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IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 2026 और 2027 में 7% विकास दर रहने की उम्मीद

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने साल 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। वैश्विक तनाव, आर्थिक सुस्ती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ध्यान खींचा है। मजबूत घरेलू मांग और सर्विसेज सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन को भारत की तेज विकास दर की प्रमुख वजह माना गया है। IMF ने अक्टूबर 2026 की अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में भारत की विकास संभावनाओं को सकारात्मक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा आयात पर निर्भर कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं जहां दबाव का सामना कर रही हैं, वहीं भारत की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। 2027 में भी 7% ग्रोथ का अनुमान IMF ने 2026 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान में जुलाई के मुकाबले 0.6 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की है। वहीं, 2027 के लिए भी विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया गया है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2027 का अनुमान जुलाई के मुकाबले 0.3 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारत में विकास की संभावनाओं को लेकर उम्मीद बनी हुई है। IMF से पहले विश्व बैंक और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत की विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी कर चुकी हैं। चीन की सुस्ती के बीच भारत पर नजर रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती देखने को मिल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी गतिविधियों में तेजी ने भी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। भारत और चीन एशिया की आर्थिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि दोनों देशों की विकास संभावनाओं में अंतर दिखाई दे रहा है। IMF के अनुमान के अनुसार, चीन की विकास दर 2026 में 4.5% और 2027 में 4% रह सकती है। वैश्विक तनाव और ऊर्जा की ऊंची कीमतों को चीन की आर्थिक वृद्धि के सामने चुनौतियों में शामिल किया गया है। दुनिया की आर्थिक विकास दर पर दबाव IMF के मुताबिक, 2028 से 2031 के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था औसतन 3.2% की दर से बढ़ सकती है। यह 2000 से 2019 के बीच महामारी से पहले दर्ज औसत 3.7% की विकास दर से कम है। रिपोर्ट में वैश्विक तनाव, ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और ऊर्जा आयात पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले दबाव को आर्थिक विकास के लिए चुनौती बताया गया है। ऐसे माहौल में भारत की अनुमानित विकास दर अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई देती है। मजबूत घरेलू मांग और जनसांख्यिकी से मिल रहा सहारा भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे बढ़ता घरेलू बाजार, मजबूत मांग, अनुकूल जनसांख्यिकी और सुधारों को अहम कारक माना गया है। सर्विसेज सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन भी विकास दर को सहारा दे रहा है। हालांकि, बेहतर अनुमान के बावजूद चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय तनाव और वैश्विक मांग में कमजोरी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
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UPI

UPI Charges Update: ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% फीस, दिवाली तक टला फैसला

UPI Transaction Charges में डिजिटल पेमेंट करने वाले दुकानदारों और कारोबारियों के लिए UPI चार्ज से जुड़ा अहम अपडेट सामने आया है। ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% फीस लगाने की व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होनी थी, लेकिन त्योहारी सीजन को देखते हुए इसे दिवाली तक टालने की जानकारी सामने आई है। इससे त्योहारों के दौरान डिजिटल पेमेंट करने वाले कारोबारियों को फिलहाल राहत मिल सकती है। हालांकि, इस फैसले से जुड़ी नई तारीख और लागू होने वाली शर्तों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। इसलिए ग्राहकों और दुकानदारों को किसी भी बदलाव से पहले संबंधित दिशानिर्देशों पर ध्यान देना चाहिए। UPI Payment Charges: क्या है पूरा मामला? आज देश में छोटी दुकानों से लेकर बड़े शोरूम तक UPI के जरिए भुगतान किया जाता है। सब्जी खरीदने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग और बड़े बिलों का भुगतान करने तक, QR कोड स्कैन करना लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है। इसी बीच ₹2,000 से ज्यादा के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की चर्चा है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने वाली थी, लेकिन दिवाली के दौरान बाजार में बढ़ने वाली खरीदारी और डिजिटल लेनदेन को देखते हुए इसे आगे बढ़ाने की बात कही गई है। यहां समझना जरूरी है कि MDR का संबंध कारोबारी भुगतान से है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर UPI यूजर को पैसे भेजने या प्राप्त करने पर अतिरिक्त फीस देनी होगी। क्या PhonePe और Google Pay से पेमेंट करना होगा महंगा? UPI चार्ज की खबर सामने आने के बाद कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या PhonePe, Google Pay और दूसरे UPI ऐप से भुगतान करने पर अब अतिरिक्त पैसे देने होंगे। फिलहाल आम ग्राहकों को यह समझना चाहिए कि प्रस्तावित मर्चेंट चार्ज और व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI ट्रांसफर अलग-अलग हैं। सामान्य P2P ट्रांजैक्शन पर इस तरह का MDR लागू नहीं होता। इसी तरह, निर्धारित नियमों के तहत आने वाले छोटे मूल्य के मर्चेंट ट्रांजैक्शन भी इस चार्ज से बाहर रह सकते हैं। इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि ₹2,000 से अधिक का हर UPI पेमेंट महंगा हो जाएगा। दुकानदारों को क्यों मिल सकती है राहत? दिवाली के समय बाजारों में ग्राहकों की भीड़ बढ़ जाती है। कपड़े, मिठाई, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल और घरेलू सामान की दुकानों पर डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ता है। ऐसे में ट्रांजैक्शन चार्ज से जुड़े फैसले को आगे बढ़ाने से कारोबारियों को त्योहार के दौरान भुगतान व्यवस्था में बदलाव के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है। खासकर छोटे दुकानदारों के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके कारोबार में UPI पेमेंट की बड़ी भूमिका होती है। हालांकि, चार्ज किस पर और किन शर्तों के तहत लागू होगा, यह संबंधित आधिकारिक नियमों पर निर्भर करेगा। UPI Transaction Fee: कब लागू होगा नया नियम? ₹2,000 से अधिक के पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% फीस से जुड़े फैसले को दिवाली तक टालने की खबर सामने आई है। लेकिन नई लागू तारीख और अंतिम नियमों की पुष्टि आधिकारिक घोषणा से ही की जानी चाहिए। इसलिए ग्राहकों और कारोबारियों को फिलहाल किसी भी अपुष्ट जानकारी के आधार पर यह नहीं मानना चाहिए कि सभी UPI पेमेंट पर चार्ज लगने वाला है। UPI यूजर्स के लिए जरूरी सलाह UPI ने देश में डिजिटल भुगतान को आसान और तेज बनाया है। ऐसे में चार्ज से जुड़ी किसी भी नई व्यवस्था का असर समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि नियम किस प्रकार के ट्रांजैक्शन पर लागू होता है। आम यूजर्स को अपने सामान्य डिजिटल पेमेंट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। वहीं, दुकानदारों को किसी भी संभावित चार्ज के बारे में अपने बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर से जानकारी लेनी चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Stock Market

