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मां ब्रह्मचारिणी पूजा, ब्रह्मचारिणी कथा, Navratri Day 2, ब्रह्मचारिणी मंत्र, नवरात्रि पूजा।

Navratri 2026: दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें पौराणिक कथा और मंत्र

नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी तपस्या, त्याग, धैर्य और संयम की प्रतीक मानी जाती हैं। उनकी कथा भक्तों को लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देती है। मां ब्रह्मचारिणी की कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, मां पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी कठिन साधना और अटूट संकल्प के कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी नाम से जाना गया। यह कथा धैर्य और दृढ़ निश्चय का संदेश देती है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः। भोग: मां को शक्कर, मिश्री और पंचामृत अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है।
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मां शैलपुत्री पूजा, Navratri 2026, मां शैलपुत्री कथा, नवरात्रि पूजा विधि, शैलपुत्री मंत्र।

Navratri 2026: नवरात्रि के पहले दिन करें मां शैलपुत्री की पूजा, जानें कथा, मंत्र और महत्त्व

नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। उनकी आराधना से भक्तों को धैर्य, शक्ति और स्थिरता की प्रेरणा मिलती है। मां शैलपुत्री की पौराणिक कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, मां शैलपुत्री पूर्व जन्म में राजा दक्ष की पुत्री सती थीं। भगवान शिव के अपमान से दुखी होकर उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए। इसके बाद उन्होंने हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और शैलपुत्री कहलायीं। मां शैलपुत्री का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः। भोग: मां को परंपरागत रूप से गाय के घी का भोग अर्पित किया जाता है।
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Nana Patekar Death

Nana Patekar Death: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का निधन, 75 की उम्र में कार्डियक अरेस्ट ने ली जान

Desh Harpal | Entertainment News हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। गुरुवार सुबह गोवा स्थित उनके घर पर तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक उनकी मौत गंभीर कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई। नाना पाटेकर के निधन की पुष्टि उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने की है। उन्होंने बताया कि वह गोवा पहुंच रहे हैं और परिवार की ओर से विस्तृत जानकारी बाद में साझा की जाएगी। 45 मिनट तक डॉक्टरों ने बचाने की कोशिश की मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक नाना पाटेकर को गंभीर कार्डियक अरेस्ट के बाद अस्पताल पहुंचाया गया। मेडिकल टीम ने करीब 45 मिनट तक CPR देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें होश में नहीं लाया जा सका। अस्पताल से जुड़ी जानकारी के अनुसार सुबह करीब 5:20 बजे उनकी मौत की पुष्टि हुई। मामले में मेडिको-लीगल प्रक्रिया शुरू की गई है और पोस्टमार्टम कराया जाएगा। चार दशक से ज्यादा का रहा फिल्मी सफर नाना पाटेकर उन कलाकारों में शामिल रहे, जिन्होंने अपने अभिनय के लिए किसी खास तरह की छवि पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग तरह के किरदारों को पर्दे पर उतारा। उन्होंने 1978 में ‘गमन’ से अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की थी। इसके बाद ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘अब तक छप्पन’, ‘अपहरण’, ‘वेलकम’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने याद रखा। नाना पाटेकर अभिनेता के साथ-साथ निर्देशक और लेखक के रूप में भी सक्रिय रहे। उनके लंबे करियर में हिंदी और मराठी सिनेमा दोनों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। राष्ट्रीय पुरस्कार और पद्मश्री से हुए सम्मानित नाना पाटेकर को उनके अभिनय के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले। उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और कई फिल्मफेयर पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। भारत सरकार ने वर्ष 2013 में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया। उनके अभिनय की खासियत यह रही कि वे बड़े पर्दे पर किरदार को केवल निभाते नहीं थे, बल्कि उसे अपनी आवाज, संवाद अदायगी और भाव-भंगिमा से अलग पहचान देते थे। फिल्मों से आगे भी बनाई अलग पहचान नाना पाटेकर का सार्वजनिक जीवन सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहा। किसानों और सामाजिक मुद्दों से जुड़े कार्यों को लेकर भी वे लगातार चर्चा में रहे। हाल के वर्षों में भी उनके सामाजिक कार्यों और जरूरतमंद परिवारों की मदद से जुड़ी खबरें सामने आती रही थीं। नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर है। करीब पांच दशक लंबे करियर में उन्होंने कई ऐसे किरदार दिए, जिन्हें भारतीय सिनेमा के यादगार अभिनय में गिना जाता है। नोट: नाना पाटेकर के निधन से जुड़ी यह खबर शुरुआती उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। परिवार की ओर से विस्तृत बयान सामने आने के बाद खबर को अपडेट किया जाएगा।
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Ram Mandir Donation Theft Case

Breaking: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच तेज, सुप्रीम कोर्ट ने भी मांगी रिपोर्ट

