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Ram Mandir Donation Theft Case

Breaking: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच तेज, सुप्रीम कोर्ट ने भी मांगी रिपोर्ट

अयोध्या | Desh Harpal Digital अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी (SIT) और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। जांच एजेंसियों के अनुसार अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से नकदी, आभूषण और अन्य संपत्तियां बरामद की हैं। जांच के दौरान करीब 50 बैंक खातों की भी जांच की जा रही है, ताकि कथित रूप से चढ़ावे की रकम के लेन-देन का पूरा नेटवर्क सामने आ सके। SIT की रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल एसआईटी की प्रारंभिक जांच में मंदिर के चढ़ावे की गिनती और सुरक्षा व्यवस्था में 9 बड़ी खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार इन्हीं कमियों का फायदा उठाकर कथित गबन को अंजाम दिया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 40 दिनों में 70 बार कथित चोरी की घटनाएं हुईं। एसआईटी ने अविनाश शुक्ला को इस कथित नेटवर्क का प्रमुख आरोपी बताया है। टिन्नू यादव की दोबारा रिमांड की तैयारी मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से पूछताछ अभी जारी है। पुलिस अब दोबारा रिमांड लेकर यह जानने की कोशिश करेगी कि कथित चोरी का पूरा नेटवर्क कैसे संचालित होता था और इसमें अन्य लोगों की क्या भूमिका थी। इस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को एंटी करप्शन कोर्ट में प्रस्तावित है। ट्रस्ट में भी हुए बड़े बदलाव चढ़ावा चोरी विवाद के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में भी बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए गए हैं। साथ ही नए सीईओ की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। RSS और मुख्यमंत्री योगी का बयान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए एसआईटी जांच पर भरोसा जताया है और कहा है कि दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जांच में अभी तक करीब 150 लोगों में से केवल 8 के खिलाफ ठोस साक्ष्य मिले हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की कथित करतूत के आधार पर पूरे ट्रस्ट या अयोध्या की छवि को बदनाम करना उचित नहीं है। (The Times of India) Desh Harpal Analysis राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला केवल आर्थिक अनियमितता नहीं, बल्कि जनविश्वास और पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और अंतिम निष्कर्ष एसआईटी की विस्तृत रिपोर्ट तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
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US Iran War Latest Update America Iran Conflict Iran Attack on Kuwait Bahrain US Military Base Strait of Hormuz News HIMARS Missile Launcher Middle East Breaking News

Breaking: अमेरिका-ईरान संघर्ष और भड़का, कुवैत-बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का जवाबी हमला, होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा खतरा

Baking News: US-Iran War Latest Update | Iran Attacks US Bases in Kuwait & Bahrain | Hormuz Crisis अमेरिका के ईरान पर बड़े हमलों के बाद ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला करने का दावा किया। जानिए ताजा अपडेट। नई दिल्ली/तेहरान | Desh Harpal Desk मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। रविवार को अमेरिका ने ईरान के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की। इसके जवाब में सोमवार को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। अमेरिका ने 140 से अधिक ठिकानों को बनाया निशाना अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में किश्म, सीरिक, बंदर अब्बास, जास्क, बुशेहर, खोंदाब, महशहर, बेहबहान, अंदीमेश्क, देजफुल, अहवाज, अबादान और खुर्रमशहर सहित कई अहम सैन्य और सामरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का दावा है कि पिछले कुछ दिनों में ईरान के 300 से अधिक सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की गई है, जिनमें मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन स्टोरेज और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं। ईरान का पलटवार IRGC के अनुसार— होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा संकट ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने साफ संकेत दिए हैं कि होर्मुज स्ट्रेट उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे अहम हिस्सा है। ईरान के वरिष्ठ नेता के सलाहकार मोहसिन रेजाई ने कहा, “होर्मुज स्ट्रेट हमारे लिए कई परमाणु बमों से भी अधिक महत्वपूर्ण है।” यही जलमार्ग दुनिया के लगभग 20% तेल व्यापार का प्रमुख रास्ता माना जाता है। यहां बढ़ते तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट 1. ओमान के पास जहाज पर हमला ‘GFS Galaxy’ जहाज पर हुए हमले में 11 भारतीय सवार थे। 10 को सुरक्षित बचा लिया गया जबकि एक भारतीय अभी भी लापता है। भारत सरकार ने नागरिक जहाजों पर हमलों की कड़ी निंदा की है। 2. अमेरिका का दावा अमेरिका का कहना है कि पिछले तीन दिनों में उसने ईरान के 300 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। 3. लेबनान पर इजराइल की कार्रवाई दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में इजराइली सेना ने नए हमले किए हैं। 4. कुवैत की सीमा चौकियों को नुकसान कुवैत ने पुष्टि की है कि हालिया हमलों में उत्तरी क्षेत्र की तीन सीमा चौकियां प्रभावित हुई हैं। 5. ईरान के खुजेस्तान में हमला महशहर के एक वाटर प्रोजेक्ट पर प्रोजेक्टाइल गिरने से एक व्यक्ति की मौत और चार लोग घायल हुए हैं। ईरान की मिसाइल ताकत कितनी बड़ी? अमेरिकी खुफिया एजेंसी ODNI के अनुसार— वैश्विक असर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और बढ़ता है तो इसका सीधा असर—
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PM Modi Slovakia Visit, India Slovakia Agreements,

