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Tiger Shroff

Tiger Shroff Firing Case: कोटा में पकड़े गए 3 आरोपी, ट्रेन के General Coach में पुलिस का ऑपरेशन

मुंबई में बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ (Tiger Shroff) की कार पर फायरिंग की घटना ने सभी को चौंका दिया था। वारदात के बाद आरोपी शहर से निकल गए, लेकिन पुलिस की जांच और लगातार मिल रहे इनपुट के चलते उनकी फरारी ज्यादा लंबी नहीं चल सकी। राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने ट्रेन के जनरल कोच से तीनों आरोपियों को पकड़ लिया। इस पूरे ऑपरेशन में करीब 15 से 20 मिनट लगे। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों को पकड़ने के लिए मुंबई पुलिस से मिली जानकारी, तकनीकी इनपुट और स्थानीय पुलिस की टीमों ने अहम भूमिका निभाई। अब मुंबई पुलिस इस मामले में हमले की वजह और कथित साजिश की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। Tiger Shroff Firing Case: क्या है पूरा मामला? 18 अक्टूबर 2026 की शाम मुंबई के जुहू इलाके में Tiger Shroff की कार पर फायरिंग की घटना सामने आई थी। पुलिस के अनुसार, बाइक पर सवार हमलावरों ने कार को निशाना बनाते हुए कई राउंड फायर किए। इस घटना में टाइगर श्रॉफ सुरक्षित रहे, जबकि उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति को चोटें आईं। घटना के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। मौके से मिले सुराग, आसपास के CCTV फुटेज और संदिग्धों की आवाजाही की जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई। पुलिस यह पता लगाने में जुटी कि हमले की योजना किसने बनाई और इसमें किन लोगों की भूमिका थी। मुंबई से सूरत होते हुए कोटा पहुंचे आरोपी जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि घटना के बाद आरोपी मुंबई से बाहर निकल गए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, वे सूरत पहुंचे और फिर ट्रेन से जयपुर की ओर जा रहे थे। पुलिस को शक था कि उनका अगला पड़ाव दिल्ली हो सकता है और वहां से वे नेपाल जाने की कोशिश कर सकते हैं। मुंबई पुलिस से मिले इनपुट के बाद कोटा पुलिस ने रेलवे स्टेशन पर तलाश शुरू की। पुणे-जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस के जनरल कोच में संदिग्धों की पहचान की गई। इसके बाद अलग-अलग टीमों ने मिलकर कार्रवाई की और तीनों को हिरासत में ले लिया। 15 मिनट में पूरा हुआ Kota Police का ऑपरेशन कोटा पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम के मुताबिक, इस कार्रवाई में स्थानीय पुलिस, साइबर सेल और रेलवे से जुड़ी टीमों ने मिलकर काम किया। पुलिस ने ट्रेन और स्टेशन परिसर में तलाश की। करीब 15 से 20 मिनट के भीतर तीनों संदिग्धों को पकड़ लिया गया। इस कार्रवाई की खास बात यह रही कि पुलिस को मुंबई से मिली जानकारी के आधार पर सीमित समय में संदिग्धों तक पहुंचना था। गिरफ्तारी के बाद तीनों को मुंबई पुलिस के हवाले कर दिया गया, जहां उनसे पूछताछ की गई। कौन हैं Tiger Shroff Firing Case के तीन आरोपी? मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रेहान उर्फ सुक्का, ऋतिक कुर्मी उर्फ रोशन और फूल सिंह के रूप में हुई है। पुलिस इन तीनों की कथित भूमिका, आपसी संपर्क और घटना से जुड़े अन्य लोगों के बारे में पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियों को यह भी पता लगाना है कि हमले में इस्तेमाल किए गए हथियार कहां से आए और घटना के पीछे क्या मकसद था। पुलिस ने अदालत में हथियार बरामद करने और कथित साजिश की जांच के लिए आरोपियों की हिरासत मांगी थी। Latest Update: 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत 21 अक्टूबर 2026 को मुंबई की अदालत ने तीनों आरोपियों को 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के जरिए हमले की वजह, हथियारों की बरामदगी और दूसरे संदिग्धों की भूमिका का पता लगाया जाएगा। जांच में कुछ अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस कथित तौर पर हथियारों की सप्लाई और आरोपियों के संपर्कों की कड़ियां जोड़ रही है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी बाकी है। अब पुलिस किन सवालों के जवाब तलाश रही है? टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में पुलिस के सामने कई अहम सवाल हैं। हमले की साजिश किसने रची, आरोपियों को किसने मदद दी और घटना के पीछे असली मकसद क्या था—इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। कोटा रेलवे स्टेशन पर हुई गिरफ्तारी ने जांच को आगे बढ़ाने में मदद की है। अब मुंबई पुलिस की पूछताछ और आगे मिलने वाले सबूतों से इस मामले की बाकी कड़ियां स्पष्ट होने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Global Protest

Global Protest Network: फ्रांस से भारत तक प्रदर्शनों की चर्चा, 101 संगठनों पर रिपोर्ट

