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Gold-Silver

Gold-Silver Rate: सोना-चांदी ने फिर पकड़ी रफ्तार, जानिए आज का ताजा भाव

सोना-चांदी (Gold-Silver) खरीदने वालों के लिए आज का दिन खास रहा। सराफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं के दाम में जोरदार तेजी देखने को मिली। चांदी की कीमत एक ही कारोबारी सत्र में ₹9,260 बढ़कर करीब ₹2.38 लाख प्रति किलो पहुंच गई। वहीं, 10 ग्राम सोने का भाव भी ₹3,519 चढ़कर करीब ₹1.57 लाख तक पहुंच गया। कीमती धातुओं की कीमतों में इस तेजी ने निवेशकों के साथ-साथ उन लोगों का भी ध्यान खींचा है, जो आने वाले समय में शादी या किसी खास मौके के लिए सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। Silver Price में बड़ा उछाल चांदी की कीमत में हुई तेजी इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में है। करीब ₹9 हजार से ज्यादा की बढ़त के बाद चांदी का भाव ₹2.38 लाख प्रति किलो के आसपास पहुंच गया है। चांदी की कीमत में तेजी के पीछे घरेलू मांग के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल और औद्योगिक मांग को भी अहम माना जाता है। चांदी का इस्तेमाल सिर्फ गहनों और निवेश के लिए ही नहीं होता, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी किया जाता है। इसलिए इसकी कीमत पर वैश्विक आर्थिक गतिविधियों का असर तेजी से दिखाई देता है। Gold Price भी हुआ महंगा चांदी के साथ सोने ने भी तेजी दिखाई। 10 ग्राम सोने की कीमत में ₹3,519 का इजाफा हुआ और भाव करीब ₹1.57 लाख तक पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मजबूती और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ती दिलचस्पी ने घरेलू बाजार को भी सहारा दिया। हाल के कारोबार में कमजोर डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी जैसे संकेतों ने भी सोने की कीमत को सपोर्ट किया है। ऐसे माहौल में निवेशक अक्सर Gold को सुरक्षित विकल्प के तौर पर देखते हैं। क्या ₹1.70 लाख तक पहुंच सकता है Gold? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोने का भाव इस साल ₹1.70 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है? बाजार में ऐसी संभावनाओं को लेकर चर्चा जरूर है, लेकिन कीमत का अगला स्तर कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। अमेरिकी फेड की ब्याज दर नीति, डॉलर की चाल, महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी सोने की दिशा तय करने वाले प्रमुख फैक्टर हैं। अगर इन परिस्थितियों से सोने को लगातार समर्थन मिलता रहा, तो आने वाले महीनों में नए रिकॉर्ड देखने को मिल सकते हैं। खरीदारों के लिए क्या है मतलब? सोने-चांदी की लगातार बढ़ती कीमतों से आम खरीदारों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। खासकर शादी-ब्याह के सीजन में बड़ी मात्रा में खरीदारी करने वालों के लिए कुछ हजार रुपये का अंतर भी बजट पर असर डाल सकता है। हालांकि, सिर्फ तेजी देखकर जल्दबाजी में खरीदारी करना सही रणनीति नहीं मानी जाती। अगर खरीदारी जरूरी है तो स्थानीय सराफा बाजार का ताजा भाव, GST और making charges की जानकारी लेने के बाद ही फैसला करना बेहतर रहेगा। Gold-Silver Rate में आगे भी उतार-चढ़ाव संभव सोना और चांदी इस समय ऊंचे स्तरों पर कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में आगे भी तेजी और मुनाफावसूली दोनों देखने को मिल सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाला छोटा बदलाव भी घरेलू कीमतों पर असर डाल सकता है। फिलहाल चांदी में ₹9,260 की छलांग और सोने में ₹3,519 की बढ़त ने बाजार की तस्वीर जरूर बदल दी है। अगर वैश्विक परिस्थितियां कीमती धातुओं के पक्ष में बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में सोना-चांदी नए स्तरों की ओर बढ़ते नजर आ सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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सोना-चांदी के दाम में गिरावट, 24 कैरेट सोना ₹1.53 लाख और चांदी ₹2.27 लाख किलो; जानें खरीदारी का सही तरीका

सोने और चांदी की कीमतों में 19 अगस्त को गिरावट देखने को मिली है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, चांदी की कीमत 5,772 रुपये घटकर 2.27 लाख रुपये प्रति किलो हो गई है। वहीं 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 1,196 रुपये गिरकर 1.53 लाख रुपये पर आ गया। पिछले कुछ दिनों में कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी के बाद अब बाजार में मुनाफावसूली का असर दिखाई दे रहा है। सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट क्यों आई? 1. मुनाफावसूली का असर पिछले 10-15 दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में अच्छी तेजी देखने को मिली थी। ऐसे में कई निवेशकों और ट्रेडर्स ने मुनाफा निकालने के लिए बिकवाली शुरू कर दी। बाजार में बिकवाली बढ़ने से कीमतों पर दबाव आया और दोनों धातुओं के भाव नीचे आ गए। 2. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें ब्रेंट क्रूड की कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है। कच्चा तेल महंगा होने से दुनियाभर में महंगाई बढ़ने की चिंता बढ़ती है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने या बढ़ाने की संभावना बन सकती है। ऊंची ब्याज दरों को आमतौर पर सोने के लिए नकारात्मक माना जाता है। इस साल सोना करीब 20 हजार रुपये महंगा साल 2026 में अब तक सोने की कीमत में अच्छी तेजी रही है। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोने का भाव 1.33 लाख रुपये से ऊपर था, जो अब करीब 1.53 लाख रुपये हो गया है। हालांकि, इस दौरान कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव भी रहा। 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी ने 3.86 लाख रुपये प्रति किलो का ऑलटाइम हाई बनाया था। वहीं 31 दिसंबर 2025 को चांदी करीब 2.30 लाख रुपये प्रति किलो थी, जो अब 2.27 लाख रुपये पर आ गई है। क्या अभी सोना-चांदी खरीदना सही है? कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने और चांदी की कीमतें अपने ऊंचे स्तर से काफी नीचे आ चुकी हैं। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशक धीरे-धीरे खरीदारी कर सकते हैं, लेकिन एकमुश्त बड़ी रकम लगाने से बचना बेहतर हो सकता है। उनके अनुमान के मुताबिक साल के अंत तक सोना फिर से 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2.80 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है। हालांकि, बाजार की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 3 बातों का रखें ध्यान 1. BIS हॉलमार्क वाला सोना खरीदें सोना खरीदते समय हमेशा BIS हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना लें। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता और कैरेट की जानकारी मिलती है। 2. कीमत और वजन जरूर जांचें खरीदारी से पहले सोने का वजन और उस दिन का भाव अलग-अलग विश्वसनीय स्रोतों से जांच लें। 24, 22 और 18 कैरेट सोने के भाव अलग-अलग होते हैं। 3. मेकिंग चार्ज पर ध्यान दें गहने खरीदते समय मेकिंग चार्ज भी कुल कीमत को काफी प्रभावित करता है। ज्वेलर से मेकिंग या लेबर चार्ज का पूरा ब्रेकअप मांगें और संभव हो तो इस पर बातचीत भी करें। चांदी खरीदते समय शुद्धता कैसे जांचें? चांदी की शुद्धता जांचने के लिए कुछ घरेलू तरीके बताए जाते हैं, जैसे मैग्नेट और आइस टेस्ट। हालांकि, सिर्फ इन घरेलू परीक्षणों के आधार पर चांदी को असली या नकली मानना पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है। बेहतर है कि चांदी की खरीदारी करते समय उसकी शुद्धता, हॉलमार्क और बिल की जानकारी जरूर जांचें। बड़ी खरीदारी में प्रमाणित विक्रेता से खरीदना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।
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टाटा संस की AGM पहली बार टली, कानूनी अड़चन से अटकी बैठक; चेयरमैन समेत कई अहम फैसले प्रभावित

