America-Iran War लगातार गंभीर होता जा रहा है। अब अमेरिका ने पहली बार आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि हाल के ईरानी हमलों में उसके 100 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग Pentagon ने कहा कि सुरक्षा कारणों और सैन्य अभियानों की संवेदनशीलता को देखते हुए इस जानकारी को तुरंत सार्वजनिक नहीं किया गया था। वहीं, इस खुलासे के बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई तेज करते हुए ईरान के 9 शहरों में एयरस्ट्राइक की है। इन घटनाओं ने पूरे मध्य पूर्व में तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
Pentagon ने देर से क्यों दी जानकारी?
पेंटागन के मुताबिक, घायल सैनिकों की संख्या पहले इसलिए साझा नहीं की गई क्योंकि इससे चल रहे सैन्य अभियानों और क्षेत्र में तैनात जवानों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता था। अधिकारियों का कहना है कि अधिकतर सैनिकों को विस्फोटों के कारण सिर और शरीर पर हल्की चोटें आई थीं। कई जवान इलाज के बाद दोबारा अपनी ड्यूटी पर लौट चुके हैं, जबकि कुछ अभी भी मेडिकल निगरानी में हैं।
अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जानकारी छिपाने का उद्देश्य नहीं था, बल्कि सैन्य सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी था।
America ने Iran के 9 शहरों पर किया बड़ा हमला
घायल सैनिकों की पुष्टि के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई को और तेज कर दिया। अमेरिकी सेना ने ईरान के 9 शहरों में मौजूद कई अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में मिसाइल लॉन्च साइट्स, ड्रोन बेस, हथियार भंडार, कमांड सेंटर और एयर डिफेंस सिस्टम को लक्ष्य बनाया गया।
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का दावा है कि इन एयरस्ट्राइक का मकसद भविष्य में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर होने वाले हमलों को रोकना और ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है।
लगातार बढ़ रहा है Middle East का तनाव
पिछले कुछ दिनों से अमेरिका और ईरान के बीच लगातार जवाबी हमले हो रहे हैं। ईरान समर्थित समूहों द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिका ने कई चरणों में हवाई कार्रवाई की है। ताजा एयरस्ट्राइक को इसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव इसी तरह जारी रहा तो इसका असर पूरे Middle East की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।
दुनिया की नजर America-Iran Conflict पर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष को लेकर दुनिया भर के देशों की चिंता भी बढ़ गई है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था भी इससे प्रभावित हो सकती है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल अमेरिका ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि उसके सैनिकों या सैन्य ठिकानों पर दोबारा हमला होता है तो जवाब पहले से अधिक सख्त होगा। वहीं, ईरान ने भी अमेरिकी एयरस्ट्राइक की आलोचना करते हुए उचित जवाब देने की चेतावनी दी है।
ऐसे में पूरी दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले दिनों में यह टकराव और बढ़ता है या फिर कूटनीतिक प्रयास दोनों देशों के बीच तनाव कम करने में सफल होते हैं। फिलहाल Middle East में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और हर नई सैन्य कार्रवाई वैश्विक राजनीति के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी असर डाल सकती है.
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