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Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
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PM Modi

Khelo India में PM Modi का बड़ा संवाद, Youth Power से Viksit Bharat तक होगी चर्चा

खेल के मैदान से लेकर देश के भविष्य तक, युवाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) Khelo India से जुड़े युवा खिलाड़ियों और युवाओं के साथ संवाद करेंगे। इस बातचीत में खिलाड़ियों की अब तक की खेल यात्रा, उनके अनुभव और Viksit Bharat के लक्ष्य को लेकर उनके विचार सुने जाएंगे। इस संवाद में खेल जगत की चर्चित हस्तियों की मौजूदगी भी इसे खास बनाती है। ओलंपिक पदक विजेता बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल और भारतीय एथलेटिक्स की दिग्गज पीटी ऊषा भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगी। खेलों से जुड़े युवाओं से सीधे संवाद PM Modi का युवाओं के साथ संवाद अक्सर उनके अनुभवों और भविष्य की योजनाओं पर केंद्रित रहा है। Khelo India कार्यक्रम में भी खिलाड़ियों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। खिलाड़ी प्रशिक्षण के दौरान आने वाली चुनौतियों, प्रतियोगिताओं के अनुभव और खेल के क्षेत्र में मिल रहे अवसरों से जुड़े अपने सुझाव साझा कर सकते हैं। जमीनी स्तर पर खेल सुविधाओं को बेहतर बनाने के मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा बन सकते हैं। Saina Nehwal और PT Usha की मौजूदगी क्यों खास? साइना नेहवाल ने अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन में भारत को नई पहचान दिलाई। उनके करियर ने देश के युवाओं के बीच बैडमिंटन की लोकप्रियता बढ़ाने में भी बड़ी भूमिका निभाई। वहीं, पीटी ऊषा भारतीय एथलेटिक्स की उन प्रमुख हस्तियों में हैं, जिन्होंने खिलाड़ी के रूप में देश का प्रतिनिधित्व किया और बाद में खेल प्रशासन में भी सक्रिय भूमिका निभाई। ऐसे में दोनों का अनुभव युवा खिलाड़ियों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। Khelo India से छोटे शहरों की प्रतिभाओं को मौका Khelo India का फोकस देश में खेल प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर पर पहचानने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने पर रहा है। इसका असर खासतौर पर उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है, जो बड़े शहरों से बाहर रहकर खेल की दुनिया में अपना करियर बनाना चाहते हैं। खेल केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं है। इससे फिटनेस, अनुशासन, टीम भावना और युवाओं में आत्मविश्वास को भी बढ़ावा मिलता है। यही वजह है कि खेलों को देश के व्यापक विकास से जोड़कर देखा जा रहा है। Viksit Bharat के लिए युवाओं की भूमिका पर जोर प्रधानमंत्री मोदी के इस संवाद में Viksit Bharat के लक्ष्य को लेकर युवाओं की सोच भी अहम रहेगी। भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में युवा आबादी की ऊर्जा और नए विचारों को महत्वपूर्ण माना जाता है। खेलों में बेहतर infrastructure, training, coaching और प्रतियोगिताओं के अवसर बढ़ाने से भारत की नई प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे आने का रास्ता मिल सकता है। खिलाड़ियों की आवाज से आगे की राह Khelo India का यह संवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां सिर्फ मंच से भाषण नहीं, बल्कि खिलाड़ियों और युवाओं के अनुभवों को सामने लाने पर जोर रहेगा। मैदान पर पसीना बहाने वाले युवा जब अपनी वास्तविक चुनौतियां और सुझाव साझा करेंगे, तो इससे खेल व्यवस्था को लेकर भविष्य की दिशा पर भी चर्चा को बल मिल सकता है। PM Modi Khelo India संवाद में खेल, युवा शक्ति और Viksit Bharat—तीनों मुद्दे एक साथ दिखाई देंगे। अब नजर इस बात पर रहेगी कि युवा खिलाड़ी और खेल जगत की हस्तियां प्रधानमंत्री के सामने किन मुद्दों और सुझावों को प्रमुखता से रखती हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bank Holiday

Bank Holiday Today: 28 अगस्त को बैंक रहेंगे बंद, Delhi-Mumbai समेत इन शहरों पर असर