Big Diplomacy Win: स्लोवाकिया दौरे पर PM मोदी ने किए 14 बड़े समझौते, भारत-यूरोप संबंधों को मिली नई रफ्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्लोवाकिया दौरे में रक्षा, AI, क्वांटम कम्युनिकेशन, शिक्षा, स्वास्थ्य और श्रम प्रवास सहित 14 महत्वपूर्ण समझौते हुए। जानिए भारत को क्या मिलेगा फायदा। नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्लोवाकिया यात्रा भारत की कूटनीतिक उपलब्धियों में एक महत्वपूर्ण अध्याय बनकर उभरी है। इस दौरान जहां पीएम मोदी को स्लोवाकिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया, वहीं दोनों देशों ने रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), शिक्षा, विज्ञान, स्वास्थ्य, पर्यटन और क्वांटम कम्युनिकेशन समेत 14 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों के साथ भारत और स्लोवाकिया के संबंध आधिकारिक रूप से “व्यापक साझेदारी” (Comprehensive Partnership) के स्तर तक पहुंच गए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। भारत-स्लोवाकिया संबंधों को मिला नया दर्जा दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक साझेदारी का दर्जा देने पर सहमति जताई। इसके तहत व्यापार, निवेश, तकनीक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मिली मजबूती यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग पर एक Letter of Intent (LoI) पर हस्ताक्षर किए गए। इससे रक्षा उद्योग, सैन्य सहयोग, तकनीकी साझेदारी और रक्षा निर्यात के नए अवसर खुलेंगे। साथ ही दोनों देशों ने आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) स्थापित करने पर भी सहमति बनाई, जिससे आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सहयोग बढ़ेगा। AI और क्वांटम टेक्नोलॉजी में साथ काम करेंगे दोनों देश भारत और स्लोवाकिया ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए “इंडिया चेयर ऑन AI” स्थापित करने संबंधी समझौता किया। इसके अलावा क्वांटम कम्युनिकेशन और महत्वपूर्ण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा को लेकर भी एक अहम MoU पर हस्ताक्षर हुए, जो भविष्य की साइबर सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिक्षा, विज्ञान और रिसर्च में बढ़ेगा सहयोग दोनों देशों के प्रमुख शैक्षणिक और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच कई समझौते हुए हैं। इनमें: शामिल हैं। स्वास्थ्य, पर्यटन और संस्कृति को भी मिला बढ़ावा स्वास्थ्य क्षेत्र में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरोपैथी, पुणे और स्लोवाकिया के हेल्थ स्पा संस्थान के बीच MoU हुआ। इसके अलावा: को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। भारतीय छात्रों और कामगारों को होगा फायद दोनों देशों ने श्रम प्रवास (Labour Mobility) और कांसुलर वार्ता शुरू करने पर सहमति जताई है। इससे स्लोवाकिया में काम कर रहे भारतीय कामगारों, छात्रों और प्रवासी भारतीयों को बेहतर सुविधाएं और सहायता मिल सकेगी। सुरक्षित और कानूनी श्रम प्रवास के लिए हुए समझौते से रोजगार, कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण के नए अवसर भी खुलेंगे। PM मोदी ने क्या कहा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और स्लोवाकिया के बीच बढ़ता विश्वास, साझा प्राथमिकताएं और भविष्य के लिए समान दृष्टिकोण इस नई साझेदारी की मजबूत नींव हैं। उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) को जल्द अंतिम रूप देने में स्लोवाकिया के समर्थन के लिए आभार जताया और कहा कि इससे दोनों देशों के उद्योगों, स्टार्टअप्स और व्यापारिक समुदाय को बड़ा लाभ मिलेगा। देश हरपल विश्लेषण स्लोवाकिया दौरे में हुए 14 समझौते केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भारत की यूरोप में बढ़ती रणनीतिक उपस्थिति का संकेत भी हैं। रक्षा, AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी और शिक्षा जैसे भविष्य-केंद्रित क्षेत्रों में सहयोग भारत को तकनीकी और आर्थिक रूप से नई ताकत प्रदान कर सकता है। (रिपोर्ट: देश हरपल डिजिटल डेस्क)
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Trump Iran Deal
Breaking: 47 साल बाद अमेरिका-ईरान रिश्तों में बड़ी बर्फ पिघली, ट्रम्प बोले- ‘तेल को फिर बहने दो’ दुनिया की सबसे तनावपूर्ण दुश्मनियों में से एक माने जाने वाले अमेरिका और ईरान के रिश्तों में बड़ा मोड़ आता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों ने कई महीनों तक चली कठिन और गोपनीय बातचीत के बाद एक प्रारंभिक शांति समझौते (MoU) को अंतिम रूप देने पर सहमति जता दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान के साथ समझौता लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाई जाएगी। ट्रम्प ने अपने संदेश में लिखा, “दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू कर लो। तेल को फिर बहने दो।” 19 जून को जेनेवा में हो सकते हैं हस्ताक्षर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अनुसार दोनों देशों के प्रतिनिधि 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में प्रस्तावित समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। यदि यह बैठक होती है तो यह करीब 47 वर्षों में अमेरिका और ईरान के बीच सबसे महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय संपर्क माना जाएगा। ईरान ने रखीं तीन अहम शर्तें ईरानी अधिकारियों के अनुसार अंतिम समझौते से पहले अमेरिका को तीन प्रमुख कदम उठाने होंगे— ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि आगामी 60 दिनों की बातचीत इन्हीं शर्तों के पालन पर निर्भर करेगी। 24 अरब डॉलर की संपत्तियां जारी होने की चर्चा ईरानी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका 24 अरब डॉलर तक की ईरानी जमी हुई संपत्तियां चरणबद्ध तरीके से जारी कर सकता है। इनमें से लगभग 12 अरब डॉलर शुरुआती दौर में उपलब्ध कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इस दावे की अमेरिका की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। परमाणु कार्यक्रम बना रहेगा सबसे बड़ा मुद्दा विशेषज्ञों का मानना है कि असली परीक्षा अब शुरू होगी। 2015 के परमाणु समझौते से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद दोनों देशों के बीच अविश्वास लगातार बढ़ा था। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की पिछली रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने यूरेनियम संवर्धन का स्तर 60 प्रतिशत तक पहुंचा दिया था, जिसे पश्चिमी देश चिंता का विषय मानते हैं। आगामी 60 दिनों की बातचीत में परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रमुख मुद्दे रहेंगे। इजराइल की चुप्पी बढ़ा रही अटकलें अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर इजराइल ने अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इजराइल समझौते की कुछ शर्तों को लेकर असहज है क्योंकि उसे वार्ता प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया। ईरान में भी उठ रहे विरोध के स्वर समझौते की खबर सामने आने के बाद ईरान के कट्टरपंथी समूहों और कुछ रूढ़िवादी नेताओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यह समझौता ईरान की रणनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता है। हालांकि राष्ट्रपति मसूद पेजशकियान ने आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा कि देशहित में काम करने वालों को गद्दार कहना उचित नहीं है। वैश्विक अर्थव्यवस्था को मिल सकती है राहत यदि समझौता सफल रहता है तो इसका सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल बाजार पर देखने को मिल सकता है। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसके खुलने से तेल आपूर्ति सामान्य होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है। फिलहाल दुनिया की नजरें 19 जून को जेनेवा में होने वाली संभावित बैठक पर टिकी हैं, जहां यह ऐतिहासिक समझौता औपचारिक रूप ले सकता है।
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Narendra Modi vs Nehru

सिर्फ नेहरू का रिकॉर्ड टूटा, या मोदी ने भारत की दिशा भी बदल दी…?

