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Stock Market Update 4 दिन की गिरावट से निवेशकों को झटका, ₹20 लाख करोड़ से ज्यादा घटा मार्केट कैप

शेयर बाजार (Stock Market) में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए बीते चार कारोबारी दिन काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे। भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति के बाजार मूल्य में करीब ₹20.79 लाख करोड़ की कमी आई। Sensex और Nifty में कमजोरी के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को बाजार एक बार फिर गिरावट के साथ बंद हुआ। बाजार में इस कमजोरी के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया में तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसी वजहें बताई जा रही हैं। ऐसे माहौल में निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं। Sensex-Nifty में गिरावट से निवेशकों की बढ़ी चिंता शुक्रवार को BSE Sensex 125.56 अंक गिरकर 73,123.83 पर बंद हुआ। वहीं NSE Nifty 50 में 87.65 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,600 के आसपास बंद हुआ। बाजार में गिरावट का असर केवल बड़ी कंपनियों के शेयरों तक सीमित नहीं रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। इससे उन निवेशकों की चिंता बढ़ गई, जिन्होंने इन शेयरों में पैसा लगा रखा है। लगातार गिरावट के कारण बाजार की धारणा कमजोर हुई है। हालांकि, बाजार में आगे तेजी आएगी या गिरावट जारी रहेगी, इसका अनुमान केवल मौजूदा स्थिति के आधार पर लगाना सही नहीं होगा। 4 दिन में ₹20.79 लाख करोड़ की संपत्ति घटी शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा असर कंपनियों के कुल मार्केट कैप पर दिखाई दिया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य 16 अक्टूबर को करीब ₹472.62 लाख करोड़ था। 23 अक्टूबर तक यह घटकर लगभग ₹451.83 लाख करोड़ रह गया। इस तरह चार कारोबारी दिनों में करीब ₹20,78,774 करोड़ की कमी दर्ज की गई। यानी लगभग ₹20.79 लाख करोड़ का बाजार मूल्य घट गया। यहां एक बात समझना जरूरी है। मार्केट कैप में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि निवेशकों ने इतनी रकम नकद गंवा दी। शेयरों की कीमत घटने से कंपनियों का कुल बाजार मूल्य कम हुआ है। इसी वजह से इस आंकड़े को निवेशकों की संपत्ति के बाजार मूल्य में आई कमी के तौर पर समझना ज्यादा सही होगा। आखिर क्यों गिर रहा है Share Market? कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई का दबाव भी बढ़ने की आशंका रहती है। इसका असर कंपनियों की लागत और मुनाफे पर पड़ सकता है। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को शेयर बाजार के लिए अहम संकेत माना जाता है। पश्चिम एशिया में तनाव से बढ़ी अनिश्चितता पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ाई है। अगर इस क्षेत्र में हालात बिगड़ते हैं, तो तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव आने की आशंका रहती है। ऐसे समय में निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं। इसका असर शेयरों की खरीद-बिक्री और बाजार की चाल पर दिखाई दे सकता है। Foreign Investors की बिकवाली विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की गतिविधियां भी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं। जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं, तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। हालांकि, बाजार की चाल केवल विदेशी निवेशकों पर निर्भर नहीं करती। घरेलू निवेश, कंपनियों के नतीजे और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी अहम भूमिका निभाती हैं। Midcap और Smallcap शेयरों में ज्यादा दबाव गिरावट के दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। इन शेयरों में उतार-चढ़ाव अक्सर अधिक हो सकता है, इसलिए बाजार में घबराहट बढ़ने पर इनमें बिकवाली तेज हो जाती है। ऐसे में जिन निवेशकों के पोर्टफोलियो में छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयर ज्यादा हैं, उन्हें अपने निवेश के जोखिम को समझना जरूरी है। आगे कैसा रहेगा शेयर बाजार? अब निवेशकों की नजर अगले कारोबारी सप्ताह पर रहेगी। बाजार की दिशा तय करने में कई कारक अहम होंगे, जिनमें कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया के हालात, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिकी बाजारों के संकेत और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर होने वाले फैसले भी भारतीय शेयर बाजार को प्रभावित कर सकते हैं। अगर वैश्विक हालात में सुधार होता है और निवेशकों का भरोसा लौटता है, तो बाजार को सहारा मिल सकता है। दूसरी ओर, तनाव बढ़ने और बिकवाली जारी रहने पर उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। फिलहाल किसी निश्चित दिशा का दावा करना जल्दबाजी होगी। Investors के लिए क्या है जरूरी? शेयर बाजार में गिरावट देखकर घबराना स्वाभाविक है, खासकर तब जब पोर्टफोलियो की वैल्यू लगातार कम हो रही हो। लेकिन ऐसे समय में जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय निवेश से जुड़े बुनियादी पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। निवेशकों को अपनी वित्तीय जरूरतों, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। केवल बाजार की मौजूदा गिरावट देखकर किसी शेयर को खरीदने या बेचने का फैसला करना उचित नहीं है। निष्कर्ष: भारतीय शेयर बाजार में चार कारोबारी दिनों के दौरान करीब ₹20.79 लाख करोड़ के बाजार मूल्य में आई कमी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां फिलहाल बाजार के लिए अहम संकेत हैं। आने वाले दिनों में बाजार किस दिशा में जाएगा, यह इन परिस्थितियों और कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jio Platforms IPO का आज आखिरी दिन, 20 गुना सब्सक्राइब होने का दावा; GMP से ₹1,377 पर लिस्टिंग के संकेत

Jio Platforms के IPO में बोली लगाने का आज आखिरी दिन है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, इश्यू अब तक करीब 20 गुना सब्सक्राइब हो चुका है। संस्थागत निवेशकों की ओर से जबरदस्त मांग देखने को मिली है, जबकि रिटेल निवेशकों का हिस्सा 2.69 गुना सब्सक्राइब हुआ है। दावा किया जा रहा है कि यह IPO एक करोड़ आवेदन का आंकड़ा पार करने वाला दुनिया का पहला इश्यू बन गया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड Waaree Energies के नाम था, जिसके IPO को करीब 97 लाख आवेदन मिले थे। नोट: IPO के सब्सक्रिप्शन आंकड़े, आवेदन संख्या और बोली की अंतिम समयसीमा को निवेश करने से पहले आधिकारिक एक्सचेंज या रजिस्ट्रार की वेबसाइट पर जरूर जांच लें। पहले दिन ही 3 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ था IPO दिए गए आंकड़ों के अनुसार, IPO के पहले दिन यानी 21 अक्टूबर को ही इश्यू 3.02 गुना सब्सक्राइब हो गया था। 19.75 करोड़ शेयरों के मुकाबले 59.68 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां मिली थीं। दूसरे दिन संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी के चलते सब्सक्रिप्शन का आंकड़ा 3.50 गुना से आगे निकल गया था। इसके बाद भी इश्यू में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने का दावा किया गया है। IPO में न्यूनतम ₹13,428 लगाने होंगे Jio Platforms IPO का प्राइस बैंड ₹1,065 से ₹1,119 प्रति शेयर बताया गया है। दिए गए विवरण के मुताबिक, एक लॉट में 12 शेयर शामिल हैं। अपर प्राइस बैंड के आधार पर एक लॉट के लिए निवेशकों को ₹13,428 लगाने होंगे। वहीं, अधिकतम 14 लॉट यानी 168 शेयरों के लिए आवेदन करने पर करीब ₹1.88 लाख की राशि लगेगी। आवेदन से पहले आधिकारिक IPO दस्तावेजों में लॉट साइज और निवेश की सीमा की पुष्टि करना जरूरी है। GMP के आधार पर ₹1,377 पर लिस्टिंग का अनुमान IPO की लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में शेयर का प्रीमियम (GMP) ₹258 प्रति शेयर, यानी करीब 23% बताया गया है। अगर अपर प्राइस बैंड ₹1,119 और GMP ₹258 को जोड़ें, तो संभावित लिस्टिंग कीमत ₹1,377 बनती है। हालांकि, ग्रे मार्केट प्रीमियम अनौपचारिक संकेतक है। इसके आधार पर लिस्टिंग कीमत या मुनाफे की गारंटी नहीं दी जा सकती। वास्तविक कीमत लिस्टिंग के दिन बाजार की परिस्थितियों और निवेशकों की मांग पर निर्भर करेगी। एंकर निवेशकों से ₹8,110 करोड़ जुटाने का दावा दिए गए विवरण के अनुसार, Jio Platforms इस IPO के जरिए कुल ₹30,213 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। इश्यू खुलने से पहले एंकर निवेशकों को शेयर आवंटित करके ₹8,110 करोड़ जुटाए जाने की जानकारी दी गई है। एंकर निवेशकों को आवंटन के बाद आम निवेशकों और अन्य पात्र श्रेणियों के लिए करीब ₹22,103 करोड़ का शुद्ध इश्यू रहने का दावा किया गया है। IPO से मिलने वाली रकम का कहां होगा इस्तेमाल? IPO से जुटाई जाने वाली रकम का इस्तेमाल कंपनी की प्रमुख सब्सिडियरी Reliance Jio Infocomm Limited (RJIL) के कर्ज के भुगतान के लिए किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा, राशि का एक हिस्सा सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों पर भी खर्च किया जाएगा। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, इश्यू के बाद प्रमोटर और प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी 66.43% से घटकर 64.48% रह सकती है। वहीं, सार्वजनिक शेयरधारिता 33.57% से बढ़कर 35.52% होने का अनुमान है। क्या होती है एंकर बुक? IPO में एंकर बुक संस्थागत निवेशकों के लिए आरक्षित हिस्सा होता है। इसमें म्यूचुअल फंड, विदेशी संस्थागत निवेशक और बीमा कंपनियों जैसे बड़े निवेशकों को आम जनता के लिए IPO खुलने से पहले शेयर आवंटित किए जा सकते हैं। एंकर निवेशकों की भागीदारी से इश्यू के प्रति संस्थागत मांग का संकेत मिल सकता है। हालांकि, बड़े निवेशकों का निवेश भी इस बात की गारंटी नहीं है कि शेयर की लिस्टिंग पर मुनाफा ही होगा या भविष्य में उसका प्रदर्शन अच्छा रहेगा।
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Jio Platforms IPO

