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एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
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Para Asian Games

Para Asian Games भारत को 3 Gold, Shot Put और High Jump में खिलाड़ियों ने दिखाया दम

Asian Para Games 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। जापान के आइची-नागोया में हो रहे इस खेल आयोजन में भारत ने एथलेटिक्स और तीरंदाजी में कई पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया। शॉट पुट में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक अपने नाम किए, वहीं हाई जंप में भी गोल्ड और सिल्वर मेडल भारत के खाते में आए। इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि भारतीय खिलाड़ियों ने अलग-अलग स्पर्धाओं में अपनी मेहनत और दमखम दिखाया। सचिन खिलारी, प्रवीण कुमार और आयुष वर्मा ने गोल्ड मेडल जीतकर सुर्खियां बटोरीं। इनके अलावा दूसरे खिलाड़ियों ने भी सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत की पदक तालिका में योगदान दिया। Shot Put में भारत का क्लीन स्वीप, सचिन खिलारी ने जीता Gold पुरुषों की शॉट पुट F46 स्पर्धा में सचिन सरजेराव खिलारी ने 15.87 मीटर का थ्रो करके गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने अपने आखिरी प्रयास में यह दूरी हासिल की और गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। इस मुकाबले में भारत का प्रदर्शन और भी खास रहा। मोहम्मद यासिर ने 15.06 मीटर के थ्रो के साथ सिल्वर मेडल जीता, जबकि परवीन ने 14.94 मीटर के थ्रो के साथ ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। इस तरह इस स्पर्धा के तीनों पदक भारतीय खिलाड़ियों के खाते में आए। एक ही इवेंट में गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज जीतना भारत के लिए बड़ी उपलब्धि रही। High Jump में प्रवीण कुमार ने बनाया रिकॉर्ड हाई जंप में प्रवीण कुमार ने 2.05 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। उनके इस प्रदर्शन ने भारतीय दल को एक और बड़ी सफलता दिलाई। प्रवीण ने शानदार छलांग के साथ गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। इसी स्पर्धा में भारत के बंटी ने 1.92 मीटर की छलांग लगाकर सिल्वर मेडल हासिल किया। इस तरह हाई जंप में भी भारत को दो पदक मिले। आयुष वर्मा के नाम भी Gold Medal पुरुषों की शॉट पुट F53 स्पर्धा में आयुष वर्मा ने 8.16 मीटर का थ्रो करके गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में यह दूरी हासिल की। आयुष के लिए यह प्रतियोगिता का दूसरा पदक रहा। इससे पहले वह जैवलिन थ्रो में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके थे। लगातार दो स्पर्धाओं में पदक जीतना उनके शानदार प्रदर्शन को दिखाता है। भाग्यश्री जाधव ने जीता Silver, अनभव चौधरी को Bronze महिलाओं की शॉट पुट F34 स्पर्धा में भाग्यश्री जाधव ने 8.19 मीटर का थ्रो करके सिल्वर मेडल जीता। वहीं, पुरुषों की 100 मीटर T35 दौड़ में अनभव चौधरी ने 12.72 सेकंड का समय निकालकर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। इन पदकों के साथ भारतीय खिलाड़ियों ने एथलेटिक्स में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। मैदान पर उनकी मेहनत का नतीजा पदकों के रूप में देखने को मिला। Archery में शीतल देवी और पायल नाग की जोड़ी को Silver तीरंदाजी में शीतल देवी और पायल नाग की जोड़ी ने महिला कंपाउंड डबल्स स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता। फाइनल मुकाबले में भारतीय जोड़ी को चीन की टीम से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, गोल्ड नहीं मिल सका, लेकिन दोनों खिलाड़ियों ने सिल्वर मेडल जीतकर भारत की पदक संख्या में इजाफा किया। Asian Para Games में भारत का शानदार प्रदर्शन एशियन पैरा गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार चर्चा में है। एथलेटिक्स से लेकर तीरंदाजी तक, खिलाड़ी अलग-अलग स्पर्धाओं में पदक जीत रहे हैं। गोल्ड मेडल के साथ सिल्वर और ब्रॉन्ज की उपलब्धियां भी भारतीय दल के लिए अहम हैं। सचिन खिलारी का रिकॉर्ड बनाने वाला थ्रो, प्रवीण कुमार की शानदार छलांग और आयुष वर्मा का गोल्ड मेडल इस दिन की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहे। अब भारतीय खेल प्रेमियों की नजरें आगामी मुकाबलों पर हैं, जहां खिलाड़ियों से एक बार फिर अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी। भारतीय खिलाड़ियों की यह सफलता बताती है कि मेहनत, लगन और हौसले के दम पर वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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India vs New Zealand

India vs New Zealand: कभी जीतना था मुश्किल, अब न्यूजीलैंड में तीसरी T20 Series जीतने का मौका

