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खंडवा-भोपाल हाईवे पर पेड़ से टकराई कार, कांग्रेस नेता के पोते की मौत

Table of Content

खंडवा। खंडवा-भोपाल हाईवे पर ग्राम पामाखेड़ी के पास गुरुवार सुबह तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई। हादसे में कार सवार 34 वर्षीय फरहान खोकर की मौत हो गई, जबकि उनके दो दोस्त घायल हुए हैं। एक युवक के पैर और दूसरे के सिर में चोट आई है।

मृतक की पहचान पूर्व नेता प्रतिपक्ष खंडवा नगर निगम एवं कांग्रेस नेता शौकत काका के पोते फरहान खोकर के रूप में हुई है।

मवेशियों को बचाने में अनियंत्रित हुई कार

जानकारी के अनुसार, कार के सामने अचानक मवेशी आ गए थे। उन्हें बचाने के प्रयास में चालक ने कार पर नियंत्रण खो दिया और वाहन सड़क किनारे पेड़ से जा टकराया।

हादसे की सूचना मिलने के बाद नर्मदानगर पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लेकर जांच शुरू की।

नर्मदानगर थाना प्रभारी धीरेश धारवाल ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी में कार के सामने अचानक मवेशियों के आने की बात सामने आई है। हादसे की जांच की जा रही है।

सेकंड हैंड कारों की खरीदी-बिक्री का कारोबार

फरहान खोकर सेकंड हैंड कारों की खरीदी-बिक्री का कारोबार करते थे। बताया गया कि उन्होंने ग्वालियर जाकर एक स्विफ्ट डिजायर कार खरीदी थी। कार को खंडवा लाने के लिए वे ट्रेन से ग्वालियर गए थे।

इसके बाद बुधवार रात फरहान अपने दो दोस्तों के साथ कार से ग्वालियर से खंडवा के लिए रवाना हुए थे। खंडवा लौटते समय उनके दोस्त मुस्तकीम कार चला रहे थे, जबकि एक अन्य साथी भी कार में मौजूद था।

फरहान कार की अगली सीट पर चालक के बगल में बैठे थे।

सुबह खंडवा जिले की सीमा में हुआ हादसा

तीनों दोस्त बुधवार रात कार लेकर ग्वालियर से निकले थे। गुरुवार सुबह करीब 6 बजे वे खंडवा जिले की सीमा में दाखिल हुए। इसी दौरान जिले के पहले गांव पामाखेड़ी के पास कार हादसे का शिकार हो गई।

हादसे के बाद मौके पर पहुंची 108 एंबुलेंस की मदद से घायलों को उपचार के लिए पुनासा सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं फरहान के शव को भी पुनासा अस्पताल में रखा गया।

परिजन शव और घायलों को लेकर खंडवा पहुंचे

हादसे की सूचना मिलने के बाद फरहान के परिजन पुनासा पहुंचे। इसके बाद वे शव और घायलों को लेकर खंडवा जिला अस्पताल पहुंचे।

फरहान के शव का पोस्टमार्टम खंडवा जिला अस्पताल में किया जाएगा। पुलिस ने हादसे की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है।