अयोध्या | Desh Harpal Digital अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी (SIT) और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। जांच एजेंसियों के अनुसार अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से नकदी, आभूषण और अन्य संपत्तियां बरामद की हैं। जांच के दौरान करीब 50 बैंक खातों की भी जांच की जा रही है, ताकि कथित रूप से चढ़ावे की रकम के लेन-देन का पूरा नेटवर्क सामने आ सके। SIT की रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल एसआईटी की प्रारंभिक जांच में मंदिर के चढ़ावे की गिनती और सुरक्षा व्यवस्था में 9 बड़ी खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार इन्हीं कमियों का फायदा उठाकर कथित गबन को अंजाम दिया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 40 दिनों में 70 बार कथित चोरी की घटनाएं हुईं। एसआईटी ने अविनाश शुक्ला को इस कथित नेटवर्क का प्रमुख आरोपी बताया है। टिन्नू यादव की दोबारा रिमांड की तैयारी मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से पूछताछ अभी जारी है। पुलिस अब दोबारा रिमांड लेकर यह जानने की कोशिश करेगी कि कथित चोरी का पूरा नेटवर्क कैसे संचालित होता था और इसमें अन्य लोगों की क्या भूमिका थी। इस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को एंटी करप्शन कोर्ट में प्रस्तावित है। ट्रस्ट में भी हुए बड़े बदलाव चढ़ावा चोरी विवाद के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में भी बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए गए हैं। साथ ही नए सीईओ की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। RSS और मुख्यमंत्री योगी का बयान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए एसआईटी जांच पर भरोसा जताया है और कहा है कि दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जांच में अभी तक करीब 150 लोगों में से केवल 8 के खिलाफ ठोस साक्ष्य मिले हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की कथित करतूत के आधार पर पूरे ट्रस्ट या अयोध्या की छवि को बदनाम करना उचित नहीं है। (The Times of India) Desh Harpal Analysis राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला केवल आर्थिक अनियमितता नहीं, बल्कि जनविश्वास और पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और अंतिम निष्कर्ष एसआईटी की विस्तृत रिपोर्ट तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
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Breaking: अमेरिका-ईरान संघर्ष और भड़का, कुवैत-बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का जवाबी हमला, होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा खतरा

