आपका चैनल --
ताज़ा खबर
BREAKINGवर्ल्ड न्यूज़Saudi Arabia Attack: एयरपोर्ट और Oil Field पर हमला, 3 की मौत; भारतीय समेत 10 घायल◆BREAKINGदेश-हरपलKedarnath Snowfall: पहाड़ों पर बर्फबारी, मध्य प्रदेश में बारिश और केरल में Landslide का खतरा◆BREAKINGछत्तीसगढ़छत्तीसगढ़ में परीक्षा में नकल और गड़बड़ी के मामलों की सुनवाई के लिए 3 स्पेशल कोर्ट गठित◆BREAKINGदेश-हरपलCJP Leaders Update: सौरव दास और आशुतोष रांका को फिर समन, Jantar Mantar केस में जांच तेज◆BREAKINGदेश-हरपलSonia Gandhi Instagram Debut: पहली पोस्ट में नई किताब की झलक, 3 घंटे में 59 हजार Likes◆BREAKINGमध्य प्रदेशइंदौर में गर्म दाल से झुलसे युवक की मौत, परिजनों ने डॉक्टरों पर गलत इंजेक्शन लगाने का लगाया आरोप◆BREAKINGदेश-हरपलShashi Tharoor on Rahul Gandhi: विदेश यात्रा पर सवाल पूछने वालों से बोले- मैं Travel Agent नहीं हूं◆BREAKINGवर्ल्ड न्यूज़Badr Agreement: 4 मुस्लिम देशों ने मिलाया हाथ, Defence Industry में बढ़ेगा सहयोग◆BREAKINGवर्ल्ड न्यूज़Saudi Arabia Attack: एयरपोर्ट और Oil Field पर हमला, 3 की मौत; भारतीय समेत 10 घायल◆BREAKINGदेश-हरपलKedarnath Snowfall: पहाड़ों पर बर्फबारी, मध्य प्रदेश में बारिश और केरल में Landslide का खतरा◆BREAKINGछत्तीसगढ़छत्तीसगढ़ में परीक्षा में नकल और गड़बड़ी के मामलों की सुनवाई के लिए 3 स्पेशल कोर्ट गठित◆BREAKINGदेश-हरपलCJP Leaders Update: सौरव दास और आशुतोष रांका को फिर समन, Jantar Mantar केस में जांच तेज◆BREAKINGदेश-हरपलSonia Gandhi Instagram Debut: पहली पोस्ट में नई किताब की झलक, 3 घंटे में 59 हजार Likes◆BREAKINGमध्य प्रदेशइंदौर में गर्म दाल से झुलसे युवक की मौत, परिजनों ने डॉक्टरों पर गलत इंजेक्शन लगाने का लगाया आरोप◆BREAKINGदेश-हरपलShashi Tharoor on Rahul Gandhi: विदेश यात्रा पर सवाल पूछने वालों से बोले- मैं Travel Agent नहीं हूं◆BREAKINGवर्ल्ड न्यूज़Badr Agreement: 4 मुस्लिम देशों ने मिलाया हाथ, Defence Industry में बढ़ेगा सहयोग◆

NE

News Elementor

What's Hot

Banner

Latest Posts

Saudi Arabia

Saudi Arabia Attack: एयरपोर्ट और Oil Field पर हमला, 3 की मौत; भारतीय समेत 10 घायल

सऊदी अरब (Saudi Arabia) में एयरपोर्ट और तेल ठिकाने पर हुए हमलों ने एक बार फिर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बुधवार, 21 अक्टूबर को दम्माम के किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और शायबाह ऑयल फील्ड के पास अलग-अलग घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 10 लोग घायल हुए। घायलों में एक भारतीय नागरिक भी शामिल है। इन घटनाओं के बाद अमेरिका ने सऊदी अरब में तैनात अपने गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली। लगातार बढ़ते हमलों ने सऊदी अरब की सुरक्षा, हवाई सेवाओं और तेल आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। Dammam Airport Attack: एयरपोर्ट पर हमले में एक की मौत सऊदी अरब के पूर्वी शहर दम्माम स्थित किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को 21 अक्टूबर की शाम निशाना बनाया गया। सऊदी अरब के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के मुताबिक, इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई और आठ लोग घायल हो गए। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि एयरपोर्ट की संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन शुरू किया गया। घटना के बाद हवाई यातायात पर असर पड़ा और कुछ विमानों को दूसरे एयरपोर्ट की ओर डायवर्ट करना पड़ा। अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। यात्रियों को अपनी उड़ान की ताजा स्थिति संबंधित एयरलाइन से जांचने की सलाह दी गई है। यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब सऊदी अरब के कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमलों की खबरें सामने आ रही हैं। Shaybah Oil Field Attack: ड्रोन का मलबा गिरने से दो लोगों की मौत सऊदी अरब के शायबाह ऑयल फील्ड को निशाना बनाने की कोशिश भी की गई। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, तेल सुविधा की ओर आ रहे ड्रोन को एयर डिफेंस ने रोक दिया। इसके बाद गिरे मलबे से दो लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। मारे गए लोगों में नेपाल और फिलीपींस के नागरिक शामिल हैं। वहीं, घायलों में एक भारतीय और एक पाकिस्तानी नागरिक बताया गया है। मलबा गिरने से तेल ठिकाने के बाहर एक ठेकेदार के वाहन में आग भी लग गई। शायबाह ऑयल फील्ड सऊदी अरब की प्रमुख तेल उत्पादन सुविधाओं में से एक है। राहत की बात यह रही कि शुरुआती आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस घटना से तेल उत्पादन पर असर नहीं पड़ा। Indian Citizen Injured: भारतीय दूतावास ने क्या कहा? शायबाह ऑयल फील्ड के पास हुई घटना में भारतीय नागरिक के घायल होने के बाद रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने सऊदी अधिकारियों से संपर्क किया। दूतावास ने घायल भारतीय को जरूरी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। फिलहाल उसकी स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने का इंतजार है। सऊदी अरब में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं। ऐसे में एयरपोर्ट और तेल सुविधाओं पर हमलों की खबरों से वहां रहने वाले भारतीय परिवारों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। भारतीय नागरिकों को स्थानीय प्रशासन और दूतावास की आधिकारिक सलाह पर ध्यान देना चाहिए। US Diplomats Exit: अमेरिका ने कर्मचारियों को देश छोड़ने को कहा सऊदी अरब में बढ़ते सुरक्षा खतरे के बीच अमेरिका ने अपने गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का निर्देश दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट के अनुसार, यह फैसला सऊदी अरब में नागरिक ठिकानों पर बढ़ते हमलों और उनसे पैदा हुए सुरक्षा जोखिम को देखते हुए लिया गया। अमेरिकी अधिकारियों ने क्षेत्र में संभावित नए हमलों की आशंका भी जताई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका दूसरे खाड़ी देशों में स्थित अपने कुछ मिशनों से भी परिवार के सदस्यों को वापस बुलाने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, सऊदी अरब के लिए जारी आदेश और दूसरे देशों में संभावित कदम अलग-अलग हैं। इस फैसले से संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति को गंभीरता से ले रहा है। हूती विद्रोहियों पर शक, पश्चिम एशिया में क्यों बढ़ रहा तनाव? यमन में सक्रिय हूती विद्रोही लंबे समय से सऊदी अरब और उसकी समर्थित यमनी सरकार के साथ संघर्ष में शामिल रहे हैं। हाल के दिनों में समूह ने सऊदी अरब के एयरपोर्ट और तेल से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने की धमकियां दी हैं। हूतियों ने पहले रियाद में हुए कुछ हमलों की जिम्मेदारी भी ली थी। हालांकि, 21 अक्टूबर को दम्माम एयरपोर्ट और शायबाह ऑयल फील्ड से जुड़ी दोनों घटनाओं के लिए तत्काल कोई स्पष्ट सार्वजनिक जिम्मेदारी सामने नहीं आई थी। क्षेत्र में जारी व्यापक संघर्ष ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। सऊदी अरब के लिए चुनौती केवल अपने महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा करना नहीं, बल्कि आम नागरिकों, विदेशी कर्मचारियों और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। Saudi Arabia News: पहले भी रियाद एयरपोर्ट पर हो चुके हैं हमले दम्माम की घटना से पहले राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी कई हमले हुए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, अक्टूबर के शुरुआती दिनों में हुए हमलों में बड़ी संख्या में लोग मारे गए और 300 से अधिक लोग घायल हुए। इन घटनाओं के बाद हवाई सेवाएं प्रभावित हुईं और कई एयरलाइंस ने अपनी उड़ानों में बदलाव किए। हवाई अड्डों पर लगातार हमलों से यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कारोबार और पर्यटन पर भी असर पड़ने की आशंका है। सऊदी अरब अपनी अर्थव्यवस्था को तेल के अलावा दूसरे क्षेत्रों में विस्तार देने की कोशिश कर रहा है, ऐसे में सुरक्षा संबंधी घटनाएं उसके लिए अतिरिक्त चुनौती बन सकती हैं। Crude Oil Price: हमलों के बाद कच्चा तेल महंगा सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों में शामिल है। इसलिए उसके तेल ठिकानों पर हमलों की खबर का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ता है। रॉयटर्स की 22 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.82 डॉलर बढ़कर 111.64 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। अमेरिकी WTI क्रूड भी 2.24 डॉलर बढ़कर 99.39 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा। बाजार में तेजी की एक प्रमुख वजह यह चिंता है कि अगर हमले बढ़ते हैं या तेल उत्पादन और परिवहन बाधित होता है, तो वैश्विक आपूर्ति पर असर...
Read more
Badr Agreement