फ्रांस में जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी मीडिया संस्थान Fox News Digital की एक रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक संगठनों के बीच संपर्कों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। 20 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 13 देशों में फैले 101 संगठन प्रदर्शनों को आयोजित करने, उनके बीच तालमेल बनाने और उनके संदेशों को लोगों तक पहुंचाने में सक्रिय हैं। रिपोर्ट में भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद भारत में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस और राहुल गांधी से अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ कथित संपर्कों को लेकर सवाल पूछे हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इन आरोपों को राजनीतिक ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है। हालांकि, रिपोर्ट में बताए गए संपर्कों और भारत में प्रदर्शनों को किसी विदेशी नेटवर्क द्वारा सीधे संचालित किए जाने के दावे के बीच अंतर समझना जरूरी है। Fox News Report: 101 संगठनों के Network में कौन-कौन शामिल? पत्रकार Asra Q. Nomani की रिपोर्ट का शीर्षक है, Global ‘Chaos Inc’ grows to 101 groups with plans for new rounds of demonstrations। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में पहले 54 संगठनों की पहचान की गई थी, जिनकी संख्या बढ़कर 101 हो गई। ये संगठन 13 देशों में फैले बताए गए हैं। रिपोर्ट में छात्र और युवा समूहों, श्रमिक संगठनों, समाजवादी तथा कम्युनिस्ट विचारधारा से जुड़े समूहों और सामाजिक अभियानों का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि 33 संगठनों का नेतृत्व छात्र या युवा करते हैं। Fox News ने इस नेटवर्क को ‘Red-Green Alliance’ नाम दिया है। रिपोर्ट में ‘Red’ का इस्तेमाल वामपंथी, समाजवादी और कम्युनिस्ट समूहों के लिए, जबकि ‘Green’ का इस्तेमाल इस्लामी संगठनों के संदर्भ में किया गया है। यह रिपोर्ट में इस्तेमाल किया गया वर्गीकरण है। इससे यह अपने आप साबित नहीं होता कि सभी संगठन एक ही नेतृत्व के तहत काम करते हैं। जांच में मुख्य रूप से तीन तरह की गतिविधियों पर ध्यान दिया गया है—प्रदर्शन आयोजित करना, अलग-अलग आंदोलनों के बीच तालमेल बनाना और सोशल मीडिया व मीडिया कवरेज के जरिए उनके संदेशों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाना। India Protest: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले प्रदर्शनों का जिक्र Fox News की रिपोर्ट में भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों को भी शामिल किया गया है। ये प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों के बीच हुए थे। रिपोर्ट में भारत के साथ फ्रांस, स्पेन और अल्बानिया में चल रहे आंदोलनों का भी उल्लेख है। इसके जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई है कि कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठन अलग-अलग देशों में होने वाले विरोध-प्रदर्शनों को एक साझा राजनीतिक विमर्श से जोड़ रहे हैं। यहां सवाल उठता है कि क्या ये संगठन केवल एक-दूसरे के आंदोलनों का समर्थन कर रहे हैं या उनके आयोजन और रणनीति में भी उनकी भूमिका है? इसका जवाब देने के लिए ठोस साक्ष्यों की जरूरत है। किसी प्रदर्शन के समर्थन में बयान देना, सोशल मीडिया पर उसका प्रचार करना और प्रदर्शनकारियों को निर्देश देकर आंदोलन चलाना अलग-अलग बातें हैं। भारत में हुए प्रदर्शनों को विदेशी संगठन द्वारा सीधे संचालित किए जाने की पुष्टि के लिए स्वतंत्र प्रमाण आवश्यक होंगे। Progressive International का नाम क्यों आया? Fox News की रिपोर्ट में Progressive International का खास तौर पर उल्लेख किया गया है। यह एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसका घोषित उद्देश्य दुनिया भर की प्रगतिशील राजनीतिक शक्तियों और सामाजिक आंदोलनों के बीच सहयोग बढ़ाना है। रिपोर्ट के अनुसार, संगठन ने 16 अक्टूबर 2026 की अपनी ब्रीफिंग में फ्रांस, स्पेन, भारत और अल्बानिया में चल रहे आंदोलनों का एक साथ जिक्र किया था। इसमें इन आंदोलनों के बीच संपर्क बढ़ाने और उन्हें संगठित राजनीतिक शक्ति में बदलने से जुड़े विचार भी सामने आए। Fox News ने इसे अलग-अलग देशों में चल रहे प्रदर्शनों के बीच संभावित राजनीतिक समन्वय के उदाहरण के रूप में पेश किया है। हालांकि, किसी आंदोलन को समर्थन देना और उसके आयोजन को नियंत्रित करना एक जैसी गतिविधियां नहीं हैं। इसलिए Progressive International का नाम रिपोर्ट में आने को भारत में प्रदर्शनों के प्रत्यक्ष संचालन का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। Rahul Gandhi-Sonia Gandhi की मुलाकात पर BJP ने उठाए सवाल Progressive International को लेकर चर्चा के बीच कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और सोनिया गांधी की संगठन के प्रतिनिधिमंडल से हुई मुलाकात भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है। अप्रैल 2025 में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नई दिल्ली स्थित 10 जनपथ आवास पर Progressive International के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। उस समय विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई थी। अब भाजपा इसी मुलाकात का हवाला देकर कांग्रेस से सवाल पूछ रही है कि संगठन के प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत में किन मुद्दों पर चर्चा हुई थी और क्या भारत में हुए प्रदर्शनों के साथ कोई समन्वय किया गया था। हालांकि, मुलाकात का होना और उसके आधार पर प्रदर्शनों के आयोजन में कथित भूमिका का आरोप लगाना दो अलग बातें हैं। सार्वजनिक रूप से सामने आई जानकारी से यह साबित नहीं होता कि बैठक में भारत में विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने या किसी सरकार को बदलने की योजना बनाई गई थी। BJP vs Congress: आरोप-प्रत्यारोप से गरमाई राजनीति Fox News की रिपोर्ट सामने आने के बाद भाजपा ने 22 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए अंतरराष्ट्रीय संगठनों और भारत के प्रदर्शनों के बीच कथित संबंधों को लेकर आरोप लगाए। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी Progressive International और अलग-अलग देशों के आंदोलनों के बीच साझा संदेशों का मुद्दा उठाया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से पूछा कि संगठन के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में क्या बातचीत हुई थी और क्या भारत में हुए प्रदर्शनों के दौरान किसी तरह का समन्वय किया गया था। कांग्रेस ने इन आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बताते हुए कहा कि भाजपा कथित वोट चोरी से जुड़े सवालों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। इस विवाद में भाजपा...
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Jantar Mantar

Jantar Mantar Case: जमानत के बाद भी CJP नेताओं की मुश्किलें बरकरार, फिर बुलाएगी पुलिस

Jantar Mantar पर प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ विवाद अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस एक बार फिर पूछताछ के लिए बुला सकती है। दोनों नेता पिछले नोटिस पर क्राइम ब्रांच के सामने पेश नहीं हुए थे और उन्होंने इसके लिए अतिरिक्त समय मांगा था। अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर है। यह मामला 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। CJP के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करना चाहते थे। पार्टी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच विवाद की स्थिति बनी। पिछले Notice पर पेश नहीं हुए CJP नेता मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को पूछताछ के लिए बुलाया था। उन्हें राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में उपस्थित होना था। हालांकि, सौरव और आशुतोष तय समय पर नहीं पहुंचे और उन्होंने पुलिस से कुछ अतिरिक्त समय मांगा। अब पुलिस उन्हें दोबारा नोटिस जारी कर जांच में शामिल होने के लिए कह सकती है। जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम को लेकर पुलिस पहले ही मामले दर्ज कर चुकी है। जांच एजेंसी प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और लगाए गए आरोपों की पड़ताल कर रही है। Jantar Mantar Protest से कैसे शुरू हुआ विवाद? 13 अक्टूबर को CJP के नेताओं और समर्थकों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की कोशिश की थी। उनकी प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा था। पार्टी का आरोप था कि SIR प्रक्रिया के कारण मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश की और कुछ लोगों ने बैरिकेडिंग पार की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इस घटना के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ भी कार्रवाई हुई। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर नियमों के उल्लंघन और पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डालने से जुड़े आरोपों की जांच शुरू की। इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत को करना है। सात दिन बाद Jail से मिली थी राहत सौरव दास और आशुतोष रांका करीब सात दिन न्यायिक हिरासत में रहने के बाद 21 अक्टूबर को जेल से बाहर आए थे। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत ने उन्हें कुछ शर्तों के साथ राहत दी थी। दोनों नेताओं को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया गया था। इसके अलावा, उन्हें शांति बनाए रखने और अदालत की शर्तों का पालन करने का आश्वासन देना पड़ा। दोनों ने यह भी भरोसा दिया था कि जंतर-मंतर को दोबारा अधिकृत प्रदर्शन स्थल घोषित किए जाने तक वहां प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। भविष्य में विरोध प्रदर्शन संवैधानिक दायरे में करने की बात भी कही गई थी। हालांकि, जेल से रिहाई का मतलब यह नहीं है कि मामले की जांच खत्म हो गई है। पुलिस अपनी जांच के लिए दोनों नेताओं को पूछताछ में शामिल होने के लिए बुला सकती है। दो FIR के बाद Crime Branch कर रही जांच जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम को लेकर दिल्ली के कनॉट प्लेस और संसद मार्ग थानों में दो FIR दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इनमें सरकारी आदेश की अवहेलना, कथित अनधिकृत प्रवेश और पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डालने जैसे आरोप शामिल बताए गए हैं। बाद में दोनों मामलों की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। अब जांच एजेंसी घटना से जुड़े तथ्यों और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। CJP के एक अन्य सदस्य अजिंक्य शिंदे को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था। ऐसे में जांच का दायरा केवल दो नेताओं तक सीमित नहीं है। पुलिस आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर करेगी। अब आगे क्या होगा? फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि सौरव दास और आशुतोष रांका पुलिस के अगले नोटिस पर कब पेश होते हैं। पूछताछ के दौरान पुलिस प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम, प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश के आरोपों और दर्ज FIR से संबंधित सवाल पूछ सकती है। दूसरी ओर, CJP मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी मांगें उठा रही है। ऐसे में यह मामला राजनीतिक विरोध, प्रदर्शन की अनुमति और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों के बीच चर्चा में बना हुआ है। अब सबकी नजर दिल्ली पुलिस की अगली कार्रवाई और जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर है। फिलहाल, दोनों नेताओं के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jio Platforms IPO

Jio Platforms IPO: तीसरे दिन 6 गुना पार Subscription, QIBs ने लगाई ताबड़तोड़ बोली

