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Zomato-Blinkit की पैरेंट कंपनी Eternal लाएगी Dark.ai, सीक्रेट चैट और प्राइवेसी पर होगा फोकस

जोमैटो और ब्लिंकइट की पैरेंट कंपनी एटरनल (Eternal) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में नया कदम उठाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के प्रमुख दीपिंदर गोयल ने ‘Dark.ai’ नाम के नए AI ऐप के बारे में जानकारी दी है। इसका मुख्य फोकस यूजर्स की प्राइवेसी और संवेदनशील बातचीत की सुरक्षा पर होगा। गोयल के मुताबिक, इस ऐप को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि लोग अपनी निजी बातें, गोपनीय विचार, रिसर्च और जटिल सवाल बिना किसी झिझक के साझा कर सकें। फिलहाल कंपनी के कर्मचारी इसकी टेस्टिंग कर रहे हैं। डेटा सुरक्षा पर जोर, कंपनी भी नहीं पढ़ पाएगी चैट दीपिंदर गोयल ने बताया कि Dark.ai को कंपनी के अपने कंप्यूटर सिस्टम और सुरक्षित तकनीक पर चलाने की योजना है। इसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन जैसी सुरक्षा व्यवस्था का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है, ताकि बातचीत को अनधिकृत रूप से पढ़े जाने से बचाया जा सके। ऐप में एक विशेष मेमोरी सिस्टम भी होगा, जिस पर यूजर का नियंत्रण रहेगा। इसके जरिए यूजर अपनी जरूरत के अनुसार पुरानी बातचीत से जुड़ी जानकारी को सुरक्षित रख सकेंगे या हटा सकेंगे। हालांकि, ऐप की सुरक्षा व्यवस्था और डेटा प्रबंधन से जुड़े सभी तकनीकी विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसलिए कंपनी के दावों की वास्तविक सीमा लॉन्च के समय उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट होगी। स्टार्टअप, वैज्ञानिकों और रिसर्चर्स के लिए होगा उपयोगी Dark.ai को खास तौर पर उन लोगों और संस्थानों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, जिन्हें संवेदनशील जानकारियों के साथ काम करना पड़ता है। इनमें स्टार्टअप संस्थापक, वैज्ञानिक, रिसर्चर्स, बड़ी कंपनियां और सरकारी कार्यालय शामिल हैं। गोयल के मुताबिक, इस AI को केवल यूजर को खुश करने के लिए जवाब देने के बजाय तथ्यों के आधार पर उत्तर देने के लिए तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसा सिस्टम बनाना है, जो यूजर की बातों से सहमत होने के बजाय अपनी समझ के अनुसार जवाब दे। मौजूदा AI ऐप्स की प्राइवेसी पर उठाए सवाल गोयल ने मौजूदा AI प्लेटफॉर्म्स पर डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि कई सेवाओं में यूजर डेटा सेव न करने का विकल्प चुनने के बाद भी बैकएंड पर जानकारी के प्रबंधन को लेकर स्पष्टता की कमी महसूस हो सकती है। उन्होंने कहा कि आम AI ऐप्स इस्तेमाल करते समय यूजर्स के मन में यह आशंका बनी रह सकती है कि उनकी बातचीत कोई पढ़ सकता है। उनके मुताबिक, इसी तरह का डर और अविश्वास लोगों को AI का पूरी क्षमता से इस्तेमाल करने से रोक सकता है। Dark.ai के जरिए कंपनी इस चिंता को कम करने और यूजर्स को निजी बातचीत के लिए अधिक सुरक्षित माहौल देने की कोशिश कर रही है। इसी साल लॉन्च की तैयारी, कीमत पर फैसला नहीं कंपनी की ओर से ऐप की लॉन्चिंग को लेकर इसी साल की तैयारी का संकेत दिया गया है। हालांकि, इसके काम करने की गति, इस्तेमाल किए जाने वाले AI मॉडल और अन्य तकनीकी विशेषताओं की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ऐप मुफ्त होगा या इसके लिए सब्सक्रिप्शन लेना पड़ेगा, इस बारे में भी कंपनी ने कोई जानकारी नहीं दी है। इससे होने वाली संभावित कमाई को लेकर भी फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो और क्विक कॉमर्स सेवा ब्लिंकइट के बाद AI सॉफ्टवेयर क्षेत्र में एटरनल का यह संभावित कदम कंपनी के कारोबार के विस्तार की दिशा में अहम हो सकता है।
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eMudhra में तकनीकी गड़बड़ी की जांच के लिए IT मंत्रालय ने बनाई स्पेशल टीम, सरकार बोली- भारतीय वेबसाइट्स और ऐप सुरक्षित

डिजिटल सुरक्षा सेवाएं देने वाली कंपनी ई-मुद्रा (eMudhra) में तकनीकी गड़बड़ी सामने आने के बाद आईटी मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की है। सरकार के मुताबिक, इस गड़बड़ी का असर कंपनी के विदेशी कारोबार तक सीमित है। भारतीय वेबसाइट्स और ऐप्स की सुरक्षा प्रभावित होने की बात सामने नहीं आई है। सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से सावधान रहने की अपील की है। मामले की जांच साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मदद से की जा रही है, ताकि गड़बड़ी की वजह और उसके संभावित प्रभाव का पता लगाया जा सके। eMudhra दो तरह की डिजिटल सुरक्षा सेवाएं देती है ई-मुद्रा का कारोबार मुख्य रूप से दो क्षेत्रों में फैला है। पहला, भारत में डिजिटल सिग्नेचर और eSign सेवाएं देना। दूसरा, विदेशी वेबसाइट्स के लिए डिजिटल सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी करना। कंपनी से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, हालिया तकनीकी गड़बड़ी उसके विदेशी कारोबार से संबंधित डिजिटल सर्टिफिकेट्स में सामने आई। भारतीय डिजिटल सिग्नेचर और eSign सेवाओं पर इसका असर होने की जानकारी नहीं दी गई है। सिस्टम की खराबी से बने कमजोर सुरक्षा कोड ई-मुद्रा के मुताबिक, सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण कुछ कमजोर सुरक्षा कोड बन गए थे। एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ने इस समस्या के बारे में एप्पल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मोजिला जैसी बड़ी टेक कंपनियों को अलर्ट किया। चिंता जताई गई कि इन कमजोर कोड का फायदा उठाकर साइबर हमलावर सुरक्षा प्रमाणपत्रों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि इन कोड का इस्तेमाल करके वास्तव में कोई हमला हुआ था। गूगल और मोजिला ने प्रभावित सर्टिफिकेट्स पर की कार्रवाई तकनीकी गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद ब्राउजर कंपनियों ने प्रभावित सुरक्षा प्रमाणपत्रों के खिलाफ कदम उठाए। इन कदमों का उद्देश्य प्रभावित प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल से जुड़े जोखिम को सीमित करना है। eMudhra का दावा- ग्राहक का डेटा चोरी नहीं हुआ ई-मुद्रा ने कहा है कि उसका मुख्य सिस्टम सुरक्षित है और किसी ग्राहक का डेटा चोरी नहीं हुआ है। कंपनी के अनुसार, जिस विदेशी कारोबार में गड़बड़ी सामने आई, उससे उसकी कुल कमाई का लगभग 1 प्रतिशत हिस्सा आता है। कंपनी प्रभावित विदेशी ग्राहकों को नए और सुरक्षित डिजिटल सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में भी जुटी है, ताकि उनकी सेवाएं जारी रह सकें। सरकार ने अफवाहों से बचने की अपील की आईटी मंत्रालय ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट खबरों के आधार पर घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार की साइबर सुरक्षा टीम और विशेषज्ञ तकनीकी पहलुओं की पड़ताल कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल, गड़बड़ी के वास्तविक दायरे और संभावित प्रभाव को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
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Gold