Bank Holiday 28 August 2026: रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक है और अगर आपको बैंक में कोई जरूरी काम निपटाना है तो एक बार तारीख जरूर देख लें। 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को राखी के मौके पर देश के कई शहरों में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। हालांकि, हर राज्य और शहर में छुट्टी एक जैसी नहीं है। RBI यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की Holiday List के मुताबिक बैंक की छुट्टियां मुख्य रूप से स्थानीय त्योहारों और क्षेत्रीय नियमों के आधार पर तय होती हैं। ऐसे में किसी दूसरे शहर में बैंक खुले होने का मतलब यह नहीं कि आपके शहर में भी शाखा खुली मिलेगी। 28 अगस्त को इन शहरों में Bank Branch रहेंगी बंद रक्षाबंधन के अवसर पर 28 अगस्त को कई शहरों में बैंक हॉलिडे है। इनमें अहमदाबाद, गंगटोक, जयपुर, जम्मू, कोच्चि, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, शिमला और तिरुवनंतपुरम जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। इसलिए अगर आपका बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम है, तो शाखा जाने से पहले अपने शहर की Holiday List जरूर चेक कर लें। Delhi-Mumbai वालों के लिए जरूरी अपडेट 28 अगस्त की छुट्टी को लेकर सबसे ज्यादा confusion इसी बात पर है कि दिल्ली और महाराष्ट्र में बैंक खुले रहेंगे या नहीं। RBI की city-wise holiday व्यवस्था को देखें तो नई दिल्ली, मुंबई और नागपुर उन जगहों में शामिल हैं जहां इस दिन बैंक शाखाओं की छुट्टी दर्ज है। इसका मतलब यह है कि सिर्फ राज्य का नाम देखकर फैसला करना सही नहीं होगा। बैंकिंग छुट्टियां कई बार city-wise होती हैं, इसलिए अपनी branch का schedule चेक करना ज्यादा बेहतर रहेगा। Online Banking रहेगी चालू अगर 28 अगस्त को बैंक की शाखा बंद है तो भी घबराने की जरूरत नहीं है। रोजमर्रा के कई काम घर बैठे किए जा सकते हैं। UPI, ATM, Mobile Banking और Internet Banking जैसी सेवाएं आम तौर पर उपलब्ध रहती हैं। पैसे भेजने, बिल भुगतान करने या खाते से जुड़ी ऑनलाइन जानकारी देखने जैसे काम डिजिटल माध्यम से किए जा सकते हैं। हां, अगर काम के लिए बैंक शाखा में जाना जरूरी है, जैसे कुछ दस्तावेज जमा करना या काउंटर से संबंधित सेवा लेना, तो आपको अगले working day का इंतजार करना पड़ सकता है। Bank जाने से पहले कर लें ये छोटा सा काम त्योहार के दिन बैंक बंद मिलने पर सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब कोई जरूरी काम पहले से तय हो। इसलिए 28 अगस्त को बैंक जाने से पहले अपने बैंक की official branch timing और holiday schedule एक बार जरूर देख लें। खासकर अगर आपको cash deposit, cheque या किसी जरूरी document से संबंधित काम है, तो इसे छुट्टी से पहले निपटा लेना समझदारी होगी। Bank Holiday 28 August 2026: Bottom Line 28 अगस्त 2026 को Raksha Bandhan के कारण कई शहरों में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। छुट्टी पूरे देश में एक समान नहीं है और RBI के city-wise calendar के आधार पर अलग-अलग जगहों पर लागू होती है। इसलिए बैंक जाने से पहले अपने शहर और branch की छुट्टी जरूर confirm करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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LAC

China के साथ LAC पर बड़ा कदम! Boundary Delimitation से क्या बदल सकता है सीमा विवाद?

India और China के बीच सीमा विवाद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। वजह है LAC (Line of Actual Control) को लेकर चल रही बातचीत और Boundary Delimitation की दिशा में बढ़ते कदम। सवाल सीधा है—क्या भारत और चीन अब सीमा रेखा को नए सिरे से तय करने की तैयारी कर रहे हैं? फिलहाल इसका जवाब है—नहीं, अभी कोई नई सीमा रेखा तय नहीं हुई है। लेकिन इतना जरूर है कि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर बातचीत अब केवल तनाव कम करने तक सीमित नहीं रह गई है। सीमा के अंतिम समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिशें भी दिखाई दे रही हैं। 25वीं Special Representatives Meeting में क्या हुआ? 25 अगस्त 2026 को बीजिंग में भारत और चीन के बीच सीमा मुद्दे पर Special Representatives की 25वीं बैठक हुई। भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी ने बातचीत में हिस्सा लिया। बैठक में दोनों देशों ने सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ Boundary Question के समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर जोर दिया। दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रखने और सीमा विवाद का ऐसा समाधान खोजने की बात कही, जो दोनों देशों को स्वीकार्य हो। यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत-चीन संबंधों में काफी तनाव पैदा हुआ था। पिछले कुछ समय में सैन्य और राजनयिक स्तर पर लगातार बातचीत के जरिए हालात को सामान्य करने की कोशिश की गई है। Delimitation का मतलब क्या है? सीमा विवाद को समझने के लिए Delimitation और Demarcation का अंतर जानना जरूरी है। Delimitation में दोनों देश बातचीत और नक्शों के आधार पर यह तय करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय सीमा कहां होनी चाहिए। वहीं Demarcation का मतलब जमीन पर उस सीमा को चिन्हित करना होता है। इसलिए मौजूदा बातचीत को सीधे नई LAC बनाने की प्रक्रिया कहना सही नहीं होगा। अभी दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के समाधान को लेकर बातचीत चल रही है। भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बातचीत? भारत की सबसे बड़ी चिंता LAC पर लंबे समय से बनी अस्पष्टता रही है। दोनों देशों की LAC को लेकर अलग-अलग धारणाएं कई बार पेट्रोलिंग के दौरान तनाव की वजह बनती रही हैं। यदि भविष्य में दोनों पक्ष किसी इलाके को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने और सीमा प्रबंधन पर सहमति बनाने में सफल होते हैं, तो इससे सैनिकों के बीच टकराव की आशंका कम हो सकती है। हालिया बातचीत में communication mechanism मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। पूर्वी और मध्य सेक्टर में अतिरिक्त सैन्य हॉटलाइन और बैठक बिंदु बनाए जाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। इसका मकसद है कि सीमा पर किसी भी अप्रिय स्थिति में दोनों सेनाओं के अधिकारी सीधे संपर्क कर सकें। गलवान के बाद बदली तस्वीर भारत और चीन के रिश्तों में 2020 का गलवान संघर्ष एक बड़ा मोड़ साबित हुआ था। इसके बाद कई इलाकों में सैन्य तैनाती बढ़ी और दोनों देशों के बीच लंबे समय तक तनाव बना रहा। अक्टूबर 2024 में पेट्रोलिंग व्यवस्था को लेकर बनी सहमति के बाद स्थिति को सामान्य करने की प्रक्रिया ने गति पकड़ी। इसके बाद नेताओं और अधिकारियों के बीच संवाद भी धीरे-धीरे बढ़ा। अब Boundary Delimitation को लेकर बातचीत आगे बढ़ना इस बात का संकेत माना जा सकता है कि दोनों देश सीमा विवाद को केवल तत्काल तनाव के नजरिए से नहीं, बल्कि लंबे समय के समाधान के रूप में भी देखने की कोशिश कर रहे हैं। क्या जल्द खत्म होगा भारत-चीन Border Dispute? यह उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी। भारत और चीन का सीमा विवाद कई दशक पुराना है और इसमें पश्चिमी, मध्य तथा पूर्वी सेक्टर से जुड़े जटिल मुद्दे शामिल हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि दोनों देश अपने-अपने क्षेत्रीय दावों और सुरक्षा हितों के बीच ऐसी जमीन तलाशें, जिस पर राजनीतिक सहमति बन सके। इसलिए आने वाले महीनों में असली नजर इस बात पर रहेगी कि बातचीत सिर्फ बैठकों और बयानों तक रहती है या किसी खास क्षेत्र में ground-level progress भी दिखाई देती है। आगे क्या उम्मीद? दोनों देशों ने Special Representatives के स्तर पर बातचीत आगे जारी रखने पर सहमति जताई है। अगर संवाद का यह सिलसिला कायम रहता है और सीमा पर शांति बनी रहती है, तो भविष्य में बड़े समाधान की जमीन तैयार हो सकती है। फिलहाल सबसे व्यावहारिक उम्मीद यही है कि LAC पर स्पष्टता बढ़े, पेट्रोलिंग से जुड़े विवाद कम हों और दोनों देशों के बीच भरोसा धीरे-धीरे वापस आए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nepal-Tibet

