आज से हिंदू पंचांग का सबसे पवित्र और खास समय Adhik Maas 2026 (Purushottam Maas) शुरू हो गया है। इसे सामान्य भाषा में मलमास भी कहा जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह कोई अशुभ समय नहीं, बल्कि भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत शुभ महीना माना जाता है।
इस महीने को “पुरुषोत्तम मास” इसलिए कहा जाता है क्योंकि स्वयं भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम देकर सम्मानित किया था।
Adhik Maas 2026 क्या है और क्यों खास माना जाता है?
अधिकमास हर 2–3 साल में आता है, जब चंद्र और सौर कैलेंडर के बीच अंतर को संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार जब किसी देवता ने इस अतिरिक्त महीने को स्वीकार नहीं किया, तब भगवान विष्णु ने इसे अपनाकर इसे भक्ति और साधना का सर्वोच्च समय बना दिया।
यही कारण है कि इस महीने में भौतिक कार्यों से ज्यादा आध्यात्मिक गतिविधियों को महत्व दिया जाता है।
Purushottam Maas में क्या करना चाहिए (Do’s)
इस पूरे महीने में किए गए अच्छे कर्म कई गुना फल देने वाले माने जाते हैं:
- भगवान विष्णु की नियमित पूजा और आराधना
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप
- तुलसी पूजन और दीपदान
- जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र दान
- सत्यनारायण कथा का पाठ या श्रवण
- सात्विक जीवन और संयम का पालन
अधिकमास में क्या नहीं करना चाहिए (Don’ts)
इस पवित्र अवधि में कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है:
- विवाह और मांगलिक कार्य
- गृह प्रवेश
- नया व्यवसाय शुरू करना
- बड़े निवेश या नई शुरुआत से बचना
Adhik Maas 2026 के शक्तिशाली मंत्र
इस महीने में मंत्र जप का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इससे मन शांत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
1. विष्णु मंत्र
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
रोज 108 बार जप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
2. महामंत्र
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे
3. शांति मंत्र
“शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्…”
Adhik Maas 2026 का महत्व (Human Touch)
आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में यह महीना एक तरह से “pause” लेने का मौका देता है। भागदौड़ के बीच कुछ समय अपने मन, विचार और आध्यात्म से जुड़ने का अवसर मिलता है।
कई लोग इस महीने में व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ बढ़ाते हैं और अपने जीवन में सरलता लाने की कोशिश करते हैं।
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