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Rakshabandhan

Rakshabandhan 2025 भाई-बहन के अटूट बंधन का पर्व और इससे जुड़ी खास रस्में

भारत में भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को समर्पित त्योहार Rakshabandhan हर साल बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई उनकी सुरक्षा का वचन देते हैं। Rakshabandhan 2025 मुहूर्त, इतिहास और महत्व। रक्षाबंधन 2025 कब है? इस साल Rakshabandhan 9 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा। राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह से शाम तक रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन भद्रा काल समाप्त होने के बाद बहनें आराम से राखी बांध सकती हैं। Rakshabandhan का इतिहास और पौराणिक कथा रक्षाबंधन का संबंध कई पौराणिक और ऐतिहासिक कथाओं से है। महाभारत के अनुसार, द्रौपदी ने श्रीकृष्ण की उंगली से बहते खून को रोकने के लिए कपड़ा बांधा था, जिसके बदले श्रीकृष्ण ने जीवनभर उनकी रक्षा का वचन दिया। वहीं इतिहास में रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूं की कहानी भी इस त्योहार की गहराई को दर्शाती है। रक्षाबंधन का महत्व रक्षाबंधन कैसे मनाया जाता है दुनियाभर में रक्षाबंधन विदेशों में रह रहे भारतीय भी इस त्योहार को ऑनलाइन राखी और गिफ्ट भेजकर मनाते हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में भारतीय समुदाय राखी का उत्सव मनाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sawan Somwar

Sawan Somwar 2025 सावन सोमवार व्रत का महत्व, पूजा विधि, पहनने के शुभ रंग और क्या करें

श्रावण मास (Sawan Month) की शुरुआत होते ही चारों ओर शिव भक्ति का माहौल बन जाता है। खासकर सावन सोमवार (Sawan Somwar) का व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे शुभ दिन माना जाता है। इस बार 2025 में पहला सावन सोमवार 14 जुलाई को पड़ रहा है, जो देशभर के श्रद्धालुओं के लिए खास महत्त्व रखता है। क्या है Sawan Somwar व्रत का महत्त्व? सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस महीने सोमवार को व्रत और शिव पूजन करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन से कष्ट दूर होते हैं। कुंवारी कन्याएं अच्छा वर पाने के लिए और विवाहित महिलाएं सुख-समृद्धि व सौभाग्य के लिए इस व्रत को करती हैं। व्रत और पूजा विधि ना शिवजी की कृपा पाने के लिए लाभकारी माना गया है। यहां कुछ शुभ रंगों की सूची दी जा रही है: Sawan Somwar को कौन से रंग पहनें व्रत क्रम तारीख पहनने के लिए शुभ रंग पहला सोमवार 14 जुलाई सफेद (White) – शांति और शुद्धता का प्रतीक दूसरा सोमवार 21 जुलाई हल्का नीला (Sky Blue) – सकारात्मक ऊर्जा तीसरा सोमवार 28 जुलाई पीला (Yellow) – ज्ञान और समृद्धि चौथा सोमवार 4 अगस्त हरा (Green) – सुख-समृद्धि और सौभाग्य पाँचवाँ सोमवार 11 अगस्त बैंगनी या क्रीम (Purple or Cream) – भक्ति और श्रद्धा महिलाएं इन रंगों की चूड़ियां, दुपट्टा या साड़ी पहन सकती हैं। पुरुष भी इन रंगों की शर्ट या कुर्ता धारण कर सकते हैं। 2025 के सावन सोमवार की तिथियां दिनांक दिन सावन सोमवार 14 जुलाई सोमवार पहला सावन सोमवार 21 जुलाई सोमवार दूसरा सावन सोमवार 28 जुलाई सोमवार तीसरा सावन सोमवार 4 अगस्त सोमवार चौथा सावन सोमवार 11 अगस्त सोमवार अंतिम सावन सोमवार देशभर में शिवालयों में उमड़ा भक्तों का सैलाब सावन सोमवार के मौके पर देश के प्रमुख शिव मंदिरों जैसे काशी विश्वनाथ (वाराणसी), महाकालेश्वर (उज्जैन), केदारनाथ (उत्तराखंड), बैद्यनाथ धाम (झारखंड) में भक्तों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। कई जगहों पर कांवड़ यात्रा भी चरम पर है, जिसमें शिवभक्त गंगाजल लाकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। सावन में करें ये 5 काम और पाएं शिव कृपा हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rath Yatra 2025