मुकेश अंबानी की कंपनी Jio Platforms के IPO को लेकर शेयर बाजार में काफी चर्चा है। इश्यू के तीसरे दिन निवेशकों ने जमकर बोली लगाई और सब्सक्रिप्शन का आंकड़ा 6 गुना के पार पहुंच गया। सबसे ज्यादा उत्साह बड़े संस्थागत निवेशकों (QIBs) में देखने को मिला, जिन्होंने अपनी कैटेगरी में 13 गुना से ज्यादा बोली लगाई। अब निवेशकों की नजर IPO के अलॉटमेंट और शेयर बाजार में इसकी लिस्टिंग पर है। Jio Platforms IPO को निवेशकों का शानदार रिस्पॉन्स Jio Platforms का करीब 30,213 करोड़ रुपये का IPO 21 अक्टूबर 2026 को खुला था। इसमें निवेश करने का आखिरी मौका 23 अक्टूबर को है। शुरुआती दो दिनों से ही इस इश्यू को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा था। तीसरे दिन सुबह 9:20 बजे तक IPO का सब्सक्रिप्शन 5.72 गुना पहुंच चुका था और कारोबार आगे बढ़ने के साथ इसमें और तेजी देखने को मिली। IPO में इतनी मजबूत मांग ने इसे शेयर बाजार की प्रमुख चर्चाओं में शामिल कर दिया है। हालांकि, अंतिम सब्सक्रिप्शन आंकड़े और शुरुआती कारोबारी आंकड़ों में अंतर हो सकता है। QIBs ने 13 गुना से ज्यादा लगाई बोली इस IPO में सबसे ज्यादा दिलचस्पी Qualified Institutional Buyers यानी QIBs ने दिखाई। इस श्रेणी में बड़े संस्थागत निवेशक शामिल होते हैं, जैसे म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय संस्थान। दूसरे दिन के अंत तक QIB कैटेगरी 13.29 गुना सब्सक्राइब हो चुकी थी। वहीं, गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) की ओर से भी अच्छी मांग आई। रिटेल निवेशकों ने भी इश्यू में भागीदारी दिखाई। संस्थागत निवेशकों की मजबूत बोली से IPO को लेकर बाजार का उत्साह साफ नजर आता है। हालांकि, ज्यादा सब्सक्रिप्शन का मतलब यह नहीं है कि शेयर की लिस्टिंग पर निश्चित रूप से मुनाफा होगा। भारत के सबसे बड़े IPO में शामिल Jio Platforms का इश्यू Jio Platforms का करीब 30,213 करोड़ रुपये का सार्वजनिक निर्गम आकार के लिहाज से भारत के सबसे बड़े IPO में शामिल है। इससे पहले Hyundai Motor India का करीब 27,859 करोड़ रुपये का IPO देश का सबसे बड़ा इश्यू था। Platforms का कारोबार टेलीकॉम और डिजिटल सेवाओं से जुड़ा है। कंपनी मोबाइल कनेक्टिविटी, इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बड़ी संख्या में ग्राहकों तक पहुंच रखती है। डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल और कंपनी की बाजार में मौजूदगी के कारण इस IPO पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। Jio Platforms IPO का Price Band और जरूरी तारीखें निवेशकों के लिए IPO से जुड़ी जरूरी जानकारी यहां दी गई है: अलॉटमेंट और लिस्टिंग की तारीखों में बदलाव संभव है। निवेशकों को अंतिम जानकारी के लिए कंपनी और स्टॉक एक्सचेंज की आधिकारिक घोषणाएं देखनी चाहिए। GMP पर भी निवेशकों की नजर IPO में मजबूत सब्सक्रिप्शन के बीच ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) को लेकर भी निवेशकों की दिलचस्पी रहती है। GMP से बाजार में शेयर की संभावित लिस्टिंग कीमत को लेकर एक संकेत मिल सकता है, लेकिन यह आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। लिस्टिंग के दिन शेयर किस भाव पर खुलेगा, यह बाजार की स्थिति, निवेशकों की मांग और कंपनी के मूल्यांकन समेत कई बातों पर निर्भर करेगा। इसलिए सिर्फ GMP देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। क्या Jio Platforms IPO में निवेश करना सही रहेगा? IPO को मिल रहा शानदार रिस्पॉन्स निश्चित रूप से चर्चा का विषय है, लेकिन निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार की संभावनाओं और शेयर के मूल्यांकन को समझना जरूरी है। निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि IPO में आवेदन करने से शेयर अलॉट होने की गारंटी नहीं होती। इसी तरह, शेयर अलॉट होने के बाद लिस्टिंग पर फायदा होगा या नुकसान, यह पहले से तय नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, Jio Platforms IPO में QIBs की मजबूत भागीदारी ने बाजार का ध्यान खींचा है। अब सबकी नजर सब्सक्रिप्शन के अंतिम आंकड़ों, शेयर अलॉटमेंट और संभावित लिस्टिंग पर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Weather

Weather Alert: MP में बारिश, नैनीताल में Landslide से 2 की मौत; तमिलनाडु में भारी बारिश

Weather अक्टूबर का महीना खत्म होने को है, लेकिन देश के कई हिस्सों में मौसम अभी भी लोगों को परेशान कर रहा है। मध्य प्रदेश में आंधी और बारिश का दौर जारी रहने की खबर है। वहीं, उत्तराखंड के नैनीताल में भूस्खलन से दो लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। दूसरी ओर, तमिलनाडु में भारी बारिश को लेकर मौसम विभाग ने चेतावनी दी है। ऐसे में लोगों को मौसम का हाल जानकर ही घर से निकलने की सलाह दी जा रही है। MP Weather: मध्य प्रदेश में सात दिन से बारिश, पांच जिलों में अलर्ट की खबर मध्य प्रदेश में अक्टूबर के आखिरी दिनों में भी मौसम का मिजाज बदला हुआ है। कई इलाकों में बादल छाने, तेज हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बारिश होने की खबरें सामने आई हैं। इससे दिन और रात के तापमान में भी बदलाव महसूस किया जा सकता है। प्रदेश में बारिश की गतिविधियों को देखते हुए पांच जिलों में अलर्ट जारी होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, 23 अक्टूबर के लिए इन पांच जिलों के नाम की ताजा आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए लोगों को अपने जिले का मौसम अपडेट भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की वेबसाइट या स्थानीय प्रशासन से जरूर देखना चाहिए। बारिश के कारण किसानों की चिंता भी बढ़ सकती है। जिन किसानों की फसल कटकर तैयार है, उन्हें मौसम का पूर्वानुमान देखकर उपज को सुरक्षित रखने की व्यवस्था करनी चाहिए। Nainital Landslide: नैनीताल में भूस्खलन, दो लोगों की मौत उत्तराखंड के नैनीताल में भूस्खलन की खबर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पहाड़ी इलाकों में बारिश के बाद मिट्टी ढीली होने से चट्टानों और मलबे के खिसकने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सड़क पर चलने वाले लोगों के साथ आसपास रहने वाले परिवारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। मिली जानकारी के मुताबिक, नैनीताल में लैंडस्लाइड की घटना में दो लोगों की मौत हुई है। हालांकि, घटना की तारीख, सटीक स्थान और मृतकों की संख्या की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस खबर से जुड़े विवरणों को प्रकाशित करने से पहले स्थानीय प्रशासन की जानकारी से सत्यापित करना जरूरी है। पहाड़ी क्षेत्रों में जाने वाले पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा से पहले सड़क की स्थिति जांच लें। बारिश के दौरान भूस्खलन संभावित रास्तों पर रुकने या जोखिम लेने से बचना चाहिए। Tamil Nadu Rain Alert: तमिलनाडु में भारी बारिश का अनुमान तमिलनाडु में उत्तर-पूर्वी मानसून के सक्रिय होने के साथ कई इलाकों में बारिश की गतिविधियां बढ़ रही हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, राज्य के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। नीलगिरि, कोयंबटूर, सेलम, नमक्कल, डिंडीगुल और मदुरै समेत कई इलाकों में बारिश की संभावना जताई गई है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक और तेज हवाएं भी चल सकती हैं। लगातार बारिश से निचले इलाकों में पानी भरने, सड़कों पर यातायात प्रभावित होने और आम लोगों को रोजमर्रा के कामों में परेशानी होने की आशंका रहती है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। Kerala और Karnataka में भी बदलेगा मौसम दक्षिण भारत के दूसरे राज्यों में भी बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। केरल और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में बारिश का पूर्वानुमान है। आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में भी गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम में इस तरह के बदलाव के बीच यात्रियों को अपनी यात्रा से पहले मौसम की जानकारी लेनी चाहिए। खासकर उन इलाकों में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है, जहां भारी बारिश के कारण जलभराव या सड़क बंद होने की आशंका हो। बारिश और आंधी के दौरान इन बातों का रखें ध्यान MP से Tamil Nadu तक मौसम पर नजर रखना जरूरी मध्य प्रदेश में बारिश और आंधी की खबरों के बीच उत्तराखंड में भूस्खलन और तमिलनाडु में भारी बारिश की संभावना लोगों के लिए सतर्क रहने का संकेत है। मौसम की स्थिति जिले और इलाके के हिसाब से अलग हो सकती है, इसलिए किसी एक अपडेट को पूरे राज्य पर लागू नहीं मानना चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Chinmaya Mission

