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New Education Minister B.A. पास हैं Pralhad Joshi, जानिए क्यों सौंपी गई Education Ministry की जिम्मेदारी

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देश की शिक्षा व्यवस्था इन दिनों बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद, छात्रों के आंदोलन और शिक्षा सुधार को लेकर बढ़ती मांग के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। वरिष्ठ भाजपा नेता प्रह्लाद जोशी (Pralhad Joshi) को देश का नया केंद्रीय शिक्षा मंत्री (New Education Minister) बनाया गया है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंपी गई है। ऐसे में लोगों के मन में कई सवाल हैं—आखिर नए शिक्षा मंत्री कितने पढ़े-लिखे हैं? उनका राजनीतिक अनुभव कितना है? और क्या वे शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल कर पाएंगे? आइए जानते हैं।

कौन हैं Pralhad Joshi?

Pralhad Joshi भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। उनका राजनीतिक सफर संगठन से शुरू होकर संसद और केंद्र सरकार तक पहुंचा है। वे कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार कई बार सांसद चुने जा चुके हैं, जो उनकी मजबूत जनाधार और राजनीतिक स्वीकार्यता को दर्शाता है।

केंद्र सरकार में वे पहले भी कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। संसदीय कार्य, कोयला, खान, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा जैसे मंत्रालयों में उनके काम को प्रशासनिक अनुभव का मजबूत आधार माना जाता है।

Education Qualification: कितने पढ़े-लिखे हैं नए शिक्षा मंत्री?

अगर उनकी पढ़ाई की बात करें तो प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक विश्वविद्यालय (Karnataka University), धारवाड़ से संबद्ध श्री कदासिद्धेश्वर आर्ट्स कॉलेज से Bachelor of Arts (B.A.) की डिग्री हासिल की है।

कॉलेज शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन को चुना और राजनीति में सक्रिय हो गए। पिछले तीन दशकों में उन्होंने संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।

ऐसे समय मिली शिक्षा मंत्रालय की कमान

प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब देश में परीक्षा प्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों ने पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग की। कई शहरों में प्रदर्शन हुए और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई।

इन्हीं परिस्थितियों के बीच सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में बदलाव करते हुए अनुभवी नेतृत्व पर भरोसा जताया है।

New Education Minister के सामने क्या होंगी सबसे बड़ी चुनौतियां?

परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता

राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सुरक्षा बढ़ाना और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।

National Education Policy (NEP) को गति देना

नई शिक्षा नीति को सभी राज्यों में प्रभावी ढंग से लागू करना और उसकी प्रगति की निगरानी करना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी।

छात्रों का भरोसा दोबारा जीतना

हालिया घटनाओं के बाद छात्रों और अभिभावकों का विश्वास प्रभावित हुआ है। नई नीतियों और पारदर्शी व्यवस्था के जरिए इस भरोसे को मजबूत करना जरूरी होगा।

डिजिटल और रोजगार आधारित शिक्षा

उच्च शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट, रिसर्च और डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देकर शिक्षा को रोजगार से जोड़ना भी मंत्रालय के प्रमुख लक्ष्यों में शामिल रहेगा।

क्या बदल सकती है शिक्षा व्यवस्था?

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मंत्री बदलने से बदलाव नहीं आएगा। असली परीक्षा नई टीम के फैसलों और उनके क्रियान्वयन की होगी। यदि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ती है, छात्रों की शिकायतों का समय पर समाधान होता है और शिक्षा नीति को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो इसका सीधा लाभ देश के करोड़ों विद्यार्थियों को मिलेगा।

हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

Yukta

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Monsoon

Monsoon Alert: 3 राज्यों में Red Alert जारी, Assam Flood से 66 मौतें; Himachal की 134 सड़कें बंद

देशभर में मानसून (Monsoon) एक बार फिर कहर बरपा रहा है। पश्चिम भारत से लेकर पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों तक लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने गुजरात, महाराष्ट्र और ओडिशा के कई जिलों में अत्यधिक बारिश की आशंका जताते हुए रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं, असम में बाढ़ की स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है, जबकि हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन के कारण सैकड़ों सड़कें बंद हैं। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है। Gujarat, Maharashtra और Odisha में Heavy Rain का Red Alert IMD के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले 24 से 48 घंटे गुजरात, महाराष्ट्र और ओडिशा के लिए बेहद अहम हैं। इन राज्यों के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश होने की संभावना है। लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है। राज्य सरकारों ने जिला प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव दलों को पहले से तैनात किया गया है, जबकि लोगों से अनावश्यक यात्रा न करने की सलाह दी गई है। Assam Flood: 7 लाख लोग प्रभावित, 66 लोगों की मौत असम में मानसून सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। लगातार बारिश के चलते कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे बड़ी आबादी बाढ़ की चपेट में आ गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में करीब 7 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं और अब तक 66 लोगों की मौत हो चुकी है। हजारों परिवारों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है, जबकि कई गांवों का संपर्क अब भी टूटा हुआ है। राहत एजेंसियां प्रभावित इलाकों में भोजन, पीने का पानी, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाने में जुटी हैं। Himachal Pradesh में Landslide से 134 सड़कें बंद हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश ने पहाड़ी इलाकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई स्थानों पर भूस्खलन होने से 134 सड़कें बंद हो गई हैं। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीमें मलबा हटाकर सड़कें दोबारा चालू करने की कोशिश कर रही हैं। प्रशासन ने लोगों से मौसम सामान्य होने तक पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा टालने की अपील की है। कई राज्यों में Alert Mode पर प्रशासन लगातार बिगड़ते मौसम को देखते हुए गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, असम और हिमाचल प्रदेश में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है। NDRF और SDRF की टीमें संवेदनशील इलाकों में तैनात हैं और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की सक्रियता अभी कुछ दिन और बनी रह सकती है। ऐसे में नागरिकों को मौसम विभाग के आधिकारिक अपडेट पर नजर रखने और अफवाहों से बचने की सलाह दी गई है। क्या करें और क्या न करें? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Iran

