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Amarnath Yatra

Amarnath Yatra 2026 गुफा में दिखा Baba Barfani, श्रद्धालुओं में उत्साह

जम्मू-कश्मीर की पवित्र अमरनाथ गुफा से इस साल की अमरनाथ यात्रा 2026 (Amarnath Yatra) से पहले बाबा बर्फानी (Baba Barfani) की पहली झलक सामने आई है। गुफा के अंदर इस बार प्राकृतिक रूप से बना बर्फ का शिवलिंग करीब 6 से 7 फीट ऊँचा दिखाई दे रहा है, जिसे देखकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिल रहा है। 6–7 फीट का प्राकृतिक Shivling बना आकर्षण हर साल की तरह इस बार भी यह बर्फीला शिवलिंग मौसम के साथ अपने अलग-अलग रूप में नजर आता है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव का दिव्य स्वरूप मानते हैं। अमरनाथ की गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन को बेहद पवित्र और दुर्लभ माना जाता है। 3 जुलाई से शुरू होगी Amarnath Yatra 2026 इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रही है। यात्रा से पहले सुरक्षा बलों ने गुफा क्षेत्र का निरीक्षण किया और तैयारियों का जायजा लिया। जवानों ने भी मौके पर पहुंचकर बाबा बर्फानी के दर्शन किए। सुरक्षा और व्यवस्थाओं की कड़ी तैयारी प्रशासन का कहना है कि इस बार यात्रा को पहले से ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। रास्तों की निगरानी, मेडिकल सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था पर खास ध्यान दिया जा रहा है। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र देशभर से हर साल लाखों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों को पार कर अमरनाथ गुफा तक पहुंचते हैं और बाबा बर्फानी के दर्शन करते हैं। इस साल भी बड़ी संख्या में भक्तों के आने की उम्मीद है। प्रशासन की श्रद्धालुओं से अपील स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करें और नियमों का पालन करते हुए सुरक्षित दर्शन करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Adhik Maas

Adhik Maas 2026: भक्ति का महीना शुरू, जानें शुभ मंत्र और धार्मिक महत्व

आज से हिंदू पंचांग का सबसे पवित्र और खास समय Adhik Maas 2026 (Purushottam Maas) शुरू हो गया है। इसे सामान्य भाषा में मलमास भी कहा जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह कोई अशुभ समय नहीं, बल्कि भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत शुभ महीना माना जाता है। इस महीने को “पुरुषोत्तम मास” इसलिए कहा जाता है क्योंकि स्वयं भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम देकर सम्मानित किया था। Adhik Maas 2026 क्या है और क्यों खास माना जाता है? अधिकमास हर 2–3 साल में आता है, जब चंद्र और सौर कैलेंडर के बीच अंतर को संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जब किसी देवता ने इस अतिरिक्त महीने को स्वीकार नहीं किया, तब भगवान विष्णु ने इसे अपनाकर इसे भक्ति और साधना का सर्वोच्च समय बना दिया। यही कारण है कि इस महीने में भौतिक कार्यों से ज्यादा आध्यात्मिक गतिविधियों को महत्व दिया जाता है। Purushottam Maas में क्या करना चाहिए (Do’s) इस पूरे महीने में किए गए अच्छे कर्म कई गुना फल देने वाले माने जाते हैं: अधिकमास में क्या नहीं करना चाहिए (Don’ts) इस पवित्र अवधि में कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है: Adhik Maas 2026 के शक्तिशाली मंत्र इस महीने में मंत्र जप का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इससे मन शांत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। 1. विष्णु मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”रोज 108 बार जप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। 2. महामंत्र हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरेहरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे 3. शांति मंत्र “शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्…” Adhik Maas 2026 का महत्व (Human Touch) आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में यह महीना एक तरह से “pause” लेने का मौका देता है। भागदौड़ के बीच कुछ समय अपने मन, विचार और आध्यात्म से जुड़ने का अवसर मिलता है। कई लोग इस महीने में व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ बढ़ाते हैं और अपने जीवन में सरलता लाने की कोशिश करते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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वट सावित्री

