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Social Media Controversy: Biryani वाले बयान पर बड़ा एक्शन, नौकरी खत्म

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Social Media पर दिया गया एक हल्का-फुल्का बयान एक शख्स के लिए भारी पड़ गया। “बिरयानी के 370 वसूलूंगा” कहने के बाद शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि उसकी नौकरी चली गई और मामला पूरी तरह सुर्खियों में आ गया।

वायरल पोस्ट से बढ़ा मामला

जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद एक वायरल पोस्ट या वीडियो से जुड़ा है, जिसमें व्यक्ति ने मजाकिया अंदाज में यह टिप्पणी की थी। लेकिन कुछ ही समय में यह बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फैल गया और लोगों ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। कुछ यूजर्स ने इसे मजाक माना, तो कई लोगों ने इसे गैर-जिम्मेदाराना और गलत बताया।

कंपनी ने लिया सख्त एक्शन

मामला बढ़ता देख संबंधित कंपनी ने भी सख्त रुख अपनाया। आंतरिक जांच के बाद कंपनी ने फैसला लेते हुए उस व्यक्ति को नौकरी से हटा दिया। कंपनी का मानना है कि कर्मचारियों का सोशल मीडिया व्यवहार भी संस्थान की छवि को प्रभावित करता है, इसलिए इस तरह के मामलों में कार्रवाई जरूरी हो जाती है।

इंस्टाग्राम अकाउंट भी डिलीट

विवाद और बढ़ते ऑनलाइन ट्रोलिंग के बीच उस शख्स ने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट भी डिलीट कर दिया, जिससे यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है।

सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी जरूरी

यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया पर कही गई छोटी-सी बात भी तेजी से वायरल होकर बड़ा विवाद बन सकती है। एक मजाकिया कमेंट भी कभी-कभी करियर और निजी जिंदगी पर गहरा असर डाल सकता है।

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धर्मेंद्र प्रधान

Parliament Session धर्मेंद्र प्रधान का सम्मान, विपक्ष के हंगामे से Lok Sabha और Rajya Sabha की कार्यवाही प्रभावित

पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोमवार का दिन संसद में कई अहम घटनाओं का गवाह बना। एक तरफ धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे, जहां एनडीए (NDA) के सांसदों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत करते हुए शॉल ओढ़ाई और मिथिला पाग पहनाकर सम्मानित किया। वहीं दूसरी ओर लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और दोनों सदनों को दोपहर 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा। यह पूरा घटनाक्रम संसद के मौजूदा सत्र का सबसे चर्चित घटनाक्रम बन गया। संसद पहुंचते ही धर्मेंद्र प्रधान का हुआ भव्य स्वागत शिक्षा मंत्री पद छोड़ने के बाद धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे। संसद परिसर में एनडीए के कई सांसद पहले से उनका इंतजार कर रहे थे। जैसे ही वह पहुंचे, सांसदों ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर और पारंपरिक मिथिला पाग पहनाकर सम्मानित किया। इस दौरान सांसदों ने उनके शिक्षा मंत्री के रूप में किए गए कार्यों की सराहना की। कई नेताओं ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने और शिक्षा क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाने में धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। सम्मान के पीछे क्या है राजनीतिक संदेश? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सम्मान केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं था। इसे भाजपा और एनडीए की ओर से धर्मेंद्र प्रधान के प्रति भरोसे और सम्मान का सार्वजनिक संदेश भी माना जा रहा है। इस्तीफे के बाद भी पार्टी नेतृत्व और सहयोगी दलों का उनके साथ खड़ा दिखना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। इधर संसद में विपक्ष का जोरदार हंगामा जहां संसद परिसर में सम्मान का माहौल था, वहीं सदन के भीतर तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आई। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष लगातार अपनी मांगों पर चर्चा कराने की मांग करता रहा, जबकि सरकार अपने तय एजेंडे के अनुसार कार्यवाही आगे बढ़ाना चाहती थी। दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण सदन में शोर-शराबा बढ़ता गया। 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी कार्यवाही लगातार हंगामे के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही सामान्य रूप से नहीं चल सकी। पीठासीन अधिकारियों ने व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष का विरोध जारी रहने पर दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। इस वजह से कई महत्वपूर्ण विधायी और सरकारी कार्य भी तय समय पर नहीं हो सके। शिक्षा मंत्रालय की कमान अब नए मंत्री के हाथों में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने प्रह्लाद जोशी को देश का नया शिक्षा मंत्री बनाया है। अब नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, उच्च शिक्षा सुधार और छात्रों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी। शिक्षा जगत की नजर अब नए नेतृत्व के अगले कदमों पर टिकी है। संसद का दिन क्यों रहा खास? सोमवार का दिन संसद में दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आया। एक तरफ धर्मेंद्र प्रधान का सम्मान चर्चा का विषय बना, तो दूसरी तरफ विपक्ष के हंगामे ने संसदीय कार्यवाही को प्रभावित किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में संसद का सत्र और अधिक गर्म रहने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