Jio Platforms IPO: तीसरे दिन 6 गुना पार Subscription, QIBs ने लगाई ताबड़तोड़ बोली

मुकेश अंबानी की कंपनी Jio Platforms के IPO को लेकर शेयर बाजार में काफी चर्चा है। इश्यू के तीसरे दिन निवेशकों ने जमकर बोली लगाई और सब्सक्रिप्शन का आंकड़ा 6 गुना के पार पहुंच गया। सबसे ज्यादा उत्साह बड़े संस्थागत निवेशकों (QIBs) में देखने को मिला, जिन्होंने अपनी कैटेगरी में 13 गुना से ज्यादा बोली लगाई। अब निवेशकों की नजर IPO के अलॉटमेंट और शेयर बाजार में इसकी लिस्टिंग पर है। Jio Platforms IPO को निवेशकों का शानदार रिस्पॉन्स Jio Platforms का करीब 30,213 करोड़ रुपये का IPO 21 अक्टूबर 2026 को खुला था। इसमें निवेश करने का आखिरी मौका 23 अक्टूबर को है। शुरुआती दो दिनों से ही इस इश्यू को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा था। तीसरे दिन सुबह 9:20 बजे तक IPO का सब्सक्रिप्शन 5.72 गुना पहुंच चुका था और कारोबार आगे बढ़ने के साथ इसमें और तेजी देखने को मिली। IPO में इतनी मजबूत मांग ने इसे शेयर बाजार की प्रमुख चर्चाओं में शामिल कर दिया है। हालांकि, अंतिम सब्सक्रिप्शन आंकड़े और शुरुआती कारोबारी आंकड़ों में अंतर हो सकता है। QIBs ने 13 गुना से ज्यादा लगाई बोली इस IPO में सबसे ज्यादा दिलचस्पी Qualified Institutional Buyers यानी QIBs ने दिखाई। इस श्रेणी में बड़े संस्थागत निवेशक शामिल होते हैं, जैसे म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय संस्थान। दूसरे दिन के अंत तक QIB कैटेगरी 13.29 गुना सब्सक्राइब हो चुकी थी। वहीं, गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) की ओर से भी अच्छी मांग आई। रिटेल निवेशकों ने भी इश्यू में भागीदारी दिखाई। संस्थागत निवेशकों की मजबूत बोली से IPO को लेकर बाजार का उत्साह साफ नजर आता है। हालांकि, ज्यादा सब्सक्रिप्शन का मतलब यह नहीं है कि शेयर की लिस्टिंग पर निश्चित रूप से मुनाफा होगा। भारत के सबसे बड़े IPO में शामिल Jio Platforms का इश्यू Jio Platforms का करीब 30,213 करोड़ रुपये का सार्वजनिक निर्गम आकार के लिहाज से भारत के सबसे बड़े IPO में शामिल है। इससे पहले Hyundai Motor India का करीब 27,859 करोड़ रुपये का IPO देश का सबसे बड़ा इश्यू था। Platforms का कारोबार टेलीकॉम और डिजिटल सेवाओं से जुड़ा है। कंपनी मोबाइल कनेक्टिविटी, इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बड़ी संख्या में ग्राहकों तक पहुंच रखती है। डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल और कंपनी की बाजार में मौजूदगी के कारण इस IPO पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। Jio Platforms IPO का Price Band और जरूरी तारीखें निवेशकों के लिए IPO से जुड़ी जरूरी जानकारी यहां दी गई है: अलॉटमेंट और लिस्टिंग की तारीखों में बदलाव संभव है। निवेशकों को अंतिम जानकारी के लिए कंपनी और स्टॉक एक्सचेंज की आधिकारिक घोषणाएं देखनी चाहिए। GMP पर भी निवेशकों की नजर IPO में मजबूत सब्सक्रिप्शन के बीच ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) को लेकर भी निवेशकों की दिलचस्पी रहती है। GMP से बाजार में शेयर की संभावित लिस्टिंग कीमत को लेकर एक संकेत मिल सकता है, लेकिन यह आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। लिस्टिंग के दिन शेयर किस भाव पर खुलेगा, यह बाजार की स्थिति, निवेशकों की मांग और कंपनी के मूल्यांकन समेत कई बातों पर निर्भर करेगा। इसलिए सिर्फ GMP देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। क्या Jio Platforms IPO में निवेश करना सही रहेगा? IPO को मिल रहा शानदार रिस्पॉन्स निश्चित रूप से चर्चा का विषय है, लेकिन निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार की संभावनाओं और शेयर के मूल्यांकन को समझना जरूरी है। निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि IPO में आवेदन करने से शेयर अलॉट होने की गारंटी नहीं होती। इसी तरह, शेयर अलॉट होने के बाद लिस्टिंग पर फायदा होगा या नुकसान, यह पहले से तय नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, Jio Platforms IPO में QIBs की मजबूत भागीदारी ने बाजार का ध्यान खींचा है। अब सबकी नजर सब्सक्रिप्शन के अंतिम आंकड़ों, शेयर अलॉटमेंट और संभावित लिस्टिंग पर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना होगा मुश्किल? अब टेस्ट में 75% अंक जरूरी करने का प्रस्ताव, PVC कार्ड भी मिलेगा