वट सावित्री 2026: सुहागिन महिलाओं में दिखी आस्था, मंदिरों में उमड़ी भीड़

ज्येष्ठ अमावस्या के मौके पर शनिवार को देशभर में वट सावित्री व्रत श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिरों और बरगद के पेड़ों के पास सुहागिन महिलाओं की भीड़ देखने को मिली। महिलाओं ने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा की। इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना की, बरगद के पेड़ के चारों ओर धागा बांधा और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी। कई जगहों पर सामूहिक पूजा का आयोजन भी किया गया, जहां महिलाओं ने पूरे विधि-विधान से व्रत किया। क्यों खास माना जाता है Vat Savitri Vrat? हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत को सुहाग और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार माता सावित्री ने अपने तप, प्रेम और दृढ़ निश्चय से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि बरगद का पेड़ त्रिदेवों का स्वरूप होता है। इसकी जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व होता है। परिक्रमा के समय बोलें ये शुभ मंत्र बरगद के पेड़ की परिक्रमा करते समय महिलाएं इस मंत्र का जाप करती हैं— “वट वृक्ष त्वं देववृक्षः त्वं च विष्णुस्वरूपधृक्।पति आयुः प्रदेहि त्वं नमस्ते वटवृक्षाय॥” मान्यता है कि श्रद्धा से इस मंत्र का जाप करने पर वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। ऐसे की जाती है वट सावित्री की पूजा बाजारों में भी दिखी रौनक वट सावित्री व्रत को लेकर पूजा सामग्री, फल, मिठाई और सजावटी सामान की दुकानों पर भी अच्छी भीड़ देखने को मिली। महिलाओं ने पूजा के लिए विशेष रूप से लाल और पीले रंग की सामग्री खरीदी। कई जगहों पर बरगद के पेड़ों को फूलों और रंगोली से सजाया गया। परिवार और रिश्तों से जुड़ा त्योहार वट सावित्री व्रत सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास, प्रेम और समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है। बदलते दौर में भी यह पर्व भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को मजबूती से जोड़कर रखे हुए है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शनि जयंती

शनि जयंती 2026: कल का दिन क्यों है खास? Shani Dev देंगे किसे सफलता और किसे चेतावनी

शनि जयंती 2026 इस बार 16 मई 2026 (शनिवार) को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में इसे बेहद पवित्र और शक्तिशाली दिन माना जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान शनि देव के जन्मोत्सव का उत्सव होता है। शनिवार और ज्येष्ठ अमावस्या का यह दुर्लभ संयोग इस वर्ष शनि जयंती के महत्व को और बढ़ा रहा है। देशभर के शनि मंदिरों में इस दिन भक्त विशेष पूजा, व्रत और दान करते हैं। माना जाता है कि इस दिन शनि देव की कृपा से जीवन की परेशानियों में कमी आती है और कर्मों का फल बेहतर रूप में मिलता है। Shani Jayanti 2026 का धार्मिक महत्व Shani Jayanti को कर्म, न्याय और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है। शनि देव को “कर्मफल दाता” कहा गया है, यानी व्यक्ति के अच्छे-बुरे कर्मों का परिणाम समय के साथ देते हैं। इस दिन पूजा करने से जीवन में स्थिरता, बाधाओं से राहत और मानसिक शांति मिलने की मान्यता है। किसकी चमकेगी किस्मत? इस Shani Jayanti पर कुछ लोगों के लिए समय काफी शुभ माना जा रहा है: ऐसे लोगों के लिए रुके हुए कामों में तेजी, आर्थिक लाभ और नए अवसरों के योग बन सकते हैं। किसे रहना होगा सावधान? कुछ लोगों को इस समय थोड़ा ध्यान रखने की जरूरत हो सकती है: इस समय सोच-समझकर कदम उठाना और धैर्य बनाए रखना सबसे जरूरी माना जाता है। सरल उपाय शनि देव को प्रसन्न करने के लिए इस दिन ये उपाय किए जाते हैं: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया 2026 Gold नहीं, ये 1 दान दिलाएगा सुख-समृद्धि और Good Luck