Rath Yatra 2025 पुरी में Lord Jagannath की Grand यात्रा शुरू

पुरी, ओडिशा में हर साल की तरह इस बार भी Lord Jagannath, Balabhadra और Subhadra की ऐतिहासिक Rath Yatra 2025 का शुभारंभ 27 जून से हो रहा है। यह यात्रा न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से भी भारत की सबसे बड़ी यात्राओं में से एक है। Rath Yatra 2025 Date and Full Schedule Rath Yatra Route और Raths का विवरण Security और Traffic व्यवस्था Cultural Highlights और Bhakti का उत्सव Global Celebrations – ISKCON और International Events हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Shani Jayanti 2025: जानिए पूजा विधि, किन राशियों को रहना होगा सावधान और कैसे पाएं शनि देव की कृपा

हर साल ज्येष्ठ अमावस्या को मनाई जाने वाली शनि जयंती, इस वर्ष 27 मई 2025 (मंगलवार) को आ रही है। इस दिन को शनि देव के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। शनिदेव को न्याय के देवता कहा जाता है और उनकी कृपा से जीवन में संतुलन और सकारात्मक परिवर्तन आता है, वहीं क्रोध से कष्ट भी झेलना पड़ सकता है। शनि जयंती 2025 की तिथि व मुहूर्त: शनि जयंती की पूजा विधि: किन राशियों को रहना चाहिए सावधान?इस बार शनि ग्रह मकर राशि में वक्री होकर विराजमान रहेंगे, जिससे कुछ राशियों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव बना रहेगा: उपाय: शनि से डरने की नहीं, समझने की ज़रूरत है:शनि देव अनुशासन, कर्म और न्याय के प्रतीक हैं। अगर आपने जीवन में कर्म और सोच को सकारात्मक बनाए रखा है, तो शनि देव आपके सबसे बड़े रक्षक भी साबित हो सकते हैं। शनि जयंती का ये पर्व नकारात्मक ऊर्जा को त्यागने और आत्मनिरीक्षण करने का सुनहरा अवसर है। शनि जयंती न केवल धार्मिक आस्था का दिन है बल्कि आत्मसुधार और अनुशासन का प्रतीक भी है। इसे श्रद्धा और विधिपूर्वक मनाएं, ताकि शनि देव की कृपा आपके जीवन में स्थायित्व और शांति लेकर आए।शनि जयंती के दिन सूर्यास्त के समय 7 बार हनुमान जी का नाम लेकर सरसों के तेल का दीपक जलाएं, और घर के मुख्य द्वार पर रखें – नकारात्मक ऊर्जा घर से दूर रहती है।
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हनुमान जी

Bada Mangal 2025: बड़ा मंगल कब है, क्या है इसका महत्व और कैसे करें पूजा ?

Bada Mangal 2025: बड़ा मंगल कब है? बड़ा मंगल का पर्व विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, खासकर लखनऊ में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। बड़ा मंगल का आरंभ ज्येष्ठ महीने के पहले मंगलवार से होता है और पूरे महीने के हर मंगलवार को इसे मनाया जाता है। वर्ष 2025 में, बड़ा मंगल का पहला मंगलवार 13 मई को है। क्या होता है बड़ा मंगल? बड़ा मंगल विशेष रूप से हनुमान जी को समर्पित पर्व है। इसे ‘हनुमान जयन्ती’ के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन भक्तगण हनुमान मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं और भंडारे का आयोजन करते हैं। लखनऊ में इस पर्व का विशेष महत्त्व है, जहाँ जगह-जगह प्रसाद वितरण और भंडारे का आयोजन किया जाता है। बड़ा मंगल कैसे मनाएं? बड़ा मंगल का महत्व: ऐसी मान्यता है कि बड़ा मंगल के दिन हनुमान जी की पूजा से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इस दिन का व्रत रखने से कष्टों का निवारण होता है और संकट कटते हैं। लखनऊ में बड़ा मंगल का महत्व: लखनऊ में बड़ा मंगल एक उत्सव की तरह मनाया जाता है। यहाँ के हनुमान मंदिरों में हजारों भक्त पूजा-अर्चना करने आते हैं। सड़कों पर भंडारे लगते हैं और भक्तगण प्रसाद का वितरण करते हैं। यह पर्व लखनऊ की संस्कृति का अहम हिस्सा है।
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Buddha Purnima

