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Bhai Dooj

Bhai Dooj 2025 शुभ मुहूर्त भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का त्योहार

Bhai Dooj भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। यह त्योहार भाई और बहन के रिश्ते को मजबूत करने और परिवार में खुशियों का माहौल बनाने का अवसर है। इस साल भाई दूज 23 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा, जो दीपावली के दूसरे दिन पड़ता है। भाई दूज का महत्व Bhai Dooj का मुख्य महत्व भाई-बहन के रिश्ते में विश्वास, सुरक्षा और प्यार को दर्शाना है। इस दिन बहन अपने भाई के लिए टिका, आरती, और मीठा भोजन तैयार करती है, जबकि भाई उसकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करता है। यह त्योहार बताता है कि चाहे भाई दूर ही क्यों न हो, बहन का प्यार और आशीर्वाद हमेशा उसके साथ रहता है। भाई दूज 2025 की परंपराएं Bhai Dooj शुभ मुहूर्त 2025 इस समय बहन अपने भाई को टिका करके उसका आशीर्वाद ले सकती है। Bhai Dooj की खास बातें भाई दूज 2025 का पर्व आपके रिश्तों को मजबूत करने और परिवार में खुशियों की लहर लाने का सबसे अच्छा मौका है।
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Govardhan Puja

Govardhan Puja 2025 दिवाली के बाद का खास पर्व और पूजा का महत्व

Govardhan Puja 2025, दिवाली के अगले दिन मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिन्दू त्योहार है। इसे अन्नकूट पूजा या इंदिरा पूजा भी कहा जाता है। यह पर्व भगवान कृष्ण और उनकी लीला, विशेषकर गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा, के लिए प्रसिद्ध है। गोवर्धन पूजा की कहानी (Govardhan Puja Story in Hindi) पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान कृष्ण ने गोकुलवासियों को समझाया कि केवल प्रकृति और गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए, न कि केवल इन्द्रदेव की, तब इन्द्रदेव क्रोधित होकर भारी वर्षा करने लगे। तब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत अपने छोटे अंगूठे पर उठाकर गोकुलवासियों और उनके पशुओं की रक्षा की। इस घटना के बाद से हर साल Govardhan Puja मनाई जाती है, जो भक्ति, प्रेम और प्रकृति संरक्षण का संदेश देती है। Govardhan Puja कब और कैसे मनाई जाती है? गोवर्धन पूजा का आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व Govardhan Puja केवल भगवान कृष्ण की भक्ति का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह प्रकृति संरक्षण और सामाजिक समरसता का संदेश भी देती है। अन्नकूट बनाकर गांव और शहर के लोग मिलकर भोजन करते हैं और जरूरतमंदों में दान वितरित करते हैं। Govardhan Puja 2025 प्रेम, भक्ति और प्राकृतिक संतुलन का पर्व है। मिट्टी के गोवर्धन पर्वत का निर्माण कर, अन्नकूट चढ़ाकर और गायों की सेवा करके हम अपने जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति कर सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Laxmi Pooja