अक्षय तृतीया का दिन हिंदू धर्म में बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया हर अच्छा काम—चाहे वो पूजा हो, दान हो या नई शुरुआत—उसका फल कभी खत्म नहीं होता। यही वजह है कि लोग इस दिन को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के मौके के रूप में देखते हैं। इस साल भी अक्षय तृतीया को लेकर लोगों में खास उत्साह है। जहां एक तरफ बाजारों में सोना-चांदी खरीदने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान-पुण्य करने का महत्व भी काफी बढ़ जाता है। क्यों खास है “Ann Daan”? प्रसिद्ध संत Premanand Maharaj का कहना है कि अगर आप अक्षय तृतीया पर सिर्फ एक काम करना चाहते हैं, तो वो है अन्न दान। उनके अनुसार, जरूरतमंद को भोजन या अनाज देना सबसे बड़ा पुण्य है। उनका मानना है कि जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से गेहूं, चावल या दाल का दान करता है, उसके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। ये सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि इंसानियत का सबसे सरल और असरदार तरीका भी है। कैसे करें ये आसान उपाय? अक्षय तृतीया के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा करें। इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार अन्न का दान करें। आप चाहें तो किसी गरीब परिवार को राशन दे सकते हैं या किसी भूखे व्यक्ति को भोजन करा सकते हैं। ध्यान रखने वाली बात ये है कि दान दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सच्चे मन से किया जाए—तभी उसका सही फल मिलता है। सिर्फ सोना खरीदना ही नहीं, ये भी करें अक्सर लोग अक्षय तृतीया को सिर्फ गोल्ड खरीदने से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसका असली महत्व दान और अच्छे कर्मों में छिपा है। इस दिन: दिल से किया छोटा काम, बड़ा असर अक्षय तृतीया हमें ये सिखाती है कि छोटे-छोटे अच्छे काम भी जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। अगर आप इस दिन किसी की मदद करते हैं, तो उसका असर सिर्फ सामने वाले पर ही नहीं, बल्कि आपके जीवन पर भी पड़ता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ram Navami

Ram Navami 2026 सही Date,शुभ मुहूर्त और Puja Samagri पूरी जानकारी

राम नवमी (Ram Navami) हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार है। यह दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और भक्त इस दिन व्रत, पूजा और आरती करके भगवान की कृपा पाने का प्रयास करते हैं। साल 2026 में राम नवमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच थोड़ी कन्फ्यूजन है कि यह 26 मार्च को है या 27 मार्च को। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं। Ram Navami 2026 Date: 26 या 27 मार्च? वर्ष 2026 में राम नवमी 26 मार्च, गुरुवार को पड़ रही है। कई लोग सोचते हैं कि 27 मार्च को मनाना चाहिए, लेकिन हिंदू पंचांग के अनुसार जिस दिन मध्याह्न (दोपहर) में नवमी तिथि आती है, उसी दिन राम नवमी मनाई जाती है, क्योंकि भगवान श्रीराम का जन्म दोपहर में हुआ था। इस कारण 26 मार्च ही मुख्य और शुभ दिन माना जाता है। Shubh Muhurat for Ram Navami 2026 राम नवमी पूजा का सबसे महत्वपूर्ण समय मध्याह्न होता है। इस समय भगवान श्रीराम की पूजा और अभिषेक करना सबसे शुभ माना जाता है। Ram Navami Puja Samagri List राम नवमी की पूजा में निम्न सामग्रियों की आवश्यकता होती है। इन्हें पहले से तैयार करना शुभ माना जाता है: मुख्य सामग्री Ram Navami Puja Vidhi (संक्षेप में) हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शैलपुत्री

