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Rath Yatra 2026

Rath Yatra 2026: अहमदाबाद में बदले सुरक्षा इंतजाम, हाथियों के पैर बांधकर निकाली यात्रा; Puri में निभेगी सदियों पुरानी रस्म

Rath Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा देशभर में आस्था और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। गुजरात के अहमदाबाद और ओडिशा के पुरी में इस बार भी लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए उमड़े। हालांकि अहमदाबाद की रथयात्रा इस बार एक खास वजह से rerचर्चा में रही। पिछले साल हाथियों के बेकाबू होने की घटना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा में शामिल हाथियों के पैरों को हल्के बंधन में रखा। दूसरी ओर पुरी में सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार गजपति महाराज सोने की झाड़ू से भगवान के रथों की सफाई करेंगे। पिछले साल की घटना के बाद बदली तैयारी अहमदाबाद की जगन्नाथ रथयात्रा देश की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक रथयात्राओं में से एक मानी जाती है। लेकिन वर्ष 2025 की यात्रा के दौरान तीन हाथी अचानक बेकाबू हो गए थे। भीड़ में अफरा-तफरी मच गई थी और कई श्रद्धालु घायल हुए थे। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल उठे थे। इसी अनुभव से सीख लेते हुए इस बार प्रशासन, वन विभाग और पशु चिकित्सकों ने मिलकर विस्तृत सुरक्षा योजना तैयार की। हाथियों के आगे और पीछे के पैरों को हल्की रस्सियों से नियंत्रित रखा गया ताकि वे भीड़ में अचानक तेज़ी से न दौड़ सकें। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम केवल एहतियात के तौर पर उठाया गया है और इसमें पशुओं की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया। सुरक्षा व्यवस्था रही हाई अलर्ट पर रथयात्रा के पूरे मार्ग पर हजारों पुलिसकर्मी तैनात किए गए। ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी, कंट्रोल रूम और क्विक रिस्पॉन्स टीम के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी गई। हाथियों के साथ अनुभवी महावत, वन विभाग की टीम और पशु चिकित्सक भी लगातार मौजूद रहे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह मेडिकल कैंप, एम्बुलेंस, पेयजल केंद्र और हेल्प डेस्क बनाए गए। ट्रैफिक को भी पहले से तय डायवर्जन प्लान के अनुसार संचालित किया गया ताकि यात्रा बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके। Puri में निभेगी ‘छेरा पहंरा’ की अनोखी परंपरा ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। यहां रथयात्रा के दौरान गजपति महाराज ‘छेरा पहंरा’ नामक विशेष अनुष्ठान करते हैं। इस रस्म में वे सोने की झाड़ू से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथों की सफाई करते हैं और चंदन मिश्रित पवित्र जल का छिड़काव करते हैं। यह परंपरा इस बात का संदेश देती है कि भगवान के सामने हर व्यक्ति समान है। चाहे वह राजा हो या आम भक्त, सभी भगवान के सेवक हैं। लाखों श्रद्धालुओं ने लगाए जयकारे अहमदाबाद और पुरी दोनों शहरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। भगवान जगन्नाथ के जयघोष के बीच भक्तों ने रथों को खींचकर अपनी आस्था व्यक्त की। पूरे वातावरण में भक्ति, उत्साह और पारंपरिक संस्कृति की झलक साफ दिखाई दी। आस्था के साथ सुरक्षा का भी संदेश इस बार की रथयात्रा ने दो महत्वपूर्ण संदेश दिए। पहला, धार्मिक परंपराओं का सम्मान और दूसरा, श्रद्धालुओं की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं। अहमदाबाद में पिछले साल की घटना से सीख लेकर किए गए इंतजाम और पुरी में सदियों से चली आ रही परंपराओं का निर्वहन, दोनों ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया। यही वजह है कि जगन्नाथ रथयात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का भी प्रतीक मानी जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jagannath Rath Yatra

Jagannath Rath Yatra 2026: Tradition बनाम अलग आयोजन, ISKCON को लेकर पुरी राजा ने उठाई आवाज

भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक Jagannath Puri Rath Yatra को लेकर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। पुरी के राजा ने ISKCON (International Society for Krishna Consciousness) की ओर से अलग समय पर रथयात्रा आयोजित किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस मामले में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर भगवान जगन्नाथ की सदियों पुरानी परंपराओं और धार्मिक मर्यादाओं की रक्षा करने की अपील की है। पुरी राजा का कहना है कि Jagannath Rath Yatra सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इसलिए इससे जुड़े नियमों और परंपराओं का पालन बेहद जरूरी है। ISKCON की अलग रथयात्रा पर क्यों उठा विवाद? ISKCON दुनिया के कई देशों में भगवान कृष्ण और भगवान जगन्नाथ से जुड़े धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करता है। संस्था की ओर से कई जगहों पर Rath Yatra का आयोजन भी किया जाता है। हालांकि, पुरी की मुख्य रथयात्रा की अपनी अलग धार्मिक मान्यता और परंपरागत व्यवस्था है। पुरी राजा ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अलग-अलग समय पर रथयात्रा आयोजित होने से भगवान जगन्नाथ की परंपरा को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि इस विषय पर ध्यान दिया जाए और सदियों से चली आ रही धार्मिक व्यवस्था को सुरक्षित रखा जाए। President और PM को लिखा पत्र, परंपरा बचाने की अपील पुरी राजा की ओर से लिखे गए पत्र में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से अनुरोध किया गया है कि भगवान जगन्नाथ से जुड़ी परंपराओं की गरिमा बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि पुरी की रथयात्रा केवल ओडिशा की पहचान नहीं है, बल्कि देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों भक्तों की भावनाओं से जुड़ी हुई है। ऐसे में इससे जुड़े किसी भी बदलाव को संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए। Jagannath Rath Yatra का है ऐतिहासिक महत्व पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा भारत के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक आयोजनों में से एक है। हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए पुरी पहुंचते हैं। इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर की ओर जाते हैं। सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जाती है। आस्था और Tradition के बीच बढ़ी बहस Jagannath Puri Rath Yatra से जुड़ा यह विवाद एक बार फिर इस बात को सामने लाता है कि धार्मिक परंपराओं और आधुनिक आयोजनों के बीच संतुलन कितना जरूरी है। जहां ISKCON दुनिया भर में भगवान जगन्नाथ और कृष्ण भक्ति का प्रचार करता है, वहीं पुरी की पारंपरिक व्यवस्था से जुड़े लोग मूल परंपराओं और धार्मिक नियमों को बनाए रखने की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि सरकार और संबंधित पक्ष इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल, Jagannath Puri Rath Yatra Controversy ने धार्मिक और सामाजिक स्तर पर नई चर्चा शुरू कर दी है।
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Yogini Ekadashi

Yogini Ekadashi 2026: दीपदान के ये 5 आसान उपाय, घर में सुख-समृद्धि आने की है मान्यता

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है, लेकिन योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने वाली प्रमुख एकादशियों में गिना जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं तथा सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी की शाम घर के कुछ खास स्थानों पर दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और आर्थिक परेशानियां दूर होने की प्रार्थना की जाती है। अगर आप भी इस शुभ अवसर पर पूजा-पाठ कर रहे हैं, तो जानिए वे पांच स्थान जहां दीपक जलाना शुभ माना जाता है। Yogini Ekadashi 2026 पर इन 5 जगहों पर जरूर जलाएं दीपक 1. मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं घर का मुख्य द्वार सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि योगिनी एकादशी की शाम यहां घी या तिल के तेल का दीपक जलाने से घर में शुभता का आगमन होता है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। 2. तुलसी के पौधे के सामने तुलसी का पौधा भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय माना गया है। योगिनी एकादशी के दिन शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाकर पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आने की मान्यता है। कई परिवार इस दिन तुलसी की परिक्रमा भी करते हैं। 3. पूजा घर में भगवान विष्णु के समक्ष पूजा स्थल पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाना विशेष फलदायी माना जाता है। पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। 4. रसोईघर में वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोईघर माता अन्नपूर्णा का स्थान माना जाता है। यहां दीपक जलाने की परंपरा को अन्न और धन की वृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इससे घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। 5. ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) घर का उत्तर-पूर्व भाग यानी ईशान कोण सबसे पवित्र दिशा मानी जाती है। इस स्थान पर दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार के लिए सुख, शांति एवं आर्थिक उन्नति की कामना की जाती है। योगिनी एकादशी पर पूजा करते समय रखें इन बातों का ध्यान दान-पुण्य का भी है विशेष महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी के दिन अन्न, वस्त्र, फल, जल और दक्षिणा का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन किए गए दान और सेवा का विशेष फल प्राप्त होता है तथा जीवन की कई बाधाएं दूर होने की कामना की जाती है। क्या सच में दूर होती है आर्थिक तंगी? धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में योगिनी एकादशी पर दीपदान, व्रत और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। हालांकि, इन मान्यताओं का आधार आस्था है। इसे धार्मिक विश्वास के रूप में ही देखा जाना चाहिए। नियमित पूजा, सकारात्मक सोच, मेहनत और सही आर्थिक योजना के साथ जीवन में सफलता के अवसर और भी मजबूत हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Adhik Maas

