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Katyayani

छठा दिन Navratri 2025 Mata Katyayani पूजा विधि और शुभ रंग

Navratri Day 6 का महत्व Navratri का छठा दिन माता Katyayani को समर्पित होता है। माता Katyayani शक्ति, साहस और विजयी जीवन की देवी मानी जाती हैं। इस दिन उनकी पूजा करने से जीवन में साहस, सफलता, और मनोकामना पूरी होती है। माता Katyayani को नौ स्वरूपों में छठे दिन पूजा जाता है। उनका आशीर्वाद गृहस्थ जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा लाता है। Mata Katyayani पूजा विधि (Puja Method) Navratri Day 6 Color & Dress Tip छठे दिन का शुभ रंग ग्रे (Grey) है। ग्रे रंग स्थिरता, संतुलन और मानसिक शांति का प्रतीक है। इस दिन ग्रे रंग के वस्त्र पहनने से पूजा में एक विशेष ऊर्जा और आंतरिक संतुलन मिलता है। यह रंग मन को एकाग्र करने और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने में मदद करता है, जिससे माता Katyayani की पूजा का प्रभाव और भी गहरा होता है। विशेष पूजा टिप्स: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Maa Skand Mata

नवरात्रि Day 5 Maa Skand Mata पूजा और सकारात्मक ऊर्जा का महत्व

नवरात्रि दिन 5 का आध्यात्मिक महत्व नवरात्रि का पाँचवाँ दिन माँ स्कंद माता (Maa Skand Mata) को समर्पित होता है। Maa Skand Mata भगवान कार्तिकेय की माता हैं और देवी दुर्गा का एक पवित्र रूप मानी जाती हैं। इस दिन भक्त माँ की पूजा-अर्चना करते हैं और उनके आशीर्वाद से जीवन में शक्ति, सफलता, आत्मविश्वास और सुख-शांति पाने की कामना करते हैं। Maa Skand Mata का महत्व मां स्कंद माता चार मुख और चार हाथ वाली देवी हैं। उनके हाथों में कमल, त्रिशूल, तलवार और आशीर्वाद मुद्रा होती है। यह रूप हमें यह संदेश देता है कि जीवन में ज्ञान, साहस, शक्ति और प्रेम का संतुलन होना चाहिए। Maa Skand Mata भक्तों को कठिनाइयों पर विजय पाने और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने की प्रेरणा देती हैं। Navratri Day 5 पूजा विधि इस दिन माँ स्कंद माता की पूजा विशेष भक्ति और श्रद्धा के साथ की जाती है। पूजा में दीप, पुष्प, हल्दी-कुंकुम और देवी का चित्र या मूर्ति रखा जाता है। भक्त दिन में उपवास रखते हैं और हलवा, खिचड़ी या फल का सेवन करते हैं। Maa Skand Mata के मंत्र का जाप और स्तुति पाठ करने से इस दिन विशेष लाभ प्राप्त होते हैं। मां स्कंद माता से जुड़ी मान्यताएं नवरात्रि दिन 5 का विशेष रंग — हरा (Green) Navratri के पाँचवें दिन, भक्त हरा (Green) रंग के वस्त्र पहनते हैं।यह रंग विकास (growth), समृद्धि (prosperity), शांतता (harmony) और संतुलन का प्रतीक माना जाता है।हरा पहनकर भक्त माँ स्कंद माता की कृपा, पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करते हैं। Navratri 2025 Day 5 का संदेश नवरात्रि Day 5 हमें यह याद दिलाता है कि सच्ची शक्ति केवल बाहरी नहीं बल्कि भीतर से आती है। Maa Skand Mata का आशीर्वाद हमें अपने लक्ष्य की प्राप्ति में साहस और शक्ति प्रदान करता है। यह दिन आध्यात्मिक ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Maa Kushmanda

