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Gold

MCX Gold Silver Rate Today: अचानक बदले भाव, जानें ताजा सोना-चांदी अपडेट

Gold और Silver की कीमतों में आज फिर हलचल देखने को मिली है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोनों कीमती धातुएं उतार-चढ़ाव के बीच मजबूत रुझान दिखा रही हैं। निवेशकों के बीच एक बार फिर खरीदारी का माहौल बनता दिख रहा है, क्योंकि ग्लोबल मार्केट से मिले संकेतों ने कीमतों को सपोर्ट दिया है। MCX Gold Silver Rate Today: क्या रहा आज का ट्रेंड? आज के ट्रेडिंग सेशन में: MCX पर गोल्ड और सिल्वर दोनों लगातार बदलते ग्लोबल संकेतों के हिसाब से मूव करते नजर आए। सोने की कीमत क्यों बढ़ी? आज सोने में आए उछाल के पीछे कुछ अहम कारण रहे: सोना हमेशा से ही ऐसे समय में मजबूत होता है जब बाजार में डर और अस्थिरता बढ़ती है। Silver Price Today: चांदी में भी दिखी हलचल चांदी की कीमतें भी आज लगातार बदलती रहीं। चांदी अक्सर सोने से ज्यादा तेज मूव करती है, इसलिए इसमें उतार-चढ़ाव ज्यादा रहता है। हाल के दिनों का Gold Silver Trend पिछले कुछ दिनों में बाजार का मूड काफी बदलता रहा है: इस तरह गोल्ड और सिल्वर दोनों ही फिलहाल वोलैटाइल जोन में बने हुए हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स की राय बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि: निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tax

Indian Market को मिलेगा बड़ा Boost! विदेशी निवेशकों के लिए सरकार ला सकती है Tax Relief

भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर विदेशी निवेशकों की वापसी की उम्मीद बढ़ गई है। केंद्र सरकार अब ऐसा बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है, जिससे Foreign Portfolio Investors (FPI) का भरोसा भारतीय बाजार पर फिर मजबूत हो सकता है। खबरें हैं कि सरकार सरकारी बॉन्ड्स में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों के लिए Capital Gains Tax हटाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। अगर यह फैसला लागू होता है, तो भारत का बॉन्ड मार्केट विदेशी निवेशकों के लिए पहले से ज्यादा आकर्षक बन जाएगा। पिछले कुछ महीनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़ी मात्रा में पैसा निकाला था, जिसका असर शेयर बाजार और रुपये दोनों पर देखने को मिला। ऐसे में सरकार का यह कदम बाजार को नई मजबूती दे सकता है। क्या है सरकार की नई तैयारी? सूत्रों के मुताबिक, सरकार सिर्फ Capital Gains Tax हटाने पर ही नहीं बल्कि विदेशी निवेशकों को मिलने वाले ब्याज पर लगने वाले withholding tax में भी राहत देने की योजना बना रही है। अभी सरकारी बॉन्ड्स पर मिलने वाले ब्याज पर करीब 20% टैक्स देना पड़ता है, जिसे कम किया जा सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि टैक्स में राहत मिलने के बाद विदेशी निवेशकों का रुझान भारतीय बॉन्ड मार्केट की तरफ तेजी से बढ़ सकता है। इससे भारत में डॉलर का फ्लो बढ़ेगा और बाजार में स्थिरता आने की संभावना भी मजबूत होगी। क्यों जरूरी बन गया यह फैसला? हाल के समय में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, अमेरिका की ब्याज दरों और अंतरराष्ट्रीय तनावों की वजह से विदेशी निवेशकों ने कई उभरते बाजारों से दूरी बनाई थी। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। लगातार बिकवाली के कारण शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा और निवेशकों की चिंता भी बढ़ी। इसी बीच भारत को J.P. Morgan और Bloomberg जैसे बड़े ग्लोबल बॉन्ड इंडेक्स में शामिल किए जाने से विदेशी निवेश की नई संभावनाएं खुली हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि टैक्स बोझ कम करके ज्यादा से ज्यादा विदेशी पूंजी भारत में लाई जाए। पहले भी निवेशकों को मिल चुकी है राहत सरकार इससे पहले भी निवेश बढ़ाने के लिए कई अहम फैसले ले चुकी है। Budget 2024 में Angel Tax खत्म करने का फैसला इसी दिशा में बड़ा कदम माना गया था। इसका फायदा स्टार्टअप सेक्टर और विदेशी निवेशकों दोनों को मिला। अब माना जा रहा है कि अगर बॉन्ड मार्केट से जुड़े टैक्स नियमों में ढील दी जाती है, तो भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी तेज हो सकती है। इसका सीधा असर शेयर बाजार, रुपये और देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक रूप से देखने को मिल सकता है। Market Experts क्या मानते हैं? मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार जल्द इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो आने वाले महीनों में भारतीय बाजार में विदेशी निवेश बढ़ सकता है। इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा और बाजार में नई तेजी देखने को मिल सकती है। फिलहाल निवेशकों की नजर सरकार के अगले आधिकारिक ऐलान पर टिकी हुई है। अगर टैक्स में राहत का फैसला आता है, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Share Market