Adhik Maas 2026: भक्ति का महीना शुरू, जानें शुभ मंत्र और धार्मिक महत्व

आज से हिंदू पंचांग का सबसे पवित्र और खास समय Adhik Maas 2026 (Purushottam Maas) शुरू हो गया है। इसे सामान्य भाषा में मलमास भी कहा जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह कोई अशुभ समय नहीं, बल्कि भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत शुभ महीना माना जाता है। इस महीने को “पुरुषोत्तम मास” इसलिए कहा जाता है क्योंकि स्वयं भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम देकर सम्मानित किया था। Adhik Maas 2026 क्या है और क्यों खास माना जाता है? अधिकमास हर 2–3 साल में आता है, जब चंद्र और सौर कैलेंडर के बीच अंतर को संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जब किसी देवता ने इस अतिरिक्त महीने को स्वीकार नहीं किया, तब भगवान विष्णु ने इसे अपनाकर इसे भक्ति और साधना का सर्वोच्च समय बना दिया। यही कारण है कि इस महीने में भौतिक कार्यों से ज्यादा आध्यात्मिक गतिविधियों को महत्व दिया जाता है। Purushottam Maas में क्या करना चाहिए (Do’s) इस पूरे महीने में किए गए अच्छे कर्म कई गुना फल देने वाले माने जाते हैं: अधिकमास में क्या नहीं करना चाहिए (Don’ts) इस पवित्र अवधि में कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है: Adhik Maas 2026 के शक्तिशाली मंत्र इस महीने में मंत्र जप का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इससे मन शांत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। 1. विष्णु मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”रोज 108 बार जप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। 2. महामंत्र हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरेहरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे 3. शांति मंत्र “शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्…” Adhik Maas 2026 का महत्व (Human Touch) आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में यह महीना एक तरह से “pause” लेने का मौका देता है। भागदौड़ के बीच कुछ समय अपने मन, विचार और आध्यात्म से जुड़ने का अवसर मिलता है। कई लोग इस महीने में व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ बढ़ाते हैं और अपने जीवन में सरलता लाने की कोशिश करते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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वट सावित्री

वट सावित्री 2026: सुहागिन महिलाओं में दिखी आस्था, मंदिरों में उमड़ी भीड़

ज्येष्ठ अमावस्या के मौके पर शनिवार को देशभर में वट सावित्री व्रत श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिरों और बरगद के पेड़ों के पास सुहागिन महिलाओं की भीड़ देखने को मिली। महिलाओं ने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा की। इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना की, बरगद के पेड़ के चारों ओर धागा बांधा और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी। कई जगहों पर सामूहिक पूजा का आयोजन भी किया गया, जहां महिलाओं ने पूरे विधि-विधान से व्रत किया। क्यों खास माना जाता है Vat Savitri Vrat? हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत को सुहाग और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार माता सावित्री ने अपने तप, प्रेम और दृढ़ निश्चय से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि बरगद का पेड़ त्रिदेवों का स्वरूप होता है। इसकी जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व होता है। परिक्रमा के समय बोलें ये शुभ मंत्र बरगद के पेड़ की परिक्रमा करते समय महिलाएं इस मंत्र का जाप करती हैं— “वट वृक्ष त्वं देववृक्षः त्वं च विष्णुस्वरूपधृक्।पति आयुः प्रदेहि त्वं नमस्ते वटवृक्षाय॥” मान्यता है कि श्रद्धा से इस मंत्र का जाप करने पर वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। ऐसे की जाती है वट सावित्री की पूजा बाजारों में भी दिखी रौनक वट सावित्री व्रत को लेकर पूजा सामग्री, फल, मिठाई और सजावटी सामान की दुकानों पर भी अच्छी भीड़ देखने को मिली। महिलाओं ने पूजा के लिए विशेष रूप से लाल और पीले रंग की सामग्री खरीदी। कई जगहों पर बरगद के पेड़ों को फूलों और रंगोली से सजाया गया। परिवार और रिश्तों से जुड़ा त्योहार वट सावित्री व्रत सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास, प्रेम और समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है। बदलते दौर में भी यह पर्व भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को मजबूती से जोड़कर रखे हुए है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया 2026 Gold नहीं, ये 1 दान दिलाएगा सुख-समृद्धि और Good Luck

