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World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
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Marco Rubio

India-Iran Trade Deal पर Marco Rubio का जवाब, Iran की मदद करने वालों को US ने दी Sanctions की Warning

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की मुलाकात के बाद India-Iran Relations एक बार फिर चर्चा में हैं। खास बात यह है कि इस बैठक को लेकर अमेरिका की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच किसी नए Trade Deal पर बातचीत चल रही है। रुबियो का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत ईरान के साथ अपने पुराने रिश्तों को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। दोनों देशों के नेताओं की मुलाकात में व्यापार, क्षेत्रीय हालात और आपसी सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। मोदी-Pezeshkian Meeting पर क्या बोले Rubio? मोदी और पेजेश्कियान की मुलाकात को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री से सवाल किया गया था कि क्या दोनों देश किसी नए व्यापार समझौते की तैयारी कर रहे हैं। रुबियो ने जवाब में कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच इस समय कोई Trade Deal हो रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि अलग-अलग देशों के ईरान के साथ अपने संबंध और विदेश नीति हो सकती है। यही वजह है कि रुबियो के बयान को भारत और ईरान के बीच बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता के संदर्भ में देखा जा रहा है। Iran की मदद करने वालों को US की चेतावनी रुबियो ने सिर्फ Trade Deal पर ही बात नहीं की। उन्होंने ईरान को लेकर अमेरिका की सख्त नीति भी दोहराई। अमेरिकी विदेश मंत्री ने चेतावनी दी कि जो देश ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद करेंगे, उनके खिलाफ भी Sanctions लगाए जा सकते हैं। अमेरिका लंबे समय से ईरान की आर्थिक गतिविधियों और उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर कड़ा रुख अपनाता रहा है। इस बयान से साफ है कि वॉशिंगटन ईरान से जुड़े आर्थिक और व्यापारिक मामलों पर करीबी नजर रख रहा है। भारत-ईरान के रिश्ते क्यों हैं महत्वपूर्ण? भारत और ईरान के रिश्ते काफी पुराने हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार के साथ-साथ ऊर्जा, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दे भी अहम रहे हैं। भारत के लिए ईरान की भौगोलिक स्थिति भी महत्वपूर्ण है। Chabahar Port के जरिए भारत मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक अपनी कनेक्टिविटी मजबूत करने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए ईरान के साथ संबंधों को संतुलित रखना एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मुद्दा है। मोदी और पेजेश्कियान के बीच क्या हुई बातचीत? बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने और व्यापारिक सहयोग मजबूत करने पर चर्चा की। पश्चिम एशिया की स्थिति और क्षेत्रीय शांति का मुद्दा भी बातचीत में महत्वपूर्ण रहा। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान Dialogue और Diplomacy के जरिए होना चाहिए। मोदी-पेजेश्कियान मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया की स्थिति पहले से ही संवेदनशील बनी हुई है। इसलिए इस बैठक को सिर्फ सामान्य द्विपक्षीय मुलाकात के तौर पर नहीं देखा जा रहा। क्या भारत पर बढ़ेगा अमेरिकी दबाव? रुबियो के बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले दिनों में भारत और अमेरिका के बीच ईरान को लेकर कोई नया मतभेद सामने आएगा। भारत की विदेश नीति लंबे समय से अपने रणनीतिक हितों के आधार पर अलग-अलग देशों के साथ संबंध बनाए रखने पर केंद्रित रही है। अमेरिका के साथ भारत की साझेदारी लगातार मजबूत हुई है, लेकिन ईरान के साथ भी नई दिल्ली के अपने महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक हित हैं। फिलहाल किसी नए India-Iran Trade Deal की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन मोदी और पेजेश्कियान की मुलाकात ने यह जरूर संकेत दिया है कि दोनों देश अपने संबंधों को बनाए रखने और आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि भारत-अमेरिका संबंधों और भारत-ईरान साझेदारी के बीच नई दिल्ली किस तरह संतुलन कायम करती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Iran

Iran में Wedding Party पर US Attack का दावा, 5 की मौत; Jordan-Bahrain में पलटवार

Iran और America के बीच जारी तनाव अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। दक्षिणी ईरान के सिरिक इलाके में एक घर को अमेरिकी हमले में निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, जिस जगह हमला हुआ वहां शादी समारोह चल रहा था। घटना में कम से कम 5 लोगों की मौत हुई है, जबकि 63 लोग घायल बताए जा रहे हैं। इस हमले के बाद ईरान ने भी पलटवार किया है। ईरान की ओर से जॉर्डन और बहरीन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया गया है। लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई ने पूरे Middle East में तनाव बढ़ा दिया है। शादी की खुशी के बीच मची अफरा-तफरी ईरानी अधिकारियों के अनुसार, हमला हार्मोजगान प्रांत के सिरिक इलाके में हुआ। बताया गया कि एक घर में शादी समारोह चल रहा था। इसी दौरान हुए हमले से वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, घटना में 5 लोगों की जान गई और 63 लोग घायल हुए। घायलों में महिलाएं और बच्चे भी बताए गए हैं। राहत और बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया। ईरानी अधिकारियों ने इस घटना को अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से जोड़ा है। हालांकि, अमेरिका की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि उसके अभियान का लक्ष्य ईरान के सैन्य ठिकाने और सैन्य ढांचा था। इसलिए शादी समारोह को जानबूझकर निशाना बनाए जाने का दावा अभी विवादित है। Iran ने किया जवाबी हमला अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू करने का दावा किया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के अनुसार, अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए गए। ईरान के दावे के मुताबिक, जॉर्डन और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य सुविधाएं भी इन हमलों के निशाने पर रहीं। इसके बाद दोनों देशों में एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय किया गया। जॉर्डन ने अपने क्षेत्र की ओर आने वाली कुछ मिसाइलों को रोकने की कार्रवाई की बात कही है। वहीं बहरीन में भी ड्रोन और मिसाइल खतरे के बीच सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई। Middle East में बढ़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष का असर अब केवल दोनों देशों तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मौजूदगी और ईरान के जवाबी हमलों से दूसरे देशों के भी इसकी चपेट में आने का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले दिनों में संघर्ष किस दिशा में जाता है। अगर दूसरे देश सीधे तौर पर इसमें शामिल होते हैं, तो Middle East में हालात और बिगड़ सकते हैं। Strait of Hormuz पर भी दुनिया की नजर इस पूरे घटनाक्रम के बीच Strait of Hormuz को लेकर भी चिंता बनी हुई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने से तेल की सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर असर पड़ने की आशंका है। संघर्ष लंबा खिंचने पर इसका असर केवल Middle East तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के कई देशों में पेट्रोलियम और अन्य ऊर्जा कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। अब आगे क्या? शादी समारोह के दौरान हुई मौतों की खबर ने Iran-US Conflict के मानवीय असर को एक बार फिर सामने ला दिया है। एक तरफ अमेरिका अपने सैन्य अभियान को ईरान के सैन्य ढांचे के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है, वहीं ईरान लगातार जवाबी हमलों के जरिए दबाव बढ़ा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोनों देशों के बीच यह टकराव यहीं रुकता है या आने वाले दिनों में इसका दायरा और बढ़ता है। फिलहाल Jordan, Bahrain और Gulf region में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है और दुनिया की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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SCO Summit