Laxmi Pooja 2025 Diwali पर घर में समृद्धि और खुशियों का त्यौहार

दिवाली या दीपावली, भारत का सबसे बड़ा और आनंदमय त्यौहार है। यह अंधकार पर प्रकाश, दुख पर सुख और कठिनाई पर समृद्धि की जीत का प्रतीक है। दिवाली के मुख्य दिन Laxmi Pooja का विशेष महत्व है। इस दिन घर और व्यापार में मां लक्ष्मी की पूजा कर समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। Laxmi Pooja का महत्व Laxmi Pooja सिर्फ धन पाने के लिए नहीं, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख और समृद्धि लाने के लिए मनाई जाती है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी उन्हीं घरों में आती हैं जो साफ-सुथरे, व्यवस्थित और श्रद्धाभाव से भरे हों। इसलिए दिवाली से पहले घर की सफाई और सजावट बहुत जरूरी है। Diwali 2025 में Laxmi Pooja का शुभ मुहूर्त इस वर्ष Laxmi Pooja 20 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी।शुभ मुहूर्त: 7.08 P.M बजे से 8.18 P.M बजे तक।इस समय पूजा करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में धन-संपत्ति बढ़ती है। दिवाली और Laxmi Pooja की प्रमुख रीतियाँ दिवाली का संदेश दिवाली सिर्फ धन और समृद्धि का त्यौहार नहीं है। यह अच्छाई, सकारात्मकता और ज्ञान की जीत का प्रतीक भी है। इस दिवाली अपने जीवन में खुशियाँ और प्रेम फैलाना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि धन-संपत्ति बढ़ाना। Diwali 2025 हमें यह सिखाते हैं कि खुशहाल जीवन के लिए घर और मन की सफाई और सकारात्मक सोच आवश्यक है। इस दिवाली घर में उजाला और जीवन में खुशियाँ लाएँ। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Chhoti Diwali

Chhoti Diwali 2025 शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्त्व

छोटी दिवाली 2025, जिसे Chhoti Diwali या Kali Chaudas भी कहते हैं, दीपावली का एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व मुख्य रूप से यमराज की पूजा और घर में सुख-समृद्धि लाने के लिए मनाया जाता है। छोटी दिवाली 2025 की तारीख और शुभ मुहूर्त छोटी दिवाली का महत्त्व छोटी दिवाली का मुख्य उद्देश्य यमराज की पूजा करना है। मान्यता है कि इस दिन यमराज अपने भक्तों को लंबी आयु और स्वास्थ्य का आशीर्वाद देते हैं। साथ ही, घर में दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि आती है। छोटी दिवाली पूजा विधि (Special Puja Vidhi) छोटी दिवाली पर विशेष टिप्स छोटी दिवाली 2025 Special केवल यमराज को प्रसन्न करने का पर्व नहीं है, बल्कि यह घर में सुख, शांति और समृद्धि लाने का अवसर भी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Dhanteras 2025

Dhanteras 2025 शुभ मुहूर्त, पूजा समय और सोना-चांदी खरीदने का सही तरीका

धनतेरस (Dhanteras 2025) दीवाली (Diwali) के पांच दिवसीय महापर्व की शुरुआत का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। यह दिन भगवान धन्वंतरि, देवी लक्ष्मी और कुबेर भगवान को समर्पित होता है और इसे स्वास्थ्य, समृद्धि और धन के लिए सबसे शुभ माना जाता है। Dhanteras 2025 Date and Time Dhanteras पूजा Vrishabha Kaal में करना सबसे शुभ माना जाता है। Best Time to Buy Gold and Silver on Dhanteras धनतेरस पर सोना (Gold), चांदी (Silver) और नए बर्तन खरीदना बहुत ही शुभ माना जाता है। इस समय में की गई खरीदारी से घर में धन और समृद्धि बढ़ती है। Dhanteras 2025 Puja Rituals धनतेरस के दिन निम्नलिखित पूजा और रीति-रिवाज अपनाए जाते हैं: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Karva Chauth

Karva Chauth 2025 व्रत, पूजा विधि और चंद्र दर्शन का महत्व

करवा चौथ (Karva Chauth) भारत का एक बेहद खास त्योहार है, जो विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र, खुशहाली और स्वास्थ्य के लिए मनाया जाता है। यह पर्व न सिर्फ धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि प्रेम और समर्पण का प्रतीक भी है। Karva Chauth 2025 का महत्व करवा चौथ व्रत (Karva Chauth Vrat) केवल एक परंपरा नहीं है, बल्कि यह पति-पत्नी के बीच विश्वास, प्रेम और एक-दूसरे के प्रति समर्पण का प्रतीक है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और सूर्यास्त के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। करवा चौथ 2025: शुभ तिथि और समय Karva Chauth पूजा और रस्में करवा चौथ का दिन कई खास पूजा और रीति-रिवाजों से भरा होता है: करवा चौथ 2025 में खास टिप्स हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sharad Purnima

