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America ने फिर किया Iran पर हवाई हमला

America ने फिर किया Iran पर हवाई हमला

America और Iran के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन और कुवैत की ओर मिसाइलें दाग दीं। इस घटनाक्रम के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है। जानकारी के अनुसार, ईरान की ओर से दागी गई कुछ मिसाइलें जॉर्डन के हवाई क्षेत्र की तरफ भी बढ़ीं। जॉर्डन की सेना ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आठ मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई से किसी बड़े नुकसान को टाल दिया गया। अमेरिका का कहना है कि उसके हवाई हमले ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने और क्षेत्र में अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किए गए। वहीं ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है। बहरीन और कुवैत में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। कई जगहों पर लोगों से सतर्क रहने और आवश्यक होने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है। क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ गई है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकालने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात इसी तरह बिगड़ते रहे तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों की ओर से सैन्य गतिविधियां तेज हैं और दुनिया की नजरें इस संकट पर बनी हुई हैं। आने वाले दिनों में दोनों देशों के अगले कदम से क्षेत्र की स्थिति और स्पष्ट होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Hormuz

Middle East War Crisis: Hormuz में Iran का Missile Attack, UAE के Oil Tankers बने निशाना

मध्य पूर्व (Middle East) में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। ईरान (Iran) और अमेरिका (US) के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो तेल टैंकरों को मिसाइलों से निशाना बनाया। इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। इसके कुछ ही घंटों बाद ईरान ने बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी मिसाइल और ड्रोन हमले किए। जवाब में अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर करीब पांच घंटे तक लगातार एयर स्ट्राइक की। इस घटनाक्रम ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात पैदा कर दिए हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। Hormuz Strait में UAE के Oil Tankers पर हमला रिपोर्ट्स के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे UAE से जुड़े दो ऑयल टैंकरों पर ईरानी मिसाइलों से हमला किया गया। धमाकों के बाद जहाजों में आग लग गई और चालक दल में अफरा-तफरी मच गई। इस हमले में एक भारतीय क्रू सदस्य की जान चली गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। UAE ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर सीधा हमला बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसे हमले जारी रहे तो वैश्विक समुद्री व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है। Bahrain और Jordan में US Military Bases बने निशाना टैंकरों पर हमले के कुछ समय बाद ईरान ने बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। कई जगह एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय किए गए और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने की कोशिश की गई। हालांकि शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार बड़े पैमाने पर नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन हमलों ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर पहुंचा दिया है। US का पलटवार, 5 घंटे तक चली Air Strike ईरानी हमलों के जवाब में अमेरिकी सेना ने बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई शुरू की। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के मिसाइल लॉन्च पैड, सैन्य ठिकानों और तटीय रक्षा प्रणाली को निशाना बनाया। यह एयर ऑपरेशन करीब पांच घंटे तक चला। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए की गई है। क्यों अहम है Strait of Hormuz? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है। दुनिया के समुद्री रास्ते से होने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार को प्रभावित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट लंबा चला तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, शिपिंग लागत में बढ़ोतरी और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव देखने को मिल सकता है। भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता? इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत के बाद भारत के लिए भी चिंता बढ़ गई है। खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं और बड़ी संख्या में भारतीय नाविक अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर तैनात हैं। ऐसे में यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी इसका असर पड़ सकता है। भारत सरकार पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। Middle East Crisis पर दुनिया की नजर ईरान और अमेरिका के बीच लगातार बढ़ रहे हमलों ने यह साफ कर दिया है कि मध्य पूर्व में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। यदि दोनों देशों के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विश्व अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में दोनों देश सैन्य कार्रवाई को आगे बढ़ाते हैं या फिर कूटनीतिक बातचीत के जरिए हालात सामान्य करने की कोशिश करते हैं।
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Sheikh Hamad

Modern Qatar के Architect Sheikh Hamad का निधन: Former Emir ने बदली थी देश की तस्वीर