चैत्र नवरात्रि 2026 Day 1 शैलपुत्री माता की आराधना, व्रत और शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि 2026 का पहला दिन 12 मार्च को मनाया जाएगा। यह नवरात्रि वसंत ऋतु के आगमन और माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का शुभ समय है। हर दिन माँ के अलग रूप की पूजा की जाती है, और पहले दिन शैलपुत्री माता की उपासना होती है। शैलपुत्री माता – पहला दिन का महत्व ‘शैलपुत्री’ का अर्थ है “पर्वत की कन्या”। माता शैलपुत्री भगवान शिव और पार्वती की पुत्री हैं। उनके वाहन बैल हैं और हाथ में त्रिशूल और कमल धारण है। शैलपुत्री माता धैर्य, साहस और मानसिक स्थिरता का प्रतीक हैं। उनके आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का विकास होता है। शैलपुत्री माता का पूजन और मंत्र व्रत और अनुष्ठान शैलपुत्री माता के दिन विशेष सुझाव हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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चैत्र नवरात्रि 2026

चैत्र नवरात्रि 2026 माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा और व्रत नियम

जानें चैत्र नवरात्रि 2026 की तिथियाँ, महत्व, व्रत नियम और पूजा विधियाँ। यह पर्व सिर्फ भक्ति और श्रद्धा का समय नहीं है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, समर्पण और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक भी माना जाता है। चैत्र नवरात्रि 2026 की तारीखें और महत्त्व चैत्र नवरात्रि को वसंत ऋतु में मनाया जाता है और यह नया हिंदू संवत्सर शुरू करने का प्रतीक है। नवरात्रि के अंतिम दिन राम नवमी भी मनाई जाती है, जो भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का शुभ अवसर है। माँ दुर्गा के नौ रूप और उनके लाभ हर दिन नवरात्रि में माँ दुर्गा के अलग-अलग रूप की पूजा की जाती है, जिनसे विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। दिन देवी का रूप प्रमुख गुण 1 शैलपुत्री शक्ति और मूल तत्व 2 ब्रह्मचारिणी तप और समर्पण 3 चंद्रघंटा साहस और धैर्य 4 कुश्मांडा आनंद और सृजन शक्ति 5 स्कंदमाता मातृत्व और प्रेम 6 कात्यायनी वीरता और साहस 7 कालरात्रि भय नाश 8 महागौरी पवित्रता और शांति 9 सिद्धिदात्री सिद्धि और सफलता घट स्थापना और पूजा विधि नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है। घर या मंदिर में कलश स्थापित कर माँ दुर्गा के स्वागत के लिए मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभता आती है। व्रत नियम और पूजा के टिप्स इन नियमों का पालन करने से न केवल धार्मिक पुण्य मिलता है, बल्कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। समाज में नवरात्रि का महत्व नवरात्रि के अवसर पर धार्मिक स्थलों पर विशेष सुरक्षा और भीड़-प्रबंधन की तैयारी की जाती है। श्रद्धालुओं की सुविधा और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन अतिरिक्त कदम उठाता है। नवरात्रि का संदेश नवरात्रि केवल पूजा और उत्सव नहीं है, बल्कि यह शक्ति, समर्पण और आत्म-नवीनीकरण का पर्व है। माँ दुर्गा के आदर्शों — धैर्य, करुणा, वीरता और शक्ति — को अपनाकर जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Chandra Grahan

Chandra Grahan 2026 भारत में कितने बजे दिखा Lunar Eclipse? जानें Time, Sutak Kaal और पूरी जानकारी