भारतीय क्रिकेट टीम के लिए न्यूजीलैंड की धरती पर टी-20 क्रिकेट का सफर हमेशा आसान नहीं रहा। एक समय ऐसा भी था, जब टीम इंडिया को कीवी टीम के खिलाफ उसकी घरेलू जमीन पर पहली टी-20 इंटरनेशनल जीत दर्ज करने के लिए करीब 10 साल इंतजार करना पड़ा था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड में अपनी ताकत दिखाई है और अब उसके पास लगातार तीसरी टी-20 सीरीज जीतने का मौका है। भारत और न्यूजीलैंड (India vs New Zealand) के बीच होने वाली पांच मैचों की T20 Series को लेकर क्रिकेट फैंस की नजरें दोनों टीमों पर टिकी हैं। भारतीय टीम जहां अपने पुराने प्रदर्शन को दोहराना चाहेगी, वहीं न्यूजीलैंड घरेलू मैदान का फायदा उठाकर सीरीज जीतने की कोशिश करेगा। India vs New Zealand: कैसे बदली टीम इंडिया की कहानी? भारत और न्यूजीलैंड के बीच न्यूजीलैंड की धरती पर पहला टी-20 इंटरनेशनल मुकाबला 2008-09 में खेला गया था। उस समय भारतीय टीम को दोनों मैचों में हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद भी न्यूजीलैंड में जीत दर्ज करना भारत के लिए आसान नहीं रहा। 2018-19 के दौरे पर टीम इंडिया ने आखिरकार अपनी पहली टी-20 इंटरनेशनल जीत दर्ज की। तीन मैचों की सीरीज का दूसरा मुकाबला जीतकर भारत ने इतिहास रचा। हालांकि, भारतीय टीम सीरीज 1-2 से हार गई थी। इस जीत ने भारतीय टीम के लिए न्यूजीलैंड में आगे का रास्ता जरूर खोला, लेकिन सीरीज जीतने के लिए उसे अभी और इंतजार करना था। 2019-20 में भारत ने किया कमाल साल 2019-20 में भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड दौरे पर शानदार प्रदर्शन किया। पांच मैचों की टी-20 सीरीज में भारत ने न्यूजीलैंड को 5-0 से हराकर क्लीन स्वीप किया। यह सीरीज भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए खास रही, क्योंकि टीम इंडिया ने मुश्किल परिस्थितियों में भी अपना संयम बनाए रखा। कुछ मुकाबलों में मैच का फैसला सुपर ओवर तक पहुंचा, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने दबाव में भी बेहतर प्रदर्शन किया। इसके बाद 2022-23 में भारत ने न्यूजीलैंड में तीन मैचों की टी-20 सीरीज 1-0 से जीती। बारिश के कारण एक मैच रद्द हुआ, जबकि दूसरा मुकाबला टाई रहा था। इस तरह भारत ने न्यूजीलैंड की धरती पर अपनी दूसरी टी-20 सीरीज जीत दर्ज की। अब भारतीय टीम के सामने लगातार तीसरी टी-20 सीरीज जीतने का लक्ष्य है। IND vs NZ Head-to-Head: किसका पलड़ा भारी? भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट में कई यादगार मुकाबले हुए हैं। भारत का कुल रिकॉर्ड बेहतर रहा है, लेकिन न्यूजीलैंड को उसके घरेलू मैदान पर हल्के में नहीं लिया जा सकता। दोनों टीमों के बीच मुकाबलों में भारतीय बल्लेबाजों की आक्रामकता और न्यूजीलैंड की तेज गेंदबाजी अक्सर निर्णायक भूमिका निभाती है। यही वजह है कि आगामी सीरीज में भी क्रिकेट फैंस को कड़े मुकाबलों की उम्मीद रहेगी। भारतीय टीम की कोशिश होगी कि वह शुरुआती मैचों से ही लय हासिल करे, ताकि सीरीज में बढ़त बनाना आसान हो सके। Vaibhav Sooryavanshi पर रहेंगी सबकी नजरें इस सीरीज में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी भी चर्चा में हैं। अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के कारण उन्होंने क्रिकेट जगत का ध्यान खींचा है। न्यूजीलैंड के गेंदबाजों के सामने उनके प्रदर्शन को लेकर भी उत्सुकता बनी हुई है। न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज जैकब डफी ने वैभव की बल्लेबाजी क्षमता की तारीफ की है और उनके खिलाफ रणनीति तैयार करने की बात कही है। न्यूजीलैंड की परिस्थितियां भारतीय बल्लेबाजों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। ऐसे में वैभव के साथ-साथ टीम के अनुभवी खिलाड़ियों की भूमिका भी अहम रहेगी। अगर भारतीय बल्लेबाज शुरुआती ओवरों में संभलकर खेलते हैं और बाद में रन गति बढ़ाते हैं, तो टीम को बड़ा स्कोर बनाने में मदद मिल सकती है। IND vs NZ T20 Series 2026: शेड्यूल और मुकाबलों पर नजर भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की सीरीज को लेकर क्रिकेट फैंस उत्साहित हैं। सीरीज के मुकाबलों में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के साथ-साथ टीम संयोजन और गेंदबाजी रणनीति भी अहम होगी। न्यूजीलैंड की टीम घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाना चाहेगी, जबकि भारत की नजर अपनी पिछली सीरीज जीतों की लय को बरकरार रखने पर होगी। मैचों की तारीख, मैदान और प्रसारण की जानकारी के लिए आधिकारिक क्रिकेट बोर्ड के अपडेट देखना बेहतर रहेगा। क्या भारत जीत की हैट्रिक लगा पाएगा? एक समय न्यूजीलैंड में पहली टी-20 जीत के लिए करीब एक दशक इंतजार करने वाली टीम इंडिया अब वहां अपनी तीसरी लगातार सीरीज जीतने का लक्ष्य लेकर उतरने की तैयारी में है। यह बदलाव भारतीय टी-20 क्रिकेट में आए सुधार और टीम के बढ़ते आत्मविश्वास को भी दिखाता है। हालांकि, क्रिकेट में पुराने रिकॉर्ड मैदान पर जीत की गारंटी नहीं होते। न्यूजीलैंड की टीम अपने घरेलू मैदान पर कड़ी चुनौती दे सकती है। ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों को बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में अच्छा प्रदर्शन करना होगा। अब फैंस को इंतजार है कि टीम इंडिया न्यूजीलैंड में अपनी जीत का सिलसिला आगे बढ़ा पाती है या नहीं। अगर भारतीय खिलाड़ी अपनी क्षमता के मुताबिक प्रदर्शन करते हैं, तो यह सीरीज एक बार फिर यादगार बन सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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पैरा एशियन गेम्स की ओपनिंग सेरेमनी में लहराया तिरंगा, प्रमोद भगत और सिमरन शर्मा ने की भारतीय दल की अगुआई