नया ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वालों के लिए नियमों में बदलाव का प्रस्ताव सामने आया है। परिवहन मंत्रालय ने ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े नियमों का नया ड्राफ्ट तैयार किया है। इसके तहत ड्राइविंग टेस्ट में पास होने के लिए न्यूनतम अंक 60% से बढ़ाकर 75% करने का प्रस्ताव है। साथ ही, टेस्ट से पहले कम से कम 30 मिनट का ‘सेफ-ड्राइविंग ट्यूटोरियल’ देखना भी जरूरी किया जा सकता है। सरकार ने लाइसेंस से जुड़ी कुछ ऑनलाइन सेवाओं को आधार वेरिफिकेशन के जरिए मुफ्त करने का प्रस्ताव भी रखा है। इसमें नाम, पता और अन्य व्यक्तिगत जानकारी अपडेट करने जैसी सेवाएं शामिल हैं। हालांकि, ये बदलाव अभी प्रस्तावित हैं और अंतिम नियम जारी होने के बाद ही इनकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। अब मिलेगा मजबूत और वाटरप्रूफ PVC कार्ड ड्राफ्ट के मुताबिक, नया ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने या पुराने लाइसेंस का नवीनीकरण कराने पर साधारण कागज के बजाय ‘फॉर्म 7’ के तहत मजबूत और वाटरप्रूफ PVC कार्ड देने का प्रावधान है। लाइसेंस से जुड़ी प्रक्रिया में पहचान, उम्र और पते के प्रमाण के लिए आधार कार्ड, पासपोर्ट, वोटर ID, ई-राशन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा सकेगा। दस्तावेजों की स्वीकार्यता संबंधित नियमों और निर्धारित शर्तों पर निर्भर करेगी। 15 दिन में नाम-पता बदलने की प्रक्रिया पूरी करने का प्रस्ताव ड्राइविंग लाइसेंस में नाम, पता या अन्य जानकारी बदलवाने के लिए आवेदन करने वालों को भी राहत मिल सकती है। प्रस्ताव के अनुसार, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के अधिकारी को आवेदन मिलने के 15 दिनों के भीतर प्रक्रिया पूरी करनी होगी या आवेदन खारिज करना होगा। यदि आवेदन अस्वीकार किया जाता है, तो संबंधित अधिकारी को उसका स्पष्ट कारण लिखित रूप में बताना होगा। इससे आवेदकों को आवेदन की स्थिति और अस्वीकृति की वजह जानने में मदद मिलेगी। आधार वेरिफिकेशन से मुफ्त में बदलवा सकेंगे नाम-पता सरकार ने डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए आधार वेरिफिकेशन के जरिए ऑनलाइन ड्राइविंग लाइसेंस सेवाओं की फीस माफ करने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत लाइसेंस में नाम, पता और अन्य व्यक्तिगत जानकारी अपडेट करने जैसी सेवाएं मुफ्त हो सकती हैं। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो निर्धारित ऑनलाइन सेवाओं का लाभ लेने वाले आवेदकों को शुल्क नहीं देना पड़ेगा। हालांकि, मुफ्त सेवाओं का अंतिम दायरा नियमों को मंजूरी मिलने के बाद स्पष्ट होगा। 30 दिनों में मांगे सुझाव और आपत्तियां परिवहन मंत्रालय ने नए नियमों का ड्राफ्ट जारी कर आम लोगों और विशेषज्ञों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। प्राप्त प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद सरकार नियमों को अंतिम रूप दे सकती है। ध्यान दें: फिलहाल ये बदलाव प्रस्तावित नियमों का हिस्सा हैं। इन्हें अंतिम रूप से लागू किए जाने से पहले आधिकारिक अधिसूचना जारी होना जरूरी है।
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Apple ने ऑनलाइन iPhone खरीदने की लिमिट तय की, एक ग्राहक खरीद सकेगा अधिकतम 2 फोन

फेस्टिव सीजन में iPhone खरीदने वालों के लिए Apple की ओर से खरीदारी की सीमा तय किए जाने की खबर सामने आई है। दावा है कि कंपनी के आधिकारिक ऑनलाइन स्टोर पर एक ग्राहक अधिकतम 2 iPhone ही खरीद सकेगा। एक ही मॉडल के दो फोन खरीदें या अलग-अलग मॉडल चुनें, तीसरा iPhone कार्ट में जोड़ने पर ऑर्डर रोकने और चेतावनी संदेश दिखाने का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, इस नियम की आधिकारिक पुष्टि और इसकी लागू होने की अवधि की जानकारी स्पष्ट होना जरूरी है। खरीदारी से पहले Apple के आधिकारिक स्टोर पर मौजूदा शर्तें जांच लें। ऑफलाइन स्टोर पर खरीदारी को लेकर दावा रिपोर्ट के मुताबिक, दो iPhone खरीदने की सीमा केवल ऑनलाइन स्टोर के लिए है। यदि किसी ग्राहक को दो से ज्यादा फोन खरीदने हैं, तो वह Apple के ऑफलाइन स्टोर से खरीदारी कर सकता है। हालांकि, ऑफलाइन स्टोर पर भी उपलब्धता और बिक्री की शर्तें लागू हो सकती हैं। कालाबाजारी रोकने की कोशिश त्योहारों के दौरान लोकप्रिय स्मार्टफोन की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में कुछ खरीदार या रीसेलर बड़ी संख्या में फोन खरीद सकते हैं, जिससे आम ग्राहकों के लिए उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका रहती है। एक ग्राहक के लिए खरीदारी की सीमा तय करने का उद्देश्य जमाखोरी और रीसेलिंग को नियंत्रित करना हो सकता है। हालांकि, इस नियम के पीछे Apple की आधिकारिक वजह की पुष्टि जरूरी है। फोल्डेबल iPhone और iPhone 18 सीरीज को लेकर भी दावे दी गई जानकारी में Apple के पहले फोल्डेबल iPhone ‘iPhone Duo’ का भी जिक्र है। इसके मुताबिक, फोन में 5.4 इंच का कवर डिस्प्ले और 7.6 इंच की अंदरूनी स्क्रीन होने का दावा किया गया है। इसकी शुरुआती कीमत करीब 3 लाख रुपए और टॉप मॉडल की कीमत 4.50 लाख रुपए तक बताई गई है। इसी तरह, iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max की कीमतों और कैमरा फीचर्स को लेकर भी जानकारी दी गई है। लेकिन इन मॉडल्स, कीमतों और लॉन्च से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि के बिना इन्हें पक्की जानकारी नहीं माना जाना चाहिए।
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Gold

Gold Price Today: सोने के दाम में बड़ी गिरावट, 10 ग्राम का भाव ₹1.43 लाख पर

सोना (Gold) और चांदी (Silver) खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। पिछले तीन दिनों में दोनों कीमती धातुओं के भाव में अच्छी-खासी गिरावट आई है। सोना करीब ₹3,000 और चांदी लगभग ₹9,000 तक सस्ती हुई है। ऐसे में शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने या निवेश की योजना बना रहे लोगों की नजर अब बाजार के अगले रुख पर है। 22 अक्टूबर 2026 के बाजार अपडेट के मुताबिक, 10 ग्राम सोने की कीमत करीब ₹1.43 लाख और चांदी का भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो बताया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग बाजारों में कीमतों का अंतर हो सकता है। Gold Rate Today: ₹1.43 लाख पर पहुंचा 10 ग्राम सोना Gold Price में आई गिरावट से खरीदारों को कुछ राहत जरूर मिली है। बीते तीन दिनों में भाव करीब ₹3,000 नीचे आने से उन लोगों के लिए खरीदारी का मौका बन सकता है, जो लंबे समय से कीमतें कम होने का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, सोना खरीदने से पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर पता कर लें। 24 कैरेट सोने की कीमत और गहने बनाने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने के भाव में अंतर होता है। इसके अलावा ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और GST भी देना पड़ता है। Silver Rate Today: चांदी ₹9,000 तक हुई सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। पिछले तीन दिनों में चांदी करीब ₹9,000 तक सस्ती हुई है और इसका भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो के स्तर पर बताया जा रहा है। चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर उन ग्राहकों पर भी पड़ता है, जो त्योहारों पर चांदी के सिक्के, बर्तन या दूसरे सामान खरीदते हैं। हालांकि, खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार में चांदी का ताजा भाव और शुद्धता की जानकारी लेना जरूरी है। सोना-चांदी के दाम क्यों गिर रहे हैं? Gold or Silver की कीमतें केवल घरेलू मांग से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव, डॉलर की चाल, रुपये की स्थिति और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें भी इनके भाव पर असर डालती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतें कमजोर होती हैं, तो भारतीय बाजार में भी इसका असर दिखाई दे सकता है। इसके अलावा मुनाफावसूली के कारण भी कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, बाजार में आई गिरावट की किसी एक वजह को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। कीमतों की चाल कई आर्थिक और वैश्विक कारकों पर निर्भर करती है। क्या अभी सोना और चांदी खरीदना सही रहेगा? अगर आप शादी या त्योहार के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो मौजूदा गिरावट आपके लिए राहत की बात हो सकती है। लेकिन केवल तीन दिन की गिरावट देखकर यह मान लेना ठीक नहीं है कि आगे भी भाव लगातार कम होंगे। खरीदारी से पहले अलग-अलग ज्वेलर्स के रेट की तुलना करें। सोने पर हॉलमार्क और शुद्धता की जांच करें तथा बिल में मेकिंग चार्ज और GST का पूरा विवरण देखें। निवेश के लिहाज से भी जल्दबाजी करने के बजाय अपने बजट और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना बेहतर है। आगे Gold-Silver Price में क्या बदलाव हो सकता है? आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख, अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों से जुड़ी खबरें और रुपये की चाल सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में भाव में फिर तेजी आने या गिरावट जारी रहने, दोनों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, तीन दिनों में सोने और चांदी के दाम में आई गिरावट ने खरीदारों को थोड़ी राहत दी है। अगर आप आज खरीदारी करने जा रहे हैं, तो पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर जांच लें, क्योंकि बाजार भाव और ज्वेलरी की अंतिम कीमत में अंतर हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Zomato-Blinkit की पैरेंट कंपनी Eternal लाएगी Dark.ai, सीक्रेट चैट और प्राइवेसी पर होगा फोकस