Nepal-Tibet Flood: पहाड़ टूटा, नदी बनी काल; 165 मौतें, सैकड़ों अब भी लापता

नेपाल-तिब्बत (Nepal-Tibet) बॉर्डर पर आई विनाशकारी Flash Flood ने तबाही मचा दी है। ग्लेशियर का हिस्सा टूटने और उसके बाद मलबे के साथ आई तेज बाढ़ ने कई इलाकों में घर, सड़कें, पुल और दूसरी जरूरी सुविधाएं बहा दीं। नेपाल और तिब्बत में मृतकों का आंकड़ा 165 तक पहुंच गया है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। अचानक आई बाढ़ ने मचाई भारी तबाही नेपाल के रसुवा और आसपास के पहाड़ी इलाकों में बुधवार को अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव आया। देखते ही देखते नदी का जलस्तर बढ़ा और कई इलाकों में पानी के साथ चट्टान और मिट्टी भी पहुंच गई। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र से जुड़े इलाकों में इसका असर सबसे ज्यादा देखा गया। शुरुआत में इस घटना को भूकंप से जोड़कर देखा गया था, लेकिन बाद में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के विश्लेषण में संकेत मिला कि ग्लेशियर के बर्फ और चट्टान वाले हिस्से के टूटने से पैदा हुए मलबे ने नदी के बहाव को बेहद खतरनाक बना दिया। 165 लोगों की मौत, लापता लोगों की संख्या लगातार बढ़ी ताजा रिपोर्टों के अनुसार नेपाल में 165 शव बरामद किए जा चुके हैं। दूसरी ओर, नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में मिलाकर करीब 1,500 लोगों के लापता होने की खबर सामने आई है। हालांकि अलग-अलग एजेंसियों की ओर से जारी आंकड़ों में अंतर है और राहत अभियान आगे बढ़ने के साथ संख्या बदल सकती है। तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में भी हालात गंभीर हैं। चीनी अधिकारियों के मुताबिक वहां 558 लोग लापता बताए गए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक शामिल हैं। भारतीयों को लेकर भी बढ़ी चिंता इस प्राकृतिक आपदा में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। नेपाल में लापता विदेशी नागरिकों की सूची में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा बताई जा रही है। इनमें बड़ी संख्या उन श्रद्धालुओं की है जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए निकले थे। तमिलनाडु और कोलकाता से गए श्रद्धालुओं के कुछ समूहों से भी संपर्क टूटने की खबर सामने आई है। कोलकाता से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया 32 लोगों का एक समूह भी संपर्क से बाहर बताया गया है। Rescue Operation जारी, हेलिकॉप्टर से निकाले जा रहे लोग नेपाल सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां लगातार Search and Rescue Operation चला रही हैं। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण हेलिकॉप्टरों की मदद से लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। कई इलाकों में राहत सामग्री, भोजन और जरूरी सामान हेलिकॉप्टर के जरिए पहुंचाया जा रहा है। बचावकर्मियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लगातार खराब मौसम, मलबे और पहाड़ी इलाकों में दोबारा भूस्खलन का खतरा है। भारत ने भी बढ़ाया मदद का हाथ नेपाल में फंसे भारतीयों की जानकारी जुटाने और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए भारत और नेपाल के अधिकारी लगातार संपर्क में हैं। भारत की ओर से मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की पेशकश भी की गई है। कई राज्यों ने अपने नागरिकों और उनके परिवारों की मदद के लिए हेल्पलाइन व्यवस्था शुरू की है। फिर आ सकती है बाढ़, बढ़ी चिंता बचाव अभियान के बीच एक और खतरा विशेषज्ञों और अधिकारियों की चिंता बढ़ा रहा है। तिब्बत की ओर मलबे के कारण पानी का अवरोध बनने से अचानक दोबारा तेज बाढ़ आने की आशंका जताई गई है। इसी वजह से राहत दलों को बेहद सावधानी के साथ आगे बढ़ना पड़ रहा है। फिलहाल नेपाल-तिब्बत बॉर्डर का यह इलाका भारी तबाही के बाद राहत और बचाव अभियान का केंद्र बना हुआ है। परिवार अपने लापता परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं और रेस्क्यू टीमें मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। आने वाले घंटों में मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े में बदलाव संभव है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nepal

