आपका चैनल --
ताज़ा खबर
BREAKINGदेश-हरपलट्रम्प-जिनपिंग की व्हाइट हाउस में द्विपक्षीय बैठक खत्म, बोले- अमेरिका और चीन दोस्त; जिनपिंग ने कहा- रेस हो, रेसलिंग नहीं◆BREAKINGमध्य प्रदेशमध्य प्रदेश में शुक्रवार से शुरू होगी सुगम परिवहन सेवा, 7 शहरों में दौड़ेंगी 351 बसें; ₹2 प्रति किमी किराया तय◆BREAKINGदेश-हरपलगाजा में महिलाओं और लड़कियों पर हिंसा बढ़ी, 14 साल की बच्ची की 2 बोरी आटे के बदले शादी का दावा; UNFPA रिपोर्ट में चौंकाने वाले मामले◆BREAKINGमध्य प्रदेशसीहोर में जीतू पटवारी का बीजेपी पर हमला, चुनावी गड़बड़ियों के विरोध में कांग्रेस करेगी प्रदेशव्यापी प्रदर्शन◆BREAKINGबिज़नेस₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर MDR को लेकर विवाद, ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा शुल्क; 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ का ऐलान◆BREAKINGस्पोर्ट्सएशियन गेम्स में भारत ने जीते 5 मेडल, 4×400 मीटर मिक्स्ड रिले में सिल्वर; कुल पदक 17 हुए◆BREAKINGबिज़नेसWhatsApp Birthday Feature: दोस्तों का Birthday अब नहीं छूटेगा, App में होगा बड़ा बदलाव◆BREAKINGदेश-हरपलRahul Gandhi: SIR विवाद के बीच आज Press Conference, बोले- संविधान के दुश्मनों का पर्दाफाश◆BREAKINGदेश-हरपलट्रम्प-जिनपिंग की व्हाइट हाउस में द्विपक्षीय बैठक खत्म, बोले- अमेरिका और चीन दोस्त; जिनपिंग ने कहा- रेस हो, रेसलिंग नहीं◆BREAKINGमध्य प्रदेशमध्य प्रदेश में शुक्रवार से शुरू होगी सुगम परिवहन सेवा, 7 शहरों में दौड़ेंगी 351 बसें; ₹2 प्रति किमी किराया तय◆BREAKINGदेश-हरपलगाजा में महिलाओं और लड़कियों पर हिंसा बढ़ी, 14 साल की बच्ची की 2 बोरी आटे के बदले शादी का दावा; UNFPA रिपोर्ट में चौंकाने वाले मामले◆BREAKINGमध्य प्रदेशसीहोर में जीतू पटवारी का बीजेपी पर हमला, चुनावी गड़बड़ियों के विरोध में कांग्रेस करेगी प्रदेशव्यापी प्रदर्शन◆BREAKINGबिज़नेस₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर MDR को लेकर विवाद, ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा शुल्क; 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ का ऐलान◆BREAKINGस्पोर्ट्सएशियन गेम्स में भारत ने जीते 5 मेडल, 4×400 मीटर मिक्स्ड रिले में सिल्वर; कुल पदक 17 हुए◆BREAKINGबिज़नेसWhatsApp Birthday Feature: दोस्तों का Birthday अब नहीं छूटेगा, App में होगा बड़ा बदलाव◆BREAKINGदेश-हरपलRahul Gandhi: SIR विवाद के बीच आज Press Conference, बोले- संविधान के दुश्मनों का पर्दाफाश◆

NE

News Elementor

Banner

Canada PGWP पढ़ाई पूरी, लाखों खर्च फिर भी Work Permit से इनकार; Punjabi Students का बड़ा Protest

Table of Content

विदेश में बेहतर शिक्षा और सुनहरे भविष्य का सपना लेकर हर साल हजारों भारतीय छात्र कनाडा (Canada) का रुख करते हैं। लेकिन इस समय कनाडा में पढ़ रहे सैकड़ों भारतीय छात्रों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। खासतौर पर पंजाब से जुड़े 500 से अधिक छात्र पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) नहीं मिलने के विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं। कई छात्र कई दिनों से धरना दे रहे हैं, जबकि कुछ ने भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है।