Share Market में बड़ा उलटफेर! 50% टूटे Stock पर फिर बुलिश हुए Analysts

Share Market में उतार-चढ़ाव के बीच एक दिग्गज कंपनी का स्टॉक इन दिनों चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। कभी निवेशकों का पसंदीदा रहा यह शेयर अब अपने हाई लेवल से करीब 50 फीसदी तक टूट चुका है। लगातार गिरावट के बाद छोटे निवेशकों में चिंता बढ़ गई, लेकिन इसी बीच कई ब्रोकरेज हाउस ने इस शेयर पर फिर भरोसा जताया है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में यह स्टॉक शानदार वापसी कर सकता है और इसका भाव ₹3100 तक पहुंच सकता है। क्यों टूटा शेयर? पिछले कुछ महीनों में कंपनी के शेयर पर लगातार दबाव देखने को मिला। कमजोर तिमाही नतीजे, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता और सेक्टर में सुस्ती इसके बड़े कारण माने जा रहे हैं। इसके चलते निवेशकों ने तेजी से मुनाफावसूली शुरू कर दी और शेयर में भारी गिरावट आ गई। कई निवेशकों को उम्मीद नहीं थी कि यह स्टॉक इतनी तेजी से नीचे आ जाएगा। बाजार में डर का माहौल बना और रिटेल निवेशकों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा। अब क्यों बढ़ा भरोसा? हाल ही में आई नई रिपोर्ट्स के बाद बाजार का नजरिया थोड़ा बदला है। कई ब्रोकरेज फर्म्स का कहना है कि कंपनी के फंडामेंटल अभी भी मजबूत हैं और आने वाले क्वार्टर्स में कंपनी की कमाई बेहतर हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि: इसी वजह से कुछ ब्रोकरेज हाउस ने शेयर के लिए ₹3100 तक का टारगेट प्राइस दिया है। निवेशकों को क्या करना चाहिए? मार्केट एक्सपर्ट्स की मानें तो किसी भी गिरते शेयर में सिर्फ सस्ता देखकर पैसा लगाना सही रणनीति नहीं होती। निवेश से पहले कंपनी के फंडामेंटल, कर्ज, ग्रोथ और भविष्य की योजनाओं को समझना जरूरी है। अगर कोई निवेशक लंबे समय के नजरिए से निवेश करना चाहता है, तो चरणबद्ध तरीके से निवेश करना बेहतर विकल्प माना जा सकता है। वहीं शॉर्ट टर्म निवेशकों को बाजार की चाल पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। क्या फिर दौड़ेगा यह शेयर? शेयर बाजार में कई बार बड़े स्टॉक्स भारी गिरावट के बाद दमदार वापसी भी करते हैं। ऐसे में निवेशकों की नजर अब कंपनी के आने वाले तिमाही नतीजों और बाजार के माहौल पर टिकी हुई है। अगर कंपनी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन करती है तो यह शेयर आने वाले समय में फिर से तेजी पकड़ सकता है। फिलहाल बाजार में यही चर्चा है कि क्या यह टूटा हुआ स्टॉक एक बार फिर निवेशकों को बड़ा रिटर्न देगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Stock Market