Sharad Purnima 2025 शुभ मुहूर्त और राशिफल के साथ आध्यात्मिक उपाय

Sharad Purnima हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो चन्द्रमा की पूर्ण चमक में मनाया जाता है। इस दिन का चाँद पूर्ण रूप से प्रकाशित होता है और इसे आध्यात्मिक शक्ति, स्वास्थ्य, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष, 6 अक्टूबर 2025 को शरद पूर्णिमा मनाई जा रही है, जो विशेष रूप से धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है। Sharad Purnima का महत्व हिन्दू धर्म में Sharad Purnima को “कृष्ण पूर्णिमा” और “कोजागरी पूर्णिमा” के नाम से भी जाना जाता है। इस रात को चाँद की रोशनी में खीर रखना और उसका भोग लगाना विशेष पुण्यकारी माना जाता है। इसे स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि प्राप्त करने का अवसर माना जाता है। शरद पूर्णिमा 2025 का शुभ मुहूर्त राशिफल अनुसार शुभ मन्त्र और उपाय हर राशि के लिए Sharad Purnima पर खास मन्त्र और उपाय बताए गए हैं, जो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं। जल तत्व राशि वालों के लिए विशेष योग इस वर्ष शरद पूर्णिमा पर ग्रहों की दुर्लभ स्थिति बनी है, जिससे कर्क, वृश्चिक और मीन राशि वालों के लिए विशेष लाभकारी योग बन रहे हैं। इन राशियों को धन, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति की संभावना अधिक है। शरद पूर्णिमा कैसे मनाएं हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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दशहरा

Vijayadashami 2025 : दशहरा उत्सव की परंपराएं India से लेकर Nepal, Sri Lanka तक

दशहरा (Dussehra), जिसे विजयदशमी (Vijayadashami) भी कहा जाता है, भारत का प्रमुख त्योहार है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और धर्म की स्थापना का प्रतीक है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म और सत्य की स्थापना की थी। भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में भी दशहरा बड़े उत्साह और भक्ति भाव से मनाया जाता है। भारत (India) में दशहरा उत्सव भारत में दशहरा अलग-अलग राज्यों में अपनी विशिष्ट परंपराओं के साथ मनाया जाता है— अन्य देशों (Other Countries) में दशहरा दशहरे का संदेश (Message of Dussehra) दशहरा हमें यह सिखाता है कि सत्य की जीत हमेशा होती है और बुराई का अंत निश्चित है। चाहे भारत हो या विदेश, यह त्योहार भारतीय संस्कृति को जोड़कर रखता है और हमें अपने भीतर के अहंकार, क्रोध और लालच जैसे “रावण” को खत्म करने की प्रेरणा देता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मां सिद्धिदात्री

Navratri Day 9 मां सिद्धिदात्री पूजा विधि, महत्व, मंत्र, भोग और शुभ रंग

नवरात्रि का Day 9 (नवमी / Maha Navami) हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र दिन है। इस दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है, जो नौ दुर्गाओं का अंतिम रूप हैं। मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करती हैं — यश, धन, स्वास्थ्य और मोक्ष। मां सिद्धिदात्री का महत्व मां सिद्धिदात्री का अर्थ है — “सिद्धि” (अलौकिक शक्तियां) और “दात्री” (दाता)। वह देवी हैं जो सभी सिद्धियों की दात्री हैं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव ने उनकी पूजा से सभी सिद्धियां प्राप्त की थीं। माँ सिद्धिदात्री सिंह पर विराजमान होती हैं और कमल के फूल पर उनका रूप होता है। Navratri Day 9 पूजा विधि (Puja Vidhi) शुभ रंग और पुष्प विशेष उपाय (Special Remedies) नौवीं रात को पीली कौड़ी को शुद्ध करके हवन में अर्पित करने या तिजोरी में रखने से धन-धान्य और आर्थिक समृद्धि में वृद्धि होती है। मां सिद्धिदात्री के मंत्र और आरती Maha Navami का धार्मिक महत्व महा नवमी का दिन न केवल मां दुर्गा की आराधना का दिन है, बल्कि यह नारी शक्ति और मातृ शक्ति का सम्मान करने का पर्व भी है। इस दिन कन्या पूजन समाज में नारी के प्रति सम्मान और प्रतिष्ठा को बढ़ाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Maha Ashtami

