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अमेरिका-ईरान Peace Agreement से दुनिया में हलचल, 19 जून को हो सकता है ऐतिहासिक ऐलान

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कई सालों से तनाव और टकराव के बीच उलझे अमेरिका और ईरान के रिश्तों में अब नरमी के संकेत दिखाई देने लगे हैं। दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत के बाद Peace Deal के ड्राफ्ट पर डिजिटल साइन होने की खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समझौते की औपचारिक घोषणा 19 जून को स्विट्जरलैंड में की जा सकती है।

इस खबर के सामने आते ही दुनिया भर में राजनीतिक और आर्थिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि अगर यह डील पूरी तरह सफल होती है तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देगा।

डिजिटल साइन के बाद बढ़ी उम्मीदें

रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका और ईरान के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने शुरुआती समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सहमति जताई है। हालांकि अभी कुछ तकनीकी और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अंतिम बातचीत बाकी है।

सूत्रों की मानें तो इस बातचीत में कतर और पाकिस्तान जैसे देशों ने अहम भूमिका निभाई है। पिछले कुछ महीनों से दोनों देशों के बीच बैकडोर डिप्लोमेसी लगातार जारी थी, जिसके बाद अब यह बड़ा कदम सामने आया है।

क्या-क्या शामिल है इस Peace Deal में?

इस प्रस्तावित समझौते में कई अहम बिंदुओं पर चर्चा हुई है। इनमें युद्धविराम को मजबूत करना, स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज में समुद्री आवाजाही को सामान्य बनाना और ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर नई शर्तों के साथ बातचीत शुरू करना शामिल है।

इसके अलावा दोनों देशों के बीच अगले 60 दिनों तक तकनीकी स्तर पर चर्चा जारी रखने की भी बात कही जा रही है। जानकारों का मानना है कि यह कदम भविष्य में बड़े कूटनीतिक बदलाव का रास्ता खोल सकता है।

₹28 लाख करोड़ के Economic Package की चर्चा

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा अमेरिका की ओर से ईरान को दिए जाने वाले संभावित आर्थिक राहत पैकेज को लेकर हो रही है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका करीब 300 अरब डॉलर यानी लगभग ₹28 लाख करोड़ तक की आर्थिक मदद, निवेश या फ्रीज की गई संपत्तियों को रिलीज कर सकता है।

हालांकि अभी तक इस रकम की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिकी प्रशासन की तरफ से भी साफ कहा गया है कि अंतिम फैसला बातचीत पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

दुनिया की नजर 19 जून की बैठक पर

अगर 19 जून को यह समझौता औपचारिक रूप लेता है तो इसे पिछले कई दशकों में अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा डिप्लोमैटिक बदलाव माना जाएगा। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि इससे मध्य पूर्व में तनाव कम हो सकता है और वैश्विक तेल बाजार को भी राहत मिल सकती है।

तेल व्यापार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज में स्थिरता आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। वहीं निवेशकों को भी वैश्विक व्यापार में सुधार की उम्मीद दिखाई दे रही है।

अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ विवाद

हालांकि माहौल सकारात्मक जरूर दिख रहा है, लेकिन दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद अब भी बने हुए हैं। ईरान जहां प्रतिबंधों में पूरी राहत चाहता है, वहीं अमेरिका सुरक्षा और न्यूक्लियर निगरानी को लेकर सख्त शर्तों पर अड़ा हुआ है।

ऐसे में 19 जून की बैठक दोनों देशों के रिश्तों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। अब पूरी दुनिया की नजर इसी बात पर टिकी है कि क्या यह Peace Deal वास्तव में इतिहास बदल पाएगी या फिर बातचीत एक बार फिर अधूरी रह जाएगी।

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Yukta

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CJP

Jaipur Violence: CJP Chief Abhijeet Dipke पर हमला, RSS पर लगे गंभीर आरोप, मचा बवाल

