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PM Modi

PM मोदी की बड़ी बैठक आज, कैबिनेट फेरबदल और बड़े फैसलों की चर्चा तेज

PM Modi Cabinet Meeting 2026: आज होगी बड़ी बैठक, कैबिनेट फेरबदल की अटकलें नई दिल्ली। Narendra Modi आज केंद्रीय मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) की अहम बैठक की अध्यक्षता करने जा रहे हैं। इस बैठक को मोदी सरकार 3.0 के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक रिव्यू से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस बैठक के बाद बड़े कैबिनेट फेरबदल और मंत्रालयों में बदलाव की चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं की प्रगति, मंत्रालयों के कामकाज, आगामी रणनीति और प्रशासनिक सुधारों पर चर्चा होगी। इसके अलावा कई मंत्रियों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट भी समीक्षा के दायरे में रह सकती है। जून में हो सकता है बड़ा कैबिनेट विस्तार राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि मोदी सरकार के पहले कार्यकाल की वर्षगांठ से पहले जून के दूसरे सप्ताह में कैबिनेट विस्तार और फेरबदल हो सकता है। ऐसे में आज की बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि सरकार संगठन और प्रशासन दोनों स्तरों पर “परफॉर्मेंस और चुनावी समीकरण” को ध्यान में रखते हुए बदलाव कर सकती है। कई राज्यों में आगामी चुनावों और हालिया राजनीतिक समीकरणों को भी इस रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। किन मुद्दों पर रहेगा फोकस? बैठक में इन प्रमुख विषयों पर चर्चा होने की संभावना है— सूत्रों के अनुसार, कुछ मंत्रालयों में जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण भी संभव माना जा रहा है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक किसी आधिकारिक फेरबदल की पुष्टि नहीं की गई है। राजनीतिक हलकों में क्यों बढ़ी हलचल? हाल ही में कई राज्यों में बीजेपी के संगठनात्मक बदलाव और कैबिनेट पुनर्गठन की चर्चाएं तेज हुई हैं। ऐसे में केंद्र स्तर पर भी बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार 2027 और 2029 की रणनीति को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों को मौका दे सकती है।
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Supreme Court Stray Dogs Verdict

Supreme Court का बड़ा फैसला आज! आवारा कुत्तों के आतंक पर क्या बदलेगा कानून?

देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामलों और आवारा कुत्तों के आतंक के बीच आज Supreme Court of India एक बड़ा फैसला सुनाने जा रहा है। यह मामला सिर्फ जानवरों की सुरक्षा का नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा और बच्चों की जान से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। Supreme Court Stray Dogs Verdict आज उन याचिकाओं पर फैसला देगा, जिनमें पहले दिए गए आदेशों में बदलाव की मांग की गई थी। इस केस में केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, पशु अधिकार संगठन, डॉग लवर्स, डॉग बाइट पीड़ित और Animal Welfare Board of India (AWBI) समेत कई पक्ष शामिल हैं। आखिर मामला क्या है? पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में बढ़ते स्ट्रे डॉग अटैक पर सख्त रुख अपनाया था। कोर्ट ने कहा था कि राजधानी को “आवारा कुत्तों से मुक्त” किया जाना चाहिए और सभी स्ट्रे डॉग्स को पकड़कर विशेष शेल्टर में भेजा जाए। लेकिन इस आदेश का कई पशु अधिकार संगठनों और एक्टिविस्ट्स ने विरोध किया। उनका कहना था कि यह आदेश व्यवहारिक नहीं है और इससे जानवरों के अधिकार प्रभावित होंगे। इसके बाद कई याचिकाएं दायर हुईं, जिन पर आज फैसला आने वाला है। देश में क्यों बढ़ रहा है स्ट्रे डॉग संकट? Dog Bite Crisis India 2026 ╔════════════════════════════╗║ 🚨 भारत में डॉग बाइट अलर्ट 🚨 ║╠════════════════════════════╣║ लाखों लोग हर साल शिकार ║║ बच्चों और बुजुर्गों पर खतरा ║║ Rabies के मामले भी चिंता ║║ नगर निगमों पर उठे सवाल ║╚════════════════════════════╝ विशेषज्ञों के अनुसार, नसबंदी कार्यक्रमों की धीमी रफ्तार, कचरा प्रबंधन की खराब व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही इस समस्या की बड़ी वजह हैं। कई राज्यों में स्ट्रे डॉग्स के हमलों से बच्चों और बुजुर्गों की मौत तक हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या कहा था? सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था: “अगर आप कुत्तों को खाना खिलाना चाहते हैं, तो उन्हें अपने घर ले जाइए।” कोर्ट ने यह भी कहा था कि डॉग बाइट मामलों में राज्यों को “भारी मुआवजा” देना पड़ सकता है। आज के फैसले पर पूरे देश की नजर आज आने वाला फैसला यह तय कर सकता है कि: इस फैसले का असर देशभर की नगर पालिकाओं, पशु अधिकार कानूनों और आम जनता की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
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Breaking News

Fuel Shock: भोपाल में पेट्रोल ₹109 के पार! दूसरी बार बढ़े दाम, आम आदमी की जेब पर डबल अटैक

