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मार्को रुबियो के भारत दौरे में जामनगर रिफाइनरी पर फोकस, मुकेश अंबानी से करेंगे मुलाकात

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो 20 अक्टूबर को मुंबई पहुंचेंगे। अपने भारत दौरे के दौरान वे गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज के रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स का दौरा करेंगे और कंपनी के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी से मुलाकात करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जामनगर में उनका कार्यक्रम करीब 9 घंटे का हो सकता है। रुबियो का यह दौरा भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग, व्यापार और निवेश के लिहाज से अहम माना जा रहा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज अमेरिका के टेक्सास में प्रस्तावित नई ऑयल रिफाइनरी परियोजना से जुड़ी है। ऐसे में जामनगर रिफाइनरी का दौरा दोनों देशों के ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। 20 अक्टूबर को मुंबई पहुंचेंगे रुबियो तय कार्यक्रम के अनुसार, रुबियो 20 अक्टूबर को मुंबई पहुंचेंगे। इसी दिन उनकी भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक प्रस्तावित है। इसके बाद वे गुजरात के जामनगर जाएंगे, जहां रिलायंस के अधिकारियों और मुकेश अंबानी से मुलाकात करेंगे। जामनगर में वे रिलायंस के रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स का जायजा लेने के साथ वनतारा वन्यजीव एवं पशु पुनर्वास केंद्र भी देख सकते हैं। हालांकि, वनतारा के दौरे को लेकर अंतिम कार्यक्रम की पुष्टि जरूरी होगी। अडाणी और टाटा समूह के प्रमुखों से भी बातचीत की चर्चा मीडिया रिपोर्ट्स में रुबियो की भारत के प्रमुख उद्योगपतियों से मुलाकात की संभावना भी जताई गई है। इनमें उद्योगपति गौतम अडाणी और टाटा समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के नाम शामिल हैं। इन बैठकों का संभावित उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, ऊर्जा और निवेश संबंधों को आगे बढ़ाना है। हालांकि, इन मुलाकातों की आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत एजेंडे की जानकारी सामने आने पर ही स्थिति स्पष्ट होगी। रुबियो के जामनगर दौरे को 5 पॉइंट में समझें 1. अमेरिका में ईंधन की कीमतें और मिडटर्म चुनाव अमेरिका में नवंबर 2026 में मिडटर्म चुनाव होने हैं। ईंधन की कीमतें वहां राजनीतिक और आर्थिक चर्चा का अहम मुद्दा हैं। ऐसे में ट्रम्प प्रशासन ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने के विकल्पों पर ध्यान दे रहा है। 2. जामनगर रिफाइनरी से ईंधन आपूर्ति की संभावनाएं गुजरात के जामनगर में रिलायंस का रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का प्रसंस्करण करता है और पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी करता है। इसकी क्षमता भारत-अमेरिका के बीच ऊर्जा व्यापार बढ़ाने के अवसर उपलब्ध करा सकती है। 3. रिलायंस और अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र के बीच बढ़ता सहयोग मार्च 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने टेक्सास में प्रस्तावित नई रिफाइनरी परियोजना में रिलायंस के निवेश का उल्लेख किया था। इस परियोजना को अमेरिका में कई दशकों बाद नई ऑयल रिफाइनरी स्थापित करने की योजना के रूप में पेश किया गया है। ऐसे में रुबियो का जामनगर दौरा भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा क्षेत्र में संभावित साझेदारी को रेखांकित करता है। 4. टेक्सास रिफाइनरी परियोजना पर नजर टेक्सास के ब्राउन्सविल क्षेत्र में प्रस्तावित रिफाइनरी परियोजना अमेरिका की ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना का हिस्सा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज इस परियोजना से जुड़ी है। हालांकि, परियोजना की लागत, निवेश की वास्तविक संरचना और निर्माण की प्रगति को लेकर अलग-अलग दावों को आधिकारिक जानकारी के आधार पर समझना जरूरी है। 5. दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स रिलायंस के जामनगर परिसर को दुनिया का सबसे बड़ा एक ही स्थान पर स्थित रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स माना जाता है। इसकी कच्चे तेल के प्रसंस्करण की क्षमता करीब 14 लाख बैरल प्रतिदिन बताई जाती है। बड़े पैमाने पर उत्पादन और निर्यात क्षमता के कारण यह भारत के ऊर्जा क्षेत्र का प्रमुख केंद्र है। भारत-अमेरिका ऊर्जा संबंधों के लिहाज से अहम दौरा रुबियो का मुंबई और जामनगर दौरा दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों के साथ व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर भी केंद्रित रहेगा। रिलायंस की रिफाइनरी और टेक्सास की प्रस्तावित परियोजना इस दौरे को कारोबारी दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती हैं। Desh Har Pal वेबसाइट पर देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें।
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लोन चुकाने के बाद भी CIBIL में दिख रहा बकाया? ऐसे सुधारें क्रेडिट रिपोर्ट, जानें शिकायत का पूरा तरीका

अगर आपने अपने लोन की सभी किस्तें चुका दी हैं और बैंक से नो-ड्यूज सर्टिफिकेट (NOC) भी मिल गया है, लेकिन आपकी CIBIL रिपोर्ट में लोन अब भी ‘Active’ या बकाया दिख रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें। क्रेडिट रिपोर्ट में ऐसी गलती की वजह से नया लोन लेने में परेशानी हो सकती है। बैंक आपकी रिपोर्ट देखकर यह समझ सकता है कि आप पर अभी भी पुराने लोन की देनदारी है। हालांकि, ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है। सही दस्तावेजों के साथ बैंक और क्रेडिट ब्यूरो में शिकायत करके रिकॉर्ड दुरुस्त कराया जा सकता है। 1. सबसे पहले लोन बंद होने के दस्तावेज जांचें क्रेडिट रिपोर्ट में सुधार की प्रक्रिया शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि बैंक के रिकॉर्ड में आपका लोन पूरी तरह बंद हो चुका है। इसके लिए इन दस्तावेजों को संभालकर रखें: 2. बैंक से संपर्क करें और लिखित पुष्टि लें CIBIL और अन्य क्रेडिट ब्यूरो आम तौर पर लोन से जुड़ी जानकारी संबंधित बैंक या वित्तीय संस्थान से प्राप्त करते हैं। इसलिए गलत रिकॉर्ड सुधारने के लिए बैंक से संपर्क करना जरूरी है। आपको ये कदम उठाने चाहिए: केवल मौखिक आश्वासन पर निर्भर रहने के बजाय शिकायत का लिखित रिकॉर्ड रखना बेहतर है। 3. CIBIL की वेबसाइट पर दर्ज करें शिकायत अगर बैंक से संपर्क करने के बाद भी क्रेडिट रिपोर्ट में गलती बनी रहती है, तो आप TransUnion CIBIL की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर विवाद दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए: क्रेडिट ब्यूरो आम तौर पर संबंधित बैंक से जानकारी की पुष्टि कराता है। इसलिए रिपोर्ट में सुधार होने में समय लग सकता है। समय सीमा: क्रेडिट रिपोर्ट में सुधार के लिए बैंक और क्रेडिट ब्यूरो की प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई होती है। शिकायत के समाधान की समय सीमा और लागू नियमों की पुष्टि संबंधित संस्थान से करें। 4. बैंक के नोडल अधिकारी और RBI तक पहुंचाएं शिकायत अगर बैंक या क्रेडिट ब्यूरो के स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होता, तो आप शिकायत को आगे बढ़ा सकते हैं। RBI का आधिकारिक शिकायत पोर्टल: https://cms.rbi.org.in ध्यान रखें कि CIBIL की रिपोर्ट में सुधार से जुड़ी शिकायत और बैंक की सेवा से जुड़ी शिकायत की प्रक्रिया अलग हो सकती है। इसलिए सभी दस्तावेज और पहले की शिकायतों का रिकॉर्ड साथ रखें। क्रेडिट रिपोर्ट की गलती को नजरअंदाज न करें लोन चुकाने के बाद भी रिपोर्ट में बकाया दिखने पर जल्द कार्रवाई करना बेहतर है। NOC, भुगतान की रसीदें और बैंक के साथ पत्राचार आपके दावे को मजबूत कर सकते हैं। रिपोर्ट में सुधार होने के बाद नई क्रेडिट रिपोर्ट डाउनलोड करके यह भी जांच लें कि लोन का स्टेटस और बकाया रकम सही दर्ज हैं या नहीं।
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ऑस्ट्रेलिया