मुंबई स्थित टाटा समूह के मुख्यालय बॉम्बे हाउस में 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) स्थगित हो गई। टाटा संस के इतिहास में यह पहली बार है जब कंपनी की AGM टली है। चेयरमैन एन चंद्रशेखरन बैठक में शामिल होने के लिए सुबह ही पहुंच गए थे, लेकिन कानूनी और तकनीकी अड़चनों के चलते बैठक में कोई फैसला नहीं हो सका। पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि AGM के लिए जरूरी कोरम पूरा नहीं हो पाया। इस पूरे घटनाक्रम का असर कंपनी के कई महत्वपूर्ण फैसलों और टाटा समूह में नेतृत्व की आगे की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। सवाल 1: AGM क्यों टली? टाटा संस के नियमों के मुताबिक AGM के लिए कम से कम 5 सदस्यों की व्यक्तिगत मौजूदगी जरूरी है। साथ ही सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) की ओर से संयुक्त रूप से नामित प्रतिनिधि की मौजूदगी भी जरूरी है। बोर्ड मीटिंग नहीं हो पाने के कारण दोनों ट्रस्ट संयुक्त प्रतिनिधि का नाम तय नहीं कर सके। यह नियम तब तक लागू है, जब तक दोनों ट्रस्टों के पास टाटा संस की कम से कम 40% हिस्सेदारी है। फिलहाल SRTT और SDTT के पास करीब 51% और पूरे टाटा ट्रस्ट्स नेटवर्क के पास करीब 66% हिस्सेदारी बताई गई है। सवाल 2: SRTT की बैठक क्यों नहीं हो पा रही? महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने मई में SRTT के बोर्ड गठन से जुड़ी जांच को लेकर निर्देश जारी किए थे। इसके बाद से ट्रस्ट की बैठक नहीं हो सकी है। इसी वजह से AGM के लिए संयुक्त प्रतिनिधि के नाम पर भी फैसला नहीं हो पाया। सवाल 3: विवाद किस कानून से जुड़ा है? मामला महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट की धारा 30A (2) से जुड़ा है। यह प्रावधान 2025 के संशोधन के जरिए लागू किया गया था। इसके तहत किसी पब्लिक ट्रस्ट के बोर्ड में लाइफटाइम या परमानेंट ट्रस्टियों की संख्या कुल ट्रस्टियों के 25% तक सीमित की गई है। SRTT का तर्क है कि यह प्रावधान नया है और इसे पहले से की गई नियुक्तियों पर लागू नहीं किया जा सकता। सवाल 4: AGM टलने से कौन से फैसले अटके? AGM स्थगित होने से कंपनी के तीन अहम एजेंडे फिलहाल अटक गए हैं: सवाल 5: एन चंद्रशेखरन और नए चेयरमैन की स्थिति क्या है? एन चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को स्पष्ट किया था कि वह टाटा संस के चेयरमैन पद से हट रहे हैं और अगले कार्यकाल के लिए पद पर नहीं रहेंगे। हालांकि, वह टाटा संस के डायरेक्टर भी हैं। AGM स्थगित होने के बाद वह अगली बैठक होने तक डायरेक्टर पद पर बने रहेंगे। दूसरी ओर, नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। SDTT ने 13 अगस्त को नए चेयरमैन के चयन के लिए कमेटी बनाने का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन SRTT की बैठक नहीं होने से प्रक्रिया आगे बढ़ने में अड़चन आ सकती है। सवाल 6: क्या AGM स्थगित करने को लेकर नियम स्पष्ट हैं? टाटा संस के आर्टिकल 87 में कोरम पूरा नहीं होने की स्थिति में बैठक स्थगित करने का प्रावधान है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक यदि SRTT और SDTT का संयुक्त प्रतिनिधि आगे भी नियुक्त नहीं हो पाता है, तो स्थगित AGM को किस तरह आगे बढ़ाया जाएगा, इस स्थिति को लेकर नियमों में स्पष्टता नहीं है। सवाल 7: टाटा ट्रस्ट्स में पिछले एक साल से किन मुद्दों पर मतभेद? पिछले एक साल में टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टियों के बीच बोर्ड में प्रतिनिधित्व, नए ट्रस्टियों की नियुक्ति, टाटा संस की संभावित लिस्टिंग और एयर इंडिया, टाटा डिजिटल व टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कारोबारों में पूंजी आवंटन को लेकर मतभेद सामने आए हैं। इन मतभेदों के बीच कुछ बड़े इस्तीफे भी हुए हैं। टाटा समूह के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम? टाटा संस की AGM का पहली बार स्थगित होना सिर्फ एक कॉरपोरेट बैठक का टलना नहीं है। इसका सीधा असर कंपनी के वित्तीय फैसलों, बोर्ड में नियुक्तियों और नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। अब अगली बैठक कब और किस तरह होती है, इस पर टाटा संस के साथ-साथ पूरे टाटा ट्रस्ट्स की आगे की रणनीति भी निर्भर करेगी।
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Petrol