Gold Price Today: सोने के दाम में बड़ी गिरावट, 10 ग्राम का भाव ₹1.43 लाख पर

सोना (Gold) और चांदी (Silver) खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। पिछले तीन दिनों में दोनों कीमती धातुओं के भाव में अच्छी-खासी गिरावट आई है। सोना करीब ₹3,000 और चांदी लगभग ₹9,000 तक सस्ती हुई है। ऐसे में शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने या निवेश की योजना बना रहे लोगों की नजर अब बाजार के अगले रुख पर है। 22 अक्टूबर 2026 के बाजार अपडेट के मुताबिक, 10 ग्राम सोने की कीमत करीब ₹1.43 लाख और चांदी का भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो बताया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग बाजारों में कीमतों का अंतर हो सकता है। Gold Rate Today: ₹1.43 लाख पर पहुंचा 10 ग्राम सोना Gold Price में आई गिरावट से खरीदारों को कुछ राहत जरूर मिली है। बीते तीन दिनों में भाव करीब ₹3,000 नीचे आने से उन लोगों के लिए खरीदारी का मौका बन सकता है, जो लंबे समय से कीमतें कम होने का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, सोना खरीदने से पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर पता कर लें। 24 कैरेट सोने की कीमत और गहने बनाने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने के भाव में अंतर होता है। इसके अलावा ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और GST भी देना पड़ता है। Silver Rate Today: चांदी ₹9,000 तक हुई सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। पिछले तीन दिनों में चांदी करीब ₹9,000 तक सस्ती हुई है और इसका भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो के स्तर पर बताया जा रहा है। चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर उन ग्राहकों पर भी पड़ता है, जो त्योहारों पर चांदी के सिक्के, बर्तन या दूसरे सामान खरीदते हैं। हालांकि, खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार में चांदी का ताजा भाव और शुद्धता की जानकारी लेना जरूरी है। सोना-चांदी के दाम क्यों गिर रहे हैं? Gold or Silver की कीमतें केवल घरेलू मांग से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव, डॉलर की चाल, रुपये की स्थिति और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें भी इनके भाव पर असर डालती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतें कमजोर होती हैं, तो भारतीय बाजार में भी इसका असर दिखाई दे सकता है। इसके अलावा मुनाफावसूली के कारण भी कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, बाजार में आई गिरावट की किसी एक वजह को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। कीमतों की चाल कई आर्थिक और वैश्विक कारकों पर निर्भर करती है। क्या अभी सोना और चांदी खरीदना सही रहेगा? अगर आप शादी या त्योहार के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो मौजूदा गिरावट आपके लिए राहत की बात हो सकती है। लेकिन केवल तीन दिन की गिरावट देखकर यह मान लेना ठीक नहीं है कि आगे भी भाव लगातार कम होंगे। खरीदारी से पहले अलग-अलग ज्वेलर्स के रेट की तुलना करें। सोने पर हॉलमार्क और शुद्धता की जांच करें तथा बिल में मेकिंग चार्ज और GST का पूरा विवरण देखें। निवेश के लिहाज से भी जल्दबाजी करने के बजाय अपने बजट और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना बेहतर है। आगे Gold-Silver Price में क्या बदलाव हो सकता है? आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख, अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों से जुड़ी खबरें और रुपये की चाल सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में भाव में फिर तेजी आने या गिरावट जारी रहने, दोनों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, तीन दिनों में सोने और चांदी के दाम में आई गिरावट ने खरीदारों को थोड़ी राहत दी है। अगर आप आज खरीदारी करने जा रहे हैं, तो पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर जांच लें, क्योंकि बाजार भाव और ज्वेलरी की अंतिम कीमत में अंतर हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Share Market

Share Market Update सेंसेक्स की तेजी पर लगा ब्रेक, Auto-Metal Stocks में दबाव

शेयर बाजार (Share Market) में तेजी देखकर खरीदारी करने वाले निवेशकों के लिए बुधवार का कारोबार थोड़ा निराशाजनक रहा। 21 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार ने शुरुआत में अच्छी बढ़त बनाई, लेकिन दोपहर तक तस्वीर बदल गई। सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर से करीब 1,200 अंक नीचे आ गया और 73,500 के आसपास कारोबार करने लगा। ऑटो और मेटल शेयरों में बिकवाली ने बाजार की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। शुरुआती कारोबार में खरीदारी का माहौल था, लेकिन जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया। इसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर दबाव देखने को मिला। बाजार में गिरावट के बीच निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर है। Sensex और Nifty में गिरावट, शुरुआती तेजी पड़ी फीकी बुधवार को बाजार की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ हुई थी। कुछ बड़े शेयरों में खरीदारी से प्रमुख इंडेक्स को सहारा मिला। हालांकि, ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू होने के बाद सेंसेक्स अपनी बढ़त बरकरार नहीं रख सका। दिन के उच्चतम स्तर से करीब 1,200 अंक की गिरावट ने बाजार में जारी उतार-चढ़ाव को उजागर किया। निफ्टी पर भी दबाव देखने को मिला। निवेशक फिलहाल बाजार में बड़े दांव लगाने के बजाय कारोबार से जुड़े संकेतों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। Auto और Metal Stocks में क्यों बढ़ी बिकवाली? बाजार की गिरावट में ऑटो और मेटल सेक्टर के शेयरों की कमजोरी चर्चा में रही। इन सेक्टरों में बिकवाली से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। ऑटो कंपनियों के शेयरों पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए वाहन बिक्री, मांग और उत्पादन लागत जैसे पहलू अहम हैं। वहीं, मेटल कंपनियों के प्रदर्शन पर वैश्विक मांग, धातुओं की कीमतों और औद्योगिक गतिविधियों का असर पड़ता है। हालांकि, पूरे सेक्टर को एक ही नजर से देखना सही नहीं होगा। अलग-अलग कंपनियों के शेयरों में उनकी वित्तीय स्थिति और कारोबार के आधार पर अलग-अलग चाल देखने को मिल सकती है। Crude Oil Price में तेजी से बढ़ी चिंता अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भी भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। तेल महंगा होने से भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर महंगाई, परिवहन खर्च और कई कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे कुछ कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से निवेशक वैश्विक घटनाक्रम और तेल बाजार की चाल पर नजर रख रहे हैं। IT Stocks और Reliance पर भी निवेशकों की नजर जहां ऑटो और मेटल शेयरों में दबाव देखने को मिला, वहीं आईटी सेक्टर और रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े घटनाक्रम भी बाजार की चर्चा में रहे। आईटी कंपनियों के तिमाही नतीजे और कारोबार की संभावनाएं निवेशकों के लिए अहम हैं। इसके अलावा, जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO से जुड़ी गतिविधियों पर भी बाजार की नजर बनी हुई है। हालांकि, किसी एक कंपनी में खरीदारी या तेजी से पूरे बाजार की दिशा तय नहीं होती। सेंसेक्स और निफ्टी पर कई बड़े शेयरों और सेक्टरों का संयुक्त असर पड़ता है। Share Market में गिरावट की 4 बड़ी वजहें निवेशक अब किन बातों पर रखें नजर? आने वाले कारोबारी सत्रों में कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, वैश्विक बाजारों का रुख और कंपनियों के तिमाही नतीजे अहम रहेंगे। इन संकेतों से बाजार की दिशा को समझने में मदद मिल सकती है, हालांकि बाजार की चाल का सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल एक दिन की तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला न लें। निवेश से पहले कंपनी के प्रदर्शन, अपनी जोखिम क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना बेहतर रहता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold-Silver Rate

