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अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया 2026 Gold नहीं, ये 1 दान दिलाएगा सुख-समृद्धि और Good Luck

अक्षय तृतीया का दिन हिंदू धर्म में बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया हर अच्छा काम—चाहे वो पूजा हो, दान हो या नई शुरुआत—उसका फल कभी खत्म नहीं होता। यही वजह है कि लोग इस दिन को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के मौके के रूप में देखते हैं। इस साल भी अक्षय तृतीया को लेकर लोगों में खास उत्साह है। जहां एक तरफ बाजारों में सोना-चांदी खरीदने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान-पुण्य करने का महत्व भी काफी बढ़ जाता है। क्यों खास है “Ann Daan”? प्रसिद्ध संत Premanand Maharaj का कहना है कि अगर आप अक्षय तृतीया पर सिर्फ एक काम करना चाहते हैं, तो वो है अन्न दान। उनके अनुसार, जरूरतमंद को भोजन या अनाज देना सबसे बड़ा पुण्य है। उनका मानना है कि जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से गेहूं, चावल या दाल का दान करता है, उसके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। ये सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि इंसानियत का सबसे सरल और असरदार तरीका भी है। कैसे करें ये आसान उपाय? अक्षय तृतीया के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा करें। इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार अन्न का दान करें। आप चाहें तो किसी गरीब परिवार को राशन दे सकते हैं या किसी भूखे व्यक्ति को भोजन करा सकते हैं। ध्यान रखने वाली बात ये है कि दान दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सच्चे मन से किया जाए—तभी उसका सही फल मिलता है। सिर्फ सोना खरीदना ही नहीं, ये भी करें अक्सर लोग अक्षय तृतीया को सिर्फ गोल्ड खरीदने से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसका असली महत्व दान और अच्छे कर्मों में छिपा है। इस दिन: दिल से किया छोटा काम, बड़ा असर अक्षय तृतीया हमें ये सिखाती है कि छोटे-छोटे अच्छे काम भी जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। अगर आप इस दिन किसी की मदद करते हैं, तो उसका असर सिर्फ सामने वाले पर ही नहीं, बल्कि आपके जीवन पर भी पड़ता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ram Navami

Ram Navami 2026 सही Date,शुभ मुहूर्त और Puja Samagri पूरी जानकारी

राम नवमी (Ram Navami) हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार है। यह दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और भक्त इस दिन व्रत, पूजा और आरती करके भगवान की कृपा पाने का प्रयास करते हैं। साल 2026 में राम नवमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच थोड़ी कन्फ्यूजन है कि यह 26 मार्च को है या 27 मार्च को। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं। Ram Navami 2026 Date: 26 या 27 मार्च? वर्ष 2026 में राम नवमी 26 मार्च, गुरुवार को पड़ रही है। कई लोग सोचते हैं कि 27 मार्च को मनाना चाहिए, लेकिन हिंदू पंचांग के अनुसार जिस दिन मध्याह्न (दोपहर) में नवमी तिथि आती है, उसी दिन राम नवमी मनाई जाती है, क्योंकि भगवान श्रीराम का जन्म दोपहर में हुआ था। इस कारण 26 मार्च ही मुख्य और शुभ दिन माना जाता है। Shubh Muhurat for Ram Navami 2026 राम नवमी पूजा का सबसे महत्वपूर्ण समय मध्याह्न होता है। इस समय भगवान श्रीराम की पूजा और अभिषेक करना सबसे शुभ माना जाता है। Ram Navami Puja Samagri List राम नवमी की पूजा में निम्न सामग्रियों की आवश्यकता होती है। इन्हें पहले से तैयार करना शुभ माना जाता है: मुख्य सामग्री Ram Navami Puja Vidhi (संक्षेप में) हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शैलपुत्री