नवरात्रि Day 8 Celebration Maha Ashtami का धार्मिक महत्व

नवरात्रि का आठवां दिन — महा अष्टमी (Maha Ashtami ) हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और शुभ माना जाता है। यह दिन माँ दुर्गा के शक्ति स्वरूप का प्रतीक है और इसे विशेष रूप से विजय, भक्ति और समर्पण का पर्व कहा जाता है। Navratri Day 8 भक्तों के लिए आध्यात्मिक अनुभव और पूजा का एक खास अवसर होता है। महा अष्टमी का धार्मिक महत्व | Religious Significance Maha Ashtami देवी दुर्गा के आठवें रूप की पूजा का दिन है। पुराणों के अनुसार, इस दिन माता दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का वध किया था। इसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है और नवरात्रि में यह सबसे महत्वपूर्ण दिन है। महा अष्टमी पूजा विधि | Maha Ashtami Puja Vidhi महा अष्टमी का महत्व जीवन में | Spiritual Importance महा अष्टमी जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, साहस और विश्वास लाती है। यह दिन सिखाता है कि अंधकार पर प्रकाश की विजय निश्चित है। Special Mantra for Maha Ashtami “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” — इस मंत्र का जाप करने से माता दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में शक्ति और सुरक्षा मिलती है। Fasting Tips on Maha Ashtami महा अष्टमी पूजा के शुभ लाभ | Benefits of Maha Ashtami Puja हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Narendra Modi vs Nehru

सिर्फ नेहरू का रिकॉर्ड टूटा, या मोदी ने भारत की दिशा भी बदल दी…?