भारत ने जिम्बाब्वे को तीसरे टी-20 में हराकर 3-0 से जीती सीरीज, वैभव सूर्यवंशी बने जीत के हीरो

भारतीय क्रिकेट टीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ तीसरे टी-20 मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए 35 रन से जीत दर्ज की और तीन मैचों की सीरीज पर 3-0 से कब्जा कर लिया। हरारे में खेले गए मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 5 विकेट खोकर 192 रन बनाए। जवाब में जिम्बाब्वे की टीम 7 विकेट पर 157 रन ही बना सकी। भारत की जीत के सबसे बड़े नायक युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी रहे। उन्होंने 49 गेंदों पर 81 रन की शानदार पारी खेली और टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। वहीं गेंदबाजी में मयंक यादव ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 विकेट झटके, जबकि यश ठाकुर ने 2 विकेट लेकर मेजबान टीम की कमर तोड़ दी। भारत की शुरुआत अच्छी नहीं रही और अभिषेक शर्मा सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद वैभव सूर्यवंशी और ईशान किशन ने पारी को संभाला। दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 75 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की। ईशान किशन ने 29 रन बनाए। ईशान के आउट होने के बाद वैभव ने कप्तान श्रेयस अय्यर के साथ मिलकर 50 रन की साझेदारी की। वैभव ने 31 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और अंत तक आक्रामक बल्लेबाजी जारी रखी। तिलक वर्मा 11 रन बनाकर नाबाद रहे। जिम्बाब्वे की ओर से ब्रैड इवांस ने 2 विकेट लिए, जबकि ब्लेसिंग मुजरबानी, सिकंदर रजा और वेस्ली मधेवेरे को एक-एक सफलता मिली। 193 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की शुरुआत बेहद खराब रही। पहली ही गेंद पर मयंक यादव ने ब्रायन बेनेट को आउट कर दिया। इसके बाद यश ठाकुर ने डिओन मायर्स और सिकंदर रजा को लगातार पवेलियन भेजकर भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। बाद में रवि बिश्नोई और अशोक शर्मा ने भी एक-एक विकेट लेकर जिम्बाब्वे की उम्मीदों को खत्म कर दिया। भारतीय गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के दम पर टीम इंडिया ने मुकाबला अपने नाम किया और सीरीज में क्लीन स्वीप कर लिया।

पीएम मोदी ने परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में टास्क फोर्स बनाने का ऐलान किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार शाम परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए बड़े कदम उठाने की बात कही। पीएम मोदी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लगातार काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए हैं और संसद में कठोर सजा के प्रावधान से जुड़ा विधेयक लाने की तैयारी है। पीएम मोदी ने कहा कि केवल कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि भविष्य की परीक्षा व्यवस्था को भी मजबूत बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश की परीक्षा प्रणाली को भरोसेमंद बनाने के लिए इसमें आधुनिक तकनीक का अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने बताया कि परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में एक हाई पावर टास्क फोर्स गठित करने का निर्णय लिया गया है। यह टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली में सुधार, पारदर्शिता बढ़ाने और तकनीक के बेहतर उपयोग पर काम करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें छात्रों को निष्पक्ष अवसर मिले और किसी भी तरह की अनियमितता की गुंजाइश कम हो। पीएम मोदी का यह बयान देश में हाल के दिनों में सामने आए परीक्षा संबंधी विवादों के बीच आया है। सरकार अब परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में कदम उठा रही है।