SCO Summit में Pakistan की Edited Photo पर बवाल, PM Modi और Iran President गायब

SCO Summit से जुड़ी एक तस्वीर ने भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से चल रही तल्खी को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के आधिकारिक X अकाउंट से शेयर की गई एक तस्वीर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तस्वीर के एडिटेड वर्जन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके साथ खड़े ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन नजर नहीं आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर तस्वीर सामने आने के बाद यूजर्स ने पाकिस्तान सरकार के आधिकारिक अकाउंट पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। खास बात यह है कि जिस कार्यक्रम की तस्वीर साझा की गई, उसमें भारत और ईरान दोनों के शीर्ष नेता मौजूद थे। Original Photo और Edited Version को लेकर सवाल SCO Summit की ग्रुप फोटो में संगठन के कई सदस्य देशों के नेता एक साथ नजर आए थे। इसी तस्वीर का एक अलग वर्जन पाकिस्तान PMO के X हैंडल से पोस्ट किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन दिखाई नहीं देते। इसके बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई कि क्या तस्वीर को जानबूझकर एडिट किया गया था। हालांकि, तस्वीर को लेकर पाकिस्तान सरकार की ओर से ऐसी कोई स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है कि पोस्ट में मूल तस्वीर के बजाय बदला हुआ फ्रेम क्यों इस्तेमाल किया गया। PM Modi और Pezeshkian की मुलाकात भी रही अहम SCO Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ मुलाकात भी हुई। दोनों नेताओं के बीच भारत-ईरान संबंधों, व्यापार और क्षेत्रीय हालात पर बातचीत हुई। भारत और ईरान के रिश्ते लंबे समय से रणनीतिक और आर्थिक महत्व रखते हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की बैठक Summit के दौरान महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रमों में शामिल रही। यही वजह है कि ग्रुप फोटो से दोनों नेताओं के गायब होने वाली तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। Pakistan PM की भी ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात इस मामले का एक और दिलचस्प पहलू सामने आया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी SCO Summit के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत हुई। ऐसे में सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि अगर ईरानी राष्ट्रपति पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से भी मिले थे, तो ग्रुप फोटो के साझा किए गए वर्जन में उनका नजर नहीं आना आखिर क्यों हुआ। India-Pakistan Relations के बीच बढ़ी चर्चा भारत और पाकिस्तान के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसे में SCO जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच से सामने आने वाली छोटी-सी तस्वीर भी राजनीतिक और कूटनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने Summit में आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और सामूहिक कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया। भारत लगातार यह रुख रखता रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी तरह का दोहरा रवैया नहीं होना चाहिए। ऐसे माहौल में पाकिस्तान के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से सामने आई कथित Edited Photo ने राजनीतिक बहस को और हवा दे दी। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने उठाए सवाल तस्वीर पोस्ट होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। कई यूजर्स ने Original Group Photo और पाकिस्तान PMO द्वारा साझा तस्वीर की तुलना करते हुए सवाल पूछे। हालांकि, यह भी जरूरी है कि तस्वीर के पीछे की मंशा को लेकर जल्दबाजी में निष्कर्ष न निकाला जाए। पाकिस्तान सरकार की ओर से इस मामले में आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि तस्वीर में बदलाव क्यों किया गया था। SCO Summit ने फिर खींचा दुनिया का ध्यान SCO Summit में भारत, पाकिस्तान, चीन, रूस, ईरान समेत कई देशों के शीर्ष नेता शामिल हुए। बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, आर्थिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर चर्चा हुई। एक तरफ Summit में भारत का आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश सुर्खियों में रहा, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी की ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात ने भारत-ईरान संबंधों को लेकर ध्यान खींचा। अब पाकिस्तान PMO की कथित Edited Photo इस पूरे घटनाक्रम में एक नया विवाद बनकर सामने आई है। सोशल मीडिया पर बहस जारी है और लोगों की नजर इस बात पर है कि पाकिस्तान सरकार इस तस्वीर को लेकर कोई आधिकारिक सफाई देती है या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Iran-America

Iran-America फिर बढ़ा Middle East तनाव, Hormuz के पास US Strike के बाद Iran का Missile Attack