Muskan Negi

muskannegi1302@gmail.com

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Houthi

Houthi Missile Attack: सऊदी अरब पर हमले के बाद Pakistan का Iran को सीधा संदेश

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। यमन के हूती (Houthi) विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर किए गए हमलों ने पूरे क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। हमलों के बाद पाकिस्तान भी खुलकर सामने आया है। पाकिस्तान ने ईरान को साफ संदेश दिया है कि वह हूतियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सऊदी अरब पर हो रहे हमलों को रोकने की कोशिश करे। मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हाल ही में रक्षा सहयोग मजबूत हुआ है। ऐसे में सऊदी अरब पर लगातार हमले होने की स्थिति में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। Saudi Arabia पर Missile और Drone Attack रिपोर्ट्स के मुताबिक हूतियों ने सऊदी अरब के कुछ इलाकों को मिसाइल और ड्रोन के जरिए निशाना बनाया। अबहा, जिजान, नजरान और खमिस मुशैत जैसे क्षेत्रों में हमलों की खबर सामने आई है। कुछ स्थानों पर तेल और ऊर्जा से जुड़े ठिकानों को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई। इन हमलों में बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। हमले के बाद सऊदी सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और संभावित दूसरे हमलों को रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है। Pakistan ने Iran को क्यों चेताया? सऊदी अरब पर हमले के बाद पाकिस्तान की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। पाकिस्तान के सऊदी अरब के साथ पुराने और मजबूत रक्षा संबंध हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अगर सऊदी अरब पर हमला जारी रहता है तो पाकिस्तान अपने रक्षा सहयोग के तहत प्रतिक्रिया देने की स्थिति में आ सकता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी इस मामले में सख्त रुख दिखाया है। उनका संदेश साफ है कि सऊदी अरब की सुरक्षा को खतरा पहुंचने की स्थिति को हल्के में नहीं लिया जाएगा। यही वजह है कि पाकिस्तान ने ईरान से हूतियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने और उन्हें सऊदी अरब पर हमले रोकने के लिए मनाने की अपील की है। क्या Saudi Arabia के लिए Pakistan उतरेगा मैदान में? अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पाकिस्तान सीधे सैन्य कार्रवाई में शामिल होगा। फिलहाल इस्लामाबाद का जोर कूटनीतिक दबाव और बातचीत के जरिए तनाव कम करने पर दिखाई दे रहा है। हालांकि, अगर सऊदी अरब पर हमले बड़े स्तर पर जारी रहते हैं तो पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौता चर्चा के केंद्र में आ सकता है। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान पर अपने करीबी सहयोगी के साथ खड़े होने का दबाव बढ़ सकता है। Iran और Houthis के बीच कनेक्शन पर सवाल हूतियों और ईरान के संबंध लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। ईरान पर हूतियों को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं, जबकि तेहरान यह कहता रहा है कि हूती एक स्वतंत्र संगठन हैं और उसके सीधे नियंत्रण में नहीं हैं। यही वजह है कि पाकिस्तान का ईरान को दिया गया संदेश काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर तेहरान हूतियों पर प्रभाव डालने में सफल होता है और सऊदी अरब पर हमले कम होते हैं, तो क्षेत्र में तनाव कुछ हद तक कम हो सकता है। Saudi Arabia की जवाबी कार्रवाई से बढ़ी चिंता हूती हमलों के बाद सऊदी अरब की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई है। यमन में हूती ठिकानों पर हमलों की खबरों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों पक्ष यहीं रुकेंगे या हमले और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला आगे बढ़ेगा। अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर सिर्फ यमन और सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहेगा। Oil Market पर भी पड़ सकता है असर मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने का सीधा असर दुनिया के Energy Market पर पड़ सकता है। सऊदी अरब दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों में शामिल है। ऐसे में उसके तेल प्रतिष्ठानों या महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों को किसी बड़े हमले का सामना करना पड़ा तो Global Oil Supply को लेकर चिंता बढ़ सकती है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। भारत जैसे बड़े Oil Importing देश के लिए यह स्थिति खास तौर पर महत्वपूर्ण है। आगे क्या होगा? फिलहाल Pakistan की चेतावनी ने Middle East Crisis को नया मोड़ दे दिया है। एक तरफ सऊदी अरब हूती हमलों का सामना कर रहा है, दूसरी तरफ पाकिस्तान अपने करीबी सहयोगी के समर्थन में सख्त संदेश दे रहा है और ईरान से हूतियों पर दबाव बनाने को कह रहा है। अगर हूती हमले रुकते हैं तो क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद बन सकती है। लेकिन हमले और जवाबी कार्रवाई जारी रहती है तो पाकिस्तान, ईरान और सऊदी अरब के बीच पहले से जटिल रिश्तों पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है। फिलहाल पूरी नजर इस बात पर है कि Iran हूतियों को लेकर क्या कदम उठाता है और Saudi Arabia पर हमले आगे किस दिशा में जाते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