Middle East Crisis: Iran पर सबसे बड़ा Attack फिलहाल टला, Trump ने सेना को दिए नए आदेश

मध्य पूर्व (Middle East) में लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच अमेरिका ने फिलहाल ईरान (Iran) के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान को रोक दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने सेना को व्यापक सैन्य कार्रवाई की तैयारियां रोकने का निर्देश दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) ने चेतावनी दी कि देश के पास Patriot Interceptor Missiles का भंडार तेजी से कम हो रहा है। रक्षा अधिकारियों का मानना है कि यदि इस समय बड़े पैमाने पर हमला किया जाता है तो अमेरिका की अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में ट्रम्प प्रशासन ने सैन्य कार्रवाई के बजाय फिलहाल रणनीतिक संयम अपनाने का फैसला किया है। क्या था अमेरिका का प्लान? अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस और पेंटागन ईरान के कुछ अहम सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर बड़े हमले की योजना पर काम कर रहे थे। माना जा रहा था कि यह अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई हो सकती थी। हालांकि, अंतिम समीक्षा के दौरान रक्षा अधिकारियों ने राष्ट्रपति ट्रम्प को बताया कि हाल के संघर्षों में बड़ी संख्या में Patriot मिसाइलों का इस्तेमाल किया जा चुका है। ऐसे में नए सैन्य अभियान से अमेरिकी रक्षा क्षमता पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसके बाद हमले की योजना फिलहाल रोक दी गई। Patriot Missile की कमी क्यों बनी चिंता? Patriot एयर डिफेंस सिस्टम अमेरिका की सबसे भरोसेमंद रक्षा प्रणालियों में से एक है। इसका उपयोग बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन हमलों को हवा में ही नष्ट करने के लिए किया जाता है। पिछले कुछ महीनों में मध्य पूर्व में बढ़े तनाव और लगातार सैन्य अभियानों के कारण इन इंटरसेप्टर मिसाइलों की खपत काफी बढ़ गई है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि नए मिसाइलों के उत्पादन में समय लगता है, इसलिए मौजूदा स्टॉक को सुरक्षित रखना भी अमेरिका की प्राथमिकता बन गया है। हमला टला, लेकिन खतरा नहीं अमेरिकी प्रशासन ने साफ किया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्प पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। यदि भविष्य में हालात बिगड़ते हैं या अमेरिका और उसके सहयोगियों पर किसी तरह का बड़ा हमला होता है, तो सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू की जा सकती है। फिलहाल अमेरिका स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और सैन्य तैयारियों के साथ-साथ कूटनीतिक विकल्पों पर भी काम कर रहा है। Middle East में क्यों बढ़ रही है चिंता? ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। हाल के महीनों में क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाओं ने सुरक्षा चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। इसके चलते खाड़ी देशों, इजरायल और अन्य सहयोगी देशों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। क्या आगे बदल सकती है रणनीति? रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प प्रशासन का यह फैसला स्थायी नहीं है। यदि Patriot मिसाइलों का उत्पादन बढ़ता है या सुरक्षा हालात बदलते हैं, तो अमेरिका अपनी रणनीति में बदलाव कर सकता है। फिलहाल अमेरिका का ध्यान अपनी रक्षा क्षमता बनाए रखने, सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्र में तनाव को नियंत्रित रखने पर है। आने वाले दिनों में ईरान की प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय घटनाक्रम तय करेंगे कि दोनों देशों के रिश्ते किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kargil Vijay Diwas

Kargil Vijay Diwas 2026: वीर जवानों के बलिदान को देश का नमन, PM Modi, Rahul Gandhi समेत नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

