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Rahul Gandhi CBSE News, CBSE OSM Controversy, Rahul Gandhi Students Meeting, CBSE Result Issue 2026, OSM Row News Hindi, CBSE Evaluation System, Rahul Gandhi Latest News, Education News Hindi

Education Row: CBSE छात्रों से मिले Rahul Gandhi, OSM विवाद पर केंद्र सरकार को घेरा

Education Crisis: CBSE OSM विवाद के बीच छात्रों से मिले राहुल गांधी नई दिल्ली। CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर जारी विवाद अब राजनीतिक और शैक्षणिक दोनों स्तरों पर बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उन छात्रों से मुलाकात की, जिन्होंने उत्तर पुस्तिकाओं में कथित गड़बड़ियों और मूल्यांकन संबंधी समस्याओं को लेकर आवाज उठाई थी। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि वे उन छात्रों से मिलने जा रहे हैं जिन्हें कुछ लोगों ने “एंटी-नेशनल”, “पाकिस्तानी” और “सोरोस एजेंट” तक कह दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर 17 साल के छात्रों को इस तरह के राजनीतिक विशेषणों से क्यों जोड़ा जा रहा है। क्या है पूरा OSM विवाद? CBSE ने इस वर्ष उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम लागू किया था। कई छात्रों और अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं में पेज गायब थे, कुछ उत्तर दिखाई नहीं दे रहे थे और मूल्यांकन पोर्टल में तकनीकी समस्याएं थीं। कांग्रेस और राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि OSM कॉन्ट्रैक्ट देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और पात्रता मानकों में बदलाव कर एक विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाया गया। सरकार और CBSE का क्या कहना है? केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने माना कि OSM सिस्टम में कुछ तकनीकी समस्याएं सामने आई हैं और उन्हें दूर करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं CBSE ने राहुल गांधी के आरोपों को “भ्रामक” बताते हुए कहा कि कॉन्ट्रैक्ट पूरी सरकारी प्रक्रिया और General Financial Rules के तहत दिया गया था। बोर्ड के अनुसार सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई। छात्रों के भविष्य पर बढ़ी चिंता इस पूरे विवाद के कारण लाखों छात्रों और उनके परिवारों में चिंता का माहौल है। विपक्ष लगातार स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है, जबकि सरकार और CBSE का दावा है कि सभी शिकायतों का समाधान किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लागू करने से पहले व्यापक परीक्षण और तकनीकी तैयारी आवश्यक थी, ताकि छात्रों के परिणामों पर किसी भी तरह का प्रभाव न पड़े। Desh Harpal Analysis यह विवाद केवल एक परीक्षा परिणाम का मामला नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता, तकनीकी विश्वसनीयता और छात्रों के अधिकारों से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में सरकार, CBSE और विपक्ष के बीच यह बहस और तेज हो सकती है।
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Breaking News: नेपाल PM बालेन शाह का बड़ा दावा, बोले- “नेपाल ने भी भारत की जमीन पर किया कब्जा”, सीमा विवाद पर नई बहस

नेपाल के प्रधानमंत्री Balendra Shah (बालेन शाह) ने भारत-नेपाल संबंधों को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। संसद में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि नेपाल ने भी कुछ स्थानों पर भारतीय जमीन पर कब्जा किया हुआ है। बालेन शाह ने कहा कि दोनों देशों के बीच वर्षों से चले आ रहे सीमा विवाद का समाधान टकराव नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से निकाला जाना चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे पर ब्रिटेन की भूमिका का भी जिक्र किया और कहा कि ऐतिहासिक संधियों के कारण UK की भागीदारी पर विचार किया जा सकता है। कौन सा क्षेत्र बना चर्चा का केंद्र? रिपोर्ट्स के अनुसार, नेपाल की ओर से जिस क्षेत्र का सबसे अधिक उल्लेख किया जा रहा है, उसमें सुस्ता, कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा जैसे विवादित इलाके शामिल हैं। नेपाल लंबे समय से इन क्षेत्रों पर अपना दावा करता रहा है, जबकि भारत इन्हें अपने प्रशासनिक क्षेत्र का हिस्सा मानता है। नेपाल सरकार ने दी सफाई बयान के बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय को सफाई देनी पड़ी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि बालेन शाह की कुछ टिप्पणियां उनके व्यक्तिगत विचार हो सकती हैं और नेपाल की आधिकारिक विदेश नीति भारत के साथ मैत्रीपूर्ण और कूटनीतिक संबंध बनाए रखने की है। क्यों महत्वपूर्ण है यह बयान? विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह का यह अब तक का सबसे चर्चित विदेश नीति संबंधी बयान है। इससे पहले भी वह “ग्रेटर नेपाल” और सीमा विवादों को लेकर अपने विचारों के कारण चर्चा में रह चुके हैं। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा, सांस्कृतिक संबंध और आर्थिक साझेदारी काफी मजबूत मानी जाती है। ऐसे में सीमा विवाद से जुड़े बयान दोनों देशों के राजनीतिक और कूटनीतिक समीकरणों पर असर डाल सकते हैं। देश हरपल विश्लेषण भारत और नेपाल के रिश्ते केवल पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक स्तर पर भी गहराई से जुड़े हुए हैं। ऐसे में सीमा विवाद जैसे मुद्दों का समाधान संवाद और आपसी सहमति से निकलना ही दोनों देशों के हित में माना जा रहा है।
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Kalyan Banerjee Attack News

हुगली में TMC सांसद कल्याण बनर्जी पर हमला, सिर में चोट का दावा; BJP-TMC आमने-सामने