Gold-Silver Rate सोना लगातार दूसरे दिन हुआ सस्ता, चांदी के दाम भी गिरे

Gold-Silver Rate में गिरावट ने सर्राफा बाजार का ध्यान खींचा है। बीते दो दिनों में सोना करीब ₹2,300 सस्ता होने की खबर है। वहीं, चांदी के दाम में भी लगभग ₹5,000 की कमी दर्ज की गई है। ऐसे में जो लोग त्योहारों या शादी के लिए गहने खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, उनकी नजर अब सोने-चांदी के नए भाव पर है। आपके दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 10 ग्राम सोने की कीमत घटकर करीब ₹1.44 लाख रह गई है। हालांकि, 21 अक्टूबर 2026 को सामने आए ताजा बाजार अपडेट में सोने और चांदी के भाव अलग-अलग स्तर पर दर्ज किए गए। इसलिए खरीदारी से पहले आज का रेट जरूर जांच लें। Gold Price Today: 10 ग्राम सोने का भाव कितना है? 21 अक्टूबर के बाजार अपडेट के अनुसार, सोने की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। सुबह करीब 11:25 बजे उपलब्ध एक रिपोर्ट के मुताबिक, 10 ग्राम सोना ₹669 सस्ता होकर ₹1,45,850 पर पहुंच गया। इससे पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव ₹1,46,519 था। वहीं, एक अन्य बाजार अपडेट में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,46,220 प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। अलग-अलग रिपोर्टों में कीमतों का अंतर अपडेट के समय और बाजार के आधार पर हो सकता है। सोने की कीमतों में आई इस गिरावट से उन लोगों को कुछ राहत मिल सकती है, जो लंबे समय से गहने खरीदने के लिए सही मौके का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, केवल एक-दो दिन के भाव देखकर खरीदारी का फैसला करना सही नहीं होगा। Silver Price Today: चांदी भी हुई सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट देखने को मिली। 21 अक्टूबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक किलो चांदी का भाव ₹2,11,485 से घटकर ₹2,09,050 पर आ गया। यानी कीमत में ₹2,435 की कमी दर्ज की गई। वहीं, कुछ खुदरा बाजारों में चांदी का भाव करीब ₹2.30 लाख प्रति किलो बताया गया। यह अंतर बाजार और कीमत अपडेट के तरीके के कारण हो सकता है। इसलिए अपने शहर के सर्राफा बाजार से ताजा भाव की पुष्टि करना जरूरी है। चांदी का इस्तेमाल सिर्फ गहने बनाने में ही नहीं, बल्कि बर्तन, सिक्के और कई औद्योगिक उत्पादों में भी होता है। यही वजह है कि इसके दाम में होने वाले बदलाव पर खरीदारों और कारोबारियों की नजर बनी रहती है। Gold-Silver Rate क्यों गिर रहे हैं? सोने और चांदी की कीमतों पर घरेलू मांग के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी असर पड़ता है। डॉलर की मजबूती, रुपये की विनिमय दर, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और वैश्विक आर्थिक हालात कीमतों में उतार-चढ़ाव ला सकते हैं। 21 अक्टूबर की बाजार रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है। निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक से मिलने वाले संकेतों का भी इंतजार कर रहे हैं। इन परिस्थितियों का असर कीमती धातुओं की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। हालांकि, सोने और चांदी के भाव में गिरावट की वजह केवल एक कारक नहीं है। बाजार में निवेशकों की खरीद-बिक्री और अंतरराष्ट्रीय घटनाएं भी कीमतों की दिशा तय करती हैं। क्या अभी सोना-चांदी खरीदना सही रहेगा? अगर आप त्योहार, शादी या किसी पारिवारिक कार्यक्रम के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अलग-अलग दुकानों के भाव की तुलना करना फायदेमंद रहेगा। लेकिन यह जरूरी नहीं कि आज कीमत कम हुई है तो आने वाले दिनों में भी गिरावट जारी रहेगी। खरीदारी के समय इन बातों का ध्यान रखें: Gold-Silver Price: अलग-अलग शहरों में भाव क्यों बदलते हैं? दिल्ली, मुंबई, भोपाल, इंदौर और दूसरे शहरों में सोने-चांदी की कीमतों में अंतर हो सकता है। स्थानीय बाजार की परिस्थितियां, कारोबारी मार्जिन और आभूषण बनाने के शुल्क अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा, ऑनलाइन दिखाई देने वाला बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप पर मिलने वाली कीमत एक जैसी होना जरूरी नहीं है। इसलिए खरीदारी से पहले स्थानीय ज्वेलर से कीमत की पुष्टि करना बेहतर रहेगा। आज के Gold-Silver Rate पर एक नजर 21 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध अलग-अलग बाजार अपडेट के अनुसार: ये दरें अलग-अलग बाजारों और अपडेट के समय के आधार पर हैं। इन्हें एक ही बाजार की समान दर न मानें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jio Platforms IPO

Jio Platforms IPO: QIB कैटेगरी में जबरदस्त मांग, Retail Investors का कैसा रहा रिस्पॉन्स?