ईरान और अमेरिका (Iran-America) के बीच एक महीने से जारी अपेक्षाकृत शांति अब फिर टूट गई है। अमेरिका ने ईरान के Larak Island पर दो लॉन्चर्स को निशाना बनाया। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया। इस घटनाक्रम के बाद पूरे Middle East में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। Hormuz के पास अमेरिका ने क्यों किया हमला? अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, Larak Island पर ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। अमेरिका का दावा है कि वहां मौजूद दो लॉन्चर्स के जरिए Strait of Hormuz में समुद्री बारूदी सुरंगें पहुंचाने की तैयारी की जा रही थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस कार्रवाई को सीमित और सटीक बताया। अमेरिका के अनुसार, इसका मकसद Hormuz में Commercial Shipping के लिए संभावित खतरे को रोकना था। ईरान ने हमले को बताया बड़ी कार्रवाई अमेरिकी हमले के बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि इस कार्रवाई में उसके सैनिकों और नागरिकों के हताहत होने की जानकारी है। ईरानी पक्ष ने अमेरिका को जवाब देने की चेतावनी भी दी। इसके बाद ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही। हालांकि, हमले से हुए नुकसान को लेकर ईरान और अमेरिका की तरफ से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। Jordan में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमला ईरान के IRGC के अनुसार, जॉर्डन में मौजूद दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें Al Azraq और King Hussein से जुड़े सैन्य ठिकाने शामिल बताए गए हैं। जॉर्डन की सेना के मुताबिक, उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई 8 मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया। शुरुआती जानकारी में बड़े नुकसान या बड़े पैमाने पर हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है। Strait of Hormuz क्यों है इतना अहम? इस पूरे विवाद के केंद्र में Strait of Hormuz है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा और समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इस रास्ते में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या बाधा का असर सिर्फ खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। Hormuz में तनाव बढ़ने पर तेल की सप्लाई, समुद्री परिवहन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर सीधा असर पड़ सकता है। ताजा हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई। Reuters के मुताबिक, 31 अगस्त को Brent crude करीब 2.5% बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया था। एक महीने बाद फिर क्यों बढ़ा तनाव? अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ समय से सैन्य गतिविधियों में कमी देखने को मिल रही थी। लेकिन Hormuz में समुद्री सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ था। अमेरिका का कहना है कि ईरानी गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए खतरा पैदा कर सकती थीं। वहीं, ईरान अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को आक्रामक कदम मानता है। Larak Island पर हुए हमले और उसके बाद Jordan में जवाबी मिसाइल हमले ने दोनों देशों के बीच तनाव को फिर सुर्खियों में ला दिया है। आगे क्या होगा? फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव यहीं रुक जाएगा या फिर Middle East में तनाव और बढ़ेगा। अगर Hormuz में सैन्य गतिविधियां बढ़ती हैं, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार और Shipping Industry पर भी पड़ सकता है। अमेरिका की कार्रवाई और ईरान की जवाबी प्रतिक्रिया के बाद अब दुनिया की नजर दोनों देशों के अगले कदम पर है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि दोनों पक्ष तनाव कम करने की कोशिश करते हैं या संघर्ष एक बार फिर बड़े स्तर पर पहुंचता है। फिलहाल इतना साफ है कि Larak Island पर अमेरिकी कार्रवाई ने लंबे समय से चल रहे US-Iran तनाव को फिर भड़का दिया है और इसका असर पूरे Middle East के साथ-साथ Global Oil Market पर भी दिखाई दे सकता है।
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H-1B

H-1B Rules में बड़ा बदलाव: Trump हटाएंगे 60 Days Grace Period? Indian IT Professionals पर असर

अमेरिका में काम करने वाले भारतीय H-1B visa holders के लिए Donald Trump administration की immigration policies लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। अब H-1B के तहत मिलने वाली 60 Days Grace Period को खत्म करने की तैयारी की खबरों ने भारतीय IT professionals के बीच नई चिंता पैदा कर दी है। अगर यह प्रस्ताव अंतिम रूप से लागू होता है, तो नौकरी जाने के बाद H-1B workers को अमेरिका में नई नौकरी तलाशने के लिए मिलने वाली मौजूदा 60 दिनों की राहत खत्म हो सकती है। इसके साथ ही H-1B visa से जुड़ी बढ़ी हुई लागत और दूसरे proposed immigration changes भी भारतीय professionals के लिए अमेरिका में नौकरी और long-term career planning को प्रभावित कर सकते हैं। क्या है H-1B 60 Days Grace Period? मौजूदा नियमों के तहत, अगर किसी H-1B worker की नौकरी समाप्त हो जाती है, तो कुछ परिस्थितियों में उसे अधिकतम 60 दिन या उसके authorized stay की समाप्ति तक, जो भी पहले हो, अमेरिका में रहने की अनुमति मिल सकती है। इस दौरान कर्मचारी: टेक्नोलॉजी सेक्टर में layoffs के दौरान यह grace period H-1B workers के लिए एक महत्वपूर्ण safety net बन गई है। Trump Administration क्यों बदलना चाहती है H-1B Rules? Trump administration लंबे समय से अमेरिकी workers को प्राथमिकता देने और foreign workers पर अमेरिकी कंपनियों की निर्भरता कम करने की नीति पर जोर देती रही है। प्रस्तावित बदलावों का व्यापक उद्देश्य H-1B program में ज्यादा सख्ती और oversight लाना है। हालांकि, 60-day grace period को खत्म करने का प्रस्ताव अभी अंतिम रूप से लागू नियम नहीं माना जा सकता। अंतिम regulatory process और effective date यह तय करेंगे कि बदलाव वास्तव में कब और किस रूप में लागू होगा। Indians पर सबसे बड़ा असर क्या होगा? H-1B program में भारतीय professionals की बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण किसी भी बड़े बदलाव का असर भारतीयों पर विशेष रूप से पड़ सकता है। 1. Layoff के बाद बढ़ेगा Immigration Pressure अगर किसी भारतीय H-1B employee की नौकरी चली जाती है, तो मौजूदा 60 दिनों का buffer उपलब्ध नहीं होने पर उसे बहुत तेजी से नया employer या दूसरा वैध immigration option तलाशना पड़ सकता है। इससे layoffs का असर सिर्फ नौकरी खोने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिका में रहने की स्थिति भी तुरंत चिंता का विषय बन सकती है। 2. IT Professionals पर ज्यादा असर भारतीय H-1B workers की बड़ी संख्या technology और specialized professional roles में काम करती है। इसलिए software engineers, IT consultants, data professionals और दूसरे skilled workers के लिए नौकरी बदलने की समय-सीमा महत्वपूर्ण हो सकती है। नई व्यवस्था में companies के बीच job switch करने की प्रक्रिया को पहले से ज्यादा जल्दी पूरा करना जरूरी हो सकता है। 3. कम समय में Job Search का दबाव 60 दिन की grace period खत्म होने की स्थिति में कर्मचारी के पास नई नौकरी तलाशने के लिए कम flexibility होगी। ऐसे में कुछ workers को: H-1B Fee में भारी बढ़ोतरी से भी बढ़ी चिंता H-1B program में प्रस्तावित एक और बड़ा बदलाव इसकी लागत से जुड़ा है। Trump administration ने नए H-1B petitions से जुड़ी $103,265 की proposed fee को लेकर कदम उठाए हैं। यह समझना जरूरी है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर H-1B employee को अपनी जेब से करीब $100,000 देना होगा। यह मुख्य रूप से employer-side cost से जुड़ा प्रस्ताव है। फिर भी इतनी बड़ी लागत कंपनियों के hiring decisions को प्रभावित कर सकती है। Indian IT Companies के लिए क्या बदल सकता है? H-1B rules में सख्ती और बढ़ी हुई लागत का असर भारतीय IT companies की US business strategy पर भी पड़ सकता है। कंपनियां संभावित रूप से: इसका मतलब यह हो सकता है कि आने वाले समय में भारतीय IT professionals के लिए US onsite opportunities की competition और बढ़ जाए। H-4 Visa पर रहने वाले परिवारों पर भी असर H-1B employee की immigration स्थिति का असर उसके परिवार पर भी पड़ सकता है। H-4 status पर अमेरिका में रहने वाले spouse और children के लिए भी primary H-1B holder की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। अगर principal H-1B worker को नौकरी जाने के बाद जल्दी नया immigration solution नहीं मिलता, तो परिवार को भी relocation या दूसरे immigration options पर विचार करना पड़ सकता है। इसका असर बच्चों की schooling, spouse की employment और परिवार की financial planning पर भी पड़ सकता है। क्या हर H-1B worker को नौकरी जाते ही अमेरिका छोड़ना पड़ेगा? यह सबसे महत्वपूर्ण बात है। 60-day grace period खत्म करने का प्रस्ताव अगर लागू होता भी है, तो उसकी वास्तविक conditions अंतिम नियम में स्पष्ट होंगी। इसके अलावा H-1B worker की स्थिति उसके individual immigration circumstances, pending petitions, authorized stay और उपलब्ध दूसरे legal options पर निर्भर कर सकती है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि grace period हटते ही हर H-1B worker को नौकरी खत्म होने के अगले दिन अमेरिका छोड़ना पड़ेगा। क्या भारतीयों के लिए US में Jobs खत्म हो जाएंगी? ऐसा कहना भी सही नहीं होगा। अमेरिका की technology, healthcare, research, engineering और दूसरे specialized sectors में skilled professionals की मांग बनी हुई है। लेकिन नए नियमों से H-1B sponsorship की लागत और immigration uncertainty बढ़ सकती है। इसका सबसे बड़ा असर नए applicants और ऐसे professionals पर पड़ सकता है जिन्हें employer sponsorship की जरूरत है। H-1B Indians के लिए आगे क्या महत्वपूर्ण होगा? भारतीय H-1B professionals को आने वाले समय में immigration policy में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी होगी। खासकर ये चार चीजें महत्वपूर्ण रहेंगी: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Pakistan

