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PM Modi on Oil Crisis, Work From Home India,

Gulf War Oil Crisis: PM मोदी की देशवासियों से बड़ी अपील, बोले- पेट्रोल-डीजल बचाइए”

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट के बीच बढ़ती तेल कीमतों को लेकर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील की है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत को आने वाले आर्थिक दबाव से बचाने के लिए अब पेट्रोल, डीजल और गैस का इस्तेमाल “बहुत संयम” के साथ करना होगा। हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने लोगों से कहा कि जहां संभव हो वहां Work From Home (WFH) अपनाया जाए, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाया जाए और कारपूलिंग को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ऑनलाइन मीटिंग्स को भी फिर से प्राथमिकता देने की सलाह दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक हालात के कारण भारत पर विदेशी मुद्रा का दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में आयात करता है। ऐसे में हर लीटर पेट्रोल और डीजल की बचत देश की अर्थव्यवस्था को राहत दे सकती है। विदेशी यात्रा और गोल्ड खरीदने पर भी सलाह पीएम मोदी ने लोगों से फिलहाल गैर-जरूरी विदेशी यात्राएं टालने और शादी-ब्याह में सोने की खरीद कम करने की भी अपील की। उनका कहना था कि मौजूदा वैश्विक संकट में देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। क्या फिर लौटेगा कोविड वाला WFH कल्चर? प्रधानमंत्री की अपील के बाद सोशल मीडिया और कॉर्पोरेट सेक्टर में फिर से Work From Home को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि एशिया के कई देश बढ़ती तेल कीमतों के बीच कोविड काल जैसी रणनीतियों पर विचार कर रहे हैं। हालांकि सरकार की ओर से किसी तरह के लॉकडाउन या अनिवार्य WFH को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। सरकार ने कहा- घबराने की जरूरत नहीं इस बीच भारतीय तेल कंपनियों ने साफ किया है कि देश में फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है और सप्लाई सामान्य बनी हुई है। कंपनियों ने अफवाहों से बचने की अपील की है।
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Himanta Biswa Sarma, Assam CM 2026

असम में फिर लौटेगा BJPराज, दूसरी बार CM बनेंगे Himanta Biswa Sarma

पूर्वोत्तर की राजनीति में एक बार फिर बड़ा फैसला सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी विधायक दल की बैठक में Himanta Biswa Sarma को सर्वसम्मति से नेता चुना गया है। इसके साथ ही अब वह लगातार दूसरी बार और कुल मिलाकर तीसरी बार असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, शपथ ग्रहण समारोह 12 मई को गुवाहाटी में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री Narendra Modi, गृह मंत्री Amit Shah समेत NDA के कई बड़े नेताओं के शामिल होने की संभावना है। 2026 असम विधानसभा चुनाव में BJP के नेतृत्व वाले NDA ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बहुमत से कहीं ज्यादा सीटें हासिल कीं। चुनाव परिणामों में BJP ने 126 में से 82 सीटें जीतकर राज्य में अपनी मजबूत पकड़ साबित की। चुनाव जीतने के बाद Himanta Biswa Sarma ने कहा कि अब सरकार का फोकस “योजनाओं को जमीन पर उतारने” पर रहेगा और अगले पांच साल विकास व इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम होंगे। इससे पहले नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने मंत्रिमंडल के साथ राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया था।
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Tamil Nadu CM Vijay, C Joseph Vijay,

Breaking News: “कोई दूसरा Power Center नहीं होगा” — CM विजय का पहला बड़ा संदेश

तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने शपथ के बाद अपने पहले भाषण में साफ कहा कि सरकार में कोई दूसरा पावर सेंटर नहीं होगा। जानिए उन्होंने जनता से क्या बड़े वादे किए। चेन्नई से नई राजनीति की शुरुआत तमिलनाडु की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। टीवीके चीफ और अभिनेता से नेता बने सी जोसेफ विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपने पहले संबोधन में साफ संदेश दिया कि उनकी सरकार में “कोई दूसरा Power Center नहीं होगा।” चेन्नई में आयोजित शपथ समारोह के बाद मुख्यमंत्री विजय ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय और पारदर्शिता के सिद्धांतों पर चलेगी। उन्होंने कहा कि जनता से किए गए सभी वादे चरणबद्ध तरीके से पूरे किए जाएंगे। “वादे पूरे होंगे, लेकिन धीरे-धीरे” अपने पहले भाषण में विजय ने जल्दबाजी से बचने का संकेत देते हुए कहा कि सरकार हर फैसले को योजनाबद्ध तरीके से लागू करेगी। उन्होंने कहा कि जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है और उनकी सरकार उस भरोसे को टूटने नहीं देगी। मुख्यमंत्री विजय ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार में अंतिम निर्णय उन्हीं का होगा और किसी समानांतर शक्ति केंद्र की कोई भूमिका नहीं होगी। राजनीतिक गलियारों में उनके इस बयान को बड़ा संकेत माना जा रहा है। सामाजिक न्याय और सेक्युलर मॉडल पर जोर विजय ने कहा कि उनकी सरकार हर वर्ग के लिए काम करेगी। युवाओं, महिलाओं और गरीब तबकों को प्राथमिकता देने की बात करते हुए उन्होंने रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े सुधारों का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की पहचान सामाजिक न्याय और प्रगतिशील सोच से रही है और उनकी सरकार उसी मॉडल को आगे बढ़ाएगी। राजनीति में नई शैली? फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए विजय के मुख्यमंत्री बनने को तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। उनके पहले ही भाषण ने यह साफ कर दिया है कि वे अपनी सरकार पर पूरी पकड़ रखना चाहते हैं और नेतृत्व को लेकर किसी तरह का भ्रम नहीं छोड़ना चाहते।
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Yogi Cabinet Expansion 2026,

