पश्चिम एशिया एक बार फिर युद्ध जैसे हालात की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक व्यापारी जहाज पर हुए हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर दिया। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसने ईरान के करीब 140 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए एयरस्ट्राइक की है। इसके कुछ ही समय बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी हितों और सहयोगी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
इस घटनाक्रम ने न केवल पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा दिया है, बल्कि दुनिया भर के ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार को लेकर भी चिंता गहरा दी है।
होर्मुज में जहाज पर हमला बना कार्रवाई की वजह
अमेरिका के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक मालवाहक जहाज पर हमला किया गया, जिसमें जहाज को नुकसान पहुंचा और चालक दल के एक सदस्य के लापता होने की सूचना मिली। वाशिंगटन ने इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया और तुरंत जवाबी सैन्य कार्रवाई का फैसला लिया।
होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का हमला पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।
140 सैन्य ठिकानों पर America की Airstrike
अमेरिकी सेना ने जिन ठिकानों को निशाना बनाया, उनमें मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन बेस, एयर डिफेंस सिस्टम, रडार स्टेशन और सैन्य कमांड सेंटर शामिल बताए गए हैं।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए इसका कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है।
ईरान का पलटवार, Kuwait और Bahrain भी निशाने पर
अमेरिकी एयरस्ट्राइक के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। ईरान की ओर से कुवैत, बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों पर मिसाइल तथा ड्रोन दागे गए।
खाड़ी देशों ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार कई मिसाइलों और ड्रोन को रास्ते में ही नष्ट कर दिया गया, जबकि कुछ इलाकों में धमाकों की आवाजें भी सुनी गईं। सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
दुनिया की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य पर
इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। यदि यहां आवाजाही प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है।
कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने भी इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव लंबा खिंचता है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देगा।
क्या बढ़ सकता है युद्ध का दायरा?
अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रहा है। कई देशों ने बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कही है, लेकिन फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों अपने-अपने रुख पर कायम हैं।
यदि जवाबी सैन्य कार्रवाई का सिलसिला जारी रहता है तो यह संघर्ष पूरे खाड़ी क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।
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