Baking News: US-Iran War Latest Update | Iran Attacks US Bases in Kuwait & Bahrain | Hormuz Crisis अमेरिका के ईरान पर बड़े हमलों के बाद ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला करने का दावा किया। जानिए ताजा अपडेट। नई दिल्ली/तेहरान | Desh Harpal Desk मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। रविवार को अमेरिका ने ईरान के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की। इसके जवाब में सोमवार को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। अमेरिका ने 140 से अधिक ठिकानों को बनाया निशाना अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में किश्म, सीरिक, बंदर अब्बास, जास्क, बुशेहर, खोंदाब, महशहर, बेहबहान, अंदीमेश्क, देजफुल, अहवाज, अबादान और खुर्रमशहर सहित कई अहम सैन्य और सामरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का दावा है कि पिछले कुछ दिनों में ईरान के 300 से अधिक सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की गई है, जिनमें मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन स्टोरेज और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं। ईरान का पलटवार IRGC के अनुसार— होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा संकट ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने साफ संकेत दिए हैं कि होर्मुज स्ट्रेट उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे अहम हिस्सा है। ईरान के वरिष्ठ नेता के सलाहकार मोहसिन रेजाई ने कहा, “होर्मुज स्ट्रेट हमारे लिए कई परमाणु बमों से भी अधिक महत्वपूर्ण है।” यही जलमार्ग दुनिया के लगभग 20% तेल व्यापार का प्रमुख रास्ता माना जाता है। यहां बढ़ते तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट 1. ओमान के पास जहाज पर हमला ‘GFS Galaxy’ जहाज पर हुए हमले में 11 भारतीय सवार थे। 10 को सुरक्षित बचा लिया गया जबकि एक भारतीय अभी भी लापता है। भारत सरकार ने नागरिक जहाजों पर हमलों की कड़ी निंदा की है। 2. अमेरिका का दावा अमेरिका का कहना है कि पिछले तीन दिनों में उसने ईरान के 300 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। 3. लेबनान पर इजराइल की कार्रवाई दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में इजराइली सेना ने नए हमले किए हैं। 4. कुवैत की सीमा चौकियों को नुकसान कुवैत ने पुष्टि की है कि हालिया हमलों में उत्तरी क्षेत्र की तीन सीमा चौकियां प्रभावित हुई हैं। 5. ईरान के खुजेस्तान में हमला महशहर के एक वाटर प्रोजेक्ट पर प्रोजेक्टाइल गिरने से एक व्यक्ति की मौत और चार लोग घायल हुए हैं। ईरान की मिसाइल ताकत कितनी बड़ी? अमेरिकी खुफिया एजेंसी ODNI के अनुसार— वैश्विक असर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और बढ़ता है तो इसका सीधा असर—
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Big Diplomacy Win: स्लोवाकिया दौरे पर PM मोदी ने किए 14 बड़े समझौते, भारत-यूरोप संबंधों को मिली नई रफ्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्लोवाकिया दौरे में रक्षा, AI, क्वांटम कम्युनिकेशन, शिक्षा, स्वास्थ्य और श्रम प्रवास सहित 14 महत्वपूर्ण समझौते हुए। जानिए भारत को क्या मिलेगा फायदा। नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्लोवाकिया यात्रा भारत की कूटनीतिक उपलब्धियों में एक महत्वपूर्ण अध्याय बनकर उभरी है। इस दौरान जहां पीएम मोदी को स्लोवाकिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया, वहीं दोनों देशों ने रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), शिक्षा, विज्ञान, स्वास्थ्य, पर्यटन और क्वांटम कम्युनिकेशन समेत 14 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों के साथ भारत और स्लोवाकिया के संबंध आधिकारिक रूप से “व्यापक साझेदारी” (Comprehensive Partnership) के स्तर तक पहुंच गए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। भारत-स्लोवाकिया संबंधों को मिला नया दर्जा दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक साझेदारी का दर्जा देने पर सहमति जताई। इसके तहत व्यापार, निवेश, तकनीक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मिली मजबूती यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग पर एक Letter of Intent (LoI) पर हस्ताक्षर किए गए। इससे रक्षा उद्योग, सैन्य सहयोग, तकनीकी साझेदारी और रक्षा निर्यात के नए अवसर खुलेंगे। साथ ही दोनों देशों ने आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) स्थापित करने पर भी सहमति बनाई, जिससे आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सहयोग बढ़ेगा। AI और क्वांटम टेक्नोलॉजी में साथ काम करेंगे दोनों देश भारत और स्लोवाकिया ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए “इंडिया चेयर ऑन AI” स्थापित करने संबंधी समझौता किया। इसके अलावा क्वांटम कम्युनिकेशन और महत्वपूर्ण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा को लेकर भी एक अहम MoU पर हस्ताक्षर हुए, जो भविष्य की साइबर सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिक्षा, विज्ञान और रिसर्च में बढ़ेगा सहयोग दोनों देशों के प्रमुख शैक्षणिक और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच कई समझौते हुए हैं। इनमें: शामिल हैं। स्वास्थ्य, पर्यटन और संस्कृति को भी मिला बढ़ावा स्वास्थ्य क्षेत्र में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरोपैथी, पुणे और