Pakistan Hospital Fire: Islamabad के सरकारी अस्पताल में बड़ा हादसा, Newborns की मौत से दहला शहर

पाकिस्तान (Pakistan) की राजधानी इस्लामाबाद में बुधवार सुबह एक सरकारी अस्पताल में लगी आग ने हर किसी को झकझोर दिया। Pakistan Institute of Medical Sciences (PIMS) के एक वार्ड में अचानक आग भड़क उठी। इस हादसे में कई नवजात बच्चों की जान चली गई, जबकि रेस्क्यू टीम सिर्फ एक बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल सकी। मृतकों की संख्या को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में थोड़ा अंतर है। कुछ रिपोर्टों में 15 नवजातों की मौत की बात कही गई है, जबकि कुछ आधिकारिक शुरुआती जानकारियों में यह संख्या 14 बताई गई। घटना की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी। AC Compressor में धमाके के बाद फैली आग स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आग अस्पताल के उस हिस्से में लगी जहां नवजात बच्चों को रखा गया था। शुरुआती जांच में AC Compressor में विस्फोट को आग की संभावित वजह माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि कंप्रेसर में खराबी के बाद अचानक आग भड़की और कुछ ही समय में पूरे वार्ड को अपनी चपेट में ले लिया। वार्ड में मौजूद नवजात बच्चों के लिए स्थिति बेहद गंभीर थी, क्योंकि इतनी कम उम्र के बच्चों को अपने दम पर सुरक्षित स्थान तक ले जाना संभव नहीं था। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक आग की अंतिम वजह की पुष्टि नहीं की है। इसके लिए विस्तृत जांच की जा रही है। सुबह-सुबह मची अफरा-तफरी जानकारी के मुताबिक, आग बुधवार सुबह करीब 6:45 से 7 बजे के बीच लगी। धुआं और आग फैलते ही अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। कर्मचारियों ने तुरंत फायर ब्रिगेड और रेस्क्यू टीम को सूचना दी। दमकलकर्मी मौके पर पहुंचे और आग बुझाने के साथ वार्ड में फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक नवजात को सुरक्षित बचा लिया गया। लेकिन बाकी बच्चों को बचाने की कोशिशें कामयाब नहीं हो सकीं। इस दर्दनाक हादसे ने अस्पताल में मौजूद परिवारों और कर्मचारियों को गहरे सदमे में डाल दिया। Fire Safety व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना के बाद अस्पताल की Fire Safety System को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। खासकर नवजात बच्चों के वार्ड में आग जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए कितनी तैयारी थी, इसकी जांच की जा रही है। अस्पतालों में नर्सरी और ICU जैसे संवेदनशील हिस्सों में छोटी सी तकनीकी खराबी भी बड़ा खतरा बन सकती है। ऐसे में Fire Alarm, Emergency Exit, बिजली और AC सिस्टम की नियमित जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। PM शहबाज शरीफ ने दिए जांच के आदेश हादसे पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दुख जताया है। उन्होंने घटना की जांच के निर्देश दिए हैं और यह पता लगाने को कहा है कि आग किन परिस्थितियों में लगी और इतनी तेजी से कैसे फैली। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि हादसे के समय अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी और रेस्क्यू के दौरान किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हादसे ने कई सवाल छोड़े PIMS में हुआ यह हादसा सिर्फ एक अस्पताल की घटना नहीं है, बल्कि इससे सरकारी अस्पतालों की Emergency Preparedness और Fire Safety पर भी बहस शुरू हो गई है। फिलहाल जांच एजेंसियां आग की वजह और जिम्मेदारी तय करने में जुटी हैं। मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आने के कारण आधिकारिक आंकड़े का इंतजार किया जा रहा है। एक तरफ अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर आए परिवारों पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा, वहीं इस हादसे ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि संवेदनशील मरीजों और खासकर नवजात बच्चों की सुरक्षा के लिए अस्पतालों में सुरक्षा मानकों की नियमित निगरानी कितनी जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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France