Badr Agreement: 4 मुस्लिम देशों ने मिलाया हाथ, Defence Industry में बढ़ेगा सहयोग

पाकिस्तान ने रक्षा क्षेत्र में अपनी साझेदारी बढ़ाने के लिए तुर्किये, कतर और इंडोनेशिया के साथ हाथ मिलाया है। 21 अक्टूबर 2026 को कतर की राजधानी दोहा में चारों देशों ने ‘बद्र (Badr) मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का मकसद रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाना, तकनीकी जानकारी साझा करना और रिसर्च एवं डेवलपमेंट को बढ़ावा देना है। इस समझौते के बाद पाकिस्तान की रक्षा साझेदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इसे सिर्फ हथियार बनाने तक सीमित समझना सही नहीं होगा। इसके तहत रक्षा तकनीक, प्रशिक्षण और औद्योगिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी काम करने की संभावनाएं हैं। Badr Agreement: क्या है चार देशों के बीच समझौता? Badr Agreement के जरिए पाकिस्तान, तुर्किये, कतर और इंडोनेशिया रक्षा उद्योग में आपसी सहयोग बढ़ाना चाहते हैं। इसका उद्देश्य चारों देशों की क्षमताओं का इस्तेमाल करके रक्षा क्षेत्र में तकनीकी विकास और उत्पादन को बढ़ावा देना है। रक्षा क्षेत्र में इस तरह की साझेदारी से देशों को नई तकनीक सीखने, विशेषज्ञता साझा करने और संयुक्त परियोजनाओं पर काम करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, समझौते के तहत किन हथियारों का निर्माण किया जाएगा, कितना निवेश होगा और परियोजनाएं कब शुरू होंगी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। Pakistan और Turkiye की बढ़ती Defence Partnership पाकिस्तान और तुर्किये पहले भी रक्षा क्षेत्र में सहयोग करते रहे हैं। दोनों देशों के बीच सैन्य उपकरणों, तकनीकी सहयोग और रक्षा उत्पादन से जुड़े कई विषयों पर साझेदारी रही है। तुर्किये ने पिछले कुछ वर्षों में अपने रक्षा उद्योग को विकसित करने पर जोर दिया है। वहीं, पाकिस्तान भी घरेलू रक्षा उत्पादन और दूसरे देशों के साथ तकनीकी सहयोग बढ़ाने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में बद्र समझौता दोनों देशों के मौजूदा सहयोग को आगे बढ़ाने का एक और रास्ता बन सकता है। Qatar और Indonesia की क्या होगी भूमिका? इस समझौते में कतर और इंडोनेशिया की भागीदारी भी अहम है। कतर के पास निवेश की क्षमता है, जबकि इंडोनेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया का एक प्रमुख देश है और अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न देशों के साथ सहयोग करता है। चारों देश रक्षा उद्योग में अपनी जरूरतों और क्षमताओं के अनुसार सहयोग कर सकते हैं। लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रत्येक देश किस परियोजना में कितना योगदान देगा। इसलिए किसी खास हथियार के संयुक्त निर्माण या बड़े निवेश को लेकर पक्के दावे करना जल्दबाजी होगी। क्या पाकिस्तान मुस्लिम देशों के साथ नया रक्षा नेटवर्क बना रहा है? पाकिस्तान लंबे समय से मुस्लिम बहुल देशों के साथ अपने राजनीतिक, आर्थिक और रक्षा संबंध मजबूत करने की कोशिश करता रहा है। तुर्किये, कतर और इंडोनेशिया के साथ यह समझौता भी इसी व्यापक सहयोग का हिस्सा माना जा सकता है। हालांकि, चार देशों के बीच रक्षा उद्योग में सहयोग का समझौता होना और एक औपचारिक सैन्य गठबंधन बनना दो अलग बातें हैं। बद्र समझौते का घोषित फोकस रक्षा क्षेत्र में साझेदारी है। इसे किसी साझा सैन्य कार्रवाई की गारंटी या किसी देश के खिलाफ गठबंधन के रूप में देखना अभी सही नहीं होगा। India के लिए इस Defence Deal के क्या मायने हैं? भारत के लिए क्षेत्रीय रक्षा सहयोग से जुड़े ऐसे घटनाक्रम पर नजर रखना स्वाभाविक है। भारत और इंडोनेशिया के बीच भी रक्षा संबंध हैं। दोनों देश विभिन्न रक्षा और सुरक्षा मुद्दों पर सहयोग करते रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान, तुर्किये, कतर और इंडोनेशिया के इस समझौते को भारत के खिलाफ बनाई गई रणनीति बताने के लिए अभी पर्याप्त सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। समझौते का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि आगे कौन-सी परियोजनाएं शुरू होती हैं और चारों देश उन्हें किस तरह लागू करते हैं। आगे क्या होगा? बद्र समझौते के बाद अब नजर इसके अगले चरण पर रहेगी। संयुक्त रक्षा परियोजनाओं, तकनीकी प्रशिक्षण, रिसर्च और उत्पादन से जुड़े फैसले यह तय करेंगे कि यह साझेदारी कितनी आगे बढ़ती है। फिलहाल, समझौते से जुड़ी सभी परियोजनाओं, निवेश और हथियारों की सूची सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। इसलिए आने वाले समय में चारों देशों की आधिकारिक घोषणाएं इस साझेदारी की दिशा समझने में अहम होंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Marco Rubio

Marco Rubio Statement: पाकिस्तान से बातचीत जरूरी, भारत-ईरान की दोस्ती का अमेरिका ने किया जिक्र

अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) का बयान चर्चा में है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और उसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए अमेरिका के लिए उसके साथ संपर्क बनाए रखना जरूरी है। रुबियो ने भारत और ईरान के रिश्तों का उदाहरण देते हुए समझाया कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में मतभेद होने के बावजूद देशों को बातचीत के रास्ते खुले रखने पड़ते हैं। रुबियो ने यह बयान 20 अक्टूबर 2026 को मुंबई में Network18 के ग्रुप एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए इंटरव्यू में दिया। उनके मुताबिक, पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रखने से अमेरिका को उन गतिविधियों को हतोत्साहित करने में मदद मिल सकती है, जिनसे भारत को सुरक्षा संबंधी चिंता है। पाकिस्तान से रिश्ते बनाए रखना क्यों जरूरी मानता है अमेरिका? मार्को रुबियो ने कहा कि विदेश मंत्री के तौर पर उनकी जिम्मेदारी केवल किसी एक देश के साथ संबंधों को देखना नहीं, बल्कि अमेरिका की व्यापक विदेश नीति को संभालना है। इसके लिए उन देशों के साथ भी संपर्क बनाए रखना पड़ता है, जिनके साथ कुछ मुद्दों पर मतभेद होते हैं। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका दुनिया में आतंकवाद और आतंकवाद को समर्थन देने वालों के खिलाफ है। इसके बावजूद पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंध बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि उसके पास परमाणु हथियार हैं और उसकी भौगोलिक स्थिति भी रणनीतिक रूप से अहम है। रुबियो का कहना था कि पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रहने से अमेरिका को भारत की चिंताओं से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी भूमिका निभाने का अवसर मिल सकता है। भारत और ईरान का उदाहरण देकर क्या समझाया? अपने बयान में रुबियो ने भारत और ईरान के संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत भी ईरान के नेताओं से मिलता है और उसके साथ अपने राजनयिक रिश्ते बनाए रखता है। इस उदाहरण के जरिए रुबियो ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में हर देश को अपने हितों के हिसाब से फैसले लेने पड़ते हैं। किसी देश के साथ कुछ मुद्दों पर असहमति होने का मतलब यह नहीं है कि उससे बातचीत पूरी तरह बंद कर दी जाए। हालांकि, भारत की ईरान नीति और अमेरिका की पाकिस्तान नीति अलग-अलग परिस्थितियों से जुड़ी हैं। दोनों देशों के सुरक्षा हित, क्षेत्रीय चुनौतियां और कूटनीतिक प्राथमिकताएं एक जैसी नहीं हैं। भारत ने आतंकवाद पर क्या रुख रखा? रुबियो के बयान के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी आतंकवाद को लेकर भारत का रुख दोहराया। 20 अक्टूबर को मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि भारत को आतंकवाद से अपनी रक्षा करने का अधिकार है और वह अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से भी आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की अपेक्षा करता है। जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत बनाने के लिए व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया। इससे साफ है कि भारत और अमेरिका के बीच सहयोग के कई अहम क्षेत्र हैं, लेकिन आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे भारत के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। India-US Trade Deal पर भी हुई चर्चा मार्को रुबियो के भारत दौरे में पाकिस्तान से जुड़े बयान के अलावा व्यापार समझौता भी अहम मुद्दा रहा। 20 अक्टूबर को मुंबई में रुबियो और एस. जयशंकर के बीच मुलाकात हुई। दोनों पक्षों ने व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर चर्चा की। रुबियो ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर उम्मीद जताई कि समझौते के बाकी मुद्दों को जल्द सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं, हालांकि कुछ बिंदुओं पर काम बाकी है। अमेरिका और भारत के बीच व्यापार वार्ता पिछले कुछ समय से टैरिफ और ऊर्जा खरीद जैसे मुद्दों के कारण प्रभावित रही है। ऐसे में इस दौरे को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। ईरान के साथ बातचीत में पाकिस्तान की भूमिका पाकिस्तान की भूमिका केवल अमेरिका के साथ उसके संबंधों तक सीमित नहीं है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने की कोशिशों में भी इस्लामाबाद कूटनीतिक संपर्क बनाए हुए है। 20 अक्टूबर को पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने से पहले अपनी शर्तें रखीं। इनमें प्रतिबंध हटाने, बंदरगाहों की नाकेबंदी समाप्त करने और क्षेत्र में जारी संघर्ष रोकने जैसे मुद्दे शामिल थे। इस घटनाक्रम से पता चलता है कि पाकिस्तान पश्चिम एशिया से जुड़े कूटनीतिक प्रयासों में भी भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का आगे क्या परिणाम होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। आगे भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा क्या होगी? मार्को रुबियो का बयान बताता है कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को रणनीतिक जरूरतों के आधार पर देख रहा है। वहीं, भारत आतंकवाद के मुद्दे पर अपनी चिंताओं को लगातार सामने रखता रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिशें भी जारी हैं। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ बातचीत बनाए रखते हुए भारत की सुरक्षा चिंताओं को किस तरह संबोधित करता है। फिलहाल, रुबियो के बयान का मुख्य संदेश यही है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में देशों को अपने हितों और मतभेदों के बीच संतुलन बनाकर चलना पड़ता है। भारत, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंधों की दिशा आने वाले कूटनीतिक फैसलों और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Israel से ऑस्ट्रिया जा रही फ्लाइट को बम की धमकी, फाइटर जेट की निगरानी में हुई इमरजेंसी लैंडिंग

