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ट्रंप से नाराज कनाडा ने अमेरिका से तोड़े रिश्ते

ट्रंप से नाराज कनाडा ने अमेरिका से तोड़े रिश्ते? जानिए इस विवाद का सच

अमेरिका और कनाडा के रिश्तों में हाल ही में तनाव बढ़ गया है। इसकी वजह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान हैं, जिनमें उन्होंने कनाडा को अमेरिका में मिलाने का सुझाव दिया। इसके बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस प्रस्ताव को सख्ती से खारिज कर दिया। इस बयानबाजी के बाद दोनों देशों के संबंधों में कड़वाहट देखने को मिल रही है। आइए जानते हैं कि इस विवाद का क्या असर हो सकता है। ट्रंप ने दिया कनाडा को अमेरिका में शामिल करने का सुझाव डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया कि अमेरिका हर साल कनाडा को 100 अरब डॉलर से अधिक की सब्सिडी देता है। इस आधार पर उन्होंने सुझाव दिया कि कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बना देना चाहिए। ट्रंप ने कहा कि इससे दोनों देशों को आर्थिक और सुरक्षा लाभ होंगे। ट्रूडो ने दिया करारा जवाब कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने ट्रंप के इस प्रस्ताव को सख्ती से नकार दिया। उन्होंने कहा कि कनाडा हमेशा स्वतंत्र और संप्रभु रहेगा। ट्रूडो ने स्पष्ट किया कि उनका देश अमेरिका के अधीन नहीं जाएगा और अपनी स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं करेगा। क्या कनाडा ने अमेरिका से तोड़ दिए रिश्ते? हालांकि, इस बयानबाजी के बाद भी कनाडा और अमेरिका के बीच राजनयिक और व्यापारिक रिश्ते यथावत हैं। अभी तक दोनों देशों ने अपने कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। हालांकि, इस मुद्दे को लेकर दोनों देशों में तनाव जरूर बढ़ गया है। इस विवाद का असर क्या होगा? इस तरह के बयानों से दोनों देशों के व्यापारिक और राजनीतिक संबंधों पर असर पड़ सकता है। अमेरिका और कनाडा एक-दूसरे के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं, ऐसे में अगर तनाव बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक बाजार पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, ट्रूडो सरकार अमेरिका के साथ अपने संबंधों को संतुलित बनाए रखने की कोशिश कर रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में यह विवाद और कितना गहराता है या फिर दोनों देश इसे सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
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Vladimir Putin India Visit Update; PM Narendra Modi