Buddha Purnima 2025 भगवान बुद्ध की जयंती और ज्ञान प्राप्ति का पावन पर्व

बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima), जिसे वैशाख पूर्णिमा (Vaishakh Purnima) के नाम से भी जाना जाता है, हर साल वैशाख मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह दिन भगवान गौतम बुद्ध (Lord Gautam Buddha) के जन्म, ज्ञान प्राप्ति (Enlightenment) और महापरिनिर्वाण (Mahaparinirvana) — तीनों घटनाओं का साक्षी है, जिससे इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। बुद्ध पूर्णिमा का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व बुद्ध पूर्णिमा को बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए सबसे पवित्र दिन माना जाता है। इस दिन भगवान बुद्ध का जन्म लुंबिनी (वर्तमान नेपाल) में हुआ था, और बोधगया में उन्हें बोधिवृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। कुशीनगर में उन्होंने अंतिम उपदेश देकर महापरिनिर्वाण को प्राप्त किया। भगवान बुद्ध की शिक्षाएं आज भी दुनियाभर में शांति, करुणा और अहिंसा का संदेश देती हैं। बुद्ध पूर्णिमा कैसे मनाई जाती है (How Buddha Purnima is Celebrated) बुद्ध पूर्णिमा 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त (Buddha Purnima 2025 Date & Time) हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Akshay Tritiya

Akshay Tritiya 2025 समृद्धि, आध्यात्मिक महत्व और नए शुरुआत का शुभ अवसर

अक्षय तृतीया (Akshay Tritiya) हिंदू कैलेंडर का एक अत्यंत शुभ और पवित्र दिन है। इसे अखा तीज (Akha Teej) भी कहा जाता है और यह वैसाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। अक्षय तृतीया का दिन समृद्धि, खुशी और सफलता की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन को विशेष रूप से नई शुरुआत, खरीदारी, निवेश और धार्मिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। इस वर्ष, अक्षय तृतीया 30 अप्रैल 2025 को है, जो सभी के लिए एक नई शुरुआत और सकारात्मक बदलाव का आदर्श अवसर है। अक्षय तृतीया का महत्व अक्षय शब्द का अर्थ होता है “अक्षय” या “अनन्त”, जो अनगिनत समृद्धि और सफलता का प्रतीक है। कहा जाता है कि इस दिन किया गया कोई भी कार्य कभी विफल नहीं होता, बल्कि वह निरंतर प्रगति की ओर बढ़ता है। इस दिन को व्यवसाय, निवेश, संपत्ति खरीदने या नई योजनाओं की शुरुआत के लिए सबसे उपयुक्त दिन माना जाता है। भारत में इस दिन सोने, चांदी और अन्य कीमती धातुओं की खरीदारी की परंपरा है, क्योंकि इसे समृद्धि और स्थिरता लाने वाला माना जाता है। अक्षय तृतीया का महत्व जैन समुदाय में भी बहुत है, क्योंकि इस दिन भगवान ऋषभदेव ने अपना उपवासन (उपवास) शक्कर का पानी पीकर तोड़ा था। यह दिन जैन धर्म के अनुयायियों के लिए उपवास और प्रार्थना का दिन होता है। Akshay Tritiya पर किए जाने वाले प्रमुख आयोजन सोने की खरीदारी: अक्षय तृतीया पर सोने, चांदी और कीमती धातुओं की खरीदारी का विशेष महत्व है। इसे शुभ माना जाता है कि इस दिन सोना खरीदने से समृद्धि और आर्थिक स्थिरता प्राप्त होती है। कई लोग इस दिन अपने परिवार के लिए गहनों की खरीदारी करते हैं, जो उनके भविष्य में सफलता का प्रतीक होता है। नए व्यवसाय की शुरुआत: अक्षय तृतीया का दिन नए व्यवसायों, प्रोजेक्ट्स, या निवेशों के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन को नई योजनाओं की शुरुआत करने, नए विचारों को साकार करने, और प्रगति की दिशा में पहला कदम उठाने के लिए आदर्श माना जाता है। धार्मिक पूजा और अनुष्ठान: इस दिन को लेकर धार्मिक अनुष्ठान भी बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। विशेष रूप से भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। लोग इस दिन घरों में पूजा करते हैं, खासकर धन, सुख और समृद्धि की प्रार्थना करते हुए। दान और परोपकार: अक्षय तृतीया पर दान का भी विशेष महत्व है। इस दिन गरीबों को भोजन, कपड़े या पैसे का दान करना पुण्य का कार्य माना जाता है। इसे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आशीर्वाद प्राप्त करने का एक मार्ग माना जाता है। भारत के विभिन्न हिस्सों में Akshay Tritiya का उत्सव Akshay Tritiya भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग तरीके से मनाई जाती है। उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश, राजस्थान, और गुजरात में इसे बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। महाराष्ट्र में लोग इस दिन नए घर खरीदते हैं, जबकि गुजरात में व्यापारी इस दिन अपनी किताबें या खाता-बही खोलते हैं। दक्षिण भारत में, तमिलनाडु और कर्नाटका में इस दिन को नए कपड़े पहनने और विशेष पूजा करने का दिन माना जाता है। अक्षय तृतीया और उसका वैश्विक महत्व Akshay Tritiya न केवल हिंदू समुदाय में बल्कि जैन और बौद्ध समुदायों में भी मनाई जाती है। यह दिन विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। इसका महत्व न केवल भारत में, बल्कि दुनियाभर में बढ़ रहा है। विशेषकर व्यवसायी वर्ग इसे एक शुभ दिन मानते हैं और नए निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को प्रारंभ करने के लिए इस दिन का चयन करते हैं। क्यों अक्षय तृतीया है खास? अक्षय तृतीया एक ऐसा दिन है जो हर किसी के लिए एक नई शुरुआत का संकेत है। चाहे वह आर्थिक निवेश हो, कोई नई योजना हो, या फिर जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की सोच हो, यह दिन उन सभी चीजों को शुरू करने के लिए आदर्श है जो समृद्धि और सफलता की ओर बढ़ने में मदद करें। इस दिन के साथ जुड़ी मान्यताएं और परंपराएं इसे हमारे जीवन में नई ऊर्जा और प्रेरणा देने वाला बनाती हैं। देशहारपाल पर पढ़ें खबरें, ताज़ा खबरें।
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सप्ताह के व्रत -त्यौहार

