छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस सरकार के खिलाफ बड़ा राजनीतिक कदम उठाने जा रही है। पार्टी ने तय किया है कि 14 जुलाई को विधानसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा।
रविवार को नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के सरकारी निवास पर हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति बनी। बैठक के बाद महंत ने कहा कि कांग्रेस को मौजूदा सरकार पर भरोसा नहीं है, इसलिए सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा।
करीब दो घंटे चली कांग्रेस विधायक दल की बैठक
नेता प्रतिपक्ष के सरकारी बंगले पर कांग्रेस विधायक दल की बैठक करीब दो घंटे तक चली। इससे पहले लगभग डेढ़ घंटे तक पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने विधानसभा सत्र की रणनीति पर अलग से चर्चा की।
इसके बाद विधायक दल की बैठक में सरकार को घेरने की अंतिम रणनीति तय की गई।
चरणदास महंत बोले- सरकार के वादे झूठे साबित हुए
बैठक के बाद चरणदास महंत ने कहा कि कांग्रेस का सरकार पर से विश्वास उठ चुका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने वादे पूरे करने में विफल रही है। प्रदेश में भ्रष्टाचार बढ़ा है और आम जनता बिजली संकट, महंगाई, किसानों की समस्याओं तथा कानून-व्यवस्था जैसे कई मुद्दों से परेशान है। इन्हीं मुद्दों को लेकर कांग्रेस सदन में सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है।
नकटी गांव के मुद्दे पर भी होगा स्थगन प्रस्ताव
कांग्रेस विधायक दल की बैठक में नकटी गांव का मामला भी प्रमुखता से उठा। पार्टी ने इस मुद्दे पर विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव लाने का फैसला किया है।
चरणदास महंत ने कहा कि कांग्रेस इस मामले को पूरी मजबूती के साथ सदन में उठाएगी। जरूरत पड़ने पर सदन के भीतर विरोध प्रदर्शन भी किया जाएगा।
सदन के साथ सड़क पर भी आंदोलन
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विधानसभा का मानसून सत्र भले ही केवल पांच दिनों का हो, लेकिन कांग्रेस सरकार को हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर घेरने का प्रयास करेगी।
उन्होंने कहा कि पार्टी केवल सदन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जनता के मुद्दों को लेकर सड़क पर भी संघर्ष जारी रखेगी।
सरकार देगी 1033 सवालों के जवाब
इस बार विधानसभा सचिवालय में कुल 1033 प्रश्न लगाए गए हैं। इनमें 36 विधायकों ने नियमों के तहत अधिकतम 20-20 प्रश्न लगाए हैं।
दिलचस्प बात यह है कि सवाल पूछने वालों में विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के विधायक भी शामिल हैं। ऐसे में मानसून सत्र के दौरान कई अहम मुद्दों पर सरकार को जवाब देना होगा।
क्या होता है अविश्वास प्रस्ताव?
अविश्वास प्रस्ताव किसी एक मंत्री के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी सरकार के खिलाफ लाया जाता है। विपक्ष सरकार की नीतियों, फैसलों या जनहित के मुद्दों को आधार बनाकर यह प्रस्ताव पेश करता है।
यदि प्रस्ताव स्वीकार होता है तो सदन में सरकार के कामकाज पर विस्तृत चर्चा होती है। इसके बाद मतदान कराया जाता है, जिससे यह तय होता है कि सरकार के पास सदन का बहुमत और विश्वास कायम है या नहीं।
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