नवरात्रि के चौथे दिन Maa Kushmanda की आराधना Navratri Day 4 Special

नवरात्रि के चौथे दिन का महत्व नवरात्रि का पर्व देवी दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का महान त्यौहार है। इस पर्व में चौथे दिन Maa Kushmanda की पूजा होती है। “कूष्मांडा” का अर्थ है “ब्रह्मांड की रचयिता”, जो सम्पूर्ण सृष्टि को अपनी हंसी से जन्म देती हैं। Maa Kushmanda को स्वास्थ्य, ऊर्जा, शक्ति और समृद्धि का स्रोत माना जाता है। इस दिन उनकी पूजा करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। Maa Kushmanda का स्वरूप और महत्व नवरात्रि Day 4 पूजा विधि (Navratri Day 4 Puja Vidhi) नवरात्रि Day 4 का रंग और भोग नवरात्रि चौथे दिन पूजा के लाभ हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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चंद्रघंटा

Day 3 of Navratri चंद्रघंटा Mata की भक्ति और जीवन में सकारात्मकता

नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित है। मां चंद्रघंटा साहस, शक्ति और भक्ति की देवी हैं। इस दिन उनकी पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में आत्मविश्वास, शांति और सकारात्मकता आती है। मां चंद्रघंटा का महत्व मां चंद्रघंटा का नाम उनके सिर पर झूलती चाँद की घंटी के कारण पड़ा। उनका स्वरूप सुंदर, शांत और वीरता से भरा है। उनके आशीर्वाद से भय, संकट और परेशानियाँ दूर होती हैं। तीसरे दिन की पूजा विधि शुभ रंग और महत्व तीसरे दिन का शुभ रंग पीला और केसरिया माना जाता है। तीसरे दिन की विशेष बातें हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Navratri

Day 2 Navratri 2025 ब्रह्मचारिणी माता का आशीर्वाद और सकारात्मक ऊर्जा

नवरात्रि के Day 2 पर मां ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है। यह दिन देवी माँ के ज्ञान, तपस्या और संयम के स्वरूप को समर्पित है। मां ब्रह्मचारिणी शांत, धैर्यशील और तपस्विनी देवी हैं, जो भक्तों को आत्म-संयम और मानसिक शक्ति प्रदान करती हैं। ब्रह्मचारिणी माता कौन हैं? मां ब्रह्मचारिणी देवी पार्वती का वही स्वरूप हैं, जिन्होंने शिव जी की प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या की। उनका रूप ज्ञान, साधना और तप का प्रतीक है। पूजा विधि – How to Worship ब्रह्मचारिणी माता का महत्व शुभ रंग (Shubh Rang) – Day 2 Day 2 पर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए सफेद (White) रंग को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। सफेद रंग शांति, पवित्रता और मानसिक संतुलन का प्रतीक है। इस दिन सफेद या हल्के गुलाबी रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। Day 2 Message of Navratri मां ब्रह्मचारिणी हमें सिखाती हैं कि संयम और साधना से ही जीवन में सफलता और संतोष आता है। यह दिन आत्म-नियंत्रण, परिश्रम और सकारात्मक ऊर्जा के महत्व को याद दिलाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Navratri

Navratri 2025 Day1 घटस्थापना और माँ शैलपुत्री से शक्ति की शुरुआत

Navratri 2025 का पहला दिन घटस्थापना के साथ शुरू होता है। यह दिन देवी माँ दुर्गा के नौ रूपों में से पहले रूप माँ शैलपुत्री की पूजा के लिए समर्पित है। नवरात्रि हिंदू धर्म में शक्ति, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। घटस्थापना का महत्व Navratri के पहले दिन घर में कलश स्थापना या घटस्थापना करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन मिट्टी या धातु के कलश में जल, फल, फूल और कुमकुम रखकर पूजा की जाती है। घटस्थापना से घर में समृद्धि, खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। माँ शैलपुत्री की पूजा पहले दिन की नवरात्रि माँ शैलपुत्री को समर्पित है। शैलपुत्री का अर्थ है “पर्वत की पुत्री”। वे सादगी, शक्ति और पवित्रता का प्रतीक हैं। इस दिन व्रती माँ शैलपुत्री की पूजा कर अपने जीवन में धैर्य, आत्मविश्वास और मानसिक शांति प्राप्त करते हैं। पूजा विधि: व्रत और भोजन टिप्स Navratri पहले दिन व्रती फल, दूध, ठंडाई और उपवास के अनुसार हल्का भोजन करते हैं। तामसिक भोजन, मांसाहार और शराब से परहेज करना चाहिए। आज का शुभ रंग और मुहूर्त Navratri का पहला दिन हमें शक्ति, समर्पण और सकारात्मक सोच का संदेश देता है। माँ शैलपुत्री की पूजा से जीवन में आत्मबल और खुशहाली आती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Shardiya Navratri 2025