कतर के पूर्व शासक Sheikh Hamad bin Khalifa Al Thani का निधन हो गया है। 74 साल की उम्र में उनके निधन की खबर सामने आने के बाद कतर समेत पूरी दुनिया में शोक का माहौल है। Sheikh Hamad को सिर्फ एक शासक नहीं, बल्कि ऐसे नेता के रूप में याद किया जा रहा है जिन्होंने छोटे से खाड़ी देश Qatar को Global Stage पर मजबूत पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उनके निधन के साथ ही कतर के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया है। अपने कार्यकाल के दौरान Sheikh Hamad ने देश की अर्थव्यवस्था, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को नई दिशा दी। Sheikh Hamad bin Khalifa Al Thani का राजनीतिक सफर Sheikh Hamad bin Khalifa Al Thani ने साल 1995 में कतर की सत्ता संभाली थी। उनके नेतृत्व में देश ने तेजी से विकास किया और तेल व प्राकृतिक गैस संसाधनों के दम पर अपनी आर्थिक ताकत बढ़ाई। करीब 18 वर्षों तक कतर के अमीर (Emir) रहने के दौरान उन्होंने देश में बड़े बदलाव किए। उनके शासनकाल में शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर विशेष ध्यान दिया गया। Qatar को Global पहचान दिलाने में बड़ा योगदान Sheikh Hamad के कार्यकाल को आधुनिक कतर के निर्माण के दौर के रूप में देखा जाता है। उनके नेतृत्व में कतर ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और व्यापार में अपनी अलग पहचान बनाई। उनके समय में Al Jazeera Media Network की शुरुआत हुई, जिसने कतर को वैश्विक मीडिया क्षेत्र में पहचान दिलाई। इसके अलावा देश ने बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों और निवेश परियोजनाओं के जरिए दुनिया में अपनी मौजूदगी मजबूत की। FIFA World Cup 2022 की मेजबानी तक पहुंचा Qatar Sheikh Hamad के विजन का असर खेल के क्षेत्र में भी देखने को मिला। कतर को वर्ष 2022 में FIFA World Cup की मेजबानी मिली, जिसे देश की बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है। इस आयोजन के लिए कतर ने बड़े पैमाने पर स्टेडियम, सड़क और अन्य सुविधाओं का विकास किया, जिससे देश की आधुनिक छवि दुनिया के सामने आई। 2013 में बेटे Sheikh Tamim को सौंपी सत्ता साल 2013 में Sheikh Hamad ने एक बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए सत्ता अपने बेटे Sheikh Tamim bin Hamad Al Thani को सौंप दी थी। यह खाड़ी देशों की राजनीति में एक अलग उदाहरण माना गया। सत्ता छोड़ने के बाद भी Sheikh Hamad देश के प्रभावशाली नेताओं में बने रहे और कतर के विकास में उनकी भूमिका को हमेशा याद किया गया। Qatar में शोक, दुनिया ने याद किया योगदान Sheikh Hamad bin Khalifa Al Thani के निधन पर कतर में शोक की लहर है। लोग उन्हें ऐसे नेता के रूप में याद कर रहे हैं जिन्होंने Qatar को आर्थिक रूप से मजबूत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली राष्ट्र बनाने में योगदान दिया। उनका जीवन और राजनीतिक सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए कतर के विकास की कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Oman

Oman Coast पर बड़ा Ship Attack: Commercial Vessel को बनाया निशाना, भारतीय नाविक संकट में

Oman Coast के पास Commercial Vessel पर हुए हमले ने समुद्री दुनिया में चिंता बढ़ा दी है। इस घटना में जहाज पर सवार 11 भारतीय नागरिकों के फंसने की खबर सामने आई, जिसमें से 10 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि एक भारतीय नाविक अभी भी लापता है। परिवारों की चिंता बढ़ गई है और भारतीय एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। Oman Coast के पास कैसे हुआ Ship Attack? जानकारी के मुताबिक, ओमान के समुद्री क्षेत्र के पास एक कमर्शियल जहाज को निशाना बनाया गया। हमले के बाद जहाज पर मौजूद क्रू मेंबर की सुरक्षा को लेकर तुरंत राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया। इस दौरान भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने की कोशिशें तेज कर दी गईं। घटना के बाद समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी है। वहीं, लापता भारतीय नाविक की तलाश के लिए अभियान जारी है। 10 भारतीय सुरक्षित, एक की तलाश जारी इस हादसे में जहाज पर मौजूद 11 भारतीयों में से 10 को सुरक्षित बचा लिया गया है। हालांकि, एक भारतीय सदस्य के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। उसके परिवार और करीबियों में चिंता का माहौल है। भारतीय अधिकारियों की ओर से ओमान प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क किया जा रहा है ताकि लापता व्यक्ति का पता लगाया जा सके। Gulf of Oman में बढ़ी Maritime Security की चिंता Gulf of Oman और आसपास का समुद्री इलाका दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में शामिल है। यहां से बड़ी संख्या में तेल, गैस और अन्य सामान ले जाने वाले जहाज गुजरते हैं। हाल के समय में इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव और जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों की चिंता बढ़ाई है। समुद्री मार्गों की सुरक्षा अब वैश्विक स्तर पर एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर सरकार की नजर भारत के हजारों नागरिक दुनिया भर के समुद्री उद्योग में काम करते हैं। ऐसे में विदेशों में काम कर रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा सरकार के लिए अहम प्राथमिकता है। ओमान Ship Attack के बाद भारतीय एजेंसियां पूरे मामले की जानकारी जुटाने में लगी हैं। सरकार की कोशिश है कि सभी भारतीय नागरिक सुरक्षित रहें और लापता नाविक को जल्द खोजा जा सके। परिवारों में चिंता, जल्द राहत की उम्मीद घटना की खबर सामने आने के बाद जहाज पर मौजूद भारतीयों के परिवारों में चिंता का माहौल है। हर कोई सुरक्षित वापसी की उम्मीद कर रहा है। फिलहाल बचाव अभियान और जांच दोनों जारी हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gen-Z Protest