Chinmaya Mission के 75 साल पूरे: PM Modi की मौजूदगी में भव्य Global Sammelan

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिन्मय मिशन (Chinmaya Mission) के 75 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित ‘चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन’ में हिस्सा लिया। इस आयोजन में स्वामी चिन्मयानंद की आध्यात्मिक विरासत को याद किया जा रहा है। कार्यक्रम से जुड़ी सबसे खास चर्चा प्रधानमंत्री मोदी की स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम से बातचीत को लेकर है। हालांकि, इस बातचीत के पूरे विवरण की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही इसे विस्तार से बताया जा सकता है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक चल रहे इस तीन दिवसीय सम्मेलन में देश-विदेश से हजारों लोगों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, वेदांत और भगवद्गीता के संदेश को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है। Chinmaya Mission के 75 साल, दुनिया भर में 350 से ज्यादा केंद्र चिन्मय मिशन की स्थापना वर्ष 1951 में स्वामी चिन्मयानंद ने की थी। उन्होंने भगवद्गीता और वेदांत के ज्ञान को सरल भाषा में आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया। आज मिशन का नेटवर्क भारत के साथ-साथ कई दूसरे देशों में भी फैला हुआ है। मिशन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दुनिया भर में इसके 350 से अधिक केंद्र हैं। इन केंद्रों पर आध्यात्मिक प्रवचन, गीता अध्ययन, ध्यान और भारतीय संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 75 साल का यह सफर केवल एक धार्मिक संगठन के विस्तार की कहानी नहीं है, बल्कि भारतीय दर्शन को नई पीढ़ी से जोड़ने के लंबे प्रयास का भी हिस्सा है। Bharat Mandapam में Global Sammelan का आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन’ 23 से 25 अक्टूबर तक चलेगा। आयोजन से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, इसमें 9,000 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है। सम्मेलन में चिन्मय मिशन की यात्रा, स्वामी चिन्मयानंद की शिक्षाओं और भारतीय ज्ञान परंपरा पर केंद्रित कार्यक्रम रखे गए हैं। देश-विदेश से आए प्रतिभागियों को आध्यात्मिक विचारों के आदान-प्रदान का अवसर भी मिल रहा है। इस आयोजन के जरिए मिशन अपने 75 वर्षों के काम को याद करने के साथ आगे की योजनाओं पर भी ध्यान दे रहा है। Swami Chinmayananda ने भगवद्गीता को आम लोगों तक पहुंचाया स्वामी चिन्मयानंद का मानना था कि धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान केवल पढ़ने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उसे जीवन में अपनाना भी जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने भगवद्गीता और वेदांत को सरल तरीके से समझाने पर जोर दिया। उनकी शिक्षाओं में आत्मचिंतन, जीवन में अनुशासन और अपने कर्तव्यों को समझने जैसे विषय महत्वपूर्ण रहे। चिन्मय मिशन आज भी अध्ययन सत्रों, प्रवचनों और युवाओं से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से इन विचारों को आगे बढ़ा रहा है। 40,000 किलोमीटर से ज्यादा की Chinmaya Amrit Yatra मिशन की 75वीं वर्षगांठ के कार्यक्रमों में ‘चिन्मय अमृत यात्रा’ भी शामिल रही। इस पहल के तहत चिन्मय युवा केंद्र के 15 युवा सदस्यों ने देश के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा की और भगवद्गीता के संदेश को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया। प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ी जानकारी के अनुसार, इस यात्रा में 40,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की गई। इस दौरान युवाओं से संवाद और आध्यात्मिक गतिविधियों के जरिए भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने का अवसर मिला। एक लाख से अधिक लोगों ने किया गीता पाठ चिन्मय मिशन की वर्षगांठ के दौरान भगवद्गीता को लेकर भी विशेष पहल की गई। ‘चिन्मय गीता समर्पण’ कार्यक्रम में दुनिया भर के एक लाख से अधिक लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से भगवद्गीता के 15वें अध्याय का सामूहिक पाठ किया। इसके अलावा, ‘गीता पंचामृत’ पहल के जरिए गीता के पांच प्रमुख श्लोकों के संदेश को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। सामूहिक हवन और अन्य आध्यात्मिक कार्यक्रम भी वर्षगांठ समारोह का हिस्सा रहे। 75 साल की विरासत को आगे बढ़ाने पर जोर चिन्मय मिशन की 75वीं वर्षगांठ भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और उसके वैश्विक प्रसार को समझने का अवसर है। मिशन के केंद्र शिक्षा, आध्यात्मिक अध्ययन, सांस्कृतिक गतिविधियों और समाज सेवा से जुड़े कार्यक्रम संचालित करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में आयोजित यह सम्मेलन स्वामी चिन्मयानंद की शिक्षाओं को याद करने और आने वाली पीढ़ियों तक उनके विचार पहुंचाने के प्रयासों को नई पहचान दे रहा है। निष्कर्ष: चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित यह वैश्विक सम्मेलन भारतीय ज्ञान परंपरा, भगवद्गीता और स्वामी चिन्मयानंद की विरासत पर केंद्रित है। दुनिया भर में 350 से अधिक केंद्रों के जरिए मिशन आज भी आध्यात्मिक शिक्षा और सांस्कृतिक जागरूकता से जुड़े कार्य कर रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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China vs India

China vs India: सीमा पर जारी तनाव के बीच ITBP का Drone और Modern Warfare पर फोकस

भारत और चीन (China vs India) के बीच सीमा पर तनाव को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर चीनी सैनिकों के साथ आमना-सामना जारी है। उन्होंने कहा कि चीन सैन्य ताकत और आधुनिक तकनीक के मामले में काफी आगे बढ़ चुका है। ऐसे में अब केवल पुराने तरीकों से मुकाबला करना आसान नहीं होगा। ITBP प्रमुख का यह बयान भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा तैयारियों को लेकर अहम माना जा रहा है। बदलते समय के साथ युद्ध लड़ने के तरीके भी बदल रहे हैं। ड्रोन, आधुनिक निगरानी प्रणाली और नई सैन्य तकनीक की भूमिका बढ़ने से भारतीय सुरक्षा बलों के लिए अपनी क्षमताओं को लगातार मजबूत करना जरूरी हो गया है। Arunachal Pradesh Border पर क्या है स्थिति? अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से बना हुआ है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर दोनों देशों की सेनाएं सतर्क रहती हैं। ITBP DG के ताजा बयान के मुताबिक, राज्य में कुछ स्थानों पर चीनी सैनिकों के साथ आमना-सामना अभी भी जारी है। सीमा पर इस तरह की स्थिति में निगरानी, जवानों की तैनाती और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता काफी अहम होती है। भारत की सुरक्षा एजेंसियां संवेदनशील इलाकों में अपनी तैयारियों को मजबूत करने पर ध्यान दे रही हैं। चीन की Modern Military ताकत बनी चुनौती ITBP DG ने चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता और आधुनिक तकनीक पर जोर दिया। चीन ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी सेना के आधुनिकीकरण पर काफी निवेश किया है। आधुनिक हथियारों, निगरानी उपकरणों और तकनीकी संसाधनों के इस्तेमाल से उसकी सैन्य क्षमताओं में बदलाव आया है। ऐसे हालात में भारतीय सुरक्षा बलों के सामने भी खुद को नई चुनौतियों के अनुरूप तैयार रखने की जरूरत है। अब सीमा की सुरक्षा केवल जवानों की तैनाती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रशिक्षण की भी अहम भूमिका है। ITBP की तैयारी में शामिल हैं Shaurya Commandos सीमा पर मुश्किल परिस्थितियों से निपटने के लिए ITBP ने शौर्य कमांडो की विशेष टीम तैयार की है। इस तरह की टीमों का उद्देश्य जवानों को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से काम करने के लिए तैयार करना है। इसके अलावा, बल जवानों के प्रशिक्षण को भी आधुनिक जरूरतों के हिसाब से बेहतर बनाने पर काम कर रहा है। कठिन परिस्थितियों में तेजी से निर्णय लेना, बेहतर तालमेल बनाए रखना और उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल करना इस तैयारी का अहम हिस्सा है। Drone और Anti-Drone Technology पर बढ़ रहा फोकस आधुनिक युद्ध में ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। निगरानी से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक, इनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। इसी को देखते हुए ITBP भी ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक पर ध्यान दे रही है। ड्रोन के जरिए सीमावर्ती क्षेत्रों पर निगरानी रखने में मदद मिल सकती है। वहीं, एंटी-ड्रोन सिस्टम संभावित खतरों का पता लगाने और उनसे निपटने में उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, किसी भी तकनीक की प्रभावशीलता उसके सही इस्तेमाल, प्रशिक्षण और उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर करती है। सीमा पर Infrastructure मजबूत करना भी जरूरी सीमा की सुरक्षा में आधुनिक उपकरणों के साथ मजबूत बुनियादी ढांचे की भी बड़ी भूमिका होती है। दूरदराज के इलाकों में जवानों तक जरूरी सामान पहुंचाना, सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराना और निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाना महत्वपूर्ण है। ITBP की तैयारियों में जवानों के लिए सुरक्षित ढांचे और आधुनिक सुविधाओं पर भी जोर दिया जा रहा है। कठिन मौसम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों में काम करने वाले जवानों के लिए ऐसी सुविधाएं विशेष रूप से अहम हैं। भारत-चीन संबंधों पर क्यों अहम है यह बयान? भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत के रास्ते खुले रहे हैं। दोनों देशों के बीच सीमा पर शांति बनाए रखना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी जरूरी है। हालांकि, सीमा पर कुछ स्थानों पर जारी आमना-सामना यह दिखाता है कि चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। ITBP DG के बयान से साफ है कि बदलती सैन्य तकनीक के दौर में भारत को सीमा सुरक्षा के लिए लगातार अपनी तैयारियों को बेहतर बनाना होगा। आधुनिक उपकरण, बेहतर प्रशिक्षण और मजबूत बुनियादी ढांचा इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tibet