जोमैटो और ब्लिंकइट की पैरेंट कंपनी एटरनल (Eternal) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में नया कदम उठाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के प्रमुख दीपिंदर गोयल ने ‘Dark.ai’ नाम के नए AI ऐप के बारे में जानकारी दी है। इसका मुख्य फोकस यूजर्स की प्राइवेसी और संवेदनशील बातचीत की सुरक्षा पर होगा। गोयल के मुताबिक, इस ऐप को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि लोग अपनी निजी बातें, गोपनीय विचार, रिसर्च और जटिल सवाल बिना किसी झिझक के साझा कर सकें। फिलहाल कंपनी के कर्मचारी इसकी टेस्टिंग कर रहे हैं। डेटा सुरक्षा पर जोर, कंपनी भी नहीं पढ़ पाएगी चैट दीपिंदर गोयल ने बताया कि Dark.ai को कंपनी के अपने कंप्यूटर सिस्टम और सुरक्षित तकनीक पर चलाने की योजना है। इसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन जैसी सुरक्षा व्यवस्था का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है, ताकि बातचीत को अनधिकृत रूप से पढ़े जाने से बचाया जा सके। ऐप में एक विशेष मेमोरी सिस्टम भी होगा, जिस पर यूजर का नियंत्रण रहेगा। इसके जरिए यूजर अपनी जरूरत के अनुसार पुरानी बातचीत से जुड़ी जानकारी को सुरक्षित रख सकेंगे या हटा सकेंगे। हालांकि, ऐप की सुरक्षा व्यवस्था और डेटा प्रबंधन से जुड़े सभी तकनीकी विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसलिए कंपनी के दावों की वास्तविक सीमा लॉन्च के समय उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट होगी। स्टार्टअप, वैज्ञानिकों और रिसर्चर्स के लिए होगा उपयोगी Dark.ai को खास तौर पर उन लोगों और संस्थानों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, जिन्हें संवेदनशील जानकारियों के साथ काम करना पड़ता है। इनमें स्टार्टअप संस्थापक, वैज्ञानिक, रिसर्चर्स, बड़ी कंपनियां और सरकारी कार्यालय शामिल हैं। गोयल के मुताबिक, इस AI को केवल यूजर को खुश करने के लिए जवाब देने के बजाय तथ्यों के आधार पर उत्तर देने के लिए तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसा सिस्टम बनाना है, जो यूजर की बातों से सहमत होने के बजाय अपनी समझ के अनुसार जवाब दे। मौजूदा AI ऐप्स की प्राइवेसी पर उठाए सवाल गोयल ने मौजूदा AI प्लेटफॉर्म्स पर डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि कई सेवाओं में यूजर डेटा सेव न करने का विकल्प चुनने के बाद भी बैकएंड पर जानकारी के प्रबंधन को लेकर स्पष्टता की कमी महसूस हो सकती है। उन्होंने कहा कि आम AI ऐप्स इस्तेमाल करते समय यूजर्स के मन में यह आशंका बनी रह सकती है कि उनकी बातचीत कोई पढ़ सकता है। उनके मुताबिक, इसी तरह का डर और अविश्वास लोगों को AI का पूरी क्षमता से इस्तेमाल करने से रोक सकता है। Dark.ai के जरिए कंपनी इस चिंता को कम करने और यूजर्स को निजी बातचीत के लिए अधिक सुरक्षित माहौल देने की कोशिश कर रही है। इसी साल लॉन्च की तैयारी, कीमत पर फैसला नहीं कंपनी की ओर से ऐप की लॉन्चिंग को लेकर इसी साल की तैयारी का संकेत दिया गया है। हालांकि, इसके काम करने की गति, इस्तेमाल किए जाने वाले AI मॉडल और अन्य तकनीकी विशेषताओं की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ऐप मुफ्त होगा या इसके लिए सब्सक्रिप्शन लेना पड़ेगा, इस बारे में भी कंपनी ने कोई जानकारी नहीं दी है। इससे होने वाली संभावित कमाई को लेकर भी फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो और क्विक कॉमर्स सेवा ब्लिंकइट के बाद AI सॉफ्टवेयर क्षेत्र में एटरनल का यह संभावित कदम कंपनी के कारोबार के विस्तार की दिशा में अहम हो सकता है।
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eMudhra में तकनीकी गड़बड़ी की जांच के लिए IT मंत्रालय ने बनाई स्पेशल टीम, सरकार बोली- भारतीय वेबसाइट्स और ऐप सुरक्षित

डिजिटल सुरक्षा सेवाएं देने वाली कंपनी ई-मुद्रा (eMudhra) में तकनीकी गड़बड़ी सामने आने के बाद आईटी मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की है। सरकार के मुताबिक, इस गड़बड़ी का असर कंपनी के विदेशी कारोबार तक सीमित है। भारतीय वेबसाइट्स और ऐप्स की सुरक्षा प्रभावित होने की बात सामने नहीं आई है। सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से सावधान रहने की अपील की है। मामले की जांच साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मदद से की जा रही है, ताकि गड़बड़ी की वजह और उसके संभावित प्रभाव का पता लगाया जा सके। eMudhra दो तरह की डिजिटल सुरक्षा सेवाएं देती है ई-मुद्रा का कारोबार मुख्य रूप से दो क्षेत्रों में फैला है। पहला, भारत में डिजिटल सिग्नेचर और eSign सेवाएं देना। दूसरा, विदेशी वेबसाइट्स के लिए डिजिटल सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी करना। कंपनी से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, हालिया तकनीकी गड़बड़ी उसके विदेशी कारोबार से संबंधित डिजिटल सर्टिफिकेट्स में सामने आई। भारतीय डिजिटल सिग्नेचर और eSign सेवाओं पर इसका असर होने की जानकारी नहीं दी गई है। सिस्टम की खराबी से बने कमजोर सुरक्षा कोड ई-मुद्रा के मुताबिक, सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण कुछ कमजोर सुरक्षा कोड बन गए थे। एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ने इस समस्या के बारे में एप्पल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मोजिला जैसी बड़ी टेक कंपनियों को अलर्ट किया। चिंता जताई गई कि इन कमजोर कोड का फायदा उठाकर साइबर हमलावर सुरक्षा प्रमाणपत्रों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि इन कोड का इस्तेमाल करके वास्तव में कोई हमला हुआ था। गूगल और मोजिला ने प्रभावित सर्टिफिकेट्स पर की कार्रवाई तकनीकी गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद ब्राउजर कंपनियों ने प्रभावित सुरक्षा प्रमाणपत्रों के खिलाफ कदम उठाए। इन कदमों का उद्देश्य प्रभावित प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल से जुड़े जोखिम को सीमित करना है। eMudhra का दावा- ग्राहक का डेटा चोरी नहीं हुआ ई-मुद्रा ने कहा है कि उसका मुख्य सिस्टम सुरक्षित है और किसी ग्राहक का डेटा चोरी नहीं हुआ है। कंपनी के अनुसार, जिस विदेशी कारोबार में गड़बड़ी सामने आई, उससे उसकी कुल कमाई का लगभग 1 प्रतिशत हिस्सा आता है। कंपनी प्रभावित विदेशी ग्राहकों को नए और सुरक्षित डिजिटल सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में भी जुटी है, ताकि उनकी सेवाएं जारी रह सकें। सरकार ने अफवाहों से बचने की अपील की आईटी मंत्रालय ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट खबरों के आधार पर घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार की साइबर सुरक्षा टीम और विशेषज्ञ तकनीकी पहलुओं की पड़ताल कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल, गड़बड़ी के वास्तविक दायरे और संभावित प्रभाव को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
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SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Share Market