France Tornado Pomas में तूफान ने मचाई तबाही, घरों की छतें उड़ीं

France में सोमवार शाम मौसम ने अचानक करवट ली और कुछ ही मिनटों में Pomas गांव का नजारा बदल गया। तेज तूफान के बीच आए Tornado ने घरों की छतें उड़ा दीं, पेड़ गिरा दिए और कई इमारतों को नुकसान पहुंचाया। इस प्राकृतिक आपदा में 41 लोगों के घायल होने की खबर है, जबकि करीब 300 घरों को नुकसान पहुंचा है। मलबे और टूटे-फूटे सामान से सड़कों के भर जाने के बाद स्थानीय प्रशासन को राहत और बचाव अभियान तेज करना पड़ा। कई परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। अचानक आया Tornado, लोगों में मची दहशत Aude क्षेत्र के Pomas और आसपास के इलाकों में सोमवार शाम तेज हवाओं के साथ मौसम बिगड़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ ही समय में हवा इतनी तेज हो गई कि लोगों को घरों के अंदर सुरक्षित जगह तलाशनी पड़ी। Tornado के गुजरने के बाद कई मकानों की छतों और खिड़कियों को नुकसान पहुंचा। गांव की गलियों में पेड़ और मलबा बिखरा दिखाई दिया। प्रभावित इलाकों में प्रशासन और Emergency Services की टीमें पहुंचीं और नुकसान का जायजा लेना शुरू किया। 41 लोग घायल, कई अस्पताल में भर्ती इस घटना में 41 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। इनमें से कुछ लोगों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। राहत टीमों ने प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों की मदद की और क्षतिग्रस्त इमारतों की सुरक्षा जांच शुरू की। प्रशासन ने लोगों से अपील की कि वे क्षतिग्रस्त मकानों में बिना जांच के वापस न जाएं। कुछ परिवारों के लिए अस्थायी राहत केंद्रों की व्यवस्था भी की गई। 300 घरों को नुकसान, कई छतें उड़ीं Tornado का सबसे ज्यादा असर मकानों पर दिखाई दिया। करीब 300 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। कई घरों की छतों को नुकसान पहुंचा, जबकि खिड़कियां और बाहरी हिस्से भी टूट गए। स्थानीय लोगों के लिए यह अनुभव बेहद डरावना रहा। कई परिवारों ने बताया कि उन्हें कुछ ही मिनटों में समझ नहीं आया कि अचानक इतनी तेज हवा कहां से आ गई। 117 kmph तक पहुंची हवा की रफ्तार मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक आसपास के क्षेत्र में 117 kmph तक की तेज हवाएं दर्ज की गईं। हालांकि, इस आंकड़े को सीधे Tornado की स्पीड बताना सही नहीं होगा। यह आसपास के इलाके में दर्ज तेज हवा की गति है। दक्षिणी फ्रांस में पहले से ही खराब मौसम को लेकर चेतावनी जारी थी। तेज बारिश, गरज-चमक और आंधी ने हालात को और मुश्किल बना दिया। बिजली और सड़क व्यवस्था प्रभावित तूफान के कारण बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। कई इलाकों में पेड़ और मलबा सड़कों पर गिरने से यातायात बाधित हुआ। Emergency teams को रास्ते साफ करने और बिजली व्यवस्था बहाल करने के लिए काम करना पड़ा। खराब मौसम का असर Road और Rail Services पर भी पड़ा। कई जगहों पर यातायात धीमा हुआ और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। Flight Services पर भी पड़ा असर फ्रांस के कई हिस्सों में खराब मौसम के कारण Flight Operations भी प्रभावित हुए। कुछ उड़ानों में देरी हुई, जबकि कुछ सेवाओं को रद्द या प्रभावित करना पड़ा। यात्रियों को एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी Flight Status जांचने की सलाह दी गई। यानी Tornado और Storm का असर केवल एक गांव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि Transport Network पर भी इसका असर दिखाई दिया। Vuelta a España पर भी मौसम का असर खराब मौसम का असर खेल आयोजनों पर भी पड़ा। Vuelta a España Cycling Race के तीसरे चरण को सुरक्षा कारणों से रोकना पड़ा। तेज बारिश और ओलावृष्टि के बाद आयोजकों ने खिलाड़ियों की सुरक्षा को देखते हुए रेस को रोकने का फैसला किया। राहत कार्य जारी, सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिश फिलहाल प्रशासन प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य में जुटा है। क्षतिग्रस्त मकानों की जांच की जा रही है और सड़कों से मलबा हटाया जा रहा है। Pomas के लोगों के लिए यह शाम लंबे समय तक याद रहने वाली है। कुछ ही मिनटों में तेज हवाओं ने जिस तरह घरों और आसपास के इलाके को प्रभावित किया, उसने पूरे क्षेत्र को हिला दिया। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित परिवारों को सुरक्षित जगह उपलब्ध कराना और बिजली, सड़क व परिवहन व्यवस्था को जल्द से जल्द सामान्य करना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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B1/B2 Visa

Trump का बड़ा Immigration Action: 2 लाख तक B1/B2 Visa होंगे रद्द, Asylum वालों पर नजर