Breaking News: योगी सरकार 2.0 का बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार, 8 मंत्रियों ने ली शपथ

लखनऊ में रविवार को योगी आदित्यनाथ सरकार 2.0 का दूसरा बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार हुआ। राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में कुल 8 नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इनमें 2 नेताओं को कैबिनेट मंत्री बनाया गया, जबकि 2 राज्य मंत्रियों को प्रमोशन देकर स्वतंत्र प्रभार दिया गया। इस विस्तार में भाजपा ने सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की है। पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और समाजवादी पार्टी से आए मनोज पांडे को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। वहीं अजीत पाल सिंह और सोमेंद्र तोमर को स्वतंत्र प्रभार का दर्जा मिला। इसके अलावा कृष्णा पासवान, सुरेंद्र डिलेर, हंसराज विश्वकर्मा और कैलाश राजपूत को राज्य मंत्री के रूप में शामिल किया गया है। इस विस्तार के बाद योगी सरकार में मंत्रियों की संख्या बढ़कर 60 के करीब पहुंच गई है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने ओबीसी, दलित और पूर्वांचल-बुंदेलखंड क्षेत्रों को साधने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है। पार्टी संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर भी फोकस दिखा। समारोह में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath, राज्यपाल Anandiben Patel समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। विपक्ष ने इस विस्तार को चुनावी रणनीति बताया है।
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Historic Bengal: सुवेंदु अधिकारी बने पश्चिम बंगाल के पहले BJP मुख्यमंत्री, शपथ के बाद PM मोदी के छुए पैर

पश्चिम बंगाल में इतिहास रचते हुए सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के पहले BJP मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। शपथ समारोह में PM मोदी, अमित शाह और NDA शासित राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे। Historic Bengal: सुवेंदु अधिकारी ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, बंगाल में पहली बार BJP सरकार कोलकाता में शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा अध्याय लिखा गया, जब भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के पहले भारतीय जनता पार्टी मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। सुवेंदु अधिकारी ने बांग्ला भाषा में ईश्वर के नाम पर शपथ लेकर समारोह को भावनात्मक और ऐतिहासिक बना दिया। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने पूरे समारोह का केंद्र बना दिया। सुवेंदु अधिकारी मंच से उतरकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास पहुंचे और उनके पैर छुए। प्रधानमंत्री ने उन्हें गले लगाकर शुभकामनाएं दीं। इस दृश्य पर कार्यक्रम स्थल तालियों से गूंज उठा। 4 मंत्रियों ने भी ली शपथ सुवेंदु अधिकारी के साथ भाजपा के चार वरिष्ठ नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली। इनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पाल, निषिथ प्रमाणिक और अशोक शामिल रहे। माना जा रहा है कि नई सरकार बंगाल में संगठन और प्रशासन दोनों स्तर पर बड़े बदलाव की तैयारी में है। समारोह में दिखा शक्ति प्रदर्शन कोलकाता में आयोजित इस भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, NDA सहयोगी दलों के नेता और भाजपा शासित राज्यों के लगभग 20 मुख्यमंत्री मौजूद रहे। समारोह पूरी तरह शक्ति प्रदर्शन में बदल गया, जहां भाजपा ने बंगाल में अपनी ऐतिहासिक जीत का संदेश पूरे देश को देने की कोशिश की। टैगोर को श्रद्धांजलि समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की 165वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मंच पर टैगोर की तस्वीर के सामने प्रधानमंत्री कुछ क्षण रुके और नमन किया। भाजपा नेताओं ने इसे बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने वाला संदेश बताया। 98 वर्षीय कार्यकर्ता का सम्मान बना सबसे भावुक पल कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा के 98 वर्षीय कार्यकर्ता माखनलाल सरकार का सम्मान किया। मंच पर पहुंचते ही प्रधानमंत्री सीधे उनके पास गए, उन्हें शॉल ओढ़ाई और फिर उनके पैर छुए। यह दृश्य देखकर पूरा सभागार भावुक हो गया। माखनलाल सरकार ने प्रधानमंत्री को गले लगाया और कुछ देर तक दोनों मंच पर साथ खड़े रहे। भाजपा नेताओं ने इसे “कार्यकर्ता सम्मान” की सबसे बड़ी मिसाल बताया। बंगाल की राजनीति में नया दौर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के साथ राज्य की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत हो चुकी है। लंबे समय बाद सत्ता परिवर्तन ने बंगाल की राजनीतिक दिशा बदल दी है। अब सबकी नजर नई सरकार के पहले फैसलों और प्रशासनिक रणनीति पर रहेगी।
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Big Breaking: लेफ्टिनेंट जनरल NS राजा सुब्रमणि होंगे भारत के नए CDS, अनिल चौहान की लेंगे जगह