22 अप्रैल से 27 अप्रैल 2025 के व्रत और त्योहार प्रत्येक पर्व की तिथि, महत्व और परंपरागत रूप से मनाने के विधान

22 April se 27 April ke vrat aur tyohar 🌍 22 अप्रैल 2025 (मंगलवार) – पृथ्वी दिवस 🙏 24 अप्रैल 2025 (गुरुवार) – वरुथिनी एकादशी 🕉️ 25 अप्रैल 2025 (शुक्रवार) – प्रदोष व्रत 🕉️ 26 अप्रैल 2025 (शनिवार) – मासिक शिवरात्रि 🌑 27 अप्रैल 2025 (रविवार) – वैशाख अमावस्या इस सप्ताह के व्रत और त्योहार आध्यात्मिक उन्नति, पर्यावरण संरक्षण और पारिवारिक कल्याण के लिए महत्वपूर्णहं।इन अवसरों पर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर और समाज सेवा करके आप अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकतेहैं।
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हनुमान जयंती

हनुमान जयंती का ज्योतिषीय प्रभाव: विभिन्न राशियों में ऊर्जा, आध्यात्मिक लाभ एवं धर्म का प्रेरणादायक संदेश

हनुमान जयंती का राशि चक्र पर प्रभाव और धर्म से जुड़े लाभ हनुमान जयंती न केवल आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है, बल्कि यह ज्योतिषीय ऊर्जा और राशि चक्र पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। इस दिन भगवान हनुमान के आदर्श – साहस, भक्ति और आत्मविश्वास – जीवन के हर पहलू में प्रेरणा का स्रोत बनते हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे हनुमान जयंती विभिन्न राशियों को प्रभावित करती है और धर्म से जुड़े लाभों तथा आध्यात्मिक ऊर्जा के संचार से जीवन में कैसे संतुलन और सकारात्मकता आती है। 1. हनुमान जयंती और ज्योतिषीय प्रभाव भगवान हनुमान ऊर्जा और साहस के देवता हैं। ज्योतिष शास्त्र में उनकी उपस्थिति, खासकर मंगल (Mars) ग्रह के प्रभाव से मेल खाती है, जो कि ऊर्जा, जोश और साहस का प्रतीक माना जाता है। हनुमान जयंती के दिन इस ऊर्जा का संचार पूरे ब्रह्मांड में फैला रहता है, जिससे विभिन्न राशियों में निम्नलिखित प्रभाव देखने को मिलते हैं: 2. राशियों पर विशेष प्रभाव प्रत्येक राशि पर हनुमान जयंती का प्रभाव कुछ न कुछ अनूठा होता है। आइए जानें कि प्रमुख राशियों में किस प्रकार के सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं: 3. धर्म, आध्यात्मिकता और हनुमान जयंती धर्मिक आस्थाओं में नयी ऊर्जा:हनुमान जयंती पर भक्तगण अपने धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से आत्मिक शुद्धि की ओर अग्रसर होते हैं। हनुमान चालीसा का पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सकारात्मक प्रवाह बनता है। सामाजिक सद्भावना और सेवा:धर्म का मूल उद्देश्य सेवा और करुणा है। इस दिन सामुदायिक गतिविधियाँ, जैसे मुफ्त भोजन वितरण, रक्तदान शिविर, और अन्य सामाजिक कार्य आयोजित किए जाते हैं, जो न केवल आध्यात्मिक लाभ प्रदान करते हैं बल्कि समाज में भाईचारे और सहयोग की भावना भी बढ़ाते हैं। आध्यात्मिक और मानसिक संतुलन:अध्यात्मिक साधनाएं, जैसे ध्यान, प्रार्थना और योग, हनुमान जयंती की रौनक में चार चांद लगा देती हैं। यह दिन व्यक्ति को स्वयं के अंदर के शक्ति स्रोत से जोड़ता है, जिससे जीवन में मानसिक संतुलन और शांति बनी रहती है।
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Mahavir Jayanti 2025