स्लोवाकिया के हेल्थ स्पा संस्थान के बीच MoU हुआ। इसके अलावा: को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। भारतीय छात्रों और कामगारों को होगा फायद दोनों देशों ने श्रम प्रवास (Labour Mobility) और कांसुलर वार्ता शुरू करने पर सहमति जताई है। इससे स्लोवाकिया में काम कर रहे भारतीय कामगारों, छात्रों और प्रवासी भारतीयों को बेहतर सुविधाएं और सहायता मिल सकेगी। सुरक्षित और कानूनी श्रम प्रवास के लिए हुए समझौते से रोजगार, कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण के नए अवसर भी खुलेंगे। PM मोदी ने क्या कहा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और स्लोवाकिया के बीच बढ़ता विश्वास, साझा प्राथमिकताएं और भविष्य के लिए समान दृष्टिकोण इस नई साझेदारी की मजबूत नींव हैं। उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) को जल्द अंतिम रूप देने में स्लोवाकिया के समर्थन के लिए आभार जताया और कहा कि इससे दोनों देशों के उद्योगों, स्टार्टअप्स और व्यापारिक समुदाय को बड़ा लाभ मिलेगा। देश हरपल विश्लेषण स्लोवाकिया दौरे में हुए 14 समझौते केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भारत की यूरोप में बढ़ती रणनीतिक उपस्थिति का संकेत भी हैं। रक्षा, AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी और शिक्षा जैसे भविष्य-केंद्रित क्षेत्रों में सहयोग भारत को तकनीकी और आर्थिक रूप से नई ताकत प्रदान कर सकता है। (रिपोर्ट: देश हरपल डिजिटल डेस्क)
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Trump Iran Deal
Breaking: 47 साल बाद अमेरिका-ईरान रिश्तों में बड़ी बर्फ पिघली, ट्रम्प बोले- ‘तेल को फिर बहने दो’ दुनिया की सबसे तनावपूर्ण दुश्मनियों में से एक माने जाने वाले अमेरिका और ईरान के रिश्तों में बड़ा मोड़ आता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों ने कई महीनों तक चली कठिन और गोपनीय बातचीत के बाद एक प्रारंभिक शांति समझौते (MoU) को अंतिम रूप देने पर सहमति जता दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान के साथ समझौता लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाई जाएगी। ट्रम्प ने अपने संदेश में लिखा, “दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू कर लो। तेल को फिर बहने दो।” 19 जून को जेनेवा में हो सकते हैं हस्ताक्षर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अनुसार दोनों देशों के प्रतिनिधि 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में प्रस्तावित समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। यदि यह बैठक होती है तो यह करीब 47 वर्षों में अमेरिका और ईरान के बीच सबसे महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय संपर्क माना जाएगा। ईरान ने रखीं तीन अहम शर्तें ईरानी अधिकारियों के अनुसार अंतिम समझौते से पहले अमेरिका को तीन प्रमुख कदम उठाने होंगे— ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि आगामी 60 दिनों की बातचीत इन्हीं शर्तों के पालन पर निर्भर करेगी। 24 अरब डॉलर की संपत्तियां जारी होने की चर्चा ईरानी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका 24 अरब डॉलर तक की ईरानी जमी हुई संपत्तियां चरणबद्ध तरीके से जारी कर सकता है। इनमें से लगभग 12 अरब डॉलर शुरुआती दौर में उपलब्ध कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इस दावे की अमेरिका की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। परमाणु कार्यक्रम बना रहेगा सबसे बड़ा मुद्दा विशेषज्ञों का मानना है कि असली परीक्षा अब शुरू होगी। 2015 के परमाणु समझौते से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद दोनों देशों के बीच अविश्वास लगातार बढ़ा था। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की पिछली रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने यूरेनियम संवर्धन का स्तर 60 प्रतिशत तक पहुंचा दिया था, जिसे पश्चिमी देश चिंता का विषय मानते हैं। आगामी 60 दिनों की बातचीत में परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रमुख मुद्दे रहेंगे। इजराइल की चुप्पी बढ़ा रही अटकलें अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर इजराइल ने अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इजराइल समझौते की कुछ शर्तों को लेकर असहज है क्योंकि उसे वार्ता प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया। ईरान में भी उठ रहे विरोध के स्वर समझौते की खबर सामने आने के बाद ईरान के कट्टरपंथी समूहों और कुछ रूढ़िवादी नेताओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यह समझौता ईरान की रणनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता है। हालांकि राष्ट्रपति मसूद पेजशकियान ने आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा कि देशहित में काम करने वालों को गद्दार कहना उचित नहीं है। वैश्विक अर्थव्यवस्था को मिल सकती है राहत यदि समझौता सफल रहता है तो इसका सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल बाजार पर देखने को मिल सकता है। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसके खुलने से तेल आपूर्ति सामान्य होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है। फिलहाल दुनिया की नजरें 19 जून को जेनेवा में होने वाली संभावित बैठक पर टिकी हैं, जहां यह ऐतिहासिक समझौता औपचारिक रूप ले सकता है।
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Narendra Modi vs Nehru

