अमेरिका (America) ने ईरान (Iran) के खिलाफ आर्थिक दबाव को एक और कदम आगे बढ़ा दिया है। ट्रंप प्रशासन ने “Operation Economic Outcast” नाम से एक नई मुहिम शुरू की है, जिसके तहत ईरान की अर्थव्यवस्था से जुड़े पांच अहम सेक्टरों पर Secondary Sanctions का खतरा बढ़ाया गया है। इनमें Digital Assets, Technology, Gold, Aviation और Shipping शामिल हैं।
इस फैसले की खास बात यह है कि अमेरिका का निशाना सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। जो विदेशी कंपनियां या संस्थाएं ईरान से जुड़े इन क्षेत्रों में कारोबार या सेवाएं जारी रखेंगी, उनके खिलाफ भी अमेरिकी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ईरान के साथ कारोबार करने वाले हर देश पर तुरंत प्रतिबंध लगा दिया गया है। अमेरिका ने कई मामलों में पहले चेतावनी और कार्रवाई के लिए समयसीमा तय करने की बात कही है।
अमेरिका ने क्यों उठाया इतना बड़ा कदम?
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के मुताबिक इस अभियान का मकसद ईरान की उन आर्थिक “lifelines” को काटना है, जिनसे उसे अंतरराष्ट्रीय कारोबार और राजस्व हासिल होता है। अमेरिकी सरकार का आरोप है कि ईरान तेल की बिक्री, प्रतिबंधों से बचने वाले नेटवर्क और दूसरे वित्तीय रास्तों के जरिए अपनी गतिविधियों को जारी रखता है।
नई रणनीति में अमेरिका ईरान से जुड़े कारोबारी नेटवर्क के साथ-साथ उन विदेशी संस्थाओं पर भी दबाव बनाना चाहता है, जो इन गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद करती हैं।
Gold और Digital Assets पर खास नजर
नई कार्रवाई में Gold और Digital Assets को भी प्रमुखता दी गई है। अमेरिकी ट्रेजरी का कहना है कि ईरान अपनी कमजोर होती औपचारिक वित्तीय व्यवस्था के बीच सोने का इस्तेमाल अपनी मुद्रा को सहारा देने और महंगाई के असर से बचने के लिए कर रहा है।
वहीं, Digital Assets यानी क्रिप्टो से जुड़े नेटवर्क को भी प्रतिबंधों से बचने और वित्तीय लेनदेन के लिए इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई गई है।
Technology सेक्टर भी अमेरिकी निशाने पर
ईरान को उन्नत तकनीक तक पहुंच से रोकना भी इस अभियान का अहम हिस्सा है। अमेरिका का दावा है कि ईरान ऐसी तकनीक और उपकरण हासिल करने की कोशिश करता है, जिनका इस्तेमाल उसके मिसाइल और अन्य संवेदनशील कार्यक्रमों में हो सकता है।
इसी वजह से नई कार्रवाई में Technology से जुड़े नेटवर्क और खरीद गतिविधियों को भी शामिल किया गया है।
Aviation और Shipping पर भी शिकंजा
ईरान की Aviation और Shipping गतिविधियां भी इस अभियान के केंद्र में हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक कुछ ईरानी एयरलाइंस और शिपिंग नेटवर्क का इस्तेमाल संवेदनशील सामान, तकनीक और तेल की आवाजाही के लिए किया जाता है।
Shipping के मामले में अमेरिका ने ईरान से जुड़े Shadow Fleet नेटवर्क पर विशेष कार्रवाई की है। ट्रेजरी ने अलग-अलग देशों में मौजूद ब्रोकरों, कंपनियों और जहाजों पर कार्रवाई करते हुए ईरानी तेल की ढुलाई और उससे होने वाली कमाई के नेटवर्क को निशाना बनाया है।
करीब 60 Entities, Individuals और Vessels पर कार्रवाई
अमेरिका ने इस अभियान के शुरुआती चरण में करीब 60 Entities, Individuals और Vessels को प्रतिबंधों के दायरे में लिया है। इनमें कथित तेल नेटवर्क, तकनीकी खरीद, साइबर गतिविधियों और अन्य वित्तीय चैनलों से जुड़े लोग और संस्थाएं शामिल हैं।
अमेरिकी कार्रवाई का नेटवर्क काफी बड़ा है और इसमें UAE, Hong Kong, China, Singapore, Switzerland और यूरोप जैसे अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े कारोबारी नेटवर्क शामिल बताए गए हैं।
दूसरे देशों के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
अमेरिका का यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि Secondary Sanctions का असर ईरान की सीमाओं से बाहर भी पड़ सकता है। अगर कोई विदेशी संस्था ईरान से जुड़े ऐसे कारोबार में शामिल होती है जिसे अमेरिका प्रतिबंधों के दायरे में लाता है, तो उस संस्था के अमेरिकी वित्तीय सिस्टम तक पहुंच पर खतरा बढ़ सकता है।
यानी अब ईरान के साथ कारोबार करने वाली कंपनियों को सिर्फ तेहरान के साथ अपने रिश्ते नहीं देखने होंगे, बल्कि अमेरिकी प्रतिबंधों के संभावित असर को भी ध्यान में रखना पड़ेगा।
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