Gold Mining: ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज से बदलेगी तस्वीर, भारत को मिल सकता है नया सप्लायर

भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं, बल्कि लोगों की बचत और निवेश का भी अहम हिस्सा है। शादी का सीजन हो या दिवाली-धनतेरस, सोने की खरीदारी को लेकर बाजार में हमेशा हलचल रहती है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया से आई सोने की खोज और बढ़ते निवेश की खबर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज के लिए कंपनियां बड़े स्तर पर खर्च कर रही हैं। इससे आने वाले समय में सोने की वैश्विक सप्लाई बढ़ने की संभावना है। भारत जैसे देश के लिए यह एक अहम घटनाक्रम है, क्योंकि अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा करने के लिए भारत को दूसरे देशों से सोना आयात करना पड़ता है। Australia में Gold Exploration पर कितना खर्च हुआ? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज से जुड़ा निवेश जून 2026 की तिमाही में बढ़कर लगभग 565.6 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पहुंच गया। ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो (ABS) के आंकड़ों के अनुसार, पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 23.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह खर्च जमीन के नीचे मौजूद सोने के संभावित भंडार का पता लगाने, ड्रिलिंग और खनन की संभावनाओं का आकलन करने जैसे कामों पर किया जाता है। हालांकि, खोज पर खर्च बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर जगह सोने का नया भंडार मिल गया है। किसी जगह सोना मिलने के बाद भी यह देखना पड़ता है कि वहां से उसे निकालना आर्थिक रूप से कितना व्यावहारिक होगा। ऑस्ट्रेलिया में कितना Gold Reserve मौजूद है? ऑस्ट्रेलिया दुनिया के प्रमुख सोना उत्पादक देशों में शामिल है। सरकारी संस्था Geoscience Australia के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2024 तक देश के अनुमानित Ore Reserves करीब 4,785 टन थे। वहीं, पहचाने गए कुल Gold Resources का आंकड़ा इससे काफी ज्यादा था। यहां एक बात समझना जरूरी है। Gold Resources में सोने के संभावित और पहचाने गए संसाधन शामिल होते हैं, जबकि Ore Reserves उस सोने को दर्शाते हैं जिसे मौजूदा तकनीकी और आर्थिक परिस्थितियों में निकालना व्यावहारिक माना जाता है। इसीलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने के बड़े भंडार होने और किसी नई खोज को दुनिया का सबसे बड़ा भंडार बताने में अंतर है। किसी खास नई खोज के बारे में ऐसा दावा करने से पहले उसके आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि जरूरी है। भारत को कैसे मिल सकता है फायदा? भारत में सोने की मांग काफी बड़ी है और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर ऑस्ट्रेलिया में आने वाले वर्षों में सोने का उत्पादन बढ़ता है, तो भारतीय आयातकों के लिए सप्लाई का एक अतिरिक्त विकल्प तैयार हो सकता है। इसके तीन संभावित फायदे हो सकते हैं: हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में निकाला गया सोना अपने आप भारत नहीं पहुंचेगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उत्पादन कितना बढ़ता है, कंपनियां किस देश को निर्यात करती हैं और भारतीय आयातकों के साथ किस तरह के व्यापारिक समझौते होते हैं। क्या भारत में सस्ता हो जाएगा सोना? सोने की नई खोज की खबर सुनकर खरीदारों के मन में सबसे पहले यही सवाल आता है कि क्या अब Gold Price कम होगा? फिलहाल ऐसा कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत केवल उत्पादन पर निर्भर नहीं करती। निवेशकों की मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीद, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी भाव को प्रभावित करती हैं। भारत में इसके अलावा रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क, टैक्स और घरेलू मांग का भी असर पड़ता है। इसलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज बढ़ने के बावजूद भारतीय बाजार में कीमतें तुरंत कम होंगी, इसकी गारंटी नहीं है। ₹13,000 करोड़ के निवेश की खबर कितनी सही है? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर खर्च बढ़ने के आंकड़े सामने आए हैं। लेकिन ₹13,000 करोड़ के निवेश को किसी खास नई खोज या दुनिया के सबसे बड़े सोना भंडार से जोड़ने के लिए संबंधित कंपनी और परियोजना के आधिकारिक दस्तावेजों की जरूरत है। इसलिए इस रकम को किसी एक नए गोल्ड रिजर्व की खोज पर खर्च हुई राशि बताने से पहले इसकी पुष्टि करना जरूरी है। खोज पर किया गया खर्च, जमीन में मौजूद कुल सोने का मूल्य और खनन परियोजना में कुल निवेश तीन अलग-अलग बातें हैं। आगे क्या होगा? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर बढ़ता खर्च वैश्विक गोल्ड इंडस्ट्री के लिए अहम है। अगर आने वाले वर्षों में नए भंडार की पहचान होती है और उनसे व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो पाता है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई के विकल्प बढ़ सकते हैं। भारत के लिए भी यह एक संभावित अवसर है। लेकिन नए सप्लायर की भूमिका, आयात पर असर और सोने की कीमतों में बदलाव का पता तभी चलेगा, जब वास्तविक उत्पादन और निर्यात के आंकड़े सामने आएंगे। फिलहाल, ऑस्ट्रेलिया की गोल्ड इंडस्ट्री पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन नई खोज के नाम पर सोना सस्ता होने की उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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पेट्रोल एक्सपोर्ट पर 5 गुना बढ़ा टैक्स, डीजल पर विंडफॉल टैक्स घटाया; घरेलू कीमतों पर असर नहीं

कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला टैक्स पांच गुना बढ़ा दिया है। वहीं, डीजल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स को करीब आधा कर दिया गया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, नई दरें 16 अक्टूबर से लागू हो गई हैं और अगले दो सप्ताह तक प्रभावी रहेंगी। सरकार के इस फैसले का असर विदेशों में बेचे जाने वाले पेट्रोल-डीजल पर पड़ेगा। देश के पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में इस बदलाव से सीधे किसी परिवर्तन की घोषणा नहीं की गई है। हर 15 दिन में तय होती हैं टैक्स की दरें सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इन टैक्स दरों की समीक्षा करती है। आमतौर पर हर 15 दिन में दरों में बदलाव किया जाता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने पर तेल कंपनियों को निर्यात से ज्यादा मुनाफा मिल सकता है। ऐसे में सरकार टैक्स के जरिए निर्यात और घरेलू आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करती है। मिडिल ईस्ट तनाव से तेल बाजार में उतार-चढ़ाव मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और समुद्री मार्गों पर जहाजों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। इस स्थिति का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ रहा है। तेल बाजार से जुड़ी कुछ अन्य गतिविधियां भी कीमतों को प्रभावित कर रही हैं। इन घटनाक्रमों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। विंडफॉल टैक्स क्या होता है? विंडफॉल टैक्स वह विशेष कर है, जो सरकार कंपनियों के असाधारण मुनाफे पर लगाती है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो तेल कंपनियों को कुछ परिस्थितियों में सामान्य से ज्यादा मुनाफा मिल सकता है। ऐसे अतिरिक्त मुनाफे के एक हिस्से को सरकारी राजस्व के रूप में हासिल करने के लिए विंडफॉल टैक्स लगाया जाता है। पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाला यह टैक्स सरकार को घरेलू जरूरतों और निर्यात से होने वाले मुनाफे के बीच संतुलन बनाने में भी मदद करता है। फिलहाल नई दरें दो सप्ताह के लिए लागू की गई हैं। आगे अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और घरेलू ईंधन आपूर्ति को ध्यान में रखकर इनमें फिर बदलाव किया जा सकता है।
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शेयर बाजार में हेरफेर: ED की 6 शहरों में 29 ठिकानों पर छापेमारी, 1 लाख से ज्यादा निवेशकों को नुकसान