Gen-Z Protest in Nepal: 3 दिन में 3 आत्मदाह, युवाओं का गुस्सा चरम पर, सरकार घिरी

नेपाल में एक बार फिर युवाओं का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है। Gen-Z Protest ने देश के कई हिस्सों में जोर पकड़ लिया है। पिछले तीन दिनों के भीतर सामने आई तीन आत्मदाह (Self-Immolation) की घटनाओं ने पूरे नेपाल को झकझोर दिया है। इन घटनाओं के बाद राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में प्रदर्शन तेज हो गए हैं। युवाओं का कहना है कि लगातार बढ़ती बेरोजगारी, आर्थिक परेशानियां और भ्रष्टाचार ने उनके भविष्य को संकट में डाल दिया है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि प्रदर्शनकारी अब सरकार से जवाब मांग रहे हैं। कई जगहों पर लोगों ने प्रधानमंत्री बालेन शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए रैलियां निकालीं और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। तीन दिनों में तीन आत्मदाह, बढ़ी चिंता नेपाल में हाल के दिनों में हुई आत्मदाह की घटनाओं ने पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। इनमें एक युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि अन्य मामलों ने भी युवाओं की बढ़ती निराशा और मानसिक दबाव को सामने ला दिया। इन घटनाओं के बाद अस्पतालों और सार्वजनिक स्थलों पर लोगों की भीड़ जुटी और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह केवल कुछ घटनाएं नहीं हैं, बल्कि लंबे समय से जमा हो रहे असंतोष का परिणाम हैं। उनका आरोप है कि सरकार रोजगार, शिक्षा और आर्थिक सुधार जैसे अहम मुद्दों पर प्रभावी कदम उठाने में नाकाम रही है। बेरोजगारी बनी आंदोलन की सबसे बड़ी वजह नेपाल के हजारों युवा बेहतर रोजगार की तलाश में हर साल विदेश जाने को मजबूर होते हैं। जो देश में रहते हैं, उन्हें सीमित अवसर, कम आय और बढ़ती महंगाई जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। युवाओं का कहना है कि चुनाव के दौरान किए गए रोजगार और विकास के वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। इसी नाराजगी ने सोशल मीडिया पर शुरू हुए अभियान को अब बड़े जनआंदोलन का रूप दे दिया है। बड़ी संख्या में छात्र, नौकरी की तलाश कर रहे युवा और सामाजिक संगठन इस आंदोलन से जुड़ चुके हैं। PM Balen Shah के इस्तीफे की मांग तेज प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर प्रधानमंत्री बालेन शाह के खिलाफ नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही और आत्मदाह जैसी दर्दनाक घटनाओं के बावजूद ठोस समाधान पेश नहीं कर पाई है। हालांकि सरकार ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ घटनाओं की जांच भी की जा रही है। पिछले Gen-Z आंदोलन की याद फिर हुई ताजा नेपाल में पिछले वर्ष हुए Gen-Z आंदोलन ने देश की राजनीति में बड़ा बदलाव लाया था। उस समय युवाओं ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और बेहतर शासन की मांग को लेकर व्यापक प्रदर्शन किए थे। नई सरकार बनने के बाद लोगों को बदलाव की उम्मीद थी, लेकिन मौजूदा हालात ने एक बार फिर युवाओं के असंतोष को सामने ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार जल्द रोजगार सृजन, आर्थिक सुधार और पारदर्शिता को लेकर ठोस कदम नहीं उठाती, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है। सरकार पर बढ़ा दबाव विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने आत्मदाह की घटनाओं की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही सरकार से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने, आर्थिक सुधार लागू करने और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील की गई है। फिलहाल नेपाल में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है, जबकि पूरे देश की निगाह अब इस बात पर टिकी है कि सरकार बढ़ते जनाक्रोश का समाधान किस तरह निकालती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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होर्मुज

