता है और NCP की मांग को कितनी प्राथमिकता मिलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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सागर में बटनदार चाकू लेकर घूम रहा युवक गिरफ्तार, पहले से दर्ज हैं 3 आपराधिक मामले

सागर। गोपालगंज थाना पुलिस ने अवैध रूप से धारदार चाकू लेकर घूम रहे 20 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी तिली बाघराज वार्ड क्षेत्र में चाकू लेकर घूम रहा था और दहशत फैलाने की फिराक में था। सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने एकीकृत शासकीय माध्यमिक शाला के पास घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान करन पिता लोकमन पटेल (20), निवासी तिली वार्ड के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके पास से लोहे का बटनदार धारदार चाकू बरामद किया है। पुलिस को देखकर भागने लगा आरोपी पुलिस के अनुसार, मुखबिर से सूचना मिली थी कि तिली बाघराज वार्ड में एक व्यक्ति अवैध धारदार चाकू लेकर घूम रहा है। सूचना पर पुलिस टीम एकीकृत शासकीय माध्यमिक शाला के पास पहुंची। पुलिस को देखकर संदिग्ध व्यक्ति भागने लगा। टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम करन पटेल बताया। जींस की जेब से मिला बटनदार चाकू पुलिस ने आरोपी की तलाशी ली तो उसकी जींस की दाहिनी जेब से लोहे का बटनदार धारदार चाकू मिला। पुलिस ने चाकू जब्त कर आरोपी को गिरफ्तार कर थाने ले आई। गोपालगंज थाना प्रभारी घनश्याम शर्मा ने बताया कि आरोपी को चाकू के साथ गिरफ्तार किया गया है। उसके खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पहले से दर्ज हैं 3 आपराधिक प्रकरण पुलिस के मुताबिक, आरोपी करन पटेल के खिलाफ गोपालगंज और सिविल लाइन थानों में पहले से तीन आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। पुलिस अब मामले में आगे की जांच कर रही है।
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Sensex-Nifty Today: निवेशकों की हुई चांदी, सेंसेक्स 75,000 के पार; बैंकिंग और Auto Stocks में खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 2 नवंबर को हफ्ते की शुरुआत शानदार रही। सुबह से ही बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला और Sensex करीब 1,000 अंक उछलकर 75,000 के पार पहुंच गया। वहीं Nifty 50 ने भी 23,300 का अहम स्तर पार कर लिया। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों की संपत्ति में कुछ ही समय में लाखों करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। इस तेजी के पीछे Reliance Industries के मजबूत तिमाही नतीजे, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जैसे बड़े कारण रहे। इसके अलावा ऑटो, बैंकिंग, मेटल और Oil & Gas सेक्टर के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। Sensex-Nifty Today: बाजार में 1% से ज्यादा की तेजी सोमवार सुबह कारोबार शुरू होते ही Sensex और Nifty में तेजी दिखाई देने लगी। सुबह करीब 11:16 बजे BSE Sensex 1,006.58 अंक यानी 1.35% की बढ़त के साथ 75,466.11 पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान इसने 75,557.06 का ऊपरी स्तर भी छुआ। वहीं NSE Nifty 50 करीब 284.60 अंक यानी 1.23% चढ़कर 23,337.70 पर पहुंच गया। कारोबारी सत्र में Nifty ने 23,360.50 का स्तर भी छुआ। बाजार में तेजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि BSE पर बढ़त दर्ज करने वाले शेयरों की संख्या गिरावट वाले शेयरों से काफी ज्यादा रही। शुरुआती कारोबार में 2,730 शेयर हरे निशान में थे, जबकि 1,299 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की संपत्ति में लाखों करोड़ रुपये का इजाफा शेयर बाजार में आई तेजी का सीधा फायदा निवेशकों को मिला। BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप बढ़कर करीब 480.76 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। कारोबार के शुरुआती एक घंटे में ही निवेशकों की संपत्ति में लगभग 5.42 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। बाजार