3 मार्च 2026, मंगलवार — होली के रंगों के बीच आसमान में भी एक खास नज़ारा देखने को मिला। इस दिन पूर्ण Chandra Grahan 2026 यानी Lunar Eclipse लगा। देशभर में लोगों के मन में उत्सुकता थी कि भारत में यह ग्रहण कितने बजे दिखेगा और क्या “ब्लड मून” साफ दिखाई देगा। दिन में शुरू हुआ यह खगोलीय आयोजन शाम तक चर्चा का विषय बना रहा। आइए आसान भाषा में समझते हैं पूरी जानकारी। Chandra Grahan 2026 Date and Time in India (IST) यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) था। पूर्ण अवस्था में चंद्रमा अक्सर लालिमा लिए दिखाई देता है, जिसे आम बोलचाल में “Blood Moon” कहा जाता है। भारत में कब और कितना दिखा Chandra Grahan? भारत में ग्रहण का मुख्य भाग चंद्रमा के उदय से पहले ही हो चुका था। इसलिए अधिकांश शहरों में लोग केवल अंतिम चरण ही देख पाए। पूर्वोत्तर भारत में चंद्रमा थोड़ा पहले उदित हुआ, जिससे वहां ग्रहण कुछ अधिक समय तक नजर आया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। इस बार सूतक काल सुबह करीब 6:20 बजे से प्रभावी माना गया। कई मंदिरों के कपाट बंद रहे कैसा दिखा चंद्रमा? (Human Experience) शाम को जब लोग छतों और बालकनियों में पहुंचे, तो चंद्रमा हल्की धुंधली छाया में दिखाई दे रहा था। जिन जगहों पर आसमान साफ था, वहां चंद्रमा का रंग थोड़ा तांबई झलक लिए नजर आया। हालांकि भारत में पूर्ण “Blood Moon” का गहरा लाल रंग साफ तौर पर नहीं दिखा, फिर भी यह अनुभव खास रहा। होली की शाम को आसमान में यह दृश्य कई लोगों के लिए यादगार बन गया। Chandra Grahan 2026 का वैज्ञानिक महत्व पूर्ण चंद्र ग्रहण तब लगता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया पूरी तरह चंद्रमा पर पड़ती है। यह एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है और इसे देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की जरूरत नहीं होती। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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देवउठनी एकादशी

देवउठनी एकादशी 2025 भगवान विष्णु जागेंगे नींद से, शुरू होंगे सभी शुभ काम

देवउठनी एकादशी 2025 (Dev Uthani Ekadashi 2025) हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं और इसी के साथ मांगलिक कार्यों की शुरुआत मानी जाती है। इसे प्रबोधिनी एकादशी या देव उठावनी एकादशी भी कहा जाता है। आइए जानते हैं इस दिन का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और तुलसी विवाह की पूरी जानकारी। देवउठनी एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त इस वर्ष देवउठनी एकादशी 1 नवंबर 2025 (शनिवार) को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त भगवान विष्णु की विशेष पूजा करते हैं और उनसे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। देवउठनी एकादशी का धार्मिक महत्व हिंदू मान्यता के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। इस चार माह की अवधि को चातुर्मास कहा जाता है, जिसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता।देवउठनी एकादशी के दिन जब भगवान विष्णु नींद से जागते हैं, तब से विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत होती है।यह दिन आध्यात्मिक जागृति, नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। तुलसी विवाह 2025: तिथि और महत्व देवउठनी एकादशी के अगले दिन यानी 2 नवंबर 2025 (रविवार) को तुलसी विवाह मनाया जाएगा।इस दिन भगवान विष्णु का विवाह तुलसी माता से कराया जाता है। यह शुभ कार्य घर-घर में मनाया जाता है। माना जाता है कि तुलसी विवाह करवाने से जीवन में शांति, प्रेम और समृद्धि आती है तथा विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं। देवउठनी एकादशी 2025 पूजा विधि इस दिन से शुरू होते हैं मांगलिक कार्य देवउठनी एकादशी के बाद विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे सभी शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है।यह दिन शुभता, सौभाग्य और नए आरंभ का प्रतीक है। जो लोग भगवान विष्णु और तुलसी माता की भक्ति से पूजा करते हैं, उनके जीवन में धन, यश और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है। महत्वपूर्ण बातें देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi 2025) का दिन धर्म, आस्था और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक है। इस दिन भगवान विष्णु के जागरण के साथ ही शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। श्रद्धा और भक्ति के साथ इस व्रत को करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और शांति का संचार होता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अमरनाथ यात्रा 2026: हाईटेक सुरक्षा कवच में होगी बाबा बर्फानी की यात्रा