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद जारी राजनीतिक तनाव के बीच रविवार को एक और बड़ा विवाद सामने आया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद Kalyan Banerjee ने दावा किया कि हुगली जिले के चंदीतला पुलिस स्टेशन के बाहर उन्हें निशाना बनाया गया और इस दौरान उनके सिर में चोट लगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कल्याण बनर्जी पुलिस स्टेशन में कथित पोस्ट-पोल हिंसा और पार्टी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में ज्ञापन देने पहुंचे थे। इसी दौरान वहां भारी संख्या में समर्थक और विरोधी कार्यकर्ता मौजूद थे, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। क्या हुआ घटनास्थल पर? बताया जा रहा है कि चंदीतला पुलिस स्टेशन के बाहर दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच तीखी नारेबाजी हुई। इसी दौरान धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। TMC नेताओं का आरोप है कि यह हमला सुनियोजित था और विपक्षी कार्यकर्ताओं ने सांसद को निशाना बनाया। वहीं भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक ड्रामा है और जनता में बढ़ते असंतोष को छिपाने की कोशिश की जा रही है। अभिषेक बनर्जी पर हमले के बाद दूसरा बड़ा विवाद यह घटना ऐसे समय में हुई है जब एक दिन पहले ही TMC के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee ने भी दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर इलाके में अपने ऊपर हमले का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि प्रदर्शनकारियों ने उन पर अंडे, पत्थर और ईंटें फेंकी थीं। लगातार दो दिनों में TMC नेताओं पर हमले के आरोपों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। बंगाल में क्यों बढ़ रहा है राजनीतिक तनाव? 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में राजनीतिक हिंसा और आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। भाजपा और TMC दोनों ही एक-दूसरे पर कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने और हिंसा फैलाने के आरोप लगा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी नतीजों के बाद पैदा हुई कटुता अब सड़क तक पहुंच चुकी है और छोटे-छोटे विरोध प्रदर्शन भी बड़े टकराव में बदल रहे हैं। इसे भी पढ़े –अभिषेक बनर्जी पर हमले के बाद ममता बनर्जी का बड़ा आरोप, अस्पताल और बीजेपी पर साधा निशाना पुलिस का क्या कहना है? घटना को लेकर पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि स्थानीय प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू करने की बात कही है। पुलिस घटनास्थल के वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी जुटा रही है। Desh Harpal Analysis लगातार दो दिनों में TMC के शीर्ष नेताओं पर हमले के आरोप पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक माहौल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।
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Weather Update: उत्तर भारत में बारिश से राहत, राजस्थान में धूल भरी आंधी का अलर्ट

Weather Update: उत्तर भारत में बदला मौसम का मिजाज, गर्मी से राहत लेकिन राजस्थान में नया खतरा

कई दिनों से भीषण गर्मी और हीटवेव की मार झेल रहे उत्तर भारत के लोगों को आखिरकार राहत मिलने लगी है। राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और आसपास के कई इलाकों में तेज हवाओं, धूल भरी आंधी और हल्की बारिश ने तापमान में गिरावट दर्ज कराई है। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से अगले कुछ दिनों तक मौसम में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। राजस्थान के कई जिलों में शुक्रवार और शनिवार को अचानक मौसम बदला। कई जगहों पर धूल भरी आंधी चली, जबकि कुछ क्षेत्रों में बारिश और बादल छाए रहने से लोगों को तपती गर्मी से राहत मिली। राजस्थान में धूल भरे तूफान ने बढ़ाई चिंता राजस्थान के बीकानेर, चूरू और आसपास के इलाकों में धूल भरे तूफान ने जनजीवन को प्रभावित किया। कई स्थानों पर दृश्यता लगभग शून्य तक पहुंच गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में आसमान पीले और काले रंग की धूल से ढका नजर आया। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश की संभावना जताई है। कुछ जिलों में ओलावृष्टि की भी चेतावनी जारी की गई है। हीटवेव से मिलेगी राहत पिछले सप्ताह राजस्थान के श्रीगंगानगर सहित कई शहरों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था। लेकिन अब बारिश और बादलों की वजह से तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 2-3 दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में हीटवेव का असर कम हो सकता है। IMD ने लोगों को दी ये सलाह किन राज्यों में रहेगा असर? मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक तेज हवाएं, गरज-चमक और हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिल सकती है।
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IPL 2026 Final: Virat Kohli की RCB या Shubman Gill की GT, आज अहमदाबाद में होगा खिताबी महामुकाबला

IPL 2026 Final: ट्रॉफी पर किसका कब्जा, RCB या GT? इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 का इंतजार आखिरकार खत्म होने जा रहा है। रविवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में defending champion Royal Challengers Bengaluru (RCB) और Gujarat Titans (GT) के बीच खिताबी मुकाबला खेला जाएगा। क्रिकेट प्रेमियों की नजरें एक बार फिर Virat Kohli, Rajat Patidar और Shubman Gill जैसे स्टार खिलाड़ियों पर टिकी हुई हैं। RCB लगातार दूसरे साल फाइनल में पहुंची है और टीम इतिहास रचते हुए लगातार दूसरी ट्रॉफी जीतने की कोशिश करेगी। वहीं गुजरात टाइटंस अपने घरेलू मैदान पर दूसरी बार IPL चैंपियन बनने के इरादे से उतरेगी। Rajat Patidar की कप्तानी बनी RCB की सबसे बड़ी ताकत इस सीजन RCB के कप्तान राजत पाटीदार ने शानदार नेतृत्व किया है। क्वालिफायर-1 में गुजरात टाइटंस के खिलाफ उनकी 33 गेंदों में नाबाद 93 रन की विस्फोटक पारी ने टीम को सीधे फाइनल में पहुंचाया था। RCB ने उस मुकाबले में 254 रन बनाकर IPL प्लेऑफ इतिहास का सबसे बड़ा स्कोर खड़ा किया था। Virat Kohli का अनुभव और Rajat Patidar की आक्रामक कप्तानी RCB के लिए बड़ा हथियार साबित हो सकती है। Shubman Gill और GT के सामने घरेलू मैदान का फायदा गुजरात टाइटंस की कप्तानी संभाल रहे Shubman Gill पूरे सीजन शानदार फॉर्म में रहे हैं। टीम ने शुरुआती संघर्ष के बाद जोरदार वापसी करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया है। अहमदाबाद की परिस्थितियां और घरेलू दर्शकों का समर्थन GT के पक्ष में जा सकता है। GT के लिए Jos Buttler, Sai Sudharsan, Rashid Khan और Kagiso Rabada जैसे खिलाड़ी मैच का रुख बदल सकते हैं। पिच रिपोर्ट: बल्लेबाजों की होगी मौज? नरेंद्र मोदी स्टेडियम की पिच आमतौर पर बल्लेबाजों के लिए मददगार मानी जाती है। हालांकि नई गेंद से तेज गेंदबाजों को शुरुआती स्विंग मिल सकती है। दूसरी पारी में ओस भी अहम भूमिका निभा सकती है, इसलिए टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी का फैसला कर सकती है। इन खिलाड़ियों की टक्कर तय करेगी फाइनल क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि ये मुकाबले मैच के नतीजे पर बड़ा असर डाल सकते हैं। संभावित प्लेइंग XI RCB Virat Kohli, Devdutt Padikkal, Rajat Patidar (कप्तान), Tim David, Krunal Pandya, Jitesh Sharma, Josh Hazlewood, Bhuvneshwar Kumar, Jacob Duffy, Rasikh Salam, Yash Dayal GT Shubman Gill (कप्तान), Sai Sudharsan, Jos Buttler, Rahul Tewatia, Rashid Khan, Jason Holder, Kagiso Rabada, Mohammed Siraj, Prasidh Krishna, Washington Sundar, Sai Kishore कहां देखें मैच? IPL 2026 Final का मुकाबला रविवार शाम नरेंद्र मोदी स्टेडियम, अहमदाबाद में खेला जाएगा। मैच का लाइव प्रसारण टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध रहेगा। देश हरपल विश्लेषण यह मुकाबला सिर्फ दो टीमों के बीच नहीं बल्कि दो अलग क्रिकेट दर्शन की लड़ाई है। एक तरफ Virat Kohli का अनुभव और RCB की विजेता मानसिकता है, तो दूसरी तरफ Shubman Gill की युवा कप्तानी और GT का संतुलित स्क्वाड। ऐसे में IPL 2026 का फाइनल रोमांच, दबाव और बड़े सितारों के प्रदर्शन का यादगार संगम साबित हो सकता है।
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Abhishek Banerjee Attack