10 अप्रैल 2025: जब महावीर जयंती और प्रदोष व्रत साथ आएंगे – जानिए इस शुभ दिन को खास बनाने के उपाय!

Mahavir Jayanti 2025 10 अप्रैल 2025 को महावीर जयंती और प्रदोष व्रत एक ही दिन आ रहे हैं, जो आध्यात्मिक दृष्टिकोण से एक अत्यंत पावन संयोग है। यदि इस दिन व्यक्ति सत्य, संयम और भक्ति के साथ दिन बिताता है, तो न केवल आत्मिक शांति मिलती है बल्कि जीवन में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि भी आती है। महावीर स्वामी जयंती और प्रदोष व्रत 2025: क्यों और कैसे मनाएं, क्या करें और क्या न करें? 🔶 महावीर स्वामी जयंती 2025: तारीख – 10 अप्रैल 2025 (गुरुवार)म🌼 महावीर स्वामी जयंती क्यों मनाई जाती है? भगवान महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे। उनका जन्म चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को बिहार के कुंडलपुर में हुआ था। अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे सिद्धांतों पर आधारित उनका जीवन आज भी मानवता के लिए प्रेरणा है। इस दिन को जैन समुदाय विशेष श्रद्धा, ध्यान और परोपकार के कार्यों के साथ मनाता है। 🙏 कैसे मनाएं महावीर जयंती 2025 को? 🔹 प्रभात फेरी एवं शोभा यात्रा – भगवान महावीर की प्रतिमा के साथ नगर भ्रमण🔹 जप और ध्यान – ‘नवकार मंत्र’ का जाप करें और आत्म-शुद्धि हेतु ध्यान करें🔹 पंचशील व्रत का पालन – अहिंसा, सत्य, चोरी न करना, ब्रह्मचर्य और त्याग🔹 परोपकार – जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या दवाई दान करें🔹 स्व-शुद्धि – आज के दिन मन, वचन और कर्म से किसी को आघात न पहुँचाएं🔹 भोजन में संयम – उपवास रखें या सादा सात्विक भोजन ग्रहण करें 🛑 क्या न करें इस दिन? 🚫 मांस, मदिरा या तामसिक भोजन का सेवन🚫 किसी जीव को नुकसान पहुँचाना या हिंसा🚫 असत्य भाषण, लालच या अपमानजनक आचरण 🕉️ क्या करने से मिलेगा विशेष फल? 🔶 प्रदोष व्रत 2025 (10 अप्रैल – गुरुवार प्रदोष): महत्व – प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और यह त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। जब यह व्रत गुरुवार को आता है, तो इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है, जो विशेष फलदायी माना जाता है। ✅ कैसे करें प्रदोष व्रत: 🌟 क्या करने से विशेष लाभ मिलेगा? ❌ इन बातों से बचें दोनों अवसरों पर:
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Pakistan