छात्रों का कहना है कि उन्होंने कनाडा में पढ़ाई के लिए लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन पढ़ाई पूरी होने के बाद अब उन्हें काम करने की अनुमति नहीं मिल रही। इससे उनका करियर, आर्थिक स्थिति और भविष्य तीनों दांव पर लग गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शन कर रहे अधिकांश छात्र अल्बर्टा (Alberta) के विभिन्न कॉलेजों से पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। इनमें Portage College के छात्र भी शामिल हैं। छात्रों का आरोप है कि जब उन्होंने एडमिशन लिया था, तब उन्हें पढ़ाई पूरी होने के बाद Post-Graduation Work Permit (PGWP) मिलने की उम्मीद थी। लेकिन अब बड़ी संख्या में उनके आवेदन खारिज कर दिए गए हैं।

छात्रों का कहना है कि परिवारों ने कर्ज लेकर उनकी पढ़ाई का खर्च उठाया। कॉलेज फीस, रहने का खर्च और अन्य जरूरतों पर लाखों रुपये खर्च हुए। अब वर्क परमिट नहीं मिलने से वे न नौकरी कर पा रहे हैं और न ही आगे स्थायी निवास (PR) की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों की क्या मांग है?

धरने पर बैठे छात्रों का कहना है कि वे किसी विशेष रियायत की मांग नहीं कर रहे हैं। उनकी केवल एक मांग है कि उनके मामलों की निष्पक्ष समीक्षा की जाए।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने पोस्टर लेकर नारे लगाए—

“We Studied Here, We Deserve to Work Here”

यानी, “हमने यहां पढ़ाई की है, इसलिए हमें यहां काम करने का मौका मिलना चाहिए।”

कई छात्रों का कहना है कि यदि उन्हें वापस भारत लौटना पड़ा तो उनका करियर और परिवार की वर्षों की मेहनत बेकार हो जाएगी।

Alberta Premier Danielle Smith का सख्त बयान

इस पूरे विवाद के बीच अल्बर्टा की प्रीमियर Danielle Smith का बयान भी चर्चा में है। उन्होंने साफ कहा कि जिन अंतरराष्ट्रीय छात्रों के पास वैध वीजा, वर्क परमिट या कानूनी रूप से रहने की अनुमति नहीं है, उन्हें कनाडा छोड़कर अपने देश लौटना होगा।

उन्होंने कहा कि कनाडा के इमिग्रेशन नियम सभी के लिए समान हैं और सरकार इनमें कोई विशेष छूट नहीं दे सकती। उनके इस बयान के बाद छात्रों की चिंता और बढ़ गई है।

छात्रों को मिला राजनीतिक समर्थन

प्रदर्शन कर रहे छात्रों से कुछ कनाडाई सांसदों ने मुलाकात की और उनकी समस्याओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का भरोसा दिया। छात्रों को उम्मीद है कि सरकार उनके मामलों की दोबारा समीक्षा करेगी और कोई समाधान निकलेगा।

हालांकि अभी तक सरकार की ओर से वर्क परमिट को लेकर किसी बड़े राहत पैकेज या नीति बदलाव की घोषणा नहीं की गई है।

क्यों बढ़ रही है Canada में सख्ती?

पिछले कुछ वर्षों में कनाडा सरकार ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़े कई नियमों में बदलाव किए हैं। सरकार का कहना है कि शिक्षा प्रणाली का गलत इस्तेमाल रोकना, इमिग्रेशन प्रक्रिया को संतुलित रखना और स्थानीय रोजगार बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।

इन्हीं बदलावों के चलते अब वर्क परमिट और स्थायी निवास (PR) से जुड़े नियम पहले की तुलना में अधिक सख्त हो गए हैं।

भारतीय छात्रों पर सबसे ज्यादा असर

भारत, खासकर पंजाब, हर साल कनाडा भेजे जाने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों की सबसे बड़ी संख्या वाले राज्यों में शामिल है। अधिकांश छात्र पढ़ाई के बाद नौकरी और फिर Permanent Residency (PR) की उम्मीद लेकर कनाडा जाते हैं।

ऐसे में वर्क परमिट पर आई इस सख्ती ने हजारों भारतीय छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश में पढ़ाई की योजना बना रहे छात्रों को अब किसी भी कॉलेज में दाखिला लेने से पहले वर्क परमिट और इमिग्रेशन नियमों की पूरी जानकारी जरूर लेनी चाहिए।

आगे क्या होगा?