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दो लिस्टेड कंपनियों RM ड्रिप एंड स्प्रिंकलर्स सिस्टम्स लिमिटेड और R&B डेनिम्स लिमिटेड के शेयरों में कथित हेरफेर के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने शुक्रवार को मुंबई, नासिक और अहमदाबाद समेत छह शहरों में 29 ठिकानों पर छापेमारी की। जांच में सामने आया है कि फर्जी वॉट्सऐप ग्रुप्स के जरिए शेयर खरीदने की टिप्स देकर एक लाख से ज्यादा खुदरा निवेशकों को कथित तौर पर नुकसान पहुंचाया गया। छापेमारी के दौरान एजेंसी ने कई संदिग्ध दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, शेयर लेनदेन के रिकॉर्ड और संपत्तियों से जुड़े कागजात जब्त किए हैं। कंपनियों के दफ्तरों और प्रमोटरों के ठिकानों पर छापे ED की कार्रवाई के दायरे में दोनों कंपनियों के कॉर्पोरेट कार्यालय, प्रमोटरों के आवास और कम कीमत पर शेयर हासिल करने वाले कुछ लोगों के ठिकाने शामिल रहे। इसके अलावा स्टॉक-ब्रोकिंग और फाइनेंस कंपनियों के कार्यालयों की भी तलाशी ली गई। एजेंसी ने उन लोगों के ठिकानों पर भी जांच की, जिन पर प्रमोटरों से जुड़े वॉट्सऐप ग्रुप चलाने का संदेह है। जांच का उद्देश्य शेयरों के आवंटन, लेनदेन और निवेशकों को दिए गए कथित भ्रामक सुझावों के बीच संबंधों का पता लगाना है। 3.5 करोड़ से ज्यादा शेयर और कन्वर्टिबल वारंट जारी किए गए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की जा रही जांच में पता चला कि अप्रैल 2023 से मार्च 2024 के बीच दोनों कंपनियों ने चुनिंदा व्यक्तियों और संस्थाओं को 3.5 करोड़ से ज्यादा शेयर और कन्वर्टिबल वारंट जारी किए थे। जांच के मुताबिक, इन शेयरों के भुगतान का बड़ा हिस्सा कथित तौर पर आपस में जुड़े व्यक्तियों, फर्मों और कुछ लेंडर्स के सीमित समूह से आया था। इसके बाद के महीनों में दोनों कंपनियों के शेयरों के भाव लगातार बढ़े, जबकि शेयरों का बड़ा हिस्सा उन्हीं लोगों के पास बना रहा। भावनगर से चलाए जा रहे थे फर्जी वॉट्सऐप ग्रुप ED की जांच के अनुसार, दिसंबर 2025 के अंतिम दिनों से फरवरी 2026 के बीच ‘मल्टीबैगर स्टॉक्स’ जैसे नामों से कई वॉट्सऐप कम्युनिटी बनाई गई थीं। इन ग्रुप्स के जरिए खुदरा निवेशकों को रोजाना दोनों कंपनियों के शेयर खरीदने की सलाह दी जाती थी। जांच में यह भी सामने आया कि इन ग्रुप्स को चलाने के लिए हरियाणा और मुंबई के अन्य लोगों के नाम पर जारी सिम कार्ड इस्तेमाल किए जा रहे थे। हालांकि, इनका संचालन गुजरात के भावनगर से किए जाने का संदेह है। खरीदारों की संख्या 3,400 से बढ़कर एक लाख के पार जांच के मुताबिक, वॉट्सऐप ग्रुप्स पर लगातार शेयर खरीदने की टिप्स मिलने के बाद दोनों कंपनियों के शेयरों में निवेश करने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी। शुरुआत में खरीदारों की संख्या करीब 3,400 थी, जो बाद में बढ़कर एक लाख से ज्यादा हो गई। एजेंसी को संदेह है कि निवेशकों को आकर्षित करने के लिए शेयरों को लेकर भ्रामक संदेश और खरीदारी के सुझाव प्रसारित किए गए। वॉट्सऐप ग्रुप डिलीट होने के बाद शेयरों में 70% तक गिरावट ED सूत्रों के मुताबिक, 25 फरवरी 2026 को सभी संबंधित वॉट्सऐप ग्रुप अचानक डिलीट कर दिए गए। इसके तुरंत बाद दोनों कंपनियों के शेयर लोअर सर्किट में पहुंच गए और कुछ ही दिनों में उनकी कीमतों में करीब 70% तक गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट से एक लाख से ज्यादा छोटे निवेशकों को नुकसान होने की बात सामने आई है। आरोप है कि कई निवेशक ऐसे शेयरों में फंस गए, जिन्हें बाजार में बेचना भी मुश्किल हो गया था। फिलहाल ED मामले में शेयरों के आवंटन, कथित हेरफेर, वॉट्सऐप ग्रुप्स के संचालन और निवेशकों को हुए नुकसान से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।
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Starlink

Reliance-Starlink Controversy: मस्क के आरोपों पर अंबानी की कंपनी का जवाब, कहा- Competition से नहीं डरते