संपादकीय | निखिल सिद्धभट्टी 10 जून 2026 भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण तारीख बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले मोदी ने आज अपने कार्यकाल के 4399 दिन पूरे कर लिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया, जो 1952 से 1964 तक लगातार 4398 दिनों तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे थे। यहां एक तथ्य समझना जरूरी है। जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त 1947 से ही देश के प्रधानमंत्री थे, लेकिन उस समय वे स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त हुए थे। 1952 में देश के पहले आम चुनाव के बाद कांग्रेस संसदीय दल ने उन्हें नेता चुना और वे 13 मई 1952 से 27 मई 1964 तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे। अब, 74 वर्ष बाद नरेंद्र मोदी ने उस रिकॉर्ड को पार कर लिया है। यही वह क्षण है, जिसने हमें यह संपादकीय लिखने के लिए प्रेरित किया। क्योंकि यह केवल एक रिकॉर्ड टूटने की घटना नहीं है। यह भारत के दो सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों, दो अलग-अलग विचारधाराओं और दो अलग-अलग विकास मॉडलों की तुलना का अवसर भी है। एक रिकॉर्ड, लेकिन दो बिल्कुल अलग भारत जब नेहरू ने 1952 में जनता के जनादेश के साथ सरकार बनाई, तब भारत एक नवजात राष्ट्र था। देश विभाजन की त्रासदी झेल चुका था। करोड़ों लोग गरीबी में जी रहे थे। औद्योगिक आधार लगभग नहीं था। साक्षरता बेहद कम थी और लोकतंत्र का भविष्य भी अनिश्चित था। नेहरू के सामने चुनौती थी—भारत को टूटने से बचाना और उसे खड़ा करना। दूसरी ओर, जब नरेंद्र मोदी 2014 में सत्ता में आए, तब भारत दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था था। अर्थव्यवस्था वैश्विक मंच पर हाफ राही थी, सेना मजबूत थी पर उसे नियंत्रण में रखा था , परमाणु शक्ति मौजूद थी और सूचना क्रांति देश में प्रवेश कर चुकी थी पर उस की गाती धीमी थी । लेकिन मोदी के सामने सवाल अलग था—क्या भारत केवल एक विकासशील देश बना रहेगा या 21वीं सदी की वैश्विक शक्ति बनेगा? यहीं से दोनों नेताओं की तुलना शुरू होती है। नेहरू ने नींव रखी, इसमें विवाद नहीं आज जो लोग नेहरू की आलोचना करते हैं, उन्हें भी यह स्वीकार करना होगा कि स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं की बुनियाद उनके दौर में रखी गई। संसद, चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय की प्रतिष्ठा, IIT, AIIMS, बड़े बांध, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग—ये सब उस दौर की उपलब्धियां हैं। दुनिया के कई नवस्वतंत्र देशों में लोकतंत्र असफल हो गया। कहीं सेना सत्ता में आ गई, कहीं तानाशाही स्थापित हो गई। भारत उस रास्ते पर नहीं गया। यह नेहरू युग की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। लेकिन इतिहास का दूसरा पक्ष भी है। नेहरू ने जिस समाजवादी आर्थिक मॉडल को अपनाया, उसने राज्य को अत्यधिक शक्तिशाली बना दिया। लाइसेंस-परमिट राज ने आने वाले दशकों में निजी क्षेत्र की ऊर्जा को सीमित कर दिया। और फिर 1962 में चीन युद्ध ने उनकी विदेश नीति की सबसे बड़ी कमजोरी उजागर कर दी। “हिंदी-चीनी भाई-भाई” का आदर्शवाद चीन की सैन्य आक्रामकता के सामने टिक नहीं सका। यहीं से नेहरू की विरासत पर बहस शुरू होती है। मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है? यहां अक्सर लोग UPI, एक्सप्रेस-वे, जी-20, अनुच्छेद 370 या डिजिटल इंडिया की बात करते हैं। लेकिन क्या यही मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि है? शायद नहीं। मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह हो सकती है कि उन्होंने भारत की शासन प्रणाली और विकास की सोच को बदलने का प्रयास किया। दशकों तक भारत में सरकार योजनाएं बनाती थी, लेकिन लाभार्थी तक पहुंचने से पहले व्यवस्था में रिसाव हो जाता था। जनधन, आधार और मोबाइल के संयोजन ने पहली बार सरकार और नागरिक के बीच सीधा संपर्क स्थापित किया। UPI केवल एक भुगतान प्रणाली नहीं है। यह उस नए भारत का प्रतीक है जो तकनीक को शासन का उपकरण बना रहा है। इसी तरह सड़क, रेलवे, एयरपोर्ट और रक्षा ढांचे में जो निवेश हुआ, उसने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति दी। चीन: दो युग, दो प्रतिक्रियाएं यदि किसी एक मुद्दे पर नेहरू और मोदी की तुलना सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, तो वह चीन है। 1962 में भारत तैयार नहीं था। राजनीतिक आदर्शवाद राष्ट्रीय सुरक्षा पर भारी पड़ गया। 2020 में गलवान घाटी में फिर चीन सामने था। यह कहना सही नहीं होगा कि भारत ने चीन को पराजित कर दिया। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि इस बार भारत ने 1962 जैसी असहाय स्थिति नहीं दिखाई। सीमा पर सड़कें बनीं, सैन्य तैनाती बढ़ी और चीन को लेकर नीति अधिक यथार्थवादी दिखाई दी। यहीं दोनों नेताओं के दृष्टिकोण का मूल अंतर दिखता है। असली बहस मोदी बनाम नेहरू नहीं, दो मॉडलों की है नेहरू का भारत राज्य-नियंत्रित अर्थव्यवस्था, समाजवादी सोच और गुटनिरपेक्ष विदेश नीति पर आधारित था। मोदी का भारत बाज़ार आधारित विकास, डिजिटल शासन, राष्ट्रीय पहचान और बहु-संरेखीय (Multi-alignment) कूटनीति पर आधारित दिखाई देता है। नेहरू संस्थानों के जरिए भारत को मजबूत करना चाहते थे। मोदी नेतृत्व और क्रियान्वयन की गति के जरिए भारत को बदलना चाहते हैं। एक ने भारत का ढांचा बनाया। दूसरा उस ढांचे को नए सिरे से आकार देने की कोशिश कर रहा है। क्या मोदी नेहरू से बेहतर प्रधानमंत्री साबित हुए हैं? इस प्रश्न का उत्तर राजनीति नहीं, इतिहास देगा। लेकिन 2026 में खड़े होकर यदि केवल प्रभाव, निर्णायकता, वैश्विक उपस्थिति, डिजिटल परिवर्तन, इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण और शासन की गति को मापदंड बनाया जाए, तो नरेंद्र मोदी का कार्यकाल स्वतंत्र भारत के सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में निश्चित रूप से गिना जाएगा। इतना ही नहीं, वे संभवतः नेहरू के बाद पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने भारत के विकास मॉडल की दिशा बदलने का प्रयास किया है। नरेंद्र मोदी द्वारा नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ना केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है। यह उस राजनीतिक यात्रा का प्रतीक है जिसमें भारत ने समाजवादी दौर से डिजिटल दौर तक, गुटनिरपेक्षता से बहु-संरेखीय कूटनीति तक और धीमी प्रशासनिक प्रक्रियाओं से तकनीक-आधारित शासन तक का सफर तय किया है। नेहरू ने आधुनिक भारत की नींव रखी थी। मोदी उस भारत को...
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Exclusive: खान सर की कोचिंग में आखिर हुआ क्या? फायरिंग की खबरों के बीच जांच में नया मोड़