चैत्र नवरात्रि 2026 Day 1 शैलपुत्री माता की आराधना, व्रत और शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि 2026 का पहला दिन 12 मार्च को मनाया जाएगा। यह नवरात्रि वसंत ऋतु के आगमन और माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का शुभ समय है। हर दिन माँ के अलग रूप की पूजा की जाती है, और पहले दिन शैलपुत्री माता की उपासना होती है। शैलपुत्री माता – पहला दिन का महत्व ‘शैलपुत्री’ का अर्थ है “पर्वत की कन्या”। माता शैलपुत्री भगवान शिव और पार्वती की पुत्री हैं। उनके वाहन बैल हैं और हाथ में त्रिशूल और कमल धारण है। शैलपुत्री माता धैर्य, साहस और मानसिक स्थिरता का प्रतीक हैं। उनके आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का विकास होता है। शैलपुत्री माता का पूजन और मंत्र व्रत और अनुष्ठान शैलपुत्री माता के दिन विशेष सुझाव हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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चैत्र नवरात्रि 2026

चैत्र नवरात्रि 2026 माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा और व्रत नियम

जानें चैत्र नवरात्रि 2026 की तिथियाँ, महत्व, व्रत नियम और पूजा विधियाँ। यह पर्व सिर्फ भक्ति और श्रद्धा का समय नहीं है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, समर्पण और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक भी माना जाता है। चैत्र नवरात्रि 2026 की तारीखें और महत्त्व चैत्र नवरात्रि को वसंत ऋतु में मनाया जाता है और यह नया हिंदू संवत्सर शुरू करने का प्रतीक है। नवरात्रि के अंतिम दिन राम नवमी भी मनाई जाती है, जो भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का शुभ अवसर है। माँ दुर्गा के नौ रूप और उनके लाभ हर दिन नवरात्रि में माँ दुर्गा के अलग-अलग रूप की पूजा की जाती है, जिनसे विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। दिन देवी का रूप प्रमुख गुण 1 शैलपुत्री शक्ति और मूल तत्व 2 ब्रह्मचारिणी तप और समर्पण 3 चंद्रघंटा साहस और धैर्य 4 कुश्मांडा आनंद और सृजन शक्ति 5 स्कंदमाता मातृत्व और प्रेम 6 कात्यायनी वीरता और साहस 7 कालरात्रि भय नाश 8 महागौरी पवित्रता और शांति 9 सिद्धिदात्री सिद्धि और सफलता घट स्थापना और पूजा विधि नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है। घर या मंदिर में कलश स्थापित कर माँ दुर्गा के स्वागत के लिए मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभता आती है। व्रत नियम और पूजा के टिप्स इन नियमों का पालन करने से न केवल धार्मिक पुण्य मिलता है, बल्कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। समाज में नवरात्रि का महत्व नवरात्रि के अवसर पर धार्मिक स्थलों पर विशेष सुरक्षा और भीड़-प्रबंधन की तैयारी की जाती है। श्रद्धालुओं की सुविधा और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन अतिरिक्त कदम उठाता है। नवरात्रि का संदेश नवरात्रि केवल पूजा और उत्सव नहीं है, बल्कि यह शक्ति, समर्पण और आत्म-नवीनीकरण का पर्व है। माँ दुर्गा के आदर्शों — धैर्य, करुणा, वीरता और शक्ति — को अपनाकर जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Holika Dahan आज, मुहूर्त रात 12 बजे तक: जानिए पूजा विधि और होली की पौराणिक कहानी