Jio Platforms IPO को लेकर शेयर बाजार में हलचल तेज हो गई है। 21 अक्टूबर 2026 को पब्लिक इश्यू खुलने के साथ ही बड़े संस्थागत निवेशकों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई। शुरुआती कारोबार के दौरान Qualified Institutional Buyers (QIB) कैटेगरी में मजबूत मांग देखने को मिली। दूसरी ओर, रिटेल निवेशकों की भागीदारी पर भी बाजार की नजर बनी हुई है। करीब ₹30,213 करोड़ के इस IPO को देश के बड़े पब्लिक इश्यू में गिना जा रहा है। निवेशकों के बीच इस बात को लेकर उत्सुकता है कि आने वाले दिनों में इश्यू को कितना सब्सक्रिप्शन मिलता है और शेयर बाजार में इसकी लिस्टिंग कैसी रहती है। Jio Platforms IPO Subscription Status: QIB कैटेगरी में मजबूत मांग IPO खुलने के शुरुआती घंटों में संस्थागत निवेशकों की ओर से अच्छी मांग दर्ज की गई। QIB कैटेगरी में मिले मजबूत रिस्पॉन्स ने इस इश्यू को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, रिटेल और Non-Institutional Investors (NII) कैटेगरी में शुरुआती प्रतिक्रिया तुलनात्मक रूप से धीमी रही। यहां ध्यान देने वाली बात है कि IPO का सब्सक्रिप्शन स्टेटस लगातार बदलता रहता है। इसलिए निवेशकों को आवेदन करने से पहले NSE और BSE पर उपलब्ध ताजा आंकड़े देखने चाहिए। QIB कैटेगरी में म्यूचुअल फंड, बैंक और अन्य बड़े संस्थागत निवेशक शामिल होते हैं। इस श्रेणी में ज्यादा मांग कंपनी के इश्यू में बड़े निवेशकों की दिलचस्पी दिखाती है, लेकिन इससे लिस्टिंग पर मुनाफे की गारंटी नहीं मिलती। ₹30,213 करोड़ का है Jio Platforms IPO Jio Platforms इस IPO के जरिए करीब ₹30,213 करोड़ जुटाने की योजना के साथ बाजार में आई है। कंपनी ने शेयरों के लिए ₹1,065 से ₹1,119 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से एक शेयर की कीमत ₹1,119 है। अगर लॉट साइज 12 शेयर है, तो एक लॉट के लिए ₹13,428 की रकम चाहिए। निवेशकों को आवेदन से पहले आधिकारिक IPO दस्तावेजों में इन जानकारियों की पुष्टि कर लेनी चाहिए। Anchor Investors ने भी दिखाई दिलचस्पी पब्लिक इश्यू से पहले एंकर निवेशकों की भागीदारी भी चर्चा में रही। एंकर निवेशक वे बड़े संस्थागत निवेशक होते हैं, जिन्हें IPO खुलने से पहले निर्धारित नियमों के तहत शेयर आवंटित किए जाते हैं। बड़े निवेशकों की भागीदारी से किसी इश्यू को लेकर बाजार की दिलचस्पी का अंदाजा मिल सकता है। हालांकि, आम निवेशकों को सिर्फ एंकर निवेशकों के नाम देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। कंपनी का मूल्यांकन, वित्तीय स्थिति और भविष्य की कारोबारी संभावनाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। Retail Investors के लिए क्या है जरूरी? Jio Platforms IPO में आवेदन करने से पहले रिटेल निवेशकों को कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देना चाहिए। सबसे पहले कंपनी का रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) पढ़ें और उसमें दी गई वित्तीय जानकारी को समझें। इसके अलावा, कंपनी के कारोबार, प्रतिस्पर्धा, संभावित जोखिम और शेयर की कीमत का आकलन करना जरूरी है। IPO में ज्यादा सब्सक्रिप्शन मिलने का मतलब यह नहीं है कि लिस्टिंग के दिन शेयर का भाव जरूर बढ़ेगा। ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) के आधार पर भी मुनाफे का पक्का अनुमान नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि यह अनौपचारिक बाजार का संकेत होता है। Jio Platforms IPO की जरूरी तारीखें IPO से जुड़ी प्रमुख तारीखों के अनुसार, इश्यू 21 अक्टूबर से 23 अक्टूबर 2026 तक खुला रहने का कार्यक्रम है। अलॉटमेंट 26 अक्टूबर और शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को प्रस्तावित है। इन तारीखों की पुष्टि कंपनी के अंतिम आधिकारिक अपडेट से करना जरूरी है। Jio Platforms IPO पर क्यों है बाजार की नजर? Jio Platforms टेलीकॉम और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में काम करती है। कंपनी की डिजिटल मौजूदगी और बड़े ग्राहक आधार के कारण इस IPO पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। इस इश्यू का प्रदर्शन भारतीय शेयर बाजार में बड़े IPO और डिजिटल कारोबार से जुड़ी कंपनियों के मूल्यांकन को लेकर चर्चा को भी प्रभावित कर सकता है। फिर भी, निवेश का फैसला करने से पहले कंपनी के कारोबारी प्रदर्शन और शेयर की कीमत को समझना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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फेस्टिव सीजन में भी स्मार्टफोन की बिक्री 26% गिरी, 10 साल के निचले स्तर पर बाजार; सैमसंग बनी नंबर-1