खंडवा-भोपाल हाईवे पर पेड़ से टकराई कार, कांग्रेस नेता के पोते की मौत

खंडवा। खंडवा-भोपाल हाईवे पर ग्राम पामाखेड़ी के पास गुरुवार सुबह तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई। हादसे में कार सवार 34 वर्षीय फरहान खोकर की मौत हो गई, जबकि उनके दो दोस्त घायल हुए हैं। एक युवक के पैर और दूसरे के सिर में चोट आई है। मृतक की पहचान पूर्व नेता प्रतिपक्ष खंडवा नगर निगम एवं कांग्रेस नेता शौकत काका के पोते फरहान खोकर के रूप में हुई है। मवेशियों को बचाने में अनियंत्रित हुई कार जानकारी के अनुसार, कार के सामने अचानक मवेशी आ गए थे। उन्हें बचाने के प्रयास में चालक ने कार पर नियंत्रण खो दिया और वाहन सड़क किनारे पेड़ से जा टकराया। हादसे की सूचना मिलने के बाद नर्मदानगर पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लेकर जांच शुरू की। नर्मदानगर थाना प्रभारी धीरेश धारवाल ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी में कार के सामने अचानक मवेशियों के आने की बात सामने आई है। हादसे की जांच की जा रही है। सेकंड हैंड कारों की खरीदी-बिक्री का कारोबार फरहान खोकर सेकंड हैंड कारों की खरीदी-बिक्री का कारोबार करते थे। बताया गया कि उन्होंने ग्वालियर जाकर एक स्विफ्ट डिजायर कार खरीदी थी। कार को खंडवा लाने के लिए वे ट्रेन से ग्वालियर गए थे। इसके बाद बुधवार रात फरहान अपने दो दोस्तों के साथ कार से ग्वालियर से खंडवा के लिए रवाना हुए थे। खंडवा लौटते समय उनके दोस्त मुस्तकीम कार चला रहे थे, जबकि एक अन्य साथी भी कार में मौजूद था। फरहान कार की अगली सीट पर चालक के बगल में बैठे थे। सुबह खंडवा जिले की सीमा में हुआ हादसा तीनों दोस्त बुधवार रात कार लेकर ग्वालियर से निकले थे। गुरुवार सुबह करीब 6 बजे वे खंडवा जिले की सीमा में दाखिल हुए। इसी दौरान जिले के पहले गांव पामाखेड़ी के पास कार हादसे का शिकार हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची 108 एंबुलेंस की मदद से घायलों को उपचार के लिए पुनासा सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं फरहान के शव को भी पुनासा अस्पताल में रखा गया। परिजन शव और घायलों को लेकर खंडवा पहुंचे हादसे की सूचना मिलने के बाद फरहान के परिजन पुनासा पहुंचे। इसके बाद वे शव और घायलों को लेकर खंडवा जिला अस्पताल पहुंचे। फरहान के शव का पोस्टमार्टम खंडवा जिला अस्पताल में किया जाएगा। पुलिस ने हादसे की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है।
Abu Salem

1993 Mumbai Blast: Abu Salem की Early Release पर Supreme Court ने लगाई रोक, नहीं मिली राहत

1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस में उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर अबू सलेम (Abu Salem) को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। सलेम ने जेल से समय से पहले रिहाई यानी Premature Release की मांग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को भी बरकरार रखा गया है। अबू सलेम ने अपनी याचिका में भारत और पुर्तगाल के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते का हवाला देते हुए कहा था कि भारत सरकार ने उसे 25 साल से ज्यादा जेल में नहीं रखने का आश्वासन दिया था। सलेम का दावा था कि यह अवधि पूरी होने के करीब है और जेल में बिताई गई अवधि तथा मिली रिमिशन को भी गणना में शामिल किया जाना चाहिए। Supreme Court ने क्यों खारिज की याचिका? अबू सलेम की याचिका पर जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई की। कोर्ट के सामने मुख्य मुद्दा यह था कि क्या जेल में मिली Remission को भारत की ओर से पुर्तगाल को दिए गए 25 साल के आश्वासन में शामिल करके सलेम को समय से पहले रिहा किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया। यानी सलेम को फिलहाल इस आधार पर जेल से बाहर आने का रास्ता नहीं मिला। 25 साल की अवधि को लेकर क्या है पूरा मामला? अबू सलेम को 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। प्रत्यर्पण के दौरान भारत की ओर से आश्वासन दिया गया था कि उसे मौत की सजा नहीं दी जाएगी और उसकी कैद 25 साल से अधिक नहीं होगी। इसी आश्वासन को आधार बनाकर सलेम ने अपनी रिहाई की मांग की थी। उसका कहना था कि उसने जेल में लंबा समय बिताया है और अच्छे आचरण के कारण मिलने वाली रिमिशन को भी उसकी सजा की अवधि में जोड़ा जाना चाहिए। हालांकि, अदालत ने इस दलील को राहत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना। नवंबर 2030 क्यों है अहम? अबू सलेम को भारत लाए जाने की तारीख 11 नवंबर 2005 से 25 साल की अवधि की गणना की जाती है। इस हिसाब से यह अवधि नवंबर 2030 में पूरी होगी। यही वजह है कि सलेम की मौजूदा कानूनी स्थिति में 2030 की तारीख महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि प्रत्यर्पण के दौरान पुर्तगाल को दिए गए आश्वासन का भारत को सम्मान करना होगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सलेम को 25 साल पूरे होने से पहले अपने आप रिहा किया जा सकता है। रिहाई से जुड़ी प्रक्रिया और कानूनी शर्तें अपनी जगह लागू रहेंगी। 1993 Mumbai Blast Case में मिली थी उम्रकैद अबू सलेम का नाम 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस से जुड़ा है। 12 मार्च 1993 को मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद सितंबर 2017 में अबू सलेम को दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इसके अलावा मुंबई के बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या के मामले में भी सलेम को उम्रकैद की सजा मिल चुकी है। अभी जेल से बाहर नहीं आएगा अबू सलेम सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अबू सलेम की Early Release की उम्मीदों को फिलहाल झटका लगा है। कोर्ट ने समय से पहले रिहाई की उसकी मांग को स्वीकार नहीं किया है। अब इस मामले में नवंबर 2030 की अवधि और उससे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल सलेम को सुप्रीम कोर्ट से तत्काल रिहाई की राहत नहीं मिली है। क्या है मामला एक नजर में? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Vijay Mallya

