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Covid-19

Covid-19 Active Cases India में बढ़े Kerala Tops Case Count

भारत में कोविड-19 सक्रिय मामलों में वृद्धि भारत (India) में कोविड-19 (COVID-19) के एक्टिव केस (Active Cases) फिर से तेजी से बढ़ने लगे हैं। देश में कुल एक्टिव इन्फेक्शंस अब 2,710 तक पहुंच गए हैं, जिसमें केरल (Kerala) सबसे आगे है। केरल में 1,147 सक्रिय मामले हैं, जबकि महाराष्ट्र (Maharashtra) में 424, दिल्ली (Delhi) में 294 और गुजरात (Gujarat) में 223 एक्टिव केस दर्ज किए गए हैं। तमिलनाडु (Tamil Nadu), कर्नाटक (Karnataka), और पश्चिम बंगाल (West Bengal) जैसे राज्यों में भी संक्रमण की स्थिति गंभीर बनी हुई है। तमिलनाडु और कर्नाटक में 148-148 जबकि पश्चिम बंगाल में 116 केस हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट और हालात केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय (Union Health Ministry) के मुताबिक, अधिकतर नए मामलों की स्थिति हल्की है और अस्पतालों पर फिलहाल दबाव नहीं है। हालांकि, पिछले कुछ दिनों में कोरोना से 7 मौतें हुई हैं, जिनमें ज्यादातर मरीजों की पहले से अन्य बीमारियां थीं। सरकार का कदम: तैयारियों की रिपोर्ट और निर्देश इस बढ़ते Covid-19 संक्रमण को देखते हुए, केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 2 जून तक कोविड प्रबंधन की तैयारियों की रिपोर्ट मांगी है। दिल्ली समेत कई राज्यों को संक्रमण रोकने और अस्पताल व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। भारत सरकार (Government of India) की सतर्कता और राज्य सरकारों के प्रयासों के बीच नागरिकों से भी कोविड-19 से बचाव के लिए मास्क पहनने, सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने और वैक्सीनेशन पूरी कराने की अपील की गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Covid-19

Covid-19 India Cases क्यों बढ़ रहे हैं कोविड केस और कैसे करें सुरक्षा

भारत (India) में Covid-19 के मामले फिर से तेजी से बढ़ रहे हैं। 27 मई 2025 तक सक्रिय (Active) केस 1,000 के पार पहुंच गए हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंताएं बढ़ गई हैं। खासकर केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में नए केस बढ़े हैं। Covid-19 Cases बढ़ने के कारण क्या Covid-19 को लेकर चिंता करें? Health experts का मानना है कि फिलहाल ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। नए variants ज्यादातर mild symptoms देते हैं और hospitalisation में कोई खास वृद्धि नहीं हुई है। कोविड-19 अब धीरे-धीरे seasonal flu जैसा हो रहा है। जरूरी Covid-19 Precautions हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Corona Virus

Corona Virus का नया JN.1 Variant,भारत में तेजी से फैल रहा है

भारत में Corona Virus (COVID-19) का नया JN.1 Variant तेजी से फैल रहा है और सक्रिय केस बढ़ रहे हैं। यह नया वैरिएंट ओमिक्रॉन के BA.2.86.1.1 से उत्पन्न हुआ है, जिसमें कई म्यूटेशन हैं, जो इसे और अधिक संक्रामक बनाते हैं। आइए जानते हैं JN.1 वैरिएंट के लक्षण (Symptoms), बढ़ते मामले (Cases) और इससे बचाव के लिए जरूरी सावधानियां (Safety Tips)। JN.1 Variant के बढ़ते Active Cases – भारत में स्थिति देश के कई राज्यों में JN.1 वैरिएंट के सक्रिय कोरोना केस तेजी से बढ़े हैं। कुल मिलाकर भारत में सक्रिय Corona Virus मामलों की संख्या 1,047 तक पहुंच गई है, जिनमें ज्यादातर JN.1 वैरिएंट से संक्रमित हैं। JN.1 Variant के Symptoms (लक्षण) JN.1 वैरिएंट के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं: Safety Tips: JN.1 से कैसे बचें? स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी से सतर्क रहने और Corona Virus (कोविड-19) से बचाव के लिए इन Safety Tips को अपनाने की सलाह दी है: विशेषज्ञों की राय विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश JN.1 मामलों में लक्षण हल्के होते हैं और अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता कम होती है। फिर भी, सावधानी बरतना जरूरी है क्योंकि नया वैरिएंट तेजी से फैलता है। वैक्सीनेशन और हेल्थ प्रोटोकॉल का पालन करना अभी भी सबसे प्रभावी तरीका है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Covid-19 cases in India 2025, JN.1 variant India,

