भोपाल। गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) के इंटर्न डॉक्टरों का तीन दिन से चल रहा आंदोलन बुधवार को सरकार से सहमति बनने के बाद खत्म हो गया। सरकार ने इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड 50 प्रतिशत बढ़ाकर ₹21,500 प्रतिमाह करने की मांग मान ली है।
वहीं, प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल के मामले में दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया है। मामले की जांच के लिए टीम गठित करने के साथ ही घायल छात्रों के इलाज की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
डिप्टी CM से बैठक के बाद बनी सहमति
बुधवार को इंटर्न डॉक्टरों, जूडा (Junior Doctors Association) और एमटीए प्रतिनिधियों की डिप्टी CM एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ बैठक हुई। करीब एक घंटे तक चली चर्चा के बाद स्टाइपेंड बढ़ाने पर सहमति बनी।
सरकार की ओर से मांग स्वीकार किए जाने के बाद डॉक्टरों ने कमला पार्क के पास चल रहा प्रदर्शन समाप्त कर दिया। आंदोलन खत्म होने के बाद डॉक्टरों ने नारेबाजी करते हुए जीत का जश्न मनाया और काम पर लौटने का ऐलान किया।
प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई की भी जांच
आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल को लेकर भी कार्रवाई की गई है। मामले में दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया है।
इसके साथ ही पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए टीम गठित की गई है। प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों के इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए हैं।

हमीदिया अस्पताल में मरीजों को हुई परेशानी
इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल का सबसे ज्यादा असर हमीदिया अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों पर पड़ा। सामान्य दिनों में अस्पताल की ओपीडी में करीब 3 हजार मरीज पहुंचते हैं, लेकिन बुधवार को सिर्फ 1,609 पर्चे बन सके।
सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक मरीजों को देखने के बाद ओपीडी बंद हो गई। इसके बाद करीब 1,391 मरीज बिना डॉक्टर को दिखाए वापस लौट गए।
आसपास के जिलों के अलावा इंदौर, सीधी और राजगढ़ से भी मरीज इलाज के लिए हमीदिया अस्पताल पहुंचे थे। कई मरीज पर्चा बनवाने के बाद डॉक्टर का इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें परामर्श नहीं मिल सका। कुछ मरीज जांच के लिए भटकते रहे, जबकि कई निराश होकर वापस लौट गए। बस और ट्रेन से इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा।
20 ऑपरेशन भी टाले गए
हड़ताल का असर अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर पर भी देखने को मिला। दोपहर 2 बजे तक 20 सर्जरी की गईं, जबकि 20 ऑपरेशन टाल दिए गए।
सामान्य दिनों में भोपाल में करीब 40 ऑपरेशन किए जाते हैं। हालांकि, हड़ताल के बावजूद इमरजेंसी और ICU सेवाएं जारी रहीं।
हमीदिया अस्पताल की लैब में भी सामान्य दिनों की तुलना में मरीजों की संख्या काफी कम रही। आंदोलन खत्म होने के बाद अब अस्पताल की नियमित स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य होने की उम्मीद है।

