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UPI

6 साल बाद UPI पर फिर MDR की तैयारी! बड़े कारोबारियों से वसूली जा सकती है Payment Fee

अगर आप रोजाना UPI से Payment करते हैं तो यह खबर आपके लिए काफी अहम है। देश में डिजिटल पेमेंट का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके UPI को लेकर सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसके बाद आने वाले समय में कुछ ट्रांजैक्शन पर MDR यानी Merchant Discount Rate लागू होने का रास्ता खुल सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि अभी UPI पर कोई नई फीस लागू नहीं हुई है। वित्त मंत्रालय ने Payment and Settlement Systems Act, 2007 में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो सरकार के पास कुछ डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने की व्यवस्था करने का विकल्प होगा। 2020 में खत्म कर दिया गया था MDR UPI को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने साल 2020 में UPI के जरिए होने वाले Merchant Payments पर MDR को खत्म कर दिया था। इसका सीधा फायदा दुकानदारों और कारोबारियों को मिला और डिजिटल पेमेंट को तेजी से अपनाने में मदद मिली। धीरे-धीरे UPI छोटे किराना स्टोर से लेकर बड़े Shopping Platforms तक पहुंच गया। आज चाय की दुकान से लेकर बड़े मॉल तक QR Code से Payment करना आम बात हो चुकी है। लेकिन इस पूरी व्यवस्था के पीछे बैंक और Payment Companies लगातार टेक्नोलॉजी, सर्वर, नेटवर्क और साइबर सिक्योरिटी पर खर्च कर रहे हैं। इसी वजह से लंबे समय से UPI के लिए एक स्थायी Revenue Model की जरूरत पर चर्चा होती रही है। Payment Act में बदलाव क्यों जरूरी माना जा रहा है? वित्त मंत्रालय ने कानून के मौजूदा प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद डिजिटल पेमेंट से जुड़े शुल्क के लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था को बदलना है। अगर संशोधन को मंजूरी मिल जाती है तो सरकार आगे यह तय कर सकती है कि किन पेमेंट सिस्टम, कारोबारियों या ट्रांजैक्शन पर MDR लगाया जाए। यानी अभी सरकार ने यह नहीं कहा है कि हर UPI Payment पर शुल्क लगेगा। फिलहाल मामला कानूनी बदलाव के प्रस्ताव तक सीमित है। क्या आम UPI Users को देना होगा पैसा? यही सवाल इस समय सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आम लोगों के सामान्य UPI Payments पर सीधे शुल्क लगाने की कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है। संभावना यह जताई जा रही है कि अगर MDR लागू किया जाता है तो इसका फोकस मुख्य रूप से बड़े कारोबारियों या कुछ खास तरह के Merchant Transactions पर हो सकता है। इसका मतलब है कि किसी दोस्त को पैसे भेजना, परिवार के सदस्य को Payment करना या रोजमर्रा की छोटी खरीदारी के लिए UPI इस्तेमाल करना फिलहाल शुल्क के दायरे में आने की पुष्टि नहीं हुई है। बड़े कारोबारियों पर क्यों हो सकता है असर? UPI का इस्तेमाल अब बड़े E-commerce Platforms, Food Delivery Apps, Travel Companies और दूसरे बड़े कारोबारों में भी बड़े पैमाने पर होता है। इन कंपनियों के जरिए रोजाना बड़ी संख्या में डिजिटल भुगतान किए जाते हैं। ऐसे में अगर सरकार बड़े कारोबारियों के कुछ UPI Transactions पर MDR लागू करती है तो सबसे पहले इसका असर इसी वर्ग पर पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम नियम आने के बाद ही पता चलेगा कि किस Merchant को कितना MDR देना होगा और इसकी दर क्या होगी। छोटे दुकानदारों के लिए क्या बदलेगा? छोटे व्यापारियों के लिए UPI लंबे समय से एक आसान और कम लागत वाला Payment Option रहा है। इसलिए सरकार के सामने यह चुनौती भी होगी कि MDR की व्यवस्था बनाते समय छोटे दुकानदारों और छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। अगर भविष्य में शुल्क सिर्फ बड़े कारोबारियों और निर्धारित श्रेणी के Transactions तक सीमित रखा जाता है तो छोटे दुकानदारों पर इसका असर अपेक्षाकृत कम रह सकता है। UPI Users के लिए अभी क्या समझना जरूरी है? इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर ऐसी चर्चाएं भी हो सकती हैं कि अब हर UPI Payment पर Fee लगेगी। लेकिन फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। अभी UPI Payment पर नई अनिवार्य फीस लागू नहीं हुई है। सरकार ने सिर्फ कानून में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। आगे संसद की प्रक्रिया, सरकार के नियम और संबंधित Notification के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी। UPI के Future के लिए बड़ा फैसला UPI ने भारत में Payment करने का तरीका ही बदल दिया है। छोटी रकम से लेकर लाखों रुपये के Business Transactions तक इसका इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में MDR की संभावित वापसी सिर्फ फीस से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि भारत के पूरे Digital Payment Ecosystem के भविष्य से जुड़ा फैसला है। सरकार के सामने दो बड़ी जरूरतें हैं—एक तरफ आम लोगों के लिए UPI को आसान और किफायती बनाए रखना और दूसरी तरफ इस पूरे सिस्टम को चलाने वाले बैंकों और Payment Companies के लिए टिकाऊ Revenue Model तैयार करना। फिलहाल नजर सरकार के अगले कदम पर है। अगर प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो आने वाले दिनों में यह साफ हो सकता है कि UPI पर MDR किन लोगों और किन Transactions पर लागू होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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FSSAI

FSSAI ने डाबर इंडिया को भेजा नोटिस, 100% दावे के साथ शहद, घी, तेल आदि की बिक्री पर लगाई रोक

खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापन में किए जाने वाले दावों को लेकर FSSAI ने बड़ी कार्रवाई की है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने Dabur India को नोटिस जारी करते हुए उसके कुछ खाद्य उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। मामला खास तौर पर उत्पादों की पैकेजिंग और ऑनलाइन लिस्टिंग में इस्तेमाल किए जा रहे ‘100%’ दावों से जुड़ा है। FSSAI की कार्रवाई के बाद शहद, घी, तेल, नारियल पानी और एप्पल साइडर विनेगर जैसे उत्पादों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इस कार्रवाई का मतलब यह नहीं है कि डाबर के सभी संबंधित उत्पादों को मिलावटी या स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया गया है। नियामक की मुख्य आपत्ति लेबलिंग और विज्ञापन में किए गए दावों को लेकर है। किन उत्पादों पर FSSAI की नजर? रिपोर्ट्स के मुताबिक, FSSAI ने डाबर के कई खाद्य उत्पादों पर इस्तेमाल किए जा रहे ‘100%’ जैसे दावों पर आपत्ति जताई है। इनमें Honey, Apple Cider Vinegar, Virgin Coconut Oil, Sesame Oil, Cow Ghee, Coconut Water और Coconut Milk जैसे उत्पाद शामिल हैं। नियामक ने कंपनी की वेबसाइट और उत्पादों की ऑनलाइन लिस्टिंग में इस्तेमाल की गई भाषा की भी जांच की। कुछ उत्पादों के साथ ‘100% Natural’, ‘100% Pure’, ‘100% Purity Guaranteed’ और ‘100% Organic’ जैसे दावे पाए गए। FSSAI का मानना है कि इस तरह के दावे उपभोक्ताओं के मन में उत्पाद की पूरी तरह शुद्ध, प्राकृतिक या जैविक होने की धारणा बना सकते हैं। इसलिए खाद्य उत्पादों के प्रचार और लेबलिंग में ऐसी भाषा के इस्तेमाल को लेकर नियमों का पालन जरूरी है। Organic Products के दावों पर भी सवाल इस मामले में केवल ‘100%’ दावे ही नहीं, बल्कि कुछ ऑर्गेनिक उत्पादों की लेबलिंग भी जांच के दायरे में आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, Dabur Organic Honey और Dabur Himalayan Organic Apple Cider Vinegar पर इस्तेमाल किए गए ‘Jaivik Bharat’ लोगो को लेकर भी नियामक ने सवाल उठाए हैं। FSSAI ने संबंधित ऑर्गेनिक दावों और उनके लिए जरूरी प्रमाणन की स्थिति को लेकर कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को पैकेजिंग पर वही जानकारी दी जाए, जिसे नियमों के तहत प्रमाणित किया जा सकता है। पहले भी दी गई थी चेतावनी FSSAI की मौजूदा कार्रवाई अचानक नहीं हुई है। इससे पहले भी खाद्य कंपनियों को ‘100%’ जैसे दावों के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए थे। मई 2025 में FSSAI ने खाद्य कारोबारियों को ऐसे दावों से बचने की सलाह दी थी, क्योंकि ‘100%’ जैसी भाषा किसी खाद्य उत्पाद की पूर्ण गुणवत्ता या श्रेष्ठता की गारंटी के तौर पर समझी जा सकती है। डाबर के मामले में भी नियामक की ओर से पहले सुधारात्मक कदम उठाने के लिए कहा गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी की ओर से की गई कार्रवाई को संतोषजनक नहीं माने जाने के बाद बिक्री रोकने का निर्देश दिया गया। 15 दिन में Action Taken Report मांगी FSSAI ने डाबर से इस मामले में 15 दिनों के भीतर Action Taken Report (ATR) जमा करने को कहा है। यानी कंपनी को यह जानकारी देनी होगी कि नियामक की आपत्तियों के बाद उसने क्या सुधारात्मक कदम उठाए हैं। यह कदम खाद्य कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी माना जा रहा है कि उत्पाद की पैकेजिंग, वेबसाइट और विज्ञापन में इस्तेमाल किए जाने वाले दावों को लेकर नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। क्या Dabur के उत्पाद मिलावटी हैं? इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि FSSAI की कार्रवाई को उत्पादों के मिलावटी या असुरक्षित होने की घोषणा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मौजूदा विवाद मुख्य रूप से ‘100%’ दावों, लेबलिंग और ऑर्गेनिक प्रमाणन से जुड़े पहलुओं पर है। इसलिए सोशल मीडिया या अन्य जगहों पर इस कार्रवाई को सीधे तौर पर ‘डाबर के उत्पाद मिलावटी पाए गए’ कहना भ्रामक हो सकता है। कंपनियों के लिए बढ़ी चुनौती FSSAI की यह कार्रवाई खाद्य उद्योग में लेबलिंग और मार्केटिंग के बढ़ते नियामकीय दबाव को भी दिखाती है। आज उपभोक्ता किसी उत्पाद को खरीदने से पहले पैकेजिंग पर लिखे शब्दों, ऑनलाइन डिस्क्रिप्शन और विज्ञापनों पर काफी भरोसा करते हैं। ऐसे में ‘Pure’, ‘Natural’, ‘Organic’ या ‘100%’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कंपनियों के लिए सिर्फ मार्केटिंग का हिस्सा नहीं, बल्कि नियमों के दायरे में आने वाला विषय भी है। डाबर मामले में अब नजर कंपनी की अगली कार्रवाई और FSSAI को दी जाने वाली रिपोर्ट पर रहेगी। अगर कंपनी को अपने उत्पादों की पैकेजिंग या ऑनलाइन दावों में बदलाव करना पड़ता है, तो इसका असर बाजार में मौजूद उत्पादों की लेबलिंग पर भी दिखाई दे सकता है। फिलहाल FSSAI का संदेश स्पष्ट है—खाद्य उत्पादों को बेचते समय कंपनियों को ऐसे दावों से बचना होगा, जो उपभोक्ताओं को उत्पाद की गुणवत्ता या शुद्धता के बारे में गलत या बढ़ा-चढ़ाकर धारणा दे सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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सरकार ने पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात पर बढ़ाया विंडफॉल टैक्स, 3 अगस्त से नई दरें लागू

