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Bangladesh Politics Update: Sheikh Hasina की वापसी पर बड़ा बयान, बोलीं- खतरे के बावजूद लौटूंगी

Bangladesh की पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina ने अपने देश लौटने को लेकर बड़ा बयान देकर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर खतरा हो सकता है, लेकिन डर की वजह से वह बांग्लादेश से दूर नहीं रहेंगी। हसीना ने साफ संकेत दिया कि वह हालात सामान्य होने पर अपने वतन जरूर वापस लौटेंगी। उनके इस बयान के बाद बांग्लादेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। समर्थक इसे उनकी राजनीतिक वापसी की तैयारी के तौर पर देख रहे हैं, जबकि विरोधी दलों की नजर भी उनके अगले कदम पर बनी हुई है। “जान का खतरा है, लेकिन फैसला नहीं बदलूंगी” Sheikh Hasina ने कहा कि उन्हें आशंका है कि उनकी जान को खतरा हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद वह अपने देश लौटने के फैसले पर कायम हैं। उन्होंने अपने बयान से यह संदेश देने की कोशिश की कि बांग्लादेश उनकी राजनीतिक और व्यक्तिगत पहचान का अहम हिस्सा है। हसीना के इस रुख से साफ है कि वह अभी भी बांग्लादेश की राजनीति से खुद को अलग नहीं मानतीं। उन्होंने वापसी के लिए सही समय और परिस्थितियों का इंतजार करने की बात कही है। कब Bangladesh वापस जाएंगी Sheikh Hasina? पूर्व प्रधानमंत्री ने अपनी वापसी को लेकर कोई तय तारीख नहीं बताई है। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि वह उचित समय आने पर स्वदेश लौटेंगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनकी वापसी कब होगी और उस समय बांग्लादेश का राजनीतिक माहौल कैसा होगा। क्योंकि उनकी वापसी सिर्फ एक व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि देश की राजनीति पर भी असर डाल सकती है। Sheikh Hasina के बयान से क्यों बढ़ी सियासी हलचल? Sheikh Hasina बांग्लादेश की राजनीति का एक बड़ा चेहरा रही हैं। लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने के बाद उनकी भूमिका हमेशा चर्चा में रही है। ऐसे में उनका वापसी को लेकर बयान देना राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके समर्थकों का मानना है कि हसीना की वापसी से उनकी पार्टी को नई ऊर्जा मिल सकती है। वहीं विपक्षी दल इस मुद्दे को अलग नजरिए से देख रहे हैं। Security और Politics दोनों पर नजर Sheikh Hasina के बयान में सबसे ज्यादा चर्चा उनकी सुरक्षा को लेकर रही। उन्होंने खतरे का जिक्र करते हुए भी वापसी का इरादा जाहिर किया है। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय और बांग्लादेश की जनता की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में वहां की राजनीतिक स्थिति किस दिशा में जाती है और Sheikh Hasina की वापसी को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Khamenei

Ali Khamenei Funeral: बेटे मुजतबा की पहली मौजूदगी पर नजर, Iran के नए Supreme Leader को लेकर चर्चा तेज