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर रिलायंस (Reliance) इंडस्ट्रीज और एलन मस्क की कंपनी Starlink के बीच चर्चा तेज हो गई है। स्टारलिंक की भारत में एंट्री में देरी को लेकर मस्क ने सवाल उठाए थे। अब मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस ने अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि वह प्रतिस्पर्धा से कभी नहीं डरी और भारत में स्टारलिंक का स्वागत करती है। Reliance के इस बयान के बाद देश के टेलीकॉम और सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में मुकाबले को लेकर चर्चा बढ़ गई है। एक तरफ एलन मस्क की स्टारलिंक भारतीय बाजार में अपनी सेवाएं शुरू करना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ जियो भी सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। Reliance ने Starlink को लेकर क्या कहा? Reliance इंडस्ट्रीज ने अपने बयान में कहा कि कंपनी ने हमेशा प्रतिस्पर्धा का सामना किया है और वह नई कंपनियों के बाजार में आने से नहीं घबराती। कंपनी के मुताबिक, भारत में कारोबार करने वाली सभी कंपनियों को देश के नियमों का पालन करना चाहिए। रिलायंस ने स्टारलिंक का स्वागत करते हुए यह भी संकेत दिया कि सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में मुकाबला ग्राहकों के लिए फायदेमंद हो सकता है। कंपनी का मानना है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सेवाओं की गुणवत्ता और ग्राहकों के अनुभव में सुधार की गुंजाइश बनती है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत को लेकर कई कंपनियां तैयारी कर रही हैं। Elon Musk ने Mukesh Ambani पर क्यों उठाए सवाल? एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग में हो रही देरी को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी हित कंपनी की भारतीय बाजार में एंट्री को मुश्किल बना रहे हैं। इस विवाद में रिलायंस और मुकेश अंबानी का नाम भी सामने आया। मस्क का कहना है कि स्टारलिंक जैसी कंपनियों को भारतीय बाजार में काम करने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि ग्राहकों के पास इंटरनेट सेवा चुनने के अधिक विकल्प हों। हालांकि, इन आरोपों से यह साबित नहीं होता कि स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी के पीछे रिलायंस की भूमिका है। इसके लिए किसी ठोस प्रमाण की जरूरत होगी। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए कंपनियों को लाइसेंस के साथ-साथ दूसरी जरूरी मंजूरियां भी हासिल करनी होती हैं। Jio भी Satellite Internet Market में उतरने को तैयार Reliance जियो ने साल 2016 में भारतीय टेलीकॉम बाजार में कदम रखा था। सस्ते डेटा और किफायती सेवाओं के कारण कंपनी ने तेजी से ग्राहक जोड़े और देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों में अपनी जगह बनाई। अब जियो की नजर सैटेलाइट इंटरनेट बाजार पर भी है। इस तकनीक के जरिए उन इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाने में मदद मिल सकती है, जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क या ब्रॉडबैंड कनेक्शन उपलब्ध कराना मुश्किल है। दूसरी तरफ, स्टारलिंक अपने सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए भारत में इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराना चाहती है। ऐसे में आने वाले समय में दोनों कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। Starlink की India Launch में देरी की वजह क्या है? भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करना केवल लाइसेंस मिलने तक सीमित नहीं है। कंपनियों को सुरक्षा मानकों, तकनीकी आवश्यकताओं और सरकारी नियमों से जुड़ी प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होती हैं। स्टारलिंक के अलावा जियो और भारती समूह से जुड़ी Eutelsat OneWeb भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन कंपनियों की सेवाओं की शुरुआत जरूरी मंजूरियों और नियामकीय शर्तों पर निर्भर करती है। इसलिए स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी को किसी एक कंपनी से जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी। वास्तविक स्थिति समझने के लिए सरकारी मंजूरियों और संबंधित कंपनियों की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखना जरूरी है। आम लोगों को क्या होगा फायदा? अगर भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू होती हैं, तो इसका फायदा खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को मिल सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों और उन जगहों पर, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है, यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि, ग्राहकों के लिए सबसे अहम सवाल इंटरनेट की कीमत, स्पीड और उपलब्धता का होगा। स्टारलिंक और जियो की सेवाएं कितनी किफायती होंगी, यह उनकी व्यावसायिक योजनाओं और लॉन्च के समय घोषित किए जाने वाले प्लान पर निर्भर करेगा। अब आगे क्या? रिलायंस के बयान से साफ है कि कंपनी सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है। वहीं, एलन मस्क की स्टारलिंक भारतीय बाजार में अपनी सेवाएं शुरू करने का इंतजार कर रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि जरूरी सरकारी प्रक्रियाएं कब पूरी होती हैं और कंपनियां ग्राहकों के लिए अपनी सेवाएं कब पेश करती हैं। अगर बाजार में कई कंपनियां उतरती हैं, तो भारतीय ग्राहकों को इंटरनेट के नए विकल्प मिल सकते हैं। फिलहाल, रिलायंस और स्टारलिंक के बीच जारी यह बहस भारत के तेजी से बदलते डिजिटल और टेलीकॉम बाजार की एक अहम तस्वीर पेश करती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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WhatsApp का नया फीचर: बिना अकाउंट और ऐप के भी कर सकेंगे कॉल, जानें कैसे करेगा काम

WhatsApp ने यूजर्स के लिए ‘गेस्ट कॉलिंग’ फीचर पेश किया है। इसकी मदद से अब ऐसे लोगों को भी WhatsApp कॉल में शामिल किया जा सकेगा, जिनके पास न तो WhatsApp अकाउंट है और न ही उनके मोबाइल या कंप्यूटर में ऐप इंस्टॉल है। इसके लिए सिर्फ कॉल का लिंक शेयर करना होगा। गेस्ट यूजर वेब ब्राउजर के जरिए कॉल से जुड़ सकेंगे। इस फीचर से पर्सनल बातचीत के साथ ऑनलाइन मीटिंग करना भी आसान हो सकता है। आइए, सवाल-जवाब के जरिए जानते हैं WhatsApp के गेस्ट कॉलिंग फीचर से जुड़ी जरूरी बातें। सवाल 1. WhatsApp का गेस्ट कॉलिंग फीचर क्या है? जवाब: गेस्ट कॉलिंग फीचर की मदद से आप ऐसे व्यक्ति को भी WhatsApp कॉल में शामिल कर सकते हैं, जो इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं करता। इसके लिए सामने वाले व्यक्ति को न तो ऐप डाउनलोड करना होगा और न ही अकाउंट बनाना पड़ेगा। कॉल शुरू करने वाला यूजर लिंक शेयर करेगा और गेस्ट उस लिंक के जरिए कॉल में शामिल हो सकेगा। सवाल 2. बिना ऐप इंस्टॉल किए कॉल से कैसे जुड़ेंगे? जवाब: गेस्ट यूजर अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर Google Chrome या Safari जैसे वेब ब्राउजर में कॉल लिंक खोलकर जुड़ सकता है। इसके लिए डिवाइस में WhatsApp ऐप इंस्टॉल होना जरूरी नहीं होगा। हालांकि, कॉल से जुड़ने के लिए जरूरी ब्राउजर और डिवाइस सपोर्ट उपलब्ध होना चाहिए। सवाल 3. गेस्ट यूजर्स को कॉल के दौरान कौन-कौन से फीचर्स मिलेंगे? जवाब: गेस्ट यूजर्स को कॉल के दौरान कुछ प्रमुख सुविधाएं मिलेंगी। इनमें शामिल हैं: इन सुविधाओं से ऑनलाइन चर्चा और मीटिंग में हिस्सा लेना आसान हो सकता है। सवाल 4. क्या गेस्ट कॉलिंग फीचर सुरक्षित है? जवाब: WhatsApp के मुताबिक, गेस्ट कॉलिंग के जरिए होने वाली कॉल भी एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से सुरक्षित रहेंगी। इसका उद्देश्य कॉल में शामिल लोगों के बीच बातचीत को निजी बनाए रखना है, ताकि कोई अनधिकृत तीसरा पक्ष उसे सुन या एक्सेस न कर सके। सवाल 5. क्या कोई भी व्यक्ति लिंक से सीधे कॉल में शामिल हो सकता है? जवाब: नहीं, गेस्ट यूजर को कॉल में शामिल करने के लिए होस्ट की मंजूरी जरूरी होगी। जब कोई व्यक्ति लिंक खोलकर कॉल से जुड़ने की कोशिश करेगा, तो उसे पहले वेटिंग रूम में रखा जाएगा। कॉल शुरू करने वाला होस्ट मंजूरी देने के बाद ही उसे कॉल में शामिल कर सकेगा। सवाल 6. गेस्ट यूजर्स पर क्या पाबंदियां होंगी? जवाब: कॉल की सुरक्षा और निजता बनाए रखने के लिए गेस्ट यूजर्स पर कुछ सीमाएं रहेंगी। वे: इसके अलावा, होस्ट किसी भी समय गेस्ट यूजर को कॉल से बाहर कर सकता है। सवाल 7. इस फीचर से यूजर्स को क्या फायदा होगा? जवाब: गेस्ट कॉलिंग फीचर से उन लोगों के साथ बातचीत करना आसान होगा, जो WhatsApp इस्तेमाल नहीं करते या अपने डिवाइस में नया ऐप इंस्टॉल नहीं करना चाहते। इसके प्रमुख फायदे हैं: सवाल 8. Google Calendar और Outlook के साथ क्या नया अपडेट आएगा? जवाब: दी गई जानकारी के मुताबिक, Meta ने Google Calendar और Outlook के साथ WhatsApp कॉल इंटीग्रेशन की योजना बताई है। इसके जरिए यूजर्स कैलेंडर इनवाइट के साथ WhatsApp कॉल का लिंक भी साझा कर सकेंगे। इस सुविधा के लिए WhatsApp प्लगइन इंस्टॉल करने और अकाउंट कनेक्ट करने की जरूरत हो सकती है। इसकी उपलब्धता और लॉन्च की तारीख से जुड़ी जानकारी आधिकारिक अपडेट के आधार पर देखनी चाहिए। क्या होता है एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन? एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन एक सुरक्षा तकनीक है, जिसमें बातचीत को इस तरह सुरक्षित किया जाता है कि उसे केवल अधिकृत प्रतिभागी ही समझ सकें। WhatsApp कॉल में इसका उद्देश्य कॉल करने वाले और कॉल रिसीव करने वाले लोगों की बातचीत को निजी रखना है। इससे सेवा देने वाली कंपनी समेत अन्य पक्षों के लिए बातचीत की सामग्री तक पहुंचना मुश्किल होता है। निष्कर्ष: WhatsApp का गेस्ट कॉलिंग फीचर उन लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है, जिन्हें बिना अकाउंट बनाए किसी कॉल या ऑनलाइन मीटिंग में शामिल होना है। हालांकि, फीचर की उपलब्धता और इससे जुड़ी शर्तों की पुष्टि WhatsApp के आधिकारिक अपडेट से करना बेहतर होगा।
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विप्रो का रेवेन्यू 9.1% बढ़ा, लेकिन मुनाफा 1.4% घटा; 2026 में अब तक 35% टूट चुका है शेयर