Kingfisher Case: Vijay Mallya ने कहा- भारत लौटना चाहता हूं, लेकिन UK की Legal पाबंदी बनी रोड़ा

करीब एक दशक से भारत से बाहर रह रहे कारोबारी Vijay Mallya एक बार फिर चर्चा में हैं। किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के बैंक कर्ज और कानूनी मामलों के बीच माल्या ने ब्रिटेन में अपनी स्थिति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि वह ब्रिटेन से बाहर नहीं जा सकते, ऐसे में भारत लौटने का सवाल ही कैसे हल हो सकता है। माल्या ने सोशल मीडिया पर अपने खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई और उन्हें ‘भगोड़ा’ कहे जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि ब्रिटेन की अदालतों के आदेशों के कारण उनकी आवाजाही पर पाबंदी है। ‘जब UK छोड़ नहीं सकता तो भारत कैसे लौटूं?’ विजय माल्या का कहना है कि लोग उनसे अक्सर पूछते हैं कि वह भारत कब लौटेंगे। लेकिन उनके मुताबिक यह फैसला केवल उनकी इच्छा पर निर्भर नहीं है। ब्रिटेन में चल रही कानूनी प्रक्रिया के कारण उनके लिए देश छोड़ना आसान नहीं है। माल्या ने इसी स्थिति को लेकर सवाल किया कि अगर उन्हें UK से बाहर जाने की कानूनी अनुमति नहीं है, तो फिर भारत नहीं लौटने के लिए उन्हें ‘भगोड़ा’ कहना कितना सही है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में माल्या के खिलाफ लंबे समय से कानूनी कार्रवाई चल रही है और उन्हें भारत वापस लाने की कोशिशें भी जारी रही हैं। ‘सोचता हूं कॉकरोच बन जाऊं’ अपने बयान में माल्या ने व्यंग्य के अंदाज में कहा कि कभी-कभी उन्हें लगता है कि शायद कॉकरोच बन जाना ही बेहतर होगा। उनका यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर काफी चर्चा होने लगी। माल्या ने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर ‘अन्याय’ की बात कही। उनका कहना है कि मामले को जिस तरह पेश किया जाता है, उसमें उनकी ओर से किए गए भुगतान और संपत्तियों से हुई Recovery को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। Kingfisher Airlines और ₹9,000 करोड़ का कर्ज विजय माल्या का नाम सबसे ज्यादा Kingfisher Airlines से जुड़े बैंक कर्ज के मामले में सामने आया। एयरलाइन के बंद होने के बाद भारतीय बैंकों का हजारों करोड़ रुपये का कर्ज बकाया रह गया। मीडिया रिपोर्टों में यह रकम करीब ₹9,000 करोड़ बताई जाती रही है। इसी विवाद के बीच माल्या मार्च 2016 में भारत से ब्रिटेन चले गए थे। इसके बाद भारत सरकार ने उनकी वापसी के लिए कानूनी रास्ता अपनाया। माल्या को भारत में Fugitive Economic Offender भी घोषित किया जा चुका है। माल्या का ₹14,131 करोड़ Recovery को लेकर दावा हालिया बयान में माल्या ने Recovery के आंकड़े का भी जिक्र किया। उनका दावा है कि उनकी संपत्तियों से करीब ₹14,131.60 करोड़ की रकम बरामद की जा चुकी है। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है। करीब ₹9,000 करोड़ का आंकड़ा मुख्य रूप से बैंकों के कर्ज से जुड़े मामले के संदर्भ में सामने आता है, जबकि ₹14,131.60 करोड़ का आंकड़ा माल्या द्वारा बताई गई Recovery से संबंधित है। इसलिए दोनों आंकड़ों को एक ही चीज समझना सही नहीं होगा। भारत वापसी पर अभी भी कानूनी पेंच विजय माल्या की भारत वापसी का मामला केवल उनकी इच्छा से तय होने वाला नहीं है। भारत और ब्रिटेन में उनके खिलाफ चल रही अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाओं का इसमें बड़ा रोल है। एक तरफ भारतीय एजेंसियां और अदालतें मामले को आगे बढ़ा रही हैं, वहीं माल्या ब्रिटेन में अपने खिलाफ हुई कार्रवाई और वहां की कानूनी पाबंदियों का हवाला देते रहे हैं। करीब 10 साल बाद भी विजय माल्या की भारत वापसी का मुद्दा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उनके ताजा बयान ने एक बार फिर Kingfisher Airlines, ₹9,000 करोड़ के बैंक कर्ज, Recovery और Extradition से जुड़े पुराने विवाद को सुर्खियों में ला दिया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन खत्म, स्टाइपेंड 50% बढ़कर ₹21,500