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरे पर आएंगे, तैयारियां शुरू

मॉस्को: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल भारत की यात्रा करेंगे। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि राष्ट्रपति पुतिन के दौरे की तैयारियां की जा रही हैं। हालांकि, उन्होंने इस यात्रा की सटीक तारीख या महीने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। लावरोव ने यह बयान ‘रूस और भारत: एक नए द्विपक्षीय एजेंडे की ओर’ समिट के दौरान दिया। इस बैठक का आयोजन रूसी अंतरराष्ट्रीय मामलों की परिषद (RIAC) द्वारा किया गया था। मोदी के रूस दौरे के बाद पुतिन भारत आएंगे रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार भारत का प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा रूस की थी। अब हमारी बारी है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत सरकार का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है।” गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2024 में दो बार रूस की यात्रा की थी। वह 22 अक्टूबर को BRICS समिट के लिए रूस गए थे। इससे पहले, जुलाई में भी उन्होंने रूस का दौरा किया था और इस दौरान राष्ट्रपति पुतिन को भारत आने का आमंत्रण दिया था। 2021 में आखिरी बार भारत आए थे पुतिन रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पिछली बार 6 दिसंबर 2021 को भारत का दौरा किया था। वह केवल चार घंटे के लिए भारत आए थे और इस दौरान दोनों देशों के बीच 28 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे, जिनमें सैन्य और तकनीकी समझौते भी शामिल थे। यूक्रेन युद्ध के बाद पहली भारत यात्रा फरवरी 2022 में यूक्रेन-रूस युद्ध शुरू होने के बाद यह राष्ट्रपति पुतिन की पहली भारत यात्रा होगी। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच 2030 तक के आर्थिक रोडमैप को आगे बढ़ाने पर चर्चा होने की उम्मीद है। भारत और रूस अपने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करते हुए इसे 100 अरब डॉलर से अधिक करने पर सहमत हुए हैं। फिलहाल, दोनों देशों के बीच करीब 60 अरब डॉलर का व्यापार हो रहा है। अरेस्ट वारंट के बाद अंतरराष्ट्रीय दौरे से बचते रहे पुतिन मार्च 2023 में इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) ने व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया था। उन पर यूक्रेन में बच्चों के अपहरण और जबरन डिपोर्टेशन के आरोप लगे थे। यह पहली बार था जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के किसी स्थायी सदस्य देश के शीर्ष नेता के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया गया। इस वारंट के बाद से पुतिन विदेश यात्राओं से बचते रहे हैं। वह 2023 में भारत में हुए G20 समिट में शामिल नहीं हुए थे और इस साल ब्राजील में हो रहे G20 समिट में भी हिस्सा नहीं लिया है। उनकी जगह दोनों सम्मेलनों में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भाग लिया। राष्ट्रपति पुतिन की आगामी भारत यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की

