विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में आतंकवाद और वैश्विक सुरक्षा को लेकर भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति जारी रहेगी। जयशंकर ने यह भी कहा कि अगर सीमा पार कोई सरकार आतंकवाद में शामिल होती है तो उसे जिम्मेदार ठहराना होगा।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद और दोस्ती-सद्भावना साथ नहीं चल सकते। भारत अपने आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करेगा और आतंकवाद फैलाने वालों को अपना रवैया बदलना होगा।
संघर्ष और टकराव दुनिया के लिए बड़ी चिंता
जयशंकर ने कहा कि संघर्ष और टकराव आज सबसे बड़ी चिंताओं में शामिल हैं। शांति बनाए रखने में असमर्थता केवल सुरक्षा को कमजोर नहीं करती, बल्कि वैश्विक प्रगति के लिए भी खतरा पैदा करती है।
उन्होंने कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे संघर्षों का असर व्यापक स्तर पर देखने को मिल रहा है।
समुद्र में जहाजों को निशाना बनाना स्वीकार नहीं
जयशंकर ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष पहले से मुश्किल स्थिति को और गंभीर बना रहा है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों और समुद्री यात्रियों को निशाना बनाए जाने को अस्वीकार्य बताया। इससे पहले UNGA के दौरान जयशंकर ने खाड़ी, लाल सागर और काला सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों को लेकर चिंता जताई थी।
भारत और लाइबेरिया ने जहाजों और समुद्री यात्रियों की सुरक्षा के लिए ‘Group of Friends on Safety and Security of Shipping and Seafarers’ पहल भी शुरू की है।
दुनिया लगातार खतरों का सामना कर रही
जयशंकर ने कहा कि भारत खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा समेत मौजूदा परिस्थितियों में सुधार के लिए हरसंभव प्रयास करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि शांति का मतलब केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दुनिया लगातार खतरों और दबावों का सामना करती रही तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल
जयशंकर ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को दोहराते हुए कहा कि देश अपने आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करेगा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और दोस्ती-सद्भावना साथ नहीं चल सकते और आतंकवाद फैलाने वालों को अपना रवैया बदलना होगा।
जयशंकर ने शुक्रवार को UNGA के इतर एक कार्यक्रम में व्यावसायिक जहाजों पर हमलों को लेकर भी कहा था कि ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को बाधित करते हैं और निर्दोष लोगों की जान लेते हैं।