US Airstrike on Iran: होर्मुज जहाज हमले के बाद America का एक्शन, Gulf में बढ़ा युद्ध का खतरा

पश्चिम एशिया एक बार फिर युद्ध जैसे हालात की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक व्यापारी जहाज पर हुए हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर दिया। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसने ईरान के करीब 140 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए एयरस्ट्राइक की है। इसके कुछ ही समय बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी हितों और सहयोगी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इस घटनाक्रम ने न केवल पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा दिया है, बल्कि दुनिया भर के ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार को लेकर भी चिंता गहरा दी है। होर्मुज में जहाज पर हमला बना कार्रवाई की वजह अमेरिका के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक मालवाहक जहाज पर हमला किया गया, जिसमें जहाज को नुकसान पहुंचा और चालक दल के एक सदस्य के लापता होने की सूचना मिली। वाशिंगटन ने इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया और तुरंत जवाबी सैन्य कार्रवाई का फैसला लिया। होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का हमला पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। 140 सैन्य ठिकानों पर America की Airstrike अमेरिकी सेना ने जिन ठिकानों को निशाना बनाया, उनमें मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन बेस, एयर डिफेंस सिस्टम, रडार स्टेशन और सैन्य कमांड सेंटर शामिल बताए गए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए इसका कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है। ईरान का पलटवार, Kuwait और Bahrain भी निशाने पर अमेरिकी एयरस्ट्राइक के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। ईरान की ओर से कुवैत, बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों पर मिसाइल तथा ड्रोन दागे गए। खाड़ी देशों ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार कई मिसाइलों और ड्रोन को रास्ते में ही नष्ट कर दिया गया, जबकि कुछ इलाकों में धमाकों की आवाजें भी सुनी गईं। सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। दुनिया की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य पर इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। यदि यहां आवाजाही प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने भी इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव लंबा खिंचता है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देगा। क्या बढ़ सकता है युद्ध का दायरा? अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रहा है। कई देशों ने बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कही है, लेकिन फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों अपने-अपने रुख पर कायम हैं। यदि जवाबी सैन्य कार्रवाई का सिलसिला जारी रहता है तो यह संघर्ष पूरे खाड़ी क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Donald Trump

Donald Trump Statement: ईरान पर सख्त हुए ट्रम्प, कहा- जवाबी कार्रवाई के आदेश पहले ही दे चुका हूं

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने एक बार फिर ईरान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि उनकी हत्या की कोशिश की गई या अमेरिका की सुरक्षा पर किसी भी तरह का हमला हुआ, तो जवाब ऐसा होगा जिसे ईरान कभी नहीं भूल पाएगा। ट्रम्प का दावा है कि अमेरिका ने पहले से ही संभावित सैन्य कार्रवाई की पूरी तैयारी कर रखी है और जरूरत पड़ने पर तुरंत जवाब दिया जाएगा। ट्रम्प के इस बयान के बाद US-Iran Tension एक बार फिर वैश्विक चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इस तरह की बयानबाजी से पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ सकता है। ट्रम्प का बड़ा दावा- जवाबी कार्रवाई के निर्देश पहले ही जारी मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों और सैन्य अधिकारियों को पहले ही स्पष्ट निर्देश दे दिए हैं। अगर उनके खिलाफ कोई साजिश रची जाती है या अमेरिका पर हमला होता है, तो तत्काल जवाबी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका पूरी तरह तैयार है और जरूरत पड़ने पर करीब 1000 मिसाइलों सहित अपनी सैन्य क्षमता का इस्तेमाल करने में कोई हिचक नहीं होगी। ईरान को दी सीधी चेतावनी ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ किसी तरह का समझौता नहीं करेगा। उनका कहना था कि यदि ईरान या उससे जुड़े किसी संगठन ने किसी भी प्रकार की आक्रामक कार्रवाई की, तो उसका जवाब बेहद कठोर होगा। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि 1000 मिसाइलों का जिक्र किसी विशेष ऑपरेशन से जुड़ा है या यह केवल अमेरिका की सैन्य ताकत का संकेत है। इसके बावजूद उनका यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है। Middle East में बढ़ सकती है हलचल अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से रिश्ते सामान्य नहीं रहे हैं। परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, क्षेत्रीय प्रभाव और सैन्य गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच कई बार तनाव चरम पर पहुंच चुका है। ऐसे माहौल में ट्रम्प का नया बयान यह संकेत देता है कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक टकराव अभी खत्म नहीं हुआ है। यदि बयानबाजी और तेज होती है तो इसका असर पूरे Middle East की सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है। दुनिया की नजर अगली प्रतिक्रिया पर ट्रम्प के बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाह अब ईरान की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। फिलहाल तेहरान की ओर से कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीतिक संबंधों पर भी दिखाई दे सकता है। क्या है इस बयान का मतलब? ट्रम्प का ताजा बयान यह दिखाता है कि अमेरिका अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों को लेकर आक्रामक रुख बनाए हुए है। हालांकि आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाएगी, यह काफी हद तक ईरान की प्रतिक्रिया और दोनों देशों की अगली कूटनीतिक रणनीति पर निर्भर करेगा। फिलहाल इतना तय है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान पश्चिम एशिया की ओर खींच लिया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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FTA