Covid Surge Alert: भारत में फिर बढ़े कोरोना केस, जेएन.1 वैरिएंट बना चिंता का कारण

कोरोना फिर से दे रहा है दस्तक! सिंगापुर और हांगकांग के बाद अब भारत में भी Covid-19 Cases में हल्का लेकिन चिंताजनक इजाफा देखने को मिल रहा है। देश के कई राज्यों ने Corona Advisory जारी कर दी है। स्वास्थ्य एजेंसियों की रिपोर्ट्स के अनुसार, नए मामलों में JN.1 वैरिएंट सक्रिय भूमिका निभा रहा है। फोर्टिस हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर डायरेक्टर डॉ. विकास मौर्य के मुताबिक, “JN.1 variant अब तक केवल हल्के से मध्यम लक्षण ही दिखा रहा है और इससे गंभीर बीमारी का खतरा बहुत कम है।” New Covid variant in Asia-एशिया में तेजी से फैल रहा है संक्रमण चीन में कोविड के गंभीर मामले पिछले महीने 3.3% से बढ़कर 5.5% हो गए हैं। अस्पतालों में A&E (Accident & Emergency) रोगियों की दर 7.5% से बढ़कर 16.2% हो चुकी है। ताइवान में भी कोविड-19 के चलते अस्पतालों में भर्ती बढ़ने लगे हैं। संक्रमण के लक्षण क्या हैं? डॉक्टरों के अनुसार, नए वैरिएंट के सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं: गंभीर लक्षण बहुत कम मामलों में देखे गए हैं और उनमें भी ज्यादातर मरीज रिकवरी की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। क्या वैक्सीन और इम्यूनिटी काम कर रही है? विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण की हल्की प्रकृति का कारण भारत की जनता में विकसित हुई Natural Immunity और पहले से ली गई वैक्सीनेशन डोज़ हैं। इसलिए कोविड की पहली लहर जैसी गंभीरता की फिलहाल कोई आशंका नहीं है। सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों की तैयारी केंद्र और राज्य सरकारें अलर्ट मोड में हैं। कुछ राज्यों ने मास्क पहनने और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में सावधानी बरतने की एडवाइजरी जारी की है। हालांकि, लॉकडाउन या बड़े प्रतिबंधों की कोई योजना नहीं है। क्या करना चाहिए आम जनता को? घबराएं नहीं, सतर्क रहें Covid-19 का खतरा पूरी तरह टला नहीं है, लेकिन मौजूदा हालात घबराने वाले नहीं हैं। अगर हम जरूरी सावधानियाँ बरतें और सरकार की गाइडलाइंस का पालन करें, तो स्थिति नियंत्रण में रह सकती है।
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COVID-19 Surge

COVID-19 Surge: एशिया में फिर बढ़े कोरोना केस, हांगकांग-सिंगापुर में हालात चिंताजनक