सिर्फ नेहरू का रिकॉर्ड टूटा, या मोदी ने भारत की दिशा भी बदल दी…?

संपादकीय | निखिल सिद्धभट्टी 10 जून 2026 भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण तारीख बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले मोदी ने आज अपने कार्यकाल के 4399 दिन पूरे कर लिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया, जो 1952 से 1964 तक लगातार 4398 दिनों तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे थे। यहां एक तथ्य समझना जरूरी है। जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त 1947 से ही देश के प्रधानमंत्री थे, लेकिन उस समय वे स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त हुए थे। 1952 में देश के पहले आम चुनाव के बाद कांग्रेस संसदीय दल ने उन्हें नेता चुना और वे 13 मई 1952 से 27 मई 1964 तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे। अब, 74 वर्ष बाद नरेंद्र मोदी ने उस रिकॉर्ड को पार कर लिया है। यही वह क्षण है, जिसने हमें यह संपादकीय लिखने के लिए प्रेरित किया। क्योंकि यह केवल एक रिकॉर्ड टूटने की घटना नहीं है। यह भारत के दो सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों, दो अलग-अलग विचारधाराओं और दो अलग-अलग विकास मॉडलों की तुलना का अवसर भी है। एक रिकॉर्ड, लेकिन दो बिल्कुल अलग भारत जब नेहरू ने 1952 में जनता के जनादेश के साथ सरकार बनाई, तब भारत एक नवजात राष्ट्र था। देश विभाजन की त्रासदी झेल चुका था। करोड़ों लोग गरीबी में जी रहे थे। औद्योगिक आधार लगभग नहीं था। साक्षरता बेहद कम थी और लोकतंत्र का भविष्य भी अनिश्चित था। नेहरू के सामने चुनौती थी—भारत को टूटने से बचाना और उसे खड़ा करना। दूसरी ओर, जब नरेंद्र मोदी 2014 में सत्ता में आए, तब भारत दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था था। अर्थव्यवस्था वैश्विक मंच पर हाफ राही थी, सेना मजबूत थी पर उसे नियंत्रण में रखा था , परमाणु शक्ति मौजूद थी और सूचना क्रांति देश में प्रवेश कर चुकी थी पर उस की गाती धीमी थी । लेकिन मोदी के सामने सवाल अलग था—क्या भारत केवल एक विकासशील देश बना रहेगा या 21वीं सदी की वैश्विक शक्ति बनेगा? यहीं से दोनों नेताओं की तुलना शुरू होती है। नेहरू ने नींव रखी, इसमें विवाद नहीं आज जो लोग नेहरू की आलोचना करते हैं, उन्हें भी यह स्वीकार करना होगा कि स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं की बुनियाद उनके दौर में रखी गई। संसद, चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय की प्रतिष्ठा, IIT, AIIMS, बड़े बांध, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग—ये सब उस दौर की उपलब्धियां हैं। दुनिया के कई नवस्वतंत्र देशों में लोकतंत्र असफल हो गया। कहीं सेना सत्ता में आ गई, कहीं तानाशाही स्थापित हो गई। भारत उस रास्ते पर नहीं गया। यह नेहरू युग की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। लेकिन इतिहास का दूसरा पक्ष भी है। नेहरू ने जिस समाजवादी आर्थिक मॉडल को अपनाया, उसने राज्य को अत्यधिक शक्तिशाली बना दिया। लाइसेंस-परमिट राज ने आने वाले दशकों में निजी क्षेत्र की ऊर्जा को सीमित कर दिया। और फिर 1962 में चीन युद्ध ने उनकी विदेश नीति की सबसे बड़ी कमजोरी उजागर कर दी। “हिंदी-चीनी भाई-भाई” का आदर्शवाद चीन की सैन्य आक्रामकता के सामने टिक नहीं सका। यहीं से नेहरू की विरासत पर बहस शुरू होती है। मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है? यहां अक्सर लोग UPI, एक्सप्रेस-वे, जी-20, अनुच्छेद 370 या डिजिटल इंडिया की बात करते हैं। लेकिन क्या यही मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि है? शायद नहीं। मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह हो सकती है कि उन्होंने भारत की शासन प्रणाली और विकास की सोच को बदलने का प्रयास किया। दशकों तक भारत में सरकार योजनाएं बनाती थी, लेकिन लाभार्थी तक पहुंचने से पहले व्यवस्था में रिसाव हो जाता था। जनधन, आधार और मोबाइल के संयोजन ने पहली बार सरकार और नागरिक के बीच सीधा संपर्क स्थापित किया। UPI केवल एक भुगतान प्रणाली नहीं है। यह उस नए भारत का प्रतीक है जो तकनीक को शासन का उपकरण बना रहा है। इसी तरह सड़क, रेलवे, एयरपोर्ट और रक्षा ढांचे में जो निवेश हुआ, उसने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति दी। चीन: दो युग, दो प्रतिक्रियाएं यदि किसी एक मुद्दे पर नेहरू और मोदी की तुलना सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, तो वह चीन है। 1962 में भारत तैयार नहीं था। राजनीतिक आदर्शवाद राष्ट्रीय सुरक्षा पर भारी पड़ गया। 2020 में गलवान घाटी में फिर चीन सामने था। यह कहना सही नहीं होगा कि भारत ने चीन को पराजित कर दिया। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि इस बार भारत ने 1962 जैसी असहाय स्थिति नहीं दिखाई। सीमा पर सड़कें बनीं, सैन्य तैनाती बढ़ी और चीन को लेकर नीति अधिक यथार्थवादी दिखाई दी। यहीं दोनों नेताओं के दृष्टिकोण का मूल अंतर दिखता है। असली बहस मोदी बनाम नेहरू नहीं, दो मॉडलों की है नेहरू का भारत राज्य-नियंत्रित अर्थव्यवस्था, समाजवादी सोच और गुटनिरपेक्ष विदेश नीति पर आधारित था। मोदी का भारत बाज़ार आधारित विकास, डिजिटल शासन, राष्ट्रीय पहचान और बहु-संरेखीय (Multi-alignment) कूटनीति पर आधारित दिखाई देता है। नेहरू संस्थानों के जरिए भारत को मजबूत करना चाहते थे। मोदी नेतृत्व और क्रियान्वयन की गति के जरिए भारत को बदलना चाहते हैं। एक ने भारत का ढांचा बनाया। दूसरा उस ढांचे को नए सिरे से आकार देने की कोशिश कर रहा है। क्या मोदी नेहरू से बेहतर प्रधानमंत्री साबित हुए हैं? इस प्रश्न का उत्तर राजनीति नहीं, इतिहास देगा। लेकिन 2026 में खड़े होकर यदि केवल प्रभाव, निर्णायकता, वैश्विक उपस्थिति, डिजिटल परिवर्तन, इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण और शासन की गति को मापदंड बनाया जाए, तो नरेंद्र मोदी का कार्यकाल स्वतंत्र भारत के सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में निश्चित रूप से गिना जाएगा। इतना ही नहीं, वे संभवतः नेहरू के बाद पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने भारत के विकास मॉडल की दिशा बदलने का प्रयास किया है। नरेंद्र मोदी द्वारा नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ना केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है। यह उस राजनीतिक यात्रा का प्रतीक है जिसमें भारत ने समाजवादी दौर से डिजिटल दौर तक, गुटनिरपेक्षता से बहु-संरेखीय कूटनीति तक और धीमी प्रशासनिक प्रक्रियाओं से तकनीक-आधारित शासन तक का सफर तय किया है। नेहरू ने आधुनिक भारत की नींव रखी थी। मोदी उस भारत को...
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Khan Sir Coaching News, Patna Coaching Controversy,

Exclusive: खान सर की कोचिंग में आखिर हुआ क्या? फायरिंग की खबरों के बीच जांच में नया मोड़