Shardiya Navratri 2025 सूर्य ग्रहण के साए में शुरू, दैनिक देवी स्वरूप और रंग

Shardiya Navratri 2025 इस साल विशेष संयोग के साथ 22 सितंबर 2025 से शुरू होकर 2 अक्टूबर 2025 तक चलेगी। इस वर्ष नवरात्रि सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2025) के बाद शुरू हो रही है, इसलिए घटस्थापना के शुभ मुहूर्त और पूजा के नियम बेहद महत्वपूर्ण हैं। घटस्थापना मुहूर्त 2025 घटस्थापना के समय देवी की कृपा विशेष रूप से प्राप्त होती है। सूर्य ग्रहण 2025 और इसका प्रभाव इससे नकारात्मक प्रभाव कम होता है और पूजा का वातावरण पवित्र बनता है। Shardiya Navratri 2025: देवी दुर्गा के 9 रूप और दैनिक रंग Day Date Goddess (देवी) Color (रंग) 1 22 Sep Shailputri White 2 23 Sep Brahmacharini Red 3 24 Sep Chandraghanta Royal Blue 4 25 Sep Kushmanda Yellow 5 26 Sep Skandamata Green 6 27 Sep Katyayani Grey 7 28 Sep Kalaratri Orange 8 29 Sep Mahagauri Pink 9 30 Sep Siddhidatri Peacock Green 10 1 Oct Vijayadashami Red हर दिन का रंग देवी के स्वरूप और उनके गुणों का प्रतीक है। Navratri पूजा सामग्री 2025 पूजा के लिए जरूरी सामग्री: इन सामग्रियों के साथ पूजा विधि पूर्ण होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। Navratri व्रत नियम और आहार सुझाव नियमों का पालन करने से व्रत सफल और फलदायी होता है। Cultural Celebrations: Garba, Dandiya और Durga Puja तीर्थ यात्रा और विशेष आयोजन इन आयोजनों में भाग लेने से आध्यात्मिक अनुभव और देवी की कृपा मिलती है। Shardiya Navratri 2025 आपके जीवन में शक्ति, सकारात्मकता और सफलता लाने का अवसर है।घटस्थापना मुहूर्त, व्रत नियम, पूजा सामग्री और सांस्कृतिक उत्सव इस पर्व को और भी विशेष बनाते हैं। इस Shardiya Navratri 2025 , श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ देवी माता का स्वागत करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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नवरात्रि

नवरात्रि में देवी की कृपा पाने के लिए करें ये 9 काम और भूलकर भी न करें ये 9 गलतियां

Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर से शुरू हो रही है। सनातन परंपरा के अनुसार देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए इन 9 नियमों का पालन करें और इन 9 गलतियों से बचें। जानें नवरात्रि पूजा के नियम और वर्जनाएँ। देश हरपल, धर्म डेस्क।सनातन परंपरा में शक्ति की साधना को सभी कष्टों को दूर करने और कामनाओं को पूरा करने वाली मानी गई है। हिंदू मान्यता के अनुसार नवरात्रि के 9 दिनों तक विधि-विधान से देवी दुर्गा की पूजा करने से जीवन से भय दूर होता है और साधक मां भगवती की कृपा से सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त करता है। इस बार शारदीय नवरात्रि 2025 (Shardiya Navratri 2025) का आरंभ 22 सितंबर से हो रहा है। मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए भक्तों को कुछ खास नियमों का पालन करना चाहिए और कुछ गलतियों से बचना जरूरी है। आइए जानते हैं कि इस नवरात्रि में कौन से 9 काम जरूर करें और कौन सी 9 गलतियां भूलकर भी न करें। नवरात्रि पूजा के 9 नियम (9 Do’s of Navratri) नवरात्रि पर न करें ये 9 गलतियां (9 Don’ts of Navratri) हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Pitra Paksh

