मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। यमन के हूती (Houthi) विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर किए गए हमलों ने पूरे क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। हमलों के बाद पाकिस्तान भी खुलकर सामने आया है। पाकिस्तान ने ईरान को साफ संदेश दिया है कि वह हूतियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सऊदी अरब पर हो रहे हमलों को रोकने की कोशिश करे।
मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हाल ही में रक्षा सहयोग मजबूत हुआ है। ऐसे में सऊदी अरब पर लगातार हमले होने की स्थिति में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
Saudi Arabia पर Missile और Drone Attack
रिपोर्ट्स के मुताबिक हूतियों ने सऊदी अरब के कुछ इलाकों को मिसाइल और ड्रोन के जरिए निशाना बनाया। अबहा, जिजान, नजरान और खमिस मुशैत जैसे क्षेत्रों में हमलों की खबर सामने आई है। कुछ स्थानों पर तेल और ऊर्जा से जुड़े ठिकानों को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई।
इन हमलों में बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। हमले के बाद सऊदी सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और संभावित दूसरे हमलों को रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है।
Pakistan ने Iran को क्यों चेताया?
सऊदी अरब पर हमले के बाद पाकिस्तान की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। पाकिस्तान के सऊदी अरब के साथ पुराने और मजबूत रक्षा संबंध हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अगर सऊदी अरब पर हमला जारी रहता है तो पाकिस्तान अपने रक्षा सहयोग के तहत प्रतिक्रिया देने की स्थिति में आ सकता है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी इस मामले में सख्त रुख दिखाया है। उनका संदेश साफ है कि सऊदी अरब की सुरक्षा को खतरा पहुंचने की स्थिति को हल्के में नहीं लिया जाएगा।
यही वजह है कि पाकिस्तान ने ईरान से हूतियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने और उन्हें सऊदी अरब पर हमले रोकने के लिए मनाने की अपील की है।
क्या Saudi Arabia के लिए Pakistan उतरेगा मैदान में?
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पाकिस्तान सीधे सैन्य कार्रवाई में शामिल होगा। फिलहाल इस्लामाबाद का जोर कूटनीतिक दबाव और बातचीत के जरिए तनाव कम करने पर दिखाई दे रहा है।
हालांकि, अगर सऊदी अरब पर हमले बड़े स्तर पर जारी रहते हैं तो पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौता चर्चा के केंद्र में आ सकता है। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान पर अपने करीबी सहयोगी के साथ खड़े होने का दबाव बढ़ सकता है।
Iran और Houthis के बीच कनेक्शन पर सवाल
हूतियों और ईरान के संबंध लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। ईरान पर हूतियों को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं, जबकि तेहरान यह कहता रहा है कि हूती एक स्वतंत्र संगठन हैं और उसके सीधे नियंत्रण में नहीं हैं।
यही वजह है कि पाकिस्तान का ईरान को दिया गया संदेश काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर तेहरान हूतियों पर प्रभाव डालने में सफल होता है और सऊदी अरब पर हमले कम होते हैं, तो क्षेत्र में तनाव कुछ हद तक कम हो सकता है।
Saudi Arabia की जवाबी कार्रवाई से बढ़ी चिंता
हूती हमलों के बाद सऊदी अरब की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई है। यमन में हूती ठिकानों पर हमलों की खबरों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों पक्ष यहीं रुकेंगे या हमले और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला आगे बढ़ेगा। अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर सिर्फ यमन और सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहेगा।
Oil Market पर भी पड़ सकता है असर
मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने का सीधा असर दुनिया के Energy Market पर पड़ सकता है। सऊदी अरब दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों में शामिल है। ऐसे में उसके तेल प्रतिष्ठानों या महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों को किसी बड़े हमले का सामना करना पड़ा तो Global Oil Supply को लेकर चिंता बढ़ सकती है।
इसका असर कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। भारत जैसे बड़े Oil Importing देश के लिए यह स्थिति खास तौर पर महत्वपूर्ण है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल Pakistan की चेतावनी ने Middle East Crisis को नया मोड़ दे दिया है। एक तरफ सऊदी अरब हूती हमलों का सामना कर रहा है, दूसरी तरफ पाकिस्तान अपने करीबी सहयोगी के समर्थन में सख्त संदेश दे रहा है और ईरान से हूतियों पर दबाव बनाने को कह रहा है।
अगर हूती हमले रुकते हैं तो क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद बन सकती है। लेकिन हमले और जवाबी कार्रवाई जारी रहती है तो पाकिस्तान, ईरान और सऊदी अरब के बीच पहले से जटिल रिश्तों पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
फिलहाल पूरी नजर इस बात पर है कि Iran हूतियों को लेकर क्या कदम उठाता है और Saudi Arabia पर हमले आगे किस दिशा में जाते हैं।
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