Share Market Update सेंसेक्स की तेजी पर लगा ब्रेक, Auto-Metal Stocks में दबाव

शेयर बाजार (Share Market) में तेजी देखकर खरीदारी करने वाले निवेशकों के लिए बुधवार का कारोबार थोड़ा निराशाजनक रहा। 21 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार ने शुरुआत में अच्छी बढ़त बनाई, लेकिन दोपहर तक तस्वीर बदल गई। सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर से करीब 1,200 अंक नीचे आ गया और 73,500 के आसपास कारोबार करने लगा। ऑटो और मेटल शेयरों में बिकवाली ने बाजार की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। शुरुआती कारोबार में खरीदारी का माहौल था, लेकिन जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया। इसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर दबाव देखने को मिला। बाजार में गिरावट के बीच निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर है। Sensex और Nifty में गिरावट, शुरुआती तेजी पड़ी फीकी बुधवार को बाजार की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ हुई थी। कुछ बड़े शेयरों में खरीदारी से प्रमुख इंडेक्स को सहारा मिला। हालांकि, ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू होने के बाद सेंसेक्स अपनी बढ़त बरकरार नहीं रख सका। दिन के उच्चतम स्तर से करीब 1,200 अंक की गिरावट ने बाजार में जारी उतार-चढ़ाव को उजागर किया। निफ्टी पर भी दबाव देखने को मिला। निवेशक फिलहाल बाजार में बड़े दांव लगाने के बजाय कारोबार से जुड़े संकेतों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। Auto और Metal Stocks में क्यों बढ़ी बिकवाली? बाजार की गिरावट में ऑटो और मेटल सेक्टर के शेयरों की कमजोरी चर्चा में रही। इन सेक्टरों में बिकवाली से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। ऑटो कंपनियों के शेयरों पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए वाहन बिक्री, मांग और उत्पादन लागत जैसे पहलू अहम हैं। वहीं, मेटल कंपनियों के प्रदर्शन पर वैश्विक मांग, धातुओं की कीमतों और औद्योगिक गतिविधियों का असर पड़ता है। हालांकि, पूरे सेक्टर को एक ही नजर से देखना सही नहीं होगा। अलग-अलग कंपनियों के शेयरों में उनकी वित्तीय स्थिति और कारोबार के आधार पर अलग-अलग चाल देखने को मिल सकती है। Crude Oil Price में तेजी से बढ़ी चिंता अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भी भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। तेल महंगा होने से भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर महंगाई, परिवहन खर्च और कई कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे कुछ कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से निवेशक वैश्विक घटनाक्रम और तेल बाजार की चाल पर नजर रख रहे हैं। IT Stocks और Reliance पर भी निवेशकों की नजर जहां ऑटो और मेटल शेयरों में दबाव देखने को मिला, वहीं आईटी सेक्टर और रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े घटनाक्रम भी बाजार की चर्चा में रहे। आईटी कंपनियों के तिमाही नतीजे और कारोबार की संभावनाएं निवेशकों के लिए अहम हैं। इसके अलावा, जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO से जुड़ी गतिविधियों पर भी बाजार की नजर बनी हुई है। हालांकि, किसी एक कंपनी में खरीदारी या तेजी से पूरे बाजार की दिशा तय नहीं होती। सेंसेक्स और निफ्टी पर कई बड़े शेयरों और सेक्टरों का संयुक्त असर पड़ता है। Share Market में गिरावट की 4 बड़ी वजहें निवेशक अब किन बातों पर रखें नजर? आने वाले कारोबारी सत्रों में कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, वैश्विक बाजारों का रुख और कंपनियों के तिमाही नतीजे अहम रहेंगे। इन संकेतों से बाजार की दिशा को समझने में मदद मिल सकती है, हालांकि बाजार की चाल का सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल एक दिन की तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला न लें। निवेश से पहले कंपनी के प्रदर्शन, अपनी जोखिम क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना बेहतर रहता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Stock Market

Stock Market Update 4 दिन की गिरावट से निवेशकों को झटका, ₹20 लाख करोड़ से ज्यादा घटा मार्केट कैप

शेयर बाजार (Stock Market) में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए बीते चार कारोबारी दिन काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे। भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति के बाजार मूल्य में करीब ₹20.79 लाख करोड़ की कमी आई। Sensex और Nifty में कमजोरी के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को बाजार एक बार फिर गिरावट के साथ बंद हुआ। बाजार में इस कमजोरी के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया में तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसी वजहें बताई जा रही हैं। ऐसे माहौल में निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं। Sensex-Nifty में गिरावट से निवेशकों की बढ़ी चिंता शुक्रवार को BSE Sensex 125.56 अंक गिरकर 73,123.83 पर बंद हुआ। वहीं NSE Nifty 50 में 87.65 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,600 के आसपास बंद हुआ। बाजार में गिरावट का असर केवल बड़ी कंपनियों के शेयरों तक सीमित नहीं रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। इससे उन निवेशकों की चिंता बढ़ गई, जिन्होंने इन शेयरों में पैसा लगा रखा है। लगातार गिरावट के कारण बाजार की धारणा कमजोर हुई है। हालांकि, बाजार में आगे तेजी आएगी या गिरावट जारी रहेगी, इसका अनुमान केवल मौजूदा स्थिति के आधार पर लगाना सही नहीं होगा। 4 दिन में ₹20.79 लाख करोड़ की संपत्ति घटी शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा असर कंपनियों के कुल मार्केट कैप पर दिखाई दिया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य 16 अक्टूबर को करीब ₹472.62 लाख करोड़ था। 23 अक्टूबर तक यह घटकर लगभग ₹451.83 लाख करोड़ रह गया। इस तरह चार कारोबारी दिनों में करीब ₹20,78,774 करोड़ की कमी दर्ज की गई। यानी लगभग ₹20.79 लाख करोड़ का बाजार मूल्य घट गया। यहां एक बात समझना जरूरी है। मार्केट कैप में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि निवेशकों ने इतनी रकम नकद गंवा दी। शेयरों की कीमत घटने से कंपनियों का कुल बाजार मूल्य कम हुआ है। इसी वजह से इस आंकड़े को निवेशकों की संपत्ति के बाजार मूल्य में आई कमी के तौर पर समझना ज्यादा सही होगा। आखिर क्यों गिर रहा है Share Market? कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई का दबाव भी बढ़ने की आशंका रहती है। इसका असर कंपनियों की लागत और मुनाफे पर पड़ सकता है। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को शेयर बाजार के लिए अहम संकेत माना जाता है। पश्चिम एशिया में तनाव से बढ़ी अनिश्चितता पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ाई है। अगर इस क्षेत्र में हालात बिगड़ते हैं, तो तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव आने की आशंका रहती है। ऐसे समय में निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं। इसका असर शेयरों की खरीद-बिक्री और बाजार की चाल पर दिखाई दे सकता है। Foreign Investors की बिकवाली विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की गतिविधियां भी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं। जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं, तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। हालांकि, बाजार की चाल केवल विदेशी निवेशकों पर निर्भर नहीं करती। घरेलू निवेश, कंपनियों के नतीजे और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी अहम भूमिका निभाती हैं। Midcap और Smallcap शेयरों में ज्यादा दबाव गिरावट के दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। इन शेयरों में उतार-चढ़ाव अक्सर अधिक हो सकता है, इसलिए बाजार में घबराहट बढ़ने पर इनमें बिकवाली तेज हो जाती है। ऐसे में जिन निवेशकों के पोर्टफोलियो में छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयर ज्यादा हैं, उन्हें अपने निवेश के जोखिम को समझना जरूरी है। आगे कैसा रहेगा शेयर बाजार? अब निवेशकों की नजर अगले कारोबारी सप्ताह पर रहेगी। बाजार की दिशा तय करने में कई कारक अहम होंगे, जिनमें कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया के हालात, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिकी बाजारों के संकेत और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर होने वाले फैसले भी भारतीय शेयर बाजार को प्रभावित कर सकते हैं। अगर वैश्विक हालात में सुधार होता है और निवेशकों का भरोसा लौटता है, तो बाजार को सहारा मिल सकता है। दूसरी ओर, तनाव बढ़ने और बिकवाली जारी रहने पर उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। फिलहाल किसी निश्चित दिशा का दावा करना जल्दबाजी होगी। Investors के लिए क्या है जरूरी? शेयर बाजार में गिरावट देखकर घबराना स्वाभाविक है, खासकर तब जब पोर्टफोलियो की वैल्यू लगातार कम हो रही हो। लेकिन ऐसे समय में जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय निवेश से जुड़े बुनियादी पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। निवेशकों को अपनी वित्तीय जरूरतों, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। केवल बाजार की मौजूदा गिरावट देखकर किसी शेयर को खरीदने या बेचने का फैसला करना उचित नहीं है। निष्कर्ष: भारतीय शेयर बाजार में चार कारोबारी दिनों के दौरान करीब ₹20.79 लाख करोड़ के बाजार मूल्य में आई कमी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां फिलहाल बाजार के लिए अहम संकेत हैं। आने वाले दिनों में बाजार किस दिशा में जाएगा, यह इन परिस्थितियों और कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
IND vs NZ

IND vs NZ 2nd T20: आज भारत-न्यूजीलैंड की भिड़ंत, ईशान किशन बाहर; वैभव सूर्यवंशी को मौका?