Nepal Flood: भोटेकोशी नदी बनी काल, पुल और गाड़ियां बहीं; 9 पुलिसकर्मियों की तलाश जारी

नेपाल (Nepal) के रसुवा जिले से आई तस्वीरों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। तिब्बत की ओर से अचानक आए तेज पानी ने भोटेकोशी नदी का रुख बेहद खतरनाक कर दिया। देखते ही देखते नदी का पानी आसपास के इलाकों में फैल गया और टिमुरे समेत कई जगहों पर भारी नुकसान की खबर सामने आई है। इस हादसे में टिमुरे बॉर्डर आउट पोस्ट पर तैनात 9 सशस्त्र पुलिसकर्मी लापता बताए जा रहे हैं। अचानक बढ़ा भोटेकोशी नदी का जलस्तर बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी में अचानक तेज बहाव आया। स्थानीय स्तर पर हालात इतने तेजी से बदले कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। शुरुआती जानकारी के मुताबिक बाढ़ का पानी तिब्बत की तरफ से आया और नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में तेजी से फैल गया। बाढ़ के कारण टिमुरे बाजार और आसपास के इलाकों में पानी और मलबा पहुंच गया। कई वाहन इसकी चपेट में आए हैं। स्थानीय लोगों के लिए यह स्थिति काफी डरावनी रही, क्योंकि कुछ ही समय में सामान्य नदी का बहाव खतरनाक सैलाब में बदल गया। 9 पुलिसकर्मी हुए लापता इस बाढ़ के बीच सबसे बड़ी चिंता 9 सशस्त्र पुलिसकर्मियों के लापता होने को लेकर है। ये जवान टिमुरे बॉर्डर आउट पोस्ट में तैनात थे। बाढ़ के बाद उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। अधिकारियों और सुरक्षा बलों की टीमें लगातार उनकी तलाश में जुटी हैं। हालांकि, प्रभावित क्षेत्र में संचार व्यवस्था बाधित होने की वजह से स्थिति की पूरी जानकारी जुटाने में परेशानी आ रही है। अधिकारियों ने यह भी संभावना जताई है कि कुछ जवान सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए हों और नेटवर्क नहीं होने के कारण उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा हो। तीन Police Posts को भी नुकसान बाढ़ का असर केवल आम आबादी तक सीमित नहीं रहा। टिमुरे एरिया पुलिस ऑफिस, स्याफ्रुबेसी पुलिस पोस्ट और रसुवागढ़ी पुलिस पोस्ट को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी है। तेज पानी के साथ मलबा आने से सड़क और आसपास के दूसरे बुनियादी ढांचे को भी नुकसान हुआ है। कई जगहों पर आवागमन प्रभावित हुआ है। पुल टूटा, गाड़ियां और सामान बहा भोटेकोशी नदी का बहाव इतना तेज था कि एक पुल के क्षतिग्रस्त होने और बहने की जानकारी सामने आई है। टिमुरे बाजार में कई वाहन भी बाढ़ के पानी की चपेट में आए। स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो में बाढ़ की भयावहता साफ नजर आ रही है। बाजार और सड़क के आसपास पानी का तेज बहाव देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुछ ही देर में हालात कितने बिगड़ गए। Rescue Operation में जुटी Nepal Army हादसे के बाद नेपाल सरकार ने Rescue Operation तेज कर दिया है। Nepal Army, Armed Police Force और Nepal Police की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रही हैं। बचाव अभियान में हेलीकॉप्टरों की मदद भी ली जा रही है। सुरक्षा बलों का मुख्य फोकस लापता पुलिसकर्मियों की तलाश और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने पर है। निचले इलाकों के लिए भी Alert भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। बाढ़ का पानी नीचे की ओर बढ़ने की वजह से नदी किनारे बसे दूसरे इलाकों में भी खतरा बढ़ सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी और नालों के पास जाने से बचें और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें। बारिश से ज्यादा Tibet से आए पानी ने बढ़ाई मुश्किल? बाढ़ की वजह को लेकर शुरुआती जानकारी में तिब्बत क्षेत्र में हुई भारी बारिश को अहम माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार नेपाल के रसुवा इलाके में हुई बारिश इस अचानक आई बाढ़ की पूरी वजह नहीं लगती। हालांकि, बाढ़ के वास्तविक कारण और पानी के अचानक बढ़ने की स्थिति का पूरा आकलन अभी किया जा रहा है। अभी कितना नुकसान हुआ, तस्वीर साफ नहीं फिलहाल बाढ़ से हुए कुल नुकसान और संभावित जनहानि का अंतिम आंकड़ा सामने नहीं आया है। प्रभावित इलाकों में संचार और सड़क संपर्क प्रभावित होने से प्रशासन को भी सही जानकारी जुटाने में समय लग रहा है। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता लापता 9 पुलिसकर्मियों को लेकर है। राहत और बचाव दल लगातार Search Operation चला रहे हैं। आने वाले घंटों में बाढ़ से हुए नुकसान और लापता लोगों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rekha Gupta