फिलहाल प्रदर्शन जारी है और छात्र अपने मामलों की दोबारा समीक्षा की मांग पर अड़े हुए हैं। दूसरी ओर, अल्बर्टा सरकार अपने रुख पर कायम है कि जिन छात्रों के पास वैध कानूनी दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें देश छोड़ना होगा।

अब सबकी नजर कनाडा सरकार के अगले फैसले पर है। यदि कोई समाधान नहीं निकलता, तो सैकड़ों भारतीय छात्रों को वापस लौटना पड़ सकता है। यह मामला सिर्फ वर्क परमिट का नहीं, बल्कि उन परिवारों के सपनों का भी है जिन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए जीवनभर की कमाई दांव पर लगा दी।

हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

Yukta

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Editor's Picks

ट्रम्प-जिनपिंग की व्हाइट हाउस में द्विपक्षीय बैठक खत्म, बोले- अमेरिका और चीन दोस्त; जिनपिंग ने कहा- रेस हो, रेसलिंग नहीं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच व्हाइट हाउस में द्विपक्षीय बैठक खत्म हो गई है। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने अमेरिका और चीन के बीच संबंधों और आपसी सहयोग पर बात की। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका और चीन दोस्त हैं और दोनों देशों के हित एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। वहीं, शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों के लिए मिलकर काम करना फायदेमंद है, जबकि टकराव से दोनों को नुकसान होगा। जिनपिंग बोले- अमेरिका और चीन में रेस हो, रेसलिंग नहीं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दोनों देशों के संबंधों को लेकर कहा कि अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए, लेकिन इसे टकराव में नहीं बदलना चाहिए। उन्होंने कहा, “अमेरिका-चीन के बीच रेस हो, रेसलिंग नहीं। दोनों देशों की कोशिश एक-दूसरे से आगे निकलने की होनी चाहिए, न कि ऐसी लड़ाई जिसमें एक की जीत और दूसरे की हार हो।” जिनपिंग के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सहयोग से दोनों पक्षों को फायदा हो सकता है, जबकि टकराव दोनों के लिए नुकसानदायक होगा। कोर्ट के आदेश के बाद पत्रकारों को व्हाइट हाउस में एंट्री CNN, पॉलिटिको और MS NOW के पत्रकारों को करीब 12 बजे अमेरिकी समय के मुताबिक व्हाइट हाउस में दोबारा प्रवेश की अनुमति मिली। इससे पहले ट्रम्प प्रशासन ने कोर्ट के आदेश के बावजूद इन पत्रकारों को अंदर जाने से रोक दिया था। रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने 23 सितंबर की रात करीब 1 बजे आदेश जारी कर इन पत्रकारों को व्हाइट हाउस में प्रवेश देने को कहा था। इसके बावजूद 24 सितंबर की सुबह पत्रकारों को अंदर जाने से रोका गया। इसके बाद तीनों मीडिया संस्थान कोर्ट पहुंचे और तत्काल सुनवाई की मांग की। कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन से दोपहर 12:30 बजे तक जवाब मांगा था। इस विवाद के बीच व्हाइट हाउस में ट्रम्प और जिनपिंग की मुलाकात का पत्रकारों ने बहिष्कार किया। अमेरिकी टीवी चैनलों पर बैठक का लाइव वीडियो भी नहीं दिखाया गया। बाद में दोपहर में पत्रकारों को व्हाइट हाउस में प्रवेश की अनुमति दे दी गई। प्रोटोकॉल तोड़कर जिनपिंग को रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचे ट्रम्प चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग गुरुवार सुबह अमेरिका पहुंचे। उनके स्वागत के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प खुद जॉइंट बेस एंड्रयूज एयरपोर्ट पहुंचे। इस दौरान ट्रम्प के साथ फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रम्प भी मौजूद थीं। शी जिनपिंग के साथ उनकी पत्नी पेंग लियुआन भी अमेरिका पहुंची हैं।