अमेरिका जाने का सपना देख रहे लोगों के लिए इमिग्रेशन से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। Trump Administration अब उन विदेशी नागरिकों पर सख्ती बढ़ाने की तैयारी में है, जो Tourist या Business Visa पर अमेरिका पहुंचे और बाद में वहां Asylum (शरण) के लिए आवेदन कर दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, ऐसे 2 लाख तक B1/B2 Visa रद्द किए जा सकते हैं। अगर यह योजना बड़े स्तर पर लागू होती है, तो एक साथ इतने वीजा रद्द किए जाने की कार्रवाई अमेरिका की इमिग्रेशन पॉलिसी में असाधारण कदम मानी जाएगी। हालांकि, फिलहाल 2 लाख का आंकड़ा संभावित संख्या है, अंतिम सरकारी आंकड़ा नहीं। Tourist Visa पर अमेरिका गए, फिर Asylum मांगा अमेरिका में B1 और B2 Visa मुख्य रूप से अस्थायी यात्राओं के लिए जारी किए जाते हैं। B1 Visa का इस्तेमाल आमतौर पर Business Travel के लिए होता है, जबकि B2 Visa Tourism, रिश्तेदारों से मिलने या कुछ मेडिकल यात्राओं के लिए दिया जाता है। अमेरिकी प्रशासन की चिंता उन मामलों को लेकर है, जहां कोई व्यक्ति Visitor Visa के जरिए अमेरिका पहुंचने के बाद वहां Asylum Application दाखिल कर देता है। सरकार का मानना है कि कुछ मामलों में अस्थायी यात्रा के लिए मिले वीजा का इस्तेमाल लंबे समय तक अमेरिका में रहने के रास्ते के तौर पर किया जा रहा है। 2 लाख Visa Cancel होने की खबर कितनी सही? यहां सबसे जरूरी बात समझना जरूरी है। 2 लाख वीजा रद्द किए जाने की बात अभी एक संभावित आंकड़ा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, मामलों की समीक्षा जारी है और वास्तविक संख्या इससे कम या ज्यादा हो सकती है। यानी फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि अमेरिका ने 2 लाख लोगों के वीजा तुरंत रद्द कर दिए हैं। बल्कि प्रशासन ऐसे मामलों की पहचान और जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है। Visa Cancel होने का मतलब Deportation नहीं Visa cancellation को लेकर लोगों के बीच एक बड़ा भ्रम भी है। वीजा रद्द होना और Deportation एक ही बात नहीं है। किसी व्यक्ति का B1/B2 Visa रद्द होने का मतलब यह है कि वह उस वीजा के आधार पर अमेरिका की यात्रा नहीं कर पाएगा। लेकिन अगर उसका Asylum Case पहले से किसी प्रक्रिया में है, तो उसकी इमिग्रेशन स्थिति अलग नियमों के तहत देखी जा सकती है। इसलिए प्रभावित लोगों के लिए आगे की कानूनी और इमिग्रेशन प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होगी। Trump Administration क्यों कर रहा है इतनी सख्ती? राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन ने इमिग्रेशन को अपने प्रमुख एजेंडे में रखा है। सरकार लगातार यह संदेश दे रही है कि अमेरिका में प्रवेश और रहने के नियमों का गलत इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। Administration का फोकस खास तौर पर उन मामलों पर है, जहां Visitor Visa लेकर अमेरिका पहुंचने के बाद व्यक्ति ऐसी प्रक्रिया शुरू करता है जिससे वह लंबे समय तक देश में रह सके। सरकार का तर्क है कि Asylum System का इस्तेमाल वास्तविक शरण की जरूरत वाले लोगों के लिए होना चाहिए, न कि इमिग्रेशन नियमों से बचने के वैकल्पिक रास्ते के तौर पर। पहले भी हजारों Visa हो चुके हैं Cancel यह कार्रवाई अचानक शुरू हुई प्रक्रिया नहीं है। Trump Administration पहले से ही Visa और Immigration System की जांच कड़ी कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, पिछले करीब 18 महीनों में अलग-अलग कारणों से 1.75 लाख से ज्यादा Visa रद्द किए जा चुके हैं। इनमें आपराधिक मामलों और वीजा नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले भी शामिल हैं। अब अगर B1/B2 Visa वाले Asylum Applicants पर प्रस्तावित कार्रवाई आगे बढ़ती है, तो यह अभियान और बड़ा रूप ले सकता है। आगे क्या होगा? आने वाले समय में अमेरिकी State Department और Department of Homeland Security की जांच और समीक्षा के बाद तस्वीर ज्यादा साफ हो सकती है। प्रभावित लोगों की संख्या भी इसी प्रक्रिया के बाद सामने आएगी। फिलहाल इतना साफ है कि America Visa Rules को लेकर Trump Administration का रुख पहले से ज्यादा सख्त हो चुका है। Tourist और Business Visa पर अमेरिका जाने वालों के लिए यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भविष्य में Visa Screening और Immigration Checks और कड़े होने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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America vs Iran: ईरान की कमाई पर बड़ा हमला, इन 5 Sectors में कारोबार पर बढ़ा खतरा

अमेरिका (America) ने ईरान (Iran) के खिलाफ आर्थिक दबाव को एक और कदम आगे बढ़ा दिया है। ट्रंप प्रशासन ने “Operation Economic Outcast” नाम से एक नई मुहिम शुरू की है, जिसके तहत ईरान की अर्थव्यवस्था से जुड़े पांच अहम सेक्टरों पर Secondary Sanctions का खतरा बढ़ाया गया है। इनमें Digital Assets, Technology, Gold, Aviation और Shipping शामिल हैं। इस फैसले की खास बात यह है कि अमेरिका का निशाना सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। जो विदेशी कंपनियां या संस्थाएं ईरान से जुड़े इन क्षेत्रों में कारोबार या सेवाएं जारी रखेंगी, उनके खिलाफ भी अमेरिकी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ईरान के साथ कारोबार करने वाले हर देश पर तुरंत प्रतिबंध लगा दिया गया है। अमेरिका ने कई मामलों में पहले चेतावनी और कार्रवाई के लिए समयसीमा तय करने की बात कही है। अमेरिका ने क्यों उठाया इतना बड़ा कदम? अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के मुताबिक इस अभियान का मकसद ईरान की उन आर्थिक “lifelines” को काटना है, जिनसे उसे अंतरराष्ट्रीय कारोबार और राजस्व हासिल होता है। अमेरिकी सरकार का आरोप है कि ईरान तेल की बिक्री, प्रतिबंधों से बचने वाले नेटवर्क और दूसरे वित्तीय रास्तों के जरिए अपनी गतिविधियों को जारी रखता है। नई रणनीति में अमेरिका ईरान से जुड़े कारोबारी नेटवर्क के साथ-साथ उन विदेशी संस्थाओं पर भी दबाव बनाना चाहता है, जो इन गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद करती हैं। Gold और Digital Assets पर खास नजर नई कार्रवाई में Gold और Digital Assets को भी प्रमुखता दी गई है। अमेरिकी ट्रेजरी का कहना है कि ईरान अपनी कमजोर होती औपचारिक वित्तीय व्यवस्था के बीच सोने का इस्तेमाल अपनी मुद्रा को सहारा देने और महंगाई के असर से बचने के लिए कर रहा है। वहीं, Digital Assets यानी क्रिप्टो से जुड़े नेटवर्क को भी प्रतिबंधों से बचने और वित्तीय लेनदेन के लिए इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई गई है। Technology सेक्टर भी अमेरिकी निशाने पर ईरान को उन्नत तकनीक तक पहुंच से रोकना भी इस अभियान का अहम हिस्सा है। अमेरिका का दावा है कि ईरान ऐसी तकनीक और उपकरण हासिल करने की कोशिश करता है, जिनका इस्तेमाल उसके मिसाइल और अन्य संवेदनशील कार्यक्रमों में हो सकता है। इसी वजह से नई कार्रवाई में Technology से जुड़े नेटवर्क और खरीद गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। Aviation और Shipping पर भी शिकंजा ईरान की Aviation और Shipping गतिविधियां भी इस अभियान के केंद्र में हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक कुछ ईरानी एयरलाइंस और शिपिंग नेटवर्क का इस्तेमाल संवेदनशील सामान, तकनीक और तेल की आवाजाही के लिए किया जाता है। Shipping के मामले में अमेरिका ने ईरान से जुड़े Shadow Fleet नेटवर्क पर विशेष कार्रवाई की है। ट्रेजरी ने अलग-अलग देशों में मौजूद ब्रोकरों, कंपनियों और जहाजों पर कार्रवाई करते हुए ईरानी तेल की ढुलाई और उससे होने वाली कमाई के नेटवर्क को निशाना बनाया है। करीब 60 Entities, Individuals और Vessels पर कार्रवाई अमेरिका ने इस अभियान के शुरुआती चरण में करीब 60 Entities, Individuals और Vessels को प्रतिबंधों के दायरे में लिया है। इनमें कथित तेल नेटवर्क, तकनीकी खरीद, साइबर गतिविधियों और अन्य वित्तीय चैनलों से जुड़े लोग और संस्थाएं शामिल हैं। अमेरिकी कार्रवाई का नेटवर्क काफी बड़ा है और इसमें UAE, Hong Kong, China, Singapore, Switzerland और यूरोप जैसे अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े कारोबारी नेटवर्क शामिल बताए गए हैं। दूसरे देशों के लिए क्यों बढ़ी चिंता? अमेरिका का यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि Secondary Sanctions का असर ईरान की सीमाओं से बाहर भी पड़ सकता है। अगर कोई विदेशी संस्था ईरान से जुड़े ऐसे कारोबार में शामिल होती है जिसे अमेरिका प्रतिबंधों के दायरे में लाता है, तो उस संस्था के अमेरिकी वित्तीय सिस्टम तक पहुंच पर खतरा बढ़ सकता है। यानी अब ईरान के साथ कारोबार करने वाली कंपनियों को सिर्फ तेहरान के साथ अपने रिश्ते नहीं देखने होंगे, बल्कि अमेरिकी प्रतिबंधों के संभावित असर को भी ध्यान में रखना पड़ेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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MP में 14 करोड़ की ठगी, Luxury Car और iPhone से दिखाता था रुतबा; 65 Bank Accounts और 20 Shell Companies का खुलासा