Israel से ऑस्ट्रिया जा रही फ्लाइट को बम की धमकी, फाइटर जेट की निगरानी में हुई इमरजेंसी लैंडिंग

Israel से ऑस्ट्रिया जा रही एक यात्री फ्लाइट में बम होने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया। विमान में 57 लोग सवार थे, जिनमें 6 क्रू मेंबर भी शामिल थे। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विमान की निगरानी के लिए फाइटर जेट तैनात किए गए और इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। बम की धमकी मिलते ही अलर्ट हुई सुरक्षा एजेंसियां इजराइल से ऑस्ट्रिया जा रही फ्लाइट को बम की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं। विमान में यात्रियों और क्रू मेंबर की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तुरंत जरूरी कदम उठाए गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फाइटर जेट ने विमान की निगरानी की। इसके बाद विमान को सुरक्षित तरीके से उतारने के लिए इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। विमान में सवार थे 57 लोग जानकारी के मुताबिक, विमान में कुल 57 लोग सवार थे। इनमें 6 क्रू मेंबर शामिल थे। ऐसी स्थिति में विमान में मौजूद सभी लोगों की सुरक्षा सबसे अहम थी। बम की धमकी के बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत कार्रवाई की गई। बम की धमकी से यात्रियों में बढ़ी चिंता हवाई यात्रा के दौरान बम की धमकी मिलने जैसी घटनाएं यात्रियों के लिए चिंता का कारण बन जाती हैं। ऐसे मामलों में सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को गंभीरता से लेती हैं और जरूरी जांच करती हैं। फिलहाल, बम की धमकी की पुष्टि, उसकी वास्तविकता और जांच के अंतिम नतीजों से जुड़ी जानकारी सामने आने पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Tariff

Trump Tariff on India: भारत पर 100% टैरिफ का खतरा टला, रूस से Diesel Deal के बाद बड़ा फैसला

Trump ने भारत पर 100% तक टैरिफ (Tariff) लगाए जाने की आशंका को फिलहाल टाल दिया है। रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई का रास्ता खोलने वाले कानून के अहम प्रावधानों को ट्रम्प ने रोक दिया है। 17 अक्टूबर 2026 को सामने आए इस फैसले से भारत और चीन जैसे देशों को राहत मिली है, जो रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदते हैं। इस फैसले की खास बात यह है कि अमेरिका ने रूस से डीजल की आपूर्ति को लेकर समझौता करने के कुछ ही दिनों बाद यह कदम उठाया है। एक तरफ ट्रम्प प्रशासन रूस पर आर्थिक दबाव बनाने की नीति से जुड़ा कानून रोक रहा है, तो दूसरी तरफ ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इस घटनाक्रम ने अमेरिका की रूस नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। Trump ने 100% Tariff वाले कानून पर क्यों लगाई रोक? अमेरिका में रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 नाम से कानून लाया गया था। इसका उद्देश्य यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की आर्थिक क्षमता पर दबाव बढ़ाना था। इस कानून के तहत रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था। भारत और चीन जैसे देश भी इसकी जद में आ सकते थे। हालांकि, कानून में अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रीय हित के आधार पर प्रतिबंधों और शुल्कों से छूट देने का अधिकार दिया गया था। ट्रम्प ने इसी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए 16 अक्टूबर को कार्यकारी आदेश जारी किया। इसके बाद 17 अक्टूबर को इस फैसले की जानकारी सामने आई। ट्रम्प ने अपने आदेश में कहा कि फिलहाल इन प्रावधानों को लागू न करना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। यह रोक स्थायी नहीं है। भविष्य में अमेरिकी प्रशासन जरूरत के मुताबिक इन उपायों को फिर से लागू करने का फैसला ले सकता है। Russia Diesel Deal के बाद बदला अमेरिकी रुख ट्रम्प का यह फैसला रूस से डीजल की आपूर्ति को लेकर हुए समझौते के कुछ दिनों बाद आया है। 9 अक्टूबर को ट्रम्प ने कहा था कि रूस तत्काल 3 लाख मीट्रिक टन से अधिक डीजल अमेरिका और वैश्विक बाजारों में भेजने पर सहमत हुआ है। इस समझौते का उद्देश्य बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाना और बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने में मदद करना बताया गया। अमेरिका में डीजल की महंगाई का असर किसानों, ट्रांसपोर्ट कंपनियों और माल ढुलाई जैसे क्षेत्रों पर पड़ता है। हालांकि, रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ाने के फैसले की अमेरिका में आलोचना भी हुई। कुछ सांसदों ने चिंता जताई कि रूसी ऊर्जा से जुड़े प्रतिबंधों में राहत देने से रूस को आर्थिक फायदा मिल सकता है, जबकि अमेरिका यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर दबाव बनाने की बात करता रहा है। यही वजह है कि रूस से डीजल खरीदने का समझौता और रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ रोकने का फैसला अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। भारत को 100% Tariff से कितनी राहत मिली? भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है। रूस भी भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। ऐसे में रूसी तेल की खरीद के कारण भारत पर अमेरिकी टैरिफ लगाए जाने की आशंका बनी हुई थी। अगर अमेरिका भारत से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाता, तो भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो सकते थे। इससे भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धा में परेशानी होती और दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर भी दबाव बढ़ सकता था। ट्रम्प के ताजा फैसले से रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत के खिलाफ इस कानून के तहत तत्काल टैरिफ लगाए जाने का खतरा फिलहाल कम हो गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत को अमेरिका के सभी टैरिफ से छूट मिल गई है। यह फैसला रूस से संबंधित कानून के खास प्रावधानों पर रोक लगाने से जुड़ा है। अमेरिका की दूसरी व्यापार नीतियां और भारत पर लागू अन्य शुल्क अलग विषय हैं। भारत ने अमेरिका के सामने क्या पक्ष रखा था? रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत और अमेरिका के बीच पहले भी मतभेद सामने आए हैं। भारत का कहना रहा है कि ऊर्जा आयात से जुड़े फैसले देश की जरूरतों, कीमतों और आपूर्ति की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं। 17 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, भारतीय अधिकारियों को उम्मीद थी कि अमेरिका नए कानून के तहत भारत पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगा। भारत ने वॉशिंगटन के सामने अपनी चिंताएं भी रखी थीं। अमेरिका में भारत के राजदूत सर्जियो गोर ने भी इससे पहले कहा था कि ट्रम्प इस मामले पर जल्द फैसला लेंगे। अब अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश से भारत पर तत्काल अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने की आशंका कम हुई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय आया है, जब भारत और अमेरिका व्यापारिक रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए बातचीत कर रहे हैं। इसलिए आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच होने वाली चर्चा भी महत्वपूर्ण होगी। Trump के फैसले पर अमेरिका में क्यों उठे सवाल? ट्रम्प के फैसले का अमेरिका में कुछ रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसदों ने विरोध किया है। आलोचकों का कहना है कि रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए बनाया गया कानून लागू होने से पहले ही रोक देने से यूक्रेन को समर्थन देने की अमेरिकी नीति पर सवाल खड़े होते हैं। कुछ सांसदों ने रूस से डीजल खरीदने के समझौते पर भी आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि रूसी ऊर्जा की बिक्री से मिलने वाला पैसा रूस की युद्ध संबंधी गतिविधियों को मदद पहुंचा सकता है। दूसरी ओर, ट्रम्प प्रशासन का जोर अमेरिकी राष्ट्रीय हित, ऊर्जा आपूर्ति और घरेलू ईंधन की कीमतों पर है। सरकार के सामने चुनौती यह है कि रूस पर दबाव बनाए रखने की नीति और अमेरिका में ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। India-US Trade Relations पर क्या होगा असर? भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध दोनों देशों की...
Read more
PM Modi

PM Modi Canada Tour दिसंबर में होगी अहम बातचीत, Trade Deal से दोनों देशों को उम्मीद