Rekha Gupta का बड़ा तोहफा: Delhi Lakshmi Yojana में महिलाओं को हर महीने ₹2500, जानें Payment Date

रक्षाबंधन के मौके पर दिल्ली की महिलाओं के लिए जिस Lakshmi Yojana को लेकर काफी उम्मीदें थीं, उसे लेकर अब तस्वीर साफ हो गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹2,500 की आर्थिक सहायता देने जा रही है। हालांकि, पहली किस्त को लेकर पहले अलग-अलग तारीखों की चर्चा थी, लेकिन अब सरकार की ओर से भुगतान शुरू करने की तारीख 1 सितंबर 2026 बताई गई है। यानी जिन महिलाओं का आवेदन जांच और सत्यापन की प्रक्रिया में सही पाया गया है, उन्हें जल्द ही इस योजना का लाभ मिलना शुरू हो सकता है। 26 अगस्त से Approval Letter देने की शुरुआत सरकार की ओर से 26 अगस्त को योजना से जुड़े लाभार्थियों को Approval Letter देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके लिए दिल्ली में विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया गया है। इस पत्र का मतलब यह होगा कि संबंधित महिला का आवेदन तय प्रक्रिया के तहत मंजूर हो चुका है। ऐसे में लाभार्थियों के लिए यह चरण काफी अहम माना जा रहा है। हर महीने खाते में आएंगे ₹2,500 Delhi Lakshmi Yojana के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की आर्थिक मदद देने का प्रावधान है। पूरे साल की रकम देखें तो यह सहायता ₹30,000 तक पहुंचती है। सरकार का कहना है कि योजना का मकसद महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है, ताकि उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए थोड़ी अतिरिक्त वित्तीय मदद मिल सके। इस योजना के लिए दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में ₹5,110 करोड़ का प्रावधान किया है। कौन महिलाएं ले सकती हैं योजना का लाभ? योजना की घोषित शर्तों के मुताबिक, दिल्ली की 21 से 60 वर्ष की पात्र महिलाएं इसका लाभ ले सकती हैं। इसके साथ दिल्ली का निवासी होना और सरकार द्वारा तय आय संबंधी मानदंडों को पूरा करना जरूरी है। कुछ ऐसी श्रेणियां भी हैं जिन्हें योजना के दायरे से बाहर रखा गया है। इसलिए सिर्फ उम्र पूरी होना ही पर्याप्त नहीं है। आवेदन की जांच के बाद ही यह तय होगा कि संबंधित महिला योजना के लिए पात्र है या नहीं। रक्षाबंधन पर पहली किस्त की थी उम्मीद Lakshmi Yojana को लेकर शुरुआत में रक्षाबंधन के आसपास पहली किस्त आने की उम्मीद जताई जा रही थी। इसी वजह से दिल्ली की बड़ी संख्या में महिलाएं भुगतान का इंतजार कर रही थीं। बाद में भुगतान की तारीख को लेकर बदलाव हुआ और अब 1 सितंबर 2026 से पहली किस्त जारी करने की तैयारी है। ऐसे में लाभार्थियों को पुरानी तारीखों के बजाय सरकार के ताजा अपडेट पर ध्यान देना चाहिए। Delhi Lakshmi Yojana Status कैसे चेक करें? अगर आपने इस योजना के लिए आवेदन किया है तो अपने आवेदन का Status चेक करने के लिए दिल्ली सरकार के संबंधित आधिकारिक पोर्टल पर जाएं। Status चेक करने का तरीका: ध्यान रखें कि OTP, बैंक PIN, ATM PIN या पासवर्ड किसी के साथ शेयर न करें। योजना से जुड़ी जानकारी के लिए केवल सरकारी माध्यमों पर भरोसा करें। महिलाओं के लिए क्यों खास है ₹2,500 की मदद? हर महीने मिलने वाली ₹2,500 की राशि भले ही किसी परिवार की पूरी आर्थिक जरूरत पूरी न करे, लेकिन घरेलू खर्चों में यह मददगार जरूर हो सकती है। खासकर उन महिलाओं के लिए जो आर्थिक रूप से परिवार पर निर्भर हैं, नियमित सहायता का अपना महत्व है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 1 सितंबर से भुगतान कितनी तेजी से लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुंचता है। आने वाले दिनों में इसी पर महिलाओं की नजर रहेगी। Delhi Lakshmi Yojana: एक नजर में जानकारी विवरण योजना का नाम Delhi Lakshmi Yojana लाभ ₹2,500 प्रति माह सालाना सहायता ₹30,000 तक आयु सीमा 21 से 60 वर्ष Approval Letter 26 अगस्त 2026 पहली किस्त 1 सितंबर 2026 से लाभार्थी पात्र दिल्ली निवासी महिलाएं जरूरी बात: योजना की पात्रता, किस्त और आवेदन Status से जुड़ी अंतिम जानकारी के लिए दिल्ली सरकार के आधिकारिक अपडेट को ही मानें। सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट तारीखों या दावों पर भरोसा न करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Amit Shah