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने एक बार फिर लोगों की टेंशन बढ़ा दी है। मंगलवार को तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी। महज एक हफ्ते के अंदर Petrol Diesel यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। इससे पहले 15 मई को भी ईंधन की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर तक का इजाफा किया गया था। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में पेट्रोल की कीमतें अब ₹110 के करीब पहुंच गई हैं, जिसने आम आदमी की जेब पर सीधा असर डाला है। बढ़ती महंगाई के बीच यह फैसला लोगों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। भोपाल में कितना महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल? ╔════════════════════════════════╗║ 🚘 भोपाल Fuel Rate Alert 🚘 ║╠══════════════╦═════════════════╣║ पेट्रोल ║ ₹109+ प्रति लीटर ║║ डीजल ║ ₹94+ प्रति लीटर ║╚══════════════╩═════════════════╝ भोपाल में पेट्रोल की कीमतें देश के कई बड़े शहरों से अधिक बनी हुई हैं, जिससे रोजाना वाहन चलाने वालों का बजट बिगड़ सकता है। देश के बड़े शहरों में पेट्रोल की नई कीमतें ⛽ Fuel Meter India 2026 शहर पेट्रोल डीजल बदलाव दिल्ली ₹98.64 ₹91.58 +90 पैसे मुंबई ₹107.59 ₹94.08 +90 पैसे कोलकाता ₹109.70 ₹96.07 +96 पैसे चेन्नई ₹104.49 ₹96.11 +80 पैसे भोपाल ₹109+ ₹94+ +90 पैसे क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगातार उछाल देखा जा रहा है। ईरान-इजरायल तनाव और वैश्विक सप्लाई संकट के चलते भारत की तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। इसी वजह से तेल कंपनियों ने एक सप्ताह में दूसरी बार दाम बढ़ाए हैं। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दामों में फिर इजाफा हो सकता है। फिलहाल आम जनता को राहत मिलने के आसार कम नजर आ रहे हैं। यह भी पढ़े – Bullet Train Photo
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Pune Professor Arrested

Breaking News: NEET UG 2026 पेपर लीक का मास्टरमाइंड निकला पुणे का प्रोफेसर, CBI के खुलासे से मचा हड़कंप

CBI की जांच में NEET UG 2026 पेपर लीक मामले का बड़ा खुलासा हुआ है। पुणे के केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी को मास्टरमाइंड बताया गया है। जानिए कैसे लीक हुआ पेपर, कितने राज्यों तक फैला नेटवर्क और अब आगे क्या होगा। NEET UG 2026 Paper Leak: कैसे हुआ देश का सबसे बड़ा एग्जाम स्कैम? देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 अब केवल एक परीक्षा नहीं बल्कि देश के सबसे बड़े शिक्षा घोटालों में बदल चुकी है। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले में अब CBI ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार पुणे के प्रोफेसर पी. वी. कुलकर्णी इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड था, जिसने कथित तौर पर परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र बाहर पहुंचा दिया। पॉइंट् वाइस समझें पूरा घटनाक्रम 3 मई 2026: परीक्षा और ‘गेस पेपर’ का खेल 3 मई 2026 को देशभर में NEET UG परीक्षा आयोजित हुई। परीक्षा से पहले ही एक कथित “गेस पेपर” व्हाट्सएप ग्रुप्स में वायरल होने लगा। बाद में इसकी फोटोकॉपी भी कई शहरों में बांटी गई। परीक्षा खत्म होते ही सीकर के कुछ छात्रों ने शिकायत की कि वायरल पेपर और असली प्रश्नपत्र में कई सवाल एक जैसे थे। 7 मई: NTA तक पहुंची गड़बड़ी की सूचना 7 मई को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी National Testing Agency को परीक्षा में गड़बड़ी की जानकारी मिली। मामला गंभीर होने पर 8 मई को इसे केंद्रीय एजेंसियों तक पहुंचाया गया। राजस्थान SOG की एंट्री मामले की जांच राजस्थान SOG को सौंपी गई। एडीजी विशाल बंसल के नेतृत्व में टीम ने कई राज्यों में छापेमारी शुरू की। शुरुआती जांच में यह साफ हुआ कि “गेस पेपर” वास्तव में लीक हुआ प्रश्नपत्र था, जिसे संगठित तरीके से फैलाया गया। कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया और मोबाइल चैट, दस्तावेज तथा बैंक ट्रांजैक्शन खंगाले गए। 12 मई: NTA ने परीक्षा रद्द की जांच में लीक के संकेत मजबूत होने के बाद NTA ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी। इसके बाद मामला औपचारिक रूप से Central Bureau of Investigation को सौंपा गया। CBI ने एफआईआर दर्ज कर देशभर में जांच शुरू की। 14 मई: गिरफ्तारी का सिलसिला शुरू CBI ने 14 मई को मनीषा वाघमारे और धनंजय लोखंडे को गिरफ्तार किया। इसके बाद जयपुर, गुरुग्राम और नासिक समेत कई शहरों से अन्य आरोपी पकड़े गए। देशभर में छापेमारी के दौरान मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और कई दस्तावेज जब्त किए गए। डिजिटल डिवाइस की जांच में कथित चैट, लीक प्रश्नपत्र और पैसों के लेनदेन के इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिले हैं। अब इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच जारी है ताकि डिलीट किया गया डेटा भी निकाला जा सके। 16 मई: मास्टरमाइंड पी. वी. कुलकर्णी गिरफ्तार 16 मई को CBI ने पुणे के प्रोफेसर पी. वी. कुलकर्णी को गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि कुलकर्णी कई वर्षों से NEET प्रश्नपत्र तैयार करने वाले पैनलों से जुड़ा था। CBI के अनुसार अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में कुलकर्णी ने कथित तौर पर गोपनीय प्रश्न जुटाए और पुणे स्थित अपने घर पर स्पेशल कोचिंग क्लास आयोजित की। इन क्लासों में छात्रों को प्रश्न, विकल्प और उत्तर तक डिक्टेट किए गए। कैसे फैला पेपर? जांच एजेंसियों के अनुसार: इसके बाद पेपर की कॉपी एक चेन के जरिए आगे बढ़ाई गई: CBI के मुताबिक यश यादव ने कई छात्रों को जोड़कर पैसे वसूलने का नेटवर्क तैयार किया। 10 से 12 लाख में बिके प्रश्न! जांच में सामने आया कि मंगीलाल बीवाल नामक व्यक्ति ने अपने बेटे के लिए लीक प्रश्न खरीदने की डील की थी। यह सौदा 10 से 12 लाख रुपये में तय हुआ। बताया जा रहा है कि करीब 500-600 प्रश्न साझा किए गए ताकि छात्रों के अच्छे अंक सुनिश्चित किए जा सकें। मंगीलाल बीवाल ने यह प्रश्न अपने रिश्तेदारों तक भी पहुंचाए। डिजिटल सबूतों से खुल रहे राज CBI को मिले इलेक्ट्रॉनिक सबूत अब इस केस की सबसे बड़ी कड़ी बन चुके हैं। एजेंसी को मोबाइल चैट, पेमेंट रिकॉर्ड, प्रश्नपत्र की तस्वीरें और कई संदिग्ध फाइलें मिली हैं। फॉरेंसिक टीम अब डिलीट डेटा रिकवर कर रही है, जिससे आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। छात्रों के भविष्य पर बड़ा सवाल करीब 23 लाख छात्रों ने इस साल NEET UG परीक्षा दी थी। अब पेपर लीक के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है। सोशल मीडिया पर परीक्षा प्रणाली, कोचिंग माफिया और अंदरूनी मिलीभगत को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सरकार अब परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी में है और भविष्य में NEET को CBT यानी Computer Based Test मोड में कराने पर विचार किया जा रहा है
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Petrol Diesel Price Hike

