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India-Saudi Arabia

India-Saudi Arabia Strategic Partnership Council: रणनीतिक साझेदारी से बढ़े द्विपक्षीय रिश्ते

India-Saudi Arabia के बीच संबंधों को और सुदृढ़ करने के लिए वर्ष 2019 में रणनीतिक साझेदारी परिषद (Strategic Partnership Council) समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते के बाद एक उच्च-स्तरीय परिषद की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को दिशा देना और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को “सभी क्षेत्रों में सहयोग के एक नए युग की शुरुआत” बताया था। उन्होंने कहा था कि व्यापार, निवेश, सुरक्षा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के संबंध पहले से ही मजबूत हैं और भविष्य में यह और गहरे होंगे। India-Saudi Arabia ऊर्जा और व्यापारिक साझेदारी में मजबूती India-Saudi Arabia के बीच व्यापारिक संबंध पिछले वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। आज भारत, सऊदी अरब का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जबकि सऊदी अरब भारत का पांचवां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में सऊदी अरब भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद आपूर्तिकर्ता रहा, जो ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच गहरे सहयोग को दर्शाता है। India-Saudi Arabia रक्षा और रणनीतिक सहयोग में प्रगति भारत और सऊदी अरब के बीच रक्षा क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। दोनों देशों ने रक्षा उत्पादन, क्षमतावृद्धि और संयुक्त अभ्यासों के जरिए रणनीतिक सहयोग को मजबूत किया है। इसके अलावा, सऊदी अरब ने संकट की घड़ी में भारत की मदद भी की। सूडान में संकट के दौरान सऊदी अरब ने 3,500 भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी में भारत को महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया। यह सहायता जेद्दा के जरिए सुरक्षित ट्रांजिट सुनिश्चित करके दी गई थी। हज समझौता: लोगों के बीच संपर्क को मजबूती भारत और सऊदी अरब के बीच 2024 के लिए द्विपक्षीय हज समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते के तहत भारत को कुल 1,75,025 हज यात्रियों का कोटा आवंटित किया गया है। इनमें से 1,40,020 सीटें हज कमेटी के लिए और 35,005 सीटें हज ग्रुप ऑपरेटर्स के लिए निर्धारित की गई हैं। यह विशेष रूप से पहली बार हज पर जाने वालों के लिए लाभकारी है। इस्लामी जगत में सऊदी अरब की भूमिका और भारत के लिए रणनीतिक महत्व सऊदी अरब, इस्लामी दुनिया में एक प्रमुख शक्ति है और मध्य पूर्व में इसका बढ़ता प्रभाव भारत के साथ उसके संबंधों को और अधिक रणनीतिक बनाता है। इस दृष्टि से भारत-सऊदी अरब साझेदारी न केवल आर्थिक बल्कि भूराजनीतिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण बन गई है। प्रधानमंत्री मोदी की सऊदी यात्रा: संबंधों को और मजबूती देने का अवसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्तमान सऊदी अरब यात्रा भारत-सऊदी अरब संबंधों को और नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक साझेदारी का विस्तार हो रहा है और यह सहयोग भविष्य में और भी मजबूत होने की संभावना रखता है।
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Modi-Vance