Amit Shah Statement: घुसपैठ को लेकर शाह का बड़ा ऐलान, Security और Economy पर बताया खतरा

देश की आंतरिक सुरक्षा और अवैध घुसपैठ को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने एक बार फिर सख्त संदेश दिया है। राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में उन्होंने कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है। देश में आने और रहने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है। गृह मंत्री ने अवैध घुसपैठ को सिर्फ सीमा का मुद्दा नहीं, बल्कि National Security, Economy और Demographic Balance से जुड़ी चुनौती बताया। शाह के इस बयान के बाद अवैध प्रवासियों की पहचान, सीमा सुरक्षा और राज्यों की भूमिका को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है। ‘भारत कोई धर्मशाला नहीं’, शाह ने क्यों कहा? अमित शाह ने अपने संबोधन में साफ कहा कि भारत में रहने का अधिकार नागरिकों को है। जो विदेशी नागरिक वैध दस्तावेज और तय कानूनी प्रक्रिया के तहत भारत आते हैं, उनके लिए अलग व्यवस्था है, लेकिन अवैध तरीके से देश में प्रवेश करने वालों पर सरकार सख्ती से कार्रवाई करेगी। गृह मंत्री ने कहा कि अवैध घुसपैठ का असर देश की सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय स्थिति पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि इसे लंबे समय से सरकार की प्रमुख आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में शामिल किया गया है। Infiltration Free India का लक्ष्य शाह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य देश को कम से कम समय में Infiltration Free India बनाना है। इसके लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया जा रहा है। भूमि सीमा साझा करने वाले राज्यों के साथ बैठकें और दौरे कर सीमा सुरक्षा को लेकर एक चार सूत्रीय रणनीति पर भी काम किया गया है। इसका उद्देश्य सीमा पर निगरानी मजबूत करने के साथ स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना है। Border Security में Technology का बढ़ेगा इस्तेमाल बदलते समय के साथ सीमा सुरक्षा का तरीका भी बदल रहा है। सरकार अब पारंपरिक निगरानी के साथ आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दे रही है। Smart Border Management, बेहतर निगरानी और सुरक्षा एजेंसियों के बीच डेटा साझा करने जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसका मकसद संदिग्ध गतिविधियों की पहचान जल्दी करना और सुरक्षा तंत्र को ज्यादा प्रभावी बनाना है। 15-20 साल आगे की तैयारी पर जोर राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में शाह ने अधिकारियों से सिर्फ आज की चुनौतियों पर ध्यान देने के बजाय आने वाले 15 से 20 वर्षों के सुरक्षा रुझानों का अध्ययन करने को कहा। उनका जोर इस बात पर रहा कि किसी खतरे के बड़ा रूप लेने का इंतजार करने के बजाय पहले से उसकी पहचान कर तैयारी की जाए। आतंकवाद, साइबर खतरे, कट्टरपंथ, नशीले पदार्थों की तस्करी और सीमा पार से आने वाली चुनौतियां इसी व्यापक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा हैं। Narcotics और Terrorism पर भी सरकार की नजर गृह मंत्री ने नशीले पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई तेज करने की जरूरत बताई। सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर Coordination के साथ नई तकनीक और Intelligence Sharing को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। सरकार की कोशिश है कि अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज हो, ताकि किसी संभावित खतरे पर समय रहते कार्रवाई की जा सके। राज्यों की भूमिका क्यों अहम? भारत की सीमा से जुड़े कई राज्यों की भूमिका इस पूरी रणनीति में बेहद महत्वपूर्ण है। सीमा सुरक्षा केवल केंद्रीय बलों की जिम्मेदारी नहीं है। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच तालमेल से ही सीमा क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी संभव है। इसी वजह से केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर Integrated Security Grid को मजबूत करने पर जोर दे रही है। शाह के बयान का बड़ा संदेश अमित शाह का ताजा बयान बताता है कि केंद्र सरकार के लिए Illegal Infiltration और Border Security आने वाले समय में भी बड़ी प्राथमिकता बने रहेंगे। सरकार एक तरफ सीमा पर निगरानी मजबूत करने की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ तकनीक और Intelligence आधारित सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाने पर जोर दे रही है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति की पहचान या उसके खिलाफ कार्रवाई कानून और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही की जानी चाहिए। अवैध घुसपैठ और वैध रूप से भारत आने वाले विदेशी नागरिकों के बीच अंतर करना भी इसी कानूनी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ram Mandir

