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Sensex

Share Market Crash Today: Trump-Iran Tension का असर, Sensex में 1900 अंकों की बड़ी गिरावट

भारतीय शेयर (Share Market) बाजार में बुधवार का दिन निवेशकों के लिए बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा। अचानक आई भारी बिकवाली के कारण बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के ईरान को लेकर दिए गए बयान के बाद वैश्विक बाजारों में तनाव बढ़ा और इसका सीधा असर भारतीय शेयर मार्केट पर दिखाई दिया। कारोबार के दौरान BSE Sensex करीब 1900 अंक तक टूट गया, जबकि Nifty 50 में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। अचानक आई इस गिरावट से निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बन गया और बाजार में चारों तरफ बिकवाली नजर आई। Trump के Iran Statement ने बढ़ाई Market Tension शेयर बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। ट्रंप के इस बयान के बाद कि ईरान के साथ अब बातचीत की संभावना नहीं है, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई। निवेशकों को डर है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिसका असर महंगाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसी चिंता के चलते विदेशी और घरेलू निवेशकों ने जमकर बिकवाली की। Opening Bell से ही कमजोर रहा बाजार बुधवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत ही दबाव के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट तेज हो गई। जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, बाजार में बिकवाली का दबाव और बढ़ता गया। बैंकिंग, आईटी, ऑटो, मेटल और एनर्जी सेक्टर के शेयर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट के कारण पूरे बाजार का सेंटीमेंट कमजोर हो गया। Investors को लगा बड़ा झटका शेयर बाजार में अचानक आई इस गिरावट ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया। कुछ ही घंटों में बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला और निवेशकों की संपत्ति में भी कमी आई। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल बाजार पूरी तरह से ग्लोबल संकेतों पर निर्भर है। अमेरिका-ईरान तनाव, क्रूड ऑयल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगी। इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा गिरावट आज की गिरावट में कई प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे: Market Crash के बीच निवेशकों को क्या करना चाहिए? बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अचानक आई गिरावट के दौरान निवेशकों को घबराकर फैसले लेने से बचना चाहिए। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है, इसलिए लंबी अवधि के निवेशकों को मजबूत कंपनियों के प्रदर्शन और फंडामेंटल पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए निवेशकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। आने वाले दिनों में बाजार की नजर अमेरिका-ईरान संबंधों और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकेतों पर बनी रहेगी। Share Market की अगली चाल पर सबकी नजर फिलहाल भारतीय शेयर बाजार के सामने सबसे बड़ी चुनौती वैश्विक अनिश्चितता है। अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होता है तो बाजार में सुधार देखने को मिल सकता है, लेकिन तनाव बढ़ने की स्थिति में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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E20 Fuel

E20 Fuel Update: पुरानी Cars Owners की बढ़ी चिंता, Arvind Kejriwal ने कंपनियों से मांगा जवाब