देश की प्रमुख आईटी कंपनियों में शामिल विप्रो ने 15 अक्टूबर को जुलाई-सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी किए। कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 9.1% बढ़कर ₹24,752.7 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹22,697.3 करोड़ था। हालांकि, रेवेन्यू में बढ़ोतरी के बावजूद कंपनी के मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई। जुलाई-सितंबर तिमाही में विप्रो को ₹3,200.6 करोड़ का मुनाफा हुआ, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह ₹3,246.2 करोड़ था। यानी कंपनी का मुनाफा सालाना आधार पर करीब 1.4% घटा। इन आंकड़ों से पता चलता है कि कंपनी की कुल कमाई बढ़ी है, लेकिन खर्चों और अन्य वित्तीय कारकों के कारण अंतिम मुनाफे में मामूली कमी आई है। विप्रो के तिमाही नतीजों पर एक नजर वित्तीय आंकड़ा जुलाई-सितंबर 2025 जुलाई-सितंबर 2026 रेवेन्यू ₹22,697.3 करोड़ ₹24,752.7 करोड़ मुनाफा ₹3,246.2 करोड़ ₹3,200.6 करोड़ रेवेन्यू में सालाना बदलाव — 9.1% की बढ़ोतरी मुनाफे में सालाना बदलाव — 1.4% की गिरावट शेयर बाजार में 1.83% की तेजी तिमाही नतीजों की घोषणा से पहले गुरुवार को विप्रो के शेयर में तेजी देखने को मिली। कंपनी का शेयर 1.83% बढ़कर ₹174.05 पर बंद हुआ। हालांकि, साल 2026 में अब तक विप्रो के शेयर में करीब 34.9% की गिरावट आ चुकी है। इसी अवधि में निफ्टी 50 में लगभग 12% की गिरावट दर्ज की गई। इस तरह विप्रो के शेयर का प्रदर्शन प्रमुख बाजार सूचकांक के मुकाबले कमजोर रहा है। कंपनी का बाजार पूंजीकरण यानी मार्केट कैप करीब ₹1.72 लाख करोड़ बताया गया है। वित्तीय नतीजों से जुड़े शब्दों का आसान मतलब Q2 FY27: वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही, यानी जुलाई से सितंबर 2026। Q1 FY27: वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही, यानी अप्रैल से जून 2026। Q2 FY26: वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही, यानी जुलाई से सितंबर 2025। रेवेन्यू: कंपनी को अपनी सेवाओं और कारोबार से मिलने वाली कुल आय। प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT): खर्च, ब्याज और टैक्स सहित संबंधित मदों को घटाने के बाद बचने वाला मुनाफा। EBITDA: ब्याज, टैक्स और मूल्यह्रास-अमूर्तकरण जैसे खर्चों से पहले की कमाई का एक वित्तीय माप। EPS: प्रति शेयर कमाई। इससे पता चलता है कि कंपनी ने प्रत्येक शेयर के हिसाब से कितनी कमाई की। आगे निवेशकों की नजर किन बातों पर रहेगी? विप्रो के नतीजों में रेवेन्यू की बढ़ोतरी और मुनाफे में गिरावट दोनों महत्वपूर्ण संकेत हैं। निवेशक आगे कंपनी की लागत, नए प्रोजेक्ट्स, आईटी सेवाओं की मांग और भविष्य के कारोबार संबंधी अनुमानों पर नजर रख सकते हैं। हालांकि, केवल एक तिमाही के नतीजों या शेयर की हालिया गिरावट के आधार पर निवेश का फैसला करना उचित नहीं है। निवेश से पहले कंपनी के आधिकारिक वित्तीय नतीजों और अन्य प्रासंगिक जानकारियों की समीक्षा करना जरूरी है।
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CNAP