Holika Dahan आज, मुहूर्त रात 12 बजे तक: जानिए पूजा विधि और होली की पौराणिक कहानी

आज देशभर में Holika Dahan मनाया जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शुभ मुहूर्त रात 12 बजे तक है। इस दौरान विधि-विधान से पूजा करने और अग्नि की परिक्रमा करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इसी के साथ रंगों के त्योहार होली की शुरुआत होती है। क्या है होलिका दहन की कहानी? पौराणिक कथा के अनुसार असुर राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने की कई कोशिशें कीं। जब वह सफल नहीं हुआ तो उसने अपनी बहन होलिका की मदद ली, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था। होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई। तभी से होलिका दहन बुराई के अंत और सच्चाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। होलिका दहन की पूजा विधि मान्यता है कि होलिका की अग्नि में पुरानी नकारात्मक ऊर्जा जलकर खत्म हो जाती है और घर में सकारात्मकता आती है। डिजिटल दौर में होली की खास झलक अब होली का जश्न सिर्फ मोहल्लों तक सीमित नहीं रहा। लोग सोशल मीडिया पर डिजिटल इफेक्ट्स, एआर फिल्टर्स और खास फोटो एडिटिंग के जरिए होली की रंगीन यादें साझा कर रहे हैं। कई लोग होलिका दहन की लाइव स्ट्रीमिंग भी कर रहे हैं, ताकि दूर बैठे रिश्तेदार भी इस परंपरा से जुड़ सकें। सामाजिक संदेश भी देता है त्योहार होलिका दहन हमें यह सीख देता है कि अहंकार और अन्याय का अंत निश्चित है। साथ ही यह पर्व हमें एकजुटता, भाईचारे और प्रेम का संदेश देता है। इस बार होली पर प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें, पानी की बचत करें और सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाएं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मकर संक्रांति

मकर संक्रांति 2026 सूर्य की नई चाल से भारत में नई उम्मीदों की शुरुआत

भारत में मनाया जाने वाला मकर संक्रांति पर्व केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं बल्कि प्राकृतिक परिवर्तन, कृषि चक्र और सामाजिक एकता का प्रतीक है। मकर संक्रांति 2026 के दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, जिसे उत्तरायण कहा जाता है। यह समय ऊर्जा, स्वास्थ्य और सकारात्मक बदलाव का संकेत माना जाता है। मकर संक्रांति 2026 का खगोलीय महत्व मकर संक्रांति एकमात्र हिंदू पर्व है जो सूर्य की स्थिति पर आधारित होता है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह पृथ्वी के झुकाव और सूर्य की किरणों की दिशा में बदलाव को दर्शाता है। इस दिन से दिन बड़े होने लगते हैं और सर्दी धीरे-धीरे विदा लेने लगती है, जिससे जीवन में नई सक्रियता आती है। किसानों के लिए खुशहाली का पर्व भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए मकर संक्रांति बेहद महत्वपूर्ण है। यह नई फसल के आगमन का समय होता है। गेहूं, धान, गन्ना और तिलहन की फसल किसानों की मेहनत का प्रतिफल होती है।इसलिए मकर संक्रांति को कृषि उत्सव भी कहा जाता है। देशभर में अलग-अलग रूप मकर संक्रांति भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है। हर क्षेत्र की परंपरा अलग है, लेकिन भावना एक—सूर्य और अन्नदाता का सम्मान। पतंगों से सजा भारत का आकाश मकर संक्रांति की सबसे सुंदर पहचान है पतंगबाजी। हजारों रंग-बिरंगी पतंगें आसमान में उड़कर उम्मीद, स्वतंत्रता और नई ऊँचाइयों का प्रतीक बन जाती हैं। गुजरात, राजस्थान और मध्य भारत में पतंग उत्सव सामाजिक मेल-मिलाप का बड़ा माध्यम बनता है। तिल-गुड़ और सामाजिक सौहार्द इस दिन तिल और गुड़ से बनी मिठाइयाँ बाँटने की परंपरा है। इसका अर्थ है—“कठिन समय में भी रिश्तों में मिठास बनाए रखना।” यह पर्व समाज को जोड़ने और प्रेम व भाईचारे को मजबूत करने का संदेश देता है। मकर संक्रांति 2026 का संदेश जब देश डिजिटल युग और वैश्विक बदलावों की ओर बढ़ रहा है, तब मकर संक्रांति 2026 हमें अपनी जड़ों, प्रकृति और परिश्रम को न भूलने की सीख देता है। यह त्योहार सिखाता है कि असली विकास तभी संभव है जब हम परंपरा और प्रगति दोनों को साथ लेकर चलें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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देवउठनी एकादशी