India-New Zealand Relations: FTA को मिली रफ्तार, PM Modi बोले- भारत में होगा ₹1.72 लाख करोड़ का निवेश

भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूजीलैंड दौरे के दौरान दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, शिक्षा, तकनीक और सुरक्षा जैसे कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि Free Trade Agreement (FTA) को आगे बढ़ाने की दिशा में बनी सहमति और 18 महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर मानी जा रही है। दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि न्यूजीलैंड भारत में करीब ₹1.72 लाख करोड़ का निवेश करेगा। माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती मिलेगी और भारत में रोजगार व निवेश के नए अवसर भी बनेंगे। FTA पर बढ़ी रफ्तार, व्यापार को मिलेगा फायदा भारत और न्यूजीलैंड पिछले काफी समय से Free Trade Agreement (FTA) पर बातचीत कर रहे हैं। अब दोनों देशों ने इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। अगर यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार पहले से अधिक आसान हो जाएगा। कई उत्पादों पर आयात-निर्यात शुल्क कम होने की संभावना है, जिससे भारतीय उद्योग, कृषि उत्पाद और सेवा क्षेत्र को भी फायदा मिल सकता है। 18 बड़े फैसलों में किन क्षेत्रों पर रहा फोकस? प्रधानमंत्री मोदी और न्यूजीलैंड के नेतृत्व के बीच हुई बैठक में कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। इनमें शामिल हैं— इन समझौतों का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना भी है। ₹1.72 लाख करोड़ का Investment क्यों है खास? प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि न्यूजीलैंड भारत में लगभग ₹1.72 लाख करोड़ का निवेश करेगा। यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक तकनीक, ऊर्जा, कृषि और अन्य विकास परियोजनाओं में किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विदेशी निवेश बढ़ेगा, नए उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। Auckland में भारतीय समुदाय को करेंगे संबोधित दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी न्यूजीलैंड के Auckland में भारतीय समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में करीब 40 हजार लोगों के पहुंचने की संभावना है। भारतीय समुदाय लंबे समय से इस कार्यक्रम का इंतजार कर रहा है। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी भारत-न्यूजीलैंड संबंधों, प्रवासी भारतीयों की भूमिका और भविष्य की साझेदारी पर विस्तार से बात कर सकते हैं। भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह दौरा? न्यूजीलैंड के साथ मजबूत होते रिश्ते भारत की आर्थिक और रणनीतिक नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, व्यापार का दायरा विस्तार करने और विदेशी निवेश आकर्षित करने की दिशा में यह यात्रा एक अहम कदम मानी जा रही है। यदि आने वाले समय में India-New Zealand FTA पर अंतिम मुहर लगती है, तो दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी और निवेश का दायरा भी बढ़ेगा। इससे भारतीय कंपनियों, किसानों, स्टार्टअप और सेवा क्षेत्र को नए अवसर मिल सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ग्रीस में उड़ान के दौरान विमान की खिड़की टूटी, 30 हजार फीट की ऊंचाई पर बड़ा हादसा टला