Ayodhya Ram Mandir चंपत राय की Diary में दर्ज हुए बड़े सवाल, नृपेंद्र मिश्रा के 14 Interviews चर्चा में

अयोध्या (Ayodhya) के राम मंदिर (Ram Mandir) से जुड़ा Donation Theft Controversy अब लगातार नए सवाल खड़े कर रहा है। मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की बताई जा रही डायरी में कई अहम बातें दर्ज होने की चर्चा है। इनमें FIR कराने में देरी, नृपेंद्र मिश्रा के लगातार मीडिया इंटरव्यू और मंदिर से जुड़ी अंदरूनी जानकारी बाहर पहुंचने जैसे मुद्दे शामिल हैं। मामले ने तब ज्यादा तूल पकड़ा जब डायरी में दर्ज कथित टिप्पणियों के आधार पर नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर सवाल सामने आए। हालांकि, डायरी में लिखी बातों को आरोप या सवाल के तौर पर ही देखना जरूरी है, क्योंकि इनसे किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी अपने आप साबित नहीं होती। चढ़ावे की चोरी सामने आई तो FIR क्यों नहीं हुई? चंपत राय की कथित डायरी में सबसे अहम सवाल यही है कि चढ़ावे में चोरी की जानकारी सामने आने के बावजूद तत्काल पुलिस FIR क्यों नहीं कराई गई। रिपोर्टों के अनुसार, चंपत राय का तर्क था कि पुलिस को मामला सौंपने के बाद जांच का दायरा काफी बढ़ सकता था और मंदिर से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की नौबत आ सकती थी। इसी वजह से पहले अंदरूनी स्तर पर जानकारी जुटाने और मामले को समझने की कोशिश किए जाने का दावा किया गया। यही फैसला अब विवाद का बड़ा हिस्सा बन गया है। सवाल यह है कि अगर चोरी की आशंका गंभीर थी तो पुलिस कार्रवाई में देरी क्यों हुई? नृपेंद्र मिश्रा से मुलाकात का भी जिक्र डायरी में जून की शुरुआत में नृपेंद्र मिश्रा के अयोध्या पहुंचने और मंदिर से जुड़े पदाधिकारियों के साथ बैठक का उल्लेख होने की बात सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस बैठक में चढ़ावे में कथित चोरी की जानकारी साझा की गई थी। इसी दौरान FIR नहीं होने को लेकर सवाल भी उठाया गया। चंपत राय की ओर से पुलिस जांच के संभावित असर का हवाला दिए जाने की बात कही गई है। इस मुलाकात ने मामले को और संवेदनशील बना दिया, क्योंकि इसके बाद मंदिर से जुड़े विवाद की जानकारी धीरे-धीरे सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनने लगी। 14 Interviews ने क्यों बढ़ाई हलचल? चंपत राय की कथित डायरी में नृपेंद्र मिश्रा के करीब 14 मीडिया इंटरव्यू का भी उल्लेख होने की बात सामने आई है। डायरी में कथित तौर पर सवाल उठाया गया कि इतने कम समय में इतने इंटरव्यू देने की जरूरत क्यों पड़ी और इसके पीछे किसका सुझाव था। यह सवाल इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि मामला उस समय मंदिर के अंदर हुई कथित चोरी और चढ़ावे की व्यवस्था से जुड़ा था। हालांकि, किसी वरिष्ठ पदाधिकारी का मीडिया से बात करना अपने आप में गलत नहीं है। असली सवाल डायरी में दर्ज उस कथित आशंका का है कि इतने इंटरव्यू की रणनीति आखिर किसने तय की थी। ‘असली भेदिया कौन?’ सवाल ने खींचा ध्यान इस पूरे विवाद में सबसे दिलचस्प सवाल अंदर की जानकारी बाहर पहुंचने को लेकर है। रिपोर्टों के मुताबिक, चंपत राय ने अपनी डायरी में यह सवाल भी दर्ज किया कि मंदिर से जुड़ी संवेदनशील जानकारी बाहर कैसे पहुंची और इसे बाहर ले जाने वाला व्यक्ति कौन था। इसी संदर्भ में कुछ संतों की ओर से नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर सवाल पूछे जाने का भी उल्लेख है। लेकिन यहां यह साफ करना जरूरी है कि ‘भेदिया’ या किसी व्यक्ति की संलिप्तता का दावा जांच के बिना तथ्य नहीं माना जा सकता। फिलहाल ये बातें डायरी में दर्ज कथित सवालों और आरोपों के रूप में सामने आई हैं। 23 जून के बाद बयान बंद होने पर भी सवाल चंपत राय की कथित डायरी में नृपेंद्र मिश्रा के मीडिया बयानों के क्रम का भी उल्लेख होने की बात कही गई है। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ दिनों तक लगातार सार्वजनिक बयान देने के बाद 23 जून के बाद उनकी ओर से इस मुद्दे पर बयान नहीं आए। इसी बदलाव को लेकर भी डायरी में सवाल उठाए जाने की चर्चा है। क्या यह सामान्य मीडिया रणनीति थी या किसी स्तर पर बयान रोकने का फैसला हुआ था? इसका जवाब आधिकारिक तौर पर सामने आना बाकी है। विवाद अब सिर्फ चोरी तक सीमित नहीं राम मंदिर चढ़ावा विवाद ने अब कई अलग-अलग सवालों को जन्म दे दिया है। एक तरफ कथित चोरी की जांच है, तो दूसरी तरफ मंदिर में चढ़ावे की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल हैं। इसके अलावा FIR में देरी, वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका और मीडिया में दिए गए बयानों को लेकर भी चर्चा तेज है। चंपत राय की ओर से मंदिर निर्माण की व्यवस्थाओं और नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर पहले भी कई सवाल उठाए गए हैं। इससे विवाद केवल चढ़ावे की कथित चोरी तक सीमित नहीं रहा। श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ा सवाल राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़ी किसी भी गड़बड़ी की खबर श्रद्धालुओं के लिए बेहद संवेदनशील है। यही वजह है कि इस मामले में सामने आने वाली हर नई जानकारी पर लोगों की नजर बनी हुई है। फिलहाल चंपत राय की डायरी में बताए गए दावों को लेकर सबसे जरूरी बात यही है कि डायरी में दर्ज आरोपों और जांच में साबित तथ्यों के बीच अंतर किया जाए। नृपेंद्र मिश्रा या किसी अन्य व्यक्ति की वास्तविक भूमिका का फैसला जांच और आधिकारिक साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकता है। आने वाले दिनों में अगर जांच से FIR में देरी, चढ़ावे की निगरानी और अंदर की जानकारी बाहर पहुंचने जैसे सवालों के जवाब मिलते हैं, तो इस पूरे विवाद की तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