देवउठनी एकादशी 2025 भगवान विष्णु जागेंगे नींद से, शुरू होंगे सभी शुभ काम

देवउठनी एकादशी 2025 (Dev Uthani Ekadashi 2025) हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं और इसी के साथ मांगलिक कार्यों की शुरुआत मानी जाती है। इसे प्रबोधिनी एकादशी या देव उठावनी एकादशी भी कहा जाता है। आइए जानते हैं इस दिन का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और तुलसी विवाह की पूरी जानकारी। देवउठनी एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त इस वर्ष देवउठनी एकादशी 1 नवंबर 2025 (शनिवार) को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त भगवान विष्णु की विशेष पूजा करते हैं और उनसे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। देवउठनी एकादशी का धार्मिक महत्व हिंदू मान्यता के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। इस चार माह की अवधि को चातुर्मास कहा जाता है, जिसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता।देवउठनी एकादशी के दिन जब भगवान विष्णु नींद से जागते हैं, तब से विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत होती है।यह दिन आध्यात्मिक जागृति, नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। तुलसी विवाह 2025: तिथि और महत्व देवउठनी एकादशी के अगले दिन यानी 2 नवंबर 2025 (रविवार) को तुलसी विवाह मनाया जाएगा।इस दिन भगवान विष्णु का विवाह तुलसी माता से कराया जाता है। यह शुभ कार्य घर-घर में मनाया जाता है। माना जाता है कि तुलसी विवाह करवाने से जीवन में शांति, प्रेम और समृद्धि आती है तथा विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं। देवउठनी एकादशी 2025 पूजा विधि इस दिन से शुरू होते हैं मांगलिक कार्य देवउठनी एकादशी के बाद विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे सभी शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है।यह दिन शुभता, सौभाग्य और नए आरंभ का प्रतीक है। जो लोग भगवान विष्णु और तुलसी माता की भक्ति से पूजा करते हैं, उनके जीवन में धन, यश और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है। महत्वपूर्ण बातें देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi 2025) का दिन धर्म, आस्था और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक है। इस दिन भगवान विष्णु के जागरण के साथ ही शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। श्रद्धा और भक्ति के साथ इस व्रत को करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और शांति का संचार होता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Chhath Puja