देश में E20 Fuel को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। सरकार जहां इसे भारत के लिए एक बड़ा Fuel Reform बता रही है, वहीं आम वाहन मालिकों के मन में अपनी पुरानी गाड़ियों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ऑटो कंपनियों से जवाब मांगा है। केजरीवाल ने देश की 29 प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों को पत्र लिखकर पूछा है कि अगर E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से पुरानी गाड़ियों में खराबी आती है, इंजन या अन्य पार्ट्स प्रभावित होते हैं या माइलेज कम हो जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? उन्होंने कंपनियों से यह भी पूछा कि ऐसी स्थिति में वाहन मालिकों को Compensation दिया जाएगा या नहीं। E20 Fuel को लेकर क्यों उठे सवाल? E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। सरकार का उद्देश्य एथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देकर पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना और पर्यावरण को बेहतर बनाना है। हालांकि, कई वाहन मालिकों की चिंता है कि जो गाड़ियां E20 Fuel के हिसाब से तैयार नहीं की गई हैं, उनमें लंबे समय तक इसके इस्तेमाल का क्या असर पड़ेगा। खासकर पुराने मॉडल की गाड़ियों में इंजन पर प्रभाव, माइलेज में कमी और मेंटेनेंस खर्च को लेकर सवाल उठ रहे हैं। Kejriwal का Auto Companies से सीधा सवाल अरविंद केजरीवाल ने ऑटो कंपनियों से पूछा है कि यदि E20 पेट्रोल के कारण किसी पुरानी गाड़ी में तकनीकी समस्या आती है, तो क्या कंपनियां उसकी जिम्मेदारी लेंगी। उन्होंने कंपनियों से यह भी जवाब मांगा है कि: केजरीवाल का कहना है कि लाखों लोगों ने अपनी गाड़ियां लंबे समय तक इस्तेमाल करने के लिए खरीदी हैं, इसलिए ग्राहकों को स्पष्ट जानकारी और सुरक्षा की गारंटी मिलनी चाहिए। Government का दावा- E20 से नहीं होगी बड़ी समस्या वहीं केंद्र सरकार लगातार कह रही है कि E20 पेट्रोल को वैज्ञानिक जांच और विशेषज्ञों की सलाह के बाद लागू किया गया है। सरकार के अनुसार, नए वाहन E20 Fuel के अनुरूप बनाए जा रहे हैं और यह कदम देश की Energy Security के लिए जरूरी है। सरकार का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और किसानों को भी फायदा मिलेगा। Auto Industry की भूमिका पर सबकी नजर E20 पेट्रोल को लेकर अब ऑटो कंपनियों के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। वाहन मालिक चाहते हैं कि कंपनियां पुराने वाहनों को लेकर अपनी स्थिति साफ करें और किसी भी संभावित नुकसान की स्थिति में ग्राहकों के हितों की रक्षा करें। फिलहाल E20 Fuel को लेकर सरकार, विपक्ष और ऑटो इंडस्ट्री के बीच बहस जारी है। आने वाले दिनों में कंपनियों का जवाब इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

Gold-Silver Market: सोने और चांदी में जबरदस्त उछाल, जानिए क्यों लगातार बढ़ रहे हैं दाम

देश में Gold Price और Silver Rate लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं। सर्राफा बाजार में एक बार फिर सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। सोने का भाव ₹177 की बढ़त के साथ ₹1.44 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया, जबकि चांदी की कीमत ₹150 बढ़कर ₹2.27 लाख प्रति किलो हो गई। लगातार बढ़ते दामों ने आम खरीदारों से लेकर निवेशकों तक सभी का ध्यान खींचा है। खास बात यह है कि साल 2026 में अब तक सोना करीब ₹11 हजार प्रति 10 ग्राम महंगा हो चुका है, जिससे गोल्ड ने निवेश के लिहाज से मजबूत प्रदर्शन किया है। Gold Rate Today: सोने की चमक क्यों बढ़ रही है? सोने की कीमतों में तेजी के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं। वैश्विक बाजार में अनिश्चितता, महंगाई को लेकर चिंता और सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की बढ़ती मांग ने इसके भाव को मजबूती दी है। जब भी दुनियाभर के बाजारों में अस्थिरता बढ़ती है, निवेशक सोने को भरोसेमंद विकल्प मानते हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ समय से गोल्ड में खरीदारी का रुझान मजबूत बना हुआ है। इसके अलावा केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीदारी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में मजबूती का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। Silver Price Update: चांदी की चमक भी बरकरार सोने के साथ-साथ Silver Price में भी लगातार तेजी देखने को मिल रही है। चांदी का भाव अब ₹2.27 लाख प्रति किलो तक पहुंच गया है। चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी सिर्फ निवेश मांग की वजह से नहीं है, बल्कि इंडस्ट्रियल सेक्टर में इसकी बढ़ती जरूरत भी एक बड़ा कारण है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई अन्य उद्योगों में चांदी का इस्तेमाल बढ़ने से इसकी मांग मजबूत हुई है। बढ़ती कीमतों से ग्राहकों की चिंता बढ़ी सोना और चांदी महंगे होने का सीधा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जो शादी, त्योहार या खास मौकों के लिए आभूषण खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। बढ़ते भाव के कारण ग्राहकों को अब पहले के मुकाबले ज्यादा बजट रखना पड़ रहा है। वहीं, निवेशकों के लिए सोना और चांदी अभी भी आकर्षक विकल्प बने हुए हैं। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी निवेश से पहले बाजार की स्थिति और अपनी आर्थिक जरूरतों को समझना जरूरी है। आगे कैसा रह सकता है Gold-Silver Market? जानकारों के मुताबिक, आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतें वैश्विक संकेतों, डॉलर की स्थिति और आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेंगी। बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद कीमती धातुओं में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। फिलहाल Gold Price Today और Silver Price Today दोनों ही चर्चा में हैं और बाजार की नजर आगे की कीमतों पर टिकी हुई है।
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Gold