ज़ेलेंस्की को उम्मीद – अमेरिका रूसी मांगों के सामने मज़बूती से खड़ा रहेगा

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने उम्मीद जताई है कि अमेरिका रूस की शर्तों के सामने झुकेगा नहीं और मजबूती से खड़ा रहेगा। रूस ने काला सागर में युद्धविराम के लिए शर्त रखी है कि पश्चिमी देश उस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध हटाएं। रूस की नई शर्तें और ज़ेलेंस्की की प्रतिक्रिया मंगलवार को रूस ने घोषणा की कि वह काला सागर में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए युद्धविराम के लिए तैयार है। लेकिन उसने शर्त रखी कि पश्चिमी देश रूस के खाद्य और उर्वरक व्यापार से जुड़े आर्थिक प्रतिबंध हटाएं। ज़ेलेंस्की ने पेरिस में यूरोप के कई पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका रूसी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। जब बीबीसी ने उनसे पूछा कि क्या अमेरिका रूस की इन मांगों को मान सकता है, तो उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि ऐसा नहीं होगा। भगवान करे, वे मजबूती से खड़े रहें। लेकिन देखना होगा कि आगे क्या होता है।” अमेरिका और यूरोप का जवाब व्हाइट हाउस ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका, रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधियों के बीच सऊदी अरब में तीन दिन की बातचीत के बाद युद्धविराम पर सहमति बनी है। लेकिन कुछ ही घंटे बाद क्रेमलिन ने बयान जारी कर कुछ शर्तें रख दीं। रूस ने मांग की है कि उसके कृषि व्यापार से जुड़े वित्तीय संस्थानों पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं और उन्हें अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम SWIFT तक दोबारा पहुंच दी जाए। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सरकार इस अनुरोध पर विचार कर रही है। लेकिन यूरोपीय संघ (EU) ने साफ कर दिया कि जब तक रूसी सेना पूरी तरह यूक्रेनी सीमा से पीछे नहीं हटती, तब तक प्रतिबंधों को हटाने का सवाल ही नहीं उठता। अमेरिका में रूस के प्रभाव की चिंता ज़ेलेंस्की ने कहा कि वे अमेरिकी समर्थन के लिए आभारी हैं, लेकिन उन्हें चिंता है कि कुछ लोग “रूसी प्रचार” के प्रभाव में आ सकते हैं। उन्होंने कहा, “हम रूस के इन झूठे नैरेटिव्स को स्वीकार नहीं कर सकते।” जब उनसे पूछा गया कि क्या डोनाल्ड ट्रंप का रिश्ता उनके साथ ज्यादा अच्छा है या पुतिन के साथ, तो उन्होंने जवाब दिया, “मुझे नहीं पता। यह कहना मुश्किल है। मैं नहीं जानता कि उनकी कितनी बार किससे बातचीत हुई है।” यूरोप की भूमिका और ट्रंप के दूत की टिप्पणी पिछले हफ्ते ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ़ ने कहा था कि यूरोप द्वारा यूक्रेन की मदद के लिए “कोएलिशन ऑफ द विलिंग” (इच्छुक देशों का गठबंधन) बनाने का प्रयास बेकार है। इस पर ज़ेलेंस्की ने कहा कि वह इस पर जल्दबाज़ी में निष्कर्ष नहीं निकालेंगे। उन्होंने कहा, “जहां तक मैं जानता हूं, विटकॉफ़ को रियल एस्टेट खरीदने और बेचने का अच्छा अनुभव है, लेकिन यह मामला अलग है।” इतिहास में ज़ेलेंस्की की पहचान? बीबीसी ने ज़ेलेंस्की से पूछा कि भविष्य में इतिहास उन्हें कैसे याद करेगा – यूक्रेन को बचाने वाले नेता के रूप में या इसे गिरते देखने वाले व्यक्ति के रूप में? इस पर ज़ेलेंस्की ने भावुक होते हुए कहा, “मुझे नहीं पता कि इतिहास की किताबों में मेरे बारे में क्या लिखा जाएगा। लेकिन मेरा मकसद यह नहीं है। मेरा लक्ष्य है – अपने देश की रक्षा करना और यह देखना कि मेरे बच्चे बिना किसी डर के अपनी सड़कों पर चल सकें।“ उन्होंने आगे कहा, “मैं अपनी आखिरी सांस तक यूक्रेन की रक्षा करने के लिए हर संभव कोशिश करूंगा।” नाटो में यूक्रेन की एंट्री का मुद्दा ज़ेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन का नाटो में शामिल होना गठबंधन को और मजबूत करेगा। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि फिलहाल यूक्रेन को नाटो में शामिल नहीं किया जाएगा। निष्कर्ष यूक्रेन और रूस के बीच जंग अब भी जारी है, और ज़ेलेंस्की को उम्मीद है कि अमेरिका रूस की शर्तों को नहीं मानेगा। हालांकि, रूस का दबाव बढ़ता जा रहा है, और अमेरिका की नीति पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। Deshharpal पर ताज़ा ख़बरों के लिए जुड़े रहें!
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ट्रम्प का बड़ा फैसला: अब वोटिंग के लिए पासपोर्ट अनिवार्य, भारत की बायोमीट्रिक प्रणाली का दिया हवाला!

एग्जीक्यूटिव ऑर्डर की मुख्य बातें: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत अमेरिकी नागरिकों को वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए नागरिकता का प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। ​ राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: कानूनी चुनौतियां: कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति के पास राज्यों के चुनावी प्रक्रियाओं पर इस प्रकार के आदेश जारी करने का अधिकार सीमित है, और यह आदेश अदालतों में चुनौती का सामना कर सकता है। राष्ट्रपति ट्रम्प का यह एग्जीक्यूटिव ऑर्डर अमेरिकी चुनावी प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव लाने का प्रयास है। हालांकि, इसकी कानूनी वैधता और प्रभावशीलता पर बहस जारी है, और यह संभवतः अदालतों में चुनौती का सामना करेगा।
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ड्डा का राहुल पर पलटवार: बोले- कांग्रेस बताए अपने राज्यों में पेपर लीक क्यों हुए, सरकार चर्चा को तैयार

पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस पहले यह बताए कि उसके शासन वाले राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं। नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार इस गंभीर विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है, जबकि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में है। दरअसल, राहुल गांधी ने हाल ही में दावा किया था कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 152 पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं। उन्होंने इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार पर परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने में विफल रहने का आरोप लगाया था। इस पर जवाब देते हुए नड्डा ने कहा कि केवल आंकड़े पेश करने से काम नहीं चलेगा। कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि जिन राज्यों में उसकी सरकारें रही हैं, वहां भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं और उन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा संसद में इस विषय पर सार्थक चर्चा का स्वागत करती है।

अजमेर में मार्बल व्यापारी पर जानलेवा हमला, CCTV में कैद हुई वारदात

राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ में बुधवार सुबह मार्बल व्यापारी पर चार बदमाशों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। स्कॉर्पियो से आए हमलावरों ने गोदाम में घुसकर व्यापारी के साथ बेरहमी से मारपीट की। पूरी घटना गोदाम में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। गोदाम में घुसकर किया हमला गांधीनगर थाना क्षेत्र स्थित मार्बल एरिया में बुधवार सुबह करीब 8:20 बजे स्कॉर्पियो में सवार चार युवक गोदाम के बाहर पहुंचे। गोदाम में बैठे मार्बल व्यापारी गोवर्धन पर उन्होंने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। व्यापारी ने शुरुआत में हमलावरों का मुकाबला करने की कोशिश की, लेकिन चारों बदमाशों ने उसे घेर लिया और जमीन पर गिराकर लगातार लाठियों से पीटा। वारदात के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। सिर और हाथ में गंभीर चोट हमले में व्यापारी के सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं। घायल अवस्था में उन्हें तत्काल किशनगढ़ के राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पीड़ित ने दर्ज कराई शिकायत गांधीनगर थाना प्रभारी अनिल शर्मा ने बताया कि पीड़ित व्यापारी की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। भाई के साथ गोदाम में मौजूद था व्यापारी पीड़ित गोवर्धन ने बताया कि वह बुधवार सुबह अपने भाई के साथ गोदाम में बैठा था। इसी दौरान स्कॉर्पियो में सवार चार युवक पहुंचे और बिना किसी बातचीत के अचानक हमला कर दिया। बदमाशों ने गोदाम के अंदर घुसकर उन्हें नीचे गिराया और लाठियों से बेरहमी से पीटा। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

BPCL को जून तिमाही में ₹3,962 करोड़ का घाटा, कच्चे तेल की महंगाई से बिगड़े नतीजे

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी को इस तिमाही में ₹3,962 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ है। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने ₹6,124 करोड़ का मुनाफा कमाया था, जबकि मार्च तिमाही में ₹3,191 करोड़ का लाभ दर्ज किया गया था। 23% बढ़ा कंपनी का रेवेन्यू घाटे के बावजूद BPCL का परिचालन से राजस्व (Revenue from Operations) बढ़कर ₹1.59 लाख करोड़ पहुंच गया। यह पिछले साल की समान तिमाही के ₹1.29 लाख करोड़ के मुकाबले करीब 23% अधिक है। वहीं, मार्च तिमाही के ₹1.35 लाख करोड़ की तुलना में इसमें करीब 18% की वृद्धि दर्ज की गई। कच्चे तेल की महंगाई बनी घाटे की वजह कंपनी के अनुसार, अमेरिका-ईरान तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। इसके साथ ही शिपिंग (भाड़ा) और इंश्योरेंस लागत भी बढ़ गई। हालांकि, बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में नहीं डाला जा सका, जिससे कंपनी की लाभप्रदता प्रभावित हुई और तिमाही घाटे में बदल गई। शेयर में गिरावट नतीजों के बाद BPCL का शेयर 3% की गिरावट के साथ ₹309 पर बंद हुआ। BPCL के बारे में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों में शामिल है। इसकी स्थापना 24 जनवरी 1976 को हुई थी। कंपनी मुंबई, कोच्चि, नुमालीगढ़ और बीना में रिफाइनरियों का संचालन करती है, जिनकी कुल रिफाइनिंग क्षमता 40 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से अधिक है। BPCL पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, लुब्रिकेंट्स और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के रिफाइनिंग व वितरण का कार्य करती है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू का इस्तीफा, विवादित कृषि बिल के विरोध में छोड़ा पद

