उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बार मुकाबला सिर्फ बड़े दलों के बीच नहीं होगा, बल्कि 5 राज्यों की 12 राजनीतिक पार्टियां भी चुनावी मैदान में अपनी ताकत आजमाने की तैयारी कर रही हैं। ऐसे में मुकाबला और भी दिलचस्प होने की संभावना है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद और अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल जैसे चेहरे कई सीटों पर वोटों का समीकरण प्रभावित कर सकते हैं। भले ही ये दल बड़ी संख्या में सीटें न जीतें, लेकिन कई क्षेत्रों में इनका वोट शेयर जीत-हार का अंतर तय कर सकता है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय और सामाजिक समीकरण हमेशा अहम रहे हैं। ऐसे में छोटे दल खास समुदायों और स्थानीय मुद्दों के आधार पर मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करेंगे। यही वजह है कि बड़े राजनीतिक दल भी इन पार्टियों की रणनीति पर नजर बनाए हुए हैं।
हालांकि, चुनावी नतीजे पूरी तरह मतदाताओं के फैसले पर निर्भर करेंगे। आने वाले समय में गठबंधन, उम्मीदवारों का चयन और चुनाव प्रचार यह तय करेगा कि छोटे दल केवल वोट काटेंगे या किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की वजह बनेंगे।