क्या सच में चली थी गोली?”पटना में खान सर की कोचिंग को लेकर सामने आई खबर ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिस अब तोड़फोड़, मारपीट और कथित फायरिंग—तीनों एंगल से जांच कर रही है। पूरी रिपोर्ट पढ़ें। पटना के चर्चित शिक्षक Khan Sir की कोचिंग को लेकर मंगलवार रात सामने आई घटनाओं ने पूरे बिहार में चर्चा छेड़ दी है। शुरुआत में फायरिंग की खबरों से हड़कंप मच गया, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ मामला अब केवल गोलीबारी तक सीमित नहीं दिख रहा है। पुलिस के अनुसार कुछ युवकों ने मुसल्लहपुर हाट स्थित कोचिंग परिसर में घुसकर कथित तौर पर तोड़फोड़ की, पोस्टर फाड़े और विरोध करने पर गार्ड के साथ मारपीट की। घायल गार्ड का इलाज कराया गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और सभी पहलुओं की जांच कर रही है। खान सर ने क्या कहा? खान सर ने घटना के पीछे प्रतिद्वंद्वी कोचिंग संस्थानों की भूमिका होने की आशंका जताई है। उनका कहना है कि कम फीस में शिक्षा उपलब्ध कराने के कारण कुछ लोगों को आपत्ति है। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस जांच जारी है। पुलिस क्या जांच कर रही है? पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी। क्यों चर्चा में है यह मामला? मुसल्लहपुर हाट पटना का बड़ा कोचिंग हब माना जाता है, जहां हजारों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में इस घटना ने छात्रों की सुरक्षा और कोचिंग संस्थानों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। “
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Bhopal Water Supply News

Breaking News: भोपाल में 36 घंटे पानी का संकट, कोलार लाइन बंद होने से 75 इलाके प्रभावित

भोपाल। राजधानी भोपाल के लाखों नागरिकों के लिए जरूरी खबर है। कोलार जलापूर्ति परियोजना में आवश्यक तकनीकी कार्य और रखरखाव के चलते शहर के कई हिस्सों में पानी की सप्लाई प्रभावित होने जा रही है। नगर निगम से मिली जानकारी के अनुसार करीब 75 इलाकों में जल वितरण व्यवस्था पर असर पड़ सकता है, जिसके चलते लोगों को पहले से पानी का पर्याप्त भंडारण करने की सलाह दी गई है। शहर की जलापूर्ति व्यवस्था का बड़ा हिस्सा कोलार और नर्मदा परियोजनाओं पर निर्भर है। विशेषज्ञों के अनुसार कोलार लाइन में किसी भी प्रकार का शटडाउन या तकनीकी कार्य होने पर बड़ी आबादी प्रभावित होती है। हाल के वर्षों में भी कई बार मेंटेनेंस और पाइपलाइन लीकेज के कारण जलापूर्ति बाधित हुई है। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह कार्य भविष्य में बेहतर और निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है। हालांकि शटडाउन की अवधि के दौरान कई क्षेत्रों में पानी नहीं पहुंच पाएगा या कम दबाव से सप्लाई होगी। ऐसे में नागरिकों से सहयोग की अपील की गई है। नागरिक क्या करें? क्यों महत्वपूर्ण है कोलार परियोजना? भोपाल की जलापूर्ति का बड़ा हिस्सा कोलार परियोजना से आता है। शहर में बढ़ती आबादी और पानी की बढ़ती मांग के बीच यह परियोजना राजधानी की प्रमुख लाइफलाइन मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी तकनीकी बाधा का सीधा असर हजारों परिवारों पर पड़ता है। यदि आप भोपाल के कोलार, अरेरा, शाहपुरा, टीटी नगर, न्यू मार्केट या आसपास के क्षेत्रों में रहते हैं तो अगले 36 घंटों के लिए पानी की व्यवस्था पहले से कर लेना बेहतर होगा। नगर निगम द्वारा सप्लाई बहाल होने के बाद स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।
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Trump Netanyahu Phone Call