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार नई दरें 3 अगस्त से लागू हो गई हैं। सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू परिस्थितियों को देखते हुए हर 15 दिन में इन टैक्स दरों की समीक्षा करती है। डीजल और ATF पर सबसे ज्यादा बढ़ी ड्यूटी नई अधिसूचना के अनुसार, डीजल के निर्यात पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) को 15.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 25.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट ईंधन के निर्यात पर ड्यूटी 14.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 22 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। इसके अलावा पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला विंडफॉल टैक्स भी 2.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 3.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। घरेलू उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा असर वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह बढ़ोतरी केवल निर्यात पर लागू होगी। देश के भीतर बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली मौजूदा एक्साइज ड्यूटी में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। यानी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए ईंधन पर लागू कर व्यवस्था पहले जैसी ही रहेगी। क्यों बढ़ाया गया विंडफॉल टैक्स? सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि तेल कंपनियां अधिक मुनाफे के लिए घरेलू जरूरतों की अनदेखी कर निर्यात को प्राथमिकता न दें। गौरतलब है कि सरकार ने 27 मार्च से डीजल और ATF के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लागू किया था। इसके बाद 16 मई से पेट्रोल के निर्यात को भी इस दायरे में शामिल कर लिया गया था। देश-दुनिया, बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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Claude AI

Claude AI Controversy: क्या AI ने किया System Hack? टेस्टिंग की गलती से सामने आया बड़ा Security Risk

AI तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उससे जुड़े सुरक्षा जोखिम भी उतनी ही तेजी से चर्चा में आ रहे हैं। हाल ही में Claude AI से जुड़ी एक टेस्टिंग घटना ने दुनिया भर के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। शुरुआती रिपोर्ट्स में इसे “AI ने कंपनियों के सिस्टम हैक कर दिए” के तौर पर पेश किया गया, लेकिन जांच में सामने आया कि मामला किसी वास्तविक साइबर हमले का नहीं, बल्कि टेस्टिंग के दौरान हुई सुरक्षा चूक (Misconfiguration) का था। इस घटना ने यह जरूर दिखा दिया कि यदि किसी AI मॉडल को जरूरत से ज्यादा अधिकार और लाइव इंटरनेट एक्सेस मिल जाए, तो वह अनजाने में भी संवेदनशील सिस्टम तक पहुंच सकता है। क्या हुआ था? जानकारी के अनुसार, Claude AI का एक नियंत्रित सुरक्षा परीक्षण (Controlled Security Test) चल रहा था। इस दौरान AI को इंटरनेट एक्सेस और कुछ ऑटोमेशन टूल्स उपलब्ध कराए गए थे, ताकि उसकी क्षमताओं और सीमाओं का आकलन किया जा सके। टेस्टिंग के दौरान सिस्टम की कॉन्फ़िगरेशन में हुई एक गलती के कारण AI उन तीन कंपनियों के नेटवर्क तक पहुंच गया, जहां उसे सामान्य परिस्थितियों में पहुंचने की अनुमति नहीं होनी चाहिए थी। हालांकि, अब तक ऐसी कोई पुष्टि नहीं हुई है कि AI ने किसी कंपनी का डेटा चुराया, सिस्टम को नुकसान पहुंचाया या किसी तरह का मैलवेयर इंस्टॉल किया हो। ‘हैकिंग’ नहीं, सुरक्षा सेटअप की कमजोरी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना को सीधे “AI हैकिंग” कहना पूरी तरह सही नहीं होगा। असल समस्या सुरक्षा नियमों और एक्सेस कंट्रोल में हुई चूक थी। AI वही कर पाया जिसकी अनुमति उसे उपलब्ध सिस्टम ने दी। यानी अगर सुरक्षा सीमाएं सही तरीके से लागू होतीं, तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती। यही कारण है कि विशेषज्ञ इस घटना को AI की गलती से ज्यादा सुरक्षा प्रबंधन (Security Configuration) की विफलता मान रहे हैं। AI Security को लेकर क्यों बढ़ी चिंता? Agentic AI और Autonomous AI सिस्टम अब पहले से कहीं अधिक जटिल काम कर सकते हैं। ऐसे में यदि उन्हें इंटरनेट, क्लाउड सर्वर, डेटाबेस या कंपनी के इंटरनल टूल्स तक सीधी पहुंच दी जाती है, तो सुरक्षा उपाय और भी मजबूत होने चाहिए। इस घटना ने कंपनियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि भविष्य में AI मॉडल्स को कितनी स्वतंत्रता दी जानी चाहिए और उनके लिए कौन-कौन से सुरक्षा मानक अनिवार्य होने चाहिए। विशेषज्ञों ने क्या सलाह दी? AI सुरक्षा पर काम कर रहे विशेषज्ञों के अनुसार, कंपनियों को कुछ जरूरी कदम अपनाने चाहिए— AI का बढ़ता इस्तेमाल, बढ़ती जिम्मेदारी आज AI का उपयोग बैंकिंग, हेल्थकेयर, साइबर सिक्योरिटी, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और सरकारी सेवाओं तक पहुंच चुका है। ऐसे में किसी भी छोटी सुरक्षा चूक का असर बड़ा हो सकता है। Claude AI से जुड़ी यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि केवल एडवांस AI बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि उसके आसपास मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार करना भी उतना ही जरूरी है।
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ITR

ITR Deadline 2026: आज चूके तो लगेगा ₹5,000 तक का जुर्माना, CA ने बताए 4 आसान Steps