ईरान की राजनीति में इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा नए Supreme Leader मुजतबा खामेनेई को लेकर हो रही है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुजतबा खामेनेई (Khamenei) अपने पिता और ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की शोकसभा में पहली बार सार्वजनिक रूप से नजर आ सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो यह उनके नेतृत्व संभालने के बाद पहली बड़ी सार्वजनिक मौजूदगी होगी। मुजतबा खामेनेई के सार्वजनिक मंच से दूर रहने के कारण पिछले कुछ समय से कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। अब उनकी संभावित उपस्थिति को ईरान की नई सत्ता व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। Mojtaba Khamenei की पहली मौजूदगी पर दुनिया की नजर रिपोर्ट्स के अनुसार, अली खामेनेई के निधन के बाद उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को ईरान का नया Supreme Leader बनाया गया। हालांकि, पद संभालने के बाद से वह बहुत कम सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए हैं। ईरानी राजनीति को करीब से देखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि शोकसभा में उनकी मौजूदगी सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं होगी, बल्कि यह देश और दुनिया के लिए एक राजनीतिक संदेश भी हो सकता है। पिता की विरासत संभालने की चुनौती अली खामेनेई ने लंबे समय तक ईरान की सर्वोच्च सत्ता संभाली। उनके बाद मुजतबा खामेनेई के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाना और जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता मजबूत करना होगी। Supreme Leader का पद ईरान की व्यवस्था में बेहद ताकतवर माना जाता है। देश की सुरक्षा नीति, विदेश नीति और बड़े रणनीतिक फैसलों में इस पद की अहम भूमिका होती है। Security कारणों से बनाई दूरी? मुजतबा खामेनेई के सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहने को लेकर सुरक्षा कारणों का हवाला दिया जाता रहा है। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव को देखते हुए उनकी सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल उठते रहे हैं। अब उनकी संभावित सार्वजनिक मौजूदगी से यह साफ हो सकता है कि वह आने वाले समय में किस तरह अपनी नेतृत्व शैली दुनिया के सामने रखते हैं। Iran Politics में नए दौर की शुरुआत मुजतबा खामेनेई का सार्वजनिक रूप से सामने आना ईरान की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। पूरी दुनिया यह देख रही है कि नए Supreme Leader के नेतृत्व में ईरान की घरेलू राजनीति और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में क्या बदलाव आते हैं। फिलहाल, शोकसभा में उनकी मौजूदगी को लेकर चर्चाएं तेज हैं और यह कार्यक्रम ईरान की नई सत्ता के लिए एक बड़ा राजनीतिक क्षण बन सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump

Trump Security Threat: Iran की कथित हत्या की साजिश पर Israel Alert

Donald Trump, Iran और Israel से जुड़ी एक रिपोर्ट ने दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इजराइल ने अमेरिका को पहले ही आगाह कर दिया था कि ईरान, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को निशाना बनाने की साजिश रच सकता है। इसी बीच ट्रम्प का एक बयान भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि वह ईरान की “Hit List” में सबसे ऊपर हैं। हालांकि, इस पूरे मामले पर अब तक किसी भी देश की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। फिर भी रिपोर्ट्स ने मध्य-पूर्व की सुरक्षा और अमेरिका-ईरान संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। Israel की खुफिया जानकारी से बढ़ी हलचल रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल की खुफिया एजेंसियों को ऐसे इनपुट मिले थे कि ईरान से जुड़े कुछ तत्व डोनाल्ड ट्रम्प को निशाना बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं। यह जानकारी बाद में अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा की गई। बताया जा रहा है कि अलर्ट मिलने के बाद ट्रम्प की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई और संभावित खतरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने अतिरिक्त सतर्कता बरतनी शुरू कर दी। हालांकि, अमेरिका या इजराइल की ओर से इस कथित साजिश के बारे में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ट्रम्प का दावा- मैं Iran की Hit List में सबसे ऊपर हाल ही में दिए गए एक बयान में डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि ईरान उन्हें अपना सबसे बड़ा विरोधी मानता है। उन्होंने कहा कि अगर किसी अमेरिकी नेता को ईरान निशाना बनाना चाहे, तो उनकी सूची में सबसे ऊपर उनका ही नाम होगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान ईरान के खिलाफ अपनाई गई सख्त नीतियों की वजह से तेहरान उन्हें दुश्मन मानता है। 2020 के बाद से लगातार बढ़ा तनाव अमेरिका और ईरान के रिश्तों में सबसे बड़ा मोड़ वर्ष 2020 में आया था, जब अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत हो गई थी। उस सैन्य कार्रवाई का आदेश तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दिया था। इसके बाद ईरान के कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से बदला लेने की बात कही थी। तभी से अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां ट्रम्प से जुड़े संभावित खतरों को गंभीरता से लेती रही हैं। सुरक्षा एजेंसियां लगातार रख रही हैं नजर रिपोर्ट्स के अनुसार, डोनाल्ड ट्रम्प की सुरक्षा पहले से ही अमेरिकी Secret Service के जिम्मे है। हालिया रिपोर्टों के बाद उनकी सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा समीक्षा की गई है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि कथित साजिश कितनी आगे बढ़ी थी या उसमें कौन-कौन शामिल था। फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया है। Iran की ओर से नहीं आया आधिकारिक जवाब ईरान ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इससे पहले भी तेहरान कई बार अमेरिका और इजराइल से जुड़े सुरक्षा दावों को खारिज करता रहा है। ऐसे में मौजूदा रिपोर्टों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। दुनिया की नजर अगले कदम पर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच पहले से जारी तनाव और बढ़ सकता है। इसका असर मध्य-पूर्व की सुरक्षा, कूटनीतिक संबंधों और वैश्विक राजनीति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल यह मामला मीडिया रिपोर्टों और सुरक्षा सूत्रों के दावों तक सीमित है। आधिकारिक पुष्टि सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। इसलिए इस खबर को तथ्यों और आधिकारिक बयानों के साथ ही देखा जाना चाहिए।
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China