एथेंस। ग्रीस से जर्मनी जा रही रायनएयर (Ryanair) की एक फ्लाइट में उड़ान के दौरान खिड़की टूटने से बड़ा हादसा टल गया। घटना के समय विमान करीब 30 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था। खिड़की टूटने के कारण विमान के केबिन का दबाव अचानक कम हो गया, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि टूटी हुई खिड़की के पास बैठे 61 वर्षीय यात्री का सिर और कंधे खिड़की से बाहर निकल गए। हालांकि, उनकी सीट बेल्ट बंधी होने और अन्य यात्रियों की सतर्कता से उनकी जान बच गई। पत्नी और यात्रियों ने बचाई जान प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही बुजुर्ग यात्री खिड़की की ओर खिंचने लगे, उनकी पत्नी ने तुरंत उनके दोनों पैर पकड़ लिए। इसके बाद आसपास बैठे अन्य यात्रियों ने भी मदद की और उन्हें सुरक्षित अंदर खींच लिया। यदि यात्री ने सीट बेल्ट नहीं पहनी होती, तो हादसा और गंभीर हो सकता था। ऑक्सीजन मास्क नीचे आ गए एक महिला यात्री ने स्थानीय रेडियो से बातचीत में बताया कि घटना के समय अधिकांश यात्री सो रहे थे। तभी अचानक टायर फटने जैसी तेज आवाज सुनाई दी और कुछ ही सेकंड में केबिन का दबाव कम हो गया। उन्होंने बताया कि इसके बाद ऑक्सीजन मास्क अपने आप नीचे आ गए और केबिन में तेज गंध फैल गई। कुछ क्षणों के लिए यात्रियों को लगा कि शायद विमान का इमरजेंसी दरवाजा खुल गया है। इंजन के पुर्जे से टूटी हो सकती है खिड़की ग्रीक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विमान के इंजन से अलग हुए किसी पुर्जे के टुकड़े के खिड़की से टकराने के कारण यह घटना हुई हो सकती है। हालांकि, एयरलाइन या संबंधित अधिकारियों ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। विमान की सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग यह फ्लाइट ग्रीस के थेसालोनिकी से जर्मनी के मेमिंगेन जा रही थी। घटना के बाद विमान को वापस थेसालोनिकी एयरपोर्ट लौटाया गया, जहां उसने सुरक्षित लैंडिंग की। एयरलाइन रायनएयर ने बताया कि घायल यात्री, जो सर्बिया का पर्यटक है, को हल्की जलन जैसी चोटें आई हैं। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत स्थिर बताई गई है। एयरलाइन ने यह भी बताया कि बाकी यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए दूसरे विमान की व्यवस्था की गई। मामले की जांच जारी है। अधिक जानकारी देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए विजिट करें: deshharpal.com
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ट्रम्प की हत्या की साजिश या इजराइल की रणनीति? ईरान-अमेरिका तनाव के बीच क्या है पूरा मामला

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नया दावा सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल ने अमेरिका को खुफिया जानकारी दी है कि ईरान पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की हत्या की नई साजिश पर काम कर रहा है। इसके बाद ट्रम्प के तेवर ईरान के प्रति और सख्त हो गए। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अमेरिकी प्रशासन ने भी सार्वजनिक रूप से ऐसे किसी नए षड्यंत्र की पुष्टि नहीं की है। इसी बीच अमेरिका ने 7-8 जुलाई की रात ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह हमला इजराइल की खुफिया जानकारी से प्रभावित था या इसके पीछे अन्य रणनीतिक कारण थे। इजराइल ने क्या दावा किया? अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजराइल ने अमेरिका को सूचना दी कि ईरान ट्रम्प को निशाना बनाने की योजना बना रहा है। The Wall Street Journal और CNN की रिपोर्टों में दावा किया गया कि अमेरिकी एजेंसियों को हाल के हफ्तों में ट्रम्प की सुरक्षा को लेकर कई खुफिया इनपुट मिले थे। हालांकि, इन रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि अमेरिकी एजेंसियों ने सार्वजनिक रूप से किसी नई साजिश की पुष्टि नहीं की है। क्या इसी वजह से अमेरिका ने ईरान पर हमला किया? इस सवाल का स्पष्ट जवाब फिलहाल उपलब्ध नहीं है, लेकिन कुछ घटनाक्रमों ने इस चर्चा को हवा दी है। हालांकि, अमेरिकी सरकार ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं कहा कि सैन्य कार्रवाई सीधे कथित हत्या की साजिश के कारण की गई। क्या इजराइल अमेरिका को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है? कुछ अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में यह संभावना जताई गई है कि इजराइल ईरान के खिलाफ अमेरिका की सैन्य नीति को और आक्रामक बनाने की कोशिश कर रहा हो सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, हाल के वर्षों में ईरान के खिलाफ कई अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों से पहले इजराइल ने खुफिया इनपुट साझा किए थे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें लेकर अलग-अलग विश्लेषण सामने आए हैं। क्या ट्रम्प वास्तव में निशाने पर हैं? यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प की सुरक्षा को लेकर ईरान का नाम सामने आया हो। अमेरिका-ईरान तनाव क्यों बढ़ा? अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार कई मुद्दों पर बना हुआ है, जिनमें शामिल हैं— विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में दोनों देशों के बीच बयानबाजी और सैन्य दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे पश्चिम एशिया में अस्थिरता की आशंका बनी हुई है। फिलहाल क्या स्थिति है? अब तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहा जा सकता है कि: अधिक जानकारी देश-दुनिया और अंतरराष्ट्रीय मामलों की ताजा खबरों के लिए विजिट करें: deshharpal.com
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ड्डा का राहुल पर पलटवार: बोले- कांग्रेस बताए अपने राज्यों में पेपर लीक क्यों हुए, सरकार चर्चा को तैयार

पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस पहले यह बताए कि उसके शासन वाले राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं। नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार इस गंभीर विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है, जबकि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में है। दरअसल, राहुल गांधी ने हाल ही में दावा किया था कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 152 पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं। उन्होंने इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार पर परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने में विफल रहने का आरोप लगाया था। इस पर जवाब देते हुए नड्डा ने कहा कि केवल आंकड़े पेश करने से काम नहीं चलेगा। कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि जिन राज्यों में उसकी सरकारें रही हैं, वहां भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं और उन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा संसद में इस विषय पर सार्थक चर्चा का स्वागत करती है।

अजमेर में मार्बल व्यापारी पर जानलेवा हमला, CCTV में कैद हुई वारदात

राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ में बुधवार सुबह मार्बल व्यापारी पर चार बदमाशों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। स्कॉर्पियो से आए हमलावरों ने गोदाम में घुसकर व्यापारी के साथ बेरहमी से मारपीट की। पूरी घटना गोदाम में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। गोदाम में घुसकर किया हमला गांधीनगर थाना क्षेत्र स्थित मार्बल एरिया में बुधवार सुबह करीब 8:20 बजे स्कॉर्पियो में सवार चार युवक गोदाम के बाहर पहुंचे। गोदाम में बैठे मार्बल व्यापारी गोवर्धन पर उन्होंने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। व्यापारी ने शुरुआत में हमलावरों का मुकाबला करने की कोशिश की, लेकिन चारों बदमाशों ने उसे घेर लिया और जमीन पर गिराकर लगातार लाठियों से पीटा। वारदात के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। सिर और हाथ में गंभीर चोट हमले में व्यापारी के सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं। घायल अवस्था में उन्हें तत्काल किशनगढ़ के राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पीड़ित ने दर्ज कराई शिकायत गांधीनगर थाना प्रभारी अनिल शर्मा ने बताया कि पीड़ित व्यापारी की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। भाई के साथ गोदाम में मौजूद था व्यापारी पीड़ित गोवर्धन ने बताया कि वह बुधवार सुबह अपने भाई के साथ गोदाम में बैठा था। इसी दौरान स्कॉर्पियो में सवार चार युवक पहुंचे और बिना किसी बातचीत के अचानक हमला कर दिया। बदमाशों ने गोदाम के अंदर घुसकर उन्हें नीचे गिराया और लाठियों से बेरहमी से पीटा। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

BPCL को जून तिमाही में ₹3,962 करोड़ का घाटा, कच्चे तेल की महंगाई से बिगड़े नतीजे

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी को इस तिमाही में ₹3,962 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ है। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने ₹6,124 करोड़ का मुनाफा कमाया था, जबकि मार्च तिमाही में ₹3,191 करोड़ का लाभ दर्ज किया गया था। 23% बढ़ा कंपनी का रेवेन्यू घाटे के बावजूद BPCL का परिचालन से राजस्व (Revenue from Operations) बढ़कर ₹1.59 लाख करोड़ पहुंच गया। यह पिछले साल की समान तिमाही के ₹1.29 लाख करोड़ के मुकाबले करीब 23% अधिक है। वहीं, मार्च तिमाही के ₹1.35 लाख करोड़ की तुलना में इसमें करीब 18% की वृद्धि दर्ज की गई। कच्चे तेल की महंगाई बनी घाटे की वजह कंपनी के अनुसार, अमेरिका-ईरान तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। इसके साथ ही शिपिंग (भाड़ा) और इंश्योरेंस लागत भी बढ़ गई। हालांकि, बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में नहीं डाला जा सका, जिससे कंपनी की लाभप्रदता प्रभावित हुई और तिमाही घाटे में बदल गई। शेयर में गिरावट नतीजों के बाद BPCL का शेयर 3% की गिरावट के साथ ₹309 पर बंद हुआ। BPCL के बारे में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों में शामिल है। इसकी स्थापना 24 जनवरी 1976 को हुई थी। कंपनी मुंबई, कोच्चि, नुमालीगढ़ और बीना में रिफाइनरियों का संचालन करती है, जिनकी कुल रिफाइनिंग क्षमता 40 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से अधिक है। BPCL पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, लुब्रिकेंट्स और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के रिफाइनिंग व वितरण का कार्य करती है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू का इस्तीफा, विवादित कृषि बिल के विरोध में छोड़ा पद