PM Modi 11 दिसंबर को कनाडा के दौरे पर जा सकते हैं। इस यात्रा को भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच ट्रेड डील यानी व्यापार समझौते को लेकर बातचीत होने की संभावना है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के बीच कनाडा भी अपने कारोबार के लिए नए बाजार तलाश रहा है। कनाडा लंबे समय से अमेरिकी बाजार पर काफी हद तक निर्भर रहा है। ऐसे में भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार के साथ व्यापार बढ़ाना उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। दूसरी ओर, भारत की भी कोशिश है कि दूसरे देशों के साथ आर्थिक सहयोग बढ़े और भारतीय कारोबारियों को नए अवसर मिलें। India-Canada Trade Deal पर क्यों है सबकी नजर? भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) को लेकर काफी उम्मीदें हैं। इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाना, निवेश के अवसर खोलना और कारोबार से जुड़ी बाधाओं को कम करना है। अगर ट्रेड डील पर सहमति बनती है, तो दोनों देशों की कंपनियों को एक-दूसरे के बाजार में कारोबार बढ़ाने का मौका मिल सकता है। इससे कृषि, ऊर्जा, तकनीक, शिक्षा और कई दूसरे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में प्रस्तावित समझौता इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है। Trump के Tariff दबाव के बीच कनाडा क्यों खोज रहा नए बाजार? डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है। इसका असर उन देशों पर भी पड़ता है, जिनका कारोबार अमेरिकी बाजार पर ज्यादा निर्भर है। कनाडा भी अपने व्यापारिक रिश्तों में विविधता लाने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है। भारत इस लिहाज से कनाडा के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है। भारत की बड़ी आबादी, बढ़ती अर्थव्यवस्था और अलग-अलग क्षेत्रों में बढ़ती मांग कनाडाई कंपनियों को आकर्षित करती है। हालांकि, भारत के साथ व्यापार बढ़ाना केवल अमेरिका पर निर्भरता कम करने तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच निवेश और कारोबारी सहयोग बढ़ने से लंबे समय में आर्थिक रिश्तों को भी मजबूती मिल सकती है। Energy और Technology सेक्टर में भी बढ़ सकते हैं मौके भारत और कनाडा के बीच कारोबार की संभावनाएं केवल ट्रेड डील तक सीमित नहीं हैं। ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाया जा सकता है। कनाडा के पास प्राकृतिक संसाधन और ऊर्जा क्षेत्र में अनुभव है, जबकि भारत तेजी से बढ़ता हुआ बड़ा बाजार है। दोनों देश अपनी जरूरतों और क्षमताओं के आधार पर साझेदारी को आगे बढ़ा सकते हैं। व्यापार समझौते पर बातचीत आगे बढ़ने से कंपनियों और निवेशकों को भी सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। हालांकि, वास्तविक फायदा समझौते की शर्तों और उसके लागू होने पर निर्भर करेगा। पुराने तनाव के बाद रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश भारत और कनाडा के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कूटनीतिक तनाव भी देखने को मिला। इस वजह से दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग को लेकर कई सवाल उठे थे। अब व्यापार और आर्थिक सहयोग जैसे साझा हितों पर बातचीत बढ़ाना दोनों देशों के लिए अहम हो सकता है। प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित यात्रा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। फिर भी, व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कई मुद्दों पर सहमति जरूरी होगी। इसलिए इस दौरे के दौरान होने वाली बातचीत और आधिकारिक घोषणाओं पर सबकी नजर रहेगी। भारत और कनाडा के लिए क्या होंगे इसके मायने? भारत-कनाडा ट्रेड डील आगे बढ़ती है, तो इससे दोनों देशों के कारोबारियों को नए बाजार मिल सकते हैं। निवेश बढ़ने, व्यापारिक अवसर पैदा होने और अलग-अलग क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत होने की संभावना भी रहेगी। कनाडा के लिए भारत के साथ व्यापार बढ़ाना अपने आर्थिक रिश्तों में विविधता लाने का अवसर है। वहीं, भारत के लिए यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश के क्षेत्र में अपनी पहुंच मजबूत करने का एक और रास्ता हो सकता है। अब नजर 11 दिसंबर की प्रस्तावित यात्रा पर है। क्या प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के नेतृत्व के बीच ट्रेड डील को लेकर कोई ठोस सहमति बन पाएगी? इसका जवाब दोनों देशों की बातचीत और आगे होने वाली आधिकारिक घोषणाओं से ही साफ होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Air India

Air India Flight Update: सऊदी अरब जाने वालों की बढ़ी परेशानी, Riyadh-Jeddah-Dammam की Flights रद्द

Saudi Arabia जाने की तैयारी कर रहे भारतीय यात्रियों के लिए हवाई यात्रा से जुड़ी परेशानी बढ़ गई है। क्षेत्र में तनावपूर्ण हालात के बीच एयरलाइंस ने अपनी उड़ानों के शेड्यूल में बदलाव किया है। Air India की रियाद, जेद्दा और दम्माम जाने वाली उड़ानों को लेकर भी यात्रियों को अपडेट का इंतजार है। जिन लोगों ने आने वाले दिनों में टिकट बुक कराया है, उन्हें एयरपोर्ट निकलने से पहले अपनी फ्लाइट की स्थिति जरूर जांच लेनी चाहिए। उड़ानों के रद्द होने या शेड्यूल बदलने से नौकरी, कारोबार और परिवार से मिलने के लिए सऊदी अरब जाने वाले यात्रियों की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में टिकट और यात्रा से जुड़े जरूरी दस्तावेज तैयार रखने के साथ एयरलाइन की आधिकारिक सूचना पर नजर रखना भी जरूरी है। Air India Flights Cancelled: किन शहरों पर पड़ा असर? Air India की उड़ानों से जुड़ी रिपोर्टों में रियाद, जेद्दा और दम्माम का जिक्र किया गया है। ये सऊदी अरब के प्रमुख शहर हैं, जहां भारत से बड़ी संख्या में यात्री आते-जाते हैं। उड़ानों के संचालन में बदलाव होने से यात्रियों को अपनी यात्रा की तारीख आगे बढ़ानी पड़ सकती है या वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, Air India ने पहले 17 अक्टूबर 2026 तक कुछ उड़ानें रद्द रखने की जानकारी दी थी। हालांकि, 20 अक्टूबर तक सभी उड़ानें रद्द रहने के दावे की ताजा आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। यात्रियों को अपनी फ्लाइट की तारीख के अनुसार एयरलाइन से जानकारी लेनी चाहिए। सऊदी अरब जाने वाले यात्रियों की बढ़ी चिंता सऊदी अरब में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं। इसके अलावा, कारोबार, पारिवारिक मुलाकात और अन्य जरूरी कामों से भी लोग वहां की यात्रा करते हैं। ऐसे में अचानक उड़ानें रद्द होने या समय बदलने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जिन यात्रियों की यात्रा पहले से तय है, उन्हें टिकट की स्थिति के साथ होटल बुकिंग, कनेक्टिंग फ्लाइट और अन्य व्यवस्थाओं की भी जांच कर लेनी चाहिए। खासकर दूसरी फ्लाइट से आगे की यात्रा करने वालों को समय रहते अपनी एयरलाइन से संपर्क करना चाहिए। आखिर क्यों प्रभावित हो रही हैं Flights? क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण एयरलाइंस को अपने उड़ान कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ सकता है। ऐसी परिस्थितियों में यात्रियों और विमान के क्रू की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि, किसी विशेष उड़ान को रद्द करने की वजह और उसकी अवधि की पुष्टि संबंधित एयरलाइन की आधिकारिक सूचना से ही की जानी चाहिए। Flight Cancel होने पर क्या करें? अगर आपकी Air India की फ्लाइट रद्द हो गई है या उसके समय में बदलाव हुआ है, तो घबराने के बजाय ये कदम उठाएं: यात्रियों के लिए जरूरी सलाह सऊदी अरब जाने वाले यात्रियों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी है कि वे किसी पुरानी खबर के आधार पर अपनी यात्रा का फैसला न लें। उड़ानों की स्थिति में बदलाव हो सकता है और अलग-अलग एयरलाइंस की समयसीमा भी अलग हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Kamchatka

Kamchatka में Earthquake: रूस में फिर कांपी धरती, पिछले साल सुनामी ने मचाई थी तबाही