Breaking News: अभिषेक बनर्जी पर हमले के बाद ममता बनर्जी का बड़ा आरोप, अस्पताल और बीजेपी पर साधा निशाना

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद Abhishek Banerjee पर हुए कथित हमले के बाद राज्य में सियासी माहौल गरमा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने दावा किया है कि उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को उचित इलाज नहीं दिया गया और अस्पताल प्रशासन पर दबाव बनाया गया। क्या है पूरा मामला? जानकारी के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर इलाके में चुनाव बाद हिंसा से प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे थे। इसी दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों ने उनके काफिले का विरोध किया। आरोप है कि भीड़ ने उन पर अंडे, पत्थर और अन्य वस्तुएं फेंकी, जिससे वे घायल हो गए। घटना के बाद उन्हें कोलकाता के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां मेडिकल जांच की गई। बाद में उन्हें दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया गया। ममता बनर्जी ने लगाए गंभीर आरोप ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि अभिषेक बनर्जी के शरीर में खून के थक्के (Blood Clots) पाए गए हैं और उनकी हालत को देखते हुए उन्हें आईटीयू (ITU) में भर्ती किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन पर राजनीतिक दबाव बनाया गया, जिसके कारण उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। ममता ने कहा कि यदि अभिषेक को कुछ भी होता है तो इसकी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की होगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ पुलिस अधिकारियों और बीजेपी नेताओं द्वारा अस्पतालों को धमकाया जा रहा है। बीजेपी ने आरोपों को बताया राजनीतिक ड्रामा दूसरी ओर बीजेपी ने टीएमसी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जनता का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई दे रहा है। पार्टी नेताओं ने घटना की निंदा तो की, लेकिन इसे टीएमसी की राजनीतिक रणनीति बताया। बंगाल में बढ़ रहा राजनीतिक तनाव यह घटना ऐसे समय हुई है जब पश्चिम बंगाल पहले से ही चुनाव बाद हिंसा और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के दौर से गुजर रहा है। हाल के विधानसभा चुनावों के बाद राज्य में कई हिंसक घटनाएं सामने आई हैं और टीएमसी तथा बीजेपी लगातार एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अभिषेक बनर्जी पर हमला और उसके बाद अस्पताल को लेकर उठे विवाद आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति को और अधिक गरमा सकते हैं। देश हरपल विश्लेषण अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले ने सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल नहीं खड़े किए हैं, बल्कि स्वास्थ्य संस्थानों की निष्पक्षता और राजनीतिक दबाव को लेकर भी नई बहस शुरू कर दी है। जहां टीएमसी इसे लोकतंत्र पर हमला बता रही है, वहीं बीजेपी इसे जनता की नाराजगी का परिणाम कह रही है। आने वाले दिनों में इस मामले की जांच और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकती हैं।
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CBI Investigation: ट्विशा शर्मा केस में 3D स्कैनिंग और डमी टेस्ट से खुलेगा मौत का रहस्य, जांच में नया मोड़

