भारत-पाकिस्तान युद्ध से जुड़ी कई कहानियां आज भी लोगों के लिए दिलचस्प हैं। इन्हीं में से एक कहानी 1971 के युद्ध की है, जब भारतीय सेना और खुफिया एजेंसियों ने मिलकर ऐसी रणनीति बनाई जिसने पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया।
बताया जाता है कि युद्ध से पहले भारतीय जासूस चेचक (Smallpox) के मरीज बनकर पाकिस्तान के कराची शहर तक पहुंचे। उस समय चेचक का डर इतना ज्यादा था कि लोगों ने उनसे दूरी बनाए रखी। इसी का फायदा उठाकर जासूसों ने महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाईं और उन्हें भारत तक पहुंचाया। इन सूचनाओं ने युद्ध की रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाई।
इसी दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और सेना प्रमुख जनरल सैम मानेकशॉ के बीच हुई बातचीत भी काफी चर्चित रही। कहा जाता है कि जब इंदिरा गांधी ने युद्ध की तैयारी के बारे में पूछा, तो जनरल मानेकशॉ ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि जब सेना पूरी तरह तैयार होगी, तब वह कार्रवाई के लिए तैयार हैं। इस प्रसंग को लेकर “I’m ready, Sweetie” वाला कथन भी अक्सर चर्चाओं में सामने आता है, हालांकि इसके अलग-अलग संस्करण प्रचलित हैं।
इसके बाद दिसंबर 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध शुरू हुआ। भारतीय सेना ने पूर्वी मोर्चे पर तेज़ी से बढ़त बनाई और केवल 13 दिनों के भीतर पाकिस्तान की सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया। इस युद्ध के बाद पूर्वी पाकिस्तान एक नए देश बांग्लादेश के रूप में दुनिया के नक्शे पर उभरा।
1971 का युद्ध भारतीय सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी सफलताओं में गिना जाता है। यह जीत केवल रणभूमि में नहीं, बल्कि सटीक रणनीति, खुफिया जानकारी और तीनों सेनाओं के बेहतर तालमेल का भी परिणाम मानी जाती है.