Gold Rate Today: सोना ₹1,442 हुआ सस्ता, चांदी में ₹4,408 की गिरावट

सोने (Gold) और चांदी (Silver) की कीमतों में इन दिनों लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद अब दोनों कीमती धातुओं के भाव में गिरावट का दौर जारी है। ताजा अपडेट के मुताबिक, चांदी की कीमत में एक दिन में ₹4,408 की बड़ी गिरावट आई है, जिसके बाद इसका भाव करीब ₹2.29 लाख प्रति किलो रह गया है। वहीं, सोना भी ₹1,442 सस्ता होकर करीब ₹1.44 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे ग्राहकों के लिए यह गिरावट राहत लेकर आई है, जबकि निवेशक बाजार की आगे की दिशा पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संकेतों और बाजार में चल रही मुनाफावसूली का असर घरेलू कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। Silver Price Crash: जून में चांदी करीब ₹38 हजार तक फिसली चांदी ने पिछले कुछ समय में शानदार तेजी दिखाई थी, लेकिन अब इसमें बड़ा करेक्शन देखने को मिल रहा है। जून महीने के दौरान चांदी की कीमत में करीब ₹38 हजार प्रति किलो तक की गिरावट दर्ज की गई। चांदी की कीमतों पर औद्योगिक मांग, वैश्विक बाजार की स्थिति और डॉलर की मजबूती का सीधा असर पड़ता है। खासतौर पर सोलर इंडस्ट्री और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की मांग में बदलाव भी सिल्वर रेट को प्रभावित करता है। Gold Price Today: सोना भी हुआ ₹15 हजार तक सस्ता सोने की कीमतों में भी जून के दौरान बड़ी गिरावट देखने को मिली है। इस अवधि में Gold Rate करीब ₹15 हजार प्रति 10 ग्राम तक नीचे आया है। हालांकि, सोने को अब भी सुरक्षित निवेश के तौर पर सबसे पसंदीदा विकल्पों में गिना जाता है। शादी-ब्याह के सीजन और निवेश की मांग के कारण सोने की खरीदारी जारी है, लेकिन ऊंचे भाव के बाद आई गिरावट ने खरीदारों को कुछ राहत जरूर दी है। क्यों गिर रहे हैं Gold और Silver के Rates? सोना और चांदी सस्ता होने के पीछे कई अहम कारण बताए जा रहे हैं— इन कारणों से घरेलू बाजार में भी गोल्ड और सिल्वर के भाव पर दबाव बना हुआ है। क्या आगे और गिरेंगे सोने-चांदी के दाम? बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में Gold और Silver Price में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अगर वैश्विक बाजार में कमजोरी बनी रहती है तो कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा बदलाव होने पर फिर से तेजी लौट सकती है। फिलहाल, सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए मौजूदा गिरावट एक अच्छा मौका साबित हो सकती है, लेकिन खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार के ताजा भाव जरूर जांच लेने चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Indian Stock Market

Indian Stock Market: Sensex ने भरी उड़ान, Nifty में भी उछाल; IT और Bank Stocks बने बाजार के सहारे

भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में मंगलवार को कारोबार की शुरुआत सकारात्मक रही। लंबे समय बाद बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला, जहां Sensex करीब 200 अंकों की बढ़त के साथ 78,500 के स्तर के आसपास पहुंच गया। वहीं Nifty भी करीब 50 अंक ऊपर कारोबार करता नजर आया। बाजार की इस तेजी को सबसे ज्यादा सपोर्ट IT और Banking सेक्टर के शेयरों से मिला। सुबह के कारोबार में निवेशकों ने टेक्नोलॉजी और बैंकिंग कंपनियों के शेयरों में जमकर दिलचस्पी दिखाई। यही वजह रही कि प्रमुख इंडेक्स बढ़त के साथ खुले और दिन चढ़ने के साथ बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहा। IT और Banking Shares में खरीदारी से बाजार को मिला सपोर्ट आज के कारोबार में IT सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। निवेशकों को उम्मीद है कि टेक कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन और वैश्विक मांग में सुधार का फायदा इस सेक्टर को मिल सकता है। इसके अलावा बैंकिंग शेयर भी बाजार की तेजी में अहम भूमिका निभा रहे हैं। बड़े बैंकों के शेयरों में खरीदारी बढ़ने से बैंकिंग इंडेक्स को मजबूती मिली और इसका असर पूरे बाजार पर दिखाई दिया। निवेशकों का भरोसा लौटा, बाजार में दिखी पॉजिटिविटी पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में उतार-चढ़ाव के बाद आज बाजार में निवेशकों का भरोसा मजबूत नजर आया। घरेलू निवेशकों की खरीदारी और सकारात्मक वैश्विक संकेतों ने बाजार को ऊपर उठाने में मदद की। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि आगे भी बाजार की दिशा कंपनियों के तिमाही नतीजों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और ग्लोबल मार्केट के रुझानों पर निर्भर करेगी। किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर? आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी बाजारों की चाल, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की स्थिति और कंपनियों के प्रदर्शन पर रहेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में तेजी के बावजूद निवेशकों को सोच-समझकर मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में निवेश करना चाहिए। आज के Market Highlights हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mobile Recharge

Mobile Recharge महंगा होने की तैयारी! 5G खर्च के बीच Jio और Airtel बढ़ा सकते हैं Plans की कीमत

मोबाइल फोन आज हर किसी की जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन चुका है। कॉलिंग से लेकर ऑनलाइन पेमेंट, पढ़ाई, काम और मनोरंजन तक सब कुछ इंटरनेट पर निर्भर है। ऐसे में अगर मोबाइल रिचार्ज (Mobile Recharge) महंगे होते हैं तो इसका सीधा असर आम लोगों के महीने के बजट पर पड़ना तय है। अब खबर है कि आने वाले 3 से 4 महीनों में मोबाइल टैरिफ प्लान की कीमतों में 15% तक बढ़ोतरी हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियां अपने रिचार्ज प्लान की कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। इसमें खास तौर पर Reliance Jio और Bharti Airtel जैसे बड़े नाम शामिल हैं। हालांकि, कंपनियों की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। क्यों महंगे हो सकते हैं Mobile Recharge Plans? टेलीकॉम कंपनियां पिछले कुछ वर्षों से 5G नेटवर्क के विस्तार, नए टावर लगाने और बेहतर इंटरनेट सर्विस देने के लिए लगातार निवेश कर रही हैं। इस बढ़ते खर्च को संभालने और अपनी कमाई बढ़ाने के लिए कंपनियां टैरिफ बढ़ाने की तैयारी कर सकती हैं। इसके अलावा कंपनियों का फोकस Average Revenue Per User (ARPU) बढ़ाने पर भी है। यानी हर ग्राहक से होने वाली औसत कमाई को बढ़ाना टेलीकॉम कंपनियों की बड़ी प्राथमिकता बन गई है। Jio और Airtel का बढ़ सकता है Market Share अगर मोबाइल रिचार्ज की कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो इसका फायदा बड़ी कंपनियों को मिल सकता है। मजबूत नेटवर्क और ज्यादा ग्राहकों वाली Jio और Airtel अपनी स्थिति और मजबूत कर सकती हैं। वहीं, छोटे टेलीकॉम ऑपरेटर्स के लिए ग्राहकों को बनाए रखना और बाजार में मुकाबला करना और मुश्किल हो सकता है। महंगे प्लान के बावजूद यूजर्स बेहतर नेटवर्क और तेज इंटरनेट के लिए बड़े ऑपरेटरों की तरफ जा सकते हैं। 15% महंगा हुआ Recharge तो कितना बढ़ेगा खर्च? अगर कंपनियां करीब 15 फीसदी तक कीमत बढ़ाती हैं तो ग्राहकों को मौजूदा प्लान के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। उदाहरण के लिए: हालांकि, असली कीमतों का पता कंपनियों के नए टैरिफ ऐलान के बाद ही चलेगा। 5G Users पर ज्यादा पड़ सकता है असर 5G सेवाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और कंपनियां हाई-स्पीड इंटरनेट नेटवर्क को मजबूत करने में भारी निवेश कर रही हैं। ऐसे में संभावना है कि प्रीमियम 4G और 5G प्लान्स की कीमतों में ज्यादा बदलाव देखने को मिल सकता है। पहले भी बढ़ चुके हैं Recharge Rates भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में पिछले कुछ सालों में कई बार रिचार्ज प्लान महंगे हुए हैं। कंपनियों का तर्क रहा है कि बेहतर नेटवर्क और सेवाओं के लिए टैरिफ में बदलाव जरूरी है। अब अगर नई बढ़ोतरी लागू होती है तो मोबाइल यूजर्स को अपने मासिक खर्च में एक और बदलाव के लिए तैयार रहना पड़ सकता है। Users के लिए क्या रहेगा विकल्प? कीमत बढ़ने की स्थिति में ग्राहक लंबी वैलिडिटी वाले प्लान, फैमिली प्लान या जरूरत के हिसाब से कम डेटा वाले पैक चुन सकते हैं। हालांकि, मोबाइल इंटरनेट की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए रिचार्ज खर्च में बढ़ोतरी का असर लगभग हर यूजर पर पड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