Chhath Puja 2025 Special सूर्य देव की आराधना और आस्था का सबसे पवित्र पर्व

Chhath Puja 2025 आने वाली है, और पूरे भारत में श्रद्धा, आस्था और उत्साह का माहौल बन चुका है। यह पर्व सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि प्रकृति, सूर्य देव और जल के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई इलाकों में शुरू हुई यह परंपरा अब पूरे देश और विदेशों में मनाई जाती है। Chhath Puja 2025 चार दिन तक चलने वाला यह पर्व – नहाय खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य – शुद्धता और तपस्या का प्रतीक माना जाता है। छठ पूजा का महत्व (Chhath Puja Significance) छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया की आराधना का पर्व है। ऐसा माना जाता है कि सूर्य की उपासना करने से जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है।यह पर्व हमें प्रकृति और मानव के बीच सामंजस्य की याद दिलाता है। छठी मैया (ऊषा देवी) को संतान, स्वास्थ्य और समृद्धि की देवी माना जाता है। इस दिन व्रती महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली और समाज की भलाई के लिए कठोर व्रत रखती हैं। Chhath Puja Vidhi (छठ पूजा की विधि) इन चार दिनों में व्रती पूर्ण संयम, पवित्रता और श्रद्धा से सभी विधियां निभाते हैं। Eco-Friendly Message of Chhath Puja (प्रकृति संग आस्था का मेल) छठ पूजा का एक बड़ा संदेश है प्रकृति और पर्यावरण का सम्मान।इस दिन घाटों, नदियों और तालाबों की सफाई की जाती है। पूजा में केवल प्राकृतिक सामग्रियों जैसे बांस की टोकरी, केला, नारियल, और दीपक का प्रयोग होता है — जिससे यह पर्व सस्टेनेबल लिविंग का उदाहरण बनता है। भक्ति गीत और छठ घाटों की रौनक (Chhath Puja Songs & Celebration) छठ के दौरान गली-गली में गूंजते हैं पारंपरिक गीत —“केलवा जे केरवा, लहराए हो… छठी मईया आइलें अंगना हो…”दीपों की रोशनी और भक्ति गीतों से सजा माहौल हर किसी के दिल को छू जाता है।लोग अपने पूरे परिवार के साथ घाटों पर जाकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और एकता का संदेश फैलाते हैं। छठ पूजा का संदेश (Spiritual Message of Chhath Puja) छठ पूजा सिखाती है कि सच्ची आस्था और तपस्या से कोई भी मनोकामना पूरी हो सकती है।यह पर्व नारी शक्ति, त्याग और सादगी का प्रतीक है।सूर्य देव से प्रार्थना की जाती है कि सभी के जीवन में उज्ज्वलता, समृद्धि और सुख-शांति बनी रहे। Chhath Puja 2025 सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की आत्मा है — जहाँ सूर्य, जल, वायु और मनुष्य के बीच अटूट संबंध झलकता है।इस छठ पर्व पर आइए हम सब छठी मैया और सूर्य देव से प्रार्थना करें कि हमारे घरों में हमेशा उजाला और खुशियाँ बनी रहें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhai Dooj

Bhai Dooj 2025 शुभ मुहूर्त भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का त्योहार

Bhai Dooj भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। यह त्योहार भाई और बहन के रिश्ते को मजबूत करने और परिवार में खुशियों का माहौल बनाने का अवसर है। इस साल भाई दूज 23 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा, जो दीपावली के दूसरे दिन पड़ता है। भाई दूज का महत्व Bhai Dooj का मुख्य महत्व भाई-बहन के रिश्ते में विश्वास, सुरक्षा और प्यार को दर्शाना है। इस दिन बहन अपने भाई के लिए टिका, आरती, और मीठा भोजन तैयार करती है, जबकि भाई उसकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करता है। यह त्योहार बताता है कि चाहे भाई दूर ही क्यों न हो, बहन का प्यार और आशीर्वाद हमेशा उसके साथ रहता है। भाई दूज 2025 की परंपराएं Bhai Dooj शुभ मुहूर्त 2025 इस समय बहन अपने भाई को टिका करके उसका आशीर्वाद ले सकती है। Bhai Dooj की खास बातें भाई दूज 2025 का पर्व आपके रिश्तों को मजबूत करने और परिवार में खुशियों की लहर लाने का सबसे अच्छा मौका है।
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Govardhan Puja

Govardhan Puja 2025 दिवाली के बाद का खास पर्व और पूजा का महत्व

Govardhan Puja 2025, दिवाली के अगले दिन मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिन्दू त्योहार है। इसे अन्नकूट पूजा या इंदिरा पूजा भी कहा जाता है। यह पर्व भगवान कृष्ण और उनकी लीला, विशेषकर गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा, के लिए प्रसिद्ध है। गोवर्धन पूजा की कहानी (Govardhan Puja Story in Hindi) पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान कृष्ण ने गोकुलवासियों को समझाया कि केवल प्रकृति और गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए, न कि केवल इन्द्रदेव की, तब इन्द्रदेव क्रोधित होकर भारी वर्षा करने लगे। तब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत अपने छोटे अंगूठे पर उठाकर गोकुलवासियों और उनके पशुओं की रक्षा की। इस घटना के बाद से हर साल Govardhan Puja मनाई जाती है, जो भक्ति, प्रेम और प्रकृति संरक्षण का संदेश देती है। Govardhan Puja कब और कैसे मनाई जाती है? गोवर्धन पूजा का आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व Govardhan Puja केवल भगवान कृष्ण की भक्ति का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह प्रकृति संरक्षण और सामाजिक समरसता का संदेश भी देती है। अन्नकूट बनाकर गांव और शहर के लोग मिलकर भोजन करते हैं और जरूरतमंदों में दान वितरित करते हैं। Govardhan Puja 2025 प्रेम, भक्ति और प्राकृतिक संतुलन का पर्व है। मिट्टी के गोवर्धन पर्वत का निर्माण कर, अन्नकूट चढ़ाकर और गायों की सेवा करके हम अपने जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति कर सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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MI vs CSK: वानखेड़े में संजू सैमसन का तूफान, 101 रन की धमाकेदार पारी से बनाया यूनिक रिकॉर्ड