में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। Reliance के शेयरों में 6-8% तक उछाल सोमवार की तेजी में Reliance Industries सबसे ज्यादा चर्चा में रही। कंपनी के सितंबर तिमाही के शानदार नतीजों के बाद शेयरों में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। Reliance का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सितंबर तिमाही में करीब 29,550 करोड़ रुपये रहा। वहीं कंपनी के मालिकों के हिस्से का नेट प्रॉफिट करीब 25,548 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। मजबूत नतीजों के बाद Reliance के शेयरों में कारोबार के दौरान करीब 6-8% तक की तेजी देखने को मिली। कंपनी के शेयरों में आई इस बढ़त ने Sensex और Nifty दोनों को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई। बाजार में तेजी के 5 बड़े कारण 1. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारतीय शेयर बाजार के लिए राहत लेकर आई। Brent Crude की कीमत शुक्रवार को करीब 118 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, लेकिन सोमवार को यह गिरकर लगभग 110-111 डॉलर के आसपास आ गई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने और अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद से तेल की कीमतों में गिरावट आई। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, इसलिए कीमतों में नरमी से अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है। 2. विदेशी निवेशकों की खरीदारी विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की खरीदारी से भी बाजार को मजबूती मिली। शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 3,598.54 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। विदेशी निवेशकों की यह वापसी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। 3. एशियाई बाजारों में मजबूती सोमवार को जापान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया समेत कई एशियाई बाजारों में बढ़त देखने को मिली। इसका असर भारतीय बाजार के सेंटीमेंट पर भी पड़ा और निवेशकों ने खरीदारी में दिलचस्पी दिखाई। 4. कंपनियों के मजबूत Quarterly Results सितंबर तिमाही के नतीजों का सीजन बाजार के लिए अहम बना हुआ है। Reliance Industries समेत कई बड़ी कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। सोमवार को भी करीब 203 कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजे आने वाले थे। इनमें ITC, Marico, National Aluminium Company और UPL जैसी कंपनियां शामिल थीं। 5. बैंकिंग और मेटल शेयरों में खरीदारी बैंकिंग, मेटल और Oil & Gas सेक्टर में खरीदारी ने बाजार को अतिरिक्त मजबूती दी। ऑटो कंपनियों के शेयरों में भी तेजी रही। इससे बाजार की बढ़त को व्यापक समर्थन मिला। इन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा तेजी सोमवार को कारोबार के दौरान कई कंपनियों के शेयर निवेशकों के रडार पर रहे। दूसरी तरफ Sun Pharma, Trent, Titan और कुछ IT शेयरों में दबाव देखने को मिला। आगे कहां जा सकता है Nifty? मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, Nifty के लिए 23,300 का स्तर अहम बना हुआ है। अगर इंडेक्स इस स्तर के ऊपर मजबूती बनाए रखता है तो 23,500 का स्तर अगला महत्वपूर्ण पड़ाव हो सकता है। वहीं गिरावट की स्थिति में 23,000 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है। बाजार की आगे की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर निर्भर करेगी। निवेशकों के लिए क्या है जरूरी बात? सोमवार की तेजी ने बाजार में सकारात्मक माहौल जरूर बनाया है, लेकिन निवेशकों को यह समझना होगा कि शेयर बाजार में हर दिन एक जैसा प्रदर्शन नहीं रहता। अंतरराष्ट्रीय तनाव, महंगाई और कंपनियों के नतीजे बाजार में उतार-चढ़ाव ला सकते हैं। इसलिए केवल बाजार की तेजी देखकर निवेश का फैसला करने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल और जोखिम को समझना जरूरी है। कुल मिलाकर, नवंबर की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए मजबूत रही। Reliance की तेजी, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को नई रफ्तार दी है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि Sensex और Nifty आने वाले कारोबारी दिनों में इस बढ़त को बरकरार रख पाते हैं या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