Day 2 Pitra Paksh 2025 पितरों की पूजा और शुभ मुहूर्त

Pitra Paksh 2025, जिसे श्राद्ध पक्ष के नाम से भी जाना जाता है, वह पवित्र समय है जब हम अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। यह समय 15 सितम्बर 2025 से शुरू हुआ और 29 सितम्बर 2025 तक चलेगा। दिन 2 का महत्व (6 सितंबर 2025 का श्राद्ध) पितृ पक्ष का दूसरा दिन विशेष रूप से उन पूर्वजों के लिए माना जाता है जिन्होंने अपने परिवार को कभी न भूलने वाले संस्कार और ज्ञान दिया। इस दिन पितृ तर्पण और दान पुण्य करने से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है। पितृ तर्पण की विधि शुभ मुहूर्त और समय दिन 2 के लिए पितृ पक्ष के शुभ समय में तर्पण और श्राद्ध कार्य करना विशेष फलदायी माना गया है। पितृ पक्ष 2025 के लिए विशेष उपाय पितृ पक्ष का धार्मिक महत्व पितृ पक्ष केवल धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक है। यह समय हमें याद दिलाता है कि हमारे पूर्वजों का आशीर्वाद ही हमारे जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य लाता है। पितृ पक्ष के दिन 2 पर किए गए तर्पण और दान से पूर्वजों की आत्मा की शांति के साथ-साथ जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। यह समय अपने परिवार, पूर्वजों और समाज के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का भी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ganesh Visarjan

Ganesh Visarjan 2025 गणेश उत्सव का Last Day, Anant Chaturdashi शुभ मुहूर्त और विधि

भारत में हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होने वाला Ganesh Utsav 10 दिनों तक धूमधाम से मनाया जाता है। इन 10 दिनों तक भक्त बप्पा की सेवा और आराधना करते हैं और फिर Anant Chaturdashi के दिन भावपूर्ण विदाई के साथ Ganesh Visarjan 2025 करते हैं। Ganesh Visarjan 2025 Muhurat (गणेश विसर्जन शुभ समय) अनंत चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 15 सितंबर 2025, सुबह 06:12 बजेअनंत चतुर्दशी तिथि समाप्त: 16 सितंबर 2025, सुबह 04:48 बजे विसर्जन के श्रेष्ठ मुहूर्त: इन मुहूर्तों में गणपति बप्पा का विसर्जन करना सबसे शुभ और फलदायी माना जाता है। Ganesh Visarjan का महत्व Ganesh Visarjan Vidhi (विसर्जन की विधि) Eco-friendly Ganesh Visarjan आजकल जल प्रदूषण रोकने के लिए मिट्टी (शाडू माटी) की मूर्तियों का विसर्जन या कृत्रिम विसर्जन तालाबों का उपयोग करने की परंपरा बढ़ रही है। यह पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों दोनों के लिए शुभ है। Cultural Celebration of Ganesh Utsav Ganesh Visarjan 2025 सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आस्था, श्रद्धा और पर्यावरण-संरक्षण का संदेश भी देता है। बप्पा से यही प्रार्थना है कि वे जीवन से सभी विघ्न हर लें और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दें। गणपति बप्पा मोरया! मंगल मूर्ति मोरया! हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Narendra Modi vs Nehru

सिर्फ नेहरू का रिकॉर्ड टूटा, या मोदी ने भारत की दिशा भी बदल दी…?