जापान के आइची-नागोया में 5वें पैरा एशियन गेम्स की ओपनिंग सेरेमनी रविवार, 18 अक्टूबर को आयोजित हुई। समारोह में पैरालिंपिक चैंपियन और बैडमिंटन खिलाड़ी प्रमोद भगत तथा धाविका सिमरन शर्मा ने भारतीय दल की अगुआई की। दोनों खिलाड़ियों ने नागोया के पालोमा मिजुहो स्टेडियम में तिरंगा थामकर भारत का प्रतिनिधित्व किया। जापान के सम्राट नारुहितो ने खेलों के उद्घाटन की घोषणा की। पैरा एशियन गेम्स का आयोजन 18 से 24 अक्टूबर 2026 तक किया जा रहा है। इसमें एशिया के विभिन्न देशों के पैरा एथलीट कई खेलों में हिस्सा ले रहे हैं। <Cite refs={[“turn519565news18″,”turn519565news9”]}/> भारत ने भेजा 281 सदस्यीय दल खेल मंत्रालय ने इन खेलों के लिए 281 सदस्यीय भारतीय दल को मंजूरी दी है। इसमें 168 एथलीट शामिल हैं, जबकि 98 टीम अधिकारी और सपोर्ट स्टाफ तथा 15 कॉन्टिजेंट स्टाफ के सदस्य हैं। भारतीय दल में 112 पुरुष और 56 महिला एथलीट शामिल हैं, जो 11 खेलों में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। भारत का लक्ष्य पिछले पैरा एशियन गेम्स में किए गए शानदार प्रदर्शन को आगे बढ़ाना है। <Cite refs={[“turn519565news12″,”turn519565news10”]}/> पिछले संस्करण में भारत ने जीते थे 111 पदक भारत ने 2023 में चीन के हांगझोऊ में आयोजित पैरा एशियन गेम्स में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था। भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 111 पदक जीते थे, जिनमें 29 स्वर्ण, 31 रजत और 51 कांस्य पदक शामिल थे। इस प्रदर्शन के साथ भारत पदक तालिका में पांचवें स्थान पर रहा था। इस बार भी भारतीय खिलाड़ी विभिन्न खेलों में पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने के इरादे से मैदान में उतर रहे हैं।
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भारत-A के न्यूजीलैंड दौरे के सभी मैच सोनी स्पोर्ट्स पर होंगे लाइव, जुरेल की कप्तानी में खेलेंगे राहुल-जायसवाल

भारत-A की टीम न्यूजीलैंड दौरे पर तीन चार दिवसीय मुकाबले खेलेगी। इन सभी मैचों का लाइव टेलीकास्ट सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा। नेटवर्क मैचों के प्रसारण के साथ उनकी प्रोडक्शन जिम्मेदारी भी संभालेगा। ये मुकाबले न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज की तैयारी के लिहाज से अहम होंगे। ध्रुव जुरेल की कप्तानी वाली भारत-A टीम में केएल राहुल, यशस्वी जायसवाल, देवदत्त पडिक्कल, वॉशिंगटन सुंदर और साई सुदर्शन जैसे खिलाड़ी शामिल हैं। टीम 18 अक्टूबर को बेंगलुरु से न्यूजीलैंड के लिए रवाना होगी। तीन चरणों में खेले जाएंगे चार दिवसीय मुकाबले भारत-A और न्यूजीलैंड के बीच तीन चार दिवसीय मैच खेले जाएंगे। सभी मुकाबले भारतीय समयानुसार सुबह 3:30 बजे शुरू होंगे। मैच तारीख पहला चार दिवसीय मैच 24 से 27 अक्टूबर दूसरा चार दिवसीय मैच 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तीसरा चार दिवसीय मैच 7 से 10 नवंबर इन मैचों के जरिए भारतीय खिलाड़ियों को न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में खेलने और टेस्ट क्रिकेट की तैयारी करने का मौका मिलेगा। भारत की इंटरनेशनल टीम के मैच भी दिखाएगा सोनी स्पोर्ट्स सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क न्यूजीलैंड दौरे पर भारत की सीनियर इंटरनेशनल टीम के मुकाबलों का प्रसारण भी करेगा। इस दौरे पर भारतीय टीम को पांच टी-20, पांच वनडे और दो टेस्ट मैच खेलने हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की सीनियर टीम और भारत-A के मुकाबले कुछ तारीखों पर एक ही समय खेले जा सकते हैं। ऐसे में दोनों टीमों के मैचों का लाइव प्रसारण किया जाएगा। एशियन गेम्स वाला सपोर्ट स्टाफ भी रहेगा साथ भारत-A टीम के साथ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) का सपोर्ट स्टाफ न्यूजीलैंड जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, एशियन गेम्स में भारतीय टीम के साथ जापान गए सपोर्ट स्टाफ को ही इस दौरे की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि, एशियन गेम्स में भारतीय टीम के हेड कोच रहे वीवीएस लक्ष्मण के न्यूजीलैंड दौरे पर जाने को लेकर फिलहाल स्पष्ट जानकारी नहीं है। भारत-A के इस दौरे से खिलाड़ियों को विदेशी परिस्थितियों में अपनी क्षमता दिखाने और टेस्ट क्रिकेट के लिए तैयारी मजबूत करने का अवसर मिलेगा।
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वैभव सूर्यवंशी

IND vs WI T20: वैभव सूर्यवंशी का भरोसा कायम, 4 दिन में दूसरी पोस्ट; अब भी मौके का इंतजार