Stock Market Today: सेंसेक्स 600 अंक उछला, Nifty में 200 अंकों की तेजी; IT और Banking Stocks में खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में मंगलवार, 13 अक्टूबर को कारोबार के दौरान अच्छी तेजी देखने को मिली। शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स ने जोरदार वापसी की और 600 अंकों से ज्यादा की बढ़त दर्ज की। वहीं, निफ्टी भी करीब 200 अंक चढ़ गया। IT और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी बढ़ने से बाजार को सहारा मिला। सुबह करीब 10 बजे BSE Sensex 72,500 के ऊपर कारोबार कर रहा था, जबकि NSE Nifty 50 भी 22,500 के पार पहुंच गया। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों को राहत मिली। हालांकि, कई शेयरों में बिकवाली जारी रहने से बाजार की तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं रही। Sensex-Nifty में तेजी, निवेशकों को मिली राहत शेयर बाजार में मंगलवार को खरीदारी का माहौल मजबूत होता दिखाई दिया। सेंसेक्स करीब 660 अंक चढ़कर 72,585 के आसपास पहुंच गया। दूसरी ओर, निफ्टी में लगभग 202 अंकों की बढ़त दर्ज की गई और यह 22,565 के स्तर के करीब कारोबार करता नजर आया। पिछले सत्रों में बाजार पर दबाव देखने को मिला था। ऐसे में प्रमुख सूचकांकों में आई इस तेजी ने निवेशकों को कुछ राहत दी। हालांकि, बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। IT Stocks में सबसे ज्यादा हलचल मंगलवार को IT सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। HCL Technologies और Tata Consultancy Services (TCS) के शेयरों में मजबूत बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा Infosys और Tech Mahindra के शेयरों पर भी निवेशकों की नजर रही। IT कंपनियों के तिमाही नतीजों और कारोबार से जुड़े अपडेट का असर शेयरों पर दिखाई दिया। खासकर HCLTech के नतीजों से जुड़ी सकारात्मक खबरों ने सेक्टर में खरीदारी को बढ़ावा दिया। IT शेयरों में आई तेजी ने सेंसेक्स और निफ्टी को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई। Banking Stocks ने भी दिया बाजार का साथ IT शेयरों के साथ बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में भी निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई। HDFC Bank, State Bank of India (SBI), Bajaj Finance और Bajaj Finserv जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। बैंकिंग शेयरों में बढ़त का असर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर भी पड़ा। हालांकि, सभी सेक्टरों में एक जैसी तेजी नहीं रही। कुछ शेयरों में कमजोरी बनी रही, जिससे पता चलता है कि निवेशक चुनिंदा कंपनियों में ही पैसा लगा रहे थे। रुपये की मजबूती से बाजार को सहारा शेयर बाजार के अलावा मुद्रा बाजार में भी हलचल देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती से निवेशकों की धारणा को कुछ समर्थन मिला। रुपये की चाल पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कदमों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और डॉलर की वैश्विक स्थिति का असर पड़ता है। हालांकि, आने वाले दिनों में रुपये की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक हालात पर निर्भर करेगी। महंगाई और कच्चे तेल पर भी रहेगी नजर बाजार में तेजी के बावजूद निवेशकों की चिंताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। खुदरा महंगाई, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे समय में कंपनियों के तिमाही नतीजे भी महत्वपूर्ण हैं। बेहतर नतीजे पेश करने वाली कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है, जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वाले शेयरों पर दबाव बना रह सकता है। निवेशकों के लिए क्या है संकेत? सेंसेक्स और निफ्टी में आई तेजी बाजार के लिए राहत की खबर है, लेकिन इसे लगातार तेजी की गारंटी नहीं माना जा सकता। बाजार में निवेश करने से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, शेयर की कीमत और उससे जुड़े जोखिमों को समझना जरूरी है। कुल मिलाकर, 13 अक्टूबर को IT और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के दम पर भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती दिखाई। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि बाजार अपनी बढ़त को कितना बरकरार रखता है और आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेत किस तरह असर डालते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold Rate

Gold Rate Today: सोने की कीमत में बड़ी गिरावट, 10 ग्राम का भाव ₹1.48 लाख; ₹1.55 लाख तक जाने का अनुमान

Gold Rate में गिरावट से उन लोगों को थोड़ी राहत मिली है, जो गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं। पिछले दो दिनों में सोना करीब ₹1,750 सस्ता हुआ है। इसके बाद 10 ग्राम सोने का भाव लगभग ₹1.48 लाख पर आ गया है। हालांकि, कीमतों में इस गिरावट के बीच बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले समय में सोना फिर महंगा हो सकता है और इसका भाव ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। ऐसे में सोना खरीदने वालों के मन में सवाल है कि क्या मौजूदा गिरावट खरीदारी का सही मौका है या आने वाले दिनों में कीमतें और नीचे जा सकती हैं? आइए जानते हैं सोने के ताजा भाव और आगे की संभावनाओं के बारे में। Gold Rate Today: दो दिन में ₹1,750 की गिरावट Gold Rate में पिछले दो दिनों के दौरान करीब ₹1,750 की कमी आई है। इससे 10 ग्राम सोने का भाव लगभग ₹1.48 लाख रह गया है। कीमतों में इस बदलाव का असर उन लोगों के बजट पर पड़ सकता है, जो शादी-ब्याह या किसी खास मौके के लिए सोने के गहने खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, खरीदारी से पहले यह समझना जरूरी है कि बाजार में सोने का भाव उसकी शुद्धता और शहर के हिसाब से अलग हो सकता है। 24 कैरेट सोना आमतौर पर निवेश के लिए खरीदा जाता है, जबकि गहने बनाने में 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल अधिक होता है। इसके अलावा, गहनों की अंतिम कीमत में मेकिंग चार्ज और लागू टैक्स भी शामिल होते हैं। इसलिए केवल सोने का बाजार भाव देखकर खरीदारी का बजट तय करना पर्याप्त नहीं है। Gold Price Prediction: ₹1.55 लाख तक पहुंच सकता है सोना सोने की कीमतों में आई गिरावट के बावजूद बाजार में आगे तेजी की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, आने वाले समय में 10 ग्राम सोने का भाव ₹1.55 लाख तक पहुंच सकता है। हालांकि, यह एक अनुमान है, निश्चित भविष्यवाणी नहीं। सोने की कीमतों में तेजी या गिरावट कई कारकों पर निर्भर करती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति, अमेरिकी डॉलर की चाल, ब्याज दरों से जुड़ी नीतियां और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता सोने के भाव को प्रभावित कर सकती हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग बढ़ती है, तो इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। दूसरी ओर, बाजार की परिस्थितियां बदलने पर कीमतों में और गिरावट भी संभव है। Gold Price का आम लोगों के बजट पर क्या असर पड़ेगा? भारत में सोना खरीदना केवल निवेश का मामला नहीं है। शादियों, त्योहारों और पारिवारिक समारोहों में भी सोने के गहनों की खास जगह होती है। ऐसे में कीमतों में होने वाला बदलाव सीधे खरीदारों के बजट को प्रभावित करता है। दो दिनों में ₹1,750 की गिरावट उन लोगों के लिए राहत की खबर हो सकती है, जो लंबे समय से सोने के भाव कम होने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, खरीदारी का फायदा कितना होगा, यह खरीदे जाने वाले सोने की मात्रा, शुद्धता और गहनों के मेकिंग चार्ज पर भी निर्भर करेगा। यही वजह है कि सोना खरीदने से पहले अलग-अलग दुकानों के भाव की तुलना करना और बिल में सभी शुल्कों की जानकारी लेना जरूरी है। क्या अभी Gold खरीदना सही रहेगा? अगर आप शादी या किसी जरूरी पारिवारिक कार्यक्रम के लिए सोना खरीदने वाले हैं, तो अपनी जरूरत और बजट को प्राथमिकता दें। केवल इस उम्मीद में खरीदारी टालना कि कीमतें और गिरेंगी, हमेशा सही फैसला नहीं हो सकता। वहीं, निवेश के लिए सोना खरीदने वालों को बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव को समझना चाहिए। एक-दो दिन की गिरावट को कीमतों में लगातार कमी का संकेत मानना ठीक नहीं है। इसी तरह, भविष्य में भाव बढ़ने के अनुमान के आधार पर जल्दबाजी में निवेश करना भी जोखिम भरा हो सकता है। खरीदारी के समय इन बातों का ध्यान रखें: आगे क्या होगा सोने की कीमतों का? फिलहाल सोने का भाव करीब ₹1.48 लाख प्रति 10 ग्राम पर आने से खरीदारों को कुछ राहत मिली है। वहीं, कीमतों के ₹1.55 लाख तक पहुंचने का अनुमान यह संकेत देता है कि बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। आने वाले दिनों में सोना सस्ता होगा या महंगा, यह अंतरराष्ट्रीय बाजार और आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। ऐसे में खरीदारों के लिए बेहतर यही है कि वे ताजा कीमतों पर नजर रखें और अपनी जरूरत के मुताबिक फैसला लें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold Price