Stock Market Down, IT Stocks Up! TCS-Infosys ने दिखाई जबरदस्त ताकत

Stock Market में मंगलवार का कारोबारी सत्र उतार-चढ़ाव से भरा रहा। एक तरफ सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में नजर आए, तो दूसरी तरफ आईटी सेक्टर ने बाजार की पूरी तस्वीर बदल दी। जब अधिकांश सेक्टर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे, तब TCS, Infosys, Tech Mahindra और अन्य आईटी कंपनियों के शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। इस तेजी ने निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान ला दी और एक बार फिर आईटी सेक्टर चर्चा के केंद्र में आ गया। गिरते बाजार में IT सेक्टर बना सबसे बड़ा सहारा मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही। वैश्विक अनिश्चितताओं, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दिया। लेकिन इसी बीच आईटी शेयरों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए निवेशकों को राहत दी। निफ्टी आईटी इंडेक्स में मजबूत बढ़त दर्ज की गई, जबकि TCS और Infosys जैसे दिग्गज शेयरों में 4 प्रतिशत तक का उछाल देखने को मिला। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह तेजी केवल एक दिन की खरीदारी नहीं, बल्कि सेक्टर में लौटते भरोसे का संकेत है। आखिर क्यों दौड़ रहे हैं IT Stocks? अमेरिकी ब्याज दरों पर टिकी उम्मीदें आईटी शेयरों में आई तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका से आ रहे संकेत माने जा रहे हैं। निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आने वाले समय में ब्याज दरों में राहत दे सकता है। यदि ऐसा होता है तो टेक्नोलॉजी कंपनियों का खर्च बढ़ेगा और भारतीय आईटी कंपनियों को नए प्रोजेक्ट मिलने की संभावना मजबूत होगी। AI को लेकर बदला निवेशकों का नजरिया कुछ समय पहले तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को आईटी कंपनियों के लिए चुनौती माना जा रहा था। लेकिन अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है। निवेशकों को भरोसा है कि भारतीय आईटी कंपनियां AI को अपने बिजनेस का मजबूत हिस्सा बनाकर नए अवसर पैदा कर सकती हैं। ग्लोबल टेक कंपनियों से मिले पॉजिटिव संकेत दुनिया की कई बड़ी टेक कंपनियों के बेहतर नतीजों ने भी आईटी सेक्टर में उत्साह बढ़ाया है। क्लाउड सर्विसेज, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और AI आधारित प्रोजेक्ट्स की मांग बढ़ने से भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर बनते दिख रहे हैं। किन शेयरों ने दिखाई सबसे ज्यादा तेजी? बाजार में आईटी शेयरों की खरीदारी व्यापक रही। Infosys और TCS में सबसे अधिक रुचि देखने को मिली। इसके अलावा Tech Mahindra, Wipro, LTIMindtree और Coforge जैसे शेयर भी मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में आईटी शेयरों में आई गिरावट के बाद उनके वैल्यूएशन आकर्षक स्तर पर पहुंच गए थे। यही वजह है कि निवेशकों ने इस सेक्टर में दोबारा खरीदारी शुरू की है। निवेशकों के लिए आगे क्या है संकेत? विशेषज्ञों के अनुसार यदि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनी रहती है और टेक्नोलॉजी सेक्टर में खर्च बढ़ता है तो भारतीय आईटी कंपनियों की आय में सुधार देखने को मिल सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में भी आईटी शेयरों में सकारात्मक रुझान जारी रह सकता है। हालांकि वैश्विक आर्थिक चुनौतियां और बदलता टेक्नोलॉजी माहौल अभी भी निवेशकों के लिए नजर रखने वाले महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Stock Market

Stock Market Opening: सप्ताह की शुरुआत शानदार, Sensex-Nifty की तेजी से निवेशकों के चेहरे खिले

पिछले कुछ दिनों से बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ था, लेकिन सप्ताह की शुरुआत ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। Stock Market खुलते ही बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे दोनों प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। निवेशकों के चेहरे पर लौटी मुस्कान सोमवार सुबह की तेजी ने उन निवेशकों को राहत दी है जो पिछले सत्रों में बाजार की सुस्ती से चिंतित थे। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की लगातार रुचि ने बाजार के माहौल को सकारात्मक बनाया है। किन सेक्टरों ने दिखाई मजबूती? शुरुआती कारोबार में निजी और सरकारी बैंकिंग शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया। इसके अलावा आईटी और ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में भी तेजी दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की सक्रियता देखने को मिली, जिससे बाजार की चौड़ाई मजबूत नजर आई। आगे क्या है निवेशकों की नजर? विश्लेषकों के अनुसार आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों का निवेश और कंपनियों के वित्तीय नतीजे बाजार की दिशा तय करेंगे। यदि सकारात्मक संकेत बने रहते हैं तो निफ्टी और सेंसेक्स दोनों नए ऊंचे स्तरों की ओर बढ़ सकते हैं। फिलहाल सप्ताह की शुरुआत ने बाजार में नई ऊर्जा भर दी है। निवेशकों की उम्मीदें बढ़ी हैं और कारोबारियों को आने वाले दिनों में भी इसी तरह के प्रदर्शन की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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जून में आम आदमी को झटका: कॉमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ महंगा, आज से बदल गए ये 4 बड़े नियम

जून में आम आदमी को झटका: कॉमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ महंगा, आज से बदल गए ये 4 बड़े नियम