19 मई 2025, देश हरपल डेस्क COVID-19 एक बार फिर एशिया में अपने पैर पसार रहा है। हांगकांग और सिंगापुर जैसे विकसित शहरों में संक्रमण के मामलों में तेज़ वृद्धि देखी जा रही है, जिससे स्वास्थ्य अधिकारियों और आम जनता में चिंता बढ़ गई है। हांगकांग में 10 हफ्तों में 30 गुना वृद्धि हांगकांग में मार्च 2025 से COVID-19 मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले 10 हफ्तों में संक्रमण के मामलों में 30 गुना तक की बढ़ोतरी हुई है। Sewage surveillance और आउटपेशेंट क्लीनिकों में COVID-19 के मामलों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। सिंगापुर में भी संक्रमण में उछाल सिंगापुर में मई के पहले सप्ताह में COVID-19 के मामलों में 28% की वृद्धि हुई है, और अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या में भी 30% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने जनता से सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है। नया वैरिएंट और लक्षणस्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, Omicron JN.1 वैरिएंट इस नए उछाल के पीछे हो सकता है। इस वैरिएंट के कारण मरीजों में खांसी, गले में खराश, मतली, उल्टी, ब्रेन फॉग और आंखों में जलन जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। भारत में स्थिति और सतर्कता भारत में भी कुछ शहरों में COVID-19 के मामलों में हल्की वृद्धि देखी जा रही है। मुंबई में डॉक्टरों ने हाल ही में कुछ नए मामलों की पुष्टि की है, हालांकि अधिकांश मामले हल्के हैं और गंभीर चिंता की आवश्यकता नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने जनता से सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है। बचाव के उपाय और सलाह स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सतर्कता और सावधानी बरतकर हम इस नए उछाल से बच सकते हैं। निष्कर्ष COVID-19 का यह नया उछाल हमें याद दिलाता है कि महामारी अभी समाप्त नहीं हुई है। हांगकांग और सिंगापुर जैसे देशों में मामलों की वृद्धि हमें सतर्क रहने की आवश्यकता का संकेत देती है। भारत में स्थिति अभी नियंत्रण में है, लेकिन हमें सतर्क रहना और आवश्यक सावधानियां बरतनी चाहिए।
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Women hear better than men

Women Hear Better Than Men: महिलाएं मर्दों से ज्यादा जल्दी और साफ़ सुन लेती हैं?

Women Hear Better Than Men: अब यह सिर्फ एक धारणा नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक तथ्य है। हाल ही में ब्रिटेन और फ्रांस के वैज्ञानिकों ने 13 देशों में की गई Hearing research study के आधार पर यह दावा किया है कि महिलाएं आम तौर पर पुरुषों की तुलना में बेहतर सुनने की क्षमता रखती हैं। 🔬 क्या कहती है स्टडी?यह स्टडी ब्रिटिश और फ्रेंच रिसर्चर्स की टीम द्वारा की गई, जिसमें अलग-अलग देशों के लोगों की ऑडिटरी क्षमता (hearing ability) का विश्लेषण किया गया। नतीजों में साफ़ देखा गया कि महिलाओं की सुनने की संवेदनशीलता (auditory sensitivity) अधिक थी, खासकर हाई-फ्रीक्वेंसी साउंड्स में। 🧠 इसके पीछे साइंटिफिक कारण क्या हैं?विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतर हॉर्मोनल स्ट्रक्चर और ब्रेन प्रोसेसिंग के कारण होता है। महिलाओं का दिमाग साउंड प्रोसेसिंग में ज्यादा एक्टिव रहता है। एस्ट्रोजन हार्मोन भी इसमें मददगार होता है, जिससे सुनने की क्षमता तेज़ बनी रहती है। 👩‍⚕️ इसका असर रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कैसे पड़ता है?इस अंतर के कारण महिलाएं न सिर्फ बच्चों की रोने की आवाज़ जल्दी पकड़ती हैं, बल्कि आपसी बातचीत में भी ज्यादा अलर्ट रहती हैं। यही वजह है कि कॉल सेंटर्स और नर्सिंग जैसे प्रोफेशन में महिलाएं ज्यादा प्रभावी साबित होती हैं। 📢 क्यों है ये रिसर्च ज़रूरी?यह स्टडी सिर्फ सुनने की क्षमता पर नहीं, बल्कि हेल्थकेयर, एजुकेशन और कम्युनिकेशन से जुड़े फैसलों पर भी असर डाल सकती है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि पुरुषों और महिलाओं के लिए हेल्थ डिवाइसेज़ और कम्युनिकेशन टूल्स अलग-अलग तरीके से डिज़ाइन किए जाने चाहिए। 📝 निष्कर्षअगर अगली बार कोई महिला बिना कहे आपकी बात पकड़ ले, तो हैरान मत होइए — यह साइंस का कमाल है!
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Heatwave Mental Impact