Gold Price Today: सोना ₹1,005 सस्ता, 10 ग्राम Gold ₹1.48 लाख पर

Gold Price की कीमतों में आज गिरावट दर्ज की गई है। सोना ₹1,005 सस्ता हो गया, जिसके बाद 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.48 लाख पर आ गया। सोने की कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को कुछ राहत मिल सकती है, जो शादी-ब्याह या त्योहारों के लिए गहने खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, सोने के भाव में रोजाना बदलाव होता है। ऐसे में खरीदारी करने से पहले अपने शहर में ताजा रेट की जानकारी लेना जरूरी है। Gold Rate Today: आज कितना सस्ता हुआ सोना? आज सोने की कीमत में ₹1,005 की गिरावट आई है। इसके बाद 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.48 लाख बताया जा रहा है। सोने की कीमतों पर नजर रखने वाले खरीदारों के लिए यह बदलाव अहम है, क्योंकि भाव में थोड़ी सी कमी भी बड़ी खरीदारी के दौरान कीमत पर असर डाल सकती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि 24 कैरेट सोना मुख्य रूप से निवेश के लिए खरीदा जाता है, जबकि गहने बनाने में आमतौर पर 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल होता है। इसलिए ज्वेलरी खरीदते समय 22 कैरेट का भाव भी जरूर चेक करें। सितंबर में भी ₹8,000 तक गिरा था सोने का भाव सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव पिछले महीने भी देखने को मिला था। सितंबर में सोना करीब ₹8,000 तक सस्ता हुआ था। अब एक बार फिर कीमतों में गिरावट आने से बाजार में सोने के अगले रुख को लेकर चर्चा बढ़ गई है। सोने के भाव पर केवल घरेलू मांग का असर नहीं पड़ता। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों की चाल, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई कारण गोल्ड रेट को प्रभावित करते हैं। इसी वजह से कभी सोने की कीमत तेजी से बढ़ती है, तो कभी इसमें गिरावट देखने को मिलती है। क्या अभी Gold खरीदना सही रहेगा? अगर आप लंबे समय से सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो मौजूदा भाव पर नजर रख सकते हैं। हालांकि, सिर्फ एक दिन की गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेना जरूरी नहीं है। आने वाले दिनों में कीमतें किस दिशा में जाएंगी, इसका निश्चित अनुमान लगाना मुश्किल है। खरीदारी से पहले अपने बजट और जरूरत को ध्यान में रखें। अगर गहने खरीद रहे हैं, तो सोने की कीमत के अलावा मेकिंग चार्ज और लागू GST को भी जोड़ें। साथ ही, हॉलमार्क वाला सोना खरीदना बेहतर रहता है। 22 और 24 कैरेट Gold Rate में क्या है अंतर? 24 कैरेट सोना अधिक शुद्ध होता है, जबकि 22 कैरेट सोने में अन्य धातुएं मिलाई जाती हैं, जिससे गहने बनाना आसान होता है। इसी कारण दोनों की कीमतों में अंतर रहता है। यह भी ध्यान रखें कि ₹1.48 लाख का भाव 10 ग्राम 24 कैरेट सोने के लिए बताया गया है। आपके शहर में वास्तविक कीमत अलग हो सकती है। खरीदारी से पहले स्थानीय ज्वेलर से ताजा रेट जरूर पता करें। Gold Price Today: आगे क्या रहेगा सोने का रुख? सोने की कीमत में आई आज की गिरावट ने खरीदारों का ध्यान खींचा है। सितंबर में भी करीब ₹8,000 की कमी दर्ज होने के बाद अब ₹1,005 की ताजा गिरावट बाजार के लिए चर्चा का विषय है। फिलहाल सोने की कीमतों में आगे तेजी आएगी या गिरावट जारी रहेगी, यह बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसलिए निवेश या खरीदारी का फैसला करने से पहले ताजा भाव और बाजार के रुझान को समझना जरूरी है। नोट: यह खबर उपलब्ध कराए गए सोने के भाव के आंकड़ों पर आधारित है। प्रकाशन से पहले ताजा रेट और सितंबर में हुई गिरावट की पुष्टि जरूर करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Stock Market