संपादकीय | निखिल सिद्धभट्टी 10 जून 2026 भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण तारीख बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले मोदी ने आज अपने कार्यकाल के 4399 दिन पूरे कर लिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया, जो 1952 से 1964 तक लगातार 4398 दिनों तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे थे। यहां एक तथ्य समझना जरूरी है। जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त 1947 से ही देश के प्रधानमंत्री थे, लेकिन उस समय वे स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त हुए थे। 1952 में देश के पहले आम चुनाव के बाद कांग्रेस संसदीय दल ने उन्हें नेता चुना और वे 13 मई 1952 से 27 मई 1964 तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे। अब, 74 वर्ष बाद नरेंद्र मोदी ने उस रिकॉर्ड को पार कर लिया है। यही वह क्षण है, जिसने हमें यह संपादकीय लिखने के लिए प्रेरित किया। क्योंकि यह केवल एक रिकॉर्ड टूटने की घटना नहीं है। यह भारत के दो सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों, दो अलग-अलग विचारधाराओं और दो अलग-अलग विकास मॉडलों की तुलना का अवसर भी है। एक रिकॉर्ड, लेकिन दो बिल्कुल अलग भारत जब नेहरू ने 1952 में जनता के जनादेश के साथ सरकार बनाई, तब भारत एक नवजात राष्ट्र था। देश विभाजन की त्रासदी झेल चुका था। करोड़ों लोग गरीबी में जी रहे थे। औद्योगिक आधार लगभग नहीं था। साक्षरता बेहद कम थी और लोकतंत्र का भविष्य भी अनिश्चित था। नेहरू के सामने चुनौती थी—भारत को टूटने से बचाना और उसे खड़ा करना। दूसरी ओर, जब नरेंद्र मोदी 2014 में सत्ता में आए, तब भारत दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था था। अर्थव्यवस्था वैश्विक मंच पर हाफ राही थी, सेना मजबूत थी पर उसे नियंत्रण में रखा था , परमाणु शक्ति मौजूद थी और सूचना क्रांति देश में प्रवेश कर चुकी थी पर उस की गाती धीमी थी । लेकिन मोदी के सामने सवाल अलग था—क्या भारत केवल एक विकासशील देश बना रहेगा या 21वीं सदी की वैश्विक शक्ति बनेगा? यहीं से दोनों नेताओं की तुलना शुरू होती है। नेहरू ने नींव रखी, इसमें विवाद नहीं आज जो लोग नेहरू की आलोचना करते हैं, उन्हें भी यह स्वीकार करना होगा कि स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं की बुनियाद उनके दौर में रखी गई। संसद, चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय की प्रतिष्ठा, IIT, AIIMS, बड़े बांध, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग—ये सब उस दौर की उपलब्धियां हैं। दुनिया के कई नवस्वतंत्र देशों में लोकतंत्र असफल हो गया। कहीं सेना सत्ता में आ गई, कहीं तानाशाही स्थापित हो गई। भारत उस रास्ते पर नहीं गया। यह नेहरू युग की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। लेकिन इतिहास का दूसरा पक्ष भी है। नेहरू ने जिस समाजवादी आर्थिक मॉडल को अपनाया, उसने राज्य को अत्यधिक शक्तिशाली बना दिया। लाइसेंस-परमिट राज ने आने वाले दशकों में निजी क्षेत्र की ऊर्जा को सीमित कर दिया। और फिर 1962 में चीन युद्ध ने उनकी विदेश नीति की सबसे बड़ी कमजोरी उजागर कर दी। “हिंदी-चीनी भाई-भाई” का आदर्शवाद चीन की सैन्य आक्रामकता के सामने टिक नहीं सका। यहीं से नेहरू की विरासत पर बहस शुरू होती है। मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है? यहां अक्सर लोग UPI, एक्सप्रेस-वे, जी-20, अनुच्छेद 370 या डिजिटल इंडिया की बात करते हैं। लेकिन क्या यही मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि है? शायद नहीं। मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह हो सकती है कि उन्होंने भारत की शासन प्रणाली और विकास की सोच को बदलने का प्रयास किया। दशकों तक भारत में सरकार योजनाएं बनाती थी, लेकिन लाभार्थी तक पहुंचने से पहले व्यवस्था में रिसाव हो जाता था। जनधन, आधार और मोबाइल के संयोजन ने पहली बार सरकार और नागरिक के बीच सीधा संपर्क स्थापित किया। UPI केवल एक भुगतान प्रणाली नहीं है। यह उस नए भारत का प्रतीक है जो तकनीक को शासन का उपकरण बना रहा है। इसी तरह सड़क, रेलवे, एयरपोर्ट और रक्षा ढांचे में जो निवेश हुआ, उसने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति दी। चीन: दो युग, दो प्रतिक्रियाएं यदि किसी एक मुद्दे पर नेहरू और मोदी की तुलना सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, तो वह चीन है। 1962 में भारत तैयार नहीं था। राजनीतिक आदर्शवाद राष्ट्रीय सुरक्षा पर भारी पड़ गया। 2020 में गलवान घाटी में फिर चीन सामने था। यह कहना सही नहीं होगा कि भारत ने चीन को पराजित कर दिया। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि इस बार भारत ने 1962 जैसी असहाय स्थिति नहीं दिखाई। सीमा पर सड़कें बनीं, सैन्य तैनाती बढ़ी और चीन को लेकर नीति अधिक यथार्थवादी दिखाई दी। यहीं दोनों नेताओं के दृष्टिकोण का मूल अंतर दिखता है। असली बहस मोदी बनाम नेहरू नहीं, दो मॉडलों की है नेहरू का भारत राज्य-नियंत्रित अर्थव्यवस्था, समाजवादी सोच और गुटनिरपेक्ष विदेश नीति पर आधारित था। मोदी का भारत बाज़ार आधारित विकास, डिजिटल शासन, राष्ट्रीय पहचान और बहु-संरेखीय (Multi-alignment) कूटनीति पर आधारित दिखाई देता है। नेहरू संस्थानों के जरिए भारत को मजबूत करना चाहते थे। मोदी नेतृत्व और क्रियान्वयन की गति के जरिए भारत को बदलना चाहते हैं। एक ने भारत का ढांचा बनाया। दूसरा उस ढांचे को नए सिरे से आकार देने की कोशिश कर रहा है। क्या मोदी नेहरू से बेहतर प्रधानमंत्री साबित हुए हैं? इस प्रश्न का उत्तर राजनीति नहीं, इतिहास देगा। लेकिन 2026 में खड़े होकर यदि केवल प्रभाव, निर्णायकता, वैश्विक उपस्थिति, डिजिटल परिवर्तन, इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण और शासन की गति को मापदंड बनाया जाए, तो नरेंद्र मोदी का कार्यकाल स्वतंत्र भारत के सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में निश्चित रूप से गिना जाएगा। इतना ही नहीं, वे संभवतः नेहरू के बाद पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने भारत के विकास मॉडल की दिशा बदलने का प्रयास किया है। नरेंद्र मोदी द्वारा नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ना केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है। यह उस राजनीतिक यात्रा का प्रतीक है जिसमें भारत ने समाजवादी दौर से डिजिटल दौर तक, गुटनिरपेक्षता से बहु-संरेखीय कूटनीति तक और धीमी प्रशासनिक प्रक्रियाओं से तकनीक-आधारित शासन तक का सफर तय किया है। नेहरू ने आधुनिक भारत की नींव रखी थी। मोदी उस भारत को...
LPG महंगाई पर राजनीति तेज: Pradhan Mantri Ujjwala Yojana बदलाव को लेकर सरकार घिरी