Trump vs Netanyahu: फोन कॉल में भड़के ट्रंप, इजरायल PM को बताया ‘पागल’, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

Trump-Netanyahu Phone Call: दोस्ती में दरार या कूटनीतिक दबाव? अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के बीच हुई एक फोन कॉल ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायली सैन्य कार्रवाई को लेकर ट्रंप बेहद नाराज नजर आए। बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान ट्रंप ने नेतन्याहू को “क्रेजी” (पागल) तक कह दिया और इजरायल की सैन्य रणनीति पर कड़ी नाराजगी जताई। आखिर क्यों भड़के ट्रंप? रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल ने बेरूत के दक्षिणी हिस्सों और हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए थे। इन हमलों से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई थी। अमेरिकी प्रशासन को डर था कि यह सैन्य कार्रवाई अमेरिका और ईरान के बीच चल रही संवेदनशील वार्ताओं को प्रभावित कर सकती है। इसी मुद्दे पर ट्रंप ने नेतन्याहू से नाराजगी जताई। रिपोर्ट्स में क्या कहा गया? Axios और अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने फोन पर नेतन्याहू से कहा कि उनकी कार्रवाई इजरायल को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग कर सकती है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ट्रंप ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया और इजरायली हमलों को “अनुपात से ज्यादा” प्रतिक्रिया बताया। क्या रुक सकते हैं हमले? बातचीत के बाद ऐसी खबरें सामने आईं कि इजरायल ने बेरूत पर कुछ संभावित हमलों की योजना रोक दी है। वहीं ट्रंप ने दावा किया कि दोनों पक्ष तनाव कम करने की दिशा में कदम बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। हालांकि नेतन्याहू ने साफ किया कि यदि हिजबुल्लाह की ओर से हमले जारी रहे तो इजरायल जवाबी कार्रवाई करता रहेगा। मिडिल ईस्ट में बढ़ सकती है नई चुनौती विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र पर पड़ सकता है। इससे अमेरिका-ईरान वार्ता, लेबनान की स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। यह भी पढ़े –Iran ने अमेरिका के साथ सीजफायर वार्ता रोकी | होर्मुज स्ट्रेट बंद करने की तैयारी, लेबनान हमलों पर विरोध Desh Harpal Analysis ट्रंप और नेतन्याहू के रिश्ते लंबे समय से मजबूत माने जाते रहे हैं, लेकिन हालिया घटनाक्रम यह संकेत दे रहा है कि मिडिल ईस्ट संकट को लेकर दोनों नेताओं के बीच रणनीतिक मतभेद उभर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह विवाद केवल कूटनीतिक दबाव है या अमेरिका-इजरायल संबंधों में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत।
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Commercial LPG Price Hike June 2026: 19 किलो LPG सिलेंडर महंगा, जानें नई कीमतें

Breaking News: फिर महंगा हुआ कमर्शियल LPG सिलेंडर, 19 किलो सिलेंडर के दाम बढ़े, होटल-रेस्टोरेंट पर बढ़ेगा बोझ

कमर्शियल LPG सिलेंडर फिर महंगा, 1 जून से बढ़ी कीमतें; होटल-रेस्टोरेंट कारोबार पर असर नई दिल्ली। जून महीने की शुरुआत के साथ ही कारोबारियों को महंगाई का एक और झटका लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 1 जून 2026 से लागू हो गई हैं। दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर अब ₹3113.50 में मिलेगा, जो पहले ₹3071.50 था। यानी एक सिलेंडर पर ₹42 की बढ़ोतरी हुई है। किन शहरों में कितना बढ़ा दाम? तेल कंपनियों द्वारा जारी नई दरों के अनुसार देश के विभिन्न शहरों में कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में ₹42 से ₹53.50 तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दिल्ली समेत कई महानगरों में नई कीमतें लागू हो चुकी हैं। घरेलू गैस सिलेंडर पर राहत हालांकि इस बार घरेलू रसोई गैस (14.2 किलो) उपभोक्ताओं को राहत मिली है। घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे करोड़ों परिवारों को फिलहाल अतिरिक्त बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। क्यों बढ़े कमर्शियल LPG के दाम? रिपोर्ट्स के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती लागत के कारण तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। ऊर्जा सुरक्षा और LPG भंडारण को मजबूत करने के लिए कीमतों में यह संशोधन किया गया है। होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबार होंगे प्रभावित कमर्शियल LPG सिलेंडर का उपयोग मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग सर्विस और छोटे उद्योग करते हैं। कीमत बढ़ने से इन व्यवसायों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। पिछले महीने भी हुआ था बड़ा इजाफा गौरतलब है कि मई 2026 में भी कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में भारी बढ़ोतरी की गई थी। तब 19 किलो सिलेंडर के दाम में लगभग ₹993 की वृद्धि हुई थी। लगातार तीसरे महीने हुई बढ़ोतरी ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। देश हरपल निष्कर्ष घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन कमर्शियल LPG सिलेंडर की बढ़ती कीमतें होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों की लागत बढ़ाने वाली हैं। आने वाले दिनों में इसका असर बाजार की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
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IPL 2026 Final: विराट कोहली का तूफान, RCB ने लगातार दूसरी बार जीती IPL ट्रॉफी, गुजरात टाइटंस को हराया