हरमनप्रीत की हैट्रिक से भारत ने मलेशिया को 4-2 से हराया, एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में पहुंचा

जालंधर। भारतीय हॉकी टीम ने एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए मलेशिया को 4-2 से हरा दिया। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने शानदार हैट्रिक लगाई। उन्होंने तीन पेनल्टी कॉर्नर पर गोल दागे। मुकाबला जालंधर के ओलिंपियन सुरजीत सिंह स्टेडियम में खेला गया। इस जीत के साथ भारत ने टूर्नामेंट में अपना अजेय अभियान बरकरार रखा है। टीम अपने चारों मुकाबले जीतकर पॉइंट्स टेबल में पहले स्थान पर है। भारत के अलावा मलेशिया, जापान और साउथ कोरिया ने भी सेमीफाइनल में जगह बना ली है। हरमनप्रीत ने तीसरे मिनट में दिलाई बढ़त कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने मैच के तीसरे मिनट में पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर भारत को 1-0 की बढ़त दिलाई। हालांकि, मलेशिया ने भी कड़ी चुनौती दी और हाफ टाइम तक स्कोर 1-1 कर दिया। दूसरे हाफ में भारतीय टीम ने फिर आक्रामक खेल दिखाया। हरमनप्रीत ने 33वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर पर अपना दूसरा गोल किया। इसके बाद सुखजीत सिंह ने 43वें मिनट में गोल कर भारत की बढ़त 3-1 कर दी। मैच के 58वें मिनट में हरमनप्रीत ने पेनल्टी स्ट्रोक पर गोल दागकर अपनी हैट्रिक पूरी की। मलेशिया के शेलो सिल्वरियस ने आखिरी मिनट में गोल किया, लेकिन तब तक भारत की जीत तय हो चुकी थी। मलेशिया ने दी कड़ी चुनौती भारत और मलेशिया इससे पहले एशियन गेम्स के फाइनल में भी आमने-सामने थे। इस मुकाबले में मलेशियाई टीम ने मजबूत डिफेंस दिखाया और भारतीय खिलाड़ियों के पासिंग मूव्स को रोकने की कोशिश की। भारतीय कोच क्रेग फुल्टन और कप्तान हरमनप्रीत ने भी माना कि टीम को मिले मौकों का बेहतर इस्तेमाल करना होगा। जापान और कोरिया ने भी बनाई सेमीफाइनल में जगह रविवार को खेले गए मुकाबलों के बाद सेमीफाइनल में पहुंचने वाली चारों टीमें तय हो गईं। कोरिया ने बांग्लादेश को 5-0 से हराया, जबकि जापान और चीन के बीच मुकाबला 2-2 से ड्रॉ रहा। इस तरह भारत, मलेशिया, जापान और साउथ कोरिया ने अंतिम चार में जगह बनाई है।

भारत की सीरीज जीत पर गंभीर बोले- मेरी डिक्शनरी में डर शब्द नहीं, न्यूजीलैंड ने आखिरी दो मैच जीते

नई दिल्ली। भारत ने न्यूजीलैंड को पांच मैचों की टी-20 सीरीज में 3-2 से हराकर सीरीज अपने नाम कर ली। जीत के बाद भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन और मानसिक मजबूती की तारीफ की। उन्होंने कहा, “मेरी डिक्शनरी और डायरेक्टरी में डर नाम का कोई शब्द नहीं है।” गंभीर ने सीरीज के पहले मुकाबले का उदाहरण देते हुए बताया कि भारतीय टीम ने 15 घंटे की लंबी फ्लाइट के बाद केवल एक अभ्यास सत्र किया था। इसके बावजूद खिलाड़ियों ने मैदान पर उतरकर जीत हासिल की। वहीं, भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने माना कि गेंदबाजी और फील्डिंग में सुधार की गुंजाइश है। न्यूजीलैंड के ग्लेन फिलिप्स को सीरीज का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया। उन्होंने पांच मैचों में कुल 341 रन बनाए। थकान के बावजूद टीम ने हासिल की जीत गौतम गंभीर ने कहा कि विदेशी परिस्थितियों में खेलते समय टीम को मुश्किल हालात से घबराना नहीं चाहिए। न्यूजीलैंड पहुंचने के बाद खिलाड़ियों को लंबी यात्रा और अभ्यास के लिए कम समय मिला था। इसके बावजूद पहले मैच में जीत हासिल करना टीम की मानसिक मजबूती को दर्शाता है। सीरीज के शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर भारत ने बढ़त बना ली थी। हालांकि, न्यूजीलैंड ने वापसी करते हुए आखिरी दोनों मैच अपने