अक्षय तृतीया का दिन हिंदू धर्म में बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया हर अच्छा काम—चाहे वो पूजा हो, दान हो या नई शुरुआत—उसका फल कभी खत्म नहीं होता। यही वजह है कि लोग इस दिन को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के मौके के रूप में देखते हैं। इस साल भी अक्षय तृतीया को लेकर लोगों में खास उत्साह है। जहां एक तरफ बाजारों में सोना-चांदी खरीदने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान-पुण्य करने का महत्व भी काफी बढ़ जाता है। क्यों खास है “Ann Daan”? प्रसिद्ध संत Premanand Maharaj का कहना है कि अगर आप अक्षय तृतीया पर सिर्फ एक काम करना चाहते हैं, तो वो है अन्न दान। उनके अनुसार, जरूरतमंद को भोजन या अनाज देना सबसे बड़ा पुण्य है। उनका मानना है कि जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से गेहूं, चावल या दाल का दान करता है, उसके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। ये सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि इंसानियत का सबसे सरल और असरदार तरीका भी है। कैसे करें ये आसान उपाय? अक्षय तृतीया के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा करें। इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार अन्न का दान करें। आप चाहें तो किसी गरीब परिवार को राशन दे सकते हैं या किसी भूखे व्यक्ति को भोजन करा सकते हैं। ध्यान रखने वाली बात ये है कि दान दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सच्चे मन से किया जाए—तभी उसका सही फल मिलता है। सिर्फ सोना खरीदना ही नहीं, ये भी करें अक्सर लोग अक्षय तृतीया को सिर्फ गोल्ड खरीदने से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसका असली महत्व दान और अच्छे कर्मों में छिपा है। इस दिन: दिल से किया छोटा काम, बड़ा असर अक्षय तृतीया हमें ये सिखाती है कि छोटे-छोटे अच्छे काम भी जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। अगर आप इस दिन किसी की मदद करते हैं, तो उसका असर सिर्फ सामने वाले पर ही नहीं, बल्कि आपके जीवन पर भी पड़ता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ram Navami

Ram Navami 2026 सही Date,शुभ मुहूर्त और Puja Samagri पूरी जानकारी

राम नवमी (Ram Navami) हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार है। यह दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और भक्त इस दिन व्रत, पूजा और आरती करके भगवान की कृपा पाने का प्रयास करते हैं। साल 2026 में राम नवमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच थोड़ी कन्फ्यूजन है कि यह 26 मार्च को है या 27 मार्च को। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं। Ram Navami 2026 Date: 26 या 27 मार्च? वर्ष 2026 में राम नवमी 26 मार्च, गुरुवार को पड़ रही है। कई लोग सोचते हैं कि 27 मार्च को मनाना चाहिए, लेकिन हिंदू पंचांग के अनुसार जिस दिन मध्याह्न (दोपहर) में नवमी तिथि आती है, उसी दिन राम नवमी मनाई जाती है, क्योंकि भगवान श्रीराम का जन्म दोपहर में हुआ था। इस कारण 26 मार्च ही मुख्य और शुभ दिन माना जाता है। Shubh Muhurat for Ram Navami 2026 राम नवमी पूजा का सबसे महत्वपूर्ण समय मध्याह्न होता है। इस समय भगवान श्रीराम की पूजा और अभिषेक करना सबसे शुभ माना जाता है। Ram Navami Puja Samagri List राम नवमी की पूजा में निम्न सामग्रियों की आवश्यकता होती है। इन्हें पहले से तैयार करना शुभ माना जाता है: मुख्य सामग्री Ram Navami Puja Vidhi (संक्षेप में) हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शैलपुत्री

चैत्र नवरात्रि 2026 Day 1 शैलपुत्री माता की आराधना, व्रत और शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि 2026 का पहला दिन 12 मार्च को मनाया जाएगा। यह नवरात्रि वसंत ऋतु के आगमन और माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का शुभ समय है। हर दिन माँ के अलग रूप की पूजा की जाती है, और पहले दिन शैलपुत्री माता की उपासना होती है। शैलपुत्री माता – पहला दिन का महत्व ‘शैलपुत्री’ का अर्थ है “पर्वत की कन्या”। माता शैलपुत्री भगवान शिव और पार्वती की पुत्री हैं। उनके वाहन बैल हैं और हाथ में त्रिशूल और कमल धारण है। शैलपुत्री माता धैर्य, साहस और मानसिक स्थिरता का प्रतीक हैं। उनके आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का विकास होता है। शैलपुत्री माता का पूजन और मंत्र व्रत और अनुष्ठान शैलपुत्री माता के दिन विशेष सुझाव हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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चैत्र नवरात्रि 2026

चैत्र नवरात्रि 2026 माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा और व्रत नियम