CNAP Service: अब अनजान नंबर से कॉल आने पर दिखेगा नाम, 1 नवंबर से नया नियम

अब अनजान नंबर से फोन आने पर यह जानना आसान हो सकता है कि कॉल किसके नाम पर रजिस्टर्ड है। केंद्र सरकार की नई व्यवस्था के तहत 1 नवंबर 2026 से मोबाइल स्क्रीन पर कॉल करने वाले का नाम दिखाने की सुविधा शुरू करने की तैयारी है। इस सिस्टम का नाम Calling Name Presentation (CNAP) है। इसका मकसद अनजान कॉल की पहचान आसान बनाना और लोगों को स्पैम व धोखाधड़ी वाली कॉल के प्रति सतर्क करना है। इस व्यवस्था के तहत अगर आपके फोन पर किसी ऐसे नंबर से कॉल आती है, जो कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव नहीं है, तो स्क्रीन पर केवल नंबर ही नहीं, बल्कि टेलीकॉम रिकॉर्ड में दर्ज नाम भी दिखाई दे सकता है। वहीं, विदेश से आने वाली कॉल के लिए स्क्रीन पर ‘International Call’ लिखा दिख सकता है। Caller Name Display: कैसे काम करेगी नई सुविधा? अभी तक अनजान नंबर से कॉल आने पर ज्यादातर लोगों को यह पता लगाने के लिए Truecaller जैसे ऐप या दूसरी सेवाओं की मदद लेनी पड़ती है कि फोन किसने किया है। CNAP सुविधा लागू होने के बाद कॉल करने वाले की पहचान दिखाने के लिए टेलीकॉम कंपनियों के रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें कॉल करने वाले के मोबाइल कनेक्शन के साथ दर्ज नाम दिखाया जा सकता है। यानी नंबर सेव नहीं होने पर भी आपको कॉल करने वाले की पहचान का अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी। दूरसंचार विभाग के निर्देश के अनुसार, 1 नवंबर 2026 से 4G और उससे नई तकनीक वाले मोबाइल नेटवर्क पर यह सुविधा शुरू की जानी है। हालांकि, अलग-अलग नेटवर्क पर इसकी उपलब्धता और शुरुआत की स्थिति अलग हो सकती है। विदेशी नंबर से फोन आया तो स्क्रीन पर क्या दिखेगा? नई व्यवस्था का एक अहम हिस्सा इंटरनेशनल कॉल की पहचान करना है। अगर विदेश से किसी अनजान नंबर पर कॉल आती है, तो स्क्रीन पर ‘International Call’ लिखा दिखाई दे सकता है। इससे यूजर को यह समझने में मदद मिलेगी कि कॉल अंतरराष्ट्रीय नंबर से आ रही है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि विदेश से आने वाली हर कॉल फर्जी होती है। विदेश में रहने वाले रिश्तेदार, दोस्त या कारोबारी संपर्क भी कॉल कर सकते हैं। इसलिए केवल इस संदेश को देखकर किसी कॉल को धोखाधड़ी मान लेना सही नहीं होगा। क्या फर्जी कॉल और साइबर फ्रॉड पर लगेगी लगाम? आजकल बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी या दूसरी संस्थाओं का प्रतिनिधि बनकर लोगों को फोन करने के मामले सामने आते रहते हैं। कई बार लोग कॉल करने वाले की बातों में आकर अपनी निजी जानकारी साझा कर देते हैं। CNAP सुविधा से कॉल करने वाले की पहचान समझने में मदद मिल सकती है। लेकिन यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि स्क्रीन पर नाम दिखने का मतलब यह नहीं है कि कॉल पूरी तरह सुरक्षित है। किसी भी अनजान व्यक्ति को OTP, बैंकिंग पासवर्ड या संवेदनशील जानकारी न बताएं। बैंक या सरकारी संस्था के नाम पर कॉल आने पर आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करना बेहतर है। क्या 4G और 5G यूजर्स को मिलेगा फायदा? CNAP को 4G और उससे नई तकनीक वाले मोबाइल नेटवर्क पर लागू करने की योजना है। इसमें 5G नेटवर्क भी शामिल हैं। हालांकि, शुरुआत में सभी यूजर्स को एक साथ या एक ही तरीके से यह सुविधा मिले, यह जरूरी नहीं है। पुराने 2G और 3G नेटवर्क के लिए व्यवस्था को लेकर अलग से निर्णय लिया जा सकता है। यूजर्स को सुविधा मिलने की स्थिति उनके टेलीकॉम ऑपरेटर और नेटवर्क सपोर्ट पर भी निर्भर करेगी। Privacy को लेकर क्या है व्यवस्था? कॉलर का नाम दिखाने की सुविधा के साथ यूजर्स की निजता का ध्यान रखना भी जरूरी है। CNAP में पहचान से जुड़ी जानकारी टेलीकॉम रिकॉर्ड के आधार पर दिखाई जाती है। जिन यूजर्स ने नियमानुसार Calling Line Identification Restriction (CLIR) सुविधा ली है, उनके लिए नाम छिपाने से जुड़े प्रावधान भी लागू हो सकते हैं। बिजनेस कनेक्शन के मामले में सत्यापन के बाद कंपनी या कारोबार का नाम दिखाने की सुविधा भी दी जा सकती है। इससे ग्राहकों को आधिकारिक बिजनेस कॉल पहचानने में मदद मिल सकती है। 1 नवंबर से मोबाइल यूजर्स को क्या फायदा होगा? नई Caller Name Display सुविधा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अनजान नंबर से कॉल आने पर यूजर को कॉल करने वाले के बारे में अतिरिक्त जानकारी मिल सकती है। विदेश से आने वाली कॉल के लिए ‘International Call’ का संकेत भी उपयोगी हो सकता है। हालांकि, यह सुविधा हर फर्जी कॉल को रोकने का पक्का समाधान नहीं है। कॉल उठाने से पहले पहचान पर ध्यान देना, संदिग्ध लिंक से बचना और निजी जानकारी साझा न करना अब भी जरूरी रहेगा। कुल मिलाकर, CNAP सुविधा मोबाइल कॉल की पहचान को पहले से आसान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। अगर इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो आम लोगों को अनजान कॉल समझने और संभावित धोखाधड़ी से सतर्क रहने में मदद मिल सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Stock Market

Stock Market Today: सेंसेक्स 1400 अंक उछला, 74 हजार के पार; Nifty में भी तूफानी तेजी

भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में आज 15 अक्टूबर को जोरदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स करीब 1,400 अंक उछलकर 74,000 के पार पहुंच गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग 400 अंकों की बढ़त दर्ज की गई। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों के बीच उत्साह देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और IT व Auto सेक्टर के शेयरों में खरीदारी को इस उछाल की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है। पिछले कारोबारी सत्रों में बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच आई इस तेजी ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। हालांकि, बाजार की यह बढ़त आगे कितनी टिकती है, इस पर घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों का असर बना रहेगा। Sensex Today: 74 हजार के पार पहुंचा सेंसेक्स शेयर बाजार में खरीदारी बढ़ने से सेंसेक्स में करीब 1,400 अंकों की तेजी आई और यह 74,000 के स्तर के पार निकल गया। प्रमुख कंपनियों के शेयरों में खरीदारी से बाजार को मजबूती मिली। वहीं, निफ्टी भी लगभग 400 अंक चढ़ गया। शेयर बाजार में इस तरह की तेजी निवेशकों की धारणा में सुधार का संकेत दे सकती है। हालांकि, बाजार की वास्तविक स्थिति समझने के लिए यह देखना भी जरूरी है कि तेजी कितने शेयरों में रही और कारोबार के अंत तक बाजार अपनी बढ़त बनाए रखता है या नहीं। Crude Oil Price: कच्चा तेल सस्ता होने से क्यों मिली राहत? कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर हो सकती है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने से देश के आयात खर्च पर दबाव कम हो सकता है। इसका फायदा परिवहन, विमानन और तेल पर निर्भर दूसरे कारोबारों को भी मिल सकता है। साथ ही, तेल की कीमतों में लंबे समय तक नरमी रहने पर महंगाई के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर तुरंत सभी कंपनियों या आम लोगों तक पहुंचे, यह जरूरी नहीं है। इसका प्रभाव रुपये की विनिमय दर, सरकारी करों और घरेलू कीमतों जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है। IT और Auto Stocks में खरीदारी से बाजार को सपोर्ट आज की तेजी में IT और Auto सेक्टर के शेयरों में खरीदारी अहम रही। इन सेक्टरों की बड़ी कंपनियों के शेयरों में बढ़त का असर सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों पर पड़ सकता है। आईटी सेक्टर पर निवेशकों की नजर वैश्विक मांग, अमेरिकी बाजारों और कंपनियों के वित्तीय नतीजों के कारण रहती है। वहीं, ऑटो सेक्टर में बिक्री, त्योहारी मांग, कच्चे माल की लागत और ब्याज दरें कंपनियों के प्रदर्शन को प्रभावित करती हैं। इन सेक्टरों में आई खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया, लेकिन निवेशकों को किसी भी कंपनी का शेयर चुनने से पहले उसके कारोबार और वित्तीय स्थिति का आकलन करना चाहिए। Share Market में तेजी के बाद निवेशक क्या करें? सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी तेजी देखकर निवेशकों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या बाजार में निवेश करने का सही समय आ गया है। लेकिन केवल एक दिन की तेजी के आधार पर फैसला लेना जोखिम भरा हो सकता है। निवेश से पहले इन बातों पर ध्यान देना उपयोगी रहेगा: आगे कैसी रहेगी Stock Market की चाल? आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा कई कारकों से प्रभावित हो सकती है। कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक बाजारों का प्रदर्शन, विदेशी निवेशकों की खरीदारी या बिकवाली और कंपनियों के तिमाही नतीजे इसमें अहम भूमिका निभाएंगे। अगर सकारात्मक संकेत बने रहते हैं, तो बाजार को आगे भी समर्थन मिल सकता है। दूसरी ओर, वैश्विक स्तर पर किसी प्रतिकूल घटनाक्रम या निवेशकों की मुनाफावसूली से बाजार में फिर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर, 15 अक्टूबर को सेंसेक्स में करीब 1,400 अंकों और निफ्टी में लगभग 400 अंकों की तेजी शेयर बाजार के लिए बड़ा उछाल है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और IT व Auto शेयरों में खरीदारी ने बाजार को मजबूती दी। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि यह तेजी आगे भी जारी रहती है या बाजार में फिर उतार-चढ़ाव शुरू होता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IND vs NZ