देशभर में जून महीने की शुरुआत आम लोगों के लिए कई बड़े बदलावों के साथ हुई है। सबसे बड़ा असर रसोई गैस और रोजमर्रा के खर्चों पर देखने को मिला है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने कॉमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए हैं। इसके साथ ही 5 किलो वाले फ्री ट्रेड LPG सिलेंडर की कीमत में भी इजाफा किया गया है। इन बदलावों का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में खाने-पीने की चीजें भी महंगी हो सकती हैं। कॉमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ महंगा तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले कॉमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में 53.50 रुपए तक की बढ़ोतरी की है। वहीं 5 किलो वाले फ्री ट्रेड LPG सिलेंडर के दाम में 11 रुपए बढ़ाए गए हैं। हालांकि घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। कॉमर्शियल सिलेंडर महंगा होने से सबसे ज्यादा असर छोटे व्यापारियों और होटल कारोबार पर पड़ेगा। कई दुकानदारों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत से कारोबार चलाना मुश्किल होता जा रहा है। जून में हुए ये 4 बड़े बदलाव 1. LPG सिलेंडर के दाम बढ़े कॉमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा होने से बाहर खाना और फूड सर्विस से जुड़ी चीजें महंगी हो सकती हैं। 2. बैंकिंग नियमों में बदलाव कुछ बैंकों ने ATM ट्रांजैक्शन और मिनिमम बैलेंस से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं। ग्राहकों को अतिरिक्त चार्ज देना पड़ सकता है। 3. क्रेडिट कार्ड नियम अपडेट कई बैंकों ने क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड पॉइंट्स और चार्जेज में बदलाव किया है। कार्ड यूजर्स को नई शर्तें ध्यान से पढ़ने की सलाह दी गई है। 4. तेल कंपनियों की नई कीमतें लागू हर महीने की पहली तारीख को पेट्रोलियम कंपनियां LPG और अन्य ईंधन की नई कीमतें जारी करती हैं। जून में भी नई दरें लागू हो गई हैं। आम लोगों की बढ़ी चिंता महंगाई के बीच गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से आम लोगों की चिंता और बढ़ गई है। खासकर छोटे होटल संचालकों और फूड बिजनेस से जुड़े लोगों का कहना है कि लागत बढ़ने से ग्राहकों पर बोझ डालना मजबूरी बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में भी इसी तरह कीमतें बढ़ती रहीं तो इसका असर घरेलू बजट पर भी साफ दिखाई देगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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WhatsApp, Facebook और Instagram के नए Plus फीचर्स आएंगे, यूजर्स को देना पड़ सकता है पैसा

WhatsApp, Facebook और Instagram के नए Plus फीचर्स आएंगे, यूजर्स को देना पड़ सकता है पैसा

दुनियाभर में करोड़ों लोग रोजाना WhatsApp, Facebook और Instagram का इस्तेमाल करते हैं। अब इन प्लेटफॉर्म्स को चलाने वाली कंपनी Meta अपने यूजर्स के लिए एक नया “Plus” या प्रीमियम वर्जन लाने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि इसके लिए यूजर्स को हर महीने कुछ पैसे चुकाने पड़ सकते हैं, लेकिन बदले में कई नए और खास फीचर्स मिलने वाले हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Meta अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को और ज्यादा पर्सनल और एडवांस बनाने पर काम कर रही है। नए Plus वर्जन में यूजर्स को ऐसी सुविधाएं मिल सकती हैं, जो अभी फ्री वर्जन में उपलब्ध नहीं हैं। 24 घंटे बाद भी नहीं हटेगी स्टोरी Instagram और Facebook पर अभी स्टोरी सिर्फ 24 घंटे तक दिखाई देती है, लेकिन Plus वर्जन में यूजर्स अपनी स्टोरी को ज्यादा समय तक एक्टिव रख सकेंगे। इससे लोग अपनी खास यादों और जरूरी अपडेट्स को लंबे समय तक शेयर कर पाएंगे। पसंदीदा लोगों की अलग-अलग लिस्ट बना सकेंगे नए फीचर के तहत यूजर्स अपने करीबी दोस्तों, परिवार और ऑफिस के लोगों की अलग-अलग लिस्ट बना पाएंगे। इससे हर पोस्ट और स्टोरी को अपनी पसंद के लोगों तक ही शेयर करना आसान हो जाएगा। यह फीचर प्राइवेसी और पर्सनल कंट्रोल को बेहतर बनाएगा। आम यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा? अगर Meta अपने Plus वर्जन को लॉन्च करता है, तो इससे यूजर्स को फ्री और पेड दोनों विकल्प मिल सकते हैं। जो लोग ज्यादा फीचर्स और बेहतर अनुभव चाहते हैं, वे प्रीमियम प्लान चुन सकते हैं। वहीं सामान्य यूजर्स पहले की तरह फ्री वर्जन इस्तेमाल कर पाएंगे। हालांकि, Meta की तरफ से अभी तक इन फीचर्स और कीमतों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स के बीच इसे लेकर काफी उत्सुकता बनी हुई है। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें Deshharpal News Portal। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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FII