भारत सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि को नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) नियुक्त किया। वे 30 मई 2026 के बाद जनरल अनिल चौहान की जगह संभालेंगे। भारत को मिला नया CDS, मोदी सरकार ने किया बड़ा ऐलान भारत सरकार ने देश के अगले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के नाम का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि (PVSM, AVSM, SM, VSM – सेवानिवृत्त) को देश का नया CDS नियुक्त किया गया है। वर्तमान CDS जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल 30 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। इसके बाद एन.एस. राजा सुब्रमणि देश की तीनों सेनाओं के सर्वोच्च सैन्य अधिकारी की जिम्मेदारी संभालेंगे। सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, वे पदभार ग्रहण करने के साथ ही सैन्य मामलों के विभाग (Department of Military Affairs) में सचिव की भूमिका भी निभाएंगे। कौन हैं NS राजा सुब्रमणि? लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि भारतीय सेना के सबसे अनुभवी और रणनीतिक अधिकारियों में गिने जाते हैं। वे 1 सितंबर 2025 से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) में सैन्य सलाहकार के तौर पर कार्यरत हैं। इससे पहले उन्होंने भारतीय सेना में कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। उनका सैन्य करियर: रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के बीच उनका अनुभव भारत के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है। क्या होता है CDS का पद? चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी CDS भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के बीच तालमेल स्थापित करने वाला सर्वोच्च सैन्य पद होता है। यह पद 2020 में मोदी सरकार ने बनाया था ताकि तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और आधुनिक युद्ध रणनीति तैयार की जा सके। CDS रक्षा मंत्रालय के सैन्य मामलों के विभाग का प्रमुख भी होता है। बिपिन रावत थे भारत के पहले CDS 1 जनवरी 2020 को यह पद अस्तित्व में आने के बाद जनरल Bipin Rawat भारत के पहले CDS बने थे। हालांकि 8 दिसंबर 2021 को तमिलनाडु में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनका निधन हो गया था, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। इसके बाद जनरल अनिल चौहान को नया CDS नियुक्त किया गया था। अब जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को संभालेंगे। क्यों अहम मानी जा रही यह नियुक्ति? भारत इस समय चीन सीमा, हिंद महासागर, साइबर युद्ध और आधुनिक सैन्य तकनीक जैसी कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में नए CDS की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि NS राजा सुब्रमणि का अनुभव और रणनीतिक सोच आने वाले वर्षों में भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और थिएटर कमांड सिस्टम को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
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Tamil Nadu Government Formation 2026, Vijay TVK,

Tamil Nadu Political Drama: बहुमत के बिना फंसे विजय! सरकार गठन पर सस्पेंस, राज्यपाल ने अब तक नहीं दिया न्योता

Tamil Nadu Government Formation 2026: विजय की TVK सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद सरकार गठन पर सस्पेंस जारी। राज्यपाल ने अब तक सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया। तमिलनाडु की राजनीति इस समय जबरदस्त सस्पेंस और सत्ता संघर्ष के दौर से गुजर रही है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत से दूर होने के कारण सरकार गठन अब तक अधर में लटका हुआ है। राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने अभी तक विजय को सरकार बनाने का औपचारिक न्योता नहीं दिया है, जिससे राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। विपक्ष इसे “लोकतंत्र की परीक्षा” बता रहा है, जबकि समर्थक इसे संवैधानिक प्रक्रिया कह रहे हैं। 108 सीटें जीतकर भी क्यों फंसी TVK? 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है। विजय की Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) ने चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीतीं, लेकिन सरकार बनाने के लिए उसे 10 और विधायकों के समर्थन की जरूरत थी। इसके बाद कांग्रेस ने सबसे पहले TVK को समर्थन देने का ऐलान किया। कांग्रेस के 5 विधायकों के साथ TVK का आंकड़ा 113 तक पहुंचा, लेकिन फिर भी बहुमत से पीछे था। राजनीतिक समीकरण तब बदले जब CPI, CPI(M), VCK और IUML जैसी पार्टियों ने भी विजय को समर्थन देने का फैसला किया। इसके बाद TVK का आंकड़ा 120 तक पहुंच गया।फिर भी राज्यपाल क्यों नहीं दे रहे न्योता? सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ था कि जब TVK बहुमत का दावा कर रही है, तो राज्यपाल सरकार गठन का निमंत्रण क्यों नहीं दे रहे? राजभवन सूत्रों के मुताबिक शुरुआत में कुछ सहयोगी दलों के समर्थन पत्र औपचारिक रूप से नहीं पहुंचे थे। इसी वजह से राज्यपाल ने विजय को तुरंत न्योता नहीं दिया। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों और संवैधानिक विशेषज्ञों के बीच बहस छिड़ गई। कई नेताओं ने कहा कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते विजय को पहले मौका मिलना चाहिए था और बहुमत साबित करने की जिम्मेदारी विधानसभा फ्लोर टेस्ट में तय होनी चाहिए। तीसरी बार राज्यपाल से मिले विजय सरकार गठन की कोशिशों के बीच विजय लगातार सक्रिय नजर आए। उन्होंने तीन दिनों में तीसरी बार राज्यपाल से मुलाकात की और समर्थन देने वाले दलों के पत्र भी सौंपे। इसके बाद चेन्नई में TVK समर्थकों ने बड़े स्तर पर जश्न मनाया। विजय ने CPI और CPI(M) कार्यालय जाकर वाम दलों के नेताओं का समर्थन के लिए धन्यवाद भी दिया। यह पहली बार था जब उन्होंने सार्वजनिक तौर पर इन दलों के साथ इतनी नजदीकी दिखाई। DMK और INDIA गठबंधन में बढ़ी बेचैनी कांग्रेस द्वारा TVK को समर्थन दिए जाने से DMK और INDIA गठबंधन के भीतर भी असहजता बढ़ गई है। राजनीतिक जानकार इसे तमिलनाडु की राजनीति में “नई पारी” मान रहे हैं। वहीं BJP ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी दल के साथ सरकार गठन में शामिल नहीं होगी और जनता के जनादेश का सम्मान करेगी। क्या विजय बन पाएंगे मुख्यमंत्री? अब लगभग साफ माना जा रहा है कि समर्थन जुटाने के बाद विजय सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच चुके हैं। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक जल्द ही शपथ ग्रहण की तारीख का आधिकारिक ऐलान हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह तमिलनाडु की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव होगा, क्योंकि दशकों बाद राज्य में DMK और AIADMK के बाहर कोई नई ताकत सत्ता तक पहुंचेगी।
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Bengal CM Face Final: सुवेंदु अधिकारी होंगे पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री, अमित शाह ने किया ऐलान