अगर आपने अभी तक Income Tax Return (ITR) फाइल नहीं किया है, तो अब और इंतजार करना भारी पड़ सकता है। 31 जुलाई को ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख है और इसके बाद रिटर्न भरने वालों को नियमों के अनुसार ₹5,000 तक की लेट फीस चुकानी पड़ सकती है। आयकर विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 5 करोड़ से ज्यादा टैक्सपेयर्स अपना रिटर्न दाखिल कर चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी अंतिम समय का इंतजार कर रहे हैं। टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि आखिरी दिन पोर्टल पर ट्रैफिक काफी बढ़ जाता है। ऐसे में सर्वर धीमा होने या तकनीकी दिक्कत आने की संभावना रहती है। इसलिए अंतिम समय का जोखिम लेने के बजाय जल्द से जल्द ITR फाइल करना बेहतर रहेगा। देर से ITR भरने पर कितना लगेगा जुर्माना? अगर तय समय सीमा के बाद Income Tax Return दाखिल किया जाता है, तो आयकर कानून के तहत लेट फीस देनी पड़ सकती है। CA ने बताए ITR Filing के 4 आसान Steps चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का कहना है कि थोड़ी तैयारी के साथ ITR भरना काफी आसान हो जाता है। इसके लिए इन चार बातों का ध्यान रखें। 1. जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखें रिटर्न भरने से पहले PAN, Aadhaar, Form-16, AIS (Annual Information Statement), बैंक अकाउंट की जानकारी, निवेश और TDS से जुड़े दस्तावेज अपने पास रखें। इससे फाइलिंग के दौरान समय बचेगा। 2. सही ITR Form का चयन करें हर टैक्सपेयर के लिए ITR फॉर्म अलग हो सकता है। आपकी आय का स्रोत वेतन, बिजनेस, किराया या अन्य किसी माध्यम से है, उसी के अनुसार सही फॉर्म चुनें। गलत फॉर्म भरने पर रिटर्न अमान्य हो सकता है। 3. सभी जानकारी अच्छी तरह जांच लें रिटर्न सबमिट करने से पहले बैंक अकाउंट, PAN, TDS, आय और टैक्स की सभी जानकारियों का मिलान जरूर करें। छोटी-सी गलती भी बाद में नोटिस या रिफंड में देरी की वजह बन सकती है। 4. e-Verification करना बिल्कुल न भूलें ITR जमा करने के बाद Aadhaar OTP, Net Banking या Digital Signature के जरिए e-Verification जरूर करें। बिना e-Verification के आपका रिटर्न अधूरा माना जाएगा। आखिरी दिन इन बातों का रखें विशेष ध्यान समय पर ITR भरना क्यों है जरूरी? Income Tax Return केवल टैक्स भरने का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह आपकी वित्तीय पहचान का भी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड होता है। होम लोन, पर्सनल लोन, वीजा आवेदन, क्रेडिट प्रोफाइल और टैक्स रिफंड जैसी कई प्रक्रियाओं में ITR की जरूरत पड़ती है। इसलिए समय पर रिटर्न दाखिल करना भविष्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Women’s Forum

India to Host Women’s Forum 2026: मुंबई में होगा Global Conference, Women Empowerment पर होगा मंथन

भारत इस साल एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन का गवाह बनने जा रहा है, जो देश की वैश्विक पहचान को नई मजबूती देगा। पहली बार प्रतिष्ठित Women’s Forum for the Economy & Society अपनी Global Meeting फ्रांस से बाहर भारत में आयोजित करने जा रहा है। यह सम्मेलन 2 और 3 नवंबर 2026 को मुंबई में होगा और France-India Innovation Year 2026 का अहम हिस्सा रहेगा। इस आयोजन में भारत में फ्रांस का दूतावास और Indo-French Chamber of Commerce and Industry (IFCCI) सहयोगी की भूमिका निभा रहे हैं। सम्मेलन में दुनिया के कई देशों से नीति-निर्माता, उद्योग जगत के दिग्गज, स्टार्टअप लीडर्स, शिक्षाविद और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ शामिल होंगे। 20 साल बाद पहली बार फ्रांस से बाहर Global Meeting पिछले दो दशकों से Women’s Forum दुनिया भर में महिलाओं की भागीदारी, आर्थिक विकास और सामाजिक बदलाव जैसे विषयों पर संवाद का एक प्रमुख मंच रहा है। लेकिन यह पहला मौका होगा जब इसकी सबसे महत्वपूर्ण Global Meeting फ्रांस के बाहर आयोजित की जा रही है। भारत को मेजबानी मिलना इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्तर पर देश को नवाचार, डिजिटल विकास और आर्थिक नेतृत्व के नए केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। AI, Innovation और Future of Work पर होगी बड़ी चर्चा इस वर्ष सम्मेलन की थीम “The Future of Prosperity: Women, Work and the Forces Reshaping Our World” रखी गई है। सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञ इन अहम विषयों पर चर्चा करेंगे— इसके अलावा यह भी विचार किया जाएगा कि तेजी से बदलती तकनीक का लाभ समाज के हर वर्ग तक कैसे पहुंचाया जाए और भविष्य के लिए किस तरह की नीतियां तैयार की जाएं। भारत क्यों बना इस Global Summit का मेजबान? दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत आज डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप इकोसिस्टम और टेक्नोलॉजी इनोवेशन के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। इन्हीं कारणों से Women’s Forum ने अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय Global Meeting के लिए भारत को चुना है। इससे भारत को वैश्विक नीति निर्माण और नवाचार पर होने वाली चर्चाओं में और मजबूत स्थान मिलने की उम्मीद है। भारत-फ्रांस साझेदारी को मिलेगी नई दिशा यह सम्मेलन केवल एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक सहयोग को भी नई गति देगा। उद्योग, सरकार, शिक्षा, तकनीकी संस्थानों और नागरिक समाज के प्रतिनिधि एक ही मंच पर भविष्य की साझेदारियों पर चर्चा करेंगे। विशेषज्ञ इस बात पर भी मंथन करेंगे कि AI आधारित भविष्य में कौन-से कौशल सबसे अधिक जरूरी होंगे और समावेशी आर्थिक विकास को कैसे आगे बढ़ाया जाए। Women’s Forum अध्यक्ष ने क्या कहा? Women’s Forum की अध्यक्ष नैनेट लाफोंड डुफोर ने कहा कि आर्थिक विकास, तकनीकी बदलाव और नवाचार तभी सार्थक होंगे जब समाज के सभी लोगों को समान अवसर मिलेंगे। उनके अनुसार लैंगिक समानता केवल सामाजिक न्याय का विषय नहीं, बल्कि नवाचार, प्रतिस्पर्धा और सतत आर्थिक विकास की मजबूत नींव भी है। फ्रांस के राजदूत का बयान भारत में फ्रांस के राजदूत थियरी माथू ने कहा कि France-India Innovation Year 2026 दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य की समृद्धि तभी संभव है, जब महिलाओं और पुरुषों को समान अवसर और बराबर भागीदारी मिले। भारत के लिए क्यों खास है यह आयोजन? मुंबई में होने वाला यह सम्मेलन भारत को वैश्विक नवाचार, महिला नेतृत्व और समावेशी विकास से जुड़े विमर्श के केंद्र में स्थापित करेगा। साथ ही यह आयोजन भारत और फ्रांस के बीच आर्थिक, तकनीकी और सामाजिक सहयोग को और मजबूत बनाने का अवसर भी देगा।
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सोने