Modi-Vance की मुलाकात: Trade Deal में प्रगति, बढ़ते Tariffs से पहले बातचीत तेज

नई दिल्ली, 22 अप्रैल 2025 –Modi-Vance की मुलाकात, भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की दिल्ली में हुई मुलाकात के बाद दोनों देशों ने इस दिशा में “सार्थक प्रगति” की बात कही है। वेंस अपनी पत्नी उषा और तीन बच्चों के साथ चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं। सोमवार रात प्रधानमंत्री मोदी ने उनके सम्मान में अपने आवास पर डिनर भी आयोजित किया। Modi-Vance ने बढ़ते टैरिफ से पहले समझौते की कोशिश अमेरिका ने भारत समेत कई देशों को जुलाई 9 तक बढ़े हुए टैरिफ से राहत दी है। भारत पर 27% तक के टैरिफ लागू होने थे, लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 90 दिनों की मोहलत दी, जिससे बातचीत को गति मिली है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से व्यापार असंतुलन को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। वेंस से मुलाकात के बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर ने बयान जारी कर भारत के साथ “व्यापार में गंभीर असमानता” की बात दोहराई। भारत ने कम किए टैरिफ, लेकिन कृषि क्षेत्र बना रोड़ा भारत ने हाल के महीनों में कई उत्पादों पर आयात शुल्क में कटौती की है, लेकिन कृषि क्षेत्र पर अमेरिका को ज्यादा पहुंच देने की मांग अब भी विवाद का कारण बनी हुई है। ट्रंप चाहते हैं कि भारत अमेरिकी मक्का (कॉर्न) खरीदे, लेकिन भारत ने कृषि को लेकर हमेशा से सख्त रुख अपनाया है। Modi-Vance ने 🇮🇳 रक्षा और ऊर्जा सहयोग पर भी चर्चा Modi-Vance ने के बीच सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि रक्षा, रणनीतिक तकनीक और ऊर्जा सहयोग जैसे मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने कहा कि वे “अमेरिका के साथ व्यापार, टेक्नोलॉजी, रक्षा और जनसंपर्क जैसे क्षेत्रों में पारस्परिक सहयोग के लिए प्रतिबद्ध हैं।” प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वे राष्ट्रपति ट्रंप की इस साल भारत यात्रा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। ट्रंप के इस साल क्वाड समिट के दौरान भारत आने की संभावना है। वेंस परिवार की भारत यात्रा बनी आकर्षण का केंद्र उप-राष्ट्रपति वेंस की यह यात्रा व्यक्तिगत और सांस्कृतिक रंगों से भी भरपूर रही। उनकी पत्नी उषा वेंस के माता-पिता आंध्र प्रदेश से अमेरिका गए थे। यह दंपति अपने बच्चों को भारतीय संस्कृति से रूबरू कराने के लिए उत्साहित है। वेंस के तीन बच्चों की पारंपरिक भारतीय परिधानों में तस्वीरें सोशल मीडिया और भारतीय मीडिया में छाई हुई हैं — दोनों बेटे कुर्ता-पायजामा में और तीन वर्षीय मिराबेल लहंगे में नजर आईं। जयपुर से आगरा तक: सांस्कृतिक सफर मोदी से मुलाकात के बाद वेंस परिवार जयपुर रवाना हुआ, जहां उन्होंने ऐतिहासिक आमेर किले का दौरा किया। वे जयपुर में भारत-अमेरिका संबंधों पर एक भाषण भी देंगे। बुधवार को परिवार आगरा जाकर ताजमहल का दीदार करेगा और फिर गुरुवार को अमेरिका के लिए रवाना होगा। लेटेस्ट इंटरनेशनल न्यूज, ट्रेड अपडेट्स और एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स के लिए जुड़े रहें Deshharpal.com से।
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भारत आए अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस: 3 महीने में 5 विदेशी दौरे और हर जगह विवाद, अब भारत कैसे करेगा स्वागत?

BHARAT आए AMERICA के VICE PRESIDENT JD VANCE: 3 महीने में 5 विदेशी दौरे और हर जगह विवाद, अब भारत कैसे करेगा स्वागत?

नई दिल्ली – अमेरिका के नए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इन दिनों लगातार सुर्खियों में हैं। वजह है उनके एक के बाद एक विदेशी दौरे – और हर दौरे के बाद उठता कोई न कोई विवाद। अब जब वे भारत पहुंचे हैं, तो सवाल ये है – भारत उनका स्वागत कैसे करेगा और रिश्तों को कैसे संभालेगा? 3 महीने में 5 दौरे, हर जगह विवाद जेडी वेंस ने अमेरिका के उपराष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद से अब तक 5 देशों का दौरा कर लिया है – और ये सब सिर्फ तीन महीने के अंदर। हर दौरे के बाद अमेरिका को सफाई देनी पड़ी या संबंधों को संभालना पड़ा। भारत को क्यों है ये दौरा खास? भारत और अमेरिका के रिश्ते इस समय बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं। व्यापार, सुरक्षा, तकनीक और एशिया की राजनीति – हर स्तर पर दोनों देश एक-दूसरे के नजदीक आ रहे हैं। भारत के लिए ये दौरा एक मौका भी है और चुनौती भी। जेडी वेंस के साथ बातचीत में ये देखा जाएगा कि अमेरिका की नई सरकार भारत को किस नजर से देखती है। जेडी वेंस का राजनीतिक स्टाइल वेंस को अमेरिका में बोल्ड और विवादास्पद नेता के रूप में जाना जाता है। वे बिना लाग-लपेट के बात करते हैं, जो कई बार राजनयिकों के लिए मुश्किलें खड़ी कर देती है।लेकिन वहीं, वे एक ईमानदार और स्पष्ट सोच वाले नेता भी माने जाते हैं, जो अमेरिका की घरेलू समस्याओं को समझते हैं। भारत की तैयारी भारत इस दौरे को डिप्लोमैटिक बैलेंस के रूप में देख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय इस बात को लेकर सतर्क हैं कि बातचीत सकारात्मक दिशा में जाए।सूत्रों के मुताबिक, व्यापार, तकनीक ट्रांसफर, रक्षा सहयोग और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर बातचीत होगी। क्या कहता है आम भारतीय? दिल्ली की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक, लोग जेडी वेंस को लेकर मिश्रित भावनाएं रखते हैं। कोई उन्हें अमेरिका का ट्रंप 2.0 कहता है, तो कोई उन्हें बदलाव की उम्मीद मानता है। रजनीश कुमार, एक युवा उद्यमी कहते हैं – “हमें उम्मीद है कि भारत को मजबूत साझेदार की तरह देखा जाएगा, न कि सिर्फ एक बाजार की तरह।”
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जिस बांग्लादेश की मदद में भारत ने लगाए हजारों करोड़, अब वही दिखा रहा आंखें – क्या PM मोदी देंगे करारा जवाब?