West Bengal New CM 2026: सुवेंदु अधिकारी को BJP विधायक दल ने नेता चुना। अमित शाह ने कोलकाता में उनके नाम का ऐलान किया। रूपा गांगुली बनेंगी डिप्टी CM। श्चिम बंगाल की राजनीति में आखिरकार वह ऐतिहासिक पल आ ही गया जिसका इंतजार पूरे देश को था। BJP विधायक दल की बैठक में सुवेंदु अधिकारी को नेता चुन लिया गया है और अब वही पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री होंगे। कोलकाता के कन्वेंशन सेंटर में हुई हाई-वोल्टेज बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आधिकारिक तौर पर उनके नाम का ऐलान किया। 15 साल बाद बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ BJP पहली बार राज्य में अपनी सरकार बनाने जा रही है। पार्टी के अंदर लंबे मंथन और कई दौर की चर्चाओं के बाद सुवेंदु अधिकारी के नाम पर अंतिम सहमति बनी। दो डिप्टी CM के साथ बनेगी नई सरकार BJP ने बंगाल में संतुलन साधने के लिए दो उपमुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक अभिनेत्री से नेता बनीं रूपा गांगुली के नाम पर डिप्टी CM के तौर पर मुहर लग चुकी है। वहीं दूसरा डिप्टी CM उत्तर बंगाल से आने वाला पुरुष विधायक होगा, जिसकी घोषणा जल्द की जाएगी। राजनीतिक जानकार इसे BJP की “सोशल और रीजनल बैलेंसिंग स्ट्रैटेजी” मान रहे हैं। उत्तर बंगाल में पार्टी को भारी समर्थन मिला था और इसी वजह से वहां से भी मजबूत प्रतिनिधित्व दिया जा रहा है। कल होगा भव्य शपथ ग्रहण समारोह नई सरकार का शपथ ग्रहण कल सुबह 10 बजे कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होगा। BJP इसे “बंगाल विजय दिवस” की तरह पेश कर रही है। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, कई केंद्रीय मंत्री और NDA शासित राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को हाई-सिक्योरिटी जोन में बदल दिया है। BJP कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। कोलकाता की सड़कों पर पार्टी समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया है। ममता को हराकर बने बंगाल की राजनीति के सबसे बड़े चेहरे सुवेंदु अधिकारी वही नेता हैं जिन्होंने 2021 में नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को हराकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई थी। इस बार भी उन्होंने भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को शिकस्त देकर बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा उलटफेर कर दिया। उन्होंने नंदीग्राम से लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुवेंदु अधिकारी की आक्रामक शैली, संगठन पर पकड़ और जमीनी नेटवर्क ने BJP को बंगाल में ऐतिहासिक जीत दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई। 207 सीटों के साथ BJP का ऐतिहासिक प्रदर्शन पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में BJP ने 294 में से 207 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया है। वहीं TMC को करारी हार का सामना करना पड़ा। यह जीत सिर्फ सरकार बदलने तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे बंगाल की राजनीति में “नई वैचारिक शुरुआत” के तौर पर देखा जा रहा है। अब नजरें कल के शपथ ग्रहण समारोह और नई सरकार के पहले फैसलों पर टिकी हैं।
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Nashik TCS Case, Nida Khan

BREAKING: 40 दिन बाद गिरफ्तार हुई निदा खान! नासिक TCS कांड में मालेगांव-मलेशिया कनेक्शन की जांच तेज