नाम किए। इस तरह भारत ने सीरीज 3-2 से जीती। ध्यान अब वनडे सीरीज पर : अय्यर भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा कि न्यूजीलैंड में खेलते समय खिलाड़ियों को अलग तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने आसमान में तेज रोशनी और मैदान पर अंधेरे जैसी स्थिति का जिक्र किया। उनके मुताबिक, ऐसी परिस्थितियां भारत में आमतौर पर देखने को नहीं मिलतीं। अय्यर ने यह भी माना कि टीम की गेंदबाजी और फील्डिंग में सुधार की जरूरत है। अब भारतीय टीम का ध्यान आगामी वनडे सीरीज पर है। ऋषभ पंत की चोट पर गंभीर के पास अपडेट नहीं प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गौतम गंभीर से विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत की उपलब्धता को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि फिलहाल उनके पास पंत की चोट को लेकर कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। सीरीज का नतीजा न्यूजीलैंड के पक्ष में भी हो सकता था : सैंटनर न्यूजीलैंड के कप्तान मिचेल सैंटनर ने माना कि पांच मैचों की सीरीज काफी करीबी रही। उनके मुताबिक, शुरुआती दो मुकाबलों में न्यूजीलैंड के पास कुछ मौके थे, जिन्हें टीम भुना नहीं सकी। अगर उन मौकों पर बेहतर प्रदर्शन होता तो सीरीज का नतीजा न्यूजीलैंड के पक्ष में भी जा सकता था। सैंटनर ने आखिरी दो मैचों में गेंदबाजों के प्रदर्शन की तारीफ की। उन्होंने बताया कि गेंदबाजों ने परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति बदली और यॉर्कर, वाइड गेंदों तथा सही लेंथ का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि टीम अपनी कमियों पर चर्चा करेगी, लेकिन फिलहाल खिलाड़ियों का ध्यान वनडे सीरीज पर है और टीम का माहौल अच्छा है।

अक्टूबर में FPIs ने भारतीय शेयर बाजार से निकाले ₹34,843 करोड़, 2026 में कुल बिकवाली ₹2.95 लाख करोड़ के पार

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की बिकवाली का सिलसिला अक्टूबर में भी जारी रहा। विदेशी निवेशकों ने इस महीने भारतीय इक्विटी बाजार से कुल 34,843 करोड़ रुपये निकाल लिए। यह लगातार दूसरा महीना है, जब FPIs ने बाजार में बड़ी बिकवाली की है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों का ऊंचा रहना और कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों की आशंका विदेशी निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर डाल रही है। हालांकि, अक्टूबर के आखिरी सप्ताह यानी 26 से 30 अक्टूबर के दौरान विदेशी निवेशकों का रुख बदला। इस दौरान उन्होंने भारतीय बाजार में करीब 6,300 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया। इससे पहले 23 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में FPIs ने करीब 2,700 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। 2026 में अब तक 2.95 लाख करोड़ रुपये की निकासी सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर से पहले सितंबर में भी विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 35,861 करोड़ रुपये निकाले थे। इससे पहले जुलाई में 20,200 करोड़ और अगस्त में 29,631 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया था। अक्टूबर की बिकवाली को मिलाकर 2026 में अब तक भारतीय इक्विटी बाजार से FPIs की कुल शुद्ध निकासी 2.95 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच 2026 में सेंसेक्स करीब 13% यानी 10,729 अंक और निफ्टी लगभग 12% यानी 3,093 अंक गिर चुका है। चार में से तीन कारोबारी सत्र में विदेशी निवेशक खरीदार रहे अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार के अल्पकालिक सेंटीमेंट में सुधार के संकेत मिले हैं। 