Stock Market Today: सेंसेक्स 500 अंक टूटा, Nifty में 150 अंकों की गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में सोमवार, 12 अक्टूबर को कारोबार के दौरान गिरावट देखने को मिली। एक समय बाजार में तेजी की उम्मीद नजर आ रही थी, लेकिन कुछ ही देर में बिकवाली बढ़ गई। सेंसेक्स करीब 500 अंक टूटकर 71,900 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग 150 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। खासतौर पर IT और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में दबाव देखने को मिला। बाजार में अचानक आई इस कमजोरी से निवेशकों की चिंता बढ़ी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार संभलता है या गिरावट का सिलसिला आगे भी जारी रहता है। Sensex Today: 71,900 के आसपास पहुंचा बाजार सोमवार को शेयर बाजार की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ हुई थी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी दिखाई दी, लेकिन बाद में बिकवाली हावी हो गई। सेंसेक्स 500 अंकों से ज्यादा गिरकर करीब 71,900 के स्तर पर कारोबार करने लगा। वहीं, निफ्टी भी लगभग 150 अंक नीचे आ गया। बाजार में इस उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक सावधानी बरतते नजर आए। जिन निवेशकों को सुबह बाजार में तेजी की उम्मीद थी, उनके लिए अचानक आई गिरावट ने चिंता बढ़ा दी। IT और Banking Stocks में सबसे ज्यादा बिकवाली सोमवार के कारोबार में IT और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। टेक महिंद्रा समेत कुछ आईटी शेयरों में कमजोरी रही। वहीं, SBI, ICICI Bank और Axis Bank जैसे प्रमुख बैंकिंग शेयरों में भी बिकवाली का असर दिखाई दिया। इन सेक्टरों के बड़े शेयरों में गिरावट आने से प्रमुख बाजार सूचकांकों पर दबाव बढ़ा। हालांकि, सभी शेयरों में एक जैसी कमजोरी नहीं रही। ऑटो सेक्टर के कुछ शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन भी अलग-अलग रहा। Stock Market में गिरावट की क्या है वजह? Stock Market में गिरावट के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण हो सकते हैं। निवेशक इस समय वैश्विक आर्थिक हालात, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर खास नजर रख रहे हैं। विदेशी निवेशकों की बिकवाली: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली होने पर बाजार के प्रमुख शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है। इससे सेंसेक्स और निफ्टी की चाल भी प्रभावित होती है। कच्चे तेल की कीमतें: भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में कच्चा तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ने और महंगाई पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है। वैश्विक बाजारों का असर: अमेरिका में बॉन्ड यील्ड, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और पश्चिम एशिया में जारी तनाव जैसे कारक निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। बाजार में मुनाफावसूली: तेजी के बाद निवेशकों की ओर से शेयर बेचकर मुनाफा निकालना भी गिरावट की एक वजह हो सकता है। हालांकि, किसी एक कारोबारी सत्र की गिरावट को केवल एक कारण से जोड़ना सही नहीं होगा। रुपये और कच्चे तेल पर भी निवेशकों की नजर शेयर बाजार के साथ-साथ रुपये की चाल और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी महत्वपूर्ण हैं। रुपये में कमजोरी आने से आयात महंगा हो सकता है, जिसका असर कंपनियों की लागत पर पड़ता है। वहीं, तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है। इसी वजह से निवेशक केवल शेयरों की कीमतों पर ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया से जुड़े आर्थिक संकेतों पर भी नजर बनाए हुए हैं। निवेशकों को अब क्या करना चाहिए? सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट के बीच निवेशकों के लिए धैर्य रखना जरूरी है। बाजार में हर गिरावट का मतलब यह नहीं होता कि सभी शेयरों में लंबे समय तक कमजोरी बनी रहेगी। इसी तरह, थोड़ी तेजी आने पर यह मान लेना भी ठीक नहीं कि बाजार पूरी तरह संभल गया है। निवेश का फैसला लेते समय कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, शेयर की कीमत, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। केवल बाजार की गिरावट देखकर जल्दबाजी में शेयर खरीदने या बेचने से बचना बेहतर है। आगे कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल? आने वाले दिनों में बाजार की दिशा विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक संकेतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों से प्रभावित हो सकती है। निवेशकों को अब यह देखना होगा कि सेंसेक्स 71,900 के आसपास खुद को संभाल पाता है या बाजार में दबाव बना रहता है। कुल मिलाकर, सोमवार को सेंसेक्स में करीब 500 अंकों और निफ्टी में लगभग 150 अंकों की गिरावट ने बाजार के माहौल को कमजोर किया। IT और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली इसका प्रमुख हिस्सा रही। फिलहाल निवेशकों के लिए बाजार की चाल पर नजर रखना और सोच-समझकर फैसले लेना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Elon Musk

Elon Musk vs Ambani: ‘Dear Prime Minister Ambani’ कहकर मस्क का तंज, Starlink का License क्यों अटका?

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने को लेकर Elon Musk और Mukesh Ambani के बीच बहस तेज हो गई है। SpaceX की इंटरनेट कंपनी Starlink की भारत में एंट्री में हो रही देरी पर मस्क ने सोशल मीडिया के जरिए मुकेश अंबानी पर निशाना साधा। उन्होंने अंबानी को ‘Dear Prime Minister Ambani’ कहकर संबोधित किया। इस टिप्पणी के बाद भारत के टेलीकॉम बाजार में प्रतिस्पर्धा और Starlink की मंजूरी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। मस्क का कहना है कि Starlink दुनिया के कई देशों में अपनी सेवाएं दे रही है, लेकिन भारत में कंपनी को कारोबार शुरू करने के लिए अभी भी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी हैं। उन्होंने भारत में प्रभावशाली कारोबारी हितों को लेकर भी सवाल उठाए। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि सैटेलाइट इंटरनेट सेवा देने वाली सभी कंपनियों को सुरक्षा और नियामकीय नियमों का पालन करना होगा। Elon Musk ने Mukesh Ambani को क्यों कहा ‘Dear Prime Minister’? एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मुकेश अंबानी को लेकर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उन्होंने ‘Dear Prime Minister Ambani’ कहकर भारत में अंबानी के कारोबारी प्रभाव पर तंज कसा। मस्क की इस पोस्ट को Starlink की भारत में एंट्री और टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा से जोड़कर देखा जा रहा है। मस्क लंबे समय से भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका तर्क है कि Starlink के जरिए उन इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है, जहां मोबाइल नेटवर्क और फाइबर ब्रॉडबैंड की सुविधा सीमित है। हालांकि, मस्क की टिप्पणी और कारोबारी हितों से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस पूरे मामले को सरकार की मंजूरी प्रक्रिया और संबंधित तथ्यों के आधार पर समझना जरूरी है। Starlink India Launch में देरी की असली वजह क्या है? Starlink को भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाएं देने के लिए जरूरी टेलीकॉम लाइसेंस मिल चुका है। लेकिन लाइसेंस मिलने का मतलब यह नहीं है कि कंपनी तुरंत अपनी व्यावसायिक सेवाएं शुरू कर सकती है। इसके लिए सुरक्षा संबंधी शर्तों, तकनीकी आवश्यकताओं और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। सैटेलाइट इंटरनेट पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क से अलग तकनीक पर काम करता है। ऐसे में सरकार को यह सुनिश्चित करना होता है कि कंपनी का नेटवर्क देश के सुरक्षा मानकों और दूरसंचार नियमों के अनुरूप काम करे। यही वजह है कि Starlink की व्यावसायिक शुरुआत के लिए जरूरी औपचारिकताएं महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। मंजूरी में देरी को केवल किसी एक कारोबारी समूह के दबाव से जोड़ने के लिए पर्याप्त सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। Jio और Starlink के बीच क्यों हो रही है चर्चा? भारत में इंटरनेट सेवाओं का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। रिलायंस जियो पहले से मोबाइल इंटरनेट और ब्रॉडबैंड सेवाओं के जरिए बड़ी संख्या में ग्राहकों तक पहुंच रखती है। दूसरी ओर, एलन मस्क की Starlink सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट उपलब्ध कराने पर काम करती है। इस क्षेत्र में भारती समूह समर्थित Eutelsat OneWeb भी एक प्रमुख नाम है। इन कंपनियों के लिए भारत जैसे बड़े बाजार में अपनी सेवाओं का विस्तार करना महत्वपूर्ण है। हालांकि, तीनों कंपनियों की तकनीक और कारोबारी रणनीति अलग-अलग है। मोबाइल नेटवर्क और फाइबर ब्रॉडबैंड जहां शहरी और अन्य नेटवर्क-कवर्ड क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाते हैं, वहीं सैटेलाइट इंटरनेट दूरदराज के इलाकों में कनेक्टिविटी का विकल्प बन सकता है। Starlink की सेवाएं शुरू होने पर भारतीय ग्राहकों को इंटरनेट का एक अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है। लेकिन इसकी सफलता काफी हद तक कीमत, नेटवर्क की उपलब्धता और उपकरणों की लागत पर निर्भर करेगी। सरकार ने एकाधिकार के आरोपों पर क्या कहा? Starlink की मंजूरी को लेकर उठे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने कहा है कि भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए नियम सभी कंपनियों पर समान रूप से लागू होते हैं। सरकार का रुख है कि किसी भी कंपनी को सेवा शुरू करने से पहले निर्धारित सुरक्षा और नियामकीय शर्तें पूरी करनी होंगी। संबंधित प्रक्रियाओं को पूरा किए बिना व्यावसायिक संचालन की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या Starlink को सभी जरूरी मंजूरियां समय पर मिल पाएंगी। फिलहाल, मस्क के आरोपों और मंजूरी में देरी के बीच किसी सीधे संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। भारत में Starlink शुरू होने से आम लोगों को क्या फायदा होगा? अगर Starlink भारत में अपनी सेवाएं शुरू करती है, तो इसका फायदा खासकर उन क्षेत्रों में हो सकता है जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है। सैटेलाइट तकनीक के जरिए दूरदराज के इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाना संभव हो सकता है। इसके कुछ संभावित फायदे हैं: हालांकि, इन सुविधाओं का वास्तविक लाभ तभी सामने आएगा, जब सेवा उपलब्ध होगी और उसकी कीमत आम ग्राहकों की पहुंच में होगी। Starlink License पर अब सबकी नजर एलन मस्क की ‘Dear Prime Minister Ambani’ वाली टिप्पणी ने भारत के टेलीकॉम बाजार में प्रतिस्पर्धा को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। एक तरफ Starlink भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने की तैयारी में है, तो दूसरी तरफ सरकार सुरक्षा और नियामकीय प्रक्रियाओं को जरूरी बता रही है। फिलहाल, Starlink की व्यावसायिक शुरुआत के लिए जरूरी मंजूरियों और स्पेक्ट्रम आवंटन की स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। अब देखना होगा कि कंपनी भारत में अपनी सेवाएं कब शुरू कर पाती है और इससे इंटरनेट बाजार में कितनी नई प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Stock Market