जिस BANGLADESH की मदद में भारत ने लगाए हजारों करोड़, अब वही दिखा रहा आंखें – क्या PM मोदी देंगे करारा जवाब?

भारत ने बांग्लादेश को हमेशा एक अच्छे पड़ोसी और दोस्त की तरह देखा। जब भी बांग्लादेश को ज़रूरत पड़ी, भारत ने दिल खोलकर मदद की – फिर चाहे बात आज़ादी की लड़ाई की हो, विकास परियोजनाओं की या आर्थिक सहायता की। लेकिन आज हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। भारत की दरियादिली पर बांग्लादेश की सियासत भारी?बीते कुछ समय में बांग्लादेश की ओर से ऐसे बयान और कदम सामने आ रहे हैं, जो भारत के लिए चौंकाने वाले हैं। बांग्लादेश सरकार का चीन के साथ बढ़ता गठजोड़, भारत के खिलाफ तल्ख़ रुख और कई द्विपक्षीय मुद्दों पर टकराव – ये सभी इशारा कर रहे हैं कि रिश्तों में दरार आ चुकी है। हजारों करोड़ की मदद – लेकिन फिर भी उपेक्षा!भारत ने अब तक बांग्लादेश को करीब 8 बिलियन डॉलर (65 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा) की आर्थिक सहायता दी है। सड़कें, रेल, बिजली और शिक्षा – हर सेक्टर में भारत ने अपना हाथ बढ़ाया। लेकिन इसके बदले में हाल ही में जो रवैया देखने को मिल रहा है, वो कड़वा है। चीन का खेल और बांग्लादेश की चुप्पीबांग्लादेश अब चीन की ओर झुकता दिख रहा है। चीन वहाँ भारी निवेश कर रहा है और रणनीतिक तौर पर भारत की घेराबंदी की कोशिश कर रहा है। ऐसे में बांग्लादेश की चुप्पी और भारत के खिलाफ बयान चिंता का कारण हैं। क्या मोदी सरकार दिखाएगी सख्ती?मोदी सरकार अब इस पूरे मामले पर बारीकी से नज़र रखे हुए है। जानकारों का मानना है कि भारत जल्द ही कड़ा संदेश दे सकता है। यह वक्त है जब भारत को अपनी उदारता और राष्ट्रीय हितों में संतुलन बैठाना होगा।
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Saudi Arabia

PM Modi की Saudi Arabia यात्रा 22-23 April को, Strategic Ties और Trade Cooperation पर होगी चर्चा: MEA