संपादकीय | निखिल सिद्धभट्टी 10 जून 2026 भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण तारीख बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले मोदी ने आज अपने कार्यकाल के 4399 दिन पूरे कर लिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया, जो 1952 से 1964 तक लगातार 4398 दिनों तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे थे। यहां एक तथ्य समझना जरूरी है। जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त 1947 से ही देश के प्रधानमंत्री थे, लेकिन उस समय वे स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त हुए थे। 1952 में देश के पहले आम चुनाव के बाद कांग्रेस संसदीय दल ने उन्हें नेता चुना और वे 13 मई 1952 से 27 मई 1964 तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे। अब, 74 वर्ष बाद नरेंद्र मोदी ने उस रिकॉर्ड को पार कर लिया है। यही वह क्षण है, जिसने हमें यह संपादकीय लिखने के लिए प्रेरित किया। क्योंकि यह केवल एक रिकॉर्ड टूटने की घटना नहीं है। यह भारत के दो सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों, दो अलग-अलग विचारधाराओं और दो अलग-अलग विकास मॉडलों की तुलना का अवसर भी है। एक रिकॉर्ड, लेकिन दो बिल्कुल अलग भारत जब नेहरू ने 1952 में जनता के जनादेश के साथ सरकार बनाई, तब भारत एक नवजात राष्ट्र था। देश विभाजन की त्रासदी झेल चुका था। करोड़ों लोग गरीबी में जी रहे थे। औद्योगिक आधार लगभग नहीं था। साक्षरता बेहद कम थी और लोकतंत्र का भविष्य भी अनिश्चित था। नेहरू के सामने चुनौती थी—भारत को टूटने से बचाना और उसे खड़ा करना। दूसरी ओर, जब नरेंद्र मोदी 2014 में सत्ता में आए, तब भारत दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था था। अर्थव्यवस्था वैश्विक मंच पर हाफ राही थी, सेना मजबूत थी पर उसे नियंत्रण में रखा था , परमाणु शक्ति मौजूद थी और सूचना क्रांति देश में प्रवेश कर चुकी थी पर उस की गाती धीमी थी । लेकिन मोदी के सामने सवाल अलग था—क्या भारत केवल एक विकासशील देश बना रहेगा या 21वीं सदी की वैश्विक शक्ति बनेगा? यहीं से दोनों नेताओं की तुलना शुरू होती है। नेहरू ने नींव रखी, इसमें विवाद नहीं आज जो लोग नेहरू की आलोचना करते हैं, उन्हें भी यह स्वीकार करना होगा कि स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं की बुनियाद उनके दौर में रखी गई। संसद, चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय की प्रतिष्ठा, IIT, AIIMS, बड़े बांध, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग—ये सब उस दौर की उपलब्धियां हैं। दुनिया के कई नवस्वतंत्र देशों में लोकतंत्र असफल हो गया। कहीं सेना सत्ता में आ गई, कहीं तानाशाही स्थापित हो गई। भारत उस रास्ते पर नहीं गया। यह नेहरू युग की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। लेकिन इतिहास का दूसरा पक्ष भी है। नेहरू ने जिस समाजवादी आर्थिक मॉडल को अपनाया, उसने राज्य को अत्यधिक शक्तिशाली बना दिया। लाइसेंस-परमिट राज ने आने वाले दशकों में निजी क्षेत्र की ऊर्जा को सीमित कर दिया। और फिर 1962 में चीन युद्ध ने उनकी विदेश नीति की सबसे बड़ी कमजोरी उजागर कर दी। “हिंदी-चीनी भाई-भाई” का आदर्शवाद चीन की सैन्य आक्रामकता के सामने टिक नहीं सका। यहीं से नेहरू की विरासत पर बहस शुरू होती है। मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है? यहां अक्सर लोग UPI, एक्सप्रेस-वे, जी-20, अनुच्छेद 370 या डिजिटल इंडिया की बात करते हैं। लेकिन क्या यही मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि है? शायद नहीं। मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह हो सकती है कि उन्होंने भारत की शासन प्रणाली और विकास की सोच को बदलने का प्रयास किया। दशकों तक भारत में सरकार योजनाएं बनाती थी, लेकिन लाभार्थी तक पहुंचने से पहले व्यवस्था में रिसाव हो जाता था। जनधन, आधार और मोबाइल के संयोजन ने पहली बार सरकार और नागरिक के बीच सीधा संपर्क स्थापित किया। UPI केवल एक भुगतान प्रणाली नहीं है। यह उस नए भारत का प्रतीक है जो तकनीक को शासन का उपकरण बना रहा है। इसी तरह सड़क, रेलवे, एयरपोर्ट और रक्षा ढांचे में जो निवेश हुआ, उसने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति दी। चीन: दो युग, दो प्रतिक्रियाएं यदि किसी एक मुद्दे पर नेहरू और मोदी की तुलना सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, तो वह चीन है। 1962 में भारत तैयार नहीं था। राजनीतिक आदर्शवाद राष्ट्रीय सुरक्षा पर भारी पड़ गया। 2020 में गलवान घाटी में फिर चीन सामने था। यह कहना सही नहीं होगा कि भारत ने चीन को पराजित कर दिया। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि इस बार भारत ने 1962 जैसी असहाय स्थिति नहीं दिखाई। सीमा पर सड़कें बनीं, सैन्य तैनाती बढ़ी और चीन को लेकर नीति अधिक यथार्थवादी दिखाई दी। यहीं दोनों नेताओं के दृष्टिकोण का मूल अंतर दिखता है। असली बहस मोदी बनाम नेहरू नहीं, दो मॉडलों की है नेहरू का भारत राज्य-नियंत्रित अर्थव्यवस्था, समाजवादी सोच और गुटनिरपेक्ष विदेश नीति पर आधारित था। मोदी का भारत बाज़ार आधारित विकास, डिजिटल शासन, राष्ट्रीय पहचान और बहु-संरेखीय (Multi-alignment) कूटनीति पर आधारित दिखाई देता है। नेहरू संस्थानों के जरिए भारत को मजबूत करना चाहते थे। मोदी नेतृत्व और क्रियान्वयन की गति के जरिए भारत को बदलना चाहते हैं। एक ने भारत का ढांचा बनाया। दूसरा उस ढांचे को नए सिरे से आकार देने की कोशिश कर रहा है। क्या मोदी नेहरू से बेहतर प्रधानमंत्री साबित हुए हैं? इस प्रश्न का उत्तर राजनीति नहीं, इतिहास देगा। लेकिन 2026 में खड़े होकर यदि केवल प्रभाव, निर्णायकता, वैश्विक उपस्थिति, डिजिटल परिवर्तन, इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण और शासन की गति को मापदंड बनाया जाए, तो नरेंद्र मोदी का कार्यकाल स्वतंत्र भारत के सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में निश्चित रूप से गिना जाएगा। इतना ही नहीं, वे संभवतः नेहरू के बाद पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने भारत के विकास मॉडल की दिशा बदलने का प्रयास किया है। नरेंद्र मोदी द्वारा नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ना केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है। यह उस राजनीतिक यात्रा का प्रतीक है जिसमें भारत ने समाजवादी दौर से डिजिटल दौर तक, गुटनिरपेक्षता से बहु-संरेखीय कूटनीति तक और धीमी प्रशासनिक प्रक्रियाओं से तकनीक-आधारित शासन तक का सफर तय किया है। नेहरू ने आधुनिक भारत की नींव रखी थी। मोदी उस भारत को...
LPG महंगाई पर राजनीति तेज: Pradhan Mantri Ujjwala Yojana बदलाव को लेकर सरकार घिरी