Fuel Shock: भोपाल में पेट्रोल ₹107 के करीब, डीजल भी महंगा — देशभर में तेल के दामों में बड़ा झटका

भोपाल में क्या हुए नए रेट? मध्यप्रदेश की राजधानी Bhopal में पेट्रोल-डीजल के दामों ने आम लोगों की टेंशन बढ़ा दी है। नई बढ़ोतरी के बाद भोपाल में पेट्रोल लगभग ₹99.90 प्रति लीटर और डीजल ₹91.80 प्रति लीटर के आसपास पहुंच गया है।15 मई से लागू हुई इस बढ़ोतरी में देशभर में पेट्रोल और डीजल करीब ₹3 प्रति लीटर महंगे हुए हैं। देश के बड़े शहरों में नया तेल झटका ⛽ पेट्रोल के नए रेट शहर पहले कितना था अब कितना हुआ बढ़ोतरी 🔴 दिल्ली ₹94.77 ₹97.77 +₹3 🔵 मुंबई ₹103.50 ₹106.68 +₹3.14 🟡 कोलकाता ₹105.45 ₹108.74 +₹3.29 🟢 चेन्नई ₹100.80 ₹103.67 +₹2.87 ⭐ भोपाल ₹103.00 (लगभग) ₹106.70 +₹3 🚛 डीजल के नए रेट शहर पुराने रेट नए रेट फर्क 🔴 दिल्ली ₹87.67 ₹90.67 +₹3 🔵 मुंबई ₹90.03 ₹93.14 +₹3.11 🟡 कोलकाता ₹92.02 ₹95.13 +₹3.11 🟢 चेन्नई ₹92.39 ₹95.25 +₹2.86 ⭐ भोपाल ₹89.70 (लगभग) ₹92.80 +₹3 नोट: भोपाल के रेट स्थानीय टैक्स और VAT के अनुसार थोड़ा बदल सकते हैं। भारत का तेल हीट-मैप: कहाँ सबसे ज्यादा मार? 📌 सबसे महंगा पेट्रोल: कोलकाता📌 मध्य भारत का दबाव: भोपाल में ₹100 के करीब पेट्रोल आखिर दाम क्यों बढ़े? तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।ईरान-अमेरिका तनाव और पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात के कारण क्रूड ऑयल 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इससे सरकारी तेल कंपनियों —Indian Oil Corporation,Bharat Petroleum औरHindustan Petroleumपर भारी दबाव बढ़ गया। कंपनियों को कितना नुकसान? पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक तेल कंपनियों को हर महीने करीब ₹30 हजार करोड़ तक का नुकसान हो रहा था। सरकार का दावा है कि लंबे समय तक कीमतें नहीं बढ़ाने के कारण कंपनियां घाटे में चल रही थीं। क्या अभी और बढ़ सकते हैं दाम? एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह बढ़ोतरी सिर्फ शुरुआत हो सकती है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लगातार महंगा रहा तो आने वाले दिनों में: पीएम मोदी की अपील Narendra Modi ने हाल ही में कहा था कि देशवासियों को पेट्रोल-डीजल और गैस का इस्तेमाल जरूरत के हिसाब से करना चाहिए ताकि विदेशी मुद्रा बचाई जा सके और युद्ध के असर को कम किया जा सके। Desh Harpal Analysis भोपाल समेत पूरे मध्यप्रदेश में यह बढ़ोतरी सीधे मध्यम वर्ग और रोजाना वाहन इस्तेमाल करने वालों की जेब पर असर डालेगी।अगर अंतरराष्ट्रीय हालात नहीं सुधरे तो आने वाले हफ्तों में पेट्रोल ₹100 के पार जाना लगभग तय माना जा रहा है।
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Sukoon E Musical Evening