FII Outflow 2026: महंगा Valuation और STT बना भारतीय बाजार की परेशानी

भारतीय शेयर बाजार इन दिनों भारी उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है और इसकी सबसे बड़ी वजह विदेशी निवेशकों यानी FII (Foreign Institutional Investors) की लगातार बिकवाली मानी जा रही है। साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़ी रकम निकाल ली है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके पीछे सिर्फ एक नहीं बल्कि तीन बड़े कारण हैं। इनमें भारतीय बाजार का महंगा वैल्यूएशन, अमेरिका की ब्याज दरें और STT से जुड़े नए नियम सबसे अहम माने जा रहे हैं। अब सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार बाजार को राहत देने के लिए STT पर अपना फैसला बदल सकती है? Indian Stock Market क्यों लग रहा महंगा? पिछले कुछ सालों में भारतीय शेयर बाजार ने शानदार रिटर्न दिया है। लेकिन इसी तेजी के कारण अब भारतीय बाजार का वैल्यूएशन काफी ऊपर पहुंच गया है। कई विदेशी निवेशकों को लगता है कि मौजूदा स्तर पर भारतीय बाजार में निवेश करना ज्यादा फायदे का सौदा नहीं है। यही वजह है कि FIIs अब चीन, ब्राजील और दूसरे एशियाई बाजारों की तरफ रुख कर रहे हैं, जहां उन्हें कम कीमत पर बेहतर अवसर दिखाई दे रहे हैं। विदेशी निवेशकों की इस बिकवाली का असर सीधे भारतीय बाजार पर दिखाई दे रहा है। US Interest Rate और Strong Dollar ने बढ़ाया दबाव अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति भी भारतीय बाजार के लिए मुश्किलें बढ़ा रही है। अमेरिका में ब्याज दरें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे वहां के बॉन्ड और डॉलर आधारित निवेश ज्यादा आकर्षक हो गए हैं। ऐसे में विदेशी निवेशक जोखिम वाले बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिका जैसे सुरक्षित बाजारों में निवेश बढ़ा रहे हैं। इसका असर भारतीय रुपये पर भी पड़ा है और डॉलर के मुकाबले रुपया दबाव में नजर आ रहा है। STT और F&O Rules से क्यों नाराज हैं Investors? Budget 2026 में सरकार ने Futures & Options ट्रेडिंग पर STT यानी Securities Transaction Tax बढ़ाने का फैसला लिया था। इसके बाद बाजार में काफी हलचल देखने को मिली। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि STT बढ़ने से ट्रेडिंग कॉस्ट ज्यादा हो गई है। इससे विदेशी निवेशकों के साथ-साथ बड़े ट्रेडर्स की दिलचस्पी भी कम हुई है। कई ब्रोकरेज कंपनियों ने सरकार से STT नियमों पर दोबारा विचार करने की मांग की है। क्या सरकार ले सकती है U-Turn? अब बाजार में चर्चा तेज हो गई है कि सरकार निवेशकों को राहत देने के लिए STT पर यू-टर्न ले सकती है। हालांकि अभी तक सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर टैक्स नियमों में राहत दी जाती है तो विदेशी निवेशकों का भरोसा फिर से लौट सकता है। घरेलू निवेशक बने बाजार का सहारा एक तरफ जहां विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ घरेलू निवेशक बाजार को संभाले हुए हैं। SIP और म्यूचुअल फंड निवेश के जरिए भारतीय निवेशकों का भरोसा अभी भी बाजार में बना हुआ है। यही वजह है कि भारी विदेशी बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिली। हालांकि आने वाले महीनों में वैश्विक संकेत और सरकारी फैसले बाजार की दिशा तय करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Indian Stock Market

Indian Stock Market Down: Sensex और Nifty में गिरावट

आज भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में निवेशकों को निराश करने वाला दिन रहा। पूरे सत्र में उतार-चढ़ाव के बाद अंत में बाजार भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। लगातार बिकवाली और वैश्विक संकेतों की कमजोरी ने बाजार की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। दिन के अंत में बेंचमार्क इंडेक्स Sensex 479 अंक गिरकर 76,009 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 भी 118 अंकों की गिरावट के साथ लाल निशान में फिसल गया। Market में क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट? शुरुआत से ही बाजार में कमजोरी का माहौल दिख रहा था। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, बिकवाली तेज होती गई और निवेशकों का सेंटीमेंट कमजोर पड़ता गया। मुख्य कारण रहे: किन सेक्टर्स ने गिराया पूरा बाजार? आज की गिरावट में कुछ प्रमुख सेक्टर्स की बड़ी भूमिका रही: Metal Stocks मेटल शेयरों में लगातार बिकवाली देखने को मिली, जिससे इंडेक्स पर दबाव बढ़ा। Realty Sector रियल्टी स्टॉक्स में कमजोरी के चलते निवेशकों का भरोसा डगमगाया। Banking Shares बैंकिंग सेक्टर में भी गिरावट रही, जिससे बाजार की गिरावट और तेज हो गई। Investor के लिए क्या मतलब है ये गिरावट? मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट पूरी तरह से ट्रेंड रिवर्सल नहीं है, बल्कि एक healthy correction हो सकता है। लंबे समय के निवेशकों के लिए यह गिरावट धीरे-धीरे एंट्री का मौका भी बन सकती है, हालांकि शॉर्ट टर्म में volatility बनी रह सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