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22-23 अप्रैल 2025 को Saudi Arabia की दो दिवसीय यात्रा पर जाएंगे। यह यात्रा क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान के निमंत्रण पर हो रही है। यह मोदी जी की सऊदी अरब की तीसरी यात्रा होगी, इससे पहले वे 2016 और 2019 में वहां गए थे।​ 🇮🇳 भारत-Saudi Arabia रणनीतिक साझेदारी: एक नया अध्याय प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा सितंबर 2023 में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की भारत यात्रा के बाद हो रही है, जब उन्होंने G20 शिखर सम्मेलन में भाग लिया और भारत-सऊदी अरब रणनीतिक साझेदारी परिषद की पहली बैठक की सह-अध्यक्षता की। इस परिषद की स्थापना 2019 में हुई थी, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है। प्रमुख एजेंडा: ऊर्जा, सुरक्षा और व्यापार इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के नेता ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, व्यापार और निवेश, स्वास्थ्य देखभाल और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) की प्रगति पर भी विचार किया जाएगा, जो सितंबर 2023 में G20 शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित किया गया था। ​ भारतीय प्रवासी समुदाय की भूमिका सऊदी अरब में भारतीय प्रवासी समुदाय इस यात्रा को लेकर उत्साहित है। रियाद और जेद्दा में भारतीय समुदाय के संगठनों द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इससे पहले, 2024 में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सऊदी अरब में भारतीय दूतावास और सऊदी खेल मंत्रालय के सहयोग से योग कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें सऊदी महिला प्रशिक्षकों ने भी भाग लिया था। आर्थिक संबंधों में वृद्धि भारत और सऊदी अरब के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2022-2023 में $52.8 बिलियन से अधिक रहा। दोनों देश ऊर्जा, पेट्रोलियम भंडारण, नवीकरणीय ऊर्जा, हाइड्रोजन उत्पादन, और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत और सऊदी अरब के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का अवसर प्रदान करेगी। इससे न केवल द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भी दोनों देशों की भूमिका सुदृढ़ होगी।
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मेरठ में आंधी-बारिश का कहर: दो मकान गिरे, 9 महीने की मासूम समेत दो की दर्दनाक मौत; कई राज्यों में मौसम ने बदला मिजाज

MEERUT में आंधी-बारिश का कहर: दो मकान गिरे, 9 महीने की मासूम समेत दो की दर्दनाक मौत; कई राज्यों में मौसम ने बदला मिजाज

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में बीती रात तेज आंधी और बारिश ने बड़ा कहर मचाया। तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश के चलते दो मकान ढह गए। इस हादसे में एक 9 महीने की मासूम बच्ची और एक बुजुर्ग की जान चली गई। परिवार के लिए यह एक ऐसा ग़म बन गया है, जो उम्र भर नहीं भरेगा। स्थानीय लोगों ने बताया कि हादसा देर रात हुआ, जब सभी लोग गहरी नींद में थे। अचानक ज़ोरदार आवाज़ के साथ दीवारें गिर गईं और सब कुछ मलबे में तब्दील हो गया। पड़ोसियों ने तुरंत मलबा हटाकर घायलों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक दो लोगों की सांसे थम चुकी थीं। राजौरी (जम्मू-कश्मीर) में ओलावृष्टि: दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में मौसम ने करवट ली और जोरदार ओले गिरे। खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा है। किसान परेशान हैं, क्योंकि उनकी मेहनत पर पानी फिर गया। राजस्थान में हीटवेव का अलर्ट: राजस्थान के कई जिलों में गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। मौसम विभाग ने हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। जयपुर, बीकानेर, जोधपुर समेत कई जगहों पर तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। लोगों को दिन में बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। देश के कोने-कोने में मौसम का कहर:एक ओर बारिश और तूफान जान ले रहे हैं, तो दूसरी ओर गर्मी से लोग बेहाल हैं। मौसम का यह बदलता रूप आम जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है। ज़रूरत है सतर्क रहने की, ताकि जान-माल का नुकसान रोका जा सके।
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क्या हिंदू कार्ड से बंगाल फतेह करेगी BJP? 2026 के मिशन की रणनीति संघ ने तय की, 4% वोट दिला सकता है सत्ता

क्या HINDU CARD से BENGAL फतेह करेगी BJP? 2026 के मिशन की रणनीति संघ ने तय की, 4% वोट दिला सकता है सत्ता KOLKATA।