China GDP Data Controversy: आर्थिक आंकड़ों को लेकर आवाज उठाने वाले Economist की मौत ने बढ़ाई चिंता

China की अर्थव्यवस्था और सरकारी आंकड़ों को लेकर आवाज उठाने वाले एक जाने-माने अर्थशास्त्री की मौत ने नई चर्चा शुरू कर दी है। अर्थशास्त्री ने पहले चीन के GDP Data की पारदर्शिता और आधिकारिक आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए थे। अब उनकी संदिग्ध मौत के बाद कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, China सरकार ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा है कि अर्थशास्त्री की मौत बीमारी के कारण हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, वह लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान थे और उनकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई। लेकिन दूसरी तरफ, सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के बीच इस मामले को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। GDP Data को लेकर पहले भी उठ चुकी है बहस चीन लंबे समय से अपनी तेज आर्थिक ग्रोथ के लिए जाना जाता है, लेकिन वहां के आर्थिक आंकड़ों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। कई अर्थशास्त्रियों और वैश्विक संस्थानों ने चीन के GDP Growth, बेरोजगारी दर और आर्थिक प्रदर्शन से जुड़े आंकड़ों की पारदर्शिता पर चर्चा की है। मृतक अर्थशास्त्री भी चीन की आर्थिक नीतियों और सरकारी डेटा सिस्टम के आलोचक माने जाते थे। उन्होंने कहा था कि किसी भी देश की मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए सही और भरोसेमंद आंकड़े बेहद जरूरी होते हैं। अर्थशास्त्री की बेबाक राय बनी चर्चा का विषय अर्थशास्त्री अपनी स्वतंत्र सोच और आर्थिक विश्लेषण के लिए जाने जाते थे। उन्होंने चीन की आर्थिक व्यवस्था में मौजूद चुनौतियों पर खुलकर अपनी राय रखी थी। खासतौर पर GDP Data की वास्तविक स्थिति और आर्थिक विकास के दावों को लेकर उनके विचारों ने काफी ध्यान खींचा था। उनकी मौत के बाद चीन में आर्थिक मामलों पर खुलकर बोलने और डेटा पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। China Economy के सामने पहले से हैं कई चुनौतियां यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब चीन की अर्थव्यवस्था कई मुश्किलों से गुजर रही है। रियल एस्टेट सेक्टर की कमजोरी, धीमी आर्थिक रफ्तार, युवाओं में रोजगार की चिंता और विदेशी निवेश में बदलाव जैसी चुनौतियां चीन के सामने बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए निवेशकों का भरोसा बनाए रखने में पारदर्शी आर्थिक आंकड़ों की अहम भूमिका होती है। सरकार के दावे और उठते सवाल फिलहाल चीनी सरकार का कहना है कि अर्थशास्त्री की मौत बीमारी की वजह से हुई है। वहीं, उनके पुराने बयानों और GDP Data को लेकर उनकी टिप्पणियों के कारण यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और तथ्य सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल चीन के आर्थिक आंकड़ों और पारदर्शिता को लेकर बहस जारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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America

America Crime: Wife Murder Case में फंसा Indian Engineer, Girlfriend को भेजी Dead Body की Photo, Bail ₹47 करोड़