जानें चैत्र नवरात्रि 2026 की तिथियाँ, महत्व, व्रत नियम और पूजा विधियाँ। यह पर्व सिर्फ भक्ति और श्रद्धा का समय नहीं है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, समर्पण और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक भी माना जाता है। चैत्र नवरात्रि 2026 की तारीखें और महत्त्व चैत्र नवरात्रि को वसंत ऋतु में मनाया जाता है और यह नया हिंदू संवत्सर शुरू करने का प्रतीक है। नवरात्रि के अंतिम दिन राम नवमी भी मनाई जाती है, जो भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का शुभ अवसर है। माँ दुर्गा के नौ रूप और उनके लाभ हर दिन नवरात्रि में माँ दुर्गा के अलग-अलग रूप की पूजा की जाती है, जिनसे विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। दिन देवी का रूप प्रमुख गुण 1 शैलपुत्री शक्ति और मूल तत्व 2 ब्रह्मचारिणी तप और समर्पण 3 चंद्रघंटा साहस और धैर्य 4 कुश्मांडा आनंद और सृजन शक्ति 5 स्कंदमाता मातृत्व और प्रेम 6 कात्यायनी वीरता और साहस 7 कालरात्रि भय नाश 8 महागौरी पवित्रता और शांति 9 सिद्धिदात्री सिद्धि और सफलता घट स्थापना और पूजा विधि नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है। घर या मंदिर में कलश स्थापित कर माँ दुर्गा के स्वागत के लिए मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभता आती है। व्रत नियम और पूजा के टिप्स इन नियमों का पालन करने से न केवल धार्मिक पुण्य मिलता है, बल्कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। समाज में नवरात्रि का महत्व नवरात्रि के अवसर पर धार्मिक स्थलों पर विशेष सुरक्षा और भीड़-प्रबंधन की तैयारी की जाती है। श्रद्धालुओं की सुविधा और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन अतिरिक्त कदम उठाता है। नवरात्रि का संदेश नवरात्रि केवल पूजा और उत्सव नहीं है, बल्कि यह शक्ति, समर्पण और आत्म-नवीनीकरण का पर्व है। माँ दुर्गा के आदर्शों — धैर्य, करुणा, वीरता और शक्ति — को अपनाकर जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Holika Dahan आज, मुहूर्त रात 12 बजे तक: जानिए पूजा विधि और होली की पौराणिक कहानी

Holika Dahan आज, मुहूर्त रात 12 बजे तक: जानिए पूजा विधि और होली की पौराणिक कहानी

आज देशभर में Holika Dahan मनाया जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शुभ मुहूर्त रात 12 बजे तक है। इस दौरान विधि-विधान से पूजा करने और अग्नि की परिक्रमा करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इसी के साथ रंगों के त्योहार होली की शुरुआत होती है। क्या है होलिका दहन की कहानी? पौराणिक कथा के अनुसार असुर राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने की कई कोशिशें कीं। जब वह सफल नहीं हुआ तो उसने अपनी बहन होलिका की मदद ली, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था। होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई। तभी से होलिका दहन बुराई के अंत और सच्चाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। होलिका दहन की पूजा विधि मान्यता है कि होलिका की अग्नि में पुरानी नकारात्मक ऊर्जा जलकर खत्म हो जाती है और घर में सकारात्मकता आती है। डिजिटल दौर में होली की खास झलक अब होली का जश्न सिर्फ मोहल्लों तक सीमित नहीं रहा। लोग सोशल मीडिया पर डिजिटल इफेक्ट्स, एआर फिल्टर्स और खास फोटो एडिटिंग के जरिए होली की रंगीन यादें साझा कर रहे हैं। कई लोग होलिका दहन की लाइव स्ट्रीमिंग भी कर रहे हैं, ताकि दूर बैठे रिश्तेदार भी इस परंपरा से जुड़ सकें। सामाजिक संदेश भी देता है त्योहार होलिका दहन हमें यह सीख देता है कि अहंकार और अन्याय का अंत निश्चित है। साथ ही यह पर्व हमें एकजुटता, भाईचारे और प्रेम का संदेश देता है। इस बार होली पर प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें, पानी की बचत करें और सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाएं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Iran

Middle East Crisis: Iran पर सबसे बड़ा Attack फिलहाल टला, Trump ने सेना को दिए नए आदेश