जयपुर में हुए एक राजनीतिक प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके पर अचानक हुए हमले ने माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है। यह घटना 15 जून 2026 को शहीद स्मारक क्षेत्र में हुई, जहाँ बड़ी संख्या में समर्थक और युवा प्रदर्शन में शामिल थे। अचानक हुई इस घटना ने न सिर्फ मौके पर अफरा-तफरी मचा दी, बल्कि देशभर में राजनीतिक बहस भी शुरू कर दी। प्रदर्शन के बीच अचानक हमला प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दीपके भीड़ के बीच मौजूद थे। तभी कुछ लोगों ने उनके पास पहुंचकर धक्का-मुक्की शुरू कर दी और देखते ही देखते मामला हाथापाई तक पहुंच गया। वीडियो फुटेज में उन्हें कई बार थप्पड़ मारे जाने की बात सामने आई है, जिसके बाद वहां मौजूद लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया। फिलहाल मामले की जांच जारी है। RSS पर लगाए आरोप, बढ़ा विवाद हमले के बाद अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि उनके ऊपर हमला करने वाले लोग “RSS से जुड़े हो सकते हैं”। उन्होंने कहा कि जो भी उनके विचारों के खिलाफ आवाज उठाएगा, उसे डराने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि अभी तक पुलिस या किसी जांच एजेंसी द्वारा नहीं की गई है। दीपके ने यह भी कहा कि— “हम डरने वाले नहीं हैं, आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।” राजनीतिक बयानबाज़ी तेज इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। सोशल मीडिया पर असर, फॉलोअर्स को लेकर चर्चा इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर CJP को लेकर भारी चर्चा शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर यह मुद्दा ट्रेंडिंग बना हुआ है और लोग अलग-अलग राय रख रहे हैं। क्या है CJP? कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) एक युवा-आधारित सोशल मीडिया आंदोलन है, जो बेरोजगारी, परीक्षा विवाद और सरकारी नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज उठाने के लिए जाना जाता है। हाल के महीनों में यह संगठन तेजी से चर्चा में आया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Monsoon

Monsoon Update अरब सागर में अटका मानसून, MP में 5 दिन बाद बारिश के संकेत

देश के कई राज्यों में लोग बारिश का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इस बार मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून (Monsoon) फिलहाल अरब सागर और तेलंगाना क्षेत्र में अटका हुआ है। तेलंगाना में पिछले 6 दिनों से मानसून आगे नहीं बढ़ पाया, जिसका असर अब मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में भी दिखाई देने लगा है। तेज गर्मी और उमस के बीच लोग बारिश का इंतजार कर रहे हैं, वहीं किसान भी खेतों की तैयारी के बाद आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। आखिर क्यों रुक गया मानसून? मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अरब सागर में बने मौसम सिस्टम और कमजोर हवा के दबाव के कारण मानसून की गति धीमी हो गई है। आमतौर पर जून के दूसरे सप्ताह तक मानसून मध्य भारत के बड़े हिस्से में पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसकी चाल काफी सुस्त बनी हुई है। तेलंगाना में मानसून पिछले 6 दिनों से लगभग स्थिर है। यही वजह है कि मध्य भारत के राज्यों में बारिश की गतिविधियां उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ पा रही हैं। MP में कब पहुंचेगा मानसून? मौसम विभाग के मुताबिक मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री अगले करीब 5 दिनों में हो सकती है। शुरुआत में बालाघाट, छिंदवाड़ा, मंडला और जबलपुर जैसे जिलों में हल्की बारिश देखने को मिल सकती है। इसके बाद धीरे-धीरे मानसून पूरे प्रदेश में सक्रिय होगा। भोपाल और इंदौर समेत कई शहरों में फिलहाल बादल छाए रहने और हल्की बूंदाबांदी के आसार हैं, लेकिन भारी बारिश के लिए अभी थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। किसानों की बढ़ी चिंता मानसून में देरी का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है। खरीफ फसलों की बुवाई का समय शुरू हो चुका है, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसान अभी इंतजार कर रहे हैं। सोयाबीन, धान और मक्का जैसी फसलों की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीण इलाकों में कई किसान खेत तैयार करके बैठे हैं, लेकिन बारिश नहीं होने से बुवाई शुरू नहीं हो पा रही। अगर अगले सप्ताह तक मानसून सक्रिय हो जाता है तो स्थिति सामान्य हो सकती है। गर्मी और उमस से लोग बेहाल मानसून की देरी का असर आम लोगों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। दिन में तेज गर्मी और शाम को उमस लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। कई शहरों में तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है, जिससे बिजली की मांग भी लगातार बढ़ रही है। अगले सप्ताह बदल सकता है मौसम मौसम विभाग का अनुमान है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में नए सिस्टम बनने के बाद मानसून को फिर से गति मिल सकती है। इसके बाद मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में अच्छी बारिश होने की संभावना है। फिलहाल लोगों और किसानों दोनों की नजरें आने वाले कुछ दिनों के मौसम पर टिकी हुई हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Cough Syrup