Virat Magic! RCB ने रचा इतिहास, लगातार दूसरी बार IPL Champion बनी बेंगलुरु Royal Challengers Bengaluru ने एक बार फिर आईपीएल में अपना दबदबा साबित कर दिया। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए IPL 2026 फाइनल में RCB ने Gujarat Titans को हराकर लगातार दूसरी बार IPL ट्रॉफी अपने नाम कर ली। मैच में गुजरात टाइटंस ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 155/8 रन बनाए। जवाब में RCB ने विराट कोहली की विस्फोटक बल्लेबाजी की बदौलत लक्ष्य को 18 ओवर के अंदर हासिल कर लिया। Virat Kohli ने खेली जवाबदारी वाली पारी फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में एक बार फिर Virat Kohli ने जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने सिर्फ 33 गेंदों में 58 रन बनाकर गुजरात के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। उनकी पारी में 7 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। RCB की शुरुआत भी बेहद तेज रही, जहां वेंकटेश अय्यर ने 16 गेंदों में 32 रन बनाए। RCB के गेंदबाजों ने पलटा मैच टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने उतरी RCB ने गुजरात को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। गुजरात की ओर से वॉशिंगटन सुंदर ने 50 रन की संघर्षपूर्ण पारी खेली, लेकिन बाकी बल्लेबाज बड़ी साझेदारी नहीं बना सके। RCB के तेज गेंदबाजों और स्पिनर्स ने शानदार रणनीति के साथ गुजरात के बल्लेबाजी क्रम को लगातार दबाव में रखा। यही वजह रही कि GT सिर्फ 155 रन तक ही पहुंच सकी। फाइनल का टर्निंग पॉइंट मैच का सबसे बड़ा मोमेंट तब आया जब विराट कोहली और वेंकटेश अय्यर ने शुरुआती ओवरों में गुजरात के गेंदबाजों की लाइन-लेंथ बिगाड़ दी। RCB ने सिर्फ 4 ओवर में 55 रन जोड़कर मैच पर पूरी पकड़ बना ली थी। इसके बाद गुजरात की वापसी मुश्किल हो गई। लगातार दूसरी ट्रॉफी के साथ RCB ने बनाया रिकॉर्ड पिछले सीजन का खिताब जीतने के बाद RCB ने 2026 में भी अपना दबदबा कायम रखा। लगातार दो IPL ट्रॉफी जीतकर टीम अब मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स जैसे दिग्गज फ्रेंचाइजियों की सूची में शामिल हो गई है। मैच का स्कोरकार्ड टीम स्कोर गुजरात टाइटंस 155/8 (20 ओवर) रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु 156+ रन (18 ओवर से पहले) परिणाम RCB ने जीत दर्ज की Desh Harpal Verdict 18 साल इंतजार के बाद पहली ट्रॉफी जीतने वाली RCB अब एक नई विरासत बना रही है। विराट कोहली का अनुभव, टीम का संतुलन और गेंदबाजों की रणनीति इस जीत की सबसे बड़ी वजह रही। IPL 2026 का फाइनल सिर्फ एक मैच नहीं बल्कि RCB के सुनहरे दौर की कहानी बन गया।
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अक्षर पटेल का ऑलराउंड शो, शुभमन गिल की कप्तानी पारी; भारत ने इंग्लैंड को 6 विकेट से हराकर पहला वनडे जीता

बर्मिंघम। ऑलराउंडर अक्षर पटेल के शानदार प्रदर्शन और कप्तान शुभमन गिल की बेहतरीन बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने इंग्लैंड को पहले वनडे मुकाबले में 6 विकेट से हराकर सीरीज में विजयी शुरुआत की। एजबेस्टन मैदान पर खेले गए मैच में भारत ने 259 रन के लक्ष्य को 45.2 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 262 रन बनाकर हासिल कर लिया। अक्षर पटेल ने नाबाद 57 रन बनाए, जबकि वॉशिंगटन सुंदर ने भी नाबाद 52 रन की महत्वपूर्ण पारी खेलकर टीम को जीत तक पहुंचाया। कप्तान शुभमन गिल ने 80 रन बनाए, लेकिन मैच के दौरान क्रैम्प्स की समस्या के कारण उन्हें रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान छोड़ना पड़ा। शुरुआती झटकों के बाद गिल ने संभाली पारी लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। रोहित शर्मा 11 रन और विराट कोहली 5 रन बनाकर जल्दी आउट हो गए। इसके बाद कप्तान शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर ने तीसरे विकेट के लिए 101 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम की पारी को संभाला। श्रेयस 35 रन बनाकर रनआउट हुए, जबकि केएल राहुल बोल्ड होकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर ने जिम्मेदारी संभालते हुए पांचवें विकेट के लिए 102 रन की अविजित साझेदारी की और भारत को शानदार जीत दिलाई। जो रूट और लियाम डॉसन ने इंग्लैंड को संभाला इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने 47.5 ओवर में 258 रन बनाए। इंग्लैंड की शुरुआत मजबूत रही और टीम ने 61 रन तक कोई विकेट नहीं गंवाया, लेकिन इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने जोरदार वापसी करते हुए महज 19 रन के भीतर 5 विकेट झटक दिए। मध्यक्रम में जो रूट ने 76 रन और लियाम डॉसन ने 68 रन की अहम पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों ने छठे विकेट के लिए 121 रन की साझेदारी कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। अक्षर पटेल ने गेंद और बल्ले दोनों से निभाई अहम भूमिका भारतीय गेंदबाजों में अक्षर पटेल सबसे सफल रहे। उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट अपने नाम किए। वहीं प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बरार ने 2-2 विकेट हासिल किए। जसप्रीत बुमराह और शिवम दुबे को एक-एक सफलता मिली। गेंद और बल्ले दोनों से बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले अक्षर पटेल ने टीम इंडिया की जीत में सबसे अहम भूमिका निभाई और भारत ने सीरीज की शानदार शुरुआत की। क्रिकेट और खेल जगत की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

CAG रिपोर्ट में जल जीवन मिशन की पोल: छत्तीसगढ़ में 33% नल कनेक्शन गैर-कार्यशील, ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा

रायपुर। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन (JJM) के क्रियान्वयन को लेकर कई गंभीर खामियों का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार कमजोर योजना, धीमा क्रियान्वयन, निगरानी की कमी और गलत रिपोर्टिंग के कारण ग्रामीण पेयजल योजनाओं की प्रभावशीलता और दीर्घकालिक स्थिरता प्रभावित हुई है। मार्च 2024 तक की अवधि पर आधारित ‘छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन का प्रदर्शन ऑडिट’ रिपोर्ट मंगलवार को वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में पेश की। रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य सरकार ने इसके लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया, जबकि उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद मिशन के कार्यों में तेजी आई है। योजना निर्माण में गंभीर खामियां CAG की रिपोर्ट के मुताबिक जल जीवन मिशन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कई स्थानों पर गांव स्तर की कार्ययोजना तैयार किए बिना ही जिला स्तरीय योजनाएं बना दी गईं, जबकि राज्य स्तरीय कार्ययोजना तैयार ही नहीं की गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि राज्य स्तर पर जल सुरक्षा योजना नहीं बनाई गई, जिससे जल स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता और योजनाओं के रखरखाव की स्पष्ट रणनीति विकसित नहीं हो सकी। 33 प्रतिशत नल कनेक्शन निकले गैर-कार्यशील रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2025 तक 50 लाख ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था। जनवरी 2025 तक 40.10 लाख फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (FHTC) लगाए गए। हालांकि, इनमें से 13.31 लाख (करीब 33%) कनेक्शन गैर-कार्यशील पाए गए। इसके पीछे सूख चुके जल स्रोत, अधूरी ओवरहेड टंकियां, बिजली कनेक्शन का अभाव और सोलर पंप स्थापित नहीं होना प्रमुख कारण बताए गए हैं। ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा राज्य के 19,656 गांवों को मार्च 2024 तक ‘हर घर जल’ प्रमाणित किया जाना था, लेकिन केवल 716 गांव (3.64 प्रतिशत) ही इस लक्ष्य तक पहुंच सके। ऑडिट में ऐसे मामले भी सामने आए, जहां अधूरे कार्यों के बावजूद गांवों को ‘हर घर जल’ प्रमाणित कर दिया गया। किसी भी जिले में 100% कवरेज नहीं मार्च 2024 तक राज्य के 33 में से किसी भी जिले और 146 में से किसी भी विकासखंड में 100 प्रतिशत नल जल कवरेज नहीं था। योजनाओं की प्रगति बेहद धीमी रिपोर्ट के अनुसार जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत 29,153 सिंगल विलेज स्कीम में से मार्च 2024 तक केवल 172 योजनाएं पूरी हो सकीं। इनमें भी सिर्फ 32 ग्राम पंचायतों को योजनाओं का संचालन सौंपा गया। वहीं, स्वीकृत 70 मल्टी विलेज स्कीम में से मार्च 2025 तक एक भी योजना पूरी नहीं हो सकी, जिससे करीब 9.85 लाख घरों तक सतही जल स्रोतों से पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य प्रभावित हुआ। सोलर आधारित योजनाओं में भी अनियमितताएं CAG ने पाया कि कई सोलर आधारित पेयजल योजनाओं में निर्धारित क्षमता से अधिक नल कनेक्शन जोड़ दिए गए। इसके कारण 28,984 परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुसार पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। वित्तीय और गुणवत्ता संबंधी कमियां रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य सरकार केंद्र और राज्यांश मिलाकर 6,480.04 करोड़ रुपये की आवश्यक वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित करने में विफल रही। साथ ही मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), जिला खनिज न्यास (DMF), सांसद निधि और CSR जैसी योजनाओं के संसाधनों के समन्वय के लिए भी कोई प्रभावी रणनीति नहीं बनाई गई। जल गुणवत्ता जांच की व्यवस्था कमजोर राज्य की 75 जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में से केवल 4 प्रयोगशालाएं ही सभी 13 निर्धारित जल गुणवत्ता मानकों की जांच करने में सक्षम पाई गईं। इसके अलावा 37 प्रतिशत प्रयोगशालाओं को NABL की मान्यता प्राप्त नहीं थी। रिपोर्ट में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी निर्धारित मानकों के अनुसार जल गुणवत्ता जांच नहीं होने की बात कही गई है। CAG की प्रमुख सिफारिशें रिपोर्ट में सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं, जिनमें शामिल हैं— सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को ठहराया जिम्मेदार CAG रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार मिशन को खराब स्थिति में छोड़कर गई थी, जिसके कारण परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की समय-सीमा 2024 से बढ़ाकर 2028 तक कर दी है। मार्च 2026 में स्वीकृत मिशन के दूसरे चरण को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा सके।