Bullion Market Update: सोने में फिर तेजी, ₹177 बढ़कर ₹1.42 लाख पहुंचा भाव; Silver Rate फिसला

देश के सर्राफा बाजार में एक बार फिर Gold Price Today चर्चा में है। सोने की कीमतों में लगातार तेजी जारी है और गुरुवार को इसके भाव में ₹177 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस उछाल के बाद सोना करीब ₹1.42 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी के दाम में हल्की गिरावट देखने को मिली है। Silver Rate Today में ₹789 प्रति किलो की कमी आई, जिसके बाद चांदी करीब ₹2.17 लाख रुपए प्रति किलो पर आ गई। सोने की चमक बरकरार, 2026 में ₹9 हजार तक बढ़े भाव सोना इस साल निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है। साल की शुरुआत से अब तक सोने की कीमतों में करीब ₹9 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी हो चुकी है। लगातार बढ़ती कीमतों के पीछे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार के कई फैक्टर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही वजह है कि मांग बढ़ने के साथ सोने के भाव में भी तेजी देखने को मिल रही है। Silver Price Update: चांदी हुई सस्ती, लेकिन मांग मजबूत जहां सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिली, वहीं चांदी के बाजार में थोड़ी नरमी आई है। चांदी का भाव ₹789 प्रति किलो गिरकर ₹2.17 लाख रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है। हालांकि, चांदी की लंबी अवधि की मांग मजबूत बनी हुई है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंडस्ट्रियल सेक्टर में चांदी के बढ़ते इस्तेमाल के कारण निवेशकों की नजर इस पर भी बनी हुई है। Gold Rate बढ़ने के पीछे क्या हैं कारण? सोने की कीमतों में तेजी के पीछे कई अहम वजहें मानी जा रही हैं— शादी और त्योहारों की खरीदारी पर असर सोने के लगातार महंगे होने का असर आम ग्राहकों पर भी दिखाई दे रहा है। खासतौर पर शादी-विवाह और त्योहारों के सीजन में ज्वेलरी खरीदने वालों को अब ज्यादा बजट तैयार करना पड़ सकता है। हालांकि, निवेश के लिहाज से सोना अभी भी लोगों के बीच पसंदीदा विकल्प बना हुआ है। वहीं, चांदी में आई गिरावट को कुछ निवेशक खरीदारी के मौके के रूप में भी देख रहे हैं। Gold-Silver Market पर निवेशकों की नजर फिलहाल Gold Rate Today ₹1.42 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है, जबकि Silver Price Today करीब ₹2.17 लाख रुपए प्रति किलो है। बाजार जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी सोने और चांदी की कीमतों में वैश्विक संकेतों के आधार पर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sensex

Sensex Today: 76,900 के स्तर पर कारोबार, Nifty भी मजबूत; निवेशकों का बढ़ा भरोसा

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को कारोबार के दौरान अच्छी तेजी देखने को मिली। Sensex करीब 100 अंकों की बढ़त के साथ 76,900 के स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया, वहीं Nifty में भी लगभग 100 अंकों की मजबूती दर्ज की गई। बाजार में आई इस तेजी के पीछे IT और FMCG सेक्टर के शेयरों में बढ़ी खरीदारी अहम वजह रही। शुरुआती कारोबार से ही निवेशकों का रुझान मजबूत शेयरों की तरफ दिखाई दिया। खासकर बड़ी आईटी कंपनियों और कंज्यूमर सेक्टर के स्टॉक्स में खरीदारी बढ़ने से बाजार का माहौल सकारात्मक बना रहा। लंबे समय बाद बाजार में आई इस मजबूती ने निवेशकों के चेहरे पर भी राहत दिखाई। IT Stocks में तेजी से बाजार को मिला सपोर्ट आज के कारोबार में IT सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। निवेशकों ने टेक्नोलॉजी कंपनियों के स्टॉक्स में भरोसा दिखाया। ग्लोबल मार्केट से मिले संकेतों और आईटी सेक्टर की बेहतर संभावनाओं के चलते इस क्षेत्र में गतिविधियां तेज रहीं। विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल सर्विसेज और टेक्नोलॉजी की बढ़ती मांग आने वाले समय में आईटी कंपनियों के लिए सकारात्मक संकेत दे सकती है। FMCG Sector में भी दिखा पॉजिटिव ट्रेंड IT के अलावा FMCG Stocks में भी तेजी का माहौल रहा। रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में निवेशकों ने रुचि दिखाई। घरेलू खपत में सुधार की उम्मीद और ग्रामीण बाजार से बेहतर संकेतों ने FMCG सेक्टर को मजबूती दी। आज किन सेक्टर्स पर रही निवेशकों की नजर? Global Market और Economic Data पर रहेगी नजर शेयर बाजार की आगे की दिशा वैश्विक बाजारों के प्रदर्शन, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा तेजी के बीच निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और मजबूत कंपनियों पर फोकस करना चाहिए। निवेशकों के लिए क्या है संकेत? बाजार में तेजी के बावजूद उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रह सकती है। ऊंचे स्तरों पर कुछ निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं, लेकिन मजबूत सेक्टरों में धीरे-धीरे निवेश का नजरिया बेहतर माना जा रहा है। कुल मिलाकर, आज के कारोबार में Sensex और Nifty ने मजबूती दिखाई। IT और FMCG शेयरों में खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया और निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेत और कंपनियों के प्रदर्शन बाजार की दिशा तय करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Currency

RBI Currency Update: देश में जल्द चलेंगे ₹10-₹20 के Plastic Notes, Paper Notes भी रहेंगे जारी