Cultural News: ‘सुकून-ए म्यूजिकल ईवनिंग’ में गूंजे सदाबहार नगमे, सुरों ने बांधा समां

भोपाल में आयोजित ‘सुकून-ए म्यूजिकल ईवनिंग’ में पुराने फिल्मी गीतों और गज़लों की शानदार प्रस्तुतियों ने संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भोपाल शहर के संगीत प्रेमियों के लिए एक यादगार शाम उस वक्त बनी, जब “ख्याल कलाप्रेमियों का” द्वारा आयोजित ‘सुकून-ए म्यूजिकल ईवनिंग’ में पुराने सदाबहार गीतों और गज़लों की शानदार प्रस्तुतियों ने माहौल को सुरमयी बना दिया। कार्यक्रम में गायिका Nidhi Sarolkar Parakhi और Shreya Dhanorkar ने अपनी मधुर आवाज़ से श्रोताओं को भावनाओं और संगीत के खूबसूरत सफर पर ले गए। शाम की शुरुआत मशहूर गीत “नाम गुम जाएगा…” से हुई, जिसने शुरुआत से ही दर्शकों का दिल जीत लिया। इसके बाद “तू है तो दिल धड़कता है”, “हम तेरे प्यार में”, “एहसान तेरा होगा मुझ पर”, “जब दीप जले आना” और “मेरा साया साथ होगा” जैसे सदाबहार गीतों ने पूरे माहौल को भावुक और रोमांटिक बना दिया। कार्यक्रम में गज़लों और फिल्मी गीतों का भी शानदार संगम देखने को मिला। “आपकी आंखों में कुछ”, “सलोना सा सजन”, “इन आंखों की मस्ती”, “पिया तोसे” और “आज जाने की जिद न करो” जैसी प्रस्तुतियों पर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं। शाम का समापन मराठी गीत “बहरला हा मधुमास” से हुआ, जिसने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। वाद्य संगीत में भी कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति दी। कीबोर्ड पर Karan Murjani, तबले पर Swapnil Bagul और गिटार पर Swapnil Pradhan ने सुरों का बेहतरीन साथ निभाया। कार्यक्रम का संचालन Sanjay Khare ने किया। भोपाल में लगातार हो रहे ऐसे सांस्कृतिक आयोजन यह साबित कर रहे हैं कि शहर में संगीत और कला के प्रति लोगों का जुड़ाव लगातार मजबूत हो रहा है।
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Breaking News

Breaking News: मोदी सरकार का बड़ा फैसला, 30 सितंबर 2026 तक चीनी निर्यात पर रोक

भारत सरकार ने देश में बढ़ती महंगाई, घरेलू सप्लाई और वैश्विक संकट के बीच बड़ा कदम उठाते हुए चीनी (Sugar Export) के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह प्रतिबंध 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक लागू रहेगा। सरकार ने यह फैसला ऐसे समय लिया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य वस्तुओं और कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि सरकार घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए यह कदम उठा रही है। DGFT की अधिसूचना में रॉ शुगर, व्हाइट शुगर और रिफाइंड शुगर — तीनों प्रकार की चीनी के निर्यात पर रोक लगाई गई है। हालांकि यूरोपियन यूनियन (EU) और अमेरिका को विशेष कोटा (CXL/TRQ) के तहत होने वाले निर्यात, एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम और सरकार-से-सरकार समझौतों के तहत होने वाली सप्लाई को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है। लेकिन लगातार दूसरे साल गन्ने के उत्पादन में कमजोरी और घरेलू खपत बढ़ने के कारण सरकार ने निर्यात नीति को “Restricted” से बदलकर “Prohibited” कैटेगरी में डाल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों पर नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है, लेकिन चीनी मिलों और निर्यात कारोबार से जुड़े उद्योगों को झटका लग सकता है। वहीं आम उपभोक्ताओं के लिए यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है। देश में पहले ही तेल संकट, वैश्विक युद्ध जैसे हालात और सप्लाई चेन पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में केंद्र सरकार लगातार आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने और आर्थिक स्थिरता पर फोकस कर रही है।
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PM Modi Appeal