रायपुर में 16 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा

रायपुर। राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की विश्वविख्यात रथयात्रा 16 जुलाई को धार्मिक आस्था, वैदिक परंपराओं और भव्य आयोजन के साथ निकाली जाएगी। वहीं बाहुड़ा यात्रा 24 जुलाई को आयोजित होगी। मंदिर परिसर में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र तथा माता सुभद्रा के तीनों रथों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। रथयात्रा से पहले 14 जुलाई की शाम 6 बजे भगवान का नेत्रोत्सव आयोजित किया जाएगा। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सांस्कृतिक एकता, भाईचारे और सनातन परंपरा का भी प्रतीक माना जाता है। भक्त और भगवान के मिलन का महापर्व श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष एवं विधायक पुरंदर मिश्रा ने बताया कि रथयात्रा भक्तों और भगवान के प्रत्यक्ष मिलन का महापर्व है। वर्ष में केवल इसी अवसर पर भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मंदिर से बाहर निकलकर श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। 11 वैदिक पंडित कराएंगे विशेष पूजन रथयात्रा के दिन सुबह 11 वैदिक पंडितों के सान्निध्य में भगवान का विशेष अभिषेक, पूजन और हवन कराया जाएगा। चंदन, केसर, कस्तूरी, कपूर सहित विभिन्न सुगंधित द्रव्यों से भगवान का दिव्य स्नान कराया जाएगा। इसके बाद भगवान को गजामूंग महाप्रसाद अर्पित किया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और मंगल वाद्यों की गूंज के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा अपने-अपने रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए प्रस्थान करेंगे। राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा रथयात्रा की सबसे प्रमुख परंपराओं में शामिल ‘छेरा पहरा’ का निर्वहन इस वर्ष भी किया जाएगा। परंपरा के अनुसार राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भगवान के रथ के आगे सोने की झाड़ू से मार्ग की प्रतीकात्मक सफाई करेंगे। यह परंपरा सेवा, समर्पण और विनम्रता का संदेश देती है। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। भजन, झांकियों और लोकनृत्य से गूंजेगा शहर रथयात्रा के दौरान महिला मंडलों द्वारा भजन-कीर्तन, आकर्षक सांस्कृतिक झांकियां और पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। “जय जगन्नाथ” के जयघोष के साथ मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहेगा। श्रद्धालुओं से की गई विशेष अपील श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति ने प्रदेशभर के श्रद्धालुओं से सपरिवार रथयात्रा में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने और सनातन संस्कृति की इस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनने की अपील की है। रायपुर और छत्तीसगढ़ की धार्मिक, सांस्कृतिक और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, सरकार और बोर्ड से 10 दिन में मांगा जवाब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि “कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता।” हालांकि, नीति को लागू करने में सामने आ रही व्यावहारिक चुनौतियों को देखते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार, CBSE और संबंधित पक्षों से 10 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी। यह नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की गई है। इसके तहत छात्रों को दो भारतीय भाषाएं और एक विदेशी भाषा पढ़नी होगी। इससे कई छात्रों को पहले से पढ़ी जा रही भाषाओं में बदलाव करना पड़ सकता है। क्या है विवाद? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CBSE ने पर्याप्त तैयारी के बिना नई भाषा नीति लागू कर दी है। उनके मुताबिक कई स्कूलों में संबंधित भाषाओं के शिक्षक, पाठ्यपुस्तकें और आवश्यक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे छात्रों और शिक्षकों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े अहम सवाल और जवाब 1. मामला क्या है? सुप्रीम कोर्ट में CBSE के उस नियम को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है। इनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। हालांकि, CBSE ने 6 जून को संशोधित दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया था कि इस वर्ष कक्षा 10 के छात्रों को तीसरी भाषा (R3) की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। 2. नए नियम में क्या बदलाव हुआ है? पहले कई छात्र अंग्रेजी के साथ एक भारतीय और एक विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच या जर्मन) पढ़ते थे। नए नियम के अनुसार अब तीन भाषाओं में से कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य है। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही चुनी जा सकेगी। 3. याचिका किसने दायर की? यह याचिका छात्र यशिका भंडारी, अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी की ओर से दायर की गई है। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर, मुकुल रोहतगी और गोपाल शंकरनारायणन ने पैरवी की। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। 4. याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्ति क्या है? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई व्यवस्था अचानक लागू कर दी गई। कई भारतीय भाषाओं की किताबें उपलब्ध नहीं हैं और अधिकांश स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक भी नहीं हैं। ऐसे में छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। 5. किताबों को लेकर क्या दलील दी गई? सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि 22 भारतीय भाषाओं में से फिलहाल केवल तीन भाषाओं की पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध हैं। ऐसे में बाकी भाषाओं की पढ़ाई शुरू करना व्यवहारिक रूप से कठिन होगा। 6. शिक्षकों की कमी पर क्या कहा गया? याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि नई भारतीय भाषाएं पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता होगी, लेकिन इतने कम समय में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति और प्रशिक्षण संभव नहीं है। 7. क्या विदेशी भाषाएं बंद हो जाएंगी? नहीं। छात्र फ्रेंच, जर्मन, जापानी जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ सकते हैं, लेकिन इसके साथ उन्हें दो भारतीय भाषाएं भी पढ़नी होंगी। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में होगी। 8. क्या तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा होगी? नहीं। CBSE ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) का अलग बोर्ड एग्जाम नहीं होगा, ताकि छात्रों पर अतिरिक्त परीक्षा का दबाव न बढ़े। 9. अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार केंद्र सरकार, CBSE और NCERT अपना जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद 29 जुलाई को अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी। नई शिक्षा नीति 2020 क्या है? भारत सरकार ने 29 जुलाई 2020 को नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को मंजूरी दी थी। यह 34 वर्षों बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में किया गया सबसे बड़ा बदलाव माना जाता है। इससे पहले शिक्षा नीति 1986 में लागू हुई थी, जिसे 1992 में संशोधित किया गया था। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना, छात्रों में व्यावहारिक ज्ञान और कौशल विकसित करना है। केंद्र सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से 2030 तक लागू करने का लक्ष्य रखा है। चूंकि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए इसे लागू करने में केंद्र और राज्य सरकारों दोनों की भूमिका होती है। देश, शिक्षा और करियर से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

बिलासपुर: CM हेल्पलाइन शिकायतों के खराब निराकरण पर PHE के ईई को नोटिस, कलेक्टर ने अधिकारियों को लगाई फटकार

बिलासपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर संचालित सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों के निराकरण की समीक्षा बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं मिलने पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने पीएचई विभाग के कार्यपालन अभियंता (ईई) रूपेश कुमार धनंजय को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। टीएल (समय-सीमा) बैठक में कलेक्टर ने सभी विभागों के अधिकारियों से कहा कि शिकायतों का केवल औपचारिक निपटारा करने के बजाय उनका गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने समय-सीमा का पालन करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी। एकल शिक्षकीय स्कूलों में जल्द होंगे अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने एकल शिक्षकीय स्कूलों में तत्काल अतिथि शिक्षक नियुक्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर सेवानिवृत्त शिक्षकों की सेवाएं भी ली जाएं, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। जर्जर स्कूल भवनों में नहीं लगेंगी कक्षाएं कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जर्जर भवनों में किसी भी स्थिति में कक्षाएं संचालित नहीं की जाएं। ऐसे विद्यालयों के लिए वैकल्पिक भवन की व्यवस्था करने और नए भवन या अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के प्रस्ताव शीघ्र भेजने को कहा गया। स्वास्थ्य विभाग को भी लगाई फटकार जिला खनिज न्यास (DMF) से जुड़े कार्यों की समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए डीएमएफ की राशि का प्रभावी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाए। बैठक में दिए गए प्रमुख निर्देश कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि शासन की योजनाओं और जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभाग समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करें। बिलासपुर और छत्तीसगढ़ की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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