Pakistan Airstrike on Afghanistan: 11 बच्चों समेत 13 की मौत, सीमा तनाव फिर बढ़ा

Pakistan और Afghanistan के बीच एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। अफगान तालिबान सरकार ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान ने उसके सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की है, जिसमें बड़ी संख्या में निर्दोष नागरिकों की जान गई है। इस घटना ने दोनों देशों के रिश्तों को और ज्यादा बिगाड़ दिया है। क्या है पूरा मामला? अफगान अधिकारियों के अनुसार, यह एयरस्ट्राइक कूनर, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में की गई। दावा किया गया है कि हमले रिहायशी इलाकों पर हुए, जहां आम लोग अपने रोजमर्रा के जीवन में थे। इस हमले में भारी नुकसान की खबर सामने आई है। मौतों और घायलों का आंकड़ा तालिबान प्रशासन के मुताबिक: यह आंकड़ा सामने आने के बाद स्थानीय इलाकों में मातम और दहशत का माहौल है। तालिबान का पाकिस्तान पर आरोप तालिबान सरकार ने पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि: अफगान प्रशासन ने इस हमले को देश की संप्रभुता पर हमला बताया है और कड़ी प्रतिक्रिया की बात कही है। पाकिस्तान की प्रतिक्रिया क्या है? इस पूरे मामले पर पाकिस्तान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या पुष्टि नहीं की गई है। हालांकि पहले पाकिस्तान कई बार यह दावा करता रहा है कि उसकी सैन्य कार्रवाई आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ होती है, न कि आम नागरिकों के खिलाफ। दोनों देशों के बीच तनाव क्यों बढ़ रहा है? पिछले कुछ समय से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच: लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जिससे हालात और संवेदनशील हो गए हैं। क्यों यह घटना गंभीर है? यह घटना सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं मानी जा रही, बल्कि इसके कई बड़े प्रभाव हो सकते हैं: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Narendra Modi vs Nehru

सिर्फ नेहरू का रिकॉर्ड टूटा, या मोदी ने भारत की दिशा भी बदल दी…?