IND vs NZ 1st T20I: संजू सैमसन-नमन धीर का धमाका, भारत ने रचा रिकॉर्ड

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पहले T20 इंटरनेशनल मुकाबले में टीम इंडिया ने शानदार जीत दर्ज की। 226 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय बल्लेबाजों ने ऐसा खेल दिखाया कि न्यूजीलैंड के गेंदबाज दबाव में आ गए। संजू सैमसन की तूफानी पारी और नमन धीर की आखिरी ओवरों में विस्फोटक बल्लेबाजी ने मैच का रुख भारत की ओर मोड़ दिया। मुकाबले में भारत ने 19.4 ओवर में 6 विकेट खोकर 230 रन बनाए और 4 विकेट से जीत हासिल की। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने पांच मैचों की T20 सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। 226 रन का लक्ष्य हासिल करना भारत के लिए T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में नया रिकॉर्ड भी रहा। NZ vs IND: न्यूजीलैंड ने खड़ा किया 225 रन का बड़ा स्कोर पहले बल्लेबाजी करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम ने निर्धारित 20 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 225 रन बनाए। मेजबान टीम के बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश की। ग्लेन फिलिप्स ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 40 गेंदों पर नाबाद 82 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। वहीं, फिन एलन ने 24 गेंदों पर 45 रन बनाकर टीम को तेज शुरुआत दी। बेवॉन जैकब्स ने भी 16 गेंदों पर 31 रन की अहम पारी खेली। न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाए और भारत के सामने 226 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रख दिया। उस समय लग रहा था कि भारतीय टीम के लिए इस स्कोर तक पहुंचना आसान नहीं होगा। Sanju Samson ने खेली तूफानी पारी लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया को संजू सैमसन ने शानदार शुरुआत दिलाई। उन्होंने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए मैदान के चारों ओर शॉट लगाए। संजू ने 33 गेंदों पर 67 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। उन्होंने केवल 23 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर भारतीय टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। दूसरी ओर, अभिषेक शर्मा ने भी तेजी से रन बनाए। उन्होंने 12 गेंदों पर 29 रन की पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों की आक्रामक शुरुआत से भारत को बड़े लक्ष्य का पीछा करने में काफी मदद मिली। हालांकि, शुरुआती विकेट गिरने के बाद भारतीय टीम की रफ्तार कुछ धीमी हुई। न्यूजीलैंड ने वापसी करने की कोशिश की, लेकिन भारत के बल्लेबाजों ने मैच को हाथ से निकलने नहीं दिया। Shreyas Iyer ने संभाली जिम्मेदारी मध्यक्रम में विकेट गिरने के बाद श्रेयस अय्यर ने पारी को संभाला। उन्होंने 28 गेंदों पर 42 रन बनाकर टीम को लक्ष्य के करीब पहुंचाया। ऐसे मुकाबलों में सिर्फ तेजी से रन बनाना ही जरूरी नहीं होता, बल्कि सही समय पर पारी को संभालना भी अहम होता है। अय्यर ने यही भूमिका निभाई और भारत की उम्मीदों को बनाए रखा। इसके बाद नमन धीर ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड की जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। Naman Dhir बने भारत की जीत के हीरो मैच के आखिरी ओवरों में नमन धीर की बल्लेबाजी ने भारतीय प्रशंसकों का उत्साह बढ़ा दिया। उन्होंने महज 15 गेंदों पर नाबाद 42 रन बनाए। उनकी पारी में 5 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। नमन ने तेजी से रन बनाकर न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बढ़ाया। भारतीय टीम को जब जीत के लिए तेज रन बनाने की जरूरत थी, तब उनकी आक्रामक बल्लेबाजी सबसे ज्यादा काम आई। भारत ने 19.4 ओवर में 230 रन बनाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। संजू सैमसन की शुरुआत और नमन धीर की शानदार फिनिशिंग इस ऐतिहासिक रनचेज की सबसे बड़ी वजह बनी। IND vs NZ 1st T20I Scorecard: एक नजर में पूरा मैच न्यूजीलैंड: 225/4 (20 ओवर) भारत: 230/6 (19.4 ओवर) नतीजा: भारत 4 विकेट से जीता। न्यूजीलैंड के टॉप स्कोरर: ग्लेन फिलिप्स – 82* रन भारत के टॉप स्कोरर: संजू सैमसन – 67 रन मैच के अहम बल्लेबाज: नमन धीर – 15 गेंदों पर नाबाद 42 रन भारत ने अपने नाम किया बड़ा रिकॉर्ड इस जीत की सबसे खास बात भारत का रिकॉर्ड रनचेज रहा। 226 रन जैसे बड़े लक्ष्य को हासिल करके टीम इंडिया ने T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में अपना सबसे बड़ा सफल रनचेज दर्ज किया। संजू सैमसन ने तेज शुरुआत देकर टीम को मजबूत आधार दिया, श्रेयस अय्यर ने मध्यक्रम में पारी संभाली और नमन धीर ने अंतिम ओवरों में तेजी से रन बनाकर जीत सुनिश्चित की। इस प्रदर्शन ने एक बार फिर दिखाया कि भारतीय टीम बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भी दबाव में संयम बनाए रख सकती है। दूसरे T20I में भी रहेगी जीत की उम्मीद पहले मुकाबले में जीत के बाद भारतीय टीम सीरीज में अपनी बढ़त मजबूत करना चाहेगी। वहीं, न्यूजीलैंड की टीम अगले मैच में वापसी करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। पहले मैच में दोनों टीमों के बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया। ऐसे में अगले मुकाबले में भी क्रिकेट प्रशंसकों को एक रोमांचक भिड़ंत देखने की उम्मीद रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
India vs New Zealand

India vs New Zealand: आखिरी 3 ओवर में 29 रन की जरूरत, रोमांचक मोड़ पर मैच

भारत और न्यूजीलैंड (India vs New Zealand) के बीच T20 मुकाबला अब बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है। न्यूजीलैंड के 226 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ने 5 विकेट के नुकसान पर 197 रन बना लिए हैं। अब जीत के लिए भारत को 18 गेंदों में 29 रन बनाने हैं। क्रीज पर श्रेयस अय्यर और नमन धीर मौजूद हैं। ऐसे में भारतीय फैंस की नजरें दोनों बल्लेबाजों पर टिकी हैं। मैच के इस मोड़ पर एक छोटी-सी गलती भी टीम की मुश्किल बढ़ा सकती है। वहीं, अगर भारतीय बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाए और विकेट बचाए रखे, तो जीत हासिल करने का मौका बना हुआ है। IND vs NZ: न्यूजीलैंड ने खड़ा किया 225 रन का स्कोर पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने 20 ओवर में 4 विकेट खोकर 225 रन बनाए। टीम की ओर से ग्लेन फिलिप्स ने शानदार बल्लेबाजी की और 40 गेंदों पर नाबाद 82 रन बनाए। उनकी आक्रामक पारी ने न्यूजीलैंड को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। कीवी बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। बड़े शॉट खेलने के साथ-साथ उन्होंने रन गति को भी धीमा नहीं पड़ने दिया। इसी वजह से भारत के सामने 226 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य आया। India vs New Zealand: लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की स्थिति 226 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को तेजी से रन बनाने थे। टीम ने स्कोर आगे बढ़ाया, लेकिन पांच विकेट गिरने के बाद मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। अब श्रेयस अय्यर और नमन धीर के सामने दोहरी चुनौती है। उन्हें एक तरफ जरूरी रन बनाने हैं, तो दूसरी तरफ विकेट भी बचाकर रखना है। दोनों के बीच अच्छी साझेदारी भारत को जीत के करीब पहुंचा सकती है। आखिरी 18 गेंदों का खेल होगा निर्णायक भारत को 18 गेंदों में 29 रन चाहिए। इसका मतलब है कि टीम को बचे हुए तीन ओवरों में लगातार रन बनाने होंगे। T20 क्रिकेट में यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, लेकिन न्यूजीलैंड के गेंदबाज भी इस मौके को आसानी से हाथ से जाने नहीं देना चाहेंगे। अगर भारतीय बल्लेबाज शुरुआती गेंदों पर बाउंड्री लगाने में सफल रहते हैं, तो आखिरी ओवर का दबाव कम हो सकता है। वहीं, विकेट गिरने की स्थिति में भारत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्या Team India हासिल कर पाएगी जीत? मैच का रुख अब काफी हद तक श्रेयस अय्यर और नमन धीर की बल्लेबाजी पर निर्भर करेगा। भारतीय टीम को जीत के लिए बड़े शॉट खेलने के साथ समझदारी से स्ट्राइक भी बदलनी होगी। न्यूजीलैंड की टीम अपने स्कोर का बचाव करने की पूरी कोशिश करेगी। ऐसे में अंतिम तीन ओवर में गेंदबाजों और बल्लेबाजों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। फिलहाल मुकाबला रोमांचक स्थिति में है और भारत के पास लक्ष्य हासिल करने का मौका मौजूद है। अब देखना होगा कि भारतीय बल्लेबाज आखिरी गेंदों में टीम को जीत दिला पाते हैं या न्यूजीलैंड मुकाबले पर कब्जा जमा लेता है। IND vs NZ Live Score: मैच की ताजा स्थिति हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