Heatwave Mental Impact: गर्मी सिर्फ शरीर नहीं, दिमाग को भी कर रही है बीमार

समाचार रिपोर्ट | देश हरपलगर्मी का असर अब सिर्फ डिहाइड्रेशन, सनबर्न या लू तक सीमित नहीं रहा। Heatwave Mental Impact अब एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा कर रहा है। हाल के अध्ययनों और विशेषज्ञों की राय के अनुसार, जैसे सर्दियों में “SAD” यानी Seasonal Affective Disorder होता है, उसी तरह गर्मियों में भी डिप्रेशन और मूड डिसऑर्डर देखने को मिल रहे हैं। इसे Summer SAD या Reverse SAD भी कहा जाता है। गर्मी में बढ़ती धूप, ऊंचा तापमान और बिगड़ी नींद की वजह से ब्रेन के केमिकल्स जैसे सेरोटोनिन और मेलाटोनिन प्रभावित होते हैं। ये दो हार्मोन हमारे मूड और नींद को कंट्रोल करते हैं। जब इनमें गड़बड़ी आती है, तो मन उदास रहने लगता है, गुस्सा बढ़ जाता है और चिड़चिड़ापन हावी हो जाता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, जब तापमान बहुत ज्यादा हो जाता है तो मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े इमरजेंसी केस 8% तक बढ़ जाते हैं। यानी सिर्फ शारीरिक नहीं, मानसिक स्तर पर भी हीटवेव का सीधा प्रभाव देखने को मिल रहा है। क्या होता है Summer SAD? Summer SAD एक प्रकार का मौसम-जनित मानसिक विकार है जो खासतौर पर गर्मियों में होता है। इसके लक्षण इस प्रकार हैं: यह स्थिति तब और भी गंभीर हो सकती है जब व्यक्ति पहले से मानसिक तनाव या डिप्रेशन से जूझ रहा हो। गर्मियों में मेंटल हेल्थ क्यों बिगड़ती है? गर्मी में हमारे शरीर और दिमाग को मौसम के अनुरूप ढलने में समय लगता है। कुछ प्रमुख कारण जो मानसिक स्थिति को प्रभावित करते हैं: क्या करें? कैसे बचें? निष्कर्ष:गर्मी का असर केवल त्वचा और शरीर तक सीमित नहीं है। हमारा दिमाग भी इस मौसम की मार झेलता है। अगर हर साल गर्मी में आपका मूड डाउन रहता है, गुस्सा आता है और सब कुछ उबाऊ लगता है, तो इसे हल्के में न लें। यह Summer SAD का संकेत हो सकता है। समय रहते पहचानें, सजग रहें और सही कदम उठाएं। देश हरपल पर ऐसे ही जरूरी और उपयोगी स्वास्थ्य समाचारों के लिए जुड़े रहें।
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Heart Attack While Studying for IIT: इंदौर में देर रात पढ़ाई करते वक्त छात्र को आया Silent Heart Attack, भाई के सामने तोड़ा दम

इंदौर (Desh Harpal News Desk):मध्य प्रदेश के इंदौर से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां IIT की तैयारी कर रहे एक 18 वर्षीय छात्र को अचानक Silent Heart Attack आया और उसने अपने बड़े भाई के सामने ही दम तोड़ दिया। इस हादसे ने न सिर्फ छात्र के परिवार को बल्कि पूरे छात्र समुदाय को गहरे सदमे में डाल दिया है। जानकारी के अनुसार, मृतक छात्र पीयूष मुरैना जिले का निवासी था और अपने बड़े भाई के साथ इंदौर के भंवरकुआं थाना क्षेत्र के चितावद इलाके में एक किराए के मकान में रहकर IIT entrance exam की तैयारी कर रहा था। हर दिन की तरह पीयूष देर रात पढ़ाई में व्यस्त था। तभी अचानक उसके सीने में तेज दर्द उठा। उसने तुरंत अपने बड़े भाई को इसकी जानकारी दी। भाई ने प्राथमिक इलाज के लिए घर पर रखी कुछ दवाइयाँ दीं, लेकिन आराम न मिलने पर उसे फौरन नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। दुर्भाग्यवश, अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने पीयूष को Dead on Arrival घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक यह मामला Silent Heart Attack का है। यानी ऐसा हार्ट अटैक जिसमें पहले से कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते और अचानक स्थिति गंभीर हो जाती है। पुलिस ने इस घटना की सूचना मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस परिजनों और भाई के बयानों के आधार पर आगे की पड़ताल कर रही है। प्रारंभिक जांच में हार्ट अटैक को ही मौत का संभावित कारण बताया गया है। पीयूष की मौत से उसके दोस्तों और आसपास के छात्रों में शोक की लहर फैल गई है। पढ़ाई के लिए अपने घर से दूर आए इस होनहार छात्र की असामयिक मृत्यु ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या युवा छात्रों में बढ़ता मानसिक तनाव और अनहेल्दी लाइफस्टाइल इस तरह की घटनाओं का कारण बन रहे हैं? Desh Harpal आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करेगा। तब तक अपने बच्चों और छात्रों की सेहत पर ध्यान दें—Health is as important as Hard Work.
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Whooping cough: New research से कूकर खांसी के भविष्य के Vaccines में आ सकती है क्रांतिकारी सुधार