Tibet में Earthquake: 16 की मौत, 65 घायल; हजारों लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया

Tibet में आए शक्तिशाली भूकंप (Earthquake) ने कई परिवारों को मुश्किल में डाल दिया है। गुरुवार रात आए 7.0 तीव्रता के भूकंप से अब तक 16 लोगों की मौत और 65 लोगों के घायल होने की खबर है। कई मकानों को नुकसान पहुंचा है, जबकि प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है। इस बीच, शुक्रवार सुबह पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। प्रशासन की टीमें प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने में जुटी हैं। Tibet Earthquake: रात में आए तेज झटकों से मची अफरा-तफरी चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में गुरुवार, 22 अक्टूबर की रात करीब 10:33 बजे स्थानीय समय के अनुसार भूकंप आया। इसका केंद्र नागकू क्षेत्र के बाकेन काउंटी के आसपास बताया गया है। भूकंप की तीव्रता 7.0 मापी गई। शुरुआती जानकारी में भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर नीचे बताया गया, जबकि अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इसकी गहराई लगभग 18 किलोमीटर दर्ज की। अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर होने के कारण भूकंप की गहराई को लेकर रिपोर्ट्स अलग हैं। झटके महसूस होते ही लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। कई जगह इमारतों को नुकसान पहुंचा और लोगों को रात खुले स्थानों पर बितानी पड़ी। प्रभावित इलाके में नुकसान का आकलन अभी जारी है। 16 लोगों की मौत, 65 घायल; सैकड़ों मकान क्षतिग्रस्त भूकंप के बाद शुरुआती रिपोर्ट्स में 16 लोगों की मौत और 54 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में घायलों की संख्या बढ़कर 65 बताई गई। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, कम से कम 339 मकान और 20 पशु बाड़े ढह गए या क्षतिग्रस्त हुए हैं। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ घायलों को चिकित्सा सहायता दी जा रही है। भूकंप के बाद कई छोटे झटके भी महसूस किए गए। ऐसे झटकों को आफ्टरशॉक कहा जाता है। मुख्य भूकंप के बाद इनकी वजह से पहले से कमजोर इमारतों को और नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। 1,600 से ज्यादा बचावकर्मी राहत कार्य में जुटे भूकंप के बाद चीन ने बड़े पैमाने पर राहत अभियान शुरू किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1,600 से अधिक बचावकर्मियों को प्रभावित इलाके में तैनात किया गया है। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रभावित परिवारों के लिए टेंट, बिस्तर, कंबल और गर्म कपड़ों की व्यवस्था की जा रही है। ठंडे मौसम को देखते हुए राहत शिविरों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राहत और बचाव कार्य तेज करने, लापता लोगों की तलाश करने और घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। भूकंप से सड़क और संचार व्यवस्था पर भी असर भूकंप के कारण कुछ इलाकों में संचार सेवाएं प्रभावित हुई हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में चट्टानें खिसकने और सड़कों पर मलबा गिरने से यातायात भी बाधित हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग-317 के एक हिस्से को सुरक्षा कारणों से बंद करना पड़ा। राहत और बचाव टीमों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए रास्तों को सुरक्षित बनाने का काम किया जा रहा है। मौसम भी बचाव अभियान के लिए चुनौती बन सकता है। प्रभावित इलाके में ठंड और संभावित बर्फबारी के कारण राहत सामग्री और अस्थायी आश्रय की जरूरत बढ़ सकती है। Pakistan और Afghanistan में भी Earthquake के झटके शुक्रवार, 23 अक्टूबर की सुबह पाकिस्तान, अफगानिस्तान और चीन के कुछ हिस्सों में भी भूकंप दर्ज किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, इन घटनाओं की तीव्रता 4.1 से 4.9 के बीच थी। इन भूकंपों के केंद्र अलग-अलग स्थानों पर थे। शुरुआती जानकारी में इन घटनाओं से बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई थी। हालांकि, इन झटकों को तिब्बत के मुख्य भूकंप से सीधे जोड़ने के लिए वैज्ञानिक पुष्टि जरूरी है। तिब्बत में बार-बार क्यों आते हैं भूकंप? तिब्बत और हिमालय का इलाका भूगर्भीय रूप से बेहद सक्रिय है। इसकी प्रमुख वजह भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों के बीच लगातार होने वाली हलचल है। भारतीय प्लेट उत्तर की ओर बढ़ते हुए यूरेशियाई प्लेट से टकराती है। इस प्रक्रिया में धरती के भीतर तनाव जमा होता है। जब यह तनाव अचानक निकलता है, तो भूकंप आता है। इसी वजह से तिब्बत, नेपाल और हिमालय के आसपास के कई क्षेत्र भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं। जनवरी 2025 में भी तिब्बत के तिंगरी क्षेत्र में शक्तिशाली भूकंप आया था, जिसमें कई लोगों की जान गई थी और इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा था। Tibet Earthquake Latest Update: राहत अभियान जारी 23 अक्टूबर को उपलब्ध रिपोर्ट्स के मुताबिक, तिब्बत में भूकंप से 16 लोगों की मौत और 65 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। सैकड़ों मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। फिलहाल राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रशासन घायलों के इलाज, प्रभावित लोगों को आश्रय देने और क्षतिग्रस्त इलाकों में स्थिति सामान्य करने पर ध्यान दे रहा है। नुकसान और हताहतों की संख्या से जुड़ी जानकारी आगे बदल सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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RTI