क्या सच में चली थी गोली?”पटना में खान सर की कोचिंग को लेकर सामने आई खबर ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिस अब तोड़फोड़, मारपीट और कथित फायरिंग—तीनों एंगल से जांच कर रही है। पूरी रिपोर्ट पढ़ें। पटना के चर्चित शिक्षक Khan Sir की कोचिंग को लेकर मंगलवार रात सामने आई घटनाओं ने पूरे बिहार में चर्चा छेड़ दी है। शुरुआत में फायरिंग की खबरों से हड़कंप मच गया, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ मामला अब केवल गोलीबारी तक सीमित नहीं दिख रहा है। पुलिस के अनुसार कुछ युवकों ने मुसल्लहपुर हाट स्थित कोचिंग परिसर में घुसकर कथित तौर पर तोड़फोड़ की, पोस्टर फाड़े और विरोध करने पर गार्ड के साथ मारपीट की। घायल गार्ड का इलाज कराया गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और सभी पहलुओं की जांच कर रही है। खान सर ने क्या कहा? खान सर ने घटना के पीछे प्रतिद्वंद्वी कोचिंग संस्थानों की भूमिका होने की आशंका जताई है। उनका कहना है कि कम फीस में शिक्षा उपलब्ध कराने के कारण कुछ लोगों को आपत्ति है। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस जांच जारी है। पुलिस क्या जांच कर रही है? पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी। क्यों चर्चा में है यह मामला? मुसल्लहपुर हाट पटना का बड़ा कोचिंग हब माना जाता है, जहां हजारों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में इस घटना ने छात्रों की सुरक्षा और कोचिंग संस्थानों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। “
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Bhopal Water Supply News

Breaking News: भोपाल में 36 घंटे पानी का संकट, कोलार लाइन बंद होने से 75 इलाके प्रभावित

भोपाल। राजधानी भोपाल के लाखों नागरिकों के लिए जरूरी खबर है। कोलार जलापूर्ति परियोजना में आवश्यक तकनीकी कार्य और रखरखाव के चलते शहर के कई हिस्सों में पानी की सप्लाई प्रभावित होने जा रही है। नगर निगम से मिली जानकारी के अनुसार करीब 75 इलाकों में जल वितरण व्यवस्था पर असर पड़ सकता है, जिसके चलते लोगों को पहले से पानी का पर्याप्त भंडारण करने की सलाह दी गई है। शहर की जलापूर्ति व्यवस्था का बड़ा हिस्सा कोलार और नर्मदा परियोजनाओं पर निर्भर है। विशेषज्ञों के अनुसार कोलार लाइन में किसी भी प्रकार का शटडाउन या तकनीकी कार्य होने पर बड़ी आबादी प्रभावित होती है। हाल के वर्षों में भी कई बार मेंटेनेंस और पाइपलाइन लीकेज के कारण जलापूर्ति बाधित हुई है। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह कार्य भविष्य में बेहतर और निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है। हालांकि शटडाउन की अवधि के दौरान कई क्षेत्रों में पानी नहीं पहुंच पाएगा या कम दबाव से सप्लाई होगी। ऐसे में नागरिकों से सहयोग की अपील की गई है। नागरिक क्या करें? क्यों महत्वपूर्ण है कोलार परियोजना? भोपाल की जलापूर्ति का बड़ा हिस्सा कोलार परियोजना से आता है। शहर में बढ़ती आबादी और पानी की बढ़ती मांग के बीच यह परियोजना राजधानी की प्रमुख लाइफलाइन मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी तकनीकी बाधा का सीधा असर हजारों परिवारों पर पड़ता है। यदि आप भोपाल के कोलार, अरेरा, शाहपुरा, टीटी नगर, न्यू मार्केट या आसपास के क्षेत्रों में रहते हैं तो अगले 36 घंटों के लिए पानी की व्यवस्था पहले से कर लेना बेहतर होगा। नगर निगम द्वारा सप्लाई बहाल होने के बाद स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।
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किरेन रिजिजू का आरोप- भारत में भी हिंसा भड़काने की रची गई थी साजिश, बोले- सत्ता परिवर्तन सिर्फ चुनाव से होगा

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया है कि फ्रांस और बांग्लादेश में हुई हिंसक घटनाओं जैसी साजिश भारत में भी रची गई थी। उन्होंने दावा किया कि कुछ नेताओं ने युवाओं को भड़काकर सड़कों पर हिंसा फैलाने की कोशिश की। रिजिजू ने कहा कि ऐसी साजिश रचने वाले यह भूल गए कि भारत न तो बांग्लादेश है और न ही फ्रांस। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव के जरिए ही हो सकता है, किसी बाहरी ताकत के माध्यम से नहीं। राहुल गांधी और नेहा बोरा का वीडियो किया शेयर किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करने के साथ एक वीडियो भी साझा किया। इस वीडियो में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और नेहा बोरा को दिखाया गया है। दरअसल, 14 अक्टूबर को नेहा बोरा का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह बांग्लादेश में हुए हिंसक प्रदर्शनों के समर्थन में बोलती दिखाई दी थीं। रिजिजू ने इसी संदर्भ में वीडियो साझा करते हुए भारत में हिंसा भड़काने की कथित कोशिशों का आरोप लगाया। बोले- सत्ता परिवर्तन चुनाव से, सोरोस के जरिए नहीं रिजिजू ने अपने बयान में कहा कि भारत में सरकार बदलने का अधिकार जनता के पास है और यह प्रक्रिया चुनावों के माध्यम से पूरी होती है। उन्होंने कहा, “भारत में सत्ता परिवर्तन बिल्कुल हो सकता है, लेकिन केवल चुनावों के जरिए, सोरोस के जरिए नहीं।” केंद्रीय मंत्री के बयान में विदेशी प्रभाव और देश में कथित तौर पर युवाओं को भड़काने की कोशिशों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, भारत में ऐसी किसी साजिश के आरोपों के समर्थन में इस बयान के साथ कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।

ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास भीषण हादसा, ट्रक ने श्रद्धालुओं को कुचला; 15 की मौत, 26 घायल

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शनिवार देर रात शीतला माता मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं पर तेज रफ्तार ट्रक चढ़ गया। हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि दो पुलिसकर्मियों समेत 26 लोग घायल हुए हैं। दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायलों को इलाज के लिए जयारोग्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ढलान पर बेकाबू हुआ धान से भरा ट्रक हादसा देर रात करीब 1:30 बजे चीनौर रोड पर ढलान के पास हुआ। श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने के लिए सड़क किनारे कतार में खड़े थे। इसी दौरान चीनौर की ओर से आ रहा धान से भरा ट्रक ढलान पर बेकाबू हो गया। बताया गया कि ट्रक करीब 90 डिग्री के तीखे ढलान से नीचे उतर रहा था। इस दौरान वह पुलिस चेकपोस्ट को तोड़ते हुए श्रद्धालुओं को कुचलता चला गया। इसके बाद ट्रक मंदिर की बाहरी दीवार और गेट से टकरा गया, जिससे दीवार ढह गई। हादसे में कई लोग मलबे में दब गए। ड्राइवर ने बताया- ब्रेक फेल हो गए थे प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, ट्रक चालक गूगल मैप की मदद से रास्ते पर आगे बढ़ रहा था। हादसे के बाद चालक ने पुलिस को बताया कि ट्रक के ब्रेक फेल हो गए थे। हालांकि, दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। परिजनों ने पुलिस पर लगाया लापरवाही का आरोप हादसे के बाद मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। घटना में दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। पुलिस ने मामले में ट्रक चालक और ट्रक मालिक को गिरफ्तार कर लिया है। हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई की गई है। सिटी एसपी हटाए गए, 8 अफसर-पुलिसकर्मी सस्पेंड हादसे के बाद सरकार ने ग्वालियर के सिटी एसपी को हटा दिया है। इसके अलावा आठ अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। निलंबित किए गए लोगों में चार थाना प्रभारी (टीआई) भी शामिल हैं। फिलहाल हादसे की जांच जारी है। दुर्घटना में जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं के परिवारों में शोक का माहौल है, जबकि घायल अस्पताल में उपचार करा रहे हैं।
Breast Cancer Alert: 30 और 35 साल की महिलाओं ने गांठ को समझा सामान्य, इलाज के बाद मां बनने की उम्मीद

Breast Cancer Alert: 30 और 35 साल की महिलाओं ने गांठ को समझा सामान्य, इलाज के बाद मां बनने की उम्मीद

कम उम्र में ब्रेस्ट कैंसर का पता चलना कई महिलाओं के लिए बड़ा झटका हो सकता है। 30 और 35 साल की महिलाओं से जुड़ी इन घटनाओं में गांठ को सामान्य समझने की बात सामने आई है। हालांकि, इन दोनों महिलाओं की व्यक्तिगत मेडिकल जानकारी उपलब्ध नहीं है, इसलिए उनके इलाज और आगे की स्थिति के बारे में पक्के दावे करना सही नहीं होगा। डॉक्टरों के मुताबिक, स्तन में होने वाली हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन किसी भी नई गांठ या असामान्य बदलाव की जांच कराना जरूरी है। खासकर तब, जब गांठ बनी रहे या स्तन की त्वचा, आकार अथवा निप्पल में बदलाव दिखाई दे। Alcohol और Smoking से कैसे बढ़ सकता है खतरा? शराब का सेवन ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। शोध में यह भी संकेत मिले हैं कि धूम्रपान कई प्रकार के कैंसर का कारण बनता है और ब्रेस्ट कैंसर के साथ इसके संबंध पर भी अध्ययन जारी हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति को कैंसर होने के पीछे केवल एक ही कारण हो, यह जरूरी नहीं है। उम्र, पारिवारिक इतिहास, आनुवंशिक बदलाव और दूसरे स्वास्थ्य संबंधी कारक भी भूमिका निभाते हैं। <Cite refs={[“turn391271search0″,”turn391271search1″,”turn687346search1”]}/> क्या ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के बाद मां बन सकती हैं महिलाएं? ब्रेस्ट कैंसर का इलाज कराने के बाद भी कुछ महिलाओं के लिए गर्भधारण करना संभव होता है। हालांकि, यह कैंसर के प्रकार, उसकी अवस्था और इलाज में इस्तेमाल की गई दवाओं पर निर्भर करता है। कीमोथेरेपी और कुछ हार्मोनल उपचार प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए जिन महिलाओं को भविष्य में मां बनना है, उन्हें इलाज शुरू करने से पहले अपने कैंसर विशेषज्ञ और फर्टिलिटी विशेषज्ञ से विकल्पों पर चर्चा करनी चाहिए। जरूरत के अनुसार एग फ्रीजिंग या एम्ब्रियो फ्रीजिंग जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। <Cite refs={[“turn391271search2″,”turn687346search2”]}/> ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों को न करें नजरअंदाज स्तन में नई गांठ, बगल में सूजन, त्वचा में बदलाव, निप्पल का अंदर की ओर खिंचना या असामान्य स्राव जैसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से जांच कराएं। इन लक्षणों का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता, लेकिन जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।
भोपाल में 12 साल की बच्ची की हत्या से आक्रोश:पिता बोले- बेटी को बचा नहीं सके, आरोपी को हमारे हवाले कर दो