America से सामने आए एक सनसनीखेज मामले ने हर किसी को हैरान कर दिया है। भारतीय मूल के एक इंजीनियर पर अपनी पत्नी की हत्या करने का आरोप लगा है। जांच एजेंसियों का दावा है कि वारदात के बाद आरोपी ने भारत में रह रही अपनी कथित गर्लफ्रेंड को पत्नी के शव की तस्वीर भेजी। इस खुलासे के बाद मामला और भी गंभीर हो गया है। क्या है पूरा मामला? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय मूल का इंजीनियर America में अपनी पत्नी के साथ रह रहा था। शुरुआती जांच में पता चला है कि दोनों के वैवाहिक रिश्तों में पिछले कुछ समय से तनाव चल रहा था। इसी दौरान आरोपी का भारत में रहने वाली एक महिला से भी संपर्क था, जिसकी जांच अब पुलिस कर रही है। जांच अधिकारियों का कहना है कि घरेलू विवाद के बाद महिला की मौत हुई। पुलिस का आरोप है कि घटना के बाद आरोपी ने अपनी कथित गर्लफ्रेंड को मैसेज के जरिए शव की तस्वीर भेजी। यह डिजिटल सबूत अब जांच का अहम हिस्सा बन चुका है। डिजिटल सबूतों की हो रही जांच पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड, कॉल हिस्ट्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। फॉरेंसिक टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वारदात से पहले और बाद में आरोपी ने किन लोगों से बातचीत की थी। अधिकारियों का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य अदालत में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अदालत ने तय की 47 करोड़ रुपये की जमानत मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने आरोपी की जमानत राशि करीब 47 करोड़ रुपये (लगभग 5.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर) तय की है। अभियोजन पक्ष का तर्क है कि आरोपी के देश छोड़कर भागने की आशंका और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए इतनी बड़ी जमानत उचित है। फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में है और मामले की सुनवाई जारी है। परिवार और भारतीय समुदाय में चिंता घटना के बाद मृतका के परिवार में शोक का माहौल है। वहीं अमेरिका में रहने वाले भारतीय समुदाय के बीच भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि जांच पूरी होने तक किसी भी तरह की अपुष्ट जानकारी या अफवाहों पर भरोसा न करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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H-1B Visa

US H-1B Visa Investigation: Cognizant पर US की जांच, क्या Indian IT Professionals की बढ़ेगी चिंता?

अमेरिका में H-1B Visa को लेकर एक बड़ी जांच शुरू होने के बाद भारतीय आईटी सेक्टर में हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी श्रम विभाग (US Department of Labor) ने H-1B और PERM Visa से जुड़े संभावित फ्रॉड और श्रम कानूनों के उल्लंघन की जांच शुरू की है। इस जांच के दायरे में आईटी दिग्गज Cognizant समेत कई कंपनियां आई हैं। हालांकि, फिलहाल किसी भी कंपनी को दोषी नहीं ठहराया गया है। जांच अभी शुरुआती चरण में है और अधिकारी सभी जरूरी दस्तावेजों व भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा कर रहे हैं। इसके बावजूद अमेरिका में नौकरी कर रहे भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और H-1B वीजा के लिए आवेदन करने वाले युवाओं के मन में कई सवाल उठने लगे हैं। क्या है पूरा मामला? अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं कुछ कंपनियां H-1B और PERM Visa Program का गलत इस्तेमाल तो नहीं कर रहीं। जांच में यह देखा जा रहा है कि विदेशी कर्मचारियों की भर्ती के दौरान अमेरिकी श्रम कानूनों का पालन किया गया या नहीं, कर्मचारियों को तय वेतन मिला या नहीं और कहीं अमेरिकी नागरिकों की जगह कम लागत पर विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता तो नहीं दी गई। बताया जा रहा है कि इस मामले में कई कंपनियों को समन (Subpoena) भेजे गए हैं और भर्ती से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। Cognizant का नाम क्यों आया सामने? भारतीय मूल की वैश्विक आईटी कंपनी Cognizant का नाम भी जांच में शामिल कंपनियों की सूची में है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अभी तक कंपनी के खिलाफ किसी तरह की अनियमितता साबित नहीं हुई है। जांच का उद्देश्य केवल तथ्यों की पुष्टि करना और यह सुनिश्चित करना है कि सभी कंपनियों ने अमेरिकी नियमों का पालन किया है। Indian IT Professionals पर क्या पड़ सकता है असर? H-1B Visa Approval में हो सकती है देरी यदि अमेरिकी एजेंसियां जांच के दौरान वीजा प्रक्रिया को और सख्त करती हैं, तो नए H-1B आवेदनों की जांच पहले से अधिक विस्तार से हो सकती है। इससे वीजा मंजूरी में अतिरिक्त समय लग सकता है। कंपनियों की Hiring Policy बदल सकती है भविष्य में आईटी कंपनियां वीजा नियमों को देखते हुए अमेरिका में स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती बढ़ा सकती हैं। इससे विदेशी कर्मचारियों के लिए अवसरों की रणनीति बदल सकती है। वैध H-1B Holders को फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं जो भारतीय प्रोफेशनल्स पहले से वैध H-1B Visa पर अमेरिका में काम कर रहे हैं और जिनके सभी दस्तावेज नियमों के अनुरूप हैं, उन्हें फिलहाल चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। केवल जांच शुरू होने से किसी कर्मचारी का वीजा प्रभावित नहीं होता। Compliance पर रहेगा ज्यादा फोकस अब कंपनियों को भर्ती प्रक्रिया, वेतन भुगतान और इमिग्रेशन नियमों का पालन पहले से अधिक सख्ती से करना पड़ सकता है। इससे पूरी H-1B प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनने की संभावना है। क्या H-1B Visa पर पड़ेगा बड़ा असर? फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है कि अमेरिका H-1B Visa Program को बंद करने जा रहा है। यह कार्रवाई केवल कथित धोखाधड़ी और नियमों के उल्लंघन की जांच के लिए की जा रही है। हालांकि, यदि जांच में बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आती हैं, तो भविष्य में H-1B और PERM Visa से जुड़े नियम और सख्त किए जा सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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America