MI vs CSK: वानखेड़े में संजू सैमसन का तूफान, 101 रन की धमाकेदार पारी से बनाया यूनिक रिकॉर्ड

मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए मुकाबले MI vs CSK में एक बार फिर क्रिकेट फैंस को बड़ा रोमांच देखने को मिला। इस मैच में संजू सैमसन ने अपनी बल्लेबाजी से पूरी तरह मैदान पर तूफान मचा दिया। उनकी शानदार पारी ने मैच का रुख ही बदल दिया। 10 चौके और 6 छक्कों से सजी पारी संजू सैमसन ने इस मैच में बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए 10 चौके और 6 गगनचुंबी छक्के लगाए। उन्होंने सिर्फ कुछ ही गेंदों में गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दीं और दर्शकों को खूब एंटरटेन किया। 101 रनों की शानदार शतकीय पारी सैमसन ने 101 रनों की शानदार शतकीय पारी खेली, जो इस मैच की सबसे बड़ी खासियत रही। उनकी यह पारी टीम के लिए बेहद अहम साबित हुई और स्कोर को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। बनाया यूनिक रिकॉर्ड इस विस्फोटक पारी के साथ संजू सैमसन ने एक खास रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। वानखेड़े में उनका यह प्रदर्शन लंबे समय तक याद रखा जाएगा, क्योंकि उन्होंने दबाव में आकर बेहतरीन बैटिंग का नमूना पेश किया। वानखेड़े में फैंस का जोश हाई मैच के दौरान स्टेडियम में मौजूद फैंस लगातार सैमसन के शॉट्स पर झूमते नजर आए। हर चौका और छक्का दर्शकों के लिए किसी जश्न से कम नहीं था। मैच का रुख बदलने वाली पारी संजू सैमसन की यह पारी सिर्फ रन बनाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने पूरी मैच की दिशा बदल दी और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।
पश्चिम बंगाल में अब तक का सबसे ज्यादा मतदान: BJP या ममता बनर्जी, किसे मिलेगा फायदा?

पश्चिम बंगाल में अब तक का सबसे ज्यादा मतदान: BJP या ममता बनर्जी, किसे मिलेगा फायदा?