फेस्टिव सीजन के बावजूद भारत में स्मार्टफोन बाजार की रफ्तार धीमी पड़ गई है। मार्केट रिसर्च फर्म Omdia के मुताबिक, जुलाई से सितंबर 2026 के बीच देश में 3.58 करोड़ स्मार्टफोन बिके। पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले बिक्री में 26% की गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, 2016 के बाद यह किसी भी तिमाही में स्मार्टफोन बिक्री का सबसे निचला स्तर है। फोन की बढ़ती कीमतें और पुराने स्मार्टफोन को लंबे समय तक इस्तेमाल करने का चलन इसकी प्रमुख वजहों में शामिल हैं। सैमसंग बनी नंबर-1, ढाई साल बाद हासिल किया पहला स्थान सैमसंग ने तीसरी तिमाही में करीब 67 लाख स्मार्टफोन बेचकर बाजार में पहला स्थान हासिल किया। कंपनी करीब ढाई साल बाद दोबारा नंबर-1 पर पहुंची है। सैमसंग की बिक्री को किफायती Galaxy A सीरीज के फोन, प्रीमियम स्मार्टफोन की मांग और आसान किस्तों जैसे ऑफर्स से फायदा मिला। एक्सचेंज ऑफर्स ने भी ग्राहकों को नए फोन खरीदने के लिए आकर्षित किया। वीवो, ओप्पो और शाओमी की बिक्री में गिरावट तीसरी तिमाही में चीनी स्मार्टफोन कंपनियों को बिक्री के मोर्चे पर नुकसान उठाना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रमुख कंपनियों का प्रदर्शन इस तरह रहा: आईफोन 16 और 17 की मांग से एपल टॉप-5 में एपल ने तीसरी तिमाही में करीब 39 लाख स्मार्टफोन बेचकर पांचवां स्थान हासिल किया। रिपोर्ट के मुताबिक, iPhone 16 और iPhone 17 मॉडल की मांग से कंपनी को फायदा मिला। इसके अलावा, कीमतें बढ़ने की आशंका के चलते दुकानदारों की ओर से पहले से स्टॉक जुटाने का भी बिक्री पर असर पड़ा। नए iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max की लॉन्चिंग को भी बाजार में कंपनी की गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। चीनी ब्रांड्स की बाजार हिस्सेदारी 75% से घटकर 68% Omdia की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में चीनी स्मार्टफोन ब्रांड्स की संयुक्त बाजार हिस्सेदारी एक साल पहले के 75% से घटकर 68% रह गई है। दूसरी ओर, सैमसंग और एपल जैसी कंपनियों को अपने प्रीमियम फोन, मजबूत रिटेल नेटवर्क और आसान EMI व एक्सचेंज ऑफर्स से फायदा मिला। इससे प्रतिस्पर्धी बाजार में उनकी स्थिति मजबूत हुई है। 2027 में भी सुस्ती की आशंका, AI फीचर्स से उम्मीद रिपोर्ट के मुताबिक, 2027 में भी भारतीय स्मार्टफोन बाजार में सुस्ती बनी रह सकती है। फोन की बढ़ती कीमतों के कारण ग्राहक अपने पुराने डिवाइस को ज्यादा समय तक इस्तेमाल कर रहे हैं और नया फोन खरीदने का फैसला टाल रहे हैं। हालांकि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े फीचर्स बाजार के लिए नई उम्मीद बन सकते हैं। Omdia के अनुसार, करीब 40% भारतीय यूजर्स उपयोगी AI फीचर्स वाले स्मार्टफोन के लिए ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार हैं। ऐसे में आने वाले समय में AI फीचर्स फोन की मांग बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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दिवाली पर 8 नवंबर को होगी मुहूर्त ट्रेडिंग, BSE-NSE ने जारी किया शेड्यूल; जानें पूरा टाइम टेबल

दिवाली और लक्ष्मी पूजन के अवसर पर 8 नवंबर को भारतीय शेयर बाजार में स्पेशल मुहूर्त ट्रेडिंग होगी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने इसके लिए सर्कुलर जारी कर ट्रेडिंग का समय निर्धारित किया है। इस बार लगातार दूसरे साल मुहूर्त ट्रेडिंग का आयोजन दोपहर में किया जाएगा। जारी शेड्यूल के मुताबिक, मुख्य ट्रेडिंग सेशन दोपहर 2:20 बजे से शाम 3:30 बजे तक चलेगा। इस दौरान निवेशक इक्विटी, कमोडिटी डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स, इक्विटी फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस और सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (SLB) जैसे सेगमेंट में कारोबार कर सकेंगे। मुहूर्त ट्रेडिंग का पूरा टाइम टेबल BSE और NSE की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, मुहूर्त ट्रेडिंग से जुड़े अलग-अलग सेशन इस प्रकार होंगे। मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान सामान्य कारोबारी दिनों की तरह बाजार खुला नहीं रहता, बल्कि एक्सचेंज निर्धारित समय के लिए विशेष ट्रेडिंग सेशन आयोजित करते हैं। लगातार दूसरे साल दोपहर में होगी ट्रेडिंग भारतीय शेयर बाजार में दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। आमतौर पर यह विशेष सत्र शाम के समय आयोजित किया जाता है, लेकिन लगातार दूसरे साल इसे दोपहर में रखा गया है। पिछले साल भी मुहूर्त ट्रेडिंग दोपहर 1:45 बजे से 2:45 बजे तक हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, मार्केट पार्टिसिपेंट्स के अनुरोध पर एक्सचेंजों ने इस बार भी दोपहर का समय निर्धारित किया है। प्री-ओपन सेशन में ऑर्डर देने के नियम रेगुलर प्री-ओपन सेशन के दौरान निवेशकों को ऑर्डर देने और उनमें बदलाव करने के लिए अलग-अलग समय मिलेगा। IPO और रिलिस्टेड शेयरों के लिए अलग समय IPO और दोबारा लिस्ट किए गए शेयरों के लिए स्पेशल प्री-ओपन सेशन दोपहर 2:05 बजे से 2:50 बजे तक निर्धारित किया गया है। इसके आखिरी 10 मिनट में रैंडम क्लोजर होगा। इन शेयरों में कंटीन्यूअस ट्रेडिंग दोपहर 3:05 बजे से शाम 3:30 बजे तक चलेगी। वहीं, इलिक्विड सिक्योरिटीज के लिए एक्सचेंज कॉल ऑक्शन सेशन आयोजित करेंगे। NSE पर ऑर्डर एंट्री दोपहर 2:25 बजे से 3:10 बजे तक होगी। इस प्रक्रिया में आखिरी मिनट के दौरान रैंडम क्लोजर शामिल रहेगा। इसके बाद ऑर्डर मैचिंग की जाएगी। क्या होती है मुहूर्त ट्रेडिंग? मुहूर्त ट्रेडिंग दिवाली के अवसर पर आयोजित होने वाला विशेष शेयर बाजार सत्र है। इसे भारतीय परंपरा में नए वित्तीय वर्ष और शुभ शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है। इस दौरान कई निवेशक प्रतीकात्मक रूप से शेयर खरीदते हैं और नए संवत की शुरुआत करते हैं। हालांकि, मुहूर्त ट्रेडिंग भी सामान्य शेयर बाजार कारोबार की तरह जोखिम के अधीन होती है। केवल शुभ समय को देखते हुए निवेश करने के बजाय कंपनी की स्थिति, निवेश के उद्देश्य और जोखिम को ध्यान में रखना जरूरी है।
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शेयर बाजार में गिरावट: सेंसेक्स 500 अंक टूटा, निफ्टी 23,000 के करीब; IT और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 19 अक्टूबर को गिरावट देखने को मिल रही है। सेंसेक्स 500 अंक से ज्यादा टूटकर 74,200 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं, निफ्टी में करीब 150 अंकों की गिरावट है और यह 23,000 के स्तर पर है। बाजार में खास तौर पर IT और निजी बैंकों के शेयरों में बिकवाली का दबाव बना हुआ है। एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार एशियाई शेयर बाजारों में सोमवार को मिला-जुला रुख रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी और हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग बढ़त में रहे, जबकि जापान के निक्केई में गिरावट दर्ज की गई। इंडेक्स स्तर पॉइंट बदलाव प्रतिशत बदलाव कोस्पी (दक्षिण कोरिया) 5,677 +40 +0.52% निक्केई (जापान) 64,534 -790 -1.21% हैंगसेंग (हॉन्गकॉन्ग) 24,187 +124 +0.52% अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी बाजारों में कमजोरी रही। नैस्डैक में 2.14% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि S&P 500 और डाउ जोन्स भी नुकसान में बंद हुए। इंडेक्स स्तर पॉइंट बदलाव प्रतिशत बदलाव डाउ जोन्स 52,002 -175 -0.34% नैस्डैक 26,140 -573 -2.14% S&P 500 7,659 -85 -1.09% विदेशी निवेशकों ने 7 दिन में 7,282 करोड़ रुपए के शेयर बेचे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPI) की बिकवाली भी बाजार पर दबाव डाल रही है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने बीते 7 दिनों में भारतीय बाजार से 7,282 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की है। बीते 30 दिनों में उनकी शुद्ध बिकवाली 85,741 करोड़ रुपए रही। दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बीते 7 दिनों में 4,768 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की है। पिछले 30 दिनों में उनकी शुद्ध खरीदारी 87,980 करोड़ रुपए रही। नोट: निवेशकों की नेट खरीदारी और बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। शुक्रवार को बढ़त के साथ बंद हुआ था बाजार इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र, शुक्रवार 16 अक्टूबर को शेयर बाजार में तेजी रही थी। सेंसेक्स 413 अंक चढ़कर 74,729 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं, निफ्टी 148 अंक की बढ़त के साथ 23,146 पर बंद हुआ था। हालांकि, सोमवार को बाजार में फिर गिरावट देखने को मिल रही है। IT और निजी बैंकिंग शेयरों में बिकवाली के साथ विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है।
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न्यूजीलैंड क्रिकेट का बड़ा फैसला, MLC में नहीं करेगा निवेश; NZ20 लीग भी टली