30 अक्टूबर को समाप्त हुए आखिरी चार कारोबारी सत्रों में से तीन में FPIs शुद्ध खरीदार रहे। हालांकि, बाजार जानकारों का मानना है कि केवल एक सप्ताह की खरीदारी को विदेशी निवेशकों के रुख में स्थायी बदलाव नहीं माना जा सकता। आगे भी उनकी निवेश रणनीति वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने संभाला बाजार अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में विदेशी निवेशकों की खरीदारी के बीच निफ्टी एक बार फिर 23,000 के स्तर के पार पहुंच गया। मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, FPIs की लगातार बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को सहारा दिया। DIIs की खरीदारी ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव को कम करने और बाजार में स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। फार्मा, हेल्थकेयर और डिजिटल कंपनियों में दिखाई दिलचस्पी अक्टूबर के दौरान विदेशी निवेशकों की खरीदारी और बिकवाली का रुझान अलग-अलग क्षेत्रों में देखने को मिला। FPIs ने बड़े वित्तीय और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली जारी रखी। वहीं, चुनिंदा फार्मा, हेल्थकेयर और डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों के शेयरों में निवेश किया। विदेशी निवेशकों की खरीदारी-बिकवाली के 5 प्रमुख कारण एक्सपर्ट्स की राय: क्रूड ऑयल और अमेरिकी चुनावों पर रहेगी नजर मीरा मनी के को-फाउंडर आनंद के. राठी के मुताबिक, अक्टूबर में विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के पीछे कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक ब्याज दरों और कंपनियों के नतीजों को लेकर बनी अनिश्चितता प्रमुख वजह रही। उनके अनुसार, विदेशी निवेशकों की आगे की भागीदारी वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, कच्चे तेल के दाम और कंपनियों की कमाई के आउटलुक पर निर्भर करेगी। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, आकर्षक वैल्युएशन और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले से निवेशकों के भरोसे को सहारा मिला है। वहीं, बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पवित्र मुखर्जी ने कहा कि FPIs की वापसी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतें बाजार की तेजी को सीमित कर सकती हैं। आने वाले समय में अमेरिकी मिडटर्म चुनाव, ब्रेंट क्रूड की कीमतें, अमेरिका-ईरान और रूस-यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष तथा कंपनियों के तिमाही नतीजों पर निवेशकों की नजर रहेगी। FPI क्या होता है और शेयर बाजार पर इसका क्या असर पड़ता है? FPI का मतलब: फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट यानी FPI के तहत विदेशी निवेशक किसी दूसरे देश के शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या बॉन्ड में पैसा लगाते हैं। ऐसे निवेशकों को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) कहा जाता है। शेयर बाजार पर असर: जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में पैसा लगाते हैं, तो शेयरों की मांग बढ़ सकती है और बाजार को मजबूती मिल सकती है। इससे रुपये को भी सहारा मिल सकता है। इसके उलट, जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में पैसा निकालते हैं, तो शेयर बाजार पर बिकवाली का दबाव बढ़ता है और रुपये पर भी कमजोरी का असर पड़ सकता है।
IND vs NZ

IND vs NZ 5th T20: न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हराया, Team India ने 3-2 से जीती सीरीज

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पांच मैचों की T20 सीरीज का आखिरी मुकाबला रोमांचक रहा। हैमिल्टन के Seddon Park में खेले गए इस मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हरा दिया। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 191 रन बनाए थे, लेकिन Tim Seifert की शानदार पारी के सामने भारतीय गेंदबाज बेबस नजर आए। न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। हालांकि, इस हार से सीरीज का नतीजा नहीं बदला। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बनाई थी। न्यूजीलैंड ने आखिरी दो मैच जीतकर वापसी जरूर की, लेकिन सीरीज भारत ने 3-2 से अपने नाम कर ली। ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने संभाली भारतीय पारी टॉस जीतकर न्यूजीलैंड ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। अभिषेक शर्मा सिर्फ 1 रन और संजू सैमसन 4 रन बनाकर आउट हो गए। शुरुआती झटकों के बाद टीम को एक बड़ी साझेदारी की जरूरत थी। ऐसे समय में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने मोर्चा संभाला। दोनों ने तेजी से रन बनाते हुए न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाया। ईशान किशन ने 32 गेंदों में 61 रन की शानदार पारी खेली, जबकि श्रेयस अय्यर ने सिर्फ 23 गेंदों में 50 रन बना दिए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 93 रन की साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को मैच में वापसी दिलाई। इसके बाद नमन धीर ने 33 रन और नीतीश कुमार रेड्डी ने 22 रन बनाकर टीम का स्कोर 191 तक पहुंचाया। न्यूजीलैंड की तरफ से Adam Milne ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए। Nathan Smith और Blair Tickner को 2-2 सफलताएं मिलीं। Tim Seifert के 93 रन ने पलट दिया Match 192 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत जरूर थोड़ी लड़खड़ाई। फिन एलन सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन इसके बाद Tim Seifert ने भारतीय गेंदबाजों को कोई राहत नहीं दी। Seifert ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों में 93 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। वह शतक से महज 7 रन दूर रह गए, लेकिन तब तक न्यूजीलैंड जीत के काफी करीब पहुंच चुका था। उनका साथ Daryl Mitchell ने दिया। Mitchell ने 16 गेंदों में 29 रन बनाए। इसके बाद Glenn Phillips ने भी अपना दम दिखाया। उन्होंने 37 गेंदों में नाबाद 61 रन की पारी खेली। इन दोनों बल्लेबाजों की मदद से न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में 3 विकेट खोकर 195 रन बना लिए और मुकाबला 7 विकेट से जीत लिया। भारतीय गेंदबाजों की नहीं चली, बल्लेबाजों की मेहनत गई बेकार भारत के लिए इस मुकाबले में सबसे बड़ी चुनौती न्यूजीलैंड की तेज रन गति रही। 191 रन बनाने के बाद टीम इंडिया को उम्मीद थी कि गेंदबाज मैच पर पकड़ बनाएंगे, लेकिन Tim Seifert और Glenn Phillips ने भारतीय गेंदबाजी को संभलने का मौका नहीं दिया। फिन एलन का विकेट जल्दी मिलने के बावजूद भारत लगातार विकेट नहीं निकाल सका। नतीजा यह रहा कि न्यूजीलैंड ने लक्ष्य को दो ओवर बाकी रहते हासिल कर लिया। 3-0 से आगे था भारत, फिर न्यूजीलैंड ने की वापसी इस T20 सीरीज की शुरुआत भारत के लिए काफी अच्छी रही थी। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बना ली थी। ऐसा लग रहा था कि भारत सीरीज में क्लीन स्वीप कर सकता है। लेकिन चौथे मुकाबले में न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी की। टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया और भारत को 87 रन से हराया। इसके बाद पांचवें T20 में भी न्यूजीलैंड ने जीत दर्ज कर दी। लगातार दो जीत के बावजूद न्यूजीलैंड सीरीज अपने नाम नहीं कर सका। भारत ने शुरुआती बढ़त के दम पर पांच मैचों की सीरीज 3-2 से जीत ली। IND vs NZ 5th T20: मैच का पूरा Scorecard भारत – 191/8 (20 ओवर) न्यूजीलैंड – 195/3 (18 ओवर) मैच का नतीजा: न्यूजीलैंड ने 7 विकेट से जीत दर्ज की। सीरीज का नतीजा: भारत ने 3-2 से सीरीज जीती। सीरीज जीतकर भी आखिरी दो मैच हारा भारत टीम इंडिया के लिए यह सीरीज दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आई। शुरुआती तीन मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन आखिरी दो मैचों में न्यूजीलैंड ने अपनी रणनीति और बल्लेबाजी से मुकाबले का रुख बदल दिया। आखिरी मैच में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर की फिफ्टी के बावजूद भारत जीत हासिल नहीं कर पाया। वहीं Tim Seifert और Glenn Phillips की पारियों ने न्यूजीलैंड को शानदार जीत दिलाई। भारत के लिए राहत की बात यही रही कि शुरुआती तीन जीत के कारण T20 सीरीज की ट्रॉफी टीम इंडिया के पास ही रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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