मध्य प्रदेश में शुक्रवार से शुरू होगी सुगम परिवहन सेवा, 7 शहरों में दौड़ेंगी 351 बसें; ₹2 प्रति किमी किराया तय

मध्य प्रदेश में शुक्रवार से सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत होने जा रही है। भोपाल, इंदौर समेत प्रदेश के 7 शहरों में कुल 351 बसें संचालित की जाएंगी। परिवहन विभाग ने इंटरसिटी बस सेवा के लिए 2 रुपए प्रति किलोमीटर किराया निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी शुक्रवार को भोपाल के बीएचईएल दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में बसों को हरी झंडी दिखाकर सेवा की शुरुआत करेंगे। सेवा के शुभारंभ से पहले गुरुवार शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बीएचईएल दशहरा मैदान पहुंचकर कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने मंच, सभा स्थल और अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने बसों को देखा और ड्राइवरों से बातचीत की। इस दौरान परिवहन सचिव मनीष सिंह भी मौजूद रहे। सीएम बोले- बेहतर और आधुनिक परिवहन सुविधा मिलेगी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 21 साल बाद प्रदेश में लोक परिवहन बस सेवा दोबारा शुरू होना ऐतिहासिक निर्णय है। उन्होंने कहा कि आधुनिक ई-बसों और सुविधायुक्त बसों का नेटवर्क चरणबद्ध तरीके से नगरों और जिलों तक पहुंचाया जाएगा। इसके तहत यात्रियों की सुविधा के लिए बस स्टॉप, बस स्टैंड, इलेक्ट्रॉनिक सुविधाएं और बेहतर कंट्रोलिंग व्यवस्था विकसित की जाएगी। एक व्यवस्था के तहत संचालित होंगी बसें सुगम परिवहन सेवा के तहत अलग-अलग बस एजेंसियों की सेवाओं को एक व्यवस्था के तहत लाने की योजना है। भोपाल में भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड के साथ पीएम बस सेवा का संचालन किया जा रहा है। इसी तरह इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन समेत अन्य शहरों में भी बस सेवाओं को एक व्यवस्था के तहत संचालित किया जाएगा। बसों को एकरूपता देने के लिए एक ही रंग में पेंट या स्टीकर लगाने का काम किया गया है। सोशल मीडिया पर इससे संबंधित फोटो और वीडियो सामने आने के बाद अधिकारियों ने बताया कि यह काम संबंधित बस एजेंसियों की ओर से किया गया है। सुगम परिवहन सेवा में इलेक्ट्रिक बसें भी शामिल सुगम परिवहन सेवा में ईजी मायट्रिप की सहायक कंपनी ईएमटीईवी/ईजी ग्रीनमोबिलिटी की बसें भी शामिल हैं। कंपनी की 12 मीटर इलेक्ट्रिक सीटर बस को लंबी दूरी के सार्वजनिक परिवहन के लिए तैयार किया गया है। इन बसों में प्रीमियम और एर्गोनॉमिक सीटिंग, व्यक्तिगत एयर वेंट और यात्रियों के लिए पर्याप्त बैठने की जगह उपलब्ध कराई गई है। बसों में यात्रियों के प्रवेश और आवागमन को भी सुविधाजनक बनाने की व्यवस्था की गई है।

गाजा में महिलाओं और लड़कियों पर हिंसा बढ़ी, 14 साल की बच्ची की 2 बोरी आटे के बदले शादी का दावा; UNFPA रिपोर्ट में चौंकाने वाले मामले