इंडियनऑयल ने शुरू की 10 और 5 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर की एक्सप्रेस डिलीवरी सेवा

नई दिल्ली। इंडियनऑयल ने ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 10 किलोग्राम और 5 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर के लिए एक्सप्रेस डिलीवरी सेवा शुरू की है। कंपनी के चेयरमैन श्री ए. एस. साहनी ने बुधवार को इंडेन एक्स्ट्रालाइट नाउ (Indane XTRALITE NOW) का शुभारंभ किया। यह 10 किलोग्राम क्षमता वाला आधुनिक कम्पोजिट एलपीजी सिलेंडर है, जिसे तेज डिलीवरी सुविधा के साथ बाजार में उतारा गया है। इस अवसर पर इंडियनऑयल के निदेशक (विपणन) श्री सौमित्र पी. श्रीवास्तव सहित कंपनी के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इंडेन एक्स्ट्रालाइट नाउ को बदलती जीवनशैली और आधुनिक परिवारों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह हल्के वजन, जंग-रोधी कम्पोजिट तकनीक और डिजिटल सेवाओं का संयोजन है, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक सुरक्षा, सुविधा और पारदर्शिता मिलेगी। इस सिलेंडर की खासियत इसकी पारदर्शी बॉडी है, जिसके माध्यम से ग्राहक आसानी से गैस का शेष स्तर देख सकेंगे। इसके अलावा बुकिंग के चार घंटे के भीतर एक्सप्रेस डिलीवरी, अपनी सुविधा के अनुसार डिलीवरी समय चुनने और न्यूनतम दस्तावेजी प्रक्रिया जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। इंडियनऑयल ने इस दौरान लोकप्रिय 5 किलोग्राम ‘छोटू’ एलपीजी सिलेंडर के लिए भी एक्सप्रेस होम डिलीवरी सेवा शुरू की है। अब ग्राहक इसकी बुकिंग के चार घंटे के भीतर घर पर डिलीवरी प्राप्त कर सकेंगे। यह सुविधा खासतौर पर शहरी परिवारों, कामकाजी लोगों और छोटे परिवारों के लिए उपयोगी साबित होगी। इंडियनऑयल के चेयरमैन श्री ए. एस. साहनी ने कहा कि ग्राहकों के जीवन को आसान बनाने वाले नवाचार ही वास्तविक रूप से उपयोगी होते हैं। उन्होंने बताया कि इंडेन एक्स्ट्रालाइट नाउ अत्याधुनिक तकनीक और बेहतर सेवा मॉडल का मेल है, जो ग्राहकों को सुरक्षित और सुविधाजनक एलपीजी अनुभव प्रदान करेगा। वहीं, निदेशक (विपणन) श्री सौमित्र पी. श्रीवास्तव ने कहा कि आज के उपभोक्ता तेज और भरोसेमंद सेवाओं की उम्मीद रखते हैं। इंडेन एक्स्ट्रालाइट नाउ इसी ग्राहक-केंद्रित सोच को आगे बढ़ाने वाली पहल है, जो घरेलू एलपीजी सेवाओं को नई दिशा देगी। फिलहाल यह सुविधा शुरुआती चरण में पुणे, गुरुग्राम, इंदौर और कोयंबटूर में उपलब्ध होगी। इसके बाद अगस्त 2026 के मध्य तक इसे 25 अन्य शहरों में और अक्टूबर 2026 के अंत तक देश के प्रमुख शहरों तक विस्तार देने की योजना है। ग्राहक इंडियनऑयल वन (IndianOil ONE) ऐप और कंपनी की ग्राहक वेबसाइट के माध्यम से नए कनेक्शन के लिए पंजीकरण और रिफिल बुकिंग कर सकेंगे। जल्द ही व्हाट्सएप नंबर 7588888824 के माध्यम से भी बुकिंग की सुविधा शुरू की जाएगी। इंडियनऑयल के इंडेन वितरक नेटवर्क और चुनिंदा रिटेल आउटलेट्स के माध्यम से यह सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। कंपनी का लक्ष्य शहरी परिवारों, आवासीय परिसरों और सुविधा पसंद करने वाले ग्राहकों को बेहतर एलपीजी समाधान उपलब्ध कराना है। इंडियनऑयल ने कहा कि डिजिटल तकनीक, नवाचार और ग्राहक-केंद्रित सेवाओं के माध्यम से कंपनी लगातार ऊर्जा क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। इंडेन एक्स्ट्रालाइट नाउ इसी प्रयास की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