न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड ने अमेरिका की मेजर लीग क्रिकेट (MLC) में निवेश नहीं करने का फैसला किया है। बोर्ड ने 2027 सीजन से पहले लीग की नई टीम शुरू करने के लिए अमेरिकी कंपनी ट्रू नॉर्थ स्पोर्ट्स (TNS) वेंचर्स के साथ साझेदारी की थी। हालांकि, अब न्यूजीलैंड क्रिकेट घरेलू क्रिकेट और अपने संसाधनों पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है। मेजर लीग क्रिकेट में न्यूजीलैंड के कई प्रमुख खिलाड़ी हिस्सा लेते रहे हैं। इनमें रचिन रवींद्र, फिन एलन, डेवोन कॉनवे, टिम सेफर्ट और लॉकी फर्ग्यूसन जैसे नाम शामिल हैं। अप्रैल 2025 में हुई थी साझेदारी की घोषणा न्यूजीलैंड क्रिकेट ने अप्रैल 2025 में TNS वेंचर्स के साथ साझेदारी की घोषणा की थी। इस समझौते के तहत बोर्ड को 2027 में MLC की प्रस्तावित दो नई टीमों में से एक को शुरू करने और संचालित करने में सहयोग देना था। इसके लिए न्यूजीलैंड क्रिकेट को हाई-परफॉर्मेंस और संचालन से जुड़ी सहायता उपलब्ध करानी थी। हालांकि, अब बोर्ड ने इस योजना से पीछे हटने का निर्णय लिया है। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने कहा- अभी सही समय नहीं न्यूजीलैंड क्रिकेट के CEO ज्योफ एलॉट ने कहा कि उन्हें इस साझेदारी के उद्देश्य और महत्वाकांक्षा पर भरोसा है। उनके मुताबिक, अमेरिकी बाजार में क्रिकेट के विस्तार की काफी संभावनाएं हैं, लेकिन विस्तृत आकलन के बाद बोर्ड को लगता है कि फिलहाल इस दिशा में आगे बढ़ने का सही समय नहीं है। एलॉट ने TNS और MLC के सह-संस्थापक समीर मेहता तथा विजय श्रीनिवासन का अवसर तलाशने में सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूजीलैंड क्रिकेट भविष्य में दोनों के साथ संपर्क बनाए रखेगा। न्यूजीलैंड की NZ20 टी-20 लीग भी टली न्यूजीलैंड में प्रस्तावित पुरुष और महिला टी-20 लीग NZ20 की शुरुआत भी टाल दी गई है। इस लीग की योजना मौजूदा सुपर स्मैश टूर्नामेंट की जगह एक नई प्रतियोगिता शुरू करने की थी। पहले NZ20 को जनवरी 2027 में शुरू करने की योजना थी, लेकिन अब इसकी शुरुआत दिसंबर 2027 तक के लिए टाल दी गई है। इससे न्यूजीलैंड क्रिकेट की घरेलू टी-20 प्रतियोगिता की योजनाओं में भी बदलाव हुआ है।

Zomato-Blinkit की पैरेंट कंपनी Eternal लाएगी Dark.ai, सीक्रेट चैट और प्राइवेसी पर होगा फोकस