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) ने गाजा में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ बढ़ती लैंगिक हिंसा को लेकर रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में बाल विवाह, जबरन शादी, यौन हिंसा और घरेलू हिंसा के कई मामलों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक पिता ने अपनी 14 साल की बेटी की शादी दो बोरी आटे के बदले कर दी। UNFPA ने गाजा में काम कर रही 10 संस्थाओं से जानकारी जुटाई। इसके अलावा गाजा सिटी और खान यूनिस के विस्थापन शिविरों में रहने वाली 230 महिलाओं से बातचीत की गई। रेप के बाद आरोपियों से शादी कराने के मामले रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में रेप की पीड़िताओं की शादी आरोपियों या किसी दूसरे व्यक्ति से कराए जाने के मामले भी सामने आए हैं। परिवार और समाज में बदनामी से बचने तथा ‘इज्जत’ बनाए रखने के नाम पर कुछ पीड़िताओं की शादी करा दी गई। रिपोर्ट में बाल और जबरन शादियों के दर्ज मामलों में 123% बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया गया है। स्कूल, टेंट और समुद्र किनारे तक यौन हिंसा गाजा सिटी और खान यूनिस के विस्थापन शिविरों में रहने वाली महिलाओं ने यौन हिंसा की कई घटनाओं की जानकारी दी। उनके मुताबिक, ऐसी घटनाएं टेंट, शरणस्थल के तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे स्कूलों, गलियों और समुद्र किनारे तक में हुईं। कुछ मामलों में आरोपी पीड़िता को पहले से जानता था। ऐसे मामलों को छिपाने की कोशिश की गई और कुछ पीड़िताओं की शादी आरोपी या किसी दूसरे व्यक्ति से करा दी गई। एक महिला ने बताया कि स्कूल में रेप की घटना सामने आने के अगले दिन उसी स्कूल में शादी और जश्न मनाया गया। महिला के मुताबिक, युद्ध से पहले ऐसी घटनाओं की कल्पना करना भी मुश्किल था। दिव्यांग लड़कियों पर भी खतरा UNFPA की रिपोर्ट में दिव्यांग महिलाओं और लड़कियों को भी अधिक जोखिम में बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ आरोपी उनकी स्थिति का फायदा उठाते हैं। गाजा सिटी की एक महिला ने बताया कि एक दिव्यांग लड़की करीब सात घंटे तक गायब रही। वापस लौटने पर वह रो रही थी, लेकिन परिवार ने समझा कि वह डर गई है। करीब दो महीने बाद पता चला कि वह गर्भवती थी और उसके साथ रेप हुआ था। आरोपी का पता नहीं चल सका। एक अन्य मामले में 20 साल की ऐसी महिला का जिक्र है, जिसे बातें समझने में परेशानी होती थी। उसके मुताबिक, कई युवकों ने उसका उत्पीड़न किया और उनमें से एक ने उसके साथ रेप किया। माता-पिता की मौत के बाद 14-15 साल की लड़कियों की शादी युद्ध में माता-पिता खो चुकी लड़कियों के सामने भी कम उम्र में शादी का खतरा बढ़ गया है। गाजा सिटी की एक महिला ने बताया कि उसके परिवार की 14 और 15 साल की दो लड़कियों के माता-पिता युद्ध में मारे गए थे। इसके बाद उनके चाचाओं ने दोनों की शादी कर दी। महिला के मुताबिक, चाचा उनकी जिम्मेदारी और खर्च नहीं उठाना चाहते थे। दोनों लड़कियों