भारत की करेंसी (Currency) व्यवस्था में जल्द एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में ₹10 और ₹20 के पॉलीमर (Plastic) नोटों का ट्रायल शुरू करने की तैयारी में हैं। इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत करीब 200 करोड़ प्लास्टिक नोट छापे जाएंगे। हालांकि, आम लोगों को फिलहाल चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि मौजूदा कागजी नोट पहले की तरह वैध रहेंगे और दोनों तरह की करेंसी साथ-साथ चलेगी। यह कदम भारतीय करेंसी को अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। क्यों लाए जा रहे हैं Plastic Notes? भारत में लंबे समय से कागजी नोटों की जल्दी खराब होने, फटने और नकली नोटों की समस्या सामने आती रही है। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए सरकार पॉलीमर नोटों के विकल्प पर काम कर रही है। पॉलीमर नोट विशेष प्लास्टिक सामग्री से बनाए जाते हैं, जो सामान्य कागजी नोटों की तुलना में अधिक मजबूत होते हैं। ये पानी, नमी और धूल से जल्दी प्रभावित नहीं होते और लंबे समय तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं। 200 करोड़ नोटों की होगी Trial Printing सरकारी योजना के अनुसार, पहले चरण में ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के लगभग 200 करोड़ पॉलीमर नोट तैयार किए जाएंगे। इनका उपयोग परीक्षण के तौर पर किया जाएगा ताकि यह समझा जा सके कि भारतीय मौसम, बैंकिंग व्यवस्था और आम लोगों के दैनिक उपयोग में ये नोट कितने प्रभावी साबित होते हैं। यदि ट्रायल सफल रहता है, तो भविष्य में अन्य मूल्यवर्ग के नोटों को भी पॉलीमर सामग्री में जारी करने पर विचार किया जा सकता है। क्या बंद हो जाएंगे पुराने Paper Notes? इस खबर के सामने आने के बाद कई लोगों के मन में सवाल उठा कि क्या कागजी नोट बंद हो जाएंगे? इसका जवाब नहीं है। सरकार और RBI की ओर से स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल पुराने ₹10 और ₹20 के कागजी नोट पूरी तरह वैध रहेंगे। नए प्लास्टिक नोट केवल परीक्षण के लिए जारी किए जाएंगे। यानी आम लोगों को अपने पुराने नोट बदलवाने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। Plastic Notes के बड़े फायदे पॉलीमर नोटों को दुनिया के कई देशों में सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जा रहा है। इनके कई फायदे हैं— कई देशों में पहले से चल रहे हैं Polymer Notes ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, न्यूजीलैंड और सिंगापुर जैसे कई देशों में पॉलीमर नोट वर्षों से उपयोग में हैं। इन देशों के अनुभव बताते हैं कि प्लास्टिक नोट कागजी नोटों की तुलना में अधिक समय तक चलते हैं और उनकी सुरक्षा भी बेहतर होती है। भारत भी अब इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाने जा रहा है। आम लोगों पर क्या होगा असर? फिलहाल आम नागरिकों की दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं होगा। बाजार, बैंक और एटीएम में कागजी और प्लास्टिक दोनों प्रकार के ₹10 और ₹20 के नोट स्वीकार किए जाएंगे। यदि ट्रायल सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में धीरे-धीरे अन्य मूल्यवर्ग के नोट भी पॉलीमर सामग्री में लाए जा सकते हैं। भारत की करेंसी में बदलाव की नई शुरुआत ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोटों का ट्रायल भारतीय करेंसी सिस्टम को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। 200 करोड़ नोटों की ट्रायल प्रिंटिंग के जरिए सरकार और RBI यह परखेंगे कि पॉलीमर नोट भारतीय परिस्थितियों में कितने सफल रहते हैं। फिलहाल लोगों के लिए सबसे अहम बात यही है कि मौजूदा कागजी नोट पूरी तरह वैध रहेंगे और उन्हें बदलवाने की कोई जरूरत नहीं है। अगर यह प्रयोग सफल होता है, तो आने वाले समय में भारत की करेंसी व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Vishwas Sarang

Vishwas Sarang को बहनों का बेशुमार प्यार, Narela Rakshabandhan Mahotsav में बना नया उत्साह

नरेला विधानसभा क्षेत्र में चल रहे Rakshabandhan Mahotsav 2026 में रविवार को भाई-बहन के रिश्ते की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। वार्ड नंबर 36, 37 और 70 में आयोजित कार्यक्रम के पांचवें दिन 24 हजार 604 बहनों ने मंत्री Vishwas Sarang को रक्षासूत्र बांधा। बहनों ने राखी बांधकर उनके प्रति स्नेह और आशीर्वाद जताया। कार्यक्रम में पहुंचते ही मंत्री विश्वास सारंग का स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। ढोल-ताशों और DJ की गूंज के बीच उन्हें बग्गी से मुख्य कार्यक्रम स्थल तक ले जाया गया। इस दौरान आतिशबाजी भी हुई। मंच पर पहुंचने के बाद सारंग ने बहनों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। बहनों के प्यार को बताया अपनी ताकत रक्षाबंधन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वास सारंग ने कहा कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच विश्वास, स्नेह और अपनत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में बहनों का प्यार और आशीर्वाद मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। कार्यक्रम में पहुंचीं बहनों से उन्होंने राखी बंधवाई और उनका आशीर्वाद लिया। सारंग ने कहा कि लाखों बहनों का स्नेह और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। चौथे दिन भी उमड़ा था बहनों का सैलाब नरेला रक्षाबंधन महोत्सव के चौथे दिन भी बड़ी संख्या में बहनें कार्यक्रम में पहुंची थीं। उस दिन 31,117 बहनों ने मंत्री विश्वास सारंग को रक्षासूत्र बांधा था। आयोजकों के अनुसार, पिछले साल के महोत्सव में कुल 1 लाख 84 हजार 632 बहनों ने रक्षासूत्र बांधा था। इस बार भी लगातार बढ़ रही भागीदारी को देखते हुए पिछले साल का आंकड़ा पार होने की उम्मीद जताई जा रही है। 7 सितंबर को इन दो वार्डों में होगा आयोजन नरेला रक्षाबंधन महोत्सव का अगला चरण 7 सितंबर 2026 को होगा। इस दिन दो वार्डों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में भी बड़ी संख्या में बहनों के शामिल होने की उम्मीद है। महोत्सव के जरिए रक्षाबंधन के पारंपरिक रिश्ते को सामाजिक जुड़ाव और भाईचारे के भाव से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। नरेला क्षेत्र में लगातार कई दिनों से चल रहे इस आयोजन में बहनों की बड़ी भागीदारी देखने को मिल रही है। पांचवें दिन 24,604 रक्षासूत्र बांधे जाने के साथ महोत्सव का उत्साह और बढ़ गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM रेखा गुप्ता