LPG महंगाई पर राजनीति तेज: Pradhan Mantri Ujjwala Yojana बदलाव को लेकर सरकार घिरी

केंद्र सरकार ने Pradhan Mantri Ujjwala Yojana के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की सालाना सीमा 9 से घटाकर 4 कर दी है। इस फैसले के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने इस कदम को लेकर मोदी सरकार पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों और विदेश नीति पर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने कहा कि पिछले 12 सालों की आर्थिक नीतियों के कारण गरीब परिवारों पर दबाव बढ़ा है और अब सब्सिडी घटने से स्थिति और मुश्किल हो गई है। उनका कहना है कि लाखों गरीब परिवारों और महिलाओं को खाना पकाने के लिए फिर से लकड़ी के जहरीले धुएं का सहारा लेने की मजबूरी हो सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले तीन महीनों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम करीब ₹89 बढ़े हैं। साथ ही 5 किलो के छोटे सिलेंडर की कीमत में भी लगभग ₹323 की बढ़ोतरी का उल्लेख किया गया है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब पहले ही महंगाई बढ़ रही है, तो सब्सिडी कम करने का फैसला आम लोगों पर और बोझ डालता है। उन्होंने कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर गरीब, मजदूर, किसान, महिलाएं और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा। सरकार की तरफ से इस फैसले को लेकर अभी तक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
INDIA गठबंधन को मजबूत करने पर जोर: अखिलेश यादव बोले – यूपी में BJP को हराना है सबसे बड़ा लक्ष्य