LPG महंगाई पर राजनीति तेज: Pradhan Mantri Ujjwala Yojana बदलाव को लेकर सरकार घिरी

केंद्र सरकार ने Pradhan Mantri Ujjwala Yojana के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की सालाना सीमा 9 से घटाकर 4 कर दी है। इस फैसले के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने इस कदम को लेकर मोदी सरकार पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों और विदेश नीति पर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने कहा कि पिछले 12 सालों की आर्थिक नीतियों के कारण गरीब परिवारों पर दबाव बढ़ा है और अब सब्सिडी घटने से स्थिति और मुश्किल हो गई है। उनका कहना है कि लाखों गरीब परिवारों और महिलाओं को खाना पकाने के लिए फिर से लकड़ी के जहरीले धुएं का सहारा लेने की मजबूरी हो सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले तीन महीनों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम करीब ₹89 बढ़े हैं। साथ ही 5 किलो के छोटे सिलेंडर की कीमत में भी लगभग ₹323 की बढ़ोतरी का उल्लेख किया गया है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब पहले ही महंगाई बढ़ रही है, तो सब्सिडी कम करने का फैसला आम लोगों पर और बोझ डालता है। उन्होंने कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर गरीब, मजदूर, किसान, महिलाएं और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा। सरकार की तरफ से इस फैसले को लेकर अभी तक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
INDIA गठबंधन को मजबूत करने पर जोर: अखिलेश यादव बोले – यूपी में BJP को हराना है सबसे बड़ा लक्ष्य

INDIA गठबंधन को मजबूत करने पर जोर: Akhilesh Yadavबोले – यूपी में BJP को हराना है सबसे बड़ा लक्ष्य

समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने कहा है कि हाल ही में हुई INDIA Alliance की बैठक में सभी सहयोगी दलों के बीच संगठन को और मजबूत करने पर सहमति बनी है। अखिलेश यादव ने कहा कि INDIA गठबंधन तभी मजबूत माना जाएगा जब उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को कड़ी टक्कर दी जाए और उसे सत्ता से बाहर किया जाए। उन्होंने साफ कहा कि यूपी देश की राजनीति में सबसे अहम राज्य है और यहां जीत-हार का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ता है। इसलिए विपक्षी दलों की एकजुटता का सबसे बड़ा लक्ष्य उत्तर प्रदेश में भाजपा को हराना होना चाहिए। अखिलेश यादव के इस बयान के बाद एक बार फिर राज्य की राजनीति में सियासी हलचल तेज हो गई है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आने वाले समय में टकराव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
Shefali Jariwala के निधन के बाद भावुक हुए पति पराग त्यागी, श्मशान घाट को लेकर किए गए दावे पर चर्चा तेज

Shefali Jariwala के निधन के बाद भावुक हुए पति पराग त्यागी, श्मशान घाट को लेकर किए गए दावे पर चर्चा तेज

टीवी और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री Shefali Jariwala के निधन के बाद उनके पति Parag Tyagi गहरे सदमे में हैं। 2025 में शेफाली के अचानक निधन ने उनके परिवार, फैंस और पूरी इंडस्ट्री को झकझोर दिया था। शेफाली जरीवाला सिर्फ 42 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गई थीं। उनके जाने के बाद पराग त्यागी लगातार उनकी यादों में जी रहे हैं और अक्सर सोशल मीडिया पर उनकी यादें साझा करते नजर आते हैं। इसी बीच हाल ही में पराग त्यागी से जुड़ी कुछ बातें सामने आई हैं, जिनमें बताया जा रहा है कि वे श्मशान घाट भी पहुंचे थे और वहां अपने भावनात्मक अनुभवों को लेकर कुछ दावे किए। सोशल मीडिया पर यह भी चर्चा है कि उन्होंने वहां कुछ अजीब अनुभव महसूस करने की बात कही, हालांकि ये बातें उनकी निजी भावनाओं और विश्वास से जुड़ी बताई जा रही हैं। फिलहाल पराग त्यागी पूरी तरह अपनी पत्नी की यादों में डूबे हुए हैं और इस मुश्किल समय में खुद को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। फैंस भी लगातार उन्हें सोशल मीडिया पर सपोर्ट और हिम्मत दे रहे हैं।
Trigrahi Yog 2026: 15 जून को सूर्य गोचर से बनेगा त्रिग्रही राजयोग, इन राशियों की बदलेगी किस्मत

Trigrahi Yog 2026: 15 June को सूर्य गोचर से बनेगा त्रिग्रही राजयोग, इन राशियों की बदलेगी किस्मत

ज्योतिष के अनुसार 15 June 2026 को एक खास ग्रहों का संयोग बनने जा रहा है, जिसे Trigrahi Yog कहा जाता है। इस दिन सूर्य के गोचर के साथ यह शक्तिशाली राजयोग बनने की संभावना है, जिसका असर कई राशियों पर देखने को मिल सकता है। इस योग में Surya (Sun) का गोचर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार जब तीन प्रमुख ग्रह एक विशेष स्थिति में आते हैं, तो उसे त्रिग्रही योग कहा जाता है और यह समय भाग्य, करियर और आर्थिक स्थिति में बड़े बदलाव ला सकता है। मान्यता है कि इस योग के प्रभाव से कुछ राशियों को अचानक लाभ, नई नौकरी के अवसर, व्यापार में बढ़ोतरी और रुके हुए कामों में तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं कुछ लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास भी बढ़ सकता है। हालांकि इसका प्रभाव हर राशि पर अलग-अलग होता है और यह व्यक्ति की कुंडली पर भी निर्भर करता है।

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