पश्चिम बंगाल में इस बार चुनावी माहौल काफी गर्म है। वोटिंग के दौरान अब तक का सबसे ज्यादा मतदान दर्ज किया गया है, जिससे राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने ज्यादा मतदान का फायदा आखिर किसे मिलेगा — भारतीय जनता पार्टी (BJP) को या फिर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) को? रिकॉर्ड वोटिंग से बढ़ी सियासी टेंशन इस बार मतदान प्रतिशत पिछले सभी चुनावों की तुलना में ज्यादा देखा गया है। कई इलाकों में लोगों ने बड़ी संख्या में वोट डाले, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि जनता इस बार बदलाव या फिर मजबूती से वापसी के मूड में है। BJP की उम्मीदें क्या कहती हैं? BJP का मानना है कि ज्यादा मतदान उनके पक्ष में जा सकता है। पार्टी का दावा है कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में उन्हें अच्छा समर्थन मिल रहा है। खासकर युवा और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं पर BJP की नजर है। ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ वहीं, ममता बनर्जी और उनकी पार्टी TMC का कहना है कि यह वोटिंग उनके जनाधार की मजबूती को दिखाती है। TMC को भरोसा है कि ग्रामीण इलाकों और महिलाओं का समर्थन उन्हें फिर से सत्ता तक पहुंचा सकता है। जनता का मूड बना सबसे बड़ा फैक्टर राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ ज्यादा वोटिंग से नतीजों का अंदाजा लगाना आसान नहीं है। असली खेल यह है कि यह वोट किस दिशा में गया है — बदलाव के लिए या फिर मौजूदा सरकार को बनाए रखने के लिए। अब निगाहें नतीजों पर अब सभी की नजरें वोटों की गिनती पर टिकी हैं। नतीजे ही तय करेंगे कि बंगाल की सत्ता पर कौन राज करेगा — BJP या फिर ममता बनर्जी की सरकार एक बार फिर वापसी करेगी।
West Bengal Election 2026, Tamil Nadu Election 2026, Phase 1 Voting turnout, 89 percent voting Bengal, 82 percent Tamil Nadu voting, Election LIVE Indi

West Bengal Phase 1 & Tamil Nadu Election 2026: शाम 5 बजे तक बंपर वोटिंग, बंगाल में 89% और तमिलनाडु में 82% मतदान दर्ज

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में रिकॉर्ड वोटिंग। शाम 5 बजे तक बंगाल में 89% और तमिलनाडु में 82% मतदान दर्ज, जानें पूरी अपडेट। देश में लोकतंत्र का उत्सव, रिकॉर्ड वोटिंग ने चौंकाया 23 अप्रैल 2026 को देश के दो बड़े राज्यों पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए विधानसभा चुनाव के पहले चरण ने रिकॉर्ड बना दिया।शाम 5 बजे तक पश्चिम बंगाल में 89% और तमिलनाडु में 82% मतदान दर्ज किया गया, जो इस चुनाव को बेहद खास बना रहा है। सुबह से ही दिखा उत्साह, महिलाओं और युवाओं की लंबी कतारें सुबह 7 बजे से शुरू हुई वोटिंग में शुरुआत से ही जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।मतदान केंद्रों के बाहर महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की लंबी कतारें नजर आईं, जिसने लोकतंत्र की ताकत को फिर साबित किया। बंगाल में छुट-पूट हिंसा के बीच भी भारी मतदान जहां एक तरफ रिकॉर्ड वोटिंग हुई, वहीं पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में हिंसा की घटनाएं भी सामने आईं।मुर्शिदाबाद और कूचबिहार जैसे क्षेत्रों में झड़प, बमबाजी और राजनीतिक तनाव की खबरें आईं। इसके बावजूद सुरक्षा बलों की तैनाती के चलते मतदान प्रक्रिया जारी रही और लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। तमिलनाडु में शांतिपूर्ण मतदान, जनता का भरोसा कायम तमिलनाडु में मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से हुआ।यहां 234 सीटों पर एक ही चरण में वोटिंग हो रही है और भारी मतदान ने यह संकेत दे दिया है कि जनता बदलाव या स्थिरता—जो भी चाहती है—उसे मजबूती से दर्ज कर रही है। किसके बीच है मुख्य मुकाबला? दोनों राज्यों के नतीजे राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। बड़े नेताओं की अपील का असर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत कई बड़े नेताओं ने मतदाताओं से ज्यादा से ज्यादा मतदान करने की अपील की थी, जिसका असर अब आंकड़ों में साफ दिख रहा है। रिकॉर्ड वोटिंग, अब नतीजों का इंतजार बंपर वोटिंग ने साफ कर दिया है कि इस बार जनता पूरी तरह सक्रिय है।अब सभी की नजरें नतीजों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि किसके हाथ में सत्ता जाएगी।
Bhopal में ‘Samarth-Bharat-Conclave 2026’: युवाओं को स्किल, स्टार्टअप और AI आधारित शिक्षा का दिया बड़ा संदेश