Gold-Silver Price Update: चांदी ₹4,750 टूटी, सोना भी ₹1,135 सस्ता

देश के सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोना (Gold) और चांदी (Silver) की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। चांदी के दाम एक ही दिन में ₹4,750 तक टूट गए, जिसके बाद इसका भाव करीब ₹2.66 लाख प्रति किलो पर पहुंच गया। वहीं सोना भी ₹1,135 सस्ता हो गया। लगातार गिरते दामों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, लेकिन खरीदारी की तैयारी कर रहे लोगों के चेहरे पर राहत जरूर दिखाई दे रही है। ऑलटाइम हाई से काफी नीचे पहुंची चांदी कुछ महीने पहले तक रिकॉर्ड तेजी दिखाने वाली चांदी अब अपने ऑलटाइम हाई से करीब ₹1.20 लाख नीचे आ चुकी है। बाजार के जानकार मानते हैं कि ग्लोबल मार्केट में कमजोर मांग और डॉलर की मजबूती ने चांदी पर दबाव बढ़ाया है। इंडस्ट्रियल सेक्टर में मांग कम होने का असर भी सीधे चांदी की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि पिछले कई दिनों से बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। Gold Price में भी आई नरमी सोने की कीमतों में भी आज अच्छी-खासी गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट गोल्ड के रेट ₹1,135 तक नीचे आए। शादी-विवाह के सीजन से पहले सोने की कीमतों में आई यह कमी आम ग्राहकों के लिए राहत की खबर मानी जा रही है। ज्वेलर्स का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव बना रहा तो आने वाले दिनों में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है। क्यों गिर रहे हैं सोना-चांदी के दाम? सर्राफा बाजार में गिरावट के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं— इन सभी फैक्टर्स का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। निवेशकों के लिए क्या है सलाह? मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल निवेशकों को जल्दबाजी से बचना चाहिए। जिन लोगों ने ऊंचे स्तर पर निवेश किया था, उन्हें नुकसान जरूर हुआ है, लेकिन लंबे समय के निवेशकों के लिए यह गिरावट एक अच्छा मौका भी साबित हो सकती है। अगर आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो बाजार की चाल पर नजर रखना जरूरी होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET

NEET RE-Exam 2026 Guidelines: ड्रेस कोड से लेकर एग्जाम हॉल तक पूरे नियम जानें

NEET री-एग्जाम को लेकर लाखों छात्रों के बीच तैयारी तेज है, लेकिन इसी बीच National Testing Agency (NTA) ने परीक्षा को लेकर सख्त गाइडलाइन जारी कर दी है। इसमें खासकर ड्रेस कोड और परीक्षा हॉल नियमों पर ज्यादा ध्यान दिया गया है, ताकि एग्जाम पूरी तरह पारदर्शी और नकल-रहित हो सके। छात्रों के लिए यह जरूरी है कि वे परीक्षा सेंटर जाने से पहले सभी नियम अच्छे से समझ लें, क्योंकि छोटी सी गलती भी एंट्री रोक सकती है। NEET Exam Dress Code 2026: क्या पहनना सही रहेगा? NTA ने साफ कहा है कि उम्मीदवारों को सिंपल और हल्के कपड़े पहनकर आना चाहिए: NEET Exam में क्या नहीं पहनना चाहिए? NTA ने कुछ चीजों पर सख्त रोक लगाई है: NEET Exam Hall Rules: क्या लेकर जा सकते हैं? परीक्षा हॉल में सिर्फ जरूरी चीजों की अनुमति है: परीक्षा केंद्र में क्या बिल्कुल मना है? छात्रों के लिए जरूरी सलाह (Important Tips) NEET जैसी बड़ी परीक्षा में छोटी तैयारी भी बड़ा फर्क डालती है:
Gold