नई दिल्ली – एक समय था जब कूकर खांसी (जिसे हूपिंग कफ या पर्टुसिस भी कहा जाता है) बच्चों की मृत्यु का एक प्रमुख कारण हुआ करती थी, खासकर अमेरिका और दुनिया के अन्य हिस्सों में। लेकिन 1940 के दशक में जब इसका टीका अस्तित्व में आया, तब इस जानलेवा बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सका। हालांकि, बीते कुछ दशकों में यह देखने को मिला है कि टीकाकरण के बावजूद whooping cough(हूपिंग कफ) के मामले दोबारा बढ़ रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि मौजूदा टीकों की प्रभावशीलता समय के साथ घट जाती है, जिससे इस बीमारी के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। अब एक नई रिसर्च ने इस दिशा में आशा की किरण दिखाई है। इस शोध में यह समझने की कोशिश की गई है कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) किस प्रकार हूपिंग कफ के बैक्टीरिया बोर्डेटेला पर्टुसिस पर प्रतिक्रिया करता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि मौजूदा टीके शरीर में “मेमोरी टी-सेल्स” को उतनी मजबूती से सक्रिय नहीं करते, जो कि दीर्घकालिक प्रतिरक्षा के लिए जरूरी हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि हम इस प्रतिक्रिया को बेहतर ढंग से समझ पाएं, तो ऐसे नए टीके विकसित किए जा सकते हैं जो लंबे समय तक प्रभावी रहेंगे और बच्चों को दोबारा इस बीमारी के खतरे से बचा सकेंगे। अमेरिका में हुए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से बच्चों और किशोरों में प्रतिरक्षा प्रणाली की गतिविधियों का विश्लेषण किया। इसके अलावा उन्होंने यह भी अध्ययन किया कि क्यों वर्तमान टीके समय के साथ कम प्रभावी हो जाते हैं। यह शोध आने वाले समय में टीका वैज्ञानिकों को ऐसे फार्मूले बनाने में मदद करेगा, जो न केवल लंबे समय तक प्रभावी होंगे, बल्कि महामारी जैसी स्थितियों में भी ज्यादा सुरक्षा प्रदान कर पाएंगे। निष्कर्षयह रिसर्च इस बात की ओर इशारा करती है कि केवल बीमारी से बचाव ही नहीं, बल्कि टीकों की गुणवत्ता और टिकाऊपन में सुधार करना अब समय की मांग है। यदि यह नई रिसर्च सफलतापूर्वक प्रैक्टिकल रूप में लागू होती है, तो हूपिंग कफ जैसी घातक बीमारी को पूरी तरह खत्म करने का सपना जल्द ही साकार हो सकता है।
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KGMU में फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार, हिंदू लड़कियों को धर्मांतरण के लिए बना रहा था निशाना

KGMU में फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार, हिंदू लड़कियों को धर्मांतरण के लिए बना रहा था निशाना