Stock Market Update Sensex में 850 अंक की गिरावट, Nifty भी 300 अंक नीचे; Investors की बढ़ी चिंता

भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में गुरुवार को कारोबार शुरू होते ही निवेशकों की चिंता बढ़ गई। Sensex और Nifty में तेज गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स एक समय करीब 850 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 300 अंक नीचे चला गया। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव Auto और Metal Stocks पर दिखाई दिया। बाजार की इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से लगातार दबाव में चल रहे शेयर बाजार में गुरुवार को भी बिकवाली का सिलसिला जारी रहा। Sensex-Nifty में बड़ी गिरावट कारोबार के दौरान BSE Sensex करीब 850 अंक तक फिसलकर 72,000 के आसपास पहुंच गया। वहीं, NSE Nifty 50 में करीब 300 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। बाजार के ज्यादातर प्रमुख शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। इस गिरावट का असर निवेशकों के पोर्टफोलियो पर भी साफ दिखाई दिया। खासकर ऑटो और मेटल कंपनियों के शेयरों में बिकवाली बढ़ने से बाजार पर दबाव और गहरा गया। Auto और Metal Stocks पर सबसे ज्यादा दबाव गुरुवार को Auto और Metal सेक्टर बाजार के कमजोर हिस्सों में रहे। निवेशकों ने कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली और बिकवाली की। ऑटो सेक्टर पर बढ़ती लागत और आर्थिक अनिश्चितता को लेकर चिंता बनी हुई है। वहीं Metal Stocks में वैश्विक मांग और कमोडिटी कीमतों को लेकर निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं। FII Selling ने बढ़ाई बाजार की परेशानी भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी चिंता का बड़ा कारण बनी हुई है। Foreign Institutional Investors (FII) लगातार भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। इससे घरेलू बाजार में खरीदारी का संतुलन बिगड़ा है। जानकारों के मुताबिक, जब विदेशी निवेशक बड़े पैमाने पर बिकवाली करते हैं तो इसका असर खासकर बड़े और प्रमुख शेयरों पर दिखाई देता है। यही वजह है कि Sensex और Nifty जैसे प्रमुख इंडेक्स पर भी दबाव बढ़ रहा है। महंगा Crude Oil भी बढ़ा रहा टेंशन अंतरराष्ट्रीय बाजार में Crude Oil की कीमतों में तेजी ने भी भारतीय बाजार की चिंता बढ़ा दी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर देश के Import Bill और महंगाई पर असर पड़ सकता है। निवेशकों को डर है कि लंबे समय तक महंगा crude रहने से कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और इसका असर उनकी कमाई पर पड़ सकता है। RBI Policy और Interest Rate पर भी नजर बाजार की नजर Reserve Bank of India (RBI) की मौद्रिक नीति पर भी बनी हुई है। ब्याज दरों में बदलाव का सीधा असर बैंकिंग, ऑटो, रियल एस्टेट और दूसरे कर्ज आधारित कारोबारों पर पड़ता है। ऐसे माहौल में निवेशक नए निवेश को लेकर थोड़ा सतर्क रुख अपना रहे हैं। बाजार में वैश्विक संकेतों के साथ-साथ घरेलू आर्थिक आंकड़ों का भी असर देखने को मिल रहा है। IT Stocks ने दी थोड़ी राहत बाजार में जहां कई सेक्टरों में गिरावट रही, वहीं IT Stocks में कुछ मजबूती देखने को मिली। आईटी कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों को लेकर निवेशकों की नजर बनी हुई है। अब बाजार की दिशा काफी हद तक कंपनियों के Quarterly Results, crude oil की कीमत और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों से तय होगी। आगे कैसी रहेगी बाजार की चाल? फिलहाल शेयर बाजार में volatility बनी हुई है। निवेशकों के लिए आने वाले दिनों में FII-DII activity, crude oil prices, RBI policy और corporate earnings अहम संकेत रहेंगे। अगर विदेशी बिकवाली कम होती है और कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं, तो बाजार में recovery देखने को मिल सकती है। दूसरी तरफ, महंगा crude और लगातार FII selling बाजार पर दबाव बनाए रख सकती है। ऐसे समय में निवेशकों के लिए जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय बाजार के अगले संकेतों पर नजर रखना ज्यादा जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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RBI

RBI का बड़ा फैसला: Repo Rate 5.50% हुआ, महंगे हो सकते हैं Loan; GDP Growth पर Good News

