मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सीजफायर वार्ता के दौरान अमेरिकी सेना ने मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट के पास बड़ी सैन्य कार्रवाई की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि ईरान समर्थित तत्व समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछा रहे थे, जिसके बाद अमेरिकी युद्धपोतों और सैनिकों की सुरक्षा को देखते हुए यह हमला किया गया।
जानकारी के मुताबिक अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के नजदीक कई संदिग्ध बोट्स को निशाना बनाया। इसके साथ ही बंदर अब्बास पोर्ट के पास मौजूद सरफेस-टू-एयर मिसाइल साइट पर भी एयरस्ट्राइक की गई। हमले के बाद इलाके में धुएं के बड़े गुबार देखे गए।
अमेरिका ने क्या कहा?
सेंटकाम के प्रवक्ता टिमोथी हॉकिन्स ने बयान जारी करते हुए कहा कि यह कार्रवाई “सेल्फ-डिफेंस” के तहत की गई है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग और अमेरिकी नौसेना के जहाजों को खतरा था।
हॉकिन्स ने कहा:
“हम क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन अपने सैनिकों और सहयोगियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।”
हालांकि अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अभी भी सीजफायर वार्ता को जारी रखना चाहता है और हालात को बड़े युद्ध में बदलने से बचना चाहता है।
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी सैन्य गतिविधि का असर सीधे ग्लोबल ऑयल मार्केट और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव और बढ़ा, तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।
ईरान की प्रतिक्रिया का इंतजार
अब तक ईरान की ओर से इस हमले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन क्षेत्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि तेहरान इस कार्रवाई को “उकसावे वाली सैन्य हरकत” मान सकता है।
सूत्रों के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र और कई यूरोपीय देश दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं।
क्या रुक जाएगी शांति वार्ता?
डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस हमले से अमेरिका-ईरान वार्ता में अस्थायी रुकावट आ सकती है, लेकिन फिलहाल बातचीत पूरी तरह टूटती नहीं दिख रही। दोनों देशों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव है कि वे तनाव को सीमित रखें।