भोपाल में ट्विशा शर्मा मौत मामला: 3D तकनीक और डमी टेस्ट से सुलझेगी गुत्थी? भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच अब नए और अत्याधुनिक तरीके से आगे बढ़ रही है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए घटनास्थल का 3D स्कैन कराया है और अब 80 किलो वजन वाली डमी के जरिए घटनाक्रम को दोबारा रीक्रिएट करने की तैयारी की है। जांच एजेंसी का मानना है कि केवल बयान और दस्तावेजों के आधार पर नहीं, बल्कि घटनास्थल के वैज्ञानिक पुनर्निर्माण से भी कई अहम सवालों के जवाब मिल सकते हैं। 3D स्कैनिंग से तैयार होगा पूरा घटनाक्रम CBI की टीम ने भोपाल स्थित घर का 3D स्कैन कराया है, जहां ट्विशा शर्मा मृत पाई गई थीं। इस तकनीक के जरिए घर का डिजिटल मॉडल तैयार किया जा रहा है, जिससे घटना के समय की परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा। सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी घर के हर कमरे, वस्तुओं की स्थिति और घटनास्थल के लेआउट का अध्ययन कर रही है ताकि किसी भी विसंगति की पहचान की जा सके। ‘टनल व्यू’ तकनीक से बनाई जा रही मिनट-दर-मिनट टाइमलाइन CBI ने जांच में “टनल व्यू” नामक आधुनिक तकनीक का भी उपयोग शुरू किया है। इसके तहत CCTV फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड, इंटरनेट गतिविधियां, वाई-फाई लॉग और गवाहों के बयानों को जोड़कर एक डिजिटल टाइमलाइन तैयार की जा रही है। इस प्रक्रिया से यह समझने की कोशिश की जा रही है कि घटना वाले दिन आखिर क्या-क्या हुआ और किस समय कौन-कौन व्यक्ति घर में मौजूद था। 80 किलो की डमी से होगा घटनाक्रम का पुनर्निर्माण CBI अब 80 किलो वजन की डमी का इस्तेमाल कर उस स्थिति को दोबारा तैयार करेगी, जैसा आरोपियों ने अपने बयानों में बताया है। एजेंसी यह जांचना चाहती है कि क्या घटनास्थल पर बताए गए तरीके से शव को नीचे उतारना वास्तव में संभव था या नहीं। इस प्रक्रिया के दौरान आरोपी पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को भी घटनास्थल पर ले जाया जा सकता है ताकि उनके दावों की सत्यता परखी जा सके। CBI हिरासत में आरोपी मामले में बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया जब विशेष अदालत ने पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को CBI की हिरासत में भेज दिया। एजेंसी दोनों से पूछताछ कर रही है और घटनाओं की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद CBI ने संभाली जांच मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच CBI को सौंपी गई। इसके बाद केंद्रीय एजेंसी ने FIR दोबारा दर्ज कर जांच शुरू की और भोपाल पुलिस से सभी दस्तावेज, फोरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्य अपने कब्जे में लिए। क्या है पूरा मामला? ट्विशा शर्मा की मई 2026 में भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इसके बाद परिवार ने दहेज प्रताड़ना और अन्य गंभीर आरोप लगाए। मामला लगातार तूल पकड़ता गया और अंततः जांच CBI को सौंप दी गई।
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LPG New Rules 2026

LPG New Rules 2026: PNG कनेक्शन वालों के लिए बड़ा अपडेट, जून से बदलेंगे गैस सिलेंडर के नियम

नई दिल्ली। देशभर में एलपीजी (LPG) और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) उपभोक्ताओं के लिए जून 2026 से नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियां ऐसे घरों की पहचान कर रही हैं जहां LPG और PNG दोनों कनेक्शन एक साथ इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इसके चलते लाखों उपभोक्ताओं के बीच यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या उनका गैस सिलेंडर कनेक्शन बंद हो सकता है। क्या है ‘One Household, One Connection’ नियम? सरकार का उद्देश्य घरेलू गैस की उपलब्धता को बेहतर बनाना और दुरुपयोग रोकना है। इसी के तहत कई शहरों में ऐसे घरों की जांच की जा रही है जिनके पास PNG सुविधा होने के बावजूद LPG कनेक्शन भी सक्रिय है। पहले ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं को LPG कनेक्शन सरेंडर करने के लिए कहा जा रहा था। हालांकि हाल ही में सरकार ने नियमों में संशोधन करते हुए उपभोक्ताओं को कुछ राहत भी दी है। अब क्या होगा LPG कनेक्शन का? नए संशोधित नियमों के अनुसार यदि किसी उपभोक्ता ने PNG कनेक्शन ले लिया है तो उसके पास दो विकल्प होंगे— 1. LPG कनेक्शन बंद करवा सकते हैं PNG मिलने के 30 दिनों के भीतर उपभोक्ता अपना LPG कनेक्शन बंद कराने के लिए आवेदन कर सकता है। 2. ट्रांसफर वाउचर ले सकते हैं यदि भविष्य में उपभोक्ता ऐसे इलाके में शिफ्ट होता है जहां PNG उपलब्ध नहीं है, तो वह ट्रांसफर वाउचर की मदद से LPG कनेक्शन दोबारा सक्रिय करवा सकेगा। किन लोगों को होगा सबसे ज्यादा फायदा? सरकार के इस फैसले से उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जिनकी नौकरी ट्रांसफरेबल है या जो अक्सर शहर बदलते रहते हैं। इसमें शामिल हैं— इन लोगों को हर बार नया गैस कनेक्शन लेने की लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। क्या गैस कनेक्शन तुरंत बंद हो जाएगा? विशेषज्ञों का मानना है कि हर शहर और गैस वितरण कंपनी की प्रक्रिया अलग हो सकती है। जिन क्षेत्रों में PNG नेटवर्क पूरी तरह उपलब्ध है, वहां कंपनियां उपभोक्ताओं से स्थिति स्पष्ट करने को कह सकती हैं। इसलिए यदि आपके पास दोनों कनेक्शन हैं तो अपनी गैस कंपनी से संपर्क कर नियमों की जानकारी लेना जरूरी है। सरकार ने नियम क्यों बदले? मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ी चिंताओं के बीच सरकार गैस संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर जोर दे रही है। इसी कारण PNG नेटवर्क को बढ़ावा देने और LPG की उपलब्धता जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। यदि आपके घर में PNG कनेक्शन मौजूद है और LPG कनेक्शन भी चालू है, तो जून 2026 में लागू होने वाले नियमों की जानकारी रखना बेहद जरूरी है। हालांकि नए संशोधन के बाद उपभोक्ताओं को ट्रांसफर वाउचर जैसी सुविधा मिल गई है, जिससे भविष्य में LPG कनेक्शन दोबारा लेने की परेशानी कम होगी। सरकार का उद्देश्य गैस वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उपभोक्ता हितैषी बनाना है।
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Shivraj Singh Chouhan Book Launch

शिवराज की किताब में बड़ा खुलासा: चुनावी संकट में PM मोदी ने ऐसे संभाला ‘मामाजी’ को