क्या बंगाल में फिर से सियासी तूफान लाने की तैयारी में है बीजेपी? 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर संघ प्रमुख मोहन भागवत की सक्रियता कुछ बड़ा संकेत दे रही है। सूत्रों की मानें तो संघ ने बंगाल में हिंदू वोट बैंक को जोड़ने के लिए एक ठोस रणनीति बना ली है। टारगेट है सिर्फ 4% अतिरिक्त वोट… जो गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। क्यों खास है ये 4%? बीजेपी को साल 2021 में लगभग 38% वोट मिले थे, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने 47.9% वोटों के साथ सत्ता कायम रखी। विश्लेषकों की मानें तो अगर बीजेपी को 2026 में 42% से ज्यादा वोट मिलते हैं, तो वो सीधे सरकार बनाने की दौड़ में आ सकती है। और यही 4% वोट अब बीजेपी और संघ का फोकस बन गए हैं। भागवत ने तय की दिशा मोहन भागवत का बंगाल दौरा सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं थी। उन्होंने संघ के स्थानीय कार्यकर्ताओं और बीजेपी के रणनीतिकारों से लंबी बैठकें कीं। बैठक में साफ कहा गया कि बंगाल में ‘हिंदू पहचान’ को केंद्र में लाकर जनमानस को जोड़ा जाएगा। क्या बदलेगा मुद्दों का रुख? जहां TMC ममता बनर्जी के विकास मॉडल और बंगाली अस्मिता की बात करती है, वहीं बीजेपी अब मंदिर, गोरक्षा, लव जिहाद और बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे मुद्दों को फिर से धार दे सकती है। संघ का मानना है कि बंगाल में हिंदू समाज के कई वर्ग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। इन्हीं भावनाओं को चुनावी मुद्दा बनाया जाएगा। ग्राउंड लेवल पर तैयारी शुरू संघ की शाखाएं गांव-गांव में तेज़ी से फैल रही हैं। युवाओं को जोड़ने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम, धर्म-सभाएं और सेवा कार्यों पर ज़ोर है। बीजेपी भी बूथ लेवल मैनेजमेंट को मज़बूत कर रही है। ममता के लिए खतरे की घंटी? अगर बीजेपी अपना 4% टारगेट पूरा कर लेती है, तो ममता बनर्जी की सत्ता को सीधी चुनौती मिल सकती है। मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण TMC के पक्ष में पहले से है, लेकिन अगर हिंदू वोट एकजुट हो गया, तो तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
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PM Modi और Elon Musk

PM Modi और Elon Musk की बातचीत: टेक्नोलॉजी, स्पेस और AI में भारत-अमेरिका साझेदारी को नया मुकाम

भारत और अमेरिका के बीच टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। इसी कड़ी में PM Modi और Elon Musk Tesla तथा SpaceX के CEO के बीच एक अहम बातचीत हुई। पीएम मोदी ने X (पूर्व में Twitter) पर जानकारी दी कि उन्होंने मस्क से पहले की वाशिंगटन बैठक में उठाए गए मुद्दों पर फिर से चर्चा की है। “Spoke to Elon Musk and talked about various issues, including the topics we covered during our meeting in Washington DC earlier this year,” – PM Modi on X उन्होंने यह भी कहा कि भारत टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में अमेरिका के साथ अपनी साझेदारी को और आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। स्पेस, AI और इनोवेशन में सहयोग की अपार संभावनाएं Elon Musk, जिनकी कंपनियां Tesla और SpaceX टेक्नोलॉजी और स्पेस इनोवेशन की अगली पंक्ति में खड़ी हैं, ने फरवरी 2024 में वाशिंगटन में पीएम मोदी से मुलाकात की थी। उस समय मस्क अपने तीन बच्चों के साथ Blair House पहुंचे थे, जहां प्रधानमंत्री रुके हुए थे। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने स्पेस एक्सप्लोरेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सस्टेनेबल डेवलपमेंट, और इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़ में भारत-अमेरिका सहयोग को और गहरा करने पर जोर दिया। MEA (विदेश मंत्रालय) के अनुसार, बातचीत में गुड गवर्नेंस, एंटरप्रेन्योरशिप, और स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी मजबूती देने की बात कही गई। PM Modi और Elon Musk की पुरानी मुलाकातें यह पहला मौका नहीं है जब मोदी और मस्क आमने-सामने आए हों। इससे पहले 2015 में California और 2023 में New York में दोनों की मुलाकात हो चुकी है। हर बार दोनों नेताओं के बीच भविष्य की तकनीकों पर संवाद हुआ है, जो भारत की डिजिटल और वैज्ञानिक दिशा को मजबूत करता है। Elon Musk: टेक्नोलॉजी के साथ पॉलिसी में भी प्रभावशाली Elon Musk को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए देखा गया है। वे Department of Government Efficiency (DOGE) का हिस्सा रहे हैं, जिसका उद्देश्य सरकारी खर्चों में कटौती और नीतिगत सुधार करना था।
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US Airstrikes in Yemen