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां के मशहूर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में एक फर्जी डॉक्टर को पकड़ा गया है। बताया जा रहा है कि आरोपी खुद को डॉक्टर बताकर अस्पताल में लोगों से मिलता था और इलाज के नाम पर भरोसा जीतता था। लेकिन जांच में सामने आया कि उसके पास कोई वैध मेडिकल डिग्री नहीं थी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी खासतौर पर हिंदू लड़कियों को अपने निशाने पर लेता था। वह पहले दोस्ती करता, फिर धीरे-धीरे उन्हें अपने प्रभाव में लेने की कोशिश करता था। इसके बाद धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने की बात भी सामने आई है। अस्पताल प्रशासन को आरोपी की गतिविधियों पर शक हुआ। इसके बाद जांच की गई तो उसकी सच्चाई सामने आ गई। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई और आरोपी को हिरासत में ले लिया गया। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। यह भी जांच की जा रही है कि वह कब से इस तरह लोगों को गुमराह कर रहा था और उसके साथ कोई और लोग भी जुड़े हैं या नहीं।? ऐसे मामलों में सावधानी बेहद जरूरी है। किसी भी डॉक्टर से इलाज कराने से पहले उसकी पहचान और डिग्री जरूर जांच लें, ताकि इस तरह के धोखे से बचा जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UP Board

UP Board Class 10th 12th Result 2026 Result से पहले जान लें Check करने का आसान तरीका

उत्तर प्रदेश के लाखों परिवारों के लिए कल का दिन बेहद अहम होने वाला है। महीनों की मेहनत, परीक्षा का तनाव और रिजल्ट का इंतजार—इन सबका अंत अब होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) कल कक्षा 10वीं (High School) और 12वीं (Intermediate) का रिजल्ट जारी करने जा रहा है। इस साल करीब 52 लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी, ऐसे में हर घर में उत्सुकता का माहौल है। कोई अपने नंबर को लेकर चिंतित है, तो कोई अपने सपनों के अगले कदम के बारे में सोच रहा है। कब और कैसे जारी होगा UP Board Result? बोर्ड रिजल्ट को प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए जारी करेगा। इसके साथ ही टॉपर्स की लिस्ट, कुल पास प्रतिशत और अन्य जरूरी आंकड़े भी सामने आएंगे। रिजल्ट जारी होते ही इसे आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा, जहां छात्र अपना स्कोर चेक कर सकेंगे। Step-by-Step: ऐसे करें UP Board Result 2026 चेक वेबसाइट स्लो हो तो घबराएं नहीं हर साल रिजल्ट के समय वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक देखने को मिलता है। ऐसे में अगर पेज खुलने में समय लगे, तो थोड़ा इंतजार करें और दोबारा कोशिश करें। जरूरत पड़ने पर SMS के जरिए भी रिजल्ट चेक किया जा सकता है। पास होने के लिए कितने नंबर जरूरी? UP Board में पास होने के लिए हर विषय में कम से कम 33% अंक लाना जरूरी होता है। अगर किसी छात्र के नंबर कम आते हैं, तो उसे कंपार्टमेंट परीक्षा का मौका मिलेगा। मार्कशीट से जुड़ी जरूरी बात ऑनलाइन दिखने वाला रिजल्ट फिलहाल प्रोविजनल होगा। ओरिजिनल मार्कशीट छात्रों को कुछ दिनों बाद अपने स्कूल से मिलेगी, इसलिए उसे सुरक्षित रखना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
3 बार NEET में फेल, IIT Madras भी नहीं मिला… फिर भी बने Data Scientist, संजय बी की कहानी है प्रेरणा

3 बार NEET में फेल, IIT Madras भी नहीं मिला… फिर भी बने Data Scientist, संजय बी की कहानी है प्रेरणा