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ अपने 35 वर्षों के राजनीतिक और व्यक्तिगत अनुभवों को एक किताब में समेटा है।‘अपनापन : नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव’ नाम की इस किताब का विमोचन मंगलवार 26 मई को दिल्ली के पूसा स्थित NASC कॉम्प्लेक्स में हुआ। कार्यक्रम में देश के पूर्व प्रधानमंत्री H. D. Deve Gowda और पूर्व उपराष्ट्रपति M. Venkaiah Naidu विशेष रूप से मौजूद रहे। यह किताब सिर्फ राजनीतिक संस्मरण नहीं, बल्कि भाजपा संगठन, कार्यकर्ता संस्कृति, संकट के समय नेतृत्व और नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व के कई अनसुने पहलुओं को सामने लाती है। किताब में 1990 के दशक से लेकर कोरोना काल, मध्य प्रदेश चुनाव, संगठनात्मक संघर्ष और पहलगाम आतंकी हमले जैसे कई महत्वपूर्ण प्रसंगों का जिक्र किया गया है। 2023 चुनाव से पहले का सबसे भावुक किस्सा किताब का सबसे चर्चित हिस्सा 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से जुड़ा है। उस समय भाजपा की पहली सूची जारी हुई थी, लेकिन उसमें शिवराज सिंह चौहान का नाम शामिल नहीं था। विपक्ष ने इसे तुरंत मुद्दा बना लिया और यह नैरेटिव बनाया जाने लगा कि “मामाजी का दौर खत्म हो गया है।” इसी दौरान शिवराज सिंह चौहान के एक भाषण की लाइन —“यदि हम चले जाएंगे तो याद बहुत आएंगे”को सोशल मीडिया और विपक्षी नेताओं ने राजनीतिक विदाई के संकेत की तरह प्रचारित करना शुरू कर दिया। शिवराज लिखते हैं कि उस समय वे बेहद मानसिक दबाव में थे। तभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन आया। किताब के अनुसार, मोदी ने बातचीत की शुरुआत इन शब्दों से की— “मैं मुख्यमंत्री से बात नहीं कर रहा, मैं अपने शिवराज से बात कर रहा हूं।” शिवराज के मुताबिक, इसके बाद मोदी ने राजनीति की नहीं बल्कि उनके मन की बात की। उन्होंने कहा— “इतनी चिंता क्यों कर रहे हो? कुछ दिन एकांत में जाओ, अपने भीतर झांको, मन को शांत करो।” किताब में शिवराज ने लिखा है कि उस समय मोदी किसी प्रधानमंत्री की तरह नहीं, बल्कि बड़े भाई की तरह बात कर रहे थे। उन्हें समझ आ गया था कि यदि शिवराज का मनोबल कमजोर हुआ, तो उसका असर लाखों भाजपा कार्यकर्ताओं पर पड़ेगा। उत्तराखंड जाकर किया आत्ममंथन फोन कॉल के बाद शिवराज सिंह चौहान कुछ दिनों के लिए उत्तराखंड गए। गंगा किनारे समय बिताया और आत्ममंथन किया।वापस लौटने के बाद उन्होंने पूरी ताकत के साथ चुनाव प्रचार संभाला। किताब में दावा किया गया है कि उन्होंने सिर्फ 13-14 दिनों में 165 से ज्यादा जनसभाएं और रोड शो किए। भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश गया कि पार्टी नेतृत्व पूरी तरह उनके साथ खड़ा है। पहलगाम आतंकी हमला: “इस बार का ऑपरेशन अलग होगा” किताब की शुरुआत अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के जिक्र से होती है, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब दौरे पर थे, लेकिन घटना के बाद तुरंत भारत लौट आए। शिवराज किताब में लिखते हैं कि हमले के बाद हुई कैबिनेट बैठक में पूरे देश की तरह मंत्रियों के मन में भी गुस्सा और बेचैनी थी। लेकिन नरेंद्र मोदी बेहद शांत दिखाई दे रहे थे। उसी बैठक में उन्होंने कहा— “इस बार का ऑपरेशन अलग होगा। यह सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक से भी अलग होगा। जिन्होंने यह किया है, उन्हें और उनके आकाओं को नहीं छोड़ेंगे।” शिवराज के अनुसार, मोदी का यह बयान भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं बल्कि एक ठोस रणनीतिक संकल्प था। उन्होंने इसे संकट के समय धैर्यपूर्ण नेतृत्व की मिसाल बताया। 1998 का किस्सा: जब भाजपा कार्यकर्ताओं से पूछा गया था — किसके पास ईमेल आईडी है? किताब में 1990 के दशक का एक दिलचस्प प्रसंग भी शामिल है। उस समय भारत में कंप्यूटर और इंटरनेट का इस्तेमाल बहुत सीमित था। शिवराज लिखते हैं कि उन्होंने नरेंद्र मोदी को दिल्ली के एक छोटे से कमरे में घंटों डेस्कटॉप कंप्यूटर पर काम करते देखा था। उस समय मोदी भाजपा संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे थे और तकनीक को लेकर काफी उत्साहित रहते थे। 1998 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी के दौरान एक बैठक में मोदी ने कार्यकर्ताओं से पूछा— “किसके पास ईमेल आईडी है?” उस दौर में अधिकांश नेताओं और कार्यकर्ताओं को ईमेल की जानकारी तक नहीं थी। शिवराज के मुताबिक, मोदी राजनीति में तकनीक और डिजिटल कम्युनिकेशन की ताकत को बहुत पहले समझ चुके थे। कोरोना काल और कार्यकर्ताओं के लिए मोदी की चिंता किताब में कोरोना महामारी के दौरान के अनुभवों का भी जिक्र है। शिवराज ने लिखा कि महामारी के सबसे कठिन दौर में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार राज्यों के संपर्क में रहते थे। वे सिर्फ प्रशासनिक रिपोर्ट नहीं लेते थे, बल्कि यह भी पूछते थे कि कार्यकर्ताओं, गरीबों और जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंच रही है या नहीं।शिवराज ने दावा किया कि मोदी संगठन और सरकार के बीच तालमेल को लेकर हमेशा बेहद गंभीर रहे। किताब में क्या खास है? ‘अपनापन : नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव’ सिर्फ राजनीतिक घटनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि इसमें नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व के मानवीय पक्ष को सामने लाने की कोशिश की गई है। किताब में खास तौर पर इन विषयों पर फोकस किया गया है—
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America Iran Conflict, Hormuz Strait Attack,