भारत और वेस्टइंडीज (IND vs WI) के बीच T-20 सीरीज के निर्णायक मुकाबले से पहले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर चर्चा में हैं। सीरीज में अब तक खेलने का मौका नहीं मिलने के बावजूद वैभव ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। चार दिन के भीतर उनकी दूसरी सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई है, जिसमें भरोसे का संदेश देखने को मिला। वैभव को इस सीरीज में अब तक मैदान पर उतरने का मौका नहीं मिला है। ऐसे में क्रिकेट फैंस के मन में एक ही सवाल है—क्या पांचवें टी-20 में उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा? Vaibhav Sooryavanshi की दूसरी पोस्ट ने खींचा ध्यान वैभव सूर्यवंशी की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर फैंस के बीच चर्चा हो रही है। चार दिन में दूसरी पोस्ट आने के बाद उनके संदेश पर लोगों की नजरें टिकी हैं। हालांकि, पोस्ट को टीम में चयन या किसी खास फैसले से जोड़कर देखना सही नहीं होगा, क्योंकि प्लेइंग-11 में किसे मौका मिलेगा, इसका फैसला टीम मैनेजमेंट करता है। कम उम्र में अपनी बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले वैभव के लिए टीम के साथ रहना और मौके का इंतजार करना भी अनुभव का हिस्सा है। अब देखना होगा कि उन्हें इस सीरीज में खेलने का मौका मिलता है या नहीं। IND vs WI 5th T20: निर्णायक मुकाबले पर नजर भारत और वेस्टइंडीज की टी-20 सीरीज का पांचवां मुकाबला दोनों टीमों के लिए अहम है। सीरीज के आखिरी मैच में जीत हासिल करने वाली टीम खिताब अपने नाम करेगी। ऐसे में भारतीय टीम की प्लेइंग-11 को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। फैंस यह जानना चाहते हैं कि क्या टीम मैनेजमेंट इस मुकाबले में युवा खिलाड़ियों को मौका देगा। वैभव सूर्यवंशी का नाम भी इसी चर्चा में शामिल है। हालांकि, उनके खेलने को लेकर आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। क्या वैभव सूर्यवंशी को मिलेगा डेब्यू का मौका? वैभव को लेकर उत्सुकता की एक बड़ी वजह उनकी कम उम्र और क्रिकेट में तेजी से बनी पहचान है। फैंस उन्हें भारतीय टीम की जर्सी में खेलते देखना चाहते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका मिलना टीम की जरूरत और चयन रणनीति पर निर्भर करता है। फिलहाल वैभव के लिए इंतजार जारी है। पांचवें टी-20 में उनका नाम प्लेइंग-11 में शामिल होता है या नहीं, इसका पता टीम की आधिकारिक घोषणा के बाद ही चलेगा। क्रिकेट में हर खिलाड़ी को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। वैभव के समर्थकों को उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही मैदान पर अपनी काबिलियत दिखाने का अवसर मिलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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संजय मांजरेकर बोले- टी-20 में 300 रन बनाने के लिए पिचें और फ्लैट हों, बाउंड्री भी छोटी की जाए

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी और कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने टी-20 क्रिकेट में बल्लेबाजों को और ज्यादा मदद देने की बात कही है। उनका मानना है कि पिचों को और फ्लैट बनाया जाना चाहिए, बाउंड्री छोटी होनी चाहिए और गेंदबाजों के खिलाफ नियमों को और सख्त किया जा सकता है, ताकि टी-20 में नियमित रूप से 20 ओवर में 300 रन बन सकें। मांजरेकर ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर यह बात कही। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारतीय क्रिकेट में फ्लैट पिचों और बल्लेबाजों को मिल रही मदद को लेकर बहस चल रही है। गौतम गंभीर और युजवेंद्र चहल समेत कई क्रिकेटर पिचों को गेंदबाजों के अनुकूल बनाने की मांग कर चुके हैं। एक दिन पहले चेतन शर्मा ने की थी गेंदबाजों के अनुकूल पिचों की मांग मांजरेकर की टिप्पणी से एक दिन पहले भारतीय टीम के पूर्व मुख्य चयनकर्ता चेतन शर्मा ने टी-20 क्रिकेट में बल्लेबाजी के अनुकूल पिचों पर सवाल उठाए थे। नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि ऐसी पिचों से बल्ले और गेंद के बीच संतुलन बिगड़ रहा है। चेतन शर्मा के मुताबिक, गेंदबाज रन देने के लिए मैदान पर उतरते हैं, लेकिन उन्हें इतनी मार नहीं पड़नी चाहिए कि वे दोबारा मैदान पर उतरना ही न चाहें। उनका कहना था कि क्रिकेट में बल्लेबाजों और गेंदबाजों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। गौतम गंभीर भी फ्लैट पिचों पर उठा चुके हैं सवाल भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर भी हाल में पिचों को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं। इन बयानों के बाद क्रिकेट में बल्लेबाजी और गेंदबाजी के बीच संतुलन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। संजय मांजरेकर का क्रिकेट करियर संजय मांजरेकर भारतीय क्रिकेट के पूर्व खिलाड़ी और कमेंटेटर हैं। वे अपने बेबाक विचारों और तकनीकी रूप से मजबूत बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। वे क्रिकेट खिलाड़ियों को विशेष बल्लेबाजी प्रशिक्षण भी देते हैं। मांजरेकर ने अपने टेस्ट करियर में 37 मैच खेले और 2,043 रन बनाए। इसमें चार शतक और नौ अर्धशतक शामिल हैं। वहीं, 74 वनडे मैचों में उन्होंने 1,994 रन बनाए, जिसमें एक शतक शामिल है। टी-20 क्रिकेट में संतुलन पर बहस तेज मांजरेकर की टिप्पणी और गेंदबाजों के अनुकूल पिचों की मांग के बीच क्रिकेट जगत में दो अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं। एक ओर बड़े स्कोर और आक्रामक बल्लेबाजी को टी-20 की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जाता है, वहीं दूसरी ओर गेंदबाजों को पर्याप्त अवसर देने और मुकाबले को संतुलित बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। अब देखना होगा कि पिचों और खेल के नियमों को लेकर यह बहस आने वाले समय में क्रिकेट के स्वरूप पर कितना असर डालती है।
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तलाक के बाद शराब की लत बढ़ गई थी, 26 दिन रिहैब में रहे युजवेंद्र चहल; पैनिक अटैक में बोलना भी हो जाता था मुश्किल