जोमैटो और ब्लिंकइट की पैरेंट कंपनी एटरनल (Eternal) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में नया कदम उठाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के प्रमुख दीपिंदर गोयल ने ‘Dark.ai’ नाम के नए AI ऐप के बारे में जानकारी दी है। इसका मुख्य फोकस यूजर्स की प्राइवेसी और संवेदनशील बातचीत की सुरक्षा पर होगा। गोयल के मुताबिक, इस ऐप को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि लोग अपनी निजी बातें, गोपनीय विचार, रिसर्च और जटिल सवाल बिना किसी झिझक के साझा कर सकें। फिलहाल कंपनी के कर्मचारी इसकी टेस्टिंग कर रहे हैं। डेटा सुरक्षा पर जोर, कंपनी भी नहीं पढ़ पाएगी चैट दीपिंदर गोयल ने बताया कि Dark.ai को कंपनी के अपने कंप्यूटर सिस्टम और सुरक्षित तकनीक पर चलाने की योजना है। इसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन जैसी सुरक्षा व्यवस्था का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है, ताकि बातचीत को अनधिकृत रूप से पढ़े जाने से बचाया जा सके। ऐप में एक विशेष मेमोरी सिस्टम भी होगा, जिस पर यूजर का नियंत्रण रहेगा। इसके जरिए यूजर अपनी जरूरत के अनुसार पुरानी बातचीत से जुड़ी जानकारी को सुरक्षित रख सकेंगे या हटा सकेंगे। हालांकि, ऐप की सुरक्षा व्यवस्था और डेटा प्रबंधन से जुड़े सभी तकनीकी विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसलिए कंपनी के दावों की वास्तविक सीमा लॉन्च के समय उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट होगी। स्टार्टअप, वैज्ञानिकों और रिसर्चर्स के लिए होगा उपयोगी Dark.ai को खास तौर पर उन लोगों और संस्थानों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, जिन्हें संवेदनशील जानकारियों के साथ काम करना पड़ता है। इनमें स्टार्टअप संस्थापक, वैज्ञानिक, रिसर्चर्स, बड़ी कंपनियां और सरकारी कार्यालय शामिल हैं। गोयल के मुताबिक, इस AI को केवल यूजर को खुश करने के लिए जवाब देने के बजाय तथ्यों के आधार पर उत्तर देने के लिए तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसा सिस्टम बनाना है, जो यूजर की बातों से सहमत होने के बजाय अपनी समझ के अनुसार जवाब दे। मौजूदा AI ऐप्स की प्राइवेसी पर उठाए सवाल गोयल ने मौजूदा AI प्लेटफॉर्म्स पर डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि कई सेवाओं में यूजर डेटा सेव न करने का विकल्प चुनने के बाद भी बैकएंड पर जानकारी के प्रबंधन को लेकर स्पष्टता की कमी महसूस हो सकती है। उन्होंने कहा कि आम AI ऐप्स इस्तेमाल करते समय यूजर्स के मन में यह आशंका बनी रह सकती है कि उनकी बातचीत कोई पढ़ सकता है। उनके मुताबिक, इसी तरह का डर और अविश्वास लोगों को AI का पूरी क्षमता से इस्तेमाल करने से रोक सकता है। Dark.ai के जरिए कंपनी इस चिंता को कम करने और यूजर्स को निजी बातचीत के लिए अधिक सुरक्षित माहौल देने की कोशिश कर रही है। इसी साल लॉन्च की तैयारी, कीमत पर फैसला नहीं कंपनी की ओर से ऐप की लॉन्चिंग को लेकर इसी साल की तैयारी का संकेत दिया गया है। हालांकि, इसके काम करने की गति, इस्तेमाल किए जाने वाले AI मॉडल और अन्य तकनीकी विशेषताओं की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ऐप मुफ्त होगा या इसके लिए सब्सक्रिप्शन लेना पड़ेगा, इस बारे में भी कंपनी ने कोई जानकारी नहीं दी है। इससे होने वाली संभावित कमाई को लेकर भी फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो और क्विक कॉमर्स सेवा ब्लिंकइट के बाद AI सॉफ्टवेयर क्षेत्र में एटरनल का यह संभावित कदम कंपनी के कारोबार के विस्तार की दिशा में अहम हो सकता है।

eMudhra में तकनीकी गड़बड़ी की जांच के लिए IT मंत्रालय ने बनाई स्पेशल टीम, सरकार बोली- भारतीय वेबसाइट्स और ऐप सुरक्षित

डिजिटल सुरक्षा सेवाएं देने वाली कंपनी ई-मुद्रा (eMudhra) में तकनीकी गड़बड़ी सामने आने के बाद आईटी मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की है। सरकार के मुताबिक, इस गड़बड़ी का असर कंपनी के विदेशी कारोबार तक सीमित है। भारतीय वेबसाइट्स और ऐप्स की सुरक्षा प्रभावित होने की बात सामने नहीं आई है। सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से सावधान रहने की अपील की है। मामले की जांच साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मदद से की जा रही है, ताकि गड़बड़ी की वजह और उसके संभावित प्रभाव का पता लगाया जा सके। eMudhra दो तरह की डिजिटल सुरक्षा सेवाएं देती है ई-मुद्रा का कारोबार मुख्य रूप से दो क्षेत्रों में फैला है। पहला, भारत में डिजिटल सिग्नेचर और eSign सेवाएं देना। दूसरा, विदेशी वेबसाइट्स के लिए डिजिटल सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी करना। कंपनी से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, हालिया तकनीकी गड़बड़ी उसके विदेशी कारोबार से संबंधित डिजिटल सर्टिफिकेट्स में सामने आई। भारतीय डिजिटल सिग्नेचर और eSign सेवाओं पर इसका असर होने की जानकारी नहीं दी गई है। सिस्टम की खराबी से बने कमजोर सुरक्षा कोड ई-मुद्रा के मुताबिक, सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण कुछ कमजोर सुरक्षा कोड बन गए थे। एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ने इस समस्या के बारे में एप्पल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मोजिला जैसी बड़ी टेक कंपनियों को अलर्ट किया। चिंता जताई गई कि इन कमजोर कोड का फायदा उठाकर साइबर हमलावर सुरक्षा प्रमाणपत्रों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि इन कोड का इस्तेमाल करके वास्तव में कोई हमला हुआ था। गूगल और मोजिला ने प्रभावित सर्टिफिकेट्स पर की कार्रवाई तकनीकी गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद ब्राउजर कंपनियों ने प्रभावित सुरक्षा प्रमाणपत्रों के खिलाफ कदम उठाए। इन कदमों का उद्देश्य प्रभावित प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल से जुड़े जोखिम को सीमित करना है। eMudhra का दावा- ग्राहक का डेटा चोरी नहीं हुआ ई-मुद्रा ने कहा है कि उसका मुख्य सिस्टम सुरक्षित है और किसी ग्राहक का डेटा चोरी नहीं हुआ है। कंपनी के अनुसार, जिस विदेशी कारोबार में गड़बड़ी सामने आई, उससे उसकी कुल कमाई का लगभग 1 प्रतिशत हिस्सा आता है। कंपनी प्रभावित विदेशी ग्राहकों को नए और सुरक्षित डिजिटल सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में भी जुटी है, ताकि उनकी सेवाएं जारी रह सकें। सरकार ने अफवाहों से बचने की अपील की आईटी मंत्रालय ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट खबरों के आधार पर घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार की साइबर सुरक्षा टीम और विशेषज्ञ तकनीकी पहलुओं की पड़ताल कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल, गड़बड़ी के वास्तविक दायरे और संभावित प्रभाव को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
Gold