Government Action on Cough Syrup: बिना Prescription दवा बेचने पर होगी कार्रवाई

देशभर में अब कफ सिरप (Cough Syrup) खरीदना पहले जितना आसान नहीं रहेगा। केंद्र सरकार ने दवाओं की बिक्री को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए साफ कर दिया है कि अब बिना डॉक्टर की पर्ची के कफ सिरप और दूसरी सिरप आधारित दवाएं मेडिकल स्टोर पर नहीं मिलेंगी। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी नई अधिसूचना के बाद यह नियम पूरे देश में लागू किया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, क्योंकि पिछले कुछ समय में कफ सिरप के गलत इस्तेमाल और मिलावटी दवाओं के कई मामले सामने आए थे। खासकर बच्चों और युवाओं में बिना सलाह के दवाएं लेने की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी थी। अब मेडिकल स्टोर पर क्या बदलेगा? नई गाइडलाइन लागू होने के बाद अब मेडिकल दुकानदारों को कफ सिरप बेचने से पहले डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन देखनी होगी। बिना पर्ची दवा बेचने पर कार्रवाई भी हो सकती है। इसके साथ ही कई दुकानों को दवा बिक्री का रिकॉर्ड रखने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं। अब तक सामान्य खांसी-जुकाम में लोग सीधे मेडिकल स्टोर से सिरप खरीद लेते थे, लेकिन नए नियम के बाद पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है। सरकार ने क्यों लिया यह फैसला? दरअसल, बीते कुछ वर्षों में भारत में बने कुछ कफ सिरप को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठे थे। कई मामलों में दूषित सिरप की वजह से बच्चों की मौत तक की खबरें सामने आई थीं। इसके अलावा कुछ लोग कफ सिरप का इस्तेमाल नशे के तौर पर भी कर रहे थे, जिसे रोकना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बिना जांच और सलाह के लंबे समय तक कफ सिरप लेना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। कुछ सिरप में ऐसे तत्व होते हैं जो अधिक मात्रा में लेने पर गंभीर साइड इफेक्ट पैदा कर सकते हैं। आम लोगों पर क्या होगा असर? इस फैसले के बाद लोगों को छोटी बीमारी में भी डॉक्टर के पास जाना पड़ सकता है। हालांकि शुरुआत में इससे थोड़ी परेशानी महसूस हो सकती है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इससे दवाओं का गलत उपयोग कम होगा और मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, कई बार लोग बच्चों को भी बिना सलाह के सिरप दे देते हैं, जो खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में यह फैसला भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने में मदद कर सकता है। Health Experts ने फैसले को बताया जरूरी दवा विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने सरकार के इस फैसले का समर्थन किया है। उनका कहना है कि भारत में लंबे समय से दवाओं की ओवर-द-काउंटर बिक्री पर सख्ती की जरूरत महसूस की जा रही थी। अब नए नियम से मेडिकल सिस्टम में ज्यादा पारदर्शिता आएगी और मरीजों को सुरक्षित इलाज मिल सकेगा। सरकार का उद्देश्य साफ है—लोगों तक सुरक्षित दवाएं पहुंचाना और कफ सिरप के अनियंत्रित इस्तेमाल पर रोक लगाना। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Earthquake