Gold Rate Today: सोना ₹832 सस्ता, चांदी में ₹2,046 की भारी गिरावट

भारतीय सर्राफा बाजार में आज फिर से सोना (Gold) और चांदी (Silver) की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। लगातार उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि कीमती धातुओं के दाम एक बार फिर नीचे आ गए हैं। ग्लोबल मार्केट के दबाव और डॉलर की मजबूती का असर सीधे घरेलू बाजार पर देखने को मिला है। चांदी की कीमत में तेज गिरावट Silver के बाजार में आज बड़ी कमजोरी देखने को मिली है। कई निवेशकों के लिए यह गिरावट अचानक आई, जिससे बाजार में थोड़ी अनिश्चितता बढ़ गई है । सोने के दाम भी टूटे Gold की चमक भी आज कुछ फीकी पड़ी। Gold Price by Carat (आज का अनुमानित रेट) (शहर और ज्वैलरी मेकिंग चार्ज के कारण कीमतों में थोड़ा फर्क संभव है) कीमतों में गिरावट की असली वजह क्या है? विशेषज्ञों के मुताबिक, इस गिरावट के पीछे कई ग्लोबल फैक्टर्स काम कर रहे हैं:
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Sensex

Sensex Today: शेयर बाजार में तूफानी तेजी, मेटल-ऑटो स्टॉक्स चमके

भारतीय शेयर बाजार में आज का दिन निवेशकों के लिए राहत और उत्साह से भरा रहा। सुबह से ही बाजार में खरीदारी का माहौल बना रहा और पूरे दिन तेजी का ट्रेंड देखने को मिला। BSE Sensex करीब 600 अंकों की मजबूती के साथ 78,350 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं NIFTY 50 भी लगभग 150 अंकों की बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। इस तेजी ने बाजार में एक बार फिर भरोसा जगाया है कि घरेलू इकॉनमी और कंपनियों की कमाई में अभी भी मजबूती बनी हुई है। बाजार में तेजी क्यों आई? आज की रैली के पीछे कई बड़े कारण रहे: इन सभी फैक्टर्स ने मिलकर बाजार को सपोर्ट दिया और सेंटीमेंट को पूरी तरह बुलिश बना दिया। Metal & Auto Stocks बने असली हीरो आज के ट्रेडिंग सेशन में सबसे ज्यादा चमक मेटल और ऑटो सेक्टर में देखने को मिली। टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील और मारुति जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई। इन सेक्टर्स में आई खरीदारी से पूरे बाजार को मजबूती मिली और इंडेक्स लगातार ऊपर चढ़ते गए। निवेशकों के लिए क्या संकेत? मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल बाजार का ट्रेंड पॉजिटिव है, लेकिन आगे की दिशा वैश्विक संकेत तय करेंगे। खास तौर पर— ये आने वाले दिनों में बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

Gold-Silver Price Today: निवेशकों की चांदी, Gold ने पहली बार छुआ ₹1.46 लाख का आंकड़ा