INDIA गठबंधन को मजबूत करने पर जोर: Akhilesh Yadavबोले – यूपी में BJP को हराना है सबसे बड़ा लक्ष्य

समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने कहा है कि हाल ही में हुई INDIA Alliance की बैठक में सभी सहयोगी दलों के बीच संगठन को और मजबूत करने पर सहमति बनी है। अखिलेश यादव ने कहा कि INDIA गठबंधन तभी मजबूत माना जाएगा जब उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को कड़ी टक्कर दी जाए और उसे सत्ता से बाहर किया जाए। उन्होंने साफ कहा कि यूपी देश की राजनीति में सबसे अहम राज्य है और यहां जीत-हार का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ता है। इसलिए विपक्षी दलों की एकजुटता का सबसे बड़ा लक्ष्य उत्तर प्रदेश में भाजपा को हराना होना चाहिए। अखिलेश यादव के इस बयान के बाद एक बार फिर राज्य की राजनीति में सियासी हलचल तेज हो गई है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आने वाले समय में टकराव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
Shefali Jariwala के निधन के बाद भावुक हुए पति पराग त्यागी, श्मशान घाट को लेकर किए गए दावे पर चर्चा तेज

Shefali Jariwala के निधन के बाद भावुक हुए पति पराग त्यागी, श्मशान घाट को लेकर किए गए दावे पर चर्चा तेज

टीवी और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री Shefali Jariwala के निधन के बाद उनके पति Parag Tyagi गहरे सदमे में हैं। 2025 में शेफाली के अचानक निधन ने उनके परिवार, फैंस और पूरी इंडस्ट्री को झकझोर दिया था। शेफाली जरीवाला सिर्फ 42 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गई थीं। उनके जाने के बाद पराग त्यागी लगातार उनकी यादों में जी रहे हैं और अक्सर सोशल मीडिया पर उनकी यादें साझा करते नजर आते हैं। इसी बीच हाल ही में पराग त्यागी से जुड़ी कुछ बातें सामने आई हैं, जिनमें बताया जा रहा है कि वे श्मशान घाट भी पहुंचे थे और वहां अपने भावनात्मक अनुभवों को लेकर कुछ दावे किए। सोशल मीडिया पर यह भी चर्चा है कि उन्होंने वहां कुछ अजीब अनुभव महसूस करने की बात कही, हालांकि ये बातें उनकी निजी भावनाओं और विश्वास से जुड़ी बताई जा रही हैं। फिलहाल पराग त्यागी पूरी तरह अपनी पत्नी की यादों में डूबे हुए हैं और इस मुश्किल समय में खुद को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। फैंस भी लगातार उन्हें सोशल मीडिया पर सपोर्ट और हिम्मत दे रहे हैं।
Trigrahi Yog 2026: 15 जून को सूर्य गोचर से बनेगा त्रिग्रही राजयोग, इन राशियों की बदलेगी किस्मत

Trigrahi Yog 2026: 15 June को सूर्य गोचर से बनेगा त्रिग्रही राजयोग, इन राशियों की बदलेगी किस्मत

ज्योतिष के अनुसार 15 June 2026 को एक खास ग्रहों का संयोग बनने जा रहा है, जिसे Trigrahi Yog कहा जाता है। इस दिन सूर्य के गोचर के साथ यह शक्तिशाली राजयोग बनने की संभावना है, जिसका असर कई राशियों पर देखने को मिल सकता है। इस योग में Surya (Sun) का गोचर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार जब तीन प्रमुख ग्रह एक विशेष स्थिति में आते हैं, तो उसे त्रिग्रही योग कहा जाता है और यह समय भाग्य, करियर और आर्थिक स्थिति में बड़े बदलाव ला सकता है। मान्यता है कि इस योग के प्रभाव से कुछ राशियों को अचानक लाभ, नई नौकरी के अवसर, व्यापार में बढ़ोतरी और रुके हुए कामों में तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं कुछ लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास भी बढ़ सकता है। हालांकि इसका प्रभाव हर राशि पर अलग-अलग होता है और यह व्यक्ति की कुंडली पर भी निर्भर करता है।

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