की शादी उस उम्र में कर दी गई, जब वे शादी और जीवन की जिम्मेदारियों को ठीक से समझ भी नहीं पाती थीं। परिवार के भीतर भी यौन हिंसा रिपोर्ट में परिवार के भीतर यौन हिंसा का एक मामला भी दर्ज है। एक महिला ने बताया कि पति की मौत के बाद उसके देवर ने सोते समय उसके साथ रेप किया। बाद में वह गर्भवती हो गई। परिवार को घटना की जानकारी मिलने के बाद आरोपी के परिवार ने दोनों की शादी कराने की कोशिश की। मामला जज के सामने पहुंचा, लेकिन शादी नहीं हो सकी। रिपोर्ट के अनुसार, उस समय महिला पति की मौत के बाद धार्मिक नियमों के तहत निर्धारित प्रतीक्षा अवधि में थी और जज ने मामले को व्यभिचार माना। युद्ध के साथ घरेलू हिंसा में भी बढ़ोतरी रिपोर्ट में महिलाओं ने बताया कि युद्ध के बाद परिवारों के भीतर भी हिंसा बढ़ी है। पति, पिता, भाई और ससुराल वालों की ओर से मारपीट, गाली-गलौज और अन्य प्रकार की हिंसा के मामले सामने आए। एक महिला ने बताया कि युद्ध से पहले उसका पति उस पर गुस्सा नहीं करता था। लेकिन घर तबाह होने और सब कुछ खोने के बाद वह चिड़चिड़ा रहने लगा और अपना गुस्सा पत्नी और बच्चों पर निकालने लगा। एक अन्य महिला ने कहा कि मारपीट महिलाओं के खिलाफ होने वाली सबसे आम हिंसा में शामिल है। महिलाओं के मुताबिक, घर उजड़ना, बेरोजगारी, गरीबी, बार-बार विस्थापन और तनाव इसके पीछे प्रमुख कारणों में शामिल हैं। संबंध बनाने से इनकार करने पर पत्नी की पिटाई विस्थापन शिविरों में परिवारों के पास निजी जगह भी बेहद सीमित है। एक महिला ने बताया कि उसके पति ने उससे शारीरिक संबंध बनाने की मांग की। बच्चों के सामने ऐसा करने से इनकार करने पर पति ने उसे पीटा, उसका हाथ तोड़ दिया और आंख पर चोट पहुंचाई। महिला के मुताबिक, जिस टेंट में वे रहते थे, उसमें बच्चों समेत 12 लोग रहते थे। बाद में पति ने स्कूल के बाथरूम में भी उसके साथ जबरन संबंध बनाए। रिपोर्ट में कहा गया है कि भीड़भाड़ और निजता की कमी ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा का खतरा बढ़ाया है। हालांकि, रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि वैवाहिक रेप युद्ध के बाद शुरू हुई नई समस्या नहीं है। मानवीय मदद पर भी नियंत्रण भोजन और जरूरी सामान की कमी ने महिलाओं की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। कुछ महिलाओं ने बताया कि उनके पति मानवीय सहायता के तौर पर मिलने वाली चीजों पर भी नियंत्रण रखते हैं। गाजा सिटी की एक महिला ने बताया कि उसे अपने फोन से मदद से जुड़े संदेश मिटाने पड़ते हैं। उसे डर रहता है कि अगर पति को सहायता मिलने की जानकारी हो गई तो वह उसे और बच्चों को मिलने वाली मदद भी छीन सकता है। एक अन्य महिला ने बताया कि कुछ पति परिवार के लिए खाना खरीदने के बजाय पैसे नशे या सिगरेट पर खर्च कर देते हैं। विरोध करने पर पत्नियों के साथ हिंसा की जाती है। हिंसा के बावजूद पति के पास लौटने को मजबूर महिला रिपोर्ट में एक ऐसी महिला का मामला भी सामने आया जिसे पति पीटता था, गालियां देता था और यौन...