Petrol Export पर बड़ी राहत: Export Duty हुई Zero, Diesel और ATF Tax में भी कटौती

पेट्रोल-डीजल (Petrol- Diesel) की कीमतों और तेल कंपनियों से जुड़ी खबरों के बीच केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। सरकार ने Petrol, Diesel और Aviation Turbine Fuel (ATF) के Export पर लगने वाले शुल्क में कटौती की है। नए बदलाव के बाद पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी अब पूरी तरह खत्म हो गई है। वहीं डीजल और ATF पर भी शुल्क कम किया गया है। सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और पेट्रोलियम उत्पादों के दाम पर लगातार नजर बनी हुई है। Petrol Export पर अब कोई Duty नहीं नई दरों के मुताबिक पेट्रोल के Export पर लगने वाली ₹3.5 प्रति लीटर की ड्यूटी को घटाकर Zero कर दिया गया है। यानी भारतीय कंपनियां अब पेट्रोल का निर्यात करते समय इस अतिरिक्त शुल्क का भुगतान नहीं करेंगी। तेल क्षेत्र से जुड़े कारोबार के लिए इसे अहम राहत माना जा रहा है। खासकर उन कंपनियों के लिए इसका महत्व बढ़ जाता है, जिनकी रिफाइनरी क्षमता घरेलू जरूरतों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई पर भी निर्भर करती है। Diesel Export Duty भी हुई कम सरकार ने डीजल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में भी कटौती की है। डीजल पर Export Duty अब ₹24 प्रति लीटर होगी। इससे पहले यह दर ₹25.5 प्रति लीटर थी। यानी डीजल के निर्यात पर कंपनियों को ₹1.5 प्रति लीटर की राहत मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रिफाइनरी उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति के लिहाज से यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ATF पर भी घटा Export Tax हवाई ईंधन यानी Aviation Turbine Fuel (ATF) के निर्यात पर भी शुल्क कम किया गया है। इसकी दर ₹22 प्रति लीटर से घटाकर ₹19.5 प्रति लीटर कर दी गई है। ATF पर शुल्क में कमी से एविएशन फ्यूल के निर्यात कारोबार को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि इसका सीधा असर घरेलू विमान किराए या घरेलू ATF की कीमत पर पड़ेगा, ऐसा अभी कहना सही नहीं होगा। क्या Petrol-Diesel के दाम भी होंगे कम? सरकार के इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आम लोगों को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलेगी? यह समझना जरूरी है कि Export Duty में कटौती सीधे घरेलू पेट्रोल-डीजल की Retail Price कम होने की गारंटी नहीं देती। मौजूदा बदलाव मुख्य रूप से विदेश भेजे जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू शुल्क से जुड़ा है। इसलिए पेट्रोल पंप पर कीमत घटने की उम्मीद को इस फैसले से सीधे जोड़ना जल्दबाजी होगी। Windfall Tax क्यों लगाया गया था? Windfall Tax का इस्तेमाल सरकार ऐसे समय करती है, जब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की वजह से तेल कंपनियों को सामान्य से काफी ज्यादा मुनाफा होने की संभावना बनती है। इसका उद्देश्य उस अतिरिक्त लाभ पर सरकार का हिस्सा सुनिश्चित करना होता है। भारत में पेट्रोलियम उत्पादों पर Export Levy में समय-समय पर बदलाव किए जाते रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, रिफाइनरी मार्जिन और वैश्विक बाजार की स्थिति जैसे कई कारक इन दरों को प्रभावित करते हैं। सरकार की नजर International Oil Market पर पेट्रोलियम उत्पादों पर Export Duty में यह बदलाव बताता है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय Oil Market की परिस्थितियों पर लगातार नजर रख रही है। जरूरत के मुताबिक शुल्क बढ़ाया या घटाया जा सकता है। पेट्रोल पर Export Duty का पूरी तरह हटना, जबकि डीजल और ATF पर शुल्क कम होना, तेल कंपनियों के लिए फिलहाल सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सरकार के अगले फैसलों पर सबकी नजर रहेगी। आम लोगों के लिए क्या मायने? सीधी बात यह है कि पेट्रोल Export पर Duty Zero हो गई है, Diesel पर ₹24 और ATF पर ₹19.5 प्रति लीटर शुल्क लागू होगा। यह फैसला मुख्य रूप से Export Market से जुड़ा है। घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर इसका असर अलग-अलग परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। ऐसे में अगर आप पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तुरंत बड़ी कटौती की उम्मीद कर रहे हैं, तो फिलहाल इंतजार करना बेहतर होगा। सरकार के अगले कदम और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें ही आगे की तस्वीर साफ करेंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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कारोबार से आत्मनिर्भरता तक India की नई उड़ान

कारोबार से आत्मनिर्भरता तक India की नई उड़ान

India की आजादी की कहानी सिर्फ राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है। आज देश की पहचान एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, मजबूत कारोबारी बाजार और दुनिया के सामने उभरते नए औद्योगिक केंद्र के रूप में भी बन रही है। देश में मैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप, डिजिटल कारोबार, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वदेशी उद्योगों को लगातार बढ़ावा मिला है। छोटे कारोबार से लेकर बड़े उद्योग समूहों तक, भारतीय कंपनियां अब घरेलू बाजार के साथ-साथ वैश्विक बाजार में भी अपनी जगह मजबूत कर रही हैं। स्टार्टअप से बदली कारोबार की तस्वीर भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम युवाओं के लिए रोजगार और नए अवसरों का बड़ा माध्यम बना है। फिनटेक, एडटेक, हेल्थटेक, ई-कॉमर्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियां तेजी से आगे बढ़ी हैं। छोटे शहरों के युवा भी अब बड़े कारोबारी आइडिया के साथ बाजार में उतर रहे हैं। मैन्युफैक्चरिंग पर बढ़ा जोर भारत में स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने से इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, डिफेंस, मोबाइल निर्माण और कई अन्य क्षेत्रों में निवेश बढ़ा है। इसका असर रोजगार के अवसरों और सप्लाई चेन पर भी दिखाई दे रहा है। भारत अब सिर्फ एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि दुनिया के लिए उत्पादन केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। डिजिटल इंडिया बना कारोबार की ताकत डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन सेवाओं ने कारोबार को आम लोगों तक पहुंचाने का काम किया है। UPI जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म ने छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक भुगतान के तरीके को आसान बनाया है। इससे देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम आजादी के इस पर्व पर भारत की आर्थिक यात्रा एक ऐसे देश की तस्वीर दिखाती है जो अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ दुनिया के बाजार में भी मजबूत भागीदारी चाहता है। स्वदेशी उत्पादन, स्थानीय कारोबार और भारतीय उद्यमिता का बढ़ता प्रभाव इसी बदलते भारत की कहानी कहता है। आज का भारत सिर्फ बाजार नहीं बना रहा, बल्कि अपने कारोबार, तकनीक और प्रतिभा के दम पर दुनिया में अपनी आर्थिक पहचान भी मजबूत कर रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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सोना-चांदी आज: 14 अगस्त को दोनों की कीमतों में गिरावट, जानें ताजा भाव और आगे का अनुमान