Satya Niketan हादसे पर CM रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला, Deputy Commissioner समेत 5 Suspend

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। पांच मंजिला इमारत के अचानक गिरने से अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के बाद CM रेखा गुप्ता ने जिम्मेदारी तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। MCD के साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत 5 अधिकारियों को Suspend कर दिया गया है। सरकार के इस एक्शन के बाद नगर निगम के कामकाज और इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हादसे के बाद MCD में बड़ा Action सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद MCD ने पांच अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। इनमें साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर सहित इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि इमारत की हालत को लेकर पहले कोई शिकायत या नोटिस जारी हुआ था या नहीं और निर्माण या मरम्मत के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं। PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी इमारत बताया जा रहा है कि जिस बिल्डिंग का हिस्सा ढहा, उसका इस्तेमाल PG accommodation के तौर पर किया जा रहा था। हादसे के समय वहां कई लोग मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। धूल का गुबार उठ गया और लोग मदद के लिए मौके पर पहुंचने लगे। इसके बाद दिल्ली फायर सर्विस, NDRF और अन्य बचाव दलों ने मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। 7 लोगों की मौत, कई घायल रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे से कई लोगों को बाहर निकाला गया। हादसे में अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद आसपास के लोगों में भी डर का माहौल है। स्थानीय स्तर पर दूसरी पुरानी और कमजोर इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। Building Owner भी पुलिस की गिरफ्त में मामले में पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक हरिराम के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस ने उसकी तलाश के लिए कई टीमें लगाई थीं। बाद में उसे भिवाड़ी से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस अब हादसे से जुड़े दस्तावेज, बिल्डिंग की स्थिति और निर्माण या मरम्मत से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे और लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। आसपास की इमारतों की भी जांच सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने आसपास की इमारतों की स्थिति को लेकर भी जांच शुरू की है। अधिकारियों की नजर खास तौर पर उन भवनों पर है जो पुराने हैं या जिनमें निर्माण और मरम्मत का काम चल रहा है। इस घटना ने दिल्ली में old buildings, PG और construction safety को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर इमारत में पहले से कोई खामी थी, तो उसे समय रहते क्यों नहीं रोका गया? सरकार के Action से उठे कई सवाल MCD के पांच अधिकारियों का निलंबन सरकार की ओर से उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, असली तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। सत्य निकेतन की इस घटना ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच में हादसे की असली वजह क्या सामने आती है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM House

CM House March पर Police का पहरा, Hamidia में Intern Doctors से धक्का-मुक्की

अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टर सोमवार को मुख्यमंत्री आवास (CM House) की ओर बढ़ रहे थे। लेकिन हमीदिया अस्पताल के पास पुलिस ने उनका रास्ता रोक दिया। डॉक्टरों को आगे जाने से रोकने के लिए पुलिस ने आसपास के रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी। इस दौरान डॉक्टरों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। प्रदर्शन को देखते हुए हमीदिया अस्पताल परिसर और आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए मौके पर Water Cannon भी तैयार रखा गया। CM House की तरफ मार्च करना चाहते थे डॉक्टर इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। इसी सिलसिले में डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने का फैसला किया। डॉक्टरों का समूह हमीदिया अस्पताल से आगे बढ़ने लगा तो पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। पुलिस की Barricading के बाद डॉक्टरों ने मौके पर नारेबाजी शुरू कर दी। आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान से आगे नहीं जाने के लिए समझाती रही। चारों तरफ से रास्ते किए गए बंद प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हमीदिया के आसपास कई रास्तों को बंद कर दिया। बैरिकेड लगाकर आवाजाही को नियंत्रित किया गया। मौके पर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गई, ताकि भीड़ को संभाला जा सके। Water Cannon की मौजूदगी से साफ था कि प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी में था। हालांकि, डॉक्टरों का प्रदर्शन अपनी मांगों को लेकर जारी रहा। मांगों पर सरकार से जवाब चाहते हैं Intern Doctors प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। CM House तक मार्च के जरिए उनका उद्देश्य सीधे सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचना था। फिलहाल पुलिस ने डॉक्टरों को मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने से रोक दिया है। हमीदिया अस्पताल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और स्थिति पर पुलिस लगातार नजर बनाए हुए है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा डॉक्टरों की मांगों और सरकार की ओर से संभावित बातचीत को लेकर है। अब देखना होगा कि प्रदर्शन के बाद प्रशासन और इंटर्न डॉक्टरों के बीच क्या समाधान निकलता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold

Gold Rate Today: सोने की कीमत ₹2409 गिरी, चांदी भी ₹3967 सस्ती

सोना खरीदने वालों के लिए सोमवार को बाजार से थोड़ी राहत की खबर आई। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोने (Gold) और चांदी (Silver) दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। आपके दिए बाजार आंकड़ों के मुताबिक सोना करीब ₹2,409 और चांदी करीब ₹3,967 सस्ती हुई है। इसके बाद 10 ग्राम सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख, जबकि एक किलो चांदी करीब ₹2.35 लाख के आसपास पहुंच गई। हालांकि, अलग-अलग बाजार, शुद्धता और कारोबार के समय के हिसाब से रेट में अंतर हो सकता है। सोमवार को एक अन्य बाजार रिपोर्ट में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,52,590 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,36,240 प्रति किलो बताया गया। सोने के भाव में फिर आई नरमी पिछले कुछ समय से रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास कारोबार कर रहा Gold सोमवार को दबाव में नजर आया। घरेलू बाजार में भी इसकी कीमत में कमजोरी देखने को मिली। MCX पर अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स में भी गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत इससे कम है। अगर आप ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं तो ध्यान रखें कि दुकान पर मिलने वाला अंतिम रेट बाजार भाव से अलग हो सकता है। Silver Price Today: चांदी भी हुई सस्ती सोने के साथ चांदी में भी कमजोरी रही। चांदी करीब ₹3,967 प्रति किलो सस्ती होने के बाद लगभग ₹2.35 लाख प्रति किलो के स्तर पर आ गई है। हालांकि, सोमवार के अलग-अलग बाजार अपडेट में चांदी का भाव करीब ₹2.36 लाख प्रति किलो भी बताया गया है। इससे साफ है कि कारोबार के समय के साथ कीमतों में बदलाव हो रहा है। आखिर क्यों गिर रहे हैं सोना और चांदी? कीमती धातुओं में इस गिरावट का कनेक्शन सीधे ग्लोबल मार्केट से जुड़ा है। अमेरिका के रोजगार आंकड़े उम्मीद से मजबूत रहने के बाद वहां Federal Reserve की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें बदली हैं। मजबूत अमेरिकी जॉब डेटा के बाद सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना को लेकर दांव बढ़े हैं। इसका असर सोने पर पड़ा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में Spot Gold करीब 0.7% नीचे आया। वहीं Silver में भी लगभग 1% की गिरावट दर्ज की गई। अब आगे क्या होगा? अब बाजार की नजर अमेरिका से आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर है। इस सप्ताह PPI और CPI जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े जारी होने हैं। इनसे Federal Reserve की अगली ब्याज दर नीति को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में Gold और Silver में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। निवेशकों के साथ-साथ शादी या त्योहार के लिए खरीदारी करने वाले लोगों की भी बाजार पर नजर बनी हुई है। Gold खरीदते समय सिर्फ भाव न देखें अगर आप आज सोना खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो सिर्फ 10 ग्राम का बाजार भाव देखकर फैसला न लें। 22K या 24K purity, GST, making charges और ज्वेलर के अन्य शुल्क अंतिम कीमत को बदल सकते हैं। अलग-अलग शहरों और ज्वेलर्स के बीच भी रेट में अंतर हो सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले अपने स्थानीय ज्वेलर से उसी समय का ताजा रेट जरूर पता करें। बाजार में तेजी से बदलाव होने के कारण सुबह और शाम के भाव में भी अंतर देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sagar

Sagar में जहरीली शराब का कहर: 19 मौत, 112 मरीज भर्ती; Liquor Network पर पुलिस का शिकंजा

मध्य प्रदेश के सागर (Sagar) जिले में जहरीली शराब ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने का सिलसिला शुरू हुआ और देखते ही देखते अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती चली गई। अब तक 19 लोगों की मौत की बात सामने आई है, जबकि 112 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती बताए जा रहे हैं। मृतकों में पिता-पुत्र के शामिल होने की जानकारी ने इस घटना को और दर्दनाक बना दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। पुलिस ने लाइसेंसी शराब ठेकेदारों समेत 30 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। इनमें से 10 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। अधिकारियों की नजर अब उस पूरे नेटवर्क पर है, जिसके जरिए कथित तौर पर मिलावटी या जहरीली शराब लोगों तक पहुंची। शराब पीने के बाद बिगड़ी लोगों की तबीयत जानकारी के मुताबिक, सागर जिले के बंडा क्षेत्र में कई लोगों ने शराब का सेवन किया था। इसके बाद एक के बाद एक लोगों की तबीयत खराब होने लगी। कुछ लोगों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया। स्थानीय स्तर पर इलाज के बाद गंभीर मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। अस्पतालों में अचानक मरीजों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया। प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमों को भेजकर लोगों की जांच की जा रही है। प्रशासन यह भी पता लगाने में जुटा है कि कितने लोगों ने संदिग्ध शराब का सेवन किया था। 112 मरीजों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जहरीली शराब की आशंका के बाद अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या लगातार चिंता बढ़ा रही है। 112 लोगों के इलाज की जानकारी सामने आई है। इनमें कुछ मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में पहुंचकर स्थिति पर नजर रख रही हैं। अधिकारियों का फोकस इस बात पर है कि संदिग्ध शराब पीने वाले किसी व्यक्ति की हालत बिगड़ने पर उसे समय रहते अस्पताल पहुंचाया जा सके। पिता-पुत्र की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ इस हादसे में पिता-पुत्र की मौत की खबर ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है। एक ही परिवार के दो सदस्यों की जान जाने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना के बाद प्रभावित इलाकों में मातम का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि शराब की एक बोतल इतनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है। अब लोगों में अवैध और संदिग्ध शराब की बिक्री को लेकर डर भी है और गुस्सा भी। 30 नामजद आरोपियों पर FIR, 10 गिरफ्तार पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए 30 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। इनमें लाइसेंसी शराब कारोबार से जुड़े लोगों के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शराब की सप्लाई कहां से हुई और इसे किन लोगों तक पहुंचाया गया। अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी है। पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी है। जांच में जिस किसी की भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है। लाइसेंसी ठेकेदारों की भूमिका भी जांच के घेरे में मामले में लाइसेंसी शराब ठेकेदारों के नाम सामने आने के बाद आबकारी विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसियां यह पता कर रही हैं कि यदि शराब की बिक्री वैध दुकानों से हुई थी, तो उसमें मिलावट कैसे पहुंची। अधिकारियों की जिम्मेदारी और संभावित लापरवाही की भी जांच की जा रही है। प्रशासन की कोशिश है कि शराब के स्रोत से लेकर इसकी बिक्री तक पूरी चेन का पता लगाया जाए। जहरीली शराब की सप्लाई का नेटवर्क खंगाल रही पुलिस पुलिस को शक है कि इस मामले के पीछे सिर्फ कुछ स्थानीय लोगों का हाथ नहीं, बल्कि शराब की सप्लाई से जुड़ा बड़ा नेटवर्क भी हो सकता है। जांच एजेंसियां शराब की बोतल, लेबल और सप्लाई चैन से जुड़े हर पहलू की जांच कर रही हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जहरीली शराब लोगों तक कैसे पहुंची और इस लापरवाही के पीछे कौन जिम्मेदार है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। प्रशासन की नजर अब हर कड़ी पर सागर की इस घटना ने अवैध और मिलावटी शराब के कारोबार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग भी प्रभावित लोगों की निगरानी कर रहा है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल परिवार अपनों को खोने के दर्द में हैं और अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजन उनके जल्द ठीक होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगा कि इस जहरीली शराब की असली सप्लाई कहां से हुई और इस पूरे मामले में किसकी कितनी भूमिका थी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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