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने विवादित कृषि विधेयक के विरोध में इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। इस बिल में दो प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित इस्तेमाल और सिंचाई के लिए बड़े जलाशय बनाने की अनुमति देने का प्रावधान है। वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे मधुमक्खियों, जैव विविधता और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के अनुसार, बारबू बुधवार को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंपेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के अपने वादों से पीछे हटते हुए ऐसे प्रावधानों को मंजूरी दी, जिनका वह लगातार विरोध करती रही थीं। बिल के दो विवादित प्रावधान 1. प्रतिबंधित कीटनाशकों को मंजूरीविधेयक में एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन जैसे प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित उपयोग की अनुमति दी गई है। इनका इस्तेमाल चुकंदर, सेब और चेरी जैसी फसलों में किया जा सकेगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ये रसायन मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले कीड़ों के लिए बेहद हानिकारक हैं, जिससे कृषि उत्पादन और पारिस्थितिकी तंत्र दोनों प्रभावित हो सकते हैं। 2. सिंचाई के लिए बड़े जलाशयों की अनुमतिबिल में किसानों को सिंचाई के लिए बड़े जलाशय और कृत्रिम तालाब बनाने की प्रक्रिया आसान करने का भी प्रावधान है। पर्यावरणविदों का तर्क है कि इससे भूजल और नदियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और गर्मियों में जल संकट बढ़ सकता है। संसद से पास हुआ विधेयक फ्रांस की संसद में मंगलवार को पेश किए गए इस विधेयक को सीनेट ने 214 के मुकाबले 111 मतों से पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि यह कानून किसानों की बढ़ती लागत और घटती आय को देखते हुए लाया गया है, ताकि वे यूरोप के अन्य देशों के किसानों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें। बारबू ने जताई नाराजगी मोनिक बारबू ने कहा कि विवादित प्रावधान आखिरी समय में बिल में जोड़े गए और उन्हें हटाने पर सरकार ने कोई गंभीर चर्चा नहीं की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पिछले नौ महीनों में उन्होंने जंगलों, स्वच्छ जल, साफ हवा और जैव विविधता की रक्षा के लिए काम किया, लेकिन अब वह अपने उद्देश्यों को पूरा करने की स्थिति में नहीं हैं। पहले भी विवादों में रहा कीटनाशक एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन नियोनिकोटिनॉइड समूह के कीटनाशक हैं। फ्रांस ने 2018 में एसेटामिप्रिड पर प्रतिबंध लगाया था। इससे पहले भी इस प्रतिबंध को हटाने की कोशिश हुई थी, लेकिन फ्रांस की सर्वोच्च अदालत ने पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर संभावित खतरे का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

इंदौर में छात्र आंदोलन को मिला कांग्रेस का समर्थन, दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी धरने में पहुंचे

इंदौर के टंट्याभील चौराहे पर चल रहे छात्र आंदोलन को बुधवार रात कांग्रेस का खुला समर्थन मिला। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी धरना स्थल पहुंचे और छात्रों के बीच बैठकर उनके आंदोलन में शामिल हुए। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। टंट्याभील चौराहे पर पिछले कई दिनों से छात्र शिक्षा व्यवस्था, कथित पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन और सोनम वांगचुक को हिरासत में लिए जाने के बाद इंदौर में भी आंदोलन तेज हो गया है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र धरना स्थल पर पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार रात दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी ने छात्रों के बीच बैठकर आंदोलन का समर्थन किया। उनके साथ शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे सहित कई कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी धरने में शामिल हुए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस पिछले 25 दिनों से यह मांग उठा रही है और उन्होंने स्वयं 21 जून को भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी थी। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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