संपादकीय | निखिल सिद्धभट्टी 10 जून 2026 भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण तारीख बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले मोदी ने आज अपने कार्यकाल के 4399 दिन पूरे कर लिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया, जो 1952 से 1964 तक लगातार 4398 दिनों तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे थे। यहां एक तथ्य समझना जरूरी है। जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त 1947 से ही देश के प्रधानमंत्री थे, लेकिन उस समय वे स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त हुए थे। 1952 में देश के पहले आम चुनाव के बाद कांग्रेस संसदीय दल ने उन्हें नेता चुना और वे 13 मई 1952 से 27 मई 1964 तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे। अब, 74 वर्ष बाद नरेंद्र मोदी ने उस रिकॉर्ड को पार कर लिया है। यही वह क्षण है, जिसने हमें यह संपादकीय लिखने के लिए प्रेरित किया। क्योंकि यह केवल एक रिकॉर्ड टूटने की घटना नहीं है। यह भारत के दो सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों, दो अलग-अलग विचारधाराओं और दो अलग-अलग विकास मॉडलों की तुलना का अवसर भी है। एक रिकॉर्ड, लेकिन दो बिल्कुल अलग भारत जब नेहरू ने 1952 में जनता के जनादेश के साथ सरकार बनाई, तब भारत एक नवजात राष्ट्र था। देश विभाजन की त्रासदी झेल चुका था। करोड़ों लोग गरीबी में जी रहे थे। औद्योगिक आधार लगभग नहीं था। साक्षरता बेहद कम थी और लोकतंत्र का भविष्य भी अनिश्चित था। नेहरू के सामने चुनौती थी—भारत को टूटने से बचाना और उसे खड़ा करना। दूसरी ओर, जब नरेंद्र मोदी 2014 में सत्ता में आए, तब भारत दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था था। अर्थव्यवस्था वैश्विक मंच पर हाफ राही थी, सेना मजबूत थी पर उसे नियंत्रण में रखा था , परमाणु शक्ति मौजूद थी और सूचना क्रांति देश में प्रवेश कर चुकी थी पर उस की गाती धीमी थी । लेकिन मोदी के सामने सवाल अलग था—क्या भारत केवल एक विकासशील देश बना रहेगा या 21वीं सदी की वैश्विक शक्ति बनेगा? यहीं से दोनों नेताओं की तुलना शुरू होती है। नेहरू ने नींव रखी, इसमें विवाद नहीं आज जो लोग नेहरू की आलोचना करते हैं, उन्हें भी यह स्वीकार करना होगा कि स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं की बुनियाद उनके दौर में रखी गई। संसद, चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय की प्रतिष्ठा, IIT, AIIMS, बड़े बांध, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग—ये सब उस दौर की उपलब्धियां हैं। दुनिया के कई नवस्वतंत्र देशों में लोकतंत्र असफल हो गया। कहीं सेना सत्ता में आ गई, कहीं तानाशाही स्थापित हो गई। भारत उस रास्ते पर नहीं गया। यह नेहरू युग की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। लेकिन इतिहास का दूसरा पक्ष भी है। नेहरू ने जिस समाजवादी आर्थिक मॉडल को अपनाया, उसने राज्य को अत्यधिक शक्तिशाली बना दिया। लाइसेंस-परमिट राज ने आने वाले दशकों में निजी क्षेत्र की ऊर्जा को सीमित कर दिया। और फिर 1962 में चीन युद्ध ने उनकी विदेश नीति की सबसे बड़ी कमजोरी उजागर कर दी। “हिंदी-चीनी भाई-भाई” का आदर्शवाद चीन की सैन्य आक्रामकता के सामने टिक नहीं सका। यहीं से नेहरू की विरासत पर बहस शुरू होती है। मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है? यहां अक्सर लोग UPI, एक्सप्रेस-वे, जी-20, अनुच्छेद 370 या डिजिटल इंडिया की बात करते हैं। लेकिन क्या यही मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि है? शायद नहीं। मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह हो सकती है कि उन्होंने भारत की शासन प्रणाली और विकास की सोच को बदलने का प्रयास किया। दशकों तक भारत में सरकार योजनाएं बनाती थी, लेकिन लाभार्थी तक पहुंचने से पहले व्यवस्था में रिसाव हो जाता था। जनधन, आधार और मोबाइल के संयोजन ने पहली बार सरकार और नागरिक के बीच सीधा संपर्क स्थापित किया। UPI केवल एक भुगतान प्रणाली नहीं है। यह उस नए भारत का प्रतीक है जो तकनीक को शासन का उपकरण बना रहा है। इसी तरह सड़क, रेलवे, एयरपोर्ट और रक्षा ढांचे में जो निवेश हुआ, उसने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति दी। चीन: दो युग, दो प्रतिक्रियाएं यदि किसी एक मुद्दे पर नेहरू और मोदी की तुलना सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, तो वह चीन है। 1962 में भारत तैयार नहीं था। राजनीतिक आदर्शवाद राष्ट्रीय सुरक्षा पर भारी पड़ गया। 2020 में गलवान घाटी में फिर चीन सामने था। यह कहना सही नहीं होगा कि भारत ने चीन को पराजित कर दिया। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि इस बार भारत ने 1962 जैसी असहाय स्थिति नहीं दिखाई। सीमा पर सड़कें बनीं, सैन्य तैनाती बढ़ी और चीन को लेकर नीति अधिक यथार्थवादी दिखाई दी। यहीं दोनों नेताओं के दृष्टिकोण का मूल अंतर दिखता है। असली बहस मोदी बनाम नेहरू नहीं, दो मॉडलों की है नेहरू का भारत राज्य-नियंत्रित अर्थव्यवस्था, समाजवादी सोच और गुटनिरपेक्ष विदेश नीति पर आधारित था। मोदी का भारत बाज़ार आधारित विकास, डिजिटल शासन, राष्ट्रीय पहचान और बहु-संरेखीय (Multi-alignment) कूटनीति पर आधारित दिखाई देता है। नेहरू संस्थानों के जरिए भारत को मजबूत करना चाहते थे। मोदी नेतृत्व और क्रियान्वयन की गति के जरिए भारत को बदलना चाहते हैं। एक ने भारत का ढांचा बनाया। दूसरा उस ढांचे को नए सिरे से आकार देने की कोशिश कर रहा है। क्या मोदी नेहरू से बेहतर प्रधानमंत्री साबित हुए हैं? इस प्रश्न का उत्तर राजनीति नहीं, इतिहास देगा। लेकिन 2026 में खड़े होकर यदि केवल प्रभाव, निर्णायकता, वैश्विक उपस्थिति, डिजिटल परिवर्तन, इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण और शासन की गति को मापदंड बनाया जाए, तो नरेंद्र मोदी का कार्यकाल स्वतंत्र भारत के सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में निश्चित रूप से गिना जाएगा। इतना ही नहीं, वे संभवतः नेहरू के बाद पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने भारत के विकास मॉडल की दिशा बदलने का प्रयास किया है। नरेंद्र मोदी द्वारा नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ना केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है। यह उस राजनीतिक यात्रा का प्रतीक है जिसमें भारत ने समाजवादी दौर से डिजिटल दौर तक, गुटनिरपेक्षता से बहु-संरेखीय कूटनीति तक और धीमी प्रशासनिक प्रक्रियाओं से तकनीक-आधारित शासन तक का सफर तय किया है। नेहरू ने आधुनिक भारत की नींव रखी थी। मोदी उस भारत को...
AIADMK के दोनों गुटों में पैचअप! फ्लोर टेस्ट में विजय का सपोर्ट करने वाले 21 विधायकों को नहीं मिलेगी सजा