भारतीय स्पिनर युजवेंद्र चहल ने अपनी निजी जिंदगी, धनश्री वर्मा से तलाक के बाद के दौर, शराब की लत और पैनिक अटैक को लेकर खुलकर बात की है। आकाश चोपड़ा के पॉडकास्ट में चहल ने बताया कि तलाक के बाद उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और शराब पीने की आदत हद से ज्यादा बढ़ गई थी। उन्होंने बताया कि वह 26 दिन रिहैब सेंटर में भी रहे। चहल के मुताबिक, पैनिक अटैक के दौरान उनके चेहरे पर भी असर दिखाई देता था। उनका चेहरा सिकुड़कर एक तरफ खिंच जाता था और उन्हें बोलने में परेशानी होती थी। उन्हें यह चिंता भी रहती थी कि लोग उनकी स्थिति को देखकर क्या सोचेंगे और सोशल मीडिया पर किस तरह की बातें होंगी। पैनिक अटैक के दौरान चेहरा एक तरफ खिंच जाता था पॉडकास्ट में चहल ने पैनिक अटैक के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि एंग्जायटी के दौरान उनके दिल की धड़कन तेज हो जाती थी और चेहरे पर असामान्य बदलाव महसूस होते थे। चहल ने कहा कि उस समय वह ठीक से बोल भी नहीं पाते थे। उनके होंठ कसकर एक तरफ खिंच जाते थे। उनके मुताबिक, चेहरे पर दिखने वाले इन बदलावों से आसपास के लोगों को अंदाजा हो जाता था कि उनके साथ कुछ ठीक नहीं है। चहल ने बताया कि उन्हें सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाओं का भी डर था। ऐसे समय में उन्होंने क्रिकेट और IPL पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया। तलाक के बाद बढ़ गई थी शराब पीने की आदत आकाश चोपड़ा ने चहल से पूछा कि शराब पीने की शुरुआत कैसे हुई और इसके पीछे क्या वजह थी। जवाब में चहल ने बताया कि शुरुआत में वह युवा थे और दोस्तों के साथ पार्टियों में शामिल होते थे। उन्होंने 2011 में अपना पहला IPL खेला था। चहल ने पूर्व दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेटर एबी डिविलियर्स की एक सलाह का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, डिविलियर्स ने उनसे कहा था कि जिंदगी में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। चहल ने माना कि यह बात सुनने में आसान लगती है, लेकिन इसे अपनी जिंदगी में अपनाना उतना आसान नहीं होता। चहल ने बताया कि तलाक के बाद शराब पीने की आदत काफी बढ़ गई थी और उस दौरान उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। उन्हें महसूस हुआ कि अगर वह इसी रास्ते पर चलते रहे, तो क्रिकेट को नुकसान पहुंचा सकते हैं। क्रिकेट को नुकसान पहुंचने का होने लगा था डर चहल ने कहा कि क्रिकेट वह चीज है, जिससे उन्हें सबसे ज्यादा प्यार है। उन्हें एहसास हुआ कि शराब की लत जारी रहने पर उनका खेल और करियर प्रभावित हो सकता है। इसी एहसास ने उन्हें अपनी स्थिति पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि मुश्किल दौर से बाहर निकलने के लिए उन्हें मदद की जरूरत महसूस हुई और वह 26 दिन रिहैब सेंटर में रहे। टीम इंडिया से लंबे समय से बाहर हैं चहल युजवेंद्र चहल भारतीय टीम के प्रमुख लेग स्पिनरों में शामिल रहे हैं। उन्होंने अपना पिछला टी-20 इंटरनेशनल मुकाबला अगस्त 2023 में खेला था। वह लंबे समय से भारतीय टीम से बाहर हैं। दी गई जानकारी के मुताबिक, उन्होंने हाल ही में फर्स्ट क्लास क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला भी किया है। चहल का यह खुलासा उनके क्रिकेट करियर के साथ-साथ निजी जीवन में आए मुश्किल दौर की झलक देता है। उनके अनुभव से यह भी सामने आता है कि मानसिक परेशानी और नशे की समस्या से जूझते समय मदद लेना महत्वपूर्ण हो सकता है।
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Smriti Mandhana

Smriti Mandhana Captaincy: नई कप्तानी में आज खेलेगी टीम इंडिया, जानें मैच का पूरा शेड्यूल

भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए आज का मुकाबला खास होने वाला है। स्मृति मंधाना (Smriti Mandhana) की कप्तानी में टीम इंडिया शुक्रवार, 16 अक्टूबर को जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले T20 इंटरनेशनल मैच में मैदान पर उतरेगी। रायपुर में होने वाले इस मुकाबले के साथ भारतीय टीम एक नई शुरुआत करने जा रही है। क्रिकेट फैंस की नजरें स्मृति मंधाना की कप्तानी और टीम के प्रदर्शन पर रहेंगी। भारत और जिम्बाब्वे के बीच होने वाली इस सीरीज में खिलाड़ियों को अपनी काबिलियत दिखाने का मौका मिलेगा। भारतीय टीम की कोशिश जीत के साथ शुरुआत करने और सीरीज में बढ़त बनाने की होगी। India vs Zimbabwe Women Match: कितने बजे शुरू होगा मुकाबला? भारत और जिम्बाब्वे की महिला टीमों के बीच पहला T20 मुकाबला 16 अक्टूबर को खेला जाएगा। मैच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित होगा। मैच का समय भारतीय दर्शकों के लिए सुविधाजनक है। ऐसे में फैंस शाम को इस मुकाबले का आनंद ले सकते हैं। Smriti Mandhana Captaincy: नई जिम्मेदारी, नई उम्मीदें स्मृति मंधाना भारतीय महिला क्रिकेट की प्रमुख बल्लेबाजों में शामिल हैं। अब पूर्णकालिक कप्तान के रूप में उनके सामने टीम को सही दिशा देने की चुनौती होगी। मैदान पर फैसले लेने से लेकर खिलाड़ियों के प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखने तक, उनकी भूमिका अहम रहने वाली है। मंधाना के पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का लंबा अनुभव है। वह अपनी बल्लेबाजी के दम पर कई बार टीम को मुश्किल परिस्थितियों से निकाल चुकी हैं। अब कप्तानी में भी उनसे इसी तरह के आत्मविश्वास और बेहतर रणनीति की उम्मीद की जा रही है। इन खिलाड़ियों पर रहेंगी सबकी नजरें भारतीय टीम में स्मृति मंधाना के अलावा शैफाली वर्मा, हरमनप्रीत कौर, ऋचा घोष और दीप्ति शर्मा जैसी खिलाड़ियों का प्रदर्शन अहम हो सकता है। शैफाली वर्मा को उपकप्तान की जिम्मेदारी दी गई है। टी20 क्रिकेट में तेज शुरुआत और आखिरी ओवरों में तेजी से रन बनाना काफी मायने रखता है। ऐसे में भारतीय बल्लेबाजों को शुरुआत से ही रन बनाने पर ध्यान देना होगा। वहीं, गेंदबाजों के सामने जिम्बाब्वे की टीम को कम स्कोर पर रोकने की चुनौती रहेगी। India Women vs Zimbabwe Women T20 Series का शेड्यूल भारत और जिम्बाब्वे की महिला टीमों के बीच तीन मैचों की T20 इंटरनेशनल सीरीज खेली जानी है। इसका कार्यक्रम इस प्रकार है: सीरीज के तीनों मुकाबले रायपुर में खेले जाने हैं। इसके बाद दोनों टीमों के बीच वनडे सीरीज भी प्रस्तावित है। Live Streaming: मोबाइल और TV पर कहां देखें मैच? भारत और जिम्बाब्वे महिला क्रिकेट टीम के बीच होने वाले मुकाबले का लाइव प्रसारण और स्ट्रीमिंग देखने के लिए दर्शक संबंधित आधिकारिक ब्रॉडकास्ट और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म की जानकारी चेक कर सकते हैं। Star Sports Network और JioHotstar पर प्रसारण की उपलब्धता मैच के आधिकारिक शेड्यूल से जरूर कन्फर्म करें। जीत से शुरुआत करना चाहेगी टीम इंडिया स्मृति मंधाना की कप्तानी में भारतीय टीम के लिए यह मुकाबला सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि नई जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने का मौका भी है। टीम के अनुभवी खिलाड़ियों और युवा प्रतिभाओं से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय महिला टीम रायपुर में जीत के साथ अपने अभियान की शुरुआत कर पाती है या जिम्बाब्वे उसे कड़ी चुनौती देता है। क्रिकेट फैंस को इस मुकाबले में रोमांचक खेल की उम्मीद रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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चेतन शर्मा बोले- गेंदबाजों को भी मिले मददगार पिचें, बोले- इतना मत मारिए कि मैदान पर लौटना ही न चाहें

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी और BCCI के पूर्व मुख्य चयनकर्ता चेतन शर्मा ने टी-20 क्रिकेट में बल्लेबाजों के अनुकूल पिचों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से ऐसी पिचें तैयार करने की अपील की, जिन पर गेंदबाजों को भी मदद मिल सके। उनका कहना है कि बल्लेबाजों के पक्ष में ज्यादा झुकी पिचों से बल्ले और गेंद के बीच संतुलन बिगड़ रहा है। नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान चेतन शर्मा ने कहा, “मैं मानता हूं कि गेंदबाज रन देने के लिए मैदान पर आते हैं, लेकिन उन्हें इतना मत मारिए कि वे दोबारा मैदान पर आना ही न चाहें।” उन्होंने जोर दिया कि इंटरनेशनल क्रिकेट में भी ऐसी पिचें होनी चाहिए, जहां गेंदबाज आक्रामक बल्लेबाजों का मुकाबला कर सकें। चेतन के मुताबिक, घरेलू क्रिकेट में गेंदबाजों को मदद देने वाली पिचें तैयार करने की तरह इंटरनेशनल मैचों में भी इस दिशा में ध्यान दिया जाना चाहिए। भारत-वेस्टइंडीज टी-20 सीरीज में चौकों-छक्कों की बरसात भारत और वेस्टइंडीज के बीच जारी टी-20 सीरीज में अब तक खेले गए चार मुकाबलों में बड़े स्कोर देखने को मिले हैं। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, सीरीज में अब तक 98 छक्के और 104 चौके लग चुके हैं। दोनों टीमों की आठ पारियों में छह बार 200 रन से ज्यादा का स्कोर बना है। सीरीज के दूसरे टी-20 मुकाबले में भारत ने 249 रन बनाए थे। इसके जवाब में वेस्टइंडीज ने नौ गेंद शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया था। तीसरे टी-20 में भारतीय टीम ने 223 रन बनाए और वेस्टइंडीज को 209 रन पर रोक दिया। वहीं, चौथे मुकाबले में वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 247 रन बनाए, जबकि भारतीय टीम जवाब में 223 रन ही बना सकी। पहले मुकाबले में भी भारत ने 172 रन का लक्ष्य 14.4 ओवर में हासिल कर लिया था। लगातार बड़े स्कोर और आक्रामक बल्लेबाजी के बीच चेतन शर्मा की पिचों को लेकर यह टिप्पणी सामने आई है। रेड-बॉल क्रिकेट को भी जरूरी मानते हैं चेतन शर्मा चेतन शर्मा ने टी-20 क्रिकेट की बढ़ती लोकप्रियता को स्वीकार किया, लेकिन युवा खिलाड़ियों के विकास के लिए रेड-बॉल क्रिकेट को भी जरूरी बताया। उन्होंने कहा, “मैं पुराने विचारों वाला व्यक्ति हूं। मेरा मानना है कि रेड-बॉल क्रिकेट सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।” चेतन के अनुसार, युवा खिलाड़ियों को रेड-बॉल क्रिकेट में खेलने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने बताया कि उनकी मुलाकात ऐसे कई कोचों से हुई है, जो इस फॉर्मेट पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने खिलाड़ियों को सलाह दी कि उन्हें जो भी अवसर मिलें, उनका पूरा उपयोग करना चाहिए। पिचों पर संतुलन और खिलाड़ियों के विकास पर जोर चेतन शर्मा की टिप्पणी टी-20 क्रिकेट में बल्लेबाजों के बढ़ते दबदबे और गेंदबाजों की भूमिका को लेकर बहस के बीच आई है। उनका मानना है कि ऐसी पिचें तैयार करना जरूरी है, जहां बल्लेबाजों को रन बनाने के अवसर मिलें, लेकिन गेंदबाजों के पास भी विकेट लेने और मुकाबले में बने रहने के मौके हों। इसके साथ ही उन्होंने रेड-बॉल क्रिकेट को युवा खिलाड़ियों के तकनीकी विकास के लिए अहम बताया।
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एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Share Market