नासिक TCS धर्मांतरण और यौन शोषण मामले में मुख्य आरोपी निदा खान को छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब मोबाइल, डायरी और कथित मालेगांव-मलेशिया नेटवर्क की जांच में जुटी है। BREAKING: 40 दिन तक फरार रही निदा खान आखिरकार गिरफ्तार, नासिक TCS कांड में नए खुलासों से हड़कंप महाराष्ट्र के चर्चित नासिक TCS कांड में बड़ा मोड़ आ गया है। लगभग 40 दिनों से फरार चल रही मुख्य आरोपी निदा खान को आखिरकार पुलिस ने छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियों की नजर उसके मोबाइल फोन, निजी डायरी और कथित धर्मांतरण नेटवर्क पर टिक गई है। पुलिस के अनुसार, निदा खान पिछले चार दिनों से छत्रपति संभाजीनगर के नारेगांव स्थित कैसर कॉलोनी के एक फ्लैट में छिपकर रह रही थी। उसके साथ उसके माता-पिता, भाई और मौसी भी मौजूद थे। नासिक SIT, क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम पिछले दो दिनों से उस फ्लैट पर नजर रखे हुए थी। देर रात हुई कार्रवाई में उसे दबोच लिया गया। कौन है निदा खान? निदा खान देश की बड़ी IT कंपनी TCS की नासिक यूनिट में कार्यरत थी, लेकिन मामला सामने आने के बाद कंपनी ने उसे निलंबित कर दिया। उसके खिलाफ बलात्कार, यौन शोषण, मानसिक प्रताड़ना और कथित धर्मांतरण के लिए दबाव डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में इससे पहले भी छह कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन पुलिस को सबसे ज्यादा तलाश निदा खान की थी क्योंकि जांच एजेंसियां उसे पूरे कथित नेटवर्क की “मुख्य कड़ी” मान रही हैं। पुलिस को कैसे मिला सुराग? सूत्रों के मुताबिक, पुलिस को तकनीकी निगरानी और कुछ संदिग्ध संपर्कों के जरिए निदा खान की लोकेशन का इनपुट मिला था। इसके बाद नारेगांव इलाके में लगातार निगरानी रखी गई। जैसे ही पुलिस को पुष्टि हुई कि निदा फ्लैट के अंदर मौजूद है, टीम ने देर रात कार्रवाई कर उसे हिरासत में ले लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे तुरंत नासिक ले जाया गया, जहां JMFC जज के समक्ष पेश कर ट्रांजिट रिमांड लिया गया। FIR में क्या-क्या आरोप? FIR में दर्ज आरोपों के मुताबिक, कार्यस्थल पर कुछ महिला कर्मचारियों पर इस्लामी परंपराएं अपनाने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि: जांच एजेंसियों का दावा है कि एक पीड़िता का नाम बदलकर “हानिया” रखने और उसे नौकरी के नाम पर मलेशिया भेजने की योजना भी बनाई जा रही थी। मोबाइल और डायरी से खुल सकते हैं बड़े राज SIT का मानना है कि निदा खान का मोबाइल फोन और निजी डायरी इस पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी साबित हो सकते हैं। जांचकर्ताओं को शक है कि: इसी वजह से पुलिस उसकी कस्टोडियल पूछताछ पर जोर दे रही है। गर्भावस्था का हवाला देकर मांगी थी राहत गिरफ्तारी से पहले निदा खान ने अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर करते हुए खुद को दो महीने की गर्भवती बताया था और सुरक्षा की मांग की थी। हालांकि अदालत ने SIT की दलीलों को अहम मानते हुए राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता और जांच में आरोपी की भूमिका को देखते हुए हिरासत में पूछताछ जरूरी है। राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज इस केस के सामने आने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति भी गरमा गई है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी बहस जारी है। एक पक्ष इसे संगठित धर्मांतरण नेटवर्क बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष निकालने से बचने की बात कह रहा है। फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और डिजिटल सबूतों की जांच के बाद कई और बड़े खुलासे संभव हैं।
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Shuvendu Adhikari PA shot dead, Chandranath Rath murder

Breaking News: शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या

पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणामों के बाद हिंसा के बीच बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की मध्यमग्राम में गोली मारकर हत्या। जानिए पूरी घटना, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और जांच की ताज़ा अपडेट। Breaking News: बंगाल में खूनी सियासत! शुभेंदु अधिकारी के सबसे करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद जारी हिंसा अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। बुधवार देर रात उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम इलाके में बीजेपी नेता और संभावित मुख्यमंत्री चेहरे Suvendu Adhikari के निजी सहायक और करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रात करीब 10:20 बजे चंद्रनाथ रथ अपनी कार से बारासात स्थित घर लौट रहे थे। इसी दौरान दो बाइक पर आए हमलावरों ने मध्यमग्राम के दोहरिया इलाके में उनकी कार को ओवरटेक कर रोक लिया और बेहद करीब से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हमलावरों ने करीब 10 राउंड फायरिंग की, जिनमें से कई गोलियां रथ को लगीं। उनके साथ मौजूद ड्राइवर और एक अन्य सहयोगी भी गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। “ये प्री-प्लान्ड मर्डर है” — शुभेंदु अधिकारी घटना के बाद बीजेपी नेता Suvendu Adhikari ने इसे “पूर्व नियोजित हत्या” बताया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार अधिकारी ने दावा किया कि कई दिनों से रेकी की जा रही थी और इसके बाद हमला किया गया। बीजेपी नेताओं ने सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा है। वहीं दूसरी ओर All India Trinamool Congress ने भी घटना की निंदा करते हुए कोर्ट मॉनिटरिंग में CBI जांच की मांग की है। कौन थे चंद्रनाथ रथ? चंद्रनाथ रथ पूर्व भारतीय वायुसेना कर्मी बताए जा रहे हैं। वे पिछले कई वर्षों से शुभेंदु अधिकारी के बेहद करीबी सहयोगी थे और चुनावी रणनीति से लेकर संगठनात्मक काम तक संभालते थे। बीजेपी के अंदर उन्हें अधिकारी का सबसे भरोसेमंद चेहरा माना जाता था। बंगाल में चुनाव बाद हिंसा क्यों बढ़ रही है? पश्चिम बंगाल में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद कई जिलों से हिंसा, आगजनी, हमले और राजनीतिक झड़पों की खबरें सामने आ रही हैं। पुलिस के अनुसार चुनाव परिणाम आने के बाद अब तक 200 से ज्यादा FIR दर्ज की जा चुकी हैं और सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कोलकाता और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस CCTV फुटेज खंगाल रही है और हमलावरों की तलाश जारी है। राजनीतिक माहौल हुआ और गर्म इस हत्या के बाद बंगाल की राजनीति पूरी तरह उबाल पर है। बीजेपी इसे “लोकतंत्र पर हमला” बता रही है, जबकि टीएमसी हिंसा के लिए बीजेपी समर्थकों को जिम्मेदार ठहरा रही है। आने वाले दिनों में यह मामला बंगाल की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। यह भी पढ़े –Bengal Political Crisis 2026: 9 May को BJP Government की शपथ
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अक्षर पटेल का ऑलराउंड शो, शुभमन गिल की कप्तानी पारी; भारत ने इंग्लैंड को 6 विकेट से हराकर पहला वनडे जीता