Election Commission RTI: मनीष गर्ग के कामकाज पर सवाल, दो आयुक्तों ने लिखा पत्र

चुनाव आयोग (Election Commission) के अंदर कामकाज और अधिकारियों की जिम्मेदारियों को लेकर विवाद सामने आया है। RTI से मिले दस्तावेजों के मुताबिक, दो चुनाव आयुक्तों ने वरिष्ठ अधिकारी मनीष गर्ग के काम करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा था। आरोप था कि अधिकारियों के बीच काम का बंटवारा बिना जरूरी चर्चा के बदल दिया गया। इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि जब शिकायत दो चुनाव आयुक्तों की ओर से की गई, तो कैबिनेट सचिवालय ने सीधे कार्रवाई क्यों नहीं की? सामने आई फाइल नोटिंग के मुताबिक, सचिवालय ने शिकायतों पर विचार किया, लेकिन पूरे चुनाव आयोग की ओर से औपचारिक शिकायत नहीं होने का हवाला देते हुए सीधे हस्तक्षेप करने से परहेज किया। RTI से कैसे सामने आया पूरा मामला? सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिले दस्तावेजों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 29 जुलाई 2026 को कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखे थे। दोनों आयुक्तों ने वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग के कामकाज को लेकर आपत्ति जताई थी। शिकायतों में कहा गया कि 28 जुलाई को वरिष्ठ अधिकारियों के बीच जिम्मेदारियों के बंटवारे में बदलाव का आदेश जारी किया गया, लेकिन इससे पहले जरूरी चर्चा नहीं हुई। यह जानकारी पारदर्शिता कार्यकर्ता और पूर्व नौसेना अधिकारी कमोडोर लोकेश के. बत्रा की RTI अर्जी के जवाब में सामने आई। दस्तावेजों में शिकायतों के साथ कैबिनेट सचिवालय की आंतरिक फाइल नोटिंग भी शामिल है। मनीष गर्ग पर क्या लगाए गए आरोप? शिकायत के मुताबिक, प्रशासनिक विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालने के बाद मनीष गर्ग ने वरिष्ठ अधिकारियों के काम का बंटवारा बदलने का आदेश जारी किया था। दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इस तरह के बदलाव से पहले संबंधित अधिकारियों और आयोग के स्तर पर चर्चा होनी चाहिए थी। विवेक जोशी ने अपनी शिकायत में यह भी कहा था कि प्रशासनिक विभाग से जुड़ी एक फाइल मांगने पर उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई। हालांकि, ये शिकायतों में लगाए गए आरोप हैं। इनके आधार पर किसी अधिकारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। मामले को समझने के लिए संबंधित नियमों और सभी पक्षों के रुख को ध्यान में रखना जरूरी है। Cabinet Secretariat ने कार्रवाई क्यों नहीं की? इस मामले में कैबिनेट सचिवालय की भूमिका भी चर्चा में है। RTI से सामने आई फाइल नोटिंग के अनुसार, अगस्त 2026 की शुरुआत में शिकायतों पर आंतरिक स्तर पर विचार किया गया था। सचिवालय के सामने सवाल था कि क्या केंद्र सरकार का प्रशासनिक तंत्र चुनाव आयोग के अंदरूनी कामकाज से जुड़े इस विवाद में सीधे हस्तक्षेप कर सकता है। फाइल नोटिंग के मुताबिक, दोनों आयुक्तों के पत्र व्यक्तिगत क्षमता में भेजे गए थे। उन्हें पूरे चुनाव आयोग की ओर से औपचारिक शिकायत नहीं माना गया। इसी वजह से सचिवालय ने सीधे कार्रवाई करने के बजाय पत्र मिलने की पुष्टि की और मामले की जानकारी संबंधित कार्यालयों को भेजी। 5 अगस्त को कैबिनेट सचिव ने दोनों आयुक्तों के पत्र मिलने की पुष्टि की थी। मामले की जानकारी मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को भी दी गई। चुनाव आयोग ने पहले क्या कहा था? इस विवाद पर चुनाव आयोग ने 26 सितंबर 2026 को भी स्पष्टीकरण दिया था। आयोग के मुताबिक, संबंधित अधिकारी की ओर से काम के बंटवारे में बदलाव को लेकर जारी आदेश दोनों चुनाव आयुक्तों के निर्देश के बाद लागू नहीं किए गए थे। इस स्पष्टीकरण के बाद मामले का एक पहलू साफ हुआ कि विवादित आदेशों को लागू करने की स्थिति क्या रही। हालांकि, इससे शिकायतों में उठाए गए सभी सवालों का समाधान हो गया, ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। मतदाता सूची के कामकाज से क्या है संबंध? काम के बंटवारे को लेकर उठे विवाद ने मतदाता सूची से जुड़े प्रशासनिक अधिकारों पर भी ध्यान खींचा है। मतदाता सूची में नाम जोड़ना, हटाना और रिकॉर्ड में सुधार करना चुनाव प्रक्रिया के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। ऐसे कामों में जिम्मेदारियां किस अधिकारी के पास होंगी और फैसले किस स्तर पर लिए जाएंगे, यह स्पष्ट होना जरूरी है। लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह दावा नहीं किया जा सकता कि इस विवाद के कारण मतदाता सूची में कोई गड़बड़ी हुई या मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए। Election Commission की स्वतंत्रता पर फिर चर्चा यह मामला केवल अधिकारियों के बीच मतभेद तक सीमित नहीं है। इससे यह सवाल भी उठता है कि एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के अंदर प्रशासनिक शिकायतों का निपटारा किस प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। एक ओर अधिकारियों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है, वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग की स्वतंत्रता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में स्पष्ट नियम और शिकायतों के निपटारे की तय प्रक्रिया विवाद को बढ़ने से रोक सकती है। अब आगे क्या होगा? 23 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, RTI से शिकायतों और कैबिनेट सचिवालय की फाइल नोटिंग का विवरण सामने आया है। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेजों से यह साबित नहीं होता कि शिकायतों में लगाए गए आरोप अंतिम रूप से सही पाए गए हैं। अब आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि चुनाव आयोग इस मामले में क्या कदम उठाता है और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को लेकर कोई नया स्पष्टीकरण सामने आता है या नहीं। फिलहाल, इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू यही है कि दो चुनाव आयुक्तों की शिकायतों के बावजूद कैबिनेट सचिवालय ने सीधे कार्रवाई क्यों नहीं की। RTI से सामने आए दस्तावेजों ने इस सवाल पर नई चर्चा शुरू कर दी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IND vs NZ