Gold Silver Price Crash: चांदी ₹9,209 टूटी, सोना ₹3,152 सस्ता, बाजार में हड़कंप

सोने (Gold)और चांदी (Silver) के दामों में आज एक बार फिर तेज गिरावट देखने को मिली है। लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव ने सर्राफा बाजार को झकझोर दिया है। जहां चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई, वहीं सोना भी दबाव में नजर आया। इस गिरावट का सीधा असर निवेशकों और ज्वेलरी कारोबार पर दिखाई दे रहा है। चांदी में बड़ा झटका, महीनेभर में ₹32,000 की गिरावट आज के कारोबार में चांदी की कीमत में ₹9,209 की बड़ी गिरावट आई और यह लगभग ₹2.31 लाख के स्तर पर पहुंच गई।सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस महीने अब तक चांदी करीब ₹32,000 तक सस्ती हो चुकी है, जो इसे एक बड़े करेक्शन की ओर इशारा करता है। सोने की कीमत भी टूटी, बाजार में दबाव बरकरार सोने के दामों में भी गिरावट का सिलसिला जारी रहा। आज सोना ₹3,152 तक सस्ता हो गया। लगातार गिरावट के कारण ज्वेलरी बाजार में खरीदारी का मूड कमजोर पड़ा है और निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं। आखिर क्यों गिर रहे हैं Gold Silver के दाम? विशेषज्ञों के मुताबिक इस गिरावट के पीछे कई ग्लोबल फैक्टर्स जिम्मेदार हैं: इन सभी कारणों का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिख रहा है। निवेशकों के लिए क्या संकेत? मार्केट आउटलुक फिलहाल सोना और चांदी दोनों ही दबाव में बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ग्लोबल संकेत स्थिर नहीं होते, तब तक कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sreesanth

Sreesanth का बयान: Team India में Dhoni जैसा Mentor की जरूरत, Gambhir पर उठे सवाल

भारतीय क्रिकेट में एक बार फिर बड़ी बहस छिड़ गई है। पूर्व तेज गेंदबाज़ Sreesanth ने टीम इंडिया के मौजूदा सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा है कि टीम को सिर्फ कोचिंग नहीं, बल्कि MS Dhoni जैसे शांत और समझदार मेंटर की जरूरत है। उन्होंने साथ ही Gautam Gambhir की कोचिंग स्टाइल पर भी टिप्पणी की है, जिससे क्रिकेट फैंस के बीच चर्चा तेज हो गई है। Sreesanth ने क्या कहा? Sreesanth का कहना है कि आज के समय में सिर्फ नेट प्रैक्टिस और टेक्निकल ट्रेनिंग काफी नहीं है। खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मजबूत रखने वाला सिस्टम ज्यादा जरूरी है। उनके अनुसार: उनका इशारा साफ था कि क्रिकेट अब सिर्फ स्किल का खेल नहीं रहा, बल्कि माइंडसेट का भी खेल बन चुका है। MS Dhoni को क्यों बताया “Perfect Mentor”? Sreesanth ने MS Dhoni की leadership style की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि धोनी जैसे खिलाड़ी टीम में एक अलग ही शांति लेकर आते हैं। Dhoni के बारे में उन्होंने कहा: इसी वजह से Sreesanth का मानना है कि Team India को Dhoni जैसा mentor system चाहिए। Gautam Gambhir की Coaching पर सवाल Gautam Gambhir की coaching approach पर बात करते हुए Sreesanth ने कहा कि उनका तरीका काफी सख्त और सीधा है। उनकी चिंता थी कि: हालांकि उन्होंने यह भी माना कि हर कोच का अपना तरीका होता है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए। क्यों शुरू हुई यह नई बहस? यह पूरा मामला ऐसे समय पर सामने आया है जब India national cricket team लगातार अपने performance और team management को लेकर चर्चा में रहती है। क्रिकेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज के दौर में: सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया Sreesanth के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर फैंस बंट गए हैं। कुछ लोगों का कहना है कि Dhoni जैसा calm leadership model ही सही रास्ता है, जबकि कुछ फैंस Gautam Gambhir की strict coaching approach का समर्थन कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Stock Market

Stock Market Crash IT सेक्टर टूटा, Accenture के संकेत से निवेशकों को बड़ा नुकसान

Accenture के ताज़ा बिजनेस अपडेट और कमजोर ग्लोबल IT डिमांड के संकेतों ने दुनिया भर के बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) पर पड़ा, जहां IT सेक्टर में भारी गिरावट देखने को मिली। शेयर बाजार की शुरुआत ही दबाव में रही और कुछ ही घंटों में निवेशकों की संपत्ति में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। IT स्टॉक्स में तेज बिकवाली ने पूरे बाजार का मूड खराब कर दिया। IT सेक्टर में अचानक बड़ी गिरावट क्यों आई? Accenture के आउटलुक में स्लोडाउन के संकेत मिलने के बाद यह डर बढ़ गया कि ग्लोबल टेक डिमांड आने वाले समय में कमजोर रह सकती है। इसी वजह से: TCS, Infosys और Wipro जैसे बड़े शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। निवेशकों को ₹2 लाख करोड़ का झटका बाजार में अचानक आई इस गिरावट का सबसे बड़ा असर निवेशकों की वेल्थ पर पड़ा। शुरुआती अनुमान के मुताबिक: करीब ₹2 लाख करोड़ से ज्यादा का मार्केट कैप खत्म हो गयाछोटे और बड़े दोनों निवेशकों को नुकसानपोर्टफोलियो में अचानक गिरावट से चिंता बढ़ी गिरावट के पीछे असली कारण क्या हैं? मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार इस गिरावट के पीछे कई ग्लोबल फैक्टर्स हैं: इन सबने मिलकर बाजार में “risk-off mood” बना दिया। आगे बाजार कैसा रह सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि: हालांकि, कुछ निवेशक इस गिरावट को लंबी अवधि के लिए “buy the dip opportunity” भी मान रहे हैं। आम निवेशक के लिए सीख इस तरह की ग्लोबल खबरें दिखाती हैं कि बाजार सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि भावनाओं और भरोसे से भी चलता है। अचानक आई गिरावट डराती जरूर है, लेकिन समझदारी से लिया गया फैसला ही लंबे समय में फायदा देता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
JD Vance