दिल्ली-NCR में GRAP-1 लागू, प्रदूषण से निपटने के लिए 334 टीमें करेंगी निगरानी; 1 नवंबर से सख्ती

दिल्ली की वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंचने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पूरे दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया है। इस बीच दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दावा किया कि सरकार के प्रयासों और जनभागीदारी के कारण इस बार पिछले वर्षों की तुलना में GRAP-1 देर से लागू हुआ है। सिरसा के मुताबिक, सर्दियों में प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार 11 सूत्रीय एक्शन प्लान पर काम कर रही है। इसमें करीब 30 एजेंसियां शामिल हैं। प्रदूषण नियंत्रण के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक, दोनों तरह के उपाय किए जा रहे हैं। 334 टीमें करेंगी निगरानी, मॉनिटरिंग स्टेशन बढ़कर होंगे 60 पर्यावरण मंत्री ने बताया कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता की निगरानी करने वाले स्टेशनों की संख्या 47 से बढ़ाकर 60 की जाएगी। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए 334 प्रवर्तन टीमें तैनात की जाएंगी। सिरसा ने दावा किया कि दिल्ली के प्रदूषण में स्थानीय स्रोतों की हिस्सेदारी करीब 30% है, जबकि आसपास के राज्यों और क्षेत्रों से 60 से 65% प्रदूषण आता है। ऐसे में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए पूरे NCR में समन्वित कार्रवाई जरूरी है। 1 नवंबर से प्रदूषण रोकने के लिए प्रस्तावित सख्त कदम सरकार की ओर से साझा की गई योजना के मुताबिक, प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई उपाय किए जाने हैं। 1. वैध PUC प्रमाणपत्र के बिना नहीं मिलेगा ईंधन ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ व्यवस्था के तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) के बिना वाहनों को पेट्रोल या डीजल नहीं देने का प्रावधान है। 2. बाहरी राज्यों के वाहनों पर प्रतिबंध योजना के अनुसार, 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों को इससे छूट देने की बात कही गई है। 3. सरकारी और निजी दफ्तरों में 50% वर्क फ्रॉम होम प्रदूषण कम करने के लिए सरकारी और निजी कार्यालयों के आधे कर्मचारियों से घर से काम कराने की योजना भी शामिल है। 4. सरकारी दफ्तरों के समय में बदलाव योजना के मुताबिक, नगर निगम (MCD) के कार्यालय सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक और दिल्ली सरकार के कार्यालय सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक संचालित किए जाने का प्रस्ताव है। 5. पार्किंग शुल्क दोगुना करने की योजना निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए 1 नवंबर से पार्किंग शुल्क दोगुना करने की योजना है। मेट्रो पार्किंग को इससे छूट देने की बात कही गई है। 6. निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर रोक धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल फैलाने वाले निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर रोक लगाने का प्रावधान है। इसके अलावा, 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध की योजना भी बताई गई है।

दिवाली से पहले दिल्ली में रात को भी होगी सफाई, CM रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

दीपावली और अन्य त्योहारों को देखते हुए दिल्ली के रिहायशी इलाकों और प्रमुख बाजारों में अब रात के समय भी सफाई कराई जाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को दिल्ली सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक कर राजधानी की सफाई व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सफाई में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां भी कूड़े के ढेर लगे हैं, उन्हें तत्काल हटाया जाए और नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों से सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए तेजी से काम करने को कहा। कूड़ा नहीं उठने की शिकायतों पर CM नाराज मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के कई इलाकों से समय पर कूड़ा नहीं उठने और जगह-जगह गंदगी की शिकायतें मिल रही हैं। कुछ जोन में सफाई व्यवस्था को लेकर लापरवाही भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि सफाई के प्रयासों के बावजूद जमीन पर अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लोगों की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। साथ ही, सफाई व्यवस्था में किए जा रहे सुधार सड़कों और बाजारों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने चाहिए। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कर्मचारी होंगे तैनात मुख्यमंत्री ने मेयर प्रवेश वाही और नगर निगम आयुक्त संजीव खिरवार को पूरी दिल्ली में सफाई अभियान तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में सफाई कर्मचारियों की कमी है, वहां अतिरिक्त स्टाफ लगाया जाए। जरूरत पड़ने पर रात में सफाई के लिए नए कर्मचारियों की नियुक्ति भी की जाए। रात में सफाई से दिन में नहीं होगी परेशानी मुख्यमंत्री के मुताबिक, बाजारों और रिहायशी कॉलोनियों में रात के समय सफाई कराने से दिन में लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी। इससे त्योहारों के दौरान भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्वच्छता बनाए रखने में मदद मिलेगी। बैठक में शहरी विकास मंत्री आशीष सूद, मेयर प्रवेश वाही, मुख्य सचिव राजीव वर्मा, नगर निगम आयुक्त संजीव खिरवार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे

छत्तीसगढ़ में 11 डॉक्टरों के तबादले, डॉ. संजय कुमार बने रायपुर जिला अस्पताल के प्रभारी सिविल सर्जन

छत्तीसगढ़ सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 11 डॉक्टरों का तबादला किया है। प्रशासनिक आधार पर चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए गए हैं। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई जगह पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय महानदी भवन से अवर सचिव दिव्या वैष्णव की ओर से जारी आदेश के तहत यह फेरबदल किया गया है। डॉ. संजय कुमार को मिली रायपुर जिला अस्पताल की जिम्मेदारी तबादला आदेश के अनुसार, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार को जिला चिकित्सालय रायपुर (पंडरी) में प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक नियुक्त किया गया है। वहीं, जिला चिकित्सालय रायपुर में अब तक प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. भेनुज कुमार सिन्हा को स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय में प्रभारी उप संचालक के पद पर पदस्थ किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए प्रशासनिक फेरबदल विभाग के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह प्रशासनिक बदलाव किया गया है। इसके तहत दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी अस्पतालों में भी स्वास्थ्य सुविधाओं को सुचारु बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। तबादला आदेश में सभी संबंधित डॉक्टरों को बिना देरी किए अपने नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

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