भोपाल में 12 साल की बच्ची की हत्या से आक्रोश:पिता बोले- बेटी को बचा नहीं सके, आरोपी को हमारे हवाले कर दो

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बैरागढ़ इलाके में 12 साल की बच्ची की हत्या के बाद लोगों में भारी आक्रोश है। बेटी को खोने के गम में परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, स्थानीय लोगों ने पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन कर आरोपी को कड़ी सजा देने की मांग की। बच्ची के पिता का दर्द उनके शब्दों में साफ झलक रहा है। उन्होंने कहा कि वे अपनी बेटी को बचा नहीं सके। अब परिवार आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहता है। खंडहर में मिला बच्ची का शव यह घटना भोपाल के बैरागढ़ इलाके की है। 15 अक्टूबर की रात बच्ची घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिवार ने उसकी तलाश की और पुलिस को सूचना दी। 16 अक्टूबर की सुबह कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे एक पुराने खंडहरनुमा भवन में बच्ची का शव मिला। घटना की जानकारी सामने आने के बाद इलाके में शोक और गुस्से का माहौल बन गया। पुलिस ने घटनास्थल की जांच की और मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाए। जांच के आधार पर एक 23 वर्षीय संदिग्ध को हिरासत में लिया गया, जिसके बाद आरोपी की गिरफ्तारी की खबर भी सामने आई। थाने के बाहर प्रदर्शन, आरोपी को सौंपने की मांग बच्ची की मौत की खबर फैलने के बाद परिजन और स्थानीय लोग बैरागढ़ थाने के बाहर जुट गए। लोगों ने आरोपी को उनके हवाले करने या उसे कड़ी सजा देने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने थाने में घुसने की कोशिश भी की। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त बल तैनात किया। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। परिवार और स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले की गंभीरता से जांच हो और दोषी को कानून के तहत सख्त सजा मिले। पुलिस जांच में जुटी, कार्रवाई पर सबकी नजर पुलिस मामले की जांच कर रही है। घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों और अन्य जानकारियों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। बच्ची की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि जांच और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर होना जरूरी है। इस घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार के लिए यह अपूरणीय क्षति है। अब उनकी उम्मीद है कि जांच जल्द पूरी हो और उन्हें न्याय मिले। नोट: आरोपी के खिलाफ आरोपों और जांच के निष्कर्षों को अदालत के अंतिम फैसले से पहले सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
Imran Khan News: भारत छोड़ने के नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे एक्टर, OCI Card रद्द करने पर मांगा गया जवाब

Imran Khan News: भारत छोड़ने के नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे एक्टर, OCI Card रद्द करने पर मांगा गया जवाब

नई दिल्ली: अभिनेता Imran Khan ने भारत छोड़ने के नोटिस को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने इस नोटिस को गैरकानूनी बताया है। यह मामला उनके Overseas Citizen of India (OCI) कार्ड को रद्द करने की प्रक्रिया से भी जुड़ा है। अधिकारियों की ओर से इस संबंध में अभिनेता से जवाब मांगा गया है। क्या है पूरा मामला? इमरान खान को भारत छोड़ने से संबंधित नोटिस जारी किया गया है। अभिनेता ने इस नोटिस पर आपत्ति जताते हुए इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि यह नोटिस गैरकानूनी है। इस मामले में उनके OCI कार्ड को रद्द करने को लेकर भी सवाल उठे हैं। संबंधित अधिकारियों ने इस संबंध में उनसे जवाब मांगा है। अब इस मामले में हाईकोर्ट की सुनवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी। क्या होता है OCI Card? OCI यानी Overseas Citizen of India कार्ड भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों को भारत में रहने और कई सुविधाओं का लाभ लेने के लिए दिया जाता है। हालांकि, यह भारतीय नागरिकता नहीं है। कुछ कानूनी परिस्थितियों में OCI कार्ड रद्द भी किया जा सकता है। आगे क्या होगा? इमरान खान की याचिका पर हाईकोर्ट में होने वाली कार्यवाही से इस मामले की आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, अभिनेता ने नोटिस को चुनौती दी है और OCI कार्ड रद्द करने से जुड़े मामले में जवाब मांगे जाने का मुद्दा भी सामने है। इस मामले में अदालत का रुख और संबंधित अधिकारियों की अगली कार्रवाई अहम होगी।

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