सीहोर में जीतू पटवारी का बीजेपी पर हमला, चुनावी गड़बड़ियों के विरोध में कांग्रेस करेगी प्रदेशव्यापी प्रदर्शन

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी सीहोर के चिंतामन गणेश मंदिर पहुंचे। उन्होंने मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार, चुनाव व्यवस्था और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा। ‘मैच फिक्सिंग’ वाले चुनाव पर उठाए सवाल जीतू पटवारी ने कहा कि राहुल गांधी ने देश के सामने चुनाव व्यवस्था को लेकर सच्चाई रखी है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अब देश को सोचना होगा कि क्या ‘मैच फिक्सिंग’ वाले चुनाव से देश का भविष्य तय हो सकता है। पटवारी ने संविधान और लोकतंत्र को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्या देश का संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा कायम रह पाएगा, इसका फैसला अब जनता को करना है। चुनावी गड़बड़ियों के विरोध में कांग्रेस का आंदोलन पटवारी ने चुनावी गड़बड़ियों के विरोध में कांग्रेस के प्रदेशव्यापी आंदोलन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पार्टी चरणबद्ध तरीके से प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि मंगलवार को प्रदेश के सभी जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ता कलेक्टर कार्यालय और निर्वाचन कार्यालयों का घेराव करेंगे। वहीं, सोमवार को प्रदेशभर से हजारों कांग्रेस कार्यकर्ता भोपाल स्थित मुख्य निर्वाचन कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन करेंगे। कांग्रेस की ओर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज कर जेल भेजने की मांग किए जाने की बात भी पटवारी ने कही। आंबेडकर की तस्वीर हटाने पर जताई आपत्ति सीहोर के पीजी कॉलेज से डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर हटाए जाने के मामले पर भी जीतू पटवारी ने आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि महापुरुषों का अनादर करना बीजेपी की सोच का हिस्सा है। पटवारी ने बीजेपी पर नफरत और बंटवारे की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी हर जगह अपना राजनीतिक फायदा देखती है। उन्होंने कहा कि देश की जनता सब कुछ देख रही है और आने वाले चुनावों में बीजेपी को इसका जवाब देगी।

₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर MDR को लेकर विवाद, ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा शुल्क; 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ का ऐलान

₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर प्रस्तावित 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर सरकार और व्यापारी संगठनों के बीच विवाद बढ़ गया है। सरकार के सूत्रों के मुताबिक, यह शुल्क ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा और MDR से मिलने वाली पूरी रकम UPI सिस्टम से जुड़े बैंकों और दूसरी संस्थाओं के बीच बांटी जाएगी। सरकारी सूत्रों ने विपक्ष के उस आरोप को भी खारिज किया है, जिसमें MDR को ग्राहकों पर लगाया जाने वाला टैक्स बताया गया था। सरकार का कहना है कि MDR न टैक्स है, न सेस और न ही सरचार्ज। MDR की रकम कैसे बांटी जाएगी? सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कुल MDR की रकम का वितरण इस तरह होगा: सूत्रों के मुताबिक, MDR से मिलने वाली राशि का कोई हिस्सा सीधे सरकारी खजाने में नहीं जाएगा। 2 अक्टूबर को देशभर में ‘नो UPI डे’ प्रस्तावित UPI शुल्क के विरोध में व्यापारी संगठनों ने 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाने का ऐलान किया है। इस दिन देशभर के व्यापारी और दुकानदार UPI से पेमेंट नहीं लेने की योजना बना रहे हैं। विरोध के दौरान दुकानों पर लगे UPI QR कोड, स्कैनर, साउंड बॉक्स और दूसरे डिजिटल पेमेंट डिवाइस को काले कपड़े से ढककर विरोध जताने की बात कही गई है। व्यापारी संगठनों की मांग है कि 15 अक्टूबर से लागू होने वाले प्रस्तावित चार्ज को वापस लिया जाए। 500 से ज्यादा व्यापारी संगठन आंदोलन में शामिल होने का दावा महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MACCIA) के अध्यक्ष रवींद्र मंगवे के मुताबिक, यह आंदोलन सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने दावा किया कि देशभर के 500 से ज्यादा प्रमुख व्यापारी संगठन इसमें शामिल होंगे। व्यापारी संगठनों का कहना है कि रिटेल व्यापारी और डिस्ट्रीब्यूटर कम मार्जिन पर काम करते हैं। ऐसे में डिजिटल पेमेंट पर अतिरिक्त शुल्क लगने से उनकी लागत बढ़ सकती है। व्यापारियों ने UPI चार्ज का विरोध क्यों किया? व्यापारी संगठनों की ओर से दिए गए तर्कों के मुताबिक: बड़े और छोटे व्यापारियों के लिए अलग नियम प्रस्तावित व्यवस्था में व्यापारियों को उनके UPI कलेक्शन के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में रखा गया है। बड़े व्यापारियों पर 0.4% MDR: जिन व्यापारियों की महीने में UPI से कमाई ₹1 लाख से ज्यादा है, उन्हें ₹2,000 से अधिक के प्रत्येक पर्सन-टू-मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR + GST देना होगा। छोटे व्यापारियों को राहत: जिन व्यापारियों का मासिक UPI कलेक्शन ₹1 लाख तक है, उन पर ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर भी MDR नहीं लगेगा। लगातार तीन महीने का नियम: अगर कोई छोटा व्यापारी लगातार तीन महीने तक ₹1 लाख से ज्यादा का UPI कलेक्शन करता है, तो बैंक उसे बड़े मर्चेंट की कैटेगरी में डाल सकते हैं। ₹2,000 तक के पेमेंट पर कोई शुल्क नहीं बड़े व्यापारियों को भी ₹2,000 या उससे कम के हर UPI पेमेंट पर MDR नहीं देना होगा। ₹2,000 की सीमा पूरे दिन की बिक्री पर नहीं, बल्कि हर एक ट्रांजैक्शन पर लागू होगी। वहीं, ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 + GST बताई गई है। कुछ सेक्टर में सिर्फ ₹5 की फ्लैट फीस पेट्रोल पंप, रेलवे, बिल पेमेंट, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और एजुकेशन से जुड़े व्यापारियों के लिए ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर 0.4% MDR के बजाय ₹5 की फ्लैट फीस प्रस्तावित है। व्यापारी संगठनों के मुताबिक, यह शुल्क क्रेडिट कार्ड के 1.5% से 2.5% और डेबिट कार्ड के 0.90% तक के शुल्क की तुलना में कम है। MDR क्या होता है? MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो व्यापारी डिजिटल पेमेंट सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बैंक, पेमेंट गेटवे या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देता है। यह शुल्क डिजिटल पेमेंट के इंफ्रास्ट्रक्चर और लेनदेन नेटवर्क से जुड़ी लागत को पूरा करने के लिए लिया जाता है। इस व्यवस्था में शुल्क व्यापारी से लिया जाता है, ग्राहक से नहीं।