अक्सर जिंदगी में हम कुछ और चाहते हैं, लेकिन मिलता कुछ और है। 3 बार NEET में फेल, IIT Madras भी नहीं मिला ऐसे में कई लोग हार मान लेते हैं, लेकिन कुछ लोग वही रास्ता बदलकर अपनी नई पहचान बना लेते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है संजय बी की। डॉक्टर बनने का सपना, लेकिन बार-बार मिली असफलता संजय बी का सपना था डॉक्टर बनने का। इसके लिए उन्होंने NEET परीक्षा की तैयारी की, लेकिन एक बार नहीं, बल्कि लगातार तीन बार फेल हो गए। इतनी बड़ी असफलता के बाद ज्यादातर लोग टूट जाते हैं, लेकिन संजय ने हार नहीं मानी। IIT Madras का सपना भी रह गया अधूरा NEET में सफलता नहीं मिलने के बाद संजय ने इंजीनियरिंग की ओर रुख किया। उनका सपना था कि वो IIT Madras में पढ़ाई करें, लेकिन यहां भी उन्हें सफलता नहीं मिल पाई। लगातार मिल रही नाकामियों ने उनके रास्ते जरूर कठिन बनाए, लेकिन उनका हौसला नहीं तोड़ पाए। बदला रास्ता, मिली नई मंजिल संजय ने अपनी सोच बदली और टेक्नोलॉजी की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने डेटा और प्रोग्रामिंग सीखना शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को Data Science के क्षेत्र में मजबूत किया। आज हैं सफल Data Scientist कड़ी मेहनत और लगातार सीखने की लगन ने संजय को आज एक सफल Data Scientist बना दिया है। जो सपना डॉक्टर बनने का था, वो पूरा नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने अपने लिए एक नई पहचान बना ली—और आज वो लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। संजय की कहानी हमें यही सिखाती है कि— हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Ceasefire Extended: Donald Trump ने कहा कि IRAN को रोज़ $500 मिलियन का नुकसान

Ceasefire Extended: Donald Trump ने कहा कि IRAN को रोज़ $500 मिलियन का नुकसान

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने सीजफायर (युद्धविराम) बढ़ाने के बाद बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि नाकेबंदी (ब्लॉकेड) की वजह से Iran को हर दिन करीब 500 मिलियन डॉलर (लगभग 4,000 करोड़ रुपये) का नुकसान हो रहा है। ट्रम्प के मुताबिक, आर्थिक दबाव के कारण ईरान की स्थिति कमजोर होती जा रही है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि इस दबाव का असर साफ दिख रहा है और ईरान बातचीत के लिए मजबूर हो सकता है। उनका मानना है कि यह रणनीति आगे भी जारी रहनी चाहिए ताकि ईरान पर दबाव बना रहे। वहीं दूसरी ओर, ईरान ने इस पर सख्त रुख अपनाया है। ईरानी दूत ने साफ कहा कि जब तक नाकेबंदी पूरी तरह खत्म नहीं की जाती, तब तक कोई बातचीत संभव नहीं है। उनका कहना है कि बातचीत के लिए माहौल बनाना जरूरी है और इसके लिए सबसे पहले प्रतिबंध हटाए जाने चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है। एक तरफ अमेरिका आर्थिक दबाव की नीति पर कायम है, तो दूसरी तरफ ईरान अपने रुख पर अड़ा हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों देश बातचीत की दिशा में आगे बढ़ते हैं या टकराव और बढ़ेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold

Gold Price India सोना ₹2000 चढ़ा, Silver में बड़ा उछाल

देश के सर्राफा बाजार में आज अचानक आई तेजी ने खरीदारों और निवेशकों दोनों को चौंका दिया। सुबह जैसे ही बाजार खुला, Gold और Silver के दामों में जोरदार उछाल देखने को मिला। खास बात यह रही कि Silver ने एक ही दिन में ₹4500 तक की छलांग लगाकर सबका ध्यान खींच लिया, जबकि Gold भी करीब ₹2000 तक महंगा हो गया। आज के ताजा रेट (Gold Silver Price Today) आज के बाजार भाव पर नजर डालें तो: ध्यान रहे कि शहर और ज्वेलर्स के हिसाब से इन कीमतों में थोड़ा फर्क देखने को मिल सकता है। MCX Market में भी तेजी का असर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी आज तेजी साफ दिखी। यह संकेत देता है कि सिर्फ घरेलू बाजार ही नहीं, बल्कि फ्यूचर्स मार्केट में भी खरीदारी बढ़ी है। आखिर क्यों बढ़े सोना-चांदी के दाम? इस तेजी के पीछे कई बड़े कारण माने जा रहे हैं: इन वजहों से सोना और चांदी दोनों की मांग अचानक बढ़ गई, जिससे कीमतों में उछाल आया। बड़े शहरों में क्या है हाल? दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में भी आज दामों में तेजी दर्ज की गई। हालांकि, स्थानीय टैक्स और मेकिंग चार्ज के कारण हर शहर में कीमत थोड़ी अलग हो सकती है। आगे क्या करें – खरीदें या रुकें? अगर आप सोना या चांदी खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह फैसला थोड़ा सोच-समझकर लेना होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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