India और China के बीच सीमा विवाद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। वजह है LAC (Line of Actual Control) को लेकर चल रही बातचीत और Boundary Delimitation की दिशा में बढ़ते कदम। सवाल सीधा है—क्या भारत और चीन अब सीमा रेखा को नए सिरे से तय करने की तैयारी कर रहे हैं?
फिलहाल इसका जवाब है—नहीं, अभी कोई नई सीमा रेखा तय नहीं हुई है। लेकिन इतना जरूर है कि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर बातचीत अब केवल तनाव कम करने तक सीमित नहीं रह गई है। सीमा के अंतिम समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिशें भी दिखाई दे रही हैं।
25वीं Special Representatives Meeting में क्या हुआ?
25 अगस्त 2026 को बीजिंग में भारत और चीन के बीच सीमा मुद्दे पर Special Representatives की 25वीं बैठक हुई। भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी ने बातचीत में हिस्सा लिया।
बैठक में दोनों देशों ने सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ Boundary Question के समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर जोर दिया। दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रखने और सीमा विवाद का ऐसा समाधान खोजने की बात कही, जो दोनों देशों को स्वीकार्य हो।
यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत-चीन संबंधों में काफी तनाव पैदा हुआ था। पिछले कुछ समय में सैन्य और राजनयिक स्तर पर लगातार बातचीत के जरिए हालात को सामान्य करने की कोशिश की गई है।
Delimitation का मतलब क्या है?
सीमा विवाद को समझने के लिए Delimitation और Demarcation का अंतर जानना जरूरी है।
Delimitation में दोनों देश बातचीत और नक्शों के आधार पर यह तय करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय सीमा कहां होनी चाहिए। वहीं Demarcation का मतलब जमीन पर उस सीमा को चिन्हित करना होता है।
इसलिए मौजूदा बातचीत को सीधे नई LAC बनाने की प्रक्रिया कहना सही नहीं होगा। अभी दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के समाधान को लेकर बातचीत चल रही है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बातचीत?
भारत की सबसे बड़ी चिंता LAC पर लंबे समय से बनी अस्पष्टता रही है। दोनों देशों की LAC को लेकर अलग-अलग धारणाएं कई बार पेट्रोलिंग के दौरान तनाव की वजह बनती रही हैं।
यदि भविष्य में दोनों पक्ष किसी इलाके को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने और सीमा प्रबंधन पर सहमति बनाने में सफल होते हैं, तो इससे सैनिकों के बीच टकराव की आशंका कम हो सकती है।
हालिया बातचीत में communication mechanism मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। पूर्वी और मध्य सेक्टर में अतिरिक्त सैन्य हॉटलाइन और बैठक बिंदु बनाए जाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। इसका मकसद है कि सीमा पर किसी भी अप्रिय स्थिति में दोनों सेनाओं के अधिकारी सीधे संपर्क कर सकें।
गलवान के बाद बदली तस्वीर
भारत और चीन के रिश्तों में 2020 का गलवान संघर्ष एक बड़ा मोड़ साबित हुआ था। इसके बाद कई इलाकों में सैन्य तैनाती बढ़ी और दोनों देशों के बीच लंबे समय तक तनाव बना रहा।
अक्टूबर 2024 में पेट्रोलिंग व्यवस्था को लेकर बनी सहमति के बाद स्थिति को सामान्य करने की प्रक्रिया ने गति पकड़ी। इसके बाद नेताओं और अधिकारियों के बीच संवाद भी धीरे-धीरे बढ़ा।
अब Boundary Delimitation को लेकर बातचीत आगे बढ़ना इस बात का संकेत माना जा सकता है कि दोनों देश सीमा विवाद को केवल तत्काल तनाव के नजरिए से नहीं, बल्कि लंबे समय के समाधान के रूप में भी देखने की कोशिश कर रहे हैं।
क्या जल्द खत्म होगा भारत-चीन Border Dispute?
यह उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी। भारत और चीन का सीमा विवाद कई दशक पुराना है और इसमें पश्चिमी, मध्य तथा पूर्वी सेक्टर से जुड़े जटिल मुद्दे शामिल हैं।
सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि दोनों देश अपने-अपने क्षेत्रीय दावों और सुरक्षा हितों के बीच ऐसी जमीन तलाशें, जिस पर राजनीतिक सहमति बन सके।
इसलिए आने वाले महीनों में असली नजर इस बात पर रहेगी कि बातचीत सिर्फ बैठकों और बयानों तक रहती है या किसी खास क्षेत्र में ground-level progress भी दिखाई देती है।
आगे क्या उम्मीद?
दोनों देशों ने Special Representatives के स्तर पर बातचीत आगे जारी रखने पर सहमति जताई है। अगर संवाद का यह सिलसिला कायम रहता है और सीमा पर शांति बनी रहती है, तो भविष्य में बड़े समाधान की जमीन तैयार हो सकती है।
फिलहाल सबसे व्यावहारिक उम्मीद यही है कि LAC पर स्पष्टता बढ़े, पेट्रोलिंग से जुड़े विवाद कम हों और दोनों देशों के बीच भरोसा धीरे-धीरे वापस आए।
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