रूस (Russia) के कामचटका (Kamchatka) प्रायद्वीप में 7.0 तीव्रता के भूकंप की खबर ने एक बार फिर इस क्षेत्र को चर्चा में ला दिया है। यह इलाका पहले भी बड़े भूकंप और सुनामी का सामना कर चुका है। साल 2025 में यहां के पास आए 8.8 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद समुद्र में उठी लहरों ने तटीय इलाकों को प्रभावित किया था। ऐसे में ताजा भूकंप के बाद लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कहीं इसका असर समुद्र और आसपास के क्षेत्रों पर तो नहीं पड़ेगा। Kamchatka Earthquake: रूस में कहां आया भूकंप? 16 अक्टूबर 2026 को रूस के कामचटका क्षेत्र में 7.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, इसका केंद्र कामचटका के पूर्वी तट के पास था। भूकंप की गहराई करीब 140 से 148 किलोमीटर बताई गई है। भूकंप के बाद सबसे अहम सवाल सुनामी के खतरे को लेकर था। शुरुआती जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सुनामी चेतावनी केंद्र ने इस भूकंप के कारण सुनामी का खतरा नहीं बताया। घटना से जुड़े नुकसान और अन्य प्रभावों की विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक अपडेट पर नजर रखना जरूरी है। 2025 में आए Earthquake ने मचाई थी तबाही कामचटका का नाम सामने आते ही पिछले साल की बड़ी प्राकृतिक आपदा याद आती है। 29 जुलाई 2025 को रूस के कामचटका तट के पास 8.8 तीव्रता का भूकंप आया था। यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली दर्ज भूकंपों में से एक था। इस भूकंप के बाद प्रशांत महासागर में सुनामी की लहरें उठीं। रूस के तटीय इलाकों और उत्तरी कुरिल द्वीप समूह में समुद्र का पानी तेजी से आगे बढ़ा। कुछ जगहों पर लहरों ने तटीय बस्तियों और इमारतों को नुकसान पहुंचाया। इस घटना के बाद प्रशांत महासागर के कई हिस्सों में सुनामी अलर्ट जारी किए गए थे। सुनामी की लहरों ने तटीय इलाकों को किया था प्रभावित 2025 में आए भूकंप के बाद समुद्र में उठी ऊंची लहरों ने तटीय क्षेत्रों में चिंता बढ़ा दी थी। कुछ इलाकों में समुद्र का पानी बस्तियों तक पहुंच गया और संपत्ति को नुकसान हुआ। इस घटना ने दिखाया कि समुद्र के नीचे आने वाला शक्तिशाली भूकंप केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हजारों किलोमीटर दूर स्थित तटों पर भी असर डाल सकता है। हालांकि, 2025 की सुनामी और अक्टूबर 2026 में आए ताजा भूकंप को अलग-अलग घटनाओं के रूप में समझना चाहिए। दोनों के बीच सीधे संबंध की पुष्टि करने वाली जानकारी उपलब्ध नहीं है। बार-बार भूकंप क्यों आते हैं कामचटका में? रूस का कामचटका प्रायद्वीप प्रशांत महासागर के चारों ओर फैले Ring of Fire का हिस्सा है। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां टेक्टोनिक प्लेटों की लगातार हलचल के कारण भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधियां होती रहती हैं। प्रशांत प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे खिसकती है। इस प्रक्रिया में जमीन के भीतर तनाव जमा होता है और जब यह तनाव अचानक निकलता है, तो भूकंप आता है। इसी भूगर्भीय गतिविधि के कारण कामचटका में शक्तिशाली भूकंप आने की आशंका बनी रहती है। क्या ताजा भूकंप से सुनामी का खतरा है? 16 अक्टूबर 2026 को आए 7.0 तीव्रता के भूकंप के संबंध में शुरुआती जानकारी में सुनामी का खतरा नहीं बताया गया। यह राहत की बात है, क्योंकि 2025 में इसी क्षेत्र के पास आए बड़े भूकंप के बाद समुद्र में उठी लहरों ने कई तटीय इलाकों को प्रभावित किया था। फिलहाल ताजा घटना से जुड़े नुकसान की पूरी तस्वीर सामने आने का इंतजार है। विशेषज्ञों के अनुसार, भूकंप के प्रभाव का आकलन उसकी तीव्रता के साथ-साथ गहराई, केंद्र की स्थिति और आसपास की भूगर्भीय परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है। कामचटका में आए इस भूकंप ने एक बार फिर याद दिलाया है कि प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से यह क्षेत्र कितना संवेदनशील है। फिलहाल सुनामी का खतरा नहीं होना राहत की खबर है, लेकिन आगे की आधिकारिक जानकारी पर नजर रखना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Pakistan

Pakistan School Accident: पेशावर में दर्दनाक हादसा, 40 से ज्यादा घायल; राहत-बचाव जारी

Pakistan के पेशावर में गुरुवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया। यहां एक निजी स्कूल की छत गिरने से 21 लोगों की मौत की खबर है। मृतकों में 20 बच्चे और एक महिला टीचर शामिल हैं। हादसे में 40 से ज्यादा लोग घायल भी हुए हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। बच्चों को मलबे से निकालने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। Peshawar School Accident: अचानक गिरी स्कूल की छत मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हादसा पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर की देर कॉलोनी में हुआ। यहां एक निजी स्कूल की छत अचानक गिर गई। उस समय स्कूल में बच्चे और स्टाफ मौजूद थे। छत गिरने से कई लोग मलबे में दब गए। हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचे। मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया गया। इस दौरान घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। 20 बच्चों और महिला टीचर की मौत इस हादसे में 20 बच्चों और एक महिला टीचर समेत 21 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों की संख्या अलग-अलग बताई गई थी, लेकिन बाद में सामने आए आंकड़ों में मौत का आंकड़ा बढ़ गया। इस घटना ने बच्चों के परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया है। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। हालांकि, मृतकों और घायलों की संख्या से जुड़ी अंतिम आधिकारिक पुष्टि के लिए प्रशासन की विस्तृत जानकारी का इंतजार करना जरूरी है। 40 से ज्यादा घायल, अस्पताल में इलाज जारी हादसे में घायल हुए 40 से ज्यादा लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया। पेशावर के लेडी रीडिंग अस्पताल में घायलों के इलाज की जानकारी रिपोर्टों में सामने आई है। अस्पताल में घायलों को जरूरी चिकित्सा सहायता दी जा रही है। दूसरी ओर, बचाव दल ने घटनास्थल पर मलबा हटाने का काम किया। ऐसे हादसों में शुरुआती समय बेहद अहम होता है, क्योंकि मलबे में फंसे लोगों को जल्द बाहर निकालना जरूरी होता है। Pakistan School Accident: कैसे गिरी छत? जांच के बाद होगा खुलासा फिलहाल स्कूल की छत गिरने की असली वजह स्पष्ट नहीं है। यह पता लगाने के लिए जांच जरूरी है कि इमारत की हालत कैसी थी और निर्माण में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। जांच पूरी होने के बाद ही हादसे के कारणों को लेकर स्थिति साफ हो सकेगी। इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों की इमारतों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल ऐसी जगह हैं, जहां बच्चे दिन का बड़ा हिस्सा बिताते हैं। ऐसे में भवन की नियमित जांच, समय पर मरम्मत और सुरक्षा नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। स्कूलों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल पेशावर का यह हादसा केवल एक इमारत के गिरने की घटना नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला भी है। स्कूल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि बच्चों को सुरक्षित माहौल मिले और इमारतों की स्थिति की समय-समय पर जांच की जाए। फिलहाल, इस हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों और महिला टीचर के परिवारों के लिए यह बेहद मुश्किल समय है। राहत एवं बचाव कार्य और घायलों के इलाज से जुड़ी आगे की जानकारी पर सभी की नजर बनी हुई है।पाकिस्तान के पेशावर में गुरुवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया। यहां एक निजी स्कूल की छत गिरने से 21 लोगों की मौत की खबर है। मृतकों में 20 बच्चे और एक महिला टीचर शामिल हैं। हादसे में 40 से ज्यादा लोग घायल भी हुए हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। बच्चों को मलबे से निकालने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। Peshawar School Accident: अचानक गिरी स्कूल की छत मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हादसा पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर की देर कॉलोनी में हुआ। यहां एक निजी स्कूल की छत अचानक गिर गई। उस समय स्कूल में बच्चे और स्टाफ मौजूद थे। छत गिरने से कई लोग मलबे में दब गए। हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचे। मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया गया। इस दौरान घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। 20 बच्चों और महिला टीचर की मौत इस हादसे में 20 बच्चों और एक महिला टीचर समेत 21 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों की संख्या अलग-अलग बताई गई थी, लेकिन बाद में सामने आए आंकड़ों में मौत का आंकड़ा बढ़ गया। इस घटना ने बच्चों के परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया है। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। हालांकि, मृतकों और घायलों की संख्या से जुड़ी अंतिम आधिकारिक पुष्टि के लिए प्रशासन की विस्तृत जानकारी का इंतजार करना जरूरी है। 40 से ज्यादा घायल, अस्पताल में इलाज जारी हादसे में घायल हुए 40 से ज्यादा लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया। पेशावर के लेडी रीडिंग अस्पताल में घायलों के इलाज की जानकारी रिपोर्टों में सामने आई है। अस्पताल में घायलों को जरूरी चिकित्सा सहायता दी जा रही है। दूसरी ओर, बचाव दल ने घटनास्थल पर मलबा हटाने का काम किया। ऐसे हादसों में शुरुआती समय बेहद अहम होता है, क्योंकि मलबे में फंसे लोगों को जल्द बाहर निकालना जरूरी होता है। Pakistan School Accident: कैसे गिरी छत? जांच के बाद होगा खुलासा फिलहाल स्कूल की छत गिरने की असली वजह स्पष्ट नहीं है। यह पता लगाने के लिए जांच जरूरी है कि इमारत की हालत कैसी थी और निर्माण में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। जांच पूरी होने के बाद ही हादसे के कारणों को लेकर स्थिति साफ हो सकेगी। इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों की इमारतों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल ऐसी जगह हैं, जहां बच्चे दिन का बड़ा हिस्सा बिताते हैं। ऐसे में भवन की नियमित जांच, समय पर मरम्मत और सुरक्षा नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। स्कूलों की सुरक्षा पर...
Read more
अजरबैजान

Hijab Controversy: अजरबैजान में School Dress Code पर विवाद, तुर्किये में भी Protest