बर्मिंघम। ऑलराउंडर अक्षर पटेल के शानदार प्रदर्शन और कप्तान शुभमन गिल की बेहतरीन बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने इंग्लैंड को पहले वनडे मुकाबले में 6 विकेट से हराकर सीरीज में विजयी शुरुआत की। एजबेस्टन मैदान पर खेले गए मैच में भारत ने 259 रन के लक्ष्य को 45.2 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 262 रन बनाकर हासिल कर लिया। अक्षर पटेल ने नाबाद 57 रन बनाए, जबकि वॉशिंगटन सुंदर ने भी नाबाद 52 रन की महत्वपूर्ण पारी खेलकर टीम को जीत तक पहुंचाया। कप्तान शुभमन गिल ने 80 रन बनाए, लेकिन मैच के दौरान क्रैम्प्स की समस्या के कारण उन्हें रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान छोड़ना पड़ा। शुरुआती झटकों के बाद गिल ने संभाली पारी लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। रोहित शर्मा 11 रन और विराट कोहली 5 रन बनाकर जल्दी आउट हो गए। इसके बाद कप्तान शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर ने तीसरे विकेट के लिए 101 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम की पारी को संभाला। श्रेयस 35 रन बनाकर रनआउट हुए, जबकि केएल राहुल बोल्ड होकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर ने जिम्मेदारी संभालते हुए पांचवें विकेट के लिए 102 रन की अविजित साझेदारी की और भारत को शानदार जीत दिलाई। जो रूट और लियाम डॉसन ने इंग्लैंड को संभाला इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने 47.5 ओवर में 258 रन बनाए। इंग्लैंड की शुरुआत मजबूत रही और टीम ने 61 रन तक कोई विकेट नहीं गंवाया, लेकिन इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने जोरदार वापसी करते हुए महज 19 रन के भीतर 5 विकेट झटक दिए। मध्यक्रम में जो रूट ने 76 रन और लियाम डॉसन ने 68 रन की अहम पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों ने छठे विकेट के लिए 121 रन की साझेदारी कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। अक्षर पटेल ने गेंद और बल्ले दोनों से निभाई अहम भूमिका भारतीय गेंदबाजों में अक्षर पटेल सबसे सफल रहे। उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट अपने नाम किए। वहीं प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बरार ने 2-2 विकेट हासिल किए। जसप्रीत बुमराह और शिवम दुबे को एक-एक सफलता मिली। गेंद और बल्ले दोनों से बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले अक्षर पटेल ने टीम इंडिया की जीत में सबसे अहम भूमिका निभाई और भारत ने सीरीज की शानदार शुरुआत की। क्रिकेट और खेल जगत की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

CAG रिपोर्ट में जल जीवन मिशन की पोल: छत्तीसगढ़ में 33% नल कनेक्शन गैर-कार्यशील, ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा

रायपुर। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन (JJM) के क्रियान्वयन को लेकर कई गंभीर खामियों का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार कमजोर योजना, धीमा क्रियान्वयन, निगरानी की कमी और गलत रिपोर्टिंग के कारण ग्रामीण पेयजल योजनाओं की प्रभावशीलता और दीर्घकालिक स्थिरता प्रभावित हुई है। मार्च 2024 तक की अवधि पर आधारित ‘छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन का प्रदर्शन ऑडिट’ रिपोर्ट मंगलवार को वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में पेश की। रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य सरकार ने इसके लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया, जबकि उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद मिशन के कार्यों में तेजी आई है। योजना निर्माण में गंभीर खामियां CAG की रिपोर्ट के मुताबिक जल जीवन मिशन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कई स्थानों पर गांव स्तर की कार्ययोजना तैयार किए बिना ही जिला स्तरीय योजनाएं बना दी गईं, जबकि राज्य स्तरीय कार्ययोजना तैयार ही नहीं की गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि राज्य स्तर पर जल सुरक्षा योजना नहीं बनाई गई, जिससे जल स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता और योजनाओं के रखरखाव की स्पष्ट रणनीति विकसित नहीं हो सकी। 33 प्रतिशत नल कनेक्शन निकले गैर-कार्यशील रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2025 तक 50 लाख ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था। जनवरी 2025 तक 40.10 लाख फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (FHTC) लगाए गए। हालांकि, इनमें से 13.31 लाख (करीब 33%) कनेक्शन गैर-कार्यशील पाए गए। इसके पीछे सूख चुके जल स्रोत, अधूरी ओवरहेड टंकियां, बिजली कनेक्शन का अभाव और सोलर पंप स्थापित नहीं होना प्रमुख कारण बताए गए हैं। ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा राज्य के 19,656 गांवों को मार्च 2024 तक ‘हर घर जल’ प्रमाणित किया जाना था, लेकिन केवल 716 गांव (3.64 प्रतिशत) ही इस लक्ष्य तक पहुंच सके। ऑडिट में ऐसे मामले भी सामने आए, जहां अधूरे कार्यों के बावजूद गांवों को ‘हर घर जल’ प्रमाणित कर दिया गया। किसी भी जिले में 100% कवरेज नहीं मार्च 2024 तक राज्य के 33 में से किसी भी जिले और 146 में से किसी भी विकासखंड में 100 प्रतिशत नल जल कवरेज नहीं था। योजनाओं की प्रगति बेहद धीमी रिपोर्ट के अनुसार जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत 29,153 सिंगल विलेज स्कीम में से मार्च 2024 तक केवल 172 योजनाएं पूरी हो सकीं। इनमें भी सिर्फ 32 ग्राम पंचायतों को योजनाओं का संचालन सौंपा गया। वहीं, स्वीकृत 70 मल्टी विलेज स्कीम में से मार्च 2025 तक एक भी योजना पूरी नहीं हो सकी, जिससे करीब 9.85 लाख घरों तक सतही जल स्रोतों से पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य प्रभावित हुआ। सोलर आधारित योजनाओं में भी अनियमितताएं CAG ने पाया कि कई सोलर आधारित पेयजल योजनाओं में निर्धारित क्षमता से अधिक नल कनेक्शन जोड़ दिए गए। इसके कारण 28,984 परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुसार पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। वित्तीय और गुणवत्ता संबंधी कमियां रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य सरकार केंद्र और राज्यांश मिलाकर 6,480.04 करोड़ रुपये की आवश्यक वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित करने में विफल रही। साथ ही मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), जिला खनिज न्यास (DMF), सांसद निधि और CSR जैसी योजनाओं के संसाधनों के समन्वय के लिए भी कोई प्रभावी रणनीति नहीं बनाई गई। जल गुणवत्ता जांच की व्यवस्था कमजोर राज्य की 75 जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में से केवल 4 प्रयोगशालाएं ही सभी 13 निर्धारित जल गुणवत्ता मानकों की जांच करने में सक्षम पाई गईं। इसके अलावा 37 प्रतिशत प्रयोगशालाओं को NABL की मान्यता प्राप्त नहीं थी। रिपोर्ट में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी निर्धारित मानकों के अनुसार जल गुणवत्ता जांच नहीं होने की बात कही गई है। CAG की प्रमुख सिफारिशें रिपोर्ट में सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं, जिनमें शामिल हैं— सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को ठहराया जिम्मेदार CAG रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार मिशन को खराब स्थिति में छोड़कर गई थी, जिसके कारण परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की समय-सीमा 2024 से बढ़ाकर 2028 तक कर दी है। मार्च 2026 में स्वीकृत मिशन के दूसरे चरण को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा सके।