AIADMK के दोनों गुटों में पैचअप! फ्लोर टेस्ट में विजय का सपोर्ट करने वाले 21 विधायकों को नहीं मिलेगी सजा

तमिलनाडु की राजनीति में AIADMK को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। पार्टी के भीतर चल रहे विवाद के बीच अब सुलह की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। सूत्रों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्लोर टेस्ट के दौरान सरकार के पक्ष में समर्थन देने वाले 21 AIADMK विधायकों के खिलाफ अब किसी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। ये विधायक पहले पार्टी लाइन से अलग जाकर दूसरी तरफ मतदान करने के कारण चर्चा में आ गए थे। लेकिन अब पार्टी नेतृत्व ने मामले को और आगे न बढ़ाते हुए अंदरूनी एकता बनाए रखने का फैसला किया है। हालांकि इस घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि AIADMK के भीतर मतभेद अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, लेकिन फिलहाल पार्टी नेतृत्व स्थिति को संभालने और संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला पार्टी में टूट को रोकने और आने वाले समय में स्थिरता बनाए रखने की कोशिश का हिस्सा है।
Badshah Mystery Girl Photos: खेतों में मिस्ट्री गर्ल के साथ दिखे रैपर बादशाह, रोमांटिक तस्वीरों ने बढ़ाई हलचल

Badshah Mystery Girl Photos: खेतों में मिस्ट्री गर्ल के साथ दिखे रैपर बादशाह, रोमांटिक तस्वीरों ने बढ़ाई हलचल

मशहूर रैपर और सिंगर Badshah एक बार फिर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर उनकी कुछ तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिनमें वह एक मिस्ट्री गर्ल के साथ खेतों में नजर आ रहे हैं। इन तस्वीरों में बादशाह काफी रिलैक्स और रोमांटिक अंदाज में दिखाई दे रहे हैं। खास बात यह है कि उन्होंने एक क्रिप्टिक कैप्शन भी लिखा है, जिसके बाद फैंस के बीच तरह-तरह की अटकलें शुरू हो गई हैं। सोशल मीडिया पर लोग इस मिस्ट्री गर्ल की पहचान को लेकर अनुमान लगा रहे हैं। कुछ यूजर्स इसे उनकी निजी जिंदगी से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे सिर्फ एक शूट या प्रमोशनल तस्वीर मान रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन तस्वीरों के सामने आने के बाद बादशाह की रिलेशनशिप और शादी को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, अभी तक उनकी तरफ से इस बारे में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। फिलहाल, यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और फैंस लगातार इन तस्वीरों पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
LPG महंगाई पर राजनीति तेज: Pradhan Mantri Ujjwala Yojana बदलाव को लेकर सरकार घिरी

LPG महंगाई पर राजनीति तेज: Pradhan Mantri Ujjwala Yojana बदलाव को लेकर सरकार घिरी

केंद्र सरकार ने Pradhan Mantri Ujjwala Yojana के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की सालाना सीमा 9 से घटाकर 4 कर दी है। इस फैसले के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने इस कदम को लेकर मोदी सरकार पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों और विदेश नीति पर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने कहा कि पिछले 12 सालों की आर्थिक नीतियों के कारण गरीब परिवारों पर दबाव बढ़ा है और अब सब्सिडी घटने से स्थिति और मुश्किल हो गई है। उनका कहना है कि लाखों गरीब परिवारों और महिलाओं को खाना पकाने के लिए फिर से लकड़ी के जहरीले धुएं का सहारा लेने की मजबूरी हो सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले तीन महीनों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम करीब ₹89 बढ़े हैं। साथ ही 5 किलो के छोटे सिलेंडर की कीमत में भी लगभग ₹323 की बढ़ोतरी का उल्लेख किया गया है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब पहले ही महंगाई बढ़ रही है, तो सब्सिडी कम करने का फैसला आम लोगों पर और बोझ डालता है। उन्होंने कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर गरीब, मजदूर, किसान, महिलाएं और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा। सरकार की तरफ से इस फैसले को लेकर अभी तक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

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