Amarnath यात्रा 2026: हाईटेक सुरक्षा कवच में होगी बाबा बर्फानी की यात्रा

Amarnath यात्रा 2026 को लेकर इस बार सुरक्षा व्यवस्था पहले से ज्यादा मजबूत और हाईटेक बनाई जा रही है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने बालटाल मार्ग से लेकर पवित्र अमरनाथ गुफा तक CCTV कैमरों का बड़ा नेटवर्क तैयार किया है। अब यात्रा मार्ग के हर कदम पर नजर रखी जाएगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। प्रशासन के अनुसार, यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां इस बार तकनीक का सहारा लेकर पूरी यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने में जुटी हैं। पहाड़ी रास्तों, संवेदनशील इलाकों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर विशेष कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो 24 घंटे निगरानी करेंगे। सिर्फ CCTV ही नहीं, बल्कि कंट्रोल रूम से लाइव मॉनिटरिंग की भी व्यवस्था की गई है। सुरक्षा बलों और प्रशासन की टीमें हर गतिविधि पर नजर रखेंगी। अगर कहीं भी कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है, तो तुरंत अलर्ट जारी किया जाएगा। यात्रियों की सुविधा के लिए मेडिकल टीम, आपदा राहत दल और हेल्प सेंटर भी तैनात किए जाएंगे। प्रशासन का कहना है कि इस बार यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए आसान बनाने पर विशेष फोकस किया जा रहा है। हर साल की तरह इस बार भी देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए पहुंचेंगे। ऐसे में हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था श्रद्धालुओं को भरोसा और सुरक्षित माहौल देने का काम करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Himachal में भूकंप के तीन झटकों से दहशत, कई मकान क्षतिग्रस्त; पालमपुर में अस्पताल की छत गिरी

Himachal में भूकंप के तीन झटकों से दहशत, कई मकान क्षतिग्रस्त; पालमपुर में अस्पताल की छत गिरी

Himachal Pradesh में शुक्रवार देर रात और शनिवार सुबह भूकंप के तीन तेज झटकों ने लोगों में दहशत फैला दी। लगातार आए झटकों से लोग डरकर अपने घरों से बाहर निकल आए। कई इलाकों में मकानों में दरारें आ गईं, जबकि कुछ जगहों पर दीवारें और छतें भी क्षतिग्रस्त हो गईं। सबसे ज्यादा असर कांगड़ा और पालमपुर इलाके में देखने को मिला। पालमपुर के एक सरकारी अस्पताल की छत का हिस्सा अचानक गिर गया। हादसे के समय अस्पताल में मरीज और स्टाफ मौजूद थे। गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गई, लेकिन लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि पहला झटका महसूस होते ही घरों में रखे सामान हिलने लगे। कई लोग डर के कारण पूरी रात घरों के बाहर खुले मैदानों और सड़कों पर बिताने को मजबूर हुए। बच्चों और बुजुर्गों में खासा डर देखने को मिला। प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और प्रभावित इलाकों का निरीक्षण शुरू किया। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और सतर्क रहें। जिन मकानों में दरारें आई हैं, वहां रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है। भूकंप के झटकों के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। लोग लगातार प्रशासन से अपडेट ले रहे हैं और किसी बड़े नुकसान की आशंका को लेकर चिंतित हैं। मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग हालात पर नजर बनाए हुए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CJI Surya Kant

CJI Surya Kant London Event Row: विदेश में लेक्चर के बीच विवाद, भारत का सख्त रुख

लंदन में आयोजित एक अकादमिक कार्यक्रम के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant) के लेक्चर में कथित तौर पर हंगामे की स्थिति बन गई। इस घटना के बाद भारत में कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है और इसे संस्थागत गरिमा के खिलाफ बताया जा रहा है। London Event में आखिर हुआ क्या? रिपोर्ट्स के अनुसार, लंदन के एक विश्वविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में CJI सूर्यकांत “AI, लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय कानून” जैसे विषय पर संबोधन दे रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने बीच-बीच में सवाल उठाकर और आपत्ति जताकर कार्यक्रम में बाधा डालने की कोशिश की। कुछ देर के लिए माहौल असहज हो गया, हालांकि बाद में कार्यक्रम फिर से सामान्य रूप से आगे बढ़ा। भारत की सख्त प्रतिक्रिया इस घटना के बाद भारत की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। भारतीय उच्चायोग ने इसे “असभ्य और अनुचित व्यवहार” बताया और कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस तरह की हरकतें स्वीकार्य नहीं हैं। सरकारी और कूटनीतिक स्तर पर यह संदेश दिया गया कि न्यायपालिका जैसे संवेदनशील संस्थानों से जुड़े कार्यक्रमों में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखना बेहद जरूरी है। Freedom of Speech vs Institutional Respect इस पूरे मामले ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है कि: कुछ जानकारों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सवाल उठाना स्वाभाविक है, लेकिन उसे व्यवस्थित और सम्मानजनक तरीके से किया जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज जैसे ही घटना से जुड़े वीडियो सामने आए, सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई।कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी बताया, तो कुछ ने इसे “अशोभनीय व्यवहार” करार दिया। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal जा रही टूरिस्ट बस डंपर से टकराई, चालक समेत 12 यात्री घायल