IND vs NZ 1st T20I: संजू सैमसन-नमन धीर का धमाका, भारत ने रचा रिकॉर्ड

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पहले T20 इंटरनेशनल मुकाबले में टीम इंडिया ने शानदार जीत दर्ज की। 226 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय बल्लेबाजों ने ऐसा खेल दिखाया कि न्यूजीलैंड के गेंदबाज दबाव में आ गए। संजू सैमसन की तूफानी पारी और नमन धीर की आखिरी ओवरों में विस्फोटक बल्लेबाजी ने मैच का रुख भारत की ओर मोड़ दिया। मुकाबले में भारत ने 19.4 ओवर में 6 विकेट खोकर 230 रन बनाए और 4 विकेट से जीत हासिल की। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने पांच मैचों की T20 सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। 226 रन का लक्ष्य हासिल करना भारत के लिए T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में नया रिकॉर्ड भी रहा। NZ vs IND: न्यूजीलैंड ने खड़ा किया 225 रन का बड़ा स्कोर पहले बल्लेबाजी करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम ने निर्धारित 20 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 225 रन बनाए। मेजबान टीम के बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश की। ग्लेन फिलिप्स ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 40 गेंदों पर नाबाद 82 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। वहीं, फिन एलन ने 24 गेंदों पर 45 रन बनाकर टीम को तेज शुरुआत दी। बेवॉन जैकब्स ने भी 16 गेंदों पर 31 रन की अहम पारी खेली। न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाए और भारत के सामने 226 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रख दिया। उस समय लग रहा था कि भारतीय टीम के लिए इस स्कोर तक पहुंचना आसान नहीं होगा। Sanju Samson ने खेली तूफानी पारी लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया को संजू सैमसन ने शानदार शुरुआत दिलाई। उन्होंने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए मैदान के चारों ओर शॉट लगाए। संजू ने 33 गेंदों पर 67 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। उन्होंने केवल 23 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर भारतीय टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। दूसरी ओर, अभिषेक शर्मा ने भी तेजी से रन बनाए। उन्होंने 12 गेंदों पर 29 रन की पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों की आक्रामक शुरुआत से भारत को बड़े लक्ष्य का पीछा करने में काफी मदद मिली। हालांकि, शुरुआती विकेट गिरने के बाद भारतीय टीम की रफ्तार कुछ धीमी हुई। न्यूजीलैंड ने वापसी करने की कोशिश की, लेकिन भारत के बल्लेबाजों ने मैच को हाथ से निकलने नहीं दिया। Shreyas Iyer ने संभाली जिम्मेदारी मध्यक्रम में विकेट गिरने के बाद श्रेयस अय्यर ने पारी को संभाला। उन्होंने 28 गेंदों पर 42 रन बनाकर टीम को लक्ष्य के करीब पहुंचाया। ऐसे मुकाबलों में सिर्फ तेजी से रन बनाना ही जरूरी नहीं होता, बल्कि सही समय पर पारी को संभालना भी अहम होता है। अय्यर ने यही भूमिका निभाई और भारत की उम्मीदों को बनाए रखा। इसके बाद नमन धीर ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड की जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। Naman Dhir बने भारत की जीत के हीरो मैच के आखिरी ओवरों में नमन धीर की बल्लेबाजी ने भारतीय प्रशंसकों का उत्साह बढ़ा दिया। उन्होंने महज 15 गेंदों पर नाबाद 42 रन बनाए। उनकी पारी में 5 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। नमन ने तेजी से रन बनाकर न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बढ़ाया। भारतीय टीम को जब जीत के लिए तेज रन बनाने की जरूरत थी, तब उनकी आक्रामक बल्लेबाजी सबसे ज्यादा काम आई। भारत ने 19.4 ओवर में 230 रन बनाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। संजू सैमसन की शुरुआत और नमन धीर की शानदार फिनिशिंग इस ऐतिहासिक रनचेज की सबसे बड़ी वजह बनी। IND vs NZ 1st T20I Scorecard: एक नजर में पूरा मैच न्यूजीलैंड: 225/4 (20 ओवर) भारत: 230/6 (19.4 ओवर) नतीजा: भारत 4 विकेट से जीता। न्यूजीलैंड के टॉप स्कोरर: ग्लेन फिलिप्स – 82* रन भारत के टॉप स्कोरर: संजू सैमसन – 67 रन मैच के अहम बल्लेबाज: नमन धीर – 15 गेंदों पर नाबाद 42 रन भारत ने अपने नाम किया बड़ा रिकॉर्ड इस जीत की सबसे खास बात भारत का रिकॉर्ड रनचेज रहा। 226 रन जैसे बड़े लक्ष्य को हासिल करके टीम इंडिया ने T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में अपना सबसे बड़ा सफल रनचेज दर्ज किया। संजू सैमसन ने तेज शुरुआत देकर टीम को मजबूत आधार दिया, श्रेयस अय्यर ने मध्यक्रम में पारी संभाली और नमन धीर ने अंतिम ओवरों में तेजी से रन बनाकर जीत सुनिश्चित की। इस प्रदर्शन ने एक बार फिर दिखाया कि भारतीय टीम बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भी दबाव में संयम बनाए रख सकती है। दूसरे T20I में भी रहेगी जीत की उम्मीद पहले मुकाबले में जीत के बाद भारतीय टीम सीरीज में अपनी बढ़त मजबूत करना चाहेगी। वहीं, न्यूजीलैंड की टीम अगले मैच में वापसी करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। पहले मैच में दोनों टीमों के बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया। ऐसे में अगले मुकाबले में भी क्रिकेट प्रशंसकों को एक रोमांचक भिड़ंत देखने की उम्मीद रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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बिलासपुर केंद्रीय जेल से 19 बंदी रिहा, 15 से 16 साल की सजा काटने के बाद मिली मुक्ति

बिलासपुर केंद्रीय जेल में लंबे समय से बंद 19 पुरुष बंदियों को शुक्रवार को रिहा कर दिया गया। ये बंदी 15 से 16 साल तक जेल में सजा काट चुके थे। सजा की अवधि पूरी होने के बावजूद शासन स्तर से माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई लंबित थी। जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता के निरीक्षण के दौरान यह मामला सामने आया था। इसके बाद संबंधित बंदियों के प्रकरणों की समीक्षा की गई और रिहाई का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। स्वीकृति मिलने के बाद सभी 19 बंदियों को जेल से रिहा कर दिया गया। बंदियों से बातचीत में सामने आई थी समस्या केंद्रीय जेल के निरीक्षण के दौरान जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने बंदियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनी थीं। इस दौरान कुछ बंदियों ने बताया कि वे अपनी सजा की अवधि पूरी कर चुके हैं, लेकिन माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई नहीं हो पा रही है। मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित बंदियों के आचरण और जेल के अभिलेखों की जांच कराई गई। परीक्षण के दौरान अच्छे आचरण वाले और अधिक उम्र के बंदियों के प्रकरणों पर विचार करते हुए रिहाई के प्रस्ताव तैयार किए गए और शासन को भेजे गए। परिवार के बीच लौटकर नई शुरुआत का अवसर शासन से स्वीकृति मिलने के बाद शुक्रवार को 19 पुरुष बंदियों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अब ये बंदी अपने परिवारों के बीच लौट सकेंगे और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर नई शुरुआत कर सकेंगे। रिहाई के दौरान केंद्रीय जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी, जेलर विजयानंद सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के अनुसार, सभी 19 बंदियों को शासन के निर्देश पर रिहा किया गया है।

ग्वालियर के दारुल कुरआन मदरसे पर कार्रवाई की मांग, 4 दिन में तालाबंदी का अल्टीमेटम

ग्वालियर के एजी ऑफिस स्थित ‘दारुल कुरआन’ मदरसे में मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम के निरीक्षण के बाद विवाद बढ़ गया है। मदरसे में बच्चों की देखरेख, साफ-सफाई और जरूरी दस्तावेजों को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं के विरोध में राष्ट्रीय सनातन सेना ने प्रदर्शन किया। संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि चार दिन के भीतर मदरसे पर ताला नहीं लगाया गया, तो उसके कार्यकर्ता खुद तालाबंदी करेंगे। संगठन के पदाधिकारियों ने बच्चों के साथ किसी भी तरह की गलत हरकत सामने आने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की। निरीक्षण के दौरान मिले थे 26 बच्चे शुक्रवार को मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता ने बाल कल्याण समिति (CWC) की टीम के साथ मदरसे का औचक निरीक्षण किया था। मौके पर 4 से 14 वर्ष की उम्र के 8 बच्चियां और 18 बच्चे मिले थे। इस तरह कुल 26 बच्चे मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि रजिस्टर्ड 15 बच्चियों में से मौके पर केवल 8 मौजूद थीं। खबर के अनुसार, कुछ बच्चियों को पिछले रास्ते से बाहर भेजे जाने की आशंका भी जताई गई। हालांकि, इस संबंध में जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं। टीम के मुताबिक, मदरसा प्रबंधन मौके पर मान्यता और पंजीकरण से जुड़े जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। बच्चों की सुरक्षा और संस्थान के संचालन से संबंधित पहलुओं की जांच की जा रही है। रसोई और टॉयलेट में मिली गंदगी निरीक्षण के दौरान टीम को रसोईघर और टॉयलेट में गंदगी मिली। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ जगहों पर दरवाजे भी नहीं थे। बच्चों के सोने की व्यवस्था पर भी सवाल उठे। बताया गया कि 42 पंजीकृत बच्चों के लिए एक छोटे हॉल में पलंग के बजाय पतली चादरों पर सोने की व्यवस्था थी। इन स्थितियों को लेकर बाल अधिकारों और बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाओं पर सवाल उठाए गए हैं। राष्ट्रीय सनातन सेना ने की सख्त कार्रवाई की मांग राष्ट्रीय सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती शुक्ला ने मदरसे में कथित अनियमितताओं पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की मांग की। संगठन ने आरोप लगाया कि ऐसे संस्थानों में बच्चों को भड़काऊ शिक्षा दी जा रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। फिलहाल, मदरसे के संचालन, निर्माण, जमीन और फंडिंग के स्रोतों से जुड़े पहलुओं की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक निष्कर्षों पर नजर रहेगी।
Vishwas Sarang

Vishwas Sarang खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे मंत्री, कॉरिडोर और दशहरा मैदान का लिया जायजा