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच आज, 24 अक्टूबर को दूसरा T20 मुकाबला खेला जाएगा। पहले मैच में शानदार जीत दर्ज करने के बाद टीम इंडिया की नजरें सीरीज में अपनी बढ़त 2-0 करने पर होंगी। लेकिन मुकाबले से पहले भारतीय टीम को झटका लगा है। विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन चोट के कारण दूसरे मैच से बाहर हो गए हैं। ऐसे में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग XI में मौका मिलने की चर्चा तेज हो गई है। यह मुकाबला न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च स्थित हेगले ओवल मैदान पर खेला जाना है। भारतीय समय के अनुसार टॉस दोपहर 12 बजे और मैच दोपहर 12:30 बजे शुरू होने का कार्यक्रम है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि कप्तान सूर्यकुमार यादव किस टीम कॉम्बिनेशन के साथ मैदान पर उतरते हैं। Ishan Kishan Injury: चोट के कारण दूसरे T20 से बाहर ईशान किशन को पहले मुकाबले के दौरान दाईं जांघ के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों में चोट लगी थी। इसके बाद मेडिकल टीम ने उनकी स्थिति का आकलन किया और उन्हें दूसरे मैच से बाहर रखने का फैसला लिया गया। ईशान की गैरमौजूदगी में विकेटकीपर-बल्लेबाज कुमार कुशाग्र को कवर के तौर पर टीम में शामिल किया गया है। ईशान की चोट भारतीय टीम के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि वह बल्लेबाजी के साथ विकेटकीपिंग का भी विकल्प देते हैं। फिलहाल उनकी वापसी को लेकर निश्चित जानकारी सामने नहीं आई है। उनकी फिटनेस पर मेडिकल टीम की नजर बनी हुई है। Vaibhav Sooryavanshi: क्या आज मिलेगा डेब्यू का मौका? दूसरे T20 से पहले वैभव सूर्यवंशी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। कम उम्र में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले वैभव को मौका मिलता है, तो यह उनके करियर के लिए बड़ा पल हो सकता है। हालांकि, उनके खेलने को लेकर आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। टीम मैनेजमेंट को यह तय करना होगा कि ईशान की जगह किस खिलाड़ी को उतारा जाए और बल्लेबाजी क्रम में क्या बदलाव किए जाएं। वैभव को मौका मिलने पर भारतीय टीम की शुरुआत और भी आक्रामक हो सकती है। लेकिन अंतिम फैसला टॉस के समय घोषित होने वाली प्लेइंग XI से ही साफ होगा। IND vs NZ 1st T20: पहले मैच में भारत ने कैसे मारी बाजी? सीरीज के पहले मुकाबले में भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड को चार विकेट से हराकर 1-0 की बढ़त बनाई थी। न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 225 रन बनाए थे। ग्लेन फिलिप्स ने 40 गेंदों पर नाबाद 82 रन की पारी खेली, जबकि फिन एलन ने भी तेजी से रन जोड़े। 226 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने 19.4 ओवर में छह विकेट खोकर 230 रन बना दिए। इस जीत के साथ भारत ने पुरुष T20 इंटरनेशनल में अपना सबसे बड़ा सफल रन चेज दर्ज किया। Sanju Samson और Naman Dhir ने दिलाई यादगार जीत भारत की जीत में संजू सैमसन का योगदान अहम रहा। उन्होंने 33 गेंदों पर 67 रन बनाकर टीम को मजबूत शुरुआत दी। अभिषेक शर्मा के साथ उनकी साझेदारी ने रन चेज को आसान बनाने में मदद की। इसके बाद श्रेयस अय्यर ने 42 रन बनाकर पारी को आगे बढ़ाया। आखिरी ओवरों में नमन धीर ने नाबाद 42 रन की पारी खेली और भारत को लक्ष्य तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इस जीत ने दिखाया कि भारतीय टीम बड़े लक्ष्य का पीछा करते समय भी दबाव में अपना संयम बनाए रख सकती है। दूसरे T20 में टीम इंडिया के सामने क्या होंगी चुनौतियां? पहले मैच में भारतीय बल्लेबाजों ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन गेंदबाजी में सुधार की गुंजाइश रही। न्यूजीलैंड ने 225 रन बनाकर भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाया था। दूसरे मुकाबले में टीम इंडिया को शुरुआती ओवरों में विकेट लेने और डेथ ओवरों में रन रोकने पर ध्यान देना होगा। दूसरी तरफ न्यूजीलैंड की टीम घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाकर सीरीज में वापसी करना चाहेगी। अगर भारतीय गेंदबाज बेहतर प्रदर्शन करते हैं, तो बल्लेबाजों के लिए मैच जीतना आसान हो सकता है। वहीं, न्यूजीलैंड की कोशिश भारत के मजबूत बल्लेबाजी क्रम को रोकने की होगी। India vs New Zealand 2nd T20: मैच की जरूरी जानकारी आज के मैच में किस पर रहेंगी सबकी नजरें? दूसरे T20 में भारत के सामने सीरीज में बढ़त मजबूत करने का मौका है। ईशान किशन की चोट से टीम का संतुलन प्रभावित हो सकता है, जबकि वैभव सूर्यवंशी को मौका मिलने की संभावना ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। अब देखना होगा कि भारतीय टीम किस प्लेइंग XI के साथ उतरती है और क्या पहले मैच की तरह बल्लेबाज एक बार फिर बड़ा लक्ष्य हासिल करने में सफल रहते हैं। क्रिकेट प्रशंसकों को एक और रोमांचक मुकाबले की उम्मीद होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gangster Himanshu Bhau

Gangster Himanshu Bhau: 30 से ज्यादा केस, Interpol Notice के बाद US में गिरफ्तारी