US Airstrikes in Yemen: अमेरिकी हमले में 38 लोगों की मौत, 100 से अधिक घायल

18 अप्रैल 2025, Yemen के रस इसा (Ras Isa) ऑयल पोर्ट पर अमेरिका द्वारा किए गए जबरदस्त एयरस्ट्राइक में कम से कम 38 लोगों की मौत हो गई है और 100 से अधिक घायल बताए जा रहे हैं। यह हमला उस वक्त हुआ जब यमन के हूथी विद्रोही गुट इस बंदरगाह का इस्तेमाल कर रहे थे। इस हमले से इलाके में भारी तबाही और एक विशाल आग का गोला (Fireball) देखने को मिला। क्या हुआ था हमला? अमेरिकी सेना CENTCOM (U.S. Central Command) ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह एयरस्ट्राइक हूथी विद्रोहियों के फ्यूल नेटवर्क को खत्म करने और उनके राजस्व स्रोतों को बंद करने के मकसद से किया गया था। हमले के बाद क्या हुआ? हूथी समर्थक चैनल Al Masirah TV ने हमले की भयावह तस्वीरें साझा कीं, जिनमें शव, बिखरी चीज़ें और एक जलता हुआ ईंधन टर्मिनल साफ दिखा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले में पैरामेडिक्स और आम नागरिकों की भी जान गई है। हूथी गुट ने इस हमले को “यमन की संप्रभुता पर खुला हमला” करार दिया और कहा कि यह पोर्ट वर्षों से आम यमनी नागरिकों की सेवा कर रहा था। रणनीतिक महत्व क्यों है इस पोर्ट का? बढ़ते तनाव की वजह क्या है? यह हमला अमेरिका द्वारा पिछले कुछ हफ्तों से चलाए जा रहे एक बड़े मिलिट्री ऑपरेशन का हिस्सा है, जिसमें: गौरतलब है कि नवंबर 2023 से अब तक हूथी विद्रोही 100 से अधिक कॉमर्शियल जहाजों पर हमला कर चुके हैं, जिनमें 2 जहाज डूब चुके और 4 नाविकों की जान जा चुकी है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं? अब तक संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस हमले पर चिंता जाहिर की है, लेकिन अमेरिका ने अपने बयान में साफ किया है कि इस ऑपरेशन का मकसद हूथी आतंकवाद को आर्थिक रूप से कमजोर करना है। Deshharpal पर हम आपको अंतरराष्ट्रीय खबरों से लेकर लोकल अपडेट्स तक सब कुछ देते हैं !
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चीन का बड़ा फैसला: बोइंग जेट नहीं खरीदेगा, अमेरिका को दिया करारा जवाब

चीन का बड़ा फैसला: बोइंग जेट नहीं खरीदेगा, अमेरिका को दिया करारा जवाब

बीजिंग/वॉशिंगटन – अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव का असर अब विमान और धातुओं के व्यापार पर भी पड़ने लगा है। चीन ने साफ कर दिया है कि वह अब अमेरिकी विमान कंपनी बोइंग से नए जेट नहीं खरीदेगा। इसके साथ ही, चीन ने अमेरिका को कीमती मेटल्स (rare earth metals) की सप्लाई भी रोक दी है। क्यों लिया ये बड़ा फैसला? यह सब हुआ है अमेरिका द्वारा चीन पर लगाए गए नए टैक्स (टैरिफ) के बाद। अमेरिका ने हाल ही में कुछ चीनी सामानों पर भारी टैरिफ लगाए हैं। इसके जवाब में चीन ने बोइंग की डिलीवरी रोकने और कीमती मेटल्स की सप्लाई बंद करने का निर्णय लिया। बोइंग को लगेगा बड़ा झटका बोइंग के लिए चीन एक बड़ा ग्राहक रहा है। हर साल चीन दर्जनों बोइंग विमान खरीदता रहा है। लेकिन अब जब चीन ने मना कर दिया है, तो इसका सीधा असर अमेरिका की इकोनॉमी और बोइंग कंपनी पर पड़ेगा। टेक्नोलॉजी और मेटल की लड़ाई चीन के पास दुर्लभ मेटल्स का बड़ा भंडार है – जैसे लैन्थेनम, नियोडिमियम, डाइसप्रोसियम आदि। ये मेटल्स इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज़, गाड़ियाँ और रक्षा उपकरण बनाने में काम आते हैं। अगर चीन इनकी सप्लाई रोक देता है, तो अमेरिका और बाकी देशों की टेक इंडस्ट्री को बड़ी दिक्कत हो सकती है। आम लोगों पर भी असर? इस तरह की ट्रेड वॉर का असर आम लोगों पर भी पड़ता है। उड़ानों की कीमतें बढ़ सकती हैं, गैजेट्स महंगे हो सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता बढ़ जाती है।
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PM Modi on Paper Leak: युवाओं को दिया भरोसा, Fast Track Courts का ऐलान; राहुल गांधी का पलटवार

देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच PM Modi ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अब और सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने घोषणा की कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए Fast Track Courts का गठन किया जाएगा, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी और सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। ऐसे में पेपर लीक का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है। PM मोदी बोले- युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी भी छात्र की मेहनत और सपनों के साथ समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होगी और ऐसे मामलों के जल्द निपटारे के लिए Fast Track Courts स्थापित किए जाएंगे। इससे जांच और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। परीक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर जोर प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार तकनीक के बेहतर उपयोग, कड़ी निगरानी और सख्त कानूनों के जरिए भर्ती एवं प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में काम कर रही है। उनका कहना था कि दोषियों को किसी भी हाल में बचने नहीं दिया जाएगा। राहुल गांधी ने सरकार से पूछे सवाल प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि केवल घोषणाएं करने से समस्या खत्म नहीं होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में कई भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक होने से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों को भरोसा तभी मिलेगा, जब दोषियों पर समयबद्ध कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाएगी। छात्रों की उम्मीदें बढ़ीं पेपर लीक की घटनाओं से प्रभावित छात्र लंबे समय से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे थे। ऐसे में Fast Track Courts की घोषणा को कई छात्र सकारात्मक कदम मान रहे हैं। हालांकि, उनका कहना है कि इस फैसले का वास्तविक असर तभी दिखेगा, जब दोषियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई होगी और भविष्य में परीक्षाएं निष्पक्ष तरीके से आयोजित की जाएंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

ड्डा का राहुल पर पलटवार: बोले- कांग्रेस बताए अपने राज्यों में पेपर लीक क्यों हुए, सरकार चर्चा को तैयार

पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस पहले यह बताए कि उसके शासन वाले राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं। नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार इस गंभीर विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है, जबकि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में है। दरअसल, राहुल गांधी ने हाल ही में दावा किया था कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 152 पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं। उन्होंने इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार पर परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने में विफल रहने का आरोप लगाया था। इस पर जवाब देते हुए नड्डा ने कहा कि केवल आंकड़े पेश करने से काम नहीं चलेगा। कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि जिन राज्यों में उसकी सरकारें रही हैं, वहां भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं और उन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा संसद में इस विषय पर सार्थक चर्चा का स्वागत करती है।

अजमेर में मार्बल व्यापारी पर जानलेवा हमला, CCTV में कैद हुई वारदात

राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ में बुधवार सुबह मार्बल व्यापारी पर चार बदमाशों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। स्कॉर्पियो से आए हमलावरों ने गोदाम में घुसकर व्यापारी के साथ बेरहमी से मारपीट की। पूरी घटना गोदाम में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। गोदाम में घुसकर किया हमला गांधीनगर थाना क्षेत्र स्थित मार्बल एरिया में बुधवार सुबह करीब 8:20 बजे स्कॉर्पियो में सवार चार युवक गोदाम के बाहर पहुंचे। गोदाम में बैठे मार्बल व्यापारी गोवर्धन पर उन्होंने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। व्यापारी ने शुरुआत में हमलावरों का मुकाबला करने की कोशिश की, लेकिन चारों बदमाशों ने उसे घेर लिया और जमीन पर गिराकर लगातार लाठियों से पीटा। वारदात के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। सिर और हाथ में गंभीर चोट हमले में व्यापारी के सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं। घायल अवस्था में उन्हें तत्काल किशनगढ़ के राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पीड़ित ने दर्ज कराई शिकायत गांधीनगर थाना प्रभारी अनिल शर्मा ने बताया कि पीड़ित व्यापारी की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। भाई के साथ गोदाम में मौजूद था व्यापारी पीड़ित गोवर्धन ने बताया कि वह बुधवार सुबह अपने भाई के साथ गोदाम में बैठा था। इसी दौरान स्कॉर्पियो में सवार चार युवक पहुंचे और बिना किसी बातचीत के अचानक हमला कर दिया। बदमाशों ने गोदाम के अंदर घुसकर उन्हें नीचे गिराया और लाठियों से बेरहमी से पीटा। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