Bhopal में ‘Samarth-Bharat-Conclave 2026’: युवाओं को स्किल, स्टार्टअप और AI आधारित शिक्षा का दिया बड़ा संदेश

Bhopal के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘Samarth-Bharat-Conclave 2026’ में स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप और AI आधारित शिक्षा पर जोर दिया गया। AISECT और Scope Global University की पहल। राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में ‘समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026’ का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन AISECT और Scope Global University द्वारा संयुक्त रूप से किया गया, जिसमें स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप और इनोवेशन को लेकर बड़े स्तर पर चर्चा हुई।र्यक्रम में मुख्य रूप से श्री संतोष चौबे (Chairman AISECT & Chancellor, Rabindranath Tagore University, Bhopal) उपस्थित रहे।वहीं विशेष अतिथि के रूप में श्री राव उदय प्रताप सिंह, स्कूल शिक्षा मंत्री, मध्यप्रदेश सरकार ने शिरकत की। दोनों ही नेताओं ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनने और स्किल आधारित शिक्षा अपनाने का संदेश दिया।कॉन्क्लेव में AI (Artificial Intelligence) और एक्सपीरिएंशियल लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण MoU (समझौता) किया गया।यह MoU AISECT Group of Universities और Wadhwani Foundation के बीच हुआ, जिसका उद्देश्य इंडस्ट्री के अनुसार AI आधारित शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट को मजबूत करना है। इस पहल को “विकसित भारत” की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।कार्यक्रम में Entrepreneur of the Year Awards भी दिए गए, जिनके माध्यम से नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। पुरस्कार इन श्रेणियों में प्रदान किए गए: ETC ServicesAISECT Seva KendraPlacements & ApprenticeshipSponsored Programs में Quality TrainingBrainy Bear Pre-school इन अवॉर्ड्स के जरिए उन लोगों को पहचान दी गई, जो देश में रोजगार और उद्यमिता को नई दिशा दे रहे हैं।युवाओं को मिला स्टार्टअप और रोजगार का मंत्र कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने युवाओं को स्टार्टअप शुरू करने, डिजिटल स्किल्स सीखने और नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।बताया गया कि आने वाला समय स्किल और इनोवेशन का है, जहां केवल डिग्री नहीं बल्कि कौशल ही सफलता की कुंजी बनेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
MI vs CSK

Mumbai Indians vs Chennai Super Kings आज का मैच बना फैंस के लिए सबसे बड़ा सरप्राइज

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में आज क्रिकेट फैंस को एक बार फिर से सबसे बड़े मुकाबलों में से एक देखने को मिलने वाला है। Mumbai Indians (MI) और Chennai Super Kings (CSK) के बीच यह भिड़ंत सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि भावनाओं, प्रतिष्ठा और पुराने राइवलरी की टक्कर है। फैंस के बीच इस मुकाबले को लेकर खासा उत्साह है, क्योंकि MI और CSK जब भी आमने-सामने आते हैं, मैच आखिरी ओवर तक रोमांच बनाए रखता है। MI vs CSK: क्यों खास है यह मुकाबला? Mumbai Indians और Chennai Super Kings को IPL की दो सबसे सफल और बड़ी टीमों में गिना जाता है। आज का मैच प्रीव्यू आज के मुकाबले में दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है। पिच रिपोर्ट और मैच कंडीशन पिच बल्लेबाजों के लिए मददगार मानी जा रही है, जिससे बड़ा स्कोर देखने को मिल सकता है। कौन है आज का फेवरेट? अगर मौजूदा फॉर्म और टीम बैलेंस की बात करें तो: इसलिए यह कहना मुश्किल है कि जीत किसके हाथ लगेगी, मुकाबला पूरी तरह 50-50 है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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