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महंगाई को लेकर बढ़ती चिंता के बीच बड़ा फैसला लिया है। RBI की Monetary Policy Committee (MPC) ने Repo Rate में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर दी है। इसके साथ ही Repo Rate अब 5.50% हो गया है। करीब चार साल में यह पहली बार है जब केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर बढ़ाई है। RBI के इस फैसले का असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। खासकर Home Loan, Car Loan और दूसरे Floating Rate Loans लेने वालों के लिए आने वाले दिनों में EMI बढ़ने की संभावना है। हालांकि, इसका वास्तविक असर अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों और Loan की शर्तों पर निर्भर करेगा। महंगाई रोकने के लिए RBI ने बढ़ाई ब्याज दर RBI के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती महंगाई को काबू में रखना है। महंगे कच्चे तेल, कमजोर मानसून और वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता से आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है। इसी को देखते हुए MPC ने Repo Rate बढ़ाने का फैसला किया। RBI ने अपनी Monetary Policy Stance को भी ‘Neutral’ से बदलकर ‘Calibrated Tightening’ कर दिया है। इसका मतलब है कि फिलहाल केंद्रीय बैंक का फोकस महंगाई के जोखिम को कम करने पर ज्यादा है। Home Loan की EMI पर क्या होगा असर? Repo Rate बढ़ने के बाद बैंकों के लिए RBI से मिलने वाला पैसा महंगा हो जाता है। इसका असर धीरे-धीरे बैंकों की Lending Rates पर दिखाई दे सकता है। अगर बैंक अपनी ब्याज दरें बढ़ाते हैं तो Floating Rate Home Loan वाले ग्राहकों की EMI बढ़ सकती है या Loan की अवधि लंबी हो सकती है। नए Loan लेने वालों को भी पहले के मुकाबले ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ सकता है। यानी जिन लोगों ने घर, कार या किसी दूसरी जरूरत के लिए Loan लिया है, उनके लिए RBI का यह फैसला सीधे तौर पर महत्वपूर्ण है। RBI ने GDP Growth का अनुमान बढ़ाया ब्याज दर बढ़ाने के साथ RBI ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत भी दिए हैं। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP Growth का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। RBI के मुताबिक घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। जून तिमाही में भारत की GDP Growth 7.8% रही, जिससे अर्थव्यवस्था की रफ्तार को लेकर केंद्रीय बैंक का भरोसा बढ़ा है। Inflation Forecast भी बढ़ाया एक तरफ GDP Growth का अनुमान बढ़ाया गया है, वहीं महंगाई को लेकर RBI ने चिंता जताई है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए CPI Inflation का अनुमान बढ़ाकर 5.2% किया गया है। RBI ने कमजोर मानसून, कच्चे तेल की कीमतों और मौसम से जुड़े जोखिमों को महंगाई के लिए अहम चुनौती माना है। खास बात यह है कि RBI का अगला कदम भी पूरी तरह महंगाई और आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा। फिलहाल ब्याज दरों में तुरंत कटौती की संभावना नहीं जताई गई है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया है कि आगे का विकल्प Rate Hike या Pause हो सकता है। आम लोगों के लिए क्या बदलेगा? RBI का Repo Rate बढ़ाना केवल Banking Sector तक सीमित फैसला नहीं है। इसका असर धीरे-धीरे आम लोगों की Borrowing Cost पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि बैंक RBI की Repo Rate Hike को ग्राहकों तक कितनी जल्दी और कितने अनुपात में पहुंचाते हैं। RBI के फैसले का बड़ा संदेश RBI का ताजा फैसला एक तरफ बढ़ती महंगाई को लेकर उसकी चिंता दिखाता है, तो दूसरी तरफ 7.1% GDP Growth Forecast यह बताता है कि केंद्रीय बैंक को भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर भरोसा है। आने वाले महीनों में Crude Oil Prices, मानसून, खाद्य महंगाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां बेहद अहम रहेंगी। इन्हीं संकेतों के आधार पर RBI आगे ब्याज दरों को लेकर अपना रुख तय करेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Stock Market

Stock Market Sensex 72,900 के पार, Nifty में 150 Points की तेजी; Bank-Metal Shares में खरीदारी

Share Market में आज अच्छी buying देखने को मिल रही है। कारोबार के दौरान Sensex करीब 500 अंक की तेजी के साथ 72,900 के आसपास पहुंच गया, वहीं Nifty भी करीब 150 अंक ऊपर कारोबार करता नजर आया। बाजार में आई इस तेजी के पीछे Banking और Metal Stocks में हो रही strong buying को बड़ी वजह माना जा रहा है। सुबह के कारोबार से ही बाजार का mood positive नजर आया। जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, बैंकिंग और मेटल कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ती गई और इसका सीधा असर Sensex और Nifty पर देखने को मिला। Banking Stocks में जमकर खरीदारी आज की market rally में Banking Sector सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। बैंकिंग शेयरों में investors की buying बढ़ने से पूरे सेक्टर को support मिला। इसके चलते बाजार में confidence भी थोड़ा मजबूत हुआ। Banking stocks में आई इस तेजी ने Sensex और Nifty को ऊपर रखने में अहम भूमिका निभाई। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि यह buying momentum आगे के कारोबार में भी बना रहता है या नहीं। Metal Stocks भी चमके Banking के अलावा Metal Stocks में भी अच्छी buying देखने को मिली। मेटल सेक्टर के कई शेयरों में तेजी आने से sector index को support मिला। बाजार में इस समय Banking और Metal stocks में interest साफ नजर आ रहा है। Investors के लिए राहत भरा रहा आज का कारोबार पिछले कुछ sessions में बाजार में volatility देखने को मिली थी। ऐसे में आज की तेजी ने investors को थोड़ी राहत जरूर दी है। Sensex और Nifty दोनों में मजबूती के चलते market sentiment पहले के मुकाबले बेहतर नजर आ रहा है। हालांकि, शेयर बाजार में तेजी के बावजूद investors को आगे के कारोबार में Global Market के संकेत, Foreign Investors की buying-selling और sector-wise movement पर नजर रखनी होगी। इन factors का असर बाजार की आगे की direction पर पड़ सकता है। फिलहाल market में buying का माहौल बना हुआ है और Sensex-Nifty की इस तेजी में Banking और Metal Stocks की अहम भूमिका नजर आ रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IND vs NZ