रायपुर में 16 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा

रायपुर। राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की विश्वविख्यात रथयात्रा 16 जुलाई को धार्मिक आस्था, वैदिक परंपराओं और भव्य आयोजन के साथ निकाली जाएगी। वहीं बाहुड़ा यात्रा 24 जुलाई को आयोजित होगी। मंदिर परिसर में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र तथा माता सुभद्रा के तीनों रथों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। रथयात्रा से पहले 14 जुलाई की शाम 6 बजे भगवान का नेत्रोत्सव आयोजित किया जाएगा। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सांस्कृतिक एकता, भाईचारे और सनातन परंपरा का भी प्रतीक माना जाता है। भक्त और भगवान के मिलन का महापर्व श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष एवं विधायक पुरंदर मिश्रा ने बताया कि रथयात्रा भक्तों और भगवान के प्रत्यक्ष मिलन का महापर्व है। वर्ष में केवल इसी अवसर पर भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मंदिर से बाहर निकलकर श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। 11 वैदिक पंडित कराएंगे विशेष पूजन रथयात्रा के दिन सुबह 11 वैदिक पंडितों के सान्निध्य में भगवान का विशेष अभिषेक, पूजन और हवन कराया जाएगा। चंदन, केसर, कस्तूरी, कपूर सहित विभिन्न सुगंधित द्रव्यों से भगवान का दिव्य स्नान कराया जाएगा। इसके बाद भगवान को गजामूंग महाप्रसाद अर्पित किया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और मंगल वाद्यों की गूंज के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा अपने-अपने रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए प्रस्थान करेंगे। राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा रथयात्रा की सबसे प्रमुख परंपराओं में शामिल ‘छेरा पहरा’ का निर्वहन इस वर्ष भी किया जाएगा। परंपरा के अनुसार राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भगवान के रथ के आगे सोने की झाड़ू से मार्ग की प्रतीकात्मक सफाई करेंगे। यह परंपरा सेवा, समर्पण और विनम्रता का संदेश देती है। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। भजन, झांकियों और लोकनृत्य से गूंजेगा शहर रथयात्रा के दौरान महिला मंडलों द्वारा भजन-कीर्तन, आकर्षक सांस्कृतिक झांकियां और पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। “जय जगन्नाथ” के जयघोष के साथ मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहेगा। श्रद्धालुओं से की गई विशेष अपील श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति ने प्रदेशभर के श्रद्धालुओं से सपरिवार रथयात्रा में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने और सनातन संस्कृति की इस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनने की अपील की है। रायपुर और छत्तीसगढ़ की धार्मिक, सांस्कृतिक और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, सरकार और बोर्ड से 10 दिन में मांगा जवाब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि “कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता।” हालांकि, नीति को लागू करने में सामने आ रही व्यावहारिक चुनौतियों को देखते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार, CBSE और संबंधित पक्षों से 10 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी। यह नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की गई है। इसके तहत छात्रों को दो भारतीय भाषाएं और एक विदेशी भाषा पढ़नी होगी। इससे कई छात्रों को पहले से पढ़ी जा रही भाषाओं में बदलाव करना पड़ सकता है। क्या है विवाद? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CBSE ने पर्याप्त तैयारी के बिना नई भाषा नीति लागू कर दी है। उनके मुताबिक कई स्कूलों में संबंधित भाषाओं के शिक्षक, पाठ्यपुस्तकें और आवश्यक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे छात्रों और शिक्षकों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े अहम सवाल और जवाब 1. मामला क्या है? सुप्रीम कोर्ट में CBSE के उस नियम को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है। इनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। हालांकि, CBSE ने 6 जून को संशोधित दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया था कि इस वर्ष कक्षा 10 के छात्रों को तीसरी भाषा (R3) की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। 2. नए नियम में क्या बदलाव हुआ है? पहले कई छात्र अंग्रेजी के साथ एक भारतीय और एक विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच या जर्मन) पढ़ते थे। नए नियम के अनुसार अब तीन भाषाओं में से कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य है। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही चुनी जा सकेगी। 3. याचिका किसने दायर की? यह याचिका छात्र यशिका भंडारी, अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी की ओर से दायर की गई है। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर, मुकुल रोहतगी और गोपाल शंकरनारायणन ने पैरवी की। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। 4. याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्ति क्या है? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई व्यवस्था अचानक लागू कर दी गई। कई भारतीय भाषाओं की किताबें उपलब्ध नहीं हैं और अधिकांश स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक भी नहीं हैं। ऐसे में छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। 5. किताबों को लेकर क्या दलील दी गई? सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि 22 भारतीय भाषाओं में से फिलहाल केवल तीन भाषाओं की पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध हैं। ऐसे में बाकी भाषाओं की पढ़ाई शुरू करना व्यवहारिक रूप से कठिन होगा। 6. शिक्षकों की कमी पर क्या कहा गया? याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि नई भारतीय भाषाएं पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता होगी, लेकिन इतने कम समय में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति और प्रशिक्षण संभव नहीं है। 7. क्या विदेशी भाषाएं बंद हो जाएंगी? नहीं। छात्र फ्रेंच, जर्मन, जापानी जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ सकते हैं, लेकिन इसके साथ उन्हें दो भारतीय भाषाएं भी पढ़नी होंगी। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में होगी। 8. क्या तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा होगी? नहीं। CBSE ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) का अलग बोर्ड एग्जाम नहीं होगा, ताकि छात्रों पर अतिरिक्त परीक्षा का दबाव न बढ़े। 9. अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार केंद्र सरकार, CBSE और NCERT अपना जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद 29 जुलाई को अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी। नई शिक्षा नीति 2020 क्या है? भारत सरकार ने 29 जुलाई 2020 को नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को मंजूरी दी थी। यह 34 वर्षों बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में किया गया सबसे बड़ा बदलाव माना जाता है। इससे पहले शिक्षा नीति 1986 में लागू हुई थी, जिसे 1992 में संशोधित किया गया था। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना, छात्रों में व्यावहारिक ज्ञान और कौशल विकसित करना है। केंद्र सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से 2030 तक लागू करने का लक्ष्य रखा है। चूंकि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए इसे लागू करने में केंद्र और राज्य सरकारों दोनों की भूमिका होती है। देश, शिक्षा और करियर से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

बिलासपुर: CM हेल्पलाइन शिकायतों के खराब निराकरण पर PHE के ईई को नोटिस, कलेक्टर ने अधिकारियों को लगाई फटकार

बिलासपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर संचालित सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों के निराकरण की समीक्षा बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं मिलने पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने पीएचई विभाग के कार्यपालन अभियंता (ईई) रूपेश कुमार धनंजय को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। टीएल (समय-सीमा) बैठक में कलेक्टर ने सभी विभागों के अधिकारियों से कहा कि शिकायतों का केवल औपचारिक निपटारा करने के बजाय उनका गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने समय-सीमा का पालन करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी। एकल शिक्षकीय स्कूलों में जल्द होंगे अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने एकल शिक्षकीय स्कूलों में तत्काल अतिथि शिक्षक नियुक्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर सेवानिवृत्त शिक्षकों की सेवाएं भी ली जाएं, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। जर्जर स्कूल भवनों में नहीं लगेंगी कक्षाएं कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जर्जर भवनों में किसी भी स्थिति में कक्षाएं संचालित नहीं की जाएं। ऐसे विद्यालयों के लिए वैकल्पिक भवन की व्यवस्था करने और नए भवन या अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के प्रस्ताव शीघ्र भेजने को कहा गया। स्वास्थ्य विभाग को भी लगाई फटकार जिला खनिज न्यास (DMF) से जुड़े कार्यों की समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए डीएमएफ की राशि का प्रभावी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाए। बैठक में दिए गए प्रमुख निर्देश कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि शासन की योजनाओं और जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभाग समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करें। बिलासपुर और छत्तीसगढ़ की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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