US-Iran Conflict: सीजफायर वार्ता के बीच अमेरिका का बड़ा हमला, होर्मुज स्ट्रेट में बोट्स और मिसाइल साइट तबाह

मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सीजफायर वार्ता के दौरान अमेरिकी सेना ने मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट के पास बड़ी सैन्य कार्रवाई की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि ईरान समर्थित तत्व समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछा रहे थे, जिसके बाद अमेरिकी युद्धपोतों और सैनिकों की सुरक्षा को देखते हुए यह हमला किया गया। जानकारी के मुताबिक अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के नजदीक कई संदिग्ध बोट्स को निशाना बनाया। इसके साथ ही बंदर अब्बास पोर्ट के पास मौजूद सरफेस-टू-एयर मिसाइल साइट पर भी एयरस्ट्राइक की गई। हमले के बाद इलाके में धुएं के बड़े गुबार देखे गए। अमेरिका ने क्या कहा? सेंटकाम के प्रवक्ता टिमोथी हॉकिन्स ने बयान जारी करते हुए कहा कि यह कार्रवाई “सेल्फ-डिफेंस” के तहत की गई है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग और अमेरिकी नौसेना के जहाजों को खतरा था। हॉकिन्स ने कहा: “हम क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन अपने सैनिकों और सहयोगियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।” हालांकि अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अभी भी सीजफायर वार्ता को जारी रखना चाहता है और हालात को बड़े युद्ध में बदलने से बचना चाहता है। क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट? होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी सैन्य गतिविधि का असर सीधे ग्लोबल ऑयल मार्केट और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव और बढ़ा, तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। ईरान की प्रतिक्रिया का इंतजार अब तक ईरान की ओर से इस हमले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन क्षेत्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि तेहरान इस कार्रवाई को “उकसावे वाली सैन्य हरकत” मान सकता है। सूत्रों के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र और कई यूरोपीय देश दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं। क्या रुक जाएगी शांति वार्ता? डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस हमले से अमेरिका-ईरान वार्ता में अस्थायी रुकावट आ सकती है, लेकिन फिलहाल बातचीत पूरी तरह टूटती नहीं दिख रही। दोनों देशों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव है कि वे तनाव को सीमित रखें। यह भी पढ़ें: America-Iran के बीच तनाव कम होने के संकेत, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर बनी सहमति
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अक्षर पटेल का ऑलराउंड शो, शुभमन गिल की कप्तानी पारी; भारत ने इंग्लैंड को 6 विकेट से हराकर पहला वनडे जीता

बर्मिंघम। ऑलराउंडर अक्षर पटेल के शानदार प्रदर्शन और कप्तान शुभमन गिल की बेहतरीन बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने इंग्लैंड को पहले वनडे मुकाबले में 6 विकेट से हराकर सीरीज में विजयी शुरुआत की। एजबेस्टन मैदान पर खेले गए मैच में भारत ने 259 रन के लक्ष्य को 45.2 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 262 रन बनाकर हासिल कर लिया। अक्षर पटेल ने नाबाद 57 रन बनाए, जबकि वॉशिंगटन सुंदर ने भी नाबाद 52 रन की महत्वपूर्ण पारी खेलकर टीम को जीत तक पहुंचाया। कप्तान शुभमन गिल ने 80 रन बनाए, लेकिन मैच के दौरान क्रैम्प्स की समस्या के कारण उन्हें रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान छोड़ना पड़ा। शुरुआती झटकों के बाद गिल ने संभाली पारी लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। रोहित शर्मा 11 रन और विराट कोहली 5 रन बनाकर जल्दी आउट हो गए। इसके बाद कप्तान शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर ने तीसरे विकेट के लिए 101 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम की पारी को संभाला। श्रेयस 35 रन बनाकर रनआउट हुए, जबकि केएल राहुल बोल्ड होकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर ने जिम्मेदारी संभालते हुए पांचवें विकेट के लिए 102 रन की अविजित साझेदारी की और भारत को शानदार जीत दिलाई। जो रूट और लियाम डॉसन ने इंग्लैंड को संभाला इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने 47.5 ओवर में 258 रन बनाए। इंग्लैंड की शुरुआत मजबूत रही और टीम ने 61 रन तक कोई विकेट नहीं गंवाया, लेकिन इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने जोरदार वापसी करते हुए महज 19 रन के भीतर 5 विकेट झटक दिए। मध्यक्रम में जो रूट ने 76 रन और लियाम डॉसन ने 68 रन की अहम पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों ने छठे विकेट के लिए 121 रन की साझेदारी कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। अक्षर पटेल ने गेंद और बल्ले दोनों से निभाई अहम भूमिका भारतीय गेंदबाजों में अक्षर पटेल सबसे सफल रहे। उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट अपने नाम किए। वहीं प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बरार ने 2-2 विकेट हासिल किए। जसप्रीत बुमराह और शिवम दुबे को एक-एक सफलता मिली। गेंद और बल्ले दोनों से बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले अक्षर पटेल ने टीम इंडिया की जीत में सबसे अहम भूमिका निभाई और भारत ने सीरीज की शानदार शुरुआत की। क्रिकेट और खेल जगत की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

CAG रिपोर्ट में जल जीवन मिशन की पोल: छत्तीसगढ़ में 33% नल कनेक्शन गैर-कार्यशील, ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा

रायपुर। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन (JJM) के क्रियान्वयन को लेकर कई गंभीर खामियों का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार कमजोर योजना, धीमा क्रियान्वयन, निगरानी की कमी और गलत रिपोर्टिंग के कारण ग्रामीण पेयजल योजनाओं की प्रभावशीलता और दीर्घकालिक स्थिरता प्रभावित हुई है। मार्च 2024 तक की अवधि पर आधारित ‘छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन का प्रदर्शन ऑडिट’ रिपोर्ट मंगलवार को वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में पेश की। रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य सरकार ने इसके लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया, जबकि उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद मिशन के कार्यों में तेजी आई है। योजना निर्माण में गंभीर खामियां CAG की रिपोर्ट के मुताबिक जल जीवन मिशन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कई स्थानों पर गांव स्तर की कार्ययोजना तैयार किए बिना ही जिला स्तरीय योजनाएं बना दी गईं, जबकि राज्य स्तरीय कार्ययोजना तैयार ही नहीं की गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि राज्य स्तर पर जल सुरक्षा योजना नहीं बनाई गई, जिससे जल स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता और योजनाओं के रखरखाव की स्पष्ट रणनीति विकसित नहीं हो सकी। 33 प्रतिशत नल कनेक्शन निकले गैर-कार्यशील रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2025 तक 50 लाख ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था। जनवरी 2025 तक 40.10 लाख फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (FHTC) लगाए गए। हालांकि, इनमें से 13.31 लाख (करीब 33%) कनेक्शन गैर-कार्यशील पाए गए। इसके पीछे सूख चुके जल स्रोत, अधूरी ओवरहेड टंकियां, बिजली कनेक्शन का अभाव और सोलर पंप स्थापित नहीं होना प्रमुख कारण बताए गए हैं। ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा राज्य के 19,656 गांवों को मार्च 2024 तक ‘हर घर जल’ प्रमाणित किया जाना था, लेकिन केवल 716 गांव (3.64 प्रतिशत) ही इस लक्ष्य तक पहुंच सके। ऑडिट में ऐसे मामले भी सामने आए, जहां अधूरे कार्यों के बावजूद गांवों को ‘हर घर जल’ प्रमाणित कर दिया गया। किसी भी जिले में 100% कवरेज नहीं मार्च 2024 तक राज्य के 33 में से किसी भी जिले और 146 में से किसी भी विकासखंड में 100 प्रतिशत नल जल कवरेज नहीं था। योजनाओं की प्रगति बेहद धीमी रिपोर्ट के अनुसार जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत 29,153 सिंगल विलेज स्कीम में से मार्च 2024 तक केवल 172 योजनाएं पूरी हो सकीं। इनमें भी सिर्फ 32 ग्राम पंचायतों को योजनाओं का संचालन सौंपा गया। वहीं, स्वीकृत 70 मल्टी विलेज स्कीम में से मार्च 2025 तक एक भी योजना पूरी नहीं हो सकी, जिससे करीब 9.85 लाख घरों तक सतही जल स्रोतों से पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य प्रभावित हुआ। सोलर आधारित योजनाओं में भी अनियमितताएं CAG ने पाया कि कई सोलर आधारित पेयजल योजनाओं में निर्धारित क्षमता से अधिक नल कनेक्शन जोड़ दिए गए। इसके कारण 28,984 परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुसार पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। वित्तीय और गुणवत्ता संबंधी कमियां रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य सरकार केंद्र और राज्यांश मिलाकर 6,480.04 करोड़ रुपये की आवश्यक वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित करने में विफल रही। साथ ही मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), जिला खनिज न्यास (DMF), सांसद निधि और CSR जैसी योजनाओं के संसाधनों के समन्वय के लिए भी कोई प्रभावी रणनीति नहीं बनाई गई। जल गुणवत्ता जांच की व्यवस्था कमजोर राज्य की 75 जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में से केवल 4 प्रयोगशालाएं ही सभी 13 निर्धारित जल गुणवत्ता मानकों की जांच करने में सक्षम पाई गईं। इसके अलावा 37 प्रतिशत प्रयोगशालाओं को NABL की मान्यता प्राप्त नहीं थी। रिपोर्ट में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी निर्धारित मानकों के अनुसार जल गुणवत्ता जांच नहीं होने की बात कही गई है। CAG की प्रमुख सिफारिशें रिपोर्ट में सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं, जिनमें शामिल हैं— सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को ठहराया जिम्मेदार CAG रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार मिशन को खराब स्थिति में छोड़कर गई थी, जिसके कारण परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की समय-सीमा 2024 से बढ़ाकर 2028 तक कर दी है। मार्च 2026 में स्वीकृत मिशन के दूसरे चरण को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा सके।