भारत में कई गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित गैंगस्टर हिमांशु भाऊ (Gangster Himanshu Bhau) को अमेरिका में गिरफ्तार किए जाने की खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसे लास वेगास में पकड़ा गया। उसके साथ गैंगस्टर नीरज फरीदपुरिया को भी हिरासत में लिया गया है। दोनों की गिरफ्तारी के बाद अब भारतीय एजेंसियों की नजर उन्हें वापस भारत लाने की प्रक्रिया पर है। हिमांशु भाऊ लंबे समय से पुलिस की तलाश में था। हरियाणा और दिल्ली समेत कई जगहों पर दर्ज आपराधिक मामलों के चलते वह जांच एजेंसियों के रडार पर रहा है। अगस्त 2023 में इंटरपोल ने उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। अमेरिका में गिरफ्तारी की खबर ऐसे समय आई है, जब भारतीय एजेंसियां विदेश में मौजूद वांछित अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने की कोशिश कर रही हैं। अमेरिका में कैसे पकड़ा गया Himanshu Bhau? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया को अमेरिका के लास वेगास क्षेत्र में हिरासत में लिया गया। इस कार्रवाई में हरियाणा स्पेशल टास्क फोर्स (STF) से मिले इनपुट और अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी ICE की भूमिका बताई गई है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि दोनों को अमेरिकी हिरासत केंद्र में रखा गया है। हालांकि, उनकी गिरफ्तारी से जुड़ी सभी परिस्थितियों और आगे की कानूनी कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। हरियाणा STF और भारतीय एजेंसियां दोनों को भारत वापस लाने के लिए अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि प्रत्यर्पण या इमिग्रेशन प्रक्रिया के जरिए उनकी वापसी कब तक संभव होगी। हिमांशु भाऊ पर 30 से ज्यादा आपराधिक मामले हिमांशु भाऊ का नाम हरियाणा के कुख्यात गैंगस्टरों में गिना जाता है। वह रोहतक जिले के रिटोली गांव का रहने वाला बताया जाता है। पुलिस रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्ट्स में उसके खिलाफ हत्या, हत्या की कोशिश, रंगदारी, धमकी और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों का जिक्र मिलता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसके खिलाफ 30 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्ट्स में मामलों की संख्या अलग बताई गई है। अगस्त 2023 में इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के समय उसे 18 मामलों में वांछित बताया गया था। जांच एजेंसियों का आरोप रहा है कि विदेश में रहने के बावजूद हिमांशु भाऊ का कथित नेटवर्क भारत में सक्रिय था। उसके गिरोह से जुड़े लोगों की भूमिका कई आपराधिक घटनाओं में जांच के दायरे में रही है। 2023 में Interpol ने क्यों जारी किया था Red Corner Notice? हिमांशु भाऊ के खिलाफ अगस्त 2023 में इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। इसका उद्देश्य सदस्य देशों की मदद से किसी वांछित व्यक्ति का पता लगाना और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत उसकी गिरफ्तारी में सहयोग करना होता है। रेड कॉर्नर नोटिस को अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट समझना सही नहीं है। किसी आरोपी को दूसरे देश से भारत लाने के लिए संबंधित देश के कानून और प्रत्यर्पण या अन्य लागू कानूनी प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है। अमेरिका में गिरफ्तारी के बाद अब भारतीय एजेंसियों के सामने अगला बड़ा कदम उसे भारत वापस लाने और यहां दर्ज मामलों में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने का है। Neeraj Faridpuria भी पुलिस की रडार पर हिमांशु भाऊ के साथ नीरज फरीदपुरिया को भी हिरासत में लिए जाने की खबर है। नीरज का नाम हरियाणा और दिल्ली-NCR से जुड़े कई आपराधिक मामलों में सामने आ चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसके खिलाफ भी कई गंभीर मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या और अन्य आपराधिक गतिविधियों से जुड़े आरोप शामिल हैं। रिपोर्ट्स में उसे हिमांशु भाऊ के कथित नेटवर्क और अन्य गैंग से जुड़ी गतिविधियों के संदर्भ में भी बताया गया है। दोनों की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां उनके कथित नेटवर्क, संपर्कों और भारत में दर्ज मामलों से संबंधित जानकारी जुटा सकती हैं। हालांकि, इस संबंध में आगे की कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। Elvish Yadav के घर पर Firing Case में भी आया था नाम हिमांशु भाऊ के कथित गैंग का नाम यूट्यूबर एल्विश यादव के गुरुग्राम स्थित घर के बाहर हुई फायरिंग की घटना की जांच में भी सामने आया था। अगस्त 2025 में हुई इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर गैंग के नाम से एक कथित पोस्ट सामने आने की खबरें आई थीं। पुलिस ने इस मामले में आरोपियों की भूमिका और संभावित गैंग कनेक्शन की जांच की थी। हिमांशु भाऊ के कथित नेटवर्क का नाम सामने आने के बाद यह मामला भी चर्चा में रहा। हालांकि, किसी घटना में गैंग का नाम सामने आना और किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी अदालत में साबित होना अलग-अलग बातें हैं। संबंधित मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा। Lawrence Bishnoi Gang से दुश्मनी की भी चर्चा हिमांशु भाऊ को लॉरेंस बिश्नोई गैंग का विरोधी बताया जाता रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स में उसके कथित संबंध नीरज बवाना और अन्य गैंग से जुड़े लोगों के साथ भी बताए गए हैं। पुलिस की जांच में उसके कथित नेटवर्क पर कारोबारियों को धमकाने, रंगदारी मांगने और हिंसक घटनाओं में शामिल होने के आरोप लगे हैं। हालांकि, अलग-अलग मामलों में आरोपियों की भूमिका और गैंग के बीच संबंधों की पुष्टि संबंधित जांच के आधार पर ही की जा सकती है। Himanshu Bhau को भारत कब लाया जाएगा? अमेरिका में गिरफ्तारी के बाद अब सबसे अहम सवाल दोनों आरोपियों की भारत वापसी का है। भारतीय एजेंसियां अमेरिकी अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं, लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी होने में समय लग सकता है। भारत वापसी के लिए प्रत्यर्पण या इमिग्रेशन से जुड़ी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इसका फैसला संबंधित कानूनी प्रावधानों और अमेरिकी अधिकारियों की कार्रवाई के आधार पर होगा। फिलहाल, हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया को भारत लाने की निश्चित तारीख की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आने वाले दिनों में इस मामले में होने वाली कार्रवाई पर जांच एजेंसियों और दोनों देशों के अधिकारियों की नजर रहेगी। क्यों अहम है यह गिरफ्तारी? अगर दोनों को भारत लाकर संबंधित मामलों में पूछताछ और कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ती है, तो जांच एजेंसियों को उनके कथित नेटवर्क, संपर्कों और आपराधिक मामलों से जुड़ी अहम जानकारियां मिल सकती हैं। फिलहाल, आगे की तस्वीर उनकी कानूनी स्थिति...
Trump-Iran

Trump-Iran Tension: ट्रम्प की हमले की धमकी पर ईरान का पलटवार, Internet Cable काटने की चेतावनी

अमेरिका और ईरान (Trump-Iran) के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं। वहीं, ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजरायल ने उस पर फिर हमला किया, तो खाड़ी क्षेत्र में समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों को निशाना बनाया जा सकता है। इस चेतावनी ने क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ इंटरनेट और वैश्विक कारोबार को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। मामला सिर्फ दो देशों के बीच सैन्य टकराव का नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री रास्ते में तनाव बढ़ने का असर तेल की सप्लाई, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और डिजिटल कनेक्टिविटी पर भी पड़ सकता है। Trump ने फिर दी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फ्लोरिडा में एक कार्यक्रम के दौरान ईरान के खिलाफ नए सैन्य अभियान की संभावना जताई। उन्होंने पहले चलाए गए ‘एपिक फ्यूरी’ ऑपरेशन का जिक्र करते हुए दोबारा ऐसी कार्रवाई किए जाने के संकेत दिए। ट्रम्प के बयान से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। हालांकि, सैन्य अभियान की संभावना जताने और वास्तव में हमला शुरू होने के बीच अंतर है। फिलहाल इस बयान को नए हमले की आधिकारिक शुरुआत नहीं माना जा सकता। अमेरिका और ईरान के बीच पहले भी सैन्य कार्रवाई और बातचीत को लेकर टकराव देखने को मिला है। अब ताजा बयान के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या दोनों देश एक बार फिर सीधे संघर्ष की ओर बढ़ रहे हैं। Iran की चेतावनी- समुद्र के नीचे बिछी Internet Cable पर खतरा अमेरिका की संभावित सैन्य कार्रवाई के बीच ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। समाचार एजेंसी Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के दो वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका और इजरायल की ओर से दोबारा हमला किए जाने की स्थिति में खाड़ी क्षेत्र की समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को निशाना बनाने की योजनाओं पर विचार किया गया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के राजनीतिक मामलों के उप प्रमुख यदोल्लाह जवानी ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे मौजूद इंटरनेट केबलों को संभावित निशाने के रूप में बताया। इन केबलों के जरिए अलग-अलग देशों के बीच इंटरनेट डेटा पहुंचता है। ऐसे में इन्हें नुकसान पहुंचने से डिजिटल सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय कारोबार में परेशानी हो सकती है। हालांकि, अभी तक इन केबलों पर किसी नए हमले की पुष्टि नहीं हुई है। ईरान की चेतावनी को संभावित जवाबी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। Internet Cable कटने से Gulf देशों पर क्या असर होगा? समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबलें दुनिया के इंटरनेट नेटवर्क का अहम हिस्सा हैं। इनके जरिए वीडियो कॉल, ऑनलाइन बैंकिंग, ई-कॉमर्स और कंपनियों के बीच डेटा का आदान-प्रदान होता है। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास इन केबलों को नुकसान पहुंचता है, तो संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, बहरीन और कुवैत जैसे देशों की इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है। इसका असर कई तरह से देखने को मिल सकता है: हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद हो जाएगा। इंटरनेट डेटा के लिए दूसरे समुद्री केबल नेटवर्क और वैकल्पिक रास्ते भी मौजूद हैं। वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी केबलें प्रभावित होती हैं और वैकल्पिक नेटवर्क कितना ट्रैफिक संभाल पाते हैं। Hormuz Strait क्यों है इतना अहम? होर्मुज जलडमरूमध्य पश्चिम एशिया का एक महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचते हैं। इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर तेल के टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका रहती है। यही वजह है कि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की खबरों पर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की नजर बनी रहती है। अगर इस रास्ते पर समुद्री परिवहन लंबे समय तक प्रभावित होता है, तो कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर उन देशों पर ज्यादा पड़ सकता है जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करते हैं। अमेरिका-ईरान तनाव से Crude Oil Price में तेजी मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दिया। उपलब्ध बाजार रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 116.72 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुई। तेल बाजार में तेजी की एक प्रमुख वजह क्षेत्र में संभावित सैन्य टकराव और सप्लाई बाधित होने की आशंका है। अगर संघर्ष बढ़ता है, तो कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, तेल की कीमतें वैश्विक मांग, उत्पादन और दूसरे आर्थिक कारणों से भी प्रभावित होती हैं। भारत के लिए यह स्थिति खास मायने रखती है। कच्चा तेल महंगा होने पर देश का आयात खर्च बढ़ सकता है। लंबे समय तक कीमतें ऊंची रहने से परिवहन लागत और महंगाई पर भी दबाव पड़ने की आशंका रहती है। क्या भारत में भी बढ़ सकती है परेशानी? अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर भारत पर सीधे सैन्य टकराव के रूप में नहीं, बल्कि आर्थिक और कारोबारी गतिविधियों के जरिए पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का काफी कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ सकता है। इसके अलावा, खाड़ी देशों में काम करने वाली भारतीय कंपनियों और वहां रहने वाले भारतीयों के लिए भी क्षेत्रीय सुरक्षा महत्वपूर्ण है। इंटरनेट केबलों को नुकसान पहुंचने की स्थिति में खाड़ी क्षेत्र से जुड़ी कुछ डिजिटल सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। लेकिन भारत में इंटरनेट बंद होने या सभी ऑनलाइन सेवाओं के ठप होने की फिलहाल कोई पुष्टि नहीं है। क्या दुनिया का Internet बंद हो सकता है? ईरान की चेतावनी के बाद इंटरनेट बंद होने की आशंका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लेकिन समुद्र के नीचे बिछी कुछ केबलों को नुकसान पहुंचने का मतलब पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद होना नहीं है। वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क कई केबलों और दूसरे संचार मार्गों से जुड़ा हुआ है। अगर किसी एक मार्ग में रुकावट आती है, तो डेटा को दूसरे रास्तों से भेजने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, एक साथ कई महत्वपूर्ण केबल प्रभावित होने पर कुछ क्षेत्रों में...
Tiger Shroff