निर्मला सीतारमण ने आयकर अधिकारियों को दी सख्त नसीहत, कहा- आम जनता को दफ्तरों के चक्कर न लगवाएं

मुंबई: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर विभाग के अधिकारियों को आम नागरिकों के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह बनने की नसीहत दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि लोगों को अपने वैध कार्यों के लिए एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर के चक्कर नहीं कटवाए जाने चाहिए। अधिकारियों का दायित्व है कि वे नियमों के तहत नागरिकों की समस्याओं का समय पर समाधान करें। रविवार को मुंबई के नरीमन पॉइंट बिजनेस डिस्ट्रिक्ट में नव-निर्मित 13 मंजिला ‘आयकर सिंधु’ भवन के उद्घाटन के अवसर पर वित्त मंत्री ने यह बात कही। 13 मंजिला भवन के निर्माण का अनुभव किया साझा सीतारमण ने बताया कि करीब 1.13 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में बने इस भवन के निर्माण और विभिन्न अनुमतियों (क्लीयरेंस) के लिए स्वयं आयकर विभाग के अधिकारियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि जब इतनी शक्तिशाली संस्था के अधिकारियों को ही मंजूरियां लेने में परेशानी होती है, तो आम नागरिक किन चुनौतियों से गुजरते होंगे, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे जनता को अनावश्यक रूप से भटकाने के बजाय उनके कार्यों को समय पर पूरा करें। सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण पर जताई नाराजगी वित्त मंत्री ने सरकारी विभागों की लापरवाही पर भी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने बताया कि जिस भूमि पर ‘आयकर सिंधु’ भवन बनाया गया है, वह वर्ष 1973 से आयकर विभाग के पास थी, लेकिन वर्षों तक उस पर अतिक्रमण होता रहा। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और समय पर उपयोग सुनिश्चित करना विभागों की जिम्मेदारी है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो सरकारी संसाधनों का नुकसान होता है और विकास कार्य प्रभावित होते हैं। अधिकारियों के आवास की समस्या का समाधान करने का आश्वासन सीतारमण ने मुंबई और नवी मुंबई में कार्यरत आयकर अधिकारियों के सरकारी आवास की कमी पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में अधिकारियों को सरकारी आवास उपलब्ध नहीं हो पाता, जिसके कारण उन्हें लंबी दूरी तय कर कार्यालय आना पड़ता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार-से-सरकार जमीन हस्तांतरण (Government-to-Government Land Transfer) की प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा, ताकि नए आवास और कार्यालयों का निर्माण तेजी से हो सके। BSNL और CPWD की जमीन के उपयोग पर दिया जोर वित्त मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे CPWD के साथ समन्वय बनाकर निर्माण कार्य समय पर पूरा करें। साथ ही उन्होंने BSNL की उपलब्ध जमीनों का उपयोग करने की संभावनाएं तलाशने को कहा। उन्होंने आश्वासन दिया कि आवश्यकता पड़ने पर वे स्वयं संबंधित मंत्रालयों से बातचीत करेंगी। ईमानदारी और निष्ठा को बताया सबसे बड़ा सिद्धांत अपने संबोधन के अंत में निर्मला सीतारमण ने अधिकारियों को ईमानदारी और निष्ठा बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वे किसी से नियम तोड़ने की अपेक्षा नहीं कर रही हैं, बल्कि चाहती हैं कि नागरिकों को उनके वैध अधिकार समय पर मिलें।

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