राजधानी भोपाल के छोला स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर को आने वाले समय में नई पहचान मिलने जा रही है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। मंत्री विश्वास सारंग (Vishwas Sarang) ने रावतपुरा सरकार के साथ मंदिर में दर्शन किए और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और छोला दशहरा मैदान का निरीक्षण कर अधिकारियों से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली। इस परियोजना का मकसद सिर्फ मंदिर परिसर का विस्तार करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। योजना को ‘विरासत भी और विकास भी’ की भावना के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। 100 करोड़ रुपये से बदलेगा खेड़ापति हनुमान मंदिर का स्वरूप श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर को लगभग 21 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। जुलाई 2026 में प्रकाशित परियोजना संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, इसके निर्माण में राजस्थान के व्हाइट मार्बल और प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला का इस्तेमाल किया जाना है। मंत्री विश्वास सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो। साथ ही मंदिर के पुराने गर्भगृह की मूल संरचना और धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। सुंदरकांड की झलक से सजेगा भव्य कॉरिडोर हनुमान लोक कॉरिडोर की खास बात यह होगी कि इसमें सुंदरकांड से जुड़े प्रसंगों की झलक देखने को मिलेगी। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी मिलेगा। कॉरिडोर को पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक निर्माण के मेल से विकसित करने की योजना है। इससे मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ने के साथ भोपाल की धार्मिक पहचान को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं परियोजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य खासतौर पर धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों को कम करना है। Chhola Dussehra Maidan का भी होगा विकास मंत्री विश्वास सारंग ((Vishwas Sarang)) ने छोला दशहरा मैदान का भी निरीक्षण किया। योजना के तहत मैदान के खुले स्वरूप को बनाए रखते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। यहां दर्शक दीर्घा, मंच और दशहरा जैसे आयोजनों के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने की योजना है। इससे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। स्थानीय लोगों और कारोबारियों का भी रखा जाएगा ध्यान निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों की सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि यातायात व्यवस्था सुचारु रहे और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। परियोजना से संबंधित पूर्व में प्रकाशित जानकारी में दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसका उद्देश्य स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। Bhopal की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई पहचान श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। ऐसे में कॉरिडोर का विकास शहर के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण पूरा होने की निश्चित तारीख और वर्तमान प्रगति की ताजा आधिकारिक स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। कुल मिलाकर, श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर भोपाल में आस्था और आधुनिक विकास को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। अब श्रद्धालुओं को इंतजार है कि यह भव्य परिसर कब पूरी तरह तैयार होकर उनके लिए नई सुविधाओं के साथ खुलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Philippines

Philippines Plane Crash: ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, 4 पायलटों की गई जान

फिलीपींस (Philippines) से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां ट्रेनिंग के दौरान वायुसेना के दो सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस हादसे में चार पायलटों की मौत हो गई। घटना के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियात के तौर पर SF-260 ट्रेनिंग विमानों की उड़ान पर रोक लगा दी है। वहीं, दुर्घटना की असली वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। Philippines Plane Crash: कहां और कब हुआ हादसा? यह हादसा 23 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के बटांगस प्रांत के लिपा शहर में स्थित फर्नांडो एयर बेस के पास हुआ। वायुसेना के अनुसार, दुर्घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:51 बजे हुई। दोनों विमान ट्रेनिंग फ्लाइट पर थे। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि उड़ान के दौरान दोनों विमान हवा में टकरा गए, जिसके बाद वे दुर्घटनाग्रस्त हो गए। हालांकि, टक्कर किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। हादसे में चार पायलटों की मौत इस दुर्घटना में दोनों विमानों में सवार चारों पायलटों की जान चली गई। इस खबर के सामने आने के बाद वायुसेना ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। अधिकारियों ने परिवारों को जरूरी सहायता देने की बात भी कही है। वायुसेना के मुताबिक, हादसा एयर बेस की सीमा के भीतर हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जमीन पर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। दुर्घटना के बाद SF-260 विमानों की उड़ान पर रोक हादसे के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियाती कदम उठाते हुए SF-260 ट्रेनिंग विमानों के पूरे बेड़े की उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं। जांच के दौरान इन विमानों को उड़ान भरने की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले का उद्देश्य दुर्घटना की वजह का पता लगाना और विमानों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच करना है। फिलहाल तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी हो चुका है SF-260 विमान हादसा फिलीपींस में SF-260 विमान से जुड़ी दुर्घटना पहले भी सामने आ चुकी है। मई 2026 में उत्तरी फिलीपींस के बेंगुएट प्रांत में एक ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में दो सैन्य पायलटों की मौत हुई थी। ताजा दुर्घटना के बाद सैन्य ट्रेनिंग विमानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की वजह फिलीपींस एयर फोर्स ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दोनों विमान किस परिस्थिति में दुर्घटनाग्रस्त हुए और क्या इसमें किसी तकनीकी समस्या की भूमिका थी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि हादसे में चार पायलटों की जान चली गई है। वायुसेना ने संबंधित विमानों की उड़ान रोक दी है और जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Yogi Adityanath

Yogi Adityanath जिस जमीन पर था भू-माफिया का कब्जा, वहां अब बना फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भू-माफिया से सरकारी जमीन वापस लेने की कहानी सुनाते हुए बताया कि जिस जमीन को कभी कब्जे से मुक्त कराना मुश्किल हो रहा था, आज उसी पर स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट (State Forensic Science Institute) बनाया गया है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने प्रदेश में जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों का जिक्र किया। सीएम योगी ने यह बात 15 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ के समापन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन को वापस लेकर उसका इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण संस्थान बनाने के लिए किया गया। कैसे भू-माफिया के कब्जे में पहुंची सरकारी जमीन? लखनऊ के सरोजनी नगर इलाके में स्थित इस जमीन का मामला कई साल पुराना है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 57 एकड़ जमीन वर्ष 1955 में एक ट्रैक्टर कंपनी को 10 साल की लीज पर दी गई थी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई। बाद में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उसे दूसरे नाम पर दर्ज कराने के आरोप सामने आए। जांच में जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराने और फिर रियल एस्टेट कंपनियों के बीच हस्तांतरित करने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें हुईं। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध हस्तांतरण का मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंचा। 2015 में वापस मिली जमीन, फिर शुरू हुई संस्थान बनाने की तैयारी उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 17 दिसंबर 2015 को जिला प्रशासन ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराया। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जमीन वापस मिलने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर योजना बनाई गई। आगे चलकर इसी जगह उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला हुआ। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि जमीन को लेकर विवाद और कब्जे की शिकायतों के बाद उसका इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किए जाने की योजना बनी। ₹200 करोड़ की लागत से बना Forensic Science Institute लखनऊ के सरोजनी नगर में इस संस्थान की आधारशिला 1 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रखी थी। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों में परियोजना की लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई थी। संस्थान का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करना और पुलिस व जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। यहां वैज्ञानिक जांच, साइबर सुरक्षा और अपराध से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आज के समय में आपराधिक मामलों की जांच केवल गवाहों और बयानों तक सीमित नहीं है। डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों की मदद से जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ऐसे संस्थान इसी जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। CM Yogi ने क्यों सुनाया जमीन का यह किस्सा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराकर उसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि जिस जमीन पर कभी कब्जे की समस्या थी, उसी पर अब शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ा संस्थान बनाया गया है। सीएम योगी ने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधारने और भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई से जोड़कर पेश किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। हालांकि, जमीन से जुड़े आरोपों और कानूनी दावों को समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। भू-माफिया से मुक्त जमीन पर आवास योजना भी चर्चा में उत्तर प्रदेश में कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों का सार्वजनिक इस्तेमाल हाल के महीनों में भी चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2026 में प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी बताई गई जमीन पर आवासीय परियोजना की शुरुआत की खबर सामने आई। 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मलोक आवास योजना के तहत 602 फ्लैटों की परियोजना का भूमि पूजन किया। परियोजना की लागत 191 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पीपलगांव में बने 556 घरों के लाभार्थियों को चाबियां सौंपने की जानकारी भी सामने आई। इन परियोजनाओं को राज्य सरकार जमीन के इस्तेमाल को आम लोगों के आवास और विकास से जोड़ने के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है। सरकारी जमीन से संस्थान तक, क्या है इस खबर का महत्व? लखनऊ के फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की कहानी में जमीन का पुराना विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और सार्वजनिक उपयोग के लिए संस्थान बनाने की प्रक्रिया शामिल है। यह मामला दिखाता है कि सरकारी जमीन को लेकर विवाद सुलझने के बाद उसका इस्तेमाल शिक्षा और वैज्ञानिक जांच जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। सीएम योगी के बयान ने इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब यह कहानी सिर्फ जमीन वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान खींचती है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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