Share Market Update सेंसेक्स की तेजी पर लगा ब्रेक, Auto-Metal Stocks में दबाव

शेयर बाजार (Share Market) में तेजी देखकर खरीदारी करने वाले निवेशकों के लिए बुधवार का कारोबार थोड़ा निराशाजनक रहा। 21 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार ने शुरुआत में अच्छी बढ़त बनाई, लेकिन दोपहर तक तस्वीर बदल गई। सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर से करीब 1,200 अंक नीचे आ गया और 73,500 के आसपास कारोबार करने लगा। ऑटो और मेटल शेयरों में बिकवाली ने बाजार की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। शुरुआती कारोबार में खरीदारी का माहौल था, लेकिन जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया। इसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर दबाव देखने को मिला। बाजार में गिरावट के बीच निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर है। Sensex और Nifty में गिरावट, शुरुआती तेजी पड़ी फीकी बुधवार को बाजार की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ हुई थी। कुछ बड़े शेयरों में खरीदारी से प्रमुख इंडेक्स को सहारा मिला। हालांकि, ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू होने के बाद सेंसेक्स अपनी बढ़त बरकरार नहीं रख सका। दिन के उच्चतम स्तर से करीब 1,200 अंक की गिरावट ने बाजार में जारी उतार-चढ़ाव को उजागर किया। निफ्टी पर भी दबाव देखने को मिला। निवेशक फिलहाल बाजार में बड़े दांव लगाने के बजाय कारोबार से जुड़े संकेतों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। Auto और Metal Stocks में क्यों बढ़ी बिकवाली? बाजार की गिरावट में ऑटो और मेटल सेक्टर के शेयरों की कमजोरी चर्चा में रही। इन सेक्टरों में बिकवाली से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। ऑटो कंपनियों के शेयरों पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए वाहन बिक्री, मांग और उत्पादन लागत जैसे पहलू अहम हैं। वहीं, मेटल कंपनियों के प्रदर्शन पर वैश्विक मांग, धातुओं की कीमतों और औद्योगिक गतिविधियों का असर पड़ता है। हालांकि, पूरे सेक्टर को एक ही नजर से देखना सही नहीं होगा। अलग-अलग कंपनियों के शेयरों में उनकी वित्तीय स्थिति और कारोबार के आधार पर अलग-अलग चाल देखने को मिल सकती है। Crude Oil Price में तेजी से बढ़ी चिंता अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भी भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। तेल महंगा होने से भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर महंगाई, परिवहन खर्च और कई कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे कुछ कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से निवेशक वैश्विक घटनाक्रम और तेल बाजार की चाल पर नजर रख रहे हैं। IT Stocks और Reliance पर भी निवेशकों की नजर जहां ऑटो और मेटल शेयरों में दबाव देखने को मिला, वहीं आईटी सेक्टर और रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े घटनाक्रम भी बाजार की चर्चा में रहे। आईटी कंपनियों के तिमाही नतीजे और कारोबार की संभावनाएं निवेशकों के लिए अहम हैं। इसके अलावा, जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO से जुड़ी गतिविधियों पर भी बाजार की नजर बनी हुई है। हालांकि, किसी एक कंपनी में खरीदारी या तेजी से पूरे बाजार की दिशा तय नहीं होती। सेंसेक्स और निफ्टी पर कई बड़े शेयरों और सेक्टरों का संयुक्त असर पड़ता है। Share Market में गिरावट की 4 बड़ी वजहें निवेशक अब किन बातों पर रखें नजर? आने वाले कारोबारी सत्रों में कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, वैश्विक बाजारों का रुख और कंपनियों के तिमाही नतीजे अहम रहेंगे। इन संकेतों से बाजार की दिशा को समझने में मदद मिल सकती है, हालांकि बाजार की चाल का सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल एक दिन की तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला न लें। निवेश से पहले कंपनी के प्रदर्शन, अपनी जोखिम क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना बेहतर रहता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

मध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में विवादों की लंबी फेहरिस्त, खरीदी से लेकर भर्ती तक उठे सवाल