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भोपाल। मध्य प्रदेश में एक बड़े ठगी के मामले ने पुलिस को भी हैरान कर दिया है। गुजरात से आकर मध्य प्रदेश में छिपे एक आरोपी पर करीब 14 करोड़ रुपये की ठगी करने का आरोप है। बताया जा रहा है कि आरोपी लोगों के बीच अपना रुतबा दिखाने के लिए लग्जरी कार और महंगे iPhone का इस्तेमाल करता था। जांच आगे बढ़ी तो इस पूरे मामले के तार सिर्फ मध्य प्रदेश और गुजरात तक सीमित नहीं मिले। पुलिस को आरोपी से जुड़े 65 बैंक खातों और करीब 20 शेल कंपनियों की जानकारी मिली है। इसके अलावा उसके नेटवर्क के हांगकांग तक जुड़े होने की बात भी सामने आई है। लग्जरी लाइफस्टाइल से बनाता था भरोसा आरोपी कथित तौर पर महंगी कार और iPhone के जरिए लोगों के बीच अपनी मजबूत आर्थिक स्थिति की छवि बनाता था। इसी तरह की लाइफस्टाइल देखकर कई लोग उस पर भरोसा कर लेते थे। पुलिस की जांच में सामने आया कि ठगी से जुड़े पैसों को अलग-अलग बैंक खातों और कंपनियों के जरिए घुमाया जाता था। इससे पैसों के लेन-देन को समझना जांच एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया। 65 बैंक अकाउंट और 20 शेल कंपनियां जांच के दौरान आरोपी से जुड़े 65 बैंक खातों का पता चला है। इसके साथ ही करीब 20 शेल कंपनियों के इस्तेमाल की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस अब इन खातों और कंपनियों के जरिए हुए लेन-देन की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इन कंपनियों के जरिए कितनी रकम ट्रांसफर की गई और इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। हांगकांग तक जुड़े ठगी के तार मामले की जांच में नेटवर्क के हांगकांग तक जुड़े होने की जानकारी सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। अब एजेंसियां विदेशी लेन-देन और नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। फिलहाल जांच जारी है। 14 करोड़ रुपये की ठगी, कई बैंक खातों और शेल कंपनियों के सामने आने से यह मामला एक संगठित वित्तीय अपराध की ओर इशारा करता है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क और रकम के इस्तेमाल की तस्वीर साफ हो पाएगी।
Suryavanshi की Batting देखने उमड़ी हजारों की भीड़, 93 मिनट तक Chepauk में दिखा शानदार नजारा

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दलीप ट्रॉफी फाइनल में सूर्यवंशी की बल्लेबाजी देखने के लिए चेपॉक स्टेडियम में बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे। उनकी बल्लेबाजी के दौरान स्टेडियम का माहौल पूरी तरह क्रिकेटमय हो गया और करीब 93 मिनट तक दर्शकों का उत्साह देखते ही बना। सूर्यवंशी को खेलते देखने के लिए इतनी भीड़ पहुंची कि स्टेडियम में मौजूद दर्शकों की संख्या को देखते हुए एक्स्ट्रा स्टैंड भी खोलने पड़े। इससे मुकाबले को लेकर फैंस की दिलचस्पी साफ नजर आई। सूर्यवंशी की बैटिंग ने खींचा ध्यान मैच के दौरान सूर्यवंशी की बल्लेबाजी देखने के लिए दर्शक लगातार उत्साहित नजर आए। चेपॉक में उनके हर शॉट पर दर्शकों की प्रतिक्रिया ने माहौल को और खास बना दिया। दलीप ट्रॉफी जैसे घरेलू टूर्नामेंट में किसी खिलाड़ी को देखने के लिए इस तरह की भीड़ जुटना क्रिकेट फैंस के बीच उसकी लोकप्रियता को दिखाता है। Extra Stands भी खोलने पड़े दर्शकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्टेडियम के अतिरिक्त स्टैंड खोलने पड़े। आयोजकों के लिए भी यह नजारा खास रहा, क्योंकि मुकाबले में फैंस की मौजूदगी उम्मीद से ज्यादा दिखाई दी। चेपॉक में मौजूद दर्शकों ने करीब 93 मिनट तक सूर्यवंशी की बल्लेबाजी का आनंद लिया। सोशल मीडिया पर भी स्टेडियम की भीड़ और माहौल की तस्वीरें चर्चा में रहीं। घरेलू क्रिकेट के लिए अच्छी तस्वीर दलीप ट्रॉफी भारतीय क्रिकेट में नए और उभरते खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा मंच है। ऐसे में किसी खिलाड़ी की बल्लेबाजी देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शकों का पहुंचना घरेलू क्रिकेट के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। चेपॉक में जुटी भीड़ ने एक बार फिर दिखाया कि भारतीय क्रिकेट फैंस सिर्फ अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में ही नहीं, बल्कि घरेलू क्रिकेट में भी खिलाड़ियों को देखने के लिए स्टेडियम पहुंच रहे हैं।
Sikkim Landslide: दो नदियों का रास्ता बंद, एक जगह जमा हुआ पानी; UP और MP में भी बारिश का असर