अगर आप सोना (Gold) या चांदी (Silver) खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है। सर्राफा बाजार में इस सप्ताह सोना और चांदी दोनों ने नई ऊंचाइयों को छू लिया। महज एक सप्ताह के भीतर सोने की कीमत में ₹6,471 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके बाद इसका भाव करीब ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वहीं, चांदी ने भी निवेशकों को चौंकाते हुए ₹17,317 प्रति किलोग्राम की तेजी दिखाई और इसकी कीमत ₹2.34 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। बाजार जानकारों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की ओर लोगों का रुझान बढ़ने से सोना-चांदी की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। इसका सीधा असर घरेलू बाजार की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है। 2026 में Gold ने दिया शानदार रिटर्न साल 2026 निवेशकों के लिए अब तक काफी फायदेमंद साबित हुआ है। जनवरी से लेकर अब तक Gold की कीमत में ₹13,145 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी हो चुकी है। लगातार बढ़ते दाम यह संकेत दे रहे हैं कि अनिश्चित आर्थिक माहौल में निवेशक अब भी सोने को सबसे सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जिन लोगों ने साल की शुरुआत में गोल्ड में निवेश किया था, उन्हें अब तक बेहतरीन रिटर्न मिला है। Silver भी पीछे नहीं, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची कीमत इस साल Silver ने भी शानदार प्रदर्शन किया है। औद्योगिक मांग बढ़ने और निवेशकों की मजबूत खरीदारी के चलते इसकी कीमत में ₹17,317 प्रति किलो की तेजी आई है। इसके साथ ही चांदी का भाव ₹2.34 लाख प्रति किलोग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञ मानते हैं कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर एनर्जी और अन्य उद्योगों में बढ़ती मांग भी चांदी की कीमतों को मजबूती दे रही है। आखिर क्यों बढ़ रहे हैं Gold-Silver के दाम? कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं। क्या अभी Gold खरीदना सही रहेगा? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि के नजरिए से सोना अब भी मजबूत निवेश विकल्प बना हुआ है। हालांकि, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद कीमतों में थोड़ी मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है। ऐसे में यदि कोई निवेश करना चाहता है, तो एकमुश्त रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करना अधिक सुरक्षित रणनीति हो सकती है। आगे क्या कहते हैं बाजार के संकेत? विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बनी रहती है, तो आने वाले महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में और मजबूती देखने को मिल सकती है। वहीं, यदि वैश्विक हालात सामान्य होते हैं या डॉलर मजबूत होता है, तो बाजार में कुछ समय के लिए गिरावट भी आ सकती है।
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Stock Market

Stock Market Rally: IT Shares की वापसी से शेयर बाजार में बहार, Sensex और Nifty दोनों चमके

भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) ने गुरुवार को शानदार बढ़त के साथ कारोबार का समापन किया। दिनभर खरीदारी का माहौल बना रहा और इसकी सबसे बड़ी वजह आईटी (IT) सेक्टर में आई जबरदस्त तेजी रही। लंबे समय बाद टेक कंपनियों के शेयरों में मजबूत रिकवरी देखने को मिली, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा और बाजार ने ऊंचे स्तर पर क्लोजिंग दी। कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 579.48 अंक की बढ़त के साथ 77,502.12 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50, 169.85 अंक चढ़कर 24,175.70 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में अधिकांश सेक्टर हरे निशान में बंद हुए, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा आईटी शेयरों की रही। IT Shares में आई जोरदार खरीदारी पिछले कुछ दिनों से दबाव झेल रहे आईटी शेयरों में गुरुवार को जबरदस्त वापसी देखने को मिली। निवेशकों ने टेक कंपनियों में खुलकर खरीदारी की, जिसके चलते Nifty IT Index में करीब 4 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। विश्लेषकों का मानना है कि हालिया गिरावट के बाद कई आईटी कंपनियों के शेयर आकर्षक वैल्यूएशन पर पहुंच गए थे। इसी वजह से निवेशकों ने दोबारा खरीदारी शुरू की, जिसका सीधा असर पूरे बाजार पर देखने को मिला। इन दिग्गज कंपनियों के शेयरों ने दिखाई ताकत आज के कारोबार में देश की प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया। इन शेयरों की तेजी ने सेंसेक्स और निफ्टी दोनों को नई मजबूती दी। केवल IT नहीं, इन सेक्टरों ने भी दिया साथ आईटी सेक्टर के अलावा बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑटो और चुनिंदा मिडकैप शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। इससे बाजार की चौड़ाई मजबूत रही और अधिकांश शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है। बाजार में तेजी की बड़ी वजह क्या रही? मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार गुरुवार की तेजी के पीछे कई सकारात्मक संकेत रहे। इन सभी कारणों ने मिलकर शेयर बाजार में शानदार रैली को जन्म दिया। निवेशकों के लिए आगे क्या हैं संकेत? अब निवेशकों की नजर कंपनियों के पहली तिमाही (Q1) के नतीजों, वैश्विक आर्थिक संकेतों, अमेरिकी बाजार, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। यदि आईटी सेक्टर में खरीदारी का रुख बना रहता है, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी बाजार सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ सकता है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा तेजी के बीच निवेशकों को जल्दबाजी से बचना चाहिए और मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में ही चरणबद्ध तरीके से निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ड्डा का राहुल पर पलटवार: बोले- कांग्रेस बताए अपने राज्यों में पेपर लीक क्यों हुए, सरकार चर्चा को तैयार

पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस पहले यह बताए कि उसके शासन वाले राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं। नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार इस गंभीर विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है, जबकि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में है। दरअसल, राहुल गांधी ने हाल ही में दावा किया था कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 152 पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं। उन्होंने इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार पर परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने में विफल रहने का आरोप लगाया था। इस पर जवाब देते हुए नड्डा ने कहा कि केवल आंकड़े पेश करने से काम नहीं चलेगा। कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि जिन राज्यों में उसकी सरकारें रही हैं, वहां भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं और उन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा संसद में इस विषय पर सार्थक चर्चा का स्वागत करती है।

अजमेर में मार्बल व्यापारी पर जानलेवा हमला, CCTV में कैद हुई वारदात

राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ में बुधवार सुबह मार्बल व्यापारी पर चार बदमाशों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। स्कॉर्पियो से आए हमलावरों ने गोदाम में घुसकर व्यापारी के साथ बेरहमी से मारपीट की। पूरी घटना गोदाम में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। गोदाम में घुसकर किया हमला गांधीनगर थाना क्षेत्र स्थित मार्बल एरिया में बुधवार सुबह करीब 8:20 बजे स्कॉर्पियो में सवार चार युवक गोदाम के बाहर पहुंचे। गोदाम में बैठे मार्बल व्यापारी गोवर्धन पर उन्होंने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। व्यापारी ने शुरुआत में हमलावरों का मुकाबला करने की कोशिश की, लेकिन चारों बदमाशों ने उसे घेर लिया और जमीन पर गिराकर लगातार लाठियों से पीटा। वारदात के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। सिर और हाथ में गंभीर चोट हमले में व्यापारी के सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं। घायल अवस्था में उन्हें तत्काल किशनगढ़ के राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पीड़ित ने दर्ज कराई शिकायत गांधीनगर थाना प्रभारी अनिल शर्मा ने बताया कि पीड़ित व्यापारी की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। भाई के साथ गोदाम में मौजूद था व्यापारी पीड़ित गोवर्धन ने बताया कि वह बुधवार सुबह अपने भाई के साथ गोदाम में बैठा था। इसी दौरान स्कॉर्पियो में सवार चार युवक पहुंचे और बिना किसी बातचीत के अचानक हमला कर दिया। बदमाशों ने गोदाम के अंदर घुसकर उन्हें नीचे गिराया और लाठियों से बेरहमी से पीटा। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

BPCL को जून तिमाही में ₹3,962 करोड़ का घाटा, कच्चे तेल की महंगाई से बिगड़े नतीजे

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी को इस तिमाही में ₹3,962 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ है। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने ₹6,124 करोड़ का मुनाफा कमाया था, जबकि मार्च तिमाही में ₹3,191 करोड़ का लाभ दर्ज किया गया था। 23% बढ़ा कंपनी का रेवेन्यू घाटे के बावजूद BPCL का परिचालन से राजस्व (Revenue from Operations) बढ़कर ₹1.59 लाख करोड़ पहुंच गया। यह पिछले साल की समान तिमाही के ₹1.29 लाख करोड़ के मुकाबले करीब 23% अधिक है। वहीं, मार्च तिमाही के ₹1.35 लाख करोड़ की तुलना में इसमें करीब 18% की वृद्धि दर्ज की गई। कच्चे तेल की महंगाई बनी घाटे की वजह कंपनी के अनुसार, अमेरिका-ईरान तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। इसके साथ ही शिपिंग (भाड़ा) और इंश्योरेंस लागत भी बढ़ गई। हालांकि, बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में नहीं डाला जा सका, जिससे कंपनी की लाभप्रदता प्रभावित हुई और तिमाही घाटे में बदल गई। शेयर में गिरावट नतीजों के बाद BPCL का शेयर 3% की गिरावट के साथ ₹309 पर बंद हुआ। BPCL के बारे में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों में शामिल है। इसकी स्थापना 24 जनवरी 1976 को हुई थी। कंपनी मुंबई, कोच्चि, नुमालीगढ़ और बीना में रिफाइनरियों का संचालन करती है, जिनकी कुल रिफाइनिंग क्षमता 40 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से अधिक है। BPCL पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, लुब्रिकेंट्स और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के रिफाइनिंग व वितरण का कार्य करती है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू का इस्तीफा, विवादित कृषि बिल के विरोध में छोड़ा पद