IND vs NZ 1st T20I: संजू सैमसन-नमन धीर का धमाका, भारत ने रचा रिकॉर्ड

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पहले T20 इंटरनेशनल मुकाबले में टीम इंडिया ने शानदार जीत दर्ज की। 226 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय बल्लेबाजों ने ऐसा खेल दिखाया कि न्यूजीलैंड के गेंदबाज दबाव में आ गए। संजू सैमसन की तूफानी पारी और नमन धीर की आखिरी ओवरों में विस्फोटक बल्लेबाजी ने मैच का रुख भारत की ओर मोड़ दिया। मुकाबले में भारत ने 19.4 ओवर में 6 विकेट खोकर 230 रन बनाए और 4 विकेट से जीत हासिल की। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने पांच मैचों की T20 सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। 226 रन का लक्ष्य हासिल करना भारत के लिए T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में नया रिकॉर्ड भी रहा। NZ vs IND: न्यूजीलैंड ने खड़ा किया 225 रन का बड़ा स्कोर पहले बल्लेबाजी करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम ने निर्धारित 20 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 225 रन बनाए। मेजबान टीम के बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश की। ग्लेन फिलिप्स ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 40 गेंदों पर नाबाद 82 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। वहीं, फिन एलन ने 24 गेंदों पर 45 रन बनाकर टीम को तेज शुरुआत दी। बेवॉन जैकब्स ने भी 16 गेंदों पर 31 रन की अहम पारी खेली। न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाए और भारत के सामने 226 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रख दिया। उस समय लग रहा था कि भारतीय टीम के लिए इस स्कोर तक पहुंचना आसान नहीं होगा। Sanju Samson ने खेली तूफानी पारी लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया को संजू सैमसन ने शानदार शुरुआत दिलाई। उन्होंने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए मैदान के चारों ओर शॉट लगाए। संजू ने 33 गेंदों पर 67 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। उन्होंने केवल 23 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर भारतीय टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। दूसरी ओर, अभिषेक शर्मा ने भी तेजी से रन बनाए। उन्होंने 12 गेंदों पर 29 रन की पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों की आक्रामक शुरुआत से भारत को बड़े लक्ष्य का पीछा करने में काफी मदद मिली। हालांकि, शुरुआती विकेट गिरने के बाद भारतीय टीम की रफ्तार कुछ धीमी हुई। न्यूजीलैंड ने वापसी करने की कोशिश की, लेकिन भारत के बल्लेबाजों ने मैच को हाथ से निकलने नहीं दिया। Shreyas Iyer ने संभाली जिम्मेदारी मध्यक्रम में विकेट गिरने के बाद श्रेयस अय्यर ने पारी को संभाला। उन्होंने 28 गेंदों पर 42 रन बनाकर टीम को लक्ष्य के करीब पहुंचाया। ऐसे मुकाबलों में सिर्फ तेजी से रन बनाना ही जरूरी नहीं होता, बल्कि सही समय पर पारी को संभालना भी अहम होता है। अय्यर ने यही भूमिका निभाई और भारत की उम्मीदों को बनाए रखा। इसके बाद नमन धीर ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड की जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। Naman Dhir बने भारत की जीत के हीरो मैच के आखिरी ओवरों में नमन धीर की बल्लेबाजी ने भारतीय प्रशंसकों का उत्साह बढ़ा दिया। उन्होंने महज 15 गेंदों पर नाबाद 42 रन बनाए। उनकी पारी में 5 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। नमन ने तेजी से रन बनाकर न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बढ़ाया। भारतीय टीम को जब जीत के लिए तेज रन बनाने की जरूरत थी, तब उनकी आक्रामक बल्लेबाजी सबसे ज्यादा काम आई। भारत ने 19.4 ओवर में 230 रन बनाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। संजू सैमसन की शुरुआत और नमन धीर की शानदार फिनिशिंग इस ऐतिहासिक रनचेज की सबसे बड़ी वजह बनी। IND vs NZ 1st T20I Scorecard: एक नजर में पूरा मैच न्यूजीलैंड: 225/4 (20 ओवर) भारत: 230/6 (19.4 ओवर) नतीजा: भारत 4 विकेट से जीता। न्यूजीलैंड के टॉप स्कोरर: ग्लेन फिलिप्स – 82* रन भारत के टॉप स्कोरर: संजू सैमसन – 67 रन मैच के अहम बल्लेबाज: नमन धीर – 15 गेंदों पर नाबाद 42 रन भारत ने अपने नाम किया बड़ा रिकॉर्ड इस जीत की सबसे खास बात भारत का रिकॉर्ड रनचेज रहा। 226 रन जैसे बड़े लक्ष्य को हासिल करके टीम इंडिया ने T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में अपना सबसे बड़ा सफल रनचेज दर्ज किया। संजू सैमसन ने तेज शुरुआत देकर टीम को मजबूत आधार दिया, श्रेयस अय्यर ने मध्यक्रम में पारी संभाली और नमन धीर ने अंतिम ओवरों में तेजी से रन बनाकर जीत सुनिश्चित की। इस प्रदर्शन ने एक बार फिर दिखाया कि भारतीय टीम बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भी दबाव में संयम बनाए रख सकती है। दूसरे T20I में भी रहेगी जीत की उम्मीद पहले मुकाबले में जीत के बाद भारतीय टीम सीरीज में अपनी बढ़त मजबूत करना चाहेगी। वहीं, न्यूजीलैंड की टीम अगले मैच में वापसी करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। पहले मैच में दोनों टीमों के बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया। ऐसे में अगले मुकाबले में भी क्रिकेट प्रशंसकों को एक रोमांचक भिड़ंत देखने की उम्मीद रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
India vs New Zealand

India vs New Zealand: आखिरी 3 ओवर में 29 रन की जरूरत, रोमांचक मोड़ पर मैच

भारत और न्यूजीलैंड (India vs New Zealand) के बीच T20 मुकाबला अब बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है। न्यूजीलैंड के 226 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ने 5 विकेट के नुकसान पर 197 रन बना लिए हैं। अब जीत के लिए भारत को 18 गेंदों में 29 रन बनाने हैं। क्रीज पर श्रेयस अय्यर और नमन धीर मौजूद हैं। ऐसे में भारतीय फैंस की नजरें दोनों बल्लेबाजों पर टिकी हैं। मैच के इस मोड़ पर एक छोटी-सी गलती भी टीम की मुश्किल बढ़ा सकती है। वहीं, अगर भारतीय बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाए और विकेट बचाए रखे, तो जीत हासिल करने का मौका बना हुआ है। IND vs NZ: न्यूजीलैंड ने खड़ा किया 225 रन का स्कोर पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने 20 ओवर में 4 विकेट खोकर 225 रन बनाए। टीम की ओर से ग्लेन फिलिप्स ने शानदार बल्लेबाजी की और 40 गेंदों पर नाबाद 82 रन बनाए। उनकी आक्रामक पारी ने न्यूजीलैंड को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। कीवी बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। बड़े शॉट खेलने के साथ-साथ उन्होंने रन गति को भी धीमा नहीं पड़ने दिया। इसी वजह से भारत के सामने 226 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य आया। India vs New Zealand: लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की स्थिति 226 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को तेजी से रन बनाने थे। टीम ने स्कोर आगे बढ़ाया, लेकिन पांच विकेट गिरने के बाद मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। अब श्रेयस अय्यर और नमन धीर के सामने दोहरी चुनौती है। उन्हें एक तरफ जरूरी रन बनाने हैं, तो दूसरी तरफ विकेट भी बचाकर रखना है। दोनों के बीच अच्छी साझेदारी भारत को जीत के करीब पहुंचा सकती है। आखिरी 18 गेंदों का खेल होगा निर्णायक भारत को 18 गेंदों में 29 रन चाहिए। इसका मतलब है कि टीम को बचे हुए तीन ओवरों में लगातार रन बनाने होंगे। T20 क्रिकेट में यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, लेकिन न्यूजीलैंड के गेंदबाज भी इस मौके को आसानी से हाथ से जाने नहीं देना चाहेंगे। अगर भारतीय बल्लेबाज शुरुआती गेंदों पर बाउंड्री लगाने में सफल रहते हैं, तो आखिरी ओवर का दबाव कम हो सकता है। वहीं, विकेट गिरने की स्थिति में भारत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्या Team India हासिल कर पाएगी जीत? मैच का रुख अब काफी हद तक श्रेयस अय्यर और नमन धीर की बल्लेबाजी पर निर्भर करेगा। भारतीय टीम को जीत के लिए बड़े शॉट खेलने के साथ समझदारी से स्ट्राइक भी बदलनी होगी। न्यूजीलैंड की टीम अपने स्कोर का बचाव करने की पूरी कोशिश करेगी। ऐसे में अंतिम तीन ओवर में गेंदबाजों और बल्लेबाजों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। फिलहाल मुकाबला रोमांचक स्थिति में है और भारत के पास लक्ष्य हासिल करने का मौका मौजूद है। अब देखना होगा कि भारतीय बल्लेबाज आखिरी गेंदों में टीम को जीत दिला पाते हैं या न्यूजीलैंड मुकाबले पर कब्जा जमा लेता है। IND vs NZ Live Score: मैच की ताजा स्थिति हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