मध्य पूर्व (Middle East) में लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच अमेरिका ने फिलहाल ईरान (Iran) के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान को रोक दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने सेना को व्यापक सैन्य कार्रवाई की तैयारियां रोकने का निर्देश दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) ने चेतावनी दी कि देश के पास Patriot Interceptor Missiles का भंडार तेजी से कम हो रहा है। रक्षा अधिकारियों का मानना है कि यदि इस समय बड़े पैमाने पर हमला किया जाता है तो अमेरिका की अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में ट्रम्प प्रशासन ने सैन्य कार्रवाई के बजाय फिलहाल रणनीतिक संयम अपनाने का फैसला किया है। क्या था अमेरिका का प्लान? अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस और पेंटागन ईरान के कुछ अहम सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर बड़े हमले की योजना पर काम कर रहे थे। माना जा रहा था कि यह अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई हो सकती थी। हालांकि, अंतिम समीक्षा के दौरान रक्षा अधिकारियों ने राष्ट्रपति ट्रम्प को बताया कि हाल के संघर्षों में बड़ी संख्या में Patriot मिसाइलों का इस्तेमाल किया जा चुका है। ऐसे में नए सैन्य अभियान से अमेरिकी रक्षा क्षमता पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसके बाद हमले की योजना फिलहाल रोक दी गई। Patriot Missile की कमी क्यों बनी चिंता? Patriot एयर डिफेंस सिस्टम अमेरिका की सबसे भरोसेमंद रक्षा प्रणालियों में से एक है। इसका उपयोग बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन हमलों को हवा में ही नष्ट करने के लिए किया जाता है। पिछले कुछ महीनों में मध्य पूर्व में बढ़े तनाव और लगातार सैन्य अभियानों के कारण इन इंटरसेप्टर मिसाइलों की खपत काफी बढ़ गई है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि नए मिसाइलों के उत्पादन में समय लगता है, इसलिए मौजूदा स्टॉक को सुरक्षित रखना भी अमेरिका की प्राथमिकता बन गया है। हमला टला, लेकिन खतरा नहीं अमेरिकी प्रशासन ने साफ किया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्प पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। यदि भविष्य में हालात बिगड़ते हैं या अमेरिका और उसके सहयोगियों पर किसी तरह का बड़ा हमला होता है, तो सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू की जा सकती है। फिलहाल अमेरिका स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और सैन्य तैयारियों के साथ-साथ कूटनीतिक विकल्पों पर भी काम कर रहा है। Middle East में क्यों बढ़ रही है चिंता? ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। हाल के महीनों में क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाओं ने सुरक्षा चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। इसके चलते खाड़ी देशों, इजरायल और अन्य सहयोगी देशों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। क्या आगे बदल सकती है रणनीति? रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प प्रशासन का यह फैसला स्थायी नहीं है। यदि Patriot मिसाइलों का उत्पादन बढ़ता है या सुरक्षा हालात बदलते हैं, तो अमेरिका अपनी रणनीति में बदलाव कर सकता है। फिलहाल अमेरिका का ध्यान अपनी रक्षा क्षमता बनाए रखने, सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्र में तनाव को नियंत्रित रखने पर है। आने वाले दिनों में ईरान की प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय घटनाक्रम तय करेंगे कि दोनों देशों के रिश्ते किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kargil Vijay Diwas

Kargil Vijay Diwas 2026: वीर जवानों के बलिदान को देश का नमन, PM Modi, Rahul Gandhi समेत नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

Kargil Vijay Diwas 2026 के अवसर पर पूरा देश उन वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दे रहा है, जिन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में अपनी जान की परवाह किए बिना भारत की सीमाओं की रक्षा की। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई राजनीतिक नेताओं ने कारगिल के शहीदों को नमन करते हुए उनके अदम्य साहस और बलिदान को याद किया। देशभर में आयोजित कार्यक्रमों, स्मारकों और सोशल मीडिया के जरिए नेताओं ने एक स्वर में कहा कि कारगिल के वीर जवानों का त्याग आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा। PM Modi ने कहा- देश हमेशा वीर सैनिकों का ऋणी रहेगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कारगिल विजय दिवस पर अपने संदेश में कहा कि कारगिल के वीरों का शौर्य, साहस और बलिदान हर भारतीय के दिल में हमेशा जीवित रहेगा। उन्होंने कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों के प्रति पूरा देश सदैव कृतज्ञ रहेगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय सेना का पराक्रम हर नागरिक के लिए गर्व का विषय है और देश की सुरक्षा के लिए उनका समर्पण अतुलनीय है। Rahul Gandhi ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कारगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारत के वीर जवानों ने कठिन परिस्थितियों में अद्भुत साहस का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि उनका बलिदान केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि हर भारतीय के लिए प्रेरणा है। राहुल गांधी ने कहा कि देश हमेशा अपने सैनिकों के त्याग और सेवा का सम्मान करता रहेगा। Rajnath Singh बोले- भारतीय सेना हर चुनौती के लिए तैयार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर भारतीय सेना की वीरता को सलाम करते हुए कहा कि देश की सशस्त्र सेनाएं हर परिस्थिति में राष्ट्र की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि कारगिल के नायकों का बलिदान भारतीय सेना की बहादुरी और समर्पण का सबसे बड़ा उदाहरण है। रक्षा मंत्री ने शहीदों के परिवारों के प्रति भी सम्मान व्यक्त किया। कई नेताओं ने साझा किए श्रद्धांजलि संदेश प्रधानमंत्री, विपक्ष और रक्षा मंत्री के अलावा कई केंद्रीय मंत्रियों, राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी कारगिल विजय दिवस पर वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी। सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेशों में नेताओं ने कहा कि कारगिल के शहीदों का बलिदान भारत के इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। उन्होंने युवाओं से देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्र सेवा की भावना अपनाने की भी अपील की। क्यों मनाया जाता है Kargil Vijay Diwas? हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन विजय’ के तहत कारगिल की दुर्गम चोटियों से पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़कर ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। करीब दो महीने तक चले इस युद्ध में भारत के 527 वीर सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी वीरता और शौर्य की याद में हर वर्ष देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। देश के लिए प्रेरणा है कारगिल के वीरों का बलिदान कारगिल विजय दिवस केवल एक ऐतिहासिक जीत का दिन नहीं, बल्कि उन सैनिकों के साहस, समर्पण और राष्ट्रभक्ति को याद करने का अवसर भी है, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। आज जब पूरा देश कारगिल के शहीदों को नमन कर रहा है, तब एक बार फिर यह संदेश गूंज रहा है कि भारत अपने वीर जवानों के बलिदान को कभी नहीं भूल सकता। यही वजह है कि कारगिल विजय दिवस हर भारतीय के लिए गर्व, सम्मान और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बन चुका है. हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Pralhad Joshi