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने विवादित कृषि विधेयक के विरोध में इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। इस बिल में दो प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित इस्तेमाल और सिंचाई के लिए बड़े जलाशय बनाने की अनुमति देने का प्रावधान है। वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे मधुमक्खियों, जैव विविधता और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के अनुसार, बारबू बुधवार को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंपेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के अपने वादों से पीछे हटते हुए ऐसे प्रावधानों को मंजूरी दी, जिनका वह लगातार विरोध करती रही थीं। बिल के दो विवादित प्रावधान 1. प्रतिबंधित कीटनाशकों को मंजूरीविधेयक में एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन जैसे प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित उपयोग की अनुमति दी गई है। इनका इस्तेमाल चुकंदर, सेब और चेरी जैसी फसलों में किया जा सकेगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ये रसायन मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले कीड़ों के लिए बेहद हानिकारक हैं, जिससे कृषि उत्पादन और पारिस्थितिकी तंत्र दोनों प्रभावित हो सकते हैं। 2. सिंचाई के लिए बड़े जलाशयों की अनुमतिबिल में किसानों को सिंचाई के लिए बड़े जलाशय और कृत्रिम तालाब बनाने की प्रक्रिया आसान करने का भी प्रावधान है। पर्यावरणविदों का तर्क है कि इससे भूजल और नदियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और गर्मियों में जल संकट बढ़ सकता है। संसद से पास हुआ विधेयक फ्रांस की संसद में मंगलवार को पेश किए गए इस विधेयक को सीनेट ने 214 के मुकाबले 111 मतों से पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि यह कानून किसानों की बढ़ती लागत और घटती आय को देखते हुए लाया गया है, ताकि वे यूरोप के अन्य देशों के किसानों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें। बारबू ने जताई नाराजगी मोनिक बारबू ने कहा कि विवादित प्रावधान आखिरी समय में बिल में जोड़े गए और उन्हें हटाने पर सरकार ने कोई गंभीर चर्चा नहीं की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पिछले नौ महीनों में उन्होंने जंगलों, स्वच्छ जल, साफ हवा और जैव विविधता की रक्षा के लिए काम किया, लेकिन अब वह अपने उद्देश्यों को पूरा करने की स्थिति में नहीं हैं। पहले भी विवादों में रहा कीटनाशक एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन नियोनिकोटिनॉइड समूह के कीटनाशक हैं। फ्रांस ने 2018 में एसेटामिप्रिड पर प्रतिबंध लगाया था। इससे पहले भी इस प्रतिबंध को हटाने की कोशिश हुई थी, लेकिन फ्रांस की सर्वोच्च अदालत ने पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर संभावित खतरे का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

इंदौर में छात्र आंदोलन को मिला कांग्रेस का समर्थन, दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी धरने में पहुंचे

इंदौर के टंट्याभील चौराहे पर चल रहे छात्र आंदोलन को बुधवार रात कांग्रेस का खुला समर्थन मिला। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी धरना स्थल पहुंचे और छात्रों के बीच बैठकर उनके आंदोलन में शामिल हुए। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। टंट्याभील चौराहे पर पिछले कई दिनों से छात्र शिक्षा व्यवस्था, कथित पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन और सोनम वांगचुक को हिरासत में लिए जाने के बाद इंदौर में भी आंदोलन तेज हो गया है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र धरना स्थल पर पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार रात दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी ने छात्रों के बीच बैठकर आंदोलन का समर्थन किया। उनके साथ शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे सहित कई कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी धरने में शामिल हुए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस पिछले 25 दिनों से यह मांग उठा रही है और उन्होंने स्वयं 21 जून को भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी थी। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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