दिल्ली-NCR में GRAP-1 लागू, प्रदूषण से निपटने के लिए 334 टीमें करेंगी निगरानी; 1 नवंबर से सख्ती

दिल्ली की वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंचने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पूरे दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया है। इस बीच दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दावा किया कि सरकार के प्रयासों और जनभागीदारी के कारण इस बार पिछले वर्षों की तुलना में GRAP-1 देर से लागू हुआ है। सिरसा के मुताबिक, सर्दियों में प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार 11 सूत्रीय एक्शन प्लान पर काम कर रही है। इसमें करीब 30 एजेंसियां शामिल हैं। प्रदूषण नियंत्रण के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक, दोनों तरह के उपाय किए जा रहे हैं। 334 टीमें करेंगी निगरानी, मॉनिटरिंग स्टेशन बढ़कर होंगे 60 पर्यावरण मंत्री ने बताया कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता की निगरानी करने वाले स्टेशनों की संख्या 47 से बढ़ाकर 60 की जाएगी। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए 334 प्रवर्तन टीमें तैनात की जाएंगी। सिरसा ने दावा किया कि दिल्ली के प्रदूषण में स्थानीय स्रोतों की हिस्सेदारी करीब 30% है, जबकि आसपास के राज्यों और क्षेत्रों से 60 से 65% प्रदूषण आता है। ऐसे में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए पूरे NCR में समन्वित कार्रवाई जरूरी है। 1 नवंबर से प्रदूषण रोकने के लिए प्रस्तावित सख्त कदम सरकार की ओर से साझा की गई योजना के मुताबिक, प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई उपाय किए जाने हैं। 1. वैध PUC प्रमाणपत्र के बिना नहीं मिलेगा ईंधन ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ व्यवस्था के तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) के बिना वाहनों को पेट्रोल या डीजल नहीं देने का प्रावधान है। 2. बाहरी राज्यों के वाहनों पर प्रतिबंध योजना के अनुसार, 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों को इससे छूट देने की बात कही गई है। 3. सरकारी और निजी दफ्तरों में 50% वर्क फ्रॉम होम प्रदूषण कम करने के लिए सरकारी और निजी कार्यालयों के आधे कर्मचारियों से घर से काम कराने की योजना भी शामिल है। 4. सरकारी दफ्तरों के समय में बदलाव योजना के मुताबिक, नगर निगम (MCD) के कार्यालय सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक और दिल्ली सरकार के कार्यालय सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक संचालित किए जाने का प्रस्ताव है। 5. पार्किंग शुल्क दोगुना करने की योजना निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए 1 नवंबर से पार्किंग शुल्क दोगुना करने की योजना है। मेट्रो पार्किंग को इससे छूट देने की बात कही गई है। 6. निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर रोक धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल फैलाने वाले निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर रोक लगाने का प्रावधान है। इसके अलावा, 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध की योजना भी बताई गई है।

दिवाली से पहले दिल्ली में रात को भी होगी सफाई, CM रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

दीपावली और अन्य त्योहारों को देखते हुए दिल्ली के रिहायशी इलाकों और प्रमुख बाजारों में अब रात के समय भी सफाई कराई जाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को दिल्ली सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक कर राजधानी की सफाई व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सफाई में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां भी कूड़े के ढेर लगे हैं, उन्हें तत्काल हटाया जाए और नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों से सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए तेजी से काम करने को कहा। कूड़ा नहीं उठने की शिकायतों पर CM नाराज मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के कई इलाकों से समय पर कूड़ा नहीं उठने और जगह-जगह गंदगी की शिकायतें मिल रही हैं। कुछ जोन में सफाई व्यवस्था को लेकर लापरवाही भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि सफाई के प्रयासों के बावजूद जमीन पर अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लोगों की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। साथ ही, सफाई व्यवस्था में किए जा रहे सुधार सड़कों और बाजारों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने चाहिए। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कर्मचारी होंगे तैनात मुख्यमंत्री ने मेयर प्रवेश वाही और नगर निगम आयुक्त संजीव खिरवार को पूरी दिल्ली में सफाई अभियान तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में सफाई कर्मचारियों की कमी है, वहां अतिरिक्त स्टाफ लगाया जाए। जरूरत पड़ने पर रात में सफाई के लिए नए कर्मचारियों की नियुक्ति भी की जाए। रात में सफाई से दिन में नहीं होगी परेशानी मुख्यमंत्री के मुताबिक, बाजारों और रिहायशी कॉलोनियों में रात के समय सफाई कराने से दिन में लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी। इससे त्योहारों के दौरान भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्वच्छता बनाए रखने में मदद मिलेगी। बैठक में शहरी विकास मंत्री आशीष सूद, मेयर प्रवेश वाही, मुख्य सचिव राजीव वर्मा, नगर निगम आयुक्त संजीव खिरवार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे

छत्तीसगढ़ में 11 डॉक्टरों के तबादले, डॉ. संजय कुमार बने रायपुर जिला अस्पताल के प्रभारी सिविल सर्जन

छत्तीसगढ़ सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 11 डॉक्टरों का तबादला किया है। प्रशासनिक आधार पर चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए गए हैं। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई जगह पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय महानदी भवन से अवर सचिव दिव्या वैष्णव की ओर से जारी आदेश के तहत यह फेरबदल किया गया है। डॉ. संजय कुमार को मिली रायपुर जिला अस्पताल की जिम्मेदारी तबादला आदेश के अनुसार, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार को जिला चिकित्सालय रायपुर (पंडरी) में प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक नियुक्त किया गया है। वहीं, जिला चिकित्सालय रायपुर में अब तक प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. भेनुज कुमार सिन्हा को स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय में प्रभारी उप संचालक के पद पर पदस्थ किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए प्रशासनिक फेरबदल विभाग के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह प्रशासनिक बदलाव किया गया है। इसके तहत दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी अस्पतालों में भी स्वास्थ्य सुविधाओं को सुचारु बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। तबादला आदेश में सभी संबंधित डॉक्टरों को बिना देरी किए अपने नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

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