Kargil Vijay Diwas 2026 के अवसर पर पूरा देश उन वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दे रहा है, जिन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में अपनी जान की परवाह किए बिना भारत की सीमाओं की रक्षा की। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई राजनीतिक नेताओं ने कारगिल के शहीदों को नमन करते हुए उनके अदम्य साहस और बलिदान को याद किया। देशभर में आयोजित कार्यक्रमों, स्मारकों और सोशल मीडिया के जरिए नेताओं ने एक स्वर में कहा कि कारगिल के वीर जवानों का त्याग आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा। PM Modi ने कहा- देश हमेशा वीर सैनिकों का ऋणी रहेगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कारगिल विजय दिवस पर अपने संदेश में कहा कि कारगिल के वीरों का शौर्य, साहस और बलिदान हर भारतीय के दिल में हमेशा जीवित रहेगा। उन्होंने कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों के प्रति पूरा देश सदैव कृतज्ञ रहेगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय सेना का पराक्रम हर नागरिक के लिए गर्व का विषय है और देश की सुरक्षा के लिए उनका समर्पण अतुलनीय है। Rahul Gandhi ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कारगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारत के वीर जवानों ने कठिन परिस्थितियों में अद्भुत साहस का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि उनका बलिदान केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि हर भारतीय के लिए प्रेरणा है। राहुल गांधी ने कहा कि देश हमेशा अपने सैनिकों के त्याग और सेवा का सम्मान करता रहेगा। Rajnath Singh बोले- भारतीय सेना हर चुनौती के लिए तैयार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर भारतीय सेना की वीरता को सलाम करते हुए कहा कि देश की सशस्त्र सेनाएं हर परिस्थिति में राष्ट्र की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि कारगिल के नायकों का बलिदान भारतीय सेना की बहादुरी और समर्पण का सबसे बड़ा उदाहरण है। रक्षा मंत्री ने शहीदों के परिवारों के प्रति भी सम्मान व्यक्त किया। कई नेताओं ने साझा किए श्रद्धांजलि संदेश प्रधानमंत्री, विपक्ष और रक्षा मंत्री के अलावा कई केंद्रीय मंत्रियों, राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी कारगिल विजय दिवस पर वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी। सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेशों में नेताओं ने कहा कि कारगिल के शहीदों का बलिदान भारत के इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। उन्होंने युवाओं से देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्र सेवा की भावना अपनाने की भी अपील की। क्यों मनाया जाता है Kargil Vijay Diwas? हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन विजय’ के तहत कारगिल की दुर्गम चोटियों से पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़कर ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। करीब दो महीने तक चले इस युद्ध में भारत के 527 वीर सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी वीरता और शौर्य की याद में हर वर्ष देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। देश के लिए प्रेरणा है कारगिल के वीरों का बलिदान कारगिल विजय दिवस केवल एक ऐतिहासिक जीत का दिन नहीं, बल्कि उन सैनिकों के साहस, समर्पण और राष्ट्रभक्ति को याद करने का अवसर भी है, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। आज जब पूरा देश कारगिल के शहीदों को नमन कर रहा है, तब एक बार फिर यह संदेश गूंज रहा है कि भारत अपने वीर जवानों के बलिदान को कभी नहीं भूल सकता। यही वजह है कि कारगिल विजय दिवस हर भारतीय के लिए गर्व, सम्मान और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बन चुका है. हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Pralhad Joshi

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Siwan

Siwan Student Protest Update: SP घायल, 30 पुलिसकर्मी जख्मी; Firing के आरोपों से बढ़ा तनाव

बिहार के सिवान (Siwan) में छात्रों का प्रदर्शन शनिवार को अचानक हिंसक हो गया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में सिवान के पुलिस अधीक्षक (SP) सहित करीब 30 पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने जिले में सुरक्षा बढ़ा दी और अफवाहों को रोकने के लिए शाम तक इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं। इस बीच प्रदर्शन के दौरान खुलेआम फायरिंग होने के आरोप भी सामने आए हैं, जिनकी जांच जारी है। छात्रों का प्रदर्शन कैसे बदला हिंसा में? जानकारी के मुताबिक, छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे थे। शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कुछ समय बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद बढ़ गया। देखते ही देखते पथराव शुरू हो गया और माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसी दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटनास्थल पर कुछ देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। SP समेत 30 पुलिसकर्मी घायल हिंसा में सिवान के SP सहित लगभग 30 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। पुलिस के कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर तैनात कर दिया गया है। Firing के आरोप, वीडियो की जांच शुरू घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल हुए, जिनमें फायरिंग जैसी आवाजें सुनाई देने का दावा किया जा रहा है। कुछ लोगों ने प्रदर्शन के दौरान खुलेआम गोली चलने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन दावों की सत्यता की जांच की जा रही है। पुलिस वायरल वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है। Internet Service बंद करने का फैसला तनावपूर्ण माहौल और सोशल मीडिया पर अफवाहों के प्रसार की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने शाम तक मोबाइल इंटरनेट सेवा अस्थायी रूप से बंद कर दी। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने और गलत सूचनाओं को फैलने से रोकने के लिए उठाया गया है। उपद्रवियों की पहचान में जुटी पुलिस पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि हिंसा फैलाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सियासत भी हुई तेज सिवान की इस घटना के बाद बिहार की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। विपक्ष ने कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार का कहना है कि स्थिति अब नियंत्रण में है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल क्या है स्थिति? प्रशासन के अनुसार, जिले में स्थिति पहले से बेहतर है, लेकिन एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है। पुलिस लगातार गश्त कर रही है और लोगों से शांति बनाए रखने तथा किसी भी अपुष्ट खबर पर विश्वास न करने की अपील की गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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