Nepal जा रही टूरिस्ट बस डंपर से टकराई, चालक समेत 12 यात्री घायल

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में शुक्रवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। Nepal जा रही एक टूरिस्ट बस सामने चल रहे डंपर से टकरा गई। हादसे में बस चालक समेत करीब एक दर्जन यात्री घायल हो गए। हादसे के बाद लखनऊ-अयोध्या मार्ग पर करीब डेढ़ घंटे तक यातायात प्रभावित रहा और सड़क पर लंबा जाम लग गया। जानकारी के मुताबिक, बस में सवार यात्री नेपाल घूमने जा रहे थे। सुबह के समय तेज रफ्तार में चल रही बस अचानक अनियंत्रित होकर डंपर से भिड़ गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों को बस से बाहर निकाला और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस और एंबुलेंस टीम ने घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। कुछ यात्रियों को मामूली चोटें आई हैं, जबकि चालक समेत कुछ लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के चलते लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त बस और डंपर को सड़क से हटवाया, जिसके बाद करीब डेढ़ घंटे बाद यातायात सामान्य हो सका। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर समय रहते स्थानीय लोग मदद के लिए नहीं पहुंचते, तो हादसा और भी बड़ा हो सकता था। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

‘तुम प्रेग्नेंट कैसे हो सकती हो?’: ट्विशा से समर्थ के सवाल पर टिकी सीबीआई जांच, प्रेग्नेंसी टर्मिनेट विवाद में नए खुलासे

प्रेग्नेंसी टर्मिनेट विवाद मामले में सीबीआई की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। अब एजेंसी की नजर ट्विशा और समर्थ के बीच हुई बातचीत पर है। जांच के दौरान कुछ ऐसे चैट और बातचीत सामने आई हैं, जिन्होंने इस केस को नया मोड़ दे दिया है। समर्थ ने पूछा- यह बच्चा किसका है? सूत्रों के मुताबिक, समर्थ ने ट्विशा से सवाल किया था कि वह प्रेग्नेंट कैसे हो सकती है और यह बच्चा आखिर किसका है। बताया जा रहा है कि इसी बातचीत के बाद दोनों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। सीबीआई अब इन्हीं सवालों और बातचीत को जांच का अहम हिस्सा मान रही है। डिजिटल सबूत खंगाल रही सीबीआई जांच एजेंसी कॉल रिकॉर्ड, चैट्स और अन्य डिजिटल सबूतों की बारीकी से जांच कर रही है। मामले से जुड़े कई लोगों से पूछताछ भी जारी है। अधिकारियों का मानना है कि दोनों के बीच हुई बातचीत से केस के कई अहम पहलुओं का खुलासा हो सकता है। मानसिक दबाव के एंगल पर भी जांच सीबीआई यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या ट्विशा पर किसी तरह का मानसिक दबाव बनाया गया था। प्रेग्नेंसी टर्मिनेट कराने के पीछे किन परिस्थितियों ने भूमिका निभाई, इस पहलू पर भी जांच की जा रही है। सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। रिश्तों में भरोसा, जिम्मेदारी और महिलाओं के अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि परिवार और करीबी लोग फिलहाल खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी सच्चाई सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और सभी मेडिकल व डिजिटल रिकॉर्ड्स की गहराई से जांच की जा रही है। एजेंसी का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी। अधिक जानकारी के लिए इस मामले से जुड़ी हर बड़ी अपडेट और ताजा खबरें पढ़ने के लिए विजिट करें www.deshharpal.com

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