New Education Minister B.A. पास हैं Pralhad Joshi, जानिए क्यों सौंपी गई Education Ministry की जिम्मेदारी

देश की शिक्षा व्यवस्था इन दिनों बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद, छात्रों के आंदोलन और शिक्षा सुधार को लेकर बढ़ती मांग के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। वरिष्ठ भाजपा नेता प्रह्लाद जोशी (Pralhad Joshi) को देश का नया केंद्रीय शिक्षा मंत्री (New Education Minister) बनाया गया है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंपी गई है। ऐसे में लोगों के मन में कई सवाल हैं—आखिर नए शिक्षा मंत्री कितने पढ़े-लिखे हैं? उनका राजनीतिक अनुभव कितना है? और क्या वे शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल कर पाएंगे? आइए जानते हैं। कौन हैं Pralhad Joshi? Pralhad Joshi भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। उनका राजनीतिक सफर संगठन से शुरू होकर संसद और केंद्र सरकार तक पहुंचा है। वे कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार कई बार सांसद चुने जा चुके हैं, जो उनकी मजबूत जनाधार और राजनीतिक स्वीकार्यता को दर्शाता है। केंद्र सरकार में वे पहले भी कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। संसदीय कार्य, कोयला, खान, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा जैसे मंत्रालयों में उनके काम को प्रशासनिक अनुभव का मजबूत आधार माना जाता है। Education Qualification: कितने पढ़े-लिखे हैं नए शिक्षा मंत्री? अगर उनकी पढ़ाई की बात करें तो प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक विश्वविद्यालय (Karnataka University), धारवाड़ से संबद्ध श्री कदासिद्धेश्वर आर्ट्स कॉलेज से Bachelor of Arts (B.A.) की डिग्री हासिल की है। कॉलेज शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन को चुना और राजनीति में सक्रिय हो गए। पिछले तीन दशकों में उन्होंने संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। ऐसे समय मिली शिक्षा मंत्रालय की कमान प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब देश में परीक्षा प्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों ने पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग की। कई शहरों में प्रदर्शन हुए और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई। इन्हीं परिस्थितियों के बीच सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में बदलाव करते हुए अनुभवी नेतृत्व पर भरोसा जताया है। New Education Minister के सामने क्या होंगी सबसे बड़ी चुनौतियां? परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सुरक्षा बढ़ाना और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। National Education Policy (NEP) को गति देना नई शिक्षा नीति को सभी राज्यों में प्रभावी ढंग से लागू करना और उसकी प्रगति की निगरानी करना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी। छात्रों का भरोसा दोबारा जीतना हालिया घटनाओं के बाद छात्रों और अभिभावकों का विश्वास प्रभावित हुआ है। नई नीतियों और पारदर्शी व्यवस्था के जरिए इस भरोसे को मजबूत करना जरूरी होगा। डिजिटल और रोजगार आधारित शिक्षा उच्च शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट, रिसर्च और डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देकर शिक्षा को रोजगार से जोड़ना भी मंत्रालय के प्रमुख लक्ष्यों में शामिल रहेगा। क्या बदल सकती है शिक्षा व्यवस्था? विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मंत्री बदलने से बदलाव नहीं आएगा। असली परीक्षा नई टीम के फैसलों और उनके क्रियान्वयन की होगी। यदि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ती है, छात्रों की शिकायतों का समय पर समाधान होता है और शिक्षा नीति को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो इसका सीधा लाभ देश के करोड़ों विद्यार्थियों को मिलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Siwan

Siwan Student Protest Update: SP घायल, 30 पुलिसकर्मी जख्मी; Firing के आरोपों से बढ़ा तनाव