US-Iran Conflict: America के ताबड़तोड़ Air Strike से दहला Iran, 90 ठिकाने बने निशाना

मध्य पूर्व में एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका (America) ने ईरान के खिलाफ लगातार दूसरे दिन बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करते हुए करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, इस कार्रवाई में तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि कई सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक बयान ने इस टकराव को और सुर्खियों में ला दिया है। उन्होंने कहा कि वह ईरान की “हिटलिस्ट” में सबसे ऊपर हैं और अमेरिका किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। 90 सैन्य ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई अमेरिकी सेना ने बताया कि इस अभियान के दौरान ईरान के मिसाइल लॉन्च सेंटर, ड्रोन बेस, एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य गोदाम और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई क्षेत्र में अमेरिकी हितों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर एक साथ किए गए हमले यह संकेत देते हैं कि अमेरिका फिलहाल ईरान पर लगातार दबाव बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। हमलों के बाद तीन लोगों की मौत स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ताजा हवाई हमलों में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है। कई इलाकों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं और सैन्य परिसरों के आसपास भारी नुकसान की खबरें सामने आई हैं। हालांकि ईरान की सरकार ने अभी तक हताहतों का विस्तृत आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है। Trump का बड़ा दावा- “मैं Iran की Hit List में सबसे ऊपर” हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ईरान उन्हें अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता है और वह उसकी “Hit List” में सबसे ऊपर हैं। ट्रम्प ने साफ कहा कि यदि अमेरिकी हितों या सैनिकों पर हमला हुआ तो उसका जवाब पहले से भी ज्यादा सख्ती से दिया जाएगा। उनके इस बयान को दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव का संकेत माना जा रहा है। ईरान ने भी दिखाई जवाबी तैयारी अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है, जबकि खाड़ी क्षेत्र के कई देशों ने हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रहा है ताकि हालात पूर्ण युद्ध में न बदलें। दुनिया की चिंता बढ़ी, Oil Market पर भी असर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है क्योंकि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव और बढ़ता है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार भी प्रभावित हो सकते हैं।
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सीजफायर के बीच America का Iran पर बड़ा हमला, 80 से ज्यादा ठिकाने बने निशाना

सीजफायर के बीच America का Iran पर बड़ा हमला, 80 से ज्यादा ठिकाने बने निशाना

America और Iran के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। सीजफायर लागू होने के बावजूद अमेरिका ने ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। इस हमले के बाद पूरे पश्चिम एशिया में हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। बताया जा रहा है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के कई अहम सैन्य ठिकानों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों के बाद ईरान ने भी तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। हालांकि, दोनों देशों की ओर से अभी तक हमलों में हुए नुकसान और हताहतों के बारे में आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। लेकिन इन घटनाओं के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीजफायर के दौरान इस तरह की सैन्य कार्रवाई से हालात और बिगड़ सकते हैं। इससे न केवल मध्य पूर्व बल्कि दुनिया के कई देशों की सुरक्षा और तेल बाजार पर भी असर पड़ने की आशंका है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील कर रहा है। यदि यह तनाव आगे बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी देखने को मिल सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की प्रतिक्रिया तय करेगी कि यह तनाव शांत होगा या फिर क्षेत्र में बड़ा सैन्य संघर्ष देखने को मिलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Macron