रायपुर में 16 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा

रायपुर। राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की विश्वविख्यात रथयात्रा 16 जुलाई को धार्मिक आस्था, वैदिक परंपराओं और भव्य आयोजन के साथ निकाली जाएगी। वहीं बाहुड़ा यात्रा 24 जुलाई को आयोजित होगी। मंदिर परिसर में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र तथा माता सुभद्रा के तीनों रथों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। रथयात्रा से पहले 14 जुलाई की शाम 6 बजे भगवान का नेत्रोत्सव आयोजित किया जाएगा। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सांस्कृतिक एकता, भाईचारे और सनातन परंपरा का भी प्रतीक माना जाता है। भक्त और भगवान के मिलन का महापर्व श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष एवं विधायक पुरंदर मिश्रा ने बताया कि रथयात्रा भक्तों और भगवान के प्रत्यक्ष मिलन का महापर्व है। वर्ष में केवल इसी अवसर पर भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मंदिर से बाहर निकलकर श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। 11 वैदिक पंडित कराएंगे विशेष पूजन रथयात्रा के दिन सुबह 11 वैदिक पंडितों के सान्निध्य में भगवान का विशेष अभिषेक, पूजन और हवन कराया जाएगा। चंदन, केसर, कस्तूरी, कपूर सहित विभिन्न सुगंधित द्रव्यों से भगवान का दिव्य स्नान कराया जाएगा। इसके बाद भगवान को गजामूंग महाप्रसाद अर्पित किया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और मंगल वाद्यों की गूंज के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा अपने-अपने रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए प्रस्थान करेंगे। राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा रथयात्रा की सबसे प्रमुख परंपराओं में शामिल ‘छेरा पहरा’ का निर्वहन इस वर्ष भी किया जाएगा। परंपरा के अनुसार राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भगवान के रथ के आगे सोने की झाड़ू से मार्ग की प्रतीकात्मक सफाई करेंगे। यह परंपरा सेवा, समर्पण और विनम्रता का संदेश देती है। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। भजन, झांकियों और लोकनृत्य से गूंजेगा शहर रथयात्रा के दौरान महिला मंडलों द्वारा भजन-कीर्तन, आकर्षक सांस्कृतिक झांकियां और पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। “जय जगन्नाथ” के जयघोष के साथ मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहेगा। श्रद्धालुओं से की गई विशेष अपील श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति ने प्रदेशभर के श्रद्धालुओं से सपरिवार रथयात्रा में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने और सनातन संस्कृति की इस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनने की अपील की है। रायपुर और छत्तीसगढ़ की धार्मिक, सांस्कृतिक और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, सरकार और बोर्ड से 10 दिन में मांगा जवाब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि “कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता।” हालांकि, नीति को लागू करने में सामने आ रही व्यावहारिक चुनौतियों को देखते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार, CBSE और संबंधित पक्षों से 10 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी। यह नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की गई है। इसके तहत छात्रों को दो भारतीय भाषाएं और एक विदेशी भाषा पढ़नी होगी। इससे कई छात्रों को पहले से पढ़ी जा रही भाषाओं में बदलाव करना पड़ सकता है। क्या है विवाद? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CBSE ने पर्याप्त तैयारी के बिना नई भाषा नीति लागू कर दी है। उनके मुताबिक कई स्कूलों में संबंधित भाषाओं के शिक्षक, पाठ्यपुस्तकें और आवश्यक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे छात्रों और शिक्षकों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े अहम सवाल और जवाब 1. मामला क्या है? सुप्रीम कोर्ट में CBSE के उस नियम को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है। इनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। हालांकि, CBSE ने 6 जून को संशोधित दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया था कि इस वर्ष कक्षा 10 के छात्रों को तीसरी भाषा (R3) की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। 2. नए नियम में क्या बदलाव हुआ है? पहले कई छात्र अंग्रेजी के साथ एक भारतीय और एक विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच या जर्मन) पढ़ते थे। नए नियम के अनुसार अब तीन भाषाओं में से कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य है। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही चुनी जा सकेगी। 3. याचिका किसने दायर की? यह याचिका छात्र यशिका भंडारी, अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी की ओर से दायर की गई है। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर, मुकुल रोहतगी और गोपाल शंकरनारायणन ने पैरवी की। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। 4. याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्ति क्या है? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई व्यवस्था अचानक लागू कर दी गई। कई भारतीय भाषाओं की किताबें उपलब्ध नहीं हैं और अधिकांश स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक भी नहीं हैं। ऐसे में छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। 5. किताबों को लेकर क्या दलील दी गई? सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि 22 भारतीय भाषाओं में से फिलहाल केवल तीन भाषाओं की पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध हैं। ऐसे में बाकी भाषाओं की पढ़ाई शुरू करना व्यवहारिक रूप से कठिन होगा। 6. शिक्षकों की कमी पर क्या कहा गया? याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि नई भारतीय भाषाएं पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता होगी, लेकिन इतने कम समय में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति और प्रशिक्षण संभव नहीं है। 7. क्या विदेशी भाषाएं बंद हो जाएंगी? नहीं। छात्र फ्रेंच, जर्मन, जापानी जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ सकते हैं, लेकिन इसके साथ उन्हें दो भारतीय भाषाएं भी पढ़नी होंगी। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में होगी। 8. क्या तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा होगी? नहीं। CBSE ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) का अलग बोर्ड एग्जाम नहीं होगा, ताकि छात्रों पर अतिरिक्त परीक्षा का दबाव न बढ़े। 9. अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार केंद्र सरकार, CBSE और NCERT अपना जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद 29 जुलाई को अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी। नई शिक्षा नीति 2020 क्या है? भारत सरकार ने 29 जुलाई 2020 को नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को मंजूरी दी थी। यह 34 वर्षों बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में किया गया सबसे बड़ा बदलाव माना जाता है। इससे पहले शिक्षा नीति 1986 में लागू हुई थी, जिसे 1992 में संशोधित किया गया था। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना, छात्रों में व्यावहारिक ज्ञान और कौशल विकसित करना है। केंद्र सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से 2030 तक लागू करने का लक्ष्य रखा है। चूंकि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए इसे लागू करने में केंद्र और राज्य सरकारों दोनों की भूमिका होती है। देश, शिक्षा और करियर से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

बिलासपुर: CM हेल्पलाइन शिकायतों के खराब निराकरण पर PHE के ईई को नोटिस, कलेक्टर ने अधिकारियों को लगाई फटकार

बिलासपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर संचालित सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों के निराकरण की समीक्षा बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं मिलने पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने पीएचई विभाग के कार्यपालन अभियंता (ईई) रूपेश कुमार धनंजय को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। टीएल (समय-सीमा) बैठक में कलेक्टर ने सभी विभागों के अधिकारियों से कहा कि शिकायतों का केवल औपचारिक निपटारा करने के बजाय उनका गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने समय-सीमा का पालन करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी। एकल शिक्षकीय स्कूलों में जल्द होंगे अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने एकल शिक्षकीय स्कूलों में तत्काल अतिथि शिक्षक नियुक्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर सेवानिवृत्त शिक्षकों की सेवाएं भी ली जाएं, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। जर्जर स्कूल भवनों में नहीं लगेंगी कक्षाएं कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जर्जर भवनों में किसी भी स्थिति में कक्षाएं संचालित नहीं की जाएं। ऐसे विद्यालयों के लिए वैकल्पिक भवन की व्यवस्था करने और नए भवन या अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के प्रस्ताव शीघ्र भेजने को कहा गया। स्वास्थ्य विभाग को भी लगाई फटकार जिला खनिज न्यास (DMF) से जुड़े कार्यों की समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए डीएमएफ की राशि का प्रभावी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाए। बैठक में दिए गए प्रमुख निर्देश कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि शासन की योजनाओं और जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभाग समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करें। बिलासपुर और छत्तीसगढ़ की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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