Tiger Shroff Firing Case: टीवी पर चेहरे दिखते ही Shooters को मिला मैसेज, जांच में नया खुलासा

बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ (Tiger Shroff ) की कार पर हुई फायरिंग के मामले में हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अब जांच में एक ऐसा पहलू सामने आया है, जिसने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि टीवी चैनलों पर संदिग्धों के चेहरे दिखने के बाद उन्हें मैसेज भेजकर अलर्ट किया गया था। कथित तौर पर मैसेज में कहा गया कि चेहरे सामने आ गए हैं, वहां से निकल जाओ। मुंबई पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों तक जांच की जानकारी कौन पहुंचा रहा था। इसी बीच, एक आरोपी से पूछताछ में सलमान खान की तारीफ से जुड़ी पुरानी बात को भी हमले की संभावित वजह बताया गया है। पुलिस लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कथित कनेक्शन और पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच कर रही है। TV पर चेहरे दिखे तो Shooters को किया गया Alert इंडियन एक्सप्रेस की 24 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस सूत्रों का दावा है कि फायरिंग के बाद आरोपी अपने कथित हैंडलर के संपर्क में थे। टीवी पर घटना से जुड़े वीडियो और संदिग्धों के चेहरे दिखाए जाने के बाद एक आरोपी, रेहान अंसारी, को कथित तौर पर मैसेज भेजा गया। मैसेज में कहा गया, “तुम्हारे चेहरे आ गए हैं, निकल जाओ वहां से।” जांचकर्ताओं को संदेह है कि कोई व्यक्ति न्यूज चैनलों पर चल रही खबरों पर नजर रख रहा था और आरोपियों को बता रहा था कि पुलिस जांच कहां तक पहुंची है। इस जानकारी के आधार पर आरोपी अपनी गतिविधियां बदल रहे थे या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस अभी यह पता लगाने में जुटी है कि मैसेज भेजने वाला व्यक्ति कौन था और उसे आरोपियों की मदद करने के निर्देश कहां से मिल रहे थे। Salman Khan की तारीफ से क्यों जुड़ रहा है मामला? इस केस में सलमान खान का नाम सामने आने की वजह टाइगर श्रॉफ का साल 2022 का एक बयान बताया जा रहा है। फिल्म ‘हीरोपंती 2’ के प्रमोशन के दौरान टाइगर से फिल्म की रिलीज डेट को लेकर सवाल पूछा गया था। उस समय उन्होंने सलमान खान की तारीफ करते हुए उन्हें इंडस्ट्री का असली टाइगर बताया था। अब टाइम्स ऑफ इंडिया की 23 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस पूछताछ में आरोपी फूल सिंह ने दावा किया कि उसे कथित साजिशकर्ता अनिल पंडित ने बताया था कि सलमान खान की तारीफ करने के कारण टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाया गया। हालांकि, यह आरोपी की ओर से बताई गई वजह है। पुलिस इसकी पुष्टि करने के लिए दूसरे सबूतों और आरोपियों के बयानों की जांच कर रही है। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि हमला सिर्फ इसी टिप्पणी की वजह से हुआ था। 18 अक्टूबर को Juhu में हुई थी Firing 18 अक्टूबर 2026 की शाम मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग की घटना हुई थी। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। टाइगर सुरक्षित बच गए, जबकि उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की खबर सामने आई थी। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के CCTV फुटेज खंगालने शुरू किए। जांच में उस बाइक की भी तलाश की गई, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर हमले के बाद भागने के लिए किया गया था। बाद में यह बाइक अंधेरी इलाके में मिली। जांचकर्ताओं ने आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाने के लिए CCTV फुटेज, डिजिटल सबूत और यात्रा से जुड़ी जानकारियों को आपस में जोड़ा। Kota की ट्रेन से पकड़े गए तीन कथित Shooters फायरिंग के बाद तीन कथित हमलावर मुंबई से फरार हो गए थे। पुलिस की सूचना पर राजस्थान के कोटा में ट्रेन से तीनों को गिरफ्तार किया गया। उनकी पहचान फूल सिंह, रेहान उर्फ सुक्का और ऋतिक उर्फ रोशन के रूप में रिपोर्ट की गई है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने भागने के दौरान बाइक, कैब और ट्रेन का इस्तेमाल किया था। जांचकर्ताओं को एक कैब ड्राइवर को किए गए सामान्य फोन कॉल से भी अहम सुराग मिला। पुलिस का कहना है कि आरोपी कथित तौर पर इंटरनेट आधारित कॉल और मैसेजिंग के जरिए संपर्क में थे। अब हिरासत में पूछताछ और डिजिटल सबूतों के विश्लेषण से यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि उनके बीच किस तरह बातचीत होती थी और उन्हें निर्देश कौन देता था। मामले में अब तक 10 गिरफ्तारियां मुंबई पुलिस की जांच अब केवल कथित हमलावरों तक सीमित नहीं है। 24 अक्टूबर को आई रिपोर्टों के मुताबिक, मामले में कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका था। पुलिस ने हरियाणा के सोनीपत से भी कुछ आरोपियों को पकड़ा है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इनमें से कुछ लोगों ने कथित तौर पर हमले से पहले या बाद में मदद पहुंचाई थी। पुलिस उनकी भूमिका, आपसी संपर्क और कथित साजिश में शामिल होने के आरोपों की जांच कर रही है। तीन प्रमुख आरोपियों को 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजे जाने की रिपोर्ट भी सामने आई है। जांच के दौरान हथियारों की बरामदगी, डिजिटल बातचीत और कथित साजिश के पीछे के लोगों की पहचान अहम मुद्दे बने हुए हैं। Lawrence Bishnoi Gang का नाम कैसे आया? फायरिंग के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट और ऑडियो संदेश सामने आया था, जिसमें अनिल पंडित नाम से एक व्यक्ति ने हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था। संदेश में सलमान खान का भी जिक्र किया गया था। पुलिस इस कथित दावे की प्रामाणिकता और लॉरेंस बिश्नोई गैंग से इसके संबंधों की जांच कर रही है। जांचकर्ताओं को यह भी पता लगाना है कि हमले की योजना किसने बनाई, आरोपियों को किसने मदद दी और घटना के पीछे वास्तविक मकसद क्या था। किसी सोशल मीडिया पोस्ट या ऑडियो में जिम्मेदारी लेने का दावा अपने आप में किसी व्यक्ति या संगठन की भूमिका का अंतिम प्रमाण नहीं होता। इसलिए पुलिस की जांच और सामने आने वाले ठोस सबूत इस मामले में अहम होंगे। अब पुलिस किन सवालों के जवाब तलाश रही है? टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में जांच के कई पहलू अभी बाकी हैं। पुलिस यह जानना चाहती है कि आरोपियों को टीवी पर चल रही खबरों की जानकारी कौन दे रहा...

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