PM मोदी की अपील के बाद मंत्री विश्वास सारंग का बड़ा फैसला, अब नहीं चलेगा गाड़ियों का लंबा काफिला

देश में बढ़ती वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, तेल संकट और ईंधन बचत को लेकर प्रधानमंत्री Narendra Modi की अपील का असर अब राज्यों में भी दिखाई देने लगा है। मध्यप्रदेश सरकार में सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री Vishvas Kailash Sarang ने बड़ा फैसला लेते हुए अपने सरकारी दौरे और कार्यक्रमों में गाड़ियों के लंबे काफिले को बंद करने का ऐलान किया है। भोपाल में मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का आवाहन केवल पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए है। उन्होंने कहा कि यदि हम देश के लिए कुछ करना चाहते हैं, तो प्रधानमंत्री की सलाह को अपनाना हम सभी का दायित्व है। मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि अब उनके साथ जरूरत से ज्यादा वाहन नहीं चलेंगे और वे खुद भी ईंधन की बचत को प्राथमिकता देंगे। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से भी अपील की कि वे अनावश्यक रूप से पेट्रोल और डीजल का उपयोग कम करें। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री मोदी का “नया राष्ट्र निर्माण अभियान” है, जो आने वाली पीढ़ियों को विकसित और स्वावलंबी हिंदुस्तान देने की दिशा में उठाया गया कदम है। सारंग ने कोरोना काल का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने दुनिया के सबसे बड़े महामारी संकट से मजबूती के साथ लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की। अब देश आर्थिक चुनौतियों और वैश्विक संकटों के बीच आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राजनीतिक गलियारों में मंत्री सारंग के इस फैसले को प्रतीकात्मक लेकिन बड़ा संदेश माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में मध्यप्रदेश के अन्य मंत्री और जनप्रतिनिधि भी इस तरह के कदम उठा सकते हैं।
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अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव का निधन,

Breaking News: अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव का निधन, लखनऊ में ली अंतिम सांस

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के भाई और अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव का 38 साल की उम्र में लखनऊ में निधन। जानिए पूरी खबर, परिवार और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं। समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav के परिवार से जुड़ी एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और भाजपा नेता Aparna Bisht Yadav के पति प्रतीक यादव का बुधवार सुबह लखनऊ में निधन हो गया। वह 38 वर्ष के थे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, उनकी तबीयत पिछले कुछ दिनों से खराब चल रही थी और उनका इलाज लखनऊ के अस्पताल में चल रहा था। सूत्रों के मुताबिक प्रतीक यादव की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिवार और राजनीतिक गलियारों में इस खबर के बाद शोक की लहर दौड़ गई है। प्रतीक यादव, समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री Mulayam Singh Yadav के पुत्र थे। हालांकि उन्होंने राजनीति से दूरी बनाए रखी और बिजनेस व फिटनेस सेक्टर में अपनी पहचान बनाई थी। वे लखनऊ में फिटनेस और रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े हुए थे। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में उनकी तबीयत लगातार खराब थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Akhilesh Yadav भी अस्पताल पहुंचकर उनका हालचाल लेने गए थे। राजनीतिक और सामाजिक जगत की कई हस्तियों ने प्रतीक यादव के निधन पर शोक व्यक्त किया है। समाजवादी पार्टी की ओर से भी आधिकारिक बयान जारी कर श्रद्धांजलि दी गई।
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E-2 अरेरा कॉलोनी

Clean Bhopal Campaign: E-2 अरेरा कॉलोनी के रहवासियों ने गजानंद पार्क में चलाया स्वच्छता अभियान

भोपाल के E-2 अरेरा कॉलोनी स्थित गजानंद पार्क में E -2 हाउस ओनर्स एसोसियेशन ने स्वच्छता अभियान चलाया। बच्चों, महिलाओं और पुरुषों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लेकर साफ-सफाई का संदेश दिया। भोपाल के E-2 अरेरा कॉलोनी स्थित गजानंद पार्क में रविवार को E -2 हाउस ओनर्स एसोसियेशन द्वारा विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस अभियान में बच्चों, महिलाओं और पुरुषों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए पार्क और आसपास के क्षेत्र की सफाई की। E -2 हाउस ओनर्स एसोसियेशन ने साफ-सफाई के साथ लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक भी किया। कॉलोनीवासियों का कहना है कि जनभागीदारी और सामूहिक प्रयासों से ही भोपाल को स्वच्छता में देश का नंबर वन शहर बनाए रखने का लक्ष्य पूरा किया जा सकता है। अभियान के दौरान बच्चों में भी खास उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने स्वच्छता का संदेश देते हुए नियमित रूप से ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही। स्थानीय लोगों ने इसे समाज के लिए प्रेरणादायक पहल बताया।
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अक्षर पटेल का ऑलराउंड शो, शुभमन गिल की कप्तानी पारी; भारत ने इंग्लैंड को 6 विकेट से हराकर पहला वनडे जीता