भोपाल। गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) के इंटर्न डॉक्टरों का तीन दिन से चल रहा आंदोलन बुधवार को सरकार से सहमति बनने के बाद खत्म हो गया। सरकार ने इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड 50 प्रतिशत बढ़ाकर ₹21,500 प्रतिमाह करने की मांग मान ली है। वहीं, प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल के मामले में दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया है। मामले की जांच के लिए टीम गठित करने के साथ ही घायल छात्रों के इलाज की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं। डिप्टी CM से बैठक के बाद बनी सहमति बुधवार को इंटर्न डॉक्टरों, जूडा (Junior Doctors Association) और एमटीए प्रतिनिधियों की डिप्टी CM एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ बैठक हुई। करीब एक घंटे तक चली चर्चा के बाद स्टाइपेंड बढ़ाने पर सहमति बनी। सरकार की ओर से मांग स्वीकार किए जाने के बाद डॉक्टरों ने कमला पार्क के पास चल रहा प्रदर्शन समाप्त कर दिया। आंदोलन खत्म होने के बाद डॉक्टरों ने नारेबाजी करते हुए जीत का जश्न मनाया और काम पर लौटने का ऐलान किया। प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई की भी जांच आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल को लेकर भी कार्रवाई की गई है। मामले में दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया है। इसके साथ ही पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए टीम गठित की गई है। प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों के इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए हैं। हमीदिया अस्पताल में मरीजों को हुई परेशानी इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल का सबसे ज्यादा असर हमीदिया अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों पर पड़ा। सामान्य दिनों में अस्पताल की ओपीडी में करीब 3 हजार मरीज पहुंचते हैं, लेकिन बुधवार को सिर्फ 1,609 पर्चे बन सके। सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक मरीजों को देखने के बाद ओपीडी बंद हो गई। इसके बाद करीब 1,391 मरीज बिना डॉक्टर को दिखाए वापस लौट गए। आसपास के जिलों के अलावा इंदौर, सीधी और राजगढ़ से भी मरीज इलाज के लिए हमीदिया अस्पताल पहुंचे थे। कई मरीज पर्चा बनवाने के बाद डॉक्टर का इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें परामर्श नहीं मिल सका। कुछ मरीज जांच के लिए भटकते रहे, जबकि कई निराश होकर वापस लौट गए। बस और ट्रेन से इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। 20 ऑपरेशन भी टाले गए हड़ताल का असर अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर पर भी देखने को मिला। दोपहर 2 बजे तक 20 सर्जरी की गईं, जबकि 20 ऑपरेशन टाल दिए गए। सामान्य दिनों में भोपाल में करीब 40 ऑपरेशन किए जाते हैं। हालांकि, हड़ताल के बावजूद इमरजेंसी और ICU सेवाएं जारी रहीं। हमीदिया अस्पताल की लैब में भी सामान्य दिनों की तुलना में मरीजों की संख्या काफी कम रही। आंदोलन खत्म होने के बाद अब अस्पताल की नियमित स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य होने की उम्मीद है।

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