6.7 Magnitude Earthquake in Indonesia: भूकंप के तेज झटकों से सहमे लोग

Indonesia में मंगलवार को आए शक्तिशाली भूकंप (Earthquake) ने लोगों में दहशत फैला दी। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 6.7 मापी गई, जिसके बाद कई इलाकों में लोग घबराकर अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। अचानक धरती हिलने से लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। समुद्र के भीतर था भूकंप का केंद्र स्थानीय एजेंसियों के मुताबिक भूकंप का केंद्र समुद्र के भीतर था। झटके इतने तेज थे कि कई शहरों में लोगों ने कुछ सेकेंड तक जमीन को लगातार कांपते हुए महसूस किया। कई जगहों पर लोग खुले मैदानों और सड़कों पर जमा हो गए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में लोग डर के कारण इधर-उधर भागते नजर आ रहे हैं। प्रशासन अलर्ट मोड पर, सुनामी का बड़ा खतरा नहीं हालांकि अब तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रशासन ने राहत और बचाव टीमों को अलर्ट पर रखा है। तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। फिलहाल सुनामी की कोई बड़ी चेतावनी जारी नहीं की गई है, लेकिन अधिकारियों की नजर पूरे हालात पर बनी हुई है। क्यों बार-बार आते हैं इंडोनेशिया में भूकंप? इंडोनेशिया दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है। यह देश “Ring of Fire” क्षेत्र में स्थित है, जहां टेक्टोनिक प्लेट्स की हलचल के कारण अक्सर भूकंप आते रहते हैं। इससे पहले भी यहां कई विनाशकारी भूकंप आ चुके हैं, जिनमें भारी तबाही देखने को मिली थी। लोगों से अफवाहों से बचने की अपील भूकंप के बाद लोगों में डर का माहौल है। प्रशासन लगातार लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील कर रहा है। राहत की बात यह रही कि फिलहाल किसी बड़ी तबाही की खबर सामने नहीं आई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Ayodhya

Ayodhya Ram Mandir Case: चढ़ावे में गड़बड़ी पर SIT Action, आज हो सकती है बड़ी कार्रवाई

Ayodhya के Ram Mandir में चढ़ावे की रकम में कथित चोरी और गड़बड़ी का मामला अब तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। जानकारी के मुताबिक आज इस मामले में दो अलग-अलग FIR दर्ज की जा सकती हैं। वहीं SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) ने मंदिर परिसर में बंद कमरे में कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों से लंबी पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार जांच टीम यह समझने की कोशिश कर रही है कि आखिर इतनी सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी कैसे हुई। इसी को लेकर कर्मचारियों से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे गए। कर्मचारियों से पूछे गए अहम सवाल SIT ने पूछताछ के दौरान कर्मचारियों से यह जानने की कोशिश की कि मंदिर में ड्यूटी खत्म होने के बाद किसी प्रकार की चेकिंग होती थी या नहीं। इसके अलावा यह भी पूछा गया कि चढ़ावे की रकम को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया क्या थी और किन लोगों को उस जगह तक पहुंचने की अनुमति थी। जांच एजेंसियों ने कर्मचारियों की एंट्री-एग्जिट व्यवस्था, CCTV निगरानी और स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा को लेकर भी विस्तार से जानकारी जुटाई है। माना जा रहा है कि कई रिकॉर्ड और फुटेज को दोबारा खंगाला जा रहा है। दो FIR दर्ज होने की संभावना मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पहली FIR चढ़ावे की रकम में कथित चोरी और गबन को लेकर दर्ज हो सकती है। वहीं दूसरी FIR सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही और नियमों की अनदेखी को लेकर की जा सकती है। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन जांच की गंभीरता को देखते हुए आने वाले दिनों में बड़ा खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है। श्रद्धालुओं में नाराजगी, प्रशासन पर उठे सवाल राम मंदिर देश की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। ऐसे में चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी की खबर सामने आने के बाद श्रद्धालुओं में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि मंदिर जैसी संवेदनशील जगह पर सुरक्षा व्यवस्था और ज्यादा मजबूत होनी चाहिए थी। फिलहाल SIT पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। CCTV फुटेज, ड्यूटी रजिस्टर और कर्मचारियों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में आखिर कौन-कौन लोग सामने आते हैं और प्रशासन क्या कदम उठाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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