बिहार के सिवान (Siwan) में छात्रों का प्रदर्शन शनिवार को अचानक हिंसक हो गया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में सिवान के पुलिस अधीक्षक (SP) सहित करीब 30 पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने जिले में सुरक्षा बढ़ा दी और अफवाहों को रोकने के लिए शाम तक इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं। इस बीच प्रदर्शन के दौरान खुलेआम फायरिंग होने के आरोप भी सामने आए हैं, जिनकी जांच जारी है। छात्रों का प्रदर्शन कैसे बदला हिंसा में? जानकारी के मुताबिक, छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे थे। शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कुछ समय बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद बढ़ गया। देखते ही देखते पथराव शुरू हो गया और माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसी दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटनास्थल पर कुछ देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। SP समेत 30 पुलिसकर्मी घायल हिंसा में सिवान के SP सहित लगभग 30 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। पुलिस के कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर तैनात कर दिया गया है। Firing के आरोप, वीडियो की जांच शुरू घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल हुए, जिनमें फायरिंग जैसी आवाजें सुनाई देने का दावा किया जा रहा है। कुछ लोगों ने प्रदर्शन के दौरान खुलेआम गोली चलने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन दावों की सत्यता की जांच की जा रही है। पुलिस वायरल वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है। Internet Service बंद करने का फैसला तनावपूर्ण माहौल और सोशल मीडिया पर अफवाहों के प्रसार की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने शाम तक मोबाइल इंटरनेट सेवा अस्थायी रूप से बंद कर दी। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने और गलत सूचनाओं को फैलने से रोकने के लिए उठाया गया है। उपद्रवियों की पहचान में जुटी पुलिस पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि हिंसा फैलाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सियासत भी हुई तेज सिवान की इस घटना के बाद बिहार की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। विपक्ष ने कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार का कहना है कि स्थिति अब नियंत्रण में है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल क्या है स्थिति? प्रशासन के अनुसार, जिले में स्थिति पहले से बेहतर है, लेकिन एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है। पुलिस लगातार गश्त कर रही है और लोगों से शांति बनाए रखने तथा किसी भी अपुष्ट खबर पर विश्वास न करने की अपील की गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Abhijeet Dipke

Education Politics: Dharmendra Pradhan Resignation के बाद Abhijeet Dipke ने बताया आंदोलन का अगला कदम

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर छात्र आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था पर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के संस्थापक अभिजीत दीपके (Abhijeet Dipke) ने इस पूरे घटनाक्रम को आंदोलन की पहली जीत बताया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और छात्रों के अधिकार, परीक्षा प्रणाली में सुधार और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। Abhijeet Dipke के इस बयान के बाद शिक्षा जगत और राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है। छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबे समय से उठ रही आवाज अब एक बड़े आंदोलन का रूप लेती नजर आ रही है। Dharmendra Pradhan Resignation पर Abhijeet Dipke का बड़ा बयान धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के बाद Abhijeet Dipke ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य केवल किसी एक व्यक्ति के इस्तीफे तक सीमित नहीं था। उनका कहना है कि असली मुद्दा शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षाओं में पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि “अभी तो ये शुरुआत हुई है।” उनके अनुसार आने वाले समय में छात्रों से जुड़े कई अन्य मुद्दों को लेकर भी आवाज उठाई जाएगी। NEET Controversy और Student Protest बना बड़ा मुद्दा NEET परीक्षा और कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्रों के बीच नाराजगी देखने को मिली थी। कई छात्र संगठनों और युवाओं ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है, क्योंकि लाखों छात्रों का भविष्य इन परीक्षाओं पर निर्भर करता है। Jantar Mantar Protest से तेज हुई थी मांग धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन किए गए। CJP और अन्य प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और छात्रों की समस्याओं के समाधान की मांग रखी। आंदोलन के दौरान युवाओं ने परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और भविष्य की परीक्षाओं को बेहतर तरीके से आयोजित करने की जरूरत पर जोर दिया। “लड़ाई अभी बाकी है” — युवाओं को लेकर दीपके का संदेश अभिजीत दीपके का कहना है कि शिक्षा से जुड़े मुद्दे किसी एक घटना तक सीमित नहीं हैं। उनका फोकस युवाओं की आवाज को मजबूत करना और शिक्षा क्षेत्र में स्थायी बदलाव की मांग करना है। उनके बयान से साफ है कि आंदोलनकारी अब आगे की रणनीति बनाने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच किस तरह की बातचीत होती है। Education Reform को लेकर बढ़ी बहस धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद एक बार फिर देश में शिक्षा सुधार, परीक्षा सुरक्षा और छात्रों के अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। युवाओं का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने के लिए मजबूत नियम, पारदर्शी प्रक्रिया और समय पर समाधान जरूरी हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले समय में शिक्षा क्षेत्र को लेकर क्या बड़े फैसले सामने आते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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