JD Vance का सबसे बड़ा Political Gamble! Iran Deal सफल रही तो बन सकते हैं अगले राष्ट्रपति

अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। लेकिन इस समझौते से सबसे ज्यादा चर्चा जिस नेता की हो रही है, वह हैं अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance। कभी विदेश नीति पर सख्त रुख रखने वाले वेंस आज ईरान के साथ हुई Peace Deal का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह समझौता सिर्फ अमेरिका और ईरान के रिश्तों का मामला नहीं है, बल्कि JD Vance के राजनीतिक भविष्य की भी बड़ी परीक्षा बन गया है। अगर यह पहल सफल रहती है तो वेंस 2028 के राष्ट्रपति चुनाव के सबसे मजबूत दावेदार बन सकते हैं। वहीं अगर समझौता टूटता है तो इसका असर सीधे उनके राजनीतिक करियर पर पड़ सकता है। 60 दिन का अहम दौर, दुनिया की नजरें टिकीं ईरान और अमेरिका के बीच बनी सहमति के बाद अब 60 दिनों का महत्वपूर्ण समय शुरू हो चुका है। इस दौरान दोनों देशों को समझौते की शर्तों का पालन करना होगा और आगे की बातचीत के लिए भरोसे का माहौल तैयार करना होगा। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि शुरुआती संकेत सकारात्मक हैं और दोनों पक्ष समझौते को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध दिखाई दे रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिबंधों जैसे कई जटिल मुद्दे अभी भी समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। JD Vance क्यों बने समझौते का चेहरा? इस पूरी प्रक्रिया में JD Vance ने सक्रिय भूमिका निभाई है। शुरुआती बातचीत से लेकर अंतिम सहमति तक वे लगातार वार्ता के पक्ष में खड़े रहे। उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर भी इस समझौते का बचाव किया और इसे अमेरिका के हित में बताया। व्हाइट हाउस के भीतर भी वेंस को इस डील का प्रमुख रणनीतिकार माना जा रहा है। यही कारण है कि समझौते की सफलता का श्रेय भी उन्हें मिल सकता है और असफलता की स्थिति में सबसे ज्यादा सवाल भी उन्हीं पर उठेंगे। राष्ट्रपति पद की दौड़ में मिल सकता है बड़ा फायदा अमेरिकी राजनीति में विदेश नीति हमेशा से महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। यदि ईरान के साथ यह समझौता लंबे समय तक कायम रहता है और मध्य-पूर्व में स्थिरता आती है, तो JD Vance की छवि एक प्रभावशाली और सफल नेता के रूप में मजबूत होगी। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी स्थिति में वे रिपब्लिकन पार्टी के भीतर राष्ट्रपति पद की दौड़ में सबसे आगे निकल सकते हैं। यह समझौता उन्हें राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी पहचान दिला सकता है। लेकिन खतरा भी उतना ही बड़ा जहां एक ओर इस डील से वेंस को बड़ा राजनीतिक लाभ मिल सकता है, वहीं दूसरी ओर जोखिम भी कम नहीं है। अमेरिकी राजनीति में कई नेता पहले ही इस समझौते पर सवाल उठा चुके हैं। उनका कहना है कि ईरान पर भरोसा करना जल्दबाजी हो सकती है। यदि आने वाले दिनों में समझौता विफल होता है, तनाव दोबारा बढ़ता है या ईरान शर्तों का उल्लंघन करता है, तो विपक्ष और आलोचक सीधे JD Vance को जिम्मेदार ठहरा सकते हैं। ऐसे में उनका राष्ट्रपति बनने का सपना भी प्रभावित हो सकता है। क्या बदल सकता है अमेरिकी राजनीति का भविष्य? फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि ईरान Peace Deal कितना सफल होगी। लेकिन इतना तय है कि आने वाले कुछ सप्ताह JD Vance के राजनीतिक करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं। दुनिया की निगाहें इस समझौते पर टिकी हैं। अगर शांति कायम रहती है तो JD Vance अमेरिकी राजनीति के अगले बड़े सितारे बन सकते हैं। लेकिन यदि यह पहल विफल रही, तो यही समझौता उनके करियर की सबसे बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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