अजरबैजान में स्कूलों के ड्रेस कोड को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। देश के कुछ स्कूलों में हिजाब पहनकर आने वाली छात्राओं को लेकर उठे विवाद के बाद छात्राओं ने कक्षाओं का बहिष्कार किया। वहीं, पड़ोसी देश तुर्किये में भी इस मुद्दे से जुड़े विरोध प्रदर्शनों की खबर सामने आई है। इस पूरे मामले ने धार्मिक स्वतंत्रता, स्कूल यूनिफॉर्म और धर्मनिरपेक्ष शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अजरबैजान की आबादी में मुस्लिम समुदाय बहुसंख्यक है। इसके बावजूद देश में सरकारी संस्थानों और शिक्षा व्यवस्था में धर्मनिरपेक्षता को महत्व दिया जाता है। ऐसे में स्कूलों में हिजाब पहनने को लेकर सामने आया विवाद कई सवाल खड़े कर रहा है। छात्राओं और उनके समर्थकों के लिए यह धार्मिक पहचान से जुड़ा मुद्दा है, जबकि स्कूल ड्रेस कोड को लेकर प्रशासन के अपने नियम हैं। Azerbaijan में Hijab Ban को लेकर क्यों बढ़ा विवाद? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजरबैजान के कुछ स्कूलों में ड्रेस कोड को सख्ती से लागू किए जाने के बाद हिजाब पहनने वाली छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी के विरोध में कुछ छात्राओं ने कक्षाओं का बहिष्कार किया। हालांकि, इस मामले में यह समझना जरूरी है कि स्कूल ड्रेस कोड को लेकर सख्ती और पूरे देश में हिजाब पर स्पष्ट प्रतिबंध लगने की बात एक जैसी नहीं है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह दावा करना सही नहीं होगा कि अजरबैजान के सभी स्कूलों में हिजाब पहनने पर एक समान प्रतिबंध लागू है। 96% मुस्लिम आबादी, फिर भी Secular Education पर जोर अजरबैजान में मुस्लिम आबादी की हिस्सेदारी काफी अधिक है, लेकिन देश की शासन व्यवस्था धर्मनिरपेक्ष है। यहां धार्मिक परंपराओं और सार्वजनिक संस्थानों के नियमों के बीच संतुलन को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है। स्कूलों में यूनिफॉर्म लागू करने के पीछे एकरूपता और अनुशासन जैसे कारण दिए जाते हैं। दूसरी ओर, हिजाब पहनने वाली छात्राओं के लिए यह उनकी धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत पहचान से जुड़ा विषय है। यही वजह है कि यह विवाद केवल स्कूल के कपड़ों तक सीमित नहीं है। इसके साथ यह सवाल भी जुड़ा है कि शिक्षा संस्थानों में एक जैसे नियम लागू करते समय विद्यार्थियों की धार्मिक मान्यताओं का कितना ध्यान रखा जाना चाहिए। छात्राओं ने Classes का किया Boycott ड्रेस कोड को लेकर असहमति के बाद कुछ छात्राओं के कक्षाओं का बहिष्कार करने की खबर सामने आई। इस विरोध को स्कूलों में हिजाब पहनने से जुड़े नियमों के प्रति नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, विरोध में शामिल छात्राओं की कुल संख्या और प्रभावित स्कूलों के बारे में विस्तृत, स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी स्पष्ट नहीं है। इसलिए इस घटना को पूरे देश में व्यापक विरोध बताने से पहले आधिकारिक जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है। Türkiye में भी Protest की चर्चा अजरबैजान के मामले के बीच पड़ोसी देश तुर्किये में भी विरोध प्रदर्शन की खबरें सामने आई हैं। तुर्किये में धर्मनिरपेक्षता और सार्वजनिक संस्थानों में धार्मिक प्रतीकों की भूमिका लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। हालांकि, तुर्किये में हुए प्रदर्शनों का अजरबैजान के स्कूलों में ड्रेस कोड से सीधा संबंध है या नहीं, इसे लेकर आयोजकों की मांगों और प्रदर्शन के कारणों की पुष्टि जरूरी है। Hijab और School Dress Code पर छिड़ी बहस अजरबैजान में सामने आया यह विवाद एक अहम सवाल खड़ा करता है—क्या स्कूलों में एक समान ड्रेस कोड लागू करने के साथ विद्यार्थियों की धार्मिक पहचान का सम्मान भी किया जा सकता है? एक तरफ स्कूल प्रशासन के लिए अनुशासन और निर्धारित यूनिफॉर्म का पालन महत्वपूर्ण हो सकता है। दूसरी तरफ, छात्राओं के लिए अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कपड़े पहनना व्यक्तिगत स्वतंत्रता का विषय है। फिलहाल, इस मामले में सरकार और स्कूल प्रशासन के आधिकारिक रुख, नियमों के दायरे और विरोध प्रदर्शनों की स्थिति पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अजरबैजान में इस विवाद का समाधान किस तरह निकाला जाता है और क्या ड्रेस कोड को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
1 2 3 … 64

Trending News

Editor's Picks

Saudi Arabia

Saudi Arabia Attack: एयरपोर्ट और Oil Field पर हमला, 3 की मौत; भारतीय समेत 10 घायल

सऊदी अरब (Saudi Arabia) में एयरपोर्ट और तेल ठिकाने पर हुए हमलों ने एक बार फिर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बुधवार, 21 अक्टूबर को दम्माम के किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और शायबाह ऑयल फील्ड के पास अलग-अलग घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 10 लोग घायल हुए। घायलों में एक भारतीय नागरिक भी शामिल है। इन घटनाओं के बाद अमेरिका ने सऊदी अरब में तैनात अपने गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली। लगातार बढ़ते हमलों ने सऊदी अरब की सुरक्षा, हवाई सेवाओं और तेल आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। Dammam Airport Attack: एयरपोर्ट पर हमले में एक की मौत सऊदी अरब के पूर्वी शहर दम्माम स्थित किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को 21 अक्टूबर की शाम निशाना बनाया गया। सऊदी अरब के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के मुताबिक, इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई और आठ लोग घायल हो गए। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि एयरपोर्ट की संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन शुरू किया गया। घटना के बाद हवाई यातायात पर असर पड़ा और कुछ विमानों को दूसरे एयरपोर्ट की ओर डायवर्ट करना पड़ा। अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। यात्रियों को अपनी उड़ान की ताजा स्थिति संबंधित एयरलाइन से जांचने की सलाह दी गई है। यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब सऊदी अरब के कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमलों की खबरें सामने आ रही हैं। Shaybah Oil Field Attack: ड्रोन का मलबा गिरने से दो लोगों की मौत सऊदी अरब के शायबाह ऑयल फील्ड को निशाना बनाने की कोशिश भी की गई। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, तेल सुविधा की ओर आ रहे ड्रोन को एयर डिफेंस ने रोक दिया। इसके बाद गिरे मलबे से दो लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। मारे गए लोगों में नेपाल और फिलीपींस के नागरिक शामिल हैं। वहीं, घायलों में एक भारतीय और एक पाकिस्तानी नागरिक बताया गया है। मलबा गिरने से तेल ठिकाने के बाहर एक ठेकेदार के वाहन में आग भी लग गई। शायबाह ऑयल फील्ड सऊदी अरब की प्रमुख तेल उत्पादन सुविधाओं में से एक है। राहत की बात यह रही कि शुरुआती आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस घटना से तेल उत्पादन पर असर नहीं पड़ा। Indian Citizen Injured: भारतीय दूतावास ने क्या कहा? शायबाह ऑयल फील्ड के पास हुई घटना में भारतीय नागरिक के घायल होने के बाद रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने सऊदी अधिकारियों से संपर्क किया। दूतावास ने घायल भारतीय को जरूरी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। फिलहाल उसकी स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने का इंतजार है। सऊदी अरब में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं। ऐसे में एयरपोर्ट और तेल सुविधाओं पर हमलों की खबरों से वहां रहने वाले भारतीय परिवारों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। भारतीय नागरिकों को स्थानीय प्रशासन और दूतावास की आधिकारिक सलाह पर ध्यान देना चाहिए। US Diplomats Exit: अमेरिका ने कर्मचारियों को देश छोड़ने को कहा सऊदी अरब में बढ़ते सुरक्षा खतरे के बीच अमेरिका ने अपने गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का निर्देश दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट के अनुसार, यह फैसला सऊदी अरब में नागरिक ठिकानों पर बढ़ते हमलों और उनसे पैदा हुए सुरक्षा जोखिम को देखते हुए लिया गया। अमेरिकी अधिकारियों ने क्षेत्र में संभावित नए हमलों की आशंका भी जताई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका दूसरे खाड़ी देशों में स्थित अपने कुछ मिशनों से भी परिवार के सदस्यों को वापस बुलाने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, सऊदी अरब के लिए जारी आदेश और दूसरे देशों में संभावित कदम अलग-अलग हैं। इस फैसले से संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति को गंभीरता से ले रहा है। हूती विद्रोहियों पर शक, पश्चिम एशिया में क्यों बढ़ रहा तनाव? यमन में सक्रिय हूती विद्रोही लंबे समय से सऊदी अरब और उसकी समर्थित यमनी सरकार के साथ संघर्ष में शामिल रहे हैं। हाल के दिनों में समूह ने सऊदी अरब के एयरपोर्ट और तेल से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने की धमकियां दी हैं। हूतियों ने पहले रियाद में हुए कुछ हमलों की जिम्मेदारी भी ली थी। हालांकि, 21 अक्टूबर को दम्माम एयरपोर्ट और शायबाह ऑयल फील्ड से जुड़ी दोनों घटनाओं के लिए तत्काल कोई स्पष्ट सार्वजनिक जिम्मेदारी सामने नहीं आई थी। क्षेत्र में जारी व्यापक संघर्ष ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। सऊदी अरब के लिए चुनौती केवल अपने महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा करना नहीं, बल्कि आम नागरिकों, विदेशी कर्मचारियों और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। Saudi Arabia News: पहले भी रियाद एयरपोर्ट पर हो चुके हैं हमले दम्माम की घटना से पहले राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी कई हमले हुए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, अक्टूबर के शुरुआती दिनों में हुए हमलों में बड़ी संख्या में लोग मारे गए और 300 से अधिक लोग घायल हुए। इन घटनाओं के बाद हवाई सेवाएं प्रभावित हुईं और कई एयरलाइंस ने अपनी उड़ानों में बदलाव किए। हवाई अड्डों पर लगातार हमलों से यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कारोबार और पर्यटन पर भी असर पड़ने की आशंका है। सऊदी अरब अपनी अर्थव्यवस्था को तेल के अलावा दूसरे क्षेत्रों में विस्तार देने की कोशिश कर रहा है, ऐसे में सुरक्षा संबंधी घटनाएं उसके लिए अतिरिक्त चुनौती बन सकती हैं। Crude Oil Price: हमलों के बाद कच्चा तेल महंगा सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों में शामिल है। इसलिए उसके तेल ठिकानों पर हमलों की खबर का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ता है। रॉयटर्स की 22 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.82 डॉलर बढ़कर 111.64 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। अमेरिकी WTI क्रूड भी 2.24 डॉलर बढ़कर 99.39 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा। बाजार में तेजी की एक प्रमुख वजह यह चिंता है कि अगर हमले बढ़ते हैं या तेल उत्पादन और परिवहन बाधित होता है, तो वैश्विक आपूर्ति पर असर...
Kedarnath