You might have missed

About Me

देशहरपल सिर्फ खबरों का मंच नहीं, बल्कि आपकी आवाज़ को सामने लाने का एक सशक्त माध्यम भी है। यहां आपको ताज़ातरीन खबरों के साथ-साथ नौकरी, शिक्षा, और नए भारत की बदलती आर्थिक तस्वीर पर उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी मिलेगी।

Phone: +91 9406783569, +91 755 484 8829
Email: support@deshharpal.com
Address : A-23 Sakshi Bunglow Trilanga Near Aura Mall Bhopal M.P

Recent Posts

  • All Post
  • Breaking News
  • Education
  • More News
  • Web Story
  • एंटरटेनमेंट
  • देश-हरपल
  • धर्म-कर्म
  • प्रदेश
  • बिज़नेस
  • वर्ल्ड न्यूज़
  • वीडियो
  • स्पोर्ट्स
    •   Back
    • एक्सक्लूसिव
    • Editorial
    •   Back
    • IPL 2026
    • T20 वर्ल्ड कप
    • FIFA 2026
    •   Back
    • सोच-विचार
    • हेल्थ
    • ट्रैवल
    • कल्चर
    • एनवायरनमेंट
    • Impact Feature
    •   Back
    • राशिफल
    • पंचांग
    • पर्व-त्यौहार
    • पूजा-पाठ
    • चैत्र नवरात्रि 2025
    •   Back
    • मध्य प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    •   Back
    • टीवी
    • वेब-सीरीज
    • फिल्म रिव्यू
    • बॉलीवुड
    •   Back
    • लाइफस्टाइल
    •   Back
    • स्टॉक-मार्केट

© 2023 Deshharpal. All Rights Reserved.