Sikkim Landslide: दो नदियों का रास्ता बंद, एक जगह जमा हुआ पानी; UP और MP में भी बारिश का असर

देश के कई हिस्सों में लगातार बारिश के कारण हालात मुश्किल होते जा रहे हैं। सिक्किम में लैंडस्लाइड के बाद दो नदियों का रास्ता बंद होने से पानी एक जगह जमा हो गया है। वहीं उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और बढ़े जलस्तर का असर घाटों पर दिखाई दे रहा है। मध्य प्रदेश में भी कई नदियां उफान पर हैं। Sikkim में Landslide से नदियों का रास्ता बंद सिक्किम में लैंडस्लाइड के कारण दो नदियों का प्रवाह प्रभावित हुआ है। मलबा आने से नदी का रास्ता रुक गया और पानी एक जगह जमा होने लगा। इससे आसपास के इलाकों में खतरा बढ़ गया है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित क्षेत्रों में सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। नदी का रास्ता जल्द साफ नहीं हुआ तो जमा पानी आसपास के इलाकों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है। UP में घाट डूबे, सड़क पर हुआ अंतिम संस्कार उत्तर प्रदेश में भी बारिश और नदियों के बढ़े जलस्तर ने लोगों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। कई घाट पानी में डूब गए, जिसके कारण अंतिम संस्कार के लिए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ जगहों पर हालात ऐसे बने कि लोगों को सड़क पर ही चिता जलानी पड़ी। इस स्थिति ने स्थानीय लोगों की परेशानी को और बढ़ा दिया है। MP में नदियां उफान पर मध्य प्रदेश में भी लगातार बारिश के चलते कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। नदियों के उफान पर होने से आसपास के इलाकों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। बारिश का असर सड़क, पुल और निचले इलाकों में भी देखने को मिल रहा है। प्रशासन और स्थानीय टीमें स्थिति पर नजर रख रही हैं। कई राज्यों में बारिश से बढ़ी परेशानी सिक्किम, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आ रही तस्वीरें बताती हैं कि लगातार बारिश ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है। कहीं लैंडस्लाइड से नदी का रास्ता बंद हुआ है, तो कहीं बढ़ते जलस्तर के कारण घाट और रास्ते प्रभावित हुए हैं। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित इलाकों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और जलभराव व नदी के बढ़ते पानी से होने वाले खतरे को कम करना है।
US-Canada Trade Deal पर विवाद, अमेरिकी मंत्री ने कनाडा पर साधा निशाना; PM Carney पर भी तंज

US-Canada Trade Deal पर विवाद, अमेरिकी मंत्री ने कनाडा पर साधा निशाना; PM Carney पर भी तंज

अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड डील को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। एक अमेरिकी मंत्री ने कनाडा पर तीखी टिप्पणी करते हुए उसे ‘भौंकने वाला छोटा कुत्ता’ तक कह दिया। अमेरिकी मंत्री ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पर आरोप लगाया कि उन्होंने अमेरिका की ओर से पेश की गई एक बेहतर ट्रेड डील को ठुकरा दिया। मंत्री की इस टिप्पणी के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। खास तौर पर ऐसे समय में जब दोनों देश पहले ही व्यापार को लेकर कई मुद्दों पर बातचीत कर चुके हैं। PM Carney ने डील ठुकराने का आरोप अमेरिकी मंत्री का कहना है कि प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका की ओर से रखे गए बेहतर व्यापार समझौते को स्वीकार नहीं किया। उनके मुताबिक, कनाडा के पास समझौते के जरिए व्यापारिक संबंधों को बेहतर बनाने का मौका था, लेकिन बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। अगस्त में बातचीत रही थी नाकाम अमेरिका और कनाडा के बीच अगस्त में हुई बातचीत किसी समझौते तक नहीं पहुंच सकी थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच ट्रेड रिलेशन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अब अमेरिकी मंत्री के बयान ने इस विवाद को और राजनीतिक रंग दे दिया है। तीखी भाषा में दिए गए बयान के बाद कनाडा की ओर से प्रतिक्रिया आने की संभावना भी जताई जा रही है। Trade War का असर अहम अमेरिका और कनाडा एक-दूसरे के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच ट्रेड डील को लेकर किसी भी तरह का तनाव कारोबार और उद्योगों पर असर डाल सकता है। फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में व्यापार समझौते को लेकर नए दौर की बातचीत होती है या नहीं, यह महत्वपूर्ण रहेगा।
Delhi Building Collapse: 50 साल पुरानी इमारत गिरी, 3 की मौत; हादसे के वक्त 50 से ज्यादा लोग थे अंदर

Delhi Building Collapse: 50 साल पुरानी इमारत गिरी, 3 की मौत; हादसे के वक्त 50 से ज्यादा लोग थे अंदर

राजधानी दिल्ली में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। करीब 50 साल पुरानी बिल्डिंग अचानक गिर गई, जिसमें दबने से 3 लोगों की मौत हो गई। हादसे के वक्त इमारत के अंदर 50 से ज्यादा लोगों के मौजूद होने का दावा किया जा रहा है। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। राहत और बचाव दल ने तुरंत पहुंचकर मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू की। आसपास के लोगों ने भी बचाव अभियान में मदद की। बेसमेंट में चल रही थी खुदाई जानकारी के मुताबिक, हादसे से पहले बिल्डिंग के बेसमेंट में खुदाई का काम चल रहा था। इसी दौरान इमारत का एक हिस्सा अचानक ढह गया। हालांकि, बिल्डिंग गिरने की असली वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। 50 से ज्यादा लोगों के मौजूद होने का दावा स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि हादसे के समय बिल्डिंग के अंदर 50 से ज्यादा लोग मौजूद थे। इस वजह से राहत और बचाव कार्य को तेजी से चलाया गया। मलबे के नीचे और लोगों के दबे होने की आशंका को देखते हुए बचाव दल लगातार तलाशी अभियान चला रहा है। प्रशासन की टीमें भी मौके पर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। हादसे की जांच शुरू पुलिस और प्रशासन ने घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। यह भी देखा जा रहा है कि बेसमेंट में चल रही खुदाई के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं। फिलहाल प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना है। हादसे के बाद इलाके में लोगों के बीच चिंता का माहौल है।

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