BPCL को जून तिमाही में ₹3,962 करोड़ का घाटा, कच्चे तेल की महंगाई से बिगड़े नतीजे

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी को इस तिमाही में ₹3,962 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ है। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने ₹6,124 करोड़ का मुनाफा कमाया था, जबकि मार्च तिमाही में ₹3,191 करोड़ का लाभ दर्ज किया गया था। 23% बढ़ा कंपनी का रेवेन्यू घाटे के बावजूद BPCL का परिचालन से राजस्व (Revenue from Operations) बढ़कर ₹1.59 लाख करोड़ पहुंच गया। यह पिछले साल की समान तिमाही के ₹1.29 लाख करोड़ के मुकाबले करीब 23% अधिक है। वहीं, मार्च तिमाही के ₹1.35 लाख करोड़ की तुलना में इसमें करीब 18% की वृद्धि दर्ज की गई। कच्चे तेल की महंगाई बनी घाटे की वजह कंपनी के अनुसार, अमेरिका-ईरान तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। इसके साथ ही शिपिंग (भाड़ा) और इंश्योरेंस लागत भी बढ़ गई। हालांकि, बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में नहीं डाला जा सका, जिससे कंपनी की लाभप्रदता प्रभावित हुई और तिमाही घाटे में बदल गई। शेयर में गिरावट नतीजों के बाद BPCL का शेयर 3% की गिरावट के साथ ₹309 पर बंद हुआ। BPCL के बारे में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों में शामिल है। इसकी स्थापना 24 जनवरी 1976 को हुई थी। कंपनी मुंबई, कोच्चि, नुमालीगढ़ और बीना में रिफाइनरियों का संचालन करती है, जिनकी कुल रिफाइनिंग क्षमता 40 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से अधिक है। BPCL पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, लुब्रिकेंट्स और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के रिफाइनिंग व वितरण का कार्य करती है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू का इस्तीफा, विवादित कृषि बिल के विरोध में छोड़ा पद

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने विवादित कृषि विधेयक के विरोध में इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। इस बिल में दो प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित इस्तेमाल और सिंचाई के लिए बड़े जलाशय बनाने की अनुमति देने का प्रावधान है। वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे मधुमक्खियों, जैव विविधता और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के अनुसार, बारबू बुधवार को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंपेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के अपने वादों से पीछे हटते हुए ऐसे प्रावधानों को मंजूरी दी, जिनका वह लगातार विरोध करती रही थीं। बिल के दो विवादित प्रावधान 1. प्रतिबंधित कीटनाशकों को मंजूरीविधेयक में एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन जैसे प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित उपयोग की अनुमति दी गई है। इनका इस्तेमाल चुकंदर, सेब और चेरी जैसी फसलों में किया जा सकेगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ये रसायन मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले कीड़ों के लिए बेहद हानिकारक हैं, जिससे कृषि उत्पादन और पारिस्थितिकी तंत्र दोनों प्रभावित हो सकते हैं। 2. सिंचाई के लिए बड़े जलाशयों की अनुमतिबिल में किसानों को सिंचाई के लिए बड़े जलाशय और कृत्रिम तालाब बनाने की प्रक्रिया आसान करने का भी प्रावधान है। पर्यावरणविदों का तर्क है कि इससे भूजल और नदियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और गर्मियों में जल संकट बढ़ सकता है। संसद से पास हुआ विधेयक फ्रांस की संसद में मंगलवार को पेश किए गए इस विधेयक को सीनेट ने 214 के मुकाबले 111 मतों से पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि यह कानून किसानों की बढ़ती लागत और घटती आय को देखते हुए लाया गया है, ताकि वे यूरोप के अन्य देशों के किसानों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें। बारबू ने जताई नाराजगी मोनिक बारबू ने कहा कि विवादित प्रावधान आखिरी समय में बिल में जोड़े गए और उन्हें हटाने पर सरकार ने कोई गंभीर चर्चा नहीं की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पिछले नौ महीनों में उन्होंने जंगलों, स्वच्छ जल, साफ हवा और जैव विविधता की रक्षा के लिए काम किया, लेकिन अब वह अपने उद्देश्यों को पूरा करने की स्थिति में नहीं हैं। पहले भी विवादों में रहा कीटनाशक एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन नियोनिकोटिनॉइड समूह के कीटनाशक हैं। फ्रांस ने 2018 में एसेटामिप्रिड पर प्रतिबंध लगाया था। इससे पहले भी इस प्रतिबंध को हटाने की कोशिश हुई थी, लेकिन फ्रांस की सर्वोच्च अदालत ने पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर संभावित खतरे का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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