Monsoon Flood Alert: काशी के 84 घाट डूबे, Bihar में 50 हजार लोग प्रभावित; MP के 21 जिलों में Heavy Rain

देश के कई राज्यों में मानसून (Monsoon) की बारिश अब राहत से ज्यादा परेशानी का कारण बनती जा रही है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से काशी के 84 घाट पानी में डूब गए हैं। घाटों के आसपास की करीब 5 हजार दुकानों पर इसका असर पड़ा है। दूसरी ओर बिहार में बाढ़ से करीब 50 हजार लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। मध्य प्रदेश में भी मौसम विभाग ने 21 जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है। लगातार बढ़ते जलस्तर ने नदी किनारे रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कई जगहों पर रोजमर्रा की जिंदगी और छोटे कारोबार सीधे प्रभावित हुए हैं। Varanasi Flood: काशी के 84 घाट जलमग्न वाराणसी में गंगा का पानी तेजी से बढ़ने के बाद काशी के 84 घाटों पर बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है। दशाश्वमेध, अस्सी और मणिकर्णिका समेत कई प्रमुख घाटों की सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं। घाटों पर आने-जाने वाले लोगों की संख्या कम हुई है। सुरक्षा को देखते हुए कई गतिविधियों पर भी रोक लगाई गई है। गंगा किनारे रहने और काम करने वाले लोगों के लिए स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। 5 हजार दुकानों पर Flood का असर गंगा का जलस्तर बढ़ने का सबसे बड़ा असर घाट किनारे कारोबार करने वाले दुकानदारों पर पड़ा है। करीब 5 हजार दुकानों के बंद होने या कारोबार प्रभावित होने की बात सामने आई है। फूल-माला, पूजा सामग्री, खानपान और पर्यटकों से जुड़े छोटे कारोबार करने वाले लोगों के लिए मानसून की यह स्थिति आर्थिक नुकसान का कारण बन रही है। नाव संचालन पर भी असर पड़ा है। Bihar Flood: 50 हजार लोग बाढ़ से घिरे बिहार में भी नदियों का बढ़ता जलस्तर लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। गंगा समेत कई नदियों के उफान पर आने से निचले इलाकों में पानी पहुंच गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 50 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। कई इलाकों में आवागमन प्रभावित हुआ है और प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है। बाढ़ के बीच सबसे बड़ी चिंता उन परिवारों की है जिनका घर और रोजमर्रा का काम सीधे नदी के बढ़ते पानी से प्रभावित हुआ है। MP Weather Alert: 21 जिलों में Heavy Rain की संभावना मध्य प्रदेश में भी मानसून सक्रिय बना हुआ है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार प्रदेश के 21 जिलों में भारी बारिश हो सकती है। भोपाल समेत कई क्षेत्रों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में Waterlogging और नदी-नालों के जलस्तर बढ़ने का खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने लोगों से मौसम की स्थिति पर नजर रखने और नदी-नालों के आसपास अनावश्यक रूप से जाने से बचने की अपील की है। लगातार बारिश ने बढ़ाई चिंता वाराणसी से लेकर बिहार और मध्य प्रदेश तक बारिश का असर अलग-अलग रूप में दिखाई दे रहा है। कहीं घाट डूब रहे हैं, कहीं गांवों तक बाढ़ का पानी पहुंच रहा है तो कहीं भारी बारिश का Alert लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। फिलहाल आने वाले दिनों का मौसम बेहद अहम रहेगा। खासकर नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की Advisory को गंभीरता से लेना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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