सोने-चांदी की कीमतों में 14 अगस्त को गिरावट देखने को मिली। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का भाव 10 ग्राम पर 708 रुपए घटकर 1,52,363 रुपए रह गया। 13 अगस्त को यह 1,53,071 रुपए था। वहीं, चांदी की कीमत भी कम हुई। एक किलो चांदी 386 रुपए गिरकर 2,33,842 रुपए पर आ गई, जबकि गुरुवार को इसका भाव 2,34,228 रुपए था। शहर बदलने पर क्यों बदल जाता है सोने का भाव? सोने की कीमत हर शहर में थोड़ी अलग हो सकती है। इसके पीछे कई वजहें होती हैं— ऑल टाइम हाई से सोना-चांदी काफी नीचे इस साल सोने-चांदी में बड़ी तेजी के बाद अब कीमतों में गिरावट आई है। 31 दिसंबर 2025 को सोना करीब 1.33 लाख रुपए था, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के स्तर तक पहुंच गया था। मौजूदा भाव के मुकाबले यह करीब 23,758 रुपए नीचे है। चांदी 31 दिसंबर 2025 को करीब 2.30 लाख रुपए थी और 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑल टाइम हाई तक पहुंच गई थी। मौजूदा भाव के मुकाबले इसमें करीब 1.52 लाख रुपए की गिरावट आ चुकी है। साल के अंत तक फिर बढ़ सकते हैं दाम कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक, मौजूदा गिरावट के बाद सोने-चांदी में निवेश का मौका बन सकता है। हालांकि, उनका सुझाव है कि एकमुश्त निवेश करने के बजाय धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर हो सकता है। उनके अनुमान के अनुसार, साल के अंत तक सोना करीब 1.60 लाख रुपए और चांदी 2.80 लाख रुपए तक पहुंच सकती है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान 1. BIS हॉलमार्क जरूर देखेंसोना खरीदते समय BIS हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदें। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता की जानकारी मिलती है। 2. भाव और वजन क्रॉस चेक करेंखरीदारी से पहले सोने का वजन और उस दिन का बाजार भाव जरूर जांचें। 24, 22 और 18 कैरेट सोने के भाव अलग-अलग होते हैं। चांदी असली है या नकली? इन तरीकों से पहचानें नोट: IBJA के रेट आम तौर पर बेस/बुलियन रेट होते हैं। ज्वेलरी खरीदते समय GST, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क जुड़ने से ग्राहक द्वारा चुकाई जाने वाली अंतिम कीमत अधिक हो सकती है।
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WPI

WPI Data July: महंगाई में मामूली कमी से राहत, खाने-पीने की चीजों की कीमतें बनीं चुनौती

महंगाई को लेकर जुलाई के आंकड़ों ने थोड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन आम आदमी की परेशानी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। Wholesale Price Inflation यानी WPI Inflation जुलाई में घटकर 9.78% रह गई, जबकि जून में यह 9.87% थी। यानी एक महीने में थोक महंगाई दर में मामूली कमी दर्ज की गई। हालांकि, आंकड़ों की तस्वीर सिर्फ राहत वाली नहीं है। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी ने महंगाई के दबाव को बनाए रखा है। दूसरी ओर Fuel और Electricity सेक्टर में कुछ नरमी देखने को मिली, जिससे कुल थोक महंगाई दर को नीचे आने में मदद मिली। July WPI Inflation में मामूली गिरावट जुलाई में WPI Inflation का 9.78% पर आना अर्थव्यवस्था के लिए हल्की राहत माना जा सकता है। जून में यह आंकड़ा 9.87% था। यानी थोक स्तर पर कीमतों का दबाव थोड़ा कम हुआ है। हालांकि, सिर्फ 0.09 प्रतिशत अंक की गिरावट को बड़ी राहत कहना जल्दबाजी होगी। बाजार में कई जरूरी सामान की कीमतें अभी भी उपभोक्ताओं के बजट पर असर डाल रही हैं। Food Prices ने बढ़ाई चिंता महंगाई की सबसे बड़ी चिंता फिलहाल Food Prices को लेकर है। खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घर के मासिक बजट पर पड़ता है। सब्जियां, खाद्य उत्पाद और रोजमर्रा के इस्तेमाल की दूसरी चीजें महंगी होने पर परिवारों का खर्च बढ़ जाता है। यही वजह है कि थोक महंगाई में मामूली गिरावट के बावजूद आम लोगों को बाजार में राहत उतनी महसूस नहीं होती। Fuel और Electricity से मिली राहत जुलाई के आंकड़ों में Fuel & Power सेक्टर ने कुछ राहत दी। ईंधन और बिजली की कीमतों में नरमी का असर थोक महंगाई के कुल आंकड़े पर पड़ा। ऊर्जा की कीमतें अर्थव्यवस्था के लगभग हर हिस्से को प्रभावित करती हैं। Transport से लेकर Manufacturing तक, ईंधन की लागत बढ़ने पर उसका असर कई दूसरे उत्पादों की कीमतों पर भी दिखाई देता है। ऐसे में इस क्षेत्र में नरमी महंगाई के लिए सकारात्मक संकेत है। WPI और Retail Inflation में अंतर समझना जरूरी यहां एक बात समझना जरूरी है कि WPI Inflation और Retail Inflation एक जैसी चीजें नहीं हैं। WPI यानी Wholesale Price Index थोक बाजार में वस्तुओं की कीमतों में बदलाव को मापता है। वहीं Retail Inflation यानी CPI आम उपभोक्ता के स्तर पर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव को दर्शाता है। इसलिए WPI में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि बाजार में हर सामान सस्ता हो गया है। किसी एक श्रेणी में कीमतें घट सकती हैं, जबकि दूसरी जरूरी वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर? जुलाई के आंकड़ों को देखें तो तस्वीर मिली-जुली है। एक तरफ थोक महंगाई में थोड़ी कमी आई है और Fuel-Power सेक्टर से राहत मिली है। दूसरी तरफ खाद्य वस्तुओं की कीमतें लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं। घर चलाने वाले परिवारों के लिए असली राहत तब मानी जाएगी, जब रोजमर्रा के खाने-पीने के सामान की कीमतों में भी स्थिरता आए। सिर्फ महंगाई दर में मामूली गिरावट से घरेलू बजट पर दबाव तुरंत कम नहीं होता। आगे किन चीजों पर रहेगी नजर? आने वाले महीनों में मानसून, कृषि उत्पादन, खाद्य पदार्थों की Supply, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें और घरेलू मांग महंगाई की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल जुलाई के WPI आंकड़ों से इतना जरूर कहा जा सकता है कि महंगाई के मोर्चे पर दबाव थोड़ा कम हुआ है, लेकिन पूरी तरह राहत की तस्वीर अभी सामने नहीं आई है। Food Prices में स्थिरता आने पर ही आम लोगों को महंगाई से वास्तविक राहत महसूस हो सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sensex