मध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने के उद्देश्य से अप्रैल 2024 में डीन की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव किया गया था। पदोन्नति की पुरानी व्यवस्था के स्थान पर 18 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पहली बार सीधी भर्ती के जरिए डीन नियुक्त किए गए। इसका उद्देश्य कॉलेजों के प्रशासन और वित्तीय कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना था। हालांकि, करीब ढाई साल बाद भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों से जुड़ी शिकायतों में कमी आती नजर नहीं आ रही है। कहीं मेडिकल उपकरणों की खरीदी में अनियमितताओं के आरोप लगे, तो कहीं कर्मचारियों की भर्ती और वित्तीय लेन-देन पर सवाल उठे। कई मामलों में जांच शुरू हुई, जबकि कुछ मामलों में पुलिस और लोकायुक्त तक कार्रवाई के लिए पहुंचे। रीवा मेडिकल कॉलेज में डीन बदले, अस्पताल की घटनाओं से उठे सवाल स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के गृह जिले रीवा में मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पताल में पहले प्रसूता की मौत और फिर जीवित व्यक्ति को मृत घोषित किए जाने जैसी घटनाएं सामने आईं। इसके बाद डीन डॉ. सुनील अग्रवाल को पद से हटाकर सतना भेज दिया गया। उनकी जगह डॉ. शशिधर गर्ग को नया डीन नियुक्त किया गया। इसी कॉलेज से जुड़े संजय गांधी अस्पताल में 80 नर्सिंग छात्राओं ने ईएनटी विभाग के एक डॉक्टर पर अभद्रता करने का आरोप लगाया। इन घटनाओं ने अस्पताल के प्रशासन और व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए। उधर, शिवपुरी मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारियों पर आयुष्मान योजना की प्रोत्साहन राशि अपने खातों में ट्रांसफर कराने के आरोप लगे। मामले में लोकायुक्त ने प्रारंभिक जांच शुरू की है। वहीं, नए मेडिकल कॉलेजों में डीन की सीधी भर्ती को लेकर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है। इंदौर: मशीन खरीदी में गड़बड़ी के आरोप, डीन को आरोप पत्र इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में मेडिकल उपकरणों की खरीदी को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। शिकायत में दावा किया गया कि करीब 98 लाख रुपए में खरीदी गई ओटी लाइट जैसी लाइट जेम पोर्टल पर लगभग 7 लाख रुपए में उपलब्ध थी। इसके अलावा करीब 70.50 लाख रुपए के कैमरों की खरीदी पर भी सवाल उठे। मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय समिति गठित की गई। लोकायुक्त ने भी विभाग से रिपोर्ट मांगी है। वहीं, जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन की खरीदी के मामले में डीन के खिलाफ आरोप पत्र जारी किए जाने की जानकारी सामने आई। भोपाल: उपकरणों की खरीदी पर शिकायत, वेतन नहीं मिलने से हड़ताल भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में मेडिकल उपकरणों की खरीदी को लेकर शिकायतें सामने आईं। मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई। शिकायतकर्ता ने जांच समिति की रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति मांगते हुए मुख्य सचिव को भी आवेदन दिया। इसी बीच हमीदिया अस्पताल में आउटसोर्स कर्मचारियों को दो महीने तक वेतन नहीं मिलने के कारण हड़ताल करनी पड़ी। इससे अस्पताल के कामकाज और कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर सवाल उठे। ग्वालियर: डाइट सप्लाई और वित्तीय अनियमितताओं की जांच ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज में मरीजों के लिए डाइट सप्लाई को लेकर विवाद सामने आया। इसके अलावा वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें भी जांच के दायरे में आईं। वर्ष 2024 में कॉलेज में करीब 19 करोड़ रुपए के खर्च और खरीदी से जुड़े मामलों की जांच की जानकारी सामने आई थी। इन मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए। जबलपुर: 1.63 करोड़ रुपए की गड़बड़ी, तीन कर्मचारी गिरफ्तार जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज की कैश शाखा में वर्ष 2026 में 1.63 करोड़ रुपए से अधिक की राशि के हिसाब में गड़बड़ी का मामला सामने आया। आंतरिक जांच के बाद डीन डॉ. नवनीत सक्सेना की शिकायत पर पुलिस ने पांच कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। इनमें से तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। खंडवा से सागर तक, दूसरे मेडिकल कॉलेजों में भी शिकायतें खंडवा मेडिकल कॉलेज: छात्रों ने मेस की साफ-सफाई और भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में रसोई में गंदगी और कीड़े-मकोड़े मिलने की बात सामने आई। विदिशा मेडिकल कॉलेज: आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति में गड़बड़ी के आरोप लगे। शहडोल मेडिकल कॉलेज: नवजात के इलाज में लापरवाही के आरोपों के बाद हंगामा हुआ और पुलिस ने जांच शुरू की। इसके अलावा करीब 150 कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि और एसीआर से जुड़ी शिकायतें कीं। दतिया मेडिकल कॉलेज: वर्ष 2026 में नर्सिंग अधीक्षक की नियुक्ति को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया। रतलाम मेडिकल कॉलेज: अनियमितताओं से जुड़ी शिकायत का मुद्दा विधानसभा में उठाया गया। सागर मेडिकल कॉलेज: सोनोग्राफी सेवा बंद रहने और इलाज में लापरवाही सहित कई शिकायतें सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज कराई गईं। सीधी भर्ती से बदलाव की उम्मीद, लेकिन जवाबदेही पर सवाल सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डीन की नियुक्ति प्रक्रिया बदलने का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना और वित्तीय कामकाज में पारदर्शिता लाना था। लेकिन अलग-अलग कॉलेजों से सामने आए मामलों ने निगरानी व्यवस्था, खरीद प्रक्रिया, भर्ती और अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। अब इन शिकायतों की जांच और उन पर होने वाली कार्रवाई अहम होगी। इससे ही स्पष्ट होगा कि अनियमितताओं के आरोपों पर कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है और सरकारी मेडिकल कॉलेजों की व्यवस्था में कितना सुधार आता है।

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