Macron Syria Visit: सीरिया पहुंचते ही Security Alert, Damascus में Hotel के पास हुआ Blast

सीरिया की राजधानी दमिश्क (Damascus) में फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron के दौरे के बीच अचानक धमाकों की आवाज से हड़कंप मच गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस होटल में मैक्रों ठहरे हुए थे, उसके पास विस्फोट हुआ। घटना के तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं और पूरे इलाके में सुरक्षा घेरा और मजबूत कर दिया गया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron पूरी तरह सुरक्षित हैं। धमाके के बावजूद उनका आधिकारिक कार्यक्रम प्रभावित नहीं हुआ और वह तय कार्यक्रम के अनुसार बैठकों में शामिल हुए। Macron के Syria Visit के दौरान हुआ Blast मैक्रों अपने Syria Visit के दौरान सीरियाई नेतृत्व से मुलाकात करने पहुंचे थे। इसी बीच दमिश्क के एक संवेदनशील इलाके में धमाके की खबर सामने आई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विस्फोट के बाद इलाके में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया और सुरक्षा बलों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया। सुरक्षा अधिकारियों ने पूरे क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि धमाके के पीछे किसका हाथ है और इसका असली कारण क्या था। धमाके के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा घटना के बाद फ्रांसीसी राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां होटल और आसपास के इलाकों में लगातार निगरानी कर रही हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे को रोका जा सके। मैक्रों की यह यात्रा सीरिया के लिए कूटनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दौरान दोनों देशों के बीच सुरक्षा, राजनीतिक स्थिरता और भविष्य के सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी थी। Syria की Security Situation पर उठे सवाल दमिश्क में हुए इस धमाके ने एक बार फिर सीरिया की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। लंबे समय तक संघर्ष झेल चुके सीरिया में स्थिरता लाने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं सुरक्षा चुनौतियों को उजागर करती हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां मामले की पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों की कोशिश है कि धमाके की वजह और जिम्मेदार लोगों के बारे में जल्द जानकारी जुटाई जा सके। Macron सुरक्षित, लेकिन Damascus Blast ने बढ़ाई चिंता फ्रांस के राष्ट्रपति के दौरे के दौरान हुई इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है। जहां एक ओर मैक्रों की सुरक्षा को लेकर राहत है, वहीं दूसरी ओर Damascus में हुए इस Blast ने सीरिया के सुरक्षा हालात पर नई चर्चा शुरू कर दी है।
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Khamenei

Iran Khamenei Funeral: लगातार दूसरे दिन भी उमड़ी भारी भीड़, अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे लाखों श्रद्धालु

ईरान (Iran) के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (Khamenei) की अंतिम यात्रा में लगातार दूसरे दिन भी भारी संख्या में लोग शामिल हुए। देश के धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र माने जाने वाले कोम (Qom) शहर में लाखों श्रद्धालुओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। पूरे शहर में शोक का माहौल देखने को मिला, जबकि सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद कड़ी रखी गई। अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने खामेनेई के सम्मान में नारे लगाए और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सड़कों पर लोगों की भीड़ इतनी अधिक थी कि कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित रहा। ईरान के विभिन्न प्रांतों से आए श्रद्धालु अंतिम दर्शन के लिए घंटों तक इंतजार करते नजर आए। Jamkaran Mosque में अदा हुई जनाजे की नमाज खामेनेई की अंतिम यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव जमकरान मस्जिद (Jamkaran Mosque) रहा। यहां बड़ी संख्या में धार्मिक विद्वानों, वरिष्ठ अधिकारियों और आम नागरिकों की मौजूदगी में जनाजे की नमाज अदा की गई। नमाज के बाद लोगों ने शांति और देश की स्थिरता के लिए दुआ भी मांगी। जमकरान मस्जिद शिया समुदाय के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में गिनी जाती है। ऐसे में यहां अंतिम धार्मिक रस्मों का आयोजन विशेष महत्व रखता है। मस्जिद परिसर और उसके आसपास श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। देशभर से पहुंचे श्रद्धालु ईरान के अलग-अलग हिस्सों से लोग कोम पहुंचे ताकि वे अपने नेता को अंतिम विदाई दे सकें। कई परिवार अपने बच्चों के साथ अंतिम यात्रा में शामिल हुए। लोगों का कहना था कि वे खामेनेई के प्रति सम्मान व्यक्त करने और उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए यहां पहुंचे हैं। सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था की गई। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील भी की। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजरें खामेनेई की अंतिम यात्रा पर दुनिया के कई देशों की नजरें टिकी रहीं। इसे ईरान के हालिया इतिहास की सबसे बड़ी सार्वजनिक सभाओं में से एक माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस आयोजन के बाद ईरान की आंतरिक और क्षेत्रीय राजनीति पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ड्डा का राहुल पर पलटवार: बोले- कांग्रेस बताए अपने राज्यों में पेपर लीक क्यों हुए, सरकार चर्चा को तैयार

पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस पहले यह बताए कि उसके शासन वाले राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं। नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार इस गंभीर विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है, जबकि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में है। दरअसल, राहुल गांधी ने हाल ही में दावा किया था कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 152 पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं। उन्होंने इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार पर परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने में विफल रहने का आरोप लगाया था। इस पर जवाब देते हुए नड्डा ने कहा कि केवल आंकड़े पेश करने से काम नहीं चलेगा। कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि जिन राज्यों में उसकी सरकारें रही हैं, वहां भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं और उन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा संसद में इस विषय पर सार्थक चर्चा का स्वागत करती है।

अजमेर में मार्बल व्यापारी पर जानलेवा हमला, CCTV में कैद हुई वारदात

राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ में बुधवार सुबह मार्बल व्यापारी पर चार बदमाशों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। स्कॉर्पियो से आए हमलावरों ने गोदाम में घुसकर व्यापारी के साथ बेरहमी से मारपीट की। पूरी घटना गोदाम में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। गोदाम में घुसकर किया हमला गांधीनगर थाना क्षेत्र स्थित मार्बल एरिया में बुधवार सुबह करीब 8:20 बजे स्कॉर्पियो में सवार चार युवक गोदाम के बाहर पहुंचे। गोदाम में बैठे मार्बल व्यापारी गोवर्धन पर उन्होंने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। व्यापारी ने शुरुआत में हमलावरों का मुकाबला करने की कोशिश की, लेकिन चारों बदमाशों ने उसे घेर लिया और जमीन पर गिराकर लगातार लाठियों से पीटा। वारदात के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। सिर और हाथ में गंभीर चोट हमले में व्यापारी के सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं। घायल अवस्था में उन्हें तत्काल किशनगढ़ के राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पीड़ित ने दर्ज कराई शिकायत गांधीनगर थाना प्रभारी अनिल शर्मा ने बताया कि पीड़ित व्यापारी की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। भाई के साथ गोदाम में मौजूद था व्यापारी पीड़ित गोवर्धन ने बताया कि वह बुधवार सुबह अपने भाई के साथ गोदाम में बैठा था। इसी दौरान स्कॉर्पियो में सवार चार युवक पहुंचे और बिना किसी बातचीत के अचानक हमला कर दिया। बदमाशों ने गोदाम के अंदर घुसकर उन्हें नीचे गिराया और लाठियों से बेरहमी से पीटा। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

BPCL को जून तिमाही में ₹3,962 करोड़ का घाटा, कच्चे तेल की महंगाई से बिगड़े नतीजे

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी को इस तिमाही में ₹3,962 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ है। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने ₹6,124 करोड़ का मुनाफा कमाया था, जबकि मार्च तिमाही में ₹3,191 करोड़ का लाभ दर्ज किया गया था। 23% बढ़ा कंपनी का रेवेन्यू घाटे के बावजूद BPCL का परिचालन से राजस्व (Revenue from Operations) बढ़कर ₹1.59 लाख करोड़ पहुंच गया। यह पिछले साल की समान तिमाही के ₹1.29 लाख करोड़ के मुकाबले करीब 23% अधिक है। वहीं, मार्च तिमाही के ₹1.35 लाख करोड़ की तुलना में इसमें करीब 18% की वृद्धि दर्ज की गई। कच्चे तेल की महंगाई बनी घाटे की वजह कंपनी के अनुसार, अमेरिका-ईरान तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। इसके साथ ही शिपिंग (भाड़ा) और इंश्योरेंस लागत भी बढ़ गई। हालांकि, बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में नहीं डाला जा सका, जिससे कंपनी की लाभप्रदता प्रभावित हुई और तिमाही घाटे में बदल गई। शेयर में गिरावट नतीजों के बाद BPCL का शेयर 3% की गिरावट के साथ ₹309 पर बंद हुआ। BPCL के बारे में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों में शामिल है। इसकी स्थापना 24 जनवरी 1976 को हुई थी। कंपनी मुंबई, कोच्चि, नुमालीगढ़ और बीना में रिफाइनरियों का संचालन करती है, जिनकी कुल रिफाइनिंग क्षमता 40 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से अधिक है। BPCL पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, लुब्रिकेंट्स और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के रिफाइनिंग व वितरण का कार्य करती है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू का इस्तीफा, विवादित कृषि बिल के विरोध में छोड़ा पद