Sensex-Nifty में गिरावट: 250 अंक टूटा सेंसेक्स, Banking और IT Stocks में भारी बिकवाली

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत निवेशकों के लिए कुछ मायूस करने वाली रही। Sensex करीब 250 अंक फिसलकर 77,700 के आसपास आ गया, वहीं Nifty भी करीब 100 अंक नीचे कारोबार करता नजर आया। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव Banking और IT Stocks में देखने को मिला। सुबह के कारोबार में बिकवाली बढ़ने के साथ ही निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि बाजार दिन के अंत तक इस कमजोरी से कितना उबर पाता है। पिछले कुछ सत्रों से शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, ऐसे में छोटी सी खबर भी सेंटीमेंट पर असर डाल रही है। Banking और IT शेयरों में क्यों बढ़ी बिकवाली? गुरुवार को बाजार की कमजोरी में बैंकिंग और IT सेक्टर की अहम भूमिका रही। IT कंपनियों के शेयरों में बिकवाली से इंडेक्स पर दबाव बढ़ा। दूसरी ओर बैंकिंग शेयरों में भी निवेशकों ने मुनाफावसूली का रुख अपनाया। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा माहौल में निवेशक नए दांव लगाने से पहले ग्लोबल संकेतों और कंपनियों से जुड़े अपडेट का इंतजार कर रहे हैं। यही वजह है कि मजबूत कंपनियों के शेयरों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। पिछले कारोबारी सत्र में भी बाजार रहा कमजोर बुधवार का कारोबारी सत्र भी भारतीय शेयर बाजार के लिए अच्छा नहीं रहा था। Sensex 188 अंक की गिरावट के साथ 77,966.35 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 36 अंक टूटकर 24,435.95 के स्तर पर रहा। IT Stocks में कमजोरी खास तौर पर नजर आई। TCS के शेयर में भी तेज गिरावट दर्ज की गई थी। इससे IT इंडेक्स का प्रदर्शन प्रभावित हुआ और बाजार का मूड कमजोर बना रहा। Global Market से मिले-जुले संकेत घरेलू बाजार के अलावा विदेशी बाजारों के संकेत भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं। अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों और Federal Reserve की संभावित ब्याज दरों को लेकर बाजार की नजर बनी हुई है। वहीं, Middle East में तनाव और Crude Oil की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय है। कच्चा तेल महंगा होने पर भारत के आयात बिल और महंगाई पर असर पड़ सकता है, इसलिए निवेशक इस मोर्चे पर भी सतर्क हैं। Tata Group के शेयरों पर भी नजर इन सबके बीच Tata Group Stocks भी बाजार की निगाह में हैं। Tata Sons से जुड़े घटनाक्रम के बाद समूह की कई कंपनियों के शेयरों में हलचल देखने को मिली है। निवेशक अब कंपनियों के अगले कदम और इससे जुड़े संभावित असर को समझने की कोशिश कर रहे हैं। आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल? फिलहाल बाजार में साफ तेजी के बजाय volatility यानी उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है। अगर ग्लोबल संकेतों में सुधार आता है और Banking तथा IT Stocks में खरीदारी लौटती है तो बाजार को सहारा मिल सकता है। वहीं Crude Oil और Geopolitical Tension बढ़ने पर दबाव दोबारा मजबूत हो सकता है। निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि बाजार की हर छोटी गिरावट या तेजी को देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय कंपनियों के फंडामेंटल और व्यापक बाजार संकेतों पर नजर रखें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tata संस के Chairman N Chandrasekaran ने दिया Resign

Tata संस के Chairman N Chandrasekaran ने दिया Resign

Tata संस के Chairman N Chandrasekaran ने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है। हालांकि, वे फरवरी 2027 तक अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे, ताकि नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी की जा सके। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा समूह के भीतर पिछले कुछ समय से नेतृत्व और भविष्य की रणनीतियों को लेकर मतभेद सामने आ रहे थे। बताया जा रहा है कि नोएल टाटा और एन. चंद्रशेखरन के बीच कुछ अहम मुद्दों पर विचारों का अंतर था। इसके साथ ही टाटा ट्रस्ट के भीतर भी खींचतान और नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज थी, जिसे इस फैसले की एक बड़ी वजह माना जा रहा है। एन. चंद्रशेखरन ने साल 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने कई बड़े फैसले लिए और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान को और मजबूत किया। एयर इंडिया के अधिग्रहण से लेकर विभिन्न कारोबारी क्षेत्रों में विस्तार तक, उनके कार्यकाल को महत्वपूर्ण माना जाता है। जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में टाटा समूह नए नेतृत्व की तलाश और संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर फोकस करेगा। फिलहाल कंपनी की ओर से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर आधिकारिक प्रक्रिया जारी है। टाटा समूह के करोड़ों निवेशकों, कर्मचारियों और कारोबार से जुड़े लोगों की नजर अब इस बात पर है कि चंद्रशेखरन के बाद समूह की कमान किसके हाथों में जाएगी और भविष्य की रणनीति क्या होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Share Market

Share Market Crash: Crude Oil से Global Tension तक, क्यों लाल हुआ बाजार?