Kedarnath Snowfall: पहाड़ों पर बर्फबारी, मध्य प्रदेश में बारिश और केरल में Landslide का खतरा

देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल रहा है। उत्तराखंड के केदारनाथ (Kedarnath) में कड़ाके की ठंड पड़ रही है और तापमान -8°C तक पहुंचने का अनुमान है। मध्य प्रदेश में भी अक्टूबर के आखिरी दिनों में बारिश और आंधी का दौर जारी है। वहीं, केरल में भारी बारिश को लेकर मौसम विभाग ने कई जिलों में अलर्ट जारी किया है। लगातार बारिश के कारण भूस्खलन और जलभराव का खतरा भी बढ़ गया है। Kedarnath Weather Update: केदारनाथ में माइनस में पहुंचा तापमान उत्तराखंड के Kedarnath में ठंड लगातार बढ़ रही है। 22 अक्टूबर के मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, यहां न्यूनतम तापमान करीब -8°C तक रहने का अनुमान है। ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड का असर ज्यादा महसूस किया जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के चारधाम मौसम अपडेट के मुताबिक, 22 अक्टूबर को रुद्रप्रयाग से केदारनाथ मार्ग पर हल्की बारिश और हल्की बर्फबारी की संभावना जताई गई थी। ऐसे में पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वालों को मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही आगे बढ़ना चाहिए। ठंड बढ़ने के साथ सुबह और शाम के समय तापमान में गिरावट महसूस हो सकती है। यात्रियों को गर्म कपड़े रखने और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने की जरूरत है। MP Weather Alert: मध्य प्रदेश के 11 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी कई इलाकों में बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम में इस बदलाव के पीछे सक्रिय मौसमी प्रणालियों का असर बताया जा रहा है। प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग के 21 अक्टूबर को जारी पूर्वानुमान के अनुसार, 22 अक्टूबर को पश्चिमी मध्य प्रदेश में गरज-चमक और आंधी से जुड़ी चेतावनी जारी की गई थी। हालांकि, पूर्वी मध्य प्रदेश के लिए उसी दिन ऐसी चेतावनी नहीं थी। इससे पहले इंदौर, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, गुना, राजगढ़, शिवपुरी और मुरैना समेत कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई गई थी। अलग-अलग दिनों में अलर्ट वाले जिलों की सूची बदल सकती है। बारिश के कारण कुछ जगहों पर सड़कों पर पानी भरने, यातायात प्रभावित होने और बिजली आपूर्ति में परेशानी की आशंका है। किसानों और खुले इलाकों में काम करने वाले लोगों को भी मौसम पर नजर रखनी चाहिए। Kerala Rain Alert: तिरुवनंतपुरम समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट केरल में लगातार बारिश के कारण हालात पर नजर रखी जा रही है। भारतीय मौसम विभाग ने 21 अक्टूबर को जारी चेतावनी में तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथनमथिट्टा, अलप्पुझा और कोट्टायम सहित पांच जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। इन इलाकों में कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की आशंका जताई गई थी। इसके अलावा इडुक्की, एर्नाकुलम, त्रिशूर, पलक्कड़ और मलप्पुरम के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया था। मौसम विभाग ने बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना भी बताई। तिरुवनंतपुरम में 21 अक्टूबर को सुबह तक के पिछले 24 घंटों में 46.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। 22 अक्टूबर के पूर्वानुमान में भी भारी बारिश और गरज-चमक की संभावना बनी हुई थी। भारी बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, निचले इलाकों में जलभराव और नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी का खतरा रहता है। हालांकि, तिरुवनंतपुरम में लैंडस्लाइड की किसी विशिष्ट घटना की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं हो सकी है। अगले दिनों में कैसा रहेगा मौसम? मौसम विभाग के उपलब्ध पूर्वानुमानों के मुताबिक, मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में 23 अक्टूबर तक गरज-चमक से जुड़ी गतिविधियां रह सकती हैं। इसके बाद जारी चेतावनियों में कमी दिखाई गई है। दूसरी ओर, केरल के कई जिलों में 23 से 25 अक्टूबर तक भी भारी बारिश की संभावना जताई गई थी। केदारनाथ और आसपास के ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड और हल्की बर्फबारी की संभावना को देखते हुए यात्रियों को सतर्क रहने की जरूरत है। मौसम खराब होने पर इन बातों का रखें ध्यान कुल मिलाकर, 22 अक्टूबर को देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम की अलग-अलग परिस्थितियां देखने को मिल रही हैं। केदारनाथ में कड़ाके की ठंड, मध्य प्रदेश में आंधी-बारिश की संभावना और केरल में भारी बारिश की चेतावनी के बीच लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

छत्तीसगढ़ में परीक्षा में नकल और गड़बड़ी के मामलों की सुनवाई के लिए 3 स्पेशल कोर्ट गठित

छत्तीसगढ़ में प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल व गड़बड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए तीन स्पेशल कोर्ट बनाई गई हैं। राज्य शासन ने रायपुर, बिलासपुर और कोरिया के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट को विशेष अदालत के रूप में नामित किया है। कोरिया जिले की स्पेशल कोर्ट बैकुंठपुर में होगी। इस संबंध में कानून एवं विधायी कार्य विभाग ने अधिसूचना जारी की है। इन अदालतों में सार्वजनिक परीक्षाओं के दौरान नकल और अनुचित तरीकों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाएगी। 2024 के कानून के तहत गठित हुईं विशेष अदालतें राज्य में यह व्यवस्था पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के तहत की गई है। अधिसूचना में कानून की धारा 12-क की उपधारा (2) का उल्लेख किया गया है। इसी प्रावधान के तहत राज्य शासन ने तीन जिलों के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट को स्पेशल कोर्ट के रूप में नामित किया है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध कराना है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से परामर्श के बाद जारी हुई अधिसूचना छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र से परामर्श के बाद राज्य शासन ने यह अधिसूचना जारी की है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव ने संबंधित जिलों के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जजों को अधिसूचना की प्रतियां भेजकर आवश्यक निर्देश दिए हैं। तीनों विशेष अदालतें अपने-अपने न्यायिक क्षेत्राधिकार में आने वाले परीक्षा संबंधी गड़बड़ी के मामलों की सुनवाई करेंगी। इस व्यवस्था के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल या अनुचित तरीकों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सुना जाएगा।
CJP

CJP Leaders Update: सौरव दास और आशुतोष रांका को फिर समन, Jantar Mantar केस में जांच तेज

CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल से रिहा हुए अभी एक दिन भी नहीं बीता था कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उन्हें पूछताछ के लिए बुला लिया। बुधवार शाम, 21 अक्टूबर को जेल से बाहर आए दोनों नेताओं को गुरुवार, 22 अक्टूबर को क्राइम ब्रांच के सामने पेश होने के लिए समन जारी किया गया। इस मामले में पार्टी के एक अन्य नेता अजिंक्य शिंदे का नाम भी सामने आया है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामलों की जांच अब क्राइम ब्रांच कर रही है। ऐसे में दोनों नेताओं की रिहाई के तुरंत बाद आया समन इस पूरे घटनाक्रम का नया मोड़ माना जा रहा है। रिहाई के अगले दिन Police का Summon सौरव दास और आशुतोष रांका को करीब सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद 21 अक्टूबर की शाम रिहा किया गया था। रिहाई के लिए दोनों को निजी मुचलके और जमानतदारों से जुड़े बॉन्ड की शर्तें पूरी करनी पड़ीं। रिहाई के बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दोनों को पूछताछ के लिए बुलाया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में 22 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे पहुंचने के लिए कहा गया था। पुलिस जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े मामलों में घटनाक्रम और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। हालांकि, समन जारी होने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप साबित हो गए हैं। Jantar Mantar Protest से कैसे शुरू हुआ विवाद? CJP नेताओं ने 13 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की कोशिश की थी। पार्टी की मांग थी कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर उठे सवालों पर जवाब दिया जाए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कार्रवाई की। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने निर्धारित प्रदर्शन क्षेत्र से बाहर जाने वाले प्रतिबंधित हिस्से में प्रवेश करने की कोशिश की और बैरिकेड पार किए। इस घटनाक्रम के बाद सौरव दास, आशुतोष रांका और अन्य CJP सदस्यों को हिरासत में लिया गया। बाद में दोनों प्रमुख नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। CJP की ओर से इस प्रदर्शन को चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाने की कोशिश के रूप में पेश किया गया। वहीं, पुलिस ने कानून-व्यवस्था और निर्धारित प्रतिबंधों के उल्लंघन से जुड़े पहलुओं पर कार्रवाई की। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगी। दो FIR की जांच कर रही है Crime Branch जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े दो मामलों की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है। ये मामले कनॉट प्लेस और संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR से जुड़े बताए गए हैं। जांच में कथित तौर पर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश, सरकारी आदेशों की अवहेलना और पुलिस के काम में बाधा डालने जैसे आरोप शामिल हैं। क्राइम ब्रांच अब इन घटनाओं से जुड़े तथ्यों और संबंधित लोगों के बयान की जांच कर रही है। सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को पूछताछ के लिए बुलाए जाने की खबर इसी जांच से जुड़ी है। सात दिन बाद कैसे मिली जेल से रिहाई? दोनों नेताओं को 14 अक्टूबर को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई। इसके बाद रिहाई के लिए कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी। 21 अक्टूबर को दोनों नेताओं की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट का भी रुख किया गया था। बाद में उनकी याचिका वापस लिए जाने की खबर सामने आई। इसके बाद विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत ने बॉन्ड और लिखित आश्वासन से जुड़ी शर्तें पूरी होने पर उनकी रिहाई का आदेश दिया। रिहाई के दौरान दोनों नेताओं को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानतदारों से जुड़े बॉन्ड की शर्तें पूरी करनी पड़ीं। उन्होंने शांति बनाए रखने और कानून के दायरे में रहकर प्रदर्शन करने का आश्वासन भी दिया। उन्हें जंतर-मंतर को दोबारा प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित किए जाने तक वहां प्रदर्शन का आह्वान नहीं करने की शर्त से भी जोड़ा गया। रिहाई का अर्थ यह नहीं है कि प्रदर्शन से जुड़े सभी मामले समाप्त हो गए हैं। Abhijeet Dipke का बयान भी चर्चा में CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई पर प्रतिक्रिया देते हुए दोनों नेताओं की तारीफ की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि दोनों उनसे बड़े नेता हैं और वह उनका अनुसरण करते हैं। दीपके के इस बयान को पार्टी के भीतर दोनों नेताओं के प्रति समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। जेल से रिहाई के बाद अब क्राइम ब्रांच का समन मिलने से दोनों नेताओं से जुड़ा मामला फिर चर्चा में आ गया है। अब आगे क्या होगा? 22 अक्टूबर को पूछताछ के लिए जारी समन के बाद अब नजर क्राइम ब्रांच की जांच पर है। पुलिस प्रदर्शन के दौरान हुए घटनाक्रम और दर्ज मामलों से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करने की कोशिश करेगी। आगे की कार्रवाई पूछताछ में सामने आने वाली जानकारी और जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी। फिलहाल, मामले में किसी भी आरोप को अंतिम रूप से साबित हुआ नहीं माना जा सकता। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sonia Gandhi

Sonia Gandhi Instagram Debut: पहली पोस्ट में नई किताब की झलक, 3 घंटे में 59 हजार Likes

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने सोशल मीडिया की दुनिया में नई शुरुआत की है। उन्होंने पहली बार Instagram पर अपना अकाउंट बनाया और अपनी आने वाली किताब Belonging: A Journey of Love का वीडियो शेयर किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी पहली पोस्ट को महज 3 घंटे में करीब 59 हजार लाइक्स मिले, जबकि उनके अकाउंट पर लगभग 13 हजार फॉलोअर्स हो गए। सोनिया गांधी की इस एंट्री ने राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींचा है। खास बात यह है कि सोनिया गांधी ने अपने Instagram डेब्यू के लिए किसी राजनीतिक मुद्दे को नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी और अनुभवों से जुड़ी किताब को चुना। उनकी पोस्ट में परिवार, रिश्तों और जीवन के सफर की झलक देखने को मिली। पहली पोस्ट में दिखी नई किताब की झलक Sonia Gandhi ने अपने पहले Instagram वीडियो में अपनी किताब Belonging: A Journey of Love के बारे में बताया। वीडियो में वह एक लाइब्रेरी में किताब के पन्ने और तस्वीरें देखती नजर आती हैं। उनकी बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा भी इस दौरान उनके साथ दिखाई देती हैं। किताब का जिक्र करते हुए सोनिया गांधी ने प्यार, जिम्मेदारी, अपनों को खोने और जिंदगी में अपनेपन की तलाश जैसे अनुभवों पर बात की। उनकी पहली पोस्ट ने लोगों को उनके निजी जीवन के एक अलग पहलू से रूबरू कराया। 10 नवंबर को रिलीज होगी ‘Belonging: A Journey of Love’ सोनिया गांधी की किताब 10 नवंबर 2026 को प्रकाशित होने वाली है। HarperCollins India भारत में इसका प्रकाशन करेगा। किताब में सोनिया गांधी के बचपन से लेकर भारत आने और राजनीतिक जीवन तक के अनुभवों को जगह दी गई है। इटली में जन्मीं Sonia Gandhi की मुलाकात राजीव गांधी से कैम्ब्रिज में हुई थी। बाद में दोनों ने शादी की और वह भारत आ गईं। इसके बाद उनका जीवन गांधी परिवार और भारतीय राजनीति से जुड़ता चला गया। किताब में उनके पारिवारिक जीवन, निजी अनुभवों और सार्वजनिक जिम्मेदारियों से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा की गई है। पाठकों को यह जानने का मौका मिलेगा कि सोनिया गांधी ने अपने जीवन के अलग-अलग दौर को किस तरह देखा और अनुभव किया। राजीव गांधी से शादी और राजनीति तक का सफर सोनिया गांधी की जिंदगी में कई ऐसे मोड़ आए, जिन्होंने उन्हें व्यक्तिगत और राजनीतिक रूप से प्रभावित किया। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या जैसी घटनाओं के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। शुरुआत में सक्रिय राजनीति से दूर रहने वाली सोनिया गांधी ने बाद में कांग्रेस की जिम्मेदारी संभाली। वह लंबे समय तक पार्टी की अध्यक्ष रहीं और भारतीय राजनीति में उनकी अहम भूमिका रही। साल 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत के बाद भी उन्होंने प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं किया। इसके बजाय मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। उनके राजनीतिक सफर से जुड़े अनुभव भी इस किताब को चर्चा में बनाए हुए हैं। किताब के प्रकाशन को लेकर भी हुआ था विवाद सोनिया गांधी की इस किताब का प्रकाशन पहले Penguin Random House India से होना था, लेकिन बाद में यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। मीडिया रिपोर्ट्स में पांडुलिपि के कुछ हिस्सों और संपादकीय बदलावों को लेकर मतभेद की बात सामने आई थी। इस मामले में कुछ कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया था कि किताब के कुछ अंशों को लेकर प्रकाशक पर दबाव था। वहीं, Penguin Random House India ने इन दावों से असहमति जताई थी और संपादकीय प्रक्रिया को सामान्य प्रकाशन प्रक्रिया का हिस्सा बताया था। इसके बाद HarperCollins India ने किताब के प्रकाशन की जिम्मेदारी ली। अब 10 नवंबर को इसके आने का इंतजार किया जा रहा है। Instagram पर सोनिया गांधी की एंट्री क्यों है खास? सोनिया गांधी लंबे समय से भारतीय राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन Instagram पर उनका अकाउंट शुरू करना उनके सार्वजनिक संवाद का एक नया माध्यम है। उनकी पहली पोस्ट में किताब और परिवार से जुड़े पलों को जगह देना इसे और खास बनाता है। शुरुआती घंटों में पोस्ट पर मिले लाइक्स और फॉलोअर्स से पता चलता है कि उनकी सोशल मीडिया एंट्री को लेकर लोगों में दिलचस्पी है। हालांकि, ये आंकड़े समय के साथ बदल सकते हैं। अब सबकी नजर 10 नवंबर को किताब के प्रकाशन पर रहेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि सोनिया गांधी के जीवन और राजनीतिक सफर से जुड़े कौन-से अनुभव किताब के जरिए पाठकों के सामने आते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

About Me

देशहरपल सिर्फ खबरों का मंच नहीं, बल्कि आपकी आवाज़ को सामने लाने का एक सशक्त माध्यम भी है। यहां आपको ताज़ातरीन खबरों के साथ-साथ नौकरी, शिक्षा, और नए भारत की बदलती आर्थिक तस्वीर पर उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी मिलेगी।

Phone: +91 9406783569, +91 755 484 8829
Email: support@deshharpal.com
Address : A-23 Sakshi Bunglow Trilanga Near Aura Mall Bhopal M.P

Recent Posts

  • All Post
  • Breaking News
  • Education
  • More News
  • Web Story
  • एंटरटेनमेंट
  • देश-हरपल
  • धर्म-कर्म
  • प्रदेश
  • बिज़नेस
  • वर्ल्ड न्यूज़
  • वीडियो
  • स्पोर्ट्स
    •   Back
    • एक्सक्लूसिव
    • Editorial
    •   Back
    • IPL 2026
    • T20 वर्ल्ड कप
    • FIFA 2026
    •   Back
    • सोच-विचार
    • हेल्थ
    • ट्रैवल
    • कल्चर
    • एनवायरनमेंट
    • Impact Feature
    •   Back
    • राशिफल
    • पंचांग
    • पर्व-त्यौहार
    • पूजा-पाठ
    • चैत्र नवरात्रि 2025
    •   Back
    • मध्य प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    •   Back
    • टीवी
    • वेब-सीरीज
    • फिल्म रिव्यू
    • बॉलीवुड
    •   Back
    • लाइफस्टाइल
    •   Back
    • स्टॉक-मार्केट

© 2023 Deshharpal. All Rights Reserved.