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने विवादित कृषि विधेयक के विरोध में इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। इस बिल में दो प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित इस्तेमाल और सिंचाई के लिए बड़े जलाशय बनाने की अनुमति देने का प्रावधान है। वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे मधुमक्खियों, जैव विविधता और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के अनुसार, बारबू बुधवार को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंपेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के अपने वादों से पीछे हटते हुए ऐसे प्रावधानों को मंजूरी दी, जिनका वह लगातार विरोध करती रही थीं। बिल के दो विवादित प्रावधान 1. प्रतिबंधित कीटनाशकों को मंजूरीविधेयक में एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन जैसे प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित उपयोग की अनुमति दी गई है। इनका इस्तेमाल चुकंदर, सेब और चेरी जैसी फसलों में किया जा सकेगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ये रसायन मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले कीड़ों के लिए बेहद हानिकारक हैं, जिससे कृषि उत्पादन और पारिस्थितिकी तंत्र दोनों प्रभावित हो सकते हैं। 2. सिंचाई के लिए बड़े जलाशयों की अनुमतिबिल में किसानों को सिंचाई के लिए बड़े जलाशय और कृत्रिम तालाब बनाने की प्रक्रिया आसान करने का भी प्रावधान है। पर्यावरणविदों का तर्क है कि इससे भूजल और नदियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और गर्मियों में जल संकट बढ़ सकता है। संसद से पास हुआ विधेयक फ्रांस की संसद में मंगलवार को पेश किए गए इस विधेयक को सीनेट ने 214 के मुकाबले 111 मतों से पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि यह कानून किसानों की बढ़ती लागत और घटती आय को देखते हुए लाया गया है, ताकि वे यूरोप के अन्य देशों के किसानों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें। बारबू ने जताई नाराजगी मोनिक बारबू ने कहा कि विवादित प्रावधान आखिरी समय में बिल में जोड़े गए और उन्हें हटाने पर सरकार ने कोई गंभीर चर्चा नहीं की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पिछले नौ महीनों में उन्होंने जंगलों, स्वच्छ जल, साफ हवा और जैव विविधता की रक्षा के लिए काम किया, लेकिन अब वह अपने उद्देश्यों को पूरा करने की स्थिति में नहीं हैं। पहले भी विवादों में रहा कीटनाशक एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन नियोनिकोटिनॉइड समूह के कीटनाशक हैं। फ्रांस ने 2018 में एसेटामिप्रिड पर प्रतिबंध लगाया था। इससे पहले भी इस प्रतिबंध को हटाने की कोशिश हुई थी, लेकिन फ्रांस की सर्वोच्च अदालत ने पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर संभावित खतरे का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

इंदौर में छात्र आंदोलन को मिला कांग्रेस का समर्थन, दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी धरने में पहुंचे

इंदौर के टंट्याभील चौराहे पर चल रहे छात्र आंदोलन को बुधवार रात कांग्रेस का खुला समर्थन मिला। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी धरना स्थल पहुंचे और छात्रों के बीच बैठकर उनके आंदोलन में शामिल हुए। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। टंट्याभील चौराहे पर पिछले कई दिनों से छात्र शिक्षा व्यवस्था, कथित पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन और सोनम वांगचुक को हिरासत में लिए जाने के बाद इंदौर में भी आंदोलन तेज हो गया है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र धरना स्थल पर पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार रात दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी ने छात्रों के बीच बैठकर आंदोलन का समर्थन किया। उनके साथ शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे सहित कई कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी धरने में शामिल हुए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस पिछले 25 दिनों से यह मांग उठा रही है और उन्होंने स्वयं 21 जून को भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी थी। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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