बर्मिंघम। ऑलराउंडर अक्षर पटेल के शानदार प्रदर्शन और कप्तान शुभमन गिल की बेहतरीन बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने इंग्लैंड को पहले वनडे मुकाबले में 6 विकेट से हराकर सीरीज में विजयी शुरुआत की। एजबेस्टन मैदान पर खेले गए मैच में भारत ने 259 रन के लक्ष्य को 45.2 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 262 रन बनाकर हासिल कर लिया। अक्षर पटेल ने नाबाद 57 रन बनाए, जबकि वॉशिंगटन सुंदर ने भी नाबाद 52 रन की महत्वपूर्ण पारी खेलकर टीम को जीत तक पहुंचाया। कप्तान शुभमन गिल ने 80 रन बनाए, लेकिन मैच के दौरान क्रैम्प्स की समस्या के कारण उन्हें रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान छोड़ना पड़ा। शुरुआती झटकों के बाद गिल ने संभाली पारी लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। रोहित शर्मा 11 रन और विराट कोहली 5 रन बनाकर जल्दी आउट हो गए। इसके बाद कप्तान शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर ने तीसरे विकेट के लिए 101 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम की पारी को संभाला। श्रेयस 35 रन बनाकर रनआउट हुए, जबकि केएल राहुल बोल्ड होकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर ने जिम्मेदारी संभालते हुए पांचवें विकेट के लिए 102 रन की अविजित साझेदारी की और भारत को शानदार जीत दिलाई। जो रूट और लियाम डॉसन ने इंग्लैंड को संभाला इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने 47.5 ओवर में 258 रन बनाए। इंग्लैंड की शुरुआत मजबूत रही और टीम ने 61 रन तक कोई विकेट नहीं गंवाया, लेकिन इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने जोरदार वापसी करते हुए महज 19 रन के भीतर 5 विकेट झटक दिए। मध्यक्रम में जो रूट ने 76 रन और लियाम डॉसन ने 68 रन की अहम पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों ने छठे विकेट के लिए 121 रन की साझेदारी कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। अक्षर पटेल ने गेंद और बल्ले दोनों से निभाई अहम भूमिका भारतीय गेंदबाजों में अक्षर पटेल सबसे सफल रहे। उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट अपने नाम किए। वहीं प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बरार ने 2-2 विकेट हासिल किए। जसप्रीत बुमराह और शिवम दुबे को एक-एक सफलता मिली। गेंद और बल्ले दोनों से बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले अक्षर पटेल ने टीम इंडिया की जीत में सबसे अहम भूमिका निभाई और भारत ने सीरीज की शानदार शुरुआत की। क्रिकेट और खेल जगत की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

CAG रिपोर्ट में जल जीवन मिशन की पोल: छत्तीसगढ़ में 33% नल कनेक्शन गैर-कार्यशील, ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा

रायपुर। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन (JJM) के क्रियान्वयन को लेकर कई गंभीर खामियों का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार कमजोर योजना, धीमा क्रियान्वयन, निगरानी की कमी और गलत रिपोर्टिंग के कारण ग्रामीण पेयजल योजनाओं की प्रभावशीलता और दीर्घकालिक स्थिरता प्रभावित हुई है। मार्च 2024 तक की अवधि पर आधारित ‘छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन का प्रदर्शन ऑडिट’ रिपोर्ट मंगलवार को वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में पेश की। रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य सरकार ने इसके लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया, जबकि उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद मिशन के कार्यों में तेजी आई है। योजना निर्माण में गंभीर खामियां CAG की रिपोर्ट के मुताबिक जल जीवन मिशन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कई स्थानों पर गांव स्तर की कार्ययोजना तैयार किए बिना ही जिला स्तरीय योजनाएं बना दी गईं, जबकि राज्य स्तरीय कार्ययोजना तैयार ही नहीं की गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि राज्य स्तर पर जल सुरक्षा योजना नहीं बनाई गई, जिससे जल स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता और योजनाओं के रखरखाव की स्पष्ट रणनीति विकसित नहीं हो सकी। 33 प्रतिशत नल कनेक्शन निकले गैर-कार्यशील रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2025 तक 50 लाख ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था। जनवरी 2025 तक 40.10 लाख फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (FHTC) लगाए गए। हालांकि, इनमें से 13.31 लाख (करीब 33%) कनेक्शन गैर-कार्यशील पाए गए। इसके पीछे सूख चुके जल स्रोत, अधूरी ओवरहेड टंकियां, बिजली कनेक्शन का अभाव और सोलर पंप स्थापित नहीं होना प्रमुख कारण बताए गए हैं। ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा राज्य के 19,656 गांवों को मार्च 2024 तक ‘हर घर जल’ प्रमाणित किया जाना था, लेकिन केवल 716 गांव (3.64 प्रतिशत) ही इस लक्ष्य तक पहुंच सके। ऑडिट में ऐसे मामले भी सामने आए, जहां अधूरे कार्यों के बावजूद गांवों को ‘हर घर जल’ प्रमाणित कर दिया गया। किसी भी जिले में 100% कवरेज नहीं मार्च 2024 तक राज्य के 33 में से किसी भी जिले और 146 में से किसी भी विकासखंड में 100 प्रतिशत नल जल कवरेज नहीं था। योजनाओं की प्रगति बेहद धीमी रिपोर्ट के अनुसार जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत 29,153 सिंगल विलेज स्कीम में से मार्च 2024 तक केवल 172 योजनाएं पूरी हो सकीं। इनमें भी सिर्फ 32 ग्राम पंचायतों को योजनाओं का संचालन सौंपा गया। वहीं, स्वीकृत 70 मल्टी विलेज स्कीम में से मार्च 2025 तक एक भी योजना पूरी नहीं हो सकी, जिससे करीब 9.85 लाख घरों तक सतही जल स्रोतों से पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य प्रभावित हुआ। सोलर आधारित योजनाओं में भी अनियमितताएं CAG ने पाया कि कई सोलर आधारित पेयजल योजनाओं में निर्धारित क्षमता से अधिक नल कनेक्शन जोड़ दिए गए। इसके कारण 28,984 परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुसार पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। वित्तीय और गुणवत्ता संबंधी कमियां रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य सरकार केंद्र और राज्यांश मिलाकर 6,480.04 करोड़ रुपये की आवश्यक वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित करने में विफल रही। साथ ही मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), जिला खनिज न्यास (DMF), सांसद निधि और CSR जैसी योजनाओं के संसाधनों के समन्वय के लिए भी कोई प्रभावी रणनीति नहीं बनाई गई। जल गुणवत्ता जांच की व्यवस्था कमजोर राज्य की 75 जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में से केवल 4 प्रयोगशालाएं ही सभी 13 निर्धारित जल गुणवत्ता मानकों की जांच करने में सक्षम पाई गईं। इसके अलावा 37 प्रतिशत प्रयोगशालाओं को NABL की मान्यता प्राप्त नहीं थी। रिपोर्ट में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी निर्धारित मानकों के अनुसार जल गुणवत्ता जांच नहीं होने की बात कही गई है। CAG की प्रमुख सिफारिशें रिपोर्ट में सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं, जिनमें शामिल हैं— सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को ठहराया जिम्मेदार CAG रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार मिशन को खराब स्थिति में छोड़कर गई थी, जिसके कारण परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की समय-सीमा 2024 से बढ़ाकर 2028 तक कर दी है। मार्च 2026 में स्वीकृत मिशन के दूसरे चरण को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा सके।