बुधवार को शेयर बाजार (Share Market) खुलते ही माहौल कुछ ऐसा रहा कि निवेशकों की नजरें स्क्रीन पर टिक गईं। Sensex करीब 600 अंक तक फिसल गया, वहीं Nifty 50 में भी कमजोरी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बिकवाली बढ़ने से बाजार का कुल मार्केट कैप भी घटा और निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹2 लाख करोड़ तक की कमी आने की बात सामने आई। आखिर बाजार में अचानक इतनी गिरावट क्यों आई? इसके पीछे घरेलू के साथ-साथ कई Global Factors भी जिम्मेदार माने जा रहे हैं। Crude Oil ने बढ़ाई Market की चिंता शेयर बाजार की गिरावट में सबसे अहम वजहों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने से भारत के लिए आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर रुपये और महंगाई पर पड़ने की आशंका रहती है। महंगा तेल कंपनियों की लागत भी बढ़ा सकता है। यही वजह है कि Crude Oil में तेजी आते ही बाजार में अक्सर सावधानी बढ़ जाती है। Middle East Tension का असर मध्य पूर्व में तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। खासकर तेल की सप्लाई और Strait of Hormuz से जुड़े घटनाक्रम पर दुनियाभर के बाजारों की नजर है। अगर तनाव लंबा खिंचता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आने का खतरा बना रहता है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह अच्छी खबर नहीं मानी जाती। Global Market से भी नहीं मिला मजबूत Support भारतीय शेयर बाजार अकेले नहीं चलता। दुनिया के बड़े बाजारों में होने वाली हलचल का असर यहां भी दिखाई देता है। अमेरिका समेत प्रमुख बाजारों में आर्थिक नीतियों और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क रखा। ऐसे माहौल में विदेशी निवेशक जोखिम कम करने के लिए बिकवाली कर सकते हैं, जिससे घरेलू बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनता है। Inflation Data पर Investors की नजर महंगाई के आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि Inflation का अगला रुख ब्याज दरों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों को किस तरह प्रभावित करेगा। ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बढ़ने पर शेयरों में Volatility बढ़ना स्वाभाविक है। कौन-कौन से Sector दबाव में रहे? बाजार में गिरावट का असर कई सेक्टर्स पर दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में बड़ी संख्या में सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में रहे। हालांकि कुछ चुनिंदा क्षेत्रों, खासकर Metal और PSU Bank Stocks, में खरीदारी भी देखने को मिली। इससे साफ है कि निवेशक पूरी तरह बाजार से बाहर नहीं निकल रहे, बल्कि मौजूदा परिस्थितियों में ज्यादा सावधानी से पैसा लगा रहे हैं। क्या Investors को घबराने की जरूरत है? Sensex में 600 अंकों की गिरावट निश्चित रूप से बड़ी नजर आती है, लेकिन सिर्फ एक दिन की कमजोरी को देखकर इसे बड़ी Market Crash की शुरुआत मानना सही नहीं होगा। फिलहाल बाजार की नजर Crude Oil Prices, Middle East Tension, Global Cues और Inflation Data पर है। इन मोर्चों पर हालात सुधरते हैं तो बाजार में तेजी से रिकवरी भी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव में और बढ़ोतरी बाजार की परेशानी बढ़ा सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Vishwas Sarang

Vishwas Sarang को बहनों का बेशुमार प्यार, Narela Rakshabandhan Mahotsav में बना नया उत्साह

नरेला विधानसभा क्षेत्र में चल रहे Rakshabandhan Mahotsav 2026 में रविवार को भाई-बहन के रिश्ते की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। वार्ड नंबर 36, 37 और 70 में आयोजित कार्यक्रम के पांचवें दिन 24 हजार 604 बहनों ने मंत्री Vishwas Sarang को रक्षासूत्र बांधा। बहनों ने राखी बांधकर उनके प्रति स्नेह और आशीर्वाद जताया। कार्यक्रम में पहुंचते ही मंत्री विश्वास सारंग का स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। ढोल-ताशों और DJ की गूंज के बीच उन्हें बग्गी से मुख्य कार्यक्रम स्थल तक ले जाया गया। इस दौरान आतिशबाजी भी हुई। मंच पर पहुंचने के बाद सारंग ने बहनों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। बहनों के प्यार को बताया अपनी ताकत रक्षाबंधन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वास सारंग ने कहा कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच विश्वास, स्नेह और अपनत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में बहनों का प्यार और आशीर्वाद मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। कार्यक्रम में पहुंचीं बहनों से उन्होंने राखी बंधवाई और उनका आशीर्वाद लिया। सारंग ने कहा कि लाखों बहनों का स्नेह और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। चौथे दिन भी उमड़ा था बहनों का सैलाब नरेला रक्षाबंधन महोत्सव के चौथे दिन भी बड़ी संख्या में बहनें कार्यक्रम में पहुंची थीं। उस दिन 31,117 बहनों ने मंत्री विश्वास सारंग को रक्षासूत्र बांधा था। आयोजकों के अनुसार, पिछले साल के महोत्सव में कुल 1 लाख 84 हजार 632 बहनों ने रक्षासूत्र बांधा था। इस बार भी लगातार बढ़ रही भागीदारी को देखते हुए पिछले साल का आंकड़ा पार होने की उम्मीद जताई जा रही है। 7 सितंबर को इन दो वार्डों में होगा आयोजन नरेला रक्षाबंधन महोत्सव का अगला चरण 7 सितंबर 2026 को होगा। इस दिन दो वार्डों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में भी बड़ी संख्या में बहनों के शामिल होने की उम्मीद है। महोत्सव के जरिए रक्षाबंधन के पारंपरिक रिश्ते को सामाजिक जुड़ाव और भाईचारे के भाव से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। नरेला क्षेत्र में लगातार कई दिनों से चल रहे इस आयोजन में बहनों की बड़ी भागीदारी देखने को मिल रही है। पांचवें दिन 24,604 रक्षासूत्र बांधे जाने के साथ महोत्सव का उत्साह और बढ़ गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM रेखा गुप्ता