Gold Price Today: सोने के दाम में बड़ी गिरावट, 10 ग्राम का भाव ₹1.43 लाख पर

सोना (Gold) और चांदी (Silver) खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। पिछले तीन दिनों में दोनों कीमती धातुओं के भाव में अच्छी-खासी गिरावट आई है। सोना करीब ₹3,000 और चांदी लगभग ₹9,000 तक सस्ती हुई है। ऐसे में शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने या निवेश की योजना बना रहे लोगों की नजर अब बाजार के अगले रुख पर है। 22 अक्टूबर 2026 के बाजार अपडेट के मुताबिक, 10 ग्राम सोने की कीमत करीब ₹1.43 लाख और चांदी का भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो बताया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग बाजारों में कीमतों का अंतर हो सकता है। Gold Rate Today: ₹1.43 लाख पर पहुंचा 10 ग्राम सोना Gold Price में आई गिरावट से खरीदारों को कुछ राहत जरूर मिली है। बीते तीन दिनों में भाव करीब ₹3,000 नीचे आने से उन लोगों के लिए खरीदारी का मौका बन सकता है, जो लंबे समय से कीमतें कम होने का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, सोना खरीदने से पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर पता कर लें। 24 कैरेट सोने की कीमत और गहने बनाने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने के भाव में अंतर होता है। इसके अलावा ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और GST भी देना पड़ता है। Silver Rate Today: चांदी ₹9,000 तक हुई सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। पिछले तीन दिनों में चांदी करीब ₹9,000 तक सस्ती हुई है और इसका भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो के स्तर पर बताया जा रहा है। चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर उन ग्राहकों पर भी पड़ता है, जो त्योहारों पर चांदी के सिक्के, बर्तन या दूसरे सामान खरीदते हैं। हालांकि, खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार में चांदी का ताजा भाव और शुद्धता की जानकारी लेना जरूरी है। सोना-चांदी के दाम क्यों गिर रहे हैं? Gold or Silver की कीमतें केवल घरेलू मांग से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव, डॉलर की चाल, रुपये की स्थिति और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें भी इनके भाव पर असर डालती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतें कमजोर होती हैं, तो भारतीय बाजार में भी इसका असर दिखाई दे सकता है। इसके अलावा मुनाफावसूली के कारण भी कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, बाजार में आई गिरावट की किसी एक वजह को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। कीमतों की चाल कई आर्थिक और वैश्विक कारकों पर निर्भर करती है। क्या अभी सोना और चांदी खरीदना सही रहेगा? अगर आप शादी या त्योहार के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो मौजूदा गिरावट आपके लिए राहत की बात हो सकती है। लेकिन केवल तीन दिन की गिरावट देखकर यह मान लेना ठीक नहीं है कि आगे भी भाव लगातार कम होंगे। खरीदारी से पहले अलग-अलग ज्वेलर्स के रेट की तुलना करें। सोने पर हॉलमार्क और शुद्धता की जांच करें तथा बिल में मेकिंग चार्ज और GST का पूरा विवरण देखें। निवेश के लिहाज से भी जल्दबाजी करने के बजाय अपने बजट और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना बेहतर है। आगे Gold-Silver Price में क्या बदलाव हो सकता है? आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख, अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों से जुड़ी खबरें और रुपये की चाल सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में भाव में फिर तेजी आने या गिरावट जारी रहने, दोनों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, तीन दिनों में सोने और चांदी के दाम में आई गिरावट ने खरीदारों को थोड़ी राहत दी है। अगर आप आज खरीदारी करने जा रहे हैं, तो पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर जांच लें, क्योंकि बाजार भाव और ज्वेलरी की अंतिम कीमत में अंतर हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Amit Shah

Amit Shah Statement: धरने से कुछ नहीं होगा, जनता के बीच जाएं- विपक्ष को शाह की सलाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ धरना-प्रदर्शन करने से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता। अगर विपक्ष को राजनीति में आगे बढ़ना है, तो उसे जनता के बीच जाकर काम करना होगा। शाह ने कांग्रेस को लेकर दावा किया कि पार्टी अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं लौट पाएगी। उन्होंने अपने बयान में राहुल गांधी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी राजनीति और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठाए। अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और कथित वोट चोरी को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच सियासी टकराव जारी है। कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग से जवाब मांग रही है, जबकि भाजपा विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक हताशा से जोड़ रही है। Amit Shah Statement: कांग्रेस पर क्यों बरसे गृह मंत्री? अमित शाह ने अपने संबोधन में कांग्रेस की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए केवल विरोध प्रदर्शन करना काफी नहीं है। राजनीतिक दलों को जनता की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए काम करना चाहिए। शाह के मुताबिक, विपक्ष को अपनी चुनावी हार की वजहों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर निशाना साधते हुए दावा किया कि पार्टी की मौजूदा राजनीति उसे लंबे समय तक सत्ता से दूर रख सकती है। हालांकि, कांग्रेस के अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं आने का बयान अमित शाह का राजनीतिक दावा है। इसे किसी निश्चित चुनावी नतीजे के तौर पर नहीं देखा जा सकता। Rahul Gandhi का नाम लिए बिना क्या बोले अमित शाह? अमित शाह ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना विपक्ष के धरने और प्रदर्शनों पर टिप्पणी की। उनके बयान को कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ उठाए जा रहे सवालों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। शाह का कहना है कि विपक्ष को जनता के बीच जाकर अपना समर्थन बढ़ाना चाहिए। केवल आरोप लगाने या सड़कों पर उतरने से चुनावी राजनीति में सफलता नहीं मिलती। दूसरी तरफ, कांग्रेस का तर्क है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। पार्टी और INDIA गठबंधन के नेता मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। Vote Chori और SIR पर भाजपा-विपक्ष में टकराव देश की राजनीति में वोट चोरी और SIR यानी Special Intensive Revision का मुद्दा लगातार चर्चा में है। राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि इन मामलों में स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। वहीं, भाजपा इन आरोपों को खारिज करती रही है और विपक्ष पर चुनावी हार के बाद संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाती है। इस विवाद में दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। मतदाता सूची से जुड़े आरोपों की सच्चाई समझने के लिए आधिकारिक आंकड़ों, चुनाव आयोग के जवाब और उपलब्ध प्रमाणों को देखना जरूरी है। चुनाव आयोग को लेकर भी जारी है सियासी लड़ाई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों का विरोध पहले भी सामने आ चुका है। विपक्ष ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर जवाब मांगा है। वहीं, भाजपा का कहना है कि चुनावी नतीजों को लेकर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय विपक्ष को अपनी रणनीति पर ध्यान देना चाहिए। इस मुद्दे ने भाजपा और INDIA गठबंधन के बीच राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले समय में यह विवाद चुनावी भाषणों और विपक्षी अभियानों में भी अहम भूमिका निभा सकता है। Amit Shah ने AAP पर भी साधा निशाना अमित शाह ने अपने संबोधन में आम आदमी पार्टी (AAP) की राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने विपक्षी दलों को सलाह दी कि वे आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जनता के लिए काम करें। दिल्ली की राजनीति में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच लंबे समय से टकराव रहा है। ऐसे में शाह का बयान विपक्ष पर राजनीतिक दबाव बनाने के साथ-साथ भाजपा के चुनावी संदेश को मजबूत करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। आगे क्या होगा? कांग्रेस के सामने क्या चुनौती है? अमित शाह के बयान से साफ है कि भाजपा कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। दूसरी ओर, कांग्रेस चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर जवाब मांगने की अपनी रणनीति पर कायम है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में क्या तथ्य सामने रखता है और चुनाव आयोग इन सवालों पर क्या जवाब देता है। साथ ही, यह भी देखना होगा कि इन मुद्दों का आने वाले चुनावों में मतदाताओं पर कितना असर पड़ता है। फिलहाल, अमित शाह का 30 साल वाला बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। लेकिन आखिरकार चुनाव में किसे जनता का समर्थन मिलेगा, इसका फैसला मतदाता ही करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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