रायपुर में 16 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा

रायपुर। राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की विश्वविख्यात रथयात्रा 16 जुलाई को धार्मिक आस्था, वैदिक परंपराओं और भव्य आयोजन के साथ निकाली जाएगी। वहीं बाहुड़ा यात्रा 24 जुलाई को आयोजित होगी। मंदिर परिसर में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र तथा माता सुभद्रा के तीनों रथों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। रथयात्रा से पहले 14 जुलाई की शाम 6 बजे भगवान का नेत्रोत्सव आयोजित किया जाएगा। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सांस्कृतिक एकता, भाईचारे और सनातन परंपरा का भी प्रतीक माना जाता है। भक्त और भगवान के मिलन का महापर्व श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष एवं विधायक पुरंदर मिश्रा ने बताया कि रथयात्रा भक्तों और भगवान के प्रत्यक्ष मिलन का महापर्व है। वर्ष में केवल इसी अवसर पर भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मंदिर से बाहर निकलकर श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। 11 वैदिक पंडित कराएंगे विशेष पूजन रथयात्रा के दिन सुबह 11 वैदिक पंडितों के सान्निध्य में भगवान का विशेष अभिषेक, पूजन और हवन कराया जाएगा। चंदन, केसर, कस्तूरी, कपूर सहित विभिन्न सुगंधित द्रव्यों से भगवान का दिव्य स्नान कराया जाएगा। इसके बाद भगवान को गजामूंग महाप्रसाद अर्पित किया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और मंगल वाद्यों की गूंज के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा अपने-अपने रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए प्रस्थान करेंगे। राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा रथयात्रा की सबसे प्रमुख परंपराओं में शामिल ‘छेरा पहरा’ का निर्वहन इस वर्ष भी किया जाएगा। परंपरा के अनुसार राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भगवान के रथ के आगे सोने की झाड़ू से मार्ग की प्रतीकात्मक सफाई करेंगे। यह परंपरा सेवा, समर्पण और विनम्रता का संदेश देती है। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। भजन, झांकियों और लोकनृत्य से गूंजेगा शहर रथयात्रा के दौरान महिला मंडलों द्वारा भजन-कीर्तन, आकर्षक सांस्कृतिक झांकियां और पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। “जय जगन्नाथ” के जयघोष के साथ मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहेगा। श्रद्धालुओं से की गई विशेष अपील श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति ने प्रदेशभर के श्रद्धालुओं से सपरिवार रथयात्रा में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने और सनातन संस्कृति की इस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनने की अपील की है। रायपुर और छत्तीसगढ़ की धार्मिक, सांस्कृतिक और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, सरकार और बोर्ड से 10 दिन में मांगा जवाब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि “कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता।” हालांकि, नीति को लागू करने में सामने आ रही व्यावहारिक चुनौतियों को देखते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार, CBSE और संबंधित पक्षों से 10 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी। यह नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की गई है। इसके तहत छात्रों को दो भारतीय भाषाएं और एक विदेशी भाषा पढ़नी होगी। इससे कई छात्रों को पहले से पढ़ी जा रही भाषाओं में बदलाव करना पड़ सकता है। क्या है विवाद? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CBSE ने पर्याप्त तैयारी के बिना नई भाषा नीति लागू कर दी है। उनके मुताबिक कई स्कूलों में संबंधित भाषाओं के शिक्षक, पाठ्यपुस्तकें और आवश्यक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे छात्रों और शिक्षकों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े अहम सवाल और जवाब 1. मामला क्या है? सुप्रीम कोर्ट में CBSE के उस नियम को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है। इनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। हालांकि, CBSE ने 6 जून को संशोधित दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया था कि इस वर्ष कक्षा 10 के छात्रों को तीसरी भाषा (R3) की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। 2. नए नियम में क्या बदलाव हुआ है? पहले कई छात्र अंग्रेजी के साथ एक भारतीय और एक विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच या जर्मन) पढ़ते थे। नए नियम के अनुसार अब तीन भाषाओं में से कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य है। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही चुनी जा सकेगी। 3. याचिका किसने दायर की? यह याचिका छात्र यशिका भंडारी, अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी की ओर से दायर की गई है। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर, मुकुल रोहतगी और गोपाल शंकरनारायणन ने पैरवी की। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। 4. याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्ति क्या है? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई व्यवस्था अचानक लागू कर दी गई। कई भारतीय भाषाओं की किताबें उपलब्ध नहीं हैं और अधिकांश स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक भी नहीं हैं। ऐसे में छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। 5. किताबों को लेकर क्या दलील दी गई? सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि 22 भारतीय भाषाओं में से फिलहाल केवल तीन भाषाओं की पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध हैं। ऐसे में बाकी भाषाओं की पढ़ाई शुरू करना व्यवहारिक रूप से कठिन होगा। 6. शिक्षकों की कमी पर क्या कहा गया? याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि नई भारतीय भाषाएं पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता होगी, लेकिन इतने कम समय में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति और प्रशिक्षण संभव नहीं है। 7. क्या विदेशी भाषाएं बंद हो जाएंगी? नहीं। छात्र फ्रेंच, जर्मन, जापानी जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ सकते हैं, लेकिन इसके साथ उन्हें दो भारतीय भाषाएं भी पढ़नी होंगी। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में होगी। 8. क्या तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा होगी? नहीं। CBSE ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) का अलग बोर्ड एग्जाम नहीं होगा, ताकि छात्रों पर अतिरिक्त परीक्षा का दबाव न बढ़े। 9. अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार केंद्र सरकार, CBSE और NCERT अपना जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद 29 जुलाई को अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी। नई शिक्षा नीति 2020 क्या है? भारत सरकार ने 29 जुलाई 2020 को नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को मंजूरी दी थी। यह 34 वर्षों बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में किया गया सबसे बड़ा बदलाव माना जाता है। इससे पहले शिक्षा नीति 1986 में लागू हुई थी, जिसे 1992 में संशोधित किया गया था। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना, छात्रों में व्यावहारिक ज्ञान और कौशल विकसित करना है। केंद्र सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से 2030 तक लागू करने का लक्ष्य रखा है। चूंकि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए इसे लागू करने में केंद्र और राज्य सरकारों दोनों की भूमिका होती है। देश, शिक्षा और करियर से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

बिलासपुर: CM हेल्पलाइन शिकायतों के खराब निराकरण पर PHE के ईई को नोटिस, कलेक्टर ने अधिकारियों को लगाई फटकार

बिलासपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर संचालित सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों के निराकरण की समीक्षा बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं मिलने पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने पीएचई विभाग के कार्यपालन अभियंता (ईई) रूपेश कुमार धनंजय को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। टीएल (समय-सीमा) बैठक में कलेक्टर ने सभी विभागों के अधिकारियों से कहा कि शिकायतों का केवल औपचारिक निपटारा करने के बजाय उनका गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने समय-सीमा का पालन करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी। एकल शिक्षकीय स्कूलों में जल्द होंगे अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने एकल शिक्षकीय स्कूलों में तत्काल अतिथि शिक्षक नियुक्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर सेवानिवृत्त शिक्षकों की सेवाएं भी ली जाएं, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। जर्जर स्कूल भवनों में नहीं लगेंगी कक्षाएं कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जर्जर भवनों में किसी भी स्थिति में कक्षाएं संचालित नहीं की जाएं। ऐसे विद्यालयों के लिए वैकल्पिक भवन की व्यवस्था करने और नए भवन या अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के प्रस्ताव शीघ्र भेजने को कहा गया। स्वास्थ्य विभाग को भी लगाई फटकार जिला खनिज न्यास (DMF) से जुड़े कार्यों की समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए डीएमएफ की राशि का प्रभावी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाए। बैठक में दिए गए प्रमुख निर्देश कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि शासन की योजनाओं और जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभाग समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करें। बिलासपुर और छत्तीसगढ़ की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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