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने विवादित कृषि विधेयक के विरोध में इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। इस बिल में दो प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित इस्तेमाल और सिंचाई के लिए बड़े जलाशय बनाने की अनुमति देने का प्रावधान है। वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे मधुमक्खियों, जैव विविधता और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के अनुसार, बारबू बुधवार को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंपेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के अपने वादों से पीछे हटते हुए ऐसे प्रावधानों को मंजूरी दी, जिनका वह लगातार विरोध करती रही थीं। बिल के दो विवादित प्रावधान 1. प्रतिबंधित कीटनाशकों को मंजूरीविधेयक में एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन जैसे प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित उपयोग की अनुमति दी गई है। इनका इस्तेमाल चुकंदर, सेब और चेरी जैसी फसलों में किया जा सकेगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ये रसायन मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले कीड़ों के लिए बेहद हानिकारक हैं, जिससे कृषि उत्पादन और पारिस्थितिकी तंत्र दोनों प्रभावित हो सकते हैं। 2. सिंचाई के लिए बड़े जलाशयों की अनुमतिबिल में किसानों को सिंचाई के लिए बड़े जलाशय और कृत्रिम तालाब बनाने की प्रक्रिया आसान करने का भी प्रावधान है। पर्यावरणविदों का तर्क है कि इससे भूजल और नदियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और गर्मियों में जल संकट बढ़ सकता है। संसद से पास हुआ विधेयक फ्रांस की संसद में मंगलवार को पेश किए गए इस विधेयक को सीनेट ने 214 के मुकाबले 111 मतों से पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि यह कानून किसानों की बढ़ती लागत और घटती आय को देखते हुए लाया गया है, ताकि वे यूरोप के अन्य देशों के किसानों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें। बारबू ने जताई नाराजगी मोनिक बारबू ने कहा कि विवादित प्रावधान आखिरी समय में बिल में जोड़े गए और उन्हें हटाने पर सरकार ने कोई गंभीर चर्चा नहीं की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पिछले नौ महीनों में उन्होंने जंगलों, स्वच्छ जल, साफ हवा और जैव विविधता की रक्षा के लिए काम किया, लेकिन अब वह अपने उद्देश्यों को पूरा करने की स्थिति में नहीं हैं। पहले भी विवादों में रहा कीटनाशक एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन नियोनिकोटिनॉइड समूह के कीटनाशक हैं। फ्रांस ने 2018 में एसेटामिप्रिड पर प्रतिबंध लगाया था। इससे पहले भी इस प्रतिबंध को हटाने की कोशिश हुई थी, लेकिन फ्रांस की सर्वोच्च अदालत ने पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर संभावित खतरे का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

इंदौर में छात्र आंदोलन को मिला कांग्रेस का समर्थन, दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी धरने में पहुंचे

इंदौर के टंट्याभील चौराहे पर चल रहे छात्र आंदोलन को बुधवार रात कांग्रेस का खुला समर्थन मिला। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी धरना स्थल पहुंचे और छात्रों के बीच बैठकर उनके आंदोलन में शामिल हुए। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। टंट्याभील चौराहे पर पिछले कई दिनों से छात्र शिक्षा व्यवस्था, कथित पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन और सोनम वांगचुक को हिरासत में लिए जाने के बाद इंदौर में भी आंदोलन तेज हो गया है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र धरना स्थल पर पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार रात दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी ने छात्रों के बीच बैठकर आंदोलन का समर्थन किया। उनके साथ शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे सहित कई कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी धरने में शामिल हुए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस पिछले 25 दिनों से यह मांग उठा रही है और उन्होंने स्वयं 21 जून को भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी थी। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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