चैत्र नवरात्रि 2026 का पहला दिन 12 मार्च को मनाया जाएगा। यह नवरात्रि वसंत ऋतु के आगमन और माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का शुभ समय है। हर दिन माँ के अलग रूप की पूजा की जाती है, और पहले दिन शैलपुत्री माता की उपासना होती है।
शैलपुत्री माता – पहला दिन का महत्व
‘शैलपुत्री’ का अर्थ है “पर्वत की कन्या”। माता शैलपुत्री भगवान शिव और पार्वती की पुत्री हैं। उनके वाहन बैल हैं और हाथ में त्रिशूल और कमल धारण है।
शैलपुत्री माता धैर्य, साहस और मानसिक स्थिरता का प्रतीक हैं। उनके आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का विकास होता है।
शैलपुत्री माता का पूजन और मंत्र
- साधारण मंत्र: “ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः”
- पूजा विधि:
- स्वच्छ स्थान पर माता की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
- फूल, अक्षत, दीप और धूप से पूजा करें।
- मंत्र का जाप करते हुए माता की आराधना करें।
व्रत और अनुष्ठान
- दिनभर फल, दूध और जल का सेवन करें।
- उपवास रखने वाले लोग सादगी और श्रद्धा के साथ दिन व्यतीत करें।
- सुबह उठकर जल अर्पित करना और शाम को दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
शैलपुत्री माता के दिन विशेष सुझाव
- नए कार्य की शुरुआत करें, यह दिन फलदायक होता है।
- घर को साफ और स्वच्छ रखें, नकारात्मक ऊर्जा से बचाव के लिए।
- माता के आशीर्वाद के लिए ध्यान और भजन करें।
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