Satya Niketan हादसे पर CM रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला, Deputy Commissioner समेत 5 Suspend

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। पांच मंजिला इमारत के अचानक गिरने से अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के बाद CM रेखा गुप्ता ने जिम्मेदारी तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। MCD के साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत 5 अधिकारियों को Suspend कर दिया गया है। सरकार के इस एक्शन के बाद नगर निगम के कामकाज और इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हादसे के बाद MCD में बड़ा Action सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद MCD ने पांच अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। इनमें साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर सहित इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि इमारत की हालत को लेकर पहले कोई शिकायत या नोटिस जारी हुआ था या नहीं और निर्माण या मरम्मत के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं। PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी इमारत बताया जा रहा है कि जिस बिल्डिंग का हिस्सा ढहा, उसका इस्तेमाल PG accommodation के तौर पर किया जा रहा था। हादसे के समय वहां कई लोग मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। धूल का गुबार उठ गया और लोग मदद के लिए मौके पर पहुंचने लगे। इसके बाद दिल्ली फायर सर्विस, NDRF और अन्य बचाव दलों ने मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। 7 लोगों की मौत, कई घायल रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे से कई लोगों को बाहर निकाला गया। हादसे में अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद आसपास के लोगों में भी डर का माहौल है। स्थानीय स्तर पर दूसरी पुरानी और कमजोर इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। Building Owner भी पुलिस की गिरफ्त में मामले में पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक हरिराम के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस ने उसकी तलाश के लिए कई टीमें लगाई थीं। बाद में उसे भिवाड़ी से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस अब हादसे से जुड़े दस्तावेज, बिल्डिंग की स्थिति और निर्माण या मरम्मत से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे और लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। आसपास की इमारतों की भी जांच सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने आसपास की इमारतों की स्थिति को लेकर भी जांच शुरू की है। अधिकारियों की नजर खास तौर पर उन भवनों पर है जो पुराने हैं या जिनमें निर्माण और मरम्मत का काम चल रहा है। इस घटना ने दिल्ली में old buildings, PG और construction safety को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर इमारत में पहले से कोई खामी थी, तो उसे समय रहते क्यों नहीं रोका गया? सरकार के Action से उठे कई सवाल MCD के पांच अधिकारियों का निलंबन सरकार की ओर से उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, असली तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। सत्य निकेतन की इस घटना ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच में हादसे की असली वजह क्या सामने आती है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM House

CM House March पर Police का पहरा, Hamidia में Intern Doctors से धक्का-मुक्की

अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टर सोमवार को मुख्यमंत्री आवास (CM House) की ओर बढ़ रहे थे। लेकिन हमीदिया अस्पताल के पास पुलिस ने उनका रास्ता रोक दिया। डॉक्टरों को आगे जाने से रोकने के लिए पुलिस ने आसपास के रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी। इस दौरान डॉक्टरों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। प्रदर्शन को देखते हुए हमीदिया अस्पताल परिसर और आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए मौके पर Water Cannon भी तैयार रखा गया। CM House की तरफ मार्च करना चाहते थे डॉक्टर इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। इसी सिलसिले में डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने का फैसला किया। डॉक्टरों का समूह हमीदिया अस्पताल से आगे बढ़ने लगा तो पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। पुलिस की Barricading के बाद डॉक्टरों ने मौके पर नारेबाजी शुरू कर दी। आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान से आगे नहीं जाने के लिए समझाती रही। चारों तरफ से रास्ते किए गए बंद प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हमीदिया के आसपास कई रास्तों को बंद कर दिया। बैरिकेड लगाकर आवाजाही को नियंत्रित किया गया। मौके पर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गई, ताकि भीड़ को संभाला जा सके। Water Cannon की मौजूदगी से साफ था कि प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी में था। हालांकि, डॉक्टरों का प्रदर्शन अपनी मांगों को लेकर जारी रहा। मांगों पर सरकार से जवाब चाहते हैं Intern Doctors प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। CM House तक मार्च के जरिए उनका उद्देश्य सीधे सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचना था। फिलहाल पुलिस ने डॉक्टरों को मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने से रोक दिया है। हमीदिया अस्पताल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और स्थिति पर पुलिस लगातार नजर बनाए हुए है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा डॉक्टरों की मांगों और सरकार की ओर से संभावित बातचीत को लेकर है। अब देखना होगा कि प्रदर्शन के बाद प्रशासन और इंटर्न डॉक्टरों के बीच क्या समाधान निकलता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold

Gold Rate Today: सोने की कीमत ₹2409 गिरी, चांदी भी ₹3967 सस्ती

सोना खरीदने वालों के लिए सोमवार को बाजार से थोड़ी राहत की खबर आई। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोने (Gold) और चांदी (Silver) दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। आपके दिए बाजार आंकड़ों के मुताबिक सोना करीब ₹2,409 और चांदी करीब ₹3,967 सस्ती हुई है। इसके बाद 10 ग्राम सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख, जबकि एक किलो चांदी करीब ₹2.35 लाख के आसपास पहुंच गई। हालांकि, अलग-अलग बाजार, शुद्धता और कारोबार के समय के हिसाब से रेट में अंतर हो सकता है। सोमवार को एक अन्य बाजार रिपोर्ट में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,52,590 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,36,240 प्रति किलो बताया गया। सोने के भाव में फिर आई नरमी पिछले कुछ समय से रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास कारोबार कर रहा Gold सोमवार को दबाव में नजर आया। घरेलू बाजार में भी इसकी कीमत में कमजोरी देखने को मिली। MCX पर अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स में भी गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत इससे कम है। अगर आप ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं तो ध्यान रखें कि दुकान पर मिलने वाला अंतिम रेट बाजार भाव से अलग हो सकता है। Silver Price Today: चांदी भी हुई सस्ती सोने के साथ चांदी में भी कमजोरी रही। चांदी करीब ₹3,967 प्रति किलो सस्ती होने के बाद लगभग ₹2.35 लाख प्रति किलो के स्तर पर आ गई है। हालांकि, सोमवार के अलग-अलग बाजार अपडेट में चांदी का भाव करीब ₹2.36 लाख प्रति किलो भी बताया गया है। इससे साफ है कि कारोबार के समय के साथ कीमतों में बदलाव हो रहा है। आखिर क्यों गिर रहे हैं सोना और चांदी? कीमती धातुओं में इस गिरावट का कनेक्शन सीधे ग्लोबल मार्केट से जुड़ा है। अमेरिका के रोजगार आंकड़े उम्मीद से मजबूत रहने के बाद वहां Federal Reserve की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें बदली हैं। मजबूत अमेरिकी जॉब डेटा के बाद सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना को लेकर दांव बढ़े हैं। इसका असर सोने पर पड़ा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में Spot Gold करीब 0.7% नीचे आया। वहीं Silver में भी लगभग 1% की गिरावट दर्ज की गई। अब आगे क्या होगा? अब बाजार की नजर अमेरिका से आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर है। इस सप्ताह PPI और CPI जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े जारी होने हैं। इनसे Federal Reserve की अगली ब्याज दर नीति को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में Gold और Silver में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। निवेशकों के साथ-साथ शादी या त्योहार के लिए खरीदारी करने वाले लोगों की भी बाजार पर नजर बनी हुई है। Gold खरीदते समय सिर्फ भाव न देखें अगर आप आज सोना खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो सिर्फ 10 ग्राम का बाजार भाव देखकर फैसला न लें। 22K या 24K purity, GST, making charges और ज्वेलर के अन्य शुल्क अंतिम कीमत को बदल सकते हैं। अलग-अलग शहरों और ज्वेलर्स के बीच भी रेट में अंतर हो सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले अपने स्थानीय ज्वेलर से उसी समय का ताजा रेट जरूर पता करें। बाजार में तेजी से बदलाव होने के कारण सुबह और शाम के भाव में भी अंतर देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sagar

Sagar में जहरीली शराब का कहर: 19 मौत, 112 मरीज भर्ती; Liquor Network पर पुलिस का शिकंजा

मध्य प्रदेश के सागर (Sagar) जिले में जहरीली शराब ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने का सिलसिला शुरू हुआ और देखते ही देखते अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती चली गई। अब तक 19 लोगों की मौत की बात सामने आई है, जबकि 112 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती बताए जा रहे हैं। मृतकों में पिता-पुत्र के शामिल होने की जानकारी ने इस घटना को और दर्दनाक बना दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। पुलिस ने लाइसेंसी शराब ठेकेदारों समेत 30 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। इनमें से 10 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। अधिकारियों की नजर अब उस पूरे नेटवर्क पर है, जिसके जरिए कथित तौर पर मिलावटी या जहरीली शराब लोगों तक पहुंची। शराब पीने के बाद बिगड़ी लोगों की तबीयत जानकारी के मुताबिक, सागर जिले के बंडा क्षेत्र में कई लोगों ने शराब का सेवन किया था। इसके बाद एक के बाद एक लोगों की तबीयत खराब होने लगी। कुछ लोगों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया। स्थानीय स्तर पर इलाज के बाद गंभीर मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। अस्पतालों में अचानक मरीजों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया। प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमों को भेजकर लोगों की जांच की जा रही है। प्रशासन यह भी पता लगाने में जुटा है कि कितने लोगों ने संदिग्ध शराब का सेवन किया था। 112 मरीजों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जहरीली शराब की आशंका के बाद अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या लगातार चिंता बढ़ा रही है। 112 लोगों के इलाज की जानकारी सामने आई है। इनमें कुछ मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में पहुंचकर स्थिति पर नजर रख रही हैं। अधिकारियों का फोकस इस बात पर है कि संदिग्ध शराब पीने वाले किसी व्यक्ति की हालत बिगड़ने पर उसे समय रहते अस्पताल पहुंचाया जा सके। पिता-पुत्र की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ इस हादसे में पिता-पुत्र की मौत की खबर ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है। एक ही परिवार के दो सदस्यों की जान जाने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना के बाद प्रभावित इलाकों में मातम का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि शराब की एक बोतल इतनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है। अब लोगों में अवैध और संदिग्ध शराब की बिक्री को लेकर डर भी है और गुस्सा भी। 30 नामजद आरोपियों पर FIR, 10 गिरफ्तार पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए 30 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। इनमें लाइसेंसी शराब कारोबार से जुड़े लोगों के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शराब की सप्लाई कहां से हुई और इसे किन लोगों तक पहुंचाया गया। अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी है। पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी है। जांच में जिस किसी की भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है। लाइसेंसी ठेकेदारों की भूमिका भी जांच के घेरे में मामले में लाइसेंसी शराब ठेकेदारों के नाम सामने आने के बाद आबकारी विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसियां यह पता कर रही हैं कि यदि शराब की बिक्री वैध दुकानों से हुई थी, तो उसमें मिलावट कैसे पहुंची। अधिकारियों की जिम्मेदारी और संभावित लापरवाही की भी जांच की जा रही है। प्रशासन की कोशिश है कि शराब के स्रोत से लेकर इसकी बिक्री तक पूरी चेन का पता लगाया जाए। जहरीली शराब की सप्लाई का नेटवर्क खंगाल रही पुलिस पुलिस को शक है कि इस मामले के पीछे सिर्फ कुछ स्थानीय लोगों का हाथ नहीं, बल्कि शराब की सप्लाई से जुड़ा बड़ा नेटवर्क भी हो सकता है। जांच एजेंसियां शराब की बोतल, लेबल और सप्लाई चैन से जुड़े हर पहलू की जांच कर रही हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जहरीली शराब लोगों तक कैसे पहुंची और इस लापरवाही के पीछे कौन जिम्मेदार है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। प्रशासन की नजर अब हर कड़ी पर सागर की इस घटना ने अवैध और मिलावटी शराब के कारोबार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग भी प्रभावित लोगों की निगरानी कर रहा है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल परिवार अपनों को खोने के दर्द में हैं और अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजन उनके जल्द ठीक होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगा कि इस जहरीली शराब की